Posted by amit raghuwanshi
Madhya Pradesh
15-10-2019 12:58 PM
Amit ji, dhaan ka bhav 1815 se 1835 rupay prati quintal ke hisab se raha hai, dhanywad
Posted by amit raghuwanshi
Madhya Pradesh
15-10-2019 12:54 PM
Posted by ਹਰਪਾਲ ਸਿੰਘ
Punjab
15-10-2019 12:50 PM
tuci uss nu cargill di Heifer dry feed de skde ho ate Cafplan powder 100gm rojana dena suru kro, iss nal usdi vdia growth howegi.

Posted by amandeepsingh aman
Punjab
15-10-2019 12:48 PM
Amandeep singh ji same same te kisana di mang de mutabik Training chaldia hi rehdian han training len lai tusi apna training farm bhar Guru Angad Dev Veterinary and Animal Sciences University Address: Ferozpur Rd, Ludhiana, Punjab 141001, Phone: 0161 2553394 vich bhar ke jama karvao jida hi training di date rakhi javegi, Tuhanu call kar ke das dita javega, Thankyou.
Posted by Mirtunjay Pandey
Uttar Pradesh
15-10-2019 12:47 PM
मिरतुन्जय जी आप इसके ऊपर quinalphos @4ml को प्रति लीटर पानी के हिसाब से स्प्रे करें धन्यवाद
Posted by akash singh
Punjab
15-10-2019 12:44 PM
Amrik ji eh ik keetnashak hai eh seonk di roktham de layi varti jandi hai jekar fasl de seonk da hamla hunda hai ta isdi varto kiti ja sakdi hai.dhanwad
Posted by ਹਰਜਿੰਦਰ ਸਿੰਘ
Punjab
15-10-2019 12:37 PM

Posted by mandip gomekar
Maharashtra
15-10-2019 12:36 PM
मनदीप जी उसे आप पेट के कीड़ों के लिए Flukarid-Ds गोली दें और उसे Vitum-H liquid 10—10 मि.ली. सुबह शाम दें और Metabolite पाउडर की रोजाना एक पुडिया देनी शुरू करें और अच्छी मात्रा में हरा चारा डालें
Posted by jaychand karwasra
Rajasthan
15-10-2019 12:34 PM
Posted by sukhwinder
Punjab
15-10-2019 12:33 PM
sukhwinder ji tuc murgiyan di khaad pa sakde ho isde layi tuc 2 tonn khaad di varto kar sakde ho.jekar reeper chal ke kanak da chitta dinde ho ta kanak ug jayegi.dhanwad

Posted by Vikas Thory
Haryana
15-10-2019 12:27 PM
विकास जी इसके लिए आप Atmaram 9812921253 से संपर्क कर सकते है

Posted by Mahesh Sharma
Madhya Pradesh
15-10-2019 12:17 PM
महेश जी कृपय आप सवाल विस्तार से पूछे ताकि आपको इसके बारे में पूरी जानकारी दी जा सके धन्यवाद
Posted by ravi chaurasiya
Uttar Pradesh
15-10-2019 12:16 PM
मोती की खेती एक बहुत ही अच्छा व्यवसाय है इस व्यवसाय को शुरू करने के लिए सबसे जरुरी है इसकी ट्रेनिंग, क्योकि इसमें बहुत सी ऐसी बारीकियें होती है जो हमें प्रेक्टिकल ट्रेनिंग में ही सीखने को मिलती है अगर आप इसकी ट्रेनिंग लेना चाहते है तो आप ग्लिटराटी पर्ल फार्मिंग ट्रेनिंग केंद्र प्रशिक्षण कार्य कर्म आयोजि.... (Read More)
मोती की खेती एक बहुत ही अच्छा व्यवसाय है इस व्यवसाय को शुरू करने के लिए सबसे जरुरी है इसकी ट्रेनिंग, क्योकि इसमें बहुत सी ऐसी बारीकियें होती है जो हमें प्रेक्टिकल ट्रेनिंग में ही सीखने को मिलती है अगर आप इसकी ट्रेनिंग लेना चाहते है तो आप ग्लिटराटी पर्ल फार्मिंग ट्रेनिंग केंद्र प्रशिक्षण कार्य कर्म आयोजित किया जा रहा है प्रशिक्षण कार्य कर्म में भाग लेने के लिए नीचे दिए गए नम्बर पर आज ही संपर्क करें और Rs 250/ से अपना रजिस्ट्रेशन करवाए अचल सिंह (फाउंडर )- 9711858258. धन्यवाद

Posted by Balwan singh
Punjab
15-10-2019 12:15 PM
BhaaG rajwa hara chaara te har 4kg dudh lai gau nu 1kg wadhya feed pao har 3 mahine baad malap rehat karo

Posted by dilshad khan
Rajasthan
15-10-2019 12:14 PM
बिजाई से 10 दिन पहले 15-20 टन रूड़ी की खाद डालें नाइट्रोजन 41 किलो(यूरिया 90 किलो), फासफोरस 45 किलो(सिंगल सुपर फासफेट 125 किलो) और पोटाश 45 किलो(म्युरेट ऑफ़ पोटाश 75 किलो) प्रति एकड़ डालें फासफोरस और पोटाश की पूरी मात्रा और नाइट्रोजन की आधी मात्रा रोपण के समय डालें बाकी बची हुई नाइट्रोजन टॉप ड्रेसिंग (मिट्टी में मिलाना) के तौ.... (Read More)
बिजाई से 10 दिन पहले 15-20 टन रूड़ी की खाद डालें नाइट्रोजन 41 किलो(यूरिया 90 किलो), फासफोरस 45 किलो(सिंगल सुपर फासफेट 125 किलो) और पोटाश 45 किलो(म्युरेट ऑफ़ पोटाश 75 किलो) प्रति एकड़ डालें फासफोरस और पोटाश की पूरी मात्रा और नाइट्रोजन की आधी मात्रा रोपण के समय डालें बाकी बची हुई नाइट्रोजन टॉप ड्रेसिंग (मिट्टी में मिलाना) के तौर पर रोपण के चार हफ्ते बाद डालें
Posted by pradum Yadav
Madhya Pradesh
15-10-2019 12:13 PM
असली केसर सिर्फ जम्मू कश्मीर, ईरान और अफगानिस्तान में ही हो सकता है, यह कुसुम है, इसकी भी कई दवाई बनती है, यदि कोई और छक है तो जम्मू कश्मीर के इस किसान से बात करें, जिसके दादे, पड़दादे भी केसर की खेती करते थे और यह भी केसर की खेती करते है Javid Ahmed- 95964 93260 बाकि आप यह वीडियो देखें https://www.youtube.com/watchv=vl7c6L3ETnQ&t=8s बाकि यदि फिर भी यकीन नहीं .... (Read More)
असली केसर सिर्फ जम्मू कश्मीर, ईरान और अफगानिस्तान में ही हो सकता है, यह कुसुम है, इसकी भी कई दवाई बनती है, यदि कोई और छक है तो जम्मू कश्मीर के इस किसान से बात करें, जिसके दादे, पड़दादे भी केसर की खेती करते थे और यह भी केसर की खेती करते है Javid Ahmed- 95964 93260 बाकि आप यह वीडियो देखें https://www.youtube.com/watchv=vl7c6L3ETnQ&t=8s बाकि यदि फिर भी यकीन नहीं है तो तो आप अमृतपाल सिंह बराड़ प्रोफेसर, पीएयू लुधियाना इस वीडियो संबंधी विचार पड़ सकते हैं, यह फसल केसर की नहीं है, यह फसल कसुंबडे की है, इसे अंग्रेजी में Safflower कहते है, और विज्ञानं में इसे Carthamus tinctorius कहते है
Posted by Dinesh kumar
Bihar
15-10-2019 12:07 PM
dinesh ji abhi aap genhu ya sabjiyon ki bijai kar sakte hai.dhanywad

