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Posted by Kailash kumar
Uttar Pradesh
07-10-2019 10:22 PM
Rajasthan
10-08-2019 10:16 AM
मोती की खेती एक बहुत ही अच्छा व्यवसाय है इस व्यवसाय को शुरू करने के लिए सबसे जरुरी है इसकी ट्रेनिंग, क्योकि इसमें बहुत सी ऐसी बारीकियें होती है जो हमें प्रेक्टिकल ट्रेनिंग में ही सीखने को मिलती है अगर आप इसकी ट्रेनिंग लेना चाहते है तो आप ग्लिटराटी पर्ल फार्मिंग ट्रेनिंग केंद्र प्रशिक्षण कार्य कर्म आयोजि.... (Read More)
मोती की खेती एक बहुत ही अच्छा व्यवसाय है इस व्यवसाय को शुरू करने के लिए सबसे जरुरी है इसकी ट्रेनिंग, क्योकि इसमें बहुत सी ऐसी बारीकियें होती है जो हमें प्रेक्टिकल ट्रेनिंग में ही सीखने को मिलती है अगर आप इसकी ट्रेनिंग लेना चाहते है तो आप ग्लिटराटी पर्ल फार्मिंग ट्रेनिंग केंद्र प्रशिक्षण कार्य कर्म आयोजित किया जा रहा है प्रशिक्षण कार्य कर्म में भाग लेने के लिए नीचे दिए गए नम्बर पर आज ही संपर्क करें और Rs 250/ से अपना रजिस्ट्रेशन करवाए अचल सिंह (फाउंडर )- 9711858258. धन्यवाद
Posted by Bhuvan Chandra
Uttarakhand
07-10-2019 10:00 PM
Punjab
03-16-2020 08:03 PM
Bhuvan ji iske liye aap apne nazdiki poultry farm wale se sampark kr skte hai ja fir aap Rajinder Singh 6299561595 se sampark kr skte hai.
Posted by Mandeep singh
Punjab
07-10-2019 09:24 PM

?

Punjab
10-08-2019 07:33 AM
Mandeep singh g kirpa apna jawab check krein...
Posted by desi jaat
Rajasthan
07-10-2019 09:16 PM
Punjab
10-08-2019 10:51 AM
Desi jaat ji shriram rani kisam ki maturity 135 din ki hai aur 170-185 din ki height hai.isme 40% oil content hota hai.dhanywad
Posted by dinesh
Uttar Pradesh
07-10-2019 09:07 PM
Maharashtra
10-08-2019 10:53 AM
तोरई को बिभिन्न प्रकार की मिटटी में उगाया जा सकता है किन्तु उचित जल निकास धारण क्षमता वाली जीवांश युक्त हलकी दोमट भूमि इसकी सफल खेती के लिए सर्वोत्तम मानी गई है, वैसे उदासीन पी एच मान वाली मिटटी इसके लिए अच्छी रहती है नदियों के किनारे वाली भूमि भी इसकी खेती के लिए उपयुक्त रहती है, कुछ अम्लीय भूमि में भी इसक.... (Read More)
तोरई को बिभिन्न प्रकार की मिटटी में उगाया जा सकता है किन्तु उचित जल निकास धारण क्षमता वाली जीवांश युक्त हलकी दोमट भूमि इसकी सफल खेती के लिए सर्वोत्तम मानी गई है, वैसे उदासीन पी एच मान वाली मिटटी इसके लिए अच्छी रहती है नदियों के किनारे वाली भूमि भी इसकी खेती के लिए उपयुक्त रहती है, कुछ अम्लीय भूमि में भी इसकी खेती की जा सकती है तोरई के सफल उत्पादन के लिए पहली जुताई मिटटी पलटने वाले हल से करें, इसके बाद 2 से 3 बार हैरो या कल्टीवेटर से मिट्टी को भुरभुरी बना लें और पाटा लगाकर खेत को समतल बना लेवें पूसा नसदार- इस किस्म के फलों पर उभरी धारियां बनी रहती है इसके फल हरे हल्के पीले रंग के होते है जो बुवाई के 80 से 90 दिन बाद तैयार हो जाते है यह किस्म जायद में उगाने के लिए उपयुक्त है इसके बीजों पर छोटे-छोटे उभार होते है सरपूतिया- इस जाति के फल छोटे और गुच्छों में लगते है एक गुच्छे में 4 से 7 फल लगते है बुवाई के 60 से 70 दिनों बाद फल तुड़ाई के लिए तैयार हो जाते है यह किस्म मैदानी भागो में अधिक प्रचलित है खरीफ़ में इसकी बुवाई का समय जून से जुलाई का उत्तम होता है और ग्रीष्म कालीन फसल के लिए जनवरी से मार्च उपयुक्त होता है बीज का शोधन इसलिए आवश्यक है, क्योकि तोरई फसल को फफूंदी रोग अत्याधिक नुकसान पहुंचाते है बीज को बुवाई से पहले थीरम या बाविस्टीन की 3 ग्राम मात्रा प्रति किलोग्राम बीज दर से उपचारित करना अच्छा रहता है तोरई की खेती 2.5 से 3 मीटर की दूरी पर नालियाँ बनाकर इसकी बुवाई करते है और जो मेड़ें बनती है, उसमे 50 सेंटीमीटर की दूरी पौधे से पौध रखते हुए इसकी बुवाई करते है बीज की गहराई 3 से 4 सेंटीमीटर रखें
Posted by Anshu uttam
Uttar Pradesh
07-10-2019 09:05 PM
Punjab
10-08-2019 07:27 PM
बकरी पालन बहुत ही लाभकारी काम है शुरूआत करने के लिए आप 10 बकरियों और 2 बकरे के साथ कर सकते हैं इन्हें खुराक कम चाहिए इसलिए इन्हें आसानी से पाल सकते हैं ये हर प्रकार के मौसम में पाली जा सकती हैं बकरियां 12-14 महीने में बच्चे देना शुरू कर देती है बकरी का गर्भ समय 150 दिन का होता है और साल में 1-5 बच्चे देती है साल में दो बच्.... (Read More)
बकरी पालन बहुत ही लाभकारी काम है शुरूआत करने के लिए आप 10 बकरियों और 2 बकरे के साथ कर सकते हैं इन्हें खुराक कम चाहिए इसलिए इन्हें आसानी से पाल सकते हैं ये हर प्रकार के मौसम में पाली जा सकती हैं बकरियां 12-14 महीने में बच्चे देना शुरू कर देती है बकरी का गर्भ समय 150 दिन का होता है और साल में 1-5 बच्चे देती है साल में दो बच्चे देना आम बात है बकरियां 8-10 वर्ष तक बच्चे देती हैं और अपन गिनती को तेजी से बढ़ा लेती हैं आप बारबरी, ब्लैक बंगाल, जैसी नसल पाल सकते हैं इसकी ट्रेनिेंग के लिए आप अपने कुषि विज्ञान केंद्र से संपर्क करे या फिर जो बकरी पालन का व्यवसाय कर रहा कोई किसान उसका फार्म स्वंय जाकर देखकर आयें तो और भी बा​रीकियों का पता चल जायेगा, आप ब्लैक बंगाल, बीटल, सिरोही, जमुनापरी, बरबरी नस्ल रख सकते हैं, बकरी पालन में लोन लेने के लिए सबसे जरूरी है ट्रेनिंग सर्टीफिकेट अपने नज़दीक के कृषि विज्ञान केंद्र से ट्रेनिंग करने के बाद ट्रेनिंग के सर्टीफिकेट पर लोन एप्लाई होता है पर लोन मिलेगा या नहीं यह बैंक मेनेजर पर निर्भर करता है क्योंकि पहली बात यह है कि बैंक देखता है कि आपके अकाउंट में कितने पैसों का लेन देन हो रहा है और आपके पास ज़मीन गारंटी के तौर पर देने के लिए है या नहीं और अन्य भी कई बातें चैक करके लोन के लिए सहमत होता है बाकी कोशिश करें कि लोन के बिना अपने स्तर पर ही काम शुरू करें क्योंकि लोन की किश्त हर महीने भरनी पड़ेगी पर बकरियों से कमाई हर महीने नहीं होने होगी बाकी यदि कोशिश करके देखनी है तो अपने ट्रेनिंग सर्टीफिकेट से आप अपने जिले के पशु पालन विभाग अफसर को मिलें और उस पर प्रवानगी लेकर फिर बैंक से बात करके देखें, यदि आपने बकरी फार्म बनाना है तो बहुत बढ़िया सोच है आप बीटल नस्ल रखें यह दूध और मीट दोनों के लिए फायदेमंद है बाकि आप जैसे इस व्यवसायों में आएंगे उस हिसाब से आपके लिंक बनने शुरू हो जाएंगे और बाकि मार्केटिंग इस बात निर्भर है कि आपका लोगों के साथ लिंक कैसा है इसका दूध गाय के रेट के बराबर मिल जाता है और बाकि यदि फार्म हो तो बच्चे भी बेचे जाते है कुल मिलाकर यदि मोटा सा हिसाब लगाना है तो एक बकरी से लगभग 20000 तक कमाई हो जाती है बाकि यह भी सलाह है कि आप आपने नज़दीक kvk से ट्रेनिंग ज़रूर लें और सफल बकरी पालकों के फार्म ज़रूर देखें.वहां से आपको इस काम के बारे में जानकारी और इसे करने के तरीकों के बारे में भी पता लगेगा.
Posted by Mandeep singh
Punjab
07-10-2019 09:04 PM

?

Punjab
10-08-2019 07:33 AM
Mandeep singh g kirpa apna jawab check krein...
