
Posted by satnam singh
Rajasthan
10-10-2019 02:08 PM
Satnam ji guar ka rate 3450-3740 rupyae prati quintal ke hisab se chal raha hai.dhanywad
Posted by satinderbir singh
Punjab
10-10-2019 02:05 PM
Satinder ji tuc 10 kille jameen de layi farmtrac 45 lai sakde ho isdi keemat 6.5 lac hai.dhanwad
Posted by gourav
Punjab
10-10-2019 02:00 PM
gourav ji fal diggn to rokan de layi tuc planofix@4ml nu prati 15 litre pani de hisab nal spray karo.eh fungus de nal hon lag jande han.dhanwad

Posted by Raghunath Singh
Uttar Pradesh
10-10-2019 01:44 PM
raghunath ji kripya swal vistar se pooche ke aap in tino ki ek sath kheti karne ke bare men jankari lena chahte hai ya inki alag alag bijai ke tareeke ke bare men jankari lena chahte hai taki aapko iske bare men poori jankari di ja sake,dhanywad
Posted by mukesh
Rajasthan
10-10-2019 01:43 PM
Mukesh ji aap kripya nimbu ki umar btaye taki aapko iske bare men poori jankari di ja sake.dhanywad
Posted by Balvir Singh
Punjab
10-10-2019 01:36 PM
balvir ji please ask your question in detail what you want to know about broccoli so that we can provide you information accordingly.thank you
Posted by राम सेवक
Uttar Pradesh
10-10-2019 01:28 PM
राम जी आप हल्दी रोग की रोकथाम के लिए tilt @200ml को प्रति एकड़ के हिसाब से स्प्रे करें धन्यवाद

Posted by Sandeep
Haryana
10-10-2019 01:26 PM
Sandeep ji yeh desi nasal ki hai yeh 5-6 month di hone ke badd achi khurak ke sath egg dengi..
Posted by mukesh
Rajasthan
10-10-2019 01:24 PM
mukesh ji aap iske uper NPK 191919 ek kilo ko 150 litre pani ke hisab se spray karen.dhanywad
Posted by dharmendra dhakad
Madhya Pradesh
10-10-2019 01:22 PM
dhamendra ji aap kripya iski photo bheje taki aapko iske bare men poori jankari di ja sake.dhanwyad
Posted by jitendrakumar
Uttar Pradesh
10-10-2019 01:10 PM
यदि आप ज्यादा दूध के लिए गायों को रखना चाहते है तो आप एचएफ नस्ल की गाय रख सकते है इस नस्ल का दूध सबसे ज्यादा होता है इसे ज्यादा देखभाल जी जरूरत होती है क्योंकि इसे बीमारियां भी सबसे ज्यादा लगती है इसके इलावा आप जर्सी, साहीवाल नस्ल की गायों को भी रख सकते है पंजाब में आप एचएफ और जर्सी गायों को लेने के लिए Ajay Chopra 7009645.... (Read More)
यदि आप ज्यादा दूध के लिए गायों को रखना चाहते है तो आप एचएफ नस्ल की गाय रख सकते है इस नस्ल का दूध सबसे ज्यादा होता है इसे ज्यादा देखभाल जी जरूरत होती है क्योंकि इसे बीमारियां भी सबसे ज्यादा लगती है इसके इलावा आप जर्सी, साहीवाल नस्ल की गायों को भी रख सकते है पंजाब में आप एचएफ और जर्सी गायों को लेने के लिए Ajay Chopra 7009645902 Chopra Dairy Farm से संपर्क कर सकते है

Posted by sandhu
Punjab
10-10-2019 01:06 PM
Sandhu ji Seed len lai tusi Gurpreet Singh 9478489622, 9814130982 Punjab Seed Company, Gidderbaha nal samparak kar sakde ho, Thankyou.
Posted by ASHWANI KUMAR
Punjab
10-10-2019 01:04 PM
Ashwani ji tuc isda beej PAU ludhiana to lai sakde ho.dhanwad

Posted by sandhu
Punjab
10-10-2019 01:04 PM
Sandhu ji tuci isde lai mere nal Hardeep Singh 9781589637 Mahal Farm sampark kr skde ho

Posted by Manpreet singh
Punjab
10-10-2019 01:03 PM
ehh mastitis di smasia ate thnna vich gnnd khoran lai use kita jnda hai.

Posted by कन्हैया लाल माली
Rajasthan
10-10-2019 01:02 PM
उसे आप रोजाना 35—40 किलो हरा चारा दें और हर तीन महीने के बाद पेट के कीड़ों के लिए गोली जरूर दें और उसे उसे आप 1 किलो गेहूं का दलिया, 250 ग्राम गुड को अच्छी तरह पकाकर 5—7 दिन खाने के लिए दें इसके साथ आप Calpond powder 50gm रोजाना और Glactogog पाउडर देना शुरू करें इसका रोजाना एक पाउच देना शुरू करें इससे दूध में फायदा होगा

Posted by Dharmendra Kumar Kurmi
Uttar Pradesh
10-10-2019 01:01 PM
kripya aap iski photo bheje taki aapko iske bare men poori jankari di ja sake,dhanywad
Posted by Guri Dalio
Punjab
10-10-2019 01:01 PM
ਸ਼੍ਰੀਮਾਨ ਜੀ, ਬਹੁਤ ਸਾਰੀਆਂ ਇਸ ਤਾਰਾ ਦੀਆਂ app ਹਨ play store ਅਤੇ app store ਤੇ ਜਿਸ ਨਾਲ ਜਮੀਨ ਦਾ ਮਾਪ ਤੋਲ ਕੀਤਾ ਜਾ ਸਕਦਾ ਹੈ, ਪਰ ਇਸ ਚੀਜ ਬਾਰੇ ਕੋਈ ਪੁਸ਼ਟੀ ਨਹੀਂ ਕੀਤੀ ਜਾ ਸਕਦੀ ਕਿ ਇਹ ਜੋ ਡਾਟਾ ਹੁੰਦਾ ਹੈ, ਇਹ ਸਹੀ ਹੋਏ ਗਏ, ਧੰਨਵਾਦ