Posted by Mp singh
Uttar Pradesh
15-10-2019 11:52 AM
यह फसल बहुत तरह की मिट्टी जैसे कि रेतली, नमक वाली, दोमट और चिकनी मिट्टी में उगाई जा सकती है अच्छे जल निकास वाली, जैविक तत्व भरपूर, रेतली से दरमियानी ज़मीन में फसल अच्छी पैदावार देती है यह फसल नमक वाली तेजाबी ज़मीनों में भी उगाई जा सकती है पर बहुत ज्यादा जल जमाव और खारी या नमक वाली ज़मीन इस फसल की खेती के लिए उचित नह.... (Read More)
यह फसल बहुत तरह की मिट्टी जैसे कि रेतली, नमक वाली, दोमट और चिकनी मिट्टी में उगाई जा सकती है अच्छे जल निकास वाली, जैविक तत्व भरपूर, रेतली से दरमियानी ज़मीन में फसल अच्छी पैदावार देती है यह फसल नमक वाली तेजाबी ज़मीनों में भी उगाई जा सकती है पर बहुत ज्यादा जल जमाव और खारी या नमक वाली ज़मीन इस फसल की खेती के लिए उचित नहीं होती Kufri Bahar: इस किस्म के पौधे लंबे और तने मोटे होते हैं तनों की संख्या 4-5 प्रति पौधा होती है इसके आलू बड़े, सफेद रंग के, गोलाकार से अंडाकार होते हैं और इसका गुद्दा सफेद रंग का होता है यह किस्म 100-110 दिनों में पक जाती है और इसकी औसतन पैदावार 125 क्विंटल प्रति एकड़ होती है इसे ज्यादा देर तक स्टोर करके रखा जा सकता है यह पिछेती और अगेती झुलस रोग और पत्ता मरोड़ रोग की रोधक है Kufri Badshah: इसके पौधे लंबे और 4-5 तने प्रति पौधा होते हैं इसके आलू बड़े से दरमियाने, गोलाकार और हल्के सफेद रंग के होते हैं इसके आलू स्वाद होते हैं यह किस्म 100-110 दिनों में पक जाती है यह किस्म कोहरे को सहनेयोग्य है और पिछेती, अगेती झुलस रोग की प्रतिरोधक है Kufri Sutlaj: इस किस्म के पौधे घने और मोटे तने वाले होते हैं पत्ते हल्के हरे रंग के होते हैं आलू बड़े आकार के, गोलाकार और नर्म छिल्के वाले होते हैं यह किस्म 90-100 दिनों में पकती है इसकी औसतन पैदावार 160 क्विंटल प्रति एकड़ होती है यह किस्म खाने के लिए अच्छी और स्वादिष्ट होती है इन आलुओं को पकाना आसान होता है यह नए उत्पाद बनाने के लिए उचित किस्म नहीं है Kufri Anand: यह मध्यम समय की किस्म है, जो कि पिछेते झुलस रोग और कोहरे के प्रतिरोधक है इसकी औसतन पैदावार 140-160 क्विंटल प्रति एकड़ होती है Kufri Pukhraj: इसके पौधे लंबे और तने संख्या में कम और दरमियाने मोटे होते हैं आलू सफेद, बड़े, गोलाकार और नर्म छिल्के वाले होते हैं यह किस्म 70-90 दिनों में पकती है इसकी औसतन पैदावार 130 क्विंटल प्रति एकड़ है यह अगेती झुलस रोग की रोधक किस्म है और नए उत्पाद बनाने के लिए उचित नहीं है Kufri Chipsona 2: इस किस्म के पौधे दरमियाने कद के और कम तनों वाले होते हैं इसके पत्ते गहरे हरे और फूल सफेद रंग के होते हैं आलू सफेद, दरमियाने आकार के, गोलाकार, अंडाकार और नर्म होते हैं इसकी औसतन पैदावार 140 क्विंटल प्रति एकड़ होती है यह पिछेती झुलस रोग की रोधक किस्म है यह किस्म चिपस और फरैंच फ्राइज़ बनाने के लिए उचित है Kufri Chipsona 1: यह किस्म 90-100 दिनों में पुटाई के लिए तैयार हो जाती है Kufri Chandramukhi: इस किस्म के आलू बड़े अंडाकार आकार के होते हैं इसकी औसतन पैदावार 10 टन प्रति एकड़ होती है यह किस्म 80-90 दिनों में पुटाई के लिए तैयार हो जाती है Kufri Jyoti: यह प्रोसेसिंग के लिए उपयुक्त किस्म है इसकी औसतन पैदावार 80-120 क्विंटल प्रति एकड़ होती है Kufri Ashoka: यह किस्म CPIU, शिमला द्वारा विकसित की गई है और बिहार, हरियाणा, उत्तर प्रदेश और पश्चिमी बंगाल में खेती के लिए उपयुक्त किस्म है यह लंबे कद की और मोटे तने वाली किस्म है यह किस्म 70-80 दिनों में पककर तैयार हो जाती है इसके आलू बड़े, गोलाकार, सफेद और नर्म छिल्के वाले होते हैं यह पिछेती झुलस रोग को सहने योग्य किस्म है Kufri Lalima: इस किस्म के आलू गोल, लाल और सफेद गुद्दे वाले होते हैं आलू बड़े से मध्यम आकार के होते हैं यह किस्म 100-110 दिनों में पुटाई के लिए तैयार हो जाती है इसकी औसतन पैदावार 16 टन प्रति एकड़ होती है खेत को एक बार 30 सैं.मी. गहरा जोतकर अच्छे ढंग से बैड बनाएं जोताई के बाद 2-3 बार तवियां फेरें और फिर 2-3 बार सुहागा फेरें बिजाई से पहले खेत में नमी की मात्रा बनाकर रखें बिजाई के लिए दो ढंग मुख्य तौर पर प्रयोग किए जाते हैं 1. मेंड़ और खालियों वाला ढंग 2. समतल बैडों वाला ढंग अगेती बिजाई के लिए, सितंबर के आखिरी सप्ताह से अक्तूबर का पहला सप्ताह खेती के लिए उपयुक्त होता है मुख्य फसल के लिए अक्तूबर का दूसरे से चौथा सप्ताह बिजाई के लिए उपयुक्त समय होता है गांठों के आकार के अनुसार रोपाई का फासला विभिन्न होता है बिजाई के लिए कतार से कतार में 60 सैं.मी. और पौधे से पौधे में 20 सैं.मी. फासले का प्रयोग करें बीज बोने के बाद बीजों को 8-10 सैं.