
Posted by mahendar tard
Rajasthan
08-10-2019 11:42 AM
mahendra ji kripya aap iski photo bheje taki aapko iske bare men poori jankari di ja sake.dhanywad
Posted by VIKRAM RAGHUWANSHI
Madhya Pradesh
08-10-2019 11:38 AM
vikram ji jaise aapne btaya ki aapke khet ki mitti kaali hai to kaali mitti me pani smane ki shakti bahut km hoti hai is liye pani khet men jma rehta hai.is liye aap khet men se pani bahr nikalne ke liye khet men uchit parbandhan kare.dhanywad
Posted by Ayush Tiwari
Uttar Pradesh
08-10-2019 11:36 AM
रोपण करने से पहले खेत की अच्छे तरीके से 4-5 बार जोताई करें और समतल करें फिर खेत में आवश्यकतानुसार आकार के बैड बनाएं फासला फसल की किस्म और मिट्टी की उपजाऊ शक्ति पर निर्भर करता है पंक्तियों में 60 सैं.मी. और पौधों में 35-40 सैं.मी. का फासला रखें नर्सरी में बीजों को 1 सैं.मी. गहराई में बोयें और मिट्टी से ढक दें खेत में पन.... (Read More)
रोपण करने से पहले खेत की अच्छे तरीके से 4-5 बार जोताई करें और समतल करें फिर खेत में आवश्यकतानुसार आकार के बैड बनाएं फासला फसल की किस्म और मिट्टी की उपजाऊ शक्ति पर निर्भर करता है पंक्तियों में 60 सैं.मी. और पौधों में 35-40 सैं.मी. का फासला रखें नर्सरी में बीजों को 1 सैं.मी. गहराई में बोयें और मिट्टी से ढक दें खेत में पनीरी लगाकर इसकी बिजाई की जाती है
Posted by VIKRAM RAGHUWANSHI
Madhya Pradesh
08-10-2019 11:34 AM
vikram ji kripya aap apna swal vistar se pooche taki aapko isk bare men poori jankari di ja sake.dhanywad
Posted by lalu Yadav
Uttar Pradesh
08-10-2019 11:34 AM
Lalu ji aap kisem jaise Narendra Ageti Rai 4,Varuna (T 59),Vasanti,Rohini,Maya ki bijai kar sakte hai.dhanywad

Posted by karanvir singh
Punjab
08-10-2019 11:32 AM
Karanvir ji pashu nu ek tika bhrann ton bad jo duja tika bharia jnda hai uss nu v secondry semen bolde hai.

Posted by Amarpal Singh lodhi
Uttar Pradesh
08-10-2019 11:29 AM
Amarpal ji kripya aap audio dubara bheje aapke dwara bheji gayi audio upload nahi hui hai.dhanywad
Posted by Manpreet singh
Punjab
08-10-2019 11:24 AM
BhaaG rajwa hara chaara te 1kg pashuan wali feed pao har 3 mahine baad malap rehat karo

Posted by omprakash
Rajasthan
08-10-2019 11:23 AM
Omparkash ji dhan ka bhav 1815-35 rupyae prati quintal ke hisab se chal raha hai.dhanywad

Posted by gopal sharma
Rajasthan
08-10-2019 11:20 AM
असिंचित क्षेत्रों में बिजाई 15 सितंबर से 15 अक्तूबर तक पूरी कर लें जबकि सिंचित क्षेत्रों में बिजाई 10-25 अक्तूबर तक पूरी कर लें
Posted by Chetan Singh
Uttar Pradesh
08-10-2019 11:17 AM
श्रीमान जी, अमरुद का फल अपने समय के हिसाब से आ जाता है, इसको हम किसी भी जैविक या रासायनिक तरीके से नहीं रोक सकते है, धन्यवाद

