Posted by Dashrath kumawat
Madhya Pradesh
14-10-2019 08:06 PM
देसी किस्मों की बिजाई का उचित समय अगस्त-सितम्बर, जबकि यूरोपी किस्मों का अक्तूबर- नवंबर में होता हैं

Posted by Amrik singh
Punjab
14-10-2019 08:05 PM
HD 3226 का बीज नज़दीकी कृषि विज्ञान केन्द्र में पता कर सकते है या फिर करनाल यूनिर्वसिटी से संपर्क कर सकते है

Posted by Mahesh Jaisawal
Uttar Pradesh
14-10-2019 07:56 PM
कृप्या आप अपना सवाल विस्तार से पूछें कि आप क्या जानकारी लेना चाहते है ताकि आपको सही जानकारी दी जा सके

Posted by ਰਣਜੀਤ ਸਿੰਘ
Punjab
14-10-2019 07:47 PM
ਸ਼੍ਰੀਮਾਨ ਜੀ, ਬਹੁਤ ਸਾਰੀਆਂ ਇਸ ਤਾਰਾ ਦੀਆਂ apps ਹਨ play store ਅਤੇ app store ਤੇ ਜੀ ਨਾਲ ਜਮੀਨ ਦਾ ਮਾਪ ਤੋਲ ਕੀਤਾ ਜਾ ਸਕਦਾ ਹੈ, ਪਾਰ ਇਸ ਚੀਜ ਬਾਰੇ ਕੋਈ ਪੁਸ਼ਟੀ ਨਹੀਂ ਕੀਤੀ ਜਾ ਸਕਦੀ ਕਿ ਇਹ ਜੋ ਡਾਟਾ ਹੁੰਦਾ ਹੈ, ਇਹ ਸਹੀ ਹੋਏ ਗਾ, ਧੰਨਵਾਦ

Posted by vikram singh
Punjab
14-10-2019 07:45 PM
Hnji tuci dono ekathe de skde ho, ehna da koi nuksan nahi hai..

Posted by deepak
Uttar Pradesh
14-10-2019 07:40 PM
दीपक जी कृप्या आप अपना सवाल विस्तार से पूछें कि आप क्या जानकारी लेना चाहते है ताकि आपको सही जानकारी दी जा सके

Posted by anil
Haryana
14-10-2019 07:36 PM

Posted by Raju dada
Uttar Pradesh
14-10-2019 07:35 PM
दीपक जी कृप्या आप अपना सवाल विस्तार से पूछें कि आप क्या जानकारी लेना चाहते है ताकि आपको सही जानकारी दी जा सके

Posted by sukhwinder singh
Punjab
14-10-2019 07:22 PM
sundi di roktham de layi tuc quinalphos@400mlnu prati acre de hisab nal spray karo.dhanwad
Posted by राशिद खान
Uttar Pradesh
14-10-2019 07:17 PM
राशिद जी आप गेंहू की किस्मे जैसे WH 896: इस किस्म की सिंचित क्षेत्रों में समय पर बोने के लिए सिफारिश की गई है
PBW 373: यह अधिक उपज वाली किस्म है इसकी सिंचित क्षेत्रों में पिछेती बिजाई के लिए सिफारिश की गई है यह किस्म विभिन्न बीमारियों के प्रतिरोधक है
PBW 343: यह किस्म सिंचित और पिछेती बिजाई के क्षेत्रों के लिए उपयुक.... (Read More)
राशिद जी आप गेंहू की किस्मे जैसे WH 896: इस किस्म की सिंचित क्षेत्रों में समय पर बोने के लिए सिफारिश की गई है
PBW 373: यह अधिक उपज वाली किस्म है इसकी सिंचित क्षेत्रों में पिछेती बिजाई के लिए सिफारिश की गई है यह किस्म विभिन्न बीमारियों के प्रतिरोधक है
PBW 343: यह किस्म सिंचित और पिछेती बिजाई के क्षेत्रों के लिए उपयुक्त है यह किस्म 130-135 दिनों में कटाई के लिए तैयार हो जाती है यह गर्दन तोड़, जल जमाव की स्थितियों के प्रतिरोधक किस्म है यह करनाल बंट के भी प्रतिरोधक और झुलस रोग को सहनेयोग्य किस्म है इसकी औसतन पैदावार 19 क्विंटल प्रति एकड़ होती है
HD 2643: यह किस्म सिंचित और पिछेती बिजाई के क्षेत्रों के लिए उपयुक्त है इस किस्म से अच्छी गुणवत्ता वाली रोटी बनती है यह पत्ता और धारीदार कुंगी के प्रतिरोधक और करनाल बंट को सहनेयोग्य किस्म है
UP 2425: यह सिंचित स्थितियों में पिछेती बिजाई के लिए उपयुक्त किस्म है
PBW-443: यह किस्म सिंचित हालातों में समय पर बोने के लिए उपयुक्त किस्म है
DBW-14: यह किस्म सिंचित हालातों में पिछेती बिजाई के लिए उपयुक्त है यह जल्दी पकने वाली किस्म है इसके दाने सख्त होते हैं
NW-2036: यह सिंचित हालातों में पिछेती बिजाई के लिए उपयुक्त किस्म है यह जल्दी पकने वाली किस्म है दूसरे शब्दों में, यह किस्म 108 दिनों में कटाई के लिए तैयार हो जाती है इसके दाने छोटे, सुनहरी और अर्द्ध सख्त होते हैं
MACS-6145: यह किस्म बारानी क्षेत्रों में समय पर बोने के लिए उपयुक्त है
HD-2824: यह किस्म सिंचित क्षेत्रों में समय पर बिजाई के लिए उपयुक्त है
PBW-502: यह किस्म पंजाब एग्रीकल्चर युनिवर्सिटी द्वारा विकसित की गई है यह किस्म सिंचित हालातों में समय पर बिजाई के लिए उपयुक्त है यह किस्म पत्ते और धारीदार कुंगी के प्रतिरोधक किस्म है
PDW-291: यह किस्म सिंचित हालातों में पिछेती बिजाई के लिए उपयुक्त किस्म है यह किस्म कुंगी, करनाल बंट और कांगियारी के प्रतिरोधक किस्म है
PBW-524: यह सिंचित हालातों में पिछेती बिजाई के लिए उपयुक्त किस्म है यह किस्म कुंगी, करनाल बंट और कांगियारी के प्रतिरोधक किस्म है
HD-2864: यह सिंचित हालातों में समय पर बिजाई के लिए उपयुक्त किस्म है यह किस्म पत्ते और धारीदार कुंगी के प्रतिरोधी और ताप को सहनेयोग्य किस्म है
HI-8627: यह किस्म बारानी क्षेत्रों में समय पर बिजाई के लिए उपयुक्त है यह धारीदार कुंगी और पैर गलन के प्रतिरोधक किस्म है
Ujiar(K-9006): यह किस्म सिंचित हालातों में समय पर बोने के लिए उपयुक्त है इसके दाने अर्द्ध सख्त और सुनहरी होते हैं यह किस्म करनाल बंट के प्रतिरोधक किस्म है
Posted by Narinder
Punjab
14-10-2019 07:12 PM

