
Posted by Bitoo singh
Madhya Pradesh
17-10-2019 07:26 AM
यह फसल बहुत तरह की मिट्टी जैसे कि रेतली, नमक वाली, दोमट और चिकनी मिट्टी में उगाई जा सकती है अच्छे जल निकास वाली, जैविक तत्व भरपूर, रेतली से दरमियानी ज़मीन में फसल अच्छी पैदावार देती है यह फसल नमक वाली तेजाबी ज़मीनों में भी उगाई जा सकती है पर बहुत ज्यादा जल जमाव और खारी या नमक वाली ज़मीन इस फसल की खेती के लिए उचित नह.... (Read More)
यह फसल बहुत तरह की मिट्टी जैसे कि रेतली, नमक वाली, दोमट और चिकनी मिट्टी में उगाई जा सकती है अच्छे जल निकास वाली, जैविक तत्व भरपूर, रेतली से दरमियानी ज़मीन में फसल अच्छी पैदावार देती है यह फसल नमक वाली तेजाबी ज़मीनों में भी उगाई जा सकती है पर बहुत ज्यादा जल जमाव और खारी या नमक वाली ज़मीन इस फसल की खेती के लिए उचित नहीं होती Kufri Bahar: इस किस्म के पौधे लंबे और तने मोटे होते हैं तनों की संख्या 4-5 प्रति पौधा होती है इसके आलू बड़े, सफेद रंग के, गोलाकार से अंडाकार होते हैं और इसका गुद्दा सफेद रंग का होता है यह किस्म 100-110 दिनों में पक जाती है और इसकी औसतन पैदावार 125 क्विंटल प्रति एकड़ होती है इसे ज्यादा देर तक स्टोर करके रखा जा सकता है यह पिछेती और अगेती झुलस रोग और पत्ता मरोड़ रोग की रोधक है Kufri Badshah: इसके पौधे लंबे और 4-5 तने प्रति पौधा होते हैं इसके आलू बड़े से दरमियाने, गोलाकार और हल्के सफेद रंग के होते हैं इसके आलू स्वाद होते हैं यह किस्म 100-110 दिनों में पक जाती है यह किस्म कोहरे को सहनेयोग्य है और पिछेती, अगेती झुलस रोग की प्रतिरोधक है Kufri Sutlaj: इस किस्म के पौधे घने और मोटे तने वाले होते हैं पत्ते हल्के हरे रंग के होते हैं आलू बड़े आकार के, गोलाकार और नर्म छिल्के वाले होते हैं यह किस्म 90-100 दिनों में पकती है इसकी औसतन पैदावार 160 क्विंटल प्रति एकड़ होती है यह किस्म खाने के लिए अच्छी और स्वादिष्ट होती है इन आलुओं को पकाना आसान होता है यह नए उत्पाद बनाने के लिए उचित किस्म नहीं है Kufri Anand: यह मध्यम समय की किस्म है, जो कि पिछेते झुलस रोग और कोहरे के प्रतिरोधक है इसकी औसतन पैदावार 140-160 क्विंटल प्रति एकड़ होती है Kufri Pukhraj: इसके पौधे लंबे और तने संख्या में कम और दरमियाने मोटे होते हैं आलू सफेद, बड़े, गोलाकार और नर्म छिल्के वाले होते हैं यह किस्म 70-90 दिनों में पकती है इसकी औसतन पैदावार 130 क्विंटल प्रति एकड़ है यह अगेती झुलस रोग की रोधक किस्म है और नए उत्पाद बनाने के लिए उचित नहीं है Kufri Chipsona 2: इस किस्म के पौधे दरमियाने कद के और कम तनों वाले होते हैं इसके पत्ते गहरे हरे और फूल सफेद रंग के होते हैं आलू सफेद, दरमियाने आकार के, गोलाकार, अंडाकार और नर्म होते हैं इसकी औसतन पैदावार 140 क्विंटल प्रति एकड़ होती है यह पिछेती झुलस रोग की रोधक किस्म है यह