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Posted by संदीप सहारण
Rajasthan
08-10-2019 02:48 PM
Punjab
11-22-2019 04:32 PM
श्रीमान जी, क्षारीय क्षेत्रों में गेहूं की किस्मे जैसे के Raj 3077, K.R.L 1-4 और WH 157 जैसी किस्मों का प्रयोग करें, ये अच्छी उपज देती हैं सरसों के लिए RH 30 किस्म की बिजाई कर सकते है, धन्यवाद
Posted by Arjun
Uttar Pradesh
08-10-2019 02:45 PM
Maharashtra
10-09-2019 11:36 AM
अर्जुन जी आप इसकी किस्मे जैसे Narendra Ageti Rai 4: यह यू पी के सभी क्षेत्रों में खेती करने के लिए उपयुक्त है यह किस्म 95-100 दिनों में कटाई के लिए तैयार हो जाती है इसकी औसतन पैदावार 6-8 क्विंटल प्रति एकड़ होती है Varuna (T 59): यह यू पी के मैदानी क्षेत्रों में खेती करने के लिए उपयुक्त है यह किस्म 125-130 दिनों में कटाई के लिए तैयार हो जाती ह.... (Read More)
अर्जुन जी आप इसकी किस्मे जैसे Narendra Ageti Rai 4: यह यू पी के सभी क्षेत्रों में खेती करने के लिए उपयुक्त है यह किस्म 95-100 दिनों में कटाई के लिए तैयार हो जाती है इसकी औसतन पैदावार 6-8 क्विंटल प्रति एकड़ होती है Varuna (T 59): यह यू पी के मैदानी क्षेत्रों में खेती करने के लिए उपयुक्त है यह किस्म 125-130 दिनों में कटाई के लिए तैयार हो जाती है इसकी औसतन पैदावार 8-10 क्विंटल प्रति एकड़ होती है Vasanti: यह यू पी के मैदानी क्षेत्रों में खेती करने के लिए उपयुक्त है यह किस्म 130-135 दिनों में कटाई के लिए तैयार हो जाती है इसकी औसतन पैदावार 10-11 क्विंटल प्रति एकड़ होती है Rohini: यह यू पी के सभी क्षेत्रों में खेती करने के लिए उपयुक्त है यह किस्म 130-135 दिनों में कटाई के लिए तैयार हो जाती है इसकी औसतन पैदावार 9-11 क्विंटल प्रति एकड़ होती है Maya: यह यू पी के सभी क्षेत्रों में खेती करने के लिए उपयुक्त है यह किस्म 130-135 दिनों में कटाई के लिए तैयार हो जाती है इसकी औसतन पैदावार 10-11 क्विंटल प्रति एकड़ होती है Urvashi: यह यू पी के सभी क्षेत्रों में खेती करने के लिए उपयुक्त है यह किस्म 125-130 दिनों में कटाई के लिए तैयार हो जाती है इसकी औसतन पैदावार 8-10 क्विंटल प्रति एकड़ होती है Narendra Swarna Rai 8: यह यू पी के सभी क्षेत्रों में खेती करने के लिए उपयुक्त है यह किस्म 130-135 दिनों में कटाई के लिए तैयार हो जाती है इसकी औसतन पैदावार 8-10 क्विंटल प्रति एकड़ होती है Narendra Rai: यह यू पी के सभी क्षेत्रों में खेती करने के लिए उपयुक्त है यह किस्म 125-130 दिनों में कटाई के लिए तैयार हो जाती है इसकी औसतन पैदावार 10-12 क्विंटल प्रति एकड़ होती है
Posted by Saraj Singh
Punjab
08-10-2019 02:42 PM
Punjab
10-09-2019 10:54 AM
saraj ji tuc isde uper NPK 191919 @1 kilo nu 150 litre pani vich mila ke prati acre de hisab nal spray kar sakde ho.dhanwad
Posted by parveen kainth
Punjab
08-10-2019 02:36 PM
Punjab
10-12-2019 08:26 PM
Parveen ji majhh da bhukar kina rehnda hai uss nu ki ki smasia aa rehi hai kirpe krke iss vare vistar nal swal pusho tan jo tuhanu sahi jankari diti ja skee..
Posted by BHERU LAL GURJAR
Rajasthan
08-10-2019 02:33 PM
Punjab
10-09-2019 11:34 AM
भेरू जी आप इसके ऊपर manganese sulphate @1 किलो को 150 लीटर पानी के हिसाब से स्प्रे करें इस से फसल में हरापन आ जायेगा धन्यवाद
Posted by BHERU LAL GURJAR
Rajasthan
08-10-2019 02:33 PM
Punjab
10-09-2019 11:21 AM
Aashirwad (RK 01-03): यह किस्म पिछेती बिजाई के लिए उपयुक्त है पौधे का कद 130-140 सैं.मी. होता है इसमें तेल की मात्रा 39-42 प्रतिशत होती है यह किस्म 120-130 दिनों में कटाई के लिए तैयार हो जाती है इसकी औसतन पैदावार 5-6 क्विंटल प्रति एकड़ होती है Swarn Jyoti (RH 9801): यह किस्म सिंचित क्षेत्रों और पिछेती बिजाई के लिए उपयुक्त है पौधे का कद 130-140 सैं.मी. हो.... (Read More)
Aashirwad (RK 01-03): यह किस्म पिछेती बिजाई के लिए उपयुक्त है पौधे का कद 130-140 सैं.मी. होता है इसमें तेल की मात्रा 39-42 प्रतिशत होती है यह किस्म 120-130 दिनों में कटाई के लिए तैयार हो जाती है इसकी औसतन पैदावार 5-6 क्विंटल प्रति एकड़ होती है Swarn Jyoti (RH 9801): यह किस्म सिंचित क्षेत्रों और पिछेती बिजाई के लिए उपयुक्त है पौधे का कद 130-140 सैं.मी. होता है यह किस्म 130-140 दिनों में कटाई के लिए तैयार हो जाती है इसमें तेल की मात्रा 39-42 प्रतिशत होती है इसकी औसतन पैदावार 5-6 क्विंटल प्रति एकड़ होती है RGN 73: यह किस्म सिंचित क्षेत्रों और सामान्य बिजाई के लिए उपयुक्त है पौधे का कद 160-170 सैं.मी. होता है इसमें तेल की मात्रा 40-41 प्रतिशत होती है यह किस्म 125-130 दिनों में कटाई के लिए तैयार हो जाती है इसकी औसतन पैदावार 8.8-10 क्विंटल प्रति एकड़ होती है Lakshmi (RH 8812): यह किस्म सिंचित क्षेत्रों और सामान्य बिजाई के लिए उपयुक्त है पौधे का कद 160-180 सैं.