Posted by Gautam Bairwa
Rajasthan
15-10-2019 07:48 PM
bhai sahib rajwa hara chaara te har 3kg dudh lai bhains ko 1kg wadhya feed deo har 3 mahine baad pet ke kirhe nikalne ki dwaee deo

Posted by Dharminder Dharm
Punjab
15-10-2019 07:47 PM
Dharminder ji Enerdyna da vdia result hai tuci isdi varto kr skde ho ehh tuci pashu nu suun ton pehla v de skde ho ate suun ton badd v de skde ho, isda koi nuksan nhi hai iss nal pashu nu energy mildi hai, dhudh vich fyada hunda hai ate pashu di kamjori durr hundi hai.

Posted by Chenaram
Rajasthan
15-10-2019 07:45 PM
बीजों को मिट्टी में पैदा होने वाली बीमारियों से बचाने के लिए फफूंदीनाशक जैसे कि कार्बेनडाज़िम 12 प्रतिशत + मैनकोज़ेब 63 प्रतिशत डब्लयू पी (साफ) 2 ग्राम से प्रति किलो बीजों को बिजाई से पहले उपचार करें दीमक वाली ज़मीन पर बिजाई के लिए बीजों को क्लोरपाइरीफॉस 20 ई सी 10 मि.ली. से प्रति किलो बीजों का उपचार करें
बीजों का मै.... (Read More)
बीजों को मिट्टी में पैदा होने वाली बीमारियों से बचाने के लिए फफूंदीनाशक जैसे कि कार्बेनडाज़िम 12 प्रतिशत + मैनकोज़ेब 63 प्रतिशत डब्लयू पी (साफ) 2 ग्राम से प्रति किलो बीजों को बिजाई से पहले उपचार करें दीमक वाली ज़मीन पर बिजाई के लिए बीजों को क्लोरपाइरीफॉस 20 ई सी 10 मि.ली. से प्रति किलो बीजों का उपचार करें
बीजों का मैसोराइज़ोबियम से टीकाकरण करें इससे चने की पैदावार 7 प्रतिशत तक वृद्धि होती है इस तरह करने के लिए बीजों को पानी में भिगोकर, उन पर मैसोराइज़ोबियम डालें टीकाकरण से बीजों को छांव में सुखाएं
Posted by Rakesh jakhar
Rajasthan
15-10-2019 07:45 PM
Rakesh ji aap iske uper NPK 191919 ek kilo ko 150 litre pani ke hisab se spray karen.dhanywad
Posted by Mukesh Kumar
Uttar Pradesh
15-10-2019 07:41 PM
मुकेश जी आप इसके जड़ों में कीट चेक करें अगर मौजूद है तो कृपया हमे बताये ताकि आपको इसके बारे में पूरी जानकारी दी जा सके धन्यवाद
Posted by Sewak Dalio
Punjab
15-10-2019 07:39 PM
is lyi kise khaas dwayi di lorh nhi, tusi keval neem diya pattiya ate machis diya tiliya rakh deyo ji.

