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Posted by Awadhesh kushwaha
Uttar Pradesh
11-10-2019 06:25 PM
Chandigarh
10-12-2019 03:25 PM
यह नाइट्रोजन की ज्यादा मात्रा इस्तेमाल करने के कारण ऐसे हो जाते हैं इस पर Mancozeb@400 ग्राम प्रति एकड़ के हिसाब से छिड़काव करें
Posted by Lovedeep Singh
Punjab
11-10-2019 06:23 PM
Punjab
10-12-2019 02:01 PM
Lovepreet ji ehh 5-6 month de hoon te egg dene suru kr denge, tuci ehna di khurak ate sahi dekhbhal da dian rkho ji..
Posted by Mahendra
Rajasthan
11-10-2019 06:13 PM
Punjab
10-14-2019 11:16 AM
मशरुम की किस्में कई प्रकार की होती है जैसे कि बटन मशरुम , डीगरी, शटाकी मशरुम , पराली मशरुम , और मिलकी मशरुम. इनमे से कुछ मशरुम सर्दियो के मौसम में और कुछ गर्मीयों के मौसम में लगाये जाते है और हर मशरुम को लगाने का समय अलग अलग है जैसे बटन मशरुम का समय सितंबर से मार्च तक होता है, इससे हम 2 फसले ले सकते है, शटाकी मशरु.... (Read More)
मशरुम की किस्में कई प्रकार की होती है जैसे कि बटन मशरुम , डीगरी, शटाकी मशरुम , पराली मशरुम , और मिलकी मशरुम. इनमे से कुछ मशरुम सर्दियो के मौसम में और कुछ गर्मीयों के मौसम में लगाये जाते है और हर मशरुम को लगाने का समय अलग अलग है जैसे बटन मशरुम का समय सितंबर से मार्च तक होता है, इससे हम 2 फसले ले सकते है, शटाकी मशरुम का समय अक्तूबर से मध्य फरवरी तक हैं, इससे हम 1 फसल ही ले सकते है, पराली मशरुम का समय अप्रैल से अगस्त तक है, इससे हम 4 फसले ले सकते है, मिलकी मशरुम का समय अप्रैल से सितंबर तक है, आप अब अप्रैल में मिलकी या पराली मशरुम लगा सकते है, पराली मशरुम के लिए आपको पराली, बीज, बांस, सेबा, आदि की जरूरत है, पराली के पूले: धान की पराली 1-1 किलो के पूले दोनो सिरो से सेबे के साथ बांध कर तैयार किये जाते है. पूले के सिरे काट कर बराबर कर लिए जाते हैं. पूलो की क्यिारी लगाना : पराली के पूलो को साफ पानी में 16-20 घंटो के लिए भिगो दें, गिले पूलो को ढलान पर रख कर अधिक पानी को निकलने दे, कमरे ईटो और बांस से एक पलेटफार्म बनाये, इस पलेटफार्म पर 5 पूलो की एक तहय लगाये, जिसके ऊपर 75 ग्राम बीज डाले. इसके ऊपर की सतह उलट होती है. इस प्रकार 5-5 पूलो की 4 सेट में 300 ग्राम बीज डाल कर कियारी तैयार की जाती है. सबसे ऊपर 2 पूलो को खोलकर रख दिए जाते हैं. मशरुम का फुटाव करना : बिजाई से 7-9 दिनो के बाद का फुटाव होने लगता है. पानी और हवा का संचार : बिजाई के 2 दिन के बाद हर रोज पानी का छिडका किया जाता है. मशरुम के फूटने के बाद हवा का संचार 6-8 घंटे प्रति दिन किया जाता है. मशरुम की तूडाई : मशरुम का फुटाव के बाद 1-2 दिनो के बाद तोडाई के योग्य हो जाती है. मिलकी मशरुम : मिलकी मशरुम के लिए तूडी, बीज, मोमी लिफाफे (12×16), सेबा, केसिंग,मिट्टी आदि चाहिए. तूडी की तैयारी : सूखी तुड़ी को पक्के फर्श पर खिलार कर 16-20 घंटे पानी से गिला करे, गीली तूडी को बोरी में भर कर सेबे से बांध दे. इस बोरी को उबलते पानी में 45-50 मिनट रखें, तूडी को निकालकर पक्के फर्श पर खिलार कर ठंडा करे. यह तूडी बिजाई के लिए तैयार है. बिजाई : ठंडी तूडी में बीज मिलाकर मोमी लिफाफो में भर दें. एक मोमी लिफाफें में लगभग 2 किलो गिली तूडी और 70-80 ग्राम बीज डाला जाता है. लिफाफे के मुंह को सेबे से अच्छी तरह बांध कर कमरे में रख दे. केसिंग : बिजाई के दो तीन हफतो के बाद लिफाफे खोलकर केसिंग की 1-1.5 के सेट बना दें, केसिंग में रूडी और रेतली मिट्टी (4:1) होती है. 24 घंटो के लिए 4 प्रतिशत फारमलेन के घोल से जीवाणु रहित की जाती है. मशरुम का फुटाव: केसिंग मिट्टी डालने के लगभग 2 हफतो में मशरुम के छोटे-छोटे कण निकलने शुरू हो जाते है और 4-5 दिन के बाद तोडने योग्य हो जाते है. मशरुम की तूडाई लगभग 35-40 दिनो तक की जाती है
Posted by Neeraj Singh Rajput
Chattisgarh
11-10-2019 06:09 PM

?

Punjab
10-12-2019 02:02 PM
नीरज जी कृप्या आप अपना सवाल विस्तार से पूछें कि आप क्या जानकारी लेना चाहते है ताकि आपको सही जानकारी दी जा सके
Posted by ਜਸਵਿੰਦਰ ਸਿੰਘ
Punjab
11-10-2019 06:07 PM
Punjab
10-12-2019 02:04 PM
ਉਸ ਨੂੰ Bovimin-B ਪਾਊਡਰ 100 ਗ੍ਰਾਮ ਰੋਜਾਨਾ ਅਤੇ PG care bolus ਰੋਜਾਨਾ ਇਕ ਗੋਲੀ ਦਿਓ ਅਤੇ 21 ਦਿਨ ਤਕ ਦਿਓ, ਫਿਰ ਅਗਲੀ ਵਾਰ ਦੁਬਾਰਾ ਹੀਟ ਵਿਚ ਆਉਣ ਤੇ ਉਸ ਨੂੰ ਟੀਕਾ ਭਰਵਾਓ, ਟੀਕਾ ਭਰਵਾਕੇ ਤੁਸੀ ਉਸ ਨੂੰ Receptel injection 5ml IV ਲਗਵਾਓ
Posted by ਜਸਵਿੰਦਰ ਸਿੰਘ
Punjab
11-10-2019 06:03 PM
Punjab
10-12-2019 02:08 PM
ਉਸ ਨੂੰ ਪੇਟ ਦੇ ਕੀੜਿਆਂ ਲਈ Bendikind plus ਗੋਲੀ ਦਿਓ ਅਤੇ ਉਸ ਨੂੰ Minfa gold ਪਾਊਡਰ 100 ਗ੍ਰਾਮ ਰੋਜਾਨਾ ਦੇਣਾ ਸ਼ੁਰੂ ਕਰੋ ਅਤੇ ਉਸ ਨੂੰ Ovumin advance ਰੋਜਾਨਾ ਇਕ ਗੋਲੀ ਦਿਓ ਅਤੇ 21 ਦਿਨ ਤਕ ਦਿਓ, ਇਸ ਨਾਲ ਹੀਟ ਵਿਚ ਆ ਜਾਵੇਗੀ..