किस्म चिपस और फरैंच फ्राइज़ बनाने के लिए उचित है Kufri Chipsona 1: यह किस्म 90-100 दिनों में पुटाई के लिए तैयार हो जाती है Kufri Chandramukhi: इस किस्म के आलू बड़े अंडाकार आकार के होते हैं इसकी औसतन पैदावार 10 टन प्रति एकड़ होती है यह किस्म 80-90 दिनों में पुटाई के लिए तैयार हो जाती है Kufri Jyoti: यह प्रोसेसिंग के लिए उपयुक्त किस्म है इसकी औसतन पैदावार 80-120 क्विंटल प्रति एकड़ होती है Kufri Ashoka: यह किस्म CPIU, शिमला द्वारा विकसित की गई है और बिहार, हरियाणा, उत्तर प्रदेश और पश्चिमी बंगाल में खेती के लिए उपयुक्त किस्म है यह लंबे कद की और मोटे तने वाली किस्म है यह किस्म 70-80 दिनों में पककर तैयार हो जाती है इसके आलू बड़े, गोलाकार, सफेद और नर्म छिल्के वाले होते हैं यह पिछेती झुलस रोग को सहने योग्य किस्म है Kufri Lalima: इस किस्म के आलू गोल, लाल और सफेद गुद्दे वाले होते हैं आलू बड़े से मध्यम आकार के होते हैं यह किस्म 100-110 दिनों में पुटाई के लिए तैयार हो जाती है इसकी औसतन पैदावार 16 टन प्रति एकड़ होती है खेत को एक बार 30 सैं.मी. गहरा जोतकर अच्छे ढंग से बैड बनाएं जोताई के बाद 2-3 बार तवियां फेरें और फिर 2-3 बार सुहागा फेरें बिजाई से पहले खेत में नमी की मात्रा बनाकर रखें बिजाई के लिए दो ढंग मुख्य तौर पर प्रयोग किए जाते हैं 1. मेंड़ और खालियों वाला ढंग 2. समतल बैडों वाला ढंग अगेती बिजाई के लिए, सितंबर के आखिरी सप्ताह से अक्तूबर का पहला सप्ताह खेती के लिए उपयुक्त होता है मुख्य फसल के लिए अक्तूबर का दूसरे से चौथा सप्ताह बिजाई के लिए उपयुक्त समय होता है गांठों के आकार के अनुसार रोपाई का फासला विभिन्न होता है बिजाई के लिए कतार से कतार में 60 सैं.मी. और पौधे से पौधे में 20 सैं.मी. फासले का प्रयोग करें बीज बोने के बाद बीजों को 8-10 सैं.मी. तक मिट्टी की परत से ढक दें रोपाई के लिए बड़ी आकार की गांठों का प्रयोग किया जाता है बिजाई के लिए 13-15 क्विंटल बीज प्रयोग किए जाते हैं यदि संभव हो, तो आलू की रोपाई से पहले, हरी खाद वाली फसलें जैसे सनई, जंतर आदि फसलें उगायें और उन्हें मिट्टी में अच्छी तरह दबायें यदि हरी खाद उपलब्ध ना हो तो गली सड़ी रूड़ी की खाद या गाय का गला हुआ गोबर 60-80 क्विंटल प्रति एकड़ में खेत की तैयारी के समय रोपाई से दो सप्ताह पहले डालें फसल की उचित वृद्धि के लिए नाइट्रोजन 40-50 किलो (90-110 किलो यूरिया), फासफोरस 24-32 किलो (150-200 किलो सिंगल सुपर फासफेट) और पोटाश 40-50 किलो (66-85 किलो म्यूरेट ऑफ पोटाश) की मात्रा प्रति एकड़ में डालें बिजाई के समय नाइट्रोजन का 3/4 हिस्सा और फासफोरस और पोटाश की पूरी मात्रा डालें बाकी बचा हुआ नाइट्रोजन का 1/4 हिस्सा बिजाई से 35-40 दिन बाद जड़ों में मिट्टी लगाने के समय डालें बिजाई से पहले सिंचाई करें बिजाई के बाद 10-12 दिनों