
Posted by ankush
Uttarakhand
03-10-2019 10:25 AM
amkush ji yeh fungus ke karn hote hai iske liye aap copper oxychloride@3 gram ko prati litre pani ke hisab se spray karen.dhanywad
Posted by दिनेश नायक
Madhya Pradesh
03-10-2019 10:20 AM
divesh ji koshish kre ki faltu pani khet se bahr nikale aur khet mein fungicide jaise carbendazim@400 gram ki prati acre ke hisab se spray karen, dhanywad
Posted by Neeraj Kamboj
Madhya Pradesh
03-10-2019 10:17 AM
नीरज जी यह फंगस के कारण होता है इसके लिए आप tilt @200 ml को प्रति एकड़ के हिसाब से स्प्रे करें धन्यवाद

Posted by guggu singh
Punjab
03-10-2019 10:15 AM
guugu ji kirpa karke swal vistar nal pucho ke tuc kehdi fasl vich keet di roktham bare jankari laina chahunde ho ta jo tuhanu is bare poori jankari diti ja sake.dhanywad
Posted by harry
Punjab
03-10-2019 10:14 AM
harry ji hare chare de layi isda austan jhaad 325 quintal prati acre hunda hai.dhanwad

Posted by ਸੁਖਚੈਨ ਸਿੰਘ
Punjab
03-10-2019 10:07 AM
sukhchain ji ehna di alag alag varto karo ehna di ikathe varto karn nal fasl nu nuksaan vi ho sakda hai.kirpa karke ehna di alag alag varto karo.dhanwad

Posted by Sunil Tiwari
Uttar Pradesh
03-10-2019 10:04 AM
Kripya aap apna swal vistar se pushen ki apke dhan mein kya smasia aa rahi hai tan jo apko uske bare mein sahi jankari di jaa skee.
Posted by ROCKY KASHYAP
Uttar Pradesh
03-10-2019 09:55 AM
रॉकी जी कृपया बताएं कि आपने इसमें अभी क्या क्या डाला है ताकि आपको इसके बारे में पूरी जानकारी दी जा सके धन्यवाद

Posted by chetan sharma
Madhya Pradesh
03-10-2019 09:55 AM
शर्मा जी कृप्या आप अपना सवाल विस्तार से पूछें कि आप क्या जानकारी लेना चाहते है ताकि आपको सही जानकारी दी जा सके

Posted by Arshdeep singh
Punjab
03-10-2019 09:51 AM
Arshdeep ji Layer poultry me agar aapne commercial level par kaam shuru karna hai to venkeys ki BV300 breed besh hai ji agar aapne chote level par kam karna hai to RIR breed thik rahegi ji.
Posted by muskan
Chattisgarh
03-10-2019 09:47 AM
muskan ji iske uper aap mashar ka hamla check karen agar maujood hai to aap iske uper imidacloprid@60ml ko prtai acre ke hisab se spray karen.dhanywad
Posted by Sandeep Chauhan
Punjab
03-10-2019 09:45 AM
sandeep ji vaise ta hun koi spray karn di lod nahi hai par jekar daane kaale hunde ja dodi rog painda dikhya ta tuc tilt@200ml nu prati acre de hisab nal spray kar deo.dhanwad
Posted by Hardial Singh
Punjab
03-10-2019 09:43 AM
hardial ji jhona kina k nisreya hoya hai kirpa karke daso ta jo tuhanu is bare poori jankari diti ja sake.dhanywad
Posted by Rajendra Kumar
Uttarakhand
03-10-2019 09:38 AM

Posted by Harjeet Singh
Haryana
03-10-2019 09:38 AM
Harjeet ji kripya aap apna swal vistar se pooche taki aapko iske bare men poori jankari di ja sake.dhanywad
Posted by ਹਰਵਿੰਦਰ ਸਿੰਘ ਬਰਾੜ
Punjab
03-10-2019 09:36 AM
eh saint bernard dog breed he ji tuci iss nasal de dog ton cross krwao ji..
Posted by Rajendra Kumar
Uttarakhand
03-10-2019 09:35 AM

Posted by akash kumar
Haryana
03-10-2019 09:18 AM
Akash ji aap iss no per mere sath sampark 9416165594 kr skte hai .