Posted by Akhilesh yadav
Uttar Pradesh
07-10-2019 08:58 PM
Punjab
10-11-2019 06:20 PM
यदि आप मधु मक्खी पालन के बारे में जानकारी लेना चाहते है और अगर आप नए सिरे से मक्खी पालन का व्यवसाय शुरू करना चाहते हैं तो अगस्त से जनवरी तक शुरू किया जा सकता है इसमें 100 मक्खी के बक्सों से आप औसतन 25000-30000 तक का मुनाफा ले सकते हैं शुरूआत में यदि आप 100 बक्सों से काम शुरू करते हैं तो औसतन 4-5 लाख तक खर्चा आता है आप अपने बजट.... (Read More)
यदि आप मधु मक्खी पालन के बारे में जानकारी लेना चाहते है और अगर आप नए सिरे से मक्खी पालन का व्यवसाय शुरू करना चाहते हैं तो अगस्त से जनवरी तक शुरू किया जा सकता है इसमें 100 मक्खी के बक्सों से आप औसतन 25000-30000 तक का मुनाफा ले सकते हैं शुरूआत में यदि आप 100 बक्सों से काम शुरू करते हैं तो औसतन 4-5 लाख तक खर्चा आता है आप अपने बजट के हिसाब से बक्सों की गिणती कम ज्यादा कर सकते हैं बाकी यदि इसकी ट्रेनिंग लेकर शुरू करें तो बढ़िया रहेगा ट्रेनिंग में आपको पूरी जानकरी मिलेगी किस तरह से इसका रख रखाव करना होता है जी और उसके बाद जब आपने यह काम शुरू करना है तो आप बक्से नज़दीकी किसी भी मधुमखी पालन का काम करने वाले किसान से खरीद सकते है..
Posted by vikram singh
Punjab
07-10-2019 08:56 PM
Punjab
10-09-2019 06:02 PM
tuci uss nu ek varr kisi hor doctor ton gaban check krwao jekar ohh gaban hai tan tuci uss nu Stay progen powder ja gestaprogen powder 25gm rojana deo ate her month uss nu Duraprogen injection jiss nu thnda tika bolde hai ohh lgwande rho..
Posted by Avtar Singh
Punjab
07-10-2019 08:54 PM
Punjab
10-08-2019 07:30 PM
tuci iss nu pregstay gold powder 2-2 chamch rojana deo, jekar ehh gaban howegi tan rukk jawegi jekar gaban naa hoi tan iss nal dubara heat vich aa jawegi..
Posted by Hariom vishwakaram Vishwakaram
Madhya Pradesh
07-10-2019 08:46 PM
Maharashtra
10-08-2019 10:56 AM
हरिओम जी मौसम विभाग के अनुसार इस हफ्ते में बारिश होने की बहुत कम सम्भावना है धन्यवाद
Posted by iftekar husain
Uttar Pradesh
07-10-2019 08:45 PM
Maharashtra
10-08-2019 11:01 AM
iftekar ji yeh fungus ke karn hota hai iske liye aap carbendazim@400 gram ko 150 litre pani ke hisab se spray kren. dhanywad
Posted by Akhilesh yadav
Uttar Pradesh
07-10-2019 08:43 PM
Rajasthan
10-08-2019 10:16 AM
मोती की खेती एक बहुत ही अच्छा व्यवसाय है इस व्यवसाय को शुरू करने के लिए सबसे जरुरी है इसकी ट्रेनिंग, क्योकि इसमें बहुत सी ऐसी बारीकियें होती है जो हमें प्रेक्टिकल ट्रेनिंग में ही सीखने को मिलती है अगर आप इसकी ट्रेनिंग लेना चाहते है तो आप ग्लिटराटी पर्ल फार्मिंग ट्रेनिंग केंद्र प्रशिक्षण कार्य कर्म आयोजि.... (Read More)
मोती की खेती एक बहुत ही अच्छा व्यवसाय है इस व्यवसाय को शुरू करने के लिए सबसे जरुरी है इसकी ट्रेनिंग, क्योकि इसमें बहुत सी ऐसी बारीकियें होती है जो हमें प्रेक्टिकल ट्रेनिंग में ही सीखने को मिलती है अगर आप इसकी ट्रेनिंग लेना चाहते है तो आप ग्लिटराटी पर्ल फार्मिंग ट्रेनिंग केंद्र प्रशिक्षण कार्य कर्म आयोजित किया जा रहा है प्रशिक्षण कार्य कर्म में भाग लेने के लिए नीचे दिए गए नम्बर पर आज ही संपर्क करें और Rs 250/ से अपना रजिस्ट्रेशन करवाए अचल सिंह (फाउंडर )- 9711858258. धन्यवाद
Posted by SURENDRA SINGH RATHOR mob no 9887787879
Rajasthan
07-10-2019 08:35 PM
Maharashtra
10-08-2019 11:38 AM
सुरेंद्र जी इसकी किस्मे जैसे Aashirwad (RK 01-03): यह किस्म पिछेती बिजाई के लिए उपयुक्त है पौधे का कद 130-140 सैं.मी. होता है इसमें तेल की मात्रा 39-42 प्रतिशत होती है यह किस्म 120-130 दिनों में कटाई के लिए तैयार हो जाती है इसकी औसतन पैदावार 5-6 क्विंटल प्रति एकड़ होती है Swarn Jyoti (RH 9801): यह किस्म सिंचित क्षेत्रों और पिछेती बिजाई के लिए उपयुक्.... (Read More)
सुरेंद्र जी इसकी किस्मे जैसे Aashirwad (RK 01-03): यह किस्म पिछेती बिजाई के लिए उपयुक्त है पौधे का कद 130-140 सैं.मी. होता है इसमें तेल की मात्रा 39-42 प्रतिशत होती है यह किस्म 120-130 दिनों में कटाई के लिए तैयार हो जाती है इसकी औसतन पैदावार 5-6 क्विंटल प्रति एकड़ होती है Swarn Jyoti (RH 9801): यह किस्म सिंचित क्षेत्रों और पिछेती बिजाई के लिए उपयुक्त है पौधे का कद 130-140 सैं.मी. होता है यह किस्म 130-140 दिनों में कटाई के लिए तैयार हो जाती है इसमें तेल की मात्रा 39-42 प्रतिशत होती है इसकी औसतन पैदावार 5-6 क्विंटल प्रति एकड़ होती है RGN 73: यह किस्म सिंचित क्षेत्रों और सामान्य बिजाई के लिए उपयुक्त है पौधे का कद 160-170 सैं.मी. होता है इसमें तेल की मात्रा 40-41 प्रतिशत होती है यह किस्म 125-130 दिनों में कटाई के लिए तैयार हो जाती है इसकी औसतन पैदावार 8.8-10 क्विंटल प्रति एकड़ होती है Lakshmi (RH 8812): यह किस्म सिंचित क्षेत्रों और सामान्य बिजाई के लिए उपयुक्त है पौधे का कद 160-180 सैं.मी. होता है यह किस्म 140-145 दिनों में कटाई के लिए तैयार हो जाती है इसके दाने बड़े और काले रंग के होते हैं इसमें तेल की मात्रा 40 प्रतिशत होती है इसकी औसतन पैदावार 8.8-10 क्विंटल प्रति एकड़ होती है VSL 5: यह किस्म सिंचित क्षेत्रों और सामान्य बिजाई के लिए उपयुक्त है पौधे का कद 165-170 सैं.मी. होता है यह किस्म 125-130 दिनों में कटाई के लिए तैयार हो जाती है इसके दाने मध्यम और काले रंग के होते हैं इसमें तेल की मात्रा 39-40 प्रतिशत होती है इसकी औसतन पैदावार 8-8.8 क्विंटल प्रति एकड़ होती है Aravali (RN 393): पौधे का कद 155-165 सैं.मी. होता है यह किस्म 135-138 दिनों में कटाई के लिए तैयार हो जाती है इसमें तेल की मात्रा 42 प्रतिशत होती है इसकी औसतन पैदावार 8.8-10 क्विंटल प्रति एकड़ होती है Vansudhara (RH 9304): यह किस्म सिंचित क्षेत्रों और समय पर बोने के लिए उपयुक्त है इसके पौधे का कद 180-190 सैं.मी. होता है यह 130-135 दिनों में कटाई के लिए तैयार हो जाती है इसकी औसतन पैदावार 10-11 क्विंटल प्रति एकड़ होती है Maya (RK 9902): यह किस्म सिंचित क्षेत्रों और समय पर बोने के लिए उपयुक्त है इसके पौधे का कद 165-170 सैं.मी. होता है यह 130-135 दिनों में कटाई के लिए तैयार हो जाती है इसमें तेल की मात्रा 39-40 प्रतिशत होती है इसकी औसतन पैदावार 10-11 क्विंटल प्रति एकड़ होती है Pusa Jaykisan: इसके पौधे का कद 160-180 सैं.मी. होता है यह 130-140 दिनों में कटाई के लिए तैयार हो जाती है इसमें तेल की मात्रा 38-40 प्रतिशत होती है इसकी औसतन पैदावार 7.2-8 क्विंटल प्रति एकड़ होती है Pusa Bold: पौधा मध्यम कद का होता है इसमें तेल की मात्रा 37-38 प्रतिशत होती है यह किस्म 130-140 दिनों में कटाई के लिए तैयार हो जाती है इसकी औसतन पैदावार 4.8-10 क्विंटल प्रति एकड़ होती है T 59(Varuna): इसका पौधा मध्यम कद का होता है यह किस्म 125-140 दिनों में कटाई के लिए तैयार हो जाती है इसके दाने मोटे और काले रंग के होते हैं सिंचित हालातों में यह 6-7 क्विंटल औसतन पैदावार देती है और असिंचित क्षेत्रों में 4-6 क्विंटल औसतन पैदावार देती है RH 30: यह सिंचित और असिंचित क्षेत्रों में उगाने के लिए उपयुक्त है पौधे का कद 196 सैं.मी. होता है यह किस्म पिछेती बिजाई के लिए उपयुक्त है यह 130-135 दिनों में कटाई के लिए तैयार हो जाती है इसकी औसतन पैदावार 4.8-7 क्विंटल प्रति एकड़ होती है सीड बैड पर बोयी फसल अच्छी अंकुरित होती है ज़मीन को देसी हल से दो या तीन बार जोताई करें और प्रत्येक जोताई के बाद सुहागा फेरें बीजों के एकसार अंकुरित होने के लिए बैड नर्म, गीले और समतल होने चाहिए असिंचित क्षेत्रों में बिजाई 15 सितंबर से 15 अक्तूबर तक पूरी कर लें जबकि सिंचित क्षेत्रों में बिजाई 10-25 अक्तूबर तक पूरी कर लें बिजाई के लिए पौधे से पौधे का फासला 10 सैं.मी. और कतार से कतार का फासला 30-45 सैं.मी. रखें बीजों को 4-5 सैं.मी. गहराई में बोयें जब एक फसल लेनी हो तो ड्रिल विधि का प्रयोग करें और यदि अंतरफसली लेनी हो तो बिजाई के लिए बुरकाव या ड्रिल विधि का प्रयोग करें
Posted by naib singh
Punjab
07-10-2019 08:34 PM
Punjab
10-07-2019 10:13 PM
Naib singh ji kisnu hoi hai ji kabaz. eh daso ji ?