मी. तक मिट्टी की परत से ढक दें रोपाई के लिए बड़ी आकार की गांठों का प्रयोग किया जाता है बिजाई के लिए 13-15 क्विंटल बीज प्रयोग किए जाते हैं यदि संभव हो, तो आलू की रोपाई से पहले, हरी खाद वाली फसलें जैसे सनई, जंतर आदि फसलें उगायें और उन्हें मिट्टी में अच्छी तरह दबायें यदि हरी खाद उपलब्ध ना हो तो गली सड़ी रूड़ी की खाद या गाय का गला हुआ गोबर 60-80 क्विंटल प्रति एकड़ में खेत की तैयारी के समय रोपाई से दो सप्ताह पहले डालें फसल की उचित वृद्धि के लिए नाइट्रोजन 40-50 किलो (90-110 किलो यूरिया), फासफोरस 24-32 किलो (150-200 किलो सिंगल सुपर फासफेट) और पोटाश 40-50 किलो (66-85 किलो म्यूरेट ऑफ पोटाश) की मात्रा प्रति एकड़ में डालें बिजाई के समय नाइट्रोजन का 3/4 हिस्सा और फासफोरस और पोटाश की पूरी मात्रा डालें बाकी बचा हुआ नाइट्रोजन का 1/4 हिस्सा बिजाई से 35-40 दिन बाद जड़ों में मिट्टी लगाने के समय डालें बिजाई से पहले सिंचाई करें बिजाई के बाद 10-12 दिनों के अंदर अंदर पहली सिंचाई करें दूसरी सिंचाई पहली सिंचाई के 7 दिनों के बाद करें बाकी की सिंचाइयां जलवायु की परिस्थितियों और जरूरत के अनुसार करें गांठे बनने की अवस्था सिंचाई के लिए बहुत महत्तवपूर्ण होती है इस अवस्था में पानी की कमी ना होने दें ज्यादा सिंचाई ना करें इससे गलने की बीमारी का खतरा बढ़ता है पुटाई से 10-12 दिन पहले सिंचाई बंद कर दें डंठलों की कटाई : आलुओं को विषाणु से बचाने के लिए यह क्रिया बहुत जरूरी है और इससे आलुओं का आकार और गिणती भी बढ़ जाती है इस क्रिया में सही समय पर पौधे को ज़मीन के नज़दीक से काट दिया जाता है इसका समय अलग अलग स्थानों पर अलग है और चेपे की जनसंख्या पर निर्भर करता है उत्तरी भारत में यह क्रिया दिसंबर महीने में की जाती है
Posted by ਹਰਪਾਲ ਸਿੰਘ
Punjab
15-10-2019 11:43 AM
BhaaG rajwa hara chaara te har 3kg dudh lai majh nu 1kg feed pao har 3 mahine baad malap rehat karo
Posted by ਕੁਲਵੀਰ ਸਿੰਘ
Punjab
15-10-2019 11:41 AM
ਤੁਸੀ ਕਣਕ ਦੀਆਂ ਹੇਠ ਦਿਤੀਆਂ ਕਿਸਮਾਂ ਦੀ ਬਿਜਾਈ ਕਰ ਸਕਦੇ ਹੋ :-UNNAT PBW 343: ਇਹ ਕਿਸਮ ਸਿੰਚਾਈ ਵਾਲੇ ਖੇਤਰਾਂ ਵਿੱਚ ਲਗਾਉਣ ਯੋਗ ਹੈ ਪੱਕਣ ਦੇ ਲਈ ਇਹ 155 ਦਿਨਾਂ ਦਾ ਸਮਾਂ ਲੈਦੀ ਹੈ ਇਹ ਕਰਨਾਲ ਬੰਟ ਦੀ ਪ੍ਰਤਿਰੋਧੀ ਅਤੇ ਬਲਾਈਟ ਨੂੰ ਵੀ ਸਹਿਣ ਯੋਗ ਹੈ ਇਸਦੀ ਔਸਤ ਪੈਦਾਵਾਰ 23.2 ਕੁਇੰਟਲ ਪ੍ਰਤੀ ਏਕੜ ਹੈ
UNNAT PBW 550: ਇਹ ਕਿਸਮ ਪੰਜਾਬ ਦੇ ਸਾਰਿਆਂ ਇਲਾਕਿਆਂ ਵਿੱਚ ਉਗਾਈ ਜਾਂਦੀ ਹੈ ਇਹ ਕਿਸਮ 145 ਦਿਨਾਂ ਵ.... (Read More)
ਤੁਸੀ ਕਣਕ ਦੀਆਂ ਹੇਠ ਦਿਤੀਆਂ ਕਿਸਮਾਂ ਦੀ ਬਿਜਾਈ ਕਰ ਸਕਦੇ ਹੋ :-UNNAT PBW 343: ਇਹ ਕਿਸਮ ਸਿੰਚਾਈ ਵਾਲੇ ਖੇਤਰਾਂ ਵਿੱਚ ਲਗਾਉਣ ਯੋਗ ਹੈ ਪੱਕਣ ਦੇ ਲਈ ਇਹ 155 ਦਿਨਾਂ ਦਾ ਸਮਾਂ ਲੈਦੀ ਹੈ ਇਹ ਕਰਨਾਲ ਬੰਟ ਦੀ ਪ੍ਰਤਿਰੋਧੀ ਅਤੇ ਬਲਾਈਟ ਨੂੰ ਵੀ ਸਹਿਣ ਯੋਗ ਹੈ ਇਸਦੀ ਔਸਤ ਪੈਦਾਵਾਰ 23.2 ਕੁਇੰਟਲ ਪ੍ਰਤੀ ਏਕੜ ਹੈ
UNNAT PBW 550: ਇਹ ਕਿਸਮ ਪੰਜਾਬ ਦੇ ਸਾਰਿਆਂ ਇਲਾਕਿਆਂ ਵਿੱਚ ਉਗਾਈ ਜਾਂਦੀ ਹੈ ਇਹ ਕਿਸਮ 145 ਦਿਨਾਂ ਵਿੱਚ ਪੱਕ ਕੇ ਤਿਆਰ ਹੋ ਜਾਂਦੀ ਹੈ ਇਹ ਪੀਲੀ ਅਤੇ ਭੂਰੀ ਕੁੰਗੀ ਦੀ ਰੋਧਕ ਕਿਸਮ ਹੈ ਇਸਦਾ ਔਸਤਨ ਕੱਦ 86 ਸੈ.ਮੀ. ਹੁੰਦਾ ਹੈ ਇਸ ਦਾ ਔਸਤਨ ਝਾੜ 23 ਕੁਇੰਟਲ ਪ੍ਰਤੀ ਏਕੜ ਹੁੰਦਾ ਹੈ
PBW 1 Zn: ਇਸ ਕਿਸਮ ਦੇ ਪੌਦੇ ਦਾ ਔਸਤਨ ਕੱਦ 103 ਸੈ.ਮੀ. ਹੁੰਦਾ ਹੈ ਇਹ ਕਿਸਮ 151 ਦਿਨਾਂ ਵਿੱਚ ਕਟਾਈ ਲਈ ਤਿਆਰ ਹੋ ਜਾਂਦੀ ਹੈ ਇਸ ਦਾ ਔਸਤਨ ਝਾੜ 22.5 ਕੁਇੰਟਲ ਪ੍ਰਤੀ ਏਕੜ ਹੁੰਦਾ ਹੈ
PBW 725: ਇਹ ਕਿਸਮ ਪੀ ਏ ਯੂ, ਐਗਰੀਕਲਚਰ ਯੂਨੀਵਰਸਿਟੀ ਦੁਆਰਾ ਸਿਫਾਰਿਸ਼ ਕੀਤੀ ਗਈ ਹੈ ਇਹ ਇੱਕ ਮੱਧਰੀ ਕਿਸਮ ਹੈ ਅਤੇ ਇਹ ਸਿੰਚਾਈ ਵਾਲੇ ਖੇਤਰਾਂ ਵਿੱਚ ਲਗਾਈ ਜਾਂਦੀ ਹੈ ਇਹ ਪੀਲੇ ਅਤੇ ਭੂਰੇ ਜੰਗ ਦੀ ਪ੍ਰਤਿਰੋਧੀ ਕਿਸਮ ਹੈ ਇਸਦੇ ਦਾਣੇ ਮੋਟੇ , ਅਤੇ ਗਹਿਰੇ ਰੰਗ ਦੇ ਹੁੰਦੇ ਹਨ ਇਹ 155 ਦਿਨਾਂ ਵਿੱਚ ਪੱਕ ਕੇ ਤਿਆਰ ਹੋ ਜਾਂਦੀ ਹੈ ਇਸਦੀ ਸਲਾਨਾ ਔਸਤ ਝਾੜ 23 ਕੁਇੰਟਲ ਪ੍ਰਤੀ ਏਕੜ ਹੈ
PBW 677: ਇਹ ਕਿਸਮ 160 ਦਿਨਾਂ ਵਿੱਚ ਕਟਾਈ ਲਈ ਤਿਆਰ ਹੋ ਜਾਂਦੀ ਹੈ ਇਸਦਾ ਔਸਤ ਝਾੜ 22.4 ਕੁਇੰਟਲ ਪ੍ਰਤੀ ਏਕੜ ਹੈ HD 3086 (PusaGautam) : ਇਸ ਦਾ ਔਸਤਨ ਝਾੜ 23 ਕੁਇੰਟਲ ਪ੍ਰਤੀ ਏਕੜ ਹੁੰਦਾ ਹੈ ਇਹ ਪੱਤਿਆਂ ਦੇ ਪੀਲੇਪਣ ਅਤੇ ਭੂਰੇਪਣ ਦੀ ਬਿਮਾਰੀ ਤੋਂ ਰਹਿਤ ਹੁੰਦੀ ਹੈ ਵਧੀਆ ਕਿਮਸ ਦੇ ਬਰੈੱਡ ਬਣਾਉਣ ਦੇ ਸਾਰੇ ਗੁਣ/ਤੱਤ ਇਸ ਵਿਚ ਮੌਜੂਦ ਹਨ
WH 1105: ਇਸ ਦੀ ਕਾਢ ਪੰਜਾਬ ਖੇਤੀਬਾੜੀ ਯੂਨੀਵਰਸਿਟੀ ਵੱਲੋਂ ਕੀਤੀ ਗਈ ਹੈ ਇਹ ਇੱਕ ਛੋਟੇ ਕੱਦ ਵਾਲੀ ਕਿਸਮ ਹੈ ਜਿਸ ਵਿਚ ਬੂਟੇ ਦਾ ਔਸਤਨ ਕੱਦ 97 ਸੈ.ਮੀ. ਤੱਕ ਹੁੰਦਾ ਹੈ ਇਸ ਦੇ ਦਾਣੇ ਸੁਨਹਿਰੇ, ਮਧਰੇ, ਸਖਤ ਅਤੇ ਚਮਕਦਾਰ ਹੁੰਦੇ ਹਨ ਇਹ ਪੱਤਿਆਂ ਦੇ ਪੀਲੇਪਣ ਅਤੇ ਭੂਰੇਪਣ ਦੀ ਬਿਮਾਰੀ ਤੋਂ ਰਹਿਤ ਹੁੰਦੀ ਹੈ ਪਰੰਤੂ ਇਹ ਦਾਣਿਆਂ ਦੇ ਖਰਾਬ ਹੋਣ ਅਤੇ ਸਿੱਟਿਆਂ ਦੇ ਭੂਰੇ ਪੈਣ ਦੀ ਬਿਮਾਰੀ ਪ੍ਰਤੀ ਸੰਵੇਦਨਸ਼ੀਲ ਹੈ ਇਹ ਲਗਭਗ 157 ਦਿਨਾਂ ਵਿੱਚ ਪੱਕ ਜਾਂਦੀ ਹੈ ਇਸ ਦੀ ਔਸਤਨ ਪੈਦਾਵਾਰ 23.1 ਕੁਇੰਟਲ ਪ੍ਰਤੀ ਏਕੜ ਹੈ
HD 2967: ਇਹ ਵੱਡੇ ਕੱਦ ਦੀ ਕਿਸਮ ਹੈ ਜਿਸ ਵਿਚ ਬੂਟੇ ਦਾ ਔਸਤਨ ਕੱਦ 101 ਸੈ.ਮੀ. ਤੱਕ ਹੁੰਦਾ ਹੈ ਇਸ ਦੇ ਦਾਣੇ ਸੁਨਹਿਰੇ, ਮਧਰੇ, ਸਖਤ ਅਤੇ ਚਮਕਦਾਰ ਹੁੰਦੇ ਹਨ ਇਹ ਲਗਭਗ 157 ਦਿਨਾਂ ਵਿੱਚ ਪੱਕ ਜਾਂਦੀ ਹੈ ਇਸ ਦੀ ਔਸਤਨ ਪੈਦਾਵਾਰ 21.5 ਕੁਇੰਟਲ ਪ੍ਰਤੀ ਏਕੜ ਹੈ
PBW 621: ਇਹ ਕਿਸਮ ਪੰਜਾਬ ਦੇ ਸਾਰਿਆਂ ਇਲਾਕਿਆਂ ਵਿੱਚ ਉਗਾਈ ਜਾਂਦੀ ਹੈ ਇਹ ਕਿਸਮ 158 ਦਿਨਾਂ ਵਿੱਚ ਪੱਕ ਕੇ ਤਿਆਰ ਹੋ ਜਾਂਦੀ ਹੈ ਇਹ ਪੀਲੀ ਅਤੇ ਭੂਰੀ ਕੁੰਗੀ ਦੀ ਰੋਧਕ ਕਿਸਮ ਹੈ ਇਸਦਾ ਔਸਤਨ ਕੱਦ 100 ਸੈ.ਮੀ. ਹੁੰਦਾ ਹੈI
HD 3226:- jhaad 24 qtl / acre.
Posted by Ranjeet Kumar
Bihar
15-10-2019 11:38 AM
मोती की खेती एक बहुत ही अच्छा व्यवसाय है इस व्यवसाय को शुरू करने के लिए सबसे जरुरी है इसकी ट्रेनिंग, क्योकि इसमें बहुत सी ऐसी बारीकियें होती है जो हमें प्रेक्टिकल ट्रेनिंग में ही सीखने को मिलती है अगर आप इसकी ट्रेनिंग लेना चाहते है तो आप ग्लिटराटी पर्ल फार्मिंग ट्रेनिंग केंद्र प्रशिक्षण कार्य कर्म आयोजि.... (Read More)
मोती की खेती एक बहुत ही अच्छा व्यवसाय है इस व्यवसाय को शुरू करने के लिए सबसे जरुरी है इसकी ट्रेनिंग, क्योकि इसमें बहुत सी ऐसी बारीकियें होती है जो हमें प्रेक्टिकल ट्रेनिंग में ही सीखने को मिलती है अगर आप इसकी ट्रेनिंग लेना चाहते है तो आप ग्लिटराटी पर्ल फार्मिंग ट्रेनिंग केंद्र प्रशिक्षण कार्य कर्म आयोजित किया जा रहा है प्रशिक्षण कार्य कर्म में भाग लेने के लिए नीचे दिए गए नम्बर पर आज ही संपर्क करें और Rs 250/ से अपना रजिस्ट्रेशन करवाए अचल सिंह (फाउंडर )- 9711858258. धन्यवाद