Posted by Ravi Jain
Punjab
03-10-2019 09:17 AM
Ravi Jain ji Super Napier grass Seed lai tusi R K Singh 9888413150 se samparak kare, Thankyou.
Posted by Rajesh kumar
Uttar Pradesh
03-10-2019 09:16 AM
rajesh ji kripya aap swal vistar se pooche aur kisam ka poora nam btaye taki aapko uske hisab se jankari di ja sake.dhanywad

Posted by harmanjit singh gill
Punjab
03-10-2019 09:09 AM
Harmanjit singh gill ji kadaknath chicks lene ke lia aap Dalwinder Singh 9041009671 Papu Hachery Farmse samparak kar sakte hai, Thankyou.
Posted by धर्मेन्द्र कुमार
Uttar Pradesh
03-10-2019 09:06 AM
बटेर पालन एक लाभदायक व्यवसाय है कई स्थानों, विशेष कर बड़े शहरों के नज़दीक कई किसानों ने बटेर पालन का व्यवसाय शुरू किया है यह मुर्गी पालन से मिलता जुलता काम ही है बटेर पालन से जुड़ी कुछ आम जानकारी आपसे शेयर कर रहे हैं
1.यह बहुत छोटा पक्षी होने के कारण इस काम को शुरू करने के लिए कम जगह की जरूरत होती है उदाहरण क.... (Read More)
बटेर पालन एक लाभदायक व्यवसाय है कई स्थानों, विशेष कर बड़े शहरों के नज़दीक कई किसानों ने बटेर पालन का व्यवसाय शुरू किया है यह मुर्गी पालन से मिलता जुलता काम ही है बटेर पालन से जुड़ी कुछ आम जानकारी आपसे शेयर कर रहे हैं
1.यह बहुत छोटा पक्षी होने के कारण इस काम को शुरू करने के लिए कम जगह की जरूरत होती है उदाहरण के तौर पर 5-6 पक्षियों के लिए 1 वर्ग फीट जगह की आवश्यकता होती है
2.खुराक की खप्त भी कम होती है, सिर्फ 20-25 ग्राम प्रति पक्षी रोज़ाना
3.बटेर के अंडे और मांस में अमीनो अम्ल, विटामिन, चर्बी और धातु आदि पदार्थ उपलब्ध रहते हैं
4.बटेर पालन में, 5 सप्ताह का पक्षी मीट के लिए तैयार हो जाता है और 6-7 सप्ताह में अंडे देना शुरू कर देता है
5.मुर्गियों की बजाय बटेरों में छूत की बीमारियां कम होती हैं बीमारियों की रोकथाम के लिए मुर्गी पालन की तरह इनमें किसी प्रकार का टीका लगाने की जरूरत नहीं है
6.बटेर हर वर्ष तीन से चार पीढ़ियों को जन्म दे सकने की क्षमता रखती है
7.इसका मीट मुर्गे से काफी अधिक स्वाद और पोष्टिक होता है हेचरी में 35 से 40 दिनों में बटेरें खाने योग्य हो जाती हैं एक अंडा पांच रूपये में बिकता है
जापानी बटेर और इसे पालने की सिखलाई चंडीगढ़ के केंद्रीय मुर्गी पालन संस्था (Central Poultry Development Organization (Northern Region) की तरफ से करवायी जाती है अन्य जानकारी के लिए वैबसाइट http://cpdonrchd.gov.in पर जाकर इसकी सिखलाई और ट्रेनिंग के बारे में पता कर सकते हैं

Posted by Inshad Ali
Uttar Pradesh
03-10-2019 09:06 AM
Inshad Ali ji kripya aap apna swal vistar se pooche taki aapko iske bare mein poori jankari di ja sake.dhanywad

Posted by hr me panchu
Rajasthan
03-10-2019 09:05 AM
पंचू जी आप इसके ऊपर NPK 130045 एक किलो को 150 लीटर पानी के हिसाब से स्प्रे करें धन्यवाद
Posted by nagjibhai rathva
Gujarat
03-10-2019 08:55 AM
स्टार फल की खेती में उर्वरक:- इस फल की फसल को अच्छे आर्गेनिक पदार्थों की आवश्यकता होती है प्रति पौधा 50 किलोग्राम अच्छी तरह से गली सदी रूडी की खाद से फलों की अच्छी गुणवत्ता और बेहतर उपज होगी कोई विशिष्ट उर्वरक नहीं बताया गया हालांकि, पौधों की अच्छी वृद्धि के लिए नाइट्रोजन (N) और फॉस्फेटिक उर्वरकों को प्रयोग क.... (Read More)
स्टार फल की खेती में उर्वरक:- इस फल की फसल को अच्छे आर्गेनिक पदार्थों की आवश्यकता होती है प्रति पौधा 50 किलोग्राम अच्छी तरह से गली सदी रूडी की खाद से फलों की अच्छी गुणवत्ता और बेहतर उपज होगी कोई विशिष्ट उर्वरक नहीं बताया गया हालांकि, पौधों की अच्छी वृद्धि के लिए नाइट्रोजन (N) और फॉस्फेटिक उर्वरकों को प्रयोग करें इन उर्वरकों की मात्रा मिट्टी की उर्वरता और पौधों की उम्र पर निर्भर करती है, इसके लिए आप नज़दीकी बागवानी या कृषि विभाग से संपर्क करें

