
Posted by Amit kumar
Uttar Pradesh
10-10-2019 06:57 AM
amit ji kripya aap apna swal vistar se pooche taki aapko iske bare men poori jankari di ja sake.dhanywad

Posted by Amit kumar
Uttar Pradesh
10-10-2019 06:54 AM
Amit ji kripya aap apna swal vitsar se pooche taki aapko iske bare men poori jankari di ja sake.dhanywad

Posted by hans
Rajasthan
10-10-2019 06:35 AM
हंस जी कृपया आप बताये कि खीरे में क्या दिक्कत आ रही है ताकि आपको इसके बारे में पूरी जानकारी दी जा सके धन्यवाद
Posted by akash singh
Punjab
10-10-2019 06:25 AM
ਪੌਦੇ ਦਾ ਤੇਲਾ: ਇਨ੍ਹਾਂ ਕੀਟਾਂ ਦਾ ਫ਼ਸਲ ਉਤੇ ਹਮਲਾ ਖੜ੍ਹੇ ਪਾਣੀ ਵਾਲੇ ਜਾਂ ਵਰਖਾ ਉਤੇ ਨਿਰਭਰ ਖੇਤਰਾਂ ਵਿਚ ਜ਼ਿਆਦਾ ਹੁੰਦਾ ਹੈ I ਇਨ੍ਹਾਂ ਦੀ ਮੌਜੂਦਗੀ ਦਾ ਅੰਦਾਜਾ ਬੂਟਿਆਂ ਦੇ ਭੂਰੇ ਰੰਗ ਵਿਚ ਤਬਦੀਲ ਹੋਣ ਜਾਂ ਡਿਮਕ ਦੀ ਮੌਜੂਦਗੀ ਅਤੇ ਪੌਦਿਆਂ ਦੀਆਂ ਜੜ੍ਹਾਂ ਨੇੜੇ ਸ਼ਹਿਦ ਵਰਗੀਆਂ ਬੂੰਦਾਂ ਦੀ ਮੌਜੂਦਗੀ ਤੋਂ ਲੱਗਦਾ ਹੈ I
ਜੇਕਰ ਇਨ੍ਹਾਂ ਦਾ ਹਮਲਾ ਦਿਖਾਈ ਦੇਵੇ ਤਾਂ 126 ਮਿਲੀਲੀਟਰ ਡਾ.... (Read More)
ਪੌਦੇ ਦਾ ਤੇਲਾ: ਇਨ੍ਹਾਂ ਕੀਟਾਂ ਦਾ ਫ਼ਸਲ ਉਤੇ ਹਮਲਾ ਖੜ੍ਹੇ ਪਾਣੀ ਵਾਲੇ ਜਾਂ ਵਰਖਾ ਉਤੇ ਨਿਰਭਰ ਖੇਤਰਾਂ ਵਿਚ ਜ਼ਿਆਦਾ ਹੁੰਦਾ ਹੈ I ਇਨ੍ਹਾਂ ਦੀ ਮੌਜੂਦਗੀ ਦਾ ਅੰਦਾਜਾ ਬੂਟਿਆਂ ਦੇ ਭੂਰੇ ਰੰਗ ਵਿਚ ਤਬਦੀਲ ਹੋਣ ਜਾਂ ਡਿਮਕ ਦੀ ਮੌਜੂਦਗੀ ਅਤੇ ਪੌਦਿਆਂ ਦੀਆਂ ਜੜ੍ਹਾਂ ਨੇੜੇ ਸ਼ਹਿਦ ਵਰਗੀਆਂ ਬੂੰਦਾਂ ਦੀ ਮੌਜੂਦਗੀ ਤੋਂ ਲੱਗਦਾ ਹੈ I
ਜੇਕਰ ਇਨ੍ਹਾਂ ਦਾ ਹਮਲਾ ਦਿਖਾਈ ਦੇਵੇ ਤਾਂ 126 ਮਿਲੀਲੀਟਰ ਡਾਇਕਲੋਰਵਾਸ ਜਾਂ 400 ਗ੍ਰਾਮ ਕਾਰਬਰਿਲ ਨੂੰ 250 ਲੀਟਰ ਪਾਣੀ ਵਿਚ ਮਿਸ਼ਰਨ (ਘੋਲ) ਤਿਆਰ ਕਰ ਕੇ ਪ੍ਰਤੀ ਏਕੜ ਦੇ ਹਿਸਾਬ ਨਾਲ ਛਿੜਕਾਅ ਕਰਨਾ ਚਾਹੀਦਾ ਹੈ ਜਾਂ 40 ਮਿਲੀਲੀਟਰ ਇਮਡਾਕਲੋਪਰਿਡ ਜਾਂ 25 ਈ.ਸੀ. ਪ੍ਰਤੀ 800 ਮਿਲੀਲੀਟਰ ਦੇ ਹਿਸਾਬ ਨਾਲ ਕਿਊਨਲਫੋਸ ਜਾਂ ਇਕ ਲੀਟਰ ਕਲੋਰਪਾਈਰੀਫੋਸ ਨੂੰ 100 ਲੀਟਰ ਪਾਣੀ ਵਿਚ ਮਿਲਾ ਕੇ ਪ੍ਰਤੀ ਏਕੜ ਦੇ ਹਿਸਾਬ ਨਾਲ ਛਿੜਕਾਅ ਕਰਨਾ ਚਾਹੀਦਾ ਹੈ I
ਸੁੰਡੀ : ਇਸ ਬਿਮਾਰੀ ਦੇ ਕੀਟਾਣੂਆਂ ਦਾ ਫਸਲ ਉਤੇ ਹਮਲਾ ਉੱਚ ਨਮੀ ਵਾਲੇ ਖੇਤਰਾਂ ਵਿਚ ਅਤੇ ਖਾਸ ਤੌਰ ਤੇ ਜਿਨ੍ਹਾਂ ਇਲਾਕਿਆਂ ਵਿਚ ਝੋਨੇ ਦੀ ਪੈਦਾਵਾਰ ਲਗਾਤਾਰ ਕੀਤੀ ਜਾ ਰਹੀ ਹੋਵੇ ਉਥੇ ਜ਼ਿਆਦਾ ਵੇਖਣ ਨੂੰ ਮਿਲਦਾ ਹੈ I ਇਸ ਕੀਟਾਣੂ ਦਾ ਲਾਰਵਾ ਪੱਤਿਆਂ ਨੂੰ ਲਪੇਟ ਦਿੰਦਾ ਹੈ ਅਤੇ ਬੂਟੇ ਦੇ ਤੰਤੂਆਂ ਨੂੰ ਖਾ ਜਾਂਦਾ ਹੈ I ਇਸ ਦੇ ਹਮਲੇ ਤੋਂ ਬਾਅਦ ਪੱਤਿਆਂ ਵਿਚ ਚਿੱਟੀਆਂ ਧਾਰੀਆਂ ਬਣ ਜਾਂਦੀਆਂ ਹਨ Iਰੋਕਥਾਮ : ਜੇਕਰ ਇਸ ਦੇ ਹਮਲੇ ਦੇ ਲੱਛਣ ਦਿਖਾਈ ਦੇਣ ਤਾਂ ਫਸਲ ਉਤੇ ਕਾਰਟਾਈਪ ਹਾਈਡ੍ਰੋਕਲੋਰਾਇਡ 170 ਗ੍ਰਾਮ ਜਾਂ ਟਰਾਈਜ਼ੋਫੋਸ 350 ਮਿਲੀਲੀਟਰ ਜਾ ਇਕ ਲੀਟਰ ਕਲੋਰਪਾਈਰੀਫੋਸ ਨੂੰ 100 ਲੀਟਰ ਪਾਣੀ ਵਿਚ ਮਿਲਾ ਕੇ ਪ੍ਰਤੀ ਏਕੜ ਦੇ ਹਿਸਾਬ ਨਾਲ ਛਿੜਕਾਅ ਕਰਨਾ ਚਾਹੀਦਾ ਹੈ I
Posted by SANJEEV KASHYAP
Uttar Pradesh
10-10-2019 06:25 AM
संजीव जी आप मटर की किस्मे जैसे Rachna: यह पूरे उत्तर प्रदेश में उगाने के लिए उपयुक्त किस्म है यह किस्म 130-135 दिनों में कटाई के लिए तैयार हो जाती है इसकी औसतन पैदावार 8-10 क्विंटल प्रति एकड़ होती है KPM: यह किस्म उत्तर प्रदेश के बुंदेलखंड क्षेत्रों में उगाने के लिए उपयुक्त है यह 125-130 दिनों में कटाई के लिए तैयार हो जाती है .... (Read More)
संजीव जी आप मटर की किस्मे जैसे Rachna: यह पूरे उत्तर प्रदेश में उगाने के लिए उपयुक्त किस्म है यह किस्म 130-135 दिनों में कटाई के लिए तैयार हो जाती है इसकी औसतन पैदावार 8-10 क्विंटल प्रति एकड़ होती है KPM: यह किस्म उत्तर प्रदेश के बुंदेलखंड क्षेत्रों में उगाने के लिए उपयुक्त है यह 125-130 दिनों में कटाई के लिए तैयार हो जाती है इसकी औसतन पैदावार 12-13 क्विंटल प्रति एकड़ होती है Shikha: यह किस्म 125-130 दिनों में कटाई के लिए तैयार हो जाती है इसकी औसतन पैदावार 10-12 क्विंटल प्रति एकड़ होती है Malviya Matar 2: यह किस्म उत्तर प्रदेश के पूर्वी क्षेत्रों में उगाने के लिए उपयुक्त है यह किस्म 125-130 दिनों में कटाई के लिए तैयार हो जाती है इसकी औसतन पैदावार 8-10 क्विंटल प्रति एकड़ होती है Malviya Matar 15: यह किस्म उत्तर प्रदेश के सभी क्षेत्रों में उगाने के लिए उपयुक्त है यह 120-125 दिनों में कटाई के लिए तैयार हो जाती है इसकी औसतन पैदावार 8-10 क्विंटल प्रति एकड़ होती है JP 885: यह किस्म उत्तर प्रदेश के बुंदेलखंड क्षेत्रों में उगाने के लिए उपयुक्त है यह 130-135 दिनों में कटाई के लिए तैयार हो जाती है इसकी औसतन पैदावार 8-10 क्विंटल प्रति एकड़ होती है DDR 23 (Pusa Prabhat): यह किस्म उत्तर प्रदेश के पूर्वी क्षेत्रों में उगाने के लिए उपयुक्त है यह किस्म 100-105 दिनों में कटाई के लिए तैयार हो जाती है इसकी औसतन पैदावार 6-7 क्विंटल प्रति एकड़ होती है Pant Matar 5: यह किस्म उत्तर प्रदेश के मैदानी इलाकों में उगाने के लिए उपयुक्त है यह 130-135 दिनों में कटाई के लिए तैयार हो जाती है इसकी औसतन पैदावार 8-10 क्विंटल प्रति एकड़ होती है Adarsh: यह किस्म उत्तर प्रदेश के बुंदेलखंड क्षेत्रों में उगाने के लिए उपयुक्त है यह 130-135 दिनों में कटाई के लिए तैयार हो जाती है इसकी औसतन पैदावार 9-10 क्विंटल प्रति एकड़ होती है Vikas: यह छोटे कद की किस्म है यह 100-105 दिनों में कटाई के लिए तैयार हो जाती है इसकी औसतन पैदावार 9-10 क्विंटल प्रति एकड़ होती है
Posted by Charanjit Singh Jhajj
Punjab
10-10-2019 05:49 AM
ਤੁਸੀ 9478810324 ਨੰਬਰ ਤੇ ਜਪਿੰਦਰ ਜੀ ਨਾਲ ਗੱਲ ਕਰੋ ਉਹ ਤੁਹਾਨੁੰ ਗਾਈਡ ਕਰਨਗੇ ਜੀ ਜਾਂ ਉਹ ਖੁਦ ਬਣਾ ਦੇਣਗੇ ਜੀ ।
Posted by Manoj Kumar
Bihar
10-10-2019 05:23 AM
यदि संभव हो, तो आलू की रोपाई से पहले, हरी खाद वाली फसलें जैसे सनई, जंतर आदि फसलें उगायें और उन्हें मिट्टी में अच्छी तरह दबायें यदि हरी खाद उपलब्ध ना हो तो गली सड़ी रूड़ी की खाद या गाय का गला हुआ गोबर 60-80 क्विंटल प्रति एकड़ में खेत की तैयारी के समय रोपाई से दो सप्ताह पहले डालें फसल की उचित वृद्धि के लिए नाइट्रोजन 40-50 क.... (Read More)
यदि संभव हो, तो आलू की रोपाई से पहले, हरी खाद वाली फसलें जैसे सनई, जंतर आदि फसलें उगायें और उन्हें मिट्टी में अच्छी तरह दबायें यदि हरी खाद उपलब्ध ना हो तो गली सड़ी रूड़ी की खाद या गाय का गला हुआ गोबर 60-80 क्विंटल प्रति एकड़ में खेत की तैयारी के समय रोपाई से दो सप्ताह पहले डालें फसल की उचित वृद्धि के लिए नाइट्रोजन 40-50 किलो (90-110 किलो यूरिया), फासफोरस 24-32 किलो (150-200 किलो सिंगल सुपर फासफेट) और पोटाश 40-50 किलो (66-85 किलो म्यूरेट ऑफ पोटाश) की मात्रा प्रति एकड़ में डालें