Posted by kartik Rajput
Madhya Pradesh
14-10-2019 07:08 PM
आप एक जैफल 3 दिन लगातार देकर फिर 7 दिनों तक इंतजार करें इससे पशु हीट में आ जाएगा
Posted by NARAYAN SAHU
Chattisgarh
14-10-2019 07:06 PM
बकरी पालन बहुत ही लाभकारी काम है शुरूआत करने के लिए आप 10 बकरियों और 2 बकरे के साथ कर सकते हैं इन्हें खुराक कम चाहिए इसलिए इन्हें आसानी से पाल सकते हैं ये हर प्रकार के मौसम में पाली जा सकती हैं बकरियां 12-14 महीने में बच्चे देना शुरू कर देती है बकरी का गर्भ समय 150 दिन का होता है और साल में 1-5 बच्चे देती है साल में दो बच्.... (Read More)
बकरी पालन बहुत ही लाभकारी काम है शुरूआत करने के लिए आप 10 बकरियों और 2 बकरे के साथ कर सकते हैं इन्हें खुराक कम चाहिए इसलिए इन्हें आसानी से पाल सकते हैं ये हर प्रकार के मौसम में पाली जा सकती हैं बकरियां 12-14 महीने में बच्चे देना शुरू कर देती है बकरी का गर्भ समय 150 दिन का होता है और साल में 1-5 बच्चे देती है साल में दो बच्चे देना आम बात है बकरियां 8-10 वर्ष तक बच्चे देती हैं और अपन गिनती को तेजी से बढ़ा लेती हैं आप बारबरी, ब्लैक बंगाल, जैसी नसल पाल सकते हैं इसकी ट्रेनिेंग के लिए आप अपने कुषि विज्ञान केंद्र से संपर्क करे या फिर जो बकरी पालन का व्यवसाय कर रहा कोई किसान उसका फार्म स्वंय जाकर देखकर आयें तो और भी बारीकियों का पता चल जायेगा, आप ब्लैक बंगाल, बीटल, सिरोही, जमुनापरी, बरबरी नस्ल रख सकते हैं, बकरी पालन में लोन लेने के लिए सबसे जरूरी है ट्रेनिंग सर्टीफिकेट अपने नज़दीक के कृषि विज्ञान केंद्र से ट्रेनिंग करने के बाद ट्रेनिंग के सर्टीफिकेट पर लोन एप्लाई होता है पर लोन मिलेगा या नहीं यह बैंक मेनेजर पर निर्भर करता है क्योंकि पहली बात यह है कि बैंक देखता है कि आपके अकाउंट में कितने पैसों का लेन देन हो रहा है और आपके पास ज़मीन गारंटी के तौर पर देने के लिए है या नहीं और अन्य भी कई बातें चैक करके लोन के लिए सहमत होता है बाकी कोशिश करें कि लोन के बिना अपने स्तर पर ही काम शुरू करें क्योंकि लोन की किश्त हर महीने भरनी पड़ेगी पर बकरियों से कमाई हर महीने नहीं होने होगी बाकी यदि कोशिश करके देखनी है तो अपने ट्रेनिंग सर्टीफिकेट से आप अपने जिले के पशु पालन विभाग अफसर को मिलें और उस पर प्रवानगी लेकर फिर बैंक से बात करके देखें
Posted by Baljinder Singh Chahal
Punjab
14-10-2019 06:41 PM
ਸਰ ਮੇਰੇ ਰਿਸ਼ਤੇਦਾਰ ਯੂਪੀ ਚ ਰਹਿੰਦੇ ਆ।ਉਹਨਾਂ ਦਾ ਝੋਨਾ PR113 ਕੁੱਝ ਇਸ ਤਰ੍ਹਾਂ ਦਾ ਹੋਗਿਆ ਆ।ਕੋਈ ਹੱਲ ਦੱਸੋ।ਧੰਨਵਾਦ ?
ਸ਼੍ਰੀਮਾਨ ਜੀ, ਇਹ ਫੰਗਸ ਦਾ ਹਮਲਾ ਹੋਇਆ ਹੈ, ਇਸਦੀ ਰੋਕਥਾਮ ਲਈ ਤੁਸੀ tilt @ 200 ml ਪ੍ਰਤੀ ਏਕੜ ਦੇ ਹਿਸਾਬ ਨਾਲ ਸਪਰੇ ਕਰੋ, ਧੰਨਵਾਦ

Posted by Jagdeep singh
Punjab
14-10-2019 06:39 PM
Shirmaan ji, ap agriculture sector mein job karne ke liye B.Sc Agriculture (hons) karein, dhanywad

Posted by achhra singh
Punjab
14-10-2019 06:35 PM
ਸ਼੍ਰੀਮਾਨ ਜੀ, ਕਾਲੇ ਤੇਲੇ ਦੀ ਰੋਕਥਾਮ ਲਈ ਤੁਸੀ buprofenzin @ 250 ml ਪ੍ਰਤੀ ਏਕੜ ਦੇ ਹਿਸਾਬ ਨਾਲ ਸਪਰੇ ਕਰੋ, ਧੰਨਵਾਦ