मी. होता है यह किस्म 140-145 दिनों में कटाई के लिए तैयार हो जाती है इसके दाने बड़े और काले रंग के होते हैं इसमें तेल की मात्रा 40 प्रतिशत होती है इसकी औसतन पैदावार 8.8-10 क्विंटल प्रति एकड़ होती है VSL 5: यह किस्म सिंचित क्षेत्रों और सामान्य बिजाई के लिए उपयुक्त है पौधे का कद 165-170 सैं.मी. होता है यह किस्म 125-130 दिनों में कटाई के लिए तैयार हो जाती है इसके दाने मध्यम और काले रंग के होते हैं इसमें तेल की मात्रा 39-40 प्रतिशत होती है इसकी औसतन पैदावार 8-8.8 क्विंटल प्रति एकड़ होती है Aravali (RN 393): पौधे का कद 155-165 सैं.मी. होता है यह किस्म 135-138 दिनों में कटाई के लिए तैयार हो जाती है इसमें तेल की मात्रा 42 प्रतिशत होती है इसकी औसतन पैदावार 8.8-10 क्विंटल प्रति एकड़ होती है Vansudhara (RH 9304): यह किस्म सिंचित क्षेत्रों और समय पर बोने के लिए उपयुक्त है इसके पौधे का कद 180-190 सैं.मी. होता है यह 130-135 दिनों में कटाई के लिए तैयार हो जाती है इसकी औसतन पैदावार 10-11 क्विंटल प्रति एकड़ होती है
Posted by BHERU LAL GURJAR
Rajasthan
08-10-2019 02:32 PM
Maharashtra
10-09-2019 11:18 AM
Aashirwad (RK 01-03): यह किस्म पिछेती बिजाई के लिए उपयुक्त है पौधे का कद 130-140 सैं.मी. होता है इसमें तेल की मात्रा 39-42 प्रतिशत होती है यह किस्म 120-130 दिनों में कटाई के लिए तैयार हो जाती है इसकी औसतन पैदावार 5-6 क्विंटल प्रति एकड़ होती है Swarn Jyoti (RH 9801): यह किस्म सिंचित क्षेत्रों और पिछेती बिजाई के लिए उपयुक्त है पौधे का कद 130-140 सैं.मी. हो.... (Read More)
Aashirwad (RK 01-03): यह किस्म पिछेती बिजाई के लिए उपयुक्त है पौधे का कद 130-140 सैं.मी. होता है इसमें तेल की मात्रा 39-42 प्रतिशत होती है यह किस्म 120-130 दिनों में कटाई के लिए तैयार हो जाती है इसकी औसतन पैदावार 5-6 क्विंटल प्रति एकड़ होती है Swarn Jyoti (RH 9801): यह किस्म सिंचित क्षेत्रों और पिछेती बिजाई के लिए उपयुक्त है पौधे का कद 130-140 सैं.मी. होता है यह किस्म 130-140 दिनों में कटाई के लिए तैयार हो जाती है इसमें तेल की मात्रा 39-42 प्रतिशत होती है इसकी औसतन पैदावार 5-6 क्विंटल प्रति एकड़ होती है RGN 73: यह किस्म सिंचित क्षेत्रों और सामान्य बिजाई के लिए उपयुक्त है पौधे का कद 160-170 सैं.मी. होता है इसमें तेल की मात्रा 40-41 प्रतिशत होती है यह किस्म 125-130 दिनों में कटाई के लिए तैयार हो जाती है इसकी औसतन पैदावार 8.8-10 क्विंटल प्रति एकड़ होती है Lakshmi (RH 8812): यह किस्म सिंचित क्षेत्रों और सामान्य बिजाई के लिए उपयुक्त है पौधे का कद 160-180 सैं.मी. होता है यह किस्म 140-145 दिनों में कटाई के लिए तैयार हो जाती है इसके दाने बड़े और काले रंग के होते हैं इसमें तेल की मात्रा 40 प्रतिशत होती है इसकी औसतन पैदावार 8.8-10 क्विंटल प्रति एकड़ होती है VSL 5: यह किस्म सिंचित क्षेत्रों और सामान्य बिजाई के लिए उपयुक्त है पौधे का कद 165-170 सैं.मी. होता है यह किस्म 125-130 दिनों में कटाई के लिए तैयार हो जाती है इसके दाने मध्यम और काले रंग के होते हैं इसमें तेल की मात्रा 39-40 प्रतिशत होती है इसकी औसतन पैदावार 8-8.8 क्विंटल प्रति एकड़ होती है Aravali (RN 393): पौधे का कद 155-165 सैं.मी. होता है यह किस्म 135-138 दिनों में कटाई के लिए तैयार हो जाती है इसमें तेल की मात्रा 42 प्रतिशत होती है इसकी औसतन पैदावार 8.8-10 क्विंटल प्रति एकड़ होती है Vansudhara (RH 9304): यह किस्म सिंचित क्षेत्रों और समय पर बोने के लिए उपयुक्त है इसके पौधे का कद 180-190 सैं.मी. होता है यह 130-135 दिनों में कटाई के लिए तैयार हो जाती है इसकी औसतन पैदावार 10-11 क्विंटल प्रति एकड़ होती है
Posted by BHERU LAL GURJAR
Rajasthan
08-10-2019 02:32 PM
Maharashtra
10-09-2019 11:15 AM
भेरू जी यह तत्व की कमी को पूरा करती है और फसल की ग्रोथ अच्छी करवाती है धन्यवाद
Posted by shri krishna mishra
Uttar Pradesh
08-10-2019 02:28 PM
Rajasthan
10-08-2019 02:30 PM
मोती की खेती एक बहुत ही अच्छा व्यवसाय है इस व्यवसाय को शुरू करने के लिए सबसे जरुरी है इसकी ट्रेनिंग, क्योकि इसमें बहुत सी ऐसी बारीकियें होती है जो हमें प्रेक्टिकल ट्रेनिंग में ही सीखने को मिलती है अगर आप इसकी ट्रेनिंग लेना चाहते है तो आप ग्लिटराटी पर्ल फार्मिंग ट्रेनिंग केंद्र प्रशिक्षण कार्य कर्म आयोजि.... (Read More)