Posted by Kumar Rajeev
Uttar Pradesh
15-10-2019 07:38 PM
प्याज़ एक प्रसिद्ध व्यापक सब्जी वाली प्रजाति है इसकी खेती अलग-अलग किस्म की मिट्टी जैसे की रेतली दोमट, चिकनी, गार और भारी मिट्टी में की जा सकती है यह गहरी दोमट और जलोढ़ मिट्टी, जिसका निकास प्रबंध बढ़िया, नमी को बरकरार रखने की समर्थता, जैविक तत्वों वाली मिट्टी में बढ़िया परिणाम देती है विरली और रेतली मिट्टी इसकी ख.... (Read More)
प्याज़ एक प्रसिद्ध व्यापक सब्जी वाली प्रजाति है इसकी खेती अलग-अलग किस्म की मिट्टी जैसे की रेतली दोमट, चिकनी, गार और भारी मिट्टी में की जा सकती है यह गहरी दोमट और जलोढ़ मिट्टी, जिसका निकास प्रबंध बढ़िया, नमी को बरकरार रखने की समर्थता, जैविक तत्वों वाली मिट्टी में बढ़िया परिणाम देती है विरली और रेतली मिट्टी इसकी खेती के लिए बढ़िया नहीं मानी जाती है, क्योंकि मिट्टी के घटिया जमाव के कारण इसमें गांठों का उत्पादन सही नहीं होता है इसकी खेती के लिए मिट्टी का pH 6-7 होना चाहिए प्रसिद्ध किस्में:-alyanpur Red Round: यह उत्तर प्रदेश की प्रसद्धि किस्म है इसकी गांठे भूरे रंग की और गोलाकार आकार की होती हैं इसके पौधे 150-160 दिनों में कटाई के लिए तैयार हो जाते हैं इसकी औसतन पैदावार 8-10 टन प्रति एकड़ होती है Bhima Shakti: यह खरीफ के साथ साथ रबी के मौसम में उगाने के लिए उपयुक्त है यह किस्म रोपाई के 130 दिन बाद कटाई के लिए तैयार हो जाती है इसकी औसतन पैदावारा 170 क्विंटल प्रति एकड़ होती है Arka Kalyan: इसकी गांठे गहरे गुलाबी रंग की होती हैं इसकी औसतन पैदावार 135 क्विंटल प्रति एकड़ होती है Pusa White Round: इसकी गांठे सफेद, गोल और समतल होती हैं इसकी औसतन पैदावार 120 क्विंटल प्रति एकड़ होती है Pusa white flat: इसकी गांठे सफेद, चपटी और मध्यम से बड़े आकार की होती हैं यह किस्म डीहाइड्रेशन के लिए उपयुक्त है मिट्टी को भुरभुरा बनाने के लिए तीन-चार बार गहराई से जोताई करें मिट्टी में जैविक तत्वों की मात्रा बढ़ाने के लिए रूड़ी की खाद डालें फिर खेत को छोटे-छोटे प्लाटों में बांट दे नर्सरी तैयार करने के उचित समय मध्य-अक्तूबर से मध्य-नवबंर होता है नए पौधे मध्य-दिसंबर से मध्य-जनवरी तक रोपाई के लिए तैयार हो जाते है रोपाई के लिए 10-15 सैं.मी. कद के पौधे चुनें खरीफ के मौसम में रोपाई के लिए मई से जून का महीना नर्सरी तैयार करने के लिए उपयुक्त होता है बिजाई के 6-8 सप्ताह बाद नए पौधे रोपाई के लिए तैयार हो जाते हैं जुलाई -अगस्त के महीने में रोपण कर दें रोपण के समय, पंक्तियों के बीच 15 सैं.मी. और पौधों के बीच 10 सैं.मी. का फासला रखें नर्सरी में बीज 1-2 सैं.मी. गहराई पर बोयें बिजाई के लिए रोपण विधि का प्रयोग करें एक एकड़ के लिए 2-3 किलो बीज का प्रयोग करें उखेड़ा रोग और कांव-गियारी से बचाव के लिए थीरम 2 ग्राम+बैनोमाइल 50 डब्लयू पी 1 ग्राम प्रति लीटर पानी से प्रति किलो बीजों का उपचार करें रासायनिक उपचार के बाद बायो एजेंट ट्राईकोडर्मा विराइड 2 ग्राम के साथ प्रति किलो बीजों का उपचार करने की सिफारिश की जाती है इस तरह करने से नए पौधे मिट्टी से पैदा होने वाली और अन्य बीमारीयों से बच जाते है बिजाई से 10 दिन पहले 20 टन रूड़ी की खाद डालें नाइट्रोजन 30 किलो(यूरिया 65 किलो), फासफोरस 16 किलो(सिंगल सुपर फासफेट 100 किलो) और पोटाश 16 किलो(मिउरेट ऑफ़ पोटाश 30 किलो) प्रति एकड़ डालें फासफोरस और पोटाश की पूरी मात्रा और नाइट्रोजन की आधी मात्रा रोपण के समय डालें बाकी बची नाइट्रोजन को दो भागों में बांटकर रोपाई के बाद टॉप ड्रेसिंग के तौर पर 30वें और 45वें दिन डालें मिट्टी की किसम और जलवायु के आधार पर सिंचाई की मात्रा और आवर्ती का फैसला करें आमतौर पर, इसे 5-8 सिंचाइयों की आवश्यकता होती है पहली सिंचाई बिजाई के तुरंत बाद करें और दूसरी सिंचाई रोपाई के तीन दिन बाद करें बाकी की सिंचाई आवश्यकता और मिट्टी में नमी के आधार पर 7-10 दिनों के अंतराल पर करें पुटाई के 10-15 दिन पहले सिंचाई बंद कर दें अत्याधिक सिंचाई ना करें शुरुआत में नए पौधे धीरे-धीरे बढ़ते है इसलिए नुकसान से बचाव के लिए गोड़ाई की जगह रासायनिक नदीन-नाशक का प्रयोग करें रोकथाम के लिए बिजाई से 72 घंटे में पेंडीमैथालीन(स्टंप) 1 लीटर को 200 लीटर पानी में मिलाकर प्रति एकड़ में स्प्रे करें नदीनों के अंकुरण उपरांत बिजाई से 7 दिन बाद आक्सीफ्लोरफैन 425 मि.ली. को 200 लीटर पानी में मिलाकर प्रति एकड़ में स्प्रे करें नदीनों की रोकथाम के लिए 2-3 गोड़ाईयों की सिफारिश की जाती है पहली गोड़ाई बिजाई से एक महीने बाद और दूसरी गोड़ाई, पहली से एक महीने बाद करें सही समय पर पुटाई करना बहुत जरूरी है पुटाई का समय किस्म,ऋतु,मंडी रेट आदि पर निर्भर करता है 50% पौधे की पत्तियां नीचे की तरफ गिरना दर्शाता है कि फसल पुटाई के लिए तैयार है फसल की पुटाई हाथों से प्याज़ को उखाड़ कर की जाती है पुटाई के बाद इनको 2-3 दिन के लिए अनावश्यक नमी निकालने के लिए खेत में छोड़ दे धन्यवाद