Posted by hiraji tukdyadas naitam
Maharashtra
11-10-2019 05:50 PM
Punjab
10-12-2019 02:09 PM
कृप्या आप अपना सवाल विस्तार से पूछें कि आप क्या जानकारी लेना चाहते है ताकि आपको सही जानकारी दी जा सके धन्यवाद
Posted by Surendar Kumar
Madhya Pradesh
11-10-2019 05:39 PM
Rajasthan
10-12-2019 03:28 PM
मोती की खेती एक बहुत ही अच्छा व्यवसाय है इस व्यवसाय को शुरू करने के लिए सबसे जरुरी है इसकी ट्रेनिंग, क्योकि इसमें बहुत सी ऐसी बारीकियें होती है जो हमें प्रेक्टिकल ट्रेनिंग में ही सीखने को मिलती है अगर आप इसकी ट्रेनिंग लेना चाहते है तो आप ग्लिटराटी पर्ल फार्मिंग ट्रेनिंग केंद्र प्रशिक्षण कार्य कर्म आयोजि.... (Read More)
मोती की खेती एक बहुत ही अच्छा व्यवसाय है इस व्यवसाय को शुरू करने के लिए सबसे जरुरी है इसकी ट्रेनिंग, क्योकि इसमें बहुत सी ऐसी बारीकियें होती है जो हमें प्रेक्टिकल ट्रेनिंग में ही सीखने को मिलती है अगर आप इसकी ट्रेनिंग लेना चाहते है तो आप ग्लिटराटी पर्ल फार्मिंग ट्रेनिंग केंद्र प्रशिक्षण कार्य कर्म आयोजित किया जा रहा है प्रशिक्षण कार्य कर्म में भाग लेने के लिए नीचे दिए गए नम्बर पर आज ही संपर्क करें और Rs 250/ से अपना रजिस्ट्रेशन करवाए अचल सिंह (फाउंडर )- 9711858258. धन्यवाद
Posted by mohd nasir
Uttar Pradesh
11-10-2019 05:38 PM
Uttar Pradesh
10-11-2019 09:49 PM
moringa ke beej jhansi se milenge
Posted by Avinash Kabiriya
Madhya Pradesh
11-10-2019 05:37 PM
Punjab
03-16-2020 08:30 PM
apke sabhi swalo ke jwab diye gye hai aap App mai apne swalo ke jwab dekh skte hai.
Posted by amrit tech to dear sir
Uttar Pradesh
11-10-2019 05:35 PM
Punjab
10-12-2019 02:11 PM
आपके द्धारा भेंजी गई ओडियो में आवाज समझ नहीं आ रही है कृप्या आप दोबारा ओडियो अपलोड करें ताकि आपको सही जानकारी दी जा सके
Posted by anupsingh
Gujarat
11-10-2019 05:16 PM
Posted by bhagat shingh
Punjab
11-10-2019 05:14 PM
Punjab
11-22-2019 06:11 PM
ਸ਼੍ਰੀਮਾਨ ਜੀ, ਇਹ ਸੁੰਡੀ ਦੇ ਹਮਲਾ ਹੋਇਆ ਹੈ, ਇਸਦੀ ਰੋਕਥਾਮ ਲਈ ਤੁਸੀ cartap hydrochloride @ 170 gm ਪ੍ਰਤੀ ਏਕੜ ਦੇ ਹਿਸਾਬ ਨਾਲ ਪਾਓ, ਧੰਨਵਾਦ
Posted by Bhullar Sahb
Punjab
11-10-2019 05:01 PM
Chandigarh
10-12-2019 03:34 PM
eh fungus de kaarn is trh de ho rhe hn. isdi roktham lyi tilt@200ml nu 150ltr paani vich rlaa ke prti acre de hisaab nal spray kro.