Posted by Satyendra Pal singh
Uttar Pradesh
08-10-2019 11:16 AM
यू पी में गन्ने की खेती का उपयुक्त समय बसंत का मौसम है फरवरी से मार्च गन्ने की रोपाई के लिए सबसे उपयुक्त समय है
Posted by Chetan Singh
Uttar Pradesh
08-10-2019 11:15 AM
जीव अमृत बनाने के लिए आवश्यक चीज़ें प्लास्टिक का एक बड़ा 200 लीटर का ढोल (ढोल लोहे का नहीं होना चाहिए) 10 किलो गोबर (गाय या भैंस का पुराना गोबर) 10 लीटर पेशाब (गाय, बैल या भैंस का) 1 किलो गुड़ (पुराना या खराब और बारीक किया हुआ जो कि आसानी से पानी में घुलनशील हो) 1 किलो पिसी हुई दाल (बेसन, मांह, मसूर) 1 किलो पुरानी मिट्टी जो कि.... (Read More)
जीव अमृत बनाने के लिए आवश्यक चीज़ें प्लास्टिक का एक बड़ा 200 लीटर का ढोल (ढोल लोहे का नहीं होना चाहिए) 10 किलो गोबर (गाय या भैंस का पुराना गोबर) 10 लीटर पेशाब (गाय, बैल या भैंस का) 1 किलो गुड़ (पुराना या खराब और बारीक किया हुआ जो कि आसानी से पानी में घुलनशील हो) 1 किलो पिसी हुई दाल (बेसन, मांह, मसूर) 1 किलो पुरानी मिट्टी जो कि पीपल या बर्गद के नीचे से ली गई हो जीव अमृत बनाने की विधि इन सब चीज़ों को अच्छी तरह से आपस में मिलाएं और ढोल में डाल दें इस ढोल को 150 लीटर पानी से भर दें इस ढोल का 1/4 भाग खाली छोड़ दें यह 1/4 भाग खाली छोड़ने से उबाला मारने का खतरा कम हो जाता है इस घोल को छांव में रखें और दिन में दो बार सुबह- शाम डंडे से हिलाएं ताकि ढोल के अंदर की सामग्री अच्छी तरह घुल जाये इसे गर्मियों में 48 घंटों के लिए छांव में रखें इस ढोल को बोरी से अच्छी तरह ढक दें इस तरह एक एकड़ का जीव अमृत 2-4 दिनों में तैयार हो जाता है जीव अमृत प्रयोग करने की विधि यदि आप खेत की सिंचाई आम तरीके से कर रहे हैं तो इस घोल को टूटी के द्वारा या किसी बर्तन से पानी में मिलाते रहें ताकि जीव अमृत आसानी से सारे खेत में फैल सके यह सबसे सस्ते और फायदेमंद सूक्ष्म तत्व हैं जो कि नाइट्रोजन, कैल्शियम जैसे तत्वों की मिट्टी में पूर्ति करते हैं इसे तैयार करने के बाद 10-15 दिनों में प्रयोग कर लेना चाहिए कनोला सरसों की कुदरती/जैविक खेती जैविक या कुदरती तरीके से खेती करने से ज़मीन की क्षमता और उपजाऊपन बढ़ता है यह मिट्टी में नमी बनाए रखने में भी मदद करती है इससे पौधे का विकास भी अच्छे से होता है जैसे कि आप देख सकते हैं कि पौधे के पत्ते का आकार सामान्य पत्तों के आकार से काफी बड़ा है और पत्ता जितना बड़ा होगा प्रकाश संश्लेषण क्रिया भी उतने अच्छे से होगी इससे पौधा तंदरूस्त रहता है और पौधा जितना तंदरूस्त होगा उसका फल भी उतना ही तंदरूस्त होगा हमें कोशिश करनी चाहिए कि खेती करते समय रासायनिक खादों का प्रयोग कम से कम करें ड्राई जीव अमृत बनाने की विधि जब किसान यह सोचता है कि मुझे रासायनिक खादों के बिना खेती करनी है तो सबसे पहले उसका ध्यान रूड़ी की खाद के ढेर की तरफ जाता है कि जो रूड़ी हमने खेत में डाली है क्या वह लाभदायक है क्या उससे हमें लाभ मिल सकता है हां बिल्कुल मिल सकता है लेकिन हमें रूड़ी का प्रयोग खेत में सीधे तौर पर नहीं करना है क्योंकि इससे कईं प्रकार की दीमक और फंगस खेत में पैदा होती है यह फायदा करने की बजाए नुकसान करती है इसलिए खाद बनाने के लिए जीव अमृत का स्प्रे करके नया ढंग अपनाया है अब हम आपको दिखाते हैं कि खाद कैसे बनाई जाती है आप जो ये खाद देख रहे हैं यह पहले कच्ची रूड़ी की खाद थी जो कि जीव अमृत की स्प्रे करने से बिल्कुल सूख चुकी है इसे कैसे तैयार करना है 10 दिनों के अंतराल पर हमने इस पर 4 ढोल जीव अमृत के डाले हैं अर्थात् 16 ढोल जीव अमृत के डाले हैं 40 दिनों में ड्राई जीव अमृत फसलों के लिए तैयार हो जाती है जब हम खेत में ड्राई जीव अमृत का प्रयोग करेंगे तब यह पानी के संपर्क में आते ही सक्रिय हो जायेगा और अच्छे से काम करेगा
सामग्री: - कॉपर सल्फेट (नीला थोथा): 2 किलो
चूना: 3 किलो
पानी: 15 लीटर
बोर्डो पेस्ट बनाने का तरीका:- बोर्डो पेस्ट कॉपर सल्फेट 2 किलो को 15 लीटर पानी में घोलें, एक अन्य बर्तन में 15 लीटर पानी लें इस पानी में से थोड़ा पानी लेकर इसमें किलो चूना डालें और फिर इस चूने के घोल को बर्तन वाले पानी में डालकर दें फिर कॉपर सल्फेट और चूने वाले विभिन्न तैयार किये घोल को आपस में अच्छी तरह मिला लें और अच्छी तरह हिलाएं इस तरह बने पेस्ट को कटे हुए पौधे के भाग पर लगाएं
Posted by arif Husain
Uttar Pradesh
08-10-2019 11:14 AM
Posted by arif Husain
Uttar Pradesh
08-10-2019 11:09 AM
Shrimaan ji, kisanon ke sath yeh jankari share karne ke liye shukriya, dhanywad

Posted by Ranu
Bihar
08-10-2019 11:03 AM
usko pett ke kirro ke liye bendikind plus bolus den aur anabolite liquid 100 ml rojana aur gouge powder 50 gm rojana den isse frak padd jayaga baki aap uski khurak ka purra dian rkhen...
Posted by Chetan Singh
Uttar Pradesh
08-10-2019 10:58 AM
चेतन जी जो फ्रूट में कीड़े पड़ते है वो fruit fly के कारण पड़ते है यह अमरूद का गंभीर कीट है मादा मक्खी नए फलों के अंदर अंडे देती है उसके बाद नए कीट फल के गुद्दे को खाते हैं जिससे फल गलना शुरू हो जाता है और गिर जाता है यदि बाग में फल की मक्खी का हमला पहले भी होता है तो बारिश के मौसम में फसल को ना बोयें समय पर तुड़ाई करें तुड़ा.... (Read More)
चेतन जी जो फ्रूट में कीड़े पड़ते है वो fruit fly के कारण पड़ते है यह अमरूद का गंभीर कीट है मादा मक्खी नए फलों के अंदर अंडे देती है उसके बाद नए कीट फल के गुद्दे को खाते हैं जिससे फल गलना शुरू हो जाता है और गिर जाता है यदि बाग में फल की मक्खी का हमला पहले भी होता है तो बारिश के मौसम में फसल को ना बोयें समय पर तुड़ाई करें तुड़ाई में देरी ना करें प्रभावित शाखाओं और फलों को खेत में से बाहर निकालें और नष्ट कर दें फैनवेलरेट 80 मि.ली को 150 लीटर पानी में मिलाकर फल पकने पर सप्ताह के अंतराल पर स्प्रे करें फैनवेलरेट की स्प्रे के बाद तीसरे दिन फल की तुड़ाई करें इसका जैविक उपाए फ्रूट फ्लाई ट्रैप ही है या आप बाग़ में संतरे के पौधे लगाए इसके इलावा इसका जैविक उपाय और कोई नहीं है और जो किसम आपने लगाई है उसके फल का वजन 180 ग्राम तक average होता है अगर यह 200 ग्राम का हो रहा है तो फल सही वजन का है