मोती की खेती एक बहुत ही अच्छा व्यवसाय है इस व्यवसाय को शुरू करने के लिए सबसे जरुरी है इसकी ट्रेनिंग, क्योकि इसमें बहुत सी ऐसी बारीकियें होती है जो हमें प्रेक्टिकल ट्रेनिंग में ही सीखने को मिलती है अगर आप इसकी ट्रेनिंग लेना चाहते है तो आप ग्लिटराटी पर्ल फार्मिंग ट्रेनिंग केंद्र प्रशिक्षण कार्य कर्म आयोजित किया जा रहा है प्रशिक्षण कार्य कर्म में भाग लेने के लिए नीचे दिए गए नम्बर पर आज ही संपर्क करें और Rs 250/ से अपना रजिस्ट्रेशन करवाए अचल सिंह (फाउंडर )- 9711858258. धन्यवाद
Posted by Rajaram Mali
Rajasthan
08-10-2019 02:21 PM
Maharashtra
10-08-2019 02:25 PM
मिट्टी के भुरभुरा होने तक खेत की दो - तीन बार जोताई करें उसके बाद सुहागे की सहायता से ज़मीन को समतल करें आखिरी जोताई के समय 10-15 टन प्रति एकड़ अच्छी तरह से गली हुई रूड़ी की खाद डालें बिजाई के लिए 3x2 मीटर समतल बीज बैड तैयार करें इस फसल की बिजाई के लिए अक्तूबर का आखिरी सप्ताह और नवंबर का पहला सप्ताह अच्छा समय है
Posted by tulsiram hatta bhidari
Madhya Pradesh
08-10-2019 02:19 PM
Maharashtra
10-08-2019 02:27 PM
इसे मिट्टी की कई किस्मों में उगाया जाता है, लेकिन अंगूर की खेती के लिए उपजाऊ मिट्टी जिसकी पी एच 6.5-8.5 हो, और जल जमाव वाली मिट्टी उपयुक्त होती है किशमिश बनाने के लिए Thompson Seedless, Black Sahebi कच्चा खाने के लिए Thompson Seedless, Beauty Seedless, Black Sahebi, Anab-e-Shahi, जूस बनाने के लिए: Beauty Seedless, Black Prince वाइन बनाने के लिए Rangspray, Cholhu White, Cholhu Red अंगूर की खेती के लिए, अच्छी तरह से .... (Read More)
इसे मिट्टी की कई किस्मों में उगाया जाता है, लेकिन अंगूर की खेती के लिए उपजाऊ मिट्टी जिसकी पी एच 6.5-8.5 हो, और जल जमाव वाली मिट्टी उपयुक्त होती है किशमिश बनाने के लिए Thompson Seedless, Black Sahebi कच्चा खाने के लिए Thompson Seedless, Beauty Seedless, Black Sahebi, Anab-e-Shahi, जूस बनाने के लिए: Beauty Seedless, Black Prince वाइन बनाने के लिए Rangspray, Cholhu White, Cholhu Red अंगूर की खेती के लिए, अच्छी तरह से तैयार ज़मीन की आवश्यकता होती है मिट्टी के भुरभुरा होने तक ट्रैक्टर से 3-4 गहरी जोताई करें और हैरो से 3 जोताई करें गड्ढे भरने के समय, गाय का गोबर @ 50 किलोग्राम, एसएसपी @ 2 किलोग्राम और क्लोरपायरीफोस का मिश्रण मिलाएं इसके अलावा हल्की सिंचाई आवश्यक है नए पौधे अंगूर की मदिरा, कैल्शियम अमोनियम नाइट्रेट (CAN) @ 250gm और MOP @ 250gm को अप्रैल महीने में और फिर जून महीने में लागू करें सूखे क्षेत्रों में CAN @ 1200gm, SSP @ 1500gm और MOP 500 ग्राम पूर्ण विकसित मदिरा के लिए डालें स्टॉम्प @ 800 मिली प्रति एकड़ का प्रयोग पूरी तरह से जोताई के बाद मार्च के पहले पखवाड़े में किया जाता है और फिर Gramoxone 24 WCS (paraquat) या Glycel 41 SL (glyphosate)@1.6 लीटर/एकड़ का छिड़काव किया जाता है उद्भव के बाद जब खरपतवार 15-20 सेंटीमीटर की ऊँचाई को प्राप्त करते हैं मध्य पहाड़ियों में, सिंचाई फरवरी महीने के पहले पखवाड़े और फिर मार्च के पहले सप्ताह में दी जाती है फिर अप्रैल के शुरू से जून के अंत तक फलों के विकास के लिए फिर से सिंचाई दी जाती है कम वर्षा के दौरान सिंचाई आवश्यक है जलवायु के आधार पर शुष्क क्षेत्रों में, सप्ताह में एक बार सिंचाई दी जाती है मुख्य रूप से फरवरी के शुरू से लेकर अंत-अप्रैल तक सिंचाई की जाती है 18o ब्रिक्स वाले पके गुच्छों की कटाई की जाती है यह बीज रहित किस्मों के लिए औसतन 8-12.5 टन/ एकड़ और बीज वाली किस्मों के लिए 15-20 टन/एकड़ की उपज देता है
Posted by anil
Haryana
08-10-2019 02:18 PM

..?

Punjab
03-16-2020 08:11 PM
कृप्या आप अपना सवाल विस्तार से पूछें कि आप इस नस्ल के बारे में क्या जानकारी लेना चाहते है ताकि आपको सही जानकारी दी जा सके।
Posted by gurwinder singh
Punjab
08-10-2019 02:08 PM
Maharashtra
10-08-2019 02:29 PM
HD 3086 (PusaGautam) : ਇਸ ਦਾ ਔਸਤਨ ਝਾੜ 23 ਕੁਇੰਟਲ ਪ੍ਰਤੀ ਏਕੜ ਹੁੰਦਾ ਹੈ ਇਹ ਪੱਤਿਆਂ ਦੇ ਪੀਲੇਪਣ ਅਤੇ ਭੂਰੇਪਣ ਦੀ ਬਿਮਾਰੀ ਤੋਂ ਰਹਿਤ ਹੁੰਦੀ ਹੈ ਵਧੀਆ ਕਿਮਸ ਦੇ ਬਰੈੱਡ ਬਣਾਉਣ ਦੇ ਸਾਰੇ ਗੁਣ/ਤੱਤ ਇਸ ਵਿਚ ਮੌਜੂਦ ਹਨ HD 2967: ਇਹ ਵੱਡੇ ਕੱਦ ਦੀ ਕਿਸਮ ਹੈ ਜਿਸ ਵਿਚ ਬੂਟੇ ਦਾ ਔਸਤਨ ਕੱਦ 101 ਸੈ.ਮੀ. ਤੱਕ ਹੁੰਦਾ ਹੈ ਇਸ ਦੇ ਦਾਣੇ ਸੁਨਹਿਰੇ, ਮਧਰੇ, ਸਖਤ ਅਤੇ ਚਮਕਦਾਰ ਹੁੰਦੇ ਹਨ ਇਹ ਲਗਭਗ 157 ਦਿਨਾਂ ਵਿੱਚ ਪੱ.... (Read More)
HD 3086 (PusaGautam) : ਇਸ ਦਾ ਔਸਤਨ ਝਾੜ 23 ਕੁਇੰਟਲ ਪ੍ਰਤੀ ਏਕੜ ਹੁੰਦਾ ਹੈ ਇਹ ਪੱਤਿਆਂ ਦੇ ਪੀਲੇਪਣ ਅਤੇ ਭੂਰੇਪਣ ਦੀ ਬਿਮਾਰੀ ਤੋਂ ਰਹਿਤ ਹੁੰਦੀ ਹੈ ਵਧੀਆ ਕਿਮਸ ਦੇ ਬਰੈੱਡ ਬਣਾਉਣ ਦੇ ਸਾਰੇ ਗੁਣ/ਤੱਤ ਇਸ ਵਿਚ ਮੌਜੂਦ ਹਨ HD 2967: ਇਹ ਵੱਡੇ ਕੱਦ ਦੀ ਕਿਸਮ ਹੈ ਜਿਸ ਵਿਚ ਬੂਟੇ ਦਾ ਔਸਤਨ ਕੱਦ 101 ਸੈ.ਮੀ. ਤੱਕ ਹੁੰਦਾ ਹੈ ਇਸ ਦੇ ਦਾਣੇ ਸੁਨਹਿਰੇ, ਮਧਰੇ, ਸਖਤ ਅਤੇ ਚਮਕਦਾਰ ਹੁੰਦੇ ਹਨ ਇਹ ਲਗਭਗ 157 ਦਿਨਾਂ ਵਿੱਚ ਪੱਕ ਜਾਂਦੀ ਹੈ ਇਸ ਦੀ ਔਸਤਨ ਪੈਦਾਵਾਰ 21.5 ਕੁਇੰਟਲ ਪ੍ਰਤੀ ਏਕੜ ਹੈ
Posted by Yogesh Kumar
Uttar Pradesh
08-10-2019 01:57 PM
Punjab
10-08-2019 02:00 PM
योगेश जी आप इसकी रोकथाम के लिए imidacloprid @60 ml को प्रति एकर के हिसाब से स्प्रे करें धन्यवाद