Posted by sandhu
Punjab
10-10-2019 12:56 PM
ਉਚਿੱਤ ਪੈਦਾਵਾਰ ਲਈ, ਪੰਜਾਬ ਵਿੱਚ ਫਰਵਰੀ ਦੇ ਪਹਿਲੇ ਪੰਦਰਵਾੜੇ ਗੰਢੀਆਂ ਨੂੰ ਨਰਸਰੀ ਬੈੱਡਾਂ ਤੇ ਬੀਜੋ Punjab Arvi-1: ਇਹ ਕਿਸਮ 2009 ਵਿੱਚ ਤਿਆਰ ਕੀਤੀ ਗਈ ਇਸਦੇ ਪੌਦੇ ਲੰਬੇ ਕੱਦ ਦੇ ਅਤੇ ਹਰੇ ਪੱਤਿਆਂ ਵਾਲੇ, ਜੋ ਤਿਰਛੇ ਸਿੱਧੇ ਅਤੇ ਵੱਡੇ ਆਕਾਰ ਦੇ ਹੁੰਦੇ ਹਨ ਇਸਦੇ ਫਲ ਦਰਮਿਆਨੇ ਮੋਟੇ ਅਤੇ ਲੰਬੇ ਹੁੰਦੇ ਹਨ ਇਸਦੇ ਫਲ ਭੂਰੇ ਰੰਗ ਦੇ ਹੁੰਦੇ ਹਨ ਅਤੇ ਇਨ੍ਹਾਂ ਦਾ ਅੰਦਰੂਨੀ ਗੁੱਦਾ ਕਰੀਮ ਵਰਗੇ .... (Read More)
ਉਚਿੱਤ ਪੈਦਾਵਾਰ ਲਈ, ਪੰਜਾਬ ਵਿੱਚ ਫਰਵਰੀ ਦੇ ਪਹਿਲੇ ਪੰਦਰਵਾੜੇ ਗੰਢੀਆਂ ਨੂੰ ਨਰਸਰੀ ਬੈੱਡਾਂ ਤੇ ਬੀਜੋ Punjab Arvi-1: ਇਹ ਕਿਸਮ 2009 ਵਿੱਚ ਤਿਆਰ ਕੀਤੀ ਗਈ ਇਸਦੇ ਪੌਦੇ ਲੰਬੇ ਕੱਦ ਦੇ ਅਤੇ ਹਰੇ ਪੱਤਿਆਂ ਵਾਲੇ, ਜੋ ਤਿਰਛੇ ਸਿੱਧੇ ਅਤੇ ਵੱਡੇ ਆਕਾਰ ਦੇ ਹੁੰਦੇ ਹਨ ਇਸਦੇ ਫਲ ਦਰਮਿਆਨੇ ਮੋਟੇ ਅਤੇ ਲੰਬੇ ਹੁੰਦੇ ਹਨ ਇਸਦੇ ਫਲ ਭੂਰੇ ਰੰਗ ਦੇ ਹੁੰਦੇ ਹਨ ਅਤੇ ਇਨ੍ਹਾਂ ਦਾ ਅੰਦਰੂਨੀ ਗੁੱਦਾ ਕਰੀਮ ਵਰਗੇ ਰੰਗ ਦਾ ਹੁੰਦਾ ਹੈ ਇਹ ਕਿਸਮ ਬਿਜਾਈ ਤੋਂ 175 ਦੁਨਾਂ ਵਿੱਚ ਪੱਕ ਕੇ ਤਿਆਰ ਹੋ ਜਾਂਦੀ ਹੈ ਇਸਦਾ ਔਸਤਨ ਝਾੜ 90 ਕੁਇੰਟਲ ਪ੍ਰਤੀ ਏਕੜ ਹੁੰਦਾ ਹੈ

Posted by faisal Hussain
Uttar Pradesh
10-10-2019 12:51 PM
अधिक पैदावार के लिए बिजाई सही समय पर करनी जरूरी है बिजाई के लिए सही तापमान अधिक से अधिक 30-32° सैल्सियस और कम से कम 18-20° सैल्सियस होता है अगेती बिजाई 25 सितंबर से 10 अक्तूबर तक, दरमियाने समय वाली बिजाई अक्तूबर के पहले से तीसरे सप्ताह तक और पिछेती बिजाई अक्तूबर के तीसरे सप्ताह से नवंबर के पहले सप्ताह तक करें बसंत ऋत.... (Read More)
अधिक पैदावार के लिए बिजाई सही समय पर करनी जरूरी है बिजाई के लिए सही तापमान अधिक से अधिक 30-32° सैल्सियस और कम से कम 18-20° सैल्सियस होता है अगेती बिजाई 25 सितंबर से 10 अक्तूबर तक, दरमियाने समय वाली बिजाई अक्तूबर के पहले से तीसरे सप्ताह तक और पिछेती बिजाई अक्तूबर के तीसरे सप्ताह से नवंबर के पहले सप्ताह तक करें बसंत ऋतु के लिए जनवरी के दूसरे पखवाड़े बिजाई का सही समय है
Posted by amjul khan
Uttar Pradesh
10-10-2019 12:31 PM
यदि संभव हो, तो आलू की रोपाई से पहले, हरी खाद वाली फसलें जैसे सनई, जंतर आदि फसलें उगायें और उन्हें मिट्टी में अच्छी तरह दबायें यदि हरी खाद उपलब्ध ना हो तो गली सड़ी रूड़ी की खाद या गाय का गला हुआ गोबर 60-80 क्विंटल प्रति एकड़ में खेत की तैयारी के समय रोपाई से दो सप्ताह पहले डालें फसल की उचित वृद्धि के लिए नाइट्रोजन 40-50 क.... (Read More)
यदि संभव हो, तो आलू की रोपाई से पहले, हरी खाद वाली फसलें जैसे सनई, जंतर आदि फसलें उगायें और उन्हें मिट्टी में अच्छी तरह दबायें यदि हरी खाद उपलब्ध ना हो तो गली सड़ी रूड़ी की खाद या गाय का गला हुआ गोबर 60-80 क्विंटल प्रति एकड़ में खेत की तैयारी के समय रोपाई से दो सप्ताह पहले डालें फसल की उचित वृद्धि के लिए नाइट्रोजन 40-50 किलो (90-110 किलो यूरिया), फासफोरस 24-32 किलो (150-200 किलो सिंगल सुपर फासफेट) और पोटाश 40-50 किलो (66-85 किलो म्यूरेट ऑफ पोटाश) की मात्रा प्रति एकड़ में डालें बिजाई के समय नाइट्रोजन का 3/4 हिस्सा और फासफोरस और पोटाश की पूरी मात्रा डालें बाकी बचा हुआ नाइट्रोजन का 1/4 हिस्सा बिजाई से 35-40 दिन बाद जड़ों में मिट्टी लगाने के समय डालें
Posted by manpreet singh
Punjab
10-10-2019 12:29 PM
HD3226 da seed len lai tusi Punjab Seed Company, Gidderbaha 9814130982 nal samparak kar sakde ho ja fir is da seed ICAR-Indian Institute of Wheat and Barley Research(IIWBR) Karnal-132001, Haryana, India, Tel: +91-184-2267490 te pohach ke vi seed le sakde ho, Thankyou.
Posted by Gurjant singh sandhu
Punjab
10-10-2019 12:27 PM
गुरजंट जी कृपया सवाल विस्तार से पूछें ताकि आपको इसके बारे में पूरी जानकारी दी जा सके, धन्यवाद
Posted by lovepreet
Punjab
10-10-2019 12:14 PM
ਲਵਪ੍ਰੀਤ ਜੀ ਕਿਰਪਾ ਕਰਕੇ ਕਿਸਮ ਦਾ ਪੂਰਾ ਨਾਮ ਦੱਸੋ ਤਾ ਜੋ ਤੁਹਾਨੂੰ ਇਸ ਬਾਰੇ ਪੂਰੀ ਜਾਣਕਾਰੀ ਦਿਤੀ ਜਾ ਸਕੇ ਧੰਨਵਾਦ