Posted by Manpreet singh
Punjab
10-10-2019 04:50 AM
ਹਾਜੀ ਸਤਿ ਸ਼੍ਰੀ ਅਕਾਲ ਜੀ ਤੁਹਾਡੇ ਵੱਲੋਂ ਪੁੱਛੇ ਸਾਰੇ ਸਵਾਲਾਂ ਦਾ ਜਵਾਬ ਦਾ ਦਿੱਤਾ ਜਾ ਚੁੱਕਿਆ ਹੈ ਤੁਸੀ ਆਪਣੇ ਸਵਾਲਾਂ ਦੇ ਜਵਾਬ ਦੇਖਣ ਲਈ ਐਪ ਵਿੱਚ ਮੇਰੇ ਸਵਾਲ ਤੇ ਕਲਿੱਕ ਕਰਕੇ ਜਾਂ ਫਿਰ ਮੇਰੀ ਪ੍ਰੋਫਾਈਲ ਦੇ ਹੇਠਾ ਆਪਣੇ ਸਵਾਲ ਜਵਾਬ ਦੇਖ ਸਕਦੇ ਹੋ ਵੀ ਜੇਕਰ ਤੁਹਾਨੂੰ ਜਵਾਬ ਸਬੰਧੀ ਕਿਸੇ ਤਰਾਂ ਦੀ ਸਮੱਸਿਆ ਆ ਰਹੀ ਹੈ ਤਾਂ ਤੁਸੀ ਸਾਡੇ ਹੈਲਪਲਾਈਨ ਨੰਬਰ: 97799-77641 ਤੇ ਕਾਲ ਕਰ ਸਕਦੇ .... (Read More)
ਹਾਜੀ ਸਤਿ ਸ਼੍ਰੀ ਅਕਾਲ ਜੀ ਤੁਹਾਡੇ ਵੱਲੋਂ ਪੁੱਛੇ ਸਾਰੇ ਸਵਾਲਾਂ ਦਾ ਜਵਾਬ ਦਾ ਦਿੱਤਾ ਜਾ ਚੁੱਕਿਆ ਹੈ ਤੁਸੀ ਆਪਣੇ ਸਵਾਲਾਂ ਦੇ ਜਵਾਬ ਦੇਖਣ ਲਈ ਐਪ ਵਿੱਚ ਮੇਰੇ ਸਵਾਲ ਤੇ ਕਲਿੱਕ ਕਰਕੇ ਜਾਂ ਫਿਰ ਮੇਰੀ ਪ੍ਰੋਫਾਈਲ ਦੇ ਹੇਠਾ ਆਪਣੇ ਸਵਾਲ ਜਵਾਬ ਦੇਖ ਸਕਦੇ ਹੋ ਵੀ ਜੇਕਰ ਤੁਹਾਨੂੰ ਜਵਾਬ ਸਬੰਧੀ ਕਿਸੇ ਤਰਾਂ ਦੀ ਸਮੱਸਿਆ ਆ ਰਹੀ ਹੈ ਤਾਂ ਤੁਸੀ ਸਾਡੇ ਹੈਲਪਲਾਈਨ ਨੰਬਰ: 97799-77641 ਤੇ ਕਾਲ ਕਰ ਸਕਦੇ ਹੋਂ