Posted by SURENDRA SINGH RATHOR mob no 9887787879
Rajasthan
07-10-2019 08:33 PM
Punjab
10-08-2019 11:40 AM
यह फसल काफी तरह की मिट्टी में उगाई जाती है चने की खेती के लिए रेतली या चिकनी मिट्टी बहुत अनुकूल मानी जाती है घटिया निकास वाली ज़मीन इसकी बिजाई के लिए अनुकूल नहीं मानी जाती खारी या नमक वाली ज़मीन भी इसके लिए अच्छी नहीं मानी जाती इसके विकास के लिए 5.5 से 7 पी एच वाली मिट्टी अच्छी होती है हर साल एक खेत में एक ही फसल ना .... (Read More)
यह फसल काफी तरह की मिट्टी में उगाई जाती है चने की खेती के लिए रेतली या चिकनी मिट्टी बहुत अनुकूल मानी जाती है घटिया निकास वाली ज़मीन इसकी बिजाई के लिए अनुकूल नहीं मानी जाती खारी या नमक वाली ज़मीन भी इसके लिए अच्छी नहीं मानी जाती इसके विकास के लिए 5.5 से 7 पी एच वाली मिट्टी अच्छी होती है हर साल एक खेत में एक ही फसल ना बोयें अच्छा फसली चक्र अपनायें अनाज वाली फसलों को फसल चक्र में प्रयोग करने से ज़मीन से लगने वाली बीमारियां रोकने में मदद मिलती है आमतौर पर फसल चक्र में खरीफ के सफेद चने, खरीफ के काले चने + गेहूं /जौं/राया, चरी-चने, धान/मक्की-चने आदि फसलें आती हैं C 235: यह किस्म तकरीबन 145-150 दिनों में पक जाती है यह किस्म तना गलन और झुलस रोग को सहनेयोग्य है इसके दाने दरमियाने आकार के और पीले-भूरे रंग के होते हैं इसकी औसतन पैदावार 8.4-10 क्विंटल प्रति एकड़ होती है G 24: यह दरमियानी फैलने वाली किस्म है और बारानी क्षेत्रों के लिए अनुकूल है यह किस्म तकरीबन 140-145 दिनों में पक जाती है इसकी औसतन पैदावार 10-12 क्विंटल प्रति एकड़ होती है G 130: यह दरमियाने अंतराल की किस्म है इसकी औसतन पैदावार 8-12 क्विंटल प्रति एकड़ होती है Pant G 114: यह किस्म तकरीबन 150 दिनों में पक जाती है यह झुलस रोग की रोधक किस्म है इसकी औसतन पैदावार 12-14 क्विंटल प्रति एकड़ होती है C 104: यह काबुली चने की किस्म है, जो कि पंजाब और उत्तर प्रदेश के लिए अनुकूल है इसकी औसतन पैदावार 6-8 क्विंटल प्रति एकड़ होती है Pusa 209: यह किस्म तकरीबन 140-165 दिनों में पक जाती है इसकी औसतन पैदावार 10-12 क्विंटल प्रति एकड़ होती है चने की फसल के लिए ज्यादा समतल बैडों की जरूरत नहीं होती यदि इसे मिक्स फसल के तौर पर उगाया जाये तो खेत की अच्छी तरह से जोताई होनी चाहिए यदि इस फसल को खरीफ की फसल के तौर पर बीजना हो, तो खेत की मॉनसून आने पर गहरी जोताई करें, जो बारिश के पानी को संभालने में मदद करेगा बिजाई से पहले खेत की एक बार जोताई करें यदि मिट्टी में नमी की कमी नज़र आये तो बिजाई से एक सप्ताह पहले सुहागा फेरें बारानी हालातों के लिए 10 अक्तूबर से 25 अक्तूबर तक पूरी बिजाई करें सिंचित हालातों के लिए 25 अक्तूबर से 10 नवंबर तक देसी और काबुली चने की किस्मों की बिजाई करें सही समय पर बिजाई करनी जरूरी है क्योंकि अगेती बिजाई से अनआवश्यक विकास का खतरा बढ़ जाता है पिछेती बिजाई से पौधों में सूखा रोग का खतरा बढ़ जाता है, पौधे का विकास घटिया और जड़ें भी उचित ढंग से नहीं बढ़ती बीजों के बीच की दूरी 10 सैं.मी. और पंक्तियों के बीच की दूरी 30-40 सैं.मी. होनी चाहिए बीज को 10-12.5 सैं.मी. गहरा बीजना चाहिए उत्तरी भारत में इसकी बिजाई पोरा ढंग से की जाती है देसी किस्मों के लिए 15-18 किलो बीज प्रति एकड़ डालें और 37 किलो बीज प्रति एकड़ काबुली किस्मों के लिए डालें यदि बिजाई नवंबर के दूसरे पखवाड़े में की जाए तो 27 किलो बीज प्रति एकड़ डालें और यदि बिजाई दिसंबर के पहले पखवाड़े में की जाए तो 36 किलो बीज प्रति एकड़ डालें ट्राइकोडरमा 2.5 किलो प्रति एकड़ + गला हुआ गोबर 50 किलो मिलाएं और फिर जूट की बोरियों से ढक दें फिर इस घोल को नमी वाली ज़मीन पर बिजाई से पहले खिलार दें इससे मिट्टी में पैदा होने वाली बीमारियों को रोका जा सकता है बीजों को मिट्टी में पैदा होने वाली बीमारियों से बचाने के लिए फफूंदीनाशक जैसे कि कार्बेनडाज़िम 12 प्रतिशत + मैनकोज़ेब 63 प्रतिशत डब्लयू पी (साफ) 2 ग्राम से प्रति किलो बीजों को बिजाई से पहले उपचार करें दीमक वाली ज़मीन पर बिजाई के लिए बीजों को क्लोरपाइरीफॉस 20 ई सी 10 मि.