के अंदर अंदर पहली सिंचाई करें दूसरी सिंचाई पहली सिंचाई के 7 दिनों के बाद करें बाकी की सिंचाइयां जलवायु की परिस्थितियों और जरूरत के अनुसार करें गांठे बनने की अवस्था सिंचाई के लिए बहुत महत्तवपूर्ण होती है इस अवस्था में पानी की कमी ना होने दें ज्यादा सिंचाई ना करें इससे गलने की बीमारी का खतरा बढ़ता है पुटाई से 10-12 दिन पहले सिंचाई बंद कर दें डंठलों की कटाई : आलुओं को विषाणु से बचाने के लिए यह क्रिया बहुत जरूरी है और इससे आलुओं का आकार और गिणती भी बढ़ जाती है इस क्रिया में सही समय पर पौधे को ज़मीन के नज़दीक से काट दिया जाता है इसका समय अलग अलग स्थानों पर अलग है और चेपे की जनसंख्या पर निर्भर करता है उत्तरी भारत में यह क्रिया दिसंबर महीने में की जाती है

Posted by Ranjit Singh
Punjab
17-10-2019 07:05 AM
ਰਣਜੀਤ ਜੀ 1718 ਦਾ ਰੇਟ 2570 -2600 ਰੁਪਏ ਪ੍ਰਤੀ ਕੁਇੰਟਲ ਦੇ ਹਿਸਾਬ ਨਾਲ ਚਲ ਰਿਹਾ ਹੈ ਧੰਨਵਾਦ
Posted by Ashish Dwivedi
Uttar Pradesh
17-10-2019 06:58 AM
usko aap pett ke kirro ke liye Flukarid-Ds bolus den aur usko Broton liquid 50-50ml subah sham, Enerboost powder 100gm rojana den baki usko rojana 35-40kg hara chara den isse achi growth ho jayegi..
Posted by bharpoorsinghKandholl
Punjab
17-10-2019 06:46 AM
Kirpa krke apna swal vistar nal pusho ji tan jo tuhanu sahi jankari diti ja skee..
Posted by rajkumar mourya
Uttar Pradesh
17-10-2019 06:45 AM
aap iske patton ke neeche machar ka hamla check karen agar maujood hai to aap iske uper imidacloprid@1.5ml ko prati litre pani ke hisab se spray karen.dhanywad
Posted by rajkumar mourya
Uttar Pradesh
17-10-2019 06:43 AM
rajkumar ji yeh mashar ka hamla check karen agar maujood hai to aap iske uper imidacloprid@1.5ml ko prati litre pani ke hisab se spray karen.dhanywad
Posted by Ankit Yadav
Uttar Pradesh
17-10-2019 06:40 AM
बंद गोभी :- मिट्टी के भुरभुरा होने तक खेत की जोताई करें मिट्टी को समतल करने के लिए 3-4 बार जोताई करें आखिरी जोताई के समय अच्छी तरह से गले हुए गाय के गोबर को मिट्टी में अच्छी तरह मिलायें इसकी बिजाई के लिए दो ढंग प्रयोग किए जाते हैं
• गड्ढा खोदकर
• खेत में रोपाई करके नर्सरी में सबसे पहले बिजाई करें और खादों का प्.... (Read More)
बंद गोभी :- मिट्टी के भुरभुरा होने तक खेत की जोताई करें मिट्टी को समतल करने के लिए 3-4 बार जोताई करें आखिरी जोताई के समय अच्छी तरह से गले हुए गाय के गोबर को मिट्टी में अच्छी तरह मिलायें इसकी बिजाई के लिए दो ढंग प्रयोग किए जाते हैं
• गड्ढा खोदकर
• खेत में रोपाई करके नर्सरी में सबसे पहले बिजाई करें और खादों का प्रयोग आवश्यकता के अनुसार करें बिजाई के 25-30 दिनों के बाद नए पौधे रोपाई के लिए तैयार हो जाते हैं खेत में पौध की रोपाई के लिए 3-4 सप्ताह पुराने पौधों का प्रयोग करें
