Experts Q&A Search

Posted by Ravi Kumar sharma
Bihar
14-10-2019 08:19 AM
Punjab
12-02-2019 06:51 PM
Shrimaan ji, ispar aap macchar ka hamla check karein, agar macchar ho to aap isme imidacloprid @ 1.5 ml prati liter pani ke hisaab se spray karein, dhanywad
Posted by Vishal
Uttar Pradesh
14-10-2019 08:15 AM
Punjab
12-02-2019 06:49 PM
Shrimaan ji, kheti boht parkar ki hoti hai jaise ke phoolon ki kheti, sabjion ki kheti, faslon ki kheti or bhi anay kheti hoti hai, kripya ap bataye ke ap kis fasal ki kheti ke bare mei jankari leni hai, tajo apko iske bare mein bataya ja sake, dhanywad
Posted by akash kumar
Uttar Pradesh
14-10-2019 08:12 AM
Rajasthan
10-14-2019 11:01 AM
मोती की खेती एक बहुत ही अच्छा व्यवसाय है इस व्यवसाय को शुरू करने के लिए सबसे जरुरी है इसकी ट्रेनिंग, क्योकि इसमें बहुत सी ऐसी बारीकियें होती है जो हमें प्रेक्टिकल ट्रेनिंग में ही सीखने को मिलती है अगर आप इसकी ट्रेनिंग लेना चाहते है तो आप ग्लिटराटी पर्ल फार्मिंग ट्रेनिंग केंद्र प्रशिक्षण कार्य कर्म आयोजि.... (Read More)
मोती की खेती एक बहुत ही अच्छा व्यवसाय है इस व्यवसाय को शुरू करने के लिए सबसे जरुरी है इसकी ट्रेनिंग, क्योकि इसमें बहुत सी ऐसी बारीकियें होती है जो हमें प्रेक्टिकल ट्रेनिंग में ही सीखने को मिलती है अगर आप इसकी ट्रेनिंग लेना चाहते है तो आप ग्लिटराटी पर्ल फार्मिंग ट्रेनिंग केंद्र प्रशिक्षण कार्य कर्म आयोजित किया जा रहा है प्रशिक्षण कार्य कर्म में भाग लेने के लिए नीचे दिए गए नम्बर पर आज ही संपर्क करें और Rs 250/ से अपना रजिस्ट्रेशन करवाए अचल सिंह (फाउंडर )- 9711858258. धन्यवाद
Posted by Modaram Sen
Rajasthan
14-10-2019 08:06 AM
Punjab
11-30-2019 06:26 PM
अच्छे निकास वाली और उच्च कार्बनिक पदार्थों वाली मिट्टी जीरे की खेती के लिए उपयुक्त होती है जीरे की खेती के लिए उस ज़मीन का चयन करें जहां 3-4 वर्ष जीरे की खेती ना की गई हो जीरे की खेती के लिए अच्छी तरह से जोती गई और समतल ज़मीन की आवश्यकता होती है मिट्टी के भुरभुरा होने तक खेत की जोताई करें और मिट्टी को समतल करने के .... (Read More)
अच्छे निकास वाली और उच्च कार्बनिक पदार्थों वाली मिट्टी जीरे की खेती के लिए उपयुक्त होती है जीरे की खेती के लिए उस ज़मीन का चयन करें जहां 3-4 वर्ष जीरे की खेती ना की गई हो जीरे की खेती के लिए अच्छी तरह से जोती गई और समतल ज़मीन की आवश्यकता होती है मिट्टी के भुरभुरा होने तक खेत की जोताई करें और मिट्टी को समतल करने के लिए सुहागा फेरें जीरे की बिजाई के लिए 15 से 30 नवंबर सही समय होता है कतारों में बिजाई के लिए दो पंक्तियों में 30 सैं.मी. फासले का प्रयोग करें बीजों को 10 सैं.मी. की गहराई में बोयें बिजाई के लिए बुरकाव ढंग या कतार में बिजाई ढंग का प्रयोग करें एक एकड़ खेत में बिजाई के लिए 4-6 किलो बीज पर्याप्त होते हैं खादों की सही मात्रा के लिए और अतिरिक्त प्रयोग ना करने के लिए मिट्टी की जांच सबसे महत्तवपूर्ण कदम है फसल की अच्छी वृद्धि और अच्छी उपज के लिए नाइट्रोजन 15 किलो (यूरिया 32 किलो) फासफोरस 11 किलो (एस एस पी 66 किलो) और पोटाश 7 किलो (म्यूरेट ऑफ पोटाश 12 किलो) को गाय के गले हुए गोबर 2 टन के साथ प्रति एकड़ में डालें नाइट्रोजन की आधी मात्रा और फासफोरस और पोटाश की पूरी मात्रा बिजाई के समय डालें बाकी बची नाइट्रोजन की आधी मात्रा बिजाई के 35 दिनों के बाद डालें
Posted by Talwinder singh
Punjab
14-10-2019 07:44 AM
Punjab
10-15-2019 01:14 PM
ਅਜੇ ਤੱਕ ਕੋਈ ਪੱਕਾ ਕਲੀਅਰ ਕੁੱਝ ਨਹੀ ਹੋਇਆ ਹੈ ਜੀ ਉਮੀਦ ਹੈ ਕਣਕ ਤੱਕ ਹੋ ਜਾਵੇਗਾ ਜੀ
Posted by shubham shrivastava
Madhya Pradesh
14-10-2019 07:44 AM
Maharashtra
10-14-2019 01:01 PM
शुभम जी कृपया बताये कि आपने इसमें क्या क्या खाद डाली है ताकि आपको इसके बारे में पूरी जानकारी दी जा सके धन्यवाद
Posted by Narendra kumar
Uttar Pradesh
14-10-2019 07:44 AM
Punjab
12-02-2019 06:39 PM
Shrimaan ji, sharvati ka rate is samay 1850 se 1900 rupye prati quintal ke hisaab se chal raha hai, dhanywad
Posted by chandrakesh
Uttar Pradesh
14-10-2019 07:41 AM
Punjab
12-02-2019 06:34 PM
श्रीमान जी, आप मटर की किस्मे जैसे के Rachna, KPM, Shikha, Malviya Matar 2, Malviya Matar 15, JP 885, DDR 23 (Pusa Prabhat), Pant Matar 5, Adarsh, Vikas, Jay, Sapna, Prakash, Hariyal, Palathi Matar, Pant P 42, Aman, Kashi Nandini, Kashi Uday की बुवाई कर सकते हैं, इसका एक बीघे में 20 से 25 kg बीज डलता है, धन्यवाद
Posted by Manmeet Singh
Punjab
14-10-2019 07:34 AM
Punjab
10-14-2019 03:59 PM
pashu ko heat mai lane ke liye pett ke kirro ke liye Flukarid-Ds bolus den aur usko Minfa gold powder 100gm rojana aur Totavit tablet rojana 1 goli den aur 21 din tak dete rehen, isse heat mai aa jayegi..
Posted by chandrakesh
Uttar Pradesh
14-10-2019 07:34 AM
Punjab
11-30-2019 06:26 PM
श्रीमान जी, इसकी रोकथाम के लिए आप tilt @ २०० ml प्रति एकड़ के हिसाब से स्प्रे करें, धन्यवाद
Posted by Manmeet Singh
Punjab
14-10-2019 07:31 AM
Punjab
12-02-2019 06:41 PM
Shrimaan ji, 1121 da rate is samay 2629 to 2900 rupay prati quintal de hisaab nal chal rea hai, dhanwad
Posted by Rohit Patidar
Madhya Pradesh
14-10-2019 07:27 AM
Punjab
12-02-2019 06:05 PM
श्रीमान जी, डाई बैक को रोकने के लिए आप जहाँ पर यह समस्या है उस शाखा को काटकर वहां baudeaux paste लगा दें, धन्यवाद
Posted by Nirbhay singh
Punjab
14-10-2019 07:26 AM
Punjab
11-30-2019 06:24 PM
ਸ੍ਰੀ ਮਾਨ ਜੀ UNNAT PBW 343: ਇਹ ਕਿਸਮ ਸਿੰਚਾਈ ਵਾਲੇ ਖੇਤਰਾਂ ਵਿੱਚ ਲਗਾਉਣ ਯੋਗ ਹੈ ਪੱਕਣ ਦੇ ਲਈ ਇਹ 155 ਦਿਨਾਂ ਦਾ ਸਮਾਂ ਲੈਦੀ ਹੈ ਇਹ ਕਰਨਾਲ ਬੰਟ ਦੀ ਪ੍ਰਤਿਰੋਧੀ ਅਤੇ ਬਲਾਈਟ ਨੂੰ ਵੀ ਸਹਿਣ ਯੋਗ ਹੈ ਇਸਦੀ ਔਸਤ ਪੈਦਾਵਾਰ 23.2 ਕੁਇੰਟਲ ਪ੍ਰਤੀ ਏਕੜ ਹੈ
Posted by Devendra Kumar
Rajasthan
14-10-2019 07:25 AM
Punjab
11-30-2019 06:23 PM
अच्छी पैदावार लेने के लिए पहले 45 दिन फसल को नदीनों से बचाना बहुत जरूरी होता है दो बार फसल में गोडाई करनी चाहिए पहली बीजने के तीन सप्ताह बाद और दूसरी पहली गोडाई के तीन सप्ताह बाद फ्लूक्लोरालिन 600-800 मि.ली.प्रति एकड़ या पैंडीमैथालीन 1 लीटर प्रति एकड़ नदीनों के पैदा होने से पहले स्प्रे करें मिट्टी चढ़ाना : यह एक जरूर.... (Read More)
अच्छी पैदावार लेने के लिए पहले 45 दिन फसल को नदीनों से बचाना बहुत जरूरी होता है दो बार फसल में गोडाई करनी चाहिए पहली बीजने के तीन सप्ताह बाद और दूसरी पहली गोडाई के तीन सप्ताह बाद फ्लूक्लोरालिन 600-800 मि.ली.प्रति एकड़ या पैंडीमैथालीन 1 लीटर प्रति एकड़ नदीनों के पैदा होने से पहले स्प्रे करें मिट्टी चढ़ाना : यह एक जरूरी प्रक्रिया है, जो कि बीजने के 40-45 दिनों के बाद की जाती है इसकी मदद से पौधे आसानी से मिट्टी में चले जाते हैं जिससे फलियों के विकास में वृद्धि होती है
