Posted by ਸੁਖਚੈਨ ਸਿੰਘ
Punjab
15-10-2019 06:27 AM
tuci ohna nu diti jndi feed check kro kini khade hai ate kini nhi khadi jndi, kyuki ehna dina vich ohh feed ghtt khange ate growth v ghtt krnnge..
Posted by dabhi keval
Gujarat
15-10-2019 06:12 AM
केवल जी कृप्या आप अपना सवाल विस्तार से पूछें कि आप क्या जानकारी लेना चाहते है ताकि आपको सही जानकारी दी जा सके
Posted by Harmanjeet Singh
Punjab
15-10-2019 06:05 AM
BhaaG rajwa hara chaara te 3kg feed pao har 3 mahine baad malap rehat karo

Posted by ਸੁਲੱਖਣ ਸਿੰਘ
Punjab
15-10-2019 06:00 AM
ਸ਼੍ਰੀਮਾਨ ਜੀ, ਇਹ ਫੰਗਸ ਦਾ ਹਮਲਾ ਹੋਇਆ ਹੈ, ਇਸਦੀ ਰੋਕਥਾਮ ਲਈ ਤੁਸੀ tilt @ 200 ml ਪ੍ਰਤੀ ਲਿਟਰ ਪਾਣੀ ਦੇ ਹਿਸਾਬ ਨਾਲ ਸਪਰੇ ਕਰੋ, ਧੰਨਵਾਦ

Posted by Love
Punjab
15-10-2019 06:00 AM
ਸ਼੍ਰੀਮਾਨ ਜੀ, ਨਰਮੇ ਦਾ ਰੇਟ ਇਸ ਸਮੇਂ 5025 - 5105 ਰੁਪਏ ਪ੍ਰਤੀ ਕੁਇੰਟਲ ਦੇ ਹਿਸਾਬ ਨਾਲ ਚਲ ਰਿਹਾ ਹੈ, ਧੰਨਵਾਦ

Posted by Dharminder Dharm
Punjab
15-10-2019 05:53 AM
ਤੁਸੀ 250 ਗ੍ਰਾਮ ਗੁੜ, 250 ਗ੍ਰਾਮ ਗੁਲਕੰਦ, 100 ਗ੍ਰਾਮ ਸੌੰਫ, 100 ਗ੍ਰਾਮ ਸੁਕੇ ਆਵਲੇ ਤੇ 50 ਗ੍ਰਾਮ ਅਜਵਾਇਨ ਉਬਾਲ ਕੇ ਠਾਰ ਕੇ 5 ਦਿਨ ਦੇਣੀ ਸ਼ੁਰੂ ਕਰੋ, ਤੁਸੀ ਉਸ ਨੂੰ Enerdyna liquid 100-100ml ਸਵੇਰੇ ਸ਼ਾਮ, Milkout powder 2-2 ਚਮਚ ਰੋਜਾਨਾ ਦੇਣਾ ਸ਼ੁਰੂ ਕਰੋ ਅਤੇ ਉਸ ਨੂੰ ਰੋਜਾਨਾ 35-40 ਕਿਲੋ ਹਰਾ ਚਾਰਾ ਦਿਓ ਜੀ

Posted by दिगम्बर चौरसिया
Bihar
15-10-2019 04:15 AM
श्रीमान जी, इसे मिट्टी की विभिन्न किस्मों जैसे भारी चिकनी दोमट और रेतली दोमट मिट्टी में उगाया जा सकता है यह उपजाऊ मिट्टी में भी अच्छी उगती है जलजमाव, नमक वाली और क्षारीय मिट्टी में पान की खेती ना करें हल्की मिट्टी के साथ साथ अच्छी गहराई वाली भारी लाल दोमट मिट्टी भी इसकी खेती के लिए उपयुक्त होती है प्रसिद्.... (Read More)
श्रीमान जी, इसे मिट्टी की विभिन्न किस्मों जैसे भारी चिकनी दोमट और रेतली दोमट मिट्टी में उगाया जा सकता है यह उपजाऊ मिट्टी में भी अच्छी उगती है जलजमाव, नमक वाली और क्षारीय मिट्टी में पान की खेती ना करें हल्की मिट्टी के साथ साथ अच्छी गहराई वाली भारी लाल दोमट मिट्टी भी इसकी खेती के लिए उपयुक्त होती है प्रसिद्ध किस्में : Deswari, Kapoori, Maghai and Bangla मिट्टी के भुरभुरा होने तक खेत की चार से पांच बार जोताई करें फिर पास के क्षेत्रों से 5-10 सैं.मी. की दूरी पर ज़मीन तैयार करें और दोनों भागों पर उचित ढलान दें इससे अतिरिक्त पानी के निकास में मदद मिलेगी फिर 15 सैं.मी. ऊंचे और 30 सैं.मी. चौड़े आवश्यक बैड तैयार करें यू पी में पान की खेती के लिए जनवरी-फरवरी और अक्तूबर से नवंबर का समय उपयुक्त होता है भारत में पान की खेती के लिए दो प्रणालियों का प्रयोग किया जाता है खुली प्रणाली जिसमें दूसरे पौधे को सहारे के लिए प्रयोग किया जाता है बंद प्रणाली जिसमें बनावटी आयताकार ढांचे होते हैं, जिन्हें बोरोजस कहा जाता है, उन्हें सहारे के लिए प्रयोग किया जाता है तने के काटे हुए भाग का रोपण किया जाता है खुली प्रणाली में एक एकड़ खेत के लिए 16000-3000 कटिंग का प्रयोग किया जाता है जबकि बंद प्रणाली में खेती के लिए 40000-48000 कटिंग का प्रति एकड़ में प्रयोग किया जाता हैं फसल को सूखे और बीमारियों से बचाव के लिए बीजों को 30 मिनट के लिए स्ट्रेप्टोसाइक्लिन 500 मि.ग्रा.+ बॉर्डीऑक्स मिश्रण 0.5 ग्राम को प्रति लीटर पानी में भिगोयें प्रजनन उद्देश्य के लिए 3-5 गांठो वाली तने की कटिंग का प्रयोग करें इन कटिंग को इस तरह बोयें कि मिट्टी में 2-3 गांठे दफन हो जायें बेलों के ऊपरी भाग से 35-45 सैं.मी. लंबाई की तने की कटिंग का चयन करें उत्तर प्रदेश में रोपाई के लिए सिंगल गांठ वाली कटिंग के साथ मुख्य पौधे के पत्ते का प्रयोग करें एक एकड़ खेत के लिए 16000-30000 कटिंग का प्रयोग किया जाता है 3-5 गांठों वाली तने की कटिंग को प्रजनन के लिए प्रयोग किया जाता है और इन्हें इस तरह व्यवस्थित किया जाता है कि 2-3 गांठे मिट्टी में लग जाएं एक सिंगल कटिंग के साथ मुख्य पौधे के पत्ते को भी रोपित किया जाता है लगभग 30-45 सैं.मी. लंबी तने की कटिंग से बेलों का प्रजनन किया जाता है बेलों के ऊपरी भाग का कुछ हिस्सा लें इसे रोपित करना आसान होता है और इससे जड़ें जल्दी निकलती हैं एक एकड़ में रोपाई के लिए औसतन 100000 सैट की आवश्यकता होती है आमतौर पर एक हेक्टेयर में 40000-75000 कटिंग का प्रयोग किया जाता है पान की पूरी फसल को नाइट्रोजन 60 किलो (यूरिया 130 किलो), फासफोरस 8 किलो (एस एस पी 40 किलो) और पोटाश 8 किलो (म्यूरेट ऑफ पोटाश 12 किलो) प्रति एकड़ में प्रति वर्ष डालें शुरूआती खुराक के तौर पर नाइट्रोजन 15 किलो (यूरिया 35 किलो) के साथ फासफोरस और पोटाश की पूरी मात्रा डालें बाकी बची नाइट्रोजन को तीन भागों में बांटे - पहले भाग को बेलों के चढ़ने के 15 दिन बाद और दूसरी और तीसरी मात्रा 40-45 दिनों के अंतराल पर डालें अच्छी वृद्धि और अच्छी उपज के लिए मिट्टी में पर्याप्त नमी मौजूद होनी चाहिए इसलिए जलवायु परिस्थितियों के आधार पर लगातार हल्की सिंचाई करें यह जल जमाव स्थिति के प्रति संवेदनशील है अतिरिक्त पानी के निकास का उचित प्रबंध करें 15-20 सैं.मी. के अंतराल पर बेल को केले के फाइबर से ढीला बांधकर सिधाई की जाती है बेल की वृद्धि के आधार पर प्रत्येक 15-20 दिनों के अंतराल पर सिंधाई की जाती है
पान की फसल रोपाई के 2-3 महीनों में कटाई के लिए तैयार हो जाती है जैसे कि जब बेल 1.2-1.8 मीटर की वृद्धि कर जाये तो इसके बाद प्रत्येक 15-25 दिनों के लिए तुड़ाई कर लें तने के निचले भाग से पत्तों की तुड़ाई करें पंखुड़ियों के भाग के साथ पके हुए पत्तों को तोड़ें तुड़ाई हाथों से से की जाती है एक एकड़ खेत से प्रतिवर्ष 30-40 लाख पत्ते प्राप्त किए जाते हैं धन्यवाद
Posted by Balvir Singh
Punjab
15-10-2019 02:56 AM