Posted by Kanwaljeet Singh
Punjab
15-10-2019 11:33 AM
Shirmaan ji, ferozpur ch 1121 da rate is samay 2830 to 2995 rupay prati quintal de hisaab nal chal rahi hai, dhanwad

Posted by as
Punjab
15-10-2019 11:29 AM
ਕਣਕ ਦੀ ਬਿਜਾਈ ਸਹੀ ਸਮੇਂ ਤੇ ਕਰਨੀ ਜਰੂਰੀ ਹੈ ਪਿਛੇਤੀ ਬਿਜਾਈ ਦਾ ਫਸਲ ਦੀ ਪੈਦਾਵਾਰ ਤੇ ਬੁਰਾ ਅਸਰ ਪੈਂਦਾ ਹੈ ਕਣਕ ਦੀ ਬਿਜਾਈ 25 ਅਕ੍ਤੂਬਰ ਤੋਂ ਨਵੰਬਰ ਮਹੀਨੇ ਵਿੱਚ ਕੀਤੀ ਜਾਂਦੀ ਹੈ
Posted by vasava Dharmendra j
Gujarat
15-10-2019 11:23 AM
BIofloc Fish Farming (Hindi) BIOFLOC SYSTEM (बयोफ्लोक सिस्टम) Ø 75% मछली का खाना बेकार हो जाता है तालाब मे, जो तालाब के नीचे बैठ कर अमोनिया का निर्माण करता है Ø अमोनिया एक जहरीला गैस होता है जिससे मछली को बीमारी होती है अमोनिया को तालाब मे नियंत्रण नही कर सकते है Ø इस लिए BIOFLOC का निर्माण हुआ जिससे हम अमोनिया को नियंत्रण कर सकते है और मछली का ख.... (Read More)
BIofloc Fish Farming (Hindi) BIOFLOC SYSTEM (बयोफ्लोक सिस्टम) Ø 75% मछली का खाना बेकार हो जाता है तालाब मे, जो तालाब के नीचे बैठ कर अमोनिया का निर्माण करता है Ø अमोनिया एक जहरीला गैस होता है जिससे मछली को बीमारी होती है अमोनिया को तालाब मे नियंत्रण नही कर सकते है Ø इस लिए BIOFLOC का निर्माण हुआ जिससे हम अमोनिया को नियंत्रण कर सकते है और मछली का खाना बर्बाद नही हो Ø मछली जब खाना खा कर पोटी करती है तो अमोनिया का निर्माण होता है जो मछली को बीमारी पैदा करता है Ø BIOFLOC मै मछली की पोटी को बक्टेरिया प्रोटीन जो की मछली का भोजन होता है उसमे बदल देता है ताकी मछली उसे भी खा सके, BIOFLOC मै मछली का खाना बहुत कम लगता है और खाना बर्बाद नही होता है Ø जो ठोस पोटी बचा उसको भी बक्टेरिया प्रोटीन मे बदल कर मछली के खाने लायक बना देती है पोटी के प्रोटीन मे बदलने के कारण अमोनिया नियंत्रण मे रहता है Ø टैंक की पानी बदलने की जरुरत बहुत कम होता है 15 दिन मै एक बार सिर्फ 5% - 10% पानी बदलना होता है Ø प्रकर्ति तरीके से पोटी को मछली के खाने लायक बनता है कोई केमिकल उपयोग नही होता है BIOFLOC के फ़ायदा अमोनिया को नेचुरल तरीके से कम करता है मछली को नेचुरल खाना मिलता है मछली को ज्यदा प्रोटीन मिलता है जिससे मछली का ग्रोथ अच्छा होता है BIOFLOC मे 1% से कम मछली को बीमारी होती है पानी का क्वालिटी बहुत अच्छा रहता है सब तरफ से ढाल सेन्ट्रल ड्रेनेज की तरफ होना चाहिए जिससे पानी बाहर निकालते समय टैंक का पूरा पानी बाहर निकल जाए आउट लेट से कंट्रोल चेम्बर मे पानी जायगा जहा 4 टैंक का सब पानी एक जगह निकलेगा फिर एक पाइप से बाहर चला जायगा टंकी से 15 CM डाउन पाइप होगा जिसे पानी आसानी से बाहर निकल सके और कंट्रोल चेम्बर मे पानी बिना रुकावट के जा सके 4 डायमीटर की टैंक होनी चाइए पानी का लेवल 1M ही रखना है, 0.2 टैंक खली रखना है 4 Diameter टैंक मे 8 ऑक्सीजन पाइप डालना है 1. वाटर ट्रीटमेंट फ्लोक तयार के लिये दो चीज की जरुरत है 1. मोलासिस – मोलासिस काली गुड से बनता है , मोलासिस मतलब कार्बन, काली गुड को पानी मिलकर गरम करके लिक्विड फॉर्म बना लेना है फिर उसे यूज़ करना है 1000 लीटर पानी मे, मोलासिस 10 ML अगर टैंक 10000 लीटर का है तो 100 ML डालना है 10 ML मोलासिस + 1 लीटर पानी मिलाकर टैंक मे डाले 1. प्रोबाओटिक – ये मार्किट मे मिलता है जो टैंक मे बक्टेरिया का निर्माण करता है प्रोबाओटिक 5 ML (एक चमच) 1000 लीटर पानी मे तो 10000 लीटर मे 50 ML रात को डालना होगा 5 ML प्रोबाओटिक + 1 लीटर पानी मे मिलकर डाले याद रखे – प्रोबाओटिक अगर 5 ML है तो मोलासिस (गुड) 10 ML होगा सबसे पहले टैंक को साबुन से अच्छा से साफ करना है और एक दिन के लिये धुप मे सुखाय 50% पानी टैंक मे डाले , 4 डायमीटर टैंक मे 10 हजार लीटर पानी होता है तो हम 5 हजार लीटर पानी डालेंगे Aeration लगा देना है airpump से जिसे पानी मे हवा जाता रहे ऐसा दो दिन तक करना है स्टोन जो पानी के अन्दर रहेगा जिससे हवा निकलेगा दो दिन बाद TDS उपकरण से टीडीएस चेक करे मिनिमम वैल्यू 1800 होना चाहए 2000 से ऊपर नही जाना चाहए TDS 1800 लाने के लिये हम खडा नमक ( सेंधा नमक ) का प्रयोग करते है आयोडीन नमक यूज़ नही करे एक हजार लीटर मे हम 1KG नमक दोपहर मे डालना होता है’ अगर TDS 1800 नही आए तो थोरा अंदाजा से और नमक डालना है जिससे TDS 1800 हो जाए PH लेवल 6 – 8 के बीच होना चाहए, PH मीटर से पानी का PH लेवल नाप ले अगर PH लेवल 6 से कम है तो बुझा हुआ चुना डाले अगर 6 - 8 PH लेवल हो तो चुना नही डाले मार्किट मे चुना के बदला मे डोलोमाइट भी यूज़ होता है 1000 लीटर मे सिर्फ एक चमच चुना डालना है अगर PH लेवल ऊपर चला गया तो केमिकल डाले वैसे ऊपर नही जाता है जल्दी aeration airpump चलता रहेगा हमेसा 5 या 10 दिन बाद फ्लोक आ जायगा मछली के बच्चे का चुनाव / कैसे डाले टैंक मे मछली 1. सिर्फ एक तरह का जीरा ले दुसरे तरह का जीरा मिक्स नही होना चाहए 2. मछली का बॉडी कम्पलीट होना चाहए, 20 मछली हाथ मे ले चेक करे सब का एक तरह का हो कोई बीमारी नही हो उसको 3. सब जीरा एक साइज़ का होना चाहए, अगर 3 इंच का जीरा हो तो सब 3 इंच का ही हो 4. मछली चंचल होना चाहए, अलसी नही होना चाहए, जो छुने पर रेसपोंड करे आराम से तैरता हो पानी के बिपरीत दिशा मे तैरता हो 5. मछली का बॉडी चमकीला साफ सुथरा हो 6. मछली का जीरा सुबह या शाम को ही लाये 7. मछली का साइज़ 2 इंच से बड़ा होना चाहए 8. मछली को पोलोथिन को बिना खोले नोर्मल पानी मे पैकेट सहित रखे 15 से 20 मिनट ताकी तापमान मे अंतर नही हो जब हम पलास्टिक को खोले तब 9. मछली लाने के बाद पानी मे छोरने के बाद 1 दिन तक या 12 घंटे तक खाना नही दे, एक दिन बाद खाना दे मछली के खाने का प्रबंधन / पानी का प्रबंधन Ø तैरने वाला ही खाना देना चाहए, नही तो खाना नीचे बैठ कर अमोनिया का निर्माण करेगा Ø मछली जब छोटा हो तो ज्यदा प्रोटीन वाला खाना दे जीरो साइज़ फ़ूड, छोटे साइज़ मे प्रोटीन ज्यदा होता है,लेकिन जब मछली थोरा बड़ा हो उस हिसाब से ही खाने का साइज़ बड़ा करे Ø खाने का दर 5% होता है मतलब 100 मछली का वजन 100 ग्राम है तो टोटल एक दिन का खाना 5 ग्राम ही देना है 2 बार या 3 बार example- 2.5 ग्राम एक बार फिर 2.5 ग्राम दुसरे बाद क्यूकि probiotic भी खाना का निमार्ण करती है जो पोटी होता है मछली का उससे, इसलिए BIOFLOC सिस्टम मे खाना कम लगता है Ø खाना 3% से स्टार्ट करे अगर खा जाए तो 4% डाले अगर उसे भी खा जाए तो 5 % अगर नही खाए तो 4% ही डाले Ø बारिश के समय खाना नही डालना चाहए क्यूकि मछली आराम करती है और अलसी हो जाती है पानी का प्रबंधन / पानी की क्वालिटी पानी की क्वालिटी मेन्टेन करना बहुत जरुरी होता है Ø C/N रेसियो मेन्टेन करना जरुरी है C/N मतलब कार्बन/ नाइट्रोजन का रेश्यो स्टैण्डर्ड होता है 10/1 मतलब 10 कार्बन पर 1 नाइट्रोजन Ø C/N मेन्टेन का आसान तरीका floc कोण मे अगर floc 30% है तो C/N मेन्टेन होगा नार्मल floc रेंज है 20 – 40% Ø कोण से floc चेक करे अगर 30% से नीचे जा रहा है तो probiotic और मोलासिस डालना है टैंक मे Ø अगर floc 30% से ऊपर जा रहा है तो पानी फेकना है थोरा सा फिर नया पानी डालना है Ø अगर पानी से बदबू आए या पानी खराब हो जाए तो 30 – 50 % पानी फेक देना चाहए और नया