Posted by Tarlochan singh
Punjab
08-10-2019 10:54 AM
tarlochan ji narme da rate 5255-5550 rupaye prati quintal de hisab nl chl reha hai.dhanwad
Posted by Chetan Singh
Uttar Pradesh
08-10-2019 10:50 AM
यह एक महत्वपूर्ण सब्जी की फसल है जिसको ग्रीन हाउस या शेड नेट हाउस में उगाया जाता है इसकी खेती के लिए 18-35° सै. मिट्टी का तापमान होना आवश्यक है इसके अच्छे विकास के लिए विभिन्न प्रकार की चिकनी से दोमट मिट्टी में इसकी खेती करें यह कुछ हद तक तेज़ाबी मिट्टी में उगाई जा सकती है यह रेतली दोमट मिट्टी और पानी के अच्छे निक.... (Read More)
यह एक महत्वपूर्ण सब्जी की फसल है जिसको ग्रीन हाउस या शेड नेट हाउस में उगाया जाता है इसकी खेती के लिए 18-35° सै. मिट्टी का तापमान होना आवश्यक है इसके अच्छे विकास के लिए विभिन्न प्रकार की चिकनी से दोमट मिट्टी में इसकी खेती करें यह कुछ हद तक तेज़ाबी मिट्टी में उगाई जा सकती है यह रेतली दोमट मिट्टी और पानी के अच्छे निकास में बढ़िया परिणाम देती है शिमला मिर्च की खेती के लिए मिट्टी का pH 6-7 होना चाहिए प्रसिद्ध किस्में:-Bomby (red color),Orobelle (yellow color),Indra (green).शिमला मिर्च की खेती के लिए, ज़मीन को अच्छी तरह से तैयार करें ज़मीन को भुरभुरा बनाने के लिए, 5-6 बार सुहागे से जोताई करें खेत की तैयारी के समय खेत में रूड़ी की खाद डालें और मिट्टी में मिलाएं बीजों को मुख्य तौर पर अक्तूबर के अंत में बोयें और रोपण के लिए मध्य-फरवरी का समय उचित होता है जल्दी पैदावार के लिए, बीजों को मध्य-अक्तूबर में बोयें और रोपण के लिए नवंबर के अंत का समय उचित होता है बिजाई के लिए पंक्ति से पंक्ति में 50 सैं.मी. और पौधे से पौधे में 40 सैं.मी. का फासला रखें बीज को 2-4 सैं.मी. गहरा बोयें .प्लास्टिक शीट की मदद से सुरंगी खेती: शिमला मिर्च की अगेती पैदावार के लिए गर्मियों के शुरू में इस विधि का प्रयोग किया जाता है यह दिसंबर से मध्य-फरवरी महीने के ठंडे मौसम में फसल की सुरक्षा करने में सहायता करती है बिजाई के समय कतार से कतार में 130 सैं.मी. और पौधे से पौधे में 30 सैं.मी. का फासला रखें बिजाई से पहले 45-60 सैं.मी. लम्बे डंडों को मिट्टी में स्थापित करें खेत को प्लास्टिक शीट से (100 गेज मोटाई) डंडों की सहायता से लगाएं फरवरी के महीने में सही तापमान होने पर प्लास्टिक शीट को हटा दें 2. गड्डे खोद कर बीज लगाकर भी इसकी खेती की जाती है बीज की मात्रा:-एक एकड़ खेत के लिए 200-300 बीजों का प्रयोग करें बीज का उपचार मिट्टी से होने वाली बीमारीयों से बचाने के लिए बिजाई से पहले थीरम या कप्तान, सिरेसन आदि 2 ग्राम में प्रति किलो बीजों को भिगोएं शिमला मिर्च की खेती के लिए, सबसे पहले नर्सरी बैडों को तैयार करें नए पौधे लगाने के लिए 300 x 60 x 15 सैं.मी. आकार के सीड बैड तैयार करें बीजों को तैयार किये गए बैडों पर बोयें और बिजाई के बाद नर्सरी बैडों को मिट्टी की पतली परत से ढक दें बीजों के उचित अंकुरण के लिए बिजाई के बाद तैयार बैडों पर हल्की सिंचाई करें जब पौधे के 4-5 पत्ते निकलने शुरू हो जाये तो आरोपण करें मुख्य खेत में आरोपण किया जाता है आरोपण आमतौर पर बरसात के मौसम में किया जाता है आरोपण के लिए मुख्यतः 50-60 दिनों की पौध का प्रयोग किया जाता है आरोपण से पहले नर्सरी बैडों को पानी लगाएं ताकि पौधे को आसानी से उखाड़ा जा सके खेत की तैयारी के समय, 20-25 टन प्रति एकड़ रूड़ी की खाद मिट्टी में मिलाएं रूड़ी की खाद के साथ, नाइट्रोजन 50 किलो( यूरिया 110 किलो), फासफोरस 25 किलो(सिंगल सुपर फासफेट 175 किलो) और पोटाशियम 12 किलो(मिउरेट ऑफ़ पोटाश 20 किलो) प्रति एकड़ में डालें पोटाशियम, फासफोरस की पूरी मात्रा और नाइट्रोजन 1/3 हिस्सा रोपण से पहले कतारों में खाद के रूप में मिलाएंऔर बाकी बची हुई नाइट्रोजन को दो बराबर हिस्सों में डालें पहली खुराक रोपण के एक महीने बाद और दूसरी रोपण के दो महीने के बाद डालें फसल की बढ़िया पैदावार के लिए, उचित समय के अंतराल पर गोड़ाई करें नए पौधों के रोपण के 2-3 हफ्ते बाद मेंड़ पर मिट्टी चढ़ाएं यह खेत को नदीन मुक्त करने में मदद करती है रोपण के 30 दिनों के बाद पहली गोड़ाई और 60 दिनों के बाद दूसरी गोड़ाई करें बिजाई के बाद तुरंत हल्की सिंचाई करें अगली सिंचाई रोपण के तुरंत बाद करें और फिर आवश्यकता के अनुसार सिंचाई करें शुष्क और अर्ध शुष्क क्षेत्रों में सिंचाई उचित अंतराल पर आवश्यक होती है अपरिपक्व हरे फल कटाई के लिए तैयार होते है अपरिपक्व फल नर्म और कुरकुरे कटाई के लिए बढ़िया होते है शिमला मिर्च की औसतन पैदावार मुख्य तौर 40-50 क्विंटल प्रति एकड़ होती है इसके बीज आपको नजदीकी मार्किट में मिल जायेगे धन्यवाद