Posted by Ajay kumar
Uttar Pradesh
15-10-2019 02:18 AM
Posted by Balvir Singh
Punjab
15-10-2019 02:14 AM
Shrimaan ji, agar ap matar mein ageta kadu ki bijai krna chaht ehai to ap isse koi sahara dek kar hi lga sakte hai, isko fela kar nahi lagaya ja sakt hai, dhanywad

Posted by Keshav thakur
Bihar
15-10-2019 01:25 AM
मोती की खेती एक बहुत ही अच्छा व्यवसाय है इस व्यवसाय को शुरू करने के लिए सबसे जरुरी है इसकी ट्रेनिंग, क्योकि इसमें बहुत सी ऐसी बारीकियें होती है जो हमें प्रेक्टिकल ट्रेनिंग में ही सीखने को मिलती है अगर आप इसकी ट्रेनिंग लेना चाहते है तो आप ग्लिटराटी पर्ल फार्मिंग ट्रेनिंग केंद्र प्रशिक्षण कार्य कर्म आयोजि.... (Read More)
मोती की खेती एक बहुत ही अच्छा व्यवसाय है इस व्यवसाय को शुरू करने के लिए सबसे जरुरी है इसकी ट्रेनिंग, क्योकि इसमें बहुत सी ऐसी बारीकियें होती है जो हमें प्रेक्टिकल ट्रेनिंग में ही सीखने को मिलती है अगर आप इसकी ट्रेनिंग लेना चाहते है तो आप ग्लिटराटी पर्ल फार्मिंग ट्रेनिंग केंद्र प्रशिक्षण कार्य कर्म आयोजित किया जा रहा है प्रशिक्षण कार्य कर्म में भाग लेने के लिए नीचे दिए गए नम्बर पर आज ही संपर्क करें और Rs 250/ से अपना रजिस्ट्रेशन करवाए अचल सिंह (फाउंडर )- 9711858258. धन्यवाद