Posted by Kumar Rajeev
Uttar Pradesh
15-10-2019 07:37 PM
प्याज़ एक प्रसिद्ध व्यापक सब्जी वाली प्रजाति है इसकी खेती अलग-अलग किस्म की मिट्टी जैसे की रेतली दोमट, चिकनी, गार और भारी मिट्टी में की जा सकती है यह गहरी दोमट और जलोढ़ मिट्टी, जिसका निकास प्रबंध बढ़िया, नमी को बरकरार रखने की समर्थता, जैविक तत्वों वाली मिट्टी में बढ़िया परिणाम देती है विरली और रेतली मिट्टी इसकी ख.... (Read More)
प्याज़ एक प्रसिद्ध व्यापक सब्जी वाली प्रजाति है इसकी खेती अलग-अलग किस्म की मिट्टी जैसे की रेतली दोमट, चिकनी, गार और भारी मिट्टी में की जा सकती है यह गहरी दोमट और जलोढ़ मिट्टी, जिसका निकास प्रबंध बढ़िया, नमी को बरकरार रखने की समर्थता, जैविक तत्वों वाली मिट्टी में बढ़िया परिणाम देती है विरली और रेतली मिट्टी इसकी खेती के लिए बढ़िया नहीं मानी जाती है, क्योंकि मिट्टी के घटिया जमाव के कारण इसमें गांठों का उत्पादन सही नहीं होता है इसकी खेती के लिए मिट्टी का pH 6-7 होना चाहिए प्रसिद्ध किस्में:-alyanpur Red Round: यह उत्तर प्रदेश की प्रसद्धि किस्म है इसकी गांठे भूरे रंग की और गोलाकार आकार की होती हैं इसके पौधे 150-160 दिनों में कटाई के लिए तैयार हो जाते हैं इसकी औसतन पैदावार 8-10 टन प्रति एकड़ होती है Bhima Shakti: यह खरीफ के साथ साथ रबी के मौसम में उगाने के लिए उपयुक्त है यह किस्म रोपाई के 130 दिन बाद कटाई के लिए तैयार हो जाती है इसकी औसतन पैदावारा 170 क्विंटल प्रति एकड़ होती है Arka Kalyan: इसकी गांठे गहरे गुलाबी रंग की होती हैं इसकी औसतन पैदावार 135 क्विंटल प्रति एकड़ होती है Pusa White Round: इसकी गांठे सफेद, गोल और समतल होती हैं इसकी औसतन पैदावार 120 क्विंटल प्रति एकड़ होती है Pusa white flat: इसकी गांठे सफेद, चपटी और मध्यम से बड़े आकार की होती हैं यह किस्म डीहाइड्रेशन के लिए उपयुक्त है मिट्टी को भुरभुरा बनाने के लिए तीन-चार बार गहराई से जोताई करें मिट्टी में जैविक तत्वों की मात्रा बढ़ाने के लिए रूड़ी की खाद डालें फिर खेत को छोटे-छोटे प्लाटों में बांट दे नर्सरी तैयार करने के उचित समय मध्य-अक्तूबर से मध्य-नवबंर होता है नए पौधे मध्य-दिसंबर से मध्य-जनवरी तक रोपाई के लिए तैयार हो जाते है रोपाई के लिए 10-15 सैं.मी. कद के पौधे चुनें खरीफ के मौसम में रोपाई के लिए मई से जून का महीना नर्सरी तैयार करने के लिए उपयुक्त होता है बिजाई के 6-8 सप्ताह बाद नए पौधे रोपाई के लिए तैयार हो जाते हैं जुलाई -अगस्त के महीने में रोपण कर दें रोपण के समय, पंक्तियों के बीच 15 सैं.मी. और पौधों के बीच 10 सैं.मी. का फासला रखें नर्सरी में बीज 1-2 सैं.मी. गहराई पर बोयें बिजाई के लिए रोपण विधि का प्रयोग करें एक एकड़ के लिए 2-3 किलो बीज का प्रयोग करें उखेड़ा रोग और कांव-गियारी से बचाव के लिए थीरम 2 ग्राम+बैनोमाइल 50 डब्लयू पी 1 ग्राम प्रति लीटर पानी से प्रति किलो बीजों का उपचार करें रासायनिक उपचार के बाद बायो एजेंट ट्राईकोडर्मा विराइड 2 ग्राम के साथ प्रति किलो बीजों का उपचार करने की सिफारिश की जाती है इस तरह करने से नए पौधे मिट्टी से पैदा होने वाली और अन्य बीमारीयों से बच जाते है बिजाई से 10 दिन पहले 20 टन रूड़ी की खाद डालें नाइट्रोजन 30 किलो(यूरिया 65 किलो), फासफोरस 16 किलो(सिंगल सुपर फासफेट 100 किलो) और पोटाश 16 किलो(मिउरेट ऑफ़ पोटाश 30 किलो) प्रति एकड़ डालें फासफोरस और पोटाश की पूरी मात्रा और नाइट्रोजन की आधी मात्रा रोपण के समय डालें बाकी बची नाइट्रोजन को दो भागों में बांटकर रोपाई के बाद टॉप ड्रेसिंग के तौर पर 30वें और 45वें दिन डालें मिट्टी की किसम और जलवायु के आधार पर सिंचाई की मात्रा और आवर्ती का फैसला करें आमतौर पर, इसे 5-8 सिंचाइयों की आवश्यकता होती है पहली सिंचाई बिजाई के तुरंत बाद करें और दूसरी सिंचाई रोपाई के तीन दिन बाद करें बाकी की सिंचाई आवश्यकता और मिट्टी में नमी के आधार पर 7-10 दिनों के अंतराल पर करें पुटाई के 10-15 दिन पहले सिंचाई बंद कर दें अत्याधिक सिंचाई ना करें शुरुआत में नए पौधे धीरे-धीरे बढ़ते है इसलिए नुकसान से बचाव के लिए गोड़ाई की जगह रासायनिक नदीन-नाशक का प्रयोग करें रोकथाम के लिए बिजाई से 72 घंटे में पेंडीमैथालीन(स्टंप) 1 लीटर को 200 लीटर पानी में मिलाकर प्रति एकड़ में स्प्रे करें नदीनों के अंकुरण उपरांत बिजाई से 7 दिन बाद आक्सीफ्लोरफैन 425 मि.ली. को 200 लीटर पानी में मिलाकर प्रति एकड़ में स्प्रे करें नदीनों की रोकथाम के लिए 2-3 गोड़ाईयों की सिफारिश की जाती है पहली गोड़ाई बिजाई से एक महीने बाद और दूसरी गोड़ाई, पहली से एक महीने बाद करें सही समय पर पुटाई करना बहुत जरूरी है पुटाई का समय किस्म,ऋतु,मंडी रेट आदि पर निर्भर करता है 50% पौधे की पत्तियां नीचे की तरफ गिरना दर्शाता है कि फसल पुटाई के लिए तैयार है फसल की पुटाई हाथों से प्याज़ को उखाड़ कर की जाती है पुटाई के बाद इनको 2-3 दिन के लिए अनावश्यक नमी निकालने के लिए खेत में छोड़ दे धन्यवाद

Posted by rahul meena
Madhya Pradesh
15-10-2019 07:36 PM
कृप्या आप अपना सवाल विस्तार से पूछें कि आप क्या जानकारी लेना चाहते है ताकि आपको सही जानकारी दी जा सके

Posted by Rocky Kumar
Uttar Pradesh
15-10-2019 07:31 PM
Shrimaan ji, 1121 ka rate is samay hathi vaddi da 2730 rupay prati quintal ate machine nal vaddi da 2503 rupay prati quintal de hisaab nal chal reha hai, dhanwad