Posted by BIJJU
Madhya Pradesh
08-10-2019 10:45 AM
Bijju ji aap mooli ki kisme jaise Co 1, Pusa Rashmi, Pusa Chetki, Pusa Desi, Japanese White and Arka Nishant ki bijai kar sakte hai.dhanywad
Posted by Narendra Bahadur
Uttar Pradesh
08-10-2019 10:44 AM
Narendra ji yeh fungus hai iski roktham ke liye aap carbendazim@400 gram ko prati acre ke hisab se spray karen.dhanywad

Posted by ajay rathore
Uttar Pradesh
08-10-2019 10:43 AM
Ajay Rathore ji UP me Online ganna parchi dekhne ke lia aap apne phone me google par jakar CANEUP.IN likh kar search kare ge to aap sarkar duara chlai gaee website par chale jaege or ancre dekhe par click kar ke apna jila or mill ka name bhar kar apni parchi ki date dekh sakte hai, is ke bina aap 1800-121-3203, 1800-103-5823 toll free no. par samparak kar adhik jankari bhi le sakte hai, THankyou.

Posted by ajay rathore
Uttar Pradesh
08-10-2019 10:39 AM
ajay ji kripya aap apna swal vistar se pooche taki aapko iske bare men poori jankari di ja sake.dhanywad

Posted by Girraj Meena
Madhya Pradesh
08-10-2019 10:31 AM
giraaj ji yeh keet ke karn hota hai iske liye aap cartap hydrochloride@170 gram ko prati acre ke hisab se spray karen.dhanywad

Posted by omirapurohit
Rajasthan
08-10-2019 10:25 AM
Shrimaan ji, moong ka bhav is samay 5500 se 6200 rupay prati quintal ke hisaab se chal raha hai, dhanywad

Posted by Bhullar Sahb
Punjab
08-10-2019 10:22 AM
bhullar saab kirpa karke tidde di photo bhejo ta jo tuhanu osde hisab nal jankari diti ja sake.dhanwad

Posted by manveer
Punjab
08-10-2019 10:21 AM
manveer ji eh ik fungicide hai isdi matra 2-3 gram prati litre pani de hisab nal varti jandi hai. eh fungua valiyan bimariyan di roktham kardi hai tuc isdi varto kar sakde ho.dhanwad

Posted by Shamsher singh
Punjab
08-10-2019 10:20 AM
ਸ਼ਮਸ਼ੇਰ ਜੀ ਇਹ ਕੀਟਨਾਸ਼ਕ ਹੈ ਜੋ white grub ਦੀ ਰੋਕਥਾਮ ਦੇ ਲਈ ਵਰਤੀ ਜਾਂਦੀ ਹੈ ਇਸਦੀ ਮਾਤਰਾ 200 -220 ਗ੍ਰਾਮ ਨੂੰ ਪ੍ਰਤੀ ਏਕੜ ਦੇ ਹਿਸਾਬ ਨਾਲ ਸਪਰੇ ਕੀਤੀ ਜਾਂਦੀ ਹੈ ਧੰਨਵਾਦ