Posted by Ajeet Singh
Uttar Pradesh
10-10-2019 12:13 PM
Ajeet ji phosphate khaad jaise DAP aur SSP ko bolte hai yeh khaaden fasl men phosphorus tatv ki kami ko poora karti hai. dhanywad
Posted by Veer verma
Rajasthan
10-10-2019 12:10 PM
veer verma ji aap isme mancozeb@4 gram ko prati litre pani ke hisab se spray karen.dhanywad

Posted by inderjit
Punjab
10-10-2019 12:02 PM
tuci isdi AD sadi dusri app apni kheti buy/sell te upload kr skde ho.
Posted by Mohd. furkan
Uttar Pradesh
10-10-2019 12:02 PM
मोती की खेती एक बहुत ही अच्छा व्यवसाय है इस व्यवसाय को शुरू करने के लिए सबसे जरुरी है इसकी ट्रेनिंग, क्योकि इसमें बहुत सी ऐसी बारीकियें होती है जो हमें प्रेक्टिकल ट्रेनिंग में ही सीखने को मिलती है अगर आप इसकी ट्रेनिंग लेना चाहते है तो आप ग्लिटराटी पर्ल फार्मिंग ट्रेनिंग केंद्र प्रशिक्षण कार्य कर्म आयोजि.... (Read More)
मोती की खेती एक बहुत ही अच्छा व्यवसाय है इस व्यवसाय को शुरू करने के लिए सबसे जरुरी है इसकी ट्रेनिंग, क्योकि इसमें बहुत सी ऐसी बारीकियें होती है जो हमें प्रेक्टिकल ट्रेनिंग में ही सीखने को मिलती है अगर आप इसकी ट्रेनिंग लेना चाहते है तो आप ग्लिटराटी पर्ल फार्मिंग ट्रेनिंग केंद्र प्रशिक्षण कार्य कर्म आयोजित किया जा रहा है प्रशिक्षण कार्य कर्म में भाग लेने के लिए नीचे दिए गए नम्बर पर आज ही संपर्क करें और Rs 250/ से अपना रजिस्ट्रेशन करवाए अचल सिंह (फाउंडर )- 9711858258. धन्यवाद

Posted by anil kumar
Haryana
10-10-2019 11:56 AM
Posted by kranti sen
Madhya Pradesh
10-10-2019 11:55 AM
पपीता को मिट्टी की व्यापक किस्मों में उगाया जा सकता है अच्छे निकास वाली पहाड़ी मिट्टी पपीते की खेती के लिए उपयुक्त होती है रेतली और भारी मिट्टी में इसकी खेती ना करें पपीते की खेती के लिए मिट्टी की पी एच 6.5-7.0 होनी चाहिए पपीते की खेती के लिए नदीन रहित भूमि का प्रयोग करें मिट्टी के भुरभुरा होने तक खेत की जोताई कर.... (Read More)
पपीता को मिट्टी की व्यापक किस्मों में उगाया जा सकता है अच्छे निकास वाली पहाड़ी मिट्टी पपीते की खेती के लिए उपयुक्त होती है रेतली और भारी मिट्टी में इसकी खेती ना करें पपीते की खेती के लिए मिट्टी की पी एच 6.5-7.0 होनी चाहिए पपीते की खेती के लिए नदीन रहित भूमि का प्रयोग करें मिट्टी के भुरभुरा होने तक खेत की जोताई करें आप इसकी किस्मे जैसे Washington Coorg Honey Pusa Delicious Pusa Dwarf की बिजाई कर सकते है आखिरी जोताई के समय अच्छी तरह से गली हुई रूड़ी की खाद या गाय का गला हुआ गोबर मिट्टी में अच्छी तरह मिलाकर डालें सिफारिश किए गए फासलों पर 1 मीटर x 1 मीटर x 1 मीटर आकार के गड्ढे खोदें गड्ढों को मिट्टी और रूड़ी की खाद या गाय के गले हुए गोबर से भरें प्रयोग की गई किस्म के आधार पर प्रत्येक गड्ढे पर 2-4 नए पौधों की रोपाई करें रोपाई के बाद हल्की सिंचाई करें हवा से बचाव के लिए खूंटा लगाएं एक एकड़ में 104 ग्राम बीज प्रति एकड़ में प्रयोग करें कम बारिश वाले क्षेत्रों में जून - जुलाई के महीने में बिजाई की जानी चाहिए और तराई और अधिक बारिश वाले क्षेत्रों में सितंबर महीने में बिजाई की जानी चाहिए और क्षेत्र जहां सिंचाई की सुविधाएं उपलब्ध हो वहां पर फरवरी - मार्च के महीने में बिजाई की जानी चाहिए आमतौर पर 1.8 मीटर x 1.8 मीटर फासले का प्रयोग किया जाता है उच्च घनता की रोपाई के लिए 1.5 मीटर x 1.5 मीटर फासले का प्रयोग किया जाता है नर्सरी में बीज को 10 सैं.मी. की गहराई पर बोयें बीजो की खेत में सीधे बिजाई या मुख्य खेत में नए पौधों की रोपाई की जाती है बीजों को 150 गेज़ की मोटाई वाले, 25 x 10 सैं.मी. के पॉलीथीन बैग में बोयें पानी के उचित निकास के लिए पॉलीथीन बैग के निचले हिस्से में 1 मि.मी. अर्द्धव्यास का छेद करें उसके बाद पॉलीथीन बैग में समान अनुपात में रूड़ी की खाद, मिट्टी और रेत डालें बिजाई से पहले बीजों का उपचार करें रोपाई के लिए 6-7 सप्ताह के पौधों का प्रयोग करें पौधे की प्रौढ़ अवस्था के दौरान नदीनों की रोकथाम जरूरी होती है नदीनों की तीव्रता के आधार पर, नियमित और हल्की गोडाई करें फ्लूक्लोरालिन या बूटाक्लोर 0.8 किलो प्रति एकड़ में डालें नदीनों की रोकथाम के लिए मलचिंग भी एक प्रभावी तरीका है पौधों की रोपाई के कुछ दिनों बाद प्लास्टिक शीट या धान की पराली या गन्ने के बचे कुचे को मलच के रूप में डालें मुख्यत: फल के पूरा आकार लेने और हरे से हल्का पीला रंग होने पर तुड़ाई की जाती है पहली तुड़ाई रोपाई के 14-15 महीनों के बाद की जा सकती है 4-5 तुड़ाइयां प्रति मौसम की जा सकती हैं तुड़ाई एक एक फल को हाथों से तोड़कर की जाती है फलों को सुबह के समय तोड़ें धन्यवाद
Posted by kranti sen
Madhya Pradesh
10-10-2019 11:54 AM
पपीता को मिट्टी की व्यापक किस्मों में उगाया जा सकता है अच्छे निकास वाली पहाड़ी मिट्टी पपीते की खेती के लिए उपयुक्त होती है रेतली और भारी मिट्टी में इसकी खेती ना करें पपीते की खेती के लिए मिट्टी की पी एच 6.5-7.0 होनी चाहिए पपीते की खेती के लिए नदीन रहित भूमि का प्रयोग करें मिट्टी के भुरभुरा होने तक खेत की जोताई कर.... (Read More)
पपीता को मिट्टी की व्यापक किस्मों में उगाया जा सकता है अच्छे निकास वाली पहाड़ी मिट्टी पपीते की खेती के लिए उपयुक्त होती है रेतली और भारी मिट्टी में इसकी खेती ना करें पपीते की खेती के लिए मिट्टी की पी एच 6.5-7.0 होनी चाहिए पपीते की खेती के लिए नदीन रहित भूमि का प्रयोग करें मिट्टी के भुरभुरा होने तक खेत की जोताई करें आप इसकी किस्मे जैसे Washington Coorg Honey Pusa Delicious Pusa Dwarf की बिजाई कर सकते है आखिरी जोताई के समय अच्छी तरह से गली हुई रूड़ी की खाद या गाय का गला हुआ गोबर मिट्टी में अच्छी तरह मिलाकर डालें सिफारिश किए गए फासलों पर 1 मीटर x 1 मीटर x 1 मीटर आकार के गड्ढे खोदें गड्ढों को मिट्टी और रूड़ी की खाद या गाय के गले हुए गोबर से भरें प्रयोग की गई किस्म के आधार पर प्रत्येक गड्ढे पर 2-4 नए पौधों की रोपाई करें रोपाई के बाद हल्की सिंचाई करें हवा से बचाव के लिए खूंटा लगाएं एक एकड़ में 104 ग्राम बीज प्रति एकड़ में प्रयोग करें कम बारिश वाले क्षेत्रों में जून - जुलाई के महीने में बिजाई की जानी चाहिए और तराई और अधिक बारिश वाले क्षेत्रों में सितंबर महीने में बिजाई की जानी चाहिए और क्षेत्र जहां सिंचाई की सुविधाएं उपलब्ध हो वहां पर फरवरी - मार्च के महीने में बिजाई की जानी चाहिए आमतौर पर 1.8 मीटर x 1.8 मीटर फासले का प्रयोग किया जाता है उच्च घनता की रोपाई के लिए 1.5 मीटर x 1.5 मीटर फासले का प्रयोग किया जाता है नर्सरी में बीज को 10 सैं.मी. की गहराई पर बोयें बीजो की खेत में सीधे बिजाई या मुख्य खेत में नए पौधों की रोपाई की जाती है बीजों को 150 गेज़ की मोटाई वाले, 25 x 10 सैं.मी. के पॉलीथीन बैग में बोयें पानी के उचित निकास के लिए पॉलीथीन बैग के निचले हिस्से में 1 मि.मी. अर्द्धव्यास का छेद करें उसके बाद पॉलीथीन बैग में समान अनुपात में रूड़ी की खाद, मिट्टी और रेत डालें बिजाई से पहले बीजों का उपचार करें रोपाई के लिए 6-7 सप्ताह के पौधों का प्रयोग करें पौधे की प्रौढ़ अवस्था के दौरान नदीनों की रोकथाम जरूरी होती है नदीनों की तीव्रता के आधार पर, नियमित और हल्की गोडाई करें फ्लूक्लोरालिन या बूटाक्लोर 0.8 किलो प्रति एकड़ में डालें नदीनों की रोकथाम के लिए मलचिंग भी एक प्रभावी तरीका है पौधों की रोपाई के कुछ दिनों बाद प्लास्टिक शीट या धान की पराली या गन्ने के बचे कुचे को मलच के रूप में डालें मुख्यत: फल के पूरा आकार लेने और हरे से हल्का पीला रंग होने पर तुड़ाई की जाती है पहली तुड़ाई रोपाई के 14-15 महीनों के बाद की जा सकती है 4-5 तुड़ाइयां प्रति मौसम की जा सकती हैं तुड़ाई एक एक फल को हाथों से तोड़कर की जाती है फलों को सुबह के समय तोड़ें धन्यवाद