Posted by Manoj Kumar singh
Bihar
15-10-2019 12:46 AM
यह फसल बहुत तरह की मिट्टी जैसे कि रेतली, नमक वाली, दोमट और चिकनी मिट्टी में उगाई जा सकती है अच्छे जल निकास वाली, जैविक तत्व भरपूर, रेतली से दरमियानी ज़मीन में फसल अच्छी पैदावार देती है यह फसल नमक वाली तेजाबी ज़मीनों में भी उगाई जा सकती है पर बहुत ज्यादा जल जमाव और खारी या नमक वाली ज़मीन इस फसल की खेती के लिए उचित नह.... (Read More)
यह फसल बहुत तरह की मिट्टी जैसे कि रेतली, नमक वाली, दोमट और चिकनी मिट्टी में उगाई जा सकती है अच्छे जल निकास वाली, जैविक तत्व भरपूर, रेतली से दरमियानी ज़मीन में फसल अच्छी पैदावार देती है यह फसल नमक वाली तेजाबी ज़मीनों में भी उगाई जा सकती है पर बहुत ज्यादा जल जमाव और खारी या नमक वाली ज़मीन इस फसल की खेती के लिए उचित नहीं होती Kufri Bahar: इस किस्म के पौधे लंबे और तने मोटे होते हैं तनों की संख्या 4-5 प्रति पौधा होती है इसके आलू बड़े, सफेद रंग के, गोलाकार से अंडाकार होते हैं और इसका गुद्दा सफेद रंग का होता है यह किस्म 100-110 दिनों में पक जाती है और इसकी औसतन पैदावार 125 क्विंटल प्रति एकड़ होती है इसे ज्यादा देर तक स्टोर करके रखा जा सकता है यह पिछेती और अगेती झुलस रोग और पत्ता मरोड़ रोग की रोधक है Kufri Badshah: इसके पौधे लंबे और 4-5 तने प्रति पौधा होते हैं इसके आलू बड़े से दरमियाने, गोलाकार और हल्के सफेद रंग के होते हैं इसके आलू स्वाद होते हैं यह किस्म 100-110 दिनों में पक जाती है यह किस्म कोहरे को सहनेयोग्य है और पिछेती, अगेती झुलस रोग की प्रतिरोधक है Kufri Sutlaj: इस किस्म के पौधे घने और मोटे तने वाले होते हैं पत्ते हल्के हरे रंग के होते हैं आलू बड़े आकार के, गोलाकार और नर्म छिल्के वाले होते हैं यह किस्म 90-100 दिनों में पकती है इसकी औसतन पैदावार 160 क्विंटल प्रति एकड़ होती है यह किस्म खाने के लिए अच्छी और स्वादिष्ट होती है इन आलुओं को पकाना आसान होता है यह नए उत्पाद बनाने के लिए उचित किस्म नहीं है Kufri Anand: यह मध्यम समय की किस्म है, जो कि पिछेते झुलस रोग और कोहरे के प्रतिरोधक है इसकी औसतन पैदावार 140-160 क्विंटल प्रति एकड़ होती है Kufri Pukhraj: इसके पौधे लंबे और तने संख्या में कम और दरमियाने मोटे होते हैं आलू सफेद, बड़े, गोलाकार और नर्म छिल्के वाले होते हैं यह किस्म 70-90 दिनों में पकती है इसकी औसतन पैदावार 130 क्विंटल प्रति एकड़ है यह अगेती झुलस रोग की रोधक किस्म है और नए उत्पाद बनाने के लिए उचित नहीं है Kufri Chipsona 2: इस किस्म के पौधे दरमियाने कद के और कम तनों वाले होते हैं इसके पत्ते गहरे हरे और फूल सफेद रंग के होते हैं आलू सफेद, दरमियाने आकार के, गोलाकार, अंडाकार और नर्म होते हैं इसकी औसतन पैदावार 140 क्विंटल प्रति एकड़ होती है यह पिछेती झुलस रोग की रोधक किस्म है यह किस्म चिपस और फरैंच फ्राइज़ बनाने के लिए उचित है Kufri Chipsona 1: यह किस्म 90-100 दिनों में पुटाई के लिए तैयार हो जाती है Kufri Chandramukhi: इस किस्म के आलू बड़े अंडाकार आकार के होते हैं इसकी औसतन पैदावार 10 टन प्रति एकड़ होती है यह किस्म 80-90 दिनों में पुटाई के लिए तैयार हो जाती है Kufri Jyoti: यह प्रोसेसिंग के लिए उपयुक्त किस्म है इसकी औसतन पैदावार 80-120 क्विंटल प्रति एकड़ होती है Kufri Ashoka: यह किस्म CPIU, शिमला द्वारा विकसित की गई है और बिहार, हरियाणा, उत्तर प्रदेश और पश्चिमी बंगाल में खेती के लिए उपयुक्त किस्म है यह लंबे कद की और मोटे तने वाली किस्म है यह किस्म 70-80 दिनों में पककर तैयार हो जाती है इसके आलू बड़े, गोलाकार, सफेद और नर्म छिल्के वाले होते हैं यह पिछेती झुलस रोग को सहने योग्य किस्म है Kufri Lalima: इस किस्म के आलू गोल, लाल और सफेद गुद्दे वाले होते हैं आलू बड़े से मध्यम आकार के होते हैं यह किस्म 100-110 दिनों में पुटाई के लिए तैयार हो जाती है इसकी औसतन पैदावार 16 टन प्रति एकड़ होती है खेत को एक बार 30 सैं.मी. गहरा जोतकर अच्छे ढंग से बैड बनाएं जोताई के बाद 2-3 बार तवियां फेरें और फिर 2-3 बार सुहागा फेरें बिजाई से पहले खेत में नमी की मात्रा बनाकर रखें बिजाई के लिए दो ढंग मुख्य तौर पर प्रयोग किए जाते हैं 1. मेंड़ और खालियों वाला ढंग 2. समतल बैडों वाला ढंग अगेती बिजाई के लिए, सितंबर के आखिरी सप्ताह से अक्तूबर का पहला सप्ताह खेती के लिए उपयुक्त होता है मुख्य फसल के लिए अक्तूबर का दूसरे से चौथा सप्ताह बिजाई के लिए उपयुक्त समय होता है गांठों के आकार के अनुसार रोपाई का फासला विभिन्न होता है बिजाई के लिए कतार से कतार में 60 सैं.मी. और पौधे से पौधे में 20 सैं.मी. फासले का प्रयोग करें बीज बोने के बाद बीजों को 8-10 सैं.मी. तक मिट्टी की परत से ढक दें रोपाई के लिए बड़ी आकार की गांठों का प्रयोग किया जाता है बिजाई के लिए 13-15 क्विंटल बीज प्रयोग किए जाते हैं यदि संभव हो, तो आलू की रोपाई से पहले, हरी खाद वाली फसलें जैसे सनई, जंतर आदि फसलें उगायें और उन्हें मिट्टी में अच्छी तरह दबायें यदि हरी खाद उपलब्ध ना हो तो गली सड़ी रूड़ी की खाद या गाय का गला हुआ गोबर 60-80 क्विंटल प्रति एकड़ में खेत की तैयारी के समय रोपाई से दो सप्ताह पहले डालें फसल की उचित वृद्धि के लिए नाइट्रोजन 40-50 किलो (90-110 किलो यूरिया), फासफोरस 24-32 किलो (150-200 किलो सिंगल सुपर फासफेट) और पोटाश 40-50 किलो (66-85 किलो म्यूरेट ऑफ पोटाश) की मात्रा प्रति एकड़ में डालें बिजाई के समय नाइट्रोजन का 3/4 हिस्सा और फासफोरस और पोटाश की पूरी मात्रा डालें बाकी बचा हुआ नाइट्रोजन का 1/4 हिस्सा बिजाई से 35-40 दिन बाद जड़ों में मिट्टी लगाने के समय डालें बिजाई से पहले सिंचाई करें बिजाई के बाद 10-12 दिनों के अंदर अंदर पहली सिंचाई करें दूसरी सिंचाई पहली सिंचाई के 7 दिनों के बाद करें बाकी की सिंचाइयां जलवायु की परिस्थितियों और जरूरत के अनुसार करें गांठे बनने की अवस्था सिंचाई के लिए बहुत महत्तवपूर्ण होती है इस अवस्था में पानी की कमी ना होने दें ज्यादा सिंचाई ना करें इससे गलने की बीमारी का खतरा बढ़ता है पुटाई से 10-12 दिन पहले सिंचाई बंद कर दें डंठलों की कटाई : आलुओं को विषाणु से बचाने के लिए यह क्रिया बहुत जरूरी है और इससे आलुओं का आकार और गिणती भी बढ़ जाती है इस क्रिया में सही समय पर पौधे को ज़मीन के नज़दीक से काट दिया जाता है इसका समय अलग अलग स्थानों पर अलग है और चेपे की जनसंख्या पर निर्भर करता है उत्तरी भारत में यह क्रिया दिसंबर महीने में की जाती है
Posted by Sandeep Kumar Singh
Uttar Pradesh
15-10-2019 12:43 AM
Shrimaan ji, yeh macchar ka haml ahu ahai, iski roktham ke liye ap imidacloprid @ 1.5 ml prati liter pani ke hisaab se spray karein, dhanywad

Posted by gopalrathor
Madhya Pradesh
14-10-2019 11:30 PM
मोती की खेती एक बहुत ही अच्छा व्यवसाय है इस व्यवसाय को शुरू करने के लिए सबसे जरुरी है इसकी ट्रेनिंग, क्योकि इसमें बहुत सी ऐसी बारीकियें होती है जो हमें प्रेक्टिकल ट्रेनिंग में ही सीखने को मिलती है अगर आप इसकी ट्रेनिंग लेना चाहते है तो आप ग्लिटराटी पर्ल फार्मिंग ट्रेनिंग केंद्र प्रशिक्षण कार्य कर्म आयोजि.... (Read More)
मोती की खेती एक बहुत ही अच्छा व्यवसाय है इस व्यवसाय को शुरू करने के लिए सबसे जरुरी है इसकी ट्रेनिंग, क्योकि इसमें बहुत सी ऐसी बारीकियें होती है जो हमें प्रेक्टिकल ट्रेनिंग में ही सीखने को मिलती है अगर आप इसकी ट्रेनिंग लेना चाहते है तो आप ग्लिटराटी पर्ल फार्मिंग ट्रेनिंग केंद्र प्रशिक्षण कार्य कर्म आयोजित किया जा रहा है प्रशिक्षण कार्य कर्म में भाग लेने के लिए नीचे दिए गए नम्बर पर आज ही संपर्क करें और Rs 250/ से अपना रजिस्ट्रेशन करवाए अचल सिंह (फाउंडर )- 9711858258. धन्यवाद
Posted by ambikesh pandey
Uttar Pradesh
14-10-2019 11:23 PM
bhai sahib berseem ko sukaa k hay or jawi (oats) ka achaar banao ziada hara chaara deoration swer shaam thande samey khuao Dupehar mein 2-3 vaar nuhao Feed mein 5 kg anaaj kam karo te 5 kg khal wadhao
Posted by चौधरी Ravi Verma
Uttar Pradesh
14-10-2019 11:22 PM
एक एकड़ में 5000 पूंग डाल सकते हैं यह 2 से 3 इंच का होता है यदि 5000 डालना है तो 3000 रोहू, 1000 कतला, 500 कॉमन कॉर्प और 500 मरीगल नस्ल डाली जाए यह पूंग आप मछली पालन विभाग से खरीद सकते हैं यह एक इंच का बच्चा 10 पैसा प्रति बच्चा मिलेगा यदि बढ़िया खुराक डाली जाए तो 8 महीनों में यह लगभग 800—900 ग्राम का हो जाता है बाकी मछली पालन के लिए नहरी प.... (Read More)
एक एकड़ में 5000 पूंग डाल सकते हैं यह 2 से 3 इंच का होता है यदि 5000 डालना है तो 3000 रोहू, 1000 कतला, 500 कॉमन कॉर्प और 500 मरीगल नस्ल डाली जाए यह पूंग आप मछली पालन विभाग से खरीद सकते हैं यह एक इंच का बच्चा 10 पैसा प्रति बच्चा मिलेगा यदि बढ़िया खुराक डाली जाए तो 8 महीनों में यह लगभग 800—900 ग्राम का हो जाता है बाकी मछली पालन के लिए नहरी पानी बढ़िया होता है और आप गांव का छप्पड़ ठेके से लेकर भी यह काम शुरू कर सकते हैं तालाब में मछली के बीज डालने से पहले इस बात की जांच कर लेनी चाहिए कि उस तालाब में काफी मात्रा में मछली की कुदरती खुराक उपलब्ध है.

