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Posted by shankar Kumar Singh
Bihar
30-09-2019 08:25 AM
Punjab
10-01-2019 06:48 PM
Aap bakrio ko silage de skte hai iska koi nuksan nahi hai, aap maki ka silage khila skte hai , isko tyar krne ke liye aap yeh video dekh skte hai https://www.youtube.com/watch v=9MSj8mdkvvQ
Posted by Ravinder
Himachal Pradesh
30-09-2019 08:24 AM
Punjab
09-30-2019 03:31 PM
Ravinder ji mausam vibhag ke anusar aj barish hone ki sambhavna hai.dhanywad
Posted by umesh shakya
Uttar Pradesh
30-09-2019 08:21 AM
Maharashtra
09-30-2019 03:33 PM
umesh ji sundi ki roktham ke liye aap quinalphos@4ml ko prati litre pani ke hisab se spray karen.dhanywad
Posted by anil kumar
Uttar Pradesh
30-09-2019 08:14 AM
Maharashtra
10-15-2019 03:22 PM
Anil ji aap kisme jaiseVaruna,Shekhar,Vaibhav,Vardhan,Rohini ki bijai kar sakte hai .dhanwyad
Posted by karansingh
Uttar Pradesh
30-09-2019 08:12 AM
Punjab
09-30-2019 02:31 PM
karansingh ji kripya aap iski poori photo bheje taki aapko iske bare me poori jankari di ja sake.dhanywad
Posted by Ravinder kumar
Uttar Pradesh
30-09-2019 08:12 AM
Punjab
09-30-2019 02:53 PM
अच्छे जल निकास वाली गहरी, दोमट मिट्टी जिसमें भूमिगत-जल का स्तर ज़मीन से 1.5-2 मी. के नीचे हो और अच्छी जल धारण क्षमता वाली ज़मीन गन्ने की खेती के लिए लाभदायक है यह फसल काफी अम्लीय और खारेपन को सहन कर सकती है इसलिए इसे मिट्टी जिसका pH 5 से 8.5 हो, में उगाई जा सकती है यदि मिट्टी का pH 5 से कम हो तो इसमें चूना (कली) डालें और यदि मिट.... (Read More)
अच्छे जल निकास वाली गहरी, दोमट मिट्टी जिसमें भूमिगत-जल का स्तर ज़मीन से 1.5-2 मी. के नीचे हो और अच्छी जल धारण क्षमता वाली ज़मीन गन्ने की खेती के लिए लाभदायक है यह फसल काफी अम्लीय और खारेपन को सहन कर सकती है इसलिए इसे मिट्टी जिसका pH 5 से 8.5 हो, में उगाई जा सकती है यदि मिट्टी का pH 5 से कम हो तो इसमें चूना (कली) डालें और यदि मिट्टी का pH 9.5 से ज्यादा हो तो इसमें जिप्सम डालें आप इसकी किस्मे जैसे Co 8014 (Mahalakshami) ,Vasant 1,Co 86032 ,Co 92005 की बिजाई कर सकते है पतझड़ के मौसम में 15 अक्तूबर से २० नवंबर तक बिजाई की जाती है, बसंत के मौसम में बिजाई 15 फरवरी तक और गर्मियों के मौसम में 15 जुलाई से 15 सितंबर तक बिजाई की जाती है बिजाई के लिए सुधरे ढंग जैसे कि (गहरी खालियां, मेंड़ बनाकर,पंक्तियों में जोड़े बनाकर और गड्ढा खोदकर बिजाई ) प्रयोग किये जाते हैं 1) खालियां और मेंड़ बनाकर सूखी बिजाई: ट्रैक्टर द्वारा मेंड़ बनाने वाली मशीन की मदद से मेंड़ और खालियां बनाएं और इन मेड़ और खालियों में बिजाई करें मेड़ और खालियों में 90 सैं.मी. का फासला होना चाहिए गन्ने की गुलियों को मिट्टी में दबाएं और उसके बाद हल्की सिंचाई करें 2) पंक्तियों के जोड़े बनाकर बिजाई: खालियां बनाने वाले यंत्र के प्रयोग से खेत में 150 सैं.मी. के फासले पर खालियां बनाएं और उनमें 30:30-90-30:30 सैं.मी. के फासले पर गन्ने की रोपाई करें इस तरीके से मेड़ वाली बिजाई से अधिक पैदावार मिलती है 3) गड्ढा खोदकर बिजाई: गड्ढे खोदने वाली मशीन से 60 सैं.मी. व्यास के 30 सैं.मी. गहरे गड्ढे खोदें जिनमें 60 सैं.मी. का फासला हो इससे गन्ना 2-3 बार उगाया जा सकता है और मेड़ वाली बिजाई से 25-50 % अधिक पैदावार आती है B) एक आंख वाले गन्नों की बिजाई: रोपाई के लिए सेहतमंद गुलियां चुनें और 75-90 सैं.मी. के अंतर पर खालियों में बिजाई करें गुलियां एक आंख वाली होनी चाहिए यदि गन्ने के ऊपरी भाग में छोटी डलियां चुनी गई हों तो बिजाई 6 -9 सैं.मी. के अंतर पर करें फसल के अच्छे उगने के लिए आंखों को ऊपर की ओर रखें और हल्की सिंचाई करें पतझड़ के मौसम में 14500-16500 तीन आंख वाले बीज प्रति एकड़ में प्रयोग करें और बसंत के मौसम में 16500-25000 तीन आंख वाले बीज और 21600-25000 दो आंख वाले बीज प्रति एकड़ में प्रयोग करें गन्ने में नदीनों के कारण 12-72 % पैदावार का नुकसान होता है शुरूआती 60-120 दिनों तक नदीनों की रोकथाम बहुत जरूरी है इसलिए रोपाई के बाद 3-4 महीने बाद फसल की नदीनों की रोकथाम करें नीचे लिखे तरीकों से नदीनों को रोका जा सकता है 1) हाथों से गोडाई करके: गन्ना एक व्यापक जगह लेने वाली फसल है इसलिए नदीनों को गोडाई करके रोका जा सकता है इसके इलावा प्रत्येक सिंचाई के बाद 3-4 गोडाई जरूरी है 2) काश्तकारी ढंग: इस प्रक्रिया में खेती के तरीके, अंतरफसली और मलचिंग तरीके शामिल हैं बहुफसली के कारण नदीनों का हमला ज्यादा होता है इसकी रोकथाम के लिए चारे वाली फसलें और हरी खाद वाली फसलों के आधार वाला फसली चक्र गन्ने में नदीनों की रोकथाम करता है गन्ना एक व्यापक जगह लेने वाली भी फसल है जिससे नदीनों के हमले का खतरा भी ज्यादा होता है यदि गन्ने को कम समय वाली फसलों के साथ अंतरफसली किया जाए तो इससे नदीनों को कम किया जा सकता है और ज्यादा लाभ भी मिल सकता है गन्ने के अंकुरन के बाद गन्ने की कतारों में 10-12 सैं.