
Posted by gurbhej singh
Punjab
31-12-2022 11:14 AM
ਤੁਸੀ ਉਸ ਨੂੰ xnel inj. 1gm, Deriphyllin inj 10ml, Avil inj. 10ml, Rumirec inj. 10ml ਲਗਵਾਓ ਅਤੇ ਇਹ 3 ਦਿਨ ਲਗਵਾਓ ਇਹਨਾਂ ਨਾਲ ਫਰਕ ਪੈ ਜਾਵੇਗਾ, ਇਹ ਨਜ਼ਦੀਕੀ ਡਾਕਟਰ ਤੋਂ ਲਗਵਾ ਸਕਦੇ ਹੋ।

Posted by sukhvinder Singh
Punjab
31-12-2022 10:52 AM
ਸੁੱਖ ਜੀ, ਪਹਿਲੀ ਗੱਲ ਹੁਣ ਤੁਸੀਂ ਸਪਰੇਅ ਤਾਂ ਹੀ ਕਰੋ ਜੇਕਰ ਪਹਿਲਾ ਵਾਲੀ ਸਪਰੇਅ ਕਰੀ ਨੂੰ 7-10 ਦਿਨ ਹੋ ਗਏ ਹਨ। ਹੁਣ ਤੁਸੀਂ Atlantis dwai 160 ਗ੍ਰਾਮ ਪ੍ਰਤੀ ਏਕੜ ਦੇ ਹਿਸਾਬ ਨਾਲ ਵਰਤ ਸਕਦੇ ਹੋ।

Posted by Jp
Rajasthan
31-12-2022 10:47 AM
जप जी इन दिनों में आप मूंग, मेश, कपास, तिल, मूंगफली, सोयाबीन, आदि फसलों की खेती कर सकते हैं
Posted by Krishan Kumar Rathour
Uttar Pradesh
31-12-2022 10:40 AM
कृष्ण जी, कृपया यह बताए कि आपने इसको अभी तक कौन सी खाद डाली है। उस हिसाब से ही आपको सही जानकारी दी जा सकती है।
Posted by Sanam Briar
Punjab
31-12-2022 09:31 AM
Snam ji tusi punjab Padmini, punjab 8,7 kisma di bijai kar sakde ho

Posted by Manoj
Haryana
31-12-2022 08:12 AM
मनोज जी, यह किसी तत्व की कमी की वजह से है और जो बीच में फल फट रहा है वो पानी की कमी जा फिर एक दम से पानी लगाने के कारण हो सकता है। कृपया आप यह बताए आपने इसको कौन सी खाद कितनी मात्रा में डाली है।
Posted by Nishan Singh Gill
Punjab
31-12-2022 08:03 AM
ਤੁਸੀ ਓਹਨਾ ਨੂੰ Mammidium powder 50gm ਰੋਜਾਨਾ ਅਤੇ brotone liquid 50ml ਰੋਜਾਨਾ ਦੇਣਾ ਸ਼ੁਰੂ ਕਰੋ ਬਾਕੀ ਖੁਰਾਕ ਦਾ ਧਿਆਨ ਰੱਖੋ ਬਾਕੀ ਕੋਈ ਸਮੱਸਿਆ ਵਾਲੀ ਗੱਲ ਨਹੀਂ ਹੈ

Posted by Harwinder singh
Punjab
31-12-2022 07:55 AM
ਤੁਸੀ ਉਸ ਨੂੰ Ifer H injection 5ml ਲਗਵਾਓ ਅਤੇ 2-2 ਦਿਨ ਦੇ ਫਰਕ ਨਾਲ 5 ਟੀਕੇ ਲਗਵਾਓ ਅਤੇ potasium iodied powder 7gm ਰੋਜਾਨਾ 6 ਦਿਨ ਤੱਕ ਦਿਓ
Posted by Talwinder singh
Punjab
31-12-2022 07:55 AM
Tuci uss nu pett de kiria lai Albendazole & ivermectin salt di bolus deo ate uss nu Bovimin-b ultra powder 50gm rojana ate Ovumin advane tablet rojana 1 goli deni suru kro ate 21 din tak dinde rho jiss nal sarir di kami puri howegi ate sme te heat vich aa jawegi.

Posted by ਯਾਦਵਿੰਦਰ ਸਿੰਘ
Punjab
31-12-2022 07:50 AM
ਯਾਦਵਿੰਦਰ ਜੀ, ਤੁਸੀ ਮੱਕੀ, ਮੂੰਗੀ, ਲੀਬੀਆ, ਜਵਾਰ, ਬਾਜਰਾ ਆਦਿ ਫਸਲਾਂ ਦੀ ਬਿਜਾਈ ਕਰ ਸਕਦੇ ਹੋ ਜੀ।
Posted by baljit singh
Punjab
31-12-2022 07:35 AM
ਬਲਜੀਤ ਜੀ, ਕਣਕ ਨੂੰ ਕੁੱਲ 110 kg ਯੂਰੀਆ ਦੋ ਕਿਸ਼ਤਾਂ ਵਿੱਚ ਪਹਿਲੇ ਅਤੇ ਦੂਜੇ ਪਾਣੀ ਤੋਂ ਬਾਅਦ ਦੇ ਸਕਦੇ ਹੋ ਜੀ ਅਤੇ ਹੈ ਕਣਕ ਵਿਚ ਮੈਂਗਨੀਜ ਜਾਂ ਜ਼ਿੰਕ ਦੀ ਕਮੀ ਆਉਂਦੀ ਹੈ ਤਾਂ ਇਹਨਾ ਤੱਤਾਂ ਦਾ ਵੀ ਛਿੜਕਾਅ ਕੀਤਾ ਜਾ ਸਕਦਾ ਹੈ ਜੀ।