Posted by Lalit maurya
Uttar Pradesh
11-10-2019 04:51 PM
Punjab
10-11-2019 04:54 PM
गेंदे की खेती करना चाहते है से मिट्टी की व्यापक किस्मों में उगाया जा सकता है पर यह अच्छे जल निकास वाली उपजाऊ मिट्टी में उगाने पर अच्छे परिणाम देती है मिट्टी अच्छे निकास वाली होनी चाहिए क्योंकि यह फसल जल जमाव वाली मिट्टी में स्थिर नहीं रह सकती मिट्टी की pH 6.5 से 7.5 होनी चाहिए तेजाबी और खारी मिट्टी इसकी खेती के ल.... (Read More)
गेंदे की खेती करना चाहते है से मिट्टी की व्यापक किस्मों में उगाया जा सकता है पर यह अच्छे जल निकास वाली उपजाऊ मिट्टी में उगाने पर अच्छे परिणाम देती है मिट्टी अच्छे निकास वाली होनी चाहिए क्योंकि यह फसल जल जमाव वाली मिट्टी में स्थिर नहीं रह सकती मिट्टी की pH 6.5 से 7.5 होनी चाहिए तेजाबी और खारी मिट्टी इसकी खेती के लिए अनुकूल नहीं है फ्रैंच गेंदे की किस्म हल्की मिट्टी में अच्छी वृद्धि करती है जबकि अफ्रीकी गेंदे की किस्म उच्च जैविक खाद वाली मिट्टी में अच्छी वृद्धि करती है प्रसिद्ध किस्में :- African Marigold: इस किस्म की फसल 90 सैं.मी. तक लम्बी होती है इसके फूल बड़े आकार के और लैमन, पीले, सुनहरे, संतरी और गहरे पीले रंग के होते हैं यह लम्बे समय की किस्म है इसकी अन्य किस्में जैसे Giant Double African Orange, Crown of Gold, Giant Double African Yellow, Chrysanthemum Charm, Golden Age, Cracker Jack आदि हैं French Marigold: यह छोटे कद की जल्दी पकने वाली किस्में हैं इसके फूल छोटे आकार के और पीले, संतरी, सुनहरे पीले, लाल जंग और महोगनी रंग के होते हैं इसकी अन्य किस्में जैसे Rusty Red, Butter Scotch, Red Borcade, Star of India, Lemon drop आदि हैं Pusa Basanti Gainda: यह लम्बे समय की किस्म है इसका पौधा 58.80 सैं.मी. लम्बा और गहरे हरे रंग के पत्ते होते हैं इसके फूल सल्फर पीले, दोहरे और कारनेशन किस्म के होते हैं Pusa Narangi Gainda: फूल निकलने के लिए 125-136 दिनों की आवश्यकता होती है इसका पौधा लम्बा और कद में 73.30 सैं.मी. का होता है और पत्ते गहरे हरे रंग के होते हैं इसके फूल संतरी रंग के और कारनेशन किस्म के होते हैं फूल घने और दोहरी परत वाले होते हैं इसके ताजे फूलों की पैदावार 140 क्विंटल प्रति एकड़ होती है मिट्टी के भुरभुरा होने तक खेत की जोताई करें मिट्टी की उपजाऊ शक्ति बढ़ाने के लिए आखिरी जोताई के समय 250 क्विंटल रूड़ी की खाद और अच्छी तरह से गला हुआ गाय का गोबर मिट्टी में मिलायें गेंदे की बिजाई एक वर्ष में कभी भी की जा सकती है बारिश के मौसम में इसकी बिजाई मध्य जून से मध्य जुलाई में करें सर्दियों में इसकी बिजाई मध्य सितंबर से मध्य अक्तूबर में पूरी कर लें नर्सरी बैड 3x1 मीटर आकार के तैयार करें गाय का गला हुआ गोबर मिलायें बैडों में नमी बनाए रखने के लिए पानी दें सूखे फूलों का चूरा करें और उनका कतार या बैड पर छिड़काव करें जब पौधों का कद 10-15 सैं.मी. हो जाये, तब वे रोपाई के लिए तैयार होते हैं फैंच किस्म को 35x35 सैं.मी. और अफ्रीकी किस्म को 45x45 सैं.मी. के फासले पर रोपाई करें नर्सरी बैड पर बीजों का छिड़काव करें बिजाई के लिए पनीरी ढंग का प्रयोग किया जाता है एक एकड़ खेत के लिए 600 से 800 ग्राम बीजों की आवश्यकता होती है जब फसल 30-45 दिन की हो जाए, तब पौधे के सिरे से उसे काट दें इससे पौधे को झाड़ीदार और घना होने में मदद मिलती है, इससे फूलों की गुणवत्ता और अच्छा आकार भी प्राप्त होता है बिजाई से पहले बीजों को एजोसपीरियम 200 ग्राम को 50 मि.ली. धान के चूरे में मिलाकर उपचार करें शुरूआती खुराक के तौर पर अच्छी वृद्धि के लिए नाइट्रोजन 32 किलो (यूरिया 70 किलो), फासफोरस 16 किलो (एस एस पी 100 किलो), पोटाश 32 किलो (म्यूरेट ऑफ पोटाश 53 किलो) प्रति एकड़ में डालें मिट्टी की किस्म के अनुसार खाद की खुराक बदल दें सही खुराक देने के लिए मिट्टी की जांच करवायें और उसके आधार पर खुराक दें नदीनों की संख्या के आधार पर गोडाई करें खेत में रोपाई के बाद तुरंत सिंचाई करें कली बनने से लेकर कटाई तक की अवस्था सिंचाई के लिए बहुत महत्तवपूर्ण होती है अप्रैल से जून के महीने में 4-5 दिनों के अंतराल पर लगातार सिंचाई करना आवश्यक होता है किस्म के आधार पर गेंदा 2 से 2.5 महीने में कटाई के लिए तैयार हो जाते हैं फ्रैंच गेंदे की किस्म 1.5 महीने में कटाई के लिए तैयार हो जाती है जबकि अफ्रीकी गेंदे की किस्म दो महीने में तैयार हो जाती है जब गेंदे का पूरा आकार विकसित हो जाये तब उसे तोड़ लें कटाई सुबह के समय और शाम के समय करें फूलों की तुड़ाई से पहले खेत को सिंचित करना चाहिए इससे फूलों की गुणवत्ता लंबे समय तक बनी रहती है इसे आप अपनी नजदीकी फूल मंडी में बेच कर इसे अपनी आय का साधन बना सकते है इसका बीज आप कृषि यूनिवर्सिटी से ले सकते है या नजदीकी नर्सरी से ले सकते है जा फिर गेंदे और गुलाब के बीज लेने के लिए आप Dr N.K Saxena 9811315738 से सम्पर्क करे धन्यवाद
Posted by SHAKTI Singh Jaat
Rajasthan
11-10-2019 04:50 PM
Madhya Pradesh
10-11-2019 05:41 PM
deworming कराएं एवं एक महीने तक लगातार 50 g/d मिनरल मिक्सचर दें अगर फर्क नही पड़ता है तो वेटरनरी dr को दिखाएं ताकि वो हॉर्मोनल ट्रीटमेंट दे सके इन्फेक्शन के कारण भी रिपीट ब्रीडिंग की समस्या हो सकती है
Posted by AVTAR SINGH
Punjab
11-10-2019 04:49 PM
Punjab
10-12-2019 02:13 PM
tuci ehna nu jo feed dinde ho ohhi dinde rho, khurak de nal nal ehna nu Ostovet calcium 30ml/100birds de hisab nal deo ate Broton liquid 20ml/100birds de hisab nal deo, iss nal frak paa jawega..
