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Posted by mool chandra rajpali
Madhya Pradesh
30-09-2019 11:46 AM
Maharashtra
09-30-2019 04:50 PM
पुदीना मैंथा के नाम से जानी जाने वाली एक क्रियाशील जड़ी बूटी है पुदीने को मिट्टी की कई किस्मों जैसे दरमियाने से गहरी उपजाऊ मिट्टी, जिसमें पानी को सोखने की क्षमता ज्यादा हो, में उगाया जाता है इसको जल-जमाव वाली मिट्टी में भी उगाया जा सकता है उच्च नमी वाली मिट्टी में यह अच्छे परिणाम देती है इस फसल के लिए मिट्टी .... (Read More)
पुदीना मैंथा के नाम से जानी जाने वाली एक क्रियाशील जड़ी बूटी है पुदीने को मिट्टी की कई किस्मों जैसे दरमियाने से गहरी उपजाऊ मिट्टी, जिसमें पानी को सोखने की क्षमता ज्यादा हो, में उगाया जाता है इसको जल-जमाव वाली मिट्टी में भी उगाया जा सकता है उच्च नमी वाली मिट्टी में यह अच्छे परिणाम देती है इस फसल के लिए मिट्टी का pH 6-7.5 होना चाहिए प्रसिद्ध किस्में:- MAS-1: यह छोटे कद की किस्म है जिसकी ऊंचाई 30-45 सैं.मी. होती है यह बीमारीयों की रोधक और जल्दी पकने वाली किस्म है इसमें मैन्थोल की मात्रा 70-80% होती है इसकी औसतन पैदावार 80 क्विंटल प्रति एकड़ जड़ी-बूटियां के तौर पर और 50-60 किलोग्राम प्रति एकड़ तेल के तौर पर होती है Hybrid-77: इसकी ऊंचाई 50-60 सैं.मी. होती है यह किस्म पत्तों के धब्बा रोग और कुंगी के रोधक होती है, और यह जल्दी पकने वाली किस्म है इसमें मैन्थोल की मात्रा 80-85% होती है इसकी औसतन पैदावार 80 क्विंटल प्रति एकड़ जड़ी-बूटियां के तौर पर और 50-60 किलोग्राम प्रति एकड़ तेल के तौर पर होती है यह रेतली दोमट मिट्टी में बढ़िया पैदावार देती है औरऐसी शुष्क मौसम में की आवश्यकता होती है Shivalik: यह चीन की खेती से चुनी गई किस्म है यह किस्म उत्तर प्रदेश के तराई क्षेत्रों और उत्तरांचल में अच्छी वृद्धि करती है इसमें मैन्थोल की मात्रा 65-70% होती है इसकी औसतन पैदावार 120 क्विंटल प्रति एकड़ जड़ी-बूटियां के तौर पर और 72 किलोग्राम प्रति एकड़ तेल के तौर पर होती है यह किस्म फंगस रोगों से जल्दी प्रभावित होती है EC-41911: यह किस्म रूसी जर्मप्लाज्म से ली गई है यह किस्म पानी की रोधक और आकार में सीधी होती है इसमें मैन्थोल की मात्रा 70%पायी जाती है इसकी औसतन पैदावार 120 क्विंटल प्रति एकड़ जड़ी-बूटियां के तौर पर और 72 किलोग्राम प्रति एकड़ तेल के तौर पर होती है इस किस्म से तैयार तेल का प्रयोग विभिन्न व्यंजनों में स्वाद के लिए किया जाता है Gomti: यह किस्म रंग में हल्के लाल रंग की होती है इसकी पैदावार बाकी किस्मों की पैदावार से कम होती है इसमें मैन्थोल की मात्रा 78-80% होती है Himalaya: इसके पत्तों का आकार बाकी किस्मों से बड़ा होता है यह किस्म कुंगी, झुलस, सफेद धब्बे और पत्तों पर धब्बे रोग की रोधक है इसमें मैन्थोल की मात्रा 78-80% होती है इसकी औसतन पैदावार 160 क्विंटल प्रति एकड़ जड़ी-बूटियां के तौर पर और 80-100 किलोग्राम प्रति एकड़ तेल के तौर पर होती है Kosi: यह किस्म 90 दिनों में पक जाती है यह किस्म कुंगी, झुलस, सफेद धब्बे और पत्तों के धब्बे रोग की प्रतिरोधक है इसमें मैन्थोल की मात्रा 75-80 प्रतिशत होती है और तेल की पैदावार 80-100 किलोग्राम प्रति एकड़ होती है Saksham: यह किस्म सी वी हिमालय की तरफ से टिशू कल्चर द्वारा तैयार की गई है इसमें मैन्थोल की मात्रा 80% होती है और तेल की पैदावार 90-100 किलोग्राम प्राप्त होती है पुदीने की बिजाई के लिए सुविधाजनक आकार के बैड तैयार करें खेत की तैयारी के समय खेत की अच्छी तरह जोताई करें जैविक खाद जैसे रूड़ी की खाद 100-120 क्विंटल प्रति एकड़ रूड़ी की खाद डालें रूड़ी की खाद के बाद हरी खाद डालें इसकी बिजाई के लिए दिसंबर-जनवरी का समय अनुकूल होता है पौधे के भागों की बिजाई 40 सैं.मी. के फासले पर और पंक्तियों के बीच का फासला 60 सैं.मी होना चाहिए बीज को 2-3 सैं.मी. की गहराई में बोयें पौधे के जड़ वाले भाग को मुख्य खेत में बोया जाता है खेत की तैयारी के समय रूड़ी की खाद 80-120 क्विंटल प्रति एकड़ में डालें और अच्छी तरह मिलायें नाइट्रोजन 58 किलो (यूरिया 130 किलो), फासफोरस 32-40 किलो (सिंगल सुपर फासफेट 80-100 किलो), पोटाशियम 20 किलो (म्यूरेट ऑफ पोटाश 33 किलो) प्रति एकड़ में डालें गर्मियों में मॉनसून से पहले जलवायु और मिट्टी के आधार पर 6-9 सिंचाइयां जरूर की जानी चाहिए मॉनसून के बाद 3 सिंचाइयों की आवश्यकता होती है पहली सिंचाई सितंबर महीने में, दूसरी अक्तूबर में और तीसरी नवंबर महीने में की जानी चाहिए सर्दियों में ज्यादा सिंचाई की आवश्यकता नहीं होती, लेकिन यदि सर्दियों में बारिश ना पड़े तो एक सिंचाई जरूर देनी चाहिए पौधे 100-120 दिनों में कटाई के लिए तैयार हो जाते हैं जब निचले पत्ते पीले रंग के होने शुरू हो जायें, तब कटाई करें कटाई दराती से और बूटियों को मिट्टी की सतह के 2-3 सैं.मी. ऊपर से निकालें अगली कटाई पहली कटाई के बाद 80 दिनों के अंतराल पर करें ताजी पत्तियों को उत्पाद बनाने के लिए प्रयोग किया जाता है, धन्यवाद
Posted by Sp singh Rathod
Uttar Pradesh
30-09-2019 11:38 AM
Punjab
09-30-2019 05:02 PM
rathod ji kripya aap apna swal vistar se pooche ke aap jankari kya lena chahte hai taki aapko iske bare men poori jankari di ja sake.dhanywad
Posted by सुनील
Uttar Pradesh
30-09-2019 11:37 AM
Maharashtra
09-30-2019 11:55 AM
सब्जियों में प्रयोग करने के लिए इसकी बिजाई अक्तूबर के पहले सप्ताह में करनी चाहिए और बीज तैयार करने के लिए बिजाई अक्तूबर के आखिरी सप्ताह से नवंबर के पहले सप्ताह तक करनी चाहिए कतार से कतार का फासला 30 सैं.मी. और पौधे से पौधे का फासला 15 सैं.मी. रखें बीज की गहराई 3 सैं.मी. से ज्यादा नहीं होनी चाहिए इसकी बिजाई के लिए प.... (Read More)
सब्जियों में प्रयोग करने के लिए इसकी बिजाई अक्तूबर के पहले सप्ताह में करनी चाहिए और बीज तैयार करने के लिए बिजाई अक्तूबर के आखिरी सप्ताह से नवंबर के पहले सप्ताह तक करनी चाहिए कतार से कतार का फासला 30 सैं.मी. और पौधे से पौधे का फासला 15 सैं.मी. रखें बीज की गहराई 3 सैं.मी. से ज्यादा नहीं होनी चाहिए इसकी बिजाई के लिए पोरा ढंग का प्रयोग किया जाता है एक एकड़ खेत में बिजाई के लिए 8-10 किलो बीज प्रति एकड़ में प्रयोग करें
Posted by Gurnishan Singh Dhillon
Punjab
30-09-2019 11:36 AM
Punjab
09-30-2019 07:43 PM
isda sue de dudh da record 4000 kg ae M 321 Hissar da ae
Posted by gurshminder singh
Punjab
30-09-2019 11:34 AM
Punjab
10-12-2019 05:32 PM
A cage or net pen is a system that confines the fish or shellfish in a mesh en- closure. Site selection is a key factor in any aquaculture operation, affecting both success and sustainability. Circular cages of different diameter ranging from 2 m to 15 m, designed for the culture of fishes such as milkfish, mullet, cobia, pompano, sea bass, pearl spot, shellfishes such as shrimps, crabs and lobsters were experimented and demonstrated successfully in India by Central Marine Fisheries Research Institute (CMFRI). Stocking of right sized fish juveniles in adequate stocking density is another factor which determines the success of farming. The stocking density and size of stocked fishes varies with different species. Proper feeding of quality feeds, periodic monitoring and cleaning of cag.... (Read More)
A cage or net pen is a system that confines the fish or shellfish in a mesh en- closure. Site selection is a key factor in any aquaculture operation, affecting both success and sustainability. Circular cages of different diameter ranging from 2 m to 15 m, designed for the culture of fishes such as milkfish, mullet, cobia, pompano, sea bass, pearl spot, shellfishes such as shrimps, crabs and lobsters were experimented and demonstrated successfully in India by Central Marine Fisheries Research Institute (CMFRI). Stocking of right sized fish juveniles in adequate stocking density is another factor which determines the success of farming. The stocking density and size of stocked fishes varies with different species. Proper feeding of quality feeds, periodic monitoring and cleaning of cages contributes immensely to the success of cage farming. With proper management of cage erected at an ideal location can yield a production of 20-40kg/m 3 with various species of fishes.