फूल गोभी :- अगेती किस्मों के लिए जून-जुलाई रोपाई के लिए सबसे अच्छा समय है और पिछेती किस्मों के लिए अगस्त से मध्य सितंबर और अक्तूबर से नवंबर का पहला सप्ताह रोपाई के लिए अच्छा समय है अगेती किस्मों के लिए 45x45 से.मी. और पिछेती किस्मों के लिए 45x30 से.मी. का फासला होना चाहिए बीजों को 1-2 सैं.मी. की गहराई पर बोयें बिजाई के लिए डिबलिंग विधि और रोपण विधि का प्रयोग किया जाता है
नर्सरी में बीजों को बोयें और आवश्यकतानुसार खादें और सिंचाई दें बिजाई के 25-30 दिन बाद पौधे रोपाई के लिए तैयार हो जाते हैं रोपाई के लिए 3-4 सप्ताह पुराने पौधों का प्रयोग करें
Posted by Ankit Yadav
Uttar Pradesh
17-10-2019 06:39 AM
नर्सरी तैयार करने के उचित समय मध्य-अक्तूबर से मध्य-नवबंर होता है नए पौधे मध्य-दिसंबर से मध्य-जनवरी तक रोपाई के लिए तैयार हो जाते है रोपाई के लिए 10-15 सैं.मी. कद के पौधे चुनें ज्यादा पैदावार लेने के लिए, रोपाई के समय पंक्तियों के बीच फासला 15 सैं.मी. और पौधों के बीच का फासला 7.5 सैं.मी.रखें नर्सरी में बीज 1-2 सैं.मी. गहरा.... (Read More)
नर्सरी तैयार करने के उचित समय मध्य-अक्तूबर से मध्य-नवबंर होता है नए पौधे मध्य-दिसंबर से मध्य-जनवरी तक रोपाई के लिए तैयार हो जाते है रोपाई के लिए 10-15 सैं.मी. कद के पौधे चुनें ज्यादा पैदावार लेने के लिए, रोपाई के समय पंक्तियों के बीच फासला 15 सैं.मी. और पौधों के बीच का फासला 7.5 सैं.मी.रखें नर्सरी में बीज 1-2 सैं.मी. गहराई पर बोयेंबिजाई के लिए रोपाई विधि का प्रयोग करें
Posted by Guri Dalio
Punjab
17-10-2019 06:38 AM
ਸ਼੍ਰੀਮਾਨ ਜੀ, ਮੋਬਾਈਲ ਤੇ ਬਹੁਤ ਸਾਰੀਆਂ apps ਹਨ ਜੋ ਕੇ play store ਯਾਂ app store ਤੇ ਮਿਲ ਜਾਂਦੀਆਂ ਹਨ, ਤੁਸੀ download ਕਰ ਕੇ ਆਪਣੀ ਜਮੀਨ ਦੀ ਮਿਣਤੀ ਕਰ ਸਕਦੇ ਹੋ, ਪਰ ਇਸਦੀ ਪੁਸ਼ਟੀ ਨਹੀਂ ਕੀਤੀ ਜਾ ਸਕਦੀ ਕੇ ਇਹ ਸਹੀ ਜਾਣਕਾਰੀ ਦੇਣ , ਧੰਨਵਾਦ
Posted by Sanjeet Kumar
Uttar Pradesh
17-10-2019 06:38 AM
संजीत जी यह फंगस के कारण हो रहा है इसके लिए आप कार्बेन्डाजिम@300 ग्राम को प्रति एकड़ के हिसाब से स्प्रे करें धन्यवाद
Posted by JAGDISH KUMAR VERMA
Jharkhand
17-10-2019 06:36 AM
अगेती किस्मों के लिए, जून के दूसरे सप्ताह से जुलाई के पहले सप्ताह तक का समय उपयुक्त होता है
मुख्य मौसम की किस्मों के लिए, अगस्त के महीने में बिजाई पूरी कर लें, जबकि पिछेती किस्मों की बिजाई अक्तूबर महीने में करें
Posted by Ankit Yadav
Uttar Pradesh
17-10-2019 06:35 AM
अंकित जी इनकी कीमत 40 -42 हजार के हिसाब से होती है धन्यवाद
Posted by Guri Dalio
Punjab
17-10-2019 06:35 AM
tuci Katru nu janam ton 7 dina badd Albomar liquid 30ml nu 10-10ml krke 3 din deo fir 1-1 mahine de frak nal salt change krke deworming kro ji..