Posted by Gurpreet Singh
Punjab
11-10-2019 04:47 PM
Maharashtra
10-11-2019 04:54 PM
ਮੱਖਣ ਘਾਹ ਦੀ ਬਿਜਾਈ ਅਕਤੂਬਰ-ਦਸੰਬਰ ਮਹੀਨੇ ਵਿਚ ਕੀਤੀ ਜਾਂਦੀ ਹੈ ਜੇ ਇਸਦੀ ਬਿਜਾਈ ਇੱਕਲੀ ਕਰਨੀ ਹਾਂ ਤਾਂ 1.25-1.5kg ਤੇ ਜੇ ਕਿਸੇ ਫਸਲ ਨਾਲ ਬੀਜਣੀ ਹੈ ਤਾਂ 0.50-0.75kg ਬੀਜ ਪਾਓ ਮੱਖਣ ਘਾਹ ਦੀ ਬਿਜਾਈ ਕਤਾਰਾਂ ਵਿੱਚ 30 ਸੈ.ਮੀ. ਦੇ ਪਲਾੱਟ ਵਿੱਚ ਕੀਤੀ ਜਾਂਦੀ ਹੈ ਇਸਦੀ ਬਿਜਾਈ ਛਿੱਟਾ ਦੇ ਕੇ, ਮਸ਼ੀਨ ਨਾਲ ਜਾਂ ਹੱਥਾਂ ਨਾਲ ਕੀਤੀ ਜਾ ਸਕਦੀ ਹੈ ਪੁੰਗਰਾਅ ਲਈ ਬੈੱਡਾਂ ਤੇ ਨਮੀ ਬਣਾਈ ਰੱਖੋ ਸਧਾਰਨ ਹਾਲਾ.... (Read More)
ਮੱਖਣ ਘਾਹ ਦੀ ਬਿਜਾਈ ਅਕਤੂਬਰ-ਦਸੰਬਰ ਮਹੀਨੇ ਵਿਚ ਕੀਤੀ ਜਾਂਦੀ ਹੈ ਜੇ ਇਸਦੀ ਬਿਜਾਈ ਇੱਕਲੀ ਕਰਨੀ ਹਾਂ ਤਾਂ 1.25-1.5kg ਤੇ ਜੇ ਕਿਸੇ ਫਸਲ ਨਾਲ ਬੀਜਣੀ ਹੈ ਤਾਂ 0.50-0.75kg ਬੀਜ ਪਾਓ ਮੱਖਣ ਘਾਹ ਦੀ ਬਿਜਾਈ ਕਤਾਰਾਂ ਵਿੱਚ 30 ਸੈ.ਮੀ. ਦੇ ਪਲਾੱਟ ਵਿੱਚ ਕੀਤੀ ਜਾਂਦੀ ਹੈ ਇਸਦੀ ਬਿਜਾਈ ਛਿੱਟਾ ਦੇ ਕੇ, ਮਸ਼ੀਨ ਨਾਲ ਜਾਂ ਹੱਥਾਂ ਨਾਲ ਕੀਤੀ ਜਾ ਸਕਦੀ ਹੈ ਪੁੰਗਰਾਅ ਲਈ ਬੈੱਡਾਂ ਤੇ ਨਮੀ ਬਣਾਈ ਰੱਖੋ ਸਧਾਰਨ ਹਾਲਾਤਾਂ ਵਿੱਚ ਪੁੰਗਰਾਅ 10 ਤੋਂ 14 ਦਿਨ ਵਿੱਚ ਸ਼ੁਰੂ ਹੋ ਜਾਂਦਾ ਹੈ ਅਤੇ 18 ਦਿਨਾਂ ਵਿੱਚ ਪੂਰਾ ਹੋ ਜਾਂਦਾ ਹੈ ਇਸਦੀਆਂ ਜੜ੍ਹਾਂ 4 ਤੋਂ 6 ਹਫਤੇ ਵਿੱਚ ਵਿਕਸਿਤ ਹੋ ਜਾਂਦੀਆਂ ਹਨ ਜ਼ਮੀਨ ਦੀ ਤਿਆਰੀ ਸਮੇਂ 15–20 ਟਨ ਰੂੜੀ ਦੀ ਖਾਦ ਪਾਓ ਬਾਕੀ ਖਾਦਾਂ ਬਿਜਾਈ ਤੋਂ ਪਹਿਲਾਂ ਪਾਓ: ਨਾਈਟ੍ਰੋਜਨ - 30 kg ਪ੍ਰਤੀ ਏਕੜ, ਫਾਸਫੋਰਸ - 20 kg ਪ੍ਰਤੀ ਏਕੜ, ਹਰ ਕਟਾਈ ਤੋਂ ਬਾਅਦ 30 kg ਨਾਈਟ੍ਰੋਜਨ ਪਾਓ ਪਹਿਲੀ ਸਿੰਚਾਈ ਬਿਜਾਈ ਤੋਂ ਤੁਰੰਤ ਬਾਅਦ ਕਰੋ ਦੂਜੀ ਸਿੰਚਾਈ ਬਿਜਾਈ ਤੋਂ 5 ਤੋਂ 6 ਦਿਨ ਬਾਅਦ ਅਤੇ ਫਿਰ 10 ਦਿਨ ਦੇ ਅੰਤਰਾਲ ਤੇ ਲੋੜ ਅਨੁਸਾਰ ਸਿੰਚਾਈ ਕਰਦੇ ਰਹੋ ਪਹਿਲੀ ਸਿੰਚਾਈ ਤੋਂ ਬਾਅਦ ਹੱਥੀਂ ਗੋਡੀ ਕਰੋ ਅਤੇ 20 kg ਨਾਈਟ੍ਰੋਜਨ ਪਾਓ
Posted by AVTAR SINGH
Punjab
11-10-2019 04:46 PM
Punjab
10-12-2019 02:15 PM
tuci ehna nu ghr vich feed tyar krke de skde ho ja bazar di feed v vart skde ho ate ehna nu Broton liquid 20ml/100birds de hisab nal deo, iss nal vdia growth howegi..