Posted by Dinesh patel
Gujarat
08-10-2019 10:18 AM
दिनेश जी यह फंगस है इसकी रोकथाम के लिए आप custodia @300ml को प्रति एकड़ के हिसाब से स्प्रे करें धन्यवाद
Posted by ਕੁਲਬੀਰ ਸਿੰਘ ਬਾਜਵਾ
Punjab
08-10-2019 10:18 AM
ਬਰਾਨੀ ਹਾਲਾਤਾਂ ਲਈ, 10 ਅਕਤੂਬਰ ਤੋਂ 25 ਅਕਤੂਬਰ ਤੱਕ ਪੂਰੀ ਬਿਜਾਈ ਕਰੋ ਸਿੰਚਿਤ ਹਾਲਾਤਾਂ ਲਈ 25 ਅਕਤੂਬਰ ਤੋਂ 10 ਨਵੰਬਰ ਤੱਕ ਦੇਸੀ ਅਤੇ ਕਾਬੁਲੀ ਛੋਲਿਆਂ ਦੀਆਂ ਕਿਸਮਾਂ ਦੀ ਬਿਜਾਈ ਕਰੋ ਸਹੀ ਸਮੇਂ ਤੇ ਬਿਜਾਈ ਕਰਨਾ ਜ਼ਰੂਰੀ ਹੈ ਕਿਉਂਕਿ ਅਗੇਤੀ ਬਿਜਾਈ ਨਾਲ ਬੇਲੋੜੇ ਵਿਕਾਸ ਦਾ ਖਤਰਾ ਵੱਧ ਜਾਂਦਾ ਹੈ ਪਿਛੇਤੀ ਬਿਜਾਈ ਨਾਲ, ਪੌਦਿਆਂ ਵਿੱਚ ਸੋਕਾ ਰੋਗ ਦਾ ਖਤਰਾ ਵੱਧ ਜਾਂਦਾ, ਪੌਦੇ ਦਾ ਵਿਕਾ.... (Read More)
ਬਰਾਨੀ ਹਾਲਾਤਾਂ ਲਈ, 10 ਅਕਤੂਬਰ ਤੋਂ 25 ਅਕਤੂਬਰ ਤੱਕ ਪੂਰੀ ਬਿਜਾਈ ਕਰੋ ਸਿੰਚਿਤ ਹਾਲਾਤਾਂ ਲਈ 25 ਅਕਤੂਬਰ ਤੋਂ 10 ਨਵੰਬਰ ਤੱਕ ਦੇਸੀ ਅਤੇ ਕਾਬੁਲੀ ਛੋਲਿਆਂ ਦੀਆਂ ਕਿਸਮਾਂ ਦੀ ਬਿਜਾਈ ਕਰੋ ਸਹੀ ਸਮੇਂ ਤੇ ਬਿਜਾਈ ਕਰਨਾ ਜ਼ਰੂਰੀ ਹੈ ਕਿਉਂਕਿ ਅਗੇਤੀ ਬਿਜਾਈ ਨਾਲ ਬੇਲੋੜੇ ਵਿਕਾਸ ਦਾ ਖਤਰਾ ਵੱਧ ਜਾਂਦਾ ਹੈ ਪਿਛੇਤੀ ਬਿਜਾਈ ਨਾਲ, ਪੌਦਿਆਂ ਵਿੱਚ ਸੋਕਾ ਰੋਗ ਦਾ ਖਤਰਾ ਵੱਧ ਜਾਂਦਾ, ਪੌਦੇ ਦਾ ਵਿਕਾਸ ਮਾੜਾ ਅਤੇ ਜੜ੍ਹਾਂ ਵੀ ਉਚਿੱਤ ਢੰਗ ਨਾਲ ਨਹੀਂ ਵਧਦੀਆਂ ਹਨ ਇਸਦੀਆਂ ਕਿਸਮਾਂ ਜਿਵੇ PBG 7: ਪੂਰੇ ਪੰਜਾਬ ਵਿੱਚ ਇਸਦੀ ਬਿਜਾਈ ਦੀ ਸਿਫਾਰਿਸ਼ ਕੀਤੀ ਜਾਂਦੀ ਹੈ ਇਹ ਕਿਸਮ ਟਾਟਾਂ ਤੇ ਧੱਬਾ ਰੋਗ, ਸੋਕਾ ਅਤੇ ਜੜ੍ਹ ਗਲਣ ਰੋਗ ਦੀ ਰੋਧਕ ਹੈ ਇਸ ਦੇ ਦਾਣੇ ਦਰਮਿਆਨੇ ਆਕਾਰ ਦੇ ਹੁੰਦੇ ਹਨ ਅਤੇ ਇਸਦਾ ਔਸਤਨ ਝਾੜ 8 ਕੁਇੰਟਲ ਪ੍ਰਤੀ ਏਕੜ ਹੁੰਦਾ ਹੈ ਇਹ ਕਿਸਮ ਤਕਰੀਬਨ 159 ਦਿਨਾਂ ਵਿੱਚ ਪੱਕ ਜਾਂਦੀ ਹੈ
CSJ 515: ਇਹ ਕਿਸਮ ਸੇਂਜੂ ਇਲਾਕਿਆਂ ਲਈ ਢੁੱਕਵੀਂ ਹੈ ਇਸਦੇ ਦਾਣੇ ਛੋਟੇ ਅਤੇ ਭੂਰੇ ਰੰਗ ਦੇ ਹੁੰਦੇ ਹਨ ਅਤੇ ਭਾਰ 17 ਗ੍ਰਾਮ ਪ੍ਰਤੀ 100 ਬੀਜ ਹੁੰਦਾ ਹੈ ਇਹ ਜੜ੍ਹ ਗਲਣ ਰੋਗ ਦੀ ਰੋਧਕ ਹੈ ਅਤੇ ਟਾਟਾਂ ਦੇ ਉੱਪਰ ਧੱਬੇ ਰੋਗ ਨੂੰ ਸਹਾਰ ਲੈਂਦੀ ਹੈ ਇਹ ਕਿਸਮ ਤਕਰੀਬਨ 135 ਦਿਨਾਂ ਵਿੱਚ ਪੱਕ ਜਾਂਦੀ ਹੈ ਅਤੇ ਇਸਦਾ ਔਸਤਨ ਝਾੜ 7 ਕੁਇੰਟਲ ਪ੍ਰਤੀ ਏਕੜ ਹੁੰਦਾ ਹੈ
BG 1053: ਇਹ ਕਾਬੁਲੀ ਛੋਲਿਆਂ ਦੀ ਕਿਸਮ ਹੈ ਇਸ ਕਿਸਮ ਦੇ ਫੁੱਲ ਜਲਦੀ ਨਿਕਲ ਆਉਂਦੇ ਹਨ ਅਤੇ ਇਹ 155 ਦਿਨਾਂ ਵਿੱਚ ਪੱਕ ਜਾਂਦੀ ਹੈ ਇਸ ਦੇ ਦਾਣੇ ਸਫੇਦ ਰੰਗ ਦੇ ਅਤੇ ਮੋਟੇ ਹੁੰਦੇ ਹਨ ਇਸਦਾ ਔਸਤਨ ਝਾੜ 8 ਕੁਇੰਟਲ ਪ੍ਰਤੀ ਏਕੜ ਹੁੰਦਾ ਹੈ ਇਨ੍ਹਾਂ ਦੀ ਖੇਤੀ ਪੂਰੇ ਪ੍ਰਾਂਤ ਦੇ ਸੇਂਜੂ ਇਲਾਕਿਆਂ ਵਿੱਚ ਕੀਤੀ ਜਾਂਦੀ ਹੈ
L 550: ਇਹ ਕਾਬੁਲੀ ਛੋਲਿਆਂ ਦੀ ਕਿਸਮ ਹੈ ਇਹ ਦਰਮਿਆਨੀ ਫੈਲਣ ਵਾਲੀ ਅਤੇ ਛੇਤੀ ਫੁੱਲ ਦੇਣ ਵਾਲੀ ਕਿਸਮ ਹੈ ਇਹ 160 ਦਿਨਾਂ ਚ ਪੱਕ ਜਾਂਦੀ ਹੈ ਇਸਦੇ ਦਾਣੇ ਚਿੱਟੇ ਰੰਗ ਦੇ ਅਤੇ ਔਸਤਨ ਝਾੜ 6 ਕੁਇੰਟਲ ਪ੍ਰਤੀ ਏਕੜ ਹੁੰਦਾ ਹੈ