Posted by suresh choudhary
Rajasthan
14-10-2019 11:01 PM
इसे मिट्टी की कई किस्मों, रेतली दोमट से चिकनी मिट्टी में उगाया जा सकता है अच्छे निकास वाली मिट्टी जिसकी पी एच 6 से 7.5 हो, में उगाने पर यह अच्छे परिणाम देती है यह फसल जलजमाव वाले हालातों में खड़ी नहीं रह सकती अम्लीय मिट्टी के लिए, चूना डालें Arkal: यह छोटे कद की और जल्दी पकने वाली किस्म है इसकी फलियां लंबी और गहरे हरे .... (Read More)
इसे मिट्टी की कई किस्मों, रेतली दोमट से चिकनी मिट्टी में उगाया जा सकता है अच्छे निकास वाली मिट्टी जिसकी पी एच 6 से 7.5 हो, में उगाने पर यह अच्छे परिणाम देती है यह फसल जलजमाव वाले हालातों में खड़ी नहीं रह सकती अम्लीय मिट्टी के लिए, चूना डालें Arkal: यह छोटे कद की और जल्दी पकने वाली किस्म है इसकी फलियां लंबी और गहरे हरे रंग की होती हैं इसकी औसतन पैदावार 16-18 क्विंटल प्रति एकड़ होती है Bonneville: यह मध्यम समय की किस्म है इसके फलियां मीठे दानों वाली होती हैं इसकी औसतन पैदावार 36 क्विंटल प्रति एकड़ होती है Multi Freezer: यह देरी से पकने वाली किस्म है इसकी फलियां मीठी और नर्म होती हैं यह ठंड को सहनेयोग्य किस्म हैं इसकी औसतन पैदावार 25 क्विंटल प्रति एकड़ होती है Azad P-I: यह छोटे कद की किस्म है इसके दाने झुर्रीदार होते हैं इसकी औतसन पैदावार 16 क्विंटल प्रति एकड़ होती है Early E-6: यह किस्म पंजाब एग्रीकल्चर यूनिवर्सिटी द्वारा विकसित की गई है इसकी औसतन पैदावार 40 क्विंटल प्रति एकड़ होती है खरीफ ऋतु की फसल की कटाई के बाद, सीड बैड तैयार करने के लिए हल से 1 या 2 बार जोताई करें हल से जोतने के बाद 2 या 3 बार तवियों से जोताई करें जल जमाव से रोकने के लिए खेत को अच्छी तरह समतल कर लेना चाहिए बिजाई से पहले, खेत की एक बार सिंचाई करें जो कि फसल के अच्छे अंकुरन में सहायक होती है फसल को मिट्टी से पैदा होने वाले कीटों और बीमारियों से बचाने के लिए ट्राइकोडरमा विराइड 10 किलो को अच्छी तरह से गले हुए गाय के गोबर 25-30 किलो को आखिरी जोताई के समय प्रति एकड़ में डालें अच्छी उपज प्राप्त करने के लिए बिजाई अक्तूबर से नवंबर के मध्य में पूरी कर लें बिजाई में देरी होने से उपज में काफी नुकसान होता है कतारों में 30-40 सैं.मी. और पौधें में 3-5 सैं.मी. फासले का प्रयोग करें लंबी किस्मों के लिए 32-40 किलो बीज प्रति एकड़ में प्रयोग करें और छोटे कद की किस्मों के लिए 50 किलो बीज प्रति एकड़ में प्रयोग करें बिजाई के समय नाइट्रोजन 13 किलो (30 किलो यूरिया), फासफोरस 24 किलो (150 किलो सिंगल सुपर फासफेट) और पोटाश 18 किलो (म्यूरेट ऑफ पोटाश 30 किलो) की मात्रा प्रति एकड़ में प्रयोग करें फासफोरस, पोटाश की पूरी मात्रा और नाइट्रोजन की आधी मात्रा बिजाई के समय डालें बाकी बची नाइट्रोजन को बिजाई के एक महीने बाद डालें छोटे कद की किस्मों के लिए नाइट्रोजन की 8 किलो मात्रा बिजाई के समय डालें एक या दो गोडाई करना यह किस्म पर निर्भर करता है पहली गोडाई, फसल की बिजाई के 3-4 सप्ताह बाद या जब फसल 2 या 3 पत्ते निकाल लेती है और दूसरी गोडाई, फूल निकलने से पहले करें मटरों की खेती के लिए नदीन नाशकों का प्रयोग बहुत प्रभावशाली होता है फ्लूक्लोरालिन 45 ई सी 800 मि.ली. को 100-150 लीटर पानी में मिलाकर बीज बोने से पहले खेत में डालें नदीनों की रोकथाम के लिए पैंडीमैथालीन 1 लीटर प्रति एकड़ या बसालिन 1 लीटर प्रति एकड़ का प्रयोग फसल बीजने से 48 घंटों के अंदर करें
Posted by Atul
Haryana
14-10-2019 11:00 PM
श्रीमान जी, तोरिया की किस्में PBT 37, TL 15, TL 17, राया की किस्में RLM 619, PBR 91, PBR 97, PBR 210, RLC 3, गोभी सरसों की किस्में GSL 1, PGSH5, Gobhi sarson (canola type), Hyola PAC 401, GSC 6 धन्यवाद

