
Posted by Mahesh Kumar
Uttar Pradesh
30-09-2019 04:59 PM
mahesh ji kripya aap iski photo bheje taki aapko iske bare men poori jankari di ja sake.dhanywad
Posted by vipin
Uttar Pradesh
30-09-2019 04:57 PM
Vipin ji kripya swal vistar se btaye ke dhan me kya dikkat aa rahi hai kyuki aapne video men kuch bola nahi hai to kripya aap apna swal vistar se pooche.thank you
Posted by Prabhjot Singh Basota
Punjab
30-09-2019 04:56 PM
Prabhjot ji jekar tuci semen cylinder lenn vare push rehe hoo tan isdi jankari lai tuci Genex Biopharma 98147-99714, 98763-31262, 99150-46958, 0181-4646958 nal sampark kr skde ho.
Posted by रामवीरसिंह
Uttar Pradesh
30-09-2019 04:40 PM
बकरी पालन बहुत ही लाभकारी काम है शुरूआत करने के लिए आप 10 बकरियों और 2 बकरे के साथ कर सकत हैं इन्हें खुराक कम चाहिए इसलिए इन्हें आसानी से पाल सकते हैं ये हर प्रकार के मौसम में पाली जा सकती हैं बकरियां 12-14 महीने में बच्चे देना शुरू कर देती है बकरी का गर्भ समय 150 दिन का होता है और साल में 1-5 बच्चे देती है साल में दो बच्च.... (Read More)
बकरी पालन बहुत ही लाभकारी काम है शुरूआत करने के लिए आप 10 बकरियों और 2 बकरे के साथ कर सकत हैं इन्हें खुराक कम चाहिए इसलिए इन्हें आसानी से पाल सकते हैं ये हर प्रकार के मौसम में पाली जा सकती हैं बकरियां 12-14 महीने में बच्चे देना शुरू कर देती है बकरी का गर्भ समय 150 दिन का होता है और साल में 1-5 बच्चे देती है साल में दो बच्चे देना आम बात है बकरियां 8-10 वर्ष तक बच्चे देती हैं और अपन गिनती को तेजी से बढ़ा लेती हैं आप बारबरी, ब्लैक बंगाल, जैसी नसल पाल सकते हैं इसकी ट्रेनिेंग के लिए आप अपने कुषि विज्ञान केंद्र से संपर्क करे या फिर जो बकरी पालन का व्यवसाय कर रहा कोई किसान उसका फार्म स्वंय जाकर देखकर आयें तो और भी बारीकियों का पता चल जायेगा

Posted by surya
Madhya Pradesh
30-09-2019 04:40 PM
surya ji yeh fungus ke karn ho raha hai iske liye aap mancozeb@4 gram ko prati litre pani ke hisab se spray karen.dhanywad

Posted by sukhpreet singh
Punjab
30-09-2019 04:38 PM
tuci iss nu Hevimec-LVR bolus deo ate iss nu Udder pox homeopathic dwai dia 10-10 drops din vich 3 varr deo, iss nal holi holi frak paa jawega..

Posted by NARINDER Singh
Punjab
30-09-2019 04:31 PM
ਨਰਿੰਦਰ ਜੀ ਹਲਦੀ ਰੋਗ ਦੀ ਰੋਕਥਾਮ ਦੇ ਲਈ ਤੁਸੀ tilt @200 ml ਨੂੰ ਪ੍ਰਤੀ ਏਕੜ ਦੇ ਹਿਸਾਬ ਨਾਲ ਸਪਰੇ ਕਰੋਧੰਨਵਾਦ

Posted by Kuldeep Singh
Punjab
30-09-2019 04:23 PM
rajwa hara chaara te 2kg feed rojana dyo har 3 mahine baad malap rehat karo Bhaar 250-275 kg howe swer shaam taaran v dekho Arhamdi arhingdi na vekho JADON taaran kare iss nu aas karwa lao
Posted by Rohit Kumar
Uttar Pradesh
30-09-2019 04:19 PM
रोहित जी यह फंगस के कारण होता है इसके लिए आप tilt @200ml को प्रति एकड़ के हिसाब से स्प्रे करें धन्यवाद
Posted by Amandeep singh
Punjab
30-09-2019 04:15 PM
amandeep ji eh fungus di roktham de layi varti jandi hai. Eh fungus ton hon valia bimaria jive peeli koongi, kangiari , powdery mildew di roktham layi varti jandi hai. Is da istemal bimari de lachhan dikhan te hi karo.isdi maytra 800ml to 1 litre prati acre de hisab nal varti jandi hai.dhanwad
Posted by Amandeep singh
Punjab
30-09-2019 04:14 PM
amandeep ji eh fungus di roktham de layi varti jandi hai. Eh fungus ton hon valia bimaria jive peeli koongi, kangiari , powdery mildew di roktham layi varti jandi hai. Is da istemal bimari de lachhan dikhan te hi karo.isdi maytra 800ml to 1 litre prati acre de hisab nal varti jandi hai.dhanwad
Posted by Singh Aswinder
Punjab
30-09-2019 04:12 PM
Aswinder ji toodi da rate lagbhag 300-350 rupaye quintal de hisab nal chal reha hai.dhanwad
Posted by Amandeep singh
Punjab
30-09-2019 04:06 PM
amandeep ji eh fungus di roktham de layi varti jandi hai. Eh fungus ton hon valia bimaria jive peeli koongi, kangiari , powdery mildew di roktham layi varti jandi hai. Is da istemal bimari de lachhan dikhan te hi karo.isdi maytra 800ml to 1 litre prati acre de hisab nal varti jandi hai.dhanwad
Posted by ਹਰਪਾਲ ਸਿੰਘ
Punjab
30-09-2019 04:04 PM
BhaaG rajwa hara chaara te har 3 kg dudh lai majh nu 1kg feed pao har 3 mahine baad malap rehat karo 1quintal feed da formula Anaaj 40kg khal 30kg chokar or rice polish 30kg min mix 2kg namak 1kg mithha soda1kg rla lao
Posted by R.K.Balana
Punjab
30-09-2019 03:54 PM
RK ji gobh ki sundi ki roktham ke liye fame@20ml ya coragen@60ml ko prati acre ke hisab se spray karen.dhanywad
Posted by R.K.Balana
Punjab
30-09-2019 03:53 PM
R.K ji gobh ki sundi ki roktham ke liye aap fame@20ml ya coragen@60ml ko prati acre ke hisab se spray karen.dhanywad
Posted by ਸ਼ੇਰ ਸ਼ਿੰਘ ਧਾਲੀਵਾਲ
Punjab
30-09-2019 03:49 PM
ਸ਼ੇਰ ਸਿੰਘ ਜੀ ਪੰਜਾਬ ਵਿਚ ਅਦਰਕ ਦੀ ਖੇਤੀ ਯੂਨੀਵਰਸਿਟੀ ਵਲੋਂ ਸਿਫਾਰਿਸ਼ ਨਹੀਂ ਕੀਤੀ ਜਾਂਦੀ ਧੰਨਵਾਦ
Posted by GURPREET SINGH SIDHU
Punjab
30-09-2019 03:48 PM
ਰੋਪਣ ਦਾ ਮਤਲਬ ਕਿਸੇ ਬੂਟੇ ਜਾ ਫ਼ਸਲ ਦੀ ਪਨੀਰੀ ਨੂੰ ਖੇਤ ਵਿਚ ਬੀਜਣਾ