Posted by सुनील
Uttar Pradesh
30-09-2019 11:28 AM
Maharashtra
09-30-2019 11:30 AM
यदि सुंडी का हमला दिखाई दें तो, रोकथाम के लिए मैथोमाइल के साथ स्टिकर 1 मि.ली. प्रति लीटर की स्प्रे करें यदि थ्रिप्स, चेपा और पत्ते का टिड्डा का हमला दिखाई दें तो, मिथाइल डेमेटोन 25 ई सी 2 मि.ली. को प्रति लीटर पानी या कार्बोफिउरॉन 3 जी 5 ग्राम को प्रति पौधे पर स्प्रे करें
Posted by सुनील
Uttar Pradesh
30-09-2019 11:26 AM
Maharashtra
09-30-2019 11:29 AM
उत्तरी भारत में बिजाई का सही समय मध्य अक्तूबर है रोपाई के बाद पौधे को छांव में रखें और अगर बहुत ज्यादा धुप हो, तो पौधे पर पानी का छिड़काव करें दोपहर के अंत वाले समय बोया गया गुलाब बढ़िया उगता है
Posted by ATMA singh
Punjab
30-09-2019 11:24 AM
Rajasthan
09-30-2019 02:13 PM
Atma ji pashu nu AI krwaun ton badd 5 mint de andar andar 125gm rasond de skde ho, iss nal anndar ton infection khtm hunda hai pashu de gaban rehn di ass vddh jndi hai..
Posted by gursahib sïngh
Punjab
30-09-2019 11:24 AM
Punjab
09-30-2019 05:35 PM
Gursahib ji eh fungus de karn hunde han isde layi tuc Mancozeb@400 gram ja carbendazim@500 gram nu prat acre de hisab nal spray karo.dhanwad
Posted by Raj Kumar Bhargava
Uttar Pradesh
30-09-2019 11:13 AM
Punjab
09-30-2019 11:16 AM
राज जी आप अभी गाजर, शलगम, फूलगोभी, आलू, टमाटर, काली सरसों के बीज, मूली, पालक, पत्ता गोभी, कोहीराबी, धनिया, सौंफ के बीज, राजमा, मटर, ब्रोकोली, सलाद, बैंगन, हरी प्याज, ब्रसल्स स्प्राउट, लहसुन की बिजाई कर सकते है धन्यवाद
Posted by Rahi Murtja
Uttar Pradesh
30-09-2019 11:13 AM
Maharashtra
09-30-2019 11:17 AM
रही जी कृपया आप इसकी फोटो भेजे ताकि आपको इसके बारे में पूरी जानकारी दी जा सके धन्यवाद
Posted by ranvir singh
Punjab
30-09-2019 11:03 AM
Punjab
09-30-2019 11:14 AM
ranvir ji isdi roktham de layi tuc quinalphos@4ml nu prati litre pani de hisab nal spray karo.dhanwad
Posted by sunil pandey
Uttar Pradesh
30-09-2019 11:02 AM
Punjab
09-30-2019 02:14 PM
यदि आप मधु मक्खी पालन के बारे में जानकारी लेना चाहते है और अगर आप नए सिरे से मक्खी पालन का व्यवसाय शुरू करना चाहते हैं तो अगस्त से जनवरी तक शुरू किया जा सकता है इसमें 100 मक्खी के बक्सों से आप औसतन 25000-30000 तक का मुनाफा ले सकते हैं शुरूआत में यदि आप 100 बक्सों से काम शुरू करते हैं तो औसतन 4-5 लाख तक खर्चा आता है आप अपने बजट.... (Read More)
यदि आप मधु मक्खी पालन के बारे में जानकारी लेना चाहते है और अगर आप नए सिरे से मक्खी पालन का व्यवसाय शुरू करना चाहते हैं तो अगस्त से जनवरी तक शुरू किया जा सकता है इसमें 100 मक्खी के बक्सों से आप औसतन 25000-30000 तक का मुनाफा ले सकते हैं शुरूआत में यदि आप 100 बक्सों से काम शुरू करते हैं तो औसतन 4-5 लाख तक खर्चा आता है आप अपने बजट के हिसाब से बक्सों की गिणती कम ज्यादा कर सकते हैं बाकी यदि इसकी ट्रेनिंग लेकर शुरू करें तो बढ़िया रहेगा ट्रेनिंग में आपको पूरी जानकरी मिलेगी किस तरह से इसका रख रखाव करना होता है जी और उसके बाद जब आपने यह काम शुरू करना है तो आप बक्से नज़दीकी किसी भी मधुमखी पालन का काम करने वाले किसान से खरीद सकते है
Posted by neelesh tiwari
Madhya Pradesh
30-09-2019 10:51 AM
Maharashtra
09-30-2019 11:18 AM
नीलेश जी आप इसके ऊपर Nativo @140 gm या Isoprothiolane @400 ml को प्रति एकड़ के हिसाब से स्प्रे करें धन्यवाद
Posted by Mahendra Sidar
Chattisgarh
30-09-2019 10:51 AM
Punjab
09-30-2019 11:20 AM
Mahendra ji regent ke keetnashak hai jo gobh ki sundi ya patta lapet sundi ki roktham ke liye istemal ki jati hai kripya aap hamla ke label ki photo bheje ys iske salt ka nam btaye taki aapko iske bare men poori jankari di ja sake.dhanywad
Posted by CP Prahn
Rajasthan
30-09-2019 10:47 AM
Punjab
10-30-2019 12:38 PM
केंचुए खाद लेने के लिए आप 9057900798 नंबर पर लोकेश जी से बात करे जी वह आपको उपलबध करवा सकते है जी
Posted by Amrit singh
Punjab
30-09-2019 10:23 AM
Punjab
09-30-2019 11:21 AM
ਅੰਮ੍ਰਿਤ ਜੀ ਸਬਜ਼ੀਆਂ ਦੇ ਉਪਰ ਫੰਗਸ ਦੇ ਲਈ ਤੁਸੀ ਮ-45 ਦੀ ਸਪਰੇ ਕਰੋ ਅਤੇ ਫਲਾਂ ਦੇ ਉਪਰ ਤੁਸੀ Copper oxychloride ਦੀ ਸਪਰੇ ਕਰੋ ਧੰਨਵਾਦ
Posted by Jai Singh
Punjab
30-09-2019 10:14 AM
Punjab
09-30-2019 11:22 AM
jai ji isda asar lagbhag 15-18 dn tak rehnda hai.dhanwad
Posted by Harpreet singh
Punjab
30-09-2019 10:11 AM

?

Punjab
09-30-2019 02:17 PM
Harpreet ji kirpa krke apna swal vistar nal pusho tuci ki jankari lena chahunde ho tan jo tuhanu sahi jankari diti ja skee.
Posted by Daan singh
Punjab
30-09-2019 10:10 AM
Punjab
09-30-2019 11:24 AM
daan ji jekar tele da hamla shuru hoya hai ta tuc isde uper glamore di spray kar sakde ho isdi matra 50 gram nu prati acre de hisab nal spray karo.