Posted by tinnu
Rajasthan
03-10-2019 08:53 AM
मोती की खेती एक बहुत ही अच्छा व्यवसाय है इस व्यवसाय को शुरू करने के लिए सबसे जरुरी है इसकी ट्रेनिंग, क्योकि इसमें बहुत सी ऐसी बारीकियें होती है जो हमें प्रेक्टिकल ट्रेनिंग में ही सीखने को मिलती है अगर आप इसकी ट्रेनिंग लेना चाहते है तो आप ग्लिटराटी पर्ल फार्मिंग ट्रेनिंग केंद्र प्रशिक्षण कार्य कर्म आयोजि.... (Read More)
मोती की खेती एक बहुत ही अच्छा व्यवसाय है इस व्यवसाय को शुरू करने के लिए सबसे जरुरी है इसकी ट्रेनिंग, क्योकि इसमें बहुत सी ऐसी बारीकियें होती है जो हमें प्रेक्टिकल ट्रेनिंग में ही सीखने को मिलती है अगर आप इसकी ट्रेनिंग लेना चाहते है तो आप ग्लिटराटी पर्ल फार्मिंग ट्रेनिंग केंद्र प्रशिक्षण कार्य कर्म आयोजित किया जा रहा है प्रशिक्षण कार्य कर्म में भाग लेने के लिए नीचे दिए गए नम्बर पर आज ही संपर्क करें और Rs 250/ से अपना रजिस्ट्रेशन करवाए अचल सिंह (फाउंडर )- 9711858258. धन्यवाद
Posted by शरिफ
Rajasthan
03-10-2019 08:51 AM
शरिफ जी कृपया आप अपना सवाल विस्तार से पूछे ताकि आपको इसके बारे में पूरी जानकारी दी जा सके धन्यवाद
Posted by Raushan Kumar
Bihar
03-10-2019 08:26 AM
Raushan ji apki photo ke hisab se yeh sahiwal nasal ki hai.