Posted by Sandeep Singh
Punjab
15-10-2019 07:29 PM
BhaaG turant nazdik de doctor nu dikhao Loha v ho sakda ae

Posted by basant patel
Chattisgarh
15-10-2019 07:27 PM
yeh keet ka hamla hai iski roktham ke liye aap buprofezin@250ml ko prati acre ke hisab se spray karen.dhanywad

Posted by yadvinder singh
Punjab
15-10-2019 07:26 PM
tuci ussdi bachedani vich lixin-iu dwai bhrwa deo ji ate metra liquid 100ml rojana deo ji..
Posted by bazad khan
Punjab
15-10-2019 07:21 PM
bazad khan ji black wheat di jankari layi tusi menu 86995 55651 number te call kar sakde ho ji.
Posted by deepakchouhan
Madhya Pradesh
15-10-2019 07:18 PM
deepak ji yeh tatv ki kami ke karn hota hai iske liye aap NPK 191919 ek kilo ko 150 litre pani ke hisab se spray karem.dhanywad

Posted by yadvinder singh
Punjab
15-10-2019 07:17 PM
ਤੁਸੀ 250 ਗ੍ਰਾਮ ਗੁੜ, 250 ਗ੍ਰਾਮ ਗੁਲਕੰਦ, 100 ਗ੍ਰਾਮ ਸੌੰਫ, 100 ਗ੍ਰਾਮ ਸੁਕੇ ਆਵਲੇ ਤੇ 50 ਗ੍ਰਾਮ ਅਜਵਾਇਨ ਉਬਾਲ ਕੇ ਠਾਰ ਕੇ 5 ਦਿਨ ਦੇਣੀ ਸ਼ੁਰੂ ਕਰੋ, ਤੁਸੀ ਉਸ ਨੂੰ Enerdyna liquid 100-100ml ਸਵੇਰੇ ਸ਼ਾਮ, Milkout powder 2-2 ਚਮਚ ਰੋਜਾਨਾ ਦੇਣਾ ਸ਼ੁਰੂ ਕਰੋ

Posted by K.B. Yadav Pathera
Madhya Pradesh
15-10-2019 07:14 PM
श्रीमान जी आप इन दोनों मे से किसी की भी खेती कर सकते हैं, दोनों ही अपनी जगह पर लाभदायक हैं, धन्यवाद

Posted by NEM CHAND
Uttar Pradesh
15-10-2019 07:00 PM
श्रीमान जी, नारियल निश्चय ही एक उष्णकटिबंधीय क्षेत्र का पौधा है जो अधिकांशत: 20 डिग्री उत्तर 20 डिग्री दक्षिण अक्षान्तर के बीच बढ़ता है तथापि प्रति वर्ष 2000 मि. मी. की वर्षा अच्छी तरह मिलें तो यह नारियल की बढ़वार एवं अधिकतम उत्पादन के लिए अनुकूल है नारियल दोमट,मखराली,तटीय रेत,जलोढ़, मटियारी जैसे विभीन्न प्रकार के.... (Read More)
श्रीमान जी, नारियल निश्चय ही एक उष्णकटिबंधीय क्षेत्र का पौधा है जो अधिकांशत: 20 डिग्री उत्तर 20 डिग्री दक्षिण अक्षान्तर के बीच बढ़ता है तथापि प्रति वर्ष 2000 मि. मी. की वर्षा अच्छी तरह मिलें तो यह नारियल की बढ़वार एवं अधिकतम उत्पादन के लिए अनुकूल है नारियल दोमट,मखराली,तटीय रेत,जलोढ़, मटियारी जैसे विभीन्न प्रकार के मृदाओं में और कच्छारी निम्न भूमि के मृदा में उगाया जाता है उचित जलनिकासी व्यवस्था, अच्छी जलधारण क्षमता, 3 मीटर के भीतर जलाशय की उपलब्धता और सतह से 2 मीटर के भीतर चट्टान या कोई ठोस वस्तु एवं न होना आदि ताड़ो के बेहतर बढ़वार और निष्पादन हेतु मृदा अनुकूल परिस्थितियाँ हैं अगर आपके स्थान का मौजम ऐसा है,तो आप इसकी बुवाई मानसून शुरू होने के एक महीने पहले कर सकते हैं, धन्यवाद

Posted by Aman Sharma
Punjab
15-10-2019 06:44 PM
ਸ਼੍ਰੀਮਾਨ ਜੀ, ਕਿਰਪਾ ਕਰਕੇ ਦੱਸੋ ਕੇ ਤੁਸੀ ਬਰਸੀਮ ਤੇ ਕਿਸ ਦੀ ਸਪਰੈਅ ਕਰਨੀ ਹੈ ਅਤੇ ਤੁਹਾਡੀ ਬਰਸੀਮ ਨੂੰ ਕਿਸ ਚੀਜ ਦੀ ਦਿਕਤ ਆ ਰਹੀ ਹੈ, ਤਾਕਿ ਤੁਹਾਨੂੰ ਇਸ ਬਾਰੇ ਜਾਣਕਾਰੀ ਦਿਤੀ ਜਾ ਸਕੇ, ਧੰਨਵਾਦ
Posted by Gurdhian singh
Punjab
15-10-2019 06:40 PM
ਕਣਕ ਦੀਆਂ ਨਵੀਆਂ ਕਿਸਮਾਂ PBW 752, HD 3226 ਅਤੇ DBW 187 ਹਨ