ली. से प्रति किलो बीजों का उपचार करें बीजों का मैसोराइज़ोबियम से टीकाकरण करें इससे चने की पैदावार 7 प्रतिशत तक वृद्धि होती है इस तरह करने के लिए बीजों को पानी में भिगोकर, उन पर मैसोराइज़ोबियम डालें टीकाकरण से बीजों को छांव में सुखाएं देसी किस्मों के लिए सिंचित और असिंचित इलाकों में नाइट्रोजन (यूरिया 13 किलो) और फासफोरस (सुपर फासफेट 50 किलो) प्रति एकड़ के हिसाब से बिजाई के समय डालें जबकि काबुली चने की किस्मों के लिए, बिजाई के समय 13 किलो यूरिया और 100 किलो सुपर फासफेट प्रति एकड़ डालें खादों की ज्यादा अच्छे प्रयोग के लिए खादों को खालियों में 7-10 सैं.मी. की गहराई पर बोयें सिंचित हालातों में बिजाई से पहले एक बार पानी दें इससे बीज अच्छे ढंग से अंकुरित होते हैं और फसल की वृद्धि भी अच्छी होती है दूसरी बार पानी फूल आने से पहले और तीसरा पानी फलियों के विकास के समय डालें अगेती वर्षा होने पर सिंचाई देरी से और आवश्यकतानुसार करें अनआवश्यक पानी देने से फसल का विकास और पैदावार कम हो जाती है यह फसल पानी के ज्यादा खड़े रहने को सहन नहीं कर सकती, इसके लिए अच्छे निकास का भी प्रबंध करें
Posted by Sharry Ahluwalia
Punjab
07-10-2019 08:26 PM
Punjab
10-08-2019 11:47 AM
ਜਦੋਂ ਤਾਰਾਮੀਰਾ ਜਾਂ ਸਰੋਂ ਅਲੱਗ ਅਲੱਗ ਉਗਾਏ ਜਾਂਦੇ ਹਨ ਤਾਂ ਬੀਜ ਦੀ ਮਾਤਰਾ 1.5 ਕਿਲੋਗ੍ਰਾਮ ਪ੍ਰਤੀ ਏਕੜ ਦੀ ਜਰੂਰਤ ਹੁੰਦੀ ਹੈ ਬਿਜਾਈ ਤੋਂ 3 ਹਫਤਿਆਂ ਬਾਅਦ ਕਮਜ਼ੋਰ ਪੌਦਿਆਂ ਨੂੰ ਨਸ਼ਟ ਕਰ ਦਿਉ ਅਤੇ ਸਿਹਤਮੰਦ ਪੌਦਿਆਂ ਨੂੰ ਖੇਤ ਵਿੱਚ ਰਹਿਣ ਦਿਓ PBT 37: ਇਹ ਅਗੇਤੀ ਪੱਕਣ ਵਾਲੀ ਕਿਸਮ ਹੈ ਜੋ ਕਿ 91 ਦਿਨਾਂ ਵਿੱਚ ਪੱਕਦੀ ਹੈ ਇਹ ਤੋਰੀਆ - ਕਣਕ ਫਸਲੀ ਚੱਕਰ ਲਈ ਢੁੱਕਵੀ ਹੈ ਇਸ ਕਿਸਮ ਦੇ ਬੀਜ ਗੂ.... (Read More)
ਜਦੋਂ ਤਾਰਾਮੀਰਾ ਜਾਂ ਸਰੋਂ ਅਲੱਗ ਅਲੱਗ ਉਗਾਏ ਜਾਂਦੇ ਹਨ ਤਾਂ ਬੀਜ ਦੀ ਮਾਤਰਾ 1.5 ਕਿਲੋਗ੍ਰਾਮ ਪ੍ਰਤੀ ਏਕੜ ਦੀ ਜਰੂਰਤ ਹੁੰਦੀ ਹੈ ਬਿਜਾਈ ਤੋਂ 3 ਹਫਤਿਆਂ ਬਾਅਦ ਕਮਜ਼ੋਰ ਪੌਦਿਆਂ ਨੂੰ ਨਸ਼ਟ ਕਰ ਦਿਉ ਅਤੇ ਸਿਹਤਮੰਦ ਪੌਦਿਆਂ ਨੂੰ ਖੇਤ ਵਿੱਚ ਰਹਿਣ ਦਿਓ PBT 37: ਇਹ ਅਗੇਤੀ ਪੱਕਣ ਵਾਲੀ ਕਿਸਮ ਹੈ ਜੋ ਕਿ 91 ਦਿਨਾਂ ਵਿੱਚ ਪੱਕਦੀ ਹੈ ਇਹ ਤੋਰੀਆ - ਕਣਕ ਫਸਲੀ ਚੱਕਰ ਲਈ ਢੁੱਕਵੀ ਹੈ ਇਸ ਕਿਸਮ ਦੇ ਬੀਜ ਗੂੜੇ ਭੂਰੇ ਰੰਗ ਦੇ ਅਤੇ ਮੋਟੇ ਹੁੰਦੇ ਹਨ ਇਸ ਦਾ ਔਸਤਨ ਝਾੜ 5.4 ਕੁਇੰਟਲ ਪ੍ਰਤੀ ਏਕੜ ਹੈ ਅਤੇ ਤੇਲ ਦੀ ਮਾਤਰਾ 41.7 % ਹੈ TL 15: ਇਹ ਅਗੇਤੀ ਪੱਕਣ ਵਾਲੀ ਕਿਸਮ ਹੈ ਇਹ 88 ਦਿਨਾਂ ਵਿੱਚ ਪੱਕ ਜਾਦੀ ਹੈ ਇਸ ਦਾ ਔਸਤਨ ਝਾੜ 4.5 ਕੁਇੰਟਲ ਪ੍ਰਤੀ ਏਕੜ ਹੈ TL 17: ਇਹ ਕਿਸਮ 90 ਦਿਨਾਂ ਵਿੱਚ ਪੱਕ ਕੇ ਕਟਾਈੇ ਲਈ ਤਿਆਰ ਹੋ ਜਾਂਦੀ ਹੈ ਇਹ ਕਿਸਮ ਇੱਕ ਤੋਂ ਵੱਧ ਫਸਲਾਂ ਉਗਾਉਣ ਲਈ ਲਈ ਢੁੱਕਵੀ ਹੈ ਇਹ ਕਿਸਮ 5.2 ਕੁਇੰਟਲ ਪ੍ਰਤੀ ਏਕੜ ਔਸਤਨ ਝਾੜ ਦਿੰਦੀ ਹੈ RLM 619: ਇਕ ਕਿਸਮ ਸੇਂਜੂ ਅਤੇ ਬਰਾਨੀ ਦੋਵੇਂ ਇਲਾਕਿਆਂ ਵਿੱਚ ਲਗਾਈ ਜਾਂਦੀ ਹੈ ਇਹ 143 ਦਿਨਾਂ ਵਿੱਚ ਪੱਕਣ ਵਾਲੀ ਕਿਸਮ ਹੈ ਇਸ ਦਾ ਬੀਜ ਮੋਟਾ ਅਤੇ ਬੀਜਾਂ ਵਿੱਚ 43 % ਤੇਲ ਹੁੰਦਾ ਹੈ ਇਸ ਕਿਸਮ ਚਿੱਟੀ ਕੁੰਗੀ, ਮੁਰਝਾਉਣਾ ਅਤੇ ਚਿੱਟੇ ਧੱਬਿਆਂ ਦੇ ਰੋਗ ਨੂੰ ਸਹਾਰਣਯੋਗ ਹੈ ਇਸ ਦਾ ਔੌਸਤਨ ਝਾੜ 8 ਕੁਇੰਟਲ ਪ੍ਰਤੀ ਏਕੜ ਹੁੰਦਾ ਹੈ PBR 91: ਇਹ ਕਿਸਮ 145 ਦਿਨਾ ਵਿੱਚ ਪੱਕ ਕੇ ਕਟਾਈ ਲਈ ਤਿਆਰ ਹੋ ਜਾਂਦੀ ਹੈ ਇਹ ਮੁਰਝਾੳੇਣਾ, ਕੁੰਗੀ ਅਤੇ ਕੀੜੇ ਮਕੌੜਿਆਂ ਦੀ ਰੋਧਕ ਕਿਸਮ ਹੈ ਇਸ ਦਾ ਔਸਤਨ ਝਾੜ 8.1 ਕੁਇੰਟਲ ਪ੍ਰਤੀ ਏਕੜ ਹੈ PBR 97: ਇਹ ਬਰਾਨੀ ਇਲਾਕਿਆ ਵਿੱਚ ਬੀਜਣ ਵਾਲੀ ਕਿਸਮ ਹੈ ਜੋ ਕਿ 136 ਦਿਨਾਂ ਵਿੱਚ ਪੱਕ ਜਾਂਦੀ ਹੈ ਇਹ ਇੱਕ ਦਰਮਿਆਨੇ ਅਤੇ ਮੋਟੇ ਬੀਜਾਂ ਵਾਲੀ ਕਿਸਮ ਹੈ ਅਤੇ ਇਸ ਵਿੱਚ ਤੇਲ ਦੀ ਮਾਤਰਾ 39.8 % ਹੁੰਦੀ ਹੈ ਇਸ ਦਾ ਔਸਤਨ ਝਾੜ 5.2 ਕੁਇੰਟਲ ਪ੍ਰਤੀ ਏਕੜ ਹੈ PBR 210: ਇਹ ਕਿਸਮ ਸਹੀ ਸਮੇਂ ਅਤੇ ਸੇਂਜੂ ਖੇਤਰਾਂ ਵਿੱਚ ਉਗਾਉਣ ਦੇ ਯੋਗ ਹੈ ਇਹ ਕਿਸਮ 150 ਦਿਨਾਂ ਵਿੱਚ ਕਟਾਈ ਲਈ ਤਿਆਰ ਹੋ ਜਾਂਦੀ ਹੈ ਇਸ ਦਾ ਔਸਤਨ ਝਾੜ 6 ਕੁਇੰਟਲ ਪ੍ਰਤੀ ਏਕੜ ਹੈ RCL 1: ਇਹ ਉੱਚੇ ਕੱਦ ਦੀ ਕਿਸਮ ਹੈ ਜੋ ਕਿ 152 ਦਿਨਾਂ ਵਿੱਚ ਪੱਕ ਕੇ ਕਟਾਈ ਲਈ ਤਿਆਰ ਹੁੰਦੀ ਹੈ ਇਸਾ ਦਾ ਅੋਸਤਨ ਝਾੜ 6.62 ਕੁਇੰਟਲ ਪ੍ਰਤੀ ਏਕੜ ਹੈ ਅਤੇ ਇਸ ਵਿੱਚ ਤੇਲ ਦੀ ਮਾਤਰਾ 37. 8 % ਹੁੰਦੀ ਹੈ
Posted by Bhawan Preet ਸਿੰਘ
Punjab
07-10-2019 08:24 PM
Punjab
10-07-2019 09:11 PM
shrimaan g barseem vich Chloropyriphos 20%EC @1 liter per acre nu mitti vich mila ke chitta de skde ho g..
Posted by harmandeep singh
Punjab
07-10-2019 08:23 PM
Punjab
10-08-2019 07:33 PM
Hf nasal di cow da dhudh sbb ton jyada hunda hai, per iss nasal nu bimaria bhutt lgdia hai, baki sahiwal nasal di cow nu bimaria ghtt lgdia hai, isda dhudh v vdia hunda hai ate isde dhudh vich fatt v jyada hundi hai, tuci sahiwal nasal rakh skde ho, isdi dekhbhal ghtt krni pendi hai..
