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Posted by Vishal raaj Vishal raaj
Uttar Pradesh
05-10-2019 01:33 AM
Maharashtra
10-14-2019 11:15 AM
इस फसल की खेती अलग-अलग मिट्टी की किस्मों में की जा सकती है जैसे कि रेतली, चिकनी, दोमट, काली, लाल मिट्टी, जिसमें पानी के निकास का सही प्रबंध हो इसकी अच्छी पैदावार के लिए इसे अच्छे निकास वाली रेतली मिट्टी में उत्तम जैविक तत्वों से उगाया जा सकता है अच्छे निकास वाली मिट्टी की पी एच 7-8.5 होनी चाहिए यह तेजाबी और खारी मि.... (Read More)
इस फसल की खेती अलग-अलग मिट्टी की किस्मों में की जा सकती है जैसे कि रेतली, चिकनी, दोमट, काली, लाल मिट्टी, जिसमें पानी के निकास का सही प्रबंध हो इसकी अच्छी पैदावार के लिए इसे अच्छे निकास वाली रेतली मिट्टी में उत्तम जैविक तत्वों से उगाया जा सकता है अच्छे निकास वाली मिट्टी की पी एच 7-8.5 होनी चाहिए यह तेजाबी और खारी मिट्टी में भी उगने योग्य फसल है ज्यादा तेजाबी मिट्टी में खेती ना करें अगेती फसल के लिए हल्की मिट्टी लाभदायक है, जबकि अच्छी पैदावार के लिए चिकनी, दोमट और बारीक रेत वाली मिट्टी बहुत अच्छी है प्रसिद्ध किस्में :- Pusa Rubi,Pusa Early Dwarf,Punjab Chhuhara,Pusa 120,Roma Selection 120 टमाटर के बीजों को पहले नर्सरी में बोया जाता है और फिर हन्हें मुख्य खेत में रोपित किया जाता है मुख्य खेत की तैयार के लिए अच्छी जोताई और समतल मिट्टी की जरूरत होती है मिट्टी को भुरभुरा बनाने के लिए 4-5 बार जोताई करें फिर मिट्टी को समतल करने के लिए सुहागा फेरें आखिरी जोताई के समय गाय का गला हुआ गोबर 60 किलो को मिट्टी में अच्छी तरह मिलायें रोपाई के लिए 80-90 सैं.मी. चौड़े बैड तैयार करें बिजाई से एक महीना पहले मिट्टी को धूप में खुला छोड़ दें आवश्यक लंबाई और 80-90 सैं.मी. की चौड़ाई वाले बैडों पर टमाटर के बीजों को बोयें बिजाई के बाद बैडों को प्लास्टिक शीट से ढक दें और फूलों को पानी देने वाले डब्बे से रोज़ सुबह बैडों की सिंचाई करें रोगाणुओं के हमले से फसल को बचाने के लिए नर्सरी वाले बैडों को अच्छे नाइलोन के जाल से ढक दें पनीरी लगाने के 10-15 दिन बाद 19:19:19 के साथ सूक्ष्म तत्वों की 2.5-3 ग्राम प्रति लीटर पानी में मिलाकर स्प्रे करें पौधों को तंदरूस्त और मजबूत बनाने के लिए बिजाई के 20 दिन बाद लीहोसिन 1 मि.ली. प्रति लीटर पानी की स्प्रे करें प्रभावित पौधों को खेत में से उखाड़ दें ताकि पौधों का फासला सही रखा जा सके और निरोग पौधों को रोगाणुओं से भी बचाया जा सके रोगाणुओं से बचाव के लिए मिट्टी में नमी बनाये रखें यदि सूखा दिखे तो पौधों को रोपाई से पहले मैटालैक्सिल 2.5 ग्राम प्रति लीटर पानी में 2-3 बार भिगोयें बिजाई से 25-30 दिन बाद पनीरी वाले पौधे तैयार हो जाते हैं और इनके 3-4 पत्ते निकल आते हैं यदि पौधों की आयु 30 दिन से ज्यादा हो तो इसके उपचार के बाद इसे खेत में लगायें पनीरी उखाड़ने के 24 घंटे पहले बैडों को पानी लगायें ताकि पौधे आसानी से उखाड़े जा सकें बसंत के मौसम के लिए नर्सरी नवंबर-दिसंबर में तैयार करें जबकि सर्दियों में KE मौसम में सितंबर-अक्तूबर महीने में नर्सरी में बीजों को बोयें किस्म और विकास के ढंग मुताबिक 60x30 सैं.मी. या 75x60 सैं.मी. या 75x75 सैं.मी. का फासला रखें में छोटे कद वाली किस्म के लिए 75x30 सैं.मी. का फासला रखें और वर्षा वाले मौसम के लिए 120-150x30 सैं.मी. का फासला रखें नर्सरी में बीजों को 0-5 सैं.मी. गहराई में बोयें और मिट्टी से ढक दें पनीरी को उखाड़कर खेत में लगा दें एक एकड़ खेत में बिजाई के लिए 100-160 ग्राम बीज नए पौधे तैयार करने के लिए प्रयोग किए जाते हैं हाइब्रिड किस्मों के लिए 80-100 ग्राम बीज प्रति एकड़ में प्रयोग करें नाइट्रोजन 40-60 किलो (90-130 किलो यूरिया), फासफोरस 25 किलो (155 किलो एस एस पी) और पोटाश 25 किलो (42 किलो एम ओ पी) की मात्रा प्रति एकड़ में प्रयोग करें नए पौधों की रोपाई के 2-3 सप्ताह पहले फासफोरस और पोटाश की पूरी मात्रा और नाइट्रोजन की एक तिहाई मात्रा डालें बाकी बची नाइट्रोजन को दो भागों में बांटकर रोपाई 30 और 50 दिनों के बाद डालें लगातार गोडाई करें और जड़ों को मिट्टी लगाएं 45 दिनों तक खेत को नदीन रहित रखें यदि नदीन नियंत्रण से बाहर हो जायें तो यह 70-90 प्रतिशत पैदावार कम कर देंगे रोपाई से पहले मुख्य खेत में पैंडीमैथालीन 0.4 किलो को प्रति एकड़ में लगाएं यदि नदीनों की संख्या ज्यादा हो तो नदीनों के अंकुरण के बाद सैंकर 0.2 किलो की प्रति एकड़ में स्प्रे करें नदीनों को रोकने के साथ साथ मिट्टी के तापमान को कम करने के लिए मलचिंग भी प्रभावी तरीका है रोपाई के बाद दो से तीन दिन हल्की सिंचाई करें मिट्टी में नमी के आधार पर सर्दियों में 12 से 15 दिनों के अंतराल पर सिंचाई करें और गर्मियों में 6-7 दिनों के अंतराल पर सिंचाई करें फूल निकलने की अवस्था सिंचाई के लिए गंभीर होती हैं इस अवस्था में पानी की कमी से फूलों का गिरना बढ़ता है और फलों और उत्पादकता पर इसका गंभीर प्रभाव पड़ता है बहुत सारी जांचों के मुताबिक यह पता चला है कि हर पखवाड़े में आधा इंच सिंचाई करने से जड़ें ज्यादा फैलती हैं और इससे पैदावार भी अधिक हो जाती है अत्याधिक सिंचाई ना करें पनीरी लगाने के 70 दिन बाद पौधे फल देना शुरू कर देते हैं कटाई का समय इस बात पर निर्भर करता है कि फलों को दूरी वाले स्थानों पर लेकर जाना है या ताजे फलों को मंडी में ही बेचना है आदि पके हरे टमाटर जिनका 1/4 भाग गुलाबी रंग का हो, लंबी दूरी वाले स्थानों पर लेकर जाने के लिए प्रयोग किए जाते हैं ज्यादातर सारे फल गुलाबी या लाल रंग में बदल जाते हैं, पर सख्त गुद्दे वाले टमाटरों को नज़दीक की मंडी में बेचा जा सकता है अन्य उत्पाद बनाने और बीज तैयार करने के लिए पूरी तरह पके और नर्म गुद्दे वाले टमाटरों का प्रयोग किया जाता है कटाई के बाद आकार के आधार पर टमाटरों को छांट लिया जाता है इसके बाद टमाटरों को बांस की टोकरियों या लकड़ी के बक्सों में पैक कर लिया जाता है लंबी दूरी पर लिजाने के लिए टमाटरों को पहले ठंडा रखें ताकि इनके खराब होने की संभावना कम हो जाये पूरी तरह पके टमाटरों से जूस, सीरप और कैचअप आदि उत्पाद भी तैयार किए जाते हैं
Posted by देवेश
Uttar Pradesh
05-10-2019 12:05 AM
Punjab
11-22-2019 10:12 AM
श्रीमान जी, इसकी रोकथाम के लिए आप quinalphos @ 4gm प्रति लीटर पानी के हिसाब से स्प्रे करें, धन्यवाद
Posted by rocky
Uttar Pradesh
04-10-2019 11:29 PM
Posted by sushma Sharma
Uttar Pradesh
04-10-2019 11:24 PM
Punjab
10-07-2019 06:56 PM
Sushma Sharma ji agar aap new tractor lena chahte hai to aap PM tractor yojana ka labh le sakte hai, is ke lia aap apne najdiki SBI Bank se samparak kare, Thankyou.