Posted by gurpal singh
Punjab
03-10-2019 08:23 AM
isde vare jankari lai ate chicks lenn lai tuci mere nal sampark kr 97815 89637 skde ho.
Posted by Devendra singh thakur
Madhya Pradesh
03-10-2019 08:21 AM
यह फसल काफी तरह की मिट्टी में उगाई जाती है चने की खेती के लिए रेतली या चिकनी मिट्टी बहुत अनुकूल मानी जाती है घटिया निकास वाली ज़मीन इसकी बिजाई के लिए अनुकूल नहीं मानी जाती खारी या नमक वाली ज़मीन भी इसके लिए अच्छी नहीं मानी जाती इसके विकास के लिए 5.5 से 7 पी एच वाली मिट्टी अच्छी होती है हर साल एक खेत में एक ही फसल ना .... (Read More)
यह फसल काफी तरह की मिट्टी में उगाई जाती है चने की खेती के लिए रेतली या चिकनी मिट्टी बहुत अनुकूल मानी जाती है घटिया निकास वाली ज़मीन इसकी बिजाई के लिए अनुकूल नहीं मानी जाती खारी या नमक वाली ज़मीन भी इसके लिए अच्छी नहीं मानी जाती इसके विकास के लिए 5.5 से 7 पी एच वाली मिट्टी अच्छी होती है हर साल एक खेत में एक ही फसल ना बोयें अच्छा फसली चक्र अपनायें अनाज वाली फसलों को फसल चक्र में प्रयोग करने से ज़मीन से लगने वाली बीमारियां रोकने में मदद मिलती है आमतौर पर फसल चक्र में खरीफ के सफेद चने, खरीफ के काले चने + गेहूं /जौं/राया, चरी-चने, धान/मक्की-चने आदि फसलें आती हैं C 235: यह किस्म तकरीबन 145-150 दिनों में पक जाती है यह किस्म तना गलन और झुलस रोग को सहनेयोग्य है इसके दाने दरमियाने आकार के और पीले-भूरे रंग के होते हैं इसकी औसतन पैदावार 8.4-10 क्विंटल प्रति एकड़ होती है G 24: यह दरमियानी फैलने वाली किस्म है और बारानी क्षेत्रों के लिए अनुकूल है यह किस्म तकरीबन 140-145 दिनों में पक जाती है इसकी औसतन पैदावार 10-12 क्विंटल प्रति एकड़ होती है G 130: यह दरमियाने अंतराल की किस्म है इसकी औसतन पैदावार 8-12 क्विंटल प्रति एकड़ होती है Pant G 114: यह किस्म तकरीबन 150 दिनों में पक जाती है यह झुलस रोग की रोधक किस्म है इसकी औसतन पैदावार 12-14 क्विंटल प्रति एकड़ होती है C 104: यह काबुली चने की किस्म है, जो कि पंजाब और उत्तर प्रदेश के लिए अनुकूल है इसकी औसतन पैदावार 6-8 क्विंटल प्रति एकड़ होती है Pusa 209: यह किस्म तकरीबन 140-165 दिनों में पक जाती है इसकी औसतन पैदावार 10-12 क्विंटल प्रति एकड़ होती है चने की फसल के लिए ज्यादा समतल बैडों की जरूरत नहीं होती यदि इसे मिक्स फसल के तौर पर उगाया जाये तो खेत की अच्छी तरह से जोताई होनी चाहिए यदि इस फसल को खरीफ की फसल के तौर पर बीजना हो, तो खेत की मॉनसून आने पर गहरी जोताई करें, जो बारिश के पानी को संभालने में मदद करेगा बिजाई से पहले खेत की एक बार जोताई करें यदि मिट्टी में नमी की कमी नज़र आये तो बिजाई से एक सप्ताह पहले सुहागा फेरें बारानी हालातों के लिए 10 अक्तूबर से 25 अक्तूबर तक पूरी बिजाई करें सिंचित हालातों के लिए 25 अक्तूबर से 10 नवंबर तक देसी और काबुली चने की किस्मों की बिजाई करें सही समय पर बिजाई करनी जरूरी है क्योंकि अगेती बिजाई से अनआवश्यक विकास का खतरा बढ़ जाता है पिछेती बिजाई से पौधों में सूखा रोग का खतरा बढ़ जाता है, पौधे का विकास घटिया और जड़ें भी उचित ढंग से नहीं बढ़ती बीजों के बीच की दूरी 10 सैं.मी. और पंक्तियों के बीच की दूरी 30-40 सैं.मी. होनी चाहिए बीज को 10-12.5 सैं.मी. गहरा बीजना चाहिए उत्तरी भारत में इसकी बिजाई पोरा ढंग से की जाती है देसी किस्मों के लिए 15-18 किलो बीज प्रति एकड़ डालें और 37 किलो बीज प्रति एकड़ काबुली किस्मों के लिए डालें यदि बिजाई नवंबर के दूसरे पखवाड़े में की जाए तो 27 किलो बीज प्रति एकड़ डालें और यदि बिजाई दिसंबर के पहले पखवाड़े में की जाए तो 36 किलो बीज प्रति एकड़ डालें ट्राइकोडरमा 2.5 किलो प्रति एकड़ + गला हुआ गोबर 50 किलो मिलाएं और फिर जूट की बोरियों से ढक दें फिर इस घोल को नमी वाली ज़मीन पर बिजाई से पहले खिलार दें इससे मिट्टी में पैदा होने वाली बीमारियों को रोका जा सकता है बीजों को मिट्टी में पैदा होने वाली बीमारियों से बचाने के लिए फफूंदीनाशक जैसे कि कार्बेनडाज़िम 12 प्रतिशत + मैनकोज़ेब 63 प्रतिशत डब्लयू पी (साफ) 2 ग्राम से प्रति किलो बीजों को बिजाई से पहले उपचार करें दीमक वाली ज़मीन पर बिजाई के लिए बीजों को क्लोरपाइरीफॉस 20 ई सी 10 मि.ली. से प्रति किलो बीजों का उपचार करें बीजों का मैसोराइज़ोबियम से टीकाकरण करें इससे चने की पैदावार 7 प्रतिशत तक वृद्धि होती है इस तरह करने के लिए बीजों को पानी में भिगोकर, उन पर मैसोराइज़ोबियम डालें टीकाकरण से बीजों को छांव में सुखाएं देसी किस्मों के लिए सिंचित और असिंचित इलाकों में नाइट्रोजन (यूरिया 13 किलो) और फासफोरस (सुपर फासफेट 50 किलो) प्रति एकड़ के हिसाब से बिजाई के समय डालें जबकि काबुली चने की किस्मों के लिए, बिजाई के समय 13 किलो यूरिया और 100 किलो सुपर फासफेट प्रति एकड़ डालें खादों की ज्यादा अच्छे प्रयोग के लिए खादों को खालियों में 7-10 सैं.मी. की गहराई पर बोयें सिंचित हालातों में बिजाई से पहले एक बार पानी दें इससे बीज अच्छे ढंग से अंकुरित होते हैं और फसल की वृद्धि भी अच्छी होती है दूसरी बार पानी फूल आने से पहले और तीसरा पानी फलियों के विकास के समय डालें अगेती वर्षा होने पर सिंचाई देरी से और आवश्यकतानुसार करें अनआवश्यक पानी देने से फसल का विकास और पैदावार कम हो जाती है यह फसल पानी के ज्यादा खड़े रहने को सहन नहीं कर सकती, इसके लिए अच्छे निकास का भी प्रबंध करें