Posted by pramod rai
Uttar Pradesh
14-10-2019 06:34 PM
श्रीमान जी, एक एकड़ के लिए 10-12 किलो बीज की मात्रा का प्रयोग करें अच्छी उपज के लिए बरसीम के बीजों के साथ सरसों के 750 ग्राम बीज मिक्स करें धन्यवाद

Posted by Noor Muhammad Sayyed
Maharashtra
14-10-2019 06:29 PM
बकरियों की नस्ले है जैसे Jamnapari goat, Barbari goat, beetal goat, black bengal goat, Sirohi goat

Posted by Sikander Pal Singh
Punjab
14-10-2019 06:21 PM
ਖੁੰਭ ਦੀ ਖੇਤੀ ਭਾਰੀ ਮਾਤਰਾ ਵਿੱਚ ਖੇਤ ਦੇ ਵਿਅਰਥ ਪਦਾਰਥ ਅਤੇ ਹੋਰ ਸਮੱਗਰੀ ਜਿਵੇਂ ਵਿਅਰਥ ਕਾਗਜ਼, ਕਪਾਹ ਦੀ ਰਹਿੰਦ-ਖੂੰਹਦ, ਅਨਾਜ ਦੀ ਪਰਾਲੀ ਆਦਿ ਤੇ ਕੀਤੀ ਜਾ ਸਕਦੀ ਹੈ ਝੋਨੇ ਦੀ ਪਰਾਲੀ ਜਾਂ ਕਣਕ ਦੀ ਪਰਾਲੀ ਮੁੱਖ ਤੌਰ ਤੇ ਵਰਤੀ ਜਾਣ ਵਾਲੀ ਸਮੱਗਰੀ ਹੈ ਜਿਸ ਦਾ ਪ੍ਰਯੋਗ ਸਬਸਟ੍ਰੇਟ ਦੀ ਤਿਆਰੀ ਦੇ ਲਈ ਕੀਤਾ ਜਾਂਦਾ ਹੈ ਕਾਰਬੈਂਡਾਜ਼ਿਮ 7 ਗ੍ਰਾਮ ਨਾਲ ਫਾਰਮਾਲੀਨ 125 ਮਿ.ਲੀ. ਨੂੰ 100 ਲੀਟਰ ਪਾ.... (Read More)
ਖੁੰਭ ਦੀ ਖੇਤੀ ਭਾਰੀ ਮਾਤਰਾ ਵਿੱਚ ਖੇਤ ਦੇ ਵਿਅਰਥ ਪਦਾਰਥ ਅਤੇ ਹੋਰ ਸਮੱਗਰੀ ਜਿਵੇਂ ਵਿਅਰਥ ਕਾਗਜ਼, ਕਪਾਹ ਦੀ ਰਹਿੰਦ-ਖੂੰਹਦ, ਅਨਾਜ ਦੀ ਪਰਾਲੀ ਆਦਿ ਤੇ ਕੀਤੀ ਜਾ ਸਕਦੀ ਹੈ ਝੋਨੇ ਦੀ ਪਰਾਲੀ ਜਾਂ ਕਣਕ ਦੀ ਪਰਾਲੀ ਮੁੱਖ ਤੌਰ ਤੇ ਵਰਤੀ ਜਾਣ ਵਾਲੀ ਸਮੱਗਰੀ ਹੈ ਜਿਸ ਦਾ ਪ੍ਰਯੋਗ ਸਬਸਟ੍ਰੇਟ ਦੀ ਤਿਆਰੀ ਦੇ ਲਈ ਕੀਤਾ ਜਾਂਦਾ ਹੈ ਕਾਰਬੈਂਡਾਜ਼ਿਮ 7 ਗ੍ਰਾਮ ਨਾਲ ਫਾਰਮਾਲੀਨ 125 ਮਿ.ਲੀ. ਨੂੰ 100 ਲੀਟਰ ਪਾਣੀ ਵਿੱਚ ਮਿਲਾ ਕੇ ਪਾਓ ਅਤੇ ਇੱਕ ਮਿਸ਼ਰਣ ਤਿਆਰ ਕਰੋ ਉੱਪਰ ਦਿੱਤੇ ਗਏ ਮਿਸ਼ਰਣ ਵਿੱਚ 20 ਕਿਲੋ ਕਣਕ ਦੀ ਪਰਾਲੀ ਪਾਓ ਅਤੇ ਇਸ ਨੂੰ 18 ਘੰਟਿਆਂ ਲਈ ਰੱਖ ਦਿਓ 18 ਘੰਟੇ ਬਾਅਦ ਕਣਕ ਦੀ ਪਰਾਲੀ ਨੂੰ ਹਟਾ ਦਿਓ ਅਤੇ ਇਸ ਨੂੰ ਇੱਕ ਸਤਹਿ ਤੇ ਰੱਖੋ ਅਤੇ ਇਸ ਵਿੱਚੋਂ ਵਾਧੂ ਪਾਣੀ ਕੱਢ ਦਿਓ ਕਣਕ ਦੀ ਪਰਾਲੀ ਵਿੱਚ 2% ਬੀਜ ਪਾਓ ਅਤੇ ਇਸ ਮਿਸ਼ਰਣ ਨੂੰ 15x12 ਇੰਚ ਦੇ ਪੌਲੀਥੀਨ ਬੈਗ ਵਿੱਚ ਭਰੋ ਪੌਲੀਥੀਨ ਬੈਗ ਦਾ 2/3 ਭਾਗ ਤੂੜੀ ਨਾਲ ਭਰੋ ਅਤੇ ਫਿਰ ਬੈਗ ਦਾ ਮੂੰਹ ਬੰਨ ਦਿਓ ਪੌਲੀਥੀਨ ਬੈਗ ਵਿੱਚ 2 ਮਿ.ਮੀ. ਦੇ ਅਰਧ-ਵਿਆਸ ਨਾਲ ਸੁਰਾਖ ਹੋਣ ਹਵਾ ਦੀ ਆਵਾਜਾਈ ਲਈ ਪੂਰੀ ਸਤਹਿ ਤੇ ਲਗਭਗ 4 ਸੈ.ਮੀ ਦੇ ਸੁਰਾਖ ਹੋਣ ਉਸ ਦੇ ਬਾਅਦ ਬੈਗ ਨੂੰ 80-85% ਨਮੀ ਵਾਲੇ ਕਮਰੇ ਵਿੱਚ ਸ਼ੈੱਲਫ ਤੇ ਰੱਖੋ ਕਮਰੇ ਦਾ ਤਾਪਮਾਨ 24-26° ਸੈਲਸੀਅਸ ਹੋਣਾ ਚਾਹੀਦਾ ਹੈ ਬੈਗਾਂ ਨੂੰ ਸੁਰੱਖਿਅਤ ਜਗ੍ਹਾ ਤੇ ਰੱਖੋ ਅਤੇ ਪਾਣੀ ਦੇ ਛਿੜਕਾਅ ਦੁਆਰਾ ਇਹਨਾਂ ਵਿੱਚ ਨਮੀ ਬਣਾਈ ਰੱਖੋ ਪਰਾਲੀ ਤੇ ਚਿੱਟੇ ਰੰਗ ਦੀ ਸੂਤੀ ਮਾਈਸੀਲੀਅਮ ਵਿਕਸਿਤ ਹੋ ਜਾਂਦੀ ਹੈ ਕਣਕ ਦੀ ਪਰਾਲੀ ਆਪਣਾ ਰੰਗ ਬਦਲ ਕੇ ਭੂਰੇ ਰੰਗ ਦੀ ਹੋ ਜਾਂਦੀ ਹੈ, ਆਵਾਜ ਕਰਦੀ ਹੈ ਅਤੇ ਸੁੰਗੜ ਜਾਂਦੀ ਹੈ ਇਸ ਅਵਸਥਾ ਵਿੱਚ ਪੌਲੀਥੀਨ ਨੂੰ ਕੱਟ ਕੇ ਕੱਢ ਲਵੋ ਪੌਲੀਥੀਨ ਵਿੱਚਲੀ ਪਰਾਲੀ ਸੁੰਗੜ ਜਾਂਦੀ ਹੈ ਅਤੇ ਵੇਲਣਾਕਾਰ ਹੋ ਜਾਂਦੀ ਹੈ ਇਸ ਬੇਲਣਾਕਾਰ ਪਰਾਲੀ ਦੇ ਆਕਾਰ ਨੂੰ ਸ਼ੈਲਫ ਤੇ ਲਗਾਓ ਅਤੇ ਇਸ ਵਿੱਚ ਪਾਣੀ ਦੇ ਛਿੜਕਾਅ ਦੁਆਰਾ ਨਮੀ ਬਣਾਈ ਰੱਖੋ
Posted by संजीव कुमार
Uttar Pradesh
14-10-2019 06:20 PM
यह कई तरह की मिट्टी में उगाई जाती है इसकी पैदावार के लिए नमकीन, क्षारीय और पानी खड़ा होने वाली मिट्टी से बचाव करें यह बढ़िया निकास वाली मिट्टी जिसमे बढ़िया जैविक तत्व मौजूद हों, में बढ़िया परिणाम देती है इसके बढ़िया विकास के लिए मिट्टी का pH 5.5-7 होना चाहिए Drudriha Tulsi: यह मुख्य रूप से बंगाल, नेपाल, चटगांव और महाराष्ट्र क्ष.... (Read More)
यह कई तरह की मिट्टी में उगाई जाती है इसकी पैदावार के लिए नमकीन, क्षारीय और पानी खड़ा होने वाली मिट्टी से बचाव करें यह बढ़िया निकास वाली मिट्टी जिसमे बढ़िया जैविक तत्व मौजूद हों, में बढ़िया परिणाम देती है इसके बढ़िया विकास के लिए मिट्टी का pH 5.5-7 होना चाहिए Drudriha Tulsi: यह मुख्य रूप से बंगाल, नेपाल, चटगांव और महाराष्ट्र क्षेत्रों में पाई जाती है यह गले को सूखेपन से राहत देता है यह हाथों, पैरों और गठिया की सूजन से आराम देता है Ram/Kali Tulsi (Ocimum canum): यह चीन, ब्राज़ील, पूर्व नेपाल और साथ ही बंगाल, बिहार, चटगांव और भारत के दक्षिणी क्षेत्रों में पाई जाती है इसका तना जामुनी और पत्ते हरे रंग के और बहुत ज्यादा सुगंधित होते है इसमें उचित मात्रा में औषधीय गुण जैसे ऐज़ाडिरैकटिन, ऐंटीफंगल , ऐंटीबैक्टीरियल, और