L 551: ਇਹ ਕਾਬੁਲੀ ਛੋਲਿਆਂ ਦੀ ਕਿਸਮ ਹੈ ਇਹ ਸੋਕਾ ਰੋਗ ਦੀ ਰੋਧਕ ਕਿਸਮ ਹੈ ਇਹ 135-140 ਦਿਨਾਂ ਵਿੱਚ ਪੱਕ ਕੇ ਤਿਆਰ ਹੋ ਜਾਂਦੀ ਹੈ ਅਤੇ ਇਸਦਾ ਔਸਤਨ ਝਾੜ 6-8 ਕੁਇੰਟਲ ਪ੍ਰਤੀ ਏਕੜ ਹੁੰਦਾ ਹੈ
GNG 1958: ਇਹ ਸਿੰਚਿਤ ਇਲਾਕਿਆਂ ਅਤੇ ਆਮ ਸਿੰਚਾਈ ਵਾਲੇ ਖੇਤਰਾਂ ਲਈ ਢੁਕਵੀਂ ਹੈ ਇਹ ਕਿਸਮ 145 ਦਿਨਾਂ ਵਿੱਚ ਪੱਕ ਜਾਂਦੀ ਹੈ ਇਸਦੇ ਬੀਜ ਭੂਰੇ ਰੰਗ ਦੇ ਹੁੰਦੇ ਹਨ ਇਸਦਾ ਔਸਤਨ ਝਾੜ 8-10 ਕੁਇੰਟਲ ਪ੍ਰਤੀ ਏਕੜ ਹੁੰਦਾ ਹੈ
GNG 1969: ਇਹ ਸਿੰਚਿਤ ਇਲਾਕਿਆਂ ਅਤੇ ਆਮ ਸਿੰਚਾਈ ਵਾਲੇ ਖੇਤਰਾਂ ਲਈ ਢੁਕਵੀਂ ਹੈ ਇਸਦਾ ਬੀਜ ਸਫੇਦ ਰੰਗ ਦਾ ਹੁੰਦਾ ਹੈ ਅਤੇ ਫਸਲ 146 ਦਿਨਾਂ ਵਿੱਚ ਪੱਕ ਜਾਂਦੀ ਹੈ ਇਸਦਾ ਔਸਤਨ ਝਾੜ 9 ਕੁਇੰਟਲ ਪ੍ਰਤੀ ਏਕੜ ਹੁੰਦਾ ਹੈ
GLK 28127: ਇਹ ਸਿੰਚਿਤ ਇਲਾਕਿਆਂ ਲਈ ਢੁਕਵੀਂ ਕਿਸਮ ਹੈ ਇਸਦੇ ਬੀਜ ਹਲਕੇ ਪੀਲੇ ਅਤੇ ਸਫੇਦ ਰੰਗ ਦੇ ਅਤੇ ਵੱਡੇ ਆਕਾਰ ਦੇ ਹੁੰਦੇ ਹਨ ਜੋ ਦਿਖਣ ਵਿੱਚ ਉੱਲੂ ਵਰਗੇ ਲਗਦੇ ਹਨ ਇਹ ਕਿਸਮ 149 ਦਿਨਾਂ ਵਿੱਚ ਪੱਕ ਜਾਂਦੀ ਹੈ ਇਸਦਾ ਔਸਤਨ ਝਾੜ 8 ਕੁਇੰਟਲ ਪ੍ਰਤੀ ਏਕੜ ਹੁੰਦਾ ਹੈ
GPF2: ਇਸ ਕਿਸਮ ਦੇ ਪੌਦੇ ਲੰਬੇ ਹੁੰਦੇ ਹਨ ਜੋ ਕਿ ਉੱਪਰ ਵੱਲ ਵਧਦੇ ਹਨ ਇਹ ਟਾਟਾਂ ਦੇ ਉੱਪਰ ਪੈਣ ਵਾਲੇ ਧੱਬਾ ਰੋਗ ਦੀ ਰੋਧਕ ਕਿਸਮ ਹੈ ਇਹ ਕਿਸਮ ਤਕਰੀਬਨ 165 ਦਿਨਾਂ ਵਿੱਚ ਪੱਕ ਜਾਂਦੀ ਹੈ ਇਸਦਾ ਔਸਤ ਝਾੜ 7.6 ਕੁਇੰਟਲ ਪ੍ਰਤੀ ਏਕੜ ਹੁੰਦਾ ਹੈ
Aadhar (RSG-963): ਇਹ ਕਿਸਮ ਟਾਟਾਂ ਦੇ ਧੱਬਾ ਰੋਗ, ਜੜ ਗਲਣ, ਬੀ.ਜੀ.ਐੱਮ, ਤਣੇ ਤੋਂ ਜੜ੍ਹਾਂ ਵਿਚਲੇ ਹਿੱਸੇ ਦਾ ਗਲਣਾ, ਫਲੀ ਦਾ ਗੜੂੰਆ ਅਤੇ ਨਿਮਾਟੋਡ ਆਦਿ ਦੀ ਰੋਧਕ ਹੈ ਇਹ ਕਿਸਮ ਤਕਰੀਬਨ 125-130 ਦਿਨਾਂ ਵਿੱਚ ਪੱਕ ਜਾਂਦੀ ਹੈ ਇਸਦਾ ਔਸਤਨ ਝਾੜ 6 ਕੁਇੰਟਲ ਪ੍ਰਤੀ ਏਕੜ ਹੁੰਦਾ ਹੈ
Anubhav (RSG 888): ਇਹ ਕਿਸਮ ਬਰਾਨੀ ਖੇਤਰਾਂ ਲਈ ਢੁੱਕਵੀਂ ਹੈ ਇਹ ਸੋਕਾ ਰੋਗ ਅਤੇ ਜੜ੍ਹ ਗਲਣ ਦੀ ਰੋਧਕ ਕਿਸਮ ਹੈ ਇਹ ਕਿਸਮ ਤਕਰੀਬਨ 130-135 ਦਿਨਾਂ ਵਿੱਚ ਪੱਕ ਜਾਂਦੀ ਹੈ ਇਸਦਾ ਔਸਤਨ ਝਾੜ 9 ਕੁਇੰਟਲ ਪ੍ਰਤੀ ਏਕੜ ਹੁੰਦਾ ਹੈ
Pusa Chamatkar: ਇਹ ਕਾਬੁਲੀ ਛੋਲਿਆਂ ਦੀ ਕਿਸਮ ਹੈ ਇਹ ਕਿਸਮ ਤਕਰੀਬਨ 140-150 ਦਿਨਾਂ ਵਿੱਚ ਪੱਕ ਜਾਂਦੀ ਹੈ ਇਸਦਾ ਔਸਤਨ ਝਾੜ 7.5 ਕੁਇੰਟਲ ਪ੍ਰਤੀ ਏਕੜ ਹੁੰਦਾ ਹੈ
PBG 5: ਇਹ ਕਿਸਮ 2003 ਵਿੱਚ ਜਾਰੀ ਕੀਤੀ ਗਈ ਹੈ ਇਹ 165 ਦਿਨਾਂ ਵਿੱਚ ਪੱਕ ਜਾਂਦੀ ਹੈ ਅਤੇ ਇਸਦੀ ਔਸਤਨ ਪੈਦਾਵਾਰ 6.8 ਕੁਇੰਟਲ ਪ੍ਰਤੀ ਏਕੜ ਹੁੰਦੀ ਹੈ, ਇਸ ਦੇ ਦਾਣੇ ਮੋਟੇ ਅਤੇ ਭੂਰੇ ਰੰਗ ਦੇ ਹੁੰਦੇ ਹੈ ਇਹ ਕਿਸਮ ਸੋਕੇ ਅਤੇ ਜੜਾਂ ਦੀਆ ਬਿਮਾਰੀਆਂ ਨੂੰ ਸਹਿਣਯੋਗ ਹੈ
PDG 4: ਇਹ ਕਿਸਮ 2000 ਵਿੱਚ ਜਾਰੀ ਕੀਤੀ ਗਈ ਹੈ ਇਹ 160 ਦਿਨਾਂ ਵਿੱਚ ਪੱਕ ਜਾਂਦੀ ਹੈ ਅਤੇ ਇਸਦੀ ਔਸਤਨ ਪੈਦਾਵਾਰ 7.8 ਕੁਇੰਟਲ ਪ੍ਰਤੀ ਏਕੜ ਹੁੰਦੀ ਹੈ, ਇਹ ਕਿਸਮ ਉਖੇੜਾ ਰੋਗ, ਜੜ ਗਲਣ ਅਤੇ ਸੋਕੇ ਦੀਆ ਬਿਮਾਰੀਆਂ ਨੂੰ ਸਹਿਣਯੋਗ ਹੈ
PDG 3: ਇਸ ਕਿਸਮ ਦੀ ਔਸਤਨ ਪੈਦਾਵਾਰ 7.2 ਕੁਇੰਟਲ ਪ੍ਰਤੀ ਏਕੜ ਹੁੰਦੀ ਹੈ ਅਤੇ ਇਹ 160 ਦਿਨਾਂ ਵਿੱਚ ਪੱਕ ਜਾਂਦੀ ਹੈ