Posted by harish
Haryana
30-09-2019 10:09 AM
Punjab
09-30-2019 11:25 AM
Harish ji kripya aap apna swal vistar se pooche ke aap genda phool ke bare men kya jankari lena chahte hai taki aapko iske bare men poori jankari di ja sake.dhanywad
Posted by sidhu
Punjab
30-09-2019 10:09 AM
Punjab
09-30-2019 11:26 AM
waste decomposer ਇਕ ਵਦੀਆ ਪ੍ਰੋਡਕਟ ਹੈ ਇਹ 20 ਰੁਪਏ ਦੀ ਸ਼ੀਸ਼ੀ ਆਉਂਦੀ ਹੈ ਜੋ ਕਿ ਕਿਸੇ ਵੀ ਪੈਸਟੀਸਾਈਡ ਵਾਲੀ ਦੁਕਾਨ ਤੋਂ ਲੈ ਸਕਦੇ ਹੋ I ਇਹ ਇਕ ਆਰਗੈਨਿਕ ਪ੍ਰੋਡਕਟ ਹੈ ਜਿਸ ਵਿਚ ਇਕ ਬੈਕਟੀਰੀਆ ਹੈ ਜੋ ਕੇ ਮਿੱਟੀ ਦੀ ਉਪਜਾਊ ਸ਼ਕਤੀ ਵਧਾਉਦਾ ਹੈ ਤੇ ਫਾਲਤੂ ਚੀਜ਼ਾਂ ਜਿਵੇਂ ਪੱਤਿਆਂ ਵਗੈਰਾ ਨੂੰ ਗਾਲਣ ਵਿੱਚ ਮਦਦ ਕਰਦਾ ਹੈ ਇਸ ਨੂੰ ਤਿਆਰ ਕਰਨ ਲਈ 150-200 ਲਿਟਰ ਪਾਣੀ ਵਿੱਚ 2 ਕਿਲੋ ਗੁੜ ਅਤੇ ਇੱਕ ਸ਼ੀਸ਼ੀ Waste dec.... (Read More)
waste decomposer ਇਕ ਵਦੀਆ ਪ੍ਰੋਡਕਟ ਹੈ ਇਹ 20 ਰੁਪਏ ਦੀ ਸ਼ੀਸ਼ੀ ਆਉਂਦੀ ਹੈ ਜੋ ਕਿ ਕਿਸੇ ਵੀ ਪੈਸਟੀਸਾਈਡ ਵਾਲੀ ਦੁਕਾਨ ਤੋਂ ਲੈ ਸਕਦੇ ਹੋ I ਇਹ ਇਕ ਆਰਗੈਨਿਕ ਪ੍ਰੋਡਕਟ ਹੈ ਜਿਸ ਵਿਚ ਇਕ ਬੈਕਟੀਰੀਆ ਹੈ ਜੋ ਕੇ ਮਿੱਟੀ ਦੀ ਉਪਜਾਊ ਸ਼ਕਤੀ ਵਧਾਉਦਾ ਹੈ ਤੇ ਫਾਲਤੂ ਚੀਜ਼ਾਂ ਜਿਵੇਂ ਪੱਤਿਆਂ ਵਗੈਰਾ ਨੂੰ ਗਾਲਣ ਵਿੱਚ ਮਦਦ ਕਰਦਾ ਹੈ ਇਸ ਨੂੰ ਤਿਆਰ ਕਰਨ ਲਈ 150-200 ਲਿਟਰ ਪਾਣੀ ਵਿੱਚ 2 ਕਿਲੋ ਗੁੜ ਅਤੇ ਇੱਕ ਸ਼ੀਸ਼ੀ Waste decomposer ਦੀ ਪਾਓ ਇੱਹ FUNGICIDE ਦਾ ਵੀ ਕੰਮ ਕਰਦਾ ਹੈ ਜਲਦੀ ਜਲਦੀ ਬਿਮਾਰੀਆਂ ਨੂੰ ਨੇੜੇ ਨਹੀਂ ਆਉਣ ਦਿੰਦਾ ਇੱਹ ਲਗਭਗ 7 ਦਿਨਾਂ ਦੇ ਵਿਚ ਤਿਆਰ ਹੋ ਜਾਂਦਾ ਹੈ I ਇਹ ਇਕ ਏਕੜ ਦੀ ਮਾਤਰਾ ਹੁੰਦੀ ਹੈ I ਇਸਨੂੰ ਤੁਸੀ ਹਰ ਫ਼ਸਲ ਤੇ ਵਰਤੋਂ ਕਰ ਸਕਦੇ ਹੋ ਧੰਨਵਾਦ
Posted by सचिन कुमार सिंह
Uttar Pradesh
30-09-2019 10:01 AM
Maharashtra
09-30-2019 11:13 AM
सचिन जी आप कीट की रोकथाम के लिए Quinalphos @4ml को प्रति लीटर पानी के हिसाब से स्प्रे करें धन्यवाद
Posted by Nikhil Sharma
Himachal Pradesh
30-09-2019 09:59 AM
Rajasthan
09-30-2019 02:20 PM
यदि आप डेयरी फार्मिंग बड़े स्तर पर करना चाहते है तो आप इसकी ट्रेनिंग लेकर इस काम को करें जिसमें आपको इस काम के बारे में सारी जानकारी प्राप्त होगी , वहां आपको इसके शेड को तैयार करना और उसमें पशुओं को सही तरीके से रखने के बारे में सारी जानकारी प्राप्त हो जाएगी आप एक बार में इक्ट्ठी गाय ना खरीदें गायों को 2-2 महीन.... (Read More)
यदि आप डेयरी फार्मिंग बड़े स्तर पर करना चाहते है तो आप इसकी ट्रेनिंग लेकर इस काम को करें जिसमें आपको इस काम के बारे में सारी जानकारी प्राप्त होगी , वहां आपको इसके शेड को तैयार करना और उसमें पशुओं को सही तरीके से रखने के बारे में सारी जानकारी प्राप्त हो जाएगी आप एक बार में इक्ट्ठी गाय ना खरीदें गायों को 2-2 महीनों के फासले पर खरीदें या फिर 3 पहले खरीदें ओर 3 महीने बाद फिर खरीद लें इससे दूध की कमी नहीं आयेगी पशु की नसल सबसे ज्यादा जरूरी है पशु खरीदने के समय कोशिश करें कि दिन में तीन बार दूध निकालकर ही पशु खरीदें भैंसो का एक दिन का दूध 12 लीटर और गायों को दूध 16-17 लीटर से कम ना हो गाभिनों को खरीदने का सही समय रखड़ियों से लेकर वैशाखी तक का होता है क्योंकि इस समय मौसम अच्छा होने के कारण हरा चारा भी खुला होता है गाभिनों के लिए शैड आवाजाई वाली सड़क पर ना बनायें और शैड सड़क से कम से कम 100 गज दूर हो शैड को धूप और हवा का ध्यान रखकर ही बनायें शैड हमेशा खेत या आस पास से 2 फुट ऊंचा बनायें क्योंकि निचले स्थान पर पानी खड़ा हो जाता है जिस कारण गंदगी पैदा हो जाती है और बाकी पशुओं का मल मूत्र का निकास भी आसानी से हो जाता है पशुओं के लिए बनायी जाने वाली खुरली ढाई तीन फुट चौड़ी होनी चाहिए खुरली पर खड़ने के लिए एक पशु को तकरीबन चार फुट जगह चाहिए मतलब 10 पशुओं के लिए 40 फुट लंबी खुरली बनेगी डेयरी फार्म से संबंधित सामान रखने के लिए स्टोर बनायें पशुओं का वितरण/दाना स्टोर करने के लिए कमरा सैलाब से रहित होना चाहिए शैड का फर्श पक्क, फिसलन रहित और जल्दी साफ होने वाला हो शैड में जितना हो सके पशुओं को खुला छोंड़े और पानी और दाना पूरा डालें पशु को खुला छोड़ने से पशुओं में अफारे की समस्या कम आती है बाकी अपनी आवश्यकता और क्षमता के मुताबिक ही सामान खरीदें और आर्थिक नुकसान से बचने के लिए प्रत्येक गाभिन का बीमा जरूर करवायें
Posted by Ram Rattan Patodhiya
Haryana
30-09-2019 09:55 AM
Punjab
09-30-2019 11:32 AM
Ram ji you can spray imidacloprid@1.5ml per litre of water to get rid of them. thank you
Posted by Ájay Kumar
Uttar Pradesh
30-09-2019 09:54 AM
Punjab
09-30-2019 11:34 AM
ajay kumar ji ganne ko uski pattiyon ke sath hi bandha jata hai agar pattiyan nahi hai to aap rassi se bhi ise bandh sakte hai.dhanywad