पाचन तंत्र को ठीक रखती है यह गर्म क्षेत्रों में बढ़िया उगता है Babi Tulsi: यह पंजाब से त्रिवेंद्रम, बंगाल और बिहार में भी पाई जाती है इसका पौधा 1-2 फीट लम्बा होता है पत्ते 1-2 इंच लम्बे, अंडाकार और नुकीले होते है इसके पत्तों का स्वाद लौंग की तरह और सब्जियों में स्वाद के लिए प्रयोग किया जाता है तुलसी की खेती के लिए, अच्छी तरह से शुष्क मिट्टी की मांग की जाती है मिट्टी के भुरभुरा होने तक हैरो के साथ खेत की जोताई करें, फिर रूड़ी की खाद मिट्टी में मिलाएं तुलसी की रोपाई सीड बैड पर करें फरवरी के तीसरे महीने में नर्सरी बैड तैयार करें पौधे के विकास के अनुसार, 4.5 x 1.0 x 0.2 मीटर के सीड बैड तैयार करें बीजों को 60x60 सैं.मी. के फैसले पर बोयें बीजों को 2 सैं.मी. की गहराई पर बोयें बिजाई के 6-7 हफ्ते बाद, फसल की रोपाई खेत में करें तुलसी की खेती के लिए 120 ग्राम बीजों का प्रयोग प्रति एकड़ में करें फसल को मिट्टी से पैदा होने वाली बीमारीयों से रोकथाम के लिए, बिजाई से पहले मैनकोजेब 5 ग्राम प्रति किलोग्राम से बीजों का उपचार करें फसल की बढ़िया पैदावार के लिए बिजाई से पहले 15 टन रूड़ी की खाद मिट्टी में डालें तुलसी के बीजों को तैयार बैडों के साथ उचित अंतराल पर बोयें मानसून आने के 8 हफ्ते पहले बीजों को बैड पर बोयें बीजों को 2 सैं.मी. की गहराई पर बोयें बिजाई के बाद, रूड़ी की खाद और मिट्टी की पतली परत बीजों पर बना दें इसकी सिंचाई फुवारा विधि द्वारा की जाती है रोपाई के 15-20 दिनों के बाद, नए पौधों को तंदरुस्त बनाने के लिए 2% यूरिया का घोल डालें 6 हफ्ते पुराने और 4-5 पत्तों के अंकुरण होने पर अप्रैल के महीने में नए पौधे तैयार होते है तैयार बैडों को रोपाई 24 घंटे पहले पानी लगाएं ताकि पौधों को आसानी से उखाड़ा जा सकें और रोपाई के समय जड़ें मुलायम और सूजी हुई हो खेत की तैयारी के समय, रूड़ी की खाद को मिट्टी में मिलाएं खाद के तौर पर नाइट्रोजन 48 किलो(यूरिया 104 किलो), फासफोरस 24 किलो(सिंगल सुपर फासफेट 150 किलो) और पोटाश 24 किलो(मिउरेट 40 किलो) प्रति एकड़ में डालें नए पौधे लगाने के समय नाइट्रोजन की आधी मात्रा और फासफेट पेंटोऑक्साइड की पूरी मात्रा शुरुआती समय में डालें Mn 50 पी पी एम कंसंट्रेशन और Co@100 पी पी एम कंसंट्रेशन सूक्ष्म-तत्व डालें बाकी की बची हुई नाइट्रोजन को 2 हिस्सों में पहली और दूसरी कटाई के बाद डालें खेत को नदीनों से मुक्त करने के लिए कसी की मदद से गोड़ाई करें नदीनों की रोकथाम कम न होने पर यह फसल को नुकसान पहुंचाते है रोपण के एक महीने बाद पहली गोड़ाई और पहली गोड़ाई के चार हफ्ते बाद दूसरी गोड़ाई करें रोपण के दो महीने बाद कसी से अनुकूल गोड़ाई करें गर्मियों में, एक महीने में 3 सिंचाइयां करें और बरसात के मौसम में, सिंचाई की आवश्यकता नहीं होती एक साल में 12-15 सिंचाइयां करनी चाहिए पहली सिंचाई रोपण के बाद करें और दूसरी सिंचाई नए पौधों के स्थिर होने पर करें 2 सिंचाइयां करनी आवश्यक है और बाकी की सिंचाई मौसम के आधार पर करें इसके मंडीकरण के लिए आप Aushadhiya kheti vikas sansthan 6268536795 से संपर्क कर सकते हैं
Posted by chhannu Invati
Madhya Pradesh
14-10-2019 06:07 PM
श्रीमान जी, फोटो को देख कर यह नदीन लग रहा है, धन्यवाद
Posted by sushil kumar
Haryana
14-10-2019 06:02 PM
Shrimaan ji, iske liye ap imidacloprid @ 1.5 ml prati acre ke hisaab se spray karein, dhanywad
Posted by Rajveer Singh
Punjab
14-10-2019 06:01 PM
BhaaG sunh ton pehlan 2 mahine dudhon chhad k dab ke sewa karni si Hun usnu rajwa hara chaara te har 4kg dudh lai gau nu 1kg wadhya feed pao har 3 mahine baad malap rehat karo doctor ton calcium dian 2-3 bottle khoon wali naarh wich doctor ton luao

