
Posted by sachin
Uttar Pradesh
09-10-2019 08:13 PM
शैड हमेशा खेत या आस पास से 2 फुट ऊंचा बनायें क्योंकि निचले स्थान पर पानी खड़ा हो जाता है जिस कारण गंदगी पैदा हो जाती है और बाकी पशुओं का मल मूत्र का निकास भी आसानी से हो जाता है पशुओं के लिए बनायी जाने वाली खुरली ढाई तीन फुट चौड़ी होनी चाहिए खुरली पर खड़ने के लिए एक पशु को तकरीबन चार फुट जगह चाहिए मतलब 10 पशुओं के लिए.... (Read More)
शैड हमेशा खेत या आस पास से 2 फुट ऊंचा बनायें क्योंकि निचले स्थान पर पानी खड़ा हो जाता है जिस कारण गंदगी पैदा हो जाती है और बाकी पशुओं का मल मूत्र का निकास भी आसानी से हो जाता है पशुओं के लिए बनायी जाने वाली खुरली ढाई तीन फुट चौड़ी होनी चाहिए खुरली पर खड़ने के लिए एक पशु को तकरीबन चार फुट जगह चाहिए मतलब 10 पशुओं के लिए 40 फुट लंबी खुरली बनेगी डेयरी फार्म से संबंधित सामान रखने के लिए स्टोर बनायें पशुओं का वितरण/दाना स्टोर करने के लिए कमरा सैलाब से रहित होना चाहिए शैड का फर्श पक्क, फिसलन रहित और जल्दी साफ होने वाला हो शैड में जितना हो सके पशुओं को खुला छोंड़े और पानी और दाना पूरा डालें पशु को खुला छोड़ने से पशुओं में अफारे की समस्या कम आती है बाकी अपनी आवश्यकता और क्षमता के मुताबिक ही सामान खरीदें, बाकि आप अपनी जगह और पशुओं के हिसाब से शेड तैयार कर सकते है और आप अपने नज़दीकी किसी पशुपालक के शेड को भी देखकर आए जिससे आपको शेड तैयार करने में मदद मिलेगी

Posted by jeevan
Madhya Pradesh
09-10-2019 08:11 PM
Jeevan ji aap kisme jaise JW 17, JW 3269, JW 3288, HI1500, HI 1531, HD 4672,JW 1201, JW 322, JW 273, HI 1544, HI 8498, MPO 1215, JW 1203, MP 4010, HD 2864, HI 1454 ki bijai kar sakte hai. dhanywad

Posted by gagan faridkot
Punjab
09-10-2019 08:10 PM
45,60 din tak milk te pet de keria Di medisan,band vich calfsatater 1,2 kg,te 20,30 GM calfplan ja growth mantra deh sakde
Posted by Atinderpal singh chahal
Punjab
09-10-2019 08:10 PM
Chahal ji kirpa krke apna swal vistar nal pusho ji tuci ki jankari lena chahunde ho tan jo tuhanu sahi jankari diti ja skee..

Posted by Gurbhej singh
Punjab
09-10-2019 07:47 PM
apni gar tiar kri feed best a bki Cargill feed de sakde
Posted by Nikki
Uttar Pradesh
09-10-2019 07:39 PM
उसे आप 250 ग्राम गुड, 250 ग्राम गुलकंद, 100 ग्राम सौंफ और 100 ग्राम सूखे आंवले और 50 ग्राम अज्वाइण उबाल कर फिर ठंडा करके 5—7 दिन दें बाकि उसे Anabolite liquid 100ml रोजाना देना शुरू करें और Lactomax रोजाना 10 गोलियां दें और 20 दिनों तक देते रहें इससे फर्क पड़ जाएगा

Posted by Udham Singh
Haryana
09-10-2019 07:37 PM
Udham Singh ji earth worm lene ke lia aap Nageshwar 7876004800 Nageshwar Vermicompost Production Ltd se samparak kar sakte hai, Thankyou.
Posted by सुनील
Uttar Pradesh
09-10-2019 07:37 PM
सुनील जी कृपया सवाल विस्तार से पूछे ताकि आपको इसके बारे में पूरी जानकारी दी जा सके धन्यवाद
Posted by Bikkar singh
Punjab
09-10-2019 07:36 PM
bikkar ji jear beej ugna shuru ho gya hai ta eh grow kar jauga tuc isdi sahi dekhbahl karo.dhanwad
Posted by vinay Singh
Madhya Pradesh
09-10-2019 07:34 PM
Vinay ji kripya aap swal vistar se pooche aur iski photo bhi bheje taki aapko iske bare poori jankari di ja sake.dhanywad