Posted by suresh choudhary
Rajasthan
14-10-2019 10:45 PM
इसे मिट्टी की कई किस्मों, रेतली दोमट से चिकनी मिट्टी में उगाया जा सकता है अच्छे निकास वाली मिट्टी जिसकी पी एच 6 से 7.5 हो, में उगाने पर यह अच्छे परिणाम देती है यह फसल जलजमाव वाले हालातों में खड़ी नहीं रह सकती अम्लीय मिट्टी के लिए, चूना डालें Arkal: यह छोटे कद की और जल्दी पकने वाली किस्म है इसकी फलियां लंबी और गहरे हरे .... (Read More)
इसे मिट्टी की कई किस्मों, रेतली दोमट से चिकनी मिट्टी में उगाया जा सकता है अच्छे निकास वाली मिट्टी जिसकी पी एच 6 से 7.5 हो, में उगाने पर यह अच्छे परिणाम देती है यह फसल जलजमाव वाले हालातों में खड़ी नहीं रह सकती अम्लीय मिट्टी के लिए, चूना डालें Arkal: यह छोटे कद की और जल्दी पकने वाली किस्म है इसकी फलियां लंबी और गहरे हरे रंग की होती हैं इसकी औसतन पैदावार 16-18 क्विंटल प्रति एकड़ होती है Bonneville: यह मध्यम समय की किस्म है इसके फलियां मीठे दानों वाली होती हैं इसकी औसतन पैदावार 36 क्विंटल प्रति एकड़ होती है Multi Freezer: यह देरी से पकने वाली किस्म है इसकी फलियां मीठी और नर्म होती हैं यह ठंड को सहनेयोग्य किस्म हैं इसकी औसतन पैदावार 25 क्विंटल प्रति एकड़ होती है Azad P-I: यह छोटे कद की किस्म है इसके दाने झुर्रीदार होते हैं इसकी औतसन पैदावार 16 क्विंटल प्रति एकड़ होती है Early E-6: यह किस्म पंजाब एग्रीकल्चर यूनिवर्सिटी द्वारा विकसित की गई है इसकी औसतन पैदावार 40 क्विंटल प्रति एकड़ होती है खरीफ ऋतु की फसल की कटाई के बाद, सीड बैड तैयार करने के लिए हल से 1 या 2 बार जोताई करें हल से जोतने के बाद 2 या 3 बार तवियों से जोताई करें जल जमाव से रोकने के लिए खेत को अच्छी तरह समतल कर लेना चाहिए बिजाई से पहले, खेत की एक बार सिंचाई करें जो कि फसल के अच्छे अंकुरन में सहायक होती है फसल को मिट्टी से पैदा होने वाले कीटों और बीमारियों से बचाने के लिए ट्राइकोडरमा विराइड 10 किलो को अच्छी तरह से गले हुए गाय के गोबर 25-30 किलो को आखिरी जोताई के समय प्रति एकड़ में डालें अच्छी उपज प्राप्त करने के लिए बिजाई अक्तूबर से नवंबर के मध्य में पूरी कर लें बिजाई में देरी होने से उपज में काफी नुकसान होता है कतारों में 30-40 सैं.मी. और पौधें में 3-5 सैं.मी. फासले का प्रयोग करें लंबी किस्मों के लिए 32-40 किलो बीज प्रति एकड़ में प्रयोग करें और छोटे कद की किस्मों के लिए 50 किलो बीज प्रति एकड़ में प्रयोग करें बिजाई के समय नाइट्रोजन 13 किलो (30 किलो यूरिया), फासफोरस 24 किलो (150 किलो सिंगल सुपर फासफेट) और पोटाश 18 किलो (म्यूरेट ऑफ पोटाश 30 किलो) की मात्रा प्रति एकड़ में प्रयोग करें फासफोरस, पोटाश की पूरी मात्रा और नाइट्रोजन की आधी मात्रा बिजाई के समय डालें बाकी बची नाइट्रोजन को बिजाई के एक महीने बाद डालें छोटे कद की किस्मों के लिए नाइट्रोजन की 8 किलो मात्रा बिजाई के समय डालें एक या दो गोडाई करना यह किस्म पर निर्भर करता है पहली गोडाई, फसल की बिजाई के 3-4 सप्ताह बाद या जब फसल 2 या 3 पत्ते निकाल लेती है और दूसरी गोडाई, फूल निकलने से पहले करें मटरों की खेती के लिए नदीन नाशकों का प्रयोग बहुत प्रभावशाली होता है फ्लूक्लोरालिन 45 ई सी 800 मि.ली. को 100-150 लीटर पानी में मिलाकर बीज बोने से पहले खेत में डालें नदीनों की रोकथाम के लिए पैंडीमैथालीन 1 लीटर प्रति एकड़ या बसालिन 1 लीटर प्रति एकड़ का प्रयोग फसल बीजने से 48 घंटों के अंदर करें
Posted by Govind Kumar
Punjab
14-10-2019 10:43 PM
ਸ਼੍ਰੀਮਾਨ ਜੀ, ਸ਼ੁਰੂਆਤੀ ਵਿਕਾਸ ਦੇ ਸਮੇਂ ਇਸ ਫਸਲ ਨੂੰ ਬਾਰ ਬਾਰ ਪਾਣੀ ਲਾਓ 1-3 ਸਾਲ ਦੀ ਫਸਲ ਨੂੰ ਹਫਤੇ ਦੇ ਫਾਸਲੇ ਤੇ ਪਾਣੀ ਦਿਓ ਇਸ ਤੋਂ ਵੱਧ ਉਮਰ ਦੇ ਪੌਦਿਆਂ ਨੂੰ ਮਿੱਟੀ, ਮੌਸਮ ਅਤੇ ਵਰਖਾ ਅਨੁਸਾਰ 2-3 ਹਫਤਿਆਂ ਦੇ ਫਾਸਲੇ ਤੇ ਪਾਣੀ ਦਿਓ ਇਸ ਫਸਲ ਨੂੰ ਖੁੱਲਾ ਪਾਣੀ ਨਾ ਦਿਓ, ਕਿਉਂਕਿ ਇਸ ਨਾਲ ਜੜ੍ਹ ਗਲਣ, ਤਣਾ ਗਲਣ ਆਦਿ ਬਿਮਾਰੀਆਂ ਲਗਦੀਆਂ ਹਨ ਵਧੀਆ ਪੈਦਾਵਾਰ ਲਈ ਥੋੜੇ-ਥੋੜੇ ਸਮੇਂ ਬਾਅਦ .... (Read More)
ਸ਼੍ਰੀਮਾਨ ਜੀ, ਸ਼ੁਰੂਆਤੀ ਵਿਕਾਸ ਦੇ ਸਮੇਂ ਇਸ ਫਸਲ ਨੂੰ ਬਾਰ ਬਾਰ ਪਾਣੀ ਲਾਓ 1-3 ਸਾਲ ਦੀ ਫਸਲ ਨੂੰ ਹਫਤੇ ਦੇ ਫਾਸਲੇ ਤੇ ਪਾਣੀ ਦਿਓ ਇਸ ਤੋਂ ਵੱਧ ਉਮਰ ਦੇ ਪੌਦਿਆਂ ਨੂੰ ਮਿੱਟੀ, ਮੌਸਮ ਅਤੇ ਵਰਖਾ ਅਨੁਸਾਰ 2-3 ਹਫਤਿਆਂ ਦੇ ਫਾਸਲੇ ਤੇ ਪਾਣੀ ਦਿਓ ਇਸ ਫਸਲ ਨੂੰ ਖੁੱਲਾ ਪਾਣੀ ਨਾ ਦਿਓ, ਕਿਉਂਕਿ ਇਸ ਨਾਲ ਜੜ੍ਹ ਗਲਣ, ਤਣਾ ਗਲਣ ਆਦਿ ਬਿਮਾਰੀਆਂ ਲਗਦੀਆਂ ਹਨ ਵਧੀਆ ਪੈਦਾਵਾਰ ਲਈ ਥੋੜੇ-ਥੋੜੇ ਸਮੇਂ ਬਾਅਦ ਹਲਕੀ ਸਿੰਚਾਈ ਕਰੋ ਪੁੰਗਰਾਅ ਤੋਂ ਪਹਿਲਾਂ ਅਤੇ ਫਲ ਬਣਨ ਤੋਂ ਬਾਅਦ ਦਾ ਸਮਾਂ ਸਿੰਚਾਈ ਲਈ ਨਾਜ਼ੁਕ ਹੁੰਦਾ ਹੈ ਧੰਨਵਾਦ
Posted by sunil mishra
Uttar Pradesh
14-10-2019 10:42 PM
पश्चिमी यू पी में, सिंचित और सामान्य बिजाई स्थितियों में 1 नवंबर से 15 नवंबर तक बिजाई पूरी कर लें और पिछेती बिजाई की स्थितियों में 1 से 25 दिसंबर तक बिजाई पूरी कर लें पूर्वी यू पी के लिए, सिंचित और सामान्य बिजाई का उचित समय 1 नवंबर से 15 नवंबर तक है, जबकि पिछेती बिजाई के लिए 1 से 20 दिसंबर का समय उचित है ऊंचे पहाड़ी क्षेत.... (Read More)
पश्चिमी यू पी में, सिंचित और सामान्य बिजाई स्थितियों में 1 नवंबर से 15 नवंबर तक बिजाई पूरी कर लें और पिछेती बिजाई की स्थितियों में 1 से 25 दिसंबर तक बिजाई पूरी कर लें पूर्वी यू पी के लिए, सिंचित और सामान्य बिजाई का उचित समय 1 नवंबर से 15 नवंबर तक है, जबकि पिछेती बिजाई के लिए 1 से 20 दिसंबर का समय उचित है ऊंचे पहाड़ी क्षेत्रों के लिए, सिंचित और सामान्य बिजाई का उचित समय अक्तूबर के दूसरे पखवाड़े से लेकर नवंबर का पहला पखवाड़ा है जबकि पिछेती बिजाई के लिए 1 दिसंबर से 20 दिसंबर का समय उचित है निचले पहाड़ी क्षेत्रों के लिए, सिंचित और सामान्य बिजाई का उचित समय अक्तूबर के आखिरी सप्ताह से लेकर मध्य नवंबर तक का है जबकि पिछेती बिजाई के लिए नवंबर का दूसरा पखवाड़ा उचित समय है छोटे आकार की किस्मों के लिए 40 किलो बीज प्रति एकड़ में प्रयोग करें और मोटे किस्म के बीजों के लिए 50 किलो बीज प्रति एकड़ में प्रयोग करें यदि पिछेती बिजाई करनी हो तो 60 किलो बीज प्रति एकड़ में प्रयोग करें बिजाई से पहले बीज साफ और छांटे हुए होने चाहिए मिट्टी की जांच के आधार पर खादें डालें मिट्टी की जांच के अनुसार ही हम मिट्टी में आवश्यक खादों की मात्रा दे सकते हैं सिंचित क्षेत्रों के लिए, नाइट्रोजन 60 किलो (यूरिया 130 किलो), फासफोरस 24 किलो (एस एस पी 150 किलो), पोटाश 12 किलो (म्यूरेट ऑफ पोटाश 20 किलो) प्रति एकड़ में डालें नाइट्रोजन की आधी मात्रा और फासफोरस और पोटाश की पूरी मात्रा बिजाई के समय डालें बाकी नाइट्रोजन को पहली सिंचाई के समय डालें बारानी क्षेत्रों के लिए, नाइट्रोजन 24 किलो (यूरिया 52 किलो), फासफोरस 12 किलो (एस एस पी 75 किलो), पोटाश 8 किलो (म्यूरेट ऑफ पोटाश 15 किलो) प्रति एकड़ में डालें नाइट्रोज, फासफोरस और पोटाश की पूरी मात्रा बिजाई के समय डालें सिंचित क्षेत्रों में पिछेती बिजाई के लिए, नाइट्रोजन 50 किलो (यूरिया 110 किलो), फासफोरस 12 किलो (एस एस पी 75 किलो), पोटाश 16 किलो (म्यूरेट ऑफ पोटाश 27 किलो) प्रति एकड़ में डालें नाइट्रोजन की एक तिहाई मात्रा और फासफोरस और पोटाश की पूरी मात्रा बिजाई के समय डालें बाकी बची नाइट्रोजन की दो तिहाई मात्रा बिजाई के 35-40 दिनों के बाद डालें यह पाया गया है कि जिंक सल्फेट 10 किलो प्रति एकड़ में डालने से उपज में वृद्धि होती है जिंक की कमी को पूरा करने के लिए जिंक सल्फेट 0.5 प्रतिशत की फोलियर स्प्रे करें 15 दिनों के अंतराल पर दो से तीन स्प्रे करें अच्छी शाखाएं और उपज के लिए 19:19:19 घुलनशील खादें 5 ग्राम + स्टिकर 0.5 मि.ली. को प्रति लीटर पानी में मिलाकर बिजाई के 30 दिनों के बाद स्प्रे करें
Posted by Govind Kumar
Punjab
14-10-2019 10:40 PM
श्रीमान जी, शुरुआती विकास के समय इस फसल को बार-बार पानी लगाएं 1-3 साल की फसल को हफ्ते के फासले पर पानी दे इससे ज्यादा उम्र के पौधों को मिट्टी, मौसम और बारिश के अनुसार 1-2 हफ्तों के फासले पर पानी दे इस फसल को ज्यादा पानी ना दे, क्योंकि इससे जड़ गलन, तना गलन आदि बीमारीयां लगती है बढियां पैदावार के लिए थोड़े-थोड़े समय के .... (Read More)
श्रीमान जी, शुरुआती विकास के समय इस फसल को बार-बार पानी लगाएं 1-3 साल की फसल को हफ्ते के फासले पर पानी दे इससे ज्यादा उम्र के पौधों को मिट्टी, मौसम और बारिश के अनुसार 1-2 हफ्तों के फासले पर पानी दे इस फसल को ज्यादा पानी ना दे, क्योंकि इससे जड़ गलन, तना गलन आदि बीमारीयां लगती है बढियां पैदावार के लिए थोड़े-थोड़े समय के बाद हल्की सिंचाई करें अंकुरण से पहले और फल बनने के बाद का समय सिंचाई के लिए नाज़ुक होता है धन्यवाद
Posted by sunil mishra
Uttar Pradesh
14-10-2019 10:34 PM
पश्चिमी यू पी में, सिंचित और सामान्य बिजाई स्थितियों में 1 नवंबर से 15 नवंबर तक बिजाई पूरी कर लें और पिछेती बिजाई की स्थितियों में 1 से 25 दिसंबर तक बिजाई पूरी कर लें पूर्वी यू पी के लिए, सिंचित और सामान्य बिजाई का उचित समय 1 नवंबर से 15 नवंबर तक है, जबकि पिछेती बिजाई के लिए 1 से 20 दिसंबर का समय उचित है ऊंचे पहाड़ी क्षेत.... (Read More)
पश्चिमी यू पी में, सिंचित और सामान्य बिजाई स्थितियों में 1 नवंबर से 15 नवंबर तक बिजाई पूरी कर लें और पिछेती बिजाई की स्थितियों में 1 से 25 दिसंबर तक बिजाई पूरी कर लें पूर्वी यू पी के लिए, सिंचित और सामान्य बिजाई का उचित समय 1 नवंबर से 15 नवंबर तक है, जबकि पिछेती बिजाई के लिए 1 से 20 दिसंबर का समय उचित है ऊंचे पहाड़ी क्षेत्रों के लिए, सिंचित और सामान्य बिजाई का उचित समय अक्तूबर के दूसरे पखवाड़े से लेकर नवंबर का पहला पखवाड़ा है जबकि पिछेती बिजाई के लिए 1 दिसंबर से 20 दिसंबर का समय उचित है निचले पहाड़ी क्षेत्रों के लिए, सिंचित और सामान्य बिजाई का उचित समय अक्तूबर के आखिरी सप्ताह से लेकर मध्य नवंबर तक का है जबकि पिछेती बिजाई के लिए नवंबर का दूसरा पखवाड़ा उचित समय है छोटे आकार की किस्मों के लिए 40 किलो बीज प्रति एकड़ में प्रयोग करें और मोटे किस्म के बीजों के लिए 50 किलो बीज प्रति एकड़ में प्रयोग करें यदि पिछेती बिजाई करनी हो तो 60 किलो बीज प्रति एकड़ में प्रयोग करें बिजाई से पहले बीज साफ और छांटे हुए होने चाहिए मिट्टी की जांच के आधार पर खादें डालें मिट्टी की जांच के अनुसार ही हम मिट्टी में आवश्यक खादों की मात्रा दे सकते हैं सिंचित क्षेत्रों के लिए, नाइट्रोजन 60 किलो (यूरिया 130 किलो), फासफोरस 24 किलो (एस एस पी 150 किलो), पोटाश 12 किलो (म्यूरेट ऑफ पोटाश 20 किलो) प्रति एकड़ में डालें नाइट्रोजन की आधी मात्रा और फासफोरस और पोटाश की पूरी मात्रा बिजाई के समय डालें बाकी नाइट्रोजन को पहली सिंचाई के समय डालें बारानी क्षेत्रों के लिए, नाइट्रोजन 24 किलो (यूरिया 52 किलो), फासफोरस 12 किलो (एस एस पी 75 किलो), पोटाश 8 किलो (म्यूरेट ऑफ पोटाश 15 किलो) प्रति एकड़ में डालें नाइट्रोज, फासफोरस और पोटाश की पूरी मात्रा बिजाई के समय डालें सिंचित क्षेत्रों में पिछेती बिजाई के लिए, नाइट्रोजन 50 किलो (यूरिया 110 किलो), फासफोरस 12 किलो (एस एस पी 75 किलो), पोटाश 16 किलो (म्यूरेट ऑफ पोटाश 27 किलो) प्रति एकड़ में डालें नाइट्रोजन की एक तिहाई मात्रा और फासफोरस और पोटाश की पूरी मात्रा बिजाई के समय डालें बाकी बची नाइट्रोजन की दो तिहाई मात्रा बिजाई के 35-40 दिनों के बाद डालें यह पाया गया है कि जिंक सल्फेट 10 किलो प्रति एकड़ में डालने से उपज में वृद्धि होती है जिंक की कमी को पूरा करने के लिए जिंक सल्फेट 0.5 प्रतिशत की फोलियर स्प्रे करें 15 दिनों के अंतराल पर दो से तीन स्प्रे करें अच्छी शाखाएं और उपज के लिए 19:19:19 घुलनशील खादें 5 ग्राम + स्टिकर 0.5 मि.ली. को प्रति लीटर पानी में मिलाकर बिजाई के 30 दिनों के बाद स्प्रे करें
Posted by Prakash
Rajasthan
14-10-2019 10:34 PM
श्रीमान जी, चने की फसल का पाकलने का समय उसकी किस्म पर निर्भर करता है, यह लबहग 130 से 150 दिन में पाक जाती है, धन्यवाद