Posted by Sajandeep singh Batth
Punjab
03-10-2019 08:21 AM
Sajandeep ji kirpa karke swal vistar nal pucho ta jo tuhanu is bare poori jankari diti ja sake,dhanwad
Posted by Raushan Kumar
Bihar
03-10-2019 08:19 AM
Rausahn ji ek saal ke bad to amle ka ped fal nahi deta yeh agar kalm se lgaya jata to 3-4 saal tak fal deta hai.dhanywad
Posted by Nishan Singh
Punjab
03-10-2019 08:17 AM
nishan ji tuc isda koi nuksaan ta nahi hai par isda beej agle saal layi nahi rakhya ja sakda kyuki eh hybrid kisman han.dhanwad
Posted by Anil Kumar
Uttarakhand
03-10-2019 08:15 AM
Anil Kumar ji Hydroponics ke bare me puri jankari or is ki training ke lia aap Vikas Mishra 9807528308 se samparak kar sakte hai, Thankyou.
Posted by Iqbal singh
Punjab
03-10-2019 08:09 AM
ਇਹ ਤਣੇ ਦੇ ਗੜੂਏ ਦੇ ਕਾਰਨ ਹੁੰਦਾ ਹੈ ਇਸ ਕੀਟਾਣੂ ਦਾ ਲਾਰਵਾ ਝੋਨੇ ਦੇ ਪੌਦੇ ਦੇ ਬਣ ਰਹੇ ਸਿੱਟੇ ਦੀ ਗੋਭ ਵਿਚ ਵੜ ਕੇ ਉਸ ਨੂੰ ਖਾ ਜਾਂਦਾ ਹੈ ਜਿਸ ਨਾਲ ਸਿੱਟਾ ਹੋਲੀ ਹੋਲੀ ਸੁੱਕ ਕੇ ਖਾਲੀ ਹੋ ਜਾਂਦਾ ਹੈ ਜੋ ਬਾਅਦ ਵਿਚ ਚਿੱਟੇ ਰੰਗ ਵਿਚ ਤਬਦੀਲ ਹੋ ਜਾਂਦਾ ਹੈ ਰੋਕਥਾਮ : ਜੇਕਰ ਇਸ ਦੇ ਹਮਲੇ ਦੇ ਲੱਛਣ ਦਿਖਾਈ ਦੇਣ ਤਾਂ ਫਸਲ ਉਤੇ ਕਾਰਟਾਈਪ ਹਾਈਡ੍ਰੋਕਲੋਰਾਇਡ 170 ਗ੍ਰਾਮ ਜਾਂ ਟਰਾਈਜ਼ੋਫੋਸ 350 ਮਿ.... (Read More)
ਇਹ ਤਣੇ ਦੇ ਗੜੂਏ ਦੇ ਕਾਰਨ ਹੁੰਦਾ ਹੈ ਇਸ ਕੀਟਾਣੂ ਦਾ ਲਾਰਵਾ ਝੋਨੇ ਦੇ ਪੌਦੇ ਦੇ ਬਣ ਰਹੇ ਸਿੱਟੇ ਦੀ ਗੋਭ ਵਿਚ ਵੜ ਕੇ ਉਸ ਨੂੰ ਖਾ ਜਾਂਦਾ ਹੈ ਜਿਸ ਨਾਲ ਸਿੱਟਾ ਹੋਲੀ ਹੋਲੀ ਸੁੱਕ ਕੇ ਖਾਲੀ ਹੋ ਜਾਂਦਾ ਹੈ ਜੋ ਬਾਅਦ ਵਿਚ ਚਿੱਟੇ ਰੰਗ ਵਿਚ ਤਬਦੀਲ ਹੋ ਜਾਂਦਾ ਹੈ ਰੋਕਥਾਮ : ਜੇਕਰ ਇਸ ਦੇ ਹਮਲੇ ਦੇ ਲੱਛਣ ਦਿਖਾਈ ਦੇਣ ਤਾਂ ਫਸਲ ਉਤੇ ਕਾਰਟਾਈਪ ਹਾਈਡ੍ਰੋਕਲੋਰਾਇਡ 170 ਗ੍ਰਾਮ ਜਾਂ ਟਰਾਈਜ਼ੋਫੋਸ 350 ਮਿਲੀਲੀਟਰ ਜਾ ਇਕ ਲੀਟਰ ਕਲੋਰਪਾਈਰੀਫੋਸ ਦੇ ਪੇਸਟ ਨੂੰ 100 ਲੀਟਰ ਪਾਣੀ ਵਿਚ ਮਿਲਾ ਕੇ ਪ੍ਰਤੀ ਏਕੜ ਦੇ ਹਿਸਾਬ ਨਾਲ ਛਿੜਕਾਅ ਕਰਨਾ ਚਾਹੀਦਾ ਹੈ