Posted by gurpal singh
Punjab
31-12-2022 07:07 AM

Posted by Parminder singh
Punjab
31-12-2022 06:30 AM
ਹਾਂਜੀ ਤੁਸੀ ਉਸ ਨੂੰ Vitum H liquid 10-10ml ਸਵੇਰੇ ਸ਼ਾਮ ਦੇਣਾ ਸ਼ੁਰੂ ਕਰੋ ਅਤੇ ਉਸਦੀ ਚੰਗੀ ਖੁਰਾਕ ਦੇ ਨਾਲ ਨਾਲ ਸਹੀ ਦੇਖਭਾਲ ਕਰੋ

Posted by Dilbag Singh
Punjab
31-12-2022 12:46 AM
ਜੇਕਰ ਤੁਸੀ ਵੱਡੇ ਪੱਧਰ ਤੇ ਰੱਖਣੀਆਂ ਹੈ ਫਿਰ ਤੁਸੀ BV300 ਨਸਲ ਰੱਖ ਸਕਦੇ ਹੋ ਬਾਕੀ ਜੇਕਰ ਛੋਟੇ ਪੱਧਰ ਤੇ ਕਰਨਾ ਹੈ ਤੁਸੀ ਇਸਦੇ ਲਈ ਬਲਵਿੰਦਰ ਸਿੰਘ 9041009671 ਨਾਲ ਸੰਪਰਕ ਕਰ ਸਕਦੇ ਹੋ

Posted by Sanjoy Debnath
Tripura
30-12-2022 11:52 PM
संजय जी, नींबू की खेती लाभदायक है। नींबू को सभी किस्म की मिट्टी में उगाया जा सकता है। अच्छी जल निकासी वाली हल्की मिट्टी इसकी खेती के लिए उपयुक्त होती है। मिट्टी का पीएच 5.5-7.5 होना चाहिए। वह alkaline और acidic मिट्टी में भी उग सकते हैं। नींबू की खेती के लिए हल्की दोमट अच्छी जल निकासी वाली मिट्टी सबसे अच्छी होती है। पहाड़.... (Read More)
संजय जी, नींबू की खेती लाभदायक है। नींबू को सभी किस्म की मिट्टी में उगाया जा सकता है। अच्छी जल निकासी वाली हल्की मिट्टी इसकी खेती के लिए उपयुक्त होती है। मिट्टी का पीएच 5.5-7.5 होना चाहिए। वह alkaline और acidic मिट्टी में भी उग सकते हैं। नींबू की खेती के लिए हल्की दोमट अच्छी जल निकासी वाली मिट्टी सबसे अच्छी होती है। पहाड़ी इलाकों में ढलानों के खिलाफ छतों पर रोपण किया जाता है। ऐसे क्षेत्रों में उच्च रोपण भी संभव है। रोपण के लिए सबसे अच्छा मौसम जुलाई-अगस्त है। पौधों के बीच की दूरी 4.5×4.5 के बीच रखी जानी चाहिए। पौधा रोपण के लिए 60×60×60 सें.मी. आकार के गड्ढे खोदे जाने चाहिए। रोपण के समय गड्ढों में 10 किलोग्राम गोबर की खाद और 500 ग्राम सिंगल सुपरफास्फेट का प्रयोग करना चाहिए। नींबू को नियमित अंतराल पर सिंचाई की आवश्यकता होती है। जीवन रक्षक सिंचाई सर्दी और गर्मी में करनी चाहिए। फूल आने, फल लगने और पौधों की उचित वृद्धि के लिए सिंचाई आवश्यक है। अधिक सिंचाई करने से Root rot और collar rot जैसी बीमारियाँ भी हो सकती हैं। उचित सिंचाई लाभदायक है। खारा पानी फसली पौधों के लिए हानिकारक होता है। बसंत ऋतु में मिट्टी का आम तौरपर सूखना पौधों को प्रभावित नहीं कर सकता है। उचित आकार और आकर्षक रंग प्राप्त होने पर TSS से एसिड अनुपात 12:1 होने पर किन्नू के फल कटाई के लिए तैयार हो जाते हैं। किस्म के आधार पर फल आमतौर पर जनवरी के मध्य से फरवरी के मध्य तक कटाई के लिए तैयार हो जाते हैं। कटाई उचित समय पर करें क्योंकि बहुत जल्दी या बहुत देर से कटाई खराब गुणवत्ता देगी।

Posted by Yuvraj Singh
Punjab
30-12-2022 10:03 PM
Tuci sbh ton pehla iss nu pett de kiria lai Fenbendazole salt di bolus deo jo gaban pashu lai sahi hundi hai ate her 3 mahine badd salt badal ke dwai jrur deo ate heifer feed de nal nal CRS powder dinde rho, ehna nal hei isdi growth hon lgg jawegi baki tuci kosish kro iss nu khulla gumaya jawe jiss nal sarir di sahi growth hundi hai ate janwar nu pett di smasia bhi ghat rehndi hai.