Posted by jass
Punjab
09-10-2019 07:34 PM
ਜੱਸ ਜੀ ਤੁਸੀ ਕਿਸਮਾਂ ਜਿਵੇ PG 17: ਇਸ ਪੌਦੇ ਦੇ ਪੱਤੇ ਗੂੜੇ ਹਰੇ ਰੰਗ ਦੇ ਅਤੇ ਉੱਪਰਲੀ ਪਰਤ ਚਿੱਟੀ ਅਤੇ ਆਕਰਸ਼ਿਤ ਹੁੰਦੀ ਹੈ ਜਿਸ ਵਿੱਚ 25-30 ਤੁਰੀਆਂ ਪ੍ਰਤੀ ਗੰਢ ਹੁੰਦੀਆਂ ਹਨ ਇਹ ਕਿਸਮ 165-170 ਦਿਨਾਂ ਵਿੱਚ ਕਟਾਈ ਲਈ ਤਿਆਰ ਹੋ ਜਾਂਦੀ ਹੈ ਇਸ ਦਾ ਔਸਤਨ ਝਾੜ 50 ਕੁਇੰਟਲ ਪ੍ਰਤੀ ਏਕੜ ਹੈ Yamuna Safed (G-1): ਇਸ ਦੀਆਂ ਗੰਢਾਂ ਸਖ਼ਤ ਅਤੇ ਚਿੱਟੀਆਂ ਹੁੰਦੀਆਂ ਹਨ ਅਤੇ ਤੁਰੀਆਂ ਦਾਤੀ ਆਕਾਰ ਦੀਆਂ ਹੁੰਦੀਆਂ ਹਨ .... (Read More)
ਜੱਸ ਜੀ ਤੁਸੀ ਕਿਸਮਾਂ ਜਿਵੇ PG 17: ਇਸ ਪੌਦੇ ਦੇ ਪੱਤੇ ਗੂੜੇ ਹਰੇ ਰੰਗ ਦੇ ਅਤੇ ਉੱਪਰਲੀ ਪਰਤ ਚਿੱਟੀ ਅਤੇ ਆਕਰਸ਼ਿਤ ਹੁੰਦੀ ਹੈ ਜਿਸ ਵਿੱਚ 25-30 ਤੁਰੀਆਂ ਪ੍ਰਤੀ ਗੰਢ ਹੁੰਦੀਆਂ ਹਨ ਇਹ ਕਿਸਮ 165-170 ਦਿਨਾਂ ਵਿੱਚ ਕਟਾਈ ਲਈ ਤਿਆਰ ਹੋ ਜਾਂਦੀ ਹੈ ਇਸ ਦਾ ਔਸਤਨ ਝਾੜ 50 ਕੁਇੰਟਲ ਪ੍ਰਤੀ ਏਕੜ ਹੈ Yamuna Safed (G-1): ਇਸ ਦੀਆਂ ਗੰਢਾਂ ਸਖ਼ਤ ਅਤੇ ਚਿੱਟੀਆਂ ਹੁੰਦੀਆਂ ਹਨ ਅਤੇ ਤੁਰੀਆਂ ਦਾਤੀ ਆਕਾਰ ਦੀਆਂ ਹੁੰਦੀਆਂ ਹਨ ਅਤੇ ਹਰੇਕ ਗੰਢ ਵਿੱਚ 25- 30 ਤੁਰੀਆਂ ਹੁੰਦੀਆਂ ਹਨ Yamuna Safed 2(G-50): ਇਸ ਦੀਆਂ ਗੰਢੀਆਂ ਵੀ ਸਖਤ ਅਤੇ ਚਿੱਟੀਆਂ ਹੁੰਦੀਆਂ ਹਨ ਅਤੇ 35-40 ਤੁਰੀਆਂ ਪ੍ਰਤੀ ਗੰਢ ਹੁੰਦੀਆਂ ਹਨ Yamuna Safed 3 (G 282): ਗੰਢਾਂ ਚਿੱਟੀਆਂ ਅਤੇ ਅਕਾਰ ਵਿੱਚ ਵੱਡੀਆਂ ਹੁੰਦੀਆਂ ਹਨ ਅਤੇ 15-16 ਤੁਰੀਆਂ ਪ੍ਰਤੀ ਗੁੰਢ ਹੁੰਦੀਆਂ ਹਨ Yamuna Safed 4 (G 323): ਗੰਢਾ ਚਿੱਟੀਆਂ ਅਤੇ 20-25 ਤੁਰੀਆ ਪ੍ਰਤੀ ਗੰਢ ਹੁੰਦੀਆਂ ਹਨ ਦੀ ਬਿਜਾਈ ਕਰ ਸਕਦੇ ਹੋ ਧੰਨਵਾਦ
Posted by Krishna Kumar Sahu
Chattisgarh
09-10-2019 07:31 PM
श्रीमान जी धान में Buprofenzin @300 ml प्रति एकड़ के हिसाब से स्प्रे कर सकते है