Posted by tulsiram hatta bhidari
Madhya Pradesh
03-10-2019 08:02 AM
बटेर पालन एक लाभदायक व्यवसाय है कई स्थानों, विशेष कर बड़े शहरों के नज़दीक कई किसानों ने बटेर पालन का व्यवसाय शुरू किया है यह मुर्गी पालन से मिलता जुलता काम ही है बटेर पालन से जुड़ी कुछ आम जानकारी आपसे शेयर कर रहे हैं 1.यह बहुत छोटा पक्षी होने के कारण इस काम को शुरू करने के लिए कम जगह की जरूरत होती है उदाहरण के त.... (Read More)
बटेर पालन एक लाभदायक व्यवसाय है कई स्थानों, विशेष कर बड़े शहरों के नज़दीक कई किसानों ने बटेर पालन का व्यवसाय शुरू किया है यह मुर्गी पालन से मिलता जुलता काम ही है बटेर पालन से जुड़ी कुछ आम जानकारी आपसे शेयर कर रहे हैं 1.यह बहुत छोटा पक्षी होने के कारण इस काम को शुरू करने के लिए कम जगह की जरूरत होती है उदाहरण के तौर पर 5-6 पक्षियों के लिए 1 वर्ग फीट जगह की आवश्यकता होती है 2.खुराक की खप्त भी कम होती है, सिर्फ 20-25 ग्राम प्रति पक्षी रोज़ाना 3.बटेर के अंडे और मांस में अमीनो अम्ल, विटामिन, चर्बी और धातु आदि पदार्थ उपलब्ध रहते हैं 4.बटेर पालन में, 5 सप्ताह का पक्षी मीट के लिए तैयार हो जाता है और 6-7 सप्ताह में अंडे देना शुरू कर देता है 5.मुर्गियों की बजाय बटेरों में छूत की बीमारियां कम होती हैं बीमारियों की रोकथाम के लिए मुर्गी पालन की तरह इनमें किसी प्रकार का टीका लगाने की जरूरत नहीं है 6.बटेर हर वर्ष तीन से चार पीढ़ियों को जन्म दे सकने की क्षमता रखती है 7.इसका मीट मुर्गे से काफी अधिक स्वाद और पोष्टिक होता है हेचरी में 35 से 40 दिनों में बटेरें खाने योग्य हो जाती हैं एक अंडा पांच रूपये में बिकता है जापानी बटेर और इसे पालने की सिखलाई चंडीगढ़ के केंद्रीय मुर्गी पालन संस्था (Central Poultry Development Organization (Northern Region) की तरफ से करवायी जाती है अन्य जानकारी के लिए वैबसाइट http://cpdonrchd.gov.in पर जाकर इसकी सिखलाई और ट्रेनिंग के बारे में पता कर सकते हैं

Posted by bhagwant Singh chahal
Punjab
03-10-2019 08:02 AM
ਤੁਸੀ ਇਸਦੀ ਬੱਚੇਦਾਨੀ ਵਿਚ Utrawin-oz ਦਵਾਈ 30 ਮਿਲੀ ਅਤੇ ਉਸ ਵਿਚ Metro IV drip 50ml ਮਿਕਸ ਕਰੋ ਅਤੇ ਇਸ ਤ੍ਰਾਹ ਕਰਕੇ 3 ਦਿਨ ਭਰਵਾਓ ਅਤੇ
Powder Mac-sure-L 1kg 100gm ਰੋਜਾਨਾ ਦਿਉ

Posted by tulsiram hatta bhidari
Madhya Pradesh
03-10-2019 07:59 AM
बटेर पालन एक लाभदायक व्यवसाय है कई स्थानों, विशेष कर बड़े शहरों के नज़दीक कई किसानों ने बटेर पालन का व्यवसाय शुरू किया है यह मुर्गी पालन से मिलता जुलता काम ही है बटेर पालन से जुड़ी कुछ आम जानकारी आपसे शेयर कर रहे हैं 1.यह बहुत छोटा पक्षी होने के कारण इस काम को शुरू करने के लिए कम जगह की जरूरत होती है उदाहरण के त.... (Read More)
बटेर पालन एक लाभदायक व्यवसाय है कई स्थानों, विशेष कर बड़े शहरों के नज़दीक कई किसानों ने बटेर पालन का व्यवसाय शुरू किया है यह मुर्गी पालन से मिलता जुलता काम ही है बटेर पालन से जुड़ी कुछ आम जानकारी आपसे शेयर कर रहे हैं 1.यह बहुत छोटा पक्षी होने के कारण इस काम को शुरू करने के लिए कम जगह की जरूरत होती है उदाहरण के तौर पर 5-6 पक्षियों के लिए 1 वर्ग फीट जगह की आवश्यकता होती है 2.खुराक की खप्त भी कम होती है, सिर्फ 20-25 ग्राम प्रति पक्षी रोज़ाना 3.बटेर के अंडे और मांस में अमीनो अम्ल, विटामिन, चर्बी और धातु आदि पदार्थ उपलब्ध रहते हैं 4.बटेर पालन में, 5 सप्ताह का पक्षी मीट के लिए तैयार हो जाता है और 6-7 सप्ताह में अंडे देना शुरू कर देता है 5.मुर्गियों की बजाय बटेरों में छूत की बीमारियां कम होती हैं बीमारियों की रोकथाम के लिए मुर्गी पालन की तरह इनमें किसी प्रकार का टीका लगाने की जरूरत नहीं है 6.बटेर हर वर्ष तीन से चार पीढ़ियों को जन्म दे सकने की क्षमता रखती है 7.इसका मीट मुर्गे से काफी अधिक स्वाद और पोष्टिक होता है हेचरी में 35 से 40 दिनों में बटेरें खाने योग्य हो जाती हैं एक अंडा पांच रूपये में बिकता है जापानी बटेर और इसे पालने की सिखलाई चंडीगढ़ के केंद्रीय मुर्गी पालन संस्था (Central Poultry Development Organization (Northern Region) की तरफ से करवायी जाती है अन्य जानकारी के लिए वैबसाइट http://cpdonrchd.gov.in पर जाकर इसकी सिखलाई और ट्रेनिंग के बारे में पता कर सकते हैं