Posted by Akhilesh Madeshiya
Bihar
14-10-2019 07:22 AM
Maharashtra
10-14-2019 11:36 AM
खुम्ब की किस्में कई प्रकार की होती है जैसे कि बटन खुम्ब, डीगरी, शटाकी खुम्ब, पराली खुम्ब, और मिलकी खुम्ब इनमे से कुइ खुम्ब सर्दियो के मौसम में और कुछ गर्मीयों के मौसम में लगाये जाते है और हर खुम्ब को लगाने का समय अलग अलग है जैसे बटन खुम्ब का समय सितंबर से मार्च तक होता है इस समय में हम तीन फसले ले सकते है शटाकी ख.... (Read More)
खुम्ब की किस्में कई प्रकार की होती है जैसे कि बटन खुम्ब, डीगरी, शटाकी खुम्ब, पराली खुम्ब, और मिलकी खुम्ब इनमे से कुइ खुम्ब सर्दियो के मौसम में और कुछ गर्मीयों के मौसम में लगाये जाते है और हर खुम्ब को लगाने का समय अलग अलग है जैसे बटन खुम्ब का समय सितंबर से मार्च तक होता है इस समय में हम तीन फसले ले सकते है शटाकी खुम्ब का समय अक्तूबर से मध्य फरवरी तक हैं इस समय हम एक फसल ही ले सकते है पराली खुम्ब का समय अप्रैल से अगस्त तक है इस समय हम चार फसले ले सकते है मिलकी खुम्ब का समय अप्रैल से सितंबर तक है आप अब अप्रैल में मिलकी या पराली खुम्ब लगा सकते है पराली खुमब के लिए आपको पराली, बीज, बांस, सेबा, आदि की जरूरत है पराली के पूले, धानो की पराली 1-1 किलो के पूले दोनो सिरो से सेबे से बांध कर तैयार किये जाते है पूले के सिरे कांट कर एक सार कर लिए जाते है पूलो की क्यिारी लगाना पराली के पूलो को साफ पानी में 16-20 घंटो के लिए डूबो दे गिले पूलो को ढलान पर रख कर फालतू पानी को निकलने दे कमरे ईटो और बांस से एक पलेटफार्म बनाये इस पलेटफार्म पर 5 पूलो की एक तहय लगाये जिसके ऊपर 75 ग्राम बीज डाले इसके ऊपर की तहय उलट होती है इस प्रकार 5-5 पूलो की तहय में 300 ग्राम बीज डाल कर कियारी तैयार करे सबसे ऊपर दो पूलो को खोलकर रख दे खुम्बो का फूटना बिजाई से 7-9 दिनो के बाद खुम्ब फूटने लगती है पानी और हवा का संचार बिजाई के दो दिन के बाद हर रोज पानी का छिडका करे खुम्बो के फूटने के बाद हवा का संचार 6-8 घंटे प्रति दिन किया जाता है खुम्बो की तूडाई खुम्बो के फूटने के बाद 1-2 दिनो के बाद तोडाई के योग्य हो जाती है मिलकी खुम्ब मिलकी खुम्ब के लिए तूडी, बीज, मोमी लिफाफे, सेबा, केसिंग,मिट्टी आदि होने चाहिये तूडी की तैयारी सूकी तूडी को पक्के फर्श पर बिछा कर 16-20 घंटे पानी से गिला करे गिली तूडी को बोरी में भर कर सेबे से बांध दे इस बोरी को उबलते पानी में 45-50 मिनट रखें तूडी को निकालकर पक्के फर्श पर बिछा कर ठंडा करे यह तूडी बिजाई के लिए तैयार है बिजाई ठंडी तूडी में बीज मिलाकर मोमी लिफाफो में भर दें एक मोमी लिफाफें में लगभग 2 किलो गिली तूडी और 70-80 ग्राम बीज पडता है लिफाफे के मुंह को सेबे से अच्छी तरह बांध कर कमरे में रख दे केसिंग बिजाई के दो तीन हफतो के बाद लिफाफे खोलकर केसिंग की 1-1.5 की तहय लगा दें केसिंग में तूडी और रेतली मिट्टी होती है 24 घंटो के लिए 4 प्रतिशत फारमलेन के घोल से जीवाणु रहित किया जाता है खुम्बो का फूटना केसिंग मिट्टी डालने के लगभग दो हफतो में खुम्बो के छोटे छोटे किणके निकलने शुरू हो जाते है और 4-5 दिन के बाद तोडने योग्य हो जाते है खुम्बो की तूडाई लगभग 35-40 दिनो तक की जाती है इसका बीज लेने के लिए आप Mr. jai 8882876224 जी से संपर्क कर सकते है
Posted by Imran Khan Hasan Imran
Uttar Pradesh
14-10-2019 07:21 AM
Maharashtra
10-14-2019 11:32 AM
इमरान जी आप 2967 की बिजाई कर सकते है HD 2967 : यह बहुत बड़े कद की किस्म है जिसमें पौधे का औसतन कद 101 सैंमी होता है इसके दाने सुनहरे, मध्यम, सख्त और चमकदार होते हैं यह लगभग 157 दिनों में पक जाती है यह पत्तों के पीलेपन और भूरेपन से रहित है इसकी औसत पैदावर 21.5 क्विंटल प्रति एकड़ है
Posted by Nirbhay singh
Punjab
14-10-2019 07:21 AM
Haryana
10-14-2019 11:30 AM
ਤੁਸੀ ਕਣਕ ਦੀਆਂ ਹੇਠ ਦਿਤੀਆਂ ਕਿਸਮਾਂ ਦੀ ਬਿਜਾਈ ਕਰ ਸਕਦੇ ਹੋ :-UNNAT PBW 343: ਇਹ ਕਿਸਮ ਸਿੰਚਾਈ ਵਾਲੇ ਖੇਤਰਾਂ ਵਿੱਚ ਲਗਾਉਣ ਯੋਗ ਹੈ ਪੱਕਣ ਦੇ ਲਈ ਇਹ 155 ਦਿਨਾਂ ਦਾ ਸਮਾਂ ਲੈਦੀ ਹੈ ਇਹ ਕਰਨਾਲ ਬੰਟ ਦੀ ਪ੍ਰਤਿਰੋਧੀ ਅਤੇ ਬਲਾਈਟ ਨੂੰ ਵੀ ਸਹਿਣ ਯੋਗ ਹੈ ਇਸਦੀ ਔਸਤ ਪੈਦਾਵਾਰ 23.2 ਕੁਇੰਟਲ ਪ੍ਰਤੀ ਏਕੜ ਹੈ UNNAT PBW 550: ਇਹ ਕਿਸਮ ਪੰਜਾਬ ਦੇ ਸਾਰਿਆਂ ਇਲਾਕਿਆਂ ਵਿੱਚ ਉਗਾਈ ਜਾਂਦੀ ਹੈ ਇਹ ਕਿਸਮ 145 ਦਿਨਾਂ ਵ.... (Read More)
ਤੁਸੀ ਕਣਕ ਦੀਆਂ ਹੇਠ ਦਿਤੀਆਂ ਕਿਸਮਾਂ ਦੀ ਬਿਜਾਈ ਕਰ ਸਕਦੇ ਹੋ :-UNNAT PBW 343: ਇਹ ਕਿਸਮ ਸਿੰਚਾਈ ਵਾਲੇ ਖੇਤਰਾਂ ਵਿੱਚ ਲਗਾਉਣ ਯੋਗ ਹੈ ਪੱਕਣ ਦੇ ਲਈ ਇਹ 155 ਦਿਨਾਂ ਦਾ ਸਮਾਂ ਲੈਦੀ ਹੈ ਇਹ ਕਰਨਾਲ ਬੰਟ ਦੀ ਪ੍ਰਤਿਰੋਧੀ ਅਤੇ ਬਲਾਈਟ ਨੂੰ ਵੀ ਸਹਿਣ ਯੋਗ ਹੈ ਇਸਦੀ ਔਸਤ ਪੈਦਾਵਾਰ 23.2 ਕੁਇੰਟਲ ਪ੍ਰਤੀ ਏਕੜ ਹੈ UNNAT PBW 550: ਇਹ ਕਿਸਮ ਪੰਜਾਬ ਦੇ ਸਾਰਿਆਂ ਇਲਾਕਿਆਂ ਵਿੱਚ ਉਗਾਈ ਜਾਂਦੀ ਹੈ ਇਹ ਕਿਸਮ 145 ਦਿਨਾਂ ਵਿੱਚ ਪੱਕ ਕੇ ਤਿਆਰ ਹੋ ਜਾਂਦੀ ਹੈ ਇਹ ਪੀਲੀ ਅਤੇ ਭੂਰੀ ਕੁੰਗੀ ਦੀ ਰੋਧਕ ਕਿਸਮ ਹੈ ਇਸਦਾ ਔਸਤਨ ਕੱਦ 86 ਸੈ.ਮੀ. ਹੁੰਦਾ ਹੈ ਇਸ ਦਾ ਔਸਤਨ ਝਾੜ 23 ਕੁਇੰਟਲ ਪ੍ਰਤੀ ਏਕੜ ਹੁੰਦਾ ਹੈ PBW 1 Zn: ਇਸ ਕਿਸਮ ਦੇ ਪੌਦੇ ਦਾ ਔਸਤਨ ਕੱਦ 103 ਸੈ.ਮੀ. ਹੁੰਦਾ ਹੈ ਇਹ ਕਿਸਮ 151 ਦਿਨਾਂ ਵਿੱਚ ਕਟਾਈ ਲਈ ਤਿਆਰ ਹੋ ਜਾਂਦੀ ਹੈ ਇਸ ਦਾ ਔਸਤਨ ਝਾੜ 22.5 ਕੁਇੰਟਲ ਪ੍ਰਤੀ ਏਕੜ ਹੁੰਦਾ ਹੈ PBW 725: ਇਹ ਕਿਸਮ ਪੀ ਏ ਯੂ, ਐਗਰੀਕਲਚਰ ਯੂਨੀਵਰਸਿਟੀ ਦੁਆਰਾ ਸਿਫਾਰਿਸ਼ ਕੀਤੀ ਗਈ ਹੈ ਇਹ ਇੱਕ ਮੱਧਰੀ ਕਿਸਮ ਹੈ ਅਤੇ ਇਹ ਸਿੰਚਾਈ ਵਾਲੇ ਖੇਤਰਾਂ ਵਿੱਚ ਲਗਾਈ ਜਾਂਦੀ ਹੈ ਇਹ ਪੀਲੇ ਅਤੇ ਭੂਰੇ ਜੰਗ ਦੀ ਪ੍ਰਤਿਰੋਧੀ ਕਿਸਮ ਹੈ ਇਸਦੇ ਦਾਣੇ ਮੋਟੇ , ਅਤੇ ਗਹਿਰੇ ਰੰਗ ਦੇ ਹੁੰਦੇ ਹਨ ਇਹ 155 ਦਿਨਾਂ ਵਿੱਚ ਪੱਕ ਕੇ ਤਿਆਰ ਹੋ ਜਾਂਦੀ ਹੈ ਇਸਦੀ ਸਲਾਨਾ ਔਸਤ ਝਾੜ 23 ਕੁਇੰਟਲ ਪ੍ਰਤੀ ਏਕੜ ਹੈ PBW 677: ਇਹ ਕਿਸਮ 160 ਦਿਨਾਂ ਵਿੱਚ ਕਟਾਈ ਲਈ ਤਿਆਰ ਹੋ ਜਾਂਦੀ ਹੈ ਇਸਦਾ ਔਸਤ ਝਾੜ 22.4 ਕੁਇੰਟਲ ਪ੍ਰਤੀ ਏਕੜ ਹੈ HD 3086 (PusaGautam) : ਇਸ ਦਾ ਔਸਤਨ ਝਾੜ 23 ਕੁਇੰਟਲ ਪ੍ਰਤੀ ਏਕੜ ਹੁੰਦਾ ਹੈ ਇਹ ਪੱਤਿਆਂ ਦੇ ਪੀਲੇਪਣ ਅਤੇ ਭੂਰੇਪਣ ਦੀ ਬਿਮਾਰੀ ਤੋਂ ਰਹਿਤ ਹੁੰਦੀ ਹੈ ਵਧੀਆ ਕਿਮਸ ਦੇ ਬਰੈੱਡ ਬਣਾਉਣ ਦੇ ਸਾਰੇ ਗੁਣ/ਤੱਤ ਇਸ ਵਿਚ ਮੌਜੂਦ ਹਨ WH 1105: ਇਸ ਦੀ ਕਾਢ ਪੰਜਾਬ ਖੇਤੀਬਾੜੀ ਯੂਨੀਵਰਸਿਟੀ ਵੱਲੋਂ ਕੀਤੀ ਗਈ ਹੈ ਇਹ ਇੱਕ ਛੋਟੇ ਕੱਦ ਵਾਲੀ ਕਿਸਮ ਹੈ ਜਿਸ ਵਿਚ ਬੂਟੇ ਦਾ ਔਸਤਨ ਕੱਦ 97 ਸੈ.ਮੀ. ਤੱਕ ਹੁੰਦਾ ਹੈ ਇਸ ਦੇ ਦਾਣੇ ਸੁਨਹਿਰੇ, ਮਧਰੇ, ਸਖਤ ਅਤੇ ਚਮਕਦਾਰ ਹੁੰਦੇ ਹਨ ਇਹ ਪੱਤਿਆਂ ਦੇ ਪੀਲੇਪਣ ਅਤੇ ਭੂਰੇਪਣ ਦੀ ਬਿਮਾਰੀ ਤੋਂ ਰਹਿਤ ਹੁੰਦੀ ਹੈ ਪਰੰਤੂ ਇਹ ਦਾਣਿਆਂ ਦੇ ਖਰਾਬ ਹੋਣ ਅਤੇ ਸਿੱਟਿਆਂ ਦੇ ਭੂਰੇ ਪੈਣ ਦੀ ਬਿਮਾਰੀ ਪ੍ਰਤੀ ਸੰਵੇਦਨਸ਼ੀਲ ਹੈ ਇਹ ਲਗਭਗ 157 ਦਿਨਾਂ ਵਿੱਚ ਪੱਕ ਜਾਂਦੀ ਹੈ ਇਸ ਦੀ ਔਸਤਨ ਪੈਦਾਵਾਰ 23.1 ਕੁਇੰਟਲ ਪ੍ਰਤੀ ਏਕੜ ਹੈ HD 2967: ਇਹ ਵੱਡੇ ਕੱਦ ਦੀ ਕਿਸਮ ਹੈ ਜਿਸ ਵਿਚ ਬੂਟੇ ਦਾ ਔਸਤਨ ਕੱਦ 101 ਸੈ.ਮੀ. ਤੱਕ ਹੁੰਦਾ ਹੈ ਇਸ ਦੇ ਦਾਣੇ ਸੁਨਹਿਰੇ, ਮਧਰੇ, ਸਖਤ ਅਤੇ ਚਮਕਦਾਰ ਹੁੰਦੇ ਹਨ ਇਹ ਲਗਭਗ 157 ਦਿਨਾਂ ਵਿੱਚ ਪੱਕ ਜਾਂਦੀ ਹੈ ਇਸ ਦੀ ਔਸਤਨ ਪੈਦਾਵਾਰ 21.5 ਕੁਇੰਟਲ ਪ੍ਰਤੀ ਏਕੜ ਹੈ PBW 621: ਇਹ ਕਿਸਮ ਪੰਜਾਬ ਦੇ ਸਾਰਿਆਂ ਇਲਾਕਿਆਂ ਵਿੱਚ ਉਗਾਈ ਜਾਂਦੀ ਹੈ ਇਹ ਕਿਸਮ 158 ਦਿਨਾਂ ਵਿੱਚ ਪੱਕ ਕੇ ਤਿਆਰ ਹੋ ਜਾਂਦੀ ਹੈ ਇਹ ਪੀਲੀ ਅਤੇ ਭੂਰੀ ਕੁੰਗੀ ਦੀ ਰੋਧਕ ਕਿਸਮ ਹੈ ਇਸਦਾ ਔਸਤਨ ਕੱਦ 100 ਸੈ.ਮੀ. ਹੁੰਦਾ ਹੈI HD 3226:- jhaad 24 qtl / acre.