Posted by Mandeepsingh
Punjab
30-09-2019 09:51 AM
Punjab
09-30-2019 02:21 PM
ਬੱਚਿਆਂ ਨੂੰ ਇਕ ਮਹੀਨੇ ਤਕ ਮਾਂ ਦਾ ਰੱਜਵਾਂ ਦੁੱਧ ਪਿਲਾਓ, ਜਿਨ੍ਹਾਂ ਆਸਾਨੀ ਨਾਲ ਹਜ਼ਮ ਕਰ ਸਕੇ, ਉਸ ਨੂੰ ਖੁਲਾ ਰੱਖੋ ਜਿਸ ਨਾਲ ਉਹ ਭੱਜ ਭੱਜ ਕੇ ਕਸਰਤ ਕਰਦੀ ਰਹੇ, ਇਕ ਮਹੀਨੇ ਦਾ ਹੋਣ ਤੋਂ ਬਾਦ ਤੁਸੀ ਕਾਰਗਿਲ ਦਾ Calf starter ਦੇਣਾ ਸ਼ੁਰੂ ਕਰੋ, ਇਸ ਨੂੰ ਦੁੱਧ ਵਿਚ ਮਿਕਸ ਕਰਕੇ ਦੇ ਸਕਦੇ ਹੋ, 3 ਮਹੀਨਿਆਂ ਦਾ ਹੋਣ ਤੋਂ ਬਾਦ Calf grower ਦੇਣਾ ਸ਼ੁਰੂ ਕਰੋ, 8 ਮਹੀਨਿਆਂ ਦੀ ਉਮਰ ਤੋਂ ਬਾਦ Heifer dry ਫੀਡ ਦੇਣੀ ਸ਼ੁਰੂ ਕ.... (Read More)
ਬੱਚਿਆਂ ਨੂੰ ਇਕ ਮਹੀਨੇ ਤਕ ਮਾਂ ਦਾ ਰੱਜਵਾਂ ਦੁੱਧ ਪਿਲਾਓ, ਜਿਨ੍ਹਾਂ ਆਸਾਨੀ ਨਾਲ ਹਜ਼ਮ ਕਰ ਸਕੇ, ਉਸ ਨੂੰ ਖੁਲਾ ਰੱਖੋ ਜਿਸ ਨਾਲ ਉਹ ਭੱਜ ਭੱਜ ਕੇ ਕਸਰਤ ਕਰਦੀ ਰਹੇ, ਇਕ ਮਹੀਨੇ ਦਾ ਹੋਣ ਤੋਂ ਬਾਦ ਤੁਸੀ ਕਾਰਗਿਲ ਦਾ Calf starter ਦੇਣਾ ਸ਼ੁਰੂ ਕਰੋ, ਇਸ ਨੂੰ ਦੁੱਧ ਵਿਚ ਮਿਕਸ ਕਰਕੇ ਦੇ ਸਕਦੇ ਹੋ, 3 ਮਹੀਨਿਆਂ ਦਾ ਹੋਣ ਤੋਂ ਬਾਦ Calf grower ਦੇਣਾ ਸ਼ੁਰੂ ਕਰੋ, 8 ਮਹੀਨਿਆਂ ਦੀ ਉਮਰ ਤੋਂ ਬਾਦ Heifer dry ਫੀਡ ਦੇਣੀ ਸ਼ੁਰੂ ਕਰੋ, ਇਹ ਸਾਰਾ ਕੁਜ ਉੱਨੀ ਮਾਤਰਾ ਵਿਚ ਦਿਓ ਜਿਨ੍ਹਾਂ ਉਹ ਆਸਾਨੀ ਨਾਲ ਹਜ਼ਮ ਕਰ ਸਕੇ ਇਨ੍ਹਾਂ ਦੇ ਨਾਲ ਨਾਲ ਤੁਸੀ ਗਰੋਥ ਦੇ ਲਈ Growth Mantra ਪਾਊਡਰ ਦੇਣਾ ਸ਼ੁਰੂ ਕਰੋ ਜਾਂ ਤੁਸੀ puberaid ਪਾਊਡਰ ਵੀ ਦੇ ਸਕਦੇ ਹੋ, ਇਨ੍ਹਾਂ ਨੂੰ 2 ਮਹੀਨਿਆਂ ਦੀ ਉਮਰ ਤੋਂ ਬਾਅਦ ਦੇਣਾ ਸ਼ੁਰੂ ਕਰਨਾ ਚਾਹੀਦਾ ਹੈ, ਜੇਕਰ ਉਮਰ 2 ਮਹੀਨੇ ਤੋਂ ਜ਼ਿਆਦਾ ਹੈ ਤਾਂ 20 ਗ੍ਰਾਮ ਪਾਊਡਰ ਦੇਣਾ ਹੈ, 4 ਮਹੀਨਿਆਂ ਤੋਂ ਜ਼ਿਆਦਾ ਹੋਣ ਤੇ 25 ਗ੍ਰਾਮ ਦਿਓ, ਇਸ ਤਰ੍ਹਾਂ ਉਮਰ ਦੇ ਹਿਸਾਬ ਨਾਲ 5-5 ਗ੍ਰਾਮ ਵਧਾ ਦਿਓ. ਬਾਕੀ ਤੁਸੀ ਉਸਦੀ ਡੇਵਰਮਿੰਗ ਦਾ ਵੀ ਪੂਰਾ ਧਿਆਨ ਰੱਖੋ ਜੀ..
Posted by ਹਰਪ੍ਰੀਤ ਸਿੰਘ
Punjab
30-09-2019 09:45 AM
Maharashtra
09-30-2019 11:36 AM
ਹਰਪ੍ਰੀਤ ਜੀ ਉੱਲੀ ਰੋਗ ਤੋਂ ਰੋਕਥਾਮ ਦੇ ਲਈ ਤੁਸੀ tilt @200 ml ਨੂੰ ਪ੍ਰਤੀ ਏਕੜ ਦੇ ਹਿਸਾਬ ਨਾਲ ਸਪਰੇ ਕਰੋ ਧੰਨਵਾਦ
Posted by munender
Uttar Pradesh
30-09-2019 09:43 AM
Maharashtra
09-30-2019 11:38 AM
munender ji kripya btaye ke aapne abhi tak kya kya khaad daali hai taki aapko iske bare men poori jankari di ja sake.dhanywad
Posted by ਜਸਬੀਰ ਸਿੰਘ ਭੁੱਲਰ
Punjab
30-09-2019 09:39 AM
Punjab
10-01-2019 05:53 PM
ਨਦੀਨਾਂ ਨੂੰ ਰੋਕਣ ਲਈ ਫ਼ਸਲ ਨੂੰ ਖੇਤ ਵਿੱਚ ਲਾਉਣ ਤੋਂ ਬਾਅਦ ਫਲੂਕਲੋਰਾਲਿਨ 800 ਮਿ.ਲੀ. ਨੂੰ ਪ੍ਰਤੀ 150 ਲੀਟਰ ਪਾਣੀ ਵਿੱਚ ਪਾ ਕੇ ਪ੍ਰਤੀ ਏਕੜ ਤੇ ਸਪਰੇਅ ਕਰੋ ਅਤੇ 30-40 ਦਿਨ ਬਾਅਦ ਗੋਡੀ ਕਰੋ ਫ਼ਸਲ ਨੂੰ ਖੇਤ ਵਿੱਚ ਲਾਉਣ ਤੋਂ 1 ਦਿਨ ਪਹਿਲਾ 1 ਲੀਟਰ ਪੈਂਡੀਮੈਥਾਲਿਨ ਦੀ ਪ੍ਰਤੀ ਏਕੜ ਤੇ ਸਪਰੇਅ ਕਰੋ
Posted by dileep verma
Uttar Pradesh
30-09-2019 09:39 AM
Punjab
09-30-2019 06:16 PM
इसे मिट्टी की कई किस्मों में उगाया जाता है रेतली दोमट से चिकनी मिट्टी में उगाने पर यह अच्छे परिणाम देती है Swarn Purna: इसके फल का आकार मध्यम होता है इसकी औसतन पैदावार 120-140 क्विंटल प्रति एकड़ होती है Swarn Shweta: इसके फल मजबूत और मध्यम आकार के होते हैं इसकी औसतन पैदावार 100-120 क्विंटल प्रति एकड़ होती है Swarn Ageti: इसके फल मजबूत और .... (Read More)
इसे मिट्टी की कई किस्मों में उगाया जाता है रेतली दोमट से चिकनी मिट्टी में उगाने पर यह अच्छे परिणाम देती है Swarn Purna: इसके फल का आकार मध्यम होता है इसकी औसतन पैदावार 120-140 क्विंटल प्रति एकड़ होती है Swarn Shweta: इसके फल मजबूत और मध्यम आकार के होते हैं इसकी औसतन पैदावार 100-120 क्विंटल प्रति एकड़ होती है Swarn Ageti: इसके फल मजबूत और मध्यम आकार के होते हैं इसकी औसतन पैदावार 100-120 क्विंटल प्रति एकड़ होती है Pwainset: इसके फल गहरे हरे रंग के होते हैं इसकी औसतन पैदावार 60-80 क्विंटल प्रति एकड़ होती है Pant Sankar (Lauki 1): इसके फल 35 सैं.मी. लंबे होते हैं फल 60 दिनों में पहली तुड़ाई के लिए तैयार हो जाते हैं इसकी औसतन पैदावार 160 क्विंटल प्रति एकड़ होती है Pant Sankar (Lauki 2): इसके फल 40 सैं.मी. लंबे होते हैं फल 60 दिनों में पहली तुड़ाई के लिए तैयार हो जाते हैं इसकी औसतन पैदावार 160 क्विंटल प्रति एकड़ होती है लौकी की खेती के लिए, ज़मीन को अच्छी तरह से तैयार करें मिट्टी के भुरभुरा होने तक जोताई के बाद सुहागा फेरें गर्मियों के मौसम में, बिजाई फरवरी से मार्च में पूरी कर लें खरीफ के मौसम के लिए, लौकी की बिजाई का उपयुक्त समय जून - जुलाई का महीना उपयुक्त होता है कतार से कतार में 1.5-2.0 मीटर और पौधे से पौधे में 30-45 सैं.मी. फासले का प्रयोग करें बीज को 1-2 सैं.