मी. मोटी तह बिछा दी जाती है यह सूर्य की रोशनी को सोखता है जिससे नदीन कम होते हैं यह मिट्टी में नमी को भी बचाता है 3) रासायनिक तरीके: नदीनों की रोकथाम के लिए, सिमाज़ीन या एट्राज़ीन 600-800 ग्राम या मैट्रीब्यूज़िन 800 ग्राम या ड्यूरॉन 1-1.2 किलोग्राम प्रति एकड़ में बिजाई के तुरंत बाद प्रयोग करना चाहिए इसके इलावा चौड़े पत्ते वाले नदीनों की रोकथाम के लिए 2, 4-डी@ 300-400 ग्राम का प्रयोग प्रति एकड़ के हिसाब से करें नाइट्रोजन 62 किलो, फासफोरस 32 किलो और पोटाश 42 किलो प्रति एकड़ में डालें बिजाई से पहले नाइट्रोजन की 1/3 मात्रा और फासफोरस और पोटाश की पूरी मात्रा डालें बाकी बची नाइट्रोजन की दो मात्रा को टॉप ड्रेसिंग के तौर पर डालें नाइट्रोजन की पहली मात्रा को बीज वाली आंख के अंकुरण के समय और दूसरी मात्रा को बीज अंकुरण के 45 दिन बाद डालें 3 वर्षों के बाद गन्ने की गुलियों में 40-50 क्विंटल गाय का गोबर प्रति एकड़ में डालें पतझड़ के मौसम में 90-100 दिनों में नाइट्रोजन को टॉप ड्रेसिंग के तौर पर डालें और बसंत के मौसम में 150-160 दिन बाद डालनी चाहिए सिंचाई की संख्या मिट्टी की किस्म और पानी की उपलब्धता पर निर्भर करती है गर्मी के महीने में गर्म हवाओं और सूखे में वृद्धि होने के कारण फसल को पानी की जरूरत पड़ती है पहली सिंचाई फसल के 20-25 % अंकुरित होने पर करें मानसून में गन्ने को पानी और बारिश के आधार पर लगाएं कम वर्षा में सिंचाई 10 दिनों के अंतराल पर करें इसके बाद सिंचाई के अंतराल को बढ़ाकर 20-25 दिनों के अंतराल पर सिंचाई करें जमीन में नमी संभालने के लिए गन्ने की पंक्तियों में मलचिंग का प्रयोग करें अप्रैल जून के महीने में पानी की कमी ना होने दें इससे पैदावार कम होगी इसके इलावा बारिश के दिनों में पानी ना खड़ा होने दें जोताई का समय, वृद्धि का समय और अधिक विकास का समय सिंचाई के लिए बहुत नाज़ुक होता है मिट्टी को मेंड़ पर चढ़ाना: कसी की मदद से खालियों में और पौधे के किनारों पर मिट्टी चढ़ाई जाती है यह मिट्टी में अच्छी तरह से तैयार की गई खाद को अच्छी तरह से मिश्रित होने में मदद करती है पौधे को सहारा देने और उसे गिरने से बचाने में भी मदद करती है ज्यादा पैदावार और चीनी प्राप्त करने के लिए गन्ने की सही समय पर कटाई जरूरी है समय से पहले या बाद में कटाई करने से पैदावार पर प्रभाव पड़ता है किसान शूगर रीफरैक्टोमीटर का प्रयोग करके कटाई का समय पता लगा सकते हैं गन्ने की कटाई द्राती की सहायता से की जाती है गन्ना धरती से ऊपर थोड़ा हिस्सा छोड़कर काटा जाता है क्योंकि गन्ने में चीनी की मात्रा ज्यादा होती है कटाई के बाद गन्ना फैक्टरी में लेकर जाना जरूरी होता है
Posted by Sony Maan
Punjab
30-09-2019 08:06 AM
Punjab
10-02-2019 04:48 PM
Isda koi hall ta nhi kita jaa skda, pr tusi khet cho pani bahr kadhan lyi hall socho ya pani sukan tk wait kro. us to baad fungicide di spray kiti jaa skdi hai.
Posted by bhupendra meena
Madhya Pradesh
30-09-2019 07:54 AM
Punjab
10-15-2019 03:23 PM
Isme fok ban raha hai yeah sundi ki vaja se ho raha hai. Is ke liye app cartap hydrochloride @170 gm ka upyog kra sakte hai.
Posted by bhupendra meena
Madhya Pradesh
30-09-2019 07:54 AM
Punjab
10-16-2019 12:27 AM
bhupendra ji aap isme tna shedak ka hamla check karen agar maujood haito aap iske uper cartap hydrochloride@170 gram ko prati acre ke hisab se spray karen.dhanywad
Posted by Devilal Dhangar
Madhya Pradesh
30-09-2019 07:53 AM
Punjab
10-02-2019 04:44 PM
पूरी जानकारी के लिए बताएं कि कौन से जानवर फसल खा रहे हैं, मतलब कि कोई कीड़ा, पक्षी, आवारा पशु या क्या
Posted by vikrant pathania
Punjab
30-09-2019 07:52 AM
Punjab
10-02-2019 04:43 PM
ਹੁਣ ਇਨ੍ਹਾਂ ਦੇ ਪੁੰਗਰਾਅ ਦੇ ਬਹੁਤ ਘੱਟ ਚਾਂਸ ਹਨ, ਬਿਜਾਈ ਦੋਬਾਰਾ ਹੀ ਕਰਨੀ ਪਵੇਗੀ
Posted by jaswinder singh
Punjab
30-09-2019 07:50 AM
Punjab
09-30-2019 02:40 PM
ਜਸਵਿੰਦਰ ਜੀ ਕਿਰਪਾ ਕਰਕੇ ਆਪਣਾ ਸਵਾਲ ਵਿਸਤਾਰ ਨਾਲ ਪੁੱਛੋਂ ਜੀ ਤਾਂ ਜੋ ਤੁਹਾਨੂੰ ਸਹੀ ਜਾਣਕਾਰੀ ਦਿਤੀ ਜਾ ਸਕੇ ..