Posted by gurpreet
Punjab
09-10-2019 07:30 PM
pet de keria Di medisan fantas 3 deo phir totavit bollas 10 1 roj deni jado Tara karn lag vetmate tika 2 ml lagvo 100gm agrimin ford,1kg kanan ubal k deo heat vich Aya u gi

Posted by Imran Khan Hasan Imran
Uttar Pradesh
09-10-2019 07:22 PM
HD-2967 की औसतन उपज 21—22 क्विंटल प्रति एकड़ है
Posted by Suraj Mahato
Jharkhand
09-10-2019 07:21 PM
सूरज जी आप बांस की किस्मे जैसे Thamnocalamus falconeri ,Thamnocalamus spathiflorus की बिजाई कर सकते है धन्यवाद
Posted by sandeep Tyagi
Uttar Pradesh
09-10-2019 07:15 PM
उत्तर प्रदेश के मैदानी क्षेत्रों में बिजाई के लिए अक्तूबर से नवंबर का महीना उपयुक्त होता है

Posted by Gaganpreet Singh
Punjab
09-10-2019 07:09 PM
gagan ji kirpa karke swal vistar nal pucho ta jo tuhanu is bare poori jankari diti ja sake.dhanwad

Posted by Ram Parkash Gupta
Uttar Pradesh
09-10-2019 07:07 PM
राम प्रकाश जी आप कृपया इसकी फोटो भेजे ताकि आपको इसके बारे में पूरी जानकारी दी जा सके धन्यवाद