Posted by Ratan shah
Delhi
10-10-2019 11:52 AM
मोती की खेती एक बहुत ही अच्छा व्यवसाय है इस व्यवसाय को शुरू करने के लिए सबसे जरुरी है इसकी ट्रेनिंग, क्योकि इसमें बहुत सी ऐसी बारीकियें होती है जो हमें प्रेक्टिकल ट्रेनिंग में ही सीखने को मिलती है अगर आप इसकी ट्रेनिंग लेना चाहते है तो आप ग्लिटराटी पर्ल फार्मिंग ट्रेनिंग केंद्र प्रशिक्षण कार्य कर्म आयोजि.... (Read More)
मोती की खेती एक बहुत ही अच्छा व्यवसाय है इस व्यवसाय को शुरू करने के लिए सबसे जरुरी है इसकी ट्रेनिंग, क्योकि इसमें बहुत सी ऐसी बारीकियें होती है जो हमें प्रेक्टिकल ट्रेनिंग में ही सीखने को मिलती है अगर आप इसकी ट्रेनिंग लेना चाहते है तो आप ग्लिटराटी पर्ल फार्मिंग ट्रेनिंग केंद्र प्रशिक्षण कार्य कर्म आयोजित किया जा रहा है प्रशिक्षण कार्य कर्म में भाग लेने के लिए नीचे दिए गए नम्बर पर आज ही संपर्क करें और Rs 250/ से अपना रजिस्ट्रेशन करवाए अचल सिंह (फाउंडर )- 9711858258. धन्यवाद
Posted by kranti sen
Madhya Pradesh
10-10-2019 11:51 AM
खुम्ब की किस्में कई प्रकार की होती है जैसे कि बटन खुम्ब, डीगरी, शटाकी खुम्ब, पराली खुम्ब, और मिलकी खुम्ब इनमे से कुइ खुम्ब सर्दियो के मौसम में और कुछ गर्मीयों के मौसम में लगाये जाते है और हर खुम्ब को लगाने का समय अलग अलग है जैसे बटन खुम्ब का समय सितंबर से मार्च तक होता है इस समय में हम तीन फसले ले सकते है शटाकी ख.... (Read More)
खुम्ब की किस्में कई प्रकार की होती है जैसे कि बटन खुम्ब, डीगरी, शटाकी खुम्ब, पराली खुम्ब, और मिलकी खुम्ब इनमे से कुइ खुम्ब सर्दियो के मौसम में और कुछ गर्मीयों के मौसम में लगाये जाते है और हर खुम्ब को लगाने का समय अलग अलग है जैसे बटन खुम्ब का समय सितंबर से मार्च तक होता है इस समय में हम तीन फसले ले सकते है शटाकी खुम्ब का समय अक्तूबर से मध्य फरवरी तक हैं इस समय हम एक फसल ही ले सकते है पराली खुम्ब का समय अप्रैल से अगस्त तक है इस समय हम चार फसले ले सकते है मिलकी खुम्ब का समय अप्रैल से सितंबर तक है आप अब अप्रैल में मिलकी या पराली खुम्ब लगा सकते है पराली खुमब के लिए आपको पराली, बीज, बांस, सेबा, आदि की जरूरत है पराली के पूले, धानो की पराली 1-1 किलो के पूले दोनो सिरो से सेबे से बांध कर तैयार किये जाते है पूले के सिरे कांट कर एक सार कर लिए जाते है पूलो की क्यिारी लगाना पराली के पूलो को साफ पानी में 16-20 घंटो के लिए डूबो दे गिले पूलो को ढलान पर रख कर फालतू पानी को निकलने दे कमरे ईटो और बांस से एक पलेटफार्म बनाये इस पलेटफार्म पर 5 पूलो की एक तहय लगाये जिसके ऊपर 75 ग्राम बीज डाले इसके ऊपर की तहय उलट होती है इस प्रकार 5-5 पूलो की तहय में 300 ग्राम बीज डाल कर कियारी तैयार करे सबसे ऊपर दो पूलो को खोलकर रख दे खुम्बो का फूटना बिजाई से 7-9 दिनो के बाद खुम्ब फूटने लगती है पानी और हवा का संचार बिजाई के दो दिन के बाद हर रोज पानी का छिडका करे खुम्बो के फूटने के बाद हवा का संचार 6-8 घंटे प्रति दिन किया जाता है खुम्बो की तूडाई खुम्बो के फूटने के बाद 1-2 दिनो के बाद तोडाई के योग्य हो जाती है मिलकी खुम्ब मिलकी खुम्ब के लिए तूडी, बीज, मोमी लिफाफे, सेबा, केसिंग,मिट्टी आदि होने चाहिये तूडी की तैयारी सूकी तूडी को पक्के फर्श पर बिछा कर 16-20 घंटे पानी से गिला करे गिली तूडी को बोरी में भर कर सेबे से बांध दे इस बोरी को उबलते पानी में 45-50 मिनट रखें तूडी को निकालकर पक्के फर्श पर बिछा कर ठंडा करे यह तूडी बिजाई के लिए तैयार है बिजाई ठंडी तूडी में बीज मिलाकर मोमी लिफाफो में भर दें एक मोमी लिफाफें में लगभग 2 किलो गिली तूडी और 70-80 ग्राम बीज पडता है लिफाफे के मुंह को सेबे से अच्छी तरह बांध कर कमरे में रख दे केसिंग बिजाई के दो तीन हफतो के बाद लिफाफे खोलकर केसिंग की 1-1.5 की तहय लगा दें केसिंग में तूडी और रेतली मिट्टी होती है 24 घंटो के लिए 4 प्रतिशत फारमलेन के घोल से जीवाणु रहित किया जाता है खुम्बो का फूटना केसिंग मिट्टी डालने के लगभग दो हफतो में खुम्बो के छोटे छोटे किणके निकलने शुरू हो जाते है और 4-5 दिन के बाद तोडने योग्य हो जाते है खुम्बो की तूडाई लगभग 35-40 दिनो तक की जाती है इसका बीज लेने के लिए आप Mr. jai 8882876224 जी से संपर्क कर सकते है
पपीता को मिट्टी की व्यापक किस्मों में उगाया जा सकता है अच्छे निकास वाली पहाड़ी मिट्टी पपीते की खेती के लिए उपयुक्त होती है रेतली और भारी मिट्टी में इसकी खेती ना करें पपीते की खेती के लिए मिट्टी की पी एच 6.5-7.0 होनी चाहिए पपीते की खेती के लिए नदीन रहित भूमि का प्रयोग करें मिट्टी के भुरभुरा होने तक खेत की जोताई करें आप इसकी किस्मे जैसे Washington Coorg Honey Pusa Delicious Pusa Dwarf की बिजाई कर सकते है आखिरी जोताई के समय अच्छी तरह से गली हुई रूड़ी की खाद या गाय का गला हुआ गोबर मिट्टी में अच्छी तरह मिलाकर डालें सिफारिश किए गए फासलों पर 1 मीटर x 1 मीटर x 1 मीटर आकार के गड्ढे खोदें गड्ढों को मिट्टी और रूड़ी की खाद या गाय के गले हुए गोबर से भरें प्रयोग की गई किस्म के आधार पर प्रत्येक गड्ढे पर 2-4 नए पौधों की रोपाई करें रोपाई के बाद हल्की सिंचाई करें हवा से बचाव के लिए खूंटा लगाएं एक एकड़ में 104 ग्राम बीज प्रति एकड़ में प्रयोग करें कम बारिश वाले क्षेत्रों में जून - जुलाई के महीने में बिजाई की जानी चाहिए और तराई और अधिक बारिश वाले क्षेत्रों में सितंबर महीने में बिजाई की जानी चाहिए और क्षेत्र जहां सिंचाई की सुविधाएं उपलब्ध हो वहां पर फरवरी - मार्च के महीने में बिजाई की जानी चाहिए आमतौर पर 1.8 मीटर x 1.8 मीटर फासले का प्रयोग किया जाता है उच्च घनता की रोपाई के लिए 1.5 मीटर x 1.5 मीटर फासले का प्रयोग किया जाता है नर्सरी में बीज को 10 सैं.मी. की गहराई पर बोयें बीजो की खेत में सीधे बिजाई या मुख्य खेत में नए पौधों की रोपाई की जाती है बीजों को 150 गेज़ की मोटाई वाले, 25 x 10 सैं.मी. के पॉलीथीन बैग में बोयें पानी के उचित निकास के लिए पॉलीथीन बैग के निचले हिस्से में 1 मि.मी. अर्द्धव्यास का छेद करें उसके बाद पॉलीथीन बैग में समान अनुपात में रूड़ी की खाद, मिट्टी और रेत डालें बिजाई से पहले बीजों का उपचार करें रोपाई के लिए 6-7 सप्ताह के पौधों का प्रयोग करें पौधे की प्रौढ़ अवस्था के दौरान नदीनों की रोकथाम जरूरी होती है नदीनों की तीव्रता के आधार पर, नियमित और हल्की गोडाई करें फ्लूक्लोरालिन या बूटाक्लोर 0.8 किलो प्रति एकड़ में डालें नदीनों की रोकथाम के लिए मलचिंग भी एक प्रभावी तरीका है पौधों की रोपाई के कुछ दिनों बाद प्लास्टिक शीट या धान की पराली या गन्ने के बचे कुचे को मलच के रूप में डालें मुख्यत: फल के पूरा आकार लेने और हरे से हल्का पीला रंग होने पर तुड़ाई की जाती है पहली तुड़ाई रोपाई के 14-15 महीनों के बाद की जा सकती है 4-5 तुड़ाइयां प्रति मौसम की जा सकती हैं तुड़ाई एक एक फल को हाथों से तोड़कर की जाती है फलों को सुबह के समय तोड़ें धन्यवाद
Posted by Ghanshyam Sahu
Chattisgarh
10-10-2019 11:51 AM