Posted by dilip rajput
Gujarat
30-09-2019 03:47 PM
dilip ji yeh tatv ki kami ke karn hota hai iske liye aap paudhe ko NPK 130045@10 gram ko prati litre pani ke hisab se spray karen aur iske ilava copper oxychloride@3 gram ko prati litre pani ke hisab se spray karen.dhanywad
Posted by GURPREET SINGH SIDHU
Punjab
30-09-2019 03:45 PM
ਰੋਪਣ ਸਮਾਂ ਦਾ ਮਤਲਬ ਕਿਸੇ ਬੂਟੇ ਜਾ ਫ਼ਸਲ ਦੀ ਪਨੀਰੀ ਨੂੰ ਖੇਤ ਵਿਚ ਬੀਜਣਾ
Posted by GURPREET SINGH SIDHU
Punjab
30-09-2019 03:43 PM
ਮੌਸਮ, ਫਸਲ ਦੇ ਵਾਧੇ ਅਤੇ ਮਿੱਟੀ ਦੀ ਕਿਸਮ ਦੇ ਆਧਾਰ ਤੇ ਸਿੰਚਾਈ ਕਰੋ ਇਸਨੂੰ ਹਲਕਾ ਪਾਣੀ ਦਿਓ ਧੰਨਵਾਦ

Posted by सुरेश कुमार शर्मा
Chattisgarh
30-09-2019 03:41 PM
सुरेश जी आप इसकी जड़ों में दीमक चेक करें अगर मौजूद है तो आप chlorpyriphos @4ml को प्रति लीटर पानी के हिसाब से स्प्रे करें धन्यवाद
Posted by ਜਗਜੀਤ ਸਿੰਘ
Punjab
30-09-2019 03:39 PM
ਬਰਸੀਮ :- ਸਤੰਬਰ ਦੇ ਅਖੀਰਲੇ ਹਫਤੇ ਤੋਂ ਲੈ ਕੇ ਅਕਤੂਬਰ ਦਾ ਪਹਿਲਾਂ ਹਫਤਾ ਬਿਜਾਈ ਲਈ ਸਹੀ ਸਮਾਂ ਹੈ BL 1 :- ਇਹ ਜਲਦੀ ਉੱਗਣ ਵਾਲੀ ਦਰਮਿਆਨੀ ਕਿਸਮ ਹੈ ਇਸਦਾ ਬੂਟਾ ਵਧੀਆ ਪੈਦਾ ਹੁੰਦਾ ਹੈ,ਜੋ ਮਈ ਦੇ ਅਖੀਰਲੇ ਹਫਤੇ ਤੱਕ ਵੀ ਹਰਾ ਚਾਰਾ ਦਿੰਦਾ ਹੈ ਇਸ ਦਾ ਹਰਾ ਚਾਰਾ 380 ਕੁਇੰਟਲ ਪ੍ਰਤੀ ਏਕੜ ਹੁੰਦਾ ਹੈ
BL 10:- ਇਹ ਲੰਬੇ ਸਮੇਂ ਵਾਲੀ ਕਿਸਮ ਹੈ ਜੋ ਜੂਨ ਦੇ ਪਹਿਲੇ ਪੰਦੜਵਾੜੇ ਤੱਕ ਹਰਾ ਚਾਰਾ ਦਿੰਦੀ .... (Read More)
ਬਰਸੀਮ :- ਸਤੰਬਰ ਦੇ ਅਖੀਰਲੇ ਹਫਤੇ ਤੋਂ ਲੈ ਕੇ ਅਕਤੂਬਰ ਦਾ ਪਹਿਲਾਂ ਹਫਤਾ ਬਿਜਾਈ ਲਈ ਸਹੀ ਸਮਾਂ ਹੈ BL 1 :- ਇਹ ਜਲਦੀ ਉੱਗਣ ਵਾਲੀ ਦਰਮਿਆਨੀ ਕਿਸਮ ਹੈ ਇਸਦਾ ਬੂਟਾ ਵਧੀਆ ਪੈਦਾ ਹੁੰਦਾ ਹੈ,ਜੋ ਮਈ ਦੇ ਅਖੀਰਲੇ ਹਫਤੇ ਤੱਕ ਵੀ ਹਰਾ ਚਾਰਾ ਦਿੰਦਾ ਹੈ ਇਸ ਦਾ ਹਰਾ ਚਾਰਾ 380 ਕੁਇੰਟਲ ਪ੍ਰਤੀ ਏਕੜ ਹੁੰਦਾ ਹੈ
BL 10:- ਇਹ ਲੰਬੇ ਸਮੇਂ ਵਾਲੀ ਕਿਸਮ ਹੈ ਜੋ ਜੂਨ ਦੇ ਪਹਿਲੇ ਪੰਦੜਵਾੜੇ ਤੱਕ ਹਰਾ ਚਾਰਾ ਦਿੰਦੀ ਹੈ ਇਹ ਤਣੇ ਦੇ ਗਲਣ ਰੋਗ ਨੂੰ ਸਹਾਰਣ ਵਾਲੀ ਕਿਸਮ ਹੈ, ਜਿਸ ਦਾ ਝਾੜ 410 ਕੁਇੰਟਲ ਪ੍ਰਤੀ ਏਕੜ ਹੁੰਦਾ ਹੈ
BL 42 :- ਇਹ ਜਲਦੀ ਉੱਗਣ ਵਾਲੀ ਕਿਸਮ ਹੈ, ਜਿਸ ਦਾ ਜੰਮ ਵਧੀਆ ਹੁੰਦਾ ਹੈ ਇਹ ਕਿਸਮ ਤਣੇ ਦੇ ਗਲਣ ਵਾਲੇ ਰੋਗ ਨੂੰ ਸਹਾਰਣ ਵਾਲੀ ਕਿਸਮ ਹੈ ਇਸ ਦਾ ਹਰਾ ਚਾਰਾ ਜੂਨ ਦੇ ਪਹਿਲੇ ਹਫਤੇ ਤੱਕ ਮਿਲਦਾ ਹੈ ਇਸ ਦਾ ਝਾੜ 440 ਕੁਇੰਟਲ ਪ੍ਰਤੀ ਏਕੜ ਹੈ BL 43: ਇਹ ਅਗੇਤੀ ਪੱਕਣ ਵਾਲੀ ਕਿਸਮ ਹੈ ਇਸ ਦੇ ਹਰੇ ਚਾਰੇ ਦੀ ਔਸਤਨ ਪੈਦਾਵਾਰ 390 ਕੁਇੰਟਲ ਪ੍ਰਤੀ ਏਕੜ ਹੁੰਦੀ ਹੈ ਵਧੇਰੇ ਗੁਣਵੱਤਾ ਦੇ ਚਾਰੇ ਲਈ ਇਸ ਨੂੰ ਸਰ੍ਹੋਂ ਦੇ 750 ਗ੍ਰਾਮ ਬੀਜ ਨਾਲ ਰਲਾ ਕੇ ਛਿੱਟਾ ਦਿਓ
Posted by GURPREET SINGH SIDHU
Punjab
30-09-2019 03:36 PM
ਗੁਰਪ੍ਰੀਤ ਜੀ ਇਹ NPK ਦੇ ਨਾਮ ਤੇ ਹੀ ਮਿਲਦੀ ਹੈ ਇਹ ਕਈ ਕੰਪਨੀਆਂ ਵਲੋਂ ਤਿਆਰ ਕੀਤੀ ਜਾਂਦੀ ਹੈ ਇਸਦੇ ਵਿਚ nitrogen , phosphorus ਅਤੇ potash ਤਿੰਨੋ ਇਕੱਠੇ ਮਾਤਰਾ ਵਿਚ ਮੌਜੂਦ ਹੁੰਦੇ ਹਨ ਇਹ ਫ਼ਸਲ ਦੀ ਗਰੋਥ ਦੇ ਲਈ ਵਰਤੀ ਜਾਂਦੀ ਹੈ
Posted by nilesh
Madhya Pradesh
30-09-2019 03:35 PM
nilesh ji kripya aap btaye ke aapne iske uper koi herbicide ki spray ki hai taki aapko iske bare men poori jankari di ja sake.dhanywad