Posted by Soni
Punjab
17-10-2019 06:23 AM
BhaaG deputy director animal husbandry mansa or krishi vigyan kendar mansa naal sampark karo Training lao saara kujh das denge or GADVASU VETERINARY UNIVERSITY LUDHIANA NAAL SAMPARK KARO G No 0161 2553364 2414026

Posted by Amar Jeet singh
Uttarakhand
17-10-2019 06:22 AM
अमरजीत जी आप इसके पत्तों के नीचे तेला चेक करें अगर मौजूद है तो आप इसके ऊपर imidacloprid @1.5ml को प्रति लीटर पानी के हिसाब से स्प्रे करें धन्यवाद

Posted by Amar Jeet singh
Uttarakhand
17-10-2019 06:19 AM
अमरजीत जी कृपया आप अपना सवाल विस्तार से पूछे और इसकी फोटो भी भेजे ताकि आपको इसके बारे में पूरी जानकारी दी जा सके धन्यवाद

Posted by preet
Punjab
17-10-2019 06:09 AM
BhaaG rajwa hara chaara te har 4kg dudh lai gau nu 1kg wadhya feed pao har 3 mahine baad malap rehat karo swer shaam taaran v dekho jab taaran dekho is nu aas karwa lao
Posted by Ankit Yadav
Uttar Pradesh
17-10-2019 06:03 AM
ankit ji kripya aap iski photo bheje taki aapko iske bare men poori jankari di ja sake.dhanywad
Posted by Ankit Yadav
Uttar Pradesh
17-10-2019 06:01 AM
सब्जियों में प्रयोग करने के लिए, इसकी बिजाई अक्तूबर के पहले सप्ताह में करनी चाहिए और बीज तैयार करने के लिए, बिजाई अक्तूबर के आखिरी सप्ताह से नवंबर के पहले सप्ताह तक करनी चाहिए कतार से कतार का फासला 30 सैं.मी. और पौधे से पौधे का फासला 15 सैं.मी. रखें बीज की गहराई 3 सैं.मी. से ज्यादा नहीं होनी चाहिए इसकी बिजाई के लिए प.... (Read More)
सब्जियों में प्रयोग करने के लिए, इसकी बिजाई अक्तूबर के पहले सप्ताह में करनी चाहिए और बीज तैयार करने के लिए, बिजाई अक्तूबर के आखिरी सप्ताह से नवंबर के पहले सप्ताह तक करनी चाहिए कतार से कतार का फासला 30 सैं.मी. और पौधे से पौधे का फासला 15 सैं.मी. रखें बीज की गहराई 3 सैं.मी. से ज्यादा नहीं होनी चाहिए इसकी बिजाई के लिए पोरा ढंग का प्रयोग किया जाता हैं
Posted by AYUSH Pandey
Uttar Pradesh
17-10-2019 05:58 AM
सिंचाई मिट्टी को कृत्रिम रूप से पानी देकर उसमे उपलब्ध जल की मात्रा में वृद्धि करने की क्रिया है और आमतौर पर इसका प्रयोग फसल उगाने के दौरान, शुष्क क्षेत्रों या पर्याप्त वर्षा ना होने की स्थिति में पौधों की जल आवश्यकता पूरी करने के लिए किया जाता है कृषि के क्षेत्र में इसका प्रयोग इसके अतिरिक्त निम्न कारणें .... (Read More)
सिंचाई मिट्टी को कृत्रिम रूप से पानी देकर उसमे उपलब्ध जल की मात्रा में वृद्धि करने की क्रिया है और आमतौर पर इसका प्रयोग फसल उगाने के दौरान, शुष्क क्षेत्रों या पर्याप्त वर्षा ना होने की स्थिति में पौधों की जल आवश्यकता पूरी करने के लिए किया जाता है कृषि के क्षेत्र में इसका प्रयोग इसके अतिरिक्त निम्न कारणें से भी किया जाता है: -फसल को पाले से बचाने,मिट्टी को सूखकर कठोर (समेकन) बनने से रोकने,धान के खेतों में खरपतवार की वृद्धि पर लगाम लगाने, आदि