Posted by Yuvraj Singh
Punjab
30-12-2022 09:50 PM
Yuvraj ji es sme tusi paneeri nu khet vich lga sakde ho jeakr tusi paneeri bijan di gal kr rhe ho tan tan tusi late ho . Paneri kise nursery to lai k khet vich lga skade ho

Posted by Shubham
Madhya Pradesh
30-12-2022 09:47 PM
शुभम जी, हमला cotyledonary पत्तों पर ही है, इसलिए आपको कोई चिड़काव करने की जरूरत नहीं है, इसका ज्यादा नुकसान नहीं होगा।

Posted by Siddappa patedar
Karnataka
30-12-2022 08:16 PM
सिद्दप्पा जी, भिंडी की खेती कई तरह की मिट्टी में की जा सकती है। भिंडी की खेती के लिए उचित मिट्टी रेतीली दोमट से मिट्टी दोमट है जिसमें पूरी मात्रा में कार्बनिक पदार्थ और बेहतर जल निकासी की सुविधा है। alkaline, saline मिट्टी में और खराब जल निकासी क्षमता वाली मिट्टी में फसल की खेती न करें। भिंडी की कुछ किस्में हैं - Parbhani Kranti.... (Read More)
सिद्दप्पा जी, भिंडी की खेती कई तरह की मिट्टी में की जा सकती है। भिंडी की खेती के लिए उचित मिट्टी रेतीली दोमट से मिट्टी दोमट है जिसमें पूरी मात्रा में कार्बनिक पदार्थ और बेहतर जल निकासी की सुविधा है। alkaline, saline मिट्टी में और खराब जल निकासी क्षमता वाली मिट्टी में फसल की खेती न करें। भिंडी की कुछ किस्में हैं - Parbhani Kranti, Punjab no.13, V.R.O 6,Kashi Mahima,Kashi Bhairav और पूसा सवानी। वर्षा ऋतु में इसकी बिजाई जून-जुलाई में की जाती है तथा बसंत ऋतु में इसकी खेती फरवरी-मार्च में की जाती है। कतार से कतार की दूरी 45 सेंटीमीटर और पौधे से पौधे की दूरी 15-20 सेंटीमीटर रखने की सलाह दी जाती है। बरसात के मौसम की फसल (जून-जुलाई) के लिए बीज दर 4-6 किलोग्राम/एकड़ की दर से शाखाओं वाली किस्मों के लिए 60x30 सेंटीमीटर और गैर-शाखा वाली किस्मों के लिए 45x30 सेंटीमीटर की दूरी के साथ प्रयोग किया जाता है। मध्य फरवरी तक बीज दर 15-18 किलोग्राम/एकड़ और मार्च में बुवाई के लिए बीज दर 4-6 किलोग्राम/एकड़ प्रयोग करें। यदि मिट्टी में उचित नमी नहीं है तो अच्छा अंकुरण पाने के लिए गर्मी के मौसम की फसल में बुवाई से पहले सिंचाई की जानी चाहिए। अगली सिंचाई बीज अंकुरण के बाद की जाती है। इसके बाद गर्मी में 4 से 5 दिन और बरसात में 10 से 12 दिन बाद खेत की सिंचाई की जाती है।

Posted by gurbhej singh
Punjab
30-12-2022 07:58 PM
Gurbhej ji kirpa krke ehh daso drenching pneumonia di smasia kis nu aa rhi hai ate usda temp. kina hai ate ki ki treatment ho chuka hai iss vare pure vistar nal dubara swal pusho tan jo tuhanu sahi jankari diti ja skee.

Posted by Yuvraj Singh
Punjab
30-12-2022 07:18 PM
Yuvraj ji ehna da rate puppy di changi nasal, changi growth de hisab nal hunda hai, baki ehna nu sale krn lai koi fix market nhi hai ehh tuhanu khudd hei ass pass link bnna ke sale krne penge, baki ehna da rate bhi alag alag hunda hai tuci pehla nazdiki dog farm ja jo dog sale krde ha ohna nal gal krke puppy dikhao ate ohna ton ehna de price da idea lao ate alag alag dog sale krn walia kol ja ke uthe puppy dekho ate rate pta kro jiss nal tuhanu iss kam di sahi jankari milegi ate ohna de sahi price di jankari bhi mill jawegi.

Posted by Lakhveer Singh Sidhu
Punjab
30-12-2022 07:00 PM
ਲਖਵੀਰ ਜੀ, ਨਰਮੇ ਦਾ ਭਾਅ 8900-9200 ਤੱਕ ਚੱਲ ਰਿਹਾ ਹੈ।

Posted by Abhishek saini
Uttar Pradesh
30-12-2022 06:48 PM
अभिषेक जी, पपीते के पौधे आप फरवरी मार्च या अगस्त सतंबर के महीने में लगा सकते है।

Posted by ASHOK VERMA
Uttar Pradesh
30-12-2022 03:51 PM
अशोक जी इसके लिए आप mancozeb 3 ग्राम को प्रति लीटर पानी के हिसाब से प्रयोग कर सकते हैं