Posted by gurmindear singh
Punjab
09-10-2019 07:06 PM
Hanji tuci iss trike nal feed tyar kr skde ho..
Posted by jora Singh
Punjab
09-10-2019 07:04 PM
jora ji prali nu tuc ik jgah ikathi kar lao ate isde uper waste decomposer di spray karo eh prali nu khet vich galn vich madad karda hai.dhanwad
Posted by Balvir Singh
Punjab
09-10-2019 07:00 PM
मिर्च रेतली से भारी चिकनी हर तरह की मिट्टी में उगाई जा सकती है अच्छे विकास के लिए हल्की उपजाऊ और पानी के अच्छे निकास वाली ज़मीन जिसमे नमी सोखने की क्षमता हो, इसके लिए अनुकूल होती है हल्की ज़मीनें भारी ज़मीनों के मुकाबले अच्छी क्वालिटी की पैदावार देती हैं मिर्च के अच्छे विकास के लिए ज़मीन की pH 6-7 अनुकूल है आप इसकी .... (Read More)
मिर्च रेतली से भारी चिकनी हर तरह की मिट्टी में उगाई जा सकती है अच्छे विकास के लिए हल्की उपजाऊ और पानी के अच्छे निकास वाली ज़मीन जिसमे नमी सोखने की क्षमता हो, इसके लिए अनुकूल होती है हल्की ज़मीनें भारी ज़मीनों के मुकाबले अच्छी क्वालिटी की पैदावार देती हैं मिर्च के अच्छे विकास के लिए ज़मीन की pH 6-7 अनुकूल है आप इसकी किस्मे जैसे Arka Meghana,Arka Sweta,Kashi Early, Kashi Surkh की बिजाई कर सकते है खेत को तैयार करने के लिए 2-3 बार जोताई करें और प्रत्येक जोताई के बाद डलियों को तोड़ें बिजाई से 15-20 दिन पहले रूड़ी की खाद 150-200 क्विंटल प्रति एकड़ डालकर मिट्टी में अच्छी तरह मिला दें टमाटर और मिर्च की खेती एक ही या नज़दीक वाले खेत में ना करें, क्योंकि दोनों की बीमारियां एक जैसी होती हैं और इस कारण एंथ्राक्नोस और बैक्टीरिया वाली बीमारीयों के बढ़ने का खतरा बढ़ जाता है मिर्च की खेती पूरे वर्ष की जाती है खरीफ की फसल के लिए मई-जून और गर्मियों की फसल के लिए फरवरी - मार्च का समय मिर्च की रोपाई के लिए उपयुक्त होता है खरीफ के मौसम में 60-75 सैं.मी. x 45 सैं.मी. और सिंचित क्षेत्रों में 60 x 60 सैं.मी. फासले का प्रयोग करें नर्सरी में बीजों को 3-5 सैं.मी. की गहराई में बोयें और फिर मिट्टी से ढक दें इसकी मुख्य खेत में रोपाई की जाती है 1 मीटर चौड़े और आवश्यकतानुसार लंबे बैड बनाएं कीटाणु रहित कोकोपिट 300 किलो, 5 किलो नीम केक को मिलाए और 1-1किलो एज़ोसपीरिलियम और फासफोबैक्टीरिया भी डालें उपचार किए हुए बीज ट्रे में एक बीज प्रति सैल बोयें बीज को कोकोपिट से ढक दें और ट्रे एक- दूसरे के साथ रखें बीज अंकुरन तक इन्हें पॉलीथीन से ढक दें नर्सरी में बीज बीजने के बाद बैडों को 400 मैश नाइलोन जाल या पतले सफेद कपड़े से ढक दें यह नए पौधों को कीड़े-मकौड़े और बीमारियों के हमले से बचाता है 6 दिनों के बाद, ट्रे में लगे नए पौधों को एक एक करके जाल की छांव के नीचे बैडों में लगाएं बीज अंकुरन तक पानी देने वाले बर्तन की मदद से पानी दें बिजाई के 18 दिन बाद 19:19:19 की 0.5 % (5 ग्राम प्रति लीटर ) की स्प्रे करें किस्मों के लिए 200 ग्राम बीज और हाइब्रिड के लिए 80-100 ग्राम बीज प्रति एकड़ में प्रयोग करें बारानी क्षेत्रों के लिए, नाइट्रोजन 50 किलो (110 किलो यूरिया), फासफोरस 16 किलो (सिंगल सुपर फासफेट 100 किलो) और पोटाश 20 किलो (म्यूरेट ऑफ पोटाश 35 किलो) प्रति एकड़ डालें नाइट्रोजन की आधी मात्रा, फासफोरस और पोटाश की पूरी मात्रा पनीरी खेत में लगाने के समय डालें रोपाई के बाद बाकी बची नाइट्रोजन दो बराबर हिस्सों में 30वें और 50वें दिन डालें सिंचित क्षेत्रों के लिए, नाइट्रोजन 84 किलो (182 किलो यूरिया), फासफोरस 24 किलो (सिंगल सुपर फासफेट 150 किलो) और पोटाश 24 किलो (म्यूरेट ऑफ पोटाश 40 किलो) प्रति एकड़ डालें रोपाई से पहले 24 किलो नाइट्रोजन (यूरिया 52 किलो), फासफोरस की पूरी मात्रा और पोटाश की आधी मात्रा प्रति एकड़ में डालें बाकी बची नाइट्रोजन को पांच भागों में बांटें और पोटाश को तीन बराबर भागों में बांटें नाइट्रोजन 12 किलो (यूरिया 26 किलो) को बिजाई के बाद 45वें, 60वें, 75वें, 95वें और 115वें दिन डालें और पोटाश 4 किलो को बिजाई के बाद 45वें, 60वें, और 75वें दिन डालें 45 दिनों तक गोडाई करें, कही की मदद से मिट्टी चढ़ाएं और खेत को नदीन मुक्त रखें यदि नदीनों की रोकथाम ना की जाये तो यह 70-90 % पैदावार कम कर देते हैं रोपाई से पहले मुख्य खेत में पैंडीमैथालीन 1 लीटर प्रति एकड़ में डालें यदि नदीनों की संख्या ज्यादा हो तो उनके अंकुरण के बाद सेन्कोर 800 मि.ली की स्प्रे प्रति एकड़ में करें नदीनों की रोकथाम के साथ मिट्टी में नमी को बनाए रखने के लिए मलचिंग एक प्रभावी तरीका है मिट्टी में नमी के आधार पर सर्दियों में 6-7 दिनों के अंतराल पर और गर्मियों में 4-5 दिनों के अंतराल पर सिंचाई करें फूल निकलने की अवस्था सिंचाई के लिए गंभीर होती है इस अवस्था पर पानी की कमी से फल गिरते हैं जिससे फलों के उत्पादन में कमी होती है विभिन्न खोजों में यह पाया गया है, कि प्रत्येक पखवाड़े में आधा इंच सिंचाई से जड़ों में नमी ज्यादा होती है जिससे वे अधिक उपज देती हैं मिर्चों की तुड़ाई हरा रंग आने पर करें या फिर पकने के लिए पौधे पर ही रहने दें मिर्चों का पकने के बाद वाला रंग किस्म पर निर्भर करता है अधिक तुड़ाइयां लेने के लिए यूरिया 10 ग्राम प्रति लीटर और घुलनशील K @ 10 ग्राम प्रति लीटर पानी (1 प्रतिशत प्रत्येक का घोल) की स्प्रे 15 दिनों के फासले पर कटाई के समय करें पैकिंग के लिए मिर्चें पक्की और लाल रंग की होने पर तोड़ें सुखाने के लिए प्रयोग की जाने वाली मिर्चों की पूरी तरह पकने के बाद ही तुड़ाई करें
Posted by satinderbir singh
Punjab
09-10-2019 06:56 PM
satinder ji kirpa karke daso ke tuhade kol kine acre jameen hai ta jo tuhanu osde hisab nal tractor bare jankari diti ja sake.dhanwad