Posted by simar bajwa
Punjab
30-09-2019 03:30 PM
Jimmy ji kripya aap apna swal vistar se pooche taki aapko iske bare men poori jankari di ja sake.dhanywad

Posted by dilip rajput
Gujarat
30-09-2019 03:26 PM
आम की खेती कईं तरह की मिट्टी में की जा सकती है इसकी खेती के लिए घनी ज़मीन, जो 4 फुट की गहराई तक सख्त ना हो, की जरूरत होती है मिट्टी की पी एच 8.5 प्रतिशत से कम होनी चाहिए Dusheri: यह बहुत ज्यादा क्षेत्रों में उगाया जाता है इसके फल जुलाई के पहले सप्ताह में तुड़ाई के लिए तैयार हो जाते हैं इस किस्म के फलों का आकार छोटे से दरमिया.... (Read More)
आम की खेती कईं तरह की मिट्टी में की जा सकती है इसकी खेती के लिए घनी ज़मीन, जो 4 फुट की गहराई तक सख्त ना हो, की जरूरत होती है मिट्टी की पी एच 8.5 प्रतिशत से कम होनी चाहिए Dusheri: यह बहुत ज्यादा क्षेत्रों में उगाया जाता है इसके फल जुलाई के पहले सप्ताह में तुड़ाई के लिए तैयार हो जाते हैं इस किस्म के फलों का आकार छोटे से दरमियाना, रंग पीला, चिकना और गुठली छोटी होती है यह फल ज्यादा देर तक स्टोर किए जा सकते हैं ये फल सदाबहार लगते रहते हैं इसकी औसतन पैदावार 150 क्विंटल प्रति वृक्ष होती है Langra: इस किस्म के फलों का आकार दरमियाने से बड़ा, रंग निंबू जैसा पीला और चिकना होता है यह फल रेशे रहित और स्वाद में बढ़िया होते हैं इसके फल का छिल्का दरमियाना मोटा होता है इसके फल जुलाई के दूसरे सप्ताह में तुड़ाई के लिए तैयार हो जाते हैं इसकी औसतन पैदावार 100 किलो प्रति वृक्ष होती है Chausa: यह पिछेते मौसम की किस्म है इसके फल बड़े और अंडाकार आकार के और हल्के पीले रंग के होते हैं Ambika: इसके फल मध्यम आकार के, नर्म और मजबूत छिल्का होता है इसके फल गहरे पीले रंग के होते हैं और गहरी लाल रंग की लालिमा देते हैं यह देरी से पकने वाली किस्म है और लगातार फल देती है Arunika: यह किस्म Amrapali और Vanraj किस्म से तैयार की गई है इस किस्म के फल आकर्षित हल्के लाल रंग के होते हैं पौधे अगस्त से सितंबर और फरवरी मार्च के महीने में बोये जाते हैं पौधे हमेशा शाम को ठंडे समय में बोयें फसल को तेज हवा से बचाएं कलमी किस्मों के लिए 10 मीटर x 10 मीटर फासले का प्रयोग करें और मध्यम घनता की रोपाई के लिए 5 x 5 मीटर फासले का प्रयोग करें रोपाई के लिए वर्गाकार प्रणाली का प्रयोग करें बिजाई से एक महीना पहले 1x1x1 मीटर के आकार के गड्ढे 10x10 मीटर के फासले पर खोदें गड्ढों को सूर्य की रोशनी में खुला छोड़ दें फिर इन्हें मिट्टी में 30-40 किलो रूड़ी की खाद और 1 किलो सिंगल सुपर फासफेट मिलाकर भर दें बिजाई वर्गाकार और 6 भुजाओं वाले तरीके से की जा सकती है 6 भुजाओं वाले तरीके से बिजाई करने से 15 प्रतिशत वृक्ष ज्यादा लगाए जा सकते हैं