Posted by Vipul Tripathi
Uttar Pradesh
30-09-2019 07:42 AM
Rajasthan
10-01-2019 02:12 PM
मोती की खेती एक बहुत ही अच्छा व्यवसाय है इस व्यवसाय को शुरू करने के लिए सबसे जरुरी है इसकी ट्रेनिंग, क्योकि इसमें बहुत सी ऐसी बारीकियें होती है जो हमें प्रेक्टिकल ट्रेनिंग में ही सीखने को मिलती है अगर आप इसकी ट्रेनिंग लेना चाहते है तो आप ग्लिटराटी पर्ल फार्मिंग ट्रेनिंग केंद्र प्रशिक्षण कार्य कर्म आयोजि.... (Read More)
मोती की खेती एक बहुत ही अच्छा व्यवसाय है इस व्यवसाय को शुरू करने के लिए सबसे जरुरी है इसकी ट्रेनिंग, क्योकि इसमें बहुत सी ऐसी बारीकियें होती है जो हमें प्रेक्टिकल ट्रेनिंग में ही सीखने को मिलती है अगर आप इसकी ट्रेनिंग लेना चाहते है तो आप ग्लिटराटी पर्ल फार्मिंग ट्रेनिंग केंद्र प्रशिक्षण कार्य कर्म आयोजित किया जा रहा है प्रशिक्षण कार्य कर्म में भाग लेने के लिए नीचे दिए गए नम्बर पर आज ही संपर्क करें और Rs 250/ से अपना रजिस्ट्रेशन करवाए अचल सिंह (फाउंडर )- 9711858258. धन्यवाद
Posted by Lovely Sandhu
Punjab
30-09-2019 07:39 AM
Punjab
10-02-2019 04:41 PM
on wale dina vich halki badalvayi rhegi, pr barish di jyada sambhavna nhi hai.
Posted by vicky
Haryana
30-09-2019 07:38 AM
Punjab
10-02-2019 02:32 PM
Retli zameen me aap shriram ki 152, 172, 231, 251, 272 aadi kisme lga skte hain.
Posted by gurwinder Singh
Punjab
30-09-2019 07:37 AM
Punjab
09-30-2019 02:46 PM
Kirpa krke apna swal vistar nal pusho ji jekar tuhanu khetibadi ja pashupalan de kam vich smasia aundi hai tan tuci App vich apna swal push skde ho, jekar tuhanu App de samband vich koi smasia aundi hai tan tuci sade helpline no. 97799-77641 te sampark kr skde ho.
Posted by Akhand Pratap shakya
Uttar Pradesh
30-09-2019 07:34 AM
Punjab
10-15-2019 03:24 PM
गहुँ की अगेती बुआई नहीं की जाती इसको हम समय से ही ऊगा सकते हैं यां फिर थोड़ा लेट भी ऊगा सकते हैं वेस्टर्न उत्तेर प्रदेश में समय से उगने वाली DBW 17, PBW 502, PBW 343, WH 542, UP 2382 and UP 2554; PDW 291 (Durum), PDW 251 (Durum), WH 896 (Durum), PDW 233 (Durum) लेट बिजाई वाली DBW 16, PBW 373, RAJ 3765, UP 2425, PBW 226, UP 2526, ईस्टर्न उत्तर प्रदेश में समय से उगाए जाने वाली किस्मे K 0307, HD 2733, HD 2824, HP 1761, PBW 443, HUW 468, K 9107, NW 1012 ले.... (Read More)
गहुँ की अगेती बुआई नहीं की जाती इसको हम समय से ही ऊगा सकते हैं यां फिर थोड़ा लेट भी ऊगा सकते हैं वेस्टर्न उत्तेर प्रदेश में समय से उगने वाली DBW 17, PBW 502, PBW 343, WH 542, UP 2382 and UP 2554; PDW 291 (Durum), PDW 251 (Durum), WH 896 (Durum), PDW 233 (Durum) लेट बिजाई वाली DBW 16, PBW 373, RAJ 3765, UP 2425, PBW 226, UP 2526, ईस्टर्न उत्तर प्रदेश में समय से उगाए जाने वाली किस्मे K 0307, HD 2733, HD 2824, HP 1761, PBW 443, HUW 468, K 9107, NW 1012 लेट उगाई जाने वाली किस्मे DBW 14, NW 2036, HW 2045, NW 1014, HD 2643, HP 1744, Unnath Halna (K 9423)
Posted by mahesh
Madhya Pradesh
30-09-2019 07:04 AM
Punjab
10-02-2019 02:25 PM
Iske liye aap Imidacloprid @1.5ml prati litre pani ka upyog kre.
Posted by
--
30-09-2019 06:59 AM
Maharashtra
10-01-2019 01:58 PM
इसे मिट्टी की कई किस्मों, रेतली दोमट से चिकनी मिट्टी में उगाया जा सकता है अच्छे निकास वाली मिट्टी जिसकी पी एच 6 से 7.5 हो, में उगाने पर यह अच्छे परिणाम देती है यह फसल जलजमाव वाले हालातों में खड़ी नहीं रह सकती अम्लीय मिट्टी के लिए, चूना डालें Arkal: यह छोटे कद की और जल्दी पकने वाली किस्म है इसकी फलियां लंबी और गहरे हरे .... (Read More)