Posted by Yogesh Kumar
Uttar Pradesh
08-10-2019 01:44 PM
Punjab
10-08-2019 01:47 PM
योगेश जी कृपया आप इसकी फोटो भेजे ताकि आपको इसके बारे में पूरी जानकारी दी जा सके धन्यवाद
Posted by Wander
Punjab
08-10-2019 01:43 PM
Punjab
10-08-2019 01:47 PM
wander ji haldi rog di roktham de layi tuc tilt@200ml nu prati acre de hisab nal spray karo.dhanwad
Posted by kala Lohan
Haryana
08-10-2019 01:38 PM
Punjab
10-08-2019 01:42 PM
आपके सभी सवालो का जवाब दिया जा चुका है आप अपने सवालों के जवाब एप में मेरे सवाल का क्लिक करके देख सकते हैं या फिर मेरी प्रोफाईल के नीचे अपने सवालों के जवाब देख कते हैं यदि आपकी कोई ओर समस्या है तो आप हैल्प लाईन नंबर : 97799-77641 पर संपर्क कर सकते हैं
Posted by BHERU LAL GURJAR
Rajasthan
08-10-2019 01:29 PM
Maharashtra
10-08-2019 01:45 PM
DBW 187 किसम ICAR-INDIAN INSTITUTE OF WHEAT & BARLEY RESEARCH के द्वारा त्यार की गयी है इसकी पैदावार लगभग 28 -30 क्विंटल प्रति एकर के हिसाब से होता है धन्यवाद
Posted by Ak
Uttar Pradesh
08-10-2019 01:25 PM
Maharashtra
10-08-2019 01:42 PM
इसकी रोकथाम के लिए राइनैक्सीपायर 20 एस सी 60 मि.ली. को 100-150 लीटर पानी में मिलाकर अंत अप्रैल से मई के पहले सप्ताह तक प्रति एकड़ में स्प्रे करें खेत में जल निकास का उचित प्रबंध करें, क्योंकि पानी के खड़ा होने से इसका हमला बढ़ जाता है
Posted by sandeep
Rajasthan
08-10-2019 01:19 PM
Punjab
11-22-2019 04:29 PM
Shrimaan ji, is sama sarson ka bhav 3890 se 3985 rupay prati quintal ke hisaab se chal raha hai, dhanywad
Posted by Tarsem singh
Punjab
08-10-2019 01:13 PM
Punjab
10-09-2019 06:07 PM
Es nu Injection anthiomaline 15ml ekk din chadd. Ke lao nall liquid udderpox dea 10drops din vich 3var deo ji
Posted by Harish Yadav
Uttar Pradesh
08-10-2019 01:12 PM
Punjab
10-11-2019 05:51 PM
बकरी पालन बहुत ही लाभकारी काम है शुरूआत करने के लिए आप 10 बकरियों और 2 बकरे के साथ कर सकते हैं इन्हें खुराक कम चाहिए इसलिए इन्हें आसानी से पाल सकते हैं ये हर प्रकार के मौसम में पाली जा सकती हैं बकरियां 12-14 महीने में बच्चे देना शुरू कर देती है बकरी का गर्भ समय 150 दिन का होता है और साल में 1-5 बच्चे देती है साल में दो बच्.... (Read More)
बकरी पालन बहुत ही लाभकारी काम है शुरूआत करने के लिए आप 10 बकरियों और 2 बकरे के साथ कर सकते हैं इन्हें खुराक कम चाहिए इसलिए इन्हें आसानी से पाल सकते हैं ये हर प्रकार के मौसम में पाली जा सकती हैं बकरियां 12-14 महीने में बच्चे देना शुरू कर देती है बकरी का गर्भ समय 150 दिन का होता है और साल में 1-5 बच्चे देती है साल में दो बच्चे देना आम बात है बकरियां 8-10 वर्ष तक बच्चे देती हैं और अपन गिनती को तेजी से बढ़ा लेती हैं आप बारबरी, ब्लैक बंगाल, जैसी नसल पाल सकते हैं इसकी ट्रेनिेंग के लिए आप अपने कुषि विज्ञान केंद्र से संपर्क करे या फिर जो बकरी पालन का व्यवसाय कर रहा कोई किसान उसका फार्म स्वंय जाकर देखकर आयें तो और भी बा​रीकियों का पता चल जायेगा, आप ब्लैक बंगाल, बीटल, सिरोही, जमुनापरी, बरबरी नस्ल रख सकते हैं, बकरी पालन में लोन लेने के लिए सबसे जरूरी है ट्रेनिंग सर्टीफिकेट अपने नज़दीक के कृषि विज्ञान केंद्र से ट्रेनिंग करने के बाद ट्रेनिंग के सर्टीफिकेट पर लोन एप्लाई होता है पर लोन मिलेगा या नहीं यह बैंक मेनेजर पर निर्भर करता है क्योंकि पहली बात यह है कि बैंक देखता है कि आपके अकाउंट में कितने पैसों का लेन देन हो रहा है और आपके पास ज़मीन गारंटी के तौर पर देने के लिए है या नहीं और अन्य भी कई बातें चैक करके लोन के लिए सहमत होता है बाकी कोशिश करें कि लोन के बिना अपने स्तर पर ही काम शुरू करें क्योंकि लोन की किश्त हर महीने भरनी पड़ेगी पर बकरियों से कमाई हर महीने नहीं होने होगी बाकी यदि कोशिश करके देखनी है तो अपने ट्रेनिंग सर्टीफिकेट से आप अपने जिले के पशु पालन विभाग अफसर को मिलें और उस पर प्रवानगी लेकर फिर बैंक से बात करके देखें, यदि आपने बकरी फार्म बनाना है तो बहुत बढ़िया सोच है आप बीटल नस्ल रखें यह दूध और मीट दोनों के लिए फायदेमंद है बाकि आप जैसे इस व्यवसायों में आएंगे उस हिसाब से आपके लिंक बनने शुरू हो जाएंगे और बाकि मार्केटिंग इस बात निर्भर है कि आपका लोगों के साथ लिंक कैसा है इसका दूध गाय के रेट के बराबर मिल जाता है और बाकि यदि फार्म हो तो बच्चे भी बेचे जाते है कुल मिलाकर यदि मोटा सा हिसाब लगाना है तो एक बकरी से लगभग 20000 तक कमाई हो जाती है बाकि यह भी सलाह है कि आप आपने नज़दीक kvk से ट्रेनिंग ज़रूर लें और सफल बकरी पालकों के फार्म ज़रूर देखें.वहां से आपको इस काम के बारे में जानकारी और इसे करने के तरीकों के बारे में भी पता लगेगा.