Posted by Babarmal Gadri
Rajasthan
04-10-2019 11:16 PM
Maharashtra
10-07-2019 07:37 PM
मालाबार नीम के पेड़ की खेती सभी प्रकार की मिट्टी में की जा सकती है और पानी की कम आपूर्ति की आवश्यकता होती है मालाबार नीम रोपण से 2 साल के भीतर 40 फुट तक उचाई लेलेता है, मालाबार नीम एक नकदी नीम परिवार से संबंधित है इस पेड़ अपनी तेजी से विकास के लिए जाना जाता है हाल के दिनों में कर्नाटक के आसपास के किसान, तमिलनाडु, आ.... (Read More)
मालाबार नीम के पेड़ की खेती सभी प्रकार की मिट्टी में की जा सकती है और पानी की कम आपूर्ति की आवश्यकता होती है मालाबार नीम रोपण से 2 साल के भीतर 40 फुट तक उचाई लेलेता है, मालाबार नीम एक नकदी नीम परिवार से संबंधित है इस पेड़ अपनी तेजी से विकास के लिए जाना जाता है हाल के दिनों में कर्नाटक के आसपास के किसान, तमिलनाडु, आंध्र प्रदेश और केरल में इस वृक्ष की बढ़ी मात्रा में फार्मिंग कर रहे है और इसका प्रयोग सस्ती वुड (plywood इंडस्ट्री) के रूप में कर रहे है यदि पेड़ो को सिंचित किया जाये तो 5 वर्ष के अंत में काटा जा सकता है और प्लाई के लिए प्रयोग किया जासकता है मार्च - अप्रैल के दौरान बीज बोना सबसे अच्छा है
Posted by subbu
Madhya Pradesh
04-10-2019 11:16 PM
Punjab
10-11-2019 02:42 PM
Subbu ji 1121 abhi mandi me ana start nai hua hai pishle saal 3000- 3500/Q tha is saal is ka rate bharne ki umeed hai, Thankyou.
Posted by Ramesh kumar yadav
Uttar Pradesh
04-10-2019 11:13 PM
Punjab
10-08-2019 01:21 PM
India’s milk production increased from 165.40 MMT in 2016-17 to 176.35 MMT in 2017-18, a growth rate of 6.62 per cent. The country ranks first in global milk production.
Posted by Gurpreet singh
Punjab
04-10-2019 10:46 PM
Punjab
10-18-2019 03:25 PM
Gurpreet singh ji, ehdi growth lai tuc vermicompost 4-5 kg de hisaab nal pa do, dhanwad
Posted by karan kumar
Chandigarh
04-10-2019 10:43 PM
Punjab
10-06-2019 03:11 PM
यदि आप मछली पालन का काम शुरू करना चाहते हैं तो ट्रेनिंग बहुत जरूरी है यह ट्रेनिंग FFDA(fish farmer development aggency) हर जिले में बनी है जहां हमारा खेतीबाड़ी विभाग है वहां इसके अफसर बैठते हैं वहां जाकर एप्लीकेशन भरवायें वहां आपको 5 दिन की ट्रेनिंग दी जायेगी ट्रेनिंग के लिए दसवीं पास होना ज़रूरी है इस ट्रेनिंग में आपको लोन और सब्स.... (Read More)
यदि आप मछली पालन का काम शुरू करना चाहते हैं तो ट्रेनिंग बहुत जरूरी है यह ट्रेनिंग FFDA(fish farmer development aggency) हर जिले में बनी है जहां हमारा खेतीबाड़ी विभाग है वहां इसके अफसर बैठते हैं वहां जाकर एप्लीकेशन भरवायें वहां आपको 5 दिन की ट्रेनिंग दी जायेगी ट्रेनिंग के लिए दसवीं पास होना ज़रूरी है इस ट्रेनिंग में आपको लोन और सब्सिड़ी के बारे में सारी जानकारी प्राप्त हो जाएगी इसकी पुंग छोड़ने के लिए अप्रैल से अक्टूबर का समय बढ़िया होता है, बाकि यदि अपने शुरू करना है तो यूनिवर्सिटी की तरफ से एक एकड़ में शुरू कर सकते हैं. एक एकड़ में 5000 पूंग डाल सकते हैं यह 2 से 3 इंच का होता है यदि 5000 डालना है तो 3000 रोहू, 1000 कतला, 500 कॉमन कॉर्प और 500 मरीगल नस्ल डाली जाए यह पूंग आप मछली पालन विभाग से खरीद सकते हैं यह एक इंच का बच्चा 10 पैसा प्रति बच्चा मिलेगा यदि बढ़िया खुराक डाली जाए तो 8 महीनों में यह लगभग 800—900 ग्राम का हो जाता है बाकी मछली पालन के लिए नहरी पानी बढ़िया होता है और आप गांव का छप्पड़ ठेके से लेकर भी यह काम शुरू कर सकते हैं तालाब में मछली के बीज डालने से पहले इस बात की जांच कर लेनी चाहिए कि उस तालाब में काफी मात्रा में मछली की कुदरती खुराक उपलब्ध है.
Posted by Balwan
Madhya Pradesh
04-10-2019 10:40 PM
Punjab
10-08-2019 01:25 PM
Balwan ji 1509 ka price 2400 - 2830 tak chal reha hai, Thankyou.
Posted by prem gangwar
Uttar Pradesh
04-10-2019 10:32 PM
Maharashtra
10-08-2019 10:17 AM
खुम्ब की किस्में कई प्रकार की होती है जैसे कि बटन खुम्ब, डीगरी, शटाकी खुम्ब, पराली खुम्ब, और मिलकी खुम्ब इनमे से कुइ खुम्ब सर्दियो के मौसम में और कुछ गर्मीयों के मौसम में लगाये जाते है और हर खुम्ब को लगाने का समय अलग अलग है जैसे बटन खुम्ब का समय सितंबर से मार्च तक होता है इस समय में हम तीन फसले ले सकते है शटाकी ख.... (Read More)
खुम्ब की किस्में कई प्रकार की होती है जैसे कि बटन खुम्ब, डीगरी, शटाकी खुम्ब, पराली खुम्ब, और मिलकी खुम्ब इनमे से कुइ खुम्ब सर्दियो के मौसम में और कुछ गर्मीयों के मौसम में लगाये जाते है और हर खुम्ब को लगाने का समय अलग अलग है जैसे बटन खुम्ब का समय सितंबर से मार्च तक होता है इस समय में हम तीन फसले ले सकते है शटाकी खुम्ब का समय अक्तूबर से मध्य फरवरी तक हैं इस समय हम एक फसल ही ले सकते है पराली खुम्ब का समय अप्रैल से अगस्त तक है इस समय हम चार फसले ले सकते है मिलकी खुम्ब का समय अप्रैल से सितंबर तक है आप अब अप्रैल में मिलकी या पराली खुम्ब लगा सकते है पराली खुमब के लिए आपको पराली, बीज, बांस, सेबा, आदि की जरूरत है पराली के पूले, धानो की पराली 1-1 किलो के पूले दोनो सिरो से सेबे से बांध कर तैयार किये जाते है पूले के सिरे कांट कर एक सार कर लिए जाते है पूलो की क्यिारी लगाना पराली के पूलो को साफ पानी में 16-20 घंटो के लिए डूबो दे गिले पूलो को ढलान पर रख कर फालतू पानी को निकलने दे कमरे ईटो और बांस से एक पलेटफार्म बनाये इस पलेटफार्म पर 5 पूलो की एक तहय लगाये जिसके ऊपर 75 ग्राम बीज डाले इसके ऊपर की तहय उलट होती है इस प्रकार 5-5 पूलो की तहय में 300 ग्राम बीज डाल कर कियारी तैयार करे सबसे ऊपर दो पूलो को खोलकर रख दे खुम्बो का फूटना बिजाई से 7-9 दिनो के बाद खुम्ब फूटने लगती है पानी और हवा का संचार बिजाई के दो दिन के बाद हर रोज पानी का छिडका करे खुम्बो के फूटने के बाद हवा का संचार 6-8 घंटे प्रति दिन किया जाता है खुम्बो की तूडाई खुम्बो के फूटने के बाद 1-2 दिनो के बाद तोडाई के योग्य हो जाती है मिलकी खुम्ब मिलकी खुम्ब के लिए तूडी, बीज, मोमी लिफाफे, सेबा, केसिंग,मिट्टी आदि होने चाहिये तूडी की तैयारी सूकी तूडी को पक्के फर्श पर बिछा कर 16-20 घंटे पानी से गिला करे गिली तूडी को बोरी में भर कर सेबे से बांध दे इस बोरी को उबलते पानी में 45-50 मिनट रखें तूडी को निकालकर पक्के फर्श पर बिछा कर ठंडा करे यह तूडी बिजाई के लिए तैयार है बिजाई ठंडी तूडी में बीज मिलाकर मोमी लिफाफो में भर दें एक मोमी लिफाफें में लगभग 2 किलो गिली तूडी और 70-80 ग्राम बीज पडता है लिफाफे के मुंह को सेबे से अच्छी तरह बांध कर कमरे में रख दे केसिंग बिजाई के दो तीन हफतो के बाद लिफाफे खोलकर केसिंग की 1-1.5 की तहय लगा दें केसिंग में तूडी और रेतली मिट्टी होती है 24 घंटो के लिए 4 प्रतिशत फारमलेन के घोल से जीवाणु रहित किया जाता है खुम्बो का फूटना केसिंग मिट्टी डालने के लगभग दो हफतो में खुम्बो के छोटे छोटे किणके निकलने शुरू हो जाते है और 4-5 दिन के बाद तोडने योग्य हो जाते है खुम्बो की तूडाई लगभग 35-40 दिनो तक की जाती है इसका बीज लेने के लिए आप Mr. jai 8882876224 जी से संपर्क कर सकते है
Posted by ਕੇਵਲਸਿੰਘ
Punjab
04-10-2019 10:21 PM
Punjab
10-06-2019 03:12 PM
tuci uss nu pett de kiria lai Flukarid-Ds bolus deo ate Agrimin powder 50gm ate Sharkoferol liquid 50ml rojana deo, iss nal frak paa jawega.