Posted by श्याम
Chattisgarh
14-10-2019 10:16 PM
तिलहनी फसलों के लिए हल्की से भारी ज़मीनें अच्छी होती हैं राया हर तरह की ज़मीन में उगाया जा सकता है पर तोरिये के लिए भारी ज़मीनें चाहिए तारामीरा के लिए आमतौर पर रेतली से मैरा रेतली ज़मीनें अच्छी होती हैं सीड बैड पर बोयी फसल अच्छी अंकुरित होती है ज़मीन को देसी हल से दो या तीन बार जोताई करें और प्रत्येक जोताई के बाद .... (Read More)
तिलहनी फसलों के लिए हल्की से भारी ज़मीनें अच्छी होती हैं राया हर तरह की ज़मीन में उगाया जा सकता है पर तोरिये के लिए भारी ज़मीनें चाहिए तारामीरा के लिए आमतौर पर रेतली से मैरा रेतली ज़मीनें अच्छी होती हैं सीड बैड पर बोयी फसल अच्छी अंकुरित होती है ज़मीन को देसी हल से दो या तीन बार जोताई करें और प्रत्येक जोताई के बाद सुहागा फेरें बीजों के एकसार अंकुरित होने के लिए बैड नर्म, गीले और समतल होने चाहिए बुंदेलखंड और आगरा क्षेत्रों के लिए, बिजाई के लिए सितंबर का आखिरी सप्ताह उचित समय होता है जबकि बाकी के क्षेत्रों के लिए 15 अक्तूबर तक बिजाई पूरी कर लें असिंचित क्षेत्रों के लिए बिजाई का उपयुक्त समय सितंबर के दूसरे पखवाड़ा होता है तारामीरा-सरसों की बिजाई के लिए पंक्ति से पंक्ति का फासला 30 सैं.मी. और पौधे से पौधे का फासला 10 से 15 सैं.मी. रखें गोभी सरसों की बिजाई के लिए पंक्तियों का फासला 45 सैं.मी. और पौधे से पौधे का फासला 10 सैं.मी. रखें बीजों को 4-5 सैं.मी. की गहराई में बोयें बिजाई के लिए सीड ड्रिल विधि का प्रयोग करें सिंचित और असिंचित क्षेत्रों के लिए 2-2.5 किलो बीज प्रति एकड़ में प्रयोग करें बिजाई के 3-4 सप्ताह पहले 8-10 किलो गली हुई रूड़ी की खाद या अच्छी तरह से गला हुआ गाय का गोबर मिट्टी में मिलायें खादों की उचित मात्रा के लिए मिट्टी की जांच करना जरूरी है सिंचित हालातों में नाइट्रोजन 50 किलो (यूरिया 110 किलो), फासफोरस 24 किलो (सुपर फास्फेट 150 किलो) और पोटाश 24 किलो (म्यूरेट ऑफ पोटाश 40 किलो) प्रति एकड़ में डालें बिजाई के समय नाइट्रोजन की आधी मात्रा और फासफोरस की पूरी मात्रा डालें और बाकी बची नाइट्रोजन पहली सिंचाई के समय डालें फासफोरस के लिए, यदि एस एस पी का प्रयोग ना किया गया हो तो बिजाई के समय सल्फर 16 किलो प्रति एकड़ में डालें यदि डी ए पी का प्रयोग ना किया गया हो तो जिप्सम 80 किलो प्रति एकड़ में डालें थायोरिया 0.05 प्रतिशत की स्प्रे करने से अनाज की उपज में 10-15 प्रतिशत की वृद्धि होती है