Posted by jagpal sidhu028@gmail.com
Punjab
08-10-2019 01:11 PM
Maharashtra
10-08-2019 01:50 PM
ਬਰਾਨੀ ਹਾਲਾਤਾਂ ਲਈ, 10 ਅਕਤੂਬਰ ਤੋਂ 25 ਅਕਤੂਬਰ ਤੱਕ ਪੂਰੀ ਬਿਜਾਈ ਕਰੋ ਸਿੰਚਿਤ ਹਾਲਾਤਾਂ ਲਈ 25 ਅਕਤੂਬਰ ਤੋਂ 10 ਨਵੰਬਰ ਤੱਕ ਦੇਸੀ ਅਤੇ ਕਾਬੁਲੀ ਛੋਲਿਆਂ ਦੀਆਂ ਕਿਸਮਾਂ ਦੀ ਬਿਜਾਈ ਕਰੋ ਸਹੀ ਸਮੇਂ ਤੇ ਬਿਜਾਈ ਕਰਨਾ ਜ਼ਰੂਰੀ ਹੈ ਕਿਉਂਕਿ ਅਗੇਤੀ ਬਿਜਾਈ ਨਾਲ ਬੇਲੋੜੇ ਵਿਕਾਸ ਦਾ ਖਤਰਾ ਵੱਧ ਜਾਂਦਾ ਹੈ ਪਿਛੇਤੀ ਬਿਜਾਈ ਨਾਲ, ਪੌਦਿਆਂ ਵਿੱਚ ਸੋਕਾ ਰੋਗ ਦਾ ਖਤਰਾ ਵੱਧ ਜਾਂਦਾ, ਪੌਦੇ ਦਾ ਵਿਕਾ.... (Read More)
ਬਰਾਨੀ ਹਾਲਾਤਾਂ ਲਈ, 10 ਅਕਤੂਬਰ ਤੋਂ 25 ਅਕਤੂਬਰ ਤੱਕ ਪੂਰੀ ਬਿਜਾਈ ਕਰੋ ਸਿੰਚਿਤ ਹਾਲਾਤਾਂ ਲਈ 25 ਅਕਤੂਬਰ ਤੋਂ 10 ਨਵੰਬਰ ਤੱਕ ਦੇਸੀ ਅਤੇ ਕਾਬੁਲੀ ਛੋਲਿਆਂ ਦੀਆਂ ਕਿਸਮਾਂ ਦੀ ਬਿਜਾਈ ਕਰੋ ਸਹੀ ਸਮੇਂ ਤੇ ਬਿਜਾਈ ਕਰਨਾ ਜ਼ਰੂਰੀ ਹੈ ਕਿਉਂਕਿ ਅਗੇਤੀ ਬਿਜਾਈ ਨਾਲ ਬੇਲੋੜੇ ਵਿਕਾਸ ਦਾ ਖਤਰਾ ਵੱਧ ਜਾਂਦਾ ਹੈ ਪਿਛੇਤੀ ਬਿਜਾਈ ਨਾਲ, ਪੌਦਿਆਂ ਵਿੱਚ ਸੋਕਾ ਰੋਗ ਦਾ ਖਤਰਾ ਵੱਧ ਜਾਂਦਾ, ਪੌਦੇ ਦਾ ਵਿਕਾਸ ਮਾੜਾ ਅਤੇ ਜੜ੍ਹਾਂ ਵੀ ਉਚਿੱਤ ਢੰਗ ਨਾਲ ਨਹੀਂ ਵਧਦੀਆਂ ਹਨ ਇਕ ਕਨਾਲ ਵਿਚ ਤੁਸੀ 1.5 ਕਿਲੋ ਤੋਂ 2.5 ਕਿਲੋ ਪ੍ਰਤੀ ਕਨਾਲ ਦੇ ਹਿਸਾਬ ਨਾਲ ਵਰਤੋਂ ਕਰੋ ਧੰਨਵਾਦ
Posted by dileep verma
Uttar Pradesh
08-10-2019 01:10 PM
Punjab
10-08-2019 01:52 PM
Dileep ji iski matra ek litre prati acre ke hisab se istemal ki jayi hai par iska istemal mukhya fasl par nahi kiya jata.yeh sirf ghas ki roktham ke liye istemal ki jati hai.dhanywad
Posted by नमन सोलंकी
Madhya Pradesh
08-10-2019 12:59 PM
Posted by Sharry Ahluwalia
Punjab
08-10-2019 12:45 PM
Punjab
10-08-2019 12:48 PM
sharry ji isda rate 3000-3300 rupaye prati quintal de hisab nal chal reha hai.dhanwad
Posted by rajkumar mourya
Uttar Pradesh
08-10-2019 12:42 PM
Punjab
10-08-2019 12:46 PM
rajkumar ji yeh keet ka hamla hai iski roktham ke liye imidacloprid @1.5ml ko prati litre pani ke hisab se spray karen.dhanywad
Posted by sardeep singh pannu
Punjab
08-10-2019 12:42 PM
Punjab
10-08-2019 12:51 PM
sardeep ji kirpa karke daso ke kehde pesticide de bare jankari laina chahunde ho ta jo tuhanu is bare poori jankari diti ja sake.dhanwad
Posted by Dr.shrimal Rajput
Madhya Pradesh
08-10-2019 12:39 PM
Madhya Pradesh
10-08-2019 02:24 PM
जगह को साफ रखें, फिनाइल का पोंछा समय समय पर लगवाएं, टोपिक्योर का स्प्रे भी कर सकते हैं
Posted by chhina saab
Punjab
08-10-2019 12:33 PM
Punjab
10-08-2019 07:10 PM
Chhina ji iss semen di sari jankari tuci iss link te click krke la skde ho. https://www.stgen.com/sire-directory/dairy-bull-usa.aspx code=001HO11056&language=english&title=river-bridge-co-op-troy-et
Posted by baljit singh
Punjab
08-10-2019 12:33 PM
Punjab
10-08-2019 03:24 PM
BhaaG isnu 1kg kanak da dalia 500g gur ch rinh ke 7 din swer shaam khuao Rajwa hara chaara te har 3kg dudh lai majh nu 1kg feed pao har 3 mahine baad malap rehat karo
Posted by madan gopal
Uttar Pradesh
08-10-2019 12:22 PM
Maharashtra
10-08-2019 12:34 PM
अच्छे जल निकास वाली गहरी, दोमट मिट्टी जिसमें भूमिगत-जल का स्तर ज़मीन से 1.5-2 मी. के नीचे हो और अच्छी जल धारण क्षमता वाली ज़मीन गन्ने की खेती के लिए लाभदायक है यह फसल काफी अम्लीय और खारेपन को सहन कर सकती है इसलिए इसे मिट्टी जिसका pH 5 से 8.5 हो, में उगाई जा सकती है यदि मिट्टी का pH 5 से कम हो तो इसमें चूना (कली) डालें और यदि मिट.... (Read More)
अच्छे जल निकास वाली गहरी, दोमट मिट्टी जिसमें भूमिगत-जल का स्तर ज़मीन से 1.5-2 मी. के नीचे हो और अच्छी जल धारण क्षमता वाली ज़मीन गन्ने की खेती के लिए लाभदायक है यह फसल काफी अम्लीय और खारेपन को सहन कर सकती है इसलिए इसे मिट्टी जिसका pH 5 से 8.5 हो, में उगाई जा सकती है यदि मिट्टी का pH 5 से कम हो तो इसमें चूना (कली) डालें और यदि मिट्टी का pH 9.5 से ज्यादा हो तो इसमें जिप्सम डालें आप इसकी किस्मे जैसे Co 8014 (Mahalakshami) ,Vasant 1,Co 86032 ,Co 92005 की बिजाई कर सकते है पतझड़ के मौसम में 15 अक्तूबर से २० नवंबर तक बिजाई की जाती है, बसंत के मौसम में बिजाई 15 फरवरी तक और गर्मियों के मौसम में 15 जुलाई से 15 सितंबर तक बिजाई की जाती है बिजाई के लिए सुधरे ढंग जैसे कि (गहरी खालियां, मेंड़ बनाकर,पंक्तियों में जोड़े बनाकर और गड्ढा खोदकर बिजाई ) प्रयोग किये जाते हैं 1) खालियां और मेंड़ बनाकर सूखी बिजाई: ट्रैक्टर द्वारा मेंड़ बनाने वाली मशीन की मदद से मेंड़ और खालियां बनाएं और इन मेड़ और खालियों में बिजाई करें मेड़ और खालियों में 90 सैं.