Posted by gurpinder singh
Punjab
30-09-2019 03:25 PM
ਰਾਇਆ ਫਸਲ ਦੀ ਬਿਜਾਈ ਅੱਧ ਅਕਤੂਬਰ ਤੋਂ ਨਵੰਬਰ ਦੇ ਅਖੀਰ ਤੱਕ ਕੀਤੀ ਜਾਂਦੀ ਹੈ RLM 619: ਇਕ ਕਿਸਮ ਸੇਂਜੂ ਅਤੇ ਬਰਾਨੀ ਦੋਵੇਂ ਇਲਾਕਿਆਂ ਵਿੱਚ ਲਗਾਈ ਜਾਂਦੀ ਹੈ ਇਹ 143 ਦਿਨਾਂ ਵਿੱਚ ਪੱਕਣ ਵਾਲੀ ਕਿਸਮ ਹੈ ਇਸ ਦਾ ਬੀਜ ਮੋਟਾ ਅਤੇ ਬੀਜਾਂ ਵਿੱਚ 43 % ਤੇਲ ਹੁੰਦਾ ਹੈ ਇਸ ਕਿਸਮ ਚਿੱਟੀ ਕੁੰਗੀ, ਮੁਰਝਾਉਣਾ ਅਤੇ ਚਿੱਟੇ ਧੱਬਿਆਂ ਦੇ ਰੋਗ ਨੂੰ ਸਹਾਰਣਯੋਗ ਹੈ ਇਸ ਦਾ ਔੌਸਤਨ ਝਾੜ 8 ਕੁਇੰਟਲ ਪ੍ਰਤੀ ਏਕ.... (Read More)
ਰਾਇਆ ਫਸਲ ਦੀ ਬਿਜਾਈ ਅੱਧ ਅਕਤੂਬਰ ਤੋਂ ਨਵੰਬਰ ਦੇ ਅਖੀਰ ਤੱਕ ਕੀਤੀ ਜਾਂਦੀ ਹੈ RLM 619: ਇਕ ਕਿਸਮ ਸੇਂਜੂ ਅਤੇ ਬਰਾਨੀ ਦੋਵੇਂ ਇਲਾਕਿਆਂ ਵਿੱਚ ਲਗਾਈ ਜਾਂਦੀ ਹੈ ਇਹ 143 ਦਿਨਾਂ ਵਿੱਚ ਪੱਕਣ ਵਾਲੀ ਕਿਸਮ ਹੈ ਇਸ ਦਾ ਬੀਜ ਮੋਟਾ ਅਤੇ ਬੀਜਾਂ ਵਿੱਚ 43 % ਤੇਲ ਹੁੰਦਾ ਹੈ ਇਸ ਕਿਸਮ ਚਿੱਟੀ ਕੁੰਗੀ, ਮੁਰਝਾਉਣਾ ਅਤੇ ਚਿੱਟੇ ਧੱਬਿਆਂ ਦੇ ਰੋਗ ਨੂੰ ਸਹਾਰਣਯੋਗ ਹੈ ਇਸ ਦਾ ਔੌਸਤਨ ਝਾੜ 8 ਕੁਇੰਟਲ ਪ੍ਰਤੀ ਏਕੜ ਹੁੰਦਾ ਹੈ
PBR 91: ਇਹ ਕਿਸਮ 145 ਦਿਨਾ ਵਿੱਚ ਪੱਕ ਕੇ ਕਟਾਈ ਲਈ ਤਿਆਰ ਹੋ ਜਾਂਦੀ ਹੈ
ਇਹ ਮੁਰਝਾੳੇਣਾ, ਕੁੰਗੀ ਅਤੇ ਕੀੜੇ ਮਕੌੜਿਆਂ ਦੀ ਰੋਧਕ ਕਿਸਮ ਹੈ ਇਸ ਦਾ ਔਸਤਨ ਝਾੜ 8.1 ਕੁਇੰਟਲ ਪ੍ਰਤੀ ਏਕੜ ਹੈ
PBR 97: ਇਹ ਬਰਾਨੀ ਇਲਾਕਿਆ ਵਿੱਚ ਬੀਜਣ ਵਾਲੀ ਕਿਸਮ ਹੈ ਜੋ ਕਿ 136 ਦਿਨਾਂ ਵਿੱਚ ਪੱਕ ਜਾਂਦੀ ਹੈ ਇਹ ਇੱਕ ਦਰਮਿਆਨੇ ਅਤੇ ਮੋਟੇ ਬੀਜਾਂ ਵਾਲੀ ਕਿਸਮ ਹੈ ਅਤੇ ਇਸ ਵਿੱਚ ਤੇਲ ਦੀ ਮਾਤਰਾ 39.8 % ਹੁੰਦੀ ਹੈ ਇਸ ਦਾ ਔਸਤਨ ਝਾੜ 5.2 ਕੁਇੰਟਲ ਪ੍ਰਤੀ ਏਕੜ ਹੈ
PBR 210: ਇਹ ਕਿਸਮ ਸਹੀ ਸਮੇਂ ਅਤੇ ਸੇਂਜੂ ਖੇਤਰਾਂ ਵਿੱਚ ਉਗਾਉਣ ਦੇ ਯੋਗ ਹੈ ਇਹ ਕਿਸਮ 150 ਦਿਨਾਂ ਵਿੱਚ ਕਟਾਈ ਲਈ ਤਿਆਰ ਹੋ ਜਾਂਦੀ ਹੈ ਇਸ ਦਾ ਔਸਤਨ ਝਾੜ 6 ਕੁਇੰਟਲ ਪ੍ਰਤੀ ਏਕੜ ਹੈ
RCL 1: ਇਹ ਉੱਚੇ ਕੱਦ ਦੀ ਕਿਸਮ ਹੈ ਜੋ ਕਿ 152 ਦਿਨਾਂ ਵਿੱਚ ਪੱਕ ਕੇ ਕਟਾਈ ਲਈ ਤਿਆਰ ਹੁੰਦੀ ਹੈ ਇਸਾ ਦਾ ਅੋਸਤਨ ਝਾੜ 6.62 ਕੁਇੰਟਲ ਪ੍ਰਤੀ ਏਕੜ ਹੈ ਅਤੇ ਇਸ ਵਿੱਚ ਤੇਲ ਦੀ ਮਾਤਰਾ 37. 8 % ਹੁੰਦੀ ਹੈ

Posted by बालकृष्ण रजक
Madhya Pradesh
30-09-2019 03:20 PM
बालकृष्ण रजक जी खेत में पत्थर होने के कारण आप किसी पेड़ की बिजाई नहीं कर सकते क्युकी पेड़ की जड़ बहुत नीचे तक जाती है

Posted by Mayank Trivedi
Uttar Pradesh
30-09-2019 03:13 PM
Mayank ji kripya aap apna swal vistar se pooche taki aapko iske bare men poori jankari di ja sake.dhanywad
Posted by vikash saini
Uttar Pradesh
30-09-2019 03:13 PM
bhai sahib rajwa hara chaara te har 4kg dudh lai gau nu 1kg wadhya feed pao har 3 mahine baad pet ke kirhe nikalne ki dwaee deo

Posted by GURTEJ SINGH
Punjab
30-09-2019 03:12 PM
Gurtej ji tuci uss nu doctor ton check krwao ji jiss nal usdia fincia di janch krke sahi ilagg kita jaa skee.

Posted by Mayank Trivedi
Uttar Pradesh
30-09-2019 03:11 PM
मयंक जी चुकंदर की किस्मे जैसे Shubhra: यह किस्म स्वीडन देश में विकसित की गई है इसमें सुक्रॉस की मात्रा 18 प्रतिशत होती है और अशुद्धा गुणांक 330 होता है इसकी औसतन पैदावार 56-62 क्विंटल प्रति एकड़ होती है इस किस्म में पत्तों के धब्बा रोग होने की संभावना काफी कम होती है
Magna Poly: यह किस्म डेनमार्क देश में विकसित की गई है जो क.... (Read More)
मयंक जी चुकंदर की किस्मे जैसे Shubhra: यह किस्म स्वीडन देश में विकसित की गई है इसमें सुक्रॉस की मात्रा 18 प्रतिशत होती है और अशुद्धा गुणांक 330 होता है इसकी औसतन पैदावार 56-62 क्विंटल प्रति एकड़ होती है इस किस्म में पत्तों के धब्बा रोग होने की संभावना काफी कम होती है
Magna Poly: यह किस्म डेनमार्क देश में विकसित की गई है जो कि 56-62 क्विंटल प्रति एकड़ औसतन पैदावार देती है इसमें सुक्रॉस की मात्रा 14-16 प्रतिशत होती है और अशुद्धता गुणांक 880 होता है
Tribal: यह चुकंदर की विदेशी किस्म है जो कि 40 क्विंटल प्रति एकड़ औसतन पैदावार देती है इसमें सुक्रॉस की मात्रा 14-16 प्रतिशत होती है और इसमें अशुद्धता गुणांक 1178 होता है
IISR Compost: यह किस्म लखनऊ केंद्र द्वारा जारी की गई है इसकी औसतन पैदावार 37-40 क्विंटल प्रति एकड़ देती है इसमें सुक्रॉस की मात्रा 14-18 प्रतिशत होती है और अशुद्धता गुणांक 790 होता है
Romanskaya: यह किस्म रूस द्वारा जारी की गई है यह किस्म 140-150 दिनों में तैयार हो जाती है और 60-76 क्विंटल प्रति एकड़ औसतन पैदावार देती है इसमें 14-16 प्रतिशत सुक्रॉस की मात्रा होती है और अशुद्धता गुणांक 1180 होता है
Posted by ANRUDH
Madhya Pradesh
30-09-2019 03:08 PM
Anrudh ji aap iske uper M-45 @4 gram prati litre pani ke hisab se spray karen.yeh fungus ke karn hota hai.