Posted by vikram singh
Punjab
14-10-2019 05:58 PM
BhaaG sunh ton pehlan dab ke sewa karni si Hun usnu rajwa hara chaara te har 3 kg dudh lai 1kg feed pao calcium dian 2se 3 bottle doctor to khoon di naarh ch lua lao har 3 mahine baad malap rehat karo

Posted by srashti Chauhan
Uttar Pradesh
14-10-2019 05:55 PM
कृप्या आप अपना सवाल विस्तार से पूछें कि आप क्या जानकारी लेना चाहते है ताकि आपको सही जानकारी दी जा सके

Posted by vikram singh
Punjab
14-10-2019 05:55 PM
BhaaG isnu rajwa hara chaara te 2-3 kg feed pao Malap rehat karo Sunh baad 1kg kanak da dalia 500g gur ch rinh ke swer te aina hi shaam nu 7 din deo

Posted by Nandu madavi
Maharashtra
14-10-2019 05:54 PM
nandu ji kripya btaye ke iske uper kis bimari ka hamla hai taki aapko iske baremen poori jankari di ja sake.dhanywad

Posted by srashti Chauhan
Uttar Pradesh
14-10-2019 05:51 PM
Sir, please tell us which cash crop you want to know the details of diseases so that we can provide you full information regarding that, thank you