मी. का फासला होना चाहिए गन्ने की गुलियों को मिट्टी में दबाएं और उसके बाद हल्की सिंचाई करें 2) पंक्तियों के जोड़े बनाकर बिजाई: खालियां बनाने वाले यंत्र के प्रयोग से खेत में 150 सैं.मी. के फासले पर खालियां बनाएं और उनमें 30:30-90-30:30 सैं.मी. के फासले पर गन्ने की रोपाई करें इस तरीके से मेड़ वाली बिजाई से अधिक पैदावार मिलती है 3) गड्ढा खोदकर बिजाई: गड्ढे खोदने वाली मशीन से 60 सैं.मी. व्यास के 30 सैं.मी. गहरे गड्ढे खोदें जिनमें 60 सैं.मी. का फासला हो इससे गन्ना 2-3 बार उगाया जा सकता है और मेड़ वाली बिजाई से 25-50 % अधिक पैदावार आती है B) एक आंख वाले गन्नों की बिजाई: रोपाई के लिए सेहतमंद गुलियां चुनें और 75-90 सैं.मी. के अंतर पर खालियों में बिजाई करें गुलियां एक आंख वाली होनी चाहिए यदि गन्ने के ऊपरी भाग में छोटी डलियां चुनी गई हों तो बिजाई 6 -9 सैं.मी. के अंतर पर करें फसल के अच्छे उगने के लिए आंखों को ऊपर की ओर रखें और हल्की सिंचाई करें पतझड़ के मौसम में 14500-16500 तीन आंख वाले बीज प्रति एकड़ में प्रयोग करें और बसंत के मौसम में 16500-25000 तीन आंख वाले बीज और 21600-25000 दो आंख वाले बीज प्रति एकड़ में प्रयोग करें गन्ने में नदीनों के कारण 12-72 % पैदावार का नुकसान होता है शुरूआती 60-120 दिनों तक नदीनों की रोकथाम बहुत जरूरी है इसलिए रोपाई के बाद 3-4 महीने बाद फसल की नदीनों की रोकथाम करें नीचे लिखे तरीकों से नदीनों को रोका जा सकता है 1) हाथों से गोडाई करके: गन्ना एक व्यापक जगह लेने वाली फसल है इसलिए नदीनों को गोडाई करके रोका जा सकता है इसके इलावा प्रत्येक सिंचाई के बाद 3-4 गोडाई जरूरी है 2) काश्तकारी ढंग: इस प्रक्रिया में खेती के तरीके, अंतरफसली और मलचिंग तरीके शामिल हैं बहुफसली के कारण नदीनों का हमला ज्यादा होता है इसकी रोकथाम के लिए चारे वाली फसलें और हरी खाद वाली फसलों के आधार वाला फसली चक्र गन्ने में नदीनों की रोकथाम करता है गन्ना एक व्यापक जगह लेने वाली भी फसल है जिससे नदीनों के हमले का खतरा भी ज्यादा होता है यदि गन्ने को कम समय वाली फसलों के साथ अंतरफसली किया जाए तो इससे नदीनों को कम किया जा सकता है और ज्यादा लाभ भी मिल सकता है गन्ने के अंकुरन के बाद गन्ने की कतारों में 10-12 सैं.मी. मोटी तह बिछा दी जाती है यह सूर्य की रोशनी को सोखता है जिससे नदीन कम होते हैं यह मिट्टी में नमी को भी बचाता है 3) रासायनिक तरीके: नदीनों की रोकथाम के लिए, सिमाज़ीन या एट्राज़ीन 600-800 ग्राम या मैट्रीब्यूज़िन 800 ग्राम या ड्यूरॉन 1-1.2 किलोग्राम प्रति एकड़ में बिजाई के तुरंत बाद प्रयोग करना चाहिए इसके इलावा चौड़े पत्ते वाले नदीनों की रोकथाम के लिए 2, 4-डी@ 300-400 ग्राम का प्रयोग प्रति एकड़ के हिसाब से करें नाइट्रोजन 62 किलो, फासफोरस 32 किलो और पोटाश 42 किलो प्रति एकड़ में डालें बिजाई से पहले नाइट्रोजन की 1/3 मात्रा और फासफोरस और पोटाश की पूरी मात्रा डालें बाकी बची नाइट्रोजन की दो मात्रा को टॉप ड्रेसिंग के तौर पर डालें नाइट्रोजन की पहली मात्रा को बीज वाली आंख के अंकुरण के समय और दूसरी मात्रा को बीज अंकुरण के 45 दिन बाद डालें 3 वर्षों के बाद गन्ने की गुलियों में 40-50 क्विंटल गाय का गोबर प्रति एकड़ में डालें पतझड़ के मौसम में 90-100 दिनों में नाइट्रोजन को टॉप ड्रेसिंग के तौर पर डालें और बसंत के मौसम में 150-160 दिन बाद डालनी चाहिए सिंचाई की संख्या मिट्टी की किस्म और पानी की उपलब्धता पर निर्भर करती है गर्मी के महीने में गर्म हवाओं और सूखे में वृद्धि होने के कारण फसल को पानी की जरूरत पड़ती है पहली सिंचाई फसल के 20-25 % अंकुरित होने पर करें मानसून में गन्ने को पानी और बारिश के आधार पर लगाएं कम वर्षा में सिंचाई 10 दिनों के अंतराल पर करें इसके बाद सिंचाई के अंतराल को बढ़ाकर 20-25 दिनों के अंतराल पर सिंचाई करें जमीन में नमी संभालने के लिए गन्ने की पंक्तियों में मलचिंग का प्रयोग करें अप्रैल जून के महीने