पानी ऐड करना चाहए बीमारी प्रबंधन वैसे BIOFLOC सिस्टम मे मछली को बीमारी बहुत कम होती है 1% से भी कम लेकिन फिर भी हो जाए तो रेयर केस मे एंटीबायोटिक दावा का उपयोग करना चाहए या देसी नुक्सा पपीता के पत्तो को पिस कर पानी मिला कर टैंक मे डाले 10ML 1000 लीटर पानी मे डालना है 10000 लीटर टैंक मे 100ML डालना होगा मछली का हार्वेस्ट या मछली को बेचना हार्वेस्ट दोपहर या शाम के समय करे हार्वेस्ट के 12 घंटे पहले खाना नही दे मछली को पानी का निकास धीरे धीरे करे नही तो मछली टेंशन मे आ जायगी तयारी पहले से करे , जाल से मछली को पकडे जिससे मछली को चोट न लगे मेडिसिन/ ट्रीटमेंट 1. Tetracyclin कैप्सूल या Teramysine कैप्सूल (एंटीबायोटिक) 2. Bicosule – B-Complex Vitamine 3. Potassium Permanganate(मछली के जीरा को साफ करने के लिये) फिश के बच्चे की देखभाल, बीमारी अगर मछली का शीड (बच्चा) अच्छा मिल जाए तो 70% काम आसानी से हो जायगा Ø 200 लाइन का सीड मतलब- 1kg पर 200 फिश का बच्चा Ø 500 लाइन का सीड मतलब- 1kg पर 500 फिश का बच्चा bipfloc के लिये सबसे अच्छा 500 लाइन का अच्छा होता है बॉडी वेट/ बायोमास अगर 500 लाइन का बच्चा है और एक टैंक मे अगर 1000 बच्चा डालना है तो बायोमास 2kg होगा बायोमास मछली को खाना देने के लिये जरुरी होती है , उदहारण- अगर 3% खाना देना है तो 60 ग्राम खाना देना होगा, 2kg , 500 लाइन के बच्चे के लिये, इसतरह किसी भी लाइन या वेट का हम खाना निकल सकते है मछली के बच्चो को sanitize (स्वच्छ) कैसे करे potassium permanganate को लाल दावा भी बोलते है या पोटाश भी बोलते है 2 ग्राम लाल दावा को 30 लीटर पानी का घोल बना ले , लाइट रेड कलर का पानी बनेगा, फिर उसमे मछली के बच्चो को जाली के मदद से सिर्फ डीप करना है 2 या 3 बाद याद रखे लाल पानी मे मछली को छोरना नही है उसके बाद दूसरा बर्तन मे 25 लीटर पानी मे 500 ग्राम नमक डाले और लाल पानी के बाद इस नमक पानी मे जली के सहारे डीप करे’ अगर बच्चा healthy है तो डायरेक्ट टैंक मे डाल दे अगर healthy नही है तो 1000 लीटर पानी मे 1kg नमक को घोल ले फिर 2 या 4 दिन के लिये मछली के बच्चो को उसमे डाल दे रोज थोरा थोरा पानी चेंज करते रहे जब टैंक मे floc बन जाए तब ही बच्चा डालना चाहए इसके लिये पहले से टैंक की तयारी करनी चाहए अगर बच्चा कमजोर है तो becosule पानी मे घोल कर मछली के खाने मे मिलाकर देना चाहए अगर मछली बीमार हो तो teramysine 2 कैप्सूल 500mg + bicosule 2 कैप्सूल 50 ग्राम पानी मे मिलाकर फिर मछली के खाने मे मिक्स करके 15 मिनट छोर दे 15 मिनट के बाद मछली को देना चाहए डोज – 1 टाइम × 2 दिन याद रखे biofloc मे बहुत कम बीमारी होता है सीरियस कंडीशन मे ही दवा देना चाहए देसी जुगार अगर बच्चा बीमार हो तो खाने मे थोरा हल्दी मिलाकर देना चाहए ये एंटीबायोटिक का काम करता है हमेशा एंटीबायोटिक के साथ विटामिन B- काम्प्लेक्स की कैप्सूल देना चाहए मछली मे 2 तरह के वीमारी आती है 1. वाक्टेरिया 2. फंगल वाक्टेरिया के लिये लाल पानी’ और फंगल के लिये नमक पानी ही इलाज है C:N Ratio और अमोनिया स्टैण्डर्ड अनुपात 10:1 है नाइट्रोजन(N) 1 भाग और कार्बन(C) 10 भाग नाइट्रोजन’ मतलब अमोनिया तो एक भाग अमोनिया को समाप्त करने के लिये 10 भाग कार्बन की जरुरत होती है मतलब 10 भाग मोलासिस (गुड) 1 हिस्सा अमोनिया(नाइट्रोजन) और 10 हिस्सा कार्बन को बक्टेरिया प्रोटीन सेल मे बदल देता है उसी को FLOG कहते है जो की मछली फिर से खा सकती है यही biofloc का मैं परपस है पानी के अन्दर अमोनिया 24 घंटे बनता रहता है जब तक टैंक मे मछली है तब तक अमोनिया बनता रहेगा FLOC अच्छा से नही बनने के कारण अमोनिया का मात्रा बढ़ जाता है, अगर floc अच्छा से बन गया तो अमोनिया कंट्रोल मे रहेगा floc बढ़ जाए तो गुड जिसको मोलासिस उसको थोरा पानी मिलाकर टैंक मे डाल दे अमोनिया का कैलकुलेशन Example – टैंक मे 100kg मछली है तो कितना अमोनिया रोज बनेगा मान लीजिये मछली के टोटल वजन का हम 4% खाना देते है मछली को 100 × 4% = 4 kg खाना रोज दे रहे है चुकी मछली के खाने मे 30 % प्रोटीन रहता है ( जब मछली बड़ा हो जाए तो कम प्रोटीन वाला खाना देते है ) इसलिए, 4000 ग्राम × 30% = 1200 ग्राम प्रोटीन रोज मछली को दे रहे है प्रोटीन मे 16 % नाइट्रोजन होता है इसलिए, 1200 ग्राम × 16% = 192 ग्राम नाइट्रोजन अब, 75% नाइट्रोजन मछली पोटी से निकाल देती है , तो, अब 192 ग्राम × 75% = 144 ग्राम नाइट्रोजन, जो की यही अमोनिया जहरीला पदार्थ है जो मछली को नुकसान करता है अगर floc अच्छा से डेवेलोप हो गया तो ये अमोनिया प्रोटीन मे बदल जायगा, अगर प्रोटीन मे नही बदला तो मोलासिस मिलाना परेगा चुकी C:N ratio 10:1 होता है 144 ग्राम नाइट्रोजन के लिये 144 ग्राम × 10 = 1440 ग्राम कार्बन(मोलासिस)(गुड) मिलाना परेगा सिंपल कैलकुलेशन अमोनिया के लिये अमोनिया टेस्ट किट से पानी मे अमोनिया की मात्रा चेक करे उदहारण के लिये 1 PPM अमोनिया --------1 ग्राम अमोनिया है 1000 लीटर पानी मे, (10000 लीटर मे 10 ग्राम होगा ) 2 PPM अमोनिया----------2 ग्राम अमोनिया है 1000 लीटर पानी मे ऐसे ही 3 PPM, 4PPM, 6PPM, 20 PPM-------- Example- 2 PPM अमोनिया के लिये 20 ग्राम मोलासिस (गुड) मिलाना परेगा 1000 लीटर पानी मे, इसलिए 10000लीटर मे 200 ग्राम मोलासिस मिलाना परेगा अमोनिया कंट्रोल के लिये------(C:N ratio 10:1) मोलासिस डायरेक्ट नही मिलाना चाहए उसको FCO फॉर्म मे मिलाये लेकिन इमरजेंसी मे मोलासिस को पानी मे मिला कर डायरेक्ट टैंक मे डाल सकते है FCO कैसे बनाये fco खाना पचाने का काम अत है ,चुकी मोलासिस मिला है तो ये अमोनिया भी कंट्रोल करती है पहला बिधि 2 लीटर पानी मे ,5 ग्राम probiotic और 20 ग्राम मोलासिस को पानी के साथ किसी धकन वला बाल्टी मे अच्छा तरह से मिलाये धकन लगा दे धकन मे दो छेद कर दे और एक छेद मे aeration लगा दे 24 घंटे के लिये और 24 घंटे बाद नीचे बताये बिधि से देना है याद रखे ये सिर्फ 10 दिन तक ही रहता है उसके बाद खराब हो जाता है, थोरा गंध रहेगा लेकिन कोई बात नही ख्रराब नही होगा 10 दिन तक 50 ग्राम मछली का खाना लेकर उसमे 5 ग्राम fco मिलाये, ये मात्रा है मछली के बडी वेट से कितना खाना दे रहे है उसके अनुसार हिसाब लगा ले उधारण-200 ग्राम खाना के लिये 20 ग्राम fco देना है दूसरी बिधि 50 ग्राम probiotic + 200 ग्राम मोलासिस + 400 राइस ब्रायन एंड 20 लीटर पानी मे ऊपर बताये गए बिधि से बनाये याद रखे राइस ब्रायन pH लेवल को कम करता है fco हर हफ्ता देना है देने से पहले वाटरपैरामीटर जाँच कर ले अगर वाटर पैरामीटर अच्छा है तो देने की जरुरत नही है कुछ जरुरी बाते मछली को सुरु मे बॉडी वेट का 2 या 3% ही सुबह और शाम खाना देना चाहए 20 से 25 दिन बाद चार्ट के अनुसार देना चाहए मछली को 2 से 4 मिनट मे सब खाना खा लेना चाहए मछली के बच्चा डालने के 20 या 25 दिन तक अमोनिया थोरा बढेगा जब floc काम करने लगेगा तो अमोनिया अपने आप कम हो जायेगा आशा करता हू की हमारे गरीब किसान को लाभ हो जय जवान जय किसान और जय फिश टेक्नोलोजी
Posted by Govind Kumar
Punjab
15-10-2019 11:20 AM
kirpa krke eh dso ji k tusi is te pehla koi spray kiti hai, ta ki tuhanu is bare poori jaankari diti jaave.