Posted by prem cheema
Punjab
03-10-2019 07:54 AM
Prem ji eh fruit fly de karn hunda hai isdi roktham de layi feneval 1 ml nu prati litre pani de hisab nal spray karo ate neeche digge hoye fal ikathe krke dba deo.dhanwad

Posted by gurlal singh
Punjab
03-10-2019 07:52 AM
gurlal ji kirpa karke swal vistar nal pucho ke tuc parwal di kheti bare jankari laina chahunde ho ta jo tuhanu osde hisab nal poori jankari diti ja sake.dhanwad
Posted by narpat singh
Rajasthan
03-10-2019 07:51 AM
narpat singh ji inko aap balance diet de ji . hotel waste dene se weight nai badhega . ini proper feed de ji.

Posted by Amrish Verma
Uttar Pradesh
03-10-2019 07:48 AM
अमरीश जी आप इसके बैग में सुराख कर सकते हो पानी नीचे निकल जायेगा

Posted by pardeep singh
Punjab
03-10-2019 07:07 AM
ਤੁਸੀ 250 ਗ੍ਰਾਮ ਗੁੜ, 250 ਗ੍ਰਾਮ ਗੁਲਕੰਦ, 100 ਗ੍ਰਾਮ ਸੌੰਫ, 100 ਗ੍ਰਾਮ ਸੁਕੇ ਆਵਲੇ ਤੇ 50 ਗ੍ਰਾਮ ਅਜਵਾਇਨ ਉਬਾਲ ਕੇ ਠਾਰ ਕੇ 5 ਦਿਨ ਦੇਣੀ ਸ਼ੁਰੂ ਕਰੋ, ਤੁਸੀ ਉਸ ਨੂੰ Enerdyna liquid 100-100ml ਸਵੇਰੇ ਸ਼ਾਮ, Gouge powder 50gm ਰੋਜਾਨਾ ਦੇਣਾ ਸ਼ੁਰੂ ਕਰੋ, ਇਹਨਾਂ ਨਾਲ ਫਰਕ ਪੈ ਜਾਵੇਗਾ

Posted by akash kumar
Haryana
03-10-2019 07:01 AM
Akash ji Rir breed ki egg production 1 sall mai 150-200 eggs tak hoti hai, yeh 18-20 hafto mai egg dene suru kr dete hai aur iski murgi ka weight 6.5 lbs tak hota hai, aap iski pehchan ke liye apne nazdiki poultry farm per iss breed ko dekhe fir aap market se isko khird skte hai, jiise apko iss nasal ke vare mai purri jankari mill jayegi.