में पानी की कमी ना होने दें इससे पैदावार कम होगी इसके इलावा बारिश के दिनों में पानी ना खड़ा होने दें जोताई का समय, वृद्धि का समय और अधिक विकास का समय सिंचाई के लिए बहुत नाज़ुक होता है मिट्टी को मेंड़ पर चढ़ाना: कसी की मदद से खालियों में और पौधे के किनारों पर मिट्टी चढ़ाई जाती है यह मिट्टी में अच्छी तरह से तैयार की गई खाद को अच्छी तरह से मिश्रित होने में मदद करती है पौधे को सहारा देने और उसे गिरने से बचाने में भी मदद करती है ज्यादा पैदावार और चीनी प्राप्त करने के लिए गन्ने की सही समय पर कटाई जरूरी है समय से पहले या बाद में कटाई करने से पैदावार पर प्रभाव पड़ता है किसान शूगर रीफरैक्टोमीटर का प्रयोग करके कटाई का समय पता लगा सकते हैं गन्ने की कटाई द्राती की सहायता से की जाती है गन्ना धरती से ऊपर थोड़ा हिस्सा छोड़कर काटा जाता है क्योंकि गन्ने में चीनी की मात्रा ज्यादा होती है कटाई के बाद गन्ना फैक्टरी में लेकर जाना जरूरी होता है
Posted by boduram
Rajasthan
08-10-2019 12:21 PM
Posted by ASHWANI KUMAR
Punjab
08-10-2019 12:16 PM
Maharashtra
10-08-2019 12:53 PM
खुम्ब की किस्में कई प्रकार की होती है जैसे कि बटन खुम्ब, डीगरी, शटाकी खुम्ब, पराली खुम्ब, और मिलकी खुम्ब इनमे से कुइ खुम्ब सर्दियो के मौसम में और कुछ गर्मीयों के मौसम में लगाये जाते है और हर खुम्ब को लगाने का समय अलग अलग है जैसे बटन खुम्ब का समय सितंबर से मार्च तक होता है इस समय में हम तीन फसले ले सकते है शटाकी ख.... (Read More)
खुम्ब की किस्में कई प्रकार की होती है जैसे कि बटन खुम्ब, डीगरी, शटाकी खुम्ब, पराली खुम्ब, और मिलकी खुम्ब इनमे से कुइ खुम्ब सर्दियो के मौसम में और कुछ गर्मीयों के मौसम में लगाये जाते है और हर खुम्ब को लगाने का समय अलग अलग है जैसे बटन खुम्ब का समय सितंबर से मार्च तक होता है इस समय में हम तीन फसले ले सकते है शटाकी खुम्ब का समय अक्तूबर से मध्य फरवरी तक हैं इस समय हम एक फसल ही ले सकते है पराली खुम्ब का समय अप्रैल से अगस्त तक है इस समय हम चार फसले ले सकते है मिलकी खुम्ब का समय अप्रैल से सितंबर तक है आप अब अप्रैल में मिलकी या पराली खुम्ब लगा सकते है पराली खुमब के लिए आपको पराली, बीज, बांस, सेबा, आदि की जरूरत है पराली के पूले, धानो की पराली 1-1 किलो के पूले दोनो सिरो से सेबे से बांध कर तैयार किये जाते है पूले के सिरे कांट कर एक सार कर लिए जाते है पूलो की क्यिारी लगाना पराली के पूलो को साफ पानी में 16-20 घंटो के लिए डूबो दे गिले पूलो को ढलान पर रख कर फालतू पानी को निकलने दे कमरे ईटो और बांस से एक पलेटफार्म बनाये इस पलेटफार्म पर 5 पूलो की एक तहय लगाये जिसके ऊपर 75 ग्राम बीज डाले इसके ऊपर की तहय उलट होती है इस प्रकार 5-5 पूलो की तहय में 300 ग्राम बीज डाल कर कियारी तैयार करे सबसे ऊपर दो पूलो को खोलकर रख दे खुम्बो का फूटना बिजाई से 7-9 दिनो के बाद खुम्ब फूटने लगती है पानी और हवा का संचार बिजाई के दो दिन के बाद हर रोज पानी का छिडका करे खुम्बो के फूटने के बाद हवा का संचार 6-8 घंटे प्रति दिन किया जाता है खुम्बो की तूडाई खुम्बो के फूटने के बाद 1-2 दिनो के बाद तोडाई के योग्य हो जाती है मिलकी खुम्ब मिलकी खुम्ब के लिए तूडी, बीज, मोमी लिफाफे, सेबा, केसिंग,मिट्टी आदि होने चाहिये तूडी की तैयारी सूकी तूडी को पक्के फर्श पर बिछा कर 16-20 घंटे पानी से गिला करे गिली तूडी को बोरी में भर कर सेबे से बांध दे इस बोरी को उबलते पानी में 45-50 मिनट रखें तूडी को निकालकर पक्के फर्श पर बिछा कर ठंडा करे यह तूडी बिजाई के लिए तैयार है बिजाई ठंडी तूडी में बीज मिलाकर मोमी लिफाफो में भर दें एक मोमी लिफाफें में लगभग 2 किलो गिली तूडी और 70-80 ग्राम बीज पडता है लिफाफे के मुंह को सेबे से अच्छी तरह बांध कर कमरे में रख दे केसिंग बिजाई के दो तीन हफतो के बाद लिफाफे खोलकर केसिंग की 1-1.5 की तहय लगा दें केसिंग में तूडी और रेतली मिट्टी होती है 24 घंटो के लिए 4 प्रतिशत फारमलेन के घोल से जीवाणु रहित किया जाता है खुम्बो का फूटना केसिंग मिट्टी डालने के लगभग दो हफतो में खुम्बो के छोटे छोटे किणके निकलने शुरू हो जाते है और 4-5 दिन के बाद तोडने योग्य हो जाते है खुम्बो की तूडाई लगभग 35-40 दिनो तक की जाती है इसका बीज लेने के लिए आप Mr. jai 8882876224 जी से संपर्क कर सकते है