Posted by guri
Punjab
10-10-2019 04:15 AM
उसे आप कैल्शियम देनी बंद कर दें और उसका ज्यादा पानी पिलाएं बाकि इसका सिर्फ आॅपोशन करके इलाज हो सकता है

Posted by Pratap Singh Bundela
Uttar Pradesh
10-10-2019 03:18 AM
यदि आप डेयरी फार्मिंग बड़े स्तर पर करना चाहते है तो आप इसकी ट्रेनिंग लेकर इस काम को करें जिसमें आपको इस काम के बारे में सारी जानकारी प्राप्त होगी , वहां आपको इसके शेड को तैयार करना और उसमें पशुओं को सही तरीके से रखने के बारे में सारी जानकारी प्राप्त हो जाएगी आप एक बार में इक्ट्ठी गाय ना खरीदें गायों को 2-2 महीन.... (Read More)
यदि आप डेयरी फार्मिंग बड़े स्तर पर करना चाहते है तो आप इसकी ट्रेनिंग लेकर इस काम को करें जिसमें आपको इस काम के बारे में सारी जानकारी प्राप्त होगी , वहां आपको इसके शेड को तैयार करना और उसमें पशुओं को सही तरीके से रखने के बारे में सारी जानकारी प्राप्त हो जाएगी आप एक बार में इक्ट्ठी गाय ना खरीदें गायों को 2-2 महीनों के फासले पर खरीदें या फिर 3 पहले खरीदें ओर 3 महीने बाद फिर खरीद लें इससे दूध की कमी नहीं आयेगी पशु की नसल सबसे ज्यादा जरूरी है पशु खरीदने के समय कोशिश करें कि दिन में तीन बार दूध निकालकर ही पशु खरीदें भैंसो का एक दिन का दूध 12 लीटर और गायों को दूध 16-17 लीटर से कम ना हो गाभिनों को खरीदने का सही समय रखड़ियों से लेकर वैशाखी तक का होता है क्योंकि इस समय मौसम अच्छा होने के कारण हरा चारा भी खुला होता है गाभिनों के लिए शैड आवाजाई वाली सड़क पर ना बनायें और शैड सड़क से कम से कम 100 गज दूर हो शैड को धूप और हवा का ध्यान रखकर ही बनायें शैड हमेशा खेत या आस पास से 2 फुट ऊंचा बनायें क्योंकि निचले स्थान पर पानी खड़ा हो जाता है जिस कारण गंदगी पैदा हो जाती है और बाकी पशुओं का मल मूत्र का निकास भी आसानी से हो जाता है पशुओं के लिए बनायी जाने वाली खुरली ढाई तीन फुट चौड़ी होनी चाहिए खुरली पर खड़ने के लिए एक पशु को तकरीबन चार फुट जगह चाहिए मतलब 10 पशुओं के लिए 40 फुट लंबी खुरली बनेगी डेयरी फार्म से संबंधित सामान रखने के लिए स्टोर बनायें पशुओं का वितरण/दाना स्टोर करने के लिए कमरा सैलाब से रहित होना चाहिए शैड का फर्श पक्क, फिसलन रहित और जल्दी साफ होने वाला हो शैड में जितना हो सके पशुओं को खुला छोंड़े और पानी और दाना पूरा डालें पशु को खुला छोड़ने से पशुओं में अफारे की समस्या कम आती है बाकी अपनी आवश्यकता और क्षमता के मुताबिक ही सामान खरीदें और आर्थिक नुकसान से बचने के लिए प्रत्येक गाभिन का बीमा जरूर करवायें