Posted by Ram Parkash Gupta
Uttar Pradesh
09-10-2019 06:56 PM
राम प्रकाश जी आप कृपया इसकी फोटो भेजे ताकि आपको इसके बारे में पूरी जानकारी दी जा सके धन्यवाद
Posted by satinderbir singh
Punjab
09-10-2019 06:54 PM
satinder ji kirpa karke daso ke tuhade kol kine acre jameen hai ta jo tuhanu osde hisab nal jankari diti ja sake ke tuc kehda tractor kharid sakde ho,dhanywad

Posted by karulal Patidar
Madhya Pradesh
09-10-2019 06:53 PM
Karulal ji kripya aap iski photo bheje taki aapko iske bare mein poori jankari di ja sake,dhanywad

Posted by vikas
Rajasthan
09-10-2019 06:52 PM
Butox 2ml 1litre paani me ghol kar bel par ulte trf lgaayen Pashu ka pet bhraa ho, piyaasa na ho or har 10 din ke bad 3 baar lgaayen or frsh dho len.
Posted by om Kumar
Rajasthan
09-10-2019 06:47 PM
श्रीमान जी, मल्चिंग नदीन की रोकथाम के लिए डाली जाती, है इसे आप सबियों के बीज की बिजाई कर के ऊपर इक लेयर के जैसे डाल सकते हैं, धन्यवाद

Posted by Muñish
Punjab
09-10-2019 06:33 PM
BhaaG doctor ton 15 din baad check karwa lao hai k nahi
Posted by Dharmender singh
Haryana
09-10-2019 06:25 PM
Dharmendra ji chat par sabjiyan ugane ke liye model tyar karva sakte hai ya aap tyre ya gamlon men bel vali sabjiyan uga sakte hai.dhanywad

Posted by MANAV
Maharashtra
09-10-2019 06:20 PM
COPPER OXYCHLORIDE 50% WP ek fungusnashi hai jo systematic, contact aur prevant action hai.dhanywad

Posted by Sachit Chahal
Haryana
09-10-2019 06:16 PM
Chahal Sahib NDRI KARNAL NAAL SAMPARK KARO G TRAINING LAO

Posted by अनिराज
Rajasthan
09-10-2019 06:14 PM
अच्छी पैदावार प्राप्त करने के लिए बिजाई का उचित समय 15 अप्रैल से जून का पहला सप्ताह होता कपास की फसल के आस-पास अरहर, मूंग और भिंडी को ना बोयें क्योंकि यह कीड़ों का स्थान बनाने के लिए सहायक फसलें हैं

Posted by rohit
Maharashtra
09-10-2019 06:11 PM
रोहित जी कृप्या आप अपना सवाल विस्तार से पूछें कि आप क्या जानकारी लेना चाहते है ताकि आपको सही जानकारी दी जा सके