Posted by Aman Sharma
Punjab
15-10-2019 06:20 PM
ਤੁਸੀ ਉਸ ਨੂੰ ਪੇਟ ਦੇ ਕੀੜਿਆਂ ਲਈ Flukarid-DS ਗੋਲੀ ਦਿਓ ਅਤੇ ਉਸ ਨੂੰ Broton liquid 50-50ml ਸਵੇਰੇ ਸ਼ਾਮ ਦਿਓ, ਬਾਕੀ ਤੁਸੀ ਉਸ ਨੂੰ ਉਸਦੇ ਖਾਣ ਦੇ ਹਿਸਾਬ ਨਾਲ ਦਾਣਾ ਦੇ ਸਕਦੇ ਹੋ ਜੇਕਰ ਉਹ ਗਿਲਾ ਦਾਣਾ ਖਾਂਦੀ ਹੈ ਤਾਂ ਗਿਲਾ ਵੀ ਦੇ ਸਕਦੇ ਹੋ ਜੇਕਰ ਸੁੱਕਾ ਵਧਿਆ ਖਾਂਦੀ ਹੈ ਤਾਂ ਸੁੱਕਾ ਹੀ ਦਿਓ ਤੁਸੀ ਚਾਰੇ ਵਿਚ ਮਿਲਾ ਕੇ ਦੇ ਸਕਦੇ ਹੋ

Posted by daljeet singh
Punjab
15-10-2019 06:08 PM
Daljeet ji ehh injection pashu nu heat vich lyaun da kam krda hai, jekar pashu nu suun ton badd jer naa pwe tan isdi varto kr skde ho, iss nal bachedani di safai v ho jndi hai.

Posted by daljeet singh
Punjab
15-10-2019 06:07 PM
Daljeet ji ehh injection pashu nu heat vich lyaun da kam krda hai, jekar pashu nu suun ton badd jer naa pwe tan isdi varto kr skde ho, iss nal bachedani di safai v ho jndi hai.

Posted by shashiprakash
Rajasthan
15-10-2019 05:59 PM
पेड़ के अंदर उल्ली नहीं सकती ये दीमक हो सकता है कृप्या आप दोबारा जांच करें उल्ली पत्तों या फल पर ही हमला करती है दीमक की रोकथाम के लिए chloro@5ml प्रति लीटर पानी में मिलाकर स्प्रे करें अगर उल्ली है तो quinalphos@5ml प्रति लीटर पानी के हिसाब से स्प्रे करें
Posted by sameer khan
Madhya Pradesh
15-10-2019 05:57 PM
Sameer ji usko aap pett ke kirro ke liye Flukarid-Ds bolus den aur usko rojana 35-40 kg hara chara den aur 5-7 kg sukha chara de skte hai usko achi company ki feed dalen baki khurak ke sath sath aap usko Enerboost powder 100gm rojana de skte hai, isse pashu ki kamjori door hoti hai aur aap her 3 mahine ke badd pashu ko pett ke kirro ki goli jrur den..
Posted by pappu yadav
Bihar
15-10-2019 05:53 PM
Iske liye aap talab ka ph Check aur ammonia check kren, jisse apko iska sahi karan pta lgg jayega, fir aap usme fresh water dalen..
Posted by Harish Yadav
Uttar Pradesh
15-10-2019 05:45 PM
यादव जी बकरी लेने के लिए आप Firoz Alam 9616009911 से संपर्क कर सकते है

Posted by yogesh sindhda
Madhya Pradesh
15-10-2019 05:45 PM
फल के लिए इसके ऊपर एनपीके 130045 दो किलो या एनपीके 191919 एक किलो प्रति एकड़ के हिसाब से स्प्रे करें जो पत्ते पीले पड़ कर सुख रहे है इनकी रोकथाम के लिए एम45 400 ग्राम की प्रति एकड़ के हिसाब से स्प्रे करें

Posted by Rudra sharma
Chattisgarh
15-10-2019 05:42 PM
यदि वो 3 महीने से छोटी है तो उसे सिर्फ Broton liquid 10ml रोजाना दें और उसे किसी दूसरे पशु के मुंह से थोडा चबाया हुआ झूठा चारा दें यदि वो बड़ी है तब भी उसे दूसरे पशु के मुंह से चारा निकालकर दें और उसे Broton liquid 50ml रोजाना और Latifur ultra 2 पाउच रोजाना दें
Posted by gulashan patel
Chattisgarh
15-10-2019 05:38 PM
मोती की खेती एक बहुत ही अच्छा व्यवसाय है इस व्यवसाय को शुरू करने के लिए सबसे जरुरी है इसकी ट्रेनिंग, क्योकि इसमें बहुत सी ऐसी बारीकियें होती है जो हमें प्रेक्टिकल ट्रेनिंग में ही सीखने को मिलती है अगर आप इसकी ट्रेनिंग लेना चाहते है तो आप ग्लिटराटी पर्ल फार्मिंग ट्रेनिंग केंद्र प्रशिक्षण कार्य कर्म आयोजि.... (Read More)
मोती की खेती एक बहुत ही अच्छा व्यवसाय है इस व्यवसाय को शुरू करने के लिए सबसे जरुरी है इसकी ट्रेनिंग, क्योकि इसमें बहुत सी ऐसी बारीकियें होती है जो हमें प्रेक्टिकल ट्रेनिंग में ही सीखने को मिलती है अगर आप इसकी ट्रेनिंग लेना चाहते है तो आप ग्लिटराटी पर्ल फार्मिंग ट्रेनिंग केंद्र प्रशिक्षण कार्य कर्म आयोजित किया जा रहा है प्रशिक्षण कार्य कर्म में भाग लेने के लिए नीचे दिए गए नम्बर पर आज ही संपर्क करें और Rs 250/ से अपना रजिस्ट्रेशन करवाए अचल सिंह (फाउंडर )- 9711858258. धन्यवाद