Posted by बन्टी रघुबशी
Madhya Pradesh
10-10-2019 11:37 AM
बन्टी जी कृपया आप अपना सवाल विस्तार से पूछे के आप कोनसी फसल की किस्म के बारे में जानकारी लेना चाहते है ताकि आपको इसके बारे में पूरी जानकारी दी जा सके धन्यवाद
Posted by ਬਲਜੀਤ
Punjab
10-10-2019 11:36 AM
ਸ਼੍ਰੀਮਾਨ ਜੀ ਤੁਸੀ ਬਰਸੀਮ ਦੇ ਬੀਜ ਜਿਵੇ ਕੇ BL 1 :- ਇਹ ਜਲਦੀ ਉੱਗਣ ਵਾਲੀ ਦਰਮਿਆਨੀ ਕਿਸਮ ਹੈ ਇਸਦਾ ਬੂਟਾ ਵਧੀਆ ਪੈਦਾ ਹੁੰਦਾ ਹੈ,ਜੋ ਮਈ ਦੇ ਅਖੀਰਲੇ ਹਫਤੇ ਤੱਕ ਵੀ ਹਰਾ ਚਾਰਾ ਦਿੰਦਾ ਹੈ ਇਸ ਦਾ ਹਰਾ ਚਾਰਾ 380 ਕੁਇੰਟਲ ਪ੍ਰਤੀ ਏਕੜ ਹੁੰਦਾ ਹੈ BL 10:- ਇਹ ਲੰਬੇ ਸਮੇਂ ਵਾਲੀ ਕਿਸਮ ਹੈ ਜੋ ਜੂਨ ਦੇ ਪਹਿਲੇ ਪੰਦੜਵਾੜੇ ਤੱਕ ਹਰਾ ਚਾਰਾ ਦਿੰਦੀ ਹੈ ਇਹ ਤਣੇ ਦੇ ਗਲਣ ਰੋਗ ਨੂੰ ਸਹਾਰਣ ਵਾਲੀ ਕਿਸਮ ਹੈ, ਜਿ.... (Read More)
ਸ਼੍ਰੀਮਾਨ ਜੀ ਤੁਸੀ ਬਰਸੀਮ ਦੇ ਬੀਜ ਜਿਵੇ ਕੇ BL 1 :- ਇਹ ਜਲਦੀ ਉੱਗਣ ਵਾਲੀ ਦਰਮਿਆਨੀ ਕਿਸਮ ਹੈ ਇਸਦਾ ਬੂਟਾ ਵਧੀਆ ਪੈਦਾ ਹੁੰਦਾ ਹੈ,ਜੋ ਮਈ ਦੇ ਅਖੀਰਲੇ ਹਫਤੇ ਤੱਕ ਵੀ ਹਰਾ ਚਾਰਾ ਦਿੰਦਾ ਹੈ ਇਸ ਦਾ ਹਰਾ ਚਾਰਾ 380 ਕੁਇੰਟਲ ਪ੍ਰਤੀ ਏਕੜ ਹੁੰਦਾ ਹੈ BL 10:- ਇਹ ਲੰਬੇ ਸਮੇਂ ਵਾਲੀ ਕਿਸਮ ਹੈ ਜੋ ਜੂਨ ਦੇ ਪਹਿਲੇ ਪੰਦੜਵਾੜੇ ਤੱਕ ਹਰਾ ਚਾਰਾ ਦਿੰਦੀ ਹੈ ਇਹ ਤਣੇ ਦੇ ਗਲਣ ਰੋਗ ਨੂੰ ਸਹਾਰਣ ਵਾਲੀ ਕਿਸਮ ਹੈ, ਜਿਸ ਦਾ ਝਾੜ 410 ਕੁਇੰਟਲ ਪ੍ਰਤੀ ਏਕੜ ਹੁੰਦਾ ਹੈ BL 42 :- ਇਹ ਜਲਦੀ ਉੱਗਣ ਵਾਲੀ ਕਿਸਮ ਹੈ, ਜਿਸ ਦਾ ਜੰਮ ਵਧੀਆ ਹੁੰਦਾ ਹੈ ਇਹ ਕਿਸਮ ਤਣੇ ਦੇ ਗਲਣ ਵਾਲੇ ਰੋਗ ਨੂੰ ਸਹਾਰਣ ਵਾਲੀ ਕਿਸਮ ਹੈ ਇਸ ਦਾ ਹਰਾ ਚਾਰਾ ਜੂਨ ਦੇ ਪਹਿਲੇ ਹਫਤੇ ਤੱਕ ਮਿਲਦਾ ਹੈ ਇਸ ਦਾ ਝਾੜ 440 ਕੁਇੰਟਲ ਪ੍ਰਤੀ ਏਕੜ ਹੈ BL 43: ਇਹ ਅਗੇਤੀ ਪੱਕਣ ਵਾਲੀ ਕਿਸਮ ਹੈ ਇਸ ਦੇ ਹਰੇ ਚਾਰੇ ਦੀ ਔਸਤਨ ਪੈਦਾਵਾਰ 390 ਕੁਇੰਟਲ ਪ੍ਰਤੀ ਏਕੜ ਹੁੰਦੀ ਹੈ ਬੀਜ ਦੀ ਮਾਤਰਾ 8-10 ਕਿਲੋਂ ਗ੍ਰਾਮ ਪ੍ਰਤੀ ਏਕੜ ਹੋਣੀ ਚਾਹੀਦੀ ਹੈ ਧੰਨਵਾਦ