Posted by Sachit Chahal
Haryana
09-10-2019 06:09 PM
किन्नू की फसल के लिए 1-3 साल के पौधे को 10-30 किलो रूडी की खाद, 240-720 ग्राम यूरिया प्रति पौधा डालें 4-7 साल के पौधे को 40-80 किलो रूडी की खाद, 960-1680 ग्राम यूरिया और 1375-2400 ग्राम सिंगल सुपर फासफेट प्रति वृक्ष डालें 8 साल के पौधे को 100 किलो रूडी की खाद, 1920 ग्राम यूरिया और 2750 ग्राम सिंगल सुपर फासफेट प्रति वृक्ष डालें रूडी की खाद की पूरी .... (Read More)
किन्नू की फसल के लिए 1-3 साल के पौधे को 10-30 किलो रूडी की खाद, 240-720 ग्राम यूरिया प्रति पौधा डालें 4-7 साल के पौधे को 40-80 किलो रूडी की खाद, 960-1680 ग्राम यूरिया और 1375-2400 ग्राम सिंगल सुपर फासफेट प्रति वृक्ष डालें 8 साल के पौधे को 100 किलो रूडी की खाद, 1920 ग्राम यूरिया और 2750 ग्राम सिंगल सुपर फासफेट प्रति वृक्ष डालें रूडी की खाद की पूरी मात्रा दिसंबर के महीने में डालें, जबकि यूरिया को दो बराबर भागों में डालें पहला फरवरी और दूसरा अप्रैल-मई महीने में डालें यूरिया का पहला हिस्सा डालते समय सिंगल सुपर फासफेट की पूरी मात्रा डालें
आड़ू :- जब वृक्ष 1-2 वर्ष का होता है तो अच्छी तरह से गली हुई रूड़ी की खाद 10-15 किलो, यूरिया 150-200 ग्राम, एस एस पी 200-300 ग्राम, और म्यूरेट ऑफ पोटाश 150-300 ग्राम प्रति वृक्ष डालें जब वृक्ष 3-4 वर्ष का होता है तो अच्छी तरह से गली हुई रूड़ी की खाद 15-20 किलो, यूरिया 500-700 ग्राम, एस एस पी 500-700 ग्राम, और म्यूरेट ऑफ पोटाश 400-600 ग्राम प्रति वृक्ष डालें और जब वृक्ष 5 वर्ष या इससे ज्यादा उम्र का होता है तो अच्छी तरह से गली हुई रूड़ी की खाद 25-30 किलो, यूरिया 1000 ग्राम, एस एस पी 1000 ग्राम और म्यूरेट ऑफ पोटाश 800 ग्राम प्रति वृक्ष डालें
अनार :-पहले वर्ष के दौरान अच्छी तरह से गला हुआ गाय का गोबर 10 किलो, यूरिया 100 ग्राम, एस एस पी 250 ग्राम और म्यूरेट ऑफ पोटाश 50 ग्राम प्रति पौधे में डालें गाय का गोबर, एस एस पी, पोटाश की पूरी मात्रा और यूरिया की आधी मात्रा फूल निकलने के छ: सप्ताह पहले डालें यूरिया की बाकी बची मात्रा को फल विकसित होने के समय डालें 3 वर्षों तक फूलों की कलियों को निकालते रहें अच्छी वृद्धि और उपज के लिए 3-4 वर्ष बाद शुरू करें

Posted by Prabhjot Randhawa
Punjab
09-10-2019 06:08 PM
Prabhjot ji tuhade walo bheji gyi photo upload nhi hoi hai kirpa krke photo dubara upload kro tan jo tuhanu sahi jankari diti ja skee..
Posted by Rambabu suman
Madhya Pradesh
09-10-2019 06:05 PM
Rambabu ji aap kisme jaise JW 17, JW 3269, JW 3288, HI1500, HI 1531, HD 4672,JW 1201, JW 322, JW 273, HI 1544, HI 8498, MPO 1215, JW 1203, MP 4010, HD 2864, HI 1454,JW 3020, JW 3173, HI 1500, JW 3269,JW 1142, JW 1201, JW 366, HI 1418, JW 1202, HI 1454 ki bijai kar sakte hai.dhanywad

Posted by ਰਣਦੀਪ ਸਿੰਘ ਧਾਲੀਵਾਲ।
Punjab
09-10-2019 06:04 PM
Shrimaan ji, tuc makki nal jhone di roation kar sakde ho is toh ilawa fal jive ke amrood sem vali jameen ch lga sakde ho, dhanwad

Posted by vinay singh
Uttar Pradesh
09-10-2019 06:04 PM
Vinay ji dhan ka rate 1815-1835 rupaye prati quintal ke hisab se chal raha hai.dhanywad

Posted by devendra bihone
Madhya Pradesh
09-10-2019 06:03 PM
devendra ji aap iske uper custodia ki spray karen iski matra 300ml prati acre ke hisab se spray karen.dhanwyad
Posted by jitendra kumar
Uttar Pradesh
09-10-2019 06:02 PM
Jitendra ji gabhin pashu ka pett bhar aane lgta hai, uska lewa vdhne lgta hai, uske thnn mote hone lgte hai aur uska sarir failne lgta hai, baki pashu ko gabhin hoone se 3 month ke badd doctor se jrur janch krwayen..

