Experts Q&A Search

Posted by Gurmit Singh
Punjab
26-09-2019 09:13 AM
Punjab
09-26-2019 12:48 PM
Gurmit ji eh ulli hai isde layi tuc nativo@80 gram nu prati acre de hisab nal spray karo.dhanwad
Posted by hardeep
Punjab
26-09-2019 09:12 AM
Punjab
09-26-2019 09:19 PM
tuci isde gaban honn di janch female pregnancy test kit nal check kr skde ho, tuci isde swer wala pishab dia drops pao iss nal pta lgg jawega..
Posted by Juned Khan
Rajasthan
26-09-2019 09:08 AM
Punjab
09-26-2019 12:29 PM
जुनेद जी आप इसके ऊपर carbendazim @4 ग्राम को प्रति लीटर पानी के हिसाब से स्प्रे करें धन्यवाद
Posted by Narayan Prasad Gupta
Madhya Pradesh
26-09-2019 09:00 AM
Punjab
09-26-2019 12:27 PM
Narayan ji kripya aap apna swal vistar se pooche taki aapko iske bare men poori jankari di ja sake. dhanywad
Posted by Nandkishor Sharma
Rajasthan
26-09-2019 08:59 AM
Punjab
09-26-2019 12:24 PM
नंदकिशोर जी आप छत पर सब्जी उगाने के लिए आप सबसे पहले यह बताएं कि आपकी छत का size क्या है क्युकी उसके हिसाब से आप फ्रेम त्यार करवा सकते है धन्यवाद
Posted by dharmendra Choudhary
Madhya Pradesh
26-09-2019 08:48 AM
Punjab
09-26-2019 12:16 PM
Dharmendra ji yeh fungus hai iski roktham ke liye aap tilt@200ml ko prati acre ke hisab se spray karen.dhanywad
Posted by Rajesh Kumar
Bihar
26-09-2019 08:41 AM
Posted by Shanker Singh Jaat
Rajasthan
26-09-2019 08:40 AM
Punjab
10-14-2019 04:27 PM
शंकर जी आप फसलें जैसे जौ, सौंफ, खरीफ मक्का, मूंगफली, मैश, कपास, अरंडी, चावल, बरसेम, गेहूं, भिंडी, सरसों, बिंगल चना, बेर, बैंगन, मिर्च, घोड़े चना, मेथी, मसूर, मसकली, जैतून, मटर, आलू, गोरग, , बाजरे, मूली, अमरूद, कबूतर, किडनी, गन्ना, टमाटर, तरबूज, धनिया, सोयाबीन, आंवला, ककड़ी, भारतीय बेल, अनार, खजूर, मेंहदी, ड्रैगनफ्रूट, तारामिरा.... (Read More)
शंकर जी आप फसलें जैसे जौ, सौंफ, खरीफ मक्का, मूंगफली, मैश, कपास, अरंडी, चावल, बरसेम, गेहूं, भिंडी, सरसों, बिंगल चना, बेर, बैंगन, मिर्च, घोड़े चना, मेथी, मसूर, मसकली, जैतून, मटर, आलू, गोरग, , बाजरे, मूली, अमरूद, कबूतर, किडनी, गन्ना, टमाटर, तरबूज, धनिया, सोयाबीन, आंवला, ककड़ी, भारतीय बेल, अनार, खजूर, मेंहदी, ड्रैगनफ्रूट, तारामिरा की बिजाई कर सकते है धन्यवाद
Posted by khuspal
Punjab
26-09-2019 08:40 AM
Maharashtra
09-26-2019 12:41 PM
khuspal ji eh organic spray hai isda asar hauli hauli houga . Jekar kaale tele di aje shuruaat hai tan iss di roktham de lyi tuc chess@120gm ja glamore@50gm ja dentop@35gm nu 150 ltr paani de nal mila k prati acre te spray kr skde ho..ihna spreha di varto tela pain ton pehla kro..iss ton ilaava jekar tela jyaada fail gya hai tan uss di rokthaam de lyi 1 ltr DDVP nu 12 kg sukki ret de nal mila k khet de vich shitta de deo..iss ton bina tuc koram 300ml ja acetamiprid 20EC @60-80gm ja acephate@500gm nu 150 ltr paani de nal mila k prati acre te spray krdeo..iss ton ilaava tuc jhone de vich actara @80gm ja buprofezin@200ml nu 150 ltr paani de nal mila k prati acre te spray kr deo. jekar harra tela hai tan uss de lyi tuc solomon@120 ml prati acre de lyi spray kr skde ho...
Posted by khuspal
Punjab
26-09-2019 08:34 AM
Punjab
09-26-2019 12:44 PM
khuspal ji kirpa karke daso ke isdi kini matra di varto kiti hai ta jo tuhanu is bare poori jankari diti ja sake.dhanwad
Posted by Sonu Kumar
Madhya Pradesh
26-09-2019 08:23 AM
Punjab
09-26-2019 12:45 PM
सोनू जी आप इसके ऊपर NPK 130045 @1 किलो और बोरोन @100 ग्राम को प्रति एकर के हिसाब से स्प्रे करें धन्यवाद
Posted by govind kumar
Bihar
26-09-2019 08:21 AM
Punjab
10-24-2019 12:14 PM
aap bakri ke baccho ko acchi feed khilaye or iske sath aap deworming sahi same par kare sath me koe liver tonic dete rahe to growth o jayegi ji.