Posted by ਕੁਲਦੀਪ ਸਿੰਘ
Punjab
07-10-2019 08:20 PM
Punjab
10-08-2019 12:52 PM
kuldeep ji eh biofertiliser hai eh fasl di growth de layi varti jandi hai isdi matra 4-7 kilo prati acre de hisab nal varti jandi hai.dhanwad
Posted by chhina saab
Punjab
07-10-2019 08:19 PM
Madhya Pradesh
10-08-2019 11:42 PM
गाभिन होने वाला समय बहुत महत्वपूर्ण होता है, इसमें आखरी के तीन महीने विशेष ध्यान देना होत है, इस वक़्त 1-2 किलो दान ज़रूर देवें जिससे उसकी ऊर्जा की मांग पूरी हो सके शुरू के दिनों से ही मिनरल मिक्सचर 50 g रोज देवें जो कि बच्चे के विकास में सहायक होगा इसके साथ हरा चारा, सूखा चारा, दानें में चोकर आदि देना आवश्यक है
Posted by ਦਿਲਬਾਗ ਸਿੰਘ
Punjab
07-10-2019 08:15 PM
Maharashtra
10-08-2019 12:32 PM
ਹਰ ਸਾਲ ਪੂਰੀ ਤਰ੍ਹਾਂ ਪੌਦੇ ਦੀ ਕਟਾਈ ਅਤੇ ਛਟਾਈ ਜਰੂਰੀ ਹੁੰਦੀ ਹੈ ਇਹ ਨਰਸਰੀ ਦੇ ਸਮੇਂ ਸ਼ੁਰੂ ਹੁੰਦੀ ਹੈ ਧਿਆਨ ਰੱਖੋ ਕਿ ਨਰਸਰੀ ਦੇ ਵਿੱਚ ਇੱਕ ਤਣੇ ਵਾਲਾ ਪੌਦਾ ਹੋਵੇ ਖੇਤ ਵਿੱਚ ਰੋਪਣ ਵੇਲੇ ਪੌਦੇ ਦਾ ਉੱਪਰਲਾ ਸਿਰਾ ਸਾਫ ਹੋਵੇ ਅਤੇ 30-45 ਸੈ:ਮੀ: ਲੰਮੀਆਂ 4-5 ਮਜ਼ਬੂਤ ਟਾਹਣੀਆਂ ਹੋਣ ਪੌਦੇ ਦੀਆਂ ਟਾਹਣੀਆਂ ਦੀ ਕਟਾਈ ਕਰੋ ਤਾਂ ਜੋ ਟਾਹਣੀਆਂ ਧਰਤੀ ਤੇ ਨਾਂ ਫੈਲ ਸਕਣ ਪੌਦੇ ਦੀਆਂ ਸੁੱਕੀਆਂ,.... (Read More)
ਹਰ ਸਾਲ ਪੂਰੀ ਤਰ੍ਹਾਂ ਪੌਦੇ ਦੀ ਕਟਾਈ ਅਤੇ ਛਟਾਈ ਜਰੂਰੀ ਹੁੰਦੀ ਹੈ ਇਹ ਨਰਸਰੀ ਦੇ ਸਮੇਂ ਸ਼ੁਰੂ ਹੁੰਦੀ ਹੈ ਧਿਆਨ ਰੱਖੋ ਕਿ ਨਰਸਰੀ ਦੇ ਵਿੱਚ ਇੱਕ ਤਣੇ ਵਾਲਾ ਪੌਦਾ ਹੋਵੇ ਖੇਤ ਵਿੱਚ ਰੋਪਣ ਵੇਲੇ ਪੌਦੇ ਦਾ ਉੱਪਰਲਾ ਸਿਰਾ ਸਾਫ ਹੋਵੇ ਅਤੇ 30-45 ਸੈ:ਮੀ: ਲੰਮੀਆਂ 4-5 ਮਜ਼ਬੂਤ ਟਾਹਣੀਆਂ ਹੋਣ ਪੌਦੇ ਦੀਆਂ ਟਾਹਣੀਆਂ ਦੀ ਕਟਾਈ ਕਰੋ ਤਾਂ ਜੋ ਟਾਹਣੀਆਂ ਧਰਤੀ ਤੇ ਨਾਂ ਫੈਲ ਸਕਣ ਪੌਦੇ ਦੀਆਂ ਸੁੱਕੀਆਂ, ਟੁੱਟੀਆਂ ਹੋਈਆਂ ਅਤੇ ਬਿਮਾਰੀ ਵਾਲੀਆਂ ਟਾਹਣੀਆਂ ਨੂੰ ਕੱਟ ਦਿਉ ਮਈ ਦੇ ਦੂਜੇ ਪੰਦਰਵਾੜੇ ਵਿੱਚ ਪੌਦੇ ਦੀ ਛਟਾਈ ਕਰੋ ਜਦੋਂ ਕਿ ਪੌਦਾ ਨਾ ਵੱਧ ਰਿਹਾ ਹੋਵੇ
Posted by charanvir singh
Punjab
07-10-2019 08:14 PM
Punjab
10-08-2019 07:35 PM
jekar tuci Glovet CZH liquid vare push rehe ho tan tuci iss nu suun ton pehla v de skde ho ate badd vich v de skde ho, iss nal thna ate lewe di vdia growth hundi hai.
Posted by Sanjay Arora
Haryana
07-10-2019 08:14 PM
Punjab
10-12-2019 02:16 PM
Sanjay Arora ji ABS da sex semen len lai tusi Abhishek Kumar 9650793300 se samparak kar sakte hai, Thankyou.
Posted by मुकेश
Madhya Pradesh
07-10-2019 08:13 PM
Punjab
10-08-2019 12:38 PM
मुकेश जी कृपया सवाल विस्तार से पूछे कि आप कोनसे ट्रेक्टर के बारे में जानकारी लेना चाहते है और आपका budget कितना है ताकि आपको इसके बारे में पूरी जानकारी दी जा सके धन्यवाद
Posted by deepakchouhan
Madhya Pradesh
07-10-2019 08:04 PM
Punjab
10-08-2019 12:45 PM
deepak jo iski roktham ke liye aap imidacloprid@1.5ml ko prati litre pani ke hisab se spray karen.dhanywad
Posted by Narinder Dullat
Punjab
07-10-2019 07:57 PM
Punjab
10-08-2019 12:46 PM
narinder ji isda commerical level te koi nuksaan nahi hai tuhanu koi spray karn di lod nahi hai.dhanwad
Posted by kala maan
Punjab
07-10-2019 07:56 PM
Punjab
10-08-2019 12:50 PM
ਹਾਜੀ ਸਤਿ ਸ਼੍ਰੀ ਅਕਾਲ ਜੀ ਤੁਹਾਡੇ ਵੱਲੋਂ ਪੁੱਛੇ ਸਾਰੇ ਸਵਾਲਾਂ ਦਾ ਜਵਾਬ ਦਾ ਦਿੱਤਾ ਜਾ ਚੁੱਕਿਆ ਹੈ ਤੁਸੀ ਆਪਣੇ ਸਵਾਲਾਂ ਦੇ ਜਵਾਬ ਦੇਖਣ ਲਈ ਐਪ ਵਿੱਚ ਮੇਰੇ ਸਵਾਲ ਤੇ ਕਲਿੱਕ ਕਰਕੇ ਜਾਂ ਫਿਰ ਮੇਰੀ ਪ੍ਰੋਫਾਈਲ ਦੇ ਹੇਠਾ ਆਪਣੇ ਸਵਾਲ ਜਵਾਬ ਦੇਖ ਸਕਦੇ ਹੋ ਵੀ ਜੇਕਰ ਤੁਹਾਨੂੰ ਜਵਾਬ ਸਬੰਧੀ ਕਿਸੇ ਤਰਾਂ ਦੀ ਸਮੱਸਿਆ ਆ ਰਹੀ ਹੈ ਤਾਂ ਤੁਸੀ ਸਾਡੇ ਹੈਲਪਲਾਈਨ ਨੰਬਰ: 97799-77641 ਤੇ ਕਾਲ ਕਰ ਸਕਦੇ .... (Read More)
ਹਾਜੀ ਸਤਿ ਸ਼੍ਰੀ ਅਕਾਲ ਜੀ ਤੁਹਾਡੇ ਵੱਲੋਂ ਪੁੱਛੇ ਸਾਰੇ ਸਵਾਲਾਂ ਦਾ ਜਵਾਬ ਦਾ ਦਿੱਤਾ ਜਾ ਚੁੱਕਿਆ ਹੈ ਤੁਸੀ ਆਪਣੇ ਸਵਾਲਾਂ ਦੇ ਜਵਾਬ ਦੇਖਣ ਲਈ ਐਪ ਵਿੱਚ ਮੇਰੇ ਸਵਾਲ ਤੇ ਕਲਿੱਕ ਕਰਕੇ ਜਾਂ ਫਿਰ ਮੇਰੀ ਪ੍ਰੋਫਾਈਲ ਦੇ ਹੇਠਾ ਆਪਣੇ ਸਵਾਲ ਜਵਾਬ ਦੇਖ ਸਕਦੇ ਹੋ ਵੀ ਜੇਕਰ ਤੁਹਾਨੂੰ ਜਵਾਬ ਸਬੰਧੀ ਕਿਸੇ ਤਰਾਂ ਦੀ ਸਮੱਸਿਆ ਆ ਰਹੀ ਹੈ ਤਾਂ ਤੁਸੀ ਸਾਡੇ ਹੈਲਪਲਾਈਨ ਨੰਬਰ: 97799-77641 ਤੇ ਕਾਲ ਕਰ ਸਕਦੇ ਹੋਂ
Posted by Deepak Badwaya
Madhya Pradesh
07-10-2019 07:52 PM
Rajasthan
10-08-2019 07:36 PM
yaddi aap jyada dhudh ke liye rakhna chahthe hai to aap HF cow rkh skte hai, iss nasal ko bimaria jyada lgti hai, iske ilagg aap sahiwal, jersey cow v rakh skte hai, sahiwal ka dhudh v acha hota hai aur iske dhudh mai fatt v jyada hoti hai..