Posted by Sandeep Sandeeplodhi
Madhya Pradesh
14-10-2019 05:44 PM
मिर्च रेतली से भारी चिकनी हर तरह की मिट्टी में उगाई जा सकती है अच्छे विकास के लिए हल्की उपजाऊ और पानी के अच्छे निकास वाली ज़मीन जिसमे नमी सोखने की क्षमता हो, इसके लिए अनुकूल होती है हल्की ज़मीनें भारी ज़मीनों के मुकाबले अच्छी क्वालिटी की पैदावार देती हैं मिर्च के अच्छे विकास के लिए ज़मीन की pH 6-7 अनुकूल है खेत को .... (Read More)
मिर्च रेतली से भारी चिकनी हर तरह की मिट्टी में उगाई जा सकती है अच्छे विकास के लिए हल्की उपजाऊ और पानी के अच्छे निकास वाली ज़मीन जिसमे नमी सोखने की क्षमता हो, इसके लिए अनुकूल होती है हल्की ज़मीनें भारी ज़मीनों के मुकाबले अच्छी क्वालिटी की पैदावार देती हैं मिर्च के अच्छे विकास के लिए ज़मीन की pH 6-7 अनुकूल है खेत को तैयार करने के लिए 2-3 बार जोताई करें और प्रत्येक जोताई के बाद डलियों को तोड़ें बिजाई से 15-20 दिन पहले रूड़ी की खाद 150-200 क्विंटल प्रति एकड़ डालकर मिट्टी में अच्छी तरह मिला दें टमाटर और मिर्च की खेती एक ही या नज़दीक वाले खेत में ना करें, क्योंकि दोनों की बीमारियां एक जैसी होती हैं और इस कारण एंथ्राक्नोस और बैक्टीरिया वाली बीमारीयों के बढ़ने का खतरा बढ़ जाता है मिर्च की खेती पूरे वर्ष की जाती है खरीफ की फसल के लिए मई-जून और गर्मियों की फसल के लिए फरवरी - मार्च का समय मिर्च की रोपाई के लिए उपयुक्त होता है खरीफ के मौसम में 60-75 सैं.मी. x 45 सैं.मी. और सिंचित क्षेत्रों में 60 x 60 सैं.मी. फासले का प्रयोग करें नर्सरी में बीजों को 3-5 सैं.मी. की गहराई में बोयें और फिर मिट्टी से ढक दें इसकी मुख्य खेत में रोपाई की जाती है 1 मीटर चौड़े और आवश्यकतानुसार लंबे बैड बनाएं कीटाणु रहित कोकोपिट 300 किलो, 5 किलो नीम केक को मिलाए और 1-1किलो एज़ोसपीरिलियम और फासफोबैक्टीरिया भी डालें उपचार किए हुए बीज ट्रे में एक बीज प्रति सैल बोयें बीज को कोकोपिट से ढक दें और ट्रे एक- दूसरे के साथ रखें बीज अंकुरन तक इन्हें पॉलीथीन से ढक दें नर्सरी में बीज बीजने के बाद बैडों को 400 मैश नाइलोन जाल या पतले सफेद कपड़े से ढक दें यह नए पौधों को कीड़े-मकौड़े और बीमारियों के हमले से बचाता है 6 दिनों के बाद, ट्रे में लगे नए पौधों को एक एक करके जाल की छांव के नीचे बैडों में लगाएं बीज अंकुरन तक पानी देने वाले बर्तन की मदद से पानी दें बिजाई के 18 दिन बाद 19:19:19 की 0.5 % (5 ग्राम प्रति लीटर ) की स्प्रे करें किस्मों के लिए 200 ग्राम बीज और हाइब्रिड के लिए 80-100 ग्राम बीज प्रति एकड़ में प्रयोग करें बारानी क्षेत्रों के लिए, नाइट्रोजन 50 किलो (110 किलो यूरिया), फासफोरस 16 किलो (सिंगल सुपर फासफेट 100 किलो) और पोटाश 20 किलो (म्यूरेट ऑफ पोटाश 35 किलो) प्रति एकड़ डालें नाइट्रोजन की आधी मात्रा, फासफोरस और पोटाश की पूरी मात्रा पनीरी खेत में लगाने के समय डालें रोपाई के बाद बाकी बची नाइट्रोजन दो बराबर हिस्सों में 30वें और 50वें दिन डालें सिंचित क्षेत्रों के लिए, नाइट्रोजन 84 किलो (182 किलो यूरिया), फासफोरस 24 किलो (सिंगल सुपर फासफेट 150 किलो) और पोटाश 24 किलो (म्यूरेट ऑफ पोटाश 40 किलो) प्रति एकड़ डालें रोपाई से पहले 24 किलो नाइट्रोजन (यूरिया 52 किलो), फासफोरस की पूरी मात्रा और पोटाश की आधी मात्रा प्रति एकड़ में डालें बाकी बची नाइट्रोजन को पांच भागों में बांटें और पोटाश को तीन बराबर भागों में बांटें नाइट्रोजन 12 किलो (यूरिया 26 किलो) को बिजाई के बाद 45वें, 60वें, 75वें, 95वें और 115वें दिन डालें और पोटाश 4 किलो को बिजाई के बाद 45वें, 60वें, और 75वें दिन डालें 45 दिनों तक गोडाई करें, कही की मदद से मिट्टी चढ़ाएं और खेत को नदीन मुक्त रखें यदि नदीनों की रोकथाम ना की जाये तो यह 70-90 % पैदावार कम कर देते हैं रोपाई से पहले मुख्य खेत में पैंडीमैथालीन 1 लीटर प्रति एकड़ में डालें यदि नदीनों की संख्या ज्यादा हो तो उनके अंकुरण के बाद सेन्कोर 800 मि.ली की स्प्रे प्रति एकड़ में करें नदीनों की रोकथाम के साथ मिट्टी में नमी को बनाए रखने के लिए मलचिंग एक प्रभावी तरीका है मिट्टी में नमी के आधार पर सर्दियों में 6-7 दिनों के अंतराल पर और गर्मियों में 4-5 दिनों के अंतराल पर सिंचाई करें फूल निकलने की अवस्था सिंचाई के लिए गंभीर होती है इस अवस्था पर पानी की कमी से फल गिरते हैं जिससे फलों के उत्पादन में कमी होती है विभिन्न खोजों में यह पाया गया है, कि प्रत्येक पखवाड़े में आधा इंच सिंचाई से जड़ों में नमी ज्यादा होती है जिससे वे अधिक उपज देती हैं मिर्चों की तुड़ाई हरा रंग आने पर करें या फिर पकने के लिए पौधे पर ही रहने दें मिर्चों का पकने के बाद वाला रंग किस्म पर निर्भर करता है अधिक तुड़ाइयां लेने के लिए यूरिया 10 ग्राम प्रति लीटर और घुलनशील K @ 10 ग्राम प्रति लीटर पानी (1 प्रतिशत प्रत्येक का घोल) की स्प्रे 15 दिनों के फासले पर कटाई के समय करें पैकिंग के लिए मिर्चें पक्की और लाल रंग की होने पर तोड़ें सुखाने के लिए प्रयोग की जाने वाली मिर्चों की पूरी तरह पकने के बाद ही तुड़ाई करें
Posted by YOGESH KUMAR
Uttar Pradesh
14-10-2019 05:36 PM
असली केसर सिर्फ जम्मू कश्मीर, ईरान और अफगानिस्तान में ही हो सकता है, यह कुसुम है, इसकी भी कई दवाई बनती है, यदि कोई और छक है तो जम्मू कश्मीर के इस किसान से बात करें, जिसके दादे, पड़दादे भी केसर की खेती करते थे और यह भी केसर की खेती करते है Javid Ahmed- 95964 93260 बाकि आप यह वीडियो देखें https://www.youtube.com/watchv=vl7c6L3ETnQ&t=8s बाकि यदि फिर भी यकीन नहीं .... (Read More)
असली केसर सिर्फ जम्मू कश्मीर, ईरान और अफगानिस्तान में ही हो सकता है, यह कुसुम है, इसकी भी कई दवाई बनती है, यदि कोई और छक है तो जम्मू कश्मीर के इस किसान से बात करें, जिसके दादे, पड़दादे भी केसर की खेती करते थे और यह भी केसर की खेती करते है Javid Ahmed- 95964 93260 बाकि आप यह वीडियो देखें https://www.youtube.com/watchv=vl7c6L3ETnQ&t=8s बाकि यदि फिर भी यकीन नहीं है तो तो आप अमृतपाल सिंह बराड़ प्रोफेसर, पीएयू लुधियाना इस वीडियो संबंधी विचार पड़ सकते हैं, यह फसल केसर की नहीं है, यह फसल कसुंबडे की है, इसे अंग्रेजी में Safflower कहते है, और विज्ञानं में इसे Carthamus tinctorius कहते है
Posted by Karan Deep
Punjab
14-10-2019 05:34 PM
Karan Deep ji es layi koe treatment di jarurat nahi hai ji tusi kuch days layi feed ghat karo ji.
Posted by Gaurav Sharma
Uttar Pradesh
14-10-2019 05:22 PM
असली केसर सिर्फ जम्मू कश्मीर, ईरान और अफगानिस्तान में ही हो सकता है, यह कुसुम है, इसकी भी कई दवाई बनती है, यदि कोई और छक है तो जम्मू कश्मीर के इस किसान से बात करें, जिसके दादे, पड़दादे भी केसर की खेती करते थे और यह भी केसर की खेती करते है Javid Ahmed- 95964 93260 बाकि आप यह वीडियो देखें https://www.youtube.com/watchv=vl7c6L3ETnQ&t=8s बाकि यदि फिर भी यकीन नहीं .... (Read More)
असली केसर सिर्फ जम्मू कश्मीर, ईरान और अफगानिस्तान में ही हो सकता है, यह कुसुम है, इसकी भी कई दवाई बनती है, यदि कोई और छक है तो जम्मू कश्मीर के इस किसान से बात करें, जिसके दादे, पड़दादे भी केसर की खेती करते थे और यह भी केसर की खेती करते है Javid Ahmed- 95964 93260 बाकि आप यह वीडियो देखें https://www.youtube.com/watchv=vl7c6L3ETnQ&t=8s बाकि यदि फिर भी यकीन नहीं है तो तो आप अमृतपाल सिंह बराड़ प्रोफेसर, पीएयू लुधियाना इस वीडियो संबंधी विचार पड़ सकते हैं, यह फसल केसर की नहीं है, यह फसल कसुंबडे की है, इसे अंग्रेजी में Safflower कहते है, और विज्ञानं में इसे Carthamus tinctorius कहते है
Posted by BHANU Pratap
Uttar Pradesh
14-10-2019 05:09 PM
Shrimaan ji, yeh macchar ka hamla hu ahai, iski roktham ke liye ap imidacloprid @ 1.5 ml prati liter pani ke hisaab se spray karein, dhanywad