Posted by Navjot singh
Punjab
30-09-2019 03:08 PM
tuci uss nu Kol-L liquid 100ml rojana 5 din tak deo ate Biotrim-Ds bolus 1-1 swere sham deo, tuci ehh treatment krke dekho, jekar iss nal frak nhi penda tan tuci ussdi tazi mokk apne nazdiki polly clinic vich laa jao ate uthe Egg test, worm test krwao, jiss nal usdi mokk da karan ptta lgg jawega.

Posted by preet ਅਹਿਰਾਣੀਆ
Punjab
30-09-2019 03:06 PM
Preet ji tuci ehna di nazdiki doctor ton janch krwao ehna di janch krke death da sahi karan ptaa lgg skda hai..
Posted by Angrej Singh
Punjab
30-09-2019 03:04 PM
ਪਾਲਕ ਦੀ ਬਿਜਾਈ ਪੂਰਾ ਸਾਲ ਕੀਤੀ ਜਾਂਦੀ ਹੈ ਸਰਦੀਆਂ ਵਿੱਚ, ਸਤੰਬਰ ਤੋਂ ਅਕਤੂਬਰ ਦਾ ਸਮਾਂ ਉਚਿੱਤ ਹੁੰਦਾ ਹੈ ਬਸੰਤ ਰੁੱਤ ਵਿੱਚ ਇਸਦੀ ਬਿਜਾਈ ਮੱਧ-ਫਰਵਰੀ ਤੋਂ ਅਪ੍ਰੈਲ ਵਿੱਚ ਕੀਤੀ ਜਾਂਦੀ ਹੈ
ਜੇਕਰ ਤੁਸੀ ਮੂਲੀ ਦੀ ਬਿਜਾਈ ਹੁਣ ਕਰਨੀ ਹੈ ਤਾ ਤੁਸੀ pusa chetki ਕਿਸਮ ਦੀ ਬਿਜਾਈ ਕਰ ਸਕਦੇ ਹੋ ਧੰਨਵਾਦ
Posted by avanish yadav
Uttar Pradesh
30-09-2019 03:02 PM
अच्छे जल निकास वाली हल्की या भारी, रेतली और चिकनी मिट्टी ज़मीनें इसके लिए अच्छी मानी जाती हैं खेत में पानी खड़ा ना होने दें, क्योंकि यह फसल खड़े पानी को सहने योग्य नहीं है प्रसिद्ध किस्में:- Punjab Haldi 1: यह मध्यम कद की, हरे और लंबे पत्तों वाली और मोटी गांठों वाली किस्म है इसका गुद्दा गहरे पीले रंग का और छिल्का भूरे रंग क.... (Read More)
अच्छे जल निकास वाली हल्की या भारी, रेतली और चिकनी मिट्टी ज़मीनें इसके लिए अच्छी मानी जाती हैं खेत में पानी खड़ा ना होने दें, क्योंकि यह फसल खड़े पानी को सहने योग्य नहीं है प्रसिद्ध किस्में:- Punjab Haldi 1: यह मध्यम कद की, हरे और लंबे पत्तों वाली और मोटी गांठों वाली किस्म है इसका गुद्दा गहरे पीले रंग का और छिल्का भूरे रंग का होता है यह किस्म 215 दिनों में पकती है और औसतन पैदावार 108 क्विंटल प्रति एकड़ है Punjab Haldi 2: यह लंबे कद की हरे और चौड़े पत्तों वाली और मोटी गांठ वाली किस्म है इसका गुद्दा पीले रंग का और छिल्का भूरे रंग का होता है यह किस्म 240 दिनों में पकती है और औसतन पैदावार 122 क्विंटल प्रति एकड़ है खेत को 2-3 बार जोत कर और सुहागे से समतल करके तैयार करें हल्दी की बिजाई के लिए बैड 15 सैं.मी. ऊंचे, 1 मीटर चौड़े और आवश्यकनुसार लंबे होने चाहिए दो बैडों के बीच 50 सैं.मी. का फासला होना चाहिए अधिक पैदावार लेने के लिए बिजाई अप्रैल के अंत में करें इसे पनीरी के साथ भी उगाया जा सकता है इसके लिए जून के पहले पखवाड़े तक पनीरी खेत में लगा दें पनीरी के लिए 35-45 दिनों के पौधों को खेत में लगा दें राईज़ोमस को पंक्तियों में बीजें और पंक्ति से पंक्ति का फासला 30 सैं.मी. और पौधों में 20 सैं.मी. का फासला रखें बिजाई के बाद खेत में 2.5 टन प्रति एकड़ स्ट्रा मलच डालें बीज की गहराई 3 सैं.मी. से ज्यादा नहीं होनी चाहिए इसकी बिजाई सीधे खेत में लगाकर या पनीरी लगाकर की जाती है बिजाई के लिए साफ-सुथरे ताजे और बीमारी रहित राईज़ोमस का प्रयोग करें बीज की मात्रा 6-8 क्विंटल प्रति एकड़ बहुत होती है बिजाई से पहले क्विनलफोस 25 ई.