Posted by Deepak Badwaya
Madhya Pradesh
07-10-2019 07:51 PM
Rajasthan
10-08-2019 07:36 PM
yadi aap jyada dudh ke liye rakhna chahte hai to aap HF cow rakh skte hai, iss nasal ko bimariya jyada lgti hai, iske ilaj aap sahiwal, jersey cow v rakh skte hai, sahiwal ka dudh v acha hota hai aur iske dudh mein fat v jyada hoti hai.
Posted by Rahul
Rajasthan
07-10-2019 07:48 PM
Punjab
10-08-2019 01:28 PM
राहुल जी आप प्याज के खेत में sulphur @3 किलो प्रति एकर के हिसाब से डाले धन्यवाद
Posted by raman tiwari
Uttar Pradesh
07-10-2019 07:45 PM
Punjab
10-08-2019 07:39 PM
उसे आप रोजाना 35—40 किलो हरा चारा डालें और 4—5 किलो सूखा चारा मिक्स करके दे सकते है इसके इलावा आप 3 किलो दूध में मगर एक किलो के हिसाब से फीड डालें और हर तीन महीने के बाद पेट के कीड़ों के लिए गोली जरूर दें
Posted by Baljinder Singh Chahal
Punjab
07-10-2019 07:44 PM
Punjab
10-08-2019 01:51 PM
ਬਲਜਿੰਦਰ ਜੀ ਇਹ ਸੁੰਡੀ ਦੇ ਕਾਰਨ ਪੈਂਦੀ ਹੈ ਇਸਦੇ ਲਈ ਤੁਸੀ cartap hydrochloride @170 ਗ੍ਰਾਮ ਨੂੰ ਪ੍ਰਤੀ ਏਕੜ ਦੇ ਹਿਸਾਬ ਨਾਲ ਸਪਰੇ ਕਰੋ ਧੰਨਵਾਦ
Posted by lakhbir singh
Haryana
07-10-2019 07:44 PM
Punjab
10-08-2019 07:40 PM
ਜੇਕਰ ਤੁਹਾਡੀ ਗਾਂ ਵਾਰ ਵਾਰ ਰਪੀਟ ਹੋ ਰਹੀ ਹੈ ਤਾਂ ਤੁਸੀ ਉਸਦੀ ਬੱਚੇਦਾਨੀ ਵਿਚ Metricef-IU ਦਵਾਈ ਦੋ ਦਿਨ ਲਗਾਤਾਰ ਭਰਵਾਓ ਅਤੇ ਉਸ ਨੂੰ Bovimin-B ਪਾਊਡਰ 100 ਗ੍ਰਾਮ ਰੋਜਾਨਾ ਅਤੇ PG care bolus ਰੋਜਾਨਾ ਇਕ ਗੋਲੀ ਦਿਓ ਅਤੇ 21 ਦਿਨ ਤਕ ਦਿਓ, ਫਿਰ ਅਗਲੀ ਵਾਰ ਦੁਬਾਰਾ ਹੀਟ ਵਿਚ ਆਉਣ ਤੇ ਉਸ ਨੂੰ ਟੀਕਾ ਭਰਵਾਓ, ਟੀਕਾ ਭਰਵਾਕੇ ਤੁਸੀ ਉਸ ਨੂੰ Receptel injection 5ml IV ਲਗਵਾਓ
Posted by sidulal
Madhya Pradesh
07-10-2019 07:42 PM
Punjab
03-13-2020 08:36 PM
Aap bakri palan ki training lene ke liye apne nazdiki krishi vigyan kendra se sampark kr skte hai waha sme sme per kisano ko alag alag kamo ki training di jatti hai, aap Dr. R. P. S. Shaktawat Scientist (I/C), Krishi Vigyan Kendra Post-Agar Malwa Distt.: Agar Malwa (M. P.) PIN – 465441. Mob. : 9826676502 se sampark kr skte hai.
Posted by Gopal Dangi
Madhya Pradesh
07-10-2019 07:39 PM
Punjab
10-08-2019 01:44 PM
इसे भारत की मिट्टी की कई किस्मों में उगाया जा सकता है गेहूं की खेती के लिए चिकनी दोमट या दोमट बनतर, अच्छे ढांचे और पानी सोखने की सामान्य क्षमता वाली मिट्टी उचित होती है छिद्रित और पानी कम सोखने वाली मिट्टी गेहूं की खेती के लिए उपयुक्त नहीं होती सूखे हालातों, अच्छे जल निकास वाली भारी मिट्टी इसकी खेती के लिए अ.... (Read More)
इसे भारत की मिट्टी की कई किस्मों में उगाया जा सकता है गेहूं की खेती के लिए चिकनी दोमट या दोमट बनतर, अच्छे ढांचे और पानी सोखने की सामान्य क्षमता वाली मिट्टी उचित होती है छिद्रित और पानी कम सोखने वाली मिट्टी गेहूं की खेती के लिए उपयुक्त नहीं होती सूखे हालातों, अच्छे जल निकास वाली भारी मिट्टी इसकी खेती के लिए अनुकूल होती है भारी मिट्टी जिसका घटिया ढांचा और घटिया जल निकास हो इसकी खेती के लिए उपयुक्त नहीं होती क्योंकि गेहूं की फसल जल जमाव के प्रति संवेदनशील होती है Raj 1482: इस किस्म का गहरे हरे रंग का पौधा, जिसका कद 80-90 सैं.मी. होता है इसकी अधिक फलियां, मोटे दाने, चमकदार और हल्के रंग के दाने होते हैं इसकी औसतन पैदावार 15-16 क्विंटल प्रति एकड़ होती है यह किस्म 126-134 दिनों में परिपक्व होती है इसका मुख्य रूप से ब्रैड बनाने के लिए उपयोग किया जाता है इसमें प्रोटीन की मात्रा 11-12 प्रतिशत होती है PBW 502: यह किस्म सिंचित क्षेत्रों में उगाने के अनुकूल है पौधे का कद 90-100 सैं.मी. होता है यह किस्म 130-135 दिनों में कटाई के लिए तैयार हो जाती है यह करनाल बंट के प्रतिरोधी है इसकी औसतन पैदावार 18-20 क्विंटल प्रति एकड़ होती है. PBW 550: पौधे का कद 83-91 सैं.मी. होता है यह किस्म 128-135 दिनों में कटाई के लिए तैयार हो जाती है इसके दाने मोटे सुनहरे पीले रंग के होते हैं इसके 1000 दानों का भार लगभग 38 ग्राम होता है इसकी औसतन पैदावार 18-24 क्विंटल प्रति एकड़ होती है HD 2697: पौधे का कद 83-91 सैं.मी. होता है यह किस्म 128-133 दिनों में कटाई के लिए तैयार हो जाती है भारी ज़मीनें इस किस्म की खेती के लिए अच्छी रहती हैं इसके दाने मोटे सुनहरे रंग के होते हैं इसकी औसतन पैदावार 18-24 क्विंटल प्रति एकड़ होती है Raj 6560: यह किस्म सिंचित क्षेत्रों में उगाने के लिए अनुकूल है पौधे का कद 90-100 सैं.मी. होता है यह किस्म 130-135 दिनों में कटाई के लिए तैयार हो जाती है इसकी औसतन पैदावार18-22 क्विंटल प्रति एकड़ होती है Raj 3077: इस किस्म को वंडर गेहूं के नाम से जाना जाता है पौधे का कद 115-118 सैं.मी. होता है इसकी औसतन पैदावार 15-16 क्विंटल प्रति एकड़ होती है यह किस्म 126-134 दिनों में परिपक्व हो जाती है इसका प्रयोग मुख्य रूप से ब्रैड बनाने के लिए किया जाता है इसमें प्रोटीन की मात्रा 11-12.5 प्रतिशत होती है Raj 4079: यह किस्म 115-120 दिनों में कटाई के लिए तैयार हो जाती है इसके पौधे का कद 75-80 सैं.मी. होता है यह सामान्य और सिंचित हालातों में अच्छे परिणाम देती है यह गर्दन तोड़ के प्रतिरोधी किस्म है इसकी औसतन पैदावार 19-21 क्विंटल प्रति एकड़ होती है इसके दाने मोटे, मध्यम आकार के और सख्त होते हैं यह किस्म राजस्थान के गर्म जलवायु को सहने योग्य किस्म है और अच्छी उपज देती है Raj 4037: इसके पौधे का कद 83-95 सैं.मी. होता है इसकी औसतन पैदावार 15-16 क्विंटल प्रति एकड़ होती है यह किस्म 120 दिनों में परिपक्व हो जाती है यह मुख्य रूप से ब्रैड बनाने के लिए उपयोग किया जाता है इसमें प्रोटीन की मात्रा 11-12 प्रतिशत होती है यह किस्म काली जंग और तने पर जंग के प्रतिरोधी है Raj 4120: यह किस्म 110-120 दिनों में कटाई के लिए तैयार हो जाती है इसके पौधे का कद 80-94 सैं.मी. होता है यह किस्म सामान्य और सिंचित हालातों में अच्छे परिणाम देती है इसका तना मजबूत होता है और गर्दन तोड़ के प्रतिरोधी होता है इसकी औसतन पैदावार 20-24 क्विंटल प्रति एकड़ होती है यह किस्म राजस्थान के गर्म जलवायु को सहने योग्य किस्म है और अच्छी उपज देती है DBW 17: इसके पौधे का कद 80-85 सैं.मी. होता है यह किस्म 130-132 दिनों में कटाई के लिए तैयार हो जाती है यह करनाल बंट के प्रतिरोधी किस्म है इसका तना मजबूत होता है जो कि यह दर्शाता है कि यह गर्दन तोड़ के प्रतिरोधी है इसके दाने मोटे, मध्यम आकार के और सख्त होते हैं यह किस्म सामान्य और सिंचित हालातों में अच्छे परिणाम देती है इसकी औसतन पैदावार 16-20 क्विंटल प्रति एकड़ होती है Raj 4238: यह किस्म 115-120 दिनों में कटाई के लिए तैयार हो जाती है इसके पौधे का कद 82-86 सैं.मी. होती है इसका तना मजबूत होता है जो कि फसल को गर्दन तोड़ से बचाता है यह करनाल बंट के प्रतिरोधी किस्म है इसके दाने मध्यम आकार के होते हैं और औसतन पैदावार 16-20 क्विंटल प्रति एकड़ होती है WH 1080: यह किस्म 127-133 दिनों में कटाई के लिए तैयार हो जाती है इसके पौधे का कद 85-101 सैं.मी. होती है सिंचित हालातों में यह 16-18 क्विंटल प्रति एकड़ उपज देती है इसके दाने सुनहरे, मध्यम मोटे और सख्त होते हैं PBW 175: यह किस्म 130-132 दिनों में कटाई के लिए तैयार हो जाती है इसके पौधे का कद 15-16 सैं.