Posted by chhotelal prajapati
Uttar Pradesh
14-10-2019 05:06 PM
श्रीमान जी, इसकी रोकथाम के लिए आप tilt @ २०० ml प्रति एकड़ के हिसाब से स्प्रे करें, धन्यवाद
Posted by Naval
Madhya Pradesh
14-10-2019 04:54 PM
brown hopper ki roktham ke liye Glamore @50gm ya chess @120gm prati acre ke hisab se daalen.

Posted by Aman
Punjab
14-10-2019 04:40 PM
ਤੁਸੀ ਉਸ ਨੂੰ UTI care ਅਤੇ Septovet ਹੋਮਿਓਪੈਥਿਕ ਦਵਾਈ ਦੀਆ 10-10 ਬੂੰਦਾਂ ਦਿਨ ਵਿਚ 3 ਵਾਰ ਦਿਓ ਅਤੇ ਤੁਸੀ 50 ਗ੍ਰਾਮ ਕਲਮੀਸੋਰਾ, 50 ਗ੍ਰਾਮ ਜੋਂਖਾਰ ਲਓ, ਇਹ ਸਭ ਪੰਸਾਰੀ ਤੋਂ ਮਿਲ ਜਾਵੇਗਾ ਇਹ ਸਾਰਾ ਕੁਜ ਤੁਸੀ ਮਿਲਾ ਕੇ ਪਾਊਡਰ ਬਣਾ ਸਕਦੇ ਹੋ ਅਤੇ ਰੋਜਾਨਾ ਰਾਤ ਨੂੰ ਇਹ ਮਿਸ਼ਰਣ ਅੱਧਾ ਕਿਲੋ ਸ਼ੱਕਰ ਵਿਚ ਭਿਗੋ ਕੇ ਪਾਣੀ ਵਿਚ ਰੱਖ ਦਿਓ ਅਤੇ ਅਗਲੇ ਦਿਨ ਸਵੇਰੇ ਪਸ਼ੂ ਨੂੰ ਦਿਓ, ਇਸ ਤਰ੍ਹਾਂ ਤੁਸੀ 10 ਦਿਨ .... (Read More)
ਤੁਸੀ ਉਸ ਨੂੰ UTI care ਅਤੇ Septovet ਹੋਮਿਓਪੈਥਿਕ ਦਵਾਈ ਦੀਆ 10-10 ਬੂੰਦਾਂ ਦਿਨ ਵਿਚ 3 ਵਾਰ ਦਿਓ ਅਤੇ ਤੁਸੀ 50 ਗ੍ਰਾਮ ਕਲਮੀਸੋਰਾ, 50 ਗ੍ਰਾਮ ਜੋਂਖਾਰ ਲਓ, ਇਹ ਸਭ ਪੰਸਾਰੀ ਤੋਂ ਮਿਲ ਜਾਵੇਗਾ ਇਹ ਸਾਰਾ ਕੁਜ ਤੁਸੀ ਮਿਲਾ ਕੇ ਪਾਊਡਰ ਬਣਾ ਸਕਦੇ ਹੋ ਅਤੇ ਰੋਜਾਨਾ ਰਾਤ ਨੂੰ ਇਹ ਮਿਸ਼ਰਣ ਅੱਧਾ ਕਿਲੋ ਸ਼ੱਕਰ ਵਿਚ ਭਿਗੋ ਕੇ ਪਾਣੀ ਵਿਚ ਰੱਖ ਦਿਓ ਅਤੇ ਅਗਲੇ ਦਿਨ ਸਵੇਰੇ ਪਸ਼ੂ ਨੂੰ ਦਿਓ, ਇਸ ਤਰ੍ਹਾਂ ਤੁਸੀ 10 ਦਿਨ ਲਗਾਤਾਰ ਦਿਓ, ਇਸ ਨਾਲ ਫਰਕ ਪੈ ਜਾਵੇਗਾ..
Posted by Manpreet singh
Punjab
14-10-2019 04:37 PM
BhaaG Butox 2ml 1litre paani ch ghol ke wallan de ulte rukh lagao Pashu rajya howe Piasa na hove te har 10 din de wakfe te 3 waar lagao Sfaee rakho