Posted by harry
Punjab
14-10-2019 07:12 AM
Haryana
10-14-2019 11:23 AM
ਪਹਿਲਾਂ ਪਾਣੀ ਹਲਕੀਆਂ ਜ਼ਮੀਨਾਂ ਵਿੱਚ 3-5 ਦਿਨਾਂ ਵਿੱਚ ਅਤੇ ਭਾਰੀਆਂ ਜ਼ਮੀਨਾਂ ਵਿੱਚ 6-8 ਦਿਨਾਂ ਬਾਅਦ ਲਗਾਓ ਸਰਦੀਆਂ ਵਿੱਚ 10-15 ਦਿਨਾਂ ਦੇ ਵਕਫੇ ਤੇ ਅਤੇ ਗਰਮੀਆਂ ਵਿੱਚ 8-10 ਦਿਨਾਂ ਦੇ ਵਕਫੇ ਤੇ ਪਾਣੀ ਲਗਾਓ
Posted by padam singh baghel
Uttar Pradesh
14-10-2019 07:01 AM
Maharashtra
10-14-2019 11:16 AM
इस फसल की खेती अलग-अलग मिट्टी की किस्मों में की जा सकती है जैसे कि रेतली, चिकनी, दोमट, काली, लाल मिट्टी, जिसमें पानी के निकास का सही प्रबंध हो इसकी अच्छी पैदावार के लिए इसे अच्छे निकास वाली रेतली मिट्टी में उत्तम जैविक तत्वों से उगाया जा सकता है अच्छे निकास वाली मिट्टी की पी एच 7-8.5 होनी चाहिए यह तेजाबी और खारी मि.... (Read More)
इस फसल की खेती अलग-अलग मिट्टी की किस्मों में की जा सकती है जैसे कि रेतली, चिकनी, दोमट, काली, लाल मिट्टी, जिसमें पानी के निकास का सही प्रबंध हो इसकी अच्छी पैदावार के लिए इसे अच्छे निकास वाली रेतली मिट्टी में उत्तम जैविक तत्वों से उगाया जा सकता है अच्छे निकास वाली मिट्टी की पी एच 7-8.5 होनी चाहिए यह तेजाबी और खारी मिट्टी में भी उगने योग्य फसल है ज्यादा तेजाबी मिट्टी में खेती ना करें अगेती फसल के लिए हल्की मिट्टी लाभदायक है, जबकि अच्छी पैदावार के लिए चिकनी, दोमट और बारीक रेत वाली मिट्टी बहुत अच्छी है प्रसिद्ध किस्में :- Pusa Rubi,Pusa Early Dwarf,Punjab Chhuhara,Pusa 120,Roma Selection 120 टमाटर के बीजों को पहले नर्सरी में बोया जाता है और फिर हन्हें मुख्य खेत में रोपित किया जाता है मुख्य खेत की तैयार के लिए अच्छी जोताई और समतल मिट्टी की जरूरत होती है मिट्टी को भुरभुरा बनाने के लिए 4-5 बार जोताई करें फिर मिट्टी को समतल करने के लिए सुहागा फेरें आखिरी जोताई के समय गाय का गला हुआ गोबर 60 किलो को मिट्टी में अच्छी तरह मिलायें रोपाई के लिए 80-90 सैं.मी. चौड़े बैड तैयार करें बिजाई से एक महीना पहले मिट्टी को धूप में खुला छोड़ दें आवश्यक लंबाई और 80-90 सैं.मी. की चौड़ाई वाले बैडों पर टमाटर के बीजों को बोयें बिजाई के बाद बैडों को प्लास्टिक शीट से ढक दें और फूलों को पानी देने वाले डब्बे से रोज़ सुबह बैडों की सिंचाई करें रोगाणुओं के हमले से फसल को बचाने के लिए नर्सरी वाले बैडों को अच्छे नाइलोन के जाल से ढक दें पनीरी लगाने के 10-15 दिन बाद 19:19:19 के साथ सूक्ष्म तत्वों की 2.5-3 ग्राम प्रति लीटर पानी में मिलाकर स्प्रे करें पौधों को तंदरूस्त और मजबूत बनाने के लिए बिजाई के 20 दिन बाद लीहोसिन 1 मि.ली. प्रति लीटर पानी की स्प्रे करें प्रभावित पौधों को खेत में से उखाड़ दें ताकि पौधों का फासला सही रखा जा सके और निरोग पौधों को रोगाणुओं से भी बचाया जा सके रोगाणुओं से बचाव के लिए मिट्टी में नमी बनाये रखें यदि सूखा दिखे तो पौधों को रोपाई से पहले मैटालैक्सिल 2.5 ग्राम प्रति लीटर पानी में 2-3 बार भिगोयें बिजाई से 25-30 दिन बाद पनीरी वाले पौधे तैयार हो जाते हैं और इनके 3-4 पत्ते निकल आते हैं यदि पौधों की आयु 30 दिन से ज्यादा हो तो इसके उपचार के बाद इसे खेत में लगायें पनीरी उखाड़ने के 24 घंटे पहले बैडों को पानी लगायें ताकि पौधे आसानी से उखाड़े जा सकें बसंत के मौसम के लिए नर्सरी नवंबर-दिसंबर में तैयार करें जबकि सर्दियों में KE मौसम में सितंबर-अक्तूबर महीने में नर्सरी में बीजों को बोयें किस्म और विकास के ढंग मुताबिक 60x30 सैं.मी. या 75x60 सैं.मी. या 75x75 सैं.मी. का फासला रखें में छोटे कद वाली किस्म के लिए 75x30 सैं.मी. का फासला रखें और वर्षा वाले मौसम के लिए 120-150x30 सैं.मी. का फासला रखें नर्सरी में बीजों को 0-5 सैं.मी. गहराई में बोयें और मिट्टी से ढक दें पनीरी को उखाड़कर खेत में लगा दें एक एकड़ खेत में बिजाई के लिए 100-160 ग्राम बीज नए पौधे तैयार करने के लिए प्रयोग किए जाते हैं हाइब्रिड किस्मों के लिए 80-100 ग्राम बीज प्रति एकड़ में प्रयोग करें नाइट्रोजन 40-60 किलो (90-130 किलो यूरिया), फासफोरस 25 किलो (155 किलो एस एस पी) और पोटाश 25 किलो (42 किलो एम ओ पी) की मात्रा प्रति एकड़ में प्रयोग करें नए पौधों की रोपाई के 2-3 सप्ताह पहले फासफोरस और पोटाश की पूरी मात्रा और नाइट्रोजन की एक तिहाई मात्रा डालें बाकी बची नाइट्रोजन को दो भागों में बांटकर रोपाई 30 और 50 दिनों के बाद डालें लगातार गोडाई करें और जड़ों को मिट्टी लगाएं 45 दिनों तक खेत को नदीन रहित रखें यदि नदीन नियंत्रण से बाहर हो जायें तो यह 70-90 प्रतिशत पैदावार कम कर देंगे रोपाई से पहले मुख्य खेत में पैंडीमैथालीन 0.4 किलो को प्रति एकड़ में लगाएं यदि नदीनों की संख्या ज्यादा हो तो नदीनों के अंकुरण के बाद सैंकर 0.2 किलो की प्रति एकड़ में स्प्रे करें नदीनों को रोकने के साथ साथ मिट्टी के तापमान को कम करने के लिए मलचिंग भी प्रभावी तरीका है रोपाई के बाद दो से तीन दिन हल्की सिंचाई करें मिट्टी में नमी के आधार पर सर्दियों में 12 से 15 दिनों के अंतराल पर सिंचाई करें और गर्मियों में 6-7 दिनों के अंतराल पर सिंचाई करें फूल निकलने की अवस्था सिंचाई के लिए गंभीर होती हैं इस अवस्था में पानी की कमी से फूलों का गिरना बढ़ता है और फलों और उत्पादकता पर इसका गंभीर प्रभाव पड़ता है बहुत सारी जांचों के मुताबिक यह पता चला है कि हर पखवाड़े में आधा इंच सिंचाई करने से जड़ें ज्यादा फैलती हैं और इससे पैदावार भी अधिक हो जाती है अत्याधिक सिंचाई ना करें पनीरी लगाने के 70 दिन बाद पौधे फल देना शुरू कर देते हैं कटाई का समय इस बात पर निर्भर करता है कि फलों को दूरी वाले स्थानों पर लेकर जाना है या ताजे फलों को मंडी में ही बेचना है आदि पके हरे टमाटर जिनका 1/4 भाग गुलाबी रंग का हो, लंबी दूरी वाले स्थानों पर लेकर जाने के लिए प्रयोग किए जाते हैं ज्यादातर सारे फल गुलाबी या लाल रंग में बदल जाते हैं, पर सख्त गुद्दे वाले टमाटरों को नज़दीक की मंडी में बेचा जा सकता है अन्य उत्पाद बनाने और बीज तैयार करने के लिए पूरी तरह पके और नर्म गुद्दे वाले टमाटरों का प्रयोग किया जाता है कटाई के बाद आकार के आधार पर टमाटरों को छांट लिया जाता है इसके बाद टमाटरों को बांस की टोकरियों या लकड़ी के बक्सों में पैक कर लिया जाता है लंबी दूरी पर लिजाने के लिए टमाटरों को पहले ठंडा रखें ताकि इनके खराब होने की संभावना कम हो जाये पूरी तरह पके टमाटरों से जूस, सीरप और कैचअप आदि उत्पाद भी तैयार किए जाते हैं