सी. को 20 मि.ली. + कार्बेनडाज़िम 10 ग्राम प्रति लीटर पानी में डालकर बीज का उपचार करें बाद में गांठों को 20 मिनट के लिए इस घोल में भिगोदें ताकि इन्हें फफूंद से बचाया जा सके नाइट्रोजन 10 किलो (25 किलो यूरिया), फासफोरस 10 किलो (60 किलो एस एस पी) और पोटाश 10 किलो (16 किलो म्यूरेट ऑफ पोटाश) की मात्रा प्रति एकड़ में प्रयोग करें सारी पोटाश और आधी फासफोरस बिजाई के समय डालें नाइट्रोजन दो हिस्सों में डालें, आधी बिजाई से 75 दिन बाद और बाकी नाइट्रोजन और आधी फासफोरस बिजाई के 3 महीने बाद डालें बिजाई के 2-3 दिनों के बाद पैंडीमैथालीन 30 ई.सी. 800 मि.ली. या मैटरीब्यूज़िन 70 डब्लयू पी 400 ग्राम को 200 लीटर पानी में डालकर स्प्रे करें नदीन नाशक के प्रयोग के बाद खेत को हरे पत्तों या धान की तूड़ी से ढक दें जड़ों के विकास के लिए बिजाई से 50-60 दिनों के बाद और फिर 40 दिनों के बाद जड़ों को मिट्टी लगाएं यह कम वर्षा वाली फसल है, इसलिए वर्षा के अनुसार सिंचाई करें हल्की ज़मीन में फसल को कुल 35-40 सिंचाइयों की जरूरत पड़ती है बिजाई के बाद फसल को 40-60 क्विंटल प्रति एकड़ हरे पत्तों से ढक दें हर बार खाद डालने के बाद 30 क्विंटल प्रति एकड़ मलच डालें किस्म के अनुसार 6-9 महीनों में कटाई करें पत्ते सूखने और पीले होने पर कटाई का अनुकूल समय होता है गांठों को उखाड़ कर बाहर निकालें और साफ करें गांठों को 2-3 दिनों के लिए छांव में सुखाएं इससे छिल्का सख्त हो जाता है और आसानी से उबलता है साफ करने के बाद गांठों को पानी में सोडियम बाइकार्बोनेट डालकर 1 घंटे के लिए उबालें गांठों को उबालने के लिए कड़ाही जैसे बर्तनों का प्रयोग करें अच्छी किस्म की हल्दी लेने के लिए झाग बनने, भाफ निकलने और महक आने तक उबालें उबालने के बाद इसे 10-15 दिनों तक सुखाएं सुखाने के बाद जाली, बोरियों या मशीन से चमकायें और आकार, बनतर और रंग के अनुसार बांटे
Posted by Rahul
Haryana
30-09-2019 03:01 PM
राहुल जी आप सरसो की किस्मे जैसे PBT 37: यह अगेती पकने वाली किस्म है जो कि 91 दिनों में पकती है यह तोरिया - गेहूं फसल चक्र के लिए अनुकूल है इस किस्म के बीज गहरे भूरे रंग के और मोटे होते हैं इसकी औसतन पैदावार 5.4 क्विंटल प्रति एकड़ है और तेल की मात्रा 41.7 प्रतिशत है TL 15: यह अगेती पकने वाली किस्म है यह 88 दिनों में पक जाती है इस.... (Read More)
राहुल जी आप सरसो की किस्मे जैसे PBT 37: यह अगेती पकने वाली किस्म है जो कि 91 दिनों में पकती है यह तोरिया - गेहूं फसल चक्र के लिए अनुकूल है इस किस्म के बीज गहरे भूरे रंग के और मोटे होते हैं इसकी औसतन पैदावार 5.4 क्विंटल प्रति एकड़ है और तेल की मात्रा 41.7 प्रतिशत है TL 15: यह अगेती पकने वाली किस्म है यह 88 दिनों में पक जाती है इसकी औसतन पैदावार 4.5 क्विंटल प्रति एकड़ है TL 17: यह किस्म 90 दिनों में पककर कटाई के लिए तैयार हो जाती है यह किस्म एक से ज्यादा फसलें उगाने के लिए अनुकूल है यह किस्म 5.2 क्विंटल प्रति एकड़ औसतन पैदावार देती है RLM 619: इस किस्म की सिंचित और बारानी क्षेत्रों में खेती करने के लिए सिफारिश की गई है यह किस्म 143 दिनों में कटाई के लिए तैयार हो जाती है इसके बीज मोटे होते हैं और इनमें 43 प्रतिशत तेल की मात्रा होती है यह किस्म सफेद कुंगी, झुलस रोग और पत्तों के निचले धब्बों की प्रतिरोधक है इसकी औसतन पैदावार 8 क्विंटल प्रति एकड़ होती है