Posted by kanchan singh
Uttar Pradesh
04-10-2019 10:05 PM
Punjab
10-18-2019 03:29 PM
कंचन सिंह जी, तोरिये के लिए आप किस्मे जैसे के T-9, Bhvaani, P.T 303, P.T 30 की बिजाई कर सकते है, धन्यवाद
Posted by आशिष कुमार
Bihar
04-10-2019 09:55 PM
Punjab
10-06-2019 03:13 PM
यदि आप लेयर मुर्गी पालन करना चाहते है तो लेयर फार्मिंग के लिए आपको 50 फीट लंबाई वाली जगह और 20 फीट चौड़ाई वाली जगह की जरूरत होती है यह आपका 1000 वर्ग फुट जगह बन जाती है यहां आप 1000 बच्चों को रख सकते हैं और यदि आप लेयर का बच्चा अपने फार्म पर तैयार करते है तो आपको बच्चा अंडे देने तक 160—170 रूप्ये प्रति बच्चे के हिसाब से खर्च.... (Read More)
यदि आप लेयर मुर्गी पालन करना चाहते है तो लेयर फार्मिंग के लिए आपको 50 फीट लंबाई वाली जगह और 20 फीट चौड़ाई वाली जगह की जरूरत होती है यह आपका 1000 वर्ग फुट जगह बन जाती है यहां आप 1000 बच्चों को रख सकते हैं और यदि आप लेयर का बच्चा अपने फार्म पर तैयार करते है तो आपको बच्चा अंडे देने तक 160—170 रूप्ये प्रति बच्चे के हिसाब से खर्चा आएगा यदि आप तैयार बच्चा लेकर आते है तो वो आपको 205—210 रूप्ये प्रति बच्चे के हिसाब से पड़ेगा फिर आप उस हिसाब से इनको खरीद सकते है.
Posted by kishor Chouhan
Madhya Pradesh
04-10-2019 09:54 PM
Rajasthan
10-06-2019 03:14 PM
डेयरी फार्मिंग के लिए लोन अलग अलग कामों के लिए मिलता है जैसे शैड के लिए, पशुओं के लिए, डेयरी मशीनरी के लिए सबसे पहले आपने जिसके लिए लोन लेना है उस संबंधी आवेदन नज़दीक के डिप्टी डायरेक्टर को मिलकर दें ,इसके लिए आपके पास डेयरी ट्रेनिंग होनी जरूरी है उसके सर्टीफिकेट के हिसाब से आपको लोन मिलेगा यह ट्रेनिंग आप अप.... (Read More)
डेयरी फार्मिंग के लिए लोन अलग अलग कामों के लिए मिलता है जैसे शैड के लिए, पशुओं के लिए, डेयरी मशीनरी के लिए सबसे पहले आपने जिसके लिए लोन लेना है उस संबंधी आवेदन नज़दीक के डिप्टी डायरेक्टर को मिलकर दें ,इसके लिए आपके पास डेयरी ट्रेनिंग होनी जरूरी है उसके सर्टीफिकेट के हिसाब से आपको लोन मिलेगा यह ट्रेनिंग आप अपने नज़दीकी केवीके से प्राप्त कर सकते है वहां समय समय पर ट्रेनिंग दी जाती है आप वहां जाकर अपना फार्म भर आए जब भी वहां ट्रेनिंग होगी तो आपको फोन करके बता दिया जाएगा ट्रेनिंग में आपनको लोन लेने के बारे में और उसकी सब्सिड़ी के बारे में सारी जानकारी प्राप्त हो जाएगी
Posted by kishor Chouhan
Madhya Pradesh
04-10-2019 09:53 PM
Rajasthan
10-06-2019 03:14 PM
डेयरी फार्मिंग के लिए लोन अलग अलग कामों के लिए मिलता है जैसे शैड के लिए, पशुओं के लिए, डेयरी मशीनरी के लिए सबसे पहले आपने जिसके लिए लोन लेना है उस संबंधी आवेदन नज़दीक के डिप्टी डायरेक्टर को मिलकर दें ,इसके लिए आपके पास डेयरी ट्रेनिंग होनी जरूरी है उसके सर्टीफिकेट के हिसाब से आपको लोन मिलेगा यह ट्रेनिंग आप अप.... (Read More)
डेयरी फार्मिंग के लिए लोन अलग अलग कामों के लिए मिलता है जैसे शैड के लिए, पशुओं के लिए, डेयरी मशीनरी के लिए सबसे पहले आपने जिसके लिए लोन लेना है उस संबंधी आवेदन नज़दीक के डिप्टी डायरेक्टर को मिलकर दें ,इसके लिए आपके पास डेयरी ट्रेनिंग होनी जरूरी है उसके सर्टीफिकेट के हिसाब से आपको लोन मिलेगा यह ट्रेनिंग आप अपने नज़दीकी केवीके से प्राप्त कर सकते है वहां समय समय पर ट्रेनिंग दी जाती है आप वहां जाकर अपना फार्म भर आए जब भी वहां ट्रेनिंग होगी तो आपको फोन करके बता दिया जाएगा ट्रेनिंग में आपनको लोन लेने के बारे में और उसकी सब्सिड़ी के बारे में सारी जानकारी प्राप्त हो जाएगी
Posted by Suraj Sen
Madhya Pradesh
04-10-2019 09:47 PM
Rajasthan
10-06-2019 03:14 PM
डेयरी फार्मिंग के लिए लोन अलग अलग कामों के लिए मिलता है जैसे शैड के लिए, पशुओं के लिए, डेयरी मशीनरी के लिए सबसे पहले आपने जिसके लिए लोन लेना है उस संबंधी आवेदन नज़दीक के डिप्टी डायरेक्टर को मिलकर दें ,इसके लिए आपके पास डेयरी ट्रेनिंग होनी जरूरी है उसके सर्टीफिकेट के हिसाब से आपको लोन मिलेगा यह ट्रेनिंग आप अप.... (Read More)
डेयरी फार्मिंग के लिए लोन अलग अलग कामों के लिए मिलता है जैसे शैड के लिए, पशुओं के लिए, डेयरी मशीनरी के लिए सबसे पहले आपने जिसके लिए लोन लेना है उस संबंधी आवेदन नज़दीक के डिप्टी डायरेक्टर को मिलकर दें ,इसके लिए आपके पास डेयरी ट्रेनिंग होनी जरूरी है उसके सर्टीफिकेट के हिसाब से आपको लोन मिलेगा यह ट्रेनिंग आप अपने नज़दीकी केवीके से प्राप्त कर सकते है वहां समय समय पर ट्रेनिंग दी जाती है आप वहां जाकर अपना फार्म भर आए जब भी वहां ट्रेनिंग होगी तो आपको फोन करके बता दिया जाएगा ट्रेनिंग में आपनको लोन लेने के बारे में और उसकी सब्सिड़ी के बारे में सारी जानकारी प्राप्त हो जाएगी
Posted by Rambabu Singh
Uttar Pradesh
04-10-2019 09:46 PM
Punjab
10-08-2019 10:22 AM
Rambabu Singh ji aap medicinal plants ki kheti kar sakte hai, Is ke bare me puri jankari or training ke lia aap Aushadhiya kheti vikas sansthan 6268536795 se samparak kar sakte hai, ja fir aap jo kheti kar rahe hai us me hi, desi khad pdartho ka istemal kar apne kharch kam kare, Thankyou.