मी. की गहराई पर बोयें एक गड्ढे में दो बीज बोयें अंकुरण के बाद बीमार पौधों को निकालकर सिर्फ सेहतमंद पौधे ही रखें एक एकड़ में बिजाई के लिए 1.5 से 2 किलो बीजों का प्रयोग करें मिट्टी से पैदा होने वाली फंगस से बचाने के लिए बाविस्टिन 0.2 प्रतिशत 3 ग्राम से प्रति किलो बीज का उपचार करें बैड की तैयारी से पहले अच्छी तरह से गला हुआ गाय का गोबर 8-10 टन प्रति एकड़ में डालें पहली तुड़ाई के समय नाइट्रोजन 32 किलो (यूरिया 70 किलो), फासफोरस 24 किलो (एस एस पी 150 किलो) और पोटाश 24 किलो (म्यूरेट ऑफ पोटाश 40 किलो) प्रति एकड़ में डालें गाय का गला हुआ गोबर, पोटाश और फासफोरस की पूरी मात्रा और नाइट्रोजन की एक तिहाई मात्रा बिजाई के तीन से चार सप्ताह पहले डालें बाकी बची नाइट्रोजन को दो भागों में बांटे पहले भाग को बिजाई के 25-30 दिन बाद और दूसरे भाग को बिजाई के 40-50 दिन बाद डालें नदीनों की रोकथाम के लिए, पौधे की वृद्धि के शुरूआती समय में 2-3 गोडाई करें गोडाई खाद डालने के समय करें बरसात के मौसम में नदीनों की रोकथाम के लिए मिट्टी चढ़ाना भी प्रभावी तरीका है नदीनों की रासायनिक रोकथाम के लिए, पैंडीमैथालीन 1 लीटर को 200 लीटर पानी में मिलाकर बिजाई के बाद 48 घंटों के अंदर अंदर स्प्रे करें खरीफ के मौसम में, सिंचाई की आवश्यकता नहीं होती यदि जरूरत पड़े तो सिंचाई करें खेत में पानी ना खड़ा होने दें पानी का उचित निकास करें गर्मियों के मौसम में, बिजाई के बाद तुरंत सिंचाई की आवश्यकता नहीं होती है गर्मियों में 6-7 सिंचाइयों की आवश्यकता होती है 4-7 दिनों के अंतराल पर सिंचाई करें
Posted by ramkumar yadav
Madhya Pradesh
30-09-2019 09:24 AM
Punjab
09-30-2019 10:05 AM
Ramkumar ji aap kisme jaise C-306, HW-2004, Sujata, HI-1500, JW-3020, HI-3173 HI-1531, JW-3211,GW-273, GW-322, GW-366, HD-2864, HD-2733 HD-2932, HI-1418, HI-1544, HI-8498, HI-8627 HI-8381, HI-8627, HI-8663, MP-1142, MP-1202 MP-1203, MP-1106, MP-1215, MP-3211, MP-4010 LOK-1, RAJ-3765, RAJ-3777, WH-147 ki bijai kar sakte hai.dhanywad
Posted by Girdhari Patel
Chattisgarh
30-09-2019 09:11 AM
Maharashtra
09-30-2019 05:42 PM
girdhari patel ji aap mahu ki roktham ke liye chess@120gm ja glamore@50gm ja dentop@35gm ko 150 litre pani ke hisab se spray karen.dhanywad
Posted by Gurjant singh
Punjab
30-09-2019 09:10 AM
Punjab
09-30-2019 02:23 PM
Gurjant ji tuci pehla ohna nu apne nazdiki kise vdia doctor ton janch krwao jiss nal ohna di bimari pta lgg skee fir uss bimari de hisab nal ohna da ilag howega ate ohna de marn da sahi karan v pta lgega fir tuci koi v swal app vich push skde ho...
Posted by Girdhari Patel
Chattisgarh
30-09-2019 09:10 AM
Punjab
09-30-2019 02:25 PM
पटेल जी आपके द्धारा भेंजी गई ओडियो में कुछ समझ नहीं आ रहा है कृप्या आप दोबारा साफ आवाज में ओडियो अपलोड करें ताकि आपको सही जानकारी दी जा सके
Posted by Tarjinder Langotia
Punjab
30-09-2019 09:08 AM
Punjab
09-30-2019 05:43 PM
ਨੁਕਸਾਨੇ ਫ਼ਲ ਹਰ ਹਫਤੇ ਤੋੜ ਕੇ ਨਸ਼ਟ ਕਰ ਦਿਓ ਨਰਸਰੀ ਲਾਉਣ ਤੋਂ 1 ਮਹੀਨੇ ਬਾਅਦ ਟ੍ਰਾਈਜ਼ੋਫੋਸ 20 ਮਿ.ਲੀ. ਪ੍ਰਤੀ 10 ਲੀਟਰ ਪਾਣੀ ਅਤੇ 50 ਗ੍ਰਾਮ ਨਿੰਮ ਐਕਸਟ੍ਰੈਕਟ 50 ਗ੍ਰਾਮ ਪ੍ਰਤੀ ਲੀਟਰ ਦੀ ਸਪਰੇਅ ਕਰੋ 10-15 ਦਿਨਾਂ ਦੇ ਵਕਫੇ ਤੇ ਇਹ ਸਪਰੇਅ ਦੋਬਾਰਾ ਕਰੋ ਫੁੱਲ ਨਿਕਲਣ ਸਮੇਂ ਕੋਰਾਜੈੱਨ 18.5% ਐੱਸ.ਸੀ. 5 ਮਿ.ਲੀ. + ਟੀਪੋਲ 5 ਮਿ.ਲੀ. ਦਾ ਘੋਲ 12 ਲੀਟਰ ਪਾਣੀ ਵਿੱਚ ਮਿਲਾ ਕੇ 20 ਦਿਨਾਂ ਦੇ ਵਕਫੇ ਤੇ ਦੋ ਵਾਰ ਸ.... (Read More)
ਨੁਕਸਾਨੇ ਫ਼ਲ ਹਰ ਹਫਤੇ ਤੋੜ ਕੇ ਨਸ਼ਟ ਕਰ ਦਿਓ ਨਰਸਰੀ ਲਾਉਣ ਤੋਂ 1 ਮਹੀਨੇ ਬਾਅਦ ਟ੍ਰਾਈਜ਼ੋਫੋਸ 20 ਮਿ.ਲੀ. ਪ੍ਰਤੀ 10 ਲੀਟਰ ਪਾਣੀ ਅਤੇ 50 ਗ੍ਰਾਮ ਨਿੰਮ ਐਕਸਟ੍ਰੈਕਟ 50 ਗ੍ਰਾਮ ਪ੍ਰਤੀ ਲੀਟਰ ਦੀ ਸਪਰੇਅ ਕਰੋ 10-15 ਦਿਨਾਂ ਦੇ ਵਕਫੇ ਤੇ ਇਹ ਸਪਰੇਅ ਦੋਬਾਰਾ ਕਰੋ ਫੁੱਲ ਨਿਕਲਣ ਸਮੇਂ ਕੋਰਾਜੈੱਨ 18.5% ਐੱਸ.ਸੀ. 5 ਮਿ.ਲੀ. + ਟੀਪੋਲ 5 ਮਿ.ਲੀ. ਦਾ ਘੋਲ 12 ਲੀਟਰ ਪਾਣੀ ਵਿੱਚ ਮਿਲਾ ਕੇ 20 ਦਿਨਾਂ ਦੇ ਵਕਫੇ ਤੇ ਦੋ ਵਾਰ ਸਪਰੇਅ ਕਰੋ ਸ਼ੁਰੂਆਤੀ ਹਮਲੇ ਵਿੱਚ 5% ਨਿੰਮ ਐਕਸਟ੍ਰੈਕਟ 50 ਗ੍ਰਾਮ ਪ੍ਰਤੀ ਲੀਟਰ ਦੀ ਸਪਰੇਅ ਕਰੋ ਜ਼ਿਆਦਾ ਹਮਲਾ ਦਿਖਣ ਤੇ 25% ਸਾਈਪਰਮੈਥਰੀਨ 2.4 ਮਿ.ਲੀ. ਪ੍ਰਤੀ ਲੀਟਰ ਪਾਣੀ ਦੀ ਸਪਰੇਅ ਕਰੋ ਕੀੜਿਆਂ ਦੀ ਗਿਣਤੀ ਬਹੁਤ ਜ਼ਿਆਦਾ ਵੱਧ ਜਾਣ ਤੇ ਸਪਾਈਨੋਸੈੱਡ 1 ਮਿ.ਲੀ. ਪ੍ਰਤੀ ਲੀਟਰ ਪਾਣੀ ਦੀ ਸਪਰੇਅ ਕਰੋ ਫਲ ਪੱਕਣ ਤੋਂ ਬਾਅਦ ਟ੍ਰਾਈਜ਼ੋਫੋਸ ਜਾਂ ਕਿਸੇ ਹੋਰ ਕੀਟਨਾਸ਼ਕ ਦੀ ਸਪਰੇਅ ਨਾ ਕਰੋ
Posted by Amritpal singh
Punjab
30-09-2019 09:00 AM
Punjab
09-30-2019 02:39 PM
ਅਮ੍ਰਿਤਪਾਲ ਜੀ ਤੁਸੀ 250 ਗ੍ਰਾਮ ਗੁੜ, 250 ਗ੍ਰਾਮ ਗੁਲਕੰਦ, 100 ਗ੍ਰਾਮ ਸੌੰਫ, 100 ਗ੍ਰਾਮ ਸੁਕੇ ਆਵਲੇ ਤੇ 50 ਗ੍ਰਾਮ ਅਜਵਾਇਨ ਉਬਾਲ ਕੇ ਠਾਰ ਕੇ 5 ਦਿਨ ਦੇਣੀ ਸ਼ੁਰੂ ਕਰੋ, ਬਾਕੀ ਤੁਸੀ ਉਸ ਨੂੰ Broton liquid 50-50ml ਸਵੇਰੇ ਸ਼ਾਮ ਅਤੇ Anabolite liquid 100-100ml ਸਵੇਰੇ ਸ਼ਾਮ ਦਿਓ, ਇਸ ਨਾਲ ਫਰਕ ਪੈ ਜਾਵੇਗਾ ਅਤੇ ਤੁਸੀ ਉਸ ਨੂੰ ਦਲੀਆ ਰਿਨ ਕੇ ਦਿੰਦੇ ਰਹੋ..