Posted by AVTAR SINGH
Punjab
11-10-2019 04:43 PM
Punjab
10-12-2019 02:16 PM
ਤੁਸੀ ਓਹਨਾ ਨੂੰ ਪੇਟ ਦੇ ਕੀੜਿਆਂ ਲਈ Flukaird-DS ਗੋਲੀ ਦਿਓ, vitum-h 10-10 ml ਸਵੇਰੇ ਸ਼ਾਮ ਦਿਓ ਤੇ enerboost powder 100 ਗ੍ਰਾਮ ਰੋਜ਼ਾਨਾ ਦਿਓ ਤੇ ਫਿਰ ਸੂਣ ਤੋਂ 1 ਮਹੀਨਾ ਪਹਿਲਾਂ vitum-h ਦੇ ਨਾਲ metabolite ਪਾਊਡਰ ਦੀ ਇੱਕ ਪੁੜੀ ਰੋਜ਼ਾਨਾ ਦਿਓ
Posted by rishu
Bihar
11-10-2019 04:32 PM
Punjab
11-08-2019 05:11 PM
बढ़िया विकास के लिए, बढ़िया निकास वाली, घनी और उपजाऊ मिट्टी की आवश्यकता होती है इसके लिए मिट्टी का pH 6.5 या इससे ज्यादा होना चाहिए मिट्टी की pH 6.5 से कम होने पर फसल के विकास पर असर पड़ता है Konni Teak, West African teak, Godhavari Teak, South and Central American Teak, Nilambur or Malabar Teak.मिट्टी के भुरभुरा बनाने के लिए खेत की 2-3 बार जोताई करें मिट्टी को समतल करें ताकि खेत में पा.... (Read More)
बढ़िया विकास के लिए, बढ़िया निकास वाली, घनी और उपजाऊ मिट्टी की आवश्यकता होती है इसके लिए मिट्टी का pH 6.5 या इससे ज्यादा होना चाहिए मिट्टी की pH 6.5 से कम होने पर फसल के विकास पर असर पड़ता है Konni Teak, West African teak, Godhavari Teak, South and Central American Teak, Nilambur or Malabar Teak.मिट्टी के भुरभुरा बनाने के लिए खेत की 2-3 बार जोताई करें मिट्टी को समतल करें ताकि खेत में पानी खड़ा ना हो सके नए पौधों की रोपाई के लिए 45x45x45 सैं.मी. के फासले पर गड्ढे खोदे प्रत्येक गड्ढे में गली हुई रूड़ी की खाद के साथ कीटनाशी डालें बीजों को नर्सरी बैड में बोया जाता है रोपाई के लिए 12-15 महीने के नए पौधों का प्रयोग करें टिशू प्रजनन ग्राफ्टिंग, जड़, तने काट कर और micro छोटे प्रजनन द्वारा किया जाता है रोपाई के लिए पूर्व अंकुरन पौधों का प्रयोग किया जाता है मॉनसून का मौसम सागवान की रोपाई के लिए सबसे अच्छा मौसम होता है रोपाई के लिए 2x2 या 2.5x2.5 या 3x3 मीटर के फासले रखा जाता है जब अंतर-फसली अपनाई हो, तो 4x4 मीटर या 5.x5 मीटर फासला रखें सागवान की रोपाई के लिए पूर्व अंकुरित पौधों का प्रयोग करें 45x45x45 सैं.मी. के गड्ढे बनाएं प्रत्येक गड्ढे में गली हुई रूड़ी की खाद और मिट्टी डालें बिजाई पंक्ति में, छींटे द्वारा या पनीरी लगाकर की जा सकती है एक एकड़ में रोपाई के लिए लगभग 1500-1800 clones का प्रयोग करें हर साल अगस्त और सितंबर महीने में 50 ग्राम प्रति पौधे में पहले तीन वर्ष डालें पहले तीन वर्षों में खेत को नदीन मुक्त करना आवश्यक है नियमित समय पर गोड़ाई करें पहले वर्ष में 3 और दूसरे वर्ष में 2 गोड़ाई करें रोपाई के तीसरे वर्ष में एक बार गोड़ाई करें मॉनसून के मौसम में सिंचाई की आवश्यकता नहीं होती सिंचाई गर्म या गर्मियों के महीने में और आवश्यकता अनुसार करें आवश्यकता अनुसार सिंचाई करने के साथ काफी हद तक पैदावार में सुधार आता है अतिरिक्त सिंचाई से पानी के धब्बे और फंगस ज्यादा हो जाती है
Posted by saddeek khan
Rajasthan
11-10-2019 04:32 PM
Punjab
10-11-2019 04:46 PM
यह बैंगन की फसल का मुख्य और खतरनाक कीट है शुरूआत में इसकी छोटी गुलाबी सुंडियां पौधे की गोभ में छेद करके अंदर से तंतू खाती हैं और बाद में फल पर हमला करती हैं प्रभावित फलों के ऊपर बड़े छेद नज़र आते हैं और खाने योग्य नहीं होते हैं प्रभावित फल हर सप्ताह तोड़ कर नष्ट कर दें नर्सरी लगाने से 1 महीने बाद ट्राइज़ोफॉस 20 म.... (Read More)
यह बैंगन की फसल का मुख्य और खतरनाक कीट है शुरूआत में इसकी छोटी गुलाबी सुंडियां पौधे की गोभ में छेद करके अंदर से तंतू खाती हैं और बाद में फल पर हमला करती हैं प्रभावित फलों के ऊपर बड़े छेद नज़र आते हैं और खाने योग्य नहीं होते हैं प्रभावित फल हर सप्ताह तोड़ कर नष्ट कर दें नर्सरी लगाने से 1 महीने बाद ट्राइज़ोफॉस 20 मि.ली. प्रति 10 लीटर पानी और 50 ग्राम नीम एक्सट्रैक्ट 50 ग्राम प्रति लीटर की स्प्रे करें 10-15 दिनों के फासले पर यह स्प्रे दोबारा करें फूल निकलने के समय कोराजैन 18.5 प्रतिशत एस सी 5 मि.ली. + टीपॉल 5 मि.ली. का घोल 12 लीटर पानी में मिलाकर 20 दिनों के फासले पर दो बार स्प्रे करें शुरूआती हमले में 5 प्रतिशत नीम एक्सट्रैक्ट 50 ग्राम प्रति लीटर की स्प्रे करें ज्यादा हमला दिखने पर 25 प्रतिशत साइपरमैथरिन 2.4 मि.ली. प्रति 10 लीटर पानी की स्प्रे करें कीटों की गिनती अधिक हो जाने पर स्पाइनोसैड 1 मि.ली. प्रति लीटर पानी की स्प्रे करें फल पकने के बाद ट्राइज़ोफॉस या किसी और कीटनाशक की स्प्रे ना करें
Posted by Ram krishna
Uttar Pradesh
11-10-2019 04:28 PM
Punjab
10-11-2019 04:49 PM
यह फसल बहुत तरह की मिट्टी जैसे कि रेतली, नमक वाली, दोमट और चिकनी मिट्टी में उगाई जा सकती है अच्छे जल निकास वाली, जैविक तत्व भरपूर, रेतली से दरमियानी ज़मीन में फसल अच्छी पैदावार देती है यह फसल नमक वाली तेजाबी ज़मीनों में भी उगाई जा सकती है पर बहुत ज्यादा पानी खड़ने वाली और खारी या नमक वाली ज़मीन इस फसल की खेती के लिए .... (Read More)