Posted by Satendra Satendra Lodhi
Madhya Pradesh
04-10-2019 09:43 PM
Punjab
10-06-2019 03:15 PM
कृप्या आप अपना सवाल विस्तार से पूछें कि आप क्या जानकारी लेना चाहते है ताकि आपको इसके बारे में सही जानकारी दी जा सके
Posted by Satendra Satendra Lodhi
Madhya Pradesh
04-10-2019 09:41 PM
Punjab
10-06-2019 03:15 PM
कृप्या आप अपना सवाल विस्तार से पूछें कि आप क्या जानकारी लेना चाहते है ताकि आपको इसके बारे में सही जानकारी दी जा सके
Posted by Satendra Satendra Lodhi
Madhya Pradesh
04-10-2019 09:40 PM
Punjab
10-18-2019 03:34 PM
Satendra lodhi ji, please ask your question in detail, so that we can provide you full information regarding your question. Thank you
Posted by Himan Singh
Punjab
04-10-2019 09:19 PM
Punjab
10-06-2019 03:18 PM
कृप्या आप अपना सवाल विस्तार से पूछें कि आप कौनसी नस्ल की गाय के बारे में जानकारी लेना चाहते है ताकि आपको सही जानकारी दी जा सके
Posted by Gurdarshan singh
Punjab
04-10-2019 09:18 PM
Rajasthan
10-06-2019 03:18 PM
ਭਾਰ ਪੈਣ ਦੇ ਇਲਾਜ ਲਈ ਤੁਸੀ ਇਹ ਦੇਸੀ ਤਰੀਕਾ ਵਰਤ ਸਕਦੇ ਹੋ, ਤੁਸੀ 1 ਕਿਲੋ ਸਤਿਆਨਾਸ਼ੀ ਬੀਜ ਲਓ, ਅੱਧਾ ਕਿਲੋ ਕਮਰਕੱਸ, ਅੱਧਾ ਕਿਲੋ ਜੋਂਖਾਰ ਲਓ, ਇਹ ਸਭ ਪੰਸਾਰੀ ਤੋਂ ਮਿਲ ਜਾਵੇਗਾ ਇਹ ਸਾਰਾ ਕੁਜ ਤੁਸੀ ਮਿਲਾ ਲਓ ਅਤੇ ਇਸਦਾ ਪਾਊਡਰ ਬਣਾ ਸਕਦੇ ਹੋ ਅਤੇ ਰੋਜਾਨਾ ਰਾਤ ਨੂੰ ਇਹ ਮਿਸ਼ਰਣ ਅੱਧਾ ਕਿਲੋ ਲਓ ਅਤੇ ਅੱਧਾ ਕਿਲੋ ਸ਼ੱਕਰ ਲਓ ਅਤੇ ਇਹਨਾਂ ਨੂੰ ਭਿਗੋ ਕੇ ਰੱਖ ਦਿਓ ਅਤੇ ਅਗਲੇ ਦਿਨ ਪਸ਼ੂ ਨ.... (Read More)
ਭਾਰ ਪੈਣ ਦੇ ਇਲਾਜ ਲਈ ਤੁਸੀ ਇਹ ਦੇਸੀ ਤਰੀਕਾ ਵਰਤ ਸਕਦੇ ਹੋ, ਤੁਸੀ 1 ਕਿਲੋ ਸਤਿਆਨਾਸ਼ੀ ਬੀਜ ਲਓ, ਅੱਧਾ ਕਿਲੋ ਕਮਰਕੱਸ, ਅੱਧਾ ਕਿਲੋ ਜੋਂਖਾਰ ਲਓ, ਇਹ ਸਭ ਪੰਸਾਰੀ ਤੋਂ ਮਿਲ ਜਾਵੇਗਾ ਇਹ ਸਾਰਾ ਕੁਜ ਤੁਸੀ ਮਿਲਾ ਲਓ ਅਤੇ ਇਸਦਾ ਪਾਊਡਰ ਬਣਾ ਸਕਦੇ ਹੋ ਅਤੇ ਰੋਜਾਨਾ ਰਾਤ ਨੂੰ ਇਹ ਮਿਸ਼ਰਣ ਅੱਧਾ ਕਿਲੋ ਲਓ ਅਤੇ ਅੱਧਾ ਕਿਲੋ ਸ਼ੱਕਰ ਲਓ ਅਤੇ ਇਹਨਾਂ ਨੂੰ ਭਿਗੋ ਕੇ ਰੱਖ ਦਿਓ ਅਤੇ ਅਗਲੇ ਦਿਨ ਪਸ਼ੂ ਨੂੰ ਦਿਓ, ਇਸ ਤਰ੍ਹਾਂ ਤੁਸੀ 4 ਦਿਨ ਲਗਾਤਾਰ ਦਿਓ, ਇਸ ਨਾਲ ਫਰਕ ਪੈ ਜਾਵੇਗਾ .
Posted by Ramveer
Uttar Pradesh
04-10-2019 09:16 PM
Maharashtra
10-07-2019 07:04 PM
पुदीना मैंथा के नाम से जानी जाने वाली एक क्रियाशील जड़ी बूटी है पुदीने को मिट्टी की कई किस्मों जैसे दरमियाने से गहरी उपजाऊ मिट्टी, जिसमें पानी को सोखने की क्षमता ज्यादा हो, में उगाया जाता है इसको जल-जमाव वाली मिट्टी में भी उगाया जा सकता है उच्च नमी वाली मिट्टी में यह अच्छे परिणाम देती है इस फसल के लिए मिट्टी .... (Read More)
पुदीना मैंथा के नाम से जानी जाने वाली एक क्रियाशील जड़ी बूटी है पुदीने को मिट्टी की कई किस्मों जैसे दरमियाने से गहरी उपजाऊ मिट्टी, जिसमें पानी को सोखने की क्षमता ज्यादा हो, में उगाया जाता है इसको जल-जमाव वाली मिट्टी में भी उगाया जा सकता है उच्च नमी वाली मिट्टी में यह अच्छे परिणाम देती है इस फसल के लिए मिट्टी का pH 6-7.5 होना चाहिए प्रसिद्ध किस्में:- MAS-1: यह छोटे कद की किस्म है जिसकी ऊंचाई 30-45 सैं.मी. होती है यह बीमारीयों की रोधक और जल्दी पकने वाली किस्म है इसमें मैन्थोल की मात्रा 70-80% होती है इसकी औसतन पैदावार 80 क्विंटल प्रति एकड़ जड़ी-बूटियां के तौर पर और 50-60 किलोग्राम प्रति एकड़ तेल के तौर पर होती है Hybrid-77: इसकी ऊंचाई 50-60 सैं.मी. होती है यह किस्म पत्तों के धब्बा रोग और कुंगी के रोधक होती है, और यह जल्दी पकने वाली किस्म है इसमें मैन्थोल की मात्रा 80-85% होती है इसकी औसतन पैदावार 80 क्विंटल प्रति एकड़ जड़ी-बूटियां के तौर पर और 50-60 किलोग्राम प्रति एकड़ तेल के तौर पर होती है यह रेतली दोमट मिट्टी में बढ़िया पैदावार देती है औरऐसी शुष्क मौसम में की आवश्यकता होती है Shivalik: यह चीन की खेती से चुनी गई किस्म है यह किस्म उत्तर प्रदेश के तराई क्षेत्रों और उत्तरांचल में अच्छी वृद्धि करती है इसमें मैन्थोल की मात्रा 65-70% होती है इसकी औसतन पैदावार 120 क्विंटल प्रति एकड़ जड़ी-बूटियां के तौर पर और 72 किलोग्राम प्रति एकड़ तेल के तौर पर होती है यह किस्म फंगस रोगों से जल्दी प्रभावित होती है EC-41911: यह किस्म रूसी जर्मप्लाज्म से ली गई है यह किस्म पानी की रोधक और आकार में सीधी होती है इसमें मैन्थोल की मात्रा 70%पायी जाती है इसकी औसतन पैदावार 120 क्विंटल प्रति एकड़ जड़ी-बूटियां के तौर पर और 72 किलोग्राम प्रति एकड़ तेल के तौर पर होती है इस किस्म से तैयार तेल का प्रयोग विभिन्न व्यंजनों में स्वाद के लिए किया जाता है Gomti: यह किस्म रंग में हल्के लाल रंग की होती है इसकी पैदावार बाकी किस्मों की पैदावार से कम होती है इसमें मैन्थोल की मात्रा 78-80% होती है Himalaya: इसके पत्तों का आकार बाकी किस्मों से बड़ा होता है यह किस्म कुंगी, झुलस, सफेद धब्बे और पत्तों पर धब्बे रोग की रोधक है इसमें मैन्थोल की मात्रा 78-80% होती है इसकी औसतन पैदावार 160 क्विंटल प्रति एकड़ जड़ी-बूटियां के तौर पर और 80-100 किलोग्राम प्रति एकड़ तेल के तौर पर होती है Kosi: यह किस्म 90 दिनों में पक जाती है यह किस्म कुंगी, झुलस, सफेद धब्बे और पत्तों के धब्बे रोग की प्रतिरोधक है इसमें मैन्थोल की मात्रा 75-80 प्रतिशत होती है और तेल की पैदावार 80-100 किलोग्राम प्रति एकड़ होती है Saksham: यह किस्म सी वी हिमालय की तरफ से टिशू कल्चर द्वारा तैयार की गई है इसमें मैन्थोल की मात्रा 80% होती है और तेल की पैदावार 90-100 किलोग्राम प्राप्त होती है पुदीने की बिजाई के लिए सुविधाजनक आकार के बैड तैयार करें खेत की तैयारी के समय खेत की अच्छी तरह जोताई करें जैविक खाद जैसे रूड़ी की खाद 100-120 क्विंटल प्रति एकड़ रूड़ी की खाद डालें रूड़ी की खाद के बाद हरी खाद डालें इसकी बिजाई के लिए दिसंबर-जनवरी का समय अनुकूल होता है पौधे के भागों की बिजाई 40 सैं.मी. के फासले पर और पंक्तियों के बीच का फासला 60 सैं.मी होना चाहिए बीज को 2-3 सैं.मी. की गहराई में बोयें पौधे के जड़ वाले भाग को मुख्य खेत में बोया जाता है खेत की तैयारी के समय रूड़ी की खाद 80-120 क्विंटल प्रति एकड़ में डालें और अच्छी तरह मिलायें नाइट्रोजन 58 किलो (यूरिया 130 किलो), फासफोरस 32-40 किलो (सिंगल सुपर फासफेट 80-100 किलो), पोटाशियम 20 किलो (म्यूरेट ऑफ पोटाश 33 किलो) प्रति एकड़ में डालें गर्मियों में मॉनसून से पहले जलवायु और मिट्टी के आधार पर 6-9 सिंचाइयां जरूर की जानी चाहिए मॉनसून के बाद 3 सिंचाइयों की आवश्यकता होती है पहली सिंचाई सितंबर महीने में, दूसरी अक्तूबर में और तीसरी नवंबर महीने में की जानी चाहिए सर्दियों में ज्यादा सिंचाई की आवश्यकता नहीं होती, लेकिन यदि सर्दियों में बारिश ना पड़े तो एक सिंचाई जरूर देनी चाहिए पौधे 100-120 दिनों में कटाई के लिए तैयार हो जाते हैं जब निचले पत्ते पीले रंग के होने शुरू हो जायें, तब कटाई करें कटाई दराती से और बूटियों को मिट्टी की सतह के 2-3 सैं.मी. ऊपर से निकालें अगली कटाई पहली कटाई के बाद 80 दिनों के अंतराल पर करें ताजी पत्तियों को उत्पाद बनाने के लिए प्रयोग किया जाता है, धन्यवाद