Posted by gurpreet
Punjab
26-09-2019 08:21 AM
Punjab
09-26-2019 11:29 AM
ਗੁਰਪ੍ਰੀਤ ਜੀ ਡੋਡੀ ਰੋਗ ਦੀ propiconazole ਸਾਲ੍ਟ ਨਾਲ ਹੀ ਰੋਕਥਾਮ ਕੀਤੀ ਜਾ ਸਕਦੀ ਹੈ
Posted by santosh mahto
Jharkhand
26-09-2019 08:18 AM
Maharashtra
09-26-2019 11:28 AM
संतोष जी आप सब्जियां जैसे गाजर, शलगम, फूलगोभी, आलू, टमाटर, काली सरसों के बीज, मूली, पालक, पत्ता गोभी, कोहीराबी, धनिया, सौंफ के बीज, सलाद, ब्रोकोली की बिजाई कर सकते है धन्यवाद
Posted by milan
Gujarat
26-09-2019 08:18 AM
Punjab
09-26-2019 11:26 AM
इस फसल को मिट्टी की अलग अलग किस्मों, जिनमें पानी सोखने की क्षमता कम होती है और जिनकी पी एच 5.0 से 9.5 के बीच में होती है, में भी उगाया जा सकता है धान की पैदावार के लिए रेतली से लेकर गारी मिट्टी तक, और गारी से चिकनी मिट्टी जिसमें पानी को सोखने की क्षमता कम होती है इस फसल के लिए अच्छी मानी जाती है Jaya: यह छोटे कद की और अधिक .... (Read More)
इस फसल को मिट्टी की अलग अलग किस्मों, जिनमें पानी सोखने की क्षमता कम होती है और जिनकी पी एच 5.0 से 9.5 के बीच में होती है, में भी उगाया जा सकता है धान की पैदावार के लिए रेतली से लेकर गारी मिट्टी तक, और गारी से चिकनी मिट्टी जिसमें पानी को सोखने की क्षमता कम होती है इस फसल के लिए अच्छी मानी जाती है Jaya: यह छोटे कद की और अधिक उपज देने वाली किस्म गर्दन तोड़ के प्रतिरोधक है यह किस्म 142 दिनों में कटाई के लिए तैयार हो जाती है इसके दाने बड़े और लंबे होते हैं इसकी औसतन पैदावार 26 क्विंटल प्रति एकड़ होती है Chakia 59: यह किस्म कम जल जमाव वाले हालातों में उगाने के लिए उपयुक्त है Govind: यह किस्म पंतनगर द्वारा विकसित की गई है यह किस्म 105 दिनों में कटाई के लिए तैयार हो जाती है Indrasan: यह तराई क्षेत्रों की प्रसिद्ध किस्म है Mahsud: यह किस्म निचले क्षेत्रों में बारानी स्थितियों में उगाने के लिए उपयुक्त है Majhera 3: यह लंबी किस्म सूखे को सहनेयोग्य है और ऊंचे क्षेत्रों में उगाने के लिए उपयुक्त है Nagina 22: यह ऊंचे क्षेत्रों में बारानी हालातों में उगाने के लिए उपयुक्त है इसके दाने छोटे और मोटे होते हैं Narendra-1 and Narendra-2: यह किस्म 105 और 115 दिनों में कटाई के लिए तैयार हो जाती है Pant Dhan 6: यह किस्म निम्न और मध्यम ऊंचाई वाले पहाड़ी क्षेत्रों में रोपाई के लिए उपयुक्त है Saket 4: यह अगेते समय की किस्म है और 115 दिनों में कटाई के लिए तैयार हो जाती है यह यू पी की सबसे प्रसिद्ध किस्म है T9: यह देरी से बोयी जाने वाली सुगंधित किस्म है इसके दाने बेलनाकार होते हैं VL Dhan 16: यह निम्न और मध्यम क्षेत्रों में रोपाई के लिए उपयुक्त किस्म है VL 206: यह लंबी किस्म निम्न और मध्यम ऊंचाई वाले क्षेत्रों में उगाने के लिए उपयुक्त है Usar 1: यह किस्म कानपुर में विकसित की गई यह क्षारीय और लवणीय मिट्टी में खेती करने के लिए उपयुक्त है बासमती किस्में Taraori Basmati: यह सिंचित क्षेत्रों में अगेती बिजाई के लिए उपयुक्त है यह किस्म 145-155 दिनों में कटाई के लिए तैयार हो जाती है इसकी औसतन पैदावार 10 क्विंटल प्रति एकड़ होती है Haryana Basmati no 1: यह अर्द्ध छोटे कद की किस्म है और सिंचित क्षेत्रों के लिए उपयुक्त है यह किस्म 140 दिनों में कटाई के लिए तैयार हो जाती है इसकी औसतन पैदावार 16 क्विंटल प्रति एकड़ होती है Pusa Basmati 1121, Pusa Basmati 1, CSR 30, Shabnam.