यह फसल बहुत तरह की मिट्टी जैसे कि रेतली, नमक वाली, दोमट और चिकनी मिट्टी में उगाई जा सकती है अच्छे जल निकास वाली, जैविक तत्व भरपूर, रेतली से दरमियानी ज़मीन में फसल अच्छी पैदावार देती है यह फसल नमक वाली तेजाबी ज़मीनों में भी उगाई जा सकती है पर बहुत ज्यादा पानी खड़ने वाली और खारी या नमक वाली ज़मीन इस फसल की खेती के लिए उचित नहीं होती Kufri Ashoka: इस फसल की सी पी आई यू द्वारा विकसित की गई है और बिहार, हरियाणा, उत्तर प्रदेश और पश्चिम बंगाल में खेती करने के लिए अनुकूल है इसका पौधा मध्यम लंबा और तना दरमियाना मोटा होता है यह किस्म 70-80 दिनों में पककर तैयार हो जाती है इसके आलू बड़े, गोलाकार, सफेद और नर्म छिल्के वाले होते हैं यह पिछेती झुलस रोग को सहने योग्य किस्म है Kufri Badshah: इसके पौधे लंबे और 4-5 तने प्रति पौधा होते हैं इसके आलू गोल, बड़े से दरमियाने, गोलाकार और हल्के सफेद रंग के होते हैं इसके आलू स्वाद होते हैं यह किस्म 90-100 दिनों में पक जाती है यह किस्म कोहरे को सहनेयोग्य है और पिछेती, अगेती झुलस रोग की प्रतिरोधक है Kufri Bahar: इस किस्म के पौधे लंबे और तने मोटे होते हैं तनों की संख्या 4-5 प्रति पौधा होती है इसके आलू बड़े, सफेद रंग के, गोलाकार से अंडाकार होते हैं यह किस्म 90-100 दिनों में पक जाती है और इसकी औसतन पैदावार 100-120 क्विंटल प्रति एकड़ होती है इसे ज्यादा देर तक स्टोर करके रखा जा सकता है यह पिछेती और अगेती झुलस रोग और पत्ता मरोड़ रोग की रोधक है Kufri Chipsona 2: इस किस्म के पौधे दरमियाने कद के और कम तनों वाले होते हैं इसके पत्ते गहरे हरे और फूल सफेद रंग के होते हैं आलू सफेद, दरमियाने आकार के, गोलाकार, अंडाकार और नर्म होते हैं इसकी औसतन पैदावार 140 क्विंटल प्रति एकड़ होती है यह पिछेती झुलस रोग की रोधक किस्म है यह किस्म चिपस और फरैंच फ्राइज़ बनाने के लिए उचित है खेत को एक बार 30 सैं.मी. गहरा जोतकर अच्छे ढंग से बैड बनाएं जोताई के लिए हल और तवियों का प्रयोग करें और फिर 2-3 बार सुहागा फेरें बिजाई से पहले खेत में नमी की मात्रा बनाकर रखें बिजाई के लिए दो ढंग मुख्य तौर पर प्रयोग किए जाते हैं 1. मेंड़ और खालियों वाला ढंग 2. समतल बैडों वाला ढंग इस फसल की खेती के लिए अलग अलग किस्मों के लिए अलग अलग समय प्रयोग होता है कुफरी अशोका की बिजाई के बाद कुफरी बहार किस्म को अक्तूबर के पहले सप्ताह में बोया जाता है कुफरी बादशाह और कुफरी सतलुज की बिजाई के लिए 5 अक्तूबर से 15 अक्तूबर तक का समय अनुकूल होता है बिजाई के लिए पंक्ति से पंक्ति का फासला 60 सैं.मी और पौधे से पौधे का फासला 20 सैं.मी. रखें फासला आलुओं के आकार के अनुसार बदलता रहता है यदि आलू का व्यास 2.5-3.5 सैं.मी. हो तो फासला 60x15 सैं.मी. और यदि आलू का व्यास 5-6 सैं.मी. हो तो फासला 60x40 सैं.मी. होना चाहिए 6-8 इंच गहरी खालियां बनाएं फिर इनमें आलू रखें और थोड़ा सा ज़मीन से बाहर रहने दें बिजाई के लिए ट्रैक्टर से चलने वाली या ऑटोमैटिक बिजाई के लिए मशीन का प्रयोग करें बिजाई के लिए बड़ी आंखों वाले आलुओं का प्रयोग करें बिजाई के लिए 13-15 क्विंटल प्रति एकड़ किलो प्रति एकड़ बीजों का प्रयोग करें बिजाई के लिए सेहतमंद आलू ही चुने बिजाई से पहले आलुओं को कोल्ड स्टोर से निकालकर 1-2 सप्ताह के लिए छांव वाले स्थान पर रखें ताकि वे अंकुरित हो जायें आलुओं के सही अंकुरन के लिए उन्हें जिबरैलिक एसिड 1 ग्राम प्रति 10 लीटर पानी में मिलाकर एक घंटे के लिए उपचार करें फिर छांव में सुखाएं और 10 दिनों के लिए हवादार कमरे में रखें फिर काटकर आलुओं को मैनकोजेब 0.5 प्रतिशत घोल (5 ग्राम प्रति लीटर पानी) में 10 मिनट के लिए भिगो दें इससे आलुओं को शुरूआती समय में गलने से बचाया जा सकता है आलुओं को गलने और जड़ों में कालापन रोग से बचाने के लिए साबुत और काटे हुए आलुओं को 6 प्रतिशत मरकरी के घोल (टैफासन) 0.25 प्रतिशत(2.5 ग्राम प्रति लीटर पानी) में डालें बिजाई से दो सप्ताह पहले खेत की तैयारी के समय 200 क्विंटल प्रति एकड़ रूड़ी की खाद डालें फसल की उचित वृद्धि के लिए नाइट्रोजन 50-60 किलो (110-130 किलो यूरिया), फासफोरस 20 किलो (125 किलो सिंगल सुपर फासफेट) और पोटाश 40 किलो (68 किलो म्यूरेट ऑफ पोटाश) की मात्रा प्रति एकड़ में डालें बिजाई के समय नाइट्रोजन का 3/4 हिस्सा और फासफोरस और पोटाश की पूरी मात्रा डालें बाकी बचा हुआ नाइट्रोजन का 1/4 हिस्सा बिजाई से 25-30 दिन बाद जड़ों से मिट्टी लगाने के समय डालें यदि बिजाई से पहले सिंचाई की गई हो तो पहली सिंचाई 8-10 दिनों के अंदर करें नहीं तो बिजाई के तुरंत बाद या 1.2 दिन बाद सिंचाई करें अक्तूबर-नवंबर के महीने में 7-10 दिनों के अंतराल पर सिंचाई करें दिसंबर-जनवरी महीने में 10-15 दिनों के अंतराल पर सिंचाई करें ज्यादा मात्रा में दिए गए पानी से जड़ गलन बीमारी का खतरा रहता है कटाई के 10-12 दिन पहले सिंचाई बंद कर दें
Posted by AVTAR SINGH
Punjab
11-10-2019 04:17 PM
Punjab
10-12-2019 02:17 PM
ਤੁਸੀ ਓਹਨਾ ਨੂੰ ਪੇਟ ਦੇ ਕੀੜਿਆਂ ਲਈ Flukaird-DS ਗੋਲੀ ਦਿਓ, vitum-h 10-10 ml ਸਵੇਰੇ ਸ਼ਾਮ ਦਿਓ ਤੇ enerboost powder 100 ਗ੍ਰਾਮ ਰੋਜ਼ਾਨਾ ਦਿਓ ਤੇ ਫਿਰ ਸੂਣ ਤੋਂ 1 ਮਹੀਨਾ ਪਹਿਲਾਂ vitum-h ਦੇ ਨਾਲ metabolite ਪਾਊਡਰ ਦੀ ਇੱਕ ਪੁੜੀ ਰੋਜ਼ਾਨਾ ਦਿਓ
Posted by baljinder Singh
Punjab
11-10-2019 04:05 PM
Punjab
10-12-2019 02:18 PM