Posted by Ramveer
Uttar Pradesh
04-10-2019 09:14 PM
Maharashtra
10-07-2019 07:04 PM
पुदीना मैंथा के नाम से जानी जाने वाली एक क्रियाशील जड़ी बूटी है पुदीने को मिट्टी की कई किस्मों जैसे दरमियाने से गहरी उपजाऊ मिट्टी, जिसमें पानी को सोखने की क्षमता ज्यादा हो, में उगाया जाता है इसको जल-जमाव वाली मिट्टी में भी उगाया जा सकता है उच्च नमी वाली मिट्टी में यह अच्छे परिणाम देती है इस फसल के लिए मिट्टी .... (Read More)
पुदीना मैंथा के नाम से जानी जाने वाली एक क्रियाशील जड़ी बूटी है पुदीने को मिट्टी की कई किस्मों जैसे दरमियाने से गहरी उपजाऊ मिट्टी, जिसमें पानी को सोखने की क्षमता ज्यादा हो, में उगाया जाता है इसको जल-जमाव वाली मिट्टी में भी उगाया जा सकता है उच्च नमी वाली मिट्टी में यह अच्छे परिणाम देती है इस फसल के लिए मिट्टी का pH 6-7.5 होना चाहिए प्रसिद्ध किस्में:- MAS-1: यह छोटे कद की किस्म है जिसकी ऊंचाई 30-45 सैं.मी. होती है यह बीमारीयों की रोधक और जल्दी पकने वाली किस्म है इसमें मैन्थोल की मात्रा 70-80% होती है इसकी औसतन पैदावार 80 क्विंटल प्रति एकड़ जड़ी-बूटियां के तौर पर और 50-60 किलोग्राम प्रति एकड़ तेल के तौर पर होती है Hybrid-77: इसकी ऊंचाई 50-60 सैं.मी. होती है यह किस्म पत्तों के धब्बा रोग और कुंगी के रोधक होती है, और यह जल्दी पकने वाली किस्म है इसमें मैन्थोल की मात्रा 80-85% होती है इसकी औसतन पैदावार 80 क्विंटल प्रति एकड़ जड़ी-बूटियां के तौर पर और 50-60 किलोग्राम प्रति एकड़ तेल के तौर पर होती है यह रेतली दोमट मिट्टी में बढ़िया पैदावार देती है औरऐसी शुष्क मौसम में की आवश्यकता होती है Shivalik: यह चीन की खेती से चुनी गई किस्म है यह किस्म उत्तर प्रदेश के तराई क्षेत्रों और उत्तरांचल में अच्छी वृद्धि करती है इसमें मैन्थोल की मात्रा 65-70% होती है इसकी औसतन पैदावार 120 क्विंटल प्रति एकड़ जड़ी-बूटियां के तौर पर और 72 किलोग्राम प्रति एकड़ तेल के तौर पर होती है यह किस्म फंगस रोगों से जल्दी प्रभावित होती है EC-41911: यह किस्म रूसी जर्मप्लाज्म से ली गई है यह किस्म पानी की रोधक और आकार में सीधी होती है इसमें मैन्थोल की मात्रा 70%पायी जाती है इसकी औसतन पैदावार 120 क्विंटल प्रति एकड़ जड़ी-बूटियां के तौर पर और 72 किलोग्राम प्रति एकड़ तेल के तौर पर होती है इस किस्म से तैयार तेल का प्रयोग विभिन्न व्यंजनों में स्वाद के लिए किया जाता है Gomti: यह किस्म रंग में हल्के लाल रंग की होती है इसकी पैदावार बाकी किस्मों की पैदावार से कम होती है इसमें मैन्थोल की मात्रा 78-80% होती है Himalaya: इसके पत्तों का आकार बाकी किस्मों से बड़ा होता है यह किस्म कुंगी, झुलस, सफेद धब्बे और पत्तों पर धब्बे रोग की रोधक है इसमें मैन्थोल की मात्रा 78-80% होती है इसकी औसतन पैदावार 160 क्विंटल प्रति एकड़ जड़ी-बूटियां के तौर पर और 80-100 किलोग्राम प्रति एकड़ तेल के तौर पर होती है Kosi: यह किस्म 90 दिनों में पक जाती है यह किस्म कुंगी, झुलस, सफेद धब्बे और पत्तों के धब्बे रोग की प्रतिरोधक है इसमें मैन्थोल की मात्रा 75-80 प्रतिशत होती है और तेल की पैदावार 80-100 किलोग्राम प्रति एकड़ होती है Saksham: यह किस्म सी वी हिमालय की तरफ से टिशू कल्चर द्वारा तैयार की गई है इसमें मैन्थोल की मात्रा 80% होती है और तेल की पैदावार 90-100 किलोग्राम प्राप्त होती है पुदीने की बिजाई के लिए सुविधाजनक आकार के बैड तैयार करें खेत की तैयारी के समय खेत की अच्छी तरह जोताई करें जैविक खाद जैसे रूड़ी की खाद 100-120 क्विंटल प्रति एकड़ रूड़ी की खाद डालें रूड़ी की खाद के बाद हरी खाद डालें इसकी बिजाई के लिए दिसंबर-जनवरी का समय अनुकूल होता है पौधे के भागों की बिजाई 40 सैं.मी. के फासले पर और पंक्तियों के बीच का फासला 60 सैं.मी होना चाहिए बीज को 2-3 सैं.मी. की गहराई में बोयें पौधे के जड़ वाले भाग को मुख्य खेत में बोया जाता है खेत की तैयारी के समय रूड़ी की खाद 80-120 क्विंटल प्रति एकड़ में डालें और अच्छी तरह मिलायें नाइट्रोजन 58 किलो (यूरिया 130 किलो), फासफोरस 32-40 किलो (सिंगल सुपर फासफेट 80-100 किलो), पोटाशियम 20 किलो (म्यूरेट ऑफ पोटाश 33 किलो) प्रति एकड़ में डालें गर्मियों में मॉनसून से पहले जलवायु और मिट्टी के आधार पर 6-9 सिंचाइयां जरूर की जानी चाहिए मॉनसून के बाद 3 सिंचाइयों की आवश्यकता होती है पहली सिंचाई सितंबर महीने में, दूसरी अक्तूबर में और तीसरी नवंबर महीने में की जानी चाहिए सर्दियों में ज्यादा सिंचाई की आवश्यकता नहीं होती, लेकिन यदि सर्दियों में बारिश ना पड़े तो एक सिंचाई जरूर देनी चाहिए पौधे 100-120 दिनों में कटाई के लिए तैयार हो जाते हैं जब निचले पत्ते पीले रंग के होने शुरू हो जायें, तब कटाई करें कटाई दराती से और बूटियों को मिट्टी की सतह के 2-3 सैं.मी. ऊपर से निकालें अगली कटाई पहली कटाई के बाद 80 दिनों के अंतराल पर करें ताजी पत्तियों को उत्पाद बनाने के लिए प्रयोग किया जाता है, धन्यवाद
Posted by parveen
Haryana
04-10-2019 09:09 PM
Maharashtra
10-11-2019 03:09 PM
parveen ji iske uper magnesium sulphate@1 kilo ko 150 litre pani men mila kar spray karen.dhanywad
Posted by ravi
Uttar Pradesh
04-10-2019 09:09 PM
Punjab
10-18-2019 03:50 PM