Posted by Amardeep
Uttar Pradesh
15-10-2019 05:29 PM
श्रीमान जी, यह कई तरह की मिट्टी में उगाई जाती है इसकी पैदावार के लिए नमकीन, क्षारीय और पानी खड़ा होने वाली मिट्टी से बचाव करें यह बढ़िया निकास वाली मिट्टी जिसमे बढ़िया जैविक तत्व मौजूद हों, में बढ़िया परिणाम देती है इसके बढ़िया विकास के लिए मिट्टी का pH 5.5-7 होना चाहिए Drudriha Tulsi: यह मुख्य रूप से बंगाल, नेपाल, चटगांव और महार.... (Read More)
श्रीमान जी, यह कई तरह की मिट्टी में उगाई जाती है इसकी पैदावार के लिए नमकीन, क्षारीय और पानी खड़ा होने वाली मिट्टी से बचाव करें यह बढ़िया निकास वाली मिट्टी जिसमे बढ़िया जैविक तत्व मौजूद हों, में बढ़िया परिणाम देती है इसके बढ़िया विकास के लिए मिट्टी का pH 5.5-7 होना चाहिए Drudriha Tulsi: यह मुख्य रूप से बंगाल, नेपाल, चटगांव और महाराष्ट्र क्षेत्रों में पाई जाती है यह गले को सूखेपन से राहत देता है यह हाथों, पैरों और गठिया की सूजन से आराम देता है Ram/Kali Tulsi (Ocimum canum): यह चीन, ब्राज़ील, पूर्व नेपाल और साथ ही बंगाल, बिहार, चटगांव और भारत के दक्षिणी क्षेत्रों में पाई जाती है इसका तना जामुनी और पत्ते हरे रंग के और बहुत ज्यादा सुगंधित होते है इसमें उचित मात्रा में औषधीय गुण जैसे ऐज़ाडिरैकटिन, ऐंटीफंगल , ऐंटीबैक्टीरियल, और पाचन तंत्र को ठीक रखती है यह गर्म क्षेत्रों में बढ़िया उगता है Babi Tulsi: यह पंजाब से त्रिवेंद्रम, बंगाल और बिहार में भी पाई जाती है इसका पौधा 1-2 फीट लम्बा होता है पत्ते 1-2 इंच लम्बे, अंडाकार और नुकीले होते है इसके पत्तों का स्वाद लौंग की तरह और सब्जियों में स्वाद के लिए प्रयोग किया जाता है तुलसी की खेती के लिए, अच्छी तरह से शुष्क मिट्टी की मांग की जाती है मिट्टी के भुरभुरा होने तक हैरो के साथ खेत की जोताई करें, फिर रूड़ी की खाद मिट्टी में मिलाएं तुलसी की रोपाई सीड बैड पर करें फरवरी के तीसरे महीने में नर्सरी बैड तैयार करें पौधे के विकास के अनुसार, 4.5 x 1.0 x 0.2 मीटर के सीड बैड तैयार करें बीजों को 60x60 सैं.मी. के फैसले पर बोयें बीजों को 2 सैं.मी. की गहराई पर बोयें बिजाई के 6-7 हफ्ते बाद, फसल की रोपाई खेत में करें तुलसी की खेती के लिए 120 ग्राम बीजों का प्रयोग प्रति एकड़ में करें फसल को मिट्टी से पैदा होने वाली बीमारीयों से रोकथाम के लिए, बिजाई से पहले मैनकोजेब 5 ग्राम प्रति किलोग्राम से बीजों का उपचार करें फसल की बढ़िया पैदावार के लिए बिजाई से पहले 15 टन रूड़ी की खाद मिट्टी में डालें तुलसी के बीजों को तैयार बैडों के साथ उचित अंतराल पर बोयें मानसून आने के 8 हफ्ते पहले बीजों को बैड पर बोयें बीजों को 2 सैं.मी. की गहराई पर बोयें बिजाई के बाद, रूड़ी की खाद और मिट्टी की पतली परत बीजों पर बना दें इसकी सिंचाई फुवारा विधि द्वारा की जाती है रोपाई के 15-20 दिनों के बाद, नए पौधों को तंदरुस्त बनाने के लिए 2% यूरिया का घोल डालें 6 हफ्ते पुराने और 4-5 पत्तों के अंकुरण होने पर अप्रैल के महीने में नए पौधे तैयार होते है तैयार बैडों को रोपाई 24 घंटे पहले पानी लगाएं ताकि पौधों को आसानी से उखाड़ा जा सकें और रोपाई के समय जड़ें मुलायम और सूजी हुई हो खेत की तैयारी के समय, रूड़ी की खाद को मिट्टी में मिलाएं खाद के तौर पर नाइट्रोजन 48 किलो(यूरिया 104 किलो), फासफोरस 24 किलो(सिंगल सुपर फासफेट 150 किलो) और पोटाश 24 किलो(मिउरेट 40 किलो) प्रति एकड़ में डालें नए पौधे लगाने के समय नाइट्रोजन की आधी मात्रा और फासफेट पेंटोऑक्साइड की पूरी मात्रा शुरुआती समय में डालें Mn 50 पी पी एम कंसंट्रेशन और Co@100 पी पी एम कंसंट्रेशन सूक्ष्म-तत्व डालें बाकी की बची हुई नाइट्रोजन को 2 हिस्सों में पहली और दूसरी कटाई के बाद डालें खेत को नदीनों से मुक्त करने के लिए कसी की मदद से गोड़ाई करें नदीनों की रोकथाम कम न होने पर यह फसल को नुकसान पहुंचाते है रोपण के एक महीने बाद पहली गोड़ाई और पहली गोड़ाई के चार हफ्ते बाद दूसरी गोड़ाई करें रोपण के दो महीने बाद कसी से अनुकूल गोड़ाई करें गर्मियों में, एक महीने में 3 सिंचाइयां करें और बरसात के मौसम में, सिंचाई की आवश्यकता नहीं होती एक साल में 12-15 सिंचाइयां करनी चाहिए पहली सिंचाई रोपण के बाद करें और दूसरी सिंचाई नए पौधों के स्थिर होने पर करें 2 सिंचाइयां करनी आवश्यक है और बाकी की सिंचाई मौसम के आधार पर करें इसके मंडीकरण के लिए आप Aushadhiya kheti vikas sansthan 6268536795 से संपर्क कर सकते हैं धन्यवाद
Posted by Surendra Verma
Rajasthan
15-10-2019 05:27 PM
सरसों के लिए आप TL 15 , TL 17, RH 0749, RH 0406, RH 9801, RH 9304 , 45s42, 45s35, 45s46, T 59 किस्मों को लगा सकते है जो pioneer की किस्में है जैसे कि 45s42 और 45s46 सबसे अच्छी है अभी इसकी बिजाई चल रही है
Posted by Vinod kumar
Uttar Pradesh
15-10-2019 05:22 PM
विनोद कुमार जी कृप्या आप अपना सवाल विस्तार से पूछें ताकि आपको इसका इलाज बताया जा सके