Posted by बन्टी रघुबशी
Madhya Pradesh
10-10-2019 11:35 AM
श्रीमान जी आप चने की किस्मे जैसे के JG 16, JG 130, JG 14, JAKI 9218, JG 63 की बिजाई कर सकते हैं, धन्यवाद
Posted by Ghanshyam Sahu
Chattisgarh
10-10-2019 11:33 AM
Ghanshyam Sahu ji jamnapari Goat lene ke lia aap Imtiyaz Khurshid 9826878656 Mashallah goat farm se samparak kar sakte hai, Thankyou.
Posted by Gurpreet Singh
Punjab
10-10-2019 11:17 AM
ਤੁਸੀ ਉਸਦੀ ਬੱਚੇਦਾਨੀ ਵਿਚ lixin-iu ਦਵਾਈ 3 ਦਿਨ ਲਗਾਤਾਰ ਭਰਵਾਓ, ਇਸਦੇ ਨਾਲ ਤੁਸੀ Bovimin-B ਪਾਊਡਰ 100 ਗ੍ਰਾਮ ਰੋਜਾਨਾ ਦਿਓ ਅਤੇ Pg care bolus ਰੋਜਾਨਾ ਇਕ ਗੋਲੀ ਅਤੇ 21 ਦਿਨ ਤਕ ਦਿਓ, ਫਿਰ ਅਗਲੀ ਵਾਰ ਹੀਟ ਵਿਚ ਆਉਣ ਤੇ ਇਸ ਨੂੰ ਟੀਕਾ ਭਰਵਾਂ ਕੇ ਇਹ ਗੋਲੀਆਂ 20 ਦਿਨ ਤਕ ਹੋਰ ਦਿੰਦੇ ਰਹੋ ..
Posted by Baljinder Singh Chahal
Punjab
10-10-2019 11:15 AM
ਬਲਜਿੰਦਰ ਜੀ No problem ਨਾਮ ਦੀ ਦਵਾਈ ਸੁੰਡੀ ਦੀ ਰੋਕਥਾਮ ਦੇ ਲਈ ਵਰਤੀ ਜਾਂਦੀ ਹੈ Kilt ਵਿਚ propiconazole ਨਾਮ ਦਾ ਸਾਲ੍ਟ ਹੈ ਇਹ ਫੰਗਸ ਅਤੇ ਡੋਡੀ ਰੋਗ ਦੀ ਰੋਕਥਾਮ ਦੇ ਲਈ ਵਰਤੀ ਜਾਂਦੀ ਹੈ Tycon ਇਕ ਫੰਗਸਨਾਸ਼ੀ ਹੈ ਇਹ blast ਦੀ ਰੋਕਥਾਮ ਦੇ ਲਈ ਵਰਤੋਂ ਕੀਤੀ ਜਾਂਦੀ ਹੈ Vintage ਇਕ ਤੇਲੇ ਦੀ ਰੋਕਥਾਮ ਦੇ ਲਈ ਵਰਤੀ ਜਾਂਦੀ ਹੈ ਤੁਸੀ ਇਹਨਾਂ ਵਿੱਚੋ ਕਿਸੇ ਦੀ ਵੀ ਵਰਤੋਂ ਕਰ ਸਕਦੇ ਹੋ ਜੇਕਰ ਬਿਮਾਰੀ ਜਾ ਕੀਟ ਦਾ ਹਮਲਾ.... (Read More)
ਬਲਜਿੰਦਰ ਜੀ No problem ਨਾਮ ਦੀ ਦਵਾਈ ਸੁੰਡੀ ਦੀ ਰੋਕਥਾਮ ਦੇ ਲਈ ਵਰਤੀ ਜਾਂਦੀ ਹੈ Kilt ਵਿਚ propiconazole ਨਾਮ ਦਾ ਸਾਲ੍ਟ ਹੈ ਇਹ ਫੰਗਸ ਅਤੇ ਡੋਡੀ ਰੋਗ ਦੀ ਰੋਕਥਾਮ ਦੇ ਲਈ ਵਰਤੀ ਜਾਂਦੀ ਹੈ Tycon ਇਕ ਫੰਗਸਨਾਸ਼ੀ ਹੈ ਇਹ blast ਦੀ ਰੋਕਥਾਮ ਦੇ ਲਈ ਵਰਤੋਂ ਕੀਤੀ ਜਾਂਦੀ ਹੈ Vintage ਇਕ ਤੇਲੇ ਦੀ ਰੋਕਥਾਮ ਦੇ ਲਈ ਵਰਤੀ ਜਾਂਦੀ ਹੈ ਤੁਸੀ ਇਹਨਾਂ ਵਿੱਚੋ ਕਿਸੇ ਦੀ ਵੀ ਵਰਤੋਂ ਕਰ ਸਕਦੇ ਹੋ ਜੇਕਰ ਬਿਮਾਰੀ ਜਾ ਕੀਟ ਦਾ ਹਮਲਾ ਹੁੰਦਾ ਹੈ ਤਾ ਤੁਸੀ ਇਹਨਾਂ ਦੀ ਵਰਤੋਂ ਕਰ ਸਕਦੇ ਹੋ ਧੰਨਵਾਦ