रवि जी, मेथा की बुवाई के लिए उचित समय october के आखिरले हफ्ते से लेकर november के पहले हफ्ते तक का है इसके लिए बीज की मात्रा 11 kg प्रति एकड़ होती है कतार से कतार का फासला 30 cm होना चाहिए और बीज से बीज का फासला 10 cm होना चाहिए और इसे आप 5 cm की गहराई पर बीजे धन्यवाद
Posted by mangu singh
Rajasthan
04-10-2019 09:05 PM
Punjab
10-18-2019 03:31 PM
Mangu singh ji, kripya is label ki sahi photo beje tan ki apko dekh k iska sahi utar diya ja sake, dhaywad
Posted by दिलीप राठौर
Madhya Pradesh
04-10-2019 09:04 PM
Maharashtra
10-07-2019 07:06 PM
चुकंदर के लिए दोमट मिट्टी सबसे अच्छी होती है मिट्टी की 9.5 पी एच की आवश्यकता होती है इस फसल को सामान्य मिट्टी में भी उगाया जा सकता है प्रसिद्ध किस्में :- Crimson Globe, Detrict Dark Red खेत में 3-4 बार हैरो से जोताई करें बीज के अच्छे उत्पादन के लिए, ज़मीन को अच्छे से तैयार करें और उसमें उपयुक्त नमी बनाये रखें बिजाई के लिए सितंबर के आखि.... (Read More)
चुकंदर के लिए दोमट मिट्टी सबसे अच्छी होती है मिट्टी की 9.5 पी एच की आवश्यकता होती है इस फसल को सामान्य मिट्टी में भी उगाया जा सकता है प्रसिद्ध किस्में :- Crimson Globe, Detrict Dark Red खेत में 3-4 बार हैरो से जोताई करें बीज के अच्छे उत्पादन के लिए, ज़मीन को अच्छे से तैयार करें और उसमें उपयुक्त नमी बनाये रखें बिजाई के लिए सितंबर के आखिरी सप्ताह से मध्य अक्तूबर का समय उपयुक्त होता है बिजाई के लिए कतारों में 45-50 सैं.मी. फासले का प्रयोग करें बीजों को 3 सैं.मी. की गहराई में बोयें 1.5-2.5 किलो बीज प्रति एकड़ में प्रयोग करें बिजाई से पहले कार्बेनडाज़िम 50 डब्लयू पी या थीरम 2 ग्राम से प्रति किलो बीज का उपचार करें खेत की तैयारी के समय 5 टन गाय का गोबर प्रयोग करें खादों की मात्रा नाइट्रोजन 12 किलो (यूरिया 25 किलो), फासफोरस 5 किलो (एस एस पी 12 किलो) और पोटाशियम 20 किलो (म्यूरेट ऑफ पोटाश 30 किलो) प्रति एकड़ में प्रयोग करें फासफोरस और पोटाश की पूरी मात्रा और नाइट्रोजन की आधी मात्रा बिजाई से पहले आखिरी जोताई के समय मिट्टी में मिलायें इसी समय बोरैक्स पाउडर 2 किलो प्रति एकड़ में मिलायें बिजाई के दो महीने बाद नाइट्रोजन की बाकी बची मात्रा डालें चुकंदर को 8 सिंचाइयों द्वारा 80-100 सैं.मी. की आवश्यकता होती है पहली सिंचाई बिजाई के 25 दिन बाद और अगली 4 सिंचाइयां 25 दिनों के अंतराल पर करें और बाकी की सिंचाइयां 20 दिनों के अंतराल पर करें अंकुरण के 25-30 दिनों के बाद कमज़ोर नए पौधों की गोडाई करें पौधे से पौधे में 15-20 सैं.मी. का फासला जरूर होना चाहिए दूसरी गोडाई पहली गोडाई के 15-20 दिनों के बाद करें खरपतवार नियंत्रण के लिए 2-3 गोडाइयों की आवश्यकता होती है इस फसल की तुड़ाई अंत मार्च से मई महीने में की जाती है जब पत्तों की निचली सतह पीले रंग की हो जाये तब तुड़ाई की जाती है कटाई के 1-3 दिन पहले हल्की सिंचाई की आवश्यकता होती है यह चुकंदर की औसतन पैदावार 30- 40 क्विंटल प्रति एकड़ और हरे चारे की पैदावार 5-10 क्विंटल प्रति एकड़ देती है
Posted by Jasveer Singh Rupana
Punjab
04-10-2019 09:02 PM
Punjab
10-18-2019 03:56 PM
Jasveer ji, jaldi flowers leon lai tusi NPK 19.19.19 @ 10 gm prati liter pani de hisab nal spray karo, dhanwad
Posted by Sufiyan Ansari
Jharkhand
04-10-2019 08:53 PM
Punjab
10-04-2019 09:04 PM
Posted by Dudaram Parngi
Rajasthan
04-10-2019 08:50 PM
Punjab
10-07-2019 05:57 PM
दुदाराम जी आप इसकी फोटो भेजे ताकि आपको इसके बारे में पूरी जानकारी दी जा सके धन्यवाद
Posted by hitendra kumar tiwari
Bihar
04-10-2019 08:47 PM
Punjab
10-07-2019 05:56 PM
इसे मिट्टी की व्यापक किस्मों में उगाया जा सकता है अच्छे निकास वाली पहाड़ी मिट्टी पपीते की खेती के लिए उपयुक्त होती है रेतली और भारी मिट्टी में इसकी खेती ना करें पपीते की खेती के लिए मिट्टी की पी एच 6.5-7.0 होनी चाहिए प्रसिद्ध किस्में :-Pusa Dwarf: इसके फल मध्यम आकार के और अंडाकार होते हैं यह सूखे को सहनेयोग्य किस्म है यह .... (Read More)
इसे मिट्टी की व्यापक किस्मों में उगाया जा सकता है अच्छे निकास वाली पहाड़ी मिट्टी पपीते की खेती के लिए उपयुक्त होती है रेतली और भारी मिट्टी में इसकी खेती ना करें पपीते की खेती के लिए मिट्टी की पी एच 6.5-7.0 होनी चाहिए प्रसिद्ध किस्में :-Pusa Dwarf: इसके फल मध्यम आकार के और अंडाकार होते हैं यह सूखे को सहनेयोग्य किस्म है यह उच्च घनत्व में रोपाई के लिए लाभदायक है Pusa Giant: इस किस्म के पौधे तेज हवा को सहनेयोग्य है यह बड़े फलों का उत्पादन करती है यह पैकिंग के लिए उपयुक्त किस्म है CO 3: इसके फल बड़े आकार के और अंडाकार होते हैं इसे ज्यादा देर तक रखने की गुणवत्ता अच्छी होती है CO 1: यह छोटे कद की किस्म है जिसके फल मध्यम आकार के होते हैं फल गोलाकार, नर्म हरा-पीला छिल्का और संतरी पीले रंग का गुद्दा होता है फल रसदार होता है और इसे ज्यादा देर तक रखने की गुणवत्ता अच्छी होती है Coorg Honey Dew: इसे सीधे तौर पर खाने के लिए और प्रक्रिया के लिए प्रयोग किया जाता है इसके फल आयताकार और गुद्दा मोटा संतरी रंग का होता है Pusa Majesty: इसके फल मध्यम आकार के, गोल होते हैं इन्हें रखने की गुणवत्ता बहुत अच्छी होती है यह किस्म 146 दिनों में कटाई के लिए तैयार हो जाती है यह किस्म जड़ गलन निमाटोड के प्रतिरोधक किस्म है Pusa Delicious: यह मध्यम लंबी किस्म है इसके फल मध्यम आकार के होते हैं, गुद्दा गहरे संतरी रंग का होता है इस किस्म को कतारों में लगाने के लिए प्रयोग किया जाता है पपीते की खेती के लिए नदीन रहित भूमि का प्रयोग करें मिट्टी के भुरभुरा होने तक खेत की जोताई करें आखिरी जोताई के समय अच्छी तरह से गली हुई रूड़ी की खाद या गाय का गला हुआ गोबर मिट्टी में अच्छी तरह मिलाकर डालें सिफारिश किए गए फासलों पर 1 मीटर x 1 मीटर x 1 मीटर आकार के गड्ढे खोदें गड्ढों को मिट्टी और रूड़ी की खाद या गाय के गले हुए गोबर से भरें प्रयोग की गई किस्म के आधार पर प्रत्येक गड्ढे पर 2-4 नए पौधों की रोपाई करें रोपाई के बाद हल्की सिंचाई करें हवा से बचाव के लिए खूंटा लगाएं बीजों को 150 गेज़ की मोटाई वाले, 25 x 10 सैं.