PBR 91: यह किस्म 145 दिनों में कटाई के लिए तैयार हो जाती है यह झुलस रोग, कुंगी और कीटों के प्रतिरोधक है इसकी औसतन पैदावार 8.1 क्विंटल प्रति एकड़ होती है
PBR 97: यह किस्म बारानी हालातों में बोने के लिए उपयुक्त किसम है यह 136 दिनों में कटाई के लिए तैयार हो जाती है इसके दाने मध्यम मोटे होते हैं दानों में तेल की मात्रा 39.8 प्रतिशत होती है इसकी औसतन पैदावार 5.2 क्विंटल प्रति एकड़ होती है
PBR 210: यह किस्म सिंचित हालातों में और समय पर बोने के लिए उपयुक्त किस्म है यह 150 दिनों में कटाई के लिए तैयार हो जाती है इसकी औसतन पैदावार 6 क्विंटल प्रति एकड़ होती है
RLC 3: यह लंबी प्रकार की किस्म 145 दिनों में कटाई के लिए तैयार हो जाती है इसकी औसतन पैदावार 7.3 क्विंटल प्रति एकड़ होती है इसमें तेल की मात्रा 41.5 प्रतिशत होती है
Posted by Jagwinder Dhaliwal
Punjab
30-09-2019 03:00 PM
ਜੇਕਰ ਤੁਸੀ ਮੱਖੀ ਪਾਲਣ ਦਾ ਕਿੱਤਾ ਨਵੇ ਸਿਰੇ ਤੋਂ ਸ਼ੁਰੂ ਕਰਨਾ ਚਾਹੁੰਦੇ ਹੋਂ ਤਾਂ ਅਗਸਤ ਤੋਂ ਜਨਵਰੀ ਤੱਕ ਸ਼ੁਰੂ ਕੀਤਾ ਜਾ ਸਕਦਾ ਹੈ ਮੱਖੀ ਫਾਰਮ ਦੇ ਨੇੜੇ ਜੀ. ਟੀ. ਰੋਡ, ਰੇਲਵੇ ਲਾਈਨ ਅਤੇ ਟੈਲੀਫੋਨ ਜਾਂ ਬਿਜਲੀ ਦੀਆਂ ਤਾਰਾਂ ਦਾ ਜਾਲ ਨਾ ਹੋਵੇ ਫੁੱਲਾਂ ਤੋਂ ਮੱਖੀਆਂ ਨੂੰ ਨੈਕਟਰ (ਫੁੱਲਾਂ ਦਾ ਰਸ) ਅਤੇ ਪੋਲਨ ਮਿਲਦਾ ਹੈ ਜੋ ਕਿ ਮੱਖੀਆਂ ਦੀ ਖੁਰਾਕ ਹੁੰਦੇ ਹਨ ਵਾਧੂ ਸ਼ਹਿਦ ਇਕੱਠਾ ਕਰਨ ਲਈ ਫ.... (Read More)
ਜੇਕਰ ਤੁਸੀ ਮੱਖੀ ਪਾਲਣ ਦਾ ਕਿੱਤਾ ਨਵੇ ਸਿਰੇ ਤੋਂ ਸ਼ੁਰੂ ਕਰਨਾ ਚਾਹੁੰਦੇ ਹੋਂ ਤਾਂ ਅਗਸਤ ਤੋਂ ਜਨਵਰੀ ਤੱਕ ਸ਼ੁਰੂ ਕੀਤਾ ਜਾ ਸਕਦਾ ਹੈ ਮੱਖੀ ਫਾਰਮ ਦੇ ਨੇੜੇ ਜੀ. ਟੀ. ਰੋਡ, ਰੇਲਵੇ ਲਾਈਨ ਅਤੇ ਟੈਲੀਫੋਨ ਜਾਂ ਬਿਜਲੀ ਦੀਆਂ ਤਾਰਾਂ ਦਾ ਜਾਲ ਨਾ ਹੋਵੇ ਫੁੱਲਾਂ ਤੋਂ ਮੱਖੀਆਂ ਨੂੰ ਨੈਕਟਰ (ਫੁੱਲਾਂ ਦਾ ਰਸ) ਅਤੇ ਪੋਲਨ ਮਿਲਦਾ ਹੈ ਜੋ ਕਿ ਮੱਖੀਆਂ ਦੀ ਖੁਰਾਕ ਹੁੰਦੇ ਹਨ ਵਾਧੂ ਸ਼ਹਿਦ ਇਕੱਠਾ ਕਰਨ ਲਈ ਫੁੱਲਾਂ ਵਾਲੀਆਂ ਮੁੱਖ ਫਸਲਾਂ ਸਰ੍ਹੋਂ, ਤੋਰੀਆ, ਰਾਇਆ, ਗੋਭੀ ਸਰ੍ਹੋਂ, ਸਫੈਦਾ, ਬਰਸੀਮ, ਸੂਰਜਮੁਖੀ, ਲੀਚੀ, ਅਰਹਰ, ਟਾਹਲੀ, ਕਪਾਹ/ਨਰਮਾ ਆਦਿ ਹਨ ਜਿਨ੍ਹਾਂ ਇਲਾਕਿਆਂ ਵਿਚ ਇਹ ਫੁੱਲ-ਫੁਲਾਕੇ ਦੇ ਸੋਮੇ ਸਮੇਂ-ਸਮੇਂ ਸਿਰ ਮਿਲਦੇ ਹਨ, ਉਨ੍ਹਾਂ ਇਲਾਕਿਆਂ ਵਿਚ ਇਸ ਧੰਦੇ ਨੂੰ ਬਹੁਤ ਕਾਮਯਾਬੀ ਨਾਲ ਅਪਣਾਇਆ ਜਾ ਸਕਦਾ ਹੈ ਇਸ ਵਿੱਚ 100 ਮੱਖੀ ਦੇ ਬਕਸਿਆ ਤੋਂ ਤੁਸੀਂ ਔਸਤਨ 25000-30000 ਤੱਕ ਦਾ ਮੁਨਾਫਾ ਲੈ ਸਕਦੇ ਹੋਂ ਸ਼ੁਰੁਆਤ ਵਿੱਚ ਜੇਕਰ ਤੁਸੀਂ 100 ਬਕਸਿਆ ਨਾਲ ਕੰਮ ਸ਼ੁਰੂ ਕਰਦੇ ਹੋ ਤਾਂ ਔਸਤਨ 4-5 ਲੱਖ ਤੱਕ ਖਰਚਾ ਆਉਦਾ ਹੈ ਤੁਸੀ ਆਪਣੇ ਬੱਜਟ ਦੇ ਹਿਸਾਬ ਨਾਲ ਬਕਸਿਆ ਦੀ ਗਿਣਤੀ ਘੱਟ- ਵੱਧ ਵੀ ਕਰ ਸਕਦੇ ਹੋਂ ਬਾਕੀ ਜੇਕਰ ਇਸਦੀ ਟ੍ਰੇਨਿੰਗ ਲੈਕੇ ਸ਼ੁਰੂ ਕਰੋ ਤਾਂ ਵਧੀਆ ਰਹੇਗਾ ਟ੍ਰੇਨਿੰਗ ਲੈਣ ਲਈ ਤੁਸੀ ਆਪਣੇ ਜ਼ਿਲੇ ਦੇ ਕ੍ਰਿਸ਼ੀ ਵਿਗਿਆਨ ਕੇਂਦਰ ਤੇ ਗੁਰੂ ਅੰਗਦ ਦੇਵ ਵੈਨਟਰੀ ਯੂਨੀਵਰਸਿਟੀ ਲੁਧਿਆਣ ਵਿਖੇ ਟ੍ਰੇਨਿੰਗ ਲਈ ਫਾਰਮ ਭਰ ਕੇ ਆਓ ਉਸ ਤੋਂ ਬਾਅਦ ਜਦੋਂ ਅਗਲੀ ਟ੍ਰੇਨਿੰਗ ਹੋਈ ਤੁਹਾਨੂੰ ਕਾਲ ਕਰਕੇ ਦੱਸ ਦਿੱਤਾ ਜਾਂਦਾ ਹੈ ਬਾਕੀ ਜੇਕਰ ਬਕਸੇ ਚਾਹੀਦੇ ਹਨ ਤਾਂ ਤੁਸੀ ਮੈਨੂੰ 9417423111 ਨੰਬਰ ਤੇ ਕਾਲ ਕਰ ਸਕਦੇ ਹੋ ਜੀ.
Posted by madhusudan maraiya
Jharkhand
30-09-2019 02:56 PM
Madhusudan maraiya ji is sall (2019-20) ka MSP 1840/q hai, Thankyou.