Posted by harpreet singh
Punjab
30-12-2022 03:37 PM
Tuci iss nu Hitek injection 1ml/50kg bhar de hisab nal nazdiki doctor ton chamdi vich lgwao, iss nal frak paa jawega.
Posted by Cheema
Punjab
30-12-2022 03:13 PM
ਤੁਸੀ ਇਸ ਨੂੰ serakind plus bolus ਰੋਜਾਨਾ 1 ਗੋਲੀ ਦਿਓ ਅਤੇ ਇਸਦੇ ਉਪਰ Coolmac tube ਜਾ macroworm tube ਦਾ ਲੇਪ ਕਰਕੇ ਉਪਰ ਗਰਮ ਪੱਟੀ ਬੰਨਣੀ ਸ਼ੁਰੂ ਕਰੋ ਅਤੇ 2-2 ਦਿਨ ਬਾਦ ਪੱਟੀ ਬਦਲੋ ਅਤੇ ਇਸ ਨੂੰ ਪੋਲੀ ਮਿੱਟੀ ਵਾਲੀ ਜਗ੍ਹਾ ਹੀ ਰੱਖੋ..
Posted by Cheema
Punjab
30-12-2022 02:17 PM
ਗੁਰਦੇਵ ਜੀ, ਕਿਰਪਾ ਇਹ ਦਸੋ ਕਿੰਨੇ ਪੌਧਿਆਂ ਵਿਚ ਇਹ ਦਿੱਕਤ ਆ ਰਹੀ ਹੈ, ਕਿਉੰਕਿ ਕਈ ਵਾਰ ਏਦਾਂ ਘਾਟ ਤਾਪਮਾਨ ਜਾ ਕੋਰੇ ਕਰ ਕੇ ਵੀ ਹੋ ਜਾਂਦਾ ਹੈ।
Posted by Adv.Gurwinder Singh
Punjab
30-12-2022 01:31 PM
ਗੁਰਵਿੰਦਰ ਜੀ, ਜਵਾਰ ਤੁਸੀਂ ਨਦੀਨ ਦੀ ਰੋਕਥਾਮ ਬਾਰੇ ਪੁੱਛ ਰਹੇ ਹੋ ਤਾਂ ਤੁਸੀਂ atlantis ਦਵਾਈ 160 ਗ੍ਰਾਮ ਪ੍ਰਤੀ ਏਕੜ ਦੇ ਹਿਸਾਬ ਨਾਲ ਵਰਤ ਸਕਦੇ ਹੋ।

Posted by Indro
Haryana
30-12-2022 12:52 PM
कृप्या आप यह बताएं कि यह कितनी दिनों के बाद हीट में आ जाती है और आपने इसका क्या क्या इलाज करवाया है आप दोबारा विस्तार से सवाल पूछें ताकि आपको सही जानकारी दी जा सके।

Posted by Ajay kumar singh
Uttar Pradesh
30-12-2022 12:50 PM
Bakri palan ki suruat mai aap 10 bakrio aur 2 bakro ko rakh skte hai ek bakri ke liye cover area 12-15 sq. feet aur open area 25-30 sq.feet ki jrurat hoti hai baki alag alag breed ke hisab nal bakrio ka rate alag hota hai jaise beetal goat 20-25000 tak mill jatti hai aur Sirohi ja aur goat 13-15000 tak v mill jatti hai lekin aap iss kam ko suru krne se pehle nazdiki krishi vigyan kendra se training bhi jrur len jisme apke area ke hisab se breed ki jankari bhi milegi aur inki vaccination ki bhi sari jankari milegi. iske ilawa aap her breed ki jankari ke liye iss App ke pashu palan wale section mein jakar waha se jankari padd skte hai.

Posted by Veerpal Singh
Punjab
30-12-2022 12:47 PM
Veerpal ji kanak vich magnesium di Kami nahi aundi es vich mangneese di Kami hi aundi hai jeakr tuhadi fasal da vadha sahi ni ho rea tan tusi mangneese are zinc nu mix kr k spray kr skde ho
Posted by Sanjay Kumar
Uttar Pradesh
30-12-2022 11:51 AM
Snajay ji aap urea khaad paani Dene se 1-2 din pehle bhi de skte hai ya paani lgaane ke baad bhi aap urea khaad de sakte hai.

Posted by Kartik Kumar das
Jharkhand
30-12-2022 11:11 AM
सर अगर आप चूजे खरीदना चाहते हैं तो कृपया इस नंबर पर संपर्क करें 9534422915 अनुज कुमार मेहता, एस.के. पोल्ट्री फीड और चिक्स सेंटर।
Posted by sukhpinder singh bhullar
Punjab
30-12-2022 10:49 AM
ਸੁਖਪਿੰਦਰ ਜੀ, PBN233 ਬਾਜਰੇ ਦਾ ਬੀਜ ਤੁਹਾਨੂੰ ਸਾਉਣੀ ਕਿਸਾਨ ਮੇਲੇ ਤੇ PAU ਲੁਧਿਆਣਾ ਤੋਂ ਮਿਲ ਜਾਵੇਗਾ ਜੀ।
Posted by ਗੁਰਪਿਆਰ ਸਿੰਘ
Punjab
30-12-2022 09:35 AM
ਗੁਰਪਿਆਰ ਜੀ ਕਿਰਪਾ ਕਰਕੇ ਇਹ ਦੱਸੋ ਤੁਸੀ ਪਸ਼ੂਆਂ ਵਾਲੇ ਫਾਰਮ ਵਾਰੇ ਪੁੱਛ ਰਹੇ ਹੋ ਜਾ ਕੋਈ ਖੇਤੀਬਾੜੀ ਦੇ ਕੰਮ ਲਈ ਫਾਰਮ ਤਿਆਰ ਕਰਨਾ ਹੈ, ਤੁਸੀ ਵਿਸਤਾਰ ਨਾਲ ਸਵਾਲ ਪੁੱਛੋਂ ਤਾਂ ਜੋ ਤੁਹਾਨੂੰ ਸਹੀ ਜਾਣਕਾਰੀ ਦਿਤੀ ਜਾ ਸਕੇ