Posted by nitesh rathore
Chattisgarh
15-10-2019 05:21 PM
राठोर जी देश में पशुओं का दूध में अच्छा योगदान है देश में अच्छी नस्ल के पशु है जिनसे अच्छा दूध प्राप्त किया जाता है और अच्छी नस्ल भी तैयार की जा सकती है
Posted by Sangam Bishnoi
Rajasthan
15-10-2019 05:19 PM
मक्के में ग्रोथ के लिए डॉ दलाल घोल की स्प्रे कर सकते है यूरिया 2.5 किलो, डीएपी 2.5 किलो, जिंक0.5 किलो प्रति एकड़ के हिसाब से घोल तैयार करके स्प्रे करें डीएपी को एक रात पहले पानी में भिगोकर रखें

Posted by Radheshyamchouhan
Madhya Pradesh
15-10-2019 05:14 PM
इसे मिट्टी की कई किस्मों, रेतली दोमट से चिकनी मिट्टी में उगाया जा सकता है अच्छे निकास वाली मिट्टी जिसकी पी एच 6 से 7.5 हो, में उगाने पर यह अच्छे परिणाम देती है यह फसल जलजमाव वाले हालातों में खड़ी नहीं रह सकती अम्लीय मिट्टी के लिए, चूना डालें Arkal: यह छोटे कद की और जल्दी पकने वाली किस्म है इसकी फलियां लंबी और गहरे हरे .... (Read More)
इसे मिट्टी की कई किस्मों, रेतली दोमट से चिकनी मिट्टी में उगाया जा सकता है अच्छे निकास वाली मिट्टी जिसकी पी एच 6 से 7.5 हो, में उगाने पर यह अच्छे परिणाम देती है यह फसल जलजमाव वाले हालातों में खड़ी नहीं रह सकती अम्लीय मिट्टी के लिए, चूना डालें Arkal: यह छोटे कद की और जल्दी पकने वाली किस्म है इसकी फलियां लंबी और गहरे हरे रंग की होती हैं इसकी औसतन पैदावार 16-18 क्विंटल प्रति एकड़ होती है Bonneville: यह मध्यम समय की किस्म है इसके फलियां मीठे दानों वाली होती हैं इसकी औसतन पैदावार 36 क्विंटल प्रति एकड़ होती है Multi Freezer: यह देरी से पकने वाली किस्म है इसकी फलियां मीठी और नर्म होती हैं यह ठंड को सहनेयोग्य किस्म हैं इसकी औसतन पैदावार 25 क्विंटल प्रति एकड़ होती है Azad P-I: यह छोटे कद की किस्म है इसके दाने झुर्रीदार होते हैं इसकी औतसन पैदावार 16 क्विंटल प्रति एकड़ होती है Early E-6: यह किस्म पंजाब एग्रीकल्चर यूनिवर्सिटी द्वारा विकसित की गई है इसकी औसतन पैदावार 40 क्विंटल प्रति एकड़ होती है खरीफ ऋतु की फसल की कटाई के बाद, सीड बैड तैयार करने के लिए हल से 1 या 2 बार जोताई करें हल से जोतने के बाद 2 या 3 बार तवियों से जोताई करें जल जमाव से रोकने के लिए खेत को अच्छी तरह समतल कर लेना चाहिए बिजाई से पहले, खेत की एक बार सिंचाई करें जो कि फसल के अच्छे अंकुरन में सहायक होती है फसल को मिट्टी से पैदा होने वाले कीटों और बीमारियों से बचाने के लिए ट्राइकोडरमा विराइड 10 किलो को अच्छी तरह से गले हुए गाय के गोबर 25-30 किलो को आखिरी जोताई के समय प्रति एकड़ में डालें अच्छी उपज प्राप्त करने के लिए बिजाई अक्तूबर से नवंबर के मध्य में पूरी कर लें बिजाई में देरी होने से उपज में काफी नुकसान होता है कतारों में 30-40 सैं.मी. और पौधें में 3-5 सैं.मी. फासले का प्रयोग करें लंबी किस्मों के लिए 32-40 किलो बीज प्रति एकड़ में प्रयोग करें और छोटे कद की किस्मों के लिए 50 किलो बीज प्रति एकड़ में प्रयोग करें बिजाई के समय नाइट्रोजन 13 किलो (30 किलो यूरिया), फासफोरस 24 किलो (150 किलो सिंगल सुपर फासफेट) और पोटाश 18 किलो (म्यूरेट ऑफ पोटाश 30 किलो) की मात्रा प्रति एकड़ में प्रयोग करें फासफोरस, पोटाश की पूरी मात्रा और नाइट्रोजन की आधी मात्रा बिजाई के समय डालें बाकी बची नाइट्रोजन को बिजाई के एक महीने बाद डालें छोटे कद की किस्मों के लिए नाइट्रोजन की 8 किलो मात्रा बिजाई के समय डालें एक या दो गोडाई करना यह किस्म पर निर्भर करता है पहली गोडाई, फसल की बिजाई के 3-4 सप्ताह बाद या जब फसल 2 या 3 पत्ते निकाल लेती है और दूसरी गोडाई, फूल निकलने से पहले करें मटरों की खेती के लिए नदीन नाशकों का प्रयोग बहुत प्रभावशाली होता है फ्लूक्लोरालिन 45 ई सी 800 मि.ली. को 100-150 लीटर पानी में मिलाकर बीज बोने से पहले खेत में डालें नदीनों की रोकथाम के लिए पैंडीमैथालीन 1 लीटर प्रति एकड़ या बसालिन 1 लीटर प्रति एकड़ का प्रयोग फसल बीजने से 48 घंटों के अंदर करें