Posted by Anshu Mishra
Uttar Pradesh
30-09-2019 08:47 AM
Punjab
09-30-2019 06:08 PM
जीरा भारत का महत्तवपूर्ण मसाला है अच्छे निकास वाली और उच्च कार्बनिक पदार्थों वाली मिट्टी जीरे की खेती के लिए उपयुक्त होती है जीरे की खेती के लिए उस ज़मीन का चयन करें जहां 3-4 वर्ष जीरे की खेती ना की गई हो प्रसिद्ध किस्में:-RZ 19,RZ 209,Gujarat Jeera 2,RZ 223,GC 4 जीरे की खेती के लिए अच्छी तरह से जोती गई और समतल ज़मीन की आवश्यकता होती है म.... (Read More)
जीरा भारत का महत्तवपूर्ण मसाला है अच्छे निकास वाली और उच्च कार्बनिक पदार्थों वाली मिट्टी जीरे की खेती के लिए उपयुक्त होती है जीरे की खेती के लिए उस ज़मीन का चयन करें जहां 3-4 वर्ष जीरे की खेती ना की गई हो प्रसिद्ध किस्में:-RZ 19,RZ 209,Gujarat Jeera 2,RZ 223,GC 4 जीरे की खेती के लिए अच्छी तरह से जोती गई और समतल ज़मीन की आवश्यकता होती है मिट्टी के भुरभुरा होने तक खेत की जोताई करें और मिट्टी को समतल करने के लिए सुहागा फेरें जीरे की बिजाई के लिए 15 से 30 नवंबर सही समय होता है कतारों में बिजाई के लिए दो पंक्तियों में 30 सैं.मी. फासले का प्रयोग करें बीजों को 10 सैं.मी. की गहराई में बोयें बिजाई के लिए बुरकाव ढंग या कतार में बिजाई ढंग का प्रयोग करें एक एकड़ खेत में बिजाई के लिए 4-6 किलो बीज पर्याप्त होते हैं बिजाई से पहले कार्बेनडाज़िम 2 ग्राम से प्रति किलो बीजों का उपचार करें यह बीजों का फंगस संक्रमक से बचाव करेगा खादों की सही मात्रा के लिए और अतिरिक्त प्रयोग ना करने के लिए मिट्टी की जांच सबसे महत्तवपूर्ण कदम है फसल की अच्छी वृद्धि और अच्छी उपज के लिए नाइट्रोजन 15 किलो (यूरिया 32 किलो) फासफोरस 11 किलो (एस एस पी 66 किलो) और पोटाश 7 किलो (म्यूरेट ऑफ पोटाश 12 किलो) को गाय के गले हुए गोबर 2 टन के साथ प्रति एकड़ में डालें नाइट्रोजन की आधी मात्रा और फासफोरस और पोटाश की पूरी मात्रा बिजाई के समय डालें बाकी बची नाइट्रोजन की आधी मात्रा बिजाई के 35 दिनों के बाद डालें बिजाई के तुरंत बाद हल्की सिंचाई करें दूसरी सिंचाई बिजाई के 10 दिनों के बाद अंकुरण के समय करें उसके बाद तीन सिंचाइयां पर्याप्त होती हैं बाकी की सिंचाइयां बिजाई के 35वें, 60वें और 85वें दिन बाद करें एक बार फसल पक जाये तब सिंचाई ना करें बीज भरने की अवस्था में सिंचाई पत्तों के ऊपरी धब्बा रोग, चेपे और झुलस रोग के हमले को बढ़ाती है जीरे की फसल में नदीन गंभीर समस्या होते हैं नदीनों की जांच के लिए लगातार गोडाई और निराई करें पहली गोडाई बिजाई के 30-35 दिनों के बाद करें जब जीरे की फसल 5 सैं.मी. कद की हो जाये दूसरी गोडाई पहली गोडाई के 20-25 दिन बाद करें और खेत को नदीन रहित रखें रासायनिक रोकथाम के लिए बिजाई के 1-2 दिन बाद पैंडीमैथालीन 1 लीटर को 200 लीटर पानी में मिलाकर स्प्रे करें जीरे की फसल 100-115 दिनों में कटाई के लिए तैयार हो जाती है कटाई दरांती की सहायता से की जाती है फसल की कटाई के बाद पौधों को फर्श पर खिलार दें और धूप में सुखाने के लिए छोड़ दें धूप में अच्छे से सुखाने के बाद पौधों से दाने अलग कर लें
Posted by shivpal Yadav
Madhya Pradesh
30-09-2019 08:46 AM
Maharashtra
09-30-2019 03:37 PM
यह कई तरह की मिट्टी में उगाई जाती है इसकी पैदावार के लिए नमकीन, क्षारीय और पानी खड़ा होने वाली मिट्टी से बचाव करें यह बढ़िया निकास वाली मिट्टी जिसमे बढ़िया जैविक तत्व मौजूद हों, में बढ़िया परिणाम देती है इसके बढ़िया विकास के लिए मिट्टी का pH 5.5-7 होना चाहिए Drudriha Tulsi: यह मुख्य रूप से बंगाल, नेपाल, चटगांव और महाराष्ट्र क्ष.... (Read More)
यह कई तरह की मिट्टी में उगाई जाती है इसकी पैदावार के लिए नमकीन, क्षारीय और पानी खड़ा होने वाली मिट्टी से बचाव करें यह बढ़िया निकास वाली मिट्टी जिसमे बढ़िया जैविक तत्व मौजूद हों, में बढ़िया परिणाम देती है इसके बढ़िया विकास के लिए मिट्टी का pH 5.5-7 होना चाहिए Drudriha Tulsi: यह मुख्य रूप से बंगाल, नेपाल, चटगांव और महाराष्ट्र क्षेत्रों में पाई जाती है यह गले को सूखेपन से राहत देता है यह हाथों, पैरों और गठिया की सूजन से आराम देता है Ram/Kali Tulsi (Ocimum canum): यह चीन, ब्राज़ील, पूर्व नेपाल और साथ ही बंगाल, बिहार, चटगांव और भारत के दक्षिणी क्षेत्रों में पाई जाती है इसका तना जामुनी और पत्ते हरे रंग के और बहुत ज्यादा सुगंधित होते है इसमें उचित मात्रा में औषधीय गुण जैसे ऐज़ाडिरैकटिन, ऐंटीफंगल , ऐंटीबैक्टीरियल, और पाचन तंत्र को ठीक रखती है यह गर्म क्षेत्रों में बढ़िया उगता है Babi Tulsi: यह पंजाब से त्रिवेंद्रम, बंगाल और बिहार में भी पाई जाती है इसका पौधा 1-2 फीट लम्बा होता है पत्ते 1-2 इंच लम्बे, अंडाकार और नुकीले होते है इसके पत्तों का स्वाद लौंग की तरह और सब्जियों में स्वाद के लिए प्रयोग किया जाता है तुलसी की खेती के लिए, अच्छी तरह से शुष्क मिट्टी की मांग की जाती है मिट्टी के भुरभुरा होने तक हैरो के साथ खेत की जोताई करें, फिर रूड़ी की खाद मिट्टी में मिलाएं तुलसी की रोपाई सीड बैड पर करें फरवरी के तीसरे महीने में नर्सरी बैड तैयार करें पौधे के विकास के अनुसार, 4.5 x 1.0 x 0.2 मीटर के सीड बैड तैयार करें बीजों को 60x60 सैं.मी. के फैसले पर बोयें बीजों को 2 सैं.मी. की गहराई पर बोयें बिजाई के 6-7 हफ्ते बाद, फसल की रोपाई खेत में करें तुलसी की खेती के लिए 120 ग्राम बीजों का प्रयोग प्रति एकड़ में करें फसल को मिट्टी से पैदा होने वाली बीमारीयों से रोकथाम के लिए, बिजाई से पहले मैनकोजेब 5 ग्राम प्रति किलोग्राम से बीजों का उपचार करें फसल की बढ़िया पैदावार के लिए बिजाई से पहले 15 टन रूड़ी की खाद मिट्टी में डालें तुलसी के बीजों को तैयार बैडों के साथ उचित अंतराल पर बोयें मानसून आने के 8 हफ्ते पहले बीजों को बैड पर बोयें बीजों को 2 सैं.मी. की गहराई पर बोयें बिजाई के बाद, रूड़ी की खाद और मिट्टी की पतली परत बीजों पर बना दें इसकी सिंचाई फुवारा विधि द्वारा की जाती है रोपाई के 15-20 दिनों के बाद, नए पौधों को तंदरुस्त बनाने के लिए 2% यूरिया का घोल डालें 6 हफ्ते पुराने और 4-5 पत्तों के अंकुरण होने पर अप्रैल के महीने में नए पौधे तैयार होते है तैयार बैडों को रोपाई 24 घंटे पहले पानी लगाएं ताकि पौधों को आसानी से उखाड़ा जा सकें और रोपाई के समय जड़ें मुलायम और सूजी हुई हो खेत की तैयारी के समय, रूड़ी की खाद को मिट्टी में मिलाएं खाद के तौर पर नाइट्रोजन 48 किलो(यूरिया 104 किलो), फासफोरस 24 किलो(सिंगल सुपर फासफेट 150 किलो) और पोटाश 24 किलो(मिउरेट 40 किलो) प्रति एकड़ में डालें नए पौधे लगाने के समय नाइट्रोजन की आधी मात्रा और फासफेट पेंटोऑक्साइड की पूरी मात्रा शुरुआती समय में डालें Mn 50 पी पी एम कंसंट्रेशन और Co@100 पी पी एम कंसंट्रेशन सूक्ष्म-तत्व डालें बाकी की बची हुई नाइट्रोजन को 2 हिस्सों में पहली और दूसरी कटाई के बाद डालें खेत को नदीनों से मुक्त करने के लिए कसी की मदद से गोड़ाई करें नदीनों की रोकथाम कम न होने पर यह फसल को नुकसान पहुंचाते है रोपण के एक महीने बाद पहली गोड़ाई और पहली गोड़ाई के चार हफ्ते बाद दूसरी गोड़ाई करें रोपण के दो महीने बाद कसी से अनुकूल गोड़ाई करें गर्मियों में, एक महीने में 3 सिंचाइयां करें और बरसात के मौसम में, सिंचाई की आवश्यकता नहीं होती एक साल में 12-15 सिंचाइयां करनी चाहिए पहली सिंचाई रोपण के बाद करें और दूसरी सिंचाई नए पौधों के स्थिर होने पर करें 2 सिंचाइयां करनी आवश्यक है और बाकी की सिंचाई मौसम के आधार पर करें इसके मंडीकरण के लिए आप Aushadhiya kheti vikas sansthan 6268536795 से संपर्क कर सकते हैं
Posted by Gurpreet Jattana
Punjab
30-09-2019 08:37 AM
Punjab
10-01-2019 07:02 PM
Gurpreet Jattana ji Punjab vich 1509 da bhaa 3000-3400 tak chal reha hai, Thankyou.