Posted by Bikramjeet singh
Punjab
30-12-2022 09:26 AM
आप उसे नजदीकी डॉक्टर से जाँच करवाएं क्योंकि उसकी जाँच करके सही इलाज हो सकता है ।

Posted by Mallikarjun Madditot
Karnataka
30-12-2022 08:45 AM
मल्लिकार्जुन जी, हमारी टीम इस पर काम कर रही है, हम जल्द ही इस फसल को जोड़ेंगे।

Posted by sukhchain
Punjab
30-12-2022 08:44 AM
Sukhchain ji, jau di fasl vich kise vi nadeenashk dwaai di sifarish nahi kiti jandi.

Posted by gurmanjot singh
Punjab
30-12-2022 08:34 AM
Gurmanjot ji, chnga utpadan lain lai gobhi di paneeri hi laoni chahidi hai ji.
Posted by Dhanveer singh Benipal
Punjab
30-12-2022 08:25 AM
Dhaanveer ji, tusi Shagun 21-11 @ 200 ml ate ACM 9 @240 ml/acre de hisaab naal kise vi ik dwaai di spray kar sakde ho ji ate ih dwaaian bareek ate chaudi Patti vaale dohe nadeena di rokthaam hi kardian han, is lai tuhanu is de vich koi broad leaf vaali dwaai alag to paon di lod nhi hai ji.

Posted by ਸੁਨੀਲ ਕੁਮਾਰ
Punjab
29-12-2022 11:09 PM
ਸੁਨੀਲ ਜੀ, ਵੈਸੇ ਤਾਂ ਜਿਨ੍ਹਾਂ ਉਹ ਆਸਾਨੀ ਨਾਲ ਖਾਵੇ ਅਤੇ ਹਜ਼ਮ ਕਰ ਜਾਵੇ ਉਸ ਹਿਸਾਬ ਨਾਲ ਖਾਣ ਲਈ ਦਿਓ ਪਰ ਇਹ ਲਗਭਗ 110 ਤੋਂ 120 ਗ੍ਰਾਮ ਦਾਣਾ ਖਾ ਲੈਂਦੀਆਂ ਹੈ।

Posted by Priyanshu Bharti
Bihar
29-12-2022 10:12 PM
यदि यह ऐसा घना डिस्चार्ज कर रही है तो इसको आप pregstay gold पाउडर 30 ग्राम रोजाना 20 दिन तक देना शुरू करे।

Posted by S. K. Maurya
Uttar Pradesh
29-12-2022 07:55 PM
Maurya ji ganna ki bijayi ka sahi samay february se march ke beech ka hai. Khet ko achi trah se 2 bar buvayi kare ayr mitti ko bhurbura kare. Iski varieties jaise- CoS 687, CoS 8436, CoS 88230, CoS 95435, CoS 91232, Co 1148, CoS 767, BO 91, CoSe 96234, CoSe 96436, Co-98014 (Karan-1), Co-pant 97222, Colk-94184(Birendra), Co-0233 (Kamal), Co-0233 hai. Iski bijayi kahi tareko se ki ja sakti hai jaise -Dry planting in ridges and furrow ,Paired row planting, Ring Pit method, Single budded set planting hai. Patankiyo ke beech me fasal 60-120cm hona chahiye. Ganne ka beej 3 akho vali 20,000 gullian prati acre me bijayi ke liye kafi hai. Ganne ki fasal ko 200kg urea ki jrurat hoti hai aur baki ke fertilizers mitti ki test ke hisab se dale. Yeh 1 sal ki fasal hai. Fasal me jada growth ke liye Mycor.... (Read More)
Maurya ji ganna ki bijayi ka sahi samay february se march ke beech ka hai. Khet ko achi trah se 2 bar buvayi kare ayr mitti ko bhurbura kare. Iski varieties jaise- CoS 687, CoS 8436, CoS 88230, CoS 95435, CoS 91232, Co 1148, CoS 767, BO 91, CoSe 96234, CoSe 96436, Co-98014 (Karan-1), Co-pant 97222, Colk-94184(Birendra), Co-0233 (Kamal), Co-0233 hai. Iski bijayi kahi tareko se ki ja sakti hai jaise -Dry planting in ridges and furrow ,Paired row planting, Ring Pit method, Single budded set planting hai. Patankiyo ke beech me fasal 60-120cm hona chahiye. Ganne ka beej 3 akho vali 20,000 gullian prati acre me bijayi ke liye kafi hai. Ganne ki fasal ko 200kg urea ki jrurat hoti hai aur baki ke fertilizers mitti ki test ke hisab se dale. Yeh 1 sal ki fasal hai. Fasal me jada growth ke liye Mycorrhiza ka upyog kar sakte hai.