Posted by gurjant singh
Punjab
14-10-2019 06:55 AM
Punjab
10-14-2019 04:00 PM
ਉਸ ਨੂੰ ਪੇਟ ਦੇ ਕੀੜਿਆਂ ਲਈ Bendikind plus bolus ਦਿਓ ਅਤੇ Bovimin-b ਪਾਊਡਰ 50 ਗ੍ਰਾਮ ਰੋਜਾਨਾ ਅਤੇ Minotas tablet 1 ਗੋਲੀ ਰੋਜਾਨਾ 21 ਦਿਨ ਤਕ ਦਿਓ, ਇਸ ਨਾਲ ਹੀਟ ਵਿਚ ਆ ਜਾਵੇਗੀ
Posted by Amrit Maan
Punjab
14-10-2019 06:42 AM
Punjab
10-14-2019 11:06 AM
ਸ਼ੁਰੂਆਤੀ ਨੁਕਸਾਨ ਵੇਲੇ ਕਾਰਬਰਿਲ 900 ਗ੍ਰਾਮ ਨੂੰ ਪ੍ਰਤੀ 100 ਲੀਟਰ ਪਾਣੀ ਵਿੱਚ ਪਾ ਕੇ ਪ੍ਰਤੀ ਏਕੜ ਤੇ ਸਪਰੇਅ ਕਰੋ ਜਰੂਰਤ ਦੇ ਅਨੁਸਾਰ 15 ਦਿਨਾਂ ਦੇ ਫਾਸਲੇ ਤੇ ਦੁਬਾਰਾ ਸਪਰੇਅ ਕਰੋ ਜਿਆਦਾ ਨੁਕਸਾਨ ਦੇ ਸਮੇਂ 1 ਲੀਟਰ ਕਲੋਰਪਾਈਰੀਫੋਸ ਜਾਂ ਐਸੀਫੇਟ 800 ਗ੍ਰਾਮ ਨੂੰ 100 ਲੀਟਰ ਪਾਣੀ ਵਿੱਚ ਪਾ ਕੇ ਸਪਰੇਅ ਵਾਲੇ ਪੰਪ ਨਾਲ ਪ੍ਰਤੀ ਏਕੜ ਤੇ ਸਪਰੇਅ ਕਰੋ
Posted by Amrit Maan
Punjab
14-10-2019 06:21 AM
Maharashtra
10-14-2019 11:05 AM
ਅਗੇਤੇ ਮਟਰ ਥੋੜ੍ਹੇ ਸਮੇ ਦੀ ਫਸਲ ਹੈ ਅਤੇ ਵੱਖ-ਵੱਖ ਫਸਲੀ ਚੱਕਰ ਲਈ ਬਹੁਤ ਢੁੱਕਵੀ ਹੈ ਠੀਕ ਵਾਧੇ ਲਈ ਮਟਰ ਨੂੰ 20 ਤੋਂ 25 ਡਿਗਰੀ ਸੈਂਟੀਗਰੇਡ ਤਾਪਮਾਨ ਦੀ ਲੋੜ ਹੁੰਦੀ ਹੈ ਜੇਕਰ ਤਾਪਮਾਨ 30 ਡਿਗਰੀ ਸੈਂਟੀਗਰੇਡ ਤੋਂ ਵੱਧ ਜਾਵੇ ਤਾਂ ਬੂਟੇ ਉਗਣ ਸਮੇਂ ਹੀ ਮਰ ਜਾਂਦੇ ਹਨ ਜੇਕਰ ਫਸਲ ਵਧਣ ਸਮੇਂ ਤਾਪਮਾਨ ਜ਼ਿਆਦਾ ਰਹੇ ਤਾਂ ਉਖੇੜਾ ਅਤੇ ਤਣੇ ਦੀ ਮੱਖੀ ਬੂਟਿਆਂ ਦੀ ਗਿਣਤੀ ਘਟਾ ਕੇ ਪੈਦਾਵਾਰ ਵਿੱਚ .... (Read More)
ਅਗੇਤੇ ਮਟਰ ਥੋੜ੍ਹੇ ਸਮੇ ਦੀ ਫਸਲ ਹੈ ਅਤੇ ਵੱਖ-ਵੱਖ ਫਸਲੀ ਚੱਕਰ ਲਈ ਬਹੁਤ ਢੁੱਕਵੀ ਹੈ ਠੀਕ ਵਾਧੇ ਲਈ ਮਟਰ ਨੂੰ 20 ਤੋਂ 25 ਡਿਗਰੀ ਸੈਂਟੀਗਰੇਡ ਤਾਪਮਾਨ ਦੀ ਲੋੜ ਹੁੰਦੀ ਹੈ ਜੇਕਰ ਤਾਪਮਾਨ 30 ਡਿਗਰੀ ਸੈਂਟੀਗਰੇਡ ਤੋਂ ਵੱਧ ਜਾਵੇ ਤਾਂ ਬੂਟੇ ਉਗਣ ਸਮੇਂ ਹੀ ਮਰ ਜਾਂਦੇ ਹਨ ਜੇਕਰ ਫਸਲ ਵਧਣ ਸਮੇਂ ਤਾਪਮਾਨ ਜ਼ਿਆਦਾ ਰਹੇ ਤਾਂ ਉਖੇੜਾ ਅਤੇ ਤਣੇ ਦੀ ਮੱਖੀ ਬੂਟਿਆਂ ਦੀ ਗਿਣਤੀ ਘਟਾ ਕੇ ਪੈਦਾਵਾਰ ਵਿੱਚ ਨੁਕਸਾਨ ਕਰਦੀ ਹੈ ਅਕਤੂਬਰ ਦੇ ਪਹਿਲਾ ਹਫਤੇ ਬਜਾਈ ਕਰ ਸਕਦੇ ਹਾਂ i ਮਟਰਾਂ ਦੀ ਫਸਲ ਉਸ ਇਲਾਕੇ ਵਿੱਚ ਹੀ ਚੰਗੀ ਹੋ ਸਕਦੀ ਹੈ ਜਿਥੇ ਗਰਮੀ ਤੋਂ ਸਰਦੀ ਰੁੱਤ ਦਾ ਬਦਲਾਅ ਸਹਿਜੇ ਹੁੰਦਾ ਹੈ ਮਟਰ ਅਗੇਤਾ 7: ਇਸ ਦੇ ਬੂਟੇ ਛੇਤੀ ਵੱਧਣ ਵਾਲੇ ਹੁੰਦੇ ਹਨ ਹਰ ਬੂਟੇ ’ਤੇ 15-18 ਭਰਵੀਆਂ ਫਲੀਆਂ ਲੱਗਦੀਆਂ ਤੇ ਹਰ ਫਲੀ ਵਿੱਚ 7-9 ਦਾਣੇ ਹੁੰਦੇ ਹਨ ਫਲੀਆਂ ਦੀ ਲੰਬਾਈ ਦਰਮਿਆਨੀ (9.5 ਸੈਂਟੀਮੀਟਰ) ਅਤੇ ਸਿਰੇ ਤੋਂ ਥੋੜੀਆਂ ਮੁੜੀਆਂ ਹੁੰਦੀਆਂ ਹਨ ਇਸ ਦੀਆਂ ਫਲੀਆਂ ਇਕੱਲੀਆਂ ਜਾਂ ਜੋੜੀਆਂ ਵਿੱਚ ਲੱਗਦੀਆਂ ਹਨ ਇਸ ਦੀਆਂ ਫਲੀਆਂ ਵਿੱਚੋਂ ਲਗਪਗ 48 ਪ੍ਰਤੀਸ਼ਤ ਦਾਣੇ ਨਿਕਲਦੇ ਹਨ ਇਹ ਅਗੇਤੀ ਕਿਸਮ ਹੈ ਅਤੇ 65-70 ਦਿਨਾਂ ਵਿੱਚ ਪਹਿਲੀ ਤੁੜਾਈ ਵਾਸਤੇ ਤਿਆਰ ਹੋ ਜਾਂਦੀ ਹੈ ਇਸ ਕਿਸਮ ਦੀਆਂ ਹਰੀਆਂ ਫਲੀਆਂ ਦਾ ਝਾੜ 32 ਕੁਇੰਟਲ ਪ੍ਰਤੀ ਏਕੜ ਹੈ ਏ ਪੀ-3 (ਮਟਰ): ਇਹ ਅਗੇਤੀ ਕਿਸਮ ਹੈ ਅਤੇ ਇਸ ਦੇ ਬੂਟੇ ਮਧਰੇ ਹੁੰਦੇ ਹਨ ਫਲੀਆਂ ਦੀ ਲੰਬਾਈ ਦਰਮਿਆਨੀ (8.85 ਸੈਂਟੀਮੀਟਰ) ਅਤੇ ਸਿਰੇ ਤੋ ਮੁੜੀਆਂ ਹੁੰਦੀਆਂ ਹਨ ਇਸ ਦੀਆਂ ਫਲੀਆਂ ਇਕੱਲੀਆਂ ਜਾਂ ਜੋੜੀਆਂ ਵਿੱਚ ਲੱਗਦੀਆਂ ਹਨ ਹਰ ਫਲੀ ਵਿੱਚ 7-8 ਦਾਣੇ ਹੁੰਦੇ ਹਨ ਅਤੇ ਫਲੀਆਂ ਵਿੱਚੋ ਲਗਭਗ 50 ਪ੍ਰਤੀਸ਼ਤ ਦਾਣੇ ਨਿਕਲਦੇ ਹਨ ਇਸ ਦੇ ਦਾਣੇ ਮੋਟੇ, ਝੁਰੜੀਆਂ ਵਾਲੇ ਅਤੇ ਹਰੇ ਰੰਗ ਦੇ ਹੁੰਦੇ ਹਨ ਇਹ ਕਿਸਮ 65-70 ਦਿਨਾਂ ਵਿੱਚ ਪਹਿਲੀ ਤੁੜਾਈ ਵਾਸਤੇ ਤਿਆਰ ਹੋ ਜਾਂਦੀ ਹੈ, ਜੇਕਰ ਇਸ ਨੂੰ ਅਕਤੂਬਰ ਦੇ ਦੂਜੇ ਹਫਤੇ ਬੀਜਿਆ ਜਾਵੇ ਇਸ ਕਿਸਮ ਦੀਆਂ ਹਰੀਆਂ ਫਲੀਆਂ ਦਾ ਝਾੜ 31.5 ਕੁਇੰਟਲ ਪ੍ਰਤੀ ਏਕੜ ਹੁੰਦਾ ਹੈ ਪੰਜਾਬ 89: ਇਸਦੇ ਬੂਟੇ ਦਰਮਿਆਨੇ ਲੰਮੇ, ਨਰੋਏ ਅਤੇ ਸਿੱਧੇ ਹੁੰਦੇ ਹਨ ਇਸ ਵਿੱਚ ਜ਼ਿਆਦਾ (28-30) ਫ਼ਲੀਆਂ ਲੱਗਦੀਆਂ ਹਨ ਇਸ ਦੀਆਂ ਫ਼ਲੀਆਂ ਦਿਲ ਖਿਚ੍ਹਵੀਆਂ ਗੂੜ੍ਹੀਆਂ ਹਰੀਆਂ ਹੁੰਦੀਆਂ ਹਨ ਅਤੇ ਹਰ ਫ਼ਲੀ ਵਿੱਚ 9-10 ਦਾਣੇ ਹੁੰਦੇ ਹਨ ਫ਼ਲੀਆਂ ਆਮ ਤੋਰ ’ਤੇ ਜੋੜਿਆਂ ਵਿੱਚ ਲੱਗਦੀਆਂ ਹਨ ਇਹ ਕਿਸਮ 100 ਦਿਨਾਂ ਵਿੱਚ ਪਹਿਲੀ ਤੁੜਾਈ ਵਾਸਤੇ ਤਿਆਰ ਹੋ ਜਾਂਦੀ ਹੈ ਇਸਦੇ ਦਾਣੇ ਬੜੇ ਮਿੱਠੇ ਹੁੰਦੇ ਹਨ ਅਤੇ ਇਸਦੀਆਂ ਫ਼ਲੀਆਂ ਵਿਚੋਂ 55 ਪ੍ਰਤੀਸ਼ਤ ਦਾਣੇ ਨਿਕਲਦੇ ਹਨ ਇਹ ਕਿਸਮ 60 ਕੁਇੰਟਲ (ਹਰੀਆਂ ਫ਼ਲੀਆਂ) ਪ੍ਰਤੀ ਏਕੜ ਝਾੜ ਦਿੰਦੀ ਹੈ ਸਤੰਬਰ ਦੇ ਮਹੀਨੇ ਵਿੱਚ ਬੀਜੀ ਫ਼ਸਲ ਨੂੰ ਉਖੇੜਾ ਰੋਗ ਬਹੁਤ ਲੱਗਦਾ ਹੈ ਇਸ ਲਈ ਮੈਦਾਨੀ ਇਲਾਕਿਆਂ ਵਿੱਚ ਬਿਜਾਈ ਕਰਨ ਲਈ ਸਭ ਤੋਂ ਉਤਮ ਸਮਾਂ ਅਕਤੂਬਰ ਦੇ ਪਹਿਲੇ ਹਫ਼ਤੇ ਤੋਂ ਅੱਧ ਨਵੰਬਰ ਤੱਕ ਹੈ ਮਸ਼ੀਨੀ ਬਿਜਾਈ ਲਈ ਅਗੇਤੀਆਂ ਕਿਸਮਾਂ ਦਾ 45 ਕਿਲੋ ਅਤੇ ਮੁੱਖ ਸਮੇਂ ਦੀਆਂ ਕਿਸਮਾਂ ਦਾ 30 ਕਿਲੋ ਬੀਜ ਪ੍ਰਤੀ ਏਕੜ ਲੱਗਦਾ ਹੈ ਹੱਥਾਂ ਨਾਲ ਬਿਜਾਈ ਕਰਨ ’ਤੇ ਬੀਜ ਦੀ ਮਾਤਰਾ ਘੱਟ ਲਗਦੀ ਹੈ ਅਗੇਤੀਆਂ ਕਿਸਮਾਂ ਲਈ ਫ਼ਾਸਲਾ 3075 ਸੈਂਟੀਮੀਟਰ ਤੇ ਮੁੱਖ ਮੌਸਮ ਦੀਆਂ ਕਿਸਮਾਂ ਲਈ 3010 ਸੈਂਟੀਮੀਟਰ ਰੱਖਣ ਦੀ ਸਿਫ਼ਾਰਸ਼ ਕੀਤੀ ਜਾਂਦੀ ਹੈ ਮਟਰਾਂ ਦੀ ਬਿਜਾਈ ਸਮੇਂ ਠੀਕ ਵੱਤਰ ਹੋਵੇ ਮਟਰਾਂ ਦੀ ਬਿਜਾਈ ਖਾਦ ਡਰਿਲ ਨਾਲ ਵੱਟਾਂ ’ਤੇ ਵੀ ਕੀਤੀ ਜਾ ਸਕਦੀ ਹੈ ਇਸ ਲਈ ਵੱਟਾਂ 60 ਸੈਂਟੀਮੀਟਰ ਚੌੜੀਆਂ ਰੱਖੋ ਅਤੇ ਹਰ ਵੱਟ ਉਤੇ 25 ਸੈਂਟੀਮੀਟਰ ਦੂਰੀ ਦੀਆਂ ਦੋ ਕਤਾਰਾਂ ਵਿੱਚ ਬਿਜਾਈ ਕਰੋ ਇਸ ਡਰਿੱਲ ਨਾਲ ਇੱਕ ਘੰਟੇ ਵਿੱਚ ਇੱਕ ਏਕੜ ਦੀ ਬਿਜਾਈ ਕੀਤੀ ਜਾ ਸਕਦੀ ਹੈ ਟੀਕਾ ਤੇ ਬੀਜ ਸੋਧਣਾ: ਮਟਰਾਂ ਨੂੰ ਬਿਜਾਈ ਤੋਂਂ ਪਹਿਲਾਂ ਰਾਈਜ਼ੋਬੀਅਮ ਦਾ ਟੀਕਾ ਜ਼ਰੂਰ ਲਾਓ ਕਿਉਕਿ ਇਸ ਨਾਲ ਝਾੜ ਵੱਧ ਜਾਂਦਾ ਹੈ ਇਹ ਟੀਕਾ ਪੰਜਾਬ ਖੇਤੀਬਾੜੀ ਯੂਨੀਵਰਸਿਟੀ ਦੇ ਮਾਈਕ੍ਰੋਬਾਇਆਲੋਜੀ ਵਿਭਾਗ ਵਿੱਚੋਂ ਮਿਲਦਾ ਹੈ ਅਗੇਤੀ ਬੀਜੀ ਫਸਲ ਨੂੰ ਉਖੇੜਾ ਰੋਗ ਬਹੁਤ ਲੱਗਦਾ ਹੈ ਇਸ ਲਈ ਬੀਜ ਨੂੰ ਬੀਜਣ ਤੋਂ ਪਹਿਲਾਂ ਇੱਕ ਗ੍ਰਾਮ ਬਾਵਿਸਟਨ ਜਾਂ 2 ਗ੍ਰਾਮ ਕੈਪਟਾਨ ਜਾਂ ਸੂਡੋਮੋਨਾਸ ਫਲੋਰੇਸੈਂਸ ਫਾਰਮੂਲੇਸ਼ਨ 15 ਗ੍ਰਾਮ+1ਗ੍ਰਾਮ ਕੈਪਟਾਨ ਪ੍ਰਤੀ ਕਿਲੋ ਬੀਜ ਨਾਲ ਸੋਧ ਕੇ ਬੀਜਣਾ ਚਾਹੀਦਾ ਹੈ ਮਟਰਾਂ ਦੇ ਬੀਜ ਨੂੰ ਸੋਧਣ ਲਈ ਅੱਧੇ ਲਿਟਰ ਪਾਣੀ ਵਿੱਚ ਰਾਈਜ਼ੌਬੀਅਮ ਦੇ ਟੀਕੇ ਦਾ ਪੈਕਟ (ਇੱਕ ਏਕੜ ਵਾਲਾ) ਅਤੇ 90 ਗ੍ਰਾਮ ਕੈਪਟਾਨ ਜਾਂ 45 ਗ੍ਰਾਮ ਬਾਵਿਸਟਨ ਜਾਂ 45 ਗ੍ਰਾਮ ਬਾਵਿਸਟਾਨ ਜਾਂ ਸੂਡੋਮੋਨਾਸ ਫਲਰੇਸੈਂਸ ਫਾਰਮੂਲੇਸ਼ਨ 675 ਗ੍ਰਾਮ+45 ਗ੍ਰਾਮ ਕੈਪਟਾਨ ਰਲਾ ਦਿਓ ਫਿਰ ਇਸ ਘੋਲ ਨੂੰ 45 ਕਿਲੋ ਬੀਜ ਵਿਚ ਚੰਗੀ ਤਰ੍ਹਾਂ ਮਿਲਾ ਦਿਓ ਬੀਜ ਨੂੰ ਛਾਂਵੇ ਸੁਕਾ ਕੇ ਉਸੇ ਦਿਨ ਖੇਤ ਵਿਚ ਬੀਜ ਦਿਓ ਖਾਦਾਂ: ਮਟਰ ਵਾਸਤੇ ਏਕੜ ਪਿਛੇ 8 ਟਨ ਗੋਹੇ ਦੀ ਰੂੜੀ , 20 ਕਿਲੋ ਨਾਈਟ੍ਰੋਜਨ (45 ਕਿਲੋ ਯੂਰੀਆ) ਅਤੇ 25 ਕਿਲੋ ਫਾਸਫੋਰਸ (155 ਕਿਲੋ ਸੁਪਰਫਾਸਫੇਟ) ਬਿਜਾਈ ਤੋਂ ਪਹਿਲਾਂ ਖੇਤ ਵਿੱਚ ਪਾਓ ਇਹ ਸਾਰੀਆਂ ਖਾਦਾਂ ਬਿਜਾਈ ਤੋਂ ਪਹਿਲਾਂ ਪਾਉਣੀਆਂ ਚਾਹੀਦੀਆਂ ਹਨ ਨਦੀਨਾਂ ਦੀ ਰੋਕਥਾਮ: ਬੀਜ ਉਗਣ ਤੋਂ 4 ਅਤੇ 8 ਹਫ਼ਤਿਆਂ ਪਿੱਛੋਂ ਗੋਡੀ ਕਰਕੇ ਖੇਤ ਨੂੰ ਨਦੀਨਾਂ ਤੋਂ ਮੁਕਤ ਰੱਖੋ ਮਟਰਾਂ ਵਿੱਚ ਨਦੀਨਾਂ ਦੀ ਰੋਕਥਾਮ ਲਈ ਸਟੌਂਪ 30 ਤਾਕਤ (ਪੈਂਡੀਮੈਥਾਲਿਨ) ਇੱਕ ਲਿਟਰ ਜਾਂ ਐਫ਼ਾਲੋਨ 50 ਤਾਕਤ (ਲੀਨੂਰੋਨ) 500 ਗ੍ਰਾਮ ਪ੍ਰਤੀ ਏਕੜ, ਨਦੀਨ ਉਗਣ ਤੋਂ ਪਹਿਲਾਂ ਬਿਜਾਈ ਤੋਂ ਦੋ ਦਿਨਾਂ ਦੇ ਵਿੱਚ ਵਰਤੋ ਨਦੀਨ ਨਾਸ਼ਕ ਨੂੰ 150 ਤੋਂ 200 ਲਿਟਰ ਪਾਣੀ ਵਿੱਚ ਘੋਲ ਲਵੋ ਅਤੇ ਖੇਤ ਵਿੱਚ ਇੱਕਸਾਰ ਛਿੜਕਾਅ ਕਰੋ ਇਹ ਨਦੀਨ ਨਾਸ਼ਕ ਚੌੜੇ ਪੱਤੇ ਵਾਲੇ ਤੇ ਘਾਹ ਵਾਲੇ ਨਦੀਨ, ਜਿਨ੍ਹਾਂ ਵਿੱਚ ਗੁੱਲੀ ਡੰਡਾ ਆਦਿ ਸ਼ਾਮਲ ਹਨ, ਉਤੇ ਕਾਬੂ ਪਾ ਸਕਦੇ ਹਨ ਸਿੰਚਾਈ: ਬਿਜਾਈ ਠੀਕ ਵੱਤਰ ਵਿੱਚ ਕਰੋ ਪਹਿਲਾ ਪਾਣੀ ਬਿਜਾਈ ਤੋਂ 15-20 ਦਿਨ ਬਾਅਦ ਲਾਉ ਅਗਲਾ ਪਾਣੀ ਫੁੱਲ ਆਉਣ ਤੇ ਅਤੇ ਫਿਰ ਅਗਲਾ ਫ਼ਲ ਪੈਣ ’ਤੇ ਜੇ ਜ਼ਰੂਰਤ ਹੋਵੇ ਤਾਂ ਲਾਓ ਮਟਰ ਦੀ ਫ਼ਸਲ ਬਰਾਨੀ ਹਾਲਤਾਂ ਵਿੱਚ ਵੀ ਘੱਟ ਸਿੰਚਾਈਆਂ ਨਾਲ ਉਗਾਈ ਜਾ ਸਕਦੀ ਹੈ ਜ਼ਮੀਨ ਦੀ ਕਿਸਮ ਅਤੇ ਮੌਸਮ ਮੁਤਾਬਕ ਕੁੱਲ 3-4 ਪਾਣੀਆਂ ਦੀ ਲੋੜ ਹੈ ਕੀੜੇ: ਥਰਿੱਪ (ਜੂੰ) ਕੀੜਾ ਰਸ ਚੂਸ ਕੇ ਫ਼ਸਲ ਦਾ ਬਹੁਤ ਨੁਕਸਾਨ ਕਰਦਾ ਹੈ ਹਮਲਾ ਹੋਣ ਦੀ ਸੂਰਤ ਵਿੱਚ 400 ਮਿਲੀਲਿਟਰ ਰੋਗਰ 30 ਈਸੀ (ਡਾਈਮੈਥੋਏਟ) ਨੂੰ 80-100 ਲਿਟਰ ਪਾਣੀ ਵਿੱਚ ਘੋਲ ਕੇ ਪ੍ਰਤੀ ਏਕੜ ਛਿੜਕਾਅ ਕਰੋ ਲੋੜ ਪੈਣ ’ਤੇ ਇਕ ਛਿੜਕਾਅ 15 ਦਿਨਾਂ ਪਿੱਛੋਂ ਹੋਰ ਕਰੋ ਮਟਰਾਂ ਦੇ ਸੁਰੰਗੀ ਕੀੜੇ ਦੀਆਂ ਸੁੰਡੀਆਂ ਪੱਤਿਆਂ ਵਿੱਚ ਸੁਰੰਗਾਂ ਬਣਾ ਲੈਂਦੀਆਂ ਅਤੇ ਪੱਤੇ ਨੂੰ ਅੰਦਰੋਂ ਖਾਂਦੀਆਂ ਹਨ ਦਸੰਬਰ ਤੋਂ ਮਾਰਚ ਦੌਰਾਨ ਇਹ ਬਹੁਤ ਨੁਕਸਾਨ ਕਰਦੇ ਹਨ ਚੇਪਾ ਵੀ ਰਸ ਚੂਸਦਾ ਹੈ ਇਨ੍ਹਾਂ ਦੀ ਰੋਕਥਾਮ ਲਈ ਵੀ ਉਹੀ ਵਿਧੀ ਅਪਣਾਉ ਜੋ ਥਰਿੱਪ ਦੀ ਰੋਕਥਾਮ ਵਾਸਤੇ ਦੱਸੀ ਗਈ ਹੈ ਕਈ ਵਾਰ ਅਗੇਤੀ ਬੀਜੀ ਫਸਲ ’ਤੇ ਤਣੇ ਦੀ ਮੱਖੀ ਦਾ ਹਮਲਾ ਹੋ ਜਾਂਦਾ ਹੈ ਜ ਇਸ ਦੇ ਬਚਾਅ ਲਈ ਬਿਜਾਈ ਸਮੇ ਸਿਆੜਾਂ ਵਿਚ 3 ਕਿਲੋ ਥਿਮਟ 10 ਜੀ ਜਾਂ 10 ਕਿਲੋ ਫੂਰਾਡਾਨ 3 ਜੀ ਦਾਣੇਦਾਰ ਦਵਾਈ ਪ੍ਰਤੀ ਏਕੜ ਦੇ ਹਿਸਾਬ ਨਾਲ ਪਾੳ ਚਿੱਟਾ ਰੋਗ: ਇਸ ਰੋਗ ਨਾਲ ਚਿੱਟੇ ਆਟੇ ਵਰਗੇ ਧੱਬੇ ਪੌਦਿਆਂ ਦੇ ਤਣਿਆਂ, ਸ਼ਾਖਾਂ, ਪੱਤਿਆਂ ਅਤੇ ਫ਼ਲੀਆਂ ਉਤੇ ਪੈਦਾ ਹੋ ਜਾਦੇ ਹਨ ਪੰਜਾਬ ਵਿੱਚ ਚਿੱਟਾ ਰੋਗ ਆਮ ਤੌਰ ’ਤੇ ਅੱਧ ਫਰਵਰੀ ਤੋਂ ਮਾਰਚ ਵਿੱਚ ਆਉਂਦਾ ਹੈ ਜਦ ਫਸਲ ਖ਼ਤਮ ਹੋਣ ਨੇੜੇ ਹੁੰਦੀ ਹੈ ਜਿਸ ਕਰਕੇ ਝਾੜ ਦਾ ਨੁਕਸਾਨ ਨਹੀਂ ਹੁੰਦਾ ਇੱਕ ਏਕੜ ਫ਼ਸਲ ਉਤੇ 80 ਮਿਲੀਲਿਟਰ ਕੈਰਾਥੇਨ 40 ਤਾਕਤ ਜਾਂ 600 ਗ੍ਰਾਮ ਸਲਫ਼ੈਕਸ ਨੂੰ 200 ਲਿਟਰ ਪਾਣੀ ਵਿੱਚ ਘੋਲ ਕੇ ਤਿੰਨ ਛਿੜਕਾਅ 10 ਦਿਨਾਂ ਦੇ ਵਕਫ਼ੇ ’ਤੇ ਕਰੋ ਬੀਜ ਨੂੰ ਬੀਜਣ ਤੋਂ ਪਹਿਲਾਂ ਇੱਕ ਗ੍ਰਾਮ ਬਾਵਿਸਟਨ ਜਾਂ 2 ਗ੍ਰਾਮ ਕੈਪਟਾਨ ਜਾਂ ਸੂਡੋਮੋਨਾਸ ਫਲੋਰੇਸੈਂਸ ਫਾਰਮੂਲੇਸ਼ਨ 15 ਗ੍ਰਾਮ+1 ਗ੍ਰਾਮ ਕੈਪਟਾਨ ਪ੍ਰਤੀ ਕਿਲੋ ਬੀਜ ਨਾਲ ਸੋਧ ਕੇ ਬੀਜਣਾ ਚਾਹੀਦਾ ਹੈ
Posted by Vikram Patil
Karnataka
14-10-2019 06:13 AM
Rajasthan
10-14-2019 11:01 AM
मोती की खेती एक बहुत ही अच्छा व्यवसाय है इस व्यवसाय को शुरू करने के लिए सबसे जरुरी है इसकी ट्रेनिंग, क्योकि इसमें बहुत सी ऐसी बारीकियें होती है जो हमें प्रेक्टिकल ट्रेनिंग में ही सीखने को मिलती है अगर आप इसकी ट्रेनिंग लेना चाहते है तो आप ग्लिटराटी पर्ल फार्मिंग ट्रेनिंग केंद्र प्रशिक्षण कार्य कर्म आयोजि.... (Read More)
मोती की खेती एक बहुत ही अच्छा व्यवसाय है इस व्यवसाय को शुरू करने के लिए सबसे जरुरी है इसकी ट्रेनिंग, क्योकि इसमें बहुत सी ऐसी बारीकियें होती है जो हमें प्रेक्टिकल ट्रेनिंग में ही सीखने को मिलती है अगर आप इसकी ट्रेनिंग लेना चाहते है तो आप ग्लिटराटी पर्ल फार्मिंग ट्रेनिंग केंद्र प्रशिक्षण कार्य कर्म आयोजित किया जा रहा है प्रशिक्षण कार्य कर्म में भाग लेने के लिए नीचे दिए गए नम्बर पर आज ही संपर्क करें और Rs 250/ से अपना रजिस्ट्रेशन करवाए अचल सिंह (फाउंडर )- 9711858258. धन्यवाद
Posted by Vikram Patil
Karnataka
14-10-2019 06:09 AM
Rajasthan
10-14-2019 11:01 AM
मोती की खेती एक बहुत ही अच्छा व्यवसाय है इस व्यवसाय को शुरू करने के लिए सबसे जरुरी है इसकी ट्रेनिंग, क्योकि इसमें बहुत सी ऐसी बारीकियें होती है जो हमें प्रेक्टिकल ट्रेनिंग में ही सीखने को मिलती है अगर आप इसकी ट्रेनिंग लेना चाहते है तो आप ग्लिटराटी पर्ल फार्मिंग ट्रेनिंग केंद्र प्रशिक्षण कार्य कर्म आयोजि.... (Read More)
मोती की खेती एक बहुत ही अच्छा व्यवसाय है इस व्यवसाय को शुरू करने के लिए सबसे जरुरी है इसकी ट्रेनिंग, क्योकि इसमें बहुत सी ऐसी बारीकियें होती है जो हमें प्रेक्टिकल ट्रेनिंग में ही सीखने को मिलती है अगर आप इसकी ट्रेनिंग लेना चाहते है तो आप ग्लिटराटी पर्ल फार्मिंग ट्रेनिंग केंद्र प्रशिक्षण कार्य कर्म आयोजित किया जा रहा है प्रशिक्षण कार्य कर्म में भाग लेने के लिए नीचे दिए गए नम्बर पर आज ही संपर्क करें और Rs 250/ से अपना रजिस्ट्रेशन करवाए अचल सिंह (फाउंडर )- 9711858258. धन्यवाद
Posted by Sandeep Singh
Punjab
14-10-2019 05:43 AM
Punjab
10-14-2019 11:00 AM
ਇਹ ਭਾਰਤ ਦੀ ਇੱਕ ਮੱਹਤਵਪੂਰਨ ਫ਼ਸਲ ਹੈ ਮਿਰਚ ਹਲਕੀ ਤੋਂ ਭਾਰੀ ਹਰ ਤਰ੍ਹਾਂ ਦੀ ਮਿੱਟੀ ਵਿੱਚ ਉਗਾਈ ਜਾ ਸਕਦੀ ਹੈ CH-1: ਇਹ ਕਿਸਮ ਪੀ ਏ ਯੂ ਲੁਧਿਆਣੇ ਵੱਲੋਂ ਬਣਾਈ ਗਈ ਹੈ ਇਹ ਦਰਮਿਆਨੇ ਕੱਦ ਵਾਲੀ ਕਿਸਮ ਹੈ ਇਸਦਾ ਫ਼ਲ ਦਰਮਿਆਨੇ ਆਕਾਰ ਅਤੇ ਹਲਕੇ ਹਰੇ ਰੰਗ ਦਾ ਹੁੰਦਾ ਹੈ ਜੋ ਪੱਕਣ ਤੋਂ ਬਾਅਦ ਗੂੜੇ ਲਾਲ ਰੰਗ ਦਾ ਹੋ ਜਾਂਦਾ ਹੈ ਇਸ ਕਿਸਮ ਦਾ ਫ਼ਲ ਬਹੁਤ ਕੌੜਾ ਅਤੇ ਆਕਰਸ਼ਿਤ ਹੁੰਦਾ ਹੈ ਇਹ ਕਿਸਮ ਗਲਣ ਰ.... (Read More)