Posted by Pratap Singh Bundela
Uttar Pradesh
10-10-2019 03:16 AM
मिर्च रेतली से भारी चिकनी हर तरह की मिट्टी में उगाई जा सकती है अच्छे विकास के लिए हल्की उपजाऊ और पानी के अच्छे निकास वाली ज़मीन जिसमे नमी सोखने की क्षमता हो, इसके लिए अनुकूल होती है हल्की ज़मीनें भारी ज़मीनों के मुकाबले अच्छी क्वालिटी की पैदावार देती हैं मिर्च के अच्छे विकास के लिए ज़मीन की pH 6-7 अनुकूल है आप इसकी .... (Read More)
मिर्च रेतली से भारी चिकनी हर तरह की मिट्टी में उगाई जा सकती है अच्छे विकास के लिए हल्की उपजाऊ और पानी के अच्छे निकास वाली ज़मीन जिसमे नमी सोखने की क्षमता हो, इसके लिए अनुकूल होती है हल्की ज़मीनें भारी ज़मीनों के मुकाबले अच्छी क्वालिटी की पैदावार देती हैं मिर्च के अच्छे विकास के लिए ज़मीन की pH 6-7 अनुकूल है आप इसकी किस्मे जैसे Arka Meghana,Arka Sweta,Kashi Early, Kashi Surkh की बिजाई कर सकते है खेत को तैयार करने के लिए 2-3 बार जोताई करें और प्रत्येक जोताई के बाद डलियों को तोड़ें बिजाई से 15-20 दिन पहले रूड़ी की खाद 150-200 क्विंटल प्रति एकड़ डालकर मिट्टी में अच्छी तरह मिला दें टमाटर और मिर्च की खेती एक ही या नज़दीक वाले खेत में ना करें, क्योंकि दोनों की बीमारियां एक जैसी होती हैं और इस कारण एंथ्राक्नोस और बैक्टीरिया वाली बीमारीयों के बढ़ने का खतरा बढ़ जाता है मिर्च की खेती पूरे वर्ष की जाती है खरीफ की फसल के लिए मई-जून और गर्मियों की फसल के लिए फरवरी - मार्च का समय मिर्च की रोपाई के लिए उपयुक्त होता है खरीफ के मौसम में 60-75 सैं.मी. x 45 सैं.मी. और सिंचित क्षेत्रों में 60 x 60 सैं.मी. फासले का प्रयोग करें नर्सरी में बीजों को 3-5 सैं.मी. की गहराई में बोयें और फिर मिट्टी से ढक दें इसकी मुख्य खेत में रोपाई की जाती है 1 मीटर चौड़े और आवश्यकतानुसार लंबे बैड बनाएं कीटाणु रहित कोकोपिट 300 किलो, 5 किलो नीम केक को मिलाए और 1-1किलो एज़ोसपीरिलियम और फासफोबैक्टीरिया भी डालें उपचार किए हुए बीज ट्रे में एक बीज प्रति सैल बोयें बीज को कोकोपिट से ढक दें और ट्रे एक- दूसरे के साथ रखें बीज अंकुरन तक इन्हें पॉलीथीन से ढक दें नर्सरी में बीज बीजने के बाद बैडों को 400 मैश नाइलोन जाल या पतले सफेद कपड़े से ढक दें यह नए पौधों को कीड़े-मकौड़े और बीमारियों के हमले से बचाता है 6 दिनों के बाद, ट्रे में लगे नए पौधों को एक एक करके जाल की छांव के नीचे बैडों में लगाएं बीज अंकुरन तक पानी देने वाले बर्तन की मदद से पानी दें बिजाई के 18 दिन बाद 19:19:19 की 0.5 % (5 ग्राम प्रति लीटर ) की स्प्रे करें किस्मों के लिए 200 ग्राम बीज और हाइब्रिड के लिए 80-100 ग्राम बीज प्रति एकड़ में प्रयोग करें बारानी क्षेत्रों के लिए, नाइट्रोजन 50 किलो (110 किलो यूरिया), फासफोरस 16 किलो (सिंगल सुपर फासफेट 100 किलो) और पोटाश 20 किलो (म्यूरेट ऑफ पोटाश 35 किलो) प्रति एकड़ डालें नाइट्रोजन की आधी मात्रा, फासफोरस और पोटाश की पूरी मात्रा पनीरी खेत में लगाने के समय डालें रोपाई के बाद बाकी बची नाइट्रोजन दो बराबर हिस्सों में 30वें और 50वें दिन डालें सिंचित क्षेत्रों के लिए, नाइट्रोजन 84 किलो (182 किलो यूरिया), फासफोरस 24 किलो (सिंगल सुपर फासफेट 150 किलो) और पोटाश 24 किलो (म्यूरेट ऑफ पोटाश 40 किलो) प्रति एकड़ डालें रोपाई से पहले 24 किलो नाइट्रोजन (यूरिया 52 किलो), फासफोरस की पूरी मात्रा और पोटाश की आधी मात्रा प्रति एकड़ में डालें बाकी बची नाइट्रोजन को पांच भागों में बांटें और पोटाश को तीन बराबर भागों में बांटें नाइट्रोजन 12 किलो (यूरिया 26 किलो) को बिजाई के बाद 45वें, 60वें, 75वें, 95वें और 115वें दिन डालें और पोटाश 4 किलो को बिजाई के बाद 45वें, 60वें, और 75वें दिन डालें 45 दिनों तक गोडाई करें, कही की मदद से मिट्टी चढ़ाएं और खेत को नदीन मुक्त रखें यदि नदीनों की रोकथाम ना की जाये तो यह 70-90 % पैदावार कम कर देते हैं रोपाई से पहले मुख्य खेत में पैंडीमैथालीन 1 लीटर प्रति एकड़ में डालें यदि नदीनों की संख्या ज्यादा हो तो उनके अंकुरण के बाद सेन्कोर 800 मि.ली की स्प्रे प्रति एकड़ में करें नदीनों की रोकथाम के साथ मिट्टी में नमी को बनाए रखने के लिए मलचिंग एक प्रभावी तरीका है मिट्टी में नमी के आधार पर सर्दियों में 6-7 दिनों के अंतराल पर और गर्मियों में 4-5 दिनों के अंतराल पर सिंचाई करें फूल निकलने की अवस्था सिंचाई के लिए गंभीर होती है इस अवस्था पर पानी की कमी से फल गिरते हैं जिससे फलों के उत्पादन में कमी होती है विभिन्न खोजों में यह पाया गया है, कि प्रत्येक पखवाड़े में आधा इंच सिंचाई से जड़ों में नमी ज्यादा होती है जिससे वे अधिक उपज देती हैं मिर्चों की तुड़ाई हरा रंग आने पर करें या फिर पकने के लिए पौधे पर ही रहने दें मिर्चों का पकने के बाद वाला रंग किस्म पर निर्भर करता है अधिक तुड़ाइयां लेने के लिए यूरिया 10 ग्राम प्रति लीटर और घुलनशील K @ 10 ग्राम प्रति लीटर पानी (1 प्रतिशत प्रत्येक का घोल) की स्प्रे 15 दिनों के फासले पर कटाई के समय करें पैकिंग के लिए मिर्चें पक्की और लाल रंग की होने पर तोड़ें सुखाने के लिए प्रयोग की जाने वाली मिर्चों की पूरी तरह पकने के बाद ही तुड़ाई करें
Posted by durgesh Kumar
Uttar Pradesh
10-10-2019 12:30 AM
टमाटर की पैदावार किस्में :- Hisar Arun (Selection 7): यह अगेती किस्म है और रोपाई के बाद 70 दिनों में पहली तुड़ाई के लिए तैयार हो जाती है इसके फलों की संख्या ज्यादा होती है और फल मध्यम से बड़े आकार के होते हैं इसकी औसतन पैदावार 100 क्विंटल प्रति एकड़ होती है Kashi Amrut (D.V.R.T 1): यह मध्यम फैलने वाली किस्म है इसके फल मध्यम, गोल होते हैं इसकी औसतन.... (Read More)
टमाटर की पैदावार किस्में :- Hisar Arun (Selection 7): यह अगेती किस्म है और रोपाई के बाद 70 दिनों में पहली तुड़ाई के लिए तैयार हो जाती है इसके फलों की संख्या ज्यादा होती है और फल मध्यम से बड़े आकार के होते हैं इसकी औसतन पैदावार 100 क्विंटल प्रति एकड़ होती है Kashi Amrut (D.V.R.T 1): यह मध्यम फैलने वाली किस्म है इसके फल मध्यम, गोल होते हैं इसकी औसतन पैदावार 160 क्विंटल प्रति एकड़ होती है Kashi Anupam: यह मध्यम ऊंचाई वाली अगेती बिजाई वाली किस्म है इसके फल बड़े और गोल होते हैं इसकी औसतन पैदावार 160 क्विंटल प्रति एकड़ होती है Kashi Vishesh (H -86): इसके फल मध्यम से बड़े आकार के होते हैं और यह किस्म पत्ता मरोड़ रोग की प्रतिरोधक है इसकी औसतन पैदावार 80-100 क्विंटल प्रति एकड़ होती है Pant Bahar: इस किस्म के फल गोल और मध्यम आकार के होते हैं Arka Vikas: यह किस्म IIHR, बैंगलोर द्वारा जारी की गई है यह 120 दिनों में तुड़ाई के लिए तैयार हो जाती है इसकी औसतन पैदावार 140-160 क्विंटल प्रति एकड़ होती है D T 10: इस किस्म का पौधा लंबा और फल मध्यम आकार के होते हैं इसकी औसतन पैदावार 120-140 क्विंटल प्रति एकड होती है Arka Saurabh: यह मध्यम ऊंचाई वाली किस्म है इसके फल बड़े आकार के होते हैं इस किस्म के फलों में दरारें नहीं पड़ती इसकी औसतन पैदावार 120-140 क्विंटल प्रति एकड़ होती है Pusa Hybrid 2: यह किस्म ICAR, नई दिल्ली द्वारा विकसित की गई है इसके फल चपटे, गोल और मोटे छिल्के वाले होते हैं इसकी औसतन पैदावार 220 क्विंटल प्रति एकड़ होती है Avinash 2: यह मध्यम ऊंचाई वाली किस्म है इसके फल गोल और गहरे लाल रंग के होते हैं इसकी औसतन पैदावार 240 क्विंटल प्रति एकड़ होती है S.T.H 537: यह हाइब्रिड किस्म है इसकी औसतन पैदावार 320 क्विंटल प्रति एकड़ होती है ARTH-3: यह किस्म रोपाई के बाद 80-85 दिनों में तुड़ाई के लिए तैयार हो जाती है इसकी औसतन पैदावार 350-380 क्विंटल प्रति एकड़ होती है Gotya: यह किस्म रोपाई के बाद 70-75 दिनों में तुड़ाई के लिए तैयार हो जाती है इसकी औसतन पैदावार 240 क्विंटल प्रति एकड़ होती है N.S 815: यह किस्म रोपाई के बाद 75-80 दिनों में तुड़ाई के लिए तैयार हो जाती है इसकी औसतन पैदावार 240 क्विंटल प्रति एकड़ होती है BSS 99: यह लंबी किस्म है इसकी औसतन पैदावार 280 क्विंटल प्रति एकड़ होती है

Posted by vinod meena
Madhya Pradesh
10-10-2019 12:01 AM
vinod ji yeh keet ke hamle ke karn hota hai iski roktham ke liye aap imidacloprid@60ml ko prati acre ke hisab se spray karen.dhanywad

Posted by Vineet Kumar Yadav
Uttar Pradesh
09-10-2019 11:12 PM
इसे मिट्टी की कई किस्मों, रेतली दोमट से चिकनी मिट्टी में उगाया जा सकता है अच्छे निकास वाली मिट्टी जिसकी पी एच 6 से 7.5 हो, में उगाने पर यह अच्छे परिणाम देती है यह फसल जलजमाव वाले हालातों में खड़ी नहीं रह सकती अम्लीय मिट्टी के लिए, चूना डालें Arkal: यह छोटे कद की और जल्दी पकने वाली किस्म है इसकी फलियां लंबी और गहरे हरे .... (Read More)
इसे मिट्टी की कई किस्मों, रेतली दोमट से चिकनी मिट्टी में उगाया जा सकता है अच्छे निकास वाली मिट्टी जिसकी पी एच 6 से 7.5 हो, में उगाने पर यह अच्छे परिणाम देती है यह फसल जलजमाव वाले हालातों में खड़ी नहीं रह सकती अम्लीय मिट्टी के लिए, चूना डालें Arkal: यह छोटे कद की और जल्दी पकने वाली किस्म है इसकी फलियां लंबी और गहरे हरे रंग की होती हैं इसकी औसतन पैदावार 16-18 क्विंटल प्रति एकड़ होती है Bonneville: यह मध्यम समय की किस्म है इसके फलियां मीठे दानों वाली होती हैं इसकी औसतन पैदावार 36 क्विंटल प्रति एकड़ होती है Multi Freezer: यह देरी से पकने वाली किस्म है इसकी फलियां मीठी और नर्म होती हैं यह ठंड को सहनेयोग्य किस्म हैं इसकी औसतन पैदावार 25 क्विंटल प्रति एकड़ होती है Azad P-I: यह छोटे कद की किस्म है इसके दाने झुर्रीदार होते हैं इसकी औतसन पैदावार 16 क्विंटल प्रति एकड़ होती है Early E-6: यह किस्म पंजाब एग्रीकल्चर यूनिवर्सिटी द्वारा विकसित की गई है इसकी औसतन पैदावार 40 क्विंटल प्रति एकड़ होती है खरीफ ऋतु की फसल की कटाई के बाद, सीड बैड तैयार करने के लिए हल से 1 या 2 बार जोताई करें हल से जोतने के बाद 2 या 3 बार तवियों से जोताई करें जल जमाव से रोकने के लिए खेत को अच्छी तरह समतल कर लेना चाहिए बिजाई से पहले, खेत की एक बार सिंचाई करें जो कि फसल के अच्छे अंकुरन में सहायक होती है फसल को मिट्टी से पैदा होने वाले कीटों और बीमारियों से बचाने के लिए ट्राइकोडरमा विराइड 10 किलो को अच्छी तरह से गले हुए गाय के गोबर 25-30 किलो को आखिरी जोताई के समय प्रति एकड़ में डालें अच्छी उपज प्राप्त करने के लिए बिजाई अक्तूबर से नवंबर के मध्य में पूरी कर लें बिजाई में देरी होने से उपज में काफी नुकसान होता है कतारों में 30-40 सैं.मी. और पौधें में 3-5 सैं.मी. फासले का प्रयोग करें लंबी किस्मों के लिए 32-40 किलो बीज प्रति एकड़ में प्रयोग करें और छोटे कद की किस्मों के लिए 50 किलो बीज प्रति एकड़ में प्रयोग करें बिजाई के समय नाइट्रोजन 13 किलो (30 किलो यूरिया), फासफोरस 24 किलो (150 किलो सिंगल सुपर फासफेट) और पोटाश 18 किलो (म्यूरेट ऑफ पोटाश 30 किलो) की मात्रा प्रति एकड़ में प्रयोग करें फासफोरस, पोटाश की पूरी मात्रा और नाइट्रोजन की आधी मात्रा बिजाई के समय डालें बाकी बची नाइट्रोजन को बिजाई के एक महीने बाद डालें छोटे कद की किस्मों के लिए नाइट्रोजन की 8 किलो मात्रा बिजाई के समय डालें एक या दो गोडाई करना यह किस्म पर निर्भर करता है पहली गोडाई, फसल की बिजाई के 3-4 सप्ताह बाद या जब फसल 2 या 3 पत्ते निकाल लेती है और दूसरी गोडाई, फूल निकलने से पहले करें मटरों की खेती के लिए नदीन नाशकों का प्रयोग बहुत प्रभावशाली होता है फ्लूक्लोरालिन 45 ई सी 800 मि.ली. को 100-150 लीटर पानी में मिलाकर बीज बोने से पहले खेत में डालें नदीनों की रोकथाम के लिए पैंडीमैथालीन 1 लीटर प्रति एकड़ या बसालिन 1 लीटर प्रति एकड़ का प्रयोग फसल बीजने से 48 घंटों के अंदर करें
Posted by Bhojraj Singh
Uttar Pradesh
09-10-2019 10:53 PM
Bhojraj ji aap iske uper NPK 191919 ek kilo ko 150 litre pani ke hisab se spray karen.dhanywad

Posted by Rajesh Kumar Rajesh Kumar
Bihar
09-10-2019 10:19 PM
rajesh ji kripya aap apna swal vitsar se pooche taki aapko iske bare men poori jankari di ja sake.dhanywad

Posted by MANAV
Maharashtra
09-10-2019 10:17 PM
Manav ji aap iske uper copper oxychloride@3 gram ko prati litre pani ke hisab se spray karen.dhanywad

Posted by Shiv Rathore
Madhya Pradesh
09-10-2019 10:14 PM
शिव जी कृपया आप अपना सवाल विस्तार से पूछे ताकि आपको इसके बारे में पूरी जानकारी दी जा सके धन्यवाद
Posted by satinderbir singh
Punjab
09-10-2019 10:04 PM
Satinderbir ji kirpa karke daso ke tuhada budget kina hai ate tuc kehdi company da tractor laina chahunde ho ta jo tuhanu is bare poori jankari diti ja sake.dhanwad
Posted by manoj kumawat
Madhya Pradesh
09-10-2019 10:00 PM
अच्छे जल निकास वाली उपजाऊ दोमट मिट्टी में उगाने पर यह अच्छे परिणाम देती है मिट्टी की पी एच 6 से 7.5 सोयाबीन की अच्छी उपज के लिए अनूकूल होती है जल जमाव, खारी और क्षारीय मिट्टी सोयाबीन की खेती के लिए अनुकूल नहीं होती कम तापमान भी इस फसल को गंभीर रूप से प्रभावित करता है JS 93-05: यह किस्म तना गलन, फली और कली के झुलस रोग की .... (Read More)
अच्छे जल निकास वाली उपजाऊ दोमट मिट्टी में उगाने पर यह अच्छे परिणाम देती है मिट्टी की पी एच 6 से 7.5 सोयाबीन की अच्छी उपज के लिए अनूकूल होती है जल जमाव, खारी और क्षारीय मिट्टी सोयाबीन की खेती के लिए अनुकूल नहीं होती कम तापमान भी इस फसल को गंभीर रूप से प्रभावित करता है JS 93-05: यह किस्म तना गलन, फली और कली के झुलस रोग की प्रतिरोधक किस्म है इसके बीज हरे पीले रंग के होते हैं JS 95-60: यह किस्म 82-88 दिनों में कटाई के लिए तैयार हो जाती है यह तना गलन और विभन्न प्रकार के कीटों की प्रतिरोधक किस्म है JS 335: यह जल्दी पकने वाली किस्म है जो कि बैक्टीरियल झुलस रोग के प्रतिरोधी और तने की मक्खी, कली के झुलस रोग के प्रतिरोधी किस्म है इसकी औसतन पैदावार 10-12 क्विंटल प्रति एकड़ होती है रबी की मौसम की कटाई के बाद या अप्रैल महीने में गहरी जोताई करें इसकी मदद से कीटों के अंडे नष्ट हो जाएंगे जोताई के बाद तीन-चार बार सुहागा फेरें और मिट्टी को समतल करें ताकि खेत में पानी ना खड़ा हो सके सोयाबीन के लिए जून के तीसरे सप्ताह से मध्य जुलाई का महीना खेती के लिए अनुकूल होता है बीजों को तभी बोयें, जब मिट्टी में आवश्यक मात्रा में नमी हो (2-3 दिनों में कम से कम 50-60 मि.मी. वर्षा हुई हो) बिजाई के लिए कतार से कतार का 10-12 इंच और पौधे से पौधे का फासला 4-7 सैं.मी. रखें नमी की उचित मात्रा में बीजों को 3-4 सैं.मी. की गहराई में बोयें ज्यादा गहराई में ना बोयें, क्योंकि यह अंकुरण को प्रभावित करता है बीजों को सीड ड्रिल की सहायता से बोयें एक एकड़ खेत में 25-30 किलोग्राम बीजों का प्रयोग करें बिजाई के समय गली हुई रूड़ी की खाद और गाय का गला हुआ गोबर 4 टन और नाइट्रोजन 10 किलो (यूरिया 25 किलो) और फासफोरस 24 किलो (एस एस पी 150 किलो), पोटाश 8 किलो (म्यूरेट ऑफ पोटाश 15 किलो) प्रति एकड़ में डालें इन तत्वों के साथ 8 किलो सलफर प्रति एकड़ में डालें अच्छी वृद्धि और अच्छी उपज के लिए यूरिया 3 किलो को 150 लीटर पानी में मिलाकर बिजाई के बाद 60 वें और 75 वें दिन स्प्रे करें खेत को नदीन मुक्त करने के लिए दो गोडाई की आवश्यकता होती है, पहली गोडाई बिजाई के 15-20 दिन बाद और दूसरी गोडाई बिजाई के 30-40 दिन बाद करें रासायनिक तरीके से नदीनों को रोकने के लिए बिजाई के बाद दो दिनो में पैंडीमैथालीन 900 मि.ली. को 100-200 लीटर पानी में मिलाकर स्प्रे करें या इमाजेथापर 150&170 मि.ली. को 150-200 लीटर पानी में मिलाकर बिजाई के 15 से 20 दिन बाद बूटीनाशक के तौर पर डालें बारानी फसल होने के कारण इसे सिंचाई की आवश्यकता नहीं होती बारिश की स्थिति के आधार पर सिंचाई का उपयोग करें फली बनने के समय सिंचाई आवश्यक है इस समय पानी की कमी उपज को काफी प्रभावित करती है जब फलियां सूख जाएं और पत्तों का रंग बदल कर पीला हो जाए और पत्ते गिर जाएं, तब फसल कटाई के लिए तैयार होती है कटाई हाथों से या दराती से करें कटाई के बाद पौधों में से बीजों को निकाल लें
Posted by ਸਰਦਾਰ ਜੀ
Punjab
09-10-2019 09:59 PM
ਤੁਸੀ ਗੋਭੀ ਦੀ ਪਨੀਰੀ ਲੈਣ ਲਈ Gencore Greenhouse 9357246009 ਜੀ ਨਾਲ ਸੰਪਰਕ ਕਰ ਸਕਦੇ ਹੋ ਧੰਨਵਾਦ

Posted by pankaj kumar
Bihar
09-10-2019 09:53 PM
खुम्ब की किस्में कई प्रकार की होती है जैसे कि बटन खुम्ब, डीगरी, शटाकी खुम्ब, पराली खुम्ब, और मिलकी खुम्ब इनमे से कुइ खुम्ब सर्दियो के मौसम में और कुछ गर्मीयों के मौसम में लगाये जाते है और हर खुम्ब को लगाने का समय अलग अलग है जैसे बटन खुम्ब का समय सितंबर से मार्च तक होता है इस समय में हम तीन फसले ले सकते है शटाकी ख.... (Read More)
खुम्ब की किस्में कई प्रकार की होती है जैसे कि बटन खुम्ब, डीगरी, शटाकी खुम्ब, पराली खुम्ब, और मिलकी खुम्ब इनमे से कुइ खुम्ब सर्दियो के मौसम में और कुछ गर्मीयों के मौसम में लगाये जाते है और हर खुम्ब को लगाने का समय अलग अलग है जैसे बटन खुम्ब का समय सितंबर से मार्च तक होता है इस समय में हम तीन फसले ले सकते है शटाकी खुम्ब का समय अक्तूबर से मध्य फरवरी तक हैं इस समय हम एक फसल ही ले सकते है पराली खुम्ब का समय अप्रैल से अगस्त तक है इस समय हम चार फसले ले सकते है मिलकी खुम्ब का समय अप्रैल से सितंबर तक है आप अब अप्रैल में मिलकी या पराली खुम्ब लगा सकते है पराली खुमब के लिए आपको पराली, बीज, बांस, सेबा, आदि की जरूरत है पराली के पूले, धानो की पराली 1-1 किलो के पूले दोनो सिरो से सेबे से बांध कर तैयार किये जाते है पूले के सिरे कांट कर एक सार कर लिए जाते है पूलो की क्यिारी लगाना पराली के पूलो को साफ पानी में 16-20 घंटो के लिए डूबो दे गिले पूलो को ढलान पर रख कर फालतू पानी को निकलने दे कमरे ईटो और बांस से एक पलेटफार्म बनाये इस पलेटफार्म पर 5 पूलो की एक तहय लगाये जिसके ऊपर 75 ग्राम बीज डाले इसके ऊपर की तहय उलट होती है इस प्रकार 5-5 पूलो की तहय में 300 ग्राम बीज डाल कर कियारी तैयार करे सबसे ऊपर दो पूलो को खोलकर रख दे खुम्बो का फूटना बिजाई से 7-9 दिनो के बाद खुम्ब फूटने लगती है पानी और हवा का संचार बिजाई के दो दिन के बाद हर रोज पानी का छिडका करे खुम्बो के फूटने के बाद हवा का संचार 6-8 घंटे प्रति दिन किया जाता है खुम्बो की तूडाई खुम्बो के फूटने के बाद 1-2 दिनो के बाद तोडाई के योग्य हो जाती है मिलकी खुम्ब मिलकी खुम्ब के लिए तूडी, बीज, मोमी लिफाफे, सेबा, केसिंग,मिट्टी आदि होने चाहिये तूडी की तैयारी सूकी तूडी को पक्के फर्श पर बिछा कर 16-20 घंटे पानी से गिला करे गिली तूडी को बोरी में भर कर सेबे से बांध दे इस बोरी को उबलते पानी में 45-50 मिनट रखें तूडी को निकालकर पक्के फर्श पर बिछा कर ठंडा करे यह तूडी बिजाई के लिए तैयार है बिजाई ठंडी तूडी में बीज मिलाकर मोमी लिफाफो में भर दें एक मोमी लिफाफें में लगभग 2 किलो गिली तूडी और 70-80 ग्राम बीज पडता है लिफाफे के मुंह को सेबे से अच्छी तरह बांध कर कमरे में रख दे केसिंग बिजाई के दो तीन हफतो के बाद लिफाफे खोलकर केसिंग की 1-1.5 की तहय लगा दें केसिंग में तूडी और रेतली मिट्टी होती है 24 घंटो के लिए 4 प्रतिशत फारमलेन के घोल से जीवाणु रहित किया जाता है खुम्बो का फूटना केसिंग मिट्टी डालने के लगभग दो हफतो में खुम्बो के छोटे छोटे किणके निकलने शुरू हो जाते है और 4-5 दिन के बाद तोडने योग्य हो जाते है खुम्बो की तूडाई लगभग 35-40 दिनो तक की जाती है इसका बीज लेने के लिए आप Mr. jai 8882876224 जी से संपर्क कर सकते है

Posted by Ranjit Singh
Punjab
09-10-2019 09:52 PM
ਕਣਕ ਦੀ ਬਿਜਾਈ ਸਹੀ ਸਮੇਂ ਤੇ ਕਰਨੀ ਜਰੂਰੀ ਹੈ ਪਿਛੇਤੀ ਬਿਜਾਈ ਦਾ ਫਸਲ ਦੀ ਪੈਦਾਵਾਰ ਤੇ ਬੁਰਾ ਅਸਰ ਪੈਂਦਾ ਹੈ ਕਣਕ ਦੀ ਬਿਜਾਈ 25 ਅਕ੍ਤੂਬਰ ਤੋਂ ਨਵੰਬਰ ਮਹੀਨੇ ਵਿੱਚ ਕੀਤੀ ਜਾਂਦੀ ਹੈ

Posted by durgesh pareta
Rajasthan
09-10-2019 09:50 PM
durgesh pareta ji kripya aap apna swal vistar se pooche taki aapko iske bare men poori jankari di ja sake.dhanywad

Posted by Ravi Mehara
Rajasthan
09-10-2019 09:50 PM
Ravi ji mirch men mashar ka hamla check karen agar maujood hai to aap iske uper imidacloprid@60ml ko prati acre ke hisab se spray karen.dhanywad

Posted by Ravi Mehara
Rajasthan
09-10-2019 09:46 PM
रवि जी आप टमाटर की किस्मे जैसे Pusa Rubi: यह किस्म IARI, नई दिल्ली द्वारा विकसित की गई है यह किस्म बसंत और सर्दियों में उगाने के लिए उपयुक्त है इसकी औसतन पैदावार 133 क्विंटल प्रति एकड़ होती है
Pusa Early Dwarf: यह किस्म IARI, नई दिल्ली द्वारा विकसित की गई है इसके फल मध्यम छोटे और तना पीला होता है यह किस्म रोपाई के बाद 75-80 दिनों में कट.... (Read More)
रवि जी आप टमाटर की किस्मे जैसे Pusa Rubi: यह किस्म IARI, नई दिल्ली द्वारा विकसित की गई है यह किस्म बसंत और सर्दियों में उगाने के लिए उपयुक्त है इसकी औसतन पैदावार 133 क्विंटल प्रति एकड़ होती है
Pusa Early Dwarf: यह किस्म IARI, नई दिल्ली द्वारा विकसित की गई है इसके फल मध्यम छोटे और तना पीला होता है यह किस्म रोपाई के बाद 75-80 दिनों में कटाई के लिए तैयार हो जाती है इसकी औसतन पैदावार 140 क्विंटल प्रति एकड़ होती है
Punjab Chhuhara: इसके फल बीज रहित, नाशपाति के आकार के, लाल और बाहरी मोटी परत के होते हैं इसकी गुणवत्ता कटाई के बाद 7 दिनों तक मंडी लायक होती है इसलिए इस किस्म को लंबी दूरी वाले स्थानों और नए उत्पाद बनाने के लिए प्रयोग किया जाता है
Pusa 120: यह किस्म IARI, नई दिल्ली द्वारा विकसित की गई है इसके फल मध्यम छोटे, नर्म, आकर्षित और तना पीले रंग का होता है यह किस्म नेमाटोड के प्रतिरोधी किस्म है
Roma Selection 120: यह किस्म IARI, नई दिल्ली द्वारा विकसित की गई है यह किस्म जड़ गलन के प्रतिरोधी किस्म है
Pant Bahar: इसके फल गोल, मध्यम आकार के होते हैं
Arka Vikas: यह किस्म IIHR, बैंगलोर द्वारा जारी की गई है यह जल्दी पकने वाली और उच्च उपज वाली किस्म है इसके फल मध्यम-बड़े, गोल, गहरे लाल रंग के होते हैं
Hisar Aruna : यह किस्म HAU, हिसार द्वारा विकसित की गई है यह जल्दी पकने वाली और उच्च उपज वाली किस्म है इसके फल मध्यम -बड़े, गोल, गहरे लाल रंग के होते हैं
Karnataka Hybrid: इस किस्म की फसल रोपाई के 80 दिनों के बाद कटाई के लिए तैयार हो जाती है इसके फल लंबे और अंडाकार होते हैं यह किस्म सूखा और नेमाटोड के प्रतिरोधक किस्म है
Marglobe: यह किस्म IARI, नई दिल्ली द्वारा जारी की गई है इसके फल बड़े, गोल, नर्म और रसदार होते हैं

Posted by sachin
Uttar Pradesh
09-10-2019 09:45 PM
आप दूध निकालने वाली मशीन लेना चाहते है तो आप इनमें से किसी भी कंपनी की ले सकते है जैसे Vansum Pvt.Ltd. 9811104804, Solutions packing machine 9569010005 , Milkwell Milking machine 9416003826.
Posted by राकेश यादव
Uttar Pradesh
09-10-2019 09:35 PM
राकेश जी आप खेत की फेंसिंग करें इस से खेत में आवारा पशुओं से होने वाले नुक्सान से बचा जा सकता है धन्यवाद
Posted by राकेश यादव
Uttar Pradesh
09-10-2019 09:31 PM
राकेश जी कुछ किसानो को इसकी तीसरी किश्त आ गयी है बाकियों को त्योहारों के बाद आ जाएगी लेकिन अब सरकार उन किसानो के खाते में पैसा भेजेगी जिनके kisan card और आधार कार्ड आपस में लिंक है अगर आप सरकार की इन शर्तो की पूर्ती करते है तो आपके खाते में अगली किश्त भी आ जाएगी धन्यवाद

Posted by babu
Uttar Pradesh
09-10-2019 09:28 PM
राइजोबियम एक ही होता है मूंग की फसल से मिटटी को वही मिलता है धन्यवाद
Posted by मनु त्यागी
Uttar Pradesh
09-10-2019 09:22 PM
आप उसे रोजाना 35—40 किलो हरा चारा डालें इसे अच्छी खुराक के साथ साथ पेट के कीड़ों के लिए Flukarid-DS bolus दें और Anabolite liquid 100ml रोजाना और Milkout पाउडर 2—2 चम्मच सुबह शाम दें इनका दूध बढ़ाने में अच्छा परिणाम है, बाकि आप इसे गेहूं का दलिया भी बनाकर खिला सकते हैं

Posted by simran
Maharashtra
09-10-2019 09:13 PM
मोती की खेती एक बहुत ही अच्छा व्यवसाय है इस व्यवसाय को शुरू करने के लिए सबसे जरुरी है इसकी ट्रेनिंग, क्योकि इसमें बहुत सी ऐसी बारीकियें होती है जो हमें प्रेक्टिकल ट्रेनिंग में ही सीखने को मिलती है अगर आप इसकी ट्रेनिंग लेना चाहते है तो आप ग्लिटराटी पर्ल फार्मिंग ट्रेनिंग केंद्र प्रशिक्षण कार्य कर्म आयोजि.... (Read More)
मोती की खेती एक बहुत ही अच्छा व्यवसाय है इस व्यवसाय को शुरू करने के लिए सबसे जरुरी है इसकी ट्रेनिंग, क्योकि इसमें बहुत सी ऐसी बारीकियें होती है जो हमें प्रेक्टिकल ट्रेनिंग में ही सीखने को मिलती है अगर आप इसकी ट्रेनिंग लेना चाहते है तो आप ग्लिटराटी पर्ल फार्मिंग ट्रेनिंग केंद्र प्रशिक्षण कार्य कर्म आयोजित किया जा रहा है प्रशिक्षण कार्य कर्म में भाग लेने के लिए नीचे दिए गए नम्बर पर आज ही संपर्क करें और Rs 250/ से अपना रजिस्ट्रेशन करवाए अचल सिंह (फाउंडर )- 9711858258. धन्यवाद
Posted by upendra Singh
Bihar
09-10-2019 09:11 PM
खेत की तैयारी के समय (यूरिया 56 किलो), (एस एस पी 78 किलो) और म्यूरेट ऑफ पोटाश 20 किलो) को शुरूआती खुराक के तौर पर डालें बिजाई के समय नाइट्रोजन के 1/3 हिस्से के साथ फासफोरस और पोटाश डालें बेलों के शुरूआती विकास के समय या बिजाई के 1 महीने बाद बाकी की मात्रा डालें

Posted by Tekesh pardhi
Madhya Pradesh
09-10-2019 09:02 PM
अगर आप मुर्गी पालन करना चाहते है तो बहुत अच्छी बात है , इसके लिए अगर आपने लोन लेना है तो आपके पास पोल्ट्री फार्मिंग की ट्रेनिंग का सर्टिफिकेट होना चाहिए , उसी ट्रेनिंग में आपको सब्सिड़ी के बारे में जानकारी मिलेगी उस सर्टिफिकेट के बेस पर ही आप लोन के लिए अप्लाई कर सकते हो , इसके लिए आप अपने नज़दीकी ज़िले के कृषि व.... (Read More)
अगर आप मुर्गी पालन करना चाहते है तो बहुत अच्छी बात है , इसके लिए अगर आपने लोन लेना है तो आपके पास पोल्ट्री फार्मिंग की ट्रेनिंग का सर्टिफिकेट होना चाहिए , उसी ट्रेनिंग में आपको सब्सिड़ी के बारे में जानकारी मिलेगी उस सर्टिफिकेट के बेस पर ही आप लोन के लिए अप्लाई कर सकते हो , इसके लिए आप अपने नज़दीकी ज़िले के कृषि विज्ञानं केंद्र में ट्रेनिंग के लिए फॉर्म भरे और उसके बाद जब ट्रेनिंग शुरू हुई तो आपको कॉल करके बुला लिया जायेगा , ट्रेनिंग करने के बाद अपने नज़दीकी पशु पालन विभाग और नाबार्ड के ऑफिस जा कर लोन की फाइल लगा सकते हो , लोन की फाइल लगाने के बाद आप बैंक मैनेजर से बात करे वह आपकी फाइल देख कर आपको आगे गाइड करेंगे, इसलिए आप इस काम को ट्रेनिंग लेकर शुरू करें जिससे आपको इस काम के बारे में पूरी जानकारी प्राप्त हो जाएगी

Posted by Sunil chaudhary
Uttar Pradesh
09-10-2019 08:57 PM
फीड आप सभी पशुओं को खिला सकते है इसमें आनाज, खल, चोकर, मिर्नल मिक्सर्च आदि शामिल होते है जो पशुओं की ग्रोथ के लिए अच्छी होती है जो पशु आसानी से खा जाए तो उसे ही फीड डालें

Posted by Atul Singh
Uttar Pradesh
09-10-2019 08:50 PM
Atul ji its fungus to control this do a spray of tilt@200ml per acre.thank you
Posted by jora Singh
Punjab
09-10-2019 08:44 PM
jora ji kirpa karke apna swal vistar nal pucho ta jo tuhanu is bare poori jankari diti ja sake.dhanwad

Posted by ਗੁਰਕੀਰਤ ਖਹਿਰਾ
Punjab
09-10-2019 08:43 PM
श्रीमान जी बास्मती में पत्ता लपेट सुंडी की रोकथाम के लिए परोकलेम 80 ग्राम प्रति एकड़ के हिसाब से स्प्रे कर सकते है

Posted by ਗੁਰਕੀਰਤ ਖਹਿਰਾ
Punjab
09-10-2019 08:41 PM
ਗੁਰਕੀਰਤ ਜੀ ਪੱਤਾ ਲਪੇਟ ਸੁੰਡੀ ਦੀ ਰੋਕਥਾਮ ਦੇ ਲਈ ਤੁਸੀ fame @20 ml ਜਾ coragen @60ml ਨੂੰ ਪ੍ਰਤੀ ਏਕੜ ਦੇ ਹਿਸਾਬ ਨਾਲ ਸਪਰੇ ਕਰੋ ਧੰਨਵਾਦ
Posted by Rakesh Kumar
Uttar Pradesh
09-10-2019 08:31 PM
राकेश जी कृपया आप इसकी फोटो भेजे ताकि आपको इसके बारे में पूरी जानकारी दी जा सके धन्यवाद

Posted by suresh kumar rajput
Uttar Pradesh
09-10-2019 08:29 PM
ये कीड़े फूल निकलने के समय हमला करते हैं और फूलों पर नई टहनियों को खाकर दाने बनने से रोकते हैं
यदि इसका नुकसान दिखे तो इंडोएक्साकार्ब 14.5 एस सी 200 मि.ली. या एसीफेट 75 एस सी 800 ग्राम प्रति एकड़ की स्प्रे करें स्प्रे शाम के समय करें जरूरत पड़ने पर पहली स्प्रे के 10 दिनों के बाद दूसरी स्प्रे करें

Posted by vikas
Rajasthan
09-10-2019 08:20 PM
पशु का दूध उसकी नस्ल पर निर्भर करता है, यदि नस्ल बढ़िया है तो दूध भी बढ़िया होगा, बाकि खुराक, पशु के रहने की जगह सही, समय-समय पर डीवॉर्मिंग करवाना, इन सभी बातों का पूरा ध्यान रखना ज़रूरी है इसके साथ आप 250 ग्राम गुड़ और 2 किलो दलिया अच्छी तरह गर्म करके फिर उसमें 100 ग्राम सरसों का तेल मिक्स करें इसे आधा आधा करके सुबह शाम .... (Read More)
पशु का दूध उसकी नस्ल पर निर्भर करता है, यदि नस्ल बढ़िया है तो दूध भी बढ़िया होगा, बाकि खुराक, पशु के रहने की जगह सही, समय-समय पर डीवॉर्मिंग करवाना, इन सभी बातों का पूरा ध्यान रखना ज़रूरी है इसके साथ आप 250 ग्राम गुड़ और 2 किलो दलिया अच्छी तरह गर्म करके फिर उसमें 100 ग्राम सरसों का तेल मिक्स करें इसे आधा आधा करके सुबह शाम दे सकते हैं इस तरह आप 5—7 दिन दें, इससे दूध बढ़ जाएगा. बाकि आप Anabolite liqued 100ml रोज़ाना देना शुरू करें और आप Milkout पाउडर के 2—2 चम्मच सुबह शाम दें इसका भी दूध बढ़ाने में बढ़िया परिणाम है आप पशु की खुराक का ध्यान रखें

Posted by jaat
Uttar Pradesh
09-10-2019 08:18 PM
उसे आप 250 ग्राम गुड, 250 ग्राम गुलकंद, 100 ग्राम सौंफ और 100 ग्राम सूखे आंवले और 50 ग्राम अज्वाइण उबाल कर फिर ठंडा करके 5—7 दिन दें बाकि उसे Anabolite liquid 100ml रोजाना देना शुरू करें और Lactomax रोजाना 10 गोलियां दें और 20 दिनों तक देते रहें इससे फर्क पड़ जाएगा

Posted by dhanoa
Punjab
09-10-2019 08:16 PM
phela pet de keria Di medisan fantas 3 deo NL 50 GM minralmix totavit starong v suro kro baki saria chezz a de sakde

Posted by G.m. Tiwari
Uttar Pradesh
09-10-2019 08:15 PM
श्रीमान जी बैंगन में Cartap SC @25 gm प्रति टैंकी के हिसाब से स्प्रे कर सकते है
Expert Communities
We do not share your personal details with anyone
We do not share your personal details with anyone
Sign In
Registering to this website, you accept our Terms of Use and our Privacy Policy.
Your mobile number and password is invalid
We have sent your password on your mobile number
All fields marked with an asterisk (*) are required:
Sign Up
Registering to this website, you accept our Terms of Use and our Privacy Policy.
All fields marked with an asterisk (*) are required:
Please select atleast one option
Please select text along with image