Posted by Sukhchain singh
Chandigarh
29-12-2022 07:54 PM
Tuci uss nu Lactomax tablet 10 golia rojana, Galactin bolus 2-2 swere sham deo ate uss nu lactomood homeopathic dwai dia 10-10 drops din vich 3 varr deo ate uss nu vdhia hara chara jrur deo ate mousam de hisab nal usde rehn sehn da purra dian rakho.

Posted by S. K. Maurya
Uttar Pradesh
29-12-2022 07:53 PM
श्रीमान जी, गन्ने की खेती के लिए अच्छे जल निकास वाली गहरी, दोमट मिट्टी, जिसमें भूजल का स्तर ज़मीन से 1.5-2 मी. के नीचे हो और अच्छी जल धारण क्षमता वाली वाली ज़मीन गन्ने की खेती के लिए लाभदायक है। यह फसल काफी अम्लीय और खारेपन को सहन कर सकती है। इसलिए इसे मिट्टी जिसकी पी एच 5 से 8.5 हो, में उगाई जा सकती है। यदि मिट्टी का पी ए.... (Read More)
श्रीमान जी, गन्ने की खेती के लिए अच्छे जल निकास वाली गहरी, दोमट मिट्टी, जिसमें भूजल का स्तर ज़मीन से 1.5-2 मी. के नीचे हो और अच्छी जल धारण क्षमता वाली वाली ज़मीन गन्ने की खेती के लिए लाभदायक है। यह फसल काफी अम्लीय और खारेपन को सहन कर सकती है। इसलिए इसे मिट्टी जिसकी पी एच 5 से 8.5 हो, में उगाई जा सकती है। यदि मिट्टी का पी एच 5 से कम हो तो इसमें चूना (कली) डालें और यदि मिट्टी का पी एच 9.5 से ज्यादा हो तो इसमें जिप्सम डालें। खेत की दो बार जोताई करें। पहली जोताई 20-25 सैं.मी. होनी चाहिए। इसकी किस्मे जैसे Co 0118, Co 0232, Co 0237, Co 0238, Co 0239, CoSe 01421, Co 05009, CoPK 05191, Co 89029, CoLk 94184 और CoS 95255 है। कंकड़ों को मशीनी ढंग से अच्छी तरह तोड़कर समतल कर दें। ट्रैक्टर वाली मेंड़ बनाने वाली मशीन की मदद से मेंड़ और खालियां बनाएं और इन मेड़ और खालियों में बिजाई करें। मेड़ में 90 सैं.मी. का फासला होना चाहिए। गन्ने की गुलियों को मिट्टी में दबाएं और हल्की सिंचाई करें। खेत में 150 सैं.मी. के फासले पर खालियां बनाएं और उनमें 30-60-90 सैं.मी. के फासले पर बिजाई करें। इस तरीके से मेड़ वाली बिजाई से अधिक पैदावार मिलती है।फरवरी से मार्च गन्ने की रोपाई के लिए सबसे उपयुक्त समय है।बिजाई के लिए सुधरे ढंग जैसे कि गहरी खालियां, मेंड़ बनाकर,पंक्तियों में जोड़े बनाकर और गड्ढा खोदकर बिजाई की जाती है।अलग-अलग तजुर्बों से यह सिद्ध हुआ है कि 3 आंख वाली गुलियों का जमाव अधिक होता है जब कि एक आंख वाली गुली अच्छी नहीं जमती क्योंकि दोनों ओर काटने के कारण गुली में पानी की कमी हो जाती है और ज्यादा आंखों वाली गुलियां बीजने से भी अधिक जमाव नहीं मिलता।दो आंख वाली गुलियां 35000 और तीन आंख वाली गुलियां 23000 प्रति एकड़ में प्रयोग करें। दूसरे शब्दों में 35-40 क्विंटल बीज प्रति एकड़ में प्रयोग करें।बीज 6-7 महीनों की फसल पर लगाएं जो कि कीड़ों और बीमारियों से रहित हो। बिमारी और कीड़े वाले गन्ने और आंखों को ना चुनें। बीज वाली फसल से बिजाई से एक दिन पहले काटें इससे फसल अच्छा जमाव देती है। गुलियों को कार्बेनडाज़िम 1 ग्राम प्रति लीटर पानी में भिगो दें। रसायनों के बाद गुलियों को एज़ोस्पिरिलम के साथ उपचार करें। इससे गुलियों को एज़ोस्पिरिलम 800 ग्राम प्रति एकड़ पानी में बिजाई से पहले 15 मिनट के लिए रखें। मिट्टी के उपचार के लिए जीवाणु खाद और रूड़ी का प्रयोग करना चाहिए। इसलिए 5 किलो जीवाणु खाद को 10 लीटर पानी में घोलकर मिश्रण तैयार कर लें। इस मिश्रित घोल को 80-100 किलो रूड़ी में मिलाके घोल तैयार कर लें। इस घोल को मेंड़ पर बीजे गन्ने की गुलियों पर छिड़कें। इसके बाद मेंड़ को मिट्टी से ढक दें।नाइट्रोजन 60-90 किलो (यूरिया 135-200 किलो) और फासफोरस 20 किलो (एस एस पी 125 किलो) प्रति एकड़ में डालें। फासफोरस की पूरी मात्रा और नाइट्रोजन की 1/3 मात्रा बिजाई के समय डालें। बाकी बची नाइट्रोजन को दूसरी और चौथी सिंचाई के समय डालें।सर्दियों के मौसम में तापमान कम होने के कारण फसल तत्व ज्यादा लेती है जिस कारण मौधा पीला पड़ जाता है इसकी रोकथाम के लिए N:P:K 19:19:19 की स्प्रे 100 ग्राम 150 लीटर पानी में मिलाकर प्रति एकड़ के लिए प्रयोग करें। जिन इलाकों में पानी की कमी है वहां यूरिया+पोटाश का प्रयोग 2.5 किलोग्राम को 100 लीटर पानी में मिलाकर करें।सिंचाई की संख्या मिट्टी की किस्म, पानी की उपलब्धता आदि पर निर्भर करती है। गर्म मौसम में शुष्क हवा और सूखा फसल में पानी की आवश्यकता को बढ़ा देता है।