Posted by gaurav rana
Haryana
15-10-2019 11:17 AM
yaddi pashu 21 dino ke badd heat mai nhi aata hai too uske 50% gabhin rehne ki ass hoti hai, baki pashu ko 3 mahine purre hone ke badd doctor se janch krwa lene chahiye jisse uske gabhin hone ja naa hone ka sahi ptaa lgg jata hai..
Posted by hardeep singh
Punjab
15-10-2019 11:16 AM
ਖਾਦਾਂ ਦੀ ਵਰਤੋਂ ਮਿੱਟੀ ਪਰਖ਼ ਆਧਾਰ ਤੇ ਕਰੋ ਜੇ ਮਿੱਟੀ ਦੀ ਪਰਖ਼ ਨਹੀਂ ਕਰਵਾਈ ਤਾਂ ਕਣਕ ਲਈ ਦਰਮਿਆਨੀ ਉਪਜਾਊ ਜ਼ਮੀਨ ਲਈ 55 ਕਿਲੋ ਡੀ ਏ ਪੀ ਪ੍ਰਤੀ ਏਕੜ ਬਿਜਾਈ ਸਮੇਂ ਪੋਰ ਦਿਓ
ਉਪਰੰਤ ਪਹਿਲੇ ਅਤੇ ਦੂਜੇ ਪਾਣੀ ਨਾਲ 45 ਕਿੱਲੋ ਯੂਰੀਆ ਪ੍ਰਤੀ ਏਕੜ ਪਾਓ
ਜੇ ਬਾਰਿਸ਼ਾਂ ਕਾਰਨ ਦੂਜੇ ਪਾਣੀ ਵਿਚ ਦੇਰੀ ਹੋਵੇ ਤਾਂ ਯੂਰੀਆ ਦੀ ਦੂਜੀ ਕਿਸ਼ਤ ਬਿਜਾਈ ਤੋਂ 55 ਦਿਨਾਂ ਬਾਅਦ ਜ਼ਰੂਰ ਦੇ ਦੇਣੀ ਚਾਹੀਦੀ ਹੈ
ਪੋ.... (Read More)
ਖਾਦਾਂ ਦੀ ਵਰਤੋਂ ਮਿੱਟੀ ਪਰਖ਼ ਆਧਾਰ ਤੇ ਕਰੋ ਜੇ ਮਿੱਟੀ ਦੀ ਪਰਖ਼ ਨਹੀਂ ਕਰਵਾਈ ਤਾਂ ਕਣਕ ਲਈ ਦਰਮਿਆਨੀ ਉਪਜਾਊ ਜ਼ਮੀਨ ਲਈ 55 ਕਿਲੋ ਡੀ ਏ ਪੀ ਪ੍ਰਤੀ ਏਕੜ ਬਿਜਾਈ ਸਮੇਂ ਪੋਰ ਦਿਓ
ਉਪਰੰਤ ਪਹਿਲੇ ਅਤੇ ਦੂਜੇ ਪਾਣੀ ਨਾਲ 45 ਕਿੱਲੋ ਯੂਰੀਆ ਪ੍ਰਤੀ ਏਕੜ ਪਾਓ
ਜੇ ਬਾਰਿਸ਼ਾਂ ਕਾਰਨ ਦੂਜੇ ਪਾਣੀ ਵਿਚ ਦੇਰੀ ਹੋਵੇ ਤਾਂ ਯੂਰੀਆ ਦੀ ਦੂਜੀ ਕਿਸ਼ਤ ਬਿਜਾਈ ਤੋਂ 55 ਦਿਨਾਂ ਬਾਅਦ ਜ਼ਰੂਰ ਦੇ ਦੇਣੀ ਚਾਹੀਦੀ ਹੈ
ਪੋਟਾਸ਼ ਤੱਤ ਦੀ ਘਾਟ ਵਾਲੀਆ ਜਮੀਨਾ ਵਿੱਚ 12 ਕਿਲੋ ਪੋਟਾਸ਼ (20 ਕਿਲੋ ਮਿਊਰੇਟ ਆਫ ਪੋਟਾਸ਼) ਪ੍ਰਤੀ ਏਕੜ ਪਾਓ ਗੁਰਦਾਸਪੁਰ, ਹੁਸ਼ਿਆਰਪੁਰ, ਰੋਪੜ ਅਤੇ ਸ਼ਹੀਦ ਭਗਤ ਸਿੰਘ ਨਗਰ ਜ਼ਿਲ੍ਹਿਆਂ ਲਈ 24 ਕਿਲੋ ਪੋਟਾਸ਼ (40 ਕਿਲੋ ਮਿਊਰੇਟ ਆਫ ਪੋਟਾਸ਼) ਪ੍ਰਤੀ ਏਕੜ ਪਾਓ
Posted by Baldev moga
Haryana
15-10-2019 11:12 AM
baldev ji gehu ki nayi kisam HD3226 aur DBW187 hai.dhanywad