इसे मिट्टी की कई किस्मों, रेतली दोमट से चिकनी मिट्टी में उगाया जा सकता है अच्छे निकास वाली मिट्टी जिसकी पी एच 6 से 7.5 हो, में उगाने पर यह अच्छे परिणाम देती है यह फसल जलजमाव वाले हालातों में खड़ी नहीं रह सकती अम्लीय मिट्टी के लिए, चूना डालें Arkal: यह छोटे कद की और जल्दी पकने वाली किस्म है इसकी फलियां लंबी और गहरे हरे रंग की होती हैं इसकी औसतन पैदावार 16-18 क्विंटल प्रति एकड़ होती है Bonneville: यह मध्यम समय की किस्म है इसके फलियां मीठे दानों वाली होती हैं इसकी औसतन पैदावार 36 क्विंटल प्रति एकड़ होती है Multi Freezer: यह देरी से पकने वाली किस्म है इसकी फलियां मीठी और नर्म होती हैं यह ठंड को सहनेयोग्य किस्म हैं इसकी औसतन पैदावार 25 क्विंटल प्रति एकड़ होती है Azad P-I: यह छोटे कद की किस्म है इसके दाने झुर्रीदार होते हैं इसकी औतसन पैदावार 16 क्विंटल प्रति एकड़ होती है Early E-6: यह किस्म पंजाब एग्रीकल्चर यूनिवर्सिटी द्वारा विकसित की गई है इसकी औसतन पैदावार 40 क्विंटल प्रति एकड़ होती है खरीफ ऋतु की फसल की कटाई के बाद, सीड बैड तैयार करने के लिए हल से 1 या 2 बार जोताई करें हल से जोतने के बाद 2 या 3 बार तवियों से जोताई करें जल जमाव से रोकने के लिए खेत को अच्छी तरह समतल कर लेना चाहिए बिजाई से पहले, खेत की एक बार सिंचाई करें जो कि फसल के अच्छे अंकुरन में सहायक होती है फसल को मिट्टी से पैदा होने वाले कीटों और बीमारियों से बचाने के लिए ट्राइकोडरमा विराइड 10 किलो को अच्छी तरह से गले हुए गाय के गोबर 25-30 किलो को आखिरी जोताई के समय प्रति एकड़ में डालें अच्छी उपज प्राप्त करने के लिए बिजाई अक्तूबर से नवंबर के मध्य में पूरी कर लें बिजाई में देरी होने से उपज में काफी नुकसान होता है कतारों में 30-40 सैं.मी. और पौधें में 3-5 सैं.मी. फासले का प्रयोग करें लंबी किस्मों के लिए 32-40 किलो बीज प्रति एकड़ में प्रयोग करें और छोटे कद की किस्मों के लिए 50 किलो बीज प्रति एकड़ में प्रयोग करें बिजाई के समय नाइट्रोजन 13 किलो (30 किलो यूरिया), फासफोरस 24 किलो (150 किलो सिंगल सुपर फासफेट) और पोटाश 18 किलो (म्यूरेट ऑफ पोटाश 30 किलो) की मात्रा प्रति एकड़ में प्रयोग करें फासफोरस, पोटाश की पूरी मात्रा और नाइट्रोजन की आधी मात्रा बिजाई के समय डालें बाकी बची नाइट्रोजन को बिजाई के एक महीने बाद डालें छोटे कद की किस्मों के लिए नाइट्रोजन की 8 किलो मात्रा बिजाई के समय डालें एक या दो गोडाई करना यह किस्म पर निर्भर करता है पहली गोडाई, फसल की बिजाई के 3-4 सप्ताह बाद या जब फसल 2 या 3 पत्ते निकाल लेती है और दूसरी गोडाई, फूल निकलने से पहले करें मटरों की खेती के लिए नदीन नाशकों का प्रयोग बहुत प्रभावशाली होता है फ्लूक्लोरालिन 45 ई सी 800 मि.ली. को 100-150 लीटर पानी में मिलाकर बीज बोने से पहले खेत में डालें नदीनों की रोकथाम के लिए पैंडीमैथालीन 1 लीटर प्रति एकड़ या बसालिन 1 लीटर प्रति एकड़ का प्रयोग फसल बीजने से 48 घंटों के अंदर करें
Posted by mandip ghuman
Punjab
30-09-2019 06:44 AM
Punjab
09-30-2019 02:51 PM
tuci uss nu pett de kiria lai Bendikind plus bolus deo ate uss nu Broton liquid 50ml rojana ate Halotas 2 golia rojana deo, iss nal frak paa jawega..
Posted by pushpendra kumar
Uttar Pradesh
30-09-2019 06:39 AM
Punjab
10-02-2019 02:22 PM
Iss pr machhar ke hamle ki jaanch kre, agr machhar ho to Imidacloprid @1.5ml prati litre pani ka upyog kre.
Posted by vikram singh
Punjab
30-09-2019 06:38 AM
Punjab
09-30-2019 02:51 PM
tuci uss nu Vitum-H liquid 2 month di hoon ton badd dena suru kro ate 2ml rojana de skde ho..
Posted by Arun
Rajasthan
30-09-2019 06:35 AM

?

Punjab
10-01-2019 04:46 PM
कृप्या आप अपना सवाल विस्तार से पूछें आपके द्धारा भेंजी गई ओडियो में कुछ समझ नहीं आ रहा है कृप्या आप दोबारा ओडियो अपलोड करें ताकि आपको सही जानकारी दी जा सके
Posted by Jeetendra Rajpoot
Uttar Pradesh
30-09-2019 06:33 AM
Punjab
10-02-2019 02:20 PM
Gehu ka vanspatik naam Triticum aestivum hai.
Posted by jobanjeet singh
Punjab
30-09-2019 06:23 AM
Punjab
09-30-2019 02:52 PM
ਪਸ਼ੂ ਦਾ ਦੁੱਧ ਉਸਦੀ ਨਸਲ ਤੇ ਨਿਰਭਰ ਹੁੰਦਾ ਹੈ ਜੇਕਰ ਨਸਲ ਵਧਿਆ ਹੈ ਤਾਂ ਦੁੱਧ ਵੀ ਵੱਧ ਹੋਵੇਗੀ, ਬਾਕੀ ਖੁਰਾਕ, ਪਸ਼ੂ ਦੇ ਰਹਿਣ ਸਹਿਣ, ਟਾਈਮ ਟਾਈਮ ਤੇ ਡੇਵਰਮਿੰਗ ਕਰਵਾਉਣਾ, ਇਹਨਾਂ ਸਭ ਗੱਲਾਂ ਦਾ ਧਿਆਨ ਰੱਖਣਾ ਜਰੂਰੀ ਹੁੰਦਾ ਹੈ ਤੁਸੀ Enerboost ਦੇ ਨਾਲ ਨਾਲ Milkout ਪਾਊਡਰ 2-2 ਚਮਚ ਸਵੇਰੇ ਸ਼ਾਮ ਅਤੇ Calcimust gold liquid 50ml ਰੋਜਾਨਾ ਦਿਓ..