फसल के 20-25 प्रतिशत अंकुरण होने पर पहली सिंचाई करें। मॉनसून में बारिश की तीव्रता और नियमितता के आधार पर सिंचाई करें। कम बारिश होने पर 10 दिनों के अंतराल पर सिंचाई करें। उसके बाद सिंचाई की संख्या बढ़ा दें। दूसरे शब्दों में 20-25 दिनों के अंतराल पर सिंचाई करें। मिट्टी में नमी को बनाए रखने के लिए गन्ने की कतारों के बीच मलचिंग करें। अप्रैल से जून में पानी की कमी ना होने दें। इन दिनों में पानी की कमी उपज को कम करती है। खेत में पानी ना खड़ा होने दें। शाखाएं निकलने और विकास होने की अवस्थाएं सिंचाई के लिए गंभीर होती हैं। ज्यादा पैदावार और चीनी प्राप्त करने के लिए गन्ने की सही समय पर कटाई जरूरी है। समय से पहले या बाद में कटाई करने से पैदावार पर प्रभाव पड़ता है। गेहूं की खेती के लिए चिकनी दोमट या दोमट बनतर, अच्छे ढांचे और पानी सोखने की सामान्य क्षमता वाली मिट्टी उचित होती है। छिद्रित और पानी कम सोखने वाली मिट्टी गेहूं की खेती के लिए उपयुक्त नहीं होती। सूखे हालातों, अच्छे जल निकास वाली भारी मिट्टी इसकी खेती के लिए अनुकूल होती है। भारी मिट्टी जिसका घटिया ढांचा और घटिया जल निकास हो इसकी खेती के लिए उपयुक्त नहीं होती क्योंकि गेहूं की फसल जल जमाव के प्रति संवेदनशील होती है।इसकी किस्में जैसे - DBW 222, DBW 187, WH 896, Unnat PBW 343, UP 2425, DBW-14, MACS-6145, Ujiar(K-9006), Ujiar(K-9006), Prasad (K-8434), Gangotri(K-9162) आदि है। गेहूं की फसल को अच्छे अंकुरन के लिए अच्छी तरह से तैयार, पर ठोस बीज बैड की आवश्यकता होती है। पिछली फसल की कटाई के बाद खेत की अच्छे तरीके से ट्रैक्टर की मदद से जोताई की जानी चाहिए। खेत को आमतौर पर ट्रैक्टर के साथ तवियां जोड़कर जोता जाता है और उसके बाद दो या तीन बार हल या सुहागे से जोता जाता है। खेत की जोताई शाम के समय की जानी चाहिए और रोपाई की गई ज़मीन को पूरी रात खुला छोड़ देना चाहिए ताकि वह ओस की बूंदों से नमी सोख सके। प्रत्येक जोताई के बाद सुहागा फेरना चाहिए। सिंचित और सामान्य बिजाई का उचित समय 1 नवंबर से 15 नवंबर तक है, जबकि पिछेती बिजाई के लिए 1 से 20 दिसंबर का समय उचित है।छोटे आकार की किस्मों के लिए 40 किलो बीज प्रति एकड़ में प्रयोग करें और मोटे किस्म के बीजों के लिए 50 किलो बीज प्रति एकड़ में प्रयोग करें। बिजाई से पहले बीज साफ और छांटे हुए होने चाहिए।सिंचित क्षेत्रों के लिए, नाइट्रोजन 60 किलो (यूरिया 130 किलो), फासफोरस 24 किलो (एस एस पी 150 किलो), पोटाश 12 किलो (म्यूरेट ऑफ पोटाश 20 किलो) प्रति एकड़ में डालें। नाइट्रोजन की आधी मात्रा और फासफोरस और पोटाश की पूरी मात्रा बिजाई के समय डालें। बाकी नाइट्रोजन को पहली सिंचाई के समय डालें।सिंचित क्षेत्रों में पिछेती बिजाई के लिए, नाइट्रोजन 50 किलो (यूरिया 110 किलो), फासफोरस 12 किलो (एस एस पी 75 किलो), पोटाश 16 किलो (म्यूरेट ऑफ पोटाश 27 किलो) प्रति एकड़ में डालें। नाइट्रोजन की एक तिहाई मात्रा और फासफोरस और पोटाश की पूरी मात्रा बिजाई के समय डालें। बाकी बची नाइट्रोजन की दो तिहाई मात्रा बिजाई के 35-40 दिनों के बाद डालें।सिंचाई की संख्या, पानी की उपलब्धता मिट्टी की किस्म पर पर निर्भर करती है। जड़ें बनने के समय और बालियां बनने के समय नमी का होना जरूरी है। छोटे कद वाली किस्मों और अच्छी पैदावार के लिए बिजाई से पहले सिंचाई करें। गेहूं की फसल के लिए चार से छः सिंचाईयां बहुत होती हैं। बिजाई के 20-25 दिनों के बाद पहली सिंचाई देनी चाहिए। जड़ें बनने के समय पर नमी का होना पैदावार को कम होने से बचाता है। ठंडे क्षेत्रों में जैसे पहाड़ी क्षेत्रों और जहां पर गेहूं की पिछेती बिजाई की जाती है। वहां पर बिजाई के लगभग 25-30 दिनों के बाद पहली सिंचाई करें। बिजाई के 40-45 दिनों के बाद पौधा बनने के समय दूसरी सिंचाई करें। तीसरी सिंचाई 70-75 दिनों के बाद नोड्स बनने के समय करें। फूल निकलने के समय चौथी सिंचाई 90-95 दिनों में करें। पांचवी सिंचाई बिजाई के 110-115 दिनों के बाद करें जब दाने अपरिपक्व होते हैं।उच्च पैदावार वाली फसलों की किस्मों की कटाई पत्तों और तने के पीले पड़ने और सूखने के बाद की जाती है। हानि से बचने के लिए फसल की कटाई इसके पके हुए पौधों के सूखने से पहले की जानी चाहिए। ग्राहक की तरफ से इसे स्वीकारने और इसकी अच्छी गुण्वत्ता के लिए इसको सही समय पर काटना चाहिए। जब दानों में 25-30 प्रतिशत नमी रह जाती है तो यह इसे काटने का सही समय होता है।