Posted by Danish
Uttar Pradesh
10-10-2019 11:02 AM
सामान्यतः मुर्गियाँ 18-20 हफ्ते में अंडा देना प्रारम्भ करती हज

Posted by Harvinder Singh Sahota
Uttar Pradesh
10-10-2019 10:56 AM
अफीम एक वार्षिक औषधीय बूटी है, जिसमें कई जरूरी एल्कलॉइड (वे तत्व जिनमें ड्रग्स की मात्रा होती है) जैसे मोर्फिन, कोडेन और थिबेन होते हैं अच्छी उपज और वृद्धि के लिए इसे उपजाऊ, अच्छे निकास वाली काली मिट्टी और हल्की दोमट मिट्टी की आवश्यकता होती है मिट्टी की पी एच 7 के लगभग होनी चाहिए प्रसिद्ध किस्में :- Chetak: यह अधिक .... (Read More)
अफीम एक वार्षिक औषधीय बूटी है, जिसमें कई जरूरी एल्कलॉइड (वे तत्व जिनमें ड्रग्स की मात्रा होती है) जैसे मोर्फिन, कोडेन और थिबेन होते हैं अच्छी उपज और वृद्धि के लिए इसे उपजाऊ, अच्छे निकास वाली काली मिट्टी और हल्की दोमट मिट्टी की आवश्यकता होती है मिट्टी की पी एच 7 के लगभग होनी चाहिए प्रसिद्ध किस्में :- Chetak: यह अधिक उपज वाली किस्म है इसके पौधे का औसतन कद 80-90 सैं.मी. होता है इसके फूल सफेद रंग के और फल बड़े और गोल आकार में होते हैं यह अधिक उपजाऊ मिट्टी में अच्छी पैदावार देती है इसमें मोर्फिन की मात्रा 12.5 प्रतिशत होती है यह मोर्फिन की औसतन पैदावार 2 किलोग्राम प्रति एकड़ देती है मिट्टी की किस्म के आधार पर मिट्टी के भुरभुरा होने तक खेत की दो-तीन बार जोताई करें मिट्टी को अच्छे से समतल करें ताकि खेत में पानी ना खड़ा हो सके खेत की तैयारी के समय अच्छी तरह से गला हुआ, गाय का गोबर 4 टन प्रति एकड़ में डालें अफीम की बिजाई के लिए अक्तूबर के आखिरी सप्ताह से लेकर नवंबर के पहले सप्ताह तक का समय उपयुक्त होता है इसके बीज छोटे होते हैं इसलिए बीजों को बारीक रेत में अच्छे से मिलाया जाता है और फिर बिजाई के लिए प्रयोग किया जाता है 3 मीटर चौड़े और 5 मीटर लंबे बैड तैयार किए जाते हैं बैड पर 30 सैं.मी. के फासले पर कतार बनाई जाती है, फिर बीजों को कतारों में बोया जाता है पौधे से पौधे का फासला 30 सैं.मी. रखें बिजाई के लिए बुरकाव या कतार में बिजाई का ढंग प्रयोग किया जाता है बीज की मात्रा ज्यादा डालने से गोडाई करने में परेशानी आती है, जिससे फसल का विकास अच्छा नहीं होता, इसलिए बुरकाव विधि से ज्यादा कतारों में बिजाई करने को ज्यादा महत्तव दिया जाता है एक एकड़ खेत के लिए 2 किलो बीज की मात्रा बहुत होती है बिजाई से पहले मैनकोजेब 4 ग्राम से प्रति किलो बीजों का उपचार करें नाइट्रोजन 36 किलो (यूरिया 80 किलो), फासफोरस 16 किलो (एस एस पी 100 किलो), पोटाश 4 किलो (म्यूरेट ऑफ पोटाश 10 किलो) प्रति एकड़ में डालें फासफोरस और पोटाश की पूरी मात्रा और नाइट्रोजन की आधी मात्रा बिजाई के समय डालें नाइट्रोजन की बाकी बची मात्रा को दो भागों में बांटे, पहली मात्रा बिजाई के 40-50 दिन के बाद डालें और दूसरी मात्रा फूल बनने से पहले डालें अफीम की पूरी फसल को 8-10 सिंचाइयों की आवश्यकता होती है बिजाई के तुरंत बाद हल्की सिंचाई करें फिर मिट्टी की किस्म, सिंचित क्षेत्र के आधार पर 6-7 दिनों के अंतराल पर सिंचाई करें जलवायु हालातों और आवश्यकता के आधार पर सिंचाई के अंतराल को बढ़ाकर, सिंचित खेत में 10-12 दिनों के अंतराल पर सिंचाई करें चीरा लगाने से 8-10 दिन पहले सिंचाई बंद कर दें नदीनों की तीव्रता के आधार पर दो से तीन गोडाई करें नदीनों की रासायनिक रोकथाम के लिए लसोप्रोटियूरॉन 500 ग्राम को 200 लीटर पानी में मिलाकर बिजाई के बाद तीसरे दिन डालें नदीननाशक क्रिया के 30 दिन बाद पहली गोडाई करें बिजाई के 95-115 दिनों बाद अफीम में फूल निकलते हैं फूल बनने के बाद, 15-20 दिनों में फल परिपक्व हो जाते हैं जब फल अपने रंग को हरे से हल्के हरे में बदल देता है और फल घना हो जाता है तब कट लगाने और दूध इक्ट्ठा करने के लिए सही अवस्था होती है दोपहर में कट लगाने के प्रक्रिया पूरी कर लें और दूध को अगले दिन की सवेर में इक्ट्ठा करें इस प्रक्रिया को हर तीन दिन बाद दोहरायें प्रत्येक फल में 3-56 बार कट लगाए जा सकते हैं आखिरी कट लगाने के बाद फसल को 20-25 दिनों के लिए फसल को सूखने के लिए छोड़ दें अच्छी तरह से सुखाने के बाद फल की तुड़ाई करें और फसल को दरांती के साथ काट दें सूखे फलों की तुड़ाई के बाद उन्हें खुली जगह में बिछा दें और उनमें से बीज निकाल लें धन्यवाद