Posted by sanju rana
Uttar Pradesh
03-10-2019 06:50 AM
यह फसल रेतली दोमट से चिकनी किसी भी तरह की मिट्टी में उगाई जा सकती हैं देर से बीजने वाली किस्मों के लिए चिकनी दोमट मिट्टी को पहल दी जाती है जल्दी पकने वाली के लिए रेतली दोमट का प्रयोग करें मिट्टी की पी एच 6-7 होनी चाहिए मिट्टी की पी एच बढ़ाने के लिए उसमें चूना डाला जा सकता है प्रसिद्ध किस्में : पूसा सनोबाल 1, पूसा सन.... (Read More)
यह फसल रेतली दोमट से चिकनी किसी भी तरह की मिट्टी में उगाई जा सकती हैं देर से बीजने वाली किस्मों के लिए चिकनी दोमट मिट्टी को पहल दी जाती है जल्दी पकने वाली के लिए रेतली दोमट का प्रयोग करें मिट्टी की पी एच 6-7 होनी चाहिए मिट्टी की पी एच बढ़ाने के लिए उसमें चूना डाला जा सकता है प्रसिद्ध किस्में : पूसा सनोबाल 1, पूसा सनोबाल के-1 , पंत शुभ्रा खेत को अच्छी तरह जोतकर नर्म करें अच्छी तरह गली हुई रूड़ी की खाद आखिरी जोताई के समय डालें अगेती किस्मों के लिए जून-जुलाई रोपाई के लिए सबसे अच्छा समय है और पिछेती किस्मों के लिए अगस्त से मध्य सितंबर और अक्तूबर से नवंबर का पहला सप्ताह रोपाई के लिए अच्छा समय है अगेती किस्मों के लिए 45x45 से.मी. और पिछेती किस्मों के लिए 45x30 से.मी. का फासला होना चाहिए बीजों को 1-2 सैं.मी. की गहराई पर बोयें बिजाई के लिए डिबलिंग विधि और रोपण विधि का प्रयोग किया जाता है नर्सरी में बीजों को बोयें और आवश्यकतानुसार खादें और सिंचाई दें बिजाई के 25-30 दिन बाद पौधे रोपाई के लिए तैयार हो जाते हैं रोपाई के लिए 3-4 सप्ताह पुराने पौधों का प्रयोग करें अगेते मौसम की किस्मों के लिए 500 ग्राम, जबकि पिछेते और मुख्य मौसम की किस्मों के लिए 250 ग्राम बीज की प्रति एकड़ में आवश्यकता होती है बिजाई से पहले गर्म पानी (30 मिनट के लिए 50 डिगरी सैल्सियस) या स्ट्रैप्टोसाइक्लिन 0.01 ग्राम को प्रति लीटर पानी में मिलाकर 2 घंटे के लिए बीजों को इस घोल में भिगोकर रखें उपचार के बाद बीजों को छांव में सुखाएं और फिर उन्हें बैड पर बो दें रबी के मौसम में काली फंगस का हमला ज्यादा होता है इसकी रोकथाम के लिए मरकरी क्लोराइड से बीजों का उपचार करना जरूरी होता है इसके लिए मरकरी क्लोराइड 1 ग्राम को प्रति लीटर पानी में मिलाकर 30 मिनट के लिए बीजों को इस घोल में भिगोकर रखें और फिर छांव में सुखाएं रेतली मिट्टी में ये फसल उगाने से तना गलन का खतरा रहता है इसके लिए कार्बेनडाज़िम 50 प्रतिशत डब्लयु पी 3 ग्राम से प्रति किलो बीज का उपचार करें खेत में 40 टन पूरी तरह गली हुई रूड़ी की खाद डालें और साथ ही 50 किलो नाइट्रोजन, 25 किलो फासफोरस और 25 किलो पोटाश (110 किलो यूरिया, 155 किलो सुपरफासफेट और 40 किलो म्यूरेटे ऑफ पोटाश) सारी रूड़ी की खाद, सुपरफासफेट और म्यूरेटे ऑफ पोटाश और आधा यूरिया फसल रोपाई से पहले डालें बाकी बचा यूरिया बीजने के चार सप्ताह बाद डाल देना चाहिए अच्छी पैदावार लेने के लिए और अधिक फूलों के लिए 5-7 ग्राम घुलनशील खादें (19:19:19) प्रति लि. का प्रयोग करें रोपाई के 40 दिनों के बाद 4-5 ग्राम 12:16:0, नाइट्रोजन और फासफोरस, 2.5-3 ग्राम लघु तत्व और 1 ग्राम बोरोन प्रति लि. का छिड़काव करें फूल की अच्छी गुणवत्ता के लिए 8-10 ग्राम घुलनशील खादें (13:00:45) प्रति लि. पानी में मिलाएं मिट्टी का परीक्षण करवाएं बीजने के 30-35 दिनों के बाद मैगनीश्यिम की कमी को पूरा करने के लिए 5 ग्राम मैगनीश्यिम सलफेट प्रति लि. प्रयोग करें कैल्शियम की कमी को पूरा करने के लिए कैल्शियम नाइट्रेट 5 ग्राम को प्रति लीटर पानी में मिलाकर 30-35 दिनों के बाद डालें कभी कभी बेरंग तने देखे जा सकते हैं फूल भी भूरे रंग के हो जाते हैं और पत्ते मुड़ने लग जाते हैं यह बोरोन की कमी के कारण होता है इसके लिए बोरैक्स 250-400 ग्राम प्रति एकड़ में डालें नदीनों को रोकने के लिए फसल को खेत में लगाने के बाद फलुक्लोरालिन(बसालिन) @800 मि.ली. को 150 लि. पानी में मिलाकर छिड़काव करें और 30-40 दिनों के बाद रोपाई करें फसल को खेत में लगाने से 1 दिन पहले पैंडीमैथलीन 1 लि. प्रति एकड़ का छिड़काव करें रोपाई के बाद तुरंत पहली सिंचाई करें मिट्टी, जलवायु, के आधार पर गर्मियों में 7-8 दिनों के अंतराल पर और सर्दियों में 10-15 दिनों के अंतराल पर सिंचाई करें पूरा फूल विकसित होने पर सुबह के समय फूलों की कटाई की जा सकती है और कटाई के बाद फूलों को ठंडी जगह पर रखना चाहिए कटाई के बाद फूलों को आकार के अनुसार छांट लें
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