Posted by Radheshyamchouhan
Madhya Pradesh
15-10-2019 05:12 PM
मटर फली की बिजाई के लिए 15 दिन के बाद खाद देनी शुरू कर सकते हैं।
Posted by Sangam Bishnoi
Rajasthan
15-10-2019 05:06 PM
इसमें आप डॉ दलाल घोल की स्प्रे करें आपके दूसरे सवाल में इसकी पूरी जानकारी दी गई है आप अपने सवालों के जवाब देंखे

Posted by pranjal
Uttar Pradesh
15-10-2019 05:00 PM
इस बिमारी के कारण नींबू के ऊपर दाग धब्बे पड़ जाते है फल खराब होना शुरू हो जाता है धीरे धीरे फल गल जाता है

Posted by Amit kumar srivastava
Uttar Pradesh
15-10-2019 05:00 PM
Biofloc मछली पालन की नई तकनीक है, जिसका invention Dr.YORRAM AVNIMELECH जो कि ISRAEL के है जहाँ पानी की कमी हैै उस परस्तिथि में मछली पालन कैसे किया जाये, उस तकनीक का invention किया पर फ़िलहाल भारत के कई राज्यों में किसान इस तकनीक का इस्तेमाल करके मछली पालन कर रहे हैं इसमें हम थोड़ी जगह में जहाँ सिर्फ 4 मीटर का टैंक लगता है और 1 मीटर इसकी लम्बाई होत.... (Read More)
Biofloc मछली पालन की नई तकनीक है, जिसका invention Dr.YORRAM AVNIMELECH जो कि ISRAEL के है जहाँ पानी की कमी हैै उस परस्तिथि में मछली पालन कैसे किया जाये, उस तकनीक का invention किया पर फ़िलहाल भारत के कई राज्यों में किसान इस तकनीक का इस्तेमाल करके मछली पालन कर रहे हैं इसमें हम थोड़ी जगह में जहाँ सिर्फ 4 मीटर का टैंक लगता है और 1 मीटर इसकी लम्बाई होती है मतलब की 10,000 लीटर इसमें हम अपना मछली पालन शुरू करके 1100-1300 किलो fish बना सकते हैं इसमें ज़्यादा पानी की ज़रूरत नहीं पड़ती और ना ही ज़्यादा जगह की ज़रूरत होती है, इसमें 650 -700 रूपये बिकने वाली मछलियां हैं वह हम इसमें डालते हैं और यह मछलियां 6 से 7 महीने तक बिकने योग्य हो जाती है, shrimp farming मतलब की झींगा इसका culture period -90 दिन का होता है BFT टैंक में आपको C:N ratio की सहायता से आपको बढ़िया बैक्टीरिया maintain करना होता है, और drainage की सहायता से sludge removal किया जाता है अगर आपका मैनेजमेंट एकदम सटीक रहा तो 0 % प्रतिशत पानी अदला-बदली किये बिना culture पूरा किया जा सकता है आपको उचित blower की सहायता से DO (dissolved oxygen ) maintain करने की ज़रूरत पड़ती है C:N ratio मतलब की कार्बन: नाइट्रोजन ratio अनुपात बनाएं रखना पड़ता है कार्बन जिससे की बैक्टीरिया (हेट्रोट्रॉपिक बैक्टीरिया) ठीक से काम करके नाइट्रोजन को कम कर सके क्योंकि नाइट्रोजन का एक हिस्सा जो कि non ionised Ammonia [NH3] जो मछली के लिए जानलेवा होता हैैै अधिक जानकारी के लिए 9096843382 पर फ़ोन कीजिये.
Posted by chandresh pant
Uttarakhand
15-10-2019 04:52 PM
श्रीमान जी, कृपय आप पैन सवाल विस्तार से पूछें ताकि आपको इसकी उच्चित जानकारी दी जा सके, धन्यवाद

Posted by pankaj Patidar
Madhya Pradesh
15-10-2019 04:50 PM
अभी इसकी बिजाई का समय चल रहा है लसहुन की गठडियों को खेत में कतारों में लगाया जाता है

Posted by sonulalmali
Rajasthan
15-10-2019 04:44 PM
कृप्या आप अपना सवाल विस्तार से पूछें कि आप गेंदे के फूल के बीज के बारे में क्या जानकारी लेना चाहते है

Posted by Kalyan Singh Ravneri
Rajasthan
15-10-2019 04:41 PM
आप ईसबगोल की RI-87, RI-89, AMB-2, MI-4, TS-1-10, EC 124345 किस्में लगा सकते हैं, इसकी बिजाई के लिए उपयुक्त समय अक्तूबर से नवंबर का महीना होता है पिछेती बिजाई (दिसंबर के पहले पखवाड़े के बाद) ना करें क्योंकि यह पैदावार में कमी को बढ़ाता है

Posted by Kalyan Singh Ravneri
Rajasthan
15-10-2019 04:40 PM
जीरे की बिजाई के लिए 15 से 30 नवंबर सही समय होता है आप RZ 19, RZ 209, Gujarat Jeera 2, RZ 223, GC 4 किस्मों की बिजाई कर सकते हैं.

Posted by Kalyan Singh Ravneri
Rajasthan
15-10-2019 04:37 PM
सरसों के लिए आप TL 15 , TL 17, RH 0749, RH 0406, RH 9801, RH 9304 , 45s42, 45s35, 45s46, T 59 किस्मों को लगा सकते है जो pioneer कि किस्में है जैसे 45s42, 45s46 कि सबसे अच्छी है अक्तूबर के आखिर तक बिजाई कर सकते है जितना जल्दी हो सके आप बिजाई कर दें
Expert Communities
We do not share your personal details with anyone
We do not share your personal details with anyone
Sign In
Registering to this website, you accept our Terms of Use and our Privacy Policy.
Your mobile number and password is invalid
We have sent your password on your mobile number
All fields marked with an asterisk (*) are required:
Sign Up
Registering to this website, you accept our Terms of Use and our Privacy Policy.
All fields marked with an asterisk (*) are required:
Please select atleast one option
Please select text along with image