Posted by sukhbeer nehra
Haryana
30-09-2019 05:53 AM
Punjab
10-02-2019 04:36 PM
आप सरसो की किस्मे जैसे PBT 37: यह अगेती पकने वाली किस्म है जो कि 91 दिनों में पकती है यह तोरिया - गेहूं फसल चक्र के लिए अनुकूल है इस किस्म के बीज गहरे भूरे रंग के और मोटे होते हैं इसकी औसतन पैदावार 5.4 क्विंटल प्रति एकड़ है और तेल की मात्रा 41.7 प्रतिशत है TL 15: यह अगेती पकने वाली किस्म है यह 88 दिनों में पक जाती है इसकी औसतन पैद.... (Read More)
आप सरसो की किस्मे जैसे PBT 37: यह अगेती पकने वाली किस्म है जो कि 91 दिनों में पकती है यह तोरिया - गेहूं फसल चक्र के लिए अनुकूल है इस किस्म के बीज गहरे भूरे रंग के और मोटे होते हैं इसकी औसतन पैदावार 5.4 क्विंटल प्रति एकड़ है और तेल की मात्रा 41.7 प्रतिशत है TL 15: यह अगेती पकने वाली किस्म है यह 88 दिनों में पक जाती है इसकी औसतन पैदावार 4.5 क्विंटल प्रति एकड़ है TL 17: यह किस्म 90 दिनों में पककर कटाई के लिए तैयार हो जाती है यह किस्म एक से ज्यादा फसलें उगाने के लिए अनुकूल है यह किस्म 5.2 क्विंटल प्रति एकड़ औसतन पैदावार देती है RLM 619: इस किस्म की सिंचित और बारानी क्षेत्रों में खेती करने के लिए सिफारिश की गई है यह किस्म 143 दिनों में कटाई के लिए तैयार हो जाती है इसके बीज मोटे होते हैं और इनमें 43 प्रतिशत तेल की मात्रा होती है यह किस्म सफेद कुंगी, झुलस रोग और पत्तों के निचले धब्बों की प्रतिरोधक है इसकी औसतन पैदावार 8 क्विंटल प्रति एकड़ होती है PBR 91: यह किस्म 145 दिनों में कटाई के लिए तैयार हो जाती है यह झुलस रोग, कुंगी और कीटों के प्रतिरोधक है इसकी औसतन पैदावार 8.1 क्विंटल प्रति एकड़ होती है PBR 97: यह किस्म बारानी हालातों में बोने के लिए उपयुक्त किसम है यह 136 दिनों में कटाई के लिए तैयार हो जाती है इसके दाने मध्यम मोटे होते हैं दानों में तेल की मात्रा 39.8 प्रतिशत होती है इसकी औसतन पैदावार 5.2 क्विंटल प्रति एकड़ होती है PBR 210: यह किस्म सिंचित हालातों में और समय पर बोने के लिए उपयुक्त किस्म है यह 150 दिनों में कटाई के लिए तैयार हो जाती है इसकी औसतन पैदावार 6 क्विंटल प्रति एकड़ होती है RLC 3: यह लंबी प्रकार की किस्म 145 दिनों में कटाई के लिए तैयार हो जाती है इसकी औसतन पैदावार 7.3 क्विंटल प्रति एकड़ होती है इसमें तेल की मात्रा 41.5 प्रतिशत होती है
Posted by sukhbeer nehra
Haryana
30-09-2019 05:52 AM
Punjab
09-30-2019 11:20 AM
sukhbeer g 45s42 hybrid seed hai. kam area main try kre. agr app ke pass result asha raha ton agle saal area bda skte ho
Posted by Sharry Ahluwalia
Punjab
30-09-2019 05:12 AM
Punjab
10-02-2019 02:13 PM
UNNAT PBW 343: ਇਹ ਕਿਸਮ ਸਿੰਚਾਈ ਵਾਲੇ ਖੇਤਰਾਂ ਵਿੱਚ ਲਗਾਉਣ ਯੋਗ ਹੈ ਪੱਕਣ ਦੇ ਲਈ ਇਹ 155 ਦਿਨਾਂ ਦਾ ਸਮਾਂ ਲੈਦੀ ਹੈ ਇਹ ਕਰਨਾਲ ਬੰਟ ਦੀ ਪ੍ਰਤਿਰੋਧੀ ਅਤੇ ਬਲਾਈਟ ਨੂੰ ਵੀ ਸਹਿਣ ਯੋਗ ਹੈ ਇਸਦੀ ਔਸਤ ਪੈਦਾਵਾਰ 23.2 ਕੁਇੰਟਲ ਪ੍ਰਤੀ ਏਕੜ ਹੈ UNNAT PBW 550: ਇਹ ਕਿਸਮ ਪੰਜਾਬ ਦੇ ਸਾਰਿਆਂ ਇਲਾਕਿਆਂ ਵਿੱਚ ਉਗਾਈ ਜਾਂਦੀ ਹੈ ਇਹ ਕਿਸਮ 145 ਦਿਨਾਂ ਵਿੱਚ ਪੱਕ ਕੇ ਤਿਆਰ ਹੋ ਜਾਂਦੀ ਹੈ ਇਹ ਪੀਲੀ ਅਤੇ ਭੂਰੀ ਕੁੰਗੀ ਦੀ .... (Read More)