Milk rate jille de hisab nal rate alag alag hunda hai, jo Fat ate Snf kadde hai oh rate de hisab nal eh formula use krde hai jiwe jekar fatt da rate 200 hai ate tuahdi Fat 4 aundi hai ate Snf da rate 170 hai ate tuhadi snf 8 aundi hai tan total fatt 200x4=800 ate Snf 170x8=1360 fir Fat+snf ,800+1360= 2160 iss trah 1 liter da rate 21 rupes 60 passe howega. Example Fat 4.0 *200 =800 Snf 8.0 *=170=1360 800+1360=2160 Rate per kg 21.60 paise Milk 01 litre 21.60 Milk 10 litre 216 rupees
Posted by Sukhveer. Singh jaura
Punjab
11-10-2019 04:02 PM
Punjab
10-11-2019 04:58 PM
BhaaG deputy director animal husbandry or Krishi vigyan kendar Bathinda or GADVASU VETERINARY UNIVERSITY LUDHIANA NAAL SAMPARK KARO G No 0161 2553364 2414026
Posted by sohan lal
Himachal Pradesh
11-10-2019 03:56 PM
Punjab
10-11-2019 04:14 PM
sohan lal ji inki alag alag spray karen inki ikathe spray na karen.dhanywad
Posted by sukhpreet singh
Punjab
11-10-2019 03:56 PM
Punjab
10-11-2019 04:15 PM
sukhpreet ji sundi di roktham de layi tuc quinalphos@4ml nu prati litre pani de hisab nal spray karo.dhanwad
Posted by pardeep jarwal
Haryana
11-10-2019 03:54 PM
Punjab
10-11-2019 04:19 PM
Pardeep ji kripya aap apna swal vistar se pooche taki aapko iske bare men poori jankari di ja sake aapne video men kuch bhi bolkar nahi btaya hai.dhanywad
Posted by pardeep jarwal
Haryana
11-10-2019 03:51 PM
Punjab
10-11-2019 04:16 PM
Pardeep ji please send the full photo so that we can provide you proper information.thank you
Posted by ansar khan badpani
Madhya Pradesh
11-10-2019 03:41 PM
Punjab
10-11-2019 04:22 PM
जीरा भारत का महत्तवपूर्ण मसाला है अच्छे निकास वाली और उच्च कार्बनिक पदार्थों वाली मिट्टी जीरे की खेती के लिए उपयुक्त होती है जीरे की खेती के लिए उस ज़मीन का चयन करें जहां 3-4 वर्ष जीरे की खेती ना की गई हो प्रसिद्ध किस्में:-RZ 19,RZ 209,Gujarat Jeera 2,RZ 223,GC 4 जीरे की खेती के लिए अच्छी तरह से जोती गई और समतल ज़मीन की आवश्यकता होती है म.... (Read More)
जीरा भारत का महत्तवपूर्ण मसाला है अच्छे निकास वाली और उच्च कार्बनिक पदार्थों वाली मिट्टी जीरे की खेती के लिए उपयुक्त होती है जीरे की खेती के लिए उस ज़मीन का चयन करें जहां 3-4 वर्ष जीरे की खेती ना की गई हो प्रसिद्ध किस्में:-RZ 19,RZ 209,Gujarat Jeera 2,RZ 223,GC 4 जीरे की खेती के लिए अच्छी तरह से जोती गई और समतल ज़मीन की आवश्यकता होती है मिट्टी के भुरभुरा होने तक खेत की जोताई करें और मिट्टी को समतल करने के लिए सुहागा फेरें जीरे की बिजाई के लिए 15 से 30 नवंबर सही समय होता है कतारों में बिजाई के लिए दो पंक्तियों में 30 सैं.मी. फासले का प्रयोग करें बीजों को 10 सैं.मी. की गहराई में बोयें बिजाई के लिए बुरकाव ढंग या कतार में बिजाई ढंग का प्रयोग करें एक एकड़ खेत में बिजाई के लिए 4-6 किलो बीज पर्याप्त होते हैं बिजाई से पहले कार्बेनडाज़िम 2 ग्राम से प्रति किलो बीजों का उपचार करें यह बीजों का फंगस संक्रमक से बचाव करेगा खादों की सही मात्रा के लिए और अतिरिक्त प्रयोग ना करने के लिए मिट्टी की जांच सबसे महत्तवपूर्ण कदम है फसल की अच्छी वृद्धि और अच्छी उपज के लिए नाइट्रोजन 15 किलो (यूरिया 32 किलो) फासफोरस 11 किलो (एस एस पी 66 किलो) और पोटाश 7 किलो (म्यूरेट ऑफ पोटाश 12 किलो) को गाय के गले हुए गोबर 2 टन के साथ प्रति एकड़ में डालें नाइट्रोजन की आधी मात्रा और फासफोरस और पोटाश की पूरी मात्रा बिजाई के समय डालें बाकी बची नाइट्रोजन की आधी मात्रा बिजाई के 35 दिनों के बाद डालें बिजाई के तुरंत बाद हल्की सिंचाई करें दूसरी सिंचाई बिजाई के 10 दिनों के बाद अंकुरण के समय करें उसके बाद तीन सिंचाइयां पर्याप्त होती हैं बाकी की सिंचाइयां बिजाई के 35वें, 60वें और 85वें दिन बाद करें एक बार फसल पक जाये तब सिंचाई ना करें बीज भरने की अवस्था में सिंचाई पत्तों के ऊपरी धब्बा रोग, चेपे और झुलस रोग के हमले को बढ़ाती है जीरे की फसल में नदीन गंभीर समस्या होते हैं नदीनों की जांच के लिए लगातार गोडाई और निराई करें पहली गोडाई बिजाई के 30-35 दिनों के बाद करें जब जीरे की फसल 5 सैं.मी. कद की हो जाये दूसरी गोडाई पहली गोडाई के 20-25 दिन बाद करें और खेत को नदीन रहित रखें रासायनिक रोकथाम के लिए बिजाई के 1-2 दिन बाद पैंडीमैथालीन 1 लीटर को 200 लीटर पानी में मिलाकर स्प्रे करें जीरे की फसल 100-115 दिनों में कटाई के लिए तैयार हो जाती है कटाई दरांती की सहायता से की जाती है फसल की कटाई के बाद पौधों को फर्श पर खिलार दें और धूप में सुखाने के लिए छोड़ दें धूप में अच्छे से सुखाने के बाद पौधों से दाने अलग कर लें
Posted by Navdeep Khattra
Punjab
11-10-2019 03:35 PM
Punjab
10-11-2019 04:23 PM
Navdeep ji strawberry de plant lain layi tuc 98725 95194‬,70093 39914 NS berry orchard(Strawberry), patiala,punjab nal sampark kar sakde ho.dhanwad
Posted by baljinder Singh
Punjab
11-10-2019 03:32 PM

?