ਇਹ ਭਾਰਤ ਦੀ ਇੱਕ ਮੱਹਤਵਪੂਰਨ ਫ਼ਸਲ ਹੈ ਮਿਰਚ ਹਲਕੀ ਤੋਂ ਭਾਰੀ ਹਰ ਤਰ੍ਹਾਂ ਦੀ ਮਿੱਟੀ ਵਿੱਚ ਉਗਾਈ ਜਾ ਸਕਦੀ ਹੈ CH-1: ਇਹ ਕਿਸਮ ਪੀ ਏ ਯੂ ਲੁਧਿਆਣੇ ਵੱਲੋਂ ਬਣਾਈ ਗਈ ਹੈ ਇਹ ਦਰਮਿਆਨੇ ਕੱਦ ਵਾਲੀ ਕਿਸਮ ਹੈ ਇਸਦਾ ਫ਼ਲ ਦਰਮਿਆਨੇ ਆਕਾਰ ਅਤੇ ਹਲਕੇ ਹਰੇ ਰੰਗ ਦਾ ਹੁੰਦਾ ਹੈ ਜੋ ਪੱਕਣ ਤੋਂ ਬਾਅਦ ਗੂੜੇ ਲਾਲ ਰੰਗ ਦਾ ਹੋ ਜਾਂਦਾ ਹੈ ਇਸ ਕਿਸਮ ਦਾ ਫ਼ਲ ਬਹੁਤ ਕੌੜਾ ਅਤੇ ਆਕਰਸ਼ਿਤ ਹੁੰਦਾ ਹੈ ਇਹ ਕਿਸਮ ਗਲਣ ਰੋਗ ਨੂੰ ਸਹਾਰ ਸਕਦੀ ਹੈ ਇਸਦਾ ਔਸਤਨ ਝਾੜ 95-100 ਕੁਇੰਟਲ ਪ੍ਰਤੀ ਏਕੜ ਹੈ CH-3: ਇਹ ਕਿਸਮ ਪੰਜਾਬ ਖੇਤੀਬਾੜੀ ਯੂਨੀਵਰਸਿਟੀ, ਲੁਧਿਆਣਾ ਦੁਆਰਾ ਬਣਾਈ ਗਈ ਹੈ ਇਸਦੇ ਫ਼ਲ ਦਾ ਆਕਾਰ CH-1 ਦੇ ਆਕਾਰ ਨਾਲੋਂ ਵੱਡਾ ਹੁੰਦਾ ਹੈ ਇਸ ਵਿੱਚ ਕੈਪਸੇਸਿਨ ਦੀ ਮਾਤਰਾ 0.52% ਹੁੰਦੀ ਹੈ ਇਸ ਦਾ ਔਸਤਨ ਝਾੜ 100-110 ਕੁਇੰਟਲ ਪ੍ਰਤੀ ਏਕੜ ਹੁੰਦਾ ਹੈ CH-27: ਇਸ ਕਿਸਮ ਦੇ ਪੌਦੇ ਲੰਬੇ ਹੁੰਦੇ ਹਨ ਅਤੇ ਜ਼ਿਆਦਾ ਸਮੇਂ ਤੱਕ ਫ਼ਲ ਦਿੰਦੇ ਹਨ ਇਸ ਕਿਸਮ ਦੇ ਫ਼ਲ ਦਰਮਿਆਨੇ ਲੰਬੇ (6.7 ਸੈ.ਮੀ.), ਪਤਲੇ ਛਿਲਕੇ ਵਾਲੇ, ਸ਼ੁਰੂ ਵਿੱਚ ਹਲਕੇ ਹਰੇ ਅਤੇ ਪੱਕਣ ਤੋਂ ਬਾਅਦ ਲਾਲ ਰੰਗ ਦੇ ਹੁੰਦੇ ਹਨ ਇਹ ਕਿਸਮ ਪੱਤਾ ਮਰੋੜ, ਫਲ ਅਤੇ ਜੜ੍ਹ ਗਲਣ, ਰਸ ਚੂਸਣ ਵਾਲੇ ਕੀਟਾਂ ਜਿਵੇਂ ਕਿ ਮਕੌੜਾ ਜੂੰ ਆਦਿ ਦੀ ਰੋਧਕ ਹੈ ਇਸ ਦਾ ਔਸਤਨ ਝਾੜ 90-110 ਕੁਇੰਟਲ ਪ੍ਰਤੀ ਏਕੜ ਹੁੰਦਾ ਹੈ Punjab Sindhuri: ਇਸ ਕਿਸਮ ਦੇ ਪੌਦੇ ਗੂੜੇ ਹਰੇ, ਠੋਸ ਅਤੇ ਦਰਮਿਆਨੇ ਕੱਦ ਦੇ ਹੁੰਦੇ ਹਨ ਇਹ ਛੇਤੀ ਪੱਕਣ ਵਾਲੀ ਕਿਸਮ ਹੈ ਅਤੇ ਇਸਦੀ ਪਹਿਲੀ ਤੁੜਾਈ ਪਨੀਰੀ ਲਾਉਣ ਤੋਂ 75 ਦਿਨ ਬਾਅਦ ਕੀਤੀ ਜਾ ਸਕਦੀ ਹੈ ਇਸਦੇ ਫ਼ਲ ਲੰਮੇ (7-14 ਸੈ.ਮੀ.), ਮੋਟੇ ਛਿਲਕੇ ਵਾਲੇ, ਸ਼ੁਰੂ ਵਿੱਚ ਗੂੜੇ ਹਰੇ ਅਤੇ ਪੱਕਣ ਤੋਂ ਬਾਅਦ ਗੂੜੇ ਲਾਲ ਰੰਗ ਦੇ ਹੁੰਦੇ ਹਨ ਇਸ ਦਾ ਔਸਤਨ ਝਾੜ 70-75 ਕੁਇੰਟਲ ਪ੍ਰਤੀ ਏਕੜ ਹੁੰਦਾ ਹੈ Punjab Tej: ਇਸਦੇ ਪੌਦੇ ਹਲਕੇ ਹਰੇ, ਫੈਲੇ ਹੋੋਏ ਅਤੇ ਦਰਮਿਆਨੇ ਕੱਦ ਦੇ ਹੁੰਦੇ ਹਨ ਇਹ ਛੇਤੀ ਪੱਕਣ ਵਾਲੀ ਕਿਸਮ ਹੈ ਅਤੇ ਇਸਦੀ ਪਹਿਲੀ ਤੁੜਾਈ ਪਨੀਰੀ ਲਾਉਣ ਤੋਂ 75 ਦਿਨ ਬਾਅਦ ਕੀਤੀ ਜਾ ਸਕਦੀ ਹੈ ਇਸਦੇ ਫ਼ਲ ਲੰਮੇ (6-8 ਸੈ.ਮੀ.), ਪਤਲੇ ਛਿਲਕੇ ਵਾਲੇ, ਸ਼ੁਰੂ ਵਿੱਚ ਹਲਕੇ ਹਰੇ ਰੰਗ ਦੇ ਹੁੰਦੇ ਹਨ ਜੋ ਪੱਕਣ ਤੋਂ ਬਾਅਦ ਗੂੜੇ ਲਾਲ ਰੰਗ ਦੇ ਹੋ ਜਾਂਦੇ ਹਨ ਇਸ ਦਾ ਔਸਤਨ ਝਾੜ 60 ਕੁਇੰਟਲ ਪ੍ਰਤੀ ਏਕੜ ਹੁੰਦਾ ਹੈ Pusa Jwala: ਇਸ ਕਿਸਮ ਦੇ ਪੌਦੇ ਛੋਟੇ ਕੱਦ ਦੇ, ਝਾੜੀਆਂ ਵਾਲੇ ਅਤੇ ਹਲਕੇ ਹਰੇ ਰੰਗ ਦੇ ਹੁੰਦੇ ਹਨ ਇਸਦੇ ਫਲ 9-10 ਸੈ.ਮੀ. ਲੰਬੇ, ਹਲਕੇ ਹਰੇ ਅਤੇ ਬਹੁਤ ਕੌੜੇ ਹੁੰਦੇ ਹਨ ਇਹ ਕਿਸਮ ਥਰਿਪ ਅਤੇ ਮਕੌੜਾ ਜੂੰ ਦੀ ਰੋਧਕ ਹੈ ਇਸ ਦਾ ਔਸਤਨ ਝਾੜ 34 ਕੁਇੰਟਲ (ਹਰੀਆਂ ਮਿਰਚਾਂ) ਅਤੇ 7 ਕੁਇੰਟਲ (ਸੁੱਕੀਆਂ ਮਿਰਚਾਂ) ਪ੍ਰਤੀ ਏਕੜ ਹੁੰਦਾ ਹੈ Pusa Sadabahar: ਇਸਦੇ ਪੌਦੇ ਸਿੱਧੇ, ਸਦਾਬਹਾਰ (2-3 ਸਾਲ), 60-80 ਸੈ.ਮੀ. ਕੱਦ ਦੇ ਹੁੰਦੇ ਹਨ ਇਸਦੇ ਫ਼ਲ 6-8 ਸੈ.ਮੀ. ਲੰਬੇ ਹੁੰਦੇ ਹਨ ਫਲ ਗੁੱਛਿਆਂ ਵਿੱਚ ਲੱਗਦੇ ਹਨ ਅਤੇ ਹਰੇਕ ਗੁੱਛੇ ਚ 6-14 ਫਲ ਹੁੰਦੇ ਹਨ ਪੱਕਣ ਸਮੇਂ ਫਲ ਗੂੜੇ ਲਾਲ ਰੰਗ ਦੇ ਅਤੇ ਕੌੜੇ ਹੁੰਦੇ ਹਨ ਇਹ ਕਿਸਮ CMV, TMV ਅਤੇ ਪੱਤਾ ਮਰੋੜ ਦੀ ਰੋਧਕ ਹੈ ਇਸਦੀ ਪਹਿਲੀ ਤੁੜਾਈ ਪਨੀਰੀ ਲਾਉਣ ਤੋਂ 75-80 ਦਿਨ ਬਾਅਦ ਕੀਤੀ ਜਾ ਸਕਦੀ ਹੈ ਇਸਦਾ ਔਸਤਨ ਝਾੜ 38 ਕੁਇੰਟਲ (ਹਰੀਆਂ ਮਿਰਚਾਂ) ਅਤੇ 8 ਕੁਇੰਟਲ (ਸੁੱਕੀਆਂ ਮਿਰਚਾਂ) ਪ੍ਰਤੀ ਏਕੜ ਹੈ Arka Meghana: ਇਹ ਹਾਈਬ੍ਰਿਡ ਕਿਸਮ ਵੱਧ ਝਾੜ ਵਾਲੀ ਅਤੇ ਪੱਤਿਆਂ ਦੇ ਧੱਬਾ ਰੋਗ ਦੀ ਰੋਧਕ ਹੈ ਇਸ ਦੇ ਫਲਾਂ ਦੀ ਲੰਬਾਈ 10.6 ਸੈ.ਮੀ. ਅਤੇ ਚੌੜਾਈ 1.2 ਸੈ.ਮੀ. ਹੁੰਦੀ ਹੈ ਇਸ ਦੇ ਫਲ ਸ਼ੁਰੂ ਵਿੱਚ ਗੂੜੇ ਹਰੇ ਅਤੇ ਪੱਕਣ ਤੋਂ ਬਾਅਦ ਲਾਲ ਹੋ ਜਾਂਦੇ ਹਨ ਇਸਦਾ ਔਸਤਨ ਝਾੜ 134 ਕੁਇੰਟਲ (ਹਰੀ ਮਿਰਚ) ਅਤੇ 20 ਕੁਇੰਟਲ (ਸੁੱਕੀ ਮਿਰਚ) ਹੁੰਦਾ ਹੈ Arka Sweta: ਇਹ ਹਾਈਬ੍ਰਿਡ ਕਿਸਮ ਵਧੇਰੇ ਝਾੜ ਵਾਲੀ ਅਤੇ ਤਾਜ਼ਾ ਮੰਡੀ ਵਿੱਚ ਵੇਚਣਯੋਗ ਹੈ ਇਹ ਸੇਂਜੂ ਸਥਿਤੀਆਂ ਵਿੱਚ ਸਾਉਣੀ ਅਤੇ ਹਾੜੀ ਦੋਨੋਂ ਵਿੱਚ ਉਗਾਈ ਜਾ ਸਕਦੀ ਹੈ ਇਸ ਦੇ ਫਲ ਦੀ ਲੰਬਾਈ 11-12 ਸੈ.ਮੀ., ਚੌੜਾਈ 1.2-1.5 ਸੈ.ਮੀ. ਹੁੰਦੀ ਹੈ ਫਲ ਮੁਲਾਇਮ ਅਤੇ ਦਰਮਿਆਨੇ ਕੌੜੇ ਹੁੰਦੇ ਹਨ ਫਲ ਸ਼ੁਰੂ ਵਿੱਚ ਹਲਕੇ ਹਰੇ ਅਤੇ ਪੱਕਣ ਤੋਂ ਬਾਅਦ ਲਾਲ ਹੋ ਜਾਂਦੇ ਹਨ ਇਹ ਵਿਸ਼ਾਣੂਆਂ ਨੂੰ ਸਹਾਰਨਯੋਗ ਕਿਸਮ ਹੈ ਇਸ ਦਾ ਔਸਤਨ ਝਾੜ 132 ਕੁਇੰਟਲ (ਹਰੀਆਂ ਮਿਰਚਾਂ) ਅਤੇ 20 ਕੁਇੰਟਲ (ਸੁੱਕੀਆਂ ਮਿਰਚਾਂ) ਪ੍ਰਤੀ ਏਕੜ ਹੈ Kashi Early: ਇਸ ਹਾਈਬ੍ਰਿਡ ਕਿਸਮ ਦੇ ਪੌਦੇ ਦਾ ਕੱਦ ਲੰਬਾ (100-110 ਸੈ.ਮੀ.) ਹੁੰਦਾ ਹੈ ਇਸਦਾ ਤਣਾ ਟਾਹਣੀਆਂ ਤੋਂ ਬਿਨਾਂ ਫਿੱਕਾ ਹਰਾ ਹੁੰਦਾ ਹੈ ਇਸ ਦੇ ਫ਼ਲ ਕੌੜੇ, ਲੰਬੇ ( 8-9 x 1.0-1.2 ਸੈ.ਮੀ.), ਆਕਰਸ਼ਿਕ, ਸ਼ੁਰੂ ਵਿੱਚ ਗੂੜੇ ਹਰੇ ਜੋ ਪੱਕਣ ਤੋਂ ਬਾਅਦ ਚਮਕੀਲੇ ਲਾਲ ਹੋ ਜਾਂਦੇ ਹਨ ਇਸ ਕਿਸਮ ਵਿੱਚ ਹਰੀ ਮਿਰਚ ਦੀ ਪਹਿਲੀ ਤੁੜਾਈ ਪਨੀਰੀ ਲਗਾਉਣ ਤੋਂ 45 ਦਿਨ ਬਾਅਦ ਕੀਤੀ ਜਾ ਸਕਦੀ ਹੈ ਇਸ ਦਾ ਔਸਤਨ ਝਾੜ 100 ਕੁਇੰਟਲ (ਪੱਕੀ ਹੋਈ ਲਾਲ) ਹੁੰਦਾ ਹੈ Kashi Surkh: ਇਸ ਕਿਸਮ ਦੇ ਪੌਦੇ ਛੋਟੇ ਕੱਦ ਦੇ ਹੁੰਦੇ ਹਨ, ਜਿਨ੍ਹਾਂ ਦਾ ਤਣਾ ਟਾਹਣੀਆਂ ਵਾਲਾ ਹੁੰਦਾ ਹੈ ਇਸਦੇ ਫ਼ਲ ਹਲਕੇ ਹਰੇ, ਸਿੱਧੇ, ਲੰਬੇ 11-12 ਸੈ.ਮੀ. ਹੁੰਦੇ ਹਨ ਇਹ ਹਰੀ ਅਤੇ ਲਾਲ ਦੋਨੋਂ ਤਰ੍ਹਾਂ ਦੀਆਂ ਮਿਰਚਾਂ ਉਗਾਉਣਯੋਗ ਕਿਸਮ ਹੈ ਇਸਦੀ ਪਹਿਲੀ ਤੁੜਾਈ ਪਨੀਰੀ ਲਗਾਉਣ ਤੋਂ 55 ਦਿਨਾਂ ਬਾਅਦ ਕੀਤੀ ਜਾ ਸਕਦੀ ਹੈ ਇਸ ਵਿੱਚ ਹਰੀ ਮਿਰਚ ਦਾ ਔਸਤਨ ਝਾੜ 100 ਕੁਇੰਟਲ ਪ੍ਰਤੀ ਏਕੜ ਹੈ Kashi Anmol: ਇਸ ਕਿਸਮ ਦੇ ਪੌਦੇ ਦਰਮਿਆਨੇ ਕੱਦ ਦੇ(60-70 ਸੈ.ਮੀ.) ਹੁੰਦੇ ਹਨ, ਜਿਨ੍ਹਾਂ ਦਾ ਤਣਾ ਟਾਹਣੀਆਂ ਵਾਲਾ ਹੁੰਦਾ ਹੈ ਅਤੇ ਇਹ ਆਕਰਸ਼ਿਕ ਹਰੇ ਕੌੜੇ ਫਲ ਪੈਦਾ ਕਰਦਾ ਹੈ ਇਸਦੀ ਪਹਿਲੀ ਤੁੜਾਈ ਪਨੀਰੀ ਲਗਾਉਣ ਤੋਂ 55 ਦਿਨ ਬਾਅਦ ਕੀਤੀ ਜਾ ਸਕਦੀ ਹੈ ਇਸਦਾ ਔਸਤਨ ਝਾੜ 80 ਕੁਇੰਟਲ ਪ੍ਰਤੀ ਏਕੜ ਹੁੰਦਾ ਹੈ
Posted by Mukesh Pandit
Uttar Pradesh
14-10-2019 05:39 AM
Maharashtra
10-14-2019 10:34 AM
खेत की तैयारी के समय, 80 क्विंटल प्रति एकड़ गली हुई रूड़ी की खाद को मिट्टी में अच्छी तरह मिलायें नाइट्रोजन 24 किलो (यूरिया 52 किलो), फासफोरस 32 किलो (सिंगल सुपर फासफेट 52 किलो), और पोटाश 40 किलो (म्यूरेट ऑफ पोटाश 66 किलो) प्रति एकड़ में डालें मिट्टी से पैदा होने वाली बीमारियों से पौधे को बचाने के लिए जैविक कीट नाशी जैसे धतू.... (Read More)
खेत की तैयारी के समय, 80 क्विंटल प्रति एकड़ गली हुई रूड़ी की खाद को मिट्टी में अच्छी तरह मिलायें नाइट्रोजन 24 किलो (यूरिया 52 किलो), फासफोरस 32 किलो (सिंगल सुपर फासफेट 52 किलो), और पोटाश 40 किलो (म्यूरेट ऑफ पोटाश 66 किलो) प्रति एकड़ में डालें मिट्टी से पैदा होने वाली बीमारियों से पौधे को बचाने के लिए जैविक कीट नाशी जैसे धतूरा, चित्रकमूल और गाय के मूत्र का प्रयोग करें
Posted by madan Gurjar
Rajasthan
14-10-2019 05:28 AM
Posted by rajuram
Rajasthan
14-10-2019 03:18 AM
Maharashtra
10-14-2019 10:33 AM
राजूराम जी आप सरसो की किस्मे जैसे Aashirwad (RK 01-03): यह किस्म पिछेती बिजाई के लिए उपयुक्त है पौधे का कद 130-140 सैं.मी. होता है इसमें तेल की मात्रा 39-42 प्रतिशत होती है यह किस्म 120-130 दिनों में कटाई के लिए तैयार हो जाती है इसकी औसतन पैदावार 5-6 क्विंटल प्रति एकड़ होती है Swarn Jyoti (RH 9801): यह किस्म सिंचित क्षेत्रों और पिछेती बिजाई के लिए .... (Read More)