UNNAT PBW 343: ਇਹ ਕਿਸਮ ਸਿੰਚਾਈ ਵਾਲੇ ਖੇਤਰਾਂ ਵਿੱਚ ਲਗਾਉਣ ਯੋਗ ਹੈ ਪੱਕਣ ਦੇ ਲਈ ਇਹ 155 ਦਿਨਾਂ ਦਾ ਸਮਾਂ ਲੈਦੀ ਹੈ ਇਹ ਕਰਨਾਲ ਬੰਟ ਦੀ ਪ੍ਰਤਿਰੋਧੀ ਅਤੇ ਬਲਾਈਟ ਨੂੰ ਵੀ ਸਹਿਣ ਯੋਗ ਹੈ ਇਸਦੀ ਔਸਤ ਪੈਦਾਵਾਰ 23.2 ਕੁਇੰਟਲ ਪ੍ਰਤੀ ਏਕੜ ਹੈ UNNAT PBW 550: ਇਹ ਕਿਸਮ ਪੰਜਾਬ ਦੇ ਸਾਰਿਆਂ ਇਲਾਕਿਆਂ ਵਿੱਚ ਉਗਾਈ ਜਾਂਦੀ ਹੈ ਇਹ ਕਿਸਮ 145 ਦਿਨਾਂ ਵਿੱਚ ਪੱਕ ਕੇ ਤਿਆਰ ਹੋ ਜਾਂਦੀ ਹੈ ਇਹ ਪੀਲੀ ਅਤੇ ਭੂਰੀ ਕੁੰਗੀ ਦੀ ਰੋਧਕ ਕਿਸਮ ਹੈ ਇਸਦਾ ਔਸਤਨ ਕੱਦ 86 ਸੈ.ਮੀ. ਹੁੰਦਾ ਹੈ ਇਸ ਦਾ ਔਸਤਨ ਝਾੜ 23 ਕੁਇੰਟਲ ਪ੍ਰਤੀ ਏਕੜ ਹੁੰਦਾ ਹੈ PBW 1 Zn: ਇਸ ਕਿਸਮ ਦੇ ਪੌਦੇ ਦਾ ਔਸਤਨ ਕੱਦ 103 ਸੈ.ਮੀ. ਹੁੰਦਾ ਹੈ ਇਹ ਕਿਸਮ 151 ਦਿਨਾਂ ਵਿੱਚ ਕਟਾਈ ਲਈ ਤਿਆਰ ਹੋ ਜਾਂਦੀ ਹੈ ਇਸ ਦਾ ਔਸਤਨ ਝਾੜ 22.5 ਕੁਇੰਟਲ ਪ੍ਰਤੀ ਏਕੜ ਹੁੰਦਾ ਹੈ PBW 725: ਇਹ ਕਿਸਮ ਪੀ ਏ ਯੂ, ਐਗਰੀਕਲਚਰ ਯੂਨੀਵਰਸਿਟੀ ਦੁਆਰਾ ਸਿਫਾਰਿਸ਼ ਕੀਤੀ ਗਈ ਹੈ ਇਹ ਇੱਕ ਮੱਧਰੀ ਕਿਸਮ ਹੈ ਅਤੇ ਇਹ ਸਿੰਚਾਈ ਵਾਲੇ ਖੇਤਰਾਂ ਵਿੱਚ ਲਗਾਈ ਜਾਂਦੀ ਹੈ ਇਹ ਪੀਲੇ ਅਤੇ ਭੂਰੇ ਜੰਗ ਦੀ ਪ੍ਰਤਿਰੋਧੀ ਕਿਸਮ ਹੈ ਇਸਦੇ ਦਾਣੇ ਮੋਟੇ , ਅਤੇ ਗਹਿਰੇ ਰੰਗ ਦੇ ਹੁੰਦੇ ਹਨ ਇਹ 155 ਦਿਨਾਂ ਵਿੱਚ ਪੱਕ ਕੇ ਤਿਆਰ ਹੋ ਜਾਂਦੀ ਹੈ ਇਸਦੀ ਸਲਾਨਾ ਔਸਤ ਝਾੜ 23 ਕੁਇੰਟਲ ਪ੍ਰਤੀ ਏਕੜ ਹੈ PBW 677: ਇਹ ਕਿਸਮ 160 ਦਿਨਾਂ ਵਿੱਚ ਕਟਾਈ ਲਈ ਤਿਆਰ ਹੋ ਜਾਂਦੀ ਹੈ ਇਸਦਾ ਔਸਤ ਝਾੜ 22.4 ਕੁਇੰਟਲ ਪ੍ਰਤੀ ਏਕੜ ਹੈ HD 3086 (PusaGautam) : ਇਸ ਦਾ ਔਸਤਨ ਝਾੜ 23 ਕੁਇੰਟਲ ਪ੍ਰਤੀ ਏਕੜ ਹੁੰਦਾ ਹੈ ਇਹ ਪੱਤਿਆਂ ਦੇ ਪੀਲੇਪਣ ਅਤੇ ਭੂਰੇਪਣ ਦੀ ਬਿਮਾਰੀ ਤੋਂ ਰਹਿਤ ਹੁੰਦੀ ਹੈ ਵਧੀਆ ਕਿਮਸ ਦੇ ਬਰੈੱਡ ਬਣਾਉਣ ਦੇ ਸਾਰੇ ਗੁਣ/ਤੱਤ ਇਸ ਵਿਚ ਮੌਜੂਦ ਹਨ WH 1105: ਇਸ ਦੀ ਕਾਢ ਪੰਜਾਬ ਖੇਤੀਬਾੜੀ ਯੂਨੀਵਰਸਿਟੀ ਵੱਲੋਂ ਕੀਤੀ ਗਈ ਹੈ ਇਹ ਇੱਕ ਛੋਟੇ ਕੱਦ ਵਾਲੀ ਕਿਸਮ ਹੈ ਜਿਸ ਵਿਚ ਬੂਟੇ ਦਾ ਔਸਤਨ ਕੱਦ 97 ਸੈ.ਮੀ. ਤੱਕ ਹੁੰਦਾ ਹੈ ਇਸ ਦੇ ਦਾਣੇ ਸੁਨਹਿਰੇ, ਮਧਰੇ, ਸਖਤ ਅਤੇ ਚਮਕਦਾਰ ਹੁੰਦੇ ਹਨ ਇਹ ਪੱਤਿਆਂ ਦੇ ਪੀਲੇਪਣ ਅਤੇ ਭੂਰੇਪਣ ਦੀ ਬਿਮਾਰੀ ਤੋਂ ਰਹਿਤ ਹੁੰਦੀ ਹੈ ਪਰੰਤੂ ਇਹ ਦਾਣਿਆਂ ਦੇ ਖਰਾਬ ਹੋਣ ਅਤੇ ਸਿੱਟਿਆਂ ਦੇ ਭੂਰੇ ਪੈਣ ਦੀ ਬਿਮਾਰੀ ਪ੍ਰਤੀ ਸੰਵੇਦਨਸ਼ੀਲ ਹੈ ਇਹ ਲਗਭਗ 157 ਦਿਨਾਂ ਵਿੱਚ ਪੱਕ ਜਾਂਦੀ ਹੈ ਇਸ ਦੀ ਔਸਤਨ ਪੈਦਾਵਾਰ 23.1 ਕੁਇੰਟਲ ਪ੍ਰਤੀ ਏਕੜ ਹੈ HD 2967: ਇਹ ਵੱਡੇ ਕੱਦ ਦੀ ਕਿਸਮ ਹੈ ਜਿਸ ਵਿਚ ਬੂਟੇ ਦਾ ਔਸਤਨ ਕੱਦ 101 ਸੈ.ਮੀ. ਤੱਕ ਹੁੰਦਾ ਹੈ ਇਸ ਦੇ ਦਾਣੇ ਸੁਨਹਿਰੇ, ਮਧਰੇ, ਸਖਤ ਅਤੇ ਚਮਕਦਾਰ ਹੁੰਦੇ ਹਨ ਇਹ ਲਗਭਗ 157 ਦਿਨਾਂ ਵਿੱਚ ਪੱਕ ਜਾਂਦੀ ਹੈ ਇਸ ਦੀ ਔਸਤਨ ਪੈਦਾਵਾਰ 21.5 ਕੁਇੰਟਲ ਪ੍ਰਤੀ ਏਕੜ ਹੈ PBW 621: ਇਹ ਕਿਸਮ ਪੰਜਾਬ ਦੇ ਸਾਰਿਆਂ ਇਲਾਕਿਆਂ ਵਿੱਚ ਉਗਾਈ ਜਾਂਦੀ ਹੈ ਇਹ ਕਿਸਮ 158 ਦਿਨਾਂ ਵਿੱਚ ਪੱਕ ਕੇ ਤਿਆਰ ਹੋ ਜਾਂਦੀ ਹੈ ਇਹ ਪੀਲੀ ਅਤੇ ਭੂਰੀ ਕੁੰਗੀ ਦੀ ਰੋਧਕ ਕਿਸਮ ਹੈ ਇਸਦਾ ਔਸਤਨ ਕੱਦ 100 ਸੈ.ਮੀ. ਹੁੰਦਾ ਹੈI
Posted by jeebachh Kumar
Bihar
30-09-2019 04:29 AM
Punjab
10-02-2019 02:08 PM
jeebachh ji aap sankar aam ki kisam jaise Amrapali, Mallika, Pusa Arunima, Pusa Lalima ki bijai kar sakte hai.dhanywad
Posted by pramod
Madhya Pradesh
30-09-2019 03:53 AM
Punjab
10-02-2019 02:06 PM
फूलों की खेती के लिए मिट्टी रेतली होनी चाहिए जिसमें ज्यादा समय पानी खड़ा ना रहे, क्योंकि ज्यादा पानी फूलों की जड़ों को खराब करता है पानी मीठा होना चाहिए इसका खर्चा तथा मुनाफा फूलों की खेती की कौन सी किस्म की कर रहे हैं, उस पर निर्भर करता है यदि आपने फूलों की खेती अभी शुरू ही करनी है तो आप सबसे पहले गेंदे की खेती.... (Read More)
फूलों की खेती के लिए मिट्टी रेतली होनी चाहिए जिसमें ज्यादा समय पानी खड़ा ना रहे, क्योंकि ज्यादा पानी फूलों की जड़ों को खराब करता है पानी मीठा होना चाहिए इसका खर्चा तथा मुनाफा फूलों की खेती की कौन सी किस्म की कर रहे हैं, उस पर निर्भर करता है यदि आपने फूलों की खेती अभी शुरू ही करनी है तो आप सबसे पहले गेंदे की खेती शुरू करें तथा यह देखें कि आपके नजदीक मार्किट कौन सी है, जिसमें आप यह फूल बेच सकते हैं तथा फूलों की खेती सर्दियों में शुरू करें क्योंकि उस समय शादी का सीजन होता है, फूल अच्छे रेट पर बिक जाते हैं
Posted by Sourav Bhargava
Madhya Pradesh
30-09-2019 02:47 AM
Punjab
10-02-2019 02:01 PM
आप टमाटर की Pusa Hybrid 4, Arka Abha, Kashi Hemant आदि किस्में अच्छी पैदावार वाली हैं, जिनकी औसतन पैदावार 160-180 क्विंटल प्रति एकड़ है
Posted by star India
Uttar Pradesh
30-09-2019 02:07 AM
Punjab
10-02-2019 01:54 PM
New varieties ki development Plant Breeding Technique se ki jati hai.