Posted by Gurpreet Singh Sandhu
Punjab
14-10-2019 10:14 PM
ਸ਼੍ਰੀਮਾਨ ਜੀ, ਤੁਸੀ ਇਸ ਵਿਚ fenvalrate @3gm ਪ੍ਰਤੀ ਲਿਟਰ ਪਾਣੀ ਦੇ ਹਿਸਾਬ ਨਾਲ ਸਪਰੇ ਕਰੋ, ਧੰਨਵਾਦ

Posted by Madan singh
Rajasthan
14-10-2019 10:13 PM
श्रीमान जी, जीरे की बिजाई के लिए 15 से 30 नवंबर सही समय होता है धन्यवाद

Posted by girja shankar
Rajasthan
14-10-2019 10:12 PM
सबसे पहले आप उसके बुखार की जांच करवायें यदि बुखार सही है तो आप उसे पेट के कीड़ों के लिए Flukarid-DS bolus दें और Broton liquid 50-50ml सुबह शाम और Enerdyna liquid 100ml रोजाना दें इससे फर्क पड़ जाएगा

Posted by Manjeet Sharma
Haryana
14-10-2019 10:11 PM
अच्छी वृद्धि के लिए इसे 22-25 डिगरी सेल्सियस तापमान की जरूरत होती है और खुम्ब निकलते समय इसे 14-18 डिगरी सेल्सियस तापमान की आवश्यकता होती है

Posted by Madan singh
Rajasthan
14-10-2019 10:10 PM
श्रीमान जी, जीरे की बिजाई के लिए 15 से 30 नवंबर सही समय होता है धन्यवाद

Posted by vikas rohra
Madhya Pradesh
14-10-2019 09:44 PM
Shrimaan ji , isme ap carbendazim @ 4gm prati liter pani ke hisaab se spray karein, dhanywad
Posted by Arun begana
Uttar Pradesh
14-10-2019 09:38 PM
aap iske uper NPK 191919 ek kilo ko 150 litre pani men mila kar spray karen.dhanywad

Posted by Gurpreet Singh
Punjab
14-10-2019 09:34 PM
ਸ਼੍ਰੀਮਾਨ ਜੀ, ਤੁਸੀ ਝੋਨਾ ਪੱਕਣ ਤੋਂ ਪਹਿਲਾ NPK 130045 @ 1kg ਨੂੰ 150 ਲਿਟਰ ਪਾਣੀ ਚ ਘੋਲ ਕਿ ਪ੍ਰਤੀ ਏਕੜ ਦੇ ਹਿਸਾਬ ਨਾਲ ਸਪਰੇ ਕਰੋ, ਧੰਨਵਾਦ