Posted by Jatinder Singh Paul
Punjab
30-09-2019 02:55 PM
ਜਤਿੰਦਰ ਜੀ ਇਹ ਫੰਗਸ ਦੇ ਕਾਰਨ ਪੈਂਦੇ ਹਨ ਇਸਦੇ ਲਈ ਤੁਸੀ tilt @200ml ਨੂੰ ਪ੍ਰਤੀ ਏਕੜ ਦੇ ਹਿਸਾਬ ਨਾਲ ਸਪਰੇ ਕਰੋ ਧੰਨਵਾਦ
Posted by lakhwinder Singh
Punjab
30-09-2019 02:49 PM
Chicks lene ke lia aap Dr Dubey 9888802905, Dr Sukhminder singh 6280340082 (Guru Angad Dev Veterinary And Animal Sciences University Ludhiana) nal samparak kare. inse apko sari jankari mill jayegi.

Posted by anil nain
Rajasthan
30-09-2019 02:49 PM
अनिल जी आप गेंहू की किस्मे जैसे PBW 1 Zn: इस किस्म के पौधे का कद 103 सैं.मी. होता है फसल 151 दिनों में कटाई के लिए तैयार हो जाती है इसकी औसतन पैदावार 22.5 क्विंटल प्रति एकड़ होती है UNNAT PBW 343 : यह किस्म सिंचित क्षेत्रों और समय पर रोपाई के लिए उपयुक्त है पकने के लिए 155 दिनों का समय लेती है यह किस्म गर्दन तोड़ और जल जमाव के प्रतिरोधी .... (Read More)
अनिल जी आप गेंहू की किस्मे जैसे PBW 1 Zn: इस किस्म के पौधे का कद 103 सैं.मी. होता है फसल 151 दिनों में कटाई के लिए तैयार हो जाती है इसकी औसतन पैदावार 22.5 क्विंटल प्रति एकड़ होती है UNNAT PBW 343 : यह किस्म सिंचित क्षेत्रों और समय पर रोपाई के लिए उपयुक्त है पकने के लिए 155 दिनों का समय लेती है यह किस्म गर्दन तोड़ और जल जमाव के प्रतिरोधी है यह करनाल बंट के प्रतिरोधी और ब्लाईट को भी सहने योग्य है इसकी औसत पैदावार 23.2 क्विंटल प्रति एकड़ है
WH 542 : यह किस्म समय पर बुवाई करने और सिंचित क्षेत्रों के लिए उपयुक्त है यह धारी जंग, पत्ती जंग और करनाल बंट के लिए प्रतिरोधी है इसकी औसत पैदावार 20 क्विंटल प्रति एकड़ है PBW 725 : यह किस्म पंजाब कृषि विश्वविद्यालय द्वारा जारी की गई है यह एक बौनी प्रकार की किस्म है और समय पर बोयी जाने, सिंचित क्षेत्रों के लिए उपयुक्त है यह पीले और भूरे जंग की प्रतिरोधी है इसके दाने मोटे, सख्त और मध्यम गहरे रंग के होते हैं यह 155 दिनों के बाद कटाई के लिए तैयार हो जाती है इसकी औसत उपज 23 क्विंटल प्रति एकड़ है PBW 677 : यह किस्म 160 दिनों के बाद कटाई के लिए तैयार हो जाती है इसकी औसत उपज 22.4 क्विंटल प्रति एकड़ है HD 2851: यह किस्म समय पर उगाने योग्य किस्म है और सिंचित क्षेत्रों में उगाई जाती है यह किस्म 126-134 दिनों में पक जाती है और इस किस्म का कद 80-90 सैं.मी. होता है WHD - 912 : यह दोहरी छोटे कद की किस्म है जो उदयोग में बेकरी के लिए प्रयोग की जाती है इसमें प्रोटीन की मात्रा 12 प्रतिशत होती है यह किस्म पीले, भूरे जंग के साथ करनाल बंट के भी प्रतिरोधी है इसकी औसत उपज 21 क्विंटल प्रति एकड़ है HD 3043 : इस किस्म की औसत उपज 17.8 क्विंटल प्रति एकड़ है यह किस्म पत्तों के ऊपर पीले धब्बे और पीली धारियों की बीमारी से काफी हद तक रहित है इस किस्म से अच्छे ब्रैड का निर्माण होता है WH 1105 : इसकी खोज पंजाब खेतीबाड़ी यूनिवर्सिटी द्वारा की गई है यह एक छोटे कद की किस्म है जिसमें पौधे का औसतन कद 97 सैंमी तक होता हे इसके दाने सुनहरे, मध्यम, सख्त और चमकदार होते हैं यह पत्तों के पीलेपन और भूरेपन की बीमारी से रहित है परंतु यह दानों के खराब होने के प्रति संवेदनशील है यह लगभग 157 दिनों में पक जाती है इसकी औसतन पैदावार 23.1 क्विंटल प्रति एकड़ है
PBW 660 : पंजाब खेतीबाड़ी यूनिवर्सिटी द्वारा पंजाब राज्य के अधिक वर्षा वाले क्षेत्रों में गेंहूं की पैदावार बढ़ाने के लिए इसकी खोज की गई है यह एक छोटे कद वाली किस्म है जिस में पौधेका औसतन कद 100 सैंमी तक होता है इसके दाने सुनहरे, मध्यम, सख्त और चमकदार होते हैं और इससे अच्छी किस्म की रोटियां भी बनती है यह पत्तों के पीलेपन और भूरेपन की बीमारी से रहित होती है परंतु यह बालियों के भूरे पड़ने की बीमारी के प्रति संवेदनशील है यह लगभग 162 दिनों में पक जाती है इसकी औसत पैदावार 17.1 क्विंटल प्रति एकड़ है PBW-502 : यह किस्म पंजाब खेतीबाड़ी यूनिवर्सिटी द्वारा विकसित की गई है यह समय पर बोने और सिंचित क्षेत्रों के लिए उपयुक्त है यह धारी जंग और पत्ती जंग के प्रतिरोधी है HD 3086 (PusaGautam) : इसकी औसत पैदावार 23 क्विंटल प्रति एकड़ है यह पीली और भूरी जंग के प्रतिरोधी है अच्छे किस्म के बरैड बनाने के सभी गुण/तत्व इसमें मौजूद हैं

Posted by gurdas singh
Punjab
30-09-2019 02:47 PM

Posted by jitendra
Bihar
30-09-2019 02:46 PM
यदि संभव हो, तो आलू की रोपाई से पहले, हरी खाद वाली फसलें जैसे सनई, जंतर आदि फसलें उगायें और उन्हें मिट्टी में अच्छी तरह दबायें यदि हरी खाद उपलब्ध ना हो तो गली सड़ी रूड़ी की खाद या गाय का गला हुआ गोबर 60-80 क्विंटल प्रति एकड़ में खेत की तैयारी के समय रोपाई से दो सप्ताह पहले डालें
फसल की उचित वृद्धि के लिए नाइट्रोजन 40-50.... (Read More)
यदि संभव हो, तो आलू की रोपाई से पहले, हरी खाद वाली फसलें जैसे सनई, जंतर आदि फसलें उगायें और उन्हें मिट्टी में अच्छी तरह दबायें यदि हरी खाद उपलब्ध ना हो तो गली सड़ी रूड़ी की खाद या गाय का गला हुआ गोबर 60-80 क्विंटल प्रति एकड़ में खेत की तैयारी के समय रोपाई से दो सप्ताह पहले डालें
फसल की उचित वृद्धि के लिए नाइट्रोजन 40-50 किलो (90-110 किलो यूरिया), फासफोरस 24-32 किलो (150-200 किलो सिंगल सुपर फासफेट) और पोटाश 40-50 किलो (66-85 किलो म्यूरेट ऑफ पोटाश) की मात्रा प्रति एकड़ में डालें
बिजाई के समय नाइट्रोजन का 3/4 हिस्सा और फासफोरस और पोटाश की पूरी मात्रा डालें बाकी बचा हुआ नाइट्रोजन का 1/4 हिस्सा बिजाई से 35-40 दिन बाद जड़ों में मिट्टी लगाने के समय डालें
जड़ों के साथ मिट्टी लगाना : मिट्टी में सही हवा, पानी और तापमान बनाए रखने के लिए यह काम बहुत जरूरी है ताकि फसल का विकास अच्छा हो सके आलुओं के अच्छे विकास के लिए पौधे की जड़ों के साथ मिट्टी लगाएं मिट्टी को अच्छी तरह से पौधे के आधार पर डाला जाता है जिससे गांठे अच्छे से बनने में मदद मिलती है यह काम पौधों के 15-20 सैं.मी. कद होने पर करें यदि जरूरत पड़े तो पहली बार मिट्टी लगाने के दो सप्ताह बाद दूसरी बार फिर मिट्टी लगाएं यह काम कही से हाथों के द्वारा या बड़े क्षेत्रों में मोल्ड बोर्ड या रिज़र की सहायता से किया जा सकता है
Posted by harjinder singh khehra
Punjab
30-09-2019 02:46 PM
Harjinder ji tuhade swala de jwab de ditte gye hai tuci App vich apne swala de jwab dekh skde ho..
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