मी. के पॉलीथीन बैग में बोयें पानी के उचित निकास के लिए पॉलीथीन बैग के निचले हिस्से में 1 मि.मी. अर्द्धव्यास का छेद करें उसके बाद पॉलीथीन बैग में समान अनुपात में रूड़ी की खाद, मिट्टी और रेत डालें बिजाई से पहले बीजों का उपचार करें रोपाई के लिए 6-7 सप्ताह के पौधों का प्रयोग करें यूरिया 150 ग्राम, फासफोरस 80 ग्राम, पोटाश 100 ग्राम प्रति वृक्ष में प्रति वर्ष डालें खादों को 4 भागों में बांटकर रोपाई के बाद पहले, तीसरे, पांचवे और सातवें महीने में डालें बसंत के मौसम में फरवरी मार्च के महीने में बिजाई करें जबकि मॉनसून के मौसम में बिजाई के लिए जून जुलाई का महीना उपयुक्त होता है और पतझड़ के मौसम में बिजाई अक्तूबर से नवंबर महीने में की जाती है आमतौर पर 1.8 मीटर x 1.8 मीटर फासले का प्रयोग किया जाता है उच्च घनता की रोपाई के लिए 1.5 मीटर x 1.5 मीटर फासले का प्रयोग किया जाता है नर्सरी में बीज को 1 सैं.मी. की गहराई पर बोयें बीजो की खेत में सीधे बिजाई या मुख्य खेत में नए पौधों की रोपाई की जाती है 100-120 ग्राम बीज प्रति एकड़ में प्रयोग करें मिट्टी की किस्म, जलवायु के हालातों आदि के आधार पर सिंचाई करें सर्दियों में 15 दिनों के अंतराल पर और गर्मियों में 7 दिनों के अंतराल पर सिंचाई करें तने को पानी के संपर्क में ना आने दें और खेत में पानी भी खड़ा ना होने दें पौधे की प्रौढ़ अवस्था के दौरान नदीनों की रोकथाम जरूरी होती है नदीनों की तीव्रता के आधार पर, नियमित और हल्की गोडाई करें फ्लूक्लोरालिन या बूटाक्लोर 800 मि.ली. प्रति एकड़ में डालें नदीनों की रोकथाम के लिए मलचिंग भी एक प्रभावी तरीका है पौधों की रोपाई के कुछ दिनों बाद प्लास्टिक शीट या धान की पराली या गन्ने के बचे कुचे को मलच के रूप में डालें मुख्यत: फल के पूरा आकार लेने और हरे से हल्का पीला रंग होने पर तुड़ाई की जाती है पहली तुड़ाई रोपाई के 14-15 महीनों के बाद की जा सकती है 4-5 तुड़ाइयां प्रति मौसम की जा सकती हैं धन्यवाद
Posted by vi
Rajasthan
04-10-2019 08:40 PM
Punjab
10-18-2019 05:28 PM
Shrimaan ji, broccoli ke liye aap Palam Samridhi kisam ki bijai kar sakte hain, dhanywad
Posted by shevendra singh
Uttar Pradesh
04-10-2019 08:38 PM
Punjab
10-18-2019 04:13 PM
श्वेनद्र जी, गन्ने की खेती कर के आप उसे market में बेच सकते है, आप उसकी Processing कर सकते है और आप उसका गुड़ भी बना कर बेच सकते है इसके लिए आप खेत की दो बार जोताई करें पहली जोताई 20-25 सैं.मी. होनी चाहिए कंकड़ों को मशीनी ढंग से अच्छी तरह तोड़कर समतल कर दें ट्रैक्टर वाली मेंड़ बनाने वाली मशीन की मदद से मेंड़ और खालियां बनाएं और इन .... (Read More)
श्वेनद्र जी, गन्ने की खेती कर के आप उसे market में बेच सकते है, आप उसकी Processing कर सकते है और आप उसका गुड़ भी बना कर बेच सकते है इसके लिए आप खेत की दो बार जोताई करें पहली जोताई 20-25 सैं.मी. होनी चाहिए कंकड़ों को मशीनी ढंग से अच्छी तरह तोड़कर समतल कर दें ट्रैक्टर वाली मेंड़ बनाने वाली मशीन की मदद से मेंड़ और खालियां बनाएं और इन मेड़ और खालियों में बिजाई करें मेड़ में 90 सैं.मी. का फासला होना चाहिए गन्ने की गुलियों को मिट्टी में दबाएं और हल्की सिंचाई करें खेत में 150 सैं.मी. के फासले पर खालियां बनाएं और उनमें 30-60-90 सैं.मी. के फासले पर बिजाई करें इस तरीके से मेड़ वाली बिजाई से अधिक पैदावार मिलती है गड्ढे खोदने वाली मशीन से 60 सैं.मी. व्यास के 30 सैं.मी. गहरे गड्ढे खोदें जिनमें 60 सैं.मी. का फासला हो इससे गन्ना 2-3 बार उगाया जा सकता है और आम बिजाई से 20-25 प्रतिशत अधिक पैदावार आती है सेहतमंद गुलियां चुनें और 75-90 सैं.मी. के अंतर पर खालियों में बिजाई करें गुलियां एक आंख वाली होनी चाहिए यदि गन्ने के ऊपरले भाग में छोटी डलियां चुनी गई हों तो बिजाई 6-9 सैं.मी. के अंतर पर करें फसल के अच्छे उगने के लिए आंखों को ऊपर की ओर रखें और हल्की सिंचाई करें यू पी में गन्ने की खेती का उपयुक्त समय बसंत का मौसम है फरवरी से मार्च गन्ने की रोपाई के लिए सबसे उपयुक्त समय है कतारों में 60-120 सैं.मी. का फासला रखें बिजाई के लिए सुधरे ढंग जैसे कि गहरी खालियां, मेंड़ बनाकर,पंक्तियों में जोड़े बनाकर और गड्ढा खोदकर बिजाई की जाती है धन्यवाद
Posted by dilbag
Punjab
04-10-2019 08:37 PM
Punjab
10-04-2019 08:49 PM
ਵੈਸੇ ਤਾਂ ਬਾਜ਼ਾਰ ਵਿਚ ਬਹੁਤ ਸਾਰੀਆਂ ਕੰਪਨੀਆਂ ਦੀਆ ਫ਼ੀਡਜ ਆਉਂਦੀਆਂ ਹੈ ਜੋ ਕਿ ਕੰਪਨੀ ਵਾਲੇ ਆਪਣੇ ਹਿਸਾਬ ਨਾਲ ਤਿਆਰ ਕਰਕੇ ਦਿੰਦੇ ਹੈ, ਜੋ ਤੁਹਾਡਾ ਪਸ਼ੂ ਆਸਾਨੀ ਨਾਲ ਖਾਂਦਾ ਹੈ ਤੁਸੀ ਓਹੀ ਫੀਡ ਦੇ ਸਕਦੇ ਹੋ ਜੇਕਰ ਤੁਸੀ ਖੁਦ ਤਿਆਰ ਕਰਕੇ ਦੇਣਾ ਚਾਉਂਦੇ ਹੋ ਤਾਂ ਤੁਸੀ ਇਸ ਤਰੀਕੇ ਨਾਲ ਤਿਆਰ ਕਰਕੇ ਦੇ ਸਕਦੇ ਹੋ ਜਿਸ ਵਿਚ ਸਾਰੇ ਜਰੂਰੀ ਤੱਤ ਹੁੰਦੇ ਹੈ ਇਹ ਫੀਡ ਥੋੜੀ ਮਹਿੰਗੀ ਹੁੰਦੀ ਹੈ ਪ.... (Read More)
ਵੈਸੇ ਤਾਂ ਬਾਜ਼ਾਰ ਵਿਚ ਬਹੁਤ ਸਾਰੀਆਂ ਕੰਪਨੀਆਂ ਦੀਆ ਫ਼ੀਡਜ ਆਉਂਦੀਆਂ ਹੈ ਜੋ ਕਿ ਕੰਪਨੀ ਵਾਲੇ ਆਪਣੇ ਹਿਸਾਬ ਨਾਲ ਤਿਆਰ ਕਰਕੇ ਦਿੰਦੇ ਹੈ, ਜੋ ਤੁਹਾਡਾ ਪਸ਼ੂ ਆਸਾਨੀ ਨਾਲ ਖਾਂਦਾ ਹੈ ਤੁਸੀ ਓਹੀ ਫੀਡ ਦੇ ਸਕਦੇ ਹੋ ਜੇਕਰ ਤੁਸੀ ਖੁਦ ਤਿਆਰ ਕਰਕੇ ਦੇਣਾ ਚਾਉਂਦੇ ਹੋ ਤਾਂ ਤੁਸੀ ਇਸ ਤਰੀਕੇ ਨਾਲ ਤਿਆਰ ਕਰਕੇ ਦੇ ਸਕਦੇ ਹੋ ਜਿਸ ਵਿਚ ਸਾਰੇ ਜਰੂਰੀ ਤੱਤ ਹੁੰਦੇ ਹੈ ਇਹ ਫੀਡ ਥੋੜੀ ਮਹਿੰਗੀ ਹੁੰਦੀ ਹੈ ਪਰ ਇਸ ਨਾਲ ਪਸ਼ੂ ਨੂੰ ਫਾਇਦਾ ਬਹੁਤ ਹੁੰਦਾ ਹੈ , ਬਾਕੀ ਜੇਕਰ ਤੁਸੀ ਜ਼ਿਆਦਾ ਮਹਿੰਗੀ ਫੀਡ ਨਹੀਂ ਵਰਤਣਾ ਚਾਉਂਦੇ ਤਾਂ ਤੁਸੀ ਬਜ਼ਾਰ ਚੋ ਕਿਸੀ ਵੀ ਕੰਪਨੀ ਦੀ ਫੀਡ ਦੇ ਸਕਦੇ ਹੋ , ਉਸ ਨਾਲ ਵੀ ਪਸ਼ੂ ਤੋਂ ਦੁੱਧ ਲਿਆ ਜਾ ਸਕਦਾ ਹੈ , ਸੰਤੁਲਿਤ ਖੁਰਾਕ 100 ਕਿਲੋ ਬਣਾਉਣ ਲਈ ਲੋੜੀਂਦੀ ਸਮੱਗਰੀ ਚਾਹੀਦੀ ਹੈ ਜਿਵੇਂ 25 ਕਿਲੋ ਅਨਾਜ ( ਜਵਾਰ, ਬਾਜਰੀ (ਸਰਦੀਆਂ) , ਕਣਕ, ਜੌਂ ( ਗਰਮੀਆ) ਇਹਨਾਂ ਵਿੱਚੋ ਕੋਈ ਇੱਕ ) , ਦਾਲ ਚੂਰੀ 20 ਕਿਲੋ( ਮੂੰਗੀ ਚੂਰੀ, ਮਾਂਹ ਚੂਰੀ, ਮੋਠ ਚੂਰੀ ( ਕੇਵਲ ਸਰਦੀਆਂ ਲਈ) , ਮਸੁਰ ਚੂਰੀ ,ਅਰਹਰ, (ਇਨਾਂ ਵਿੱਚੋ ਇੱਕ ) , DOC 25 ਕਿਲੋ ( ਚੌਲਾਂ ਦਾ ਚੂਰਾ ) , ਫਾਈਬਰ ਛਿਲਕਾ 15 ਕਿਲੋ (ਕਣਕ, ਚੌਕਰ, ਚਨਾ ਛਿਲਕਾ, ਮਟਰ ਛਿਲਕਾ, ਇਨਾਂ ਵਿੱਚੋ ਇੱਕ) , ਖਲ਼ 15 ਕਿਲੋ(ਸਰੋਂ, ਬਿਨੌਲਾ ਜਾਂ ਸੋਇਆ (ਇਹਨਾਂ ਵਿੱਚੋ ਕੋਈ ਇੱਕ) , ਮਿੱਠਾ ਸੋਡਾ 250 ਗ੍ਰਾਮ, 1 ਕਿਲੋ ਨਮਕ, ਗੁੜ 1 ਕਿਲੋ, 1 ਕਿੱਲੋ ਹਲਦੀ (ਸਰਦੀਆ ਵਿੱਚ ) ਇਹ ਨੂੰ ਰਲਾ ਲਵੋ ਇਹ ਫੀਡ ਪਸ਼ੂ ਲਈ ਬਹੁਤ ਲਾਹੇਵੰਦ ਹੁੰਦੀ ਹੈ.