Posted by raviranjan kumar
Bihar
08-10-2019 12:14 PM
Punjab
10-08-2019 07:10 PM
यदि आप मछली पालन का काम शुरू करना चाहते हैं तो ट्रेनिंग बहुत जरूरी है यह ट्रेनिंग FFDA(fish farmer development aggency) हर जिले में बनी है जहां हमारा खेतीबाड़ी विभाग है वहां इसके अफसर बैठते हैं वहां जाकर एप्लीकेशन भरवायें वहां आपको 5 दिन की ट्रेनिंग दी जायेगी ट्रेनिंग के लिए दसवीं पास होना ज़रूरी है इस ट्रेनिंग में आपको लोन और सब्स.... (Read More)
यदि आप मछली पालन का काम शुरू करना चाहते हैं तो ट्रेनिंग बहुत जरूरी है यह ट्रेनिंग FFDA(fish farmer development aggency) हर जिले में बनी है जहां हमारा खेतीबाड़ी विभाग है वहां इसके अफसर बैठते हैं वहां जाकर एप्लीकेशन भरवायें वहां आपको 5 दिन की ट्रेनिंग दी जायेगी ट्रेनिंग के लिए दसवीं पास होना ज़रूरी है इस ट्रेनिंग में आपको लोन और सब्सिड़ी के बारे में सारी जानकारी प्राप्त हो जाएगी इसकी पुंग छोड़ने के लिए अप्रैल से अक्टूबर का समय बढ़िया होता है, बाकि यदि अपने शुरू करना है तो यूनिवर्सिटी की तरफ से एक एकड़ में शुरू कर सकते हैं. एक एकड़ में 5000 पूंग डाल सकते हैं यह 2 से 3 इंच का होता है यदि 5000 डालना है तो 3000 रोहू, 1000 कतला, 500 कॉमन कॉर्प और 500 मरीगल नस्ल डाली जाए यह पूंग आप मछली पालन विभाग से खरीद सकते हैं यह एक इंच का बच्चा 10 पैसा प्रति बच्चा मिलेगा यदि बढ़िया खुराक डाली जाए तो 8 महीनों में यह लगभग 800—900 ग्राम का हो जाता है बाकी मछली पालन के लिए नहरी पानी बढ़िया होता है और आप गांव का छप्पड़ ठेके से लेकर भी यह काम शुरू कर सकते हैं तालाब में मछली के बीज डालने से पहले इस बात की जांच कर लेनी चाहिए कि उस तालाब में काफी मात्रा में मछली की कुदरती खुराक उपलब्ध है.
Posted by vijay
Punjab
08-10-2019 12:13 PM
Punjab
10-08-2019 01:03 PM
Vijay ji strawberry de paudhe lain layi tuc 98725 95194‬,70093 39914 NS berry orchard(Strawberry) ji nal sampark kar sakde ho.dhanwad
Posted by sachin
Uttar Pradesh
08-10-2019 12:11 PM
Punjab
10-11-2019 06:00 PM
sachin ji iske liye aap Ajay Chopra 7009645902 Chopra Dairy Farm se sampark kr skte hai..
Posted by sachin
Uttar Pradesh
08-10-2019 12:09 PM
Punjab
10-08-2019 03:27 PM
Sahib G Murrah buffalo 1800kg sue mein dudh deti ae or 2-4 mahine baad dubara gabhan ho jaati ae
Posted by sachin
Uttar Pradesh
08-10-2019 12:04 PM
Madhya Pradesh
10-08-2019 02:27 PM
मौसम में हरा चारे को सुरक्षित करके उसका साइलेज बना सकते हैं, अगर हरा चारा नहीं है तो दाने की थोड़ी मात्रा बढ़ा दें मगर ध्यान रहे अत्यधिक दाना ना दें जो कि एसिडोसिस का कारण बन सकता है
Posted by Rimjhim Kumari
Bihar
08-10-2019 11:53 AM
Punjab
10-09-2019 12:10 PM
रिमझिम जी आप इसके ऊपर वर्मीकम्पोस्ट@4 से 5 किलो डाले इस से पौधे को सरे तत्व मिल जायेगे और फल टूटना भी बंद हो जाता है धन्यवाद
Posted by baljit singh
Punjab
08-10-2019 11:52 AM
Punjab
10-08-2019 03:30 PM
BhaaG dogli gau mein aksar khoon aata ae Ghabrao na
Posted by baljit singh
Punjab
08-10-2019 11:49 AM
Punjab
10-08-2019 07:12 PM
Baljit ji iss vich darn wali gal nhi hai ehh pashu da egg tutan krke hunda hai tuci iss nu Pregstay gold powder 50gm rojana deo ate 20 din tak deo, jekar ehh gaban hoi tan rukk jawegi jekar gaban naa hoi tan dubara heat vich aa jawegi..
Posted by Shivendra pratap singh
Madhya Pradesh
08-10-2019 11:48 AM
Punjab
10-08-2019 01:53 PM
Shivendra ji kripya aap apna swal vistar se pooche taki aapko iske bare men poori jankari di ja sake,dhanywad
Posted by Ajaib sandha
Punjab
08-10-2019 11:46 AM
Punjab
10-09-2019 06:06 PM
Os Powder Lutifr ultra 30gm swere shame deo Liquid Microtone 50ml rojana deo ji
Posted by Harjeet singh
Punjab
08-10-2019 11:46 AM
Maharashtra
10-08-2019 01:01 PM
HD3226 da seed len lai tusi Punjab Seed Company, Gidderbaha 9814130982 nal samparak kar sakde ho.isda jhaad 22-26 quintal prati acre hai.dhanwad