शुष्क खेतों को अच्छा बनाने, नदीन रहित और सेहतमंद वृद्धि के लिए ग्लाफोसेट डालनी चाहिए गेहूं की कटाई के बाद ज़मीन पर हरी खाद के तौर पर मई के पहले सप्ताह ढैंचा (बीज दर 20 किलोग्राम प्रति एकड़), या सन (बीज दर 20 किलोग्राम प्रति एकड़) या लोबीया (बीज दर 12 किलोग्राम प्रति एकड़) की बिजाई करनी चाहिए जब फसल 6 से 8 सप्ताह की हो जाए तो इसे खेत में कद्दू करने से एक दिन खेत में ही जोत देना चाहिए इस तरह प्रति एकड़ 25 किलो नाइट्रोजन खाद की बचत होती है भूमि को समतल करने के लिए लेज़र लेवलर का प्रयोग किया जाता है इसके बाद खेत में पानी खड़ा कर दें ताकि भूमि के अंदर ऊंचे नीचे स्थानों की पहचान हो सके इस तरह पानी के रसाव के कारण पानी की होने वाले बर्बादी को कम किया जा सके यू पी के सिंचित और निम्न बारानी क्षेत्रों में मध्य जून से शुरूआती जुलाई तक का समय उपयुक्त होता है पौधे की गहराई 2-3 सैं.मी. होनी चाहिए फासला बनाकर लगाने से पौधे ज्यादा पैदावार देते हैं उपजाऊ मिट्टी में 20 सैं.मी. x 15 सैं.मी. फासले का प्रयोग करें जबकि हल्की मिट्टी में रोपाई के लिए 15 सैं.मी. x 10 सैं.मी. फासले का प्रयोग करें जल जमाव वाले क्षेत्रों में 20 x 20 सैं.मी. फासले का प्रयोग करें सिंचित और कम बारानी क्षेत्रों में रोपाई ढंग प्रयोग किया जाता है रोपाई के लिए 25-30 दिनों के पौधों का प्रयोग करें जल जमाव वाले क्षेत्रों में 30-35 दिनों के पौधे रोपाई के लिए प्रयोग करें ऊंचे क्षेत्रों में, शुष्क और गीली मिट्टी में रोपाई ढंग का प्रयोग करें एक एकड़ खेत में 6-8 किलो बीज प्रति एकड़ में प्रयोग करें बिजाई से पहले 10 लीटर पानी में 20 ग्राम कार्बेनडाज़िम $ 1 ग्राम स्ट्रैप्टोसाईक्लिन घोल लें और इस घोल में बीजो को 8-10 घंटे तक भिगोयें उसके बाद बीजों को छांव में सुखाएं और फिर बिजाई के लिए प्रयोग करें फसल को जड़ गलन रोग से बचाने के लिए नीचे दिए गए फंगसनाशी का प्रयोग किया जा सकता है पहले रासायनिक फंगीनाशी का प्रयोग करें फिर बीजों का टराईकोडरमा के साथ उपचार करें वैट बैड नर्सरी : यह तकनीक उन क्षेत्रों में अपनाई जाती है जहां पर पानी ज्यादा मात्रा में पाया जाता है नर्सरी का 1/10 हिस्सा दूसरे खेत में लगाया जाता है इसकी बिजाई छींटे द्वारा की जाती है यहां पर खेत की जोताई और खेत को समतल किया जाता है बैडों पर कईं दिन तक नमी बनाए रखनी चाहिए पानी से खेत को ज्यादा ना भरें जब नर्सरी 2 सैं.मी. से वृद्धि कर जाए तब पानी को खेत में लगाते रहना चाहिए बिजाई के 15 दिन बाद 26 किलो यूरिया डालना चाहिए जब नर्सरी 25-30 सैं.मी. तक लंबी हो जाए तब उसे 15-21 दिन बाद दूसरे खेत में लगा देना चाहिए और खेत को लगातार पानी लगाते रहना चाहिए सूखे बैड वाली नर्सरी : यह तकनीक शुष्क क्षेत्रों में अपनाई जाती है जो बैड बनाया जाता है वो बिजाई वाले खेत का 1/10 हिस्से में बीज बोया जाता है बैड का आकार सीमित होना चाहिए और उसकी ऊंचाई 6-10 से.मी होनी चाहिए धान का आधा जला हुआ छिलका बैड पर बिखेर देना चाहिए इससे जड़ें मजबूत होती हैं सही समय पर सिंचाई करते रहना चाहिए और नमी बनाए रखना चाहिए ताकि नए पौधे नष्ट ना हों तत्वों की पूर्ति के लिए खाद डालना जरूरी है मॉडीफाईड मैट नर्सरी : यह नर्सरी लगाने का एक ऐसा तरीका है जिसमें कम जगह और कम बीजों की जरूरत होती है यह नर्सरी किसी भी जगह पर बनाई जा सकती हैं जहां पर समतल जगह हो और पानी की सुविधा हो इसकी पनीरी लगाने के लिए 1% खेत की जरूरत होती है 4 से.मी की सतह पर नए पौधे लगाए जाते हैं इसे बनाने के लिए 1 मीटर चौड़े और 20-30 मीटर लंबे जमीन के टुकड़े की जरूरत होती है इसके ऊपर बिछाने के लिए पॉलीथीन और केले के पत्तों की जरूरत होती है इसके इलावा एक लकड़ी का बकसा जो कि 4 से.