राजूराम जी आप सरसो की किस्मे जैसे Aashirwad (RK 01-03): यह किस्म पिछेती बिजाई के लिए उपयुक्त है पौधे का कद 130-140 सैं.मी. होता है इसमें तेल की मात्रा 39-42 प्रतिशत होती है यह किस्म 120-130 दिनों में कटाई के लिए तैयार हो जाती है इसकी औसतन पैदावार 5-6 क्विंटल प्रति एकड़ होती है Swarn Jyoti (RH 9801): यह किस्म सिंचित क्षेत्रों और पिछेती बिजाई के लिए उपयुक्त है पौधे का कद 130-140 सैं.मी. होता है यह किस्म 130-140 दिनों में कटाई के लिए तैयार हो जाती है इसमें तेल की मात्रा 39-42 प्रतिशत होती है इसकी औसतन पैदावार 5-6 क्विंटल प्रति एकड़ होती है RGN 73: यह किस्म सिंचित क्षेत्रों और सामान्य बिजाई के लिए उपयुक्त है पौधे का कद 160-170 सैं.मी. होता है इसमें तेल की मात्रा 40-41 प्रतिशत होती है यह किस्म 125-130 दिनों में कटाई के लिए तैयार हो जाती है इसकी औसतन पैदावार 8.8-10 क्विंटल प्रति एकड़ होती है Lakshmi (RH 8812): यह किस्म सिंचित क्षेत्रों और सामान्य बिजाई के लिए उपयुक्त है पौधे का कद 160-180 सैं.मी. होता है यह किस्म 140-145 दिनों में कटाई के लिए तैयार हो जाती है इसके दाने बड़े और काले रंग के होते हैं इसमें तेल की मात्रा 40 प्रतिशत होती है इसकी औसतन पैदावार 8.8-10 क्विंटल प्रति एकड़ होती है VSL 5: यह किस्म सिंचित क्षेत्रों और सामान्य बिजाई के लिए उपयुक्त है पौधे का कद 165-170 सैं.मी. होता है यह किस्म 125-130 दिनों में कटाई के लिए तैयार हो जाती है इसके दाने मध्यम और काले रंग के होते हैं इसमें तेल की मात्रा 39-40 प्रतिशत होती है इसकी औसतन पैदावार 8-8.8 क्विंटल प्रति एकड़ होती है Aravali (RN 393): पौधे का कद 155-165 सैं.मी. होता है यह किस्म 135-138 दिनों में कटाई के लिए तैयार हो जाती है इसमें तेल की मात्रा 42 प्रतिशत होती है इसकी औसतन पैदावार 8.8-10 क्विंटल प्रति एकड़ होती है Vansudhara (RH 9304): यह किस्म सिंचित क्षेत्रों और समय पर बोने के लिए उपयुक्त है इसके पौधे का कद 180-190 सैं.मी. होता है यह 130-135 दिनों में कटाई के लिए तैयार हो जाती है इसकी औसतन पैदावार 10-11 क्विंटल प्रति एकड़ होती है Maya (RK 9902): यह किस्म सिंचित क्षेत्रों और समय पर बोने के लिए उपयुक्त है इसके पौधे का कद 165-170 सैं.मी. होता है यह 130-135 दिनों में कटाई के लिए तैयार हो जाती है इसमें तेल की मात्रा 39-40 प्रतिशत होती है इसकी औसतन पैदावार 10-11 क्विंटल प्रति एकड़ होती है Pusa Jaykisan: इसके पौधे का कद 160-180 सैं.मी. होता है यह 130-140 दिनों में कटाई के लिए तैयार हो जाती है इसमें तेल की मात्रा 38-40 प्रतिशत होती है इसकी औसतन पैदावार 7.2-8 क्विंटल प्रति एकड़ होती है Pusa Bold: पौधा मध्यम कद का होता है इसमें तेल की मात्रा 37-38 प्रतिशत होती है यह किस्म 130-140 दिनों में कटाई के लिए तैयार हो जाती है इसकी औसतन पैदावार 4.8-10 क्विंटल प्रति एकड़ होती है T 59(Varuna): इसका पौधा मध्यम कद का होता है यह किस्म 125-140 दिनों में कटाई के लिए तैयार हो जाती है इसके दाने मोटे और काले रंग के होते हैं सिंचित हालातों में यह 6-7 क्विंटल औसतन पैदावार देती है और असिंचित क्षेत्रों में 4-6 क्विंटल औसतन पैदावार देती है RH 30: यह सिंचित और असिंचित क्षेत्रों में उगाने के लिए उपयुक्त है पौधे का कद 196 सैं.मी. होता है यह किस्म पिछेती बिजाई के लिए उपयुक्त है यह 130-135 दिनों में कटाई के लिए तैयार हो जाती है इसकी औसतन पैदावार 4.8-7 क्विंटल प्रति एकड़ होती है
Posted by Nishan Singh
Punjab
14-10-2019 12:03 AM
Punjab
10-14-2019 10:24 AM
nishan ji jekar tuc kheti karn da nirnay leya hai ta bahut hi vadia faisla hai kheti de vich jekar tuc kanak jhone di oragnic kheti karna chahunde ho ta eh v bahut vadia tareeka hai isto ilava tuc dragon fruot di kheti kar sakde ho. jekar tuc medicinal plants di kheti vich interested ho ta tuc stevia di kheti kar sakde ho. par ehna sab di kheti to pehan tuc is bare poori jankari hasil karo ate ho sake ta jehda farmer ehna di kheti karda hai usde khet te visist karo ate ohna da experience suno ta jo ehna di kheti karn vich aun valiyan mushkil bare pta chal jayega.dhanwad
Posted by Prasad
Karnataka
13-10-2019 11:54 PM
Rajasthan
10-14-2019 11:01 AM
मोती की खेती एक बहुत ही अच्छा व्यवसाय है इस व्यवसाय को शुरू करने के लिए सबसे जरुरी है इसकी ट्रेनिंग, क्योकि इसमें बहुत सी ऐसी बारीकियें होती है जो हमें प्रेक्टिकल ट्रेनिंग में ही सीखने को मिलती है अगर आप इसकी ट्रेनिंग लेना चाहते है तो आप ग्लिटराटी पर्ल फार्मिंग ट्रेनिंग केंद्र प्रशिक्षण कार्य कर्म आयोजि.... (Read More)
मोती की खेती एक बहुत ही अच्छा व्यवसाय है इस व्यवसाय को शुरू करने के लिए सबसे जरुरी है इसकी ट्रेनिंग, क्योकि इसमें बहुत सी ऐसी बारीकियें होती है जो हमें प्रेक्टिकल ट्रेनिंग में ही सीखने को मिलती है अगर आप इसकी ट्रेनिंग लेना चाहते है तो आप ग्लिटराटी पर्ल फार्मिंग ट्रेनिंग केंद्र प्रशिक्षण कार्य कर्म आयोजित किया जा रहा है प्रशिक्षण कार्य कर्म में भाग लेने के लिए नीचे दिए गए नम्बर पर आज ही संपर्क करें और Rs 250/ से अपना रजिस्ट्रेशन करवाए अचल सिंह (फाउंडर )- 9711858258. धन्यवाद
Posted by pravndera. yadav
Uttar Pradesh
13-10-2019 11:48 PM

..?