Posted by ankush patel
Uttar Pradesh
30-09-2019 01:52 AM
Punjab
10-02-2019 01:50 PM
Alag-Alag Pashuyon or faslon ko teyar krne or unki dekhbhaal karne ke abheyaas ko krishi kehte hai.
Posted by Paritosh Anjana
Madhya Pradesh
30-09-2019 01:04 AM
Punjab
10-02-2019 01:55 PM
Yeh podhe ki kisam pr nirbhar krta hai. Iski poori jaankari ke liye podhe kii kism btayen.
Posted by Ankit Kumar naidu
Uttar Pradesh
30-09-2019 12:20 AM
Punjab
10-02-2019 01:44 PM
Iss saal (2019-20) Gehu ka MSP Rs. 1840 hai.
Posted by AVTAR SINGH
Punjab
30-09-2019 12:00 AM
Punjab
10-02-2019 01:41 PM
Aun wale dina ch halki badalwayi rhegi te kite-kite halki barish di sambhavna v hai.
Posted by AVTAR SINGH
Punjab
29-09-2019 11:56 PM
Punjab
09-30-2019 11:33 AM
ਸਬਜ਼ੀਆਂ ਵਿਚ ਪ੍ਰਯੋਗ ਕਰਨ ਲਈ ਇਸ ਦੀ ਬਿਜਾਈ ਅਕਤੂਬਰ ਦੇ ਪਹਿਲੇ ਹਫ਼ਤੇ ਕਰਨੀ ਚਾਹੀਦੀ ਹੈ ਅਤੇ ਬੀਜ ਤਿਆਰ ਕਰਨ ਲਈ ਬਿਜਾਈ ਅਕਤੂਬਰ ਦੇ ਅਖੀਰਲੇ ਹਫਤੇ ਤੋਂ ਨਵੰਬਰ ਦੇ ਪਹਿਲੇ ਹਫਤੇ ਤੱਕ ਕਰਨੀ ਚਾਹੀਦੀ ਹੈ ਕਤਾਰ ਤੋਂ ਕਤਾਰ ਦਾ ਫਾਸਲਾ 30 ਸੈ:ਮੀ: ਅਤੇ ਪੌਦੇ ਤੋਂ ਪੌਦੇ ਦਾ ਫਾਸਲਾ 15 ਸੈ:ਮੀ: ਰੱਖੋ ਬੀਜ ਦੀ ਡੂੰਘਾਈ 3 ਸੈ:ਮੀ: ਤੋਂ ਜਿਆਦਾ ਨਹੀ ਹੋਣੀ ਚਾਹੀਦੀ ਇਸਦੀ ਬਿਜਾਈ ਲਈ ਪੋਰਾ ਢੰਗ ਵਰਤਿਆ .... (Read More)
ਸਬਜ਼ੀਆਂ ਵਿਚ ਪ੍ਰਯੋਗ ਕਰਨ ਲਈ ਇਸ ਦੀ ਬਿਜਾਈ ਅਕਤੂਬਰ ਦੇ ਪਹਿਲੇ ਹਫ਼ਤੇ ਕਰਨੀ ਚਾਹੀਦੀ ਹੈ ਅਤੇ ਬੀਜ ਤਿਆਰ ਕਰਨ ਲਈ ਬਿਜਾਈ ਅਕਤੂਬਰ ਦੇ ਅਖੀਰਲੇ ਹਫਤੇ ਤੋਂ ਨਵੰਬਰ ਦੇ ਪਹਿਲੇ ਹਫਤੇ ਤੱਕ ਕਰਨੀ ਚਾਹੀਦੀ ਹੈ ਕਤਾਰ ਤੋਂ ਕਤਾਰ ਦਾ ਫਾਸਲਾ 30 ਸੈ:ਮੀ: ਅਤੇ ਪੌਦੇ ਤੋਂ ਪੌਦੇ ਦਾ ਫਾਸਲਾ 15 ਸੈ:ਮੀ: ਰੱਖੋ ਬੀਜ ਦੀ ਡੂੰਘਾਈ 3 ਸੈ:ਮੀ: ਤੋਂ ਜਿਆਦਾ ਨਹੀ ਹੋਣੀ ਚਾਹੀਦੀ ਇਸਦੀ ਬਿਜਾਈ ਲਈ ਪੋਰਾ ਢੰਗ ਵਰਤਿਆ ਜਾਂਦਾ ਹੈ Local: ਇਸ ਕਿਸਮ ਦੇ ਪੌਦੇ ਦੀ ਔਸਤ ਉੱਚਾਈ 60 ਸੈਂਟੀਮੀਟਰ ਹੁੰਦੀ ਹੈ ਇਸ ਦੇ ਫੁੱਲਾਂ ਦਾ ਰੰਗ ਚਿੱਟਾ ਅਤੇ ਫੱਲ ਦਾ ਰੰਗ ਹਲਕੇ ਹਰੇ ਤੋਂ ਪੀਲਾ ਹੁੰਦਾ ਹੈ ਇਹ ਕਿਸਮ 175 ਤੋਂ 180 ਦਿਨਾਂ ਦਰਮਿਆਨ ਪੱਕ ਕੇ ਤਿਆਰ ਹੋ ਜਾਂਦੀ ਹੈ ਇਸਦਾ ਔਸਤਨ ਝਾੜ 3.5 ਕੁਇੰਟਲ ਪ੍ਰਤੀ ਏਕੜ ਹੁੰਦਾ ਹੈ Punjab Sugandh: ਇਸ ਕਿਸਮ ਦੇ ਪੱਤਿਆਂ ਦਾ ਆਕਾਰ ਛੋਟਾ ਅਤੇ ਖ਼ੁਸ਼ਬੋਈ (ਸੁਗੰਧ) ਬੜੀ ਤੇਜ਼ ਹੁੰਦੀ ਹੈ ਇਸ ਦਾ ਪੱਤਾ ਚਾਰ ਪੰਖੜੀਆਂ ਦੇ ਅਕਾਰ ਵਾਲਾ ਹੁੰਦਾ ਹੈ ਹਰੇ ਪੱਤਿਆਂ ਦੇ ਰੂਪ ਵਿਚ ਇਸ ਦਾ ਔਸਤਨ ਝਾੜ 150 ਕੁਇੰਟਲ ਅਤੇ 3.5 ਕੁਇੰਟਲ ਪ੍ਰਤੀ ਏਕੜ ਝਾੜ ਬੀਜ ਦਾ ਹੋ ਜਾਂਦਾ ਹੈ
Posted by deepak sharma
Madhya Pradesh
29-09-2019 11:34 PM
Punjab
09-30-2019 11:34 AM
potash ko pehli khaad men daala jata hai ise aap urea ke sath mila kar chidkav kar sakte hai.dhanywad
Posted by shaiffuddin
Jharkhand
29-09-2019 11:07 PM
Punjab
09-30-2019 03:06 PM
Aseel chicks lene ke liye aap Rajinder Singh 6299561595 Balwant Farm Chicks se sampark kr skte hai..