मी गहरा होता हैं मिट्टी के मिश्रण से भरा होता है बीजों को इसके अंदर रख देना चाहिए और फिर बीजों को सूखी मिट्टी के साथ ढक देना चाहिए इसके बाद पानी का छिड़काव कर देना चाहिए लकड़ी के बक्से को नमी देते रहना चाहिए बिजाई से 11-14 दिनों के बाद पौध तैयार हो जाती है जब पौध तैयार हो जाती है तब मैट से पौध को दूसरे खेत में रोपण कर दिया जाता है फासला: पौधों का फासला 20x20 सैं.मी. या 25x25 सैं.मी. होना चाहिए पनीरी लगाने का ढंग 1. कद्दू करके लगाई जाने वाली पनीरी : आमतौर पर पंक्ति में लगाए जाने वाले पौधे 20x15 सैं.मी. दूरी पर लगाए जाते हैं और देरी से लगाई जाने वाली पनीरी 15x15 सैं.मी. पर लगाई जाती है नए पौधों की गहराई 2-3 सैं.मी. होनी चाहिए 2. बैड बनाकर लगाई जाने वाली पनीरी : यह बैड भारी ज़मीनों के लिए बनाए जाते हैं पनीरी लगाने से पहले खालियों में पानी लगाना चाहिए और फिर पनीरी को खेत में लगाना चाहिए पौधे से पौधे का फासला 9 सैं.मी. होना चाहिए 3. मशीनी ढंग से लगाई जाने वाली पनीरी : मैट पनीरी के लिए मशीनों का प्रयोग किया जाता है यह मशीन 30x12 सैं.मी. के फासले पर पनीरी लगानी चाहिए सिंचित और कम बारानी वाले क्षेत्रों के लिए लगभग 41-50 किलो नाइट्रोजन (यूरिया 90-110 किलो), 30 किलो फासफोरस (एस एस पी 190 किलो) और 27 किलो पोटाश (म्यूरेट ऑफ पोटाश 45 किलो) प्रति एकड़ में डालें नाइट्रोजन की आधी मात्रा और फासफोरस और पोटाश की पूरी मात्रा रोपाई के समय डालें बाकी बची नाइट्रोजन को दो भागों में बांटकर, नाइट्रोजन का 1/4 हिस्सा शाखाएं निकलने के समय और 1/4 हिस्सा बालियां निकलने के समय डालें जल जमाव वाले क्षेत्रों में नाइट्रोजन 30-41 किलो (यूरिया 65-90 किलो) प्रति एकड़ में शुरूआती खुराक के तौर पर डालें कम बारानी क्षेत्रों के लिए नाइट्रोजन 23-32 किलो (यूरिया 52-70 किलो) और फासफोरस 16 किलो (एस एस पी 100 किलो) प्रति एकड़ में प्रयोग करें नाइट्रोजन की आधी मात्रा और फासफोरस की पूरी मात्रा रोपाई से पहले और बाकी बची नाइट्रोजन बालियां निकलने के समय डालें ऊंचे क्षेत्रों के लिए नाइट्रोजन 23 किलो (यूरिया 52 किलो), फासफोरस 12 किलो (एस एस पी 75 किलो) और पोटाश 12 किलो (म्यूरेट ऑफ पोटाश 20 किलो) प्रति एकड़ में डालें नाइट्रोजन की आधी और फासफोरस और पोटाश की पूरी मात्रा बिजाई के तीन सप्ताह बाद डालें बाकी बची नाइट्रोजन को दो भागों में बांटे पहले भाग को बिजाई के 6 सप्ताह बाद और दूसरे भाग को बालियां निकलने के समय डालें पनीरी लगाने के बाद खेत में दो सप्ताह तक अच्छी तरह पानी खड़ा रहने देना चाहिए जब सारा पानी सूख जाए तो उसके दो दिन बाद फिर से पानी को लगाना चाहिए खड़े पानी की गहराई 10 सै.मी. से ज्यादा नहीं होनी चाहिए खेत में से बूटी और नदीनों को निकालने से पहले खेत में से सारा पानी निकाल देना चाहिए ओर इस प्रक्रिया के पूरे होने के बाद खेत की फिर से सिंचाई करनी चाहिए पकने से 15 दिन पहले सिंचाई करनी बंद करनी चाहिए ताकि फसल को आसानी से काटा जा सके ऊंची भूमि पर सिंचाई पूरी तरह से बारिश पर निर्भर करती है बारिश की तीव्रता और नियमितता के आधार पर और पानी की उपलब्धता के आधार पर गंभीर अवस्थाओं में सिंचाई करें
Posted by Sallu Bhai
Rajasthan
26-09-2019 08:16 AM
Maharashtra
09-26-2019 11:23 AM
सल्लू जी यह फंगस के कारण होता है इसके लिए आप mancozeb @4 ग्राम को प्रति लीटर पानी के हिसाब से स्प्रे करें धन्यवाद
Posted by Harsh Deep Singh
Punjab
26-09-2019 08:15 AM
Punjab
09-27-2019 02:52 PM
Harsh ji pashu suun ton 1 mahina pehla lewe vich dudh utaran lgg jnda hai tuci uss nu suun ton 2 mahine pehla he Vitum-H liquid 10-10ml swere sham ate vdia khurak deni suru kro jiss nal lewa vdia ate dhudh vdia leya jaa ske.
Posted by munender
Uttar Pradesh
26-09-2019 08:14 AM
Punjab
09-26-2019 11:20 AM
Munender ji aap iske uper keet ka hamla check karen agar maujod hai to aap fame@20ml ya coragen@60ml ko prati acre ke hisab se spray karen. iske ilava aap fungus ke liye amistar top@200ml ko prati acre ke hisab se spray karen.dhanywad
Posted by ਹਰਦੀਪ ਸਿੰਘ ਟਿਵਾਣਾ
Punjab
26-09-2019 08:14 AM
Maharashtra
09-26-2019 11:21 AM
hardeep ji isdi matra 4 gram nu prtai acre de hisab nal varti jandi hai. isnu tuc kise vi sabji te vart sakde ho.dhanwad
Posted by Kaushal Kushwaha
Uttar Pradesh
26-09-2019 08:12 AM
Maharashtra
09-26-2019 11:15 AM
कौशल जी धान की अधिक पैदावार के लिए आप इसे बीमारी या कीट के हमले से बचाये और जब इसका निसरा होता है तो आप इसके ऊपर NPK 130045 एक किलो को 150 लीटर पानी के हिसाब से स्प्रे करें धन्यवाद
Posted by Ajay pratap maurya
Madhya Pradesh
26-09-2019 08:05 AM
Maharashtra
09-26-2019 10:43 AM
अजय जी कृपया आप बताये कि पौधे की उम्र कितनी है ताकि आपको उसके हिसाब से जानकारी दी जा सके धन्यवाद
Posted by Saurabh Singh
Uttar Pradesh
26-09-2019 08:03 AM
Punjab
10-14-2019 04:24 PM
Posted by Shatruhan Verma
Uttar Pradesh
26-09-2019 08:01 AM
Maharashtra
09-26-2019 10:40 AM
शत्रुहन जी कृपया आप अपना सवाल विस्तार से पूछे ताकि आपको इसके बारे में पूरी जानकारी दी जा सके धन्यवाद
Posted by Daljeet singh Dhalieal
Punjab
26-09-2019 08:00 AM
Punjab
09-27-2019 05:16 PM
ਜਪਾਨੀ ਬਟੇਰ (Japanese quail ) ਨੂੰ ਆਮ ਤੌਰ ‘ਤੇ ਬਟੇਰ ਕਿਹਾ ਜਾਂਦਾ ਹੈ ਹੇਚਰੀ ਵਿੱਚ 35 ਵਲੋਂ 40 ਦਿਨਾਂ ਵਿੱਚ ਬਟੇਰਾ ਖਾਣ ਲਾਇਕ ਹੋ ਜਾਂਦਾ ਹੈ ਇੱਕ ਆਂਡਾ ਪੰਜ ਰੁਪਏ ਵਿੱਚ ਵਿਕਦਾ ਹੈ ਬਟੇਰ ਤਿੰਨ – ਚਾਰ ਸੌ ਗਰਾਮ ਦਾ ਹੋ ਜਾਂਦਾ ਹੈ ਤਾਂ 120 ਰੁਪਏ ਜੋੜਾ ਵਿਕਦਾ ਹੈ ਪ੍ਰਤੀ ਬਟੇਰ 15 ਵਲੋਂ 20 ਰੁਪਏ ਬਚਤ ਹੁੰਦੀ ਹੈ ਇਸਨੂੰ ਮੁਰਗੀਆਂ ਦੇ ਮੁਕਾਬਲੇ ਬਿਮਾਰੀ ਬਹੁਤ ਹੀ ਘੱਟ ਲੱਗਦੀ ਹੈ ਖੰਭ ਦੇ ਆਧਾਰ ‘ਤੇ ਇਸ.... (Read More)
ਜਪਾਨੀ ਬਟੇਰ (Japanese quail ) ਨੂੰ ਆਮ ਤੌਰ ‘ਤੇ ਬਟੇਰ ਕਿਹਾ ਜਾਂਦਾ ਹੈ ਹੇਚਰੀ ਵਿੱਚ 35 ਵਲੋਂ 40 ਦਿਨਾਂ ਵਿੱਚ ਬਟੇਰਾ ਖਾਣ ਲਾਇਕ ਹੋ ਜਾਂਦਾ ਹੈ ਇੱਕ ਆਂਡਾ ਪੰਜ ਰੁਪਏ ਵਿੱਚ ਵਿਕਦਾ ਹੈ ਬਟੇਰ ਤਿੰਨ – ਚਾਰ ਸੌ ਗਰਾਮ ਦਾ ਹੋ ਜਾਂਦਾ ਹੈ ਤਾਂ 120 ਰੁਪਏ ਜੋੜਾ ਵਿਕਦਾ ਹੈ ਪ੍ਰਤੀ ਬਟੇਰ 15 ਵਲੋਂ 20 ਰੁਪਏ ਬਚਤ ਹੁੰਦੀ ਹੈ ਇਸਨੂੰ ਮੁਰਗੀਆਂ ਦੇ ਮੁਕਾਬਲੇ ਬਿਮਾਰੀ ਬਹੁਤ ਹੀ ਘੱਟ ਲੱਗਦੀ ਹੈ ਖੰਭ ਦੇ ਆਧਾਰ ‘ਤੇ ਇਸ ਨੂੰ ਵਿਭਿੰਨ ਕਿਸਮਾਂ ਵਿੱਚ ਵੰਡਿਆ ਜਾ ਸਕਦਾ ਹੈ, ਜਿਵੇਂ ਫਰਾਓਂ, ਇੰਗਲਿਸ਼ ਸਫੈਦ, ਟਿਕਸਡੋ, ਬ੍ਰਿਟਸ਼ ਰੇਜ ਅਤੇ ਮਾਚੁਰੀਅਨ ਗੋਲਡਨ ਜੇਕਰ ਤੁਸੀਂ ਵੀ ਜਾਪਾਨੀ ਬਟੇਰ ਪਾਲਣ ਬਾਰੇ ਟ੍ਰੇਨਿੰਗ ਲੈਣਾ ਚਾਹੁੰਦੇ ਹੋਂ ਤਾਂ ਇਸਨੂੰ ਪਾਲਣ ਦੀ ਸਿਖਲਾਈ ਚੰਡੀਗੜ੍ਹ ਦੇ ਕੇਂਦਰੀ ਮੁਰਗੀ ਪਾਲਣ ਸੰਸਥਾ (Central Poultry Development Organization (Northern Region)) ਤੋਂ ਮਿਲ ਜਾਵੇਗੀ ਇਸ ਸਬੰਧ ਵਿਚ CPDO ਵਲੋਂ ਸਮੇ ਸਮੇ ਤੇ ਮੁਰਗੀ ਪਾਲਣ ਨਾਲ ਸਬੰਧਿਤ ਸਿਖਲਾਈ ਦਿਤੀ ਜਾਂਦੀ ਹੈ ਜੋ ਤੁਸੀਂ ਆਨਲਾਈਨ ਫਾਰਮ ਭਰ ਕੇ ਰਜਿਸਟਰ ਕਰਵਾ ਸਕਦੇ ਹੋ ਇਹ ਇੰਡਸਟਰੀ ਏਰੀਆ , ਫੇਸ-1, ਚੰਡੀਗੜ੍ਹ ਵਿਚ ਸਥਿਤ ਹੈ ਤੁਸੀਂ ਫੋਨ 0172-2655391 ਤੇ ਸੰਪਰਕ ਵੀ ਕਰ ਸਕਦੇ ਹੋ ਹੋਰ ਜ਼ਿਆਦਾ ਜਾਣਕਾਰੀ ਲਈ ਵੈਬਸਾਈਟ http://cpdonrchd.gov.in ਤੇ ਜਾਓ
Posted by Ravindra
Uttar Pradesh
26-09-2019 07:55 AM
Punjab
09-26-2019 06:55 PM
bhai sahib nazdik ke pashu palan adhikari or krishi vigyan kendar se sampark karein
Posted by Arvind Yadav
Uttar Pradesh
26-09-2019 07:55 AM
Maharashtra
09-26-2019 10:39 AM
Arvind ji kripya aap apna swal vistar se pooche taki aapko iske bare men poori jankari di ja sake.dhanywad
Posted by gurwinder singh
Punjab
26-09-2019 07:53 AM
Punjab
09-26-2019 10:38 AM
Gurwinder ji kirpa karke daso ke isnu khaad ki ki payi hai ta jo tuhanu is bare poori jankari diti ja sake.dhanwad
Posted by Darshan singh
Punjab
26-09-2019 07:53 AM
Punjab
09-26-2019 10:36 AM
jekar tela jyaada fail gya hai tan uss di rokthaam de lyi 1 ltr DDVP nu 12 kg sukki ret de nal mila k khet de vich shitta de deo..
Posted by Neeraj Rathi
Uttar Pradesh
26-09-2019 07:53 AM
Punjab
09-26-2019 10:33 AM
neeraj ji yeh fungus ke karn hota hai iske liye aap tilt@200ml ko prat acre ke hisab se spray karen.dhanywad
Posted by amit
Madhya Pradesh
26-09-2019 07:47 AM
Punjab
09-26-2019 10:28 AM
Amit ji pattiyan peele hone ke kayi karn hai kripya aap iski photo bheje aur aap btaye ke aapne isme kya kya khaad daali hai taki aapko iske bare men poori jankari di ja sake. dhanywad
Posted by Anveer singh
Punjab
26-09-2019 07:45 AM
Punjab
09-26-2019 10:26 AM
Anveer ji kirpa karke khapre di photo bhejo ta jo tuhanu khet di halat dekh ke isde bare poori jankari diti ja sake.dhanwad
Posted by shubham rathore
Madhya Pradesh
26-09-2019 07:38 AM
Punjab
09-26-2019 10:19 AM
प्याज़ एक प्रसिद्ध व्यापक सब्जी वाली प्रजाति है इसकी खेती अलग-अलग किस्म की मिट्टी जैसे की रेतली दोमट, चिकनी, गार और भारी मिट्टी में की जा सकती है यह गहरी दोमट और जलोढ़ मिट्टी, जिसका निकास प्रबंध बढ़िया, नमी को बरकरार रखने की समर्थता, जैविक तत्वों वाली मिट्टी में बढ़िया परिणाम देती है विरली और रेतली मिट्टी इसकी ख.... (Read More)
प्याज़ एक प्रसिद्ध व्यापक सब्जी वाली प्रजाति है इसकी खेती अलग-अलग किस्म की मिट्टी जैसे की रेतली दोमट, चिकनी, गार और भारी मिट्टी में की जा सकती है यह गहरी दोमट और जलोढ़ मिट्टी, जिसका निकास प्रबंध बढ़िया, नमी को बरकरार रखने की समर्थता, जैविक तत्वों वाली मिट्टी में बढ़िया परिणाम देती है विरली और रेतली मिट्टी इसकी खेती के लिए बढ़िया नहीं मानी जाती है, क्योंकि मिट्टी के घटिया जमाव के कारण इसमें गांठों का उत्पादन सही नहीं होता है इसकी खेती के लिए मिट्टी का pH 6-7 होना चाहिए प्रसिद्ध किस्में:-alyanpur Red Round: यह उत्तर प्रदेश की प्रसद्धि किस्म है इसकी गांठे भूरे रंग की और गोलाकार आकार की होती हैं इसके पौधे 150-160 दिनों में कटाई के लिए तैयार हो जाते हैं इसकी औसतन पैदावार 8-10 टन प्रति एकड़ होती है Bhima Shakti: यह खरीफ के साथ साथ रबी के मौसम में उगाने के लिए उपयुक्त है यह किस्म रोपाई के 130 दिन बाद कटाई के लिए तैयार हो जाती है इसकी औसतन पैदावारा 170 क्विंटल प्रति एकड़ होती है Arka Kalyan: इसकी गांठे गहरे गुलाबी रंग की होती हैं इसकी औसतन पैदावार 135 क्विंटल प्रति एकड़ होती है Pusa White Round: इसकी गांठे सफेद, गोल और समतल होती हैं इसकी औसतन पैदावार 120 क्विंटल प्रति एकड़ होती है Pusa white flat: इसकी गांठे सफेद, चपटी और मध्यम से बड़े आकार की होती हैं यह किस्म डीहाइड्रेशन के लिए उपयुक्त है मिट्टी को भुरभुरा बनाने के लिए तीन-चार बार गहराई से जोताई करें मिट्टी में जैविक तत्वों की मात्रा बढ़ाने के लिए रूड़ी की खाद डालें फिर खेत को छोटे-छोटे प्लाटों में बांट दे नर्सरी तैयार करने के उचित समय मध्य-अक्तूबर से मध्य-नवबंर होता है नए पौधे मध्य-दिसंबर से मध्य-जनवरी तक रोपाई के लिए तैयार हो जाते है रोपाई के लिए 10-15 सैं.मी. कद के पौधे चुनें खरीफ के मौसम में रोपाई के लिए मई से जून का महीना नर्सरी तैयार करने के लिए उपयुक्त होता है बिजाई के 6-8 सप्ताह बाद नए पौधे रोपाई के लिए तैयार हो जाते हैं जुलाई -अगस्त के महीने में रोपण कर दें रोपण के समय, पंक्तियों के बीच 15 सैं.मी. और पौधों के बीच 10 सैं.मी. का फासला रखें नर्सरी में बीज 1-2 सैं.मी. गहराई पर बोयें बिजाई के लिए रोपण विधि का प्रयोग करें एक एकड़ के लिए 2-3 किलो बीज का प्रयोग करें उखेड़ा रोग और कांव-गियारी से बचाव के लिए थीरम 2 ग्राम+बैनोमाइल 50 डब्लयू पी 1 ग्राम प्रति लीटर पानी से प्रति किलो बीजों का उपचार करें रासायनिक उपचार के बाद बायो एजेंट ट्राईकोडर्मा विराइड 2 ग्राम के साथ प्रति किलो बीजों का उपचार करने की सिफारिश की जाती है इस तरह करने से नए पौधे मिट्टी से पैदा होने वाली और अन्य बीमारीयों से बच जाते है बिजाई से 10 दिन पहले 20 टन रूड़ी की खाद डालें नाइट्रोजन 30 किलो(यूरिया 65 किलो), फासफोरस 16 किलो(सिंगल सुपर फासफेट 100 किलो) और पोटाश 16 किलो(मिउरेट ऑफ़ पोटाश 30 किलो) प्रति एकड़ डालें फासफोरस और पोटाश की पूरी मात्रा और नाइट्रोजन की आधी मात्रा रोपण के समय डालें बाकी बची नाइट्रोजन को दो भागों में बांटकर रोपाई के बाद टॉप ड्रेसिंग के तौर पर 30वें और 45वें दिन डालें मिट्टी की किसम और जलवायु के आधार पर सिंचाई की मात्रा और आवर्ती का फैसला करें आमतौर पर, इसे 5-8 सिंचाइयों की आवश्यकता होती है पहली सिंचाई बिजाई के तुरंत बाद करें और दूसरी सिंचाई रोपाई के तीन दिन बाद करें बाकी की सिंचाई आवश्यकता और मिट्टी में नमी के आधार पर 7-10 दिनों के अंतराल पर करें पुटाई के 10-15 दिन पहले सिंचाई बंद कर दें अत्याधिक सिंचाई ना करें शुरुआत में नए पौधे धीरे-धीरे बढ़ते है इसलिए नुकसान से बचाव के लिए गोड़ाई की जगह रासायनिक नदीन-नाशक का प्रयोग करें रोकथाम के लिए बिजाई से 72 घंटे में पेंडीमैथालीन(स्टंप) 1 लीटर को 200 लीटर पानी में मिलाकर प्रति एकड़ में स्प्रे करें नदीनों के अंकुरण उपरांत बिजाई से 7 दिन बाद आक्सीफ्लोरफैन 425 मि.ली. को 200 लीटर पानी में मिलाकर प्रति एकड़ में स्प्रे करें नदीनों की रोकथाम के लिए 2-3 गोड़ाईयों की सिफारिश की जाती है पहली गोड़ाई बिजाई से एक महीने बाद और दूसरी गोड़ाई, पहली से एक महीने बाद करें सही समय पर पुटाई करना बहुत जरूरी है पुटाई का समय किस्म,ऋतु,मंडी रेट आदि पर निर्भर करता है 50% पौधे की पत्तियां नीचे की तरफ गिरना दर्शाता है कि फसल पुटाई के लिए तैयार है फसल की पुटाई हाथों से प्याज़ को उखाड़ कर की जाती है पुटाई के बाद इनको 2-3 दिन के लिए अनावश्यक नमी निकालने के लिए खेत में छोड़ दे धन्यवाद
Posted by Abhiyant Singh Thakur
Madhya Pradesh
26-09-2019 07:29 AM
Punjab
10-14-2019 04:23 PM
अभियंत जी इसके लिए आप सीड ट्रीटमेंट कर सकते है , बीज को 12 -24 घंटे के लिए पानी में भिगो क रखे जिससे उसकी सीड कोट नरम हो जाए गी और वह जल्दी उगने में साहियता करे गी
Posted by yashpal kandhol
Haryana
26-09-2019 07:23 AM
Punjab
09-26-2019 10:14 AM
Yashpal ji yeh tele aur chepe ki roktham ke liye istemal kiya jata hai iski matra 300 gram ko prati acre ke hisab se spray kiya jata hai.dhanywad
Posted by rammurti singh
Uttar Pradesh
26-09-2019 07:23 AM
Maharashtra
09-26-2019 10:16 AM
राममूर्ति जी कृपया आप इसकी फोटो भेजे ताकि आपको इसके बारे में पूरी जानकारी दी जा सके धन्यवाद
Posted by rammurti singh
Uttar Pradesh
26-09-2019 07:16 AM
Punjab
09-26-2019 02:14 PM
राम मूर्ति जी कृपया आप इसकी फोटो भेजे ताकि आपको इसके बारे में पूरी जानकारी दी जा सके धन्यवाद
Posted by saab sidhu
Punjab
26-09-2019 07:16 AM
Punjab
09-26-2019 02:06 PM
Saab sidhu ji eh sundi de karn ho rahi hai isde layi tuc cartap hydrochloride @170 gram ko prati acre de hisab nal spray karo.dhanwad
Posted by MALOOK SINGH
Punjab
26-09-2019 07:10 AM
Punjab
09-26-2019 09:33 AM
ਮਲੂਕ ਜੀ ਕਿਰਪਾ ਕਰਕੇ ਦੱਸੋ ਕਿ ਤੁਸੀ ਕਿਹੜੀ ਫ਼ਸਲ ਦੇ ਰੇਟ ਬਾਰੇ ਜਾਣਕਾਰੀ ਲੈਣਾ ਚਾਹੁੰਦੇ ਹੋ ਤਾ ਜੋ ਤੁਹਾਨੂੰ ਇਸ ਬਾਰੇ ਪੂਰੀ ਜਾਣਕਾਰੀ ਦਿਤੀ ਜਾ ਸਕੇ ਧੰਨਵਾਦ
Posted by Raushan Kumar Raushan Kumar
Bihar
26-09-2019 06:49 AM
Punjab
09-27-2019 11:35 AM
असली केसर सिर्फ जम्मू कश्मीर, ईरान और अफगानिस्तान में ही हो सकता है, यह कुसुम है, इसकी भी कई दवाई बनती है, यदि कोई और छक है तो जम्मू कश्मीर के इस किसान से बात करें, जिसके दादे, पड़दादे भी केसर की खेती करते थे और यह भी केसर की खेती करते है Javid Ahmed- 95964 93260 बाकि आप यह वीडियो देखें https://www.youtube.com/watchv=vl7c6L3ETnQ&t=8s बाकि यदि फिर भी यकीन नहीं .... (Read More)
असली केसर सिर्फ जम्मू कश्मीर, ईरान और अफगानिस्तान में ही हो सकता है, यह कुसुम है, इसकी भी कई दवाई बनती है, यदि कोई और छक है तो जम्मू कश्मीर के इस किसान से बात करें, जिसके दादे, पड़दादे भी केसर की खेती करते थे और यह भी केसर की खेती करते है Javid Ahmed- 95964 93260 बाकि आप यह वीडियो देखें https://www.youtube.com/watchv=vl7c6L3ETnQ&t=8s बाकि यदि फिर भी यकीन नहीं है तो तो आप अमृतपाल सिंह बराड़ प्रोफेसर, पीएयू लुधियाना इस वीडियो संबंधी विचार पड़ सकते हैं, यह फसल केसर की नहीं है, यह फसल कसुंबडे की है, इसे अंग्रेजी में Safflower कहते है, और विज्ञानं में इसे Carthamus tinctorius कहते है
Posted by Mandeep Dhami
Punjab
26-09-2019 06:29 AM
Punjab
09-26-2019 02:24 PM
mandeep ji kripya aap iske label ki photo bheje taki aapko iske bare men poori jankari di ja sake
Posted by gurpreet singh
Punjab
26-09-2019 06:07 AM
Punjab
09-27-2019 12:34 PM
Gurpreet singh ji kirpa karke eh daso ke tusi kis nasal dia vashia lena chonde ho ta jo tuhanu sahi jankari diti ja sake, Thankyou.
Posted by sukhwinder singh
Punjab
26-09-2019 06:05 AM
Punjab
09-26-2019 10:13 AM
sukha ji tuc jado v dwai kharid de ho ta usda pakka bill lao kyuki pakka dealer tuhanu registered dealer kolo hi milega.dhanwad
Posted by रामनिवास
Rajasthan
26-09-2019 02:46 AM
Punjab
09-27-2019 12:49 PM
Ramniwas ji kam pani me aap herbal plant ki kheti kar sakte hai jese ke Aloevera, stevia, tulsi ja fir Moringa vi lga sakde ho, Herbal kheti ke bare puran jankari ke lai aap Aushadhiya kheti vikas sansthan 6268536795 or Moringa ki farming ke lai aap J.B Lal 8290200303 ji se samparak kar sakte hai, Thankyou.
Posted by Ranjeet singh
Punjab
26-09-2019 01:12 AM
Punjab
09-26-2019 09:40 AM
ਰਣਜੀਤ ਜੀ ਜੇਕਰ ਤੁਸੀ ਘਾਹ ਵਾਲੇ ਟਿੱਡੇ ਦੀ ਗੱਲ ਕਰ ਰਹੇ ਹੋ ਤਾ ਇਸਦਾ commerical ਤਰੀਕੇ ਨਾਲ ਕੋਈ ਨੁਕਸਾਨ ਨਹੀਂ ਹੈ ਜੇਕਰ ਤੇਲੇ ਬਾਰੇ ਗੱਲ ਕਰ ਰਹੇ ਹੋ ਤਾ ਉਹ ਬੂਟੇ ਵਿੱਚੋ ਰੱਸ ਚੂਸਦਾ ਹੈ ਅਤੇ ਬੂਟੇ ਨੂੰ ਸੁਕਾ ਦਿੰਦਾ ਹੈ ਧੰਨਵਾਦ