मी. होता है इसके दाने सुनहरे, मध्यम मोटे और सख्त होते हैं इसकी औसतन पैदावार 15-16 क्विंटल प्रति एकड़ होती है CCNNRVOI (Raj Molya Rodhak-1: यह सिंचित हालातों में समय पर बोने के लिए उपयुक्त किस्म है इसके पौधे का कद 84 सैं.मी. होता है इसके दाने सुनहरे, मध्यम सख्त और गोल आकार के होते हैं यह किस्म 120-125 दिनों में कटाई के लिए तैयार हो जाती है इसकी औसतन पैदावार 15-18 क्विंटल प्रति एकड़ होती है यह किस्म नेमाटोड से प्रभावित क्षेत्रों में प्रसिद्ध है पिछेती बिजाई की किस्में Raj 3765: यह किस्म दिसंबर से मध्य जनवरी के तीसरे सप्ताह में बोयी जा सकती है इसके पौधे का कद 85-95 सैं.मी. होता है यह किस्म 120 दिनों में कटाई के लिए तैयार हो जाती है इसकी औसतन पैदावार 16-20 क्विंटल प्रति एकड़ होती है Raj 3777: यह किस्म 90-95 दिनों में परिपक्व हो जाती है यह किस्म मध्य नवरी में बोने के लिए अनुकूल है इसकी औसतन पैदावार 14-16 क्विंटल प्रति एकड़ होती है रेतली मिट्टी वाली किस्में इन किस्मों की वृद्धि के लिए कम पानी की आवश्यकता होती है C 306: यह किस्म बंजर भूमि में उगाने के लिए प्रयोग की जाती है और इसे कम सिंचाई की आवश्यकता होती है इसका पौधे लंबे कद के होते हैं इसके मध्यम आकार के दाने और रंग में सुनहरे होते हैं इसकी औसतन उपज 14-16 प्रति एकड़ होती है P.B.W. 299: इसके पौधे का कद 95 सैं.मी. होता है यह किस्म 150-160 दिनों में परिपक्व हो जाती है और इस किस्म की अगेती बिजाई की जाती है इसकी औसतन पैदावार 16-18 क्विंटल प्रति एकड़ होती है इन किस्मों के साथ PBW 396 और WH 147 की भी खेती की जाती है क्षारीय मिट्टी की किस्में क्षारीय क्षेत्रों में Raj 3077, K.R.L 1-4 और WH 157 जैसी किस्मों का प्रयोग करें, ये अच्छी उपज देती हैं गेहूं की फसल को अच्छे अंकुरन के लिए अच्छी तरह से तैयार, पर ठोस बीज बैड की आवश्यकता होती है पिछली फसल की कटाई के बाद खेत की अच्छे तरीके से ट्रैक्टर की मदद से जोताई की जानी चाहिए खेत को आमतौर पर ट्रैक्टर के साथ तवियां जोड़कर जोता जाता है और उसके बाद दो या तीन बार हल या सुहागे से जोता जाता है बारानी क्षेत्रों में खेत इस तरह से तैयार करना चाहिए कि वह नमी को सोख सके खेत की एक बार आयरन के हल से गहरी जोताई या सामान्य हल से दो या तीन बार जोताई करें और सुहागा फेरें खेत की जोताई शाम के समय की जानी चाहिए और रोपाई की गई ज़मीन को पूरी रात खुला छोड़ देना चाहिए ताकि वह ओस की बूंदों से नमी सोख सके प्रत्येक जोताई के बाद सुहागा फेरना चाहिए आखिरी जोताई के समय यूरिया 35-40 किलो प्रति एकड़ में डालें इससे गेहूं की अंकुरन प्रतिशतता में वृद्धि होती है अज़ोटोबैक्टर 2.5 किलो + फास्फेटिक 2.5 किलो + ट्राइकोडरमा 2.5 किलो को 100 किलो-125 किलो रूड़ी की खाद या गाय के गले हुए गोबर में मिलाकर आखिरी जोताई के समय खिलार दें गेंहूं की बिजाई सही समय पर करनी जरूरी है बारानी क्षेत्रों के लिए बिजाई नवंबर के पहले से तीसरे सप्ताह में पूरी कर लें, जबकि सिंचित क्षेत्रों में बिजाई अक्तूबर से 15 नवंबर तक पूरी कर लें सामान्य बिजाई के लिए कतारों में 20 सैं.मी. के फासले की सलाह दी जाती है यदि बिजाई देरी से करनी हो तो 18 सैं.मी. का फासला होना चाहिए 4-5 सैं.मी. की गहराई में बिजाई करनी चाहिए बीज ड्रिल बुरकाव विधि जीरो टिलेज़ ड्रिल रोटावेटरबिजाई के लिए 40 किलो बीज प्रति एकड़ में प्रयोग करें यदि बिजाई देरी से की जाये तो नवंबर के आखिरी सप्ताह से दिसंबर के दूसरे सप्ताह तक बिजाई 50 किलो बीज प्रति एकड़ में प्रयोग करके पूरी कर लें देरी से बिजाई के लिए कम समय की किस्मों का प्रयोग करें सामान्य स्थितियों में बिजाई नवंबर के पहले से तीसरे सप्ताह में पूरी कर लें, जब कि सिंचित हालातों में दिसंबर महीने में बिजाई पूरी कर लें बीज की मात्रा 50 किलोग्राम प्रति एकड़ में रखें बीजों को दीमक, फफूंद, झुलस रोग जैसे बीमारियों से बचाने के लिए बीजने से 24 घंटे पहले एक किलो बीजों का 4 मि.ली. क्लोरपाइरीफॉस या 1.5 - 1.87 ग्राम टेबुकोनाज़ोल 2 डी.एस या 2 ग्राम कार्बेनडाज़िम या थीरम मिलानी चाहिए रासायनिक उपचार के बाद बीजों को टी विराइड 1.15 प्रतिशत डब्लयु पी 4 ग्राम से प्रति किलो बीजों का उपचार करें IPM में टी विराइड 4 ग्राम + कार्बोक्सिन 75 डब्लयु पी 1.25 ग्राम या टैबुकोनाज़ोल 1.0 ग्राम से प्रति किलो बीजों का उपचार झूठी कांगियारी को रोकने के लिए किया जाता है उसके बाद दीमक से बचाव के लिए बिजाई से 15 दिनों के बाद मिट्टी का क्लोरोपाइरीफोस 1 लीटर को प्रति एकड़ में बुरकाव करके उपचार करें मिट्टी की जांच के आधार पर खादों का प्रयोग करें मिट्टी की जांच की मदद से हम खादों को मिट्टी की आवश्यकता के आधार पर दे सकते हैं गेहूं की समय पर बिजाई के लिए नाइट्रोजन 37-50 किलो (यूरिया 80-100 किलो), फासफोरस 8-15 किलो (एस एस पी 50-90 किलो) और पोटाश 12.5 किलो (म्यूरेट ऑफ पोटाश 20 किलो) प्रति एकड़ में डालें नाइट्रोजन की आधी मात्रा, पोटाश और फासफोरस की पूरी मात्रा बिजाई के समय डालें पहली सिंचाई के बाद नाइट्रोजन की बाकी बची आधी मात्रा डाल दें उपज को बढ़ाने के लिए जिंक सलफेट 10 किलोग्राम प्रति एकड़ में डालें जिंक की कमी को जिंक सल्फेट 0.5 प्रतिशत की फोलियर स्प्रे करके पूरा किया जा सकता है 15 दिनों के अंतराल पर दो से तीन स्प्रे करें मजबूत तने और उपज के लिए, बिजाई के 30 दिनों के बाद 19:19:19 पानी में घुलनशील खाद 5 ग्राम + स्टिकर 0.5 मि.ली. को प्रति लीटर पानी में डालकर स्प्रे करें मिट्टी की किस्म, पानी की उपलब्धता आदि के आधार पर सिंचाई की संख्या की आवश्यकता होती है नमी की अवस्था में जड़ गलन का हमला और बलियां बनने की अवस्था बहुत गंभीर होते हैं छोटे कद और अधिक उपज वाली किस्मों के लिए बिजाई से पहले सिंचाई करें भारी मिट्टी के लिए चार से छ: सिंचाइयों की आवश्यकता होती है जबकि हल्की मिट्टी के लिए 6-8 सिंचाइयों की आवश्यकता होती है पानी की सीमित संख्या में सिंचाई केवल गंभीर अवस्था में ही करें जब पानी केवल एक सिंचाई के लिए उपलब्ध हो तो जड़ गलन के हमले के समय सिंचाई करें जब दो सिंचाइयां उपलब्ध हो तो जड़ गलन के हमले और फूल बनने की अवस्था में सिंचाई करें जब तीन सिंचाइयां संभव हो तो पहली सिंचाई जड़ गलन के हमले के समय, दूसरी सिंचाई तना बनने के समय और तीसरी दूधिया अवस्था में करें तना गलने की अवस्था सिंचाई के लिए बहुत महत्तवपूर्ण होती है यह पाया गया है कि यदि जड़ गलन के समय पहली सिंचाई में देरी की जाये तो 85-125 किलोग्राम प्रति एकड़ उपज कम हो जाती है पहली सिंचाई बिजाई के 20-25 दिनों के बाद करनी चाहिए यह अवस्था जड़ गलन और नमी तनाव का समय होता है जिसके कारण उपज में कमी होती है दूसरी सिंचाई बिजाई के 40-45 दिनों के बाद पौधा बाहर निकलने के समय करनी चाहिए तीसरी सिंचाई 70-75 दिनों के बाद तना बनने के समय करनी चाहिए चौथी सिंचाई 90-95 दिनों के बाद फूल बनने के समय करनी चाहिए पांचवी सिंचाई 110-115 दिनों के बाद दूधिया अवस्था में करनी चाहिए
Posted by Amritpal sidhu
Punjab
07-10-2019 07:39 PM
Punjab
10-08-2019 07:41 PM
tuci iss nu Nutrich tablet 1-1 swere sham deo, iss nal mineral di kami purri howegi ate ehh jldi heat vich aa jawegi ehh tuci 15 din tak dinde rho.