Posted by Kanhaiya Patel
Chattisgarh
15-10-2019 11:06 AM
Kanhaiya ji kripya aap apna swal vistar se pooche taki aapko iske bare men poori jankari di ja sake.dhanywad

Posted by sukhwinder singh
Punjab
15-10-2019 10:59 AM
ਤੁਸੀ ਕਣਕ ਦੀਆਂ ਹੇਠ ਦਿਤੀਆਂ ਕਿਸਮਾਂ ਦੀ ਬਿਜਾਈ ਕਰ ਸਕਦੇ ਹੋ :-UNNAT PBW 343: ਇਹ ਕਿਸਮ ਸਿੰਚਾਈ ਵਾਲੇ ਖੇਤਰਾਂ ਵਿੱਚ ਲਗਾਉਣ ਯੋਗ ਹੈ ਪੱਕਣ ਦੇ ਲਈ ਇਹ 155 ਦਿਨਾਂ ਦਾ ਸਮਾਂ ਲੈਦੀ ਹੈ ਇਹ ਕਰਨਾਲ ਬੰਟ ਦੀ ਪ੍ਰਤਿਰੋਧੀ ਅਤੇ ਬਲਾਈਟ ਨੂੰ ਵੀ ਸਹਿਣ ਯੋਗ ਹੈ ਇਸਦੀ ਔਸਤ ਪੈਦਾਵਾਰ 23.2 ਕੁਇੰਟਲ ਪ੍ਰਤੀ ਏਕੜ ਹੈ
UNNAT PBW 550: ਇਹ ਕਿਸਮ ਪੰਜਾਬ ਦੇ ਸਾਰਿਆਂ ਇਲਾਕਿਆਂ ਵਿੱਚ ਉਗਾਈ ਜਾਂਦੀ ਹੈ ਇਹ ਕਿਸਮ 145 ਦਿਨਾਂ ਵ.... (Read More)
ਤੁਸੀ ਕਣਕ ਦੀਆਂ ਹੇਠ ਦਿਤੀਆਂ ਕਿਸਮਾਂ ਦੀ ਬਿਜਾਈ ਕਰ ਸਕਦੇ ਹੋ :-UNNAT PBW 343: ਇਹ ਕਿਸਮ ਸਿੰਚਾਈ ਵਾਲੇ ਖੇਤਰਾਂ ਵਿੱਚ ਲਗਾਉਣ ਯੋਗ ਹੈ ਪੱਕਣ ਦੇ ਲਈ ਇਹ 155 ਦਿਨਾਂ ਦਾ ਸਮਾਂ ਲੈਦੀ ਹੈ ਇਹ ਕਰਨਾਲ ਬੰਟ ਦੀ ਪ੍ਰਤਿਰੋਧੀ ਅਤੇ ਬਲਾਈਟ ਨੂੰ ਵੀ ਸਹਿਣ ਯੋਗ ਹੈ ਇਸਦੀ ਔਸਤ ਪੈਦਾਵਾਰ 23.2 ਕੁਇੰਟਲ ਪ੍ਰਤੀ ਏਕੜ ਹੈ
UNNAT PBW 550: ਇਹ ਕਿਸਮ ਪੰਜਾਬ ਦੇ ਸਾਰਿਆਂ ਇਲਾਕਿਆਂ ਵਿੱਚ ਉਗਾਈ ਜਾਂਦੀ ਹੈ ਇਹ ਕਿਸਮ 145 ਦਿਨਾਂ ਵਿੱਚ ਪੱਕ ਕੇ ਤਿਆਰ ਹੋ ਜਾਂਦੀ ਹੈ ਇਹ ਪੀਲੀ ਅਤੇ ਭੂਰੀ ਕੁੰਗੀ ਦੀ ਰੋਧਕ ਕਿਸਮ ਹੈ ਇਸਦਾ ਔਸਤਨ ਕੱਦ 86 ਸੈ.ਮੀ. ਹੁੰਦਾ ਹੈ ਇਸ ਦਾ ਔਸਤਨ ਝਾੜ 23 ਕੁਇੰਟਲ ਪ੍ਰਤੀ ਏਕੜ ਹੁੰਦਾ ਹੈ
PBW 1 Zn: ਇਸ ਕਿਸਮ ਦੇ ਪੌਦੇ ਦਾ ਔਸਤਨ ਕੱਦ 103 ਸੈ.ਮੀ. ਹੁੰਦਾ ਹੈ ਇਹ ਕਿਸਮ 151 ਦਿਨਾਂ ਵਿੱਚ ਕਟਾਈ ਲਈ ਤਿਆਰ ਹੋ ਜਾਂਦੀ ਹੈ ਇਸ ਦਾ ਔਸਤਨ ਝਾੜ 22.5 ਕੁਇੰਟਲ ਪ੍ਰਤੀ ਏਕੜ ਹੁੰਦਾ ਹੈ
PBW 725: ਇਹ ਕਿਸਮ ਪੀ ਏ ਯੂ, ਐਗਰੀਕਲਚਰ ਯੂਨੀਵਰਸਿਟੀ ਦੁਆਰਾ ਸਿਫਾਰਿਸ਼ ਕੀਤੀ ਗਈ ਹੈ ਇਹ ਇੱਕ ਮੱਧਰੀ ਕਿਸਮ ਹੈ ਅਤੇ ਇਹ ਸਿੰਚਾਈ ਵਾਲੇ ਖੇਤਰਾਂ ਵਿੱਚ ਲਗਾਈ ਜਾਂਦੀ ਹੈ ਇਹ ਪੀਲੇ ਅਤੇ ਭੂਰੇ ਜੰਗ ਦੀ ਪ੍ਰਤਿਰੋਧੀ ਕਿਸਮ ਹੈ ਇਸਦੇ ਦਾਣੇ ਮੋਟੇ , ਅਤੇ ਗਹਿਰੇ ਰੰਗ ਦੇ ਹੁੰਦੇ ਹਨ ਇਹ 155 ਦਿਨਾਂ ਵਿੱਚ ਪੱਕ ਕੇ ਤਿਆਰ ਹੋ ਜਾਂਦੀ ਹੈ ਇਸਦੀ ਸਲਾਨਾ ਔਸਤ ਝਾੜ 23 ਕੁਇੰਟਲ ਪ੍ਰਤੀ ਏਕੜ ਹੈ
PBW 677: ਇਹ ਕਿਸਮ 160 ਦਿਨਾਂ ਵਿੱਚ ਕਟਾਈ ਲਈ ਤਿਆਰ ਹੋ ਜਾਂਦੀ ਹੈ ਇਸਦਾ ਔਸਤ ਝਾੜ 22.4 ਕੁਇੰਟਲ ਪ੍ਰਤੀ ਏਕੜ ਹੈ HD 3086 (PusaGautam) : ਇਸ ਦਾ ਔਸਤਨ ਝਾੜ 23 ਕੁਇੰਟਲ ਪ੍ਰਤੀ ਏਕੜ ਹੁੰਦਾ ਹੈ ਇਹ ਪੱਤਿਆਂ ਦੇ ਪੀਲੇਪਣ ਅਤੇ ਭੂਰੇਪਣ ਦੀ ਬਿਮਾਰੀ ਤੋਂ ਰਹਿਤ ਹੁੰਦੀ ਹੈ ਵਧੀਆ ਕਿਮਸ ਦੇ ਬਰੈੱਡ ਬਣਾਉਣ ਦੇ ਸਾਰੇ ਗੁਣ/ਤੱਤ ਇਸ ਵਿਚ ਮੌਜੂਦ ਹਨ
WH 1105: ਇਸ ਦੀ ਕਾਢ ਪੰਜਾਬ ਖੇਤੀਬਾੜੀ ਯੂਨੀਵਰਸਿਟੀ ਵੱਲੋਂ ਕੀਤੀ ਗਈ ਹੈ ਇਹ ਇੱਕ ਛੋਟੇ ਕੱਦ ਵਾਲੀ ਕਿਸਮ ਹੈ ਜਿਸ ਵਿਚ ਬੂਟੇ ਦਾ ਔਸਤਨ ਕੱਦ 97 ਸੈ.ਮੀ. ਤੱਕ ਹੁੰਦਾ ਹੈ ਇਸ ਦੇ ਦਾਣੇ ਸੁਨਹਿਰੇ, ਮਧਰੇ, ਸਖਤ ਅਤੇ ਚਮਕਦਾਰ ਹੁੰਦੇ ਹਨ ਇਹ ਪੱਤਿਆਂ ਦੇ ਪੀਲੇਪਣ ਅਤੇ ਭੂਰੇਪਣ ਦੀ ਬਿਮਾਰੀ ਤੋਂ ਰਹਿਤ ਹੁੰਦੀ ਹੈ ਪਰੰਤੂ ਇਹ ਦਾਣਿਆਂ ਦੇ ਖਰਾਬ ਹੋਣ ਅਤੇ ਸਿੱਟਿਆਂ ਦੇ ਭੂਰੇ ਪੈਣ ਦੀ ਬਿਮਾਰੀ ਪ੍ਰਤੀ ਸੰਵੇਦਨਸ਼ੀਲ ਹੈ ਇਹ ਲਗਭਗ 157 ਦਿਨਾਂ ਵਿੱਚ ਪੱਕ ਜਾਂਦੀ ਹੈ ਇਸ ਦੀ ਔਸਤਨ ਪੈਦਾਵਾਰ 23.1 ਕੁਇੰਟਲ ਪ੍ਰਤੀ ਏਕੜ ਹੈ
HD 2967: ਇਹ ਵੱਡੇ ਕੱਦ ਦੀ ਕਿਸਮ ਹੈ ਜਿਸ ਵਿਚ ਬੂਟੇ ਦਾ ਔਸਤਨ ਕੱਦ 101 ਸੈ.ਮੀ. ਤੱਕ ਹੁੰਦਾ ਹੈ ਇਸ ਦੇ ਦਾਣੇ ਸੁਨਹਿਰੇ, ਮਧਰੇ, ਸਖਤ ਅਤੇ ਚਮਕਦਾਰ ਹੁੰਦੇ ਹਨ ਇਹ ਲਗਭਗ 157 ਦਿਨਾਂ ਵਿੱਚ ਪੱਕ ਜਾਂਦੀ ਹੈ ਇਸ ਦੀ ਔਸਤਨ ਪੈਦਾਵਾਰ 21.5 ਕੁਇੰਟਲ ਪ੍ਰਤੀ ਏਕੜ ਹੈ
PBW 621: ਇਹ ਕਿਸਮ ਪੰਜਾਬ ਦੇ ਸਾਰਿਆਂ ਇਲਾਕਿਆਂ ਵਿੱਚ ਉਗਾਈ ਜਾਂਦੀ ਹੈ ਇਹ ਕਿਸਮ 158 ਦਿਨਾਂ ਵਿੱਚ ਪੱਕ ਕੇ ਤਿਆਰ ਹੋ ਜਾਂਦੀ ਹੈ ਇਹ ਪੀਲੀ ਅਤੇ ਭੂਰੀ ਕੁੰਗੀ ਦੀ ਰੋਧਕ ਕਿਸਮ ਹੈ ਇਸਦਾ ਔਸਤਨ ਕੱਦ 100 ਸੈ.ਮੀ. ਹੁੰਦਾ ਹੈI
HD 3226:- jhaad 24 qtl / acre.