Posted by Bhikhiwind R Patel
Gujarat
08-10-2019 10:08 AM
Bhikhiwind ji aap iske uper fungicide jaise custodia@300ml ko prati acre ke hisab se spray karen.dhanywad

Posted by Amarpal Singh lodhi
Uttar Pradesh
08-10-2019 10:02 AM
बिजाई के लिए सेहतमंद आलू ही चुने बीज के तौर पर दरमियाने आकार वाले आलू, जिनका भार 25-125 ग्राम हो, प्रयोग करें बिजाई से पहले आलुओं को कोल्ड स्टोर से निकालकर 1-2 सप्ताह के लिए छांव वाले स्थान पर रखें ताकि वे अंकुरित हो जायें आलुओं के सही अंकुरन के लिए उन्हें जिबरैलिक एसिड 1 ग्राम प्रति 10 लीटर पानी में मिलाकर एक घंटे .... (Read More)
बिजाई के लिए सेहतमंद आलू ही चुने बीज के तौर पर दरमियाने आकार वाले आलू, जिनका भार 25-125 ग्राम हो, प्रयोग करें बिजाई से पहले आलुओं को कोल्ड स्टोर से निकालकर 1-2 सप्ताह के लिए छांव वाले स्थान पर रखें ताकि वे अंकुरित हो जायें आलुओं के सही अंकुरन के लिए उन्हें जिबरैलिक एसिड 1 ग्राम प्रति 10 लीटर पानी में मिलाकर एक घंटे के लिए उपचार करें फिर छांव में सुखाएं और 10 दिनों के लिए हवादार कमरे में रखें फिर काटकर आलुओं को मैनकोजेब 0.5 प्रतिशत घोल (5 ग्राम प्रति लीटर पानी) में 10 मिनट के लिए भिगो दें इससे आलुओं को शुरूआती समय में गलने से बचाया जा सकता है आलुओं को गलने और जड़ों में कालापन रोग से बचाने के लिए साबुत और काटे हुए आलुओं को 6 प्रतिशत मरकरी के घोल (टैफासन) 0.25 प्रतिशत (2.5 ग्राम प्रति लीटर पानी) में डालें
Posted by DINESH KUMAR
Uttar Pradesh
08-10-2019 10:01 AM
दिनेश जी आप इसके लिए NPK 191919 एक किलो को 150 लीटर पानी में मिला कर स्प्रे करें धन्यवाद

Posted by Ramnlal mali
Rajasthan
08-10-2019 10:00 AM
कृप्या आप अपना सवाल विस्तार से पूछें कि आप क्या जानकारी लेना चाहते है ताकि आपको सही जानकारी दी जा सके
Posted by DINESH KUMAR
Uttar Pradesh
08-10-2019 09:59 AM
दिनेश जी आप इसके लिए NPK 191919 एक किलो को 150 लीटर पानी में मिला कर स्प्रे करें धन्यवाद

Posted by Sukhpreet Singh
Punjab
08-10-2019 09:58 AM
ਸੁਖਪ੍ਰੀਤ ਜੀ 1509 ਦਾ ਰੇਟ 2350 -2600 ਰੁਪਏ ਪ੍ਰਤੀ ਕੁਇੰਟਲ ਦੇ ਹਿਸਾਬ ਨਾਲ ਚਲ ਰਿਹਾ ਹੈ ਧੰਨਵਾਦ