Posted by NARINDER Singh
Punjab
29-12-2022 07:37 PM
ਨਰਿੰਦਰ ਜੀ, ਇਹ ਫਲ ਦੀ ਮਖੀ ਦੇ ਹਮਲੇ ਕਰ ਕੇ ਹੁੰਦਾ ਹੈ। ਏਸਦੇ ਲਈ ਤੁਸੀਂ fruit fly trap 16 ਪ੍ਰਤੀ ਏਕੜ ਦੇ ਹਿਸਾਬ ਨਾਲ ਵਰਤ ਸਕਦੇ ਹੋ।

Posted by Arvind rathore
Rajasthan
29-12-2022 06:57 PM
Arbind ji kirpya yeh btaye ki apne isko konsi khad kitni matra mein daali hai us hisab se hi apko sahi jankari di ja sakti hai
Posted by jagseer
Punjab
29-12-2022 06:06 PM
ਜਗਸੀਰ ਜੀ, ਇਹ ਕਿਸੇ ਬਿਮਾਰੀ ਦਾ ਹਮਲਾ ਤਾਂ ਨਹੀ ਹੈ, ਇਹ ਕਿਸੇ ਤੱਤ ਦੀ ਕਮੀ ਕਾਰਨ ਹੋ ਸਕਦਾ ਹੈ, ਤੁਸੀ ਕਿਰਪਾ ਕਰਕੇ ਇਹ ਦੱਸੋ ਕਿ ਫ਼ਸਲ ਨੂੰ ਕਿਹੜੀ ਕਿਹੜੀ ਖਾਦ ਕਿੰਨੀ ਮਾਤਰਾ ਵਿਚ ਦੇ ਚੁੱਕੇ ਹੋ, ਉਸ ਹਿਸਾਬ ਨਾਲ ਹੀ ਤੁਹਾਨੂੰ ਇਸ ਬਾਰੇ ਸਹੀ ਜਾਣਕਾਰੀ ਦਿੱਤੀ ਜਾ ਸਕੇਗੀ।
Posted by jagseer
Punjab
29-12-2022 06:03 PM
ਜਗਸੀਰ ਜੀ, ਇਹ ਕਿਸੇ ਬਿਮਾਰੀ ਦਾ ਹਮਲਾ ਤਾਂ ਨਹੀ ਹੈ, ਇਹ ਕਿਸੇ ਤੱਤ ਦੀ ਕਮੀ ਕਾਰਨ ਹੋ ਸਕਦਾ ਹੈ, ਤੁਸੀ ਕਿਰਪਾ ਕਰਕੇ ਇਹ ਦੱਸੋ ਕਿ ਫ਼ਸਲ ਨੂੰ ਕਿਹੜੀ ਕਿਹੜੀ ਖਾਦ ਕਿੰਨੀ ਮਾਤਰਾ ਵਿਚ ਦੇ ਚੁੱਕੇ ਹੋ, ਉਸ ਹਿਸਾਬ ਨਾਲ ਹੀ ਤੁਹਾਨੂੰ ਇਸ ਬਾਰੇ ਸਹੀ ਜਾਣਕਾਰੀ ਦਿੱਤੀ ਜਾ ਸਕੇਗੀ।
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