Posted by Brijesh Kumar
Uttar Pradesh
17-10-2019 05:53 AM
brijesh ji kripya aap apna swal vistar se pooche taki aapko iske bare men poori jankari di ja sake.dhanywad

Posted by rakash Kalera
Haryana
17-10-2019 02:53 AM
असली केसर सिर्फ जम्मू कश्मीर, ईरान और अफगानिस्तान में ही हो सकता है, यह कुसुम है, इसकी भी कई दवाई बनती है, यदि कोई और छक है तो जम्मू कश्मीर के इस किसान से बात करें, जिसके दादे, पड़दादे भी केसर की खेती करते थे और यह भी केसर की खेती करते है Javid Ahmed- 95964 93260 बाकि आप यह वीडियो देखें https://www.youtube.com/watchv=vl7c6L3ETnQ&t=8s बाकि यदि फिर भी यकीन नहीं .... (Read More)
असली केसर सिर्फ जम्मू कश्मीर, ईरान और अफगानिस्तान में ही हो सकता है, यह कुसुम है, इसकी भी कई दवाई बनती है, यदि कोई और छक है तो जम्मू कश्मीर के इस किसान से बात करें, जिसके दादे, पड़दादे भी केसर की खेती करते थे और यह भी केसर की खेती करते है Javid Ahmed- 95964 93260 बाकि आप यह वीडियो देखें https://www.youtube.com/watchv=vl7c6L3ETnQ&t=8s बाकि यदि फिर भी यकीन नहीं है तो तो आप अमृतपाल सिंह बराड़ प्रोफेसर, पीएयू लुधियाना इस वीडियो संबंधी विचार पड़ सकते हैं, यह फसल केसर की नहीं है, यह फसल कसुंबडे की है, इसे अंग्रेजी में Safflower कहते है, और विज्ञानं में इसे Carthamus tinctorius कहते है
Posted by Amit Kumar Bamoriya
Madhya Pradesh
17-10-2019 01:29 AM
अमित जी किसानो के साथ जानकारी सांझी करने के लिए आपका बहुत बहुत धन्यवाद

Posted by vivek yadav
Madhya Pradesh
17-10-2019 12:27 AM
विवेक जी इसकी बाजार में मांग रहती है में जड़ी बूटी का खरीद फरोक करता हूं तो समय समय पर चाहिए आप संपर्क करें
Posted by JAGDISH KUMAR VERMA
Jharkhand
16-10-2019 11:11 PM
Bhai sahib nazdik ke pashu palan adhikari or krishi vigyan kendar se sampark karein training lao te shuroo krain

Posted by jhon
Gujarat
16-10-2019 11:02 PM
Jhon ji cattle feed khreedne par abhi koi bhi subsidy nai hai, Thankyou.
Posted by Narendra soalnki
Madhya Pradesh
16-10-2019 10:33 PM
किसान भाइयो के लिए खुसखबरी इंटीग्रेटेड फार्मिंग से एक एकड़ में 4-5 लाख कैसे कमाए हेतु सभी कोर्स ऑनलाइन उपलब्ध साथ ही हमारे बिज़नेस पार्टनर बनकर प्रतिमाह कमाए लाखो बमोरिया फार्म एवं प्रशिक्षण केंद्र ( सूक्ष्म , लघु ,मध्यम उद्यम मंत्रालय भारत सरकार से पंजीकृत ) केंद्रीय राज्य कृषि मंत्री श्री रूपाला जी द्वार.... (Read More)
किसान भाