Posted by Ravinder Singh
Punjab
29-09-2019 11:12 AM
aun wale dina ch halki badalwayi rhegi, pr barish di sambhavna ghat hai.
Posted by ਗੁਰਮਿੰਦਰ
Punjab
29-09-2019 11:05 AM
gurminder ji tusi jekar kheti nal sambandit koe kanoni slah leni hai ta tusi swal post kar sakde ho. jekar jaroor pavi ta tohanu cal v kar layi javegi . par tusi koe v kanoni slah v app te le sakde ho ji.

Posted by sexy Boy
Haryana
29-09-2019 11:01 AM
Is sall dhan ka bhav (MSP) 1815/Q, Grade A 1835/Q hai, Thankyou.
Posted by देवेन्द्र चौधरी
Uttar Pradesh
29-09-2019 10:52 AM
इसके लिए आप 13 00 45 @1kg प्रति एकड़ के हिसाब से उपयोग कर सकते हैं

Posted by Pravendeep Singh
Punjab
29-09-2019 10:51 AM
ICAR-Indian Institute of Wheat & Barley Research, Karnal wallo kanak da nva beej Karan Vandana (DBW187) teyaar kita gya hai, isda jhaad lagbhag 28-30 quintal prti acre hai. eh kisam 120 din vich teyar hundi hai.
Posted by visvnath
Uttar Pradesh
29-09-2019 10:50 AM
सिंचित क्षेत्रों के लिए:
Narendra Rai: यह यू पी के सभी क्षेत्रों में खेती करने के लिए उपयुक्त है यह किस्म 125-130 दिनों में कटाई के लिए तैयार हो जाती है इसकी औसतन पैदावार 10-12 क्विंटल प्रति एकड़ होती है
Maya: यह यू पी के सभी क्षेत्रों में खेती करने के लिए उपयुक्त है यह किस्म 130-135 दिनों में कटाई के लिए तैयार हो जाती है इसकी औसतन प.... (Read More)
सिंचित क्षेत्रों के लिए:
Narendra Rai: यह यू पी के सभी क्षेत्रों में खेती करने के लिए उपयुक्त है यह किस्म 125-130 दिनों में कटाई के लिए तैयार हो जाती है इसकी औसतन पैदावार 10-12 क्विंटल प्रति एकड़ होती है
Maya: यह यू पी के सभी क्षेत्रों में खेती करने के लिए उपयुक्त है यह किस्म 130-135 दिनों में कटाई के लिए तैयार हो जाती है इसकी औसतन पैदावार 10-11 क्विंटल प्रति एकड़ होती है
Rohini: यह यू पी के सभी क्षेत्रों में खेती करने के लिए उपयुक्त है यह किस्म 130-135 दिनों में कटाई के लिए तैयार हो जाती है इसकी औसतन पैदावार 9-11 क्विंटल प्रति एकड़ होती है
असिंचित क्षेत्रों के लिए:
Vaibhav: यह यू पी के सभी क्षेत्रों में खेती करने के लिए उपयुक्त है यह किस्म 125-130 दिनों में कटाई के लिए तैयार हो जाती है इसकी औसतन पैदावार 8-10 क्विंटल प्रति एकड़ होती है
Varuna (T 59): यह यू पी के सभी क्षेत्रों में खेती करने के लिए उपयुक्त है यह किस्म 125-130 दिनों में कटाई के लिए तैयार हो जाती है इसकी औसतन पैदावार 8-10 क्विंटल प्रति एकड़ होती है

Posted by Govind Rathore
Rajasthan
29-09-2019 10:43 AM
इसके लिए आप 13 00 45 @10gm प्रति लीटर पानी के हिसाब से उपयोग कर सकते हैं

Posted by जगदीश गुजर
Rajasthan
29-09-2019 10:42 AM
जगदीश जी आप इसके ऊपर NPK 191919 @10 ग्राम को प्रति लीटर पानी के हिसाब से स्प्रे करें इसके इलावा आप इसके ऊपर mancozeb @4 ग्राम को प्रति लीटर पानी के हिसाब से स्प्रे करें धन्यवाद

Posted by mohammad
Rajasthan
29-09-2019 10:41 AM
मोहम्मद जी आप किस्मे जैसे प्रारंभिक बुवाई की गई किस्मों (आरजीएन -13, उर्वशी), समय पर बोई गई सिंचाई (एनआरसीडी 2), आरजीएन 13, आरजीएन 73, बायो 902, माया, आरएल 1359, वसुंधरा), समय पर बोई गई बारिश (आरजीएन 48, अरावली) और गीता), नमक प्रभावित क्षेत्र (CS-52, CS-54), देर से बोया गया (नवगीत, आशिर्वाद, स्वर्ण ज्योति)
Posted by ashish soni
Madhya Pradesh
29-09-2019 10:24 AM
यह फंगस है इसकी रोकथाम के लिए आप tilt 200ml को प्रति एकड़ के हिसाब से स्प्रे करें धन्यवाद
Posted by रोबिन कुंतल
Uttar Pradesh
29-09-2019 10:20 AM
रोबिन जी इसके बारे में जानकारी लेने के लिए आप रोहन जी 98158-81243 से संपर्क कर सकते है
Posted by Chhatrapati D Pal
Maharashtra
29-09-2019 10:20 AM
यह फंगस हो गई है, इसके लिए आप custodia@300ml को 150 लीटर पानी के हिसाब से स्प्रे करें.. धन्यवाद
Posted by रोबिन कुंतल
Uttar Pradesh
29-09-2019 10:18 AM
रोबिन जी इसके बारे में जानकारी लेने के लिए आप Firoz Alam 9616009911 से संपर्क कर सकते है
Posted by Ak
Uttar Pradesh
29-09-2019 10:13 AM
कृप्या आप अपने सवाल के साथ फोटो भी अपलोड करें ताकि आपको सही जानकारी दी जा सके

Posted by paras Kumar
Bihar
29-09-2019 10:00 AM
Paras ji iske vare mai jankari ke liye aap iss link per click krke video dekh skte hai
https://www.youtube.com/watch v=TzU2K36LO_c

Posted by kashmir singh
Punjab
29-09-2019 09:59 AM
Hanji, bhari barish nal isda bura asar ho skda hai.
Posted by Gurmeet Singh
Punjab
29-09-2019 09:59 AM
ਕਿੰਨੂੰ ਦਾ ਬੂੱਟਾ ਇਸ ਤਰ੍ਹਾਂ ਉਪਰੋਂ ਪੱਤੇ ਸੁੱਕਾ ਰਿਹਾ ਹੈ, ਇਸਦਾ ਕੋਈ ਇਲਾਜ ਦੱਸੋ, ਧੰਨਵਾਦ, ਫਲ ਵੀ ਨਹੀਂ ਲਗ ਰਿਹਾ ?
ਤੁਹਾਡੇ ਵੱਲੋਂ ਭੇਜੀ ਫੋਟੋ ਸਹੀ ਅੱਪਲੋਡ ਨਹੀਂ ਹੋਈ, ਕਿਰਪਾ ਕਰਕੇ ਫੋਟੋ ਦੋਬਾਰਾ ਭੇਜੋ ਜੀ
Posted by Harish Nath Goswami
Uttarakhand
29-09-2019 09:57 AM
यह मिट्टी की किस्म पर भी निर्भर करता है, तो कृपया बताएं कि मिट्टी कैसी है
Posted by Gurmeet Singh
Punjab
29-09-2019 09:55 AM
ਤੁਹਾਡੇ ਵੱਲੋਂ ਭੇਜੀ ਫੋਟੋ ਸਹੀ ਅੱਪਲੋਡ ਨਹੀਂ ਹੋਈ, ਕਿਰਪਾ ਕਰਕੇ ਫੋਟੋ ਦੋਬਾਰਾ ਭੇਜੋ ਜੀ
Posted by shikhar
Uttar Pradesh
29-09-2019 09:54 AM
यह फसल बहुत तरह की मिट्टी जैसे कि रेतली, नमक वाली, दोमट और चिकनी मिट्टी में उगाई जा सकती है अच्छे जल निकास वाली, जैविक तत्व भरपूर, रेतली से दरमियानी ज़मीन में फसल अच्छी पैदावार देती है यह फसल नमक वाली तेजाबी ज़मीनों में भी उगाई जा सकती है पर बहुत ज्यादा पानी खड़ने वाली और खारी या नमक वाली ज़मीन इस फसल की खेती के लिए .... (Read More)
यह फसल बहुत तरह की मिट्टी जैसे कि रेतली, नमक वाली, दोमट और चिकनी मिट्टी में उगाई जा सकती है अच्छे जल निकास वाली, जैविक तत्व भरपूर, रेतली से दरमियानी ज़मीन में फसल अच्छी पैदावार देती है यह फसल नमक वाली तेजाबी ज़मीनों में भी उगाई जा सकती है पर बहुत ज्यादा पानी खड़ने वाली और खारी या नमक वाली ज़मीन इस फसल की खेती के लिए उचित नहीं होती Kufri Ashoka: इस फसल की सी पी आई यू द्वारा विकसित की गई है और बिहार, हरियाणा, उत्तर प्रदेश और पश्चिम बंगाल में खेती करने के लिए अनुकूल है इसका पौधा मध्यम लंबा और तना दरमियाना मोटा होता है यह किस्म 70-80 दिनों में पककर तैयार हो जाती है इसके आलू बड़े, गोलाकार, सफेद और नर्म छिल्के वाले होते हैं यह पिछेती झुलस रोग को सहने योग्य किस्म है Kufri Badshah: इसके पौधे लंबे और 4-5 तने प्रति पौधा होते हैं इसके आलू गोल, बड़े से दरमियाने, गोलाकार और हल्के सफेद रंग के होते हैं इसके आलू स्वाद होते हैं यह किस्म 90-100 दिनों में पक जाती है यह किस्म कोहरे को सहनेयोग्य है और पिछेती, अगेती झुलस रोग की प्रतिरोधक है Kufri Bahar: इस किस्म के पौधे लंबे और तने मोटे होते हैं तनों की संख्या 4-5 प्रति पौधा होती है इसके आलू बड़े, सफेद रंग के, गोलाकार से अंडाकार होते हैं यह किस्म 90-100 दिनों में पक जाती है और इसकी औसतन पैदावार 100-120 क्विंटल प्रति एकड़ होती है इसे ज्यादा देर तक स्टोर करके रखा जा सकता है यह पिछेती और अगेती झुलस रोग और पत्ता मरोड़ रोग की रोधक है Kufri Chipsona 2: इस किस्म के पौधे दरमियाने कद के और कम तनों वाले होते हैं इसके पत्ते गहरे हरे और फूल सफेद रंग के होते हैं आलू सफेद, दरमियाने आकार के, गोलाकार, अंडाकार और नर्म होते हैं इसकी औसतन पैदावार 140 क्विंटल प्रति एकड़ होती है यह पिछेती झुलस रोग की रोधक किस्म है यह किस्म चिपस और फरैंच फ्राइज़ बनाने के लिए उचित है खेत को एक बार 30 सैं.मी. गहरा जोतकर अच्छे ढंग से बैड बनाएं जोताई के लिए हल और तवियों का प्रयोग करें और फिर 2-3 बार सुहागा फेरें बिजाई से पहले खेत में नमी की मात्रा बनाकर रखें बिजाई के लिए दो ढंग मुख्य तौर पर प्रयोग किए जाते हैं 1. मेंड़ और खालियों वाला ढंग 2. समतल बैडों वाला ढंग इस फसल की खेती के लिए अलग अलग किस्मों के लिए अलग अलग समय प्रयोग होता है कुफरी अशोका की बिजाई के बाद कुफरी बहार किस्म को अक्तूबर के पहले सप्ताह में बोया जाता है कुफरी बादशाह और कुफरी सतलुज की बिजाई के लिए 5 अक्तूबर से 15 अक्तूबर तक का समय अनुकूल होता है बिजाई के लिए पंक्ति से पंक्ति का फासला 60 सैं.मी और पौधे से पौधे का फासला 20 सैं.मी. रखें फासला आलुओं के आकार के अनुसार बदलता रहता है यदि आलू का व्यास 2.5-3.5 सैं.मी. हो तो फासला 60x15 सैं.मी. और यदि आलू का व्यास 5-6 सैं.मी. हो तो फासला 60x40 सैं.मी. होना चाहिए 6-8 इंच गहरी खालियां बनाएं फिर इनमें आलू रखें और थोड़ा सा ज़मीन से बाहर रहने दें बिजाई के लिए ट्रैक्टर से चलने वाली या ऑटोमैटिक बिजाई के लिए मशीन का प्रयोग करें बिजाई के लिए बड़ी आंखों वाले आलुओं का प्रयोग करें बिजाई के लिए 13-15 क्विंटल प्रति एकड़ किलो प्रति एकड़ बीजों का प्रयोग करें बिजाई के लिए सेहतमंद आलू ही चुने बिजाई से पहले आलुओं को कोल्ड स्टोर से निकालकर 1-2 सप्ताह के लिए छांव वाले स्थान पर रखें ताकि वे अंकुरित हो जायें आलुओं के सही अंकुरन के लिए उन्हें जिबरैलिक एसिड 1 ग्राम प्रति 10 लीटर पानी में मिलाकर एक घंटे के लिए उपचार करें फिर छांव में सुखाएं और 10 दिनों के लिए हवादार कमरे में रखें फिर काटकर आलुओं को मैनकोजेब 0.5 प्रतिशत घोल (5 ग्राम प्रति लीटर पानी) में 10 मिनट के लिए भिगो दें इससे आलुओं को शुरूआती समय में गलने से बचाया जा सकता है आलुओं को गलने और जड़ों में कालापन रोग से बचाने के लिए साबुत और काटे हुए आलुओं को 6 प्रतिशत मरकरी के घोल (टैफासन) 0.25 प्रतिशत(2.5 ग्राम प्रति लीटर पानी) में डालें बिजाई से दो सप्ताह पहले खेत की तैयारी के समय 200 क्विंटल प्रति एकड़ रूड़ी की खाद डालें फसल की उचित वृद्धि के लिए नाइट्रोजन 50-60 किलो (110-130 किलो यूरिया), फासफोरस 20 किलो (125 किलो सिंगल सुपर फासफेट) और पोटाश 40 किलो (68 किलो म्यूरेट ऑफ पोटाश) की मात्रा प्रति एकड़ में डालें बिजाई के समय नाइट्रोजन का 3/4 हिस्सा और फासफोरस और पोटाश की पूरी मात्रा डालें बाकी बचा हुआ नाइट्रोजन का 1/4 हिस्सा बिजाई से 25-30 दिन बाद जड़ों से मिट्टी लगाने के समय डालें यदि बिजाई से पहले सिंचाई की गई हो तो पहली सिंचाई 8-10 दिनों के अंदर करें नहीं तो बिजाई के तुरंत बाद या 1.2 दिन बाद सिंचाई करें अक्तूबर-नवंबर के महीने में 7-10 दिनों के अंतराल पर सिंचाई करें दिसंबर-जनवरी महीने में 10-15 दिनों के अंतराल पर सिंचाई करें ज्यादा मात्रा में दिए गए पानी से जड़ गलन बीमारी का खतरा रहता है कटाई के 10-12 दिन पहले सिंचाई बंद कर दें

Posted by kripa shankar singh
Uttar Pradesh
29-09-2019 09:47 AM
आप सरसो की किस्मे जैसे Narendra Ageti Rai 4: यह यू पी के सभी क्षेत्रों में खेती करने के लिए उपयुक्त है यह किस्म 95-100 दिनों में कटाई के लिए तैयार हो जाती है इसकी औसतन पैदावार 6-8 क्विंटल प्रति एकड़ होती है Varuna (T 59): यह यू पी के मैदानी क्षेत्रों में खेती करने के लिए उपयुक्त है यह किस्म 125-130 दिनों में कटाई के लिए तैयार हो जाती है इसकी .... (Read More)
आप सरसो की किस्मे जैसे Narendra Ageti Rai 4: यह यू पी के सभी क्षेत्रों में खेती करने के लिए उपयुक्त है यह किस्म 95-100 दिनों में कटाई के लिए तैयार हो जाती है इसकी औसतन पैदावार 6-8 क्विंटल प्रति एकड़ होती है Varuna (T 59): यह यू पी के मैदानी क्षेत्रों में खेती करने के लिए उपयुक्त है यह किस्म 125-130 दिनों में कटाई के लिए तैयार हो जाती है इसकी औसतन पैदावार 8-10 क्विंटल प्रति एकड़ होती है Vasanti: यह यू पी के मैदानी क्षेत्रों में खेती करने के लिए उपयुक्त है यह किस्म 130-135 दिनों में कटाई के लिए तैयार हो जाती है इसकी औसतन पैदावार 10-11 क्विंटल प्रति एकड़ होती है Rohini: यह यू पी के सभी क्षेत्रों में खेती करने के लिए उपयुक्त है यह किस्म 130-135 दिनों में कटाई के लिए तैयार हो जाती है इसकी औसतन पैदावार 9-11 क्विंटल प्रति एकड़ होती है Maya: यह यू पी के सभी क्षेत्रों में खेती करने के लिए उपयुक्त है यह किस्म 130-135 दिनों में कटाई के लिए तैयार हो जाती है इसकी औसतन पैदावार 10-11 क्विंटल प्रति एकड़ होती है Urvashi: यह यू पी के सभी क्षेत्रों में खेती करने के लिए उपयुक्त है यह किस्म 125-130 दिनों में कटाई के लिए तैयार हो जाती है इसकी औसतन पैदावार 8-10 क्विंटल प्रति एकड़ होती है Narendra Swarna Rai 8: यह यू पी के सभी क्षेत्रों में खेती करने के लिए उपयुक्त है यह किस्म 130-135 दिनों में कटाई के लिए तैयार हो जाती है इसकी औसतन पैदावार 8-10 क्विंटल प्रति एकड़ होती है Narendra Rai: यह यू पी के सभी क्षेत्रों में खेती करने के लिए उपयुक्त है यह किस्म 125-130 दिनों में कटाई के लिए तैयार हो जाती है इसकी औसतन पैदावार 10-12 क्विंटल प्रति एकड़ होती है
Posted by Ravi
Haryana
29-09-2019 09:45 AM
Ravi ji pashu ka dhudh uski nasal aur uski khurak per nirbhar hota hai, jitna uss nasal ka dhudh hoga woh utna he dhudh de skti hai, baki aap uski khurak ka dian rakhen aur achi feed dalen, iske sath sath aap Anabolite liquid 100ml rojana, Milkout powder 2-2 chamch subah sham aur Calcimust gold liquid 50ml rojana dena suru kren, isse frak padd jayega..
Posted by BHERU LAL GURJAR
Rajasthan
29-09-2019 09:43 AM
इन्हें रोकने के लिए और अच्छी उपज प्राप्त करने के लिए प्लानोफिक्स (एन ए ए) 4 मि.ली. और Micnelf-16 or 32@120 ग्राम, मैगनीश्यिम सल्फेट 150 ग्राम प्रति 15 लीटर पानी की स्प्रे करें यदि खराब मौसम के कारण टिंडे झड़ते दिखाई दें तो इसकी रोकथाम के लिए 100 ग्राम NPK 00:52:34+30 मि.ली. हयूमिक एसिड (12 प्रतिशत से कम)+6 मि.मी. स्टिकर को 15 लीटर पानी में मिलाकर 10 .... (Read More)
इन्हें रोकने के लिए और अच्छी उपज प्राप्त करने के लिए प्लानोफिक्स (एन ए ए) 4 मि.ली. और Micnelf-16 or 32@120 ग्राम, मैगनीश्यिम सल्फेट 150 ग्राम प्रति 15 लीटर पानी की स्प्रे करें यदि खराब मौसम के कारण टिंडे झड़ते दिखाई दें तो इसकी रोकथाम के लिए 100 ग्राम NPK 00:52:34+30 मि.ली. हयूमिक एसिड (12 प्रतिशत से कम)+6 मि.मी. स्टिकर को 15 लीटर पानी में मिलाकर 10 दिनों के फासले पर तीन स्प्रे करें
Posted by Harish Nath Goswami
Uttarakhand
29-09-2019 09:41 AM
मोती की खेती एक बहुत ही अच्छा व्यवसाय है इस व्यवसाय को शुरू करने के लिए सबसे जरुरी है इसकी ट्रेनिंग, क्योकि इसमें बहुत सी ऐसी बारीकियें होती है जो हमें प्रेक्टिकल ट्रेनिंग में ही सीखने को मिलती है अगर आप इसकी ट्रेनिंग लेना चाहते है तो आप ग्लिटराटी पर्ल फार्मिंग ट्रेनिंग केंद्र प्रशिक्षण कार्य कर्म आयोजि.... (Read More)
मोती की खेती एक बहुत ही अच्छा व्यवसाय है इस व्यवसाय को शुरू करने के लिए सबसे जरुरी है इसकी ट्रेनिंग, क्योकि इसमें बहुत सी ऐसी बारीकियें होती है जो हमें प्रेक्टिकल ट्रेनिंग में ही सीखने को मिलती है अगर आप इसकी ट्रेनिंग लेना चाहते है तो आप ग्लिटराटी पर्ल फार्मिंग ट्रेनिंग केंद्र प्रशिक्षण कार्य कर्म आयोजित किया जा रहा है प्रशिक्षण कार्य कर्म में भाग लेने के लिए नीचे दिए गए नम्बर पर आज ही संपर्क करें और Rs 250/ से अपना रजिस्ट्रेशन करवाए अचल सिंह (फाउंडर )- 9711858258. धन्यवाद

Posted by राजपूत
Uttar Pradesh
29-09-2019 09:31 AM
असली केसर सिर्फ जम्मू कश्मीर, ईरान और अफगानिस्तान में ही हो सकता है, यह कुसुम है, इसकी भी कई दवाई बनती है, यदि कोई और छक है तो जम्मू कश्मीर के इस किसान से बात करें, जिसके दादे, पड़दादे भी केसर की खेती करते थे और यह भी केसर की खेती करते है Javid Ahmed- 95964 93260 बाकि आप यह वीडियो देखें https://www.youtube.com/watchv=vl7c6L3ETnQ&t=8s बाकि यदि फिर भी यकीन नहीं .... (Read More)
असली केसर सिर्फ जम्मू कश्मीर, ईरान और अफगानिस्तान में ही हो सकता है, यह कुसुम है, इसकी भी कई दवाई बनती है, यदि कोई और छक है तो जम्मू कश्मीर के इस किसान से बात करें, जिसके दादे, पड़दादे भी केसर की खेती करते थे और यह भी केसर की खेती करते है Javid Ahmed- 95964 93260 बाकि आप यह वीडियो देखें https://www.youtube.com/watchv=vl7c6L3ETnQ&t=8s बाकि यदि फिर भी यकीन नहीं है तो तो आप अमृतपाल सिंह बराड़ प्रोफेसर, पीएयू लुधियाना इस वीडियो संबंधी विचार पड़ सकते हैं, यह फसल केसर की नहीं है, यह फसल कसुंबडे की है, इसे अंग्रेजी में Safflower कहते है, और विज्ञानं में इसे Carthamus tinctorius कहते है
Posted by pardeep Singh
Punjab
29-09-2019 09:26 AM
Pardeep Singh ji tuhanu answer de nal ik photo bheji gai hai jis vich SHRIRAM SUPER 111 bare puri jankari diti gai hai, is bare hor jeada jankari ate is da beej len lai tusi Mr Vikas 9501410577 nal samparak kar sakde ho, Thankyou.
Posted by jaykant singh
Uttar Pradesh
29-09-2019 09:24 AM
is pr machhar ka hamla hai, iske liye aap imidacloprid @1.5ml ko prati litre pani ke hisab se spray karen.

Posted by Rakesh Das Bairagi Meghpura
Madhya Pradesh
29-09-2019 09:18 AM
सही जानकारी के लिए कृपया फसल की फोटो भेजें

Posted by govind
Rajasthan
29-09-2019 09:17 AM
इसकी रोकथाम के लिए profenophos@500ml या Ethion@800ml या oberon@200ml या Bayer की Admire pro@12gm या Flotis@400ml की प्रति एकड़ के हिसाब से 150 लीटर पानी में मिलाकर स्प्रे करें.

Posted by ਜਗਦੀਪ
Punjab
29-09-2019 09:16 AM
Jagdeep ji tuci iss nu ifer-h injection 5ml lgwao ate 3-3 dina de frak nal 3 injection lgwao, isde nal potasium-iodied rojana 7gm deo ,iss nal farak pann lgg jawega..
Posted by brahmanand
Madhya Pradesh
29-09-2019 09:09 AM
Brahmanand ji kirpya aap apna swal visthar se pushe ke aap konse bima ke bare jankari lena chahte hai, ta jo aap ko puri jankari di ja sake, Thankyou.

Posted by Mukesh rana
Rajasthan
29-09-2019 09:08 AM
हल्दी की सफल खेती के टिप्स पंजाब की कृषि अर्थव्यवस्था मुख्य रूप से धान और गेहूं की फसलों पर निर्भर करती है लेकिन धान और गेहूं के फसल चक्र को लगातार अपनाने के कारण कई समस्याएं हो रही हैं और धान और गेहूं से लाभ भी कम हो रहा है इसलिए, फसल विविधीकरण को अपनाते हुए अन्य फसलों को ध्यान में रखा जाना चाहिए हल्की फसलें .... (Read More)
हल्दी की सफल खेती के टिप्स पंजाब की कृषि अर्थव्यवस्था मुख्य रूप से धान और गेहूं की फसलों पर निर्भर करती है लेकिन धान और गेहूं के फसल चक्र को लगातार अपनाने के कारण कई समस्याएं हो रही हैं और धान और गेहूं से लाभ भी कम हो रहा है इसलिए, फसल विविधीकरण को अपनाते हुए अन्य फसलों को ध्यान में रखा जाना चाहिए हल्की फसलें विविधता में अच्छा योगदान दे सकती हैं हल्दी की खेती न केवल हमारी खुद की जरूरतों को पूरा करेगी बल्कि हमारे प्रांत और देश में व्यापार को भी बढ़ाएगी इसकी गंध के कारण हल्दी की खेती की जाती है इसके नोड्स का पीला रंग इसके विशिष्ट तत्व करक्यूमिन (1.8 से 5.4 प्रतिशत) के कारण होता है हल्दी के बर्तनों में एक विशेष प्रकार का तेल (2.5 से 7.2 प्रतिशत) होता है जिसे टर्मरोल कहा जाता है हल्दी का उपयोग मुख्य रूप से रसोई में मसाले के रूप में सुगंधित और रंगीन खाद्य सामग्री देने के लिए किया जाता है इसके अलावा, विभिन्न दवाओं और सौंदर्य प्रसाधनों में इसका विशेष गुणों के कारण उपयोग किया जाता है इसके उचित विकास के लिए गर्म और आर्द्र वातावरण की आवश्यकता होती है पंजाब में, इसकी खेती सेनजू क्षेत्र में की जा सकती है मध्यम से लेकर उच्च कार्बनिक पदार्थ इसकी खेती के लिए अधिक उपयुक्त हैं हल्दी की फसल के बाद गेहूं या प्याज लगाया जा सकता है निम्नलिखित तकनीकी विचारों पर विचार करके उच्च पैदावार प्राप्त की जा सकती है उन्नत किस्में: अधिकतम फसल उपज के लिए केवल अनुशंसित किस्मों की खेती की जानी चाहिए पंजाब में हल्दी की खेती के लिए दो प्रकार की हल्दी की सिफारिश की जाती है, जिनका विवरण निम्नानुसार है: पंजाब हल्दी 1: इस प्रकार की हल्दी की झाड़ियाँ मध्यम ऊँचाई और सीधी होती हैं इस प्रकार के झाड़ीदार पत्ते हरे, मध्यम चौड़े और थोड़े लम्बे होते हैं इसके गांठों के शीर्ष पर पैलेट का रंग भूरा होता है जबकि गद्दे के अंदर का रंग गहरा पीला होता है इस किस्म को परिपक्व होने में लगभग 215 दिन लगते हैं और इसकी औसत उपज 108 क्विंटल प्रति एकड़ है पंजाब हल्दी 2: इस प्रकार की हल्दी की झाड़ियाँ लंबी और सीधी होती हैं इस तरह के झाड़ीदार पत्ते हल्के हरे और बहुत बड़े होते हैं इसकी गांठें मोटी और लंबी होती हैं गद्दे के ऊपर की खोपड़ी का रंग भूरा है और अंदर का गद्दा पीला है इस किस्म को परिपक्व होने में लगभग 240 दिन लगते हैं और इसकी औसत उपज 122 क्विंटल प्रति एकड़ होती है फील्ड तैयारी: हल्दी को उसकी गांठों (जमीन की चड्डी) के लिए उगाया जाता है उचित मिट्टी का कटाव - विकास के लिए भूमि का नरम होना बहुत महत्वपूर्ण है इसलिए, बुवाई से पहले दो और तीन बार बुवाई और सुई को मारकर खेत को अच्छी तरह तैयार करना चाहिए यदि पिछली फसल की मुख्य और अन्य गंदगी खेत की तैयारी के दौरान पकी है, तो उन्हें खेत की तैयारी के दौरान हटा दिया जाना चाहिए बीजों की मात्रा: हल्दी की बुवाई समुद्री मील द्वारा की जाती है बुवाई के लिए उपयोग किए गए घावों को ताजा और रोग मुक्त होना चाहिए एक एकड़ बुवाई के लिए 6 से 8 क्विंटल ताजे बेल की आवश्यकता होती है 4-5 किलोग्राम गांठ एक माला (25 वर्ग मीटर) क्षेत्र के लिए पर्याप्त होती है अगर इसे घरेलू स्तर पर छोटे पैमाने पर बोया जाए बुवाई विधि: हल्दी की ताजा और रोगग्रस्त गांठों की बुवाई के लिए चुना जाना चाहिए हल्दी की बुवाई 1 फुट (30 सेमी) की दूरी पर लाइनों के बीच 8 इंच (20 सेमी) व्यास में करके की जानी चाहिए बुवाई के बाद धान का पुआल 25-36 क्विंटल प्रति एकड़ रखा जाना चाहिए भूसे के उपयोग से भूसा जल्दी हरा हो जाता है मैदान को नम स्थान पर रखा जाना चाहिए जब तक कि गांठें हरी न हों

Posted by sonu
Uttar Pradesh
29-09-2019 09:07 AM
आप पशुओं को 100 ग्राम तारामीरा का तेल रोज़ाना 20 दिन दें और आप Taktic स्प्रे का प्रयोग करें, यह 2ml/1liter स्प्रे आप पशुओं के आस पास और पशुओं के ऊपर भी करें बाकि आप साफ सफाई का पूरा ध्यान रखें..

Posted by Juned Khan
Rajasthan
29-09-2019 09:07 AM
जुनेद जी कृपया आप बताये कि प्याज में क्या दिक्कत आ रही है ताकि आपको इसके बारे में पूरी जानकारी दी जा सके धन्यवाद
Posted by SHUBHAM RANA
Madhya Pradesh
29-09-2019 09:06 AM
आप उसे 1 चम्मच मुलेठी का पाउडर गुड़ में मिलाकर देना शुरू करें बाकी आप Catcough दवाई देनी शुरू करें इसका एक चम्मच रोट पर लगाकर देना शुरू करें इससे फर्क पड़ जाएगा..

Posted by Narendra Meena
Madhya Pradesh
29-09-2019 09:05 AM
आने वाले दिनों में कहीं-कहीं बादल छाए रहेंगे और बारिश की संभावना भी है मौसम विभाग की मानें तो 10 तारीख तक मौसम साफ़ हो जाएगा

Posted by sonu
Uttar Pradesh
29-09-2019 09:01 AM
पश्चिमी यू पी में, सिंचित और सामान्य बिजाई स्थितियों में 1 नवंबर से 15 नवंबर तक बिजाई पूरी कर लें और पिछेती बिजाई की स्थितियों में 1 से 25 दिसंबर तक बिजाई पूरी कर लें
पूर्वी यू पी के लिए, सिंचित और सामान्य बिजाई का उचित समय 1 नवंबर से 15 नवंबर तक है, जबकि पिछेती बिजाई के लिए 1 से 20 दिसंबर का समय उचित है
ऊंचे पहाड़ी क्.... (Read More)
पश्चिमी यू पी में, सिंचित और सामान्य बिजाई स्थितियों में 1 नवंबर से 15 नवंबर तक बिजाई पूरी कर लें और पिछेती बिजाई की स्थितियों में 1 से 25 दिसंबर तक बिजाई पूरी कर लें
पूर्वी यू पी के लिए, सिंचित और सामान्य बिजाई का उचित समय 1 नवंबर से 15 नवंबर तक है, जबकि पिछेती बिजाई के लिए 1 से 20 दिसंबर का समय उचित है
ऊंचे पहाड़ी क्षेत्रों के लिए, सिंचित और सामान्य बिजाई का उचित समय अक्तूबर के दूसरे पखवाड़े से लेकर नवंबर का पहला पखवाड़ा है जबकि पिछेती बिजाई के लिए 1 दिसंबर से 20 दिसंबर का समय उचित है
निचले पहाड़ी क्षेत्रों के लिए, सिंचित और सामान्य बिजाई का उचित समय अक्तूबर के आखिरी सप्ताह से लेकर मध्य नवंबर तक का है जबकि पिछेती बिजाई के लिए नवंबर का दूसरा पखवाड़ा उचित समय है
Posted by Arun Saini
Uttar Pradesh
29-09-2019 08:58 AM
अरुण जी पहले साल में रासायनिक खेती की तुलना में पैदावार कम होगी और फिर 2 और 3 साल में पैदावार बढ़ेगी
Posted by ਰਸ਼ਪਿੰਦਰ ਭੁੱਲਰ
Punjab
29-09-2019 08:52 AM
Bhullar ji tuci iss nu turant nazdiki doctor ton check krwao ate iss nu injection lgwao ji..
Posted by Chhatrapati D Pal
Maharashtra
29-09-2019 08:51 AM
Shrimaan ji, yeh fungus ka hamla hua hai, iski roktham ke liye aap carbendazim @ 400 gm prati acre ke hisaab se spray karein, dhanywad
Posted by praveen gharte
Madhya Pradesh
29-09-2019 08:50 AM
is me sundi ka hamla check kre, agar hamla dikhe to fame @20ml ya coragen @60ml prti acre ka istemal kre.
Posted by Rajendra Singh Rathore Padamgarh
Rajasthan
29-09-2019 08:46 AM
चने की फसल के लिए ज्यादा समतल बैडों की जरूरत नहीं होती यदि इसे मिक्स फसल के तौर पर उगाया जाये तो खेत की अच्छी तरह से जोताई होनी चाहिए यदि इस फसल को खरीफ की फसल के तौर पर बीजना हो, तो खेत की मॉनसून आने पर गहरी जोताई करें, जो बारिश के पानी को संभालने में मदद करेगा बिजाई से पहले खेत की एक बार जोताई करें यदि मिट्टी म.... (Read More)
चने की फसल के लिए ज्यादा समतल बैडों की जरूरत नहीं होती यदि इसे मिक्स फसल के तौर पर उगाया जाये तो खेत की अच्छी तरह से जोताई होनी चाहिए यदि इस फसल को खरीफ की फसल के तौर पर बीजना हो, तो खेत की मॉनसून आने पर गहरी जोताई करें, जो बारिश के पानी को संभालने में मदद करेगा बिजाई से पहले खेत की एक बार जोताई करें यदि मिट्टी में नमी की कमी नज़र आये तो बिजाई से एक सप्ताह पहले सुहागा फेरें
बिजाई का समय
बारानी हालातों में 10 अक्तूबर से 25 अक्तूबर तक बिजाई पूरी करें सिंचित क्षेत्रों में देसी और काबुली किस्मों के लिए 25 अक्तूबर से 10 नवंबर तक बिजाई पूरी कर लें सही समय पर बिजाई करना जरूरी है अगेती बिजाई से अनावश्यक वनस्पतिक वृद्धि होती है, जबकि पिछेती बिजाई से फसल सूखे से प्रभावित होती है फसल घटिया वनस्पति वृद्धि करती है और जड़ों का विकास कम होता है
फासला
सिंचित क्षेत्रों के लिए कतार से कतार का फासला 30 सैं.मी. रखें
बीज की गहराई
सिंचित क्षेत्रों के लिए बीज की गहराई 5-7 सैं.मी. का प्रयोग करें और बारानी क्षेत्रों के लिए बीज की गहराई 7-10 सैं.मी. का प्रयोग करें
बिजाई का ढंग
उत्तरी भारत में इसकी बिजाई पोरा या सीड ड्रिल ढंग से की जाती है
बीज की मात्रा
बीज की मात्रा देसी चनों के लिए 18-20 किलोग्राम प्रति एकड़ और काबुली चनों के लिए 35-40 किलोग्राम प्रति एकड़ रखें
बीज का उपचार
ट्राइकोडरमा 2 किलो प्रति एकड़ + गला हुआ गोबर 50 किलो मिलाएं और फिर जूट की बोरियों में 24-72 घंटों के लिए रख दें फिर इस घोल को नमी वाली ज़मीन पर बिजाई से पहले खिलार दें इससे मिट्टी में पैदा होने वाली बीमारियों को रोका जा सकता है बीजों को मिट्टी में पैदा होने वाली बीमारियों से बचाने के लिए फफूंदीनाशक जैसे कि कार्बेनडाज़िम 12 प्रतिशत + मैनकोज़ेब 63 प्रतिशत डब्लयू पी (साफ) 2 ग्राम से प्रति किलो बीजों को बिजाई से पहले उपचार करें दीमक वाली ज़मीन पर बिजाई के लिए बीजों को क्लोरपाइरीफॉस 20 ई सी 10 मि.ली. से प्रति किलो बीजों का उपचार करें बीजों का मैसोराइज़ोबियम से टीकाकरण करें इससे चने की पैदावार 7 प्रतिशत तक वृद्धि होती है इस तरह करने के लिए बीजों को पानी में भिगोकर, उन पर मैसोराइज़ोबियम डालें टीकाकरण के बाद बीजों को छांव में सुखाएं

Posted by Avtar Singh
Punjab
29-09-2019 08:43 AM
avtar ji kirpa karke swal vistar nal pucho ta jo tuhanu is bare poori jankari diti ja sake.dhanwad
Posted by विरेन्द्र भगत
Bihar
29-09-2019 08:43 AM
Varender ji Boar goat lene ke lia aap Subash Kumar/Raj Kumar 9504617933, 9504097570 RS Goat Farm se samparak kar sakte hai, Thankyou.
Posted by ravinder
Rajasthan
29-09-2019 08:33 AM
dono ka dudh achha hai Jersey mein fat ziada hoti hai
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