Posted by Parmod bishnoi
Haryana
14-10-2019 04:33 PM
लोन ना देने का कारन क्या बता रहे है जी इसके बारे में डिटेल में बताये और यह भी बताये बैंक कोनसा था और आपने श्री शर्ते पूरी करी थी
Posted by ਹਰਦੀਪ ਸਿੰਘ
Punjab
14-10-2019 04:26 PM
eh jille de hisab nal rate alag alag hunda hai, jo Fat ate Snf kadde hai oh rate de hisab nal eh formula use krde hai jiwe jekar fatt da rate 200 hai ate tuahdi Fat 4 aundi hai ate Snf da rate 170 hai ate tuhadi snf 8 aundi hai tan total fatt 200x4=800 ate Snf 170x8=1360 fir Fat+snf ,800+1360= 2160 iss trah 1 liter da rate 21 rupes 60 passe howega.
Example
Fat 4.0 *200 =800
Snf 8.0 *=170=1360
800+1360=2160
Rate per kg 21.60 paise
Milk 01 litre 21.60
Milk 10 litre 216 rupees

Posted by paramveer Singh
Punjab
14-10-2019 04:19 PM
ਬਿਜਾਈ ਲਈ ਛੋਟੇ ਆਕਾਰ ਦੇ ਆਲੂ 8-10 ਕੁਇੰਟਲ, ਦਰਮਿਆਨੇ ਆਕਾਰ ਦੇ 10-12 ਕੁਇੰਟਲ ਅਤੇ ਵੱਡੇ ਆਕਾਰ ਦੇ 12-18 ਕੁਇੰਟਲ ਪ੍ਰਤੀ ਏਕੜ ਲਈ ਵਰਤੋ

Posted by Jagar Singh
Punjab
14-10-2019 04:17 PM
ਇਕ ਸਾਲ ਵਿਚ 4 ਵਾਰ ਡਿਵਰਮਿੰਗ ਕਰਨੀ ਚਾਹੀਦੀ ਹੈ ਅਤੇ ਹਰ 3-3 ਮਹੀਨੇ ਦੇ ਫਰਕ ਨਾਲ ਸਾਲਟ ਬਦਲ ਕੇ ਡਿਵਰਮਿੰਗ ਕਰਨੀ ਚਾਹੀਦੀ ਹੈ ਅਤੇ ਉਸ ਨੂੰ ਮਿਟਿੰਗ ਕਰਵਾਉਣ ਤੋਂ 3 ਦਿਨ ਪਹਿਲਾ ਡਿਵਰਮਿੰਗ ਕਰ ਸਕਦੇ ਹੋ

Posted by Mukhtiar Singh
Punjab
14-10-2019 04:11 PM
ਕਿਰਪਾ ਕਰਕੇ ਇਹ ਦਸੋ ਕੁੱਤੇ ਨੂੰ ਕਿਥੇ ਕੀੜੇ ਪਏ ਹੈ ਅਤੇ ਤੁਸੀ ਉਸਦੀ ਫੋਟੋ ਵੀ ਆਪਣੇ ਸਵਾਲ ਦੇ ਨਾਲ ਅੱਪਲੋਡ ਕਰ ਸਕਦੇ ਹੋ ਜਿਸ ਨੂੰ ਦੇਖ ਕੇ ਤੁਹਾਨੂੰ ਸਹੀ ਜਾਣਕਾਰੀ ਦਿਤੀ ਜਾ ਸਕੇ
Posted by deepakchouhan
Madhya Pradesh
14-10-2019 04:10 PM
deepak ji kripya btaye ke aapne ise kya kya khaad daali hai taki aapko uske hisab se jankari di ja sake.dhanywad

Posted by Vikas Thory
Haryana
14-10-2019 04:05 PM
श्रीमान जी, बरसीम का 1 कनाल में 1.25 kg बीज पड़ता है, धन्यवाद

Posted by Sanjay
Madhya Pradesh
14-10-2019 04:01 PM
Shrimaan ji ap apni mitti ki parkh apne paas ke KVK jo ke Krishi Vigyan Kendra, Satna, Mobile no: 7670263297 , pr hai, karwa sakte hain, dhanywad

Posted by pawan joshi
Madhya Pradesh
14-10-2019 03:53 PM
गेहूं की बिजाई के लिए JW 1201 (21.2क्विंटल/एकड़), GW 322 (22-24क्विंटल/एकड़), HI 8498 (22-24क्विंटल/एकड़), HI 1544 (22-24क्विंटल/एकड़), JW 1203 (16.8-18क्विंटल/एकड़) की बिजाई कर सकते हो
Expert Communities
We do not share your personal details with anyone
We do not share your personal details with anyone
Sign In
Registering to this website, you accept our Terms of Use and our Privacy Policy.
Your mobile number and password is invalid
We have sent your password on your mobile number
All fields marked with an asterisk (*) are required:
Sign Up
Registering to this website, you accept our Terms of Use and our Privacy Policy.
All fields marked with an asterisk (*) are required:
Please select atleast one option
Please select text along with image










.jpg)