Maharashtra
10-14-2019 11:02 AM
pravndera ji kripya aap apna swal vistar se pooche taki aapko iske bare men poori jankari di ja sake. aapke dwara bheji gayi audio upload nahi hui hai.dhanywad
Posted by Nishan Singh
Punjab
13-10-2019 11:44 PM
Punjab
10-14-2019 11:04 AM
nishan ji tuc amrood diyan kisman jive Punjab Pink,Allahbad Safeda,Arka Amulya di bijai kar sakde ho eh tuc ho sake ta kise sarkari nursery to lao ja PAU ludhiana to lai ke aao.dhanwad
Posted by Sunil Sunil
Rajasthan
13-10-2019 11:17 PM
Punjab
10-14-2019 04:04 PM
Sunil ji kripya aap apna swal vistar se pushen ki aap cow ke vare mai kya jankari lena chahte hai tan jo apko sahi jankari di jaa skee.
Posted by rishipal
Haryana
13-10-2019 10:49 PM
Rajasthan
10-14-2019 11:34 AM
डेयरी फार्मिंग के लिए लोन अलग अलग कामों के लिए मिलता है जैसे शैड के लिए, पशुओं के लिए, डेयरी मशीनरी के लिए सबसे पहले आपने जिसके लिए लोन लेना है उस संबंधी आवेदन नज़दीक के डिप्टी डायरेक्टर को मिलकर दें, इसके लिए आपके पास डेयरी ट्रेनिंग होनी जरूरी है उसके सर्टीफिकेट के हिसाब से आपको लोन मिलेगा यह ट्रेनिंग आप अप.... (Read More)
डेयरी फार्मिंग के लिए लोन अलग अलग कामों के लिए मिलता है जैसे शैड के लिए, पशुओं के लिए, डेयरी मशीनरी के लिए सबसे पहले आपने जिसके लिए लोन लेना है उस संबंधी आवेदन नज़दीक के डिप्टी डायरेक्टर को मिलकर दें, इसके लिए आपके पास डेयरी ट्रेनिंग होनी जरूरी है उसके सर्टीफिकेट के हिसाब से आपको लोन मिलेगा यह ट्रेनिंग आप अपने नज़दीकी केवीके से प्राप्त कर सकते है वहां समय समय पर ट्रेनिंग दी जाती है आप वहां जाकर अपना फार्म भर आए जब भी वहां ट्रेनिंग होगी तो आपको फोन करके बता दिया जाएगा
Posted by SAHABDEEN
Rajasthan
13-10-2019 10:02 PM
Maharashtra
10-14-2019 11:09 AM
साहबदीन जी कृपया आप अपना सवाल विस्तार से पूछे ताकि आपको इसके बारे में पूरी जानकारी दी जा सके धन्यवाद
Posted by daljeet singh
Punjab
13-10-2019 09:59 PM
Punjab
10-14-2019 11:10 AM
ਬਰਸੀਮ ਦੀ ਬਿਜਾਈ ਸਤੰਬਰ ਦੇ ਅਖੀਰਲੇ ਹਫਤੇ ਤੋਂ ਲੈ ਕੇ ਅਕਤੂਬਰ ਦਾ ਪਹਿਲਾਂ ਹਫਤਾ ਤਕ ਕੀਤੀ ਜਾਂਦੀ ਹੈ ਬਰਸੀਮ ਦੀ ਬਿਜਾਈ ਸਤੰਬਰ ਦੇ ਅਖੀਰਲੇ ਹਫਤੇ ਤੋਂ ਲੈ ਕੇ ਅਕਤੂਬਰ ਦਾ ਪਹਿਲਾਂ ਹਫਤਾ ਤਕ ਕੀਤੀ ਜਾਂਦੀ ਹੈ ਇਹ ਮੌਸਮ ਦੇ ਹਾਲਾਤਾ ਤੇ ਨਿਰਭਰ ਕਰਦੀ ਹੈ, ਛਿੱਟੇ ਨਾਲ ਕੀਤੀ, ਬੀਜ ਦੀ ਡੂੰਘਾਈ 4-5 ਸੈ:ਮੀ: ਹੋਣੀ ਚਾਹੀਦੀ ਹੈ ਇਸਦੀ ਬਿਜਾਈ ਸ਼ਾਮ ਦੇ ਸਮੇਂ ਕਰਨੀ ਚਾਹੀਦੀ ਹੈ
Posted by harpreet singh
Punjab
13-10-2019 09:30 PM
Punjab
10-14-2019 04:14 PM
tuci isde jankari lai ehh video dekh skde ho.. https://www.youtube.com/watch v=WkQtGw6MTI4
Posted by RAHUL KUMAR
Bihar
13-10-2019 09:20 PM
Maharashtra
10-14-2019 12:06 PM
मक्खन घास की बुवाई अक्तूबर-दिसंबर के महीनों में की जाती है, अगर इसकी बुवाई अकेले करनी है तो 1.25-1.5 किलोग्राम और अगर किसी फसल के साथ बुवाई करनी है तो 0.50-0.75 किलोग्राम बीज डालें, मक्खन घास की बुवाई कतारों में 30 से. मी. के प्लाट में की जाती है, इसकी बुवाई छींटा देकर, मशीन के साथ या हाथों के साथ कर सकते हैं, के लिए बैड पर नमी .... (Read More)
मक्खन घास की बुवाई अक्तूबर-दिसंबर के महीनों में की जाती है, अगर इसकी बुवाई अकेले करनी है तो 1.25-1.5 किलोग्राम और अगर किसी फसल के साथ बुवाई करनी है तो 0.50-0.75 किलोग्राम बीज डालें, मक्खन घास की बुवाई कतारों में 30 से. मी. के प्लाट में की जाती है, इसकी बुवाई छींटा देकर, मशीन के साथ या हाथों के साथ कर सकते हैं, के लिए बैड पर नमी बनाए रखें साधारण हालातों में 10 से 14 दिनों में शुरू हो जाता है और 18 दिनों में पूरा हो जाता है इसकी जड़ें 4 से 6 सप्ताहों में विक्सित हो जाती हैं ज़मीन की तैयारी के समय 15- 20 टन रूड़ी की खाद डालें अन्य खाद बुवाई से पहले डालें नाइट्रोजन 30 किलो प्रति एकड़ फॉस्फोरस 20 किलो प्रति एकड़ हरेक कटाई के बाद 30 किलो नाइट्रोजन डालें पहली सींचाई बुवाई के तुरंत बाद करें दूसरी सींचाई बुवाई के 5 से 6 दिन बाद और फिर 10 दिनों के अंतराल पर ज़रूरत के अनुसार सींचाई करते रहें पहली सींचाई के बाद हाथ से करें और 20 किलो नाइट्रोजन डालें
Posted by SANJEEV KUMAR
Punjab
13-10-2019 09:20 PM
Punjab
10-14-2019 07:28 AM
BhaaG isnu rajwa hara chaara te 1-2kg feed pao har 3 mahine baad malap rehat karo dhatan du ghat ae 50g mineral mixture rozana dio
Posted by Happy singh
Himachal Pradesh
13-10-2019 09:12 PM
Punjab
10-14-2019 01:51 PM
हैप्पी सिंह जी आप अपनी बात डिटेल में शेयर करे कि क्या कहना चाहते है जी
Posted by vishal gupta
Uttar Pradesh
13-10-2019 09:11 PM
Maharashtra
10-14-2019 11:43 AM
विशाल जी इसे घर पर त्यार किया जाता है जीव अमृत बनाने के लिए आवश्यक चीज़ें प्लास्टिक का एक बड़ा 200 लीटर का ढोल (ढोल लोहे का नहीं होना चाहिए) 10 किलो गोबर (गाय या भैंस का पुराना गोबर) 10 लीटर पेशाब (गाय, बैल या भैंस का) 1 किलो गुड़ (पुराना या खराब और बारीक किया हुआ जो कि आसानी से पानी में घुलनशील हो) 1 किलो पिसी हुई दाल (बेसन, मा.... (Read More)
विशाल जी इसे घर पर त्यार किया जाता है जीव अमृत बनाने के लिए आवश्यक चीज़ें प्लास्टिक का एक बड़ा 200 लीटर का ढोल (ढोल लोहे का नहीं होना चाहिए) 10 किलो गोबर (गाय या भैंस का पुराना गोबर) 10 लीटर पेशाब (गाय, बैल या भैंस का) 1 किलो गुड़ (पुराना या खराब और बारीक किया हुआ जो कि आसानी से पानी में घुलनशील हो) 1 किलो पिसी हुई दाल (बेसन, मांह, मसूर) 1 किलो पुरानी मिट्टी जो कि पीपल या बर्गद के नीचे से ली गई हो जीव अमृत बनाने की विधि इन सब चीज़ों को अच्छी तरह से आपस में मिलाएं और ढोल में डाल दें इस ढोल को 150 लीटर पानी से भर दें इस ढोल का 1/4 भाग खाली छोड़ दें यह 1/4 भाग खाली छोड़ने से उबाला मारने का खतरा कम हो जाता है इस घोल को छांव में रखें और दिन में दो बार सुबह- शाम डंडे से हिलाएं ताकि ढोल के अंदर की सामग्री अच्छी तरह घुल जाये इसे गर्मियों में 48 घंटों के लिए छांव में रखें इस ढोल को बोरी से अच्छी तरह ढक दें इस तरह एक एकड़ का जीव अमृत 2-4 दिनों में तैयार हो जाता है जीव अमृत प्रयोग करने की विधि यदि आप खेत की सिंचाई आम तरीके से कर रहे हैं तो इस घोल को टूटी के द्वारा या किसी बर्तन से पानी में मिलाते रहें ताकि जीव अमृत आसानी से सारे खेत में फैल सके यह सबसे सस्ते और फायदेमंद सूक्ष्म तत्व हैं जो कि नाइट्रोजन, कैल्शियम जैसे तत्वों की मिट्टी में पूर्ति करते हैं इसे तैयार करने के बाद 10-15 दिनों में प्रयोग कर लेना चाहिए कनोला सरसों की कुदरती/जैविक खेती जैविक या कुदरती तरीके से खेती करने से ज़मीन की क्षमता और उपजाऊपन बढ़ता है यह मिट्टी में नमी बनाए रखने में भी मदद करती है इससे पौधे का विकास भी अच्छे से होता है जैसे कि आप देख सकते हैं कि पौधे के पत्ते का आकार सामान्य पत्तों के आकार से काफी बड़ा है और पत्ता जितना बड़ा होगा प्रकाश संश्लेषण क्रिया भी उतने अच्छे से होगी इससे पौधा तंदरूस्त रहता है और पौधा जितना तंदरूस्त होगा उसका फल भी उतना ही तंदरूस्त होगा हमें कोशिश करनी चाहिए कि खेती करते समय रासायनिक खादों का प्रयोग कम से कम करें ड्राई जीव अमृत बनाने की विधि जब किसान यह सोचता है कि मुझे रासायनिक खादों के बिना खेती करनी है तो सबसे पहले उसका ध्यान रूड़ी की खाद के ढेर की तरफ जाता है कि जो रूड़ी हमने खेत में डाली है क्या वह लाभदायक है क्या उससे हमें लाभ मिल सकता है हां बिल्कुल मिल सकता है लेकिन हमें रूड़ी का प्रयोग खेत में सीधे तौर पर नहीं करना है क्योंकि इससे कईं प्रकार की दीमक और फंगस खेत में पैदा होती है यह फायदा करने की बजाए नुकसान करती है इसलिए खाद बनाने के लिए जीव अमृत का स्प्रे करके नया ढंग अपनाया है अब हम आपको दिखाते हैं कि खाद कैसे बनाई जाती है आप जो ये खाद देख रहे हैं यह पहले कच्ची रूड़ी की खाद थी जो कि जीव अमृत की स्प्रे करने से बिल्कुल सूख चुकी है इसे कैसे तैयार करना है 10 दिनों के अंतराल पर हमने इस पर 4 ढोल जीव अमृत के डाले हैं अर्थात् 16 ढोल जीव अमृत के डाले हैं 40 दिनों में ड्राई जीव अमृत फसलों के लिए तैयार हो जाती है जब हम खेत में ड्राई जीव अमृत का प्रयोग करेंगे तब यह पानी के संपर्क में आते ही सक्रिय हो जायेगा और अच्छे से काम करेगा Vidio dekhne ke lia aap Link par Click kare https://www.youtube.com/watch v=M1ftFepXFMY