Posted by दिलावर सिंह
Uttar Pradesh
07-10-2019 07:33 PM
Maharashtra
10-22-2019 04:43 PM
दिलावर जी यू पी में गन्ने की खेती का उपयुक्त समय बसंत का मौसम है फरवरी से मार्च गन्ने की रोपाई के लिए सबसे उपयुक्त समय है धन्यवाद
Posted by sunil
Haryana
07-10-2019 07:33 PM
Punjab
10-08-2019 02:23 PM
सुनील जी आप गेंहू की किस्मे जैसे C 306: यह किस्म कम सिंचाई वाले क्षेत्रों और कम उपजाऊ वाली मिट्टी में उगाने के लिए अनुकूल है इसके दाने मध्यम आकार के, चमकदार, ठोस और सुनहरी रंग के होते हैं इसकी औसतन पैदावार 10 क्विंटल प्रति एकड़ होती है Sonalika: यह एक जल्दी पकने वाली छोटे कद वाली गेहूं की किस्म है जो कि बहुत सारे हालात.... (Read More)
सुनील जी आप गेंहू की किस्मे जैसे C 306: यह किस्म कम सिंचाई वाले क्षेत्रों और कम उपजाऊ वाली मिट्टी में उगाने के लिए अनुकूल है इसके दाने मध्यम आकार के, चमकदार, ठोस और सुनहरी रंग के होते हैं इसकी औसतन पैदावार 10 क्विंटल प्रति एकड़ होती है Sonalika: यह एक जल्दी पकने वाली छोटे कद वाली गेहूं की किस्म है जो कि बहुत सारे हालातों के अनुकूल है इसके दाने सुनहरी होते हैं इसकी बुवाई पिछेती की जा सकती है और यह कुंगी रोग की प्रतिरोधक है इसकी औसतन पैदावार 16.8 क्विंटल प्रति एकड़ होती है PBW 343: यह किस्म सिंचित क्षेत्रों और पिछेती बिजाई के लिए उपयुक्त है यह किस्म 130-135 दिनों में कटाई के लिए तैयार हो जाती है यह किस्म जल जमाव के प्रतिरोधी है यह करनाल बंट के प्रतिरोधी और ब्लाईट को भी सहने योग्य है इसकी औसत पैदावार 19 क्विंटल प्रति एकड़ है WH 711: यह किस्म हरियाण में समय पर बोने, सिंचित और उपजाऊ मिट्टी में बोने के अनुकूल है इसके दाने मध्यम आकार के, सख्त और सुनहरे होते हैं इसकी औसतन पैदावार 24 क्विंटल प्रति एकड़ होती है UP 2338: यह किस्म समय पर और पिछेती बिजाई के लिए अनुकूल है इसके दाने मोटे और सख्त होते हैं इसकी औसतन पैदावार 23 क्विंटल प्रति एकड़ होती है WH 542: यह किस्म समय पर बुवाई करने और सिंचित क्षेत्रों के लिए उपयुक्त है इसके दाने मध्यम आकार के, सख्त और सुनहरे होते हैं इसकी औसत पैदावार 23 क्विंटल प्रति एकड़ है यह करनाल बंट के लिए प्रतिरोधी है WH 416: यह किस्म समय पर बोने और अगेती बिजाई के लिए उपयुक्त है यह कम उपजाऊ वाले लेकिन सिंचित ज़मीनों में उगाने के लिए अनुकूल है इसके दाने लंबे, मध्यम आकार के और सुनहरे रंग के होते हैं यह भूरी कुंगी के प्रतिरोधी परंतु पीली कुंगी को सहनेयोग्य है इसकी औसतन पैदावार 22 क्विंटल प्रति एकड़ होती है WH 283: यह किस्म समय पर बोने के लिए उपयुक्त है इसके दाने मध्यम, सख्त और चमकदार सुनहरे रंग के होते हैं यह भूरी और पीले कुंगी के प्रतिरोधी है इसकी औसतन पैदावार 20 क्विंटल प्रति एकड़ होती है WH147: यह समय पर बोने, उपजाऊ और सिंचित ज़मीनों पर बोने के लिए अनुकूल हैं इसके दाने मध्यम, नर्म और चमकदार सुनहरी रंग के होते हैं यह भूरी कुंगी और करनाल बंट रोग के प्रतिरोधी है इसकी औसतन पैदावार 20 क्विंटल प्रति एकड़ होती है WH 157: यह समय पर बोने, उपजाऊ और सिंचित क्षेत्रों में बोने के अनुकूल है इसके दाने बड़े, सख्त और सुनहरे रंग के होते हैं इसकी औसतन पैदावार 19 क्विंटल प्रति एकड़ होती है
Posted by navi
Punjab
07-10-2019 07:32 PM
Punjab
10-22-2019 04:47 PM
navi ji jekar tele da hamla hai ta tuc buprofezin@250Ml nu prati acre de hisab nal spray karo.dhanwad
Posted by sunil
Haryana
07-10-2019 07:24 PM
Maharashtra
10-22-2019 04:50 PM
Sunil ji aap iski kisam ka poora nam btaye taki aapko iske bare men poori jankari di ja sake.dhanywad
Posted by imaran
Uttar Pradesh
07-10-2019 07:13 PM
Rajasthan
10-07-2019 07:46 PM
मोती की खेती एक बहुत ही अच्छा व्यवसाय है इस व्यवसाय को शुरू करने के लिए सबसे जरुरी है इसकी ट्रेनिंग, क्योकि इसमें बहुत सी ऐसी बारीकियें होती है जो हमें प्रेक्टिकल ट्रेनिंग में ही सीखने को मिलती है अगर आप इसकी ट्रेनिंग लेना चाहते है तो आप ग्लिटराटी पर्ल फार्मिंग ट्रेनिंग केंद्र प्रशिक्षण कार्य कर्म आयोजि.... (Read More)
मोती की खेती एक बहुत ही अच्छा व्यवसाय है इस व्यवसाय को शुरू करने के लिए सबसे जरुरी है इसकी ट्रेनिंग, क्योकि इसमें बहुत सी ऐसी बारीकियें होती है जो हमें प्रेक्टिकल ट्रेनिंग में ही सीखने को मिलती है अगर आप इसकी ट्रेनिंग लेना चाहते है तो आप ग्लिटराटी पर्ल फार्मिंग ट्रेनिंग केंद्र प्रशिक्षण कार्य कर्म आयोजित किया जा रहा है प्रशिक्षण कार्य कर्म में भाग लेने के लिए नीचे दिए गए नम्बर पर आज ही संपर्क करें और Rs 250/ से अपना रजिस्ट्रेशन करवाए अचल सिंह (फाउंडर )- 9711858258. धन्यवाद
Posted by ਲਵਪ੍ਰੀਤ ਸਿੰਘ ਪੰਨੂ
Punjab
07-10-2019 07:13 PM
Haryana
10-22-2019 04:56 PM
ਇਸਦੀ ਬਿਜਾਈ ਜ਼ੀਰੋ ਟਿੱਲਰ ਮਸ਼ੀਨ ਜਾਂ ਬਿਜਾਈ ਵਾਲੀ ਮਸ਼ੀਨ ਨਾਲ ਕੀਤੀ ਜਾ ਸਕਦੀ ਹੈ
Posted by Arsh deep singh
Punjab
07-10-2019 07:10 PM
Punjab
10-09-2019 06:00 PM
tuci ohna nu thnnd ton bacha ke rkho ate ohna nu injection byrocin injection ate Avil injection lgwao ji..