Maharashtra
10-11-2019 04:24 PM
Baljinder ji kirpa karke audio dubara bhejo tuhade valo bheji gayi audio upload nahi hoyi hai.dhanwad
Posted by Jagdeep
Punjab
11-10-2019 03:31 PM
Maharashtra
10-11-2019 04:26 PM
jagdeep ji kirpa karke daso ke tuc isdi kinni matra di varto kiti hai ta jo tuhanu is bare poori jankari diti ja sake.dhanwad
Posted by Navdeep Khattra
Punjab
11-10-2019 03:28 PM
Punjab
10-11-2019 04:34 PM
ਨਵਦੀਪ ਜੀ ਤੁਸੀ ਇਹਨਾਂ ਨੂੰ ਇਕੱਠੇ ਰਲਾ ਕੇ ਬੀਜ ਸਕਦੇ ਹੋ ਪਰ ਇਹਨਾਂ ਦਾ ਬੀਜ ਤੁਸੀ ਦੁਬਾਰਾ ਅਗਲੇ ਸਾਲ ਲਈ ਨਹੀਂ ਰੱਖ ਸਕਦੇ ਧੰਨਵਾਦ
Posted by Hemendra Jadoun
Uttar Pradesh
11-10-2019 03:27 PM
Punjab
10-11-2019 04:58 PM
हेमेंद्र जी कृपया आप बताये के यह किसी फसल में है या खाली खेत में है ताकि आपको इसके बारे में पूरी जानकारी दी जा सके धन्यवाद
Posted by kp thakur
Punjab
11-10-2019 03:20 PM
Punjab
11-08-2019 08:02 AM
Thakur ji tuci ehh photo dekh skde ho.
Posted by kp thakur
Punjab
11-10-2019 03:17 PM
Punjab
03-16-2020 08:31 PM
iske liye aap nazdiki doctor se inki janch krwayen aur ass pass saff safai ka purra dian rakhen.
Posted by sukhpreet singh
Punjab
11-10-2019 03:15 PM
Punjab
10-11-2019 04:47 PM
Sukhpreet ji 1121 da rate 3000-3300 rupaye prati quintal de hisab nal chal reha hai.dhanwad
Posted by Dev Deva
Chattisgarh
11-10-2019 03:15 PM
Punjab
10-11-2019 04:44 PM
यह बैंगन की फसल का मुख्य और खतरनाक कीट है शुरूआत में इसकी छोटी गुलाबी सुंडियां पौधे की गोभ में छेद करके अंदर से तंतू खाती हैं और बाद में फल पर हमला करती हैं प्रभावित फलों के ऊपर बड़े छेद नज़र आते हैं और खाने योग्य नहीं होते हैं प्रभावित फल हर सप्ताह तोड़ कर नष्ट कर दें नर्सरी लगाने से 1 महीने बाद ट्राइज़ोफॉस 20 म.... (Read More)
यह बैंगन की फसल का मुख्य और खतरनाक कीट है शुरूआत में इसकी छोटी गुलाबी सुंडियां पौधे की गोभ में छेद करके अंदर से तंतू खाती हैं और बाद में फल पर हमला करती हैं प्रभावित फलों के ऊपर बड़े छेद नज़र आते हैं और खाने योग्य नहीं होते हैं प्रभावित फल हर सप्ताह तोड़ कर नष्ट कर दें नर्सरी लगाने से 1 महीने बाद ट्राइज़ोफॉस 20 मि.ली. प्रति 10 लीटर पानी और 50 ग्राम नीम एक्सट्रैक्ट 50 ग्राम प्रति लीटर की स्प्रे करें 10-15 दिनों के फासले पर यह स्प्रे दोबारा करें फूल निकलने के समय कोराजैन 18.5 प्रतिशत एस सी 5 मि.ली. + टीपॉल 5 मि.ली. का घोल 12 लीटर पानी में मिलाकर 20 दिनों के फासले पर दो बार स्प्रे करें शुरूआती हमले में 5 प्रतिशत नीम एक्सट्रैक्ट 50 ग्राम प्रति लीटर की स्प्रे करें ज्यादा हमला दिखने पर 25 प्रतिशत साइपरमैथरिन 2.4 मि.ली. प्रति 10 लीटर पानी की स्प्रे करें कीटों की गिनती अधिक हो जाने पर स्पाइनोसैड 1 मि.ली. प्रति लीटर पानी की स्प्रे करें फल पकने के बाद ट्राइज़ोफॉस या किसी और कीटनाशक की स्प्रे ना करें
Posted by Jaswant singh
Punjab
11-10-2019 03:03 PM
Punjab
10-11-2019 03:18 PM
ਜਸਵੰਤ ਜੀ ਤੁਸੀ ਮੱਕੀ ਦਾ ਬੀਜ ਲੈਣ ਲਈ ਤੁਸੀ Rajeev Gupta/ Rakesh Kharbanda 9814800554 9872211171 Kudrati KIsan Hut ਨਾਲ ਸੰਪਰਕ ਕਰ ਸਕਦੇ ਹੋ ਧੰਨਵਾਦ
Posted by Gurnaam Gujjar
Haryana
11-10-2019 02:57 PM
Maharashtra
10-11-2019 02:59 PM
HD 2967 : यह बहुत बड़े कद की किस्म है जिसमें पौधे का औसतन कद 101 सैंमी होता है इसके दाने सुनहरे, मध्यम, सख्त और चमकदार होते हैं यह लगभग 157 दिनों में पक जाती है यह पत्तों के पीलेपन और भूरेपन से रहित है इसकी औसत पैदावर 21.5 क्विंटल प्रति एकड़ है