Posted by vinay singh
Uttar Pradesh
09-10-2019 06:01 PM
Vinay ji kripya aap apna swal vistar se pooche aur iski photo bheje taki aapko iske bare mein poori jankari di ja sake,dhanywad

Posted by haricharan
Rajasthan
09-10-2019 06:01 PM
अच्छे जल निकास वाली गहरी, दोमट मिट्टी जिसमें भूमिगत-जल का स्तर ज़मीन से 1.5-2 मी. के नीचे हो और अच्छी जल धारण क्षमता वाली ज़मीन गन्ने की खेती के लिए लाभदायक है यह फसल काफी अम्लीय और खारेपन को सहन कर सकती है इसलिए इसे मिट्टी जिसका pH 5 से 8.5 हो, में उगाई जा सकती है यदि मिट्टी का pH 5 से कम हो तो इसमें चूना (कली) डालें और यदि मिट.... (Read More)
अच्छे जल निकास वाली गहरी, दोमट मिट्टी जिसमें भूमिगत-जल का स्तर ज़मीन से 1.5-2 मी. के नीचे हो और अच्छी जल धारण क्षमता वाली ज़मीन गन्ने की खेती के लिए लाभदायक है यह फसल काफी अम्लीय और खारेपन को सहन कर सकती है इसलिए इसे मिट्टी जिसका pH 5 से 8.5 हो, में उगाई जा सकती है यदि मिट्टी का pH 5 से कम हो तो इसमें चूना (कली) डालें और यदि मिट्टी का pH 9.5 से ज्यादा हो तो इसमें जिप्सम डालें आप इसकी किस्मे जैसे Co 8014 (Mahalakshami) ,Vasant 1,Co 86032 ,Co 92005 की बिजाई कर सकते है पतझड़ के मौसम में 15 अक्तूबर से २० नवंबर तक बिजाई की जाती है, बसंत के मौसम में बिजाई 15 फरवरी तक और गर्मियों के मौसम में 15 जुलाई से 15 सितंबर तक बिजाई की जाती है बिजाई के लिए सुधरे ढंग जैसे कि (गहरी खालियां, मेंड़ बनाकर,पंक्तियों में जोड़े बनाकर और गड्ढा खोदकर बिजाई ) प्रयोग किये जाते हैं 1) खालियां और मेंड़ बनाकर सूखी बिजाई: ट्रैक्टर द्वारा मेंड़ बनाने वाली मशीन की मदद से मेंड़ और खालियां बनाएं और इन मेड़ और खालियों में बिजाई करें मेड़ और खालियों में 90 सैं.मी. का फासला होना चाहिए गन्ने की गुलियों को मिट्टी में दबाएं और उसके बाद हल्की सिंचाई करें 2) पंक्तियों के जोड़े बनाकर बिजाई: खालियां बनाने वाले यंत्र के प्रयोग से खेत में 150 सैं.मी. के फासले पर खालियां बनाएं और उनमें 30:30-90-30:30 सैं.मी. के फासले पर गन्ने की रोपाई करें इस तरीके से मेड़ वाली बिजाई से अधिक पैदावार मिलती है 3) गड्ढा खोदकर बिजाई: गड्ढे खोदने वाली मशीन से 60 सैं.मी. व्यास के 30 सैं.मी. गहरे गड्ढे खोदें जिनमें 60 सैं.मी. का फासला हो इससे गन्ना 2-3 बार उगाया जा सकता है और मेड़ वाली बिजाई से 25-50 % अधिक पैदावार आती है B) एक आंख वाले गन्नों की बिजाई: रोपाई के लिए सेहतमंद गुलियां चुनें और 75-90 सैं.मी. के अंतर पर खालियों में बिजाई करें गुलियां एक आंख वाली होनी चाहिए यदि गन्ने के ऊपरी भाग में छोटी डलियां चुनी गई हों तो बिजाई 6 -9 सैं.मी. के अंतर पर करें फसल के अच्छे उगने के लिए आंखों को ऊपर की ओर रखें और हल्की सिंचाई करें पतझड़ के मौसम में 14500-16500 तीन आंख वाले बीज प्रति एकड़ में प्रयोग करें और बसंत के मौसम में 16500-25000 तीन आंख वाले बीज और 21600-25000 दो आंख वाले बीज प्रति एकड़ में प्रयोग करें गन्ने में नदीनों के कारण 12-72 % पैदावार का नुकसान होता है शुरूआती 60-120 दिनों तक नदीनों की रोकथाम बहुत जरूरी है इसलिए रोपाई के बाद 3-4 महीने बाद फसल की नदीनों की रोकथाम करें नीचे लिखे तरीकों से नदीनों को रोका जा सकता है 1) हाथों से गोडाई करके: गन्ना एक व्यापक जगह लेने वाली फसल है इसलिए नदीनों को गोडाई करके रोका जा सकता है इसके इलावा प्रत्येक सिंचाई के बाद 3-4 गोडाई जरूरी है 2) काश्तकारी ढंग: इस प्रक्रिया में खेती के तरीके, अंतरफसली और मलचिंग तरीके शामिल हैं बहुफसली के कारण नदीनों का हमला ज्यादा होता है इसकी रोकथाम के लिए चारे वाली फसलें और हरी खाद वाली फसलों के आधार वाला फसली चक्र गन्ने में नदीनों की रोकथाम करता है गन्ना एक व्यापक जगह लेने वाली भी फसल है जिससे नदीनों के हमले का खतरा भी ज्यादा होता है यदि गन्ने को कम समय वाली फसलों के साथ अंतरफसली किया जाए तो इससे नदीनों को कम किया जा सकता है और ज्यादा लाभ भी मिल सकता है गन्ने के अंकुरन के बाद गन्ने की कतारों में 10-12 सैं.