Posted by jkdesai
Gujarat
30-09-2019 08:37 AM
Punjab
09-30-2019 03:33 PM
नए पौधों की रोपाई के लिए 45x45x45 सैं.मी. के फासले पर गड्ढे खोदे प्रत्येक गड्ढे में गली हुई रूड़ी की खाद के साथ कीटनाशी डालें बीजों को नर्सरी बैड में बोया जाता है
Posted by Sachin Barde
Madhya Pradesh
30-09-2019 08:33 AM
Punjab
09-30-2019 03:29 PM
सचिन जी कृपया आप बताये के आपने इसके ऊपर कोई स्प्रे की है ताकि आपको इसके बारे में पूरी जानकारी दी जा सके धन्यवाद
Posted by Kamal pandhu
Punjab
30-09-2019 08:33 AM
Punjab
09-30-2019 03:26 PM
ਕਮਲ ਜੀ ਇਸਨੂੰ ਤੁਸੀ 4 ਤੋਂ 5 ਕਿਲੋ ਵਰਮੀਕੰਪੋਸਟ ਪਾਓ ਅਤੇ ਇਸਦੇ ਉਪਰ Zinc sulphate @3 ਗ੍ਰਾਮ ਨੂੰ ਪ੍ਰਤੀ ਲੀਟਰ ਪਾਣੀ ਦੇ ਹਿਸਾਬ ਨਾਲ ਸਪਰੇ ਕਰੋ ਧੰਨਵਾਦ
Posted by Sachin Barde
Madhya Pradesh
30-09-2019 08:31 AM
Punjab
09-30-2019 03:22 PM
सचिन जी आप इसके ऊपर custodia @300 ml को प्रति एकड़ के हिसाब से स्प्रे करें धन्यवाद
Posted by billu
Rajasthan
30-09-2019 08:29 AM
Maharashtra
09-30-2019 03:23 PM
यह फसल बहुत तरह की मिट्टी जैसे कि रेतली, नमक वाली, दोमट और चिकनी मिट्टी में उगाई जा सकती है अच्छे जल निकास वाली, जैविक तत्व भरपूर, रेतली से दरमियानी ज़मीन में फसल अच्छी पैदावार देती है यह फसल नमक वाली तेजाबी ज़मीनों में भी उगाई जा सकती है पर बहुत ज्यादा पानी खड़ने वाली और खारी या नमक वाली ज़मीन इस फसल की खेती के लिए .... (Read More)
यह फसल बहुत तरह की मिट्टी जैसे कि रेतली, नमक वाली, दोमट और चिकनी मिट्टी में उगाई जा सकती है अच्छे जल निकास वाली, जैविक तत्व भरपूर, रेतली से दरमियानी ज़मीन में फसल अच्छी पैदावार देती है यह फसल नमक वाली तेजाबी ज़मीनों में भी उगाई जा सकती है पर बहुत ज्यादा पानी खड़ने वाली और खारी या नमक वाली ज़मीन इस फसल की खेती के लिए उचित नहीं होती Kufri Ashoka: इस फसल की सी पी आई यू द्वारा विकसित की गई है और बिहार, हरियाणा, उत्तर प्रदेश और पश्चिम बंगाल में खेती करने के लिए अनुकूल है इसका पौधा मध्यम लंबा और तना दरमियाना मोटा होता है यह किस्म 70-80 दिनों में पककर तैयार हो जाती है इसके आलू बड़े, गोलाकार, सफेद और नर्म छिल्के वाले होते हैं यह पिछेती झुलस रोग को सहने योग्य किस्म है Kufri Badshah: इसके पौधे लंबे और 4-5 तने प्रति पौधा होते हैं इसके आलू गोल, बड़े से दरमियाने, गोलाकार और हल्के सफेद रंग के होते हैं इसके आलू स्वाद होते हैं यह किस्म 90-100 दिनों में पक जाती है यह किस्म कोहरे को सहनेयोग्य है और पिछेती, अगेती झुलस रोग की प्रतिरोधक है Kufri Bahar: इस किस्म के पौधे लंबे और तने मोटे होते हैं तनों की संख्या 4-5 प्रति पौधा होती है इसके आलू बड़े, सफेद रंग के, गोलाकार से अंडाकार होते हैं यह किस्म 90-100 दिनों में पक जाती है और इसकी औसतन पैदावार 100-120 क्विंटल प्रति एकड़ होती है इसे ज्यादा देर तक स्टोर करके रखा जा सकता है यह पिछेती और अगेती झुलस रोग और पत्ता मरोड़ रोग की रोधक है Kufri Chipsona 2: इस किस्म के पौधे दरमियाने कद के और कम तनों वाले होते हैं इसके पत्ते गहरे हरे और फूल सफेद रंग के होते हैं आलू सफेद, दरमियाने आकार के, गोलाकार, अंडाकार और नर्म होते हैं इसकी औसतन पैदावार 140 क्विंटल प्रति एकड़ होती है यह पिछेती झुलस रोग की रोधक किस्म है यह किस्म चिपस और फरैंच फ्राइज़ बनाने के लिए उचित है खेत को एक बार 30 सैं.मी. गहरा जोतकर अच्छे ढंग से बैड बनाएं जोताई के लिए हल और तवियों का प्रयोग करें और फिर 2-3 बार सुहागा फेरें बिजाई से पहले खेत में नमी की मात्रा बनाकर रखें बिजाई के लिए दो ढंग मुख्य तौर पर प्रयोग किए जाते हैं 1. मेंड़ और खालियों वाला ढंग 2. समतल बैडों वाला ढंग इस फसल की खेती के लिए अलग अलग किस्मों के लिए अलग अलग समय प्रयोग होता है कुफरी अशोका की बिजाई के बाद कुफरी बहार किस्म को अक्तूबर के पहले सप्ताह में बोया जाता है कुफरी बादशाह और कुफरी सतलुज की बिजाई के लिए 5 अक्तूबर से 15 अक्तूबर तक का समय अनुकूल होता है बिजाई के लिए पंक्ति से पंक्ति का फासला 60 सैं.मी और पौधे से पौधे का फासला 20 सैं.मी. रखें फासला आलुओं के आकार के अनुसार बदलता रहता है यदि आलू का व्यास 2.5-3.5 सैं.मी. हो तो फासला 60x15 सैं.मी. और यदि आलू का व्यास 5-6 सैं.मी. हो तो फासला 60x40 सैं.मी. होना चाहिए 6-8 इंच गहरी खालियां बनाएं फिर इनमें आलू रखें और थोड़ा सा ज़मीन से बाहर रहने दें बिजाई के लिए ट्रैक्टर से चलने वाली या ऑटोमैटिक बिजाई के लिए मशीन का प्रयोग करें बिजाई के लिए बड़ी आंखों वाले आलुओं का प्रयोग करें बिजाई के लिए 13-15 क्विंटल प्रति एकड़ किलो प्रति एकड़ बीजों का प्रयोग करें बिजाई के लिए सेहतमंद आलू ही चुने बिजाई से पहले आलुओं को कोल्ड स्टोर से निकालकर 1-2 सप्ताह के लिए छांव वाले स्थान पर रखें ताकि वे अंकुरित हो जायें आलुओं के सही अंकुरन के लिए उन्हें जिबरैलिक एसिड 1 ग्राम प्रति 10 लीटर पानी में मिलाकर एक घंटे के लिए उपचार करें फिर छांव में सुखाएं और 10 दिनों के लिए हवादार कमरे में रखें फिर काटकर आलुओं को मैनकोजेब 0.5 प्रतिशत घोल (5 ग्राम प्रति लीटर पानी) में 10 मिनट के लिए भिगो दें इससे आलुओं को शुरूआती समय में गलने से बचाया जा सकता है आलुओं को गलने और जड़ों में कालापन रोग से बचाने के लिए साबुत और काटे हुए आलुओं को 6 प्रतिशत मरकरी के घोल (टैफासन) 0.25 प्रतिशत(2.5 ग्राम प्रति लीटर पानी) में डालें बिजाई से दो सप्ताह पहले खेत की तैयारी के समय 200 क्विंटल प्रति एकड़ रूड़ी की खाद डालें फसल की उचित वृद्धि के लिए नाइट्रोजन 50-60 किलो (110-130 किलो यूरिया), फासफोरस 20 किलो (125 किलो सिंगल सुपर फासफेट) और पोटाश 40 किलो (68 किलो म्यूरेट ऑफ पोटाश) की मात्रा प्रति एकड़ में डालें बिजाई के समय नाइट्रोजन का 3/4 हिस्सा और फासफोरस और पोटाश की पूरी मात्रा डालें बाकी बचा हुआ नाइट्रोजन का 1/4 हिस्सा बिजाई से 25-30 दिन बाद जड़ों से मिट्टी लगाने के समय डालें यदि बिजाई से पहले सिंचाई की गई हो तो पहली सिंचाई 8-10 दिनों के अंदर करें नहीं तो बिजाई के तुरंत बाद या 1.2 दिन बाद सिंचाई करें अक्तूबर-नवंबर के महीने में 7-10 दिनों के अंतराल पर सिंचाई करें दिसंबर-जनवरी महीने में 10-15 दिनों के अंतराल पर सिंचाई करें ज्यादा मात्रा में दिए गए पानी से जड़ गलन बीमारी का खतरा रहता है कटाई के 10-12 दिन पहले सिंचाई बंद कर दें
Posted by nikhil thakur
Uttar Pradesh
30-09-2019 08:28 AM
Maharashtra
09-30-2019 03:24 PM
राजमांह को इसके लाल रंग की वजह से और किडनी के आकार जैसा होने पर किडनी बीन्स भी कहा जाता है यह प्रोटीन का मुख्य स्त्रोत है और मोलीबडेनम तत्व भी देता है इसमें कोलैस्ट्रोल को कम करने वाले तत्व भी हैं उत्तरी भारत में इसकी दाल भी बनाई जाती है भारत में, महाराष्ट्र, जम्मू कश्मीर, हिमाचल प्रदेश, उत्तराखंड, बंगाल, ताम.... (Read More)
राजमांह को इसके लाल रंग की वजह से और किडनी के आकार जैसा होने पर किडनी बीन्स भी कहा जाता है यह प्रोटीन का मुख्य स्त्रोत है और मोलीबडेनम तत्व भी देता है इसमें कोलैस्ट्रोल को कम करने वाले तत्व भी हैं उत्तरी भारत में इसकी दाल भी बनाई जाती है भारत में, महाराष्ट्र, जम्मू कश्मीर, हिमाचल प्रदेश, उत्तराखंड, बंगाल, तामिलनाडू, केरल, कर्नाटक मुख्य राजमांह उत्पादक राज्य हैं मिट्टी इसे मिट्टी की व्यापक किस्मों जैसे हल्की रेतली से भारी चिकनी मिट्टी में उगाया जा सकता है जल निकास वाली दोमट ज़मीनों में इसकी पैदावार बहुत अच्छी होती है यह नमक वाली मिट्टी के प्रति बहुत संवेदनशील है लगभग 5.5-6 पी एच वाली ज़मीनों में इसकी पैदावार अधिक होती है VL Rajma 125: यह किस्म उत्तराखंड के पहाड़ी इलाकों में समय से बोयी जाती है इसकी फली में 4-5 बीज होते हैं और 100 बीज का भार लगभग 41.38 ग्राम होता है RBL 6: यह किस्म पंजाब में बोयी जाती है इसके बीज हल्के हरे रंग के होते हैं और फली में 6-8 बीज होते हैं दूसरे राज्यों की किस्में इसके इलावा भारत में उगाई जाने वाली प्रसिद्ध किस्में: HUR 15, HUR-137, Amber, Arun, Arka Komal, Arka Suvidha, Pusa Parvathi, Pusa Himalatha, VL Boni 1, Ooty 1आदि ज़मीन की तैयारी मिट्टी के भुरभुरा होने तक खेत की 2-3 बार जोताई करें, खेत को समतल रखें ताकि उसमें पानी ना खड़ा रहे यह फसल जल जमाव के प्रति काफी संवेदनशील होती है आखिरी जोताई के समय, 60-80 क्विंटल प्रति एकड़ रूड़ी की खाद डालें ताकि अच्छी पैदावार मिल सके बिजाई का समय बसंत की ऋतु में राजमांह की बिजाई फरवरी से मार्च और खरीफ की ऋतु में इसकी बिजाई मई से जून के महीने की जाती है पंजाब में कुछ किसान राजमांह की बिजाई जनवरी के आखिरी सप्ताह करते हैं फासला अगेती किस्मों के लिए कतारों में 45-60 सैं.मी. और पौधों में फासला 10-15 सैं.मी. रखें पॉल जैसी किस्मों के लिए पहाड़ी क्षेत्रों में पौधे का फासला 3-4 मीटर प्रति पहाड़ी होना चाहिए बीज की गहराई बीज को 6-7 सैं.मी. गहरा बोयें बिजाई की विधि इसकी बिजाई गड्ढा खोदकर की जाती है समतल क्षेत्रों में बीज पंक्तियों में बोयें जाते हैं और पहाड़ी क्षेत्रों में इसकी खेती बैड बनाकर की जाती है अगेती किस्मों के लिए 30-35 किलोग्राम बीज प्रति एकड़ का प्रयोग करें पॉल किस्मों की बिजाई पहाड़ी क्षेत्रों में 1 मीटर के फासले पर 3-4 पौधे प्रति पहाड़ी पर लगाए जाते हैं बीज की मात्रा 10-12 किलोग्राम प्रति एकड़ प्रयोग की जाती है बीज का उपचार बिजाई से पहले थीरम 4 ग्राम से प्रति किलो बीज का उपचार करें बीजों का छांव में सुखाएं और तुरंत बो दें खरपतवार नियंत्रण फसल के शुरू में नदीनों की रोकथाम जरूरी है इस अवस्था में नदीनों का हमला ना होने दें खादें डालने और सिंचाई करने के साथ ही गोडाई कर दें नदीनों के अंकुरन से पहले फ्लूक्लोरालिन 800 मि.ली. प्रति एकड़ या पैंडीमैथालीन 1 लीटर प्रति एकड़ का प्रयोग करें सिंचाई बीजों के अच्छे अंकुरण के लिए बिजाई से पहले सिंचाई करें फसल की वृद्धि के दौरान 6-7 सिंचाइयों की आवश्यकता होती है बिजाई के बाद 25वें दिन सिंचाई करें और अच्छी उपज प्राप्त करने के लिए 25 दिनों के अंतराल पर 3 सिंचाइयां जरूरी होती हैं फसल के खिलने, फूल निकलने के दौरान और फलियां विकसित होने की अवस्था में सिंचाई करें इन अवस्थाओं पर पानी की कमी ना होने दें फसल की कटाई जब इसकी फलियां पूरी तरह पक जायें और रंग पीला हो जाये तो इसकी तुड़ाई की जा सकती है इसके पत्ते पीले पड़ने के बाद गिरने शुरू हो जाते हैं किस्म के आधार पर इसकी फलियां 7-12 दिनों में पककर तुड़ाई के लिए तैयार हो जाती हैं पूरी फसल 120-130 दिनों में कटाई के लिए तैयार हो जाती हैं कटाई समय से करें काटी हुई फसल 3-4 दिनों के लिए धूप में रखें अच्छी तरह सूखने के बाद बैलों या छड़ों की मदद से छंटाई की जा सकती हैं कटाई के बाद राजमांह को कटाई के बाद कईं कामों के लिए प्रयोग किया जाता है सांभ संभाल के समय इसकी देखभाल जरूरी है राजमांह को स्टोर करने से पहले आकार और क्वालिटी के आधार पर बांटा जाता है गले हुए राजमांह धूप में हल्की गर्मी में रख दिए जाते हैं ताकि उनमें से नमी की मात्रा कम हो जाये इसके लिए हमेशा ठंडी, अंधेरे और सूखी जगह पर रख दिया जाता है