Posted by gurmanjot singh
Punjab
29-09-2019 10:40 PM
Punjab
09-30-2019 03:02 PM
ਤੁਸੀ ਓਹਨਾ ਨੂੰ ਵਧਿਆ ਖੁਰਾਕ ਅਤੇ ਫੀਡ ਦੇ ਨਾਲ ਨਾਲ 1kg ਸਰੋੰ ਦੀ ਖੱਲ, 1kg ਵੜੇਵਿਆ ਦੀ ਖੱਲ ਸਵੇਰੇ ਸ਼ਾਮ ਦਿਉ, ਇਸਦੇ ਨਾਲ ਤੁਸੀ Anabolite liquid 100ml, Fatplus ਪਾਊਡਰ 50gm ਜਾਂ Fatmax ਪਾਊਡਰ 50gm ਰੋਜਾਨਾ ਦਿਓ
Posted by lovepreet singh
Punjab
29-09-2019 10:38 PM
Punjab
09-30-2019 03:05 PM
ਤੁਸੀ ਉਸ ਨੂੰ Metra liquid 100ml ਰੋਜਾਨਾ ਦਿਓ ਅਤੇ Bovimin-B ਪਾਊਡਰ 100gm ਰੋਜਾਨਾ, Milkout powder 2-2 ਚਮਚ ਸਵੇਰੇ ਸ਼ਾਮ ਦਿਓ ਅਤੇ ਖੁਰਾਕ ਵਧਿਆ ਅਤੇ ਹਰਾ ਚਾਰਾ ਵਧਿਆ ਮਾਤਰਾ ਵਿਚ ਦਿਓ, ਇਸ ਨਾਲ ਫਰਕ ਪੈ ਜਾਵੇਗਾ..
Posted by GURPREET SINGH SIDHU
Punjab
29-09-2019 10:22 PM
Punjab
09-30-2019 03:11 PM
ਰੋਪਣ ਸਮੇਂ ਕੋਈ ਵੀ ਖਾਦ ਨਾ ਪਾਓ ਉਸ ਤੋਂ ਬਾਅਦ ਫਰਵਰੀ ਮਹੀਨੇ ਵਿੱਚ N:P:K(19:19:19) @1 ਕਿਲੋ ਦੋ ਵਾਰ ਪਾਓ ਜਿਹੜੇ ਪੱਤੇ ਇਕੱਠੇ ਹੁੰਦੇ ਹਨ ਉਹ ਮੱਛਰ ਦੇ ਕਾਰਨ ਹੁੰਦੇ ਹਨ ਇਸਦੇ ਲਈ ਤੁਸੀ imidacloprid @1.5 ml ਨੂੰ ਪ੍ਰਤੀ ਲੀਟਰ ਪਾਣੀ ਦੇ ਹਿਸਾਬ ਨਾਲ ਸਪਰੇ ਕਰੋ ਧੰਨਵਾਦ
Posted by surya
Madhya Pradesh
29-09-2019 10:04 PM
Maharashtra
09-30-2019 11:31 AM
सूर्य जी कृपया आप इसकी फोटो भेजे ताकि आपको इसके बारे में पूरी जानकारी दी जा सके धन्यवाद
Posted by Navkanwal jot Singh
Punjab
29-09-2019 09:48 PM
Punjab
09-30-2019 03:08 PM
Jot ji kripa krke ehh dso tuci kis kam lai Horse rakhna hai tuci shonk de torr te rakhna hai, raceing lai rakhna hai ja kise hor kam lai rakhna hai kirpa krke apna swal vistar nal pusho tan jo tuahnu sahi jankari diti ja skee..
Posted by Shankar lal jat
Rajasthan
29-09-2019 09:36 PM
Punjab
10-03-2019 01:03 PM
Tara Mira ki adhik paidawar wali kisme RTM 2002 or RTM 314 hai.
Posted by Anshu Mishra
Uttar Pradesh
29-09-2019 09:36 PM
Punjab
10-15-2019 03:26 PM
गहुँ की सिंचाई 4 पानी में की जाती है पहला पानी बिजाई क समय पर ही दिया जाता है दूसरा पानी बिजाई के 5-6 बाद दिता जाता है तीसरा पानी दूसरे पानी के 4-5 हफ्ते के बाद दिया जाता है चौथा पानी तीसरे पानी के 3-4 हफ्ते के फैसले पे दिया जाता है सिंचाई केवल 7.5 सेंटीमीटर तक ही की जाती है
Posted by Jaswinder singh
Punjab
29-09-2019 09:25 PM
Punjab
09-30-2019 12:03 PM
ਪਿਉਰ ਬੀਟਲ ਨਸਲ ਦੀ ਬੱਕਰੀ 20-25000 ਤੱਕ ਮਿਲ ਜਾਂਦੀ ਹੈ