Posted by ajaib Singh
Punjab
04-10-2019 08:35 PM
Punjab
10-06-2019 03:20 PM
ਤੁਸੀ ਓਹਨਾ ਨੂੰ ਪੇਟ ਦੇ ਕੀੜਿਆਂ ਲਈ Flukaird-DS ਗੋਲੀ ਦਿਓ, ਸੂਣ ਤੋਂ 2 ਮਹੀਨੇ ਪਹਿਲਾਂ vitum-h 10-10 ml ਸਵੇਰੇ ਸ਼ਾਮ ਦਿਓ ਤੇ enerboost powder 100 ਗ੍ਰਾਮ ਰੋਜ਼ਾਨਾ ਦਿਓ ਤੇ ਫਿਰ ਸੂਣ ਤੋਂ 1 ਮਹੀਨਾ ਪਹਿਲਾਂ vitum-h ਦੇ ਨਾਲ metabolite ਪਾਊਡਰ ਦੀ ਇੱਕ ਪੁੜੀ ਰੋਜ਼ਾਨਾ ਦਿਓ
Posted by gurwinder kaur
Punjab
04-10-2019 08:31 PM
Punjab
10-05-2019 08:58 PM
babbu ji jekar tusi markfed bare puch rahe ho ta us feed de gatte di photo send karo ji. kyuki mash feed v alag alag hundi hai ji
Posted by ਕੁਲਦੀਪ ਸਿੰਘ
Punjab
04-10-2019 08:29 PM
Punjab
10-04-2019 08:50 PM
tuci uss nu Vitum-H liquid 10-10ml swere sham, Anabolite liquid 100ml rojana deo, ehna nal lewa vdia howega ate usdi kamjori door howegi, baki tuci saro da tel suun ton 15 din badd dena suru kro tuci pehla ehh product deo..
Posted by Aashish Patel
Madhya Pradesh
04-10-2019 08:28 PM
Punjab
10-18-2019 04:37 PM
आशीष पटेल जी, चने की खेती के लिए किस्मे जैसे के JG-322, JG-130,, JG-63, JGK-2, lam sharaya, JGK-3, jawahar gram 226, JG-6, PKV Kabuli-4, Raj vijay gram 201 की बिजाई कर सकते हैं चने की फसल के लिए ज्यादा समतल बैडों की जरूरत नहीं होती यदि इसे मिक्स फसल के तौर पर उगाया जाये तो खेत की अच्छी तरह से जोताई होनी चाहिए यदि इस फसल को खरीफ की फसल के तौर पर बीजना हो, तो खेत को मॉनसून आने पर .... (Read More)
आशीष पटेल जी, चने की खेती के लिए किस्मे जैसे के JG-322, JG-130,, JG-63, JGK-2, lam sharaya, JGK-3, jawahar gram 226, JG-6, PKV Kabuli-4, Raj vijay gram 201 की बिजाई कर सकते हैं चने की फसल के लिए ज्यादा समतल बैडों की जरूरत नहीं होती यदि इसे मिक्स फसल के तौर पर उगाया जाये तो खेत की अच्छी तरह से जोताई होनी चाहिए यदि इस फसल को खरीफ की फसल के तौर पर बीजना हो, तो खेत को मॉनसून आने पर गहरी जोताई करें, जो बारिश के पानी को संभालने में मदद करेगा बिजाई से पहले खेत की एक बार जोताई करें यदि मिट्टी में नमी की कमी नज़र आये तो बिजाई से एक सप्ताह पहले सुहागा फेरें बारानी क्षेत्रों के लिए, अक्तूबर का दूसरा या तीसरा सप्ताह चने की खेती के लिए उपयुक्त होता है सिंचित क्षेत्रों के लिए, बिजाई नवंबर के दूसरे सप्ताह में पूरी कर लें चने की पिछेती बिजाई दिसंबर के पहले सप्ताह तक पूरी कर लें बिजाई के लिए, कतार से कतार में 20-25 सैं.मी. और पौधे से पौधे में 10 सैं.मी. फासले का प्रयोग करें बीज को 6-8 सैं.मी. की गहराई पर बोयें बीज को सीड ड्रिल या लोकल हल की सहायता से बोयें छोटे दानों के लिए 30-32 किलो बीज प्रति एकड़ में प्रयोग करें और मोटे दानों के लिए 36-40 किलो बीज प्रति एकड़ में प्रयोग करें धन्यवाद
Posted by siddharth bedi
Chattisgarh
04-10-2019 08:20 PM
Punjab
10-18-2019 04:44 PM
Siddharth ji, kripya aap bataye ki aap konsi organic fasal ke bare mein jankari lena chahte hai, tan ki apko uske bare mein visthar se bataya ja sake, dhaywad
Posted by Vinay Kumar
Uttar Pradesh
04-10-2019 08:20 PM
Punjab
10-05-2019 06:30 AM
श्रीमान जी सरसों की बिजाई मध्य अक्तूबर से मध्य नवंबर तक कर सकते हैं
Posted by ਗੁਰਪ੍ਰੀਤ ਸਿੰਘ
Punjab
04-10-2019 08:17 PM
Punjab
10-07-2019 07:08 PM
Posted by ajaib Singh
Punjab
04-10-2019 08:13 PM
Punjab
10-04-2019 08:23 PM
BhaaG rajwa hara chaara te har 4 kg dudh lai gau nu 1kg wadhya feed pao har 3 mahine baad malap rehat karo sunh ton 2 mahine pehlan dudho chhad k isdi dab ke sewa karo rajwa hara chaara te 2-3 kg feed pao
Posted by ummed Singh Chauhan
Rajasthan
04-10-2019 08:12 PM
Punjab
10-18-2019 04:48 PM
Ummed ji, kripya aap tidi ki photo beje tan ki apko uski roktham ke bare mein puri jankari di ja sake, dhanywad
Posted by टिंकु बन्ना महुवा
Madhya Pradesh
04-10-2019 08:11 PM
Maharashtra
10-21-2019 01:23 PM
फूलों की खेती के लिए मिट्टी रेतली होनी चाहिए जिसमें ज्यादा समय पानी खड़ा ना रहे, क्योंकि ज्यादा पानी फूलों की जड़ों को खराब करता है पानी मीठा होना चाहिए इसका खर्चा तथा मुनाफा फूलों की खेती की कौन सी किस्म की कर रहे हैं, उस पर निर्भर करता है यदि आपने फूलों की खेती अभी शुरू ही करनी है तो आप सबसे पहले गेंदे की खेती .... (Read More)
फूलों की खेती के लिए मिट्टी रेतली होनी चाहिए जिसमें ज्यादा समय पानी खड़ा ना रहे, क्योंकि ज्यादा पानी फूलों की जड़ों को खराब करता है पानी मीठा होना चाहिए इसका खर्चा तथा मुनाफा फूलों की खेती की कौन सी किस्म की कर रहे हैं, उस पर निर्भर करता है यदि आपने फूलों की खेती अभी शुरू ही करनी है तो आप सबसे पहले गेंदे की खेती शुरू करें तथा यह देखें कि आपके नजदीक मार्किट कौन सी है, जिसमें आप यह फूल बेच सकते हैं तथा फूलों की खेती सर्दियों में शुरू करें क्योंकि उस समय शादी का सीजन होता है, फूल अच्छे रेट पर बिक जाते हैं