Posted by दयान्नल
Bihar
14-10-2019 09:25 PM
श्रीमान जी आप फसलें जैसे के गेहूं, अनानास, आड़ू, अलुचा , स्ट्रॉबेरी, कलिहारी, lassan घास, संलस, पुदीना, मुलेठी, शंखपुष्पी, शतावरी, सदाबहार, सफ़ेद मूसली, स्वीट फ्लैग, मेथी और टमाटर खेती कर सकते हैं, धन्यवाद
Posted by Krishna Pandit
Rajasthan
14-10-2019 09:23 PM
iske patton ke neeche machar ka hamla check karen agar maujood hai to aap iske uper imidacloprid@1.5ml ko prati litre pani ke hisab se spray karen.dhanywad
Posted by Manish Gujar
Madhya Pradesh
14-10-2019 09:16 PM
Shrimaan ji, gehun ki bijai ka sahi samy 15 october se 30 november tak ka hota hai, dhanywad
Posted by Vishal Mandloi
Madhya Pradesh
14-10-2019 09:06 PM
श्रीमान जी, गुलाब में फूलों की पोलिनाशन काम होने की वजह से फूल जयादा नहीं आता है, इसमें आप NPK 130045 @ 10 gm प्रति लीटर पानी के हिसाब से स्प्रे करें, धन्यवाद
Posted by Sanjeev
Punjab
14-10-2019 08:57 PM
tuci iss nu Bovimin-Gl liquid 5ml rojana deo ate Vetscuco tablet 2 golia rojana deo, iss nal frak paa jawega.
Posted by Harmeet singh
Punjab
14-10-2019 08:46 PM
Posted by kks
Chattisgarh
14-10-2019 08:43 PM
मोती की खेती एक बहुत ही अच्छा व्यवसाय है इस व्यवसाय को शुरू करने के लिए सबसे जरुरी है इसकी ट्रेनिंग, क्योकि इसमें बहुत सी ऐसी बारीकियें होती है जो हमें प्रेक्टिकल ट्रेनिंग में ही सीखने को मिलती है अगर आप इसकी ट्रेनिंग लेना चाहते है तो आप ग्लिटराटी पर्ल फार्मिंग ट्रेनिंग केंद्र प्रशिक्षण कार्य कर्म आयोजि.... (Read More)
मोती की खेती एक बहुत ही अच्छा व्यवसाय है इस व्यवसाय को शुरू करने के लिए सबसे जरुरी है इसकी ट्रेनिंग, क्योकि इसमें बहुत सी ऐसी बारीकियें होती है जो हमें प्रेक्टिकल ट्रेनिंग में ही सीखने को मिलती है अगर आप इसकी ट्रेनिंग लेना चाहते है तो आप ग्लिटराटी पर्ल फार्मिंग ट्रेनिंग केंद्र प्रशिक्षण कार्य कर्म आयोजित किया जा रहा है प्रशिक्षण कार्य कर्म में भाग लेने के लिए नीचे दिए गए नम्बर पर आज ही संपर्क करें और Rs 250/ से अपना रजिस्ट्रेशन करवाए अचल सिंह (फाउंडर )- 9711858258. धन्यवाद
Posted by sandeep singh brar
Punjab
14-10-2019 08:40 PM
ਸੰਦੀਪ ਸਿੰਘ ਬਰਾੜ ਜੀ ਬਿਲਕੁੱਲ ਤੁਹਾਡੀ ਗੱਲ ਤੇ ਧਿਆਨ ਦੇਵਾਗੇ ਜੀ, ਕਿਉਕੀ ਇਸ ਤਰੀਕੇ ਨਾਲ ਐਪ ਨੂੰ ਹੋਰ ਵਧੀਆ ਬਣਾਇਆ ਜਾ ਸਕਦਾ ਹੈ ਜੀ, ਇਸ ਬਾਰੇ ਕੁੱਝ ਹੱਲ ਦੇਖਿਆ ਜਾਵੇਗਾ ਕਿਉਕੀ ਇਹ ਰੇਟ ਲੋਕਲ ਮੰਡੀ ਦੇ ਹਿਸਾਬ ਨਾਲ ਪਤਾ ਕਰਨੇ ਪੈਣਗੇ ਜੀ, ਬਾਕੀ ਤੁਸੀ ਇੱਕ ਵਾਰ ਆਪਣਾ ਏਰੀਆ ਦੱਸ ਕੇ ਬਾਸਮਤੀ ਦੇ ਰੇਟ ਸਬੰਧੀ ਸਵਾਲ ਵੀ ਪੁੱਛ ਸਕਦੇ ਹੋ ਜੀ, ਇਸ ਤਰੀਕੇ ਨਾਲ ਵੀ ਤਹਾਨੂੰ ਰੇਟ ਬਾਰੇ ਜਾਣ.... (Read More)
ਸੰਦੀਪ ਸਿੰਘ ਬਰਾੜ ਜੀ ਬਿਲਕੁੱਲ ਤੁਹਾਡੀ ਗੱਲ ਤੇ ਧਿਆਨ ਦੇਵਾਗੇ ਜੀ, ਕਿਉਕੀ ਇਸ ਤਰੀਕੇ ਨਾਲ ਐਪ ਨੂੰ ਹੋਰ ਵਧੀਆ ਬਣਾਇਆ ਜਾ ਸਕਦਾ ਹੈ ਜੀ, ਇਸ ਬਾਰੇ ਕੁੱਝ ਹੱਲ ਦੇਖਿਆ ਜਾਵੇਗਾ ਕਿਉਕੀ ਇਹ ਰੇਟ ਲੋਕਲ ਮੰਡੀ ਦੇ ਹਿਸਾਬ ਨਾਲ ਪਤਾ ਕਰਨੇ ਪੈਣਗੇ ਜੀ, ਬਾਕੀ ਤੁਸੀ ਇੱਕ ਵਾਰ ਆਪਣਾ ਏਰੀਆ ਦੱਸ ਕੇ ਬਾਸਮਤੀ ਦੇ ਰੇਟ ਸਬੰਧੀ ਸਵਾਲ ਵੀ ਪੁੱਛ ਸਕਦੇ ਹੋ ਜੀ, ਇਸ ਤਰੀਕੇ ਨਾਲ ਵੀ ਤਹਾਨੂੰ ਰੇਟ ਬਾਰੇ ਜਾਣਕਾਰੀ ਮਿਲ ਸਕਦੀ ਹੈ ਜੀ, ਬਹੁਤ ਬਹੁਤ ਧੰਨਵਾਦ ਸੁਝਾਅ ਦੇਣ ਲਈ ਜੀ
Posted by Pushpa Chauhan
Haryana
14-10-2019 08:39 PM
श्रीमान जी, इसमें दीमक का हमला चेक करें, अगर दीमक मौजूद हो तो आप इसमें chlorpyriphos @ 4ml प्रति लीटर पानी के हिसाब से स्प्रे करें, धन्यवाद

Posted by Shailendra verma
Madhya Pradesh
14-10-2019 08:32 PM
वर्मा जी कृप्या आप अपना सवाल विस्तार से पूछें कि आप क्या जानकारी लेना चाहते है ताकि आपको सही जानकारी दी जा सके
Posted by gaurav sinha
Chattisgarh
14-10-2019 08:28 PM
श्रीमान जी,मिटटी को उपजाऊ बनाने के लिए आप पहले अपनी मिटटी को टेस्ट करवाए , उसी के हिसाब से इसमें खादों का इस्तेमाल करें और फिर इसमें आप हरी खाद की बुवाई करें, और इसमें गोबर की खाद भी डालें, इसमें आप धान की फसल लगा सकते हैं, इसके इलावा आप सब्जियां या चिकित्सक पौधे भी लगा सकतड़े हैं, धन्यवाद
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