मी. मोटी तह बिछा दी जाती है यह सूर्य की रोशनी को सोखता है जिससे नदीन कम होते हैं यह मिट्टी में नमी को भी बचाता है 3) रासायनिक तरीके: नदीनों की रोकथाम के लिए, सिमाज़ीन या एट्राज़ीन 600-800 ग्राम या मैट्रीब्यूज़िन 800 ग्राम या ड्यूरॉन 1-1.2 किलोग्राम प्रति एकड़ में बिजाई के तुरंत बाद प्रयोग करना चाहिए इसके इलावा चौड़े पत्ते वाले नदीनों की रोकथाम के लिए 2, 4-डी@ 300-400 ग्राम का प्रयोग प्रति एकड़ के हिसाब से करें नाइट्रोजन 62 किलो, फासफोरस 32 किलो और पोटाश 42 किलो प्रति एकड़ में डालें बिजाई से पहले नाइट्रोजन की 1/3 मात्रा और फासफोरस और पोटाश की पूरी मात्रा डालें बाकी बची नाइट्रोजन की दो मात्रा को टॉप ड्रेसिंग के तौर पर डालें नाइट्रोजन की पहली मात्रा को बीज वाली आंख के अंकुरण के समय और दूसरी मात्रा को बीज अंकुरण के 45 दिन बाद डालें 3 वर्षों के बाद गन्ने की गुलियों में 40-50 क्विंटल गाय का गोबर प्रति एकड़ में डालें पतझड़ के मौसम में 90-100 दिनों में नाइट्रोजन को टॉप ड्रेसिंग के तौर पर डालें और बसंत के मौसम में 150-160 दिन बाद डालनी चाहिए सिंचाई की संख्या मिट्टी की किस्म और पानी की उपलब्धता पर निर्भर करती है गर्मी के महीने में गर्म हवाओं और सूखे में वृद्धि होने के कारण फसल को पानी की जरूरत पड़ती है पहली सिंचाई फसल के 20-25 % अंकुरित होने पर करें मानसून में गन्ने को पानी और बारिश के आधार पर लगाएं कम वर्षा में सिंचाई 10 दिनों के अंतराल पर करें इसके बाद सिंचाई के अंतराल को बढ़ाकर 20-25 दिनों के अंतराल पर सिंचाई करें जमीन में नमी संभालने के लिए गन्ने की पंक्तियों में मलचिंग का प्रयोग करें अप्रैल जून के महीने में पानी की कमी ना होने दें इससे पैदावार कम होगी इसके इलावा बारिश के दिनों में पानी ना खड़ा होने दें जोताई का समय, वृद्धि का समय और अधिक विकास का समय सिंचाई के लिए बहुत नाज़ुक होता है मिट्टी को मेंड़ पर चढ़ाना: कसी की मदद से खालियों में और पौधे के किनारों पर मिट्टी चढ़ाई जाती है यह मिट्टी में अच्छी तरह से तैयार की गई खाद को अच्छी तरह से मिश्रित होने में मदद करती है पौधे को सहारा देने और उसे गिरने से बचाने में भी मदद करती है ज्यादा पैदावार और चीनी प्राप्त करने के लिए गन्ने की सही समय पर कटाई जरूरी है समय से पहले या बाद में कटाई करने से पैदावार पर प्रभाव पड़ता है किसान शूगर रीफरैक्टोमीटर का प्रयोग करके कटाई का समय पता लगा सकते हैं गन्ने की कटाई द्राती की सहायता से की जाती है गन्ना धरती से ऊपर थोड़ा हिस्सा छोड़कर काटा जाता है क्योंकि गन्ने में चीनी की मात्रा ज्यादा होती है कटाई के बाद गन्ना फैक्टरी में लेकर जाना जरूरी होता है

Posted by Neeraj
Uttar Pradesh
09-10-2019 05:57 PM
Neeraj ji please tell us in detail what is the condition of your field and also send the photo of field so that we can provide you proper information.thank you

Posted by Salwinder Sandhu
Punjab
09-10-2019 05:54 PM
salwinder ji kirpa karke isdi photo bhejo ta jo tuhanu is bare poori jankari diti ja sake.dhanwad
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