Posted by ravi gurav
Maharashtra
08-10-2019 09:57 AM
कम पानी और जंगली जानवरों से परेशान परंपरागत खेती करने वाले किसानों के लिए जिरेनियम की खेती राहत देने वाली साबित हो सकती है जिरेनियम कम पानी में आसानी से हो जाता है और इसे जंगली जानवरों से भी कोई नुकसान नहीं है इसके साथ ही नए तरीके की खेती ‘जिरेनियम’ से उन्हें परंपरागत फसलों की अपेक्षा ज्यादा फायदा भी मिल .... (Read More)
कम पानी और जंगली जानवरों से परेशान परंपरागत खेती करने वाले किसानों के लिए जिरेनियम की खेती राहत देने वाली साबित हो सकती है जिरेनियम कम पानी में आसानी से हो जाता है और इसे जंगली जानवरों से भी कोई नुकसान नहीं है इसके साथ ही नए तरीके की खेती ‘जिरेनियम’ से उन्हें परंपरागत फसलों की अपेक्षा ज्यादा फायदा भी मिल सकता है खासकर पहाड़ का मौसम इसकी खेती के लिए बेहद अनुकूल है यह छोटी जोतों में भी हो जाती है जिरेनियम पौधे की पत्तियों और तने से सुगंधित तेल निकलता है जलवायु उपोष्ण, ठंड एवं शुष्क जलवायु 25-30 डिग्री से तापक्रम एवं आर्द्रता 60% से कम अच्छी बढ़वार के लिये उपयुक्त दोमट भूमि, पी.एच.-5.5-8.0, जीवांश पदार्थ की अधिकता एवं समुचित जल निकास की व्यवस्था वाली मृदा उपयुक्त रहती है प्रवर्धन 12-15 सेमी. लम्बी, रोग मुक्त 3-4 गांठों वाली शाकीय कटिंग से पौधें तैयार किये जाते है पौध रोपण एवं भूमि खेत की अच्छी जुताई करने के पश्चात् उसमें सड़ी हुई 10-15 टन गोबर की खाद मिलाकर सुविधाजनक आकार की क्यारियों में रोपाई 50ग50 सेमी. की दूरी पर करनी चाहिए जिरेनियम उत्तर भारत के मैदानी क्षेत्रों में नवम्बर से जनवरी के मध्य लगाते है फसल को 5-6 सिंचाई की आवष्कता पड़ती है
Posted by DINESH KUMAR
Uttar Pradesh
08-10-2019 09:56 AM
दिनेश जी आप इसके लिए NPK 191919 एक किलो को 150 लीटर पानी में मिला कर स्प्रे करें धन्यवाद

Posted by Sanjay
Jharkhand
08-10-2019 09:53 AM
संजय जी आप मिर्च की किस्मे जैसे Pusa Jwala, Sona-21, Jawahar, Sadabahar, Agni की बिजाई कर सकते है धन्यवाद

Posted by Mahendra Singh Patel
Uttar Pradesh
08-10-2019 09:53 AM
देसी किस्मों के लिए सिंचित और असिंचित इलाकों में नाइट्रोजन (यूरिया 13 किलो) और फासफोरस (सुपर फासफेट 50 किलो) प्रति एकड़ के हिसाब से बिजाई के समय डालें जबकि काबुली चने की किस्मों के लिए, बिजाई के समय 13 किलो यूरिया और 100 किलो सुपर फासफेट प्रति एकड़ डालें खादों की ज्यादा अच्छे प्रयोग के लिए खादों को खालियों में 7-10 सैं..... (Read More)
देसी किस्मों के लिए सिंचित और असिंचित इलाकों में नाइट्रोजन (यूरिया 13 किलो) और फासफोरस (सुपर फासफेट 50 किलो) प्रति एकड़ के हिसाब से बिजाई के समय डालें जबकि काबुली चने की किस्मों के लिए, बिजाई के समय 13 किलो यूरिया और 100 किलो सुपर फासफेट प्रति एकड़ डालें खादों की ज्यादा अच्छे प्रयोग के लिए खादों को खालियों में 7-10 सैं.मी. की गहराई पर बोयें

Posted by Bs Randhawa
Punjab
08-10-2019 09:42 AM
tuci ehna nu Enrofloxacin and stressvel dwai deni suru kro ehh sarir de bhar de hisab nal deo iss nal frak paa jawega.

Posted by harshit
Uttar Pradesh
08-10-2019 09:05 AM
कृप्या आप विस्तार से अपना सवाल पूछें कि उन्हें क्या समस्या आ रही है ताकि आपको उसके बारे में सही जानकारी दी जा सके

Posted by chhina saab
Punjab
08-10-2019 09:01 AM
kirpa krke apna swal vistar nal pusho ji tan jo tuhanu sahi jankari diti ja skee.
Posted by ਸਰਦਾਰ ਜੀ
Punjab
08-10-2019 08:42 AM
ਸ਼੍ਰੀਮਾਨ ਜੀ, ਇਹਨੂੰ ਇਕ ਜਗਾਹ ਇਕੱਠੀ ਕਰ ਕੇ ਤੁਸੀ ਇਸ ਤੋਂ ਖਾਦ ਤਿਆਰ ਕਰ ਸਕਦੇ ਹੋ, ਧੰਨਵਾਦ
Posted by Asif Rahaman
Bihar
08-10-2019 08:35 AM
Rahaman ji khet ko nadeenmukt karen . aur agar har saal aise hi hota hai to aap khet men har saal ek hi fasl na ugaye. aur jab aap fasl kibijai ke liye khet tyar kar rahe ho to us same aap khet ki gehri jutayi kare aur khet ko aache se dhoop lgaye iske ilava aap gobar ki khaad men tricoderma mila kar khet men istemal karen.dhanywad

Posted by Abhash shrivastava
Uttar Pradesh
08-10-2019 08:28 AM
Abhash ji haldi rog ki roktham ke liye tilt@200ml ko prati acre ke hisab se spray karen.dhanywad
Posted by Dhanveer singh Benipal
Punjab
08-10-2019 08:28 AM
Benipal ji tuci uss nu nazdiki doctor ton check krwao ji jiss nal usdi janch krke sahi ilagg kita jaa skee..
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