Posted by vikash patel
Uttar Pradesh
10-10-2019 10:53 AM
इसे मिट्टी की कई किस्मों, रेतली दोमट से चिकनी मिट्टी में उगाया जा सकता है अच्छे निकास वाली मिट्टी जिसकी पी एच 6 से 7.5 हो, में उगाने पर यह अच्छे परिणाम देती है यह फसल जलजमाव वाले हालातों में खड़ी नहीं रह सकती अम्लीय मिट्टी के लिए, चूना डालें Arkal: यह छोटे कद की और जल्दी पकने वाली किस्म है इसकी फलियां लंबी और गहरे हरे .... (Read More)
इसे मिट्टी की कई किस्मों, रेतली दोमट से चिकनी मिट्टी में उगाया जा सकता है अच्छे निकास वाली मिट्टी जिसकी पी एच 6 से 7.5 हो, में उगाने पर यह अच्छे परिणाम देती है यह फसल जलजमाव वाले हालातों में खड़ी नहीं रह सकती अम्लीय मिट्टी के लिए, चूना डालें Arkal: यह छोटे कद की और जल्दी पकने वाली किस्म है इसकी फलियां लंबी और गहरे हरे रंग की होती हैं इसकी औसतन पैदावार 16-18 क्विंटल प्रति एकड़ होती है Bonneville: यह मध्यम समय की किस्म है इसके फलियां मीठे दानों वाली होती हैं इसकी औसतन पैदावार 36 क्विंटल प्रति एकड़ होती है Multi Freezer: यह देरी से पकने वाली किस्म है इसकी फलियां मीठी और नर्म होती हैं यह ठंड को सहनेयोग्य किस्म हैं इसकी औसतन पैदावार 25 क्विंटल प्रति एकड़ होती है Azad P-I: यह छोटे कद की किस्म है इसके दाने झुर्रीदार होते हैं इसकी औतसन पैदावार 16 क्विंटल प्रति एकड़ होती है Early E-6: यह किस्म पंजाब एग्रीकल्चर यूनिवर्सिटी द्वारा विकसित की गई है इसकी औसतन पैदावार 40 क्विंटल प्रति एकड़ होती है खरीफ ऋतु की फसल की कटाई के बाद, सीड बैड तैयार करने के लिए हल से 1 या 2 बार जोताई करें हल से जोतने के बाद 2 या 3 बार तवियों से जोताई करें जल जमाव से रोकने के लिए खेत को अच्छी तरह समतल कर लेना चाहिए बिजाई से पहले, खेत की एक बार सिंचाई करें जो कि फसल के अच्छे अंकुरन में सहायक होती है फसल को मिट्टी से पैदा होने वाले कीटों और बीमारियों से बचाने के लिए ट्राइकोडरमा विराइड 10 किलो को अच्छी तरह से गले हुए गाय के गोबर 25-30 किलो को आखिरी जोताई के समय प्रति एकड़ में डालें अच्छी उपज प्राप्त करने के लिए बिजाई अक्तूबर से नवंबर के मध्य में पूरी कर लें बिजाई में देरी होने से उपज में काफी नुकसान होता है कतारों में 30-40 सैं.मी. और पौधें में 3-5 सैं.मी. फासले का प्रयोग करें लंबी किस्मों के लिए 32-40 किलो बीज प्रति एकड़ में प्रयोग करें और छोटे कद की किस्मों के लिए 50 किलो बीज प्रति एकड़ में प्रयोग करें बिजाई के समय नाइट्रोजन 13 किलो (30 किलो यूरिया), फासफोरस 24 किलो (150 किलो सिंगल सुपर फासफेट) और पोटाश 18 किलो (म्यूरेट ऑफ पोटाश 30 किलो) की मात्रा प्रति एकड़ में प्रयोग करें फासफोरस, पोटाश की पूरी मात्रा और नाइट्रोजन की आधी मात्रा बिजाई के समय डालें बाकी बची नाइट्रोजन को बिजाई के एक महीने बाद डालें छोटे कद की किस्मों के लिए नाइट्रोजन की 8 किलो मात्रा बिजाई के समय डालें एक या दो गोडाई करना यह किस्म पर निर्भर करता है पहली गोडाई, फसल की बिजाई के 3-4 सप्ताह बाद या जब फसल 2 या 3 पत्ते निकाल लेती है और दूसरी गोडाई, फूल निकलने से पहले करें मटरों की खेती के लिए नदीन नाशकों का प्रयोग बहुत प्रभावशाली होता है फ्लूक्लोरालिन 45 ई सी 800 मि.ली. को 100-150 लीटर पानी में मिलाकर बीज बोने से पहले खेत में डालें नदीनों की रोकथाम के लिए पैंडीमैथालीन 1 लीटर प्रति एकड़ या बसालिन 1 लीटर प्रति एकड़ का प्रयोग फसल बीजने से 48 घंटों के अंदर करें

Posted by Danish
Uttar Pradesh
10-10-2019 10:51 AM
दानिश जी कृपया बताये के आपने इसमें क्या क्या खाद डाली है ताकि आपको इसके बारे में पूरी जानकारी दी जा सके धन्यवाद
Posted by Partap Chand
Rajasthan
10-10-2019 10:42 AM
परताप जी कृपया आप सवाल विस्तार से पूछे कि आप कोनसी फसल के बारे में जानकारी लेना चाहते है ताकि आपको इसके बारे में पूरी जानकारी दी जा सके धन्यवाद

Posted by Dinesh Kumar Tiwari
Bihar
10-10-2019 10:37 AM
बीज को जुलाई के दूसरे सप्ताह से सितंबर के तीसरे सप्ताह में बोया जाता है और सितंबर के पहले सप्ताह से मध्य अक्तूबर तक रोपाई की जाती है
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