Posted by Rajwinder singh Dhillon
Punjab
15-10-2019 10:57 AM
BhaaG deputy director dairy development or krishi vigyan kendar MOGA or GADVASU VETERINARY UNIVERSITY LUDHIANA NAAL SAMPARK KARO G

Posted by sukhwinder singh
Punjab
15-10-2019 10:55 AM
BhaaG isnu 1kg kanak da dalia 500g gur ch rinh ke swer te aina hi shaam nu khuao Rajwa hara chaara te har 3kg dudh lai 1kg feed pao har 3 mahine baad malap rehat karo

Posted by GYANENDRA GUPTA
Uttar Pradesh
15-10-2019 10:50 AM
Shrimaan ji, ap faslein jaise ke piyaj, lahsun or gobhi ki bijai kar sakte hain, dhanywad

Posted by चन्द्रप्रकाश सिन्हा
Chattisgarh
15-10-2019 10:47 AM
सिन्हा जी कटहल की हाईब्रिड किस्म नहीं होती है
Posted by Sidhu Guravtar
Himachal Pradesh
15-10-2019 10:40 AM
ਸਿੱਧੂ ਜੀ ਤੁਸੀ ਸਬਜ਼ੀਆਂ ਜਿਵੇ ਗਾਜਰ, ਸ਼ਲਗਮ, ਫੁੱਲਗੋਭੀ, ਆਲੂ, ਸਰ੍ਹੋਂ, ਮੂਲੀ, ਪਾਲਕ, ਪੱਤਾ ਗੋਭੀ, ਧਨੀਆ, ਸੌਂਫ, ਰਾਜਮਾਹ, ਮਟਰ, ਬਰੌਕਲੀ, ਸਲਾਦ, ਬੈਂਗਣ, ਹਰਾ ਪਿਆਜ, ਲਸਣ ਦੀ ਬਿਜਾਈ ਹੁੰਦੀ ਹੈ ਧੰਨਵਾਦ
Posted by Hari singh shekhawat
Rajasthan
15-10-2019 10:37 AM
Hari ji bakrio ke liye aap Berseem, sarso, makhan ghas lgga skte hai.

Posted by navpreet Singh
Punjab
15-10-2019 10:36 AM
Navpreet ji tuci sahiwal/rathi cow lenn lai Gulam Ashraf 9915672525 nal sampark kr skde ho.
Posted by akash singh
Punjab
15-10-2019 10:32 AM
ਅਮਰੀਕ ਜੀ ਤੁਸੀ ਮੈਗਨੀਜ ਕਿਸੇ ਵੀ ਕੰਪਨੀ ਦੀ ਖਰੀਦ ਸਕਦੇ ਹੋ ਜੋ ਤੁਹਾਡੇ budget ਦੇ ਹਿਸਾਬ ਨਾਲ ਹੋਏ ਧੰਨਵਾਦ
Posted by akash singh
Punjab
15-10-2019 10:31 AM
amrik ji eh v chaude patte vale nadeena di roktham kardi hai isdi matra 9-15gram prati acre de hisab nal varti jandi hai.dhanwad
Posted by akash singh
Punjab
15-10-2019 10:30 AM
ਇਹ ਇੱਕ ਨਦੀਨਨਾਸ਼ਕ ਹੈ ਜਿਸ ਵਿੱਚ 2,4D amine salt ਨਾਮ ਦਾ ਸਾਲਟ ਮੌਜੂਦ ਹੁੰਦਾ ਹੈ ਇਹ ਪੱਤਿਆਂ ਵਾਲੇ ਨਦੀਨਾਂ ਨੂੰ ਖਤਮ ਕਰਦਾ ਹੈ ਇਸ ਦੀ ਮਾਤਰਾ 350-500ml ਪ੍ਰਤੀ ਏਕੜ ਹੁੰਦੀ ਹੈ
Posted by akash singh
Punjab
15-10-2019 10:29 AM
eh ik nadeen-nashi hai, jis di varto kanak ate jhone vich chaude patte wale ndeena di roktham lyi kiti jandi hai. isdi varto 12-15gm prati 100 litre pani de hisab nal kiti jandi hai.
Posted by akash singh
Punjab
15-10-2019 10:27 AM
eh ik nadeen-nashi hai, jis di varto chaude patte wale ndeena di roktham lyi kiti jandi hai. isdi dose 200-400gm prati acre hundi hai.
Posted by akash singh
Punjab
15-10-2019 10:27 AM
eh ik nadeen-nashi hai, jis di varto kanak ate jhone vich chaude patte wale ndeena di roktham lyi kiti jandi hai. isdi varto 2ml prati litre pani de hisab nal kiti jandi hai.
Posted by happy
Punjab
15-10-2019 10:24 AM
Shrimaan ji is vich tuc tili @ 200 ml prati acre de hisaab nal spray karo, dhanwad

Posted by avtar Singh
Punjab
15-10-2019 10:17 AM
Hun tusi Pyaz, matar, mirch, shakarkandi, tmatar, phull gobhi, bengan, lettuce di bijayi kr skde ho.
Posted by Durgesh singh
Uttar Pradesh
15-10-2019 10:17 AM
Durgesh ji, yeh fungus ka hamla hua hai, iski roktham ke liye ap tilt @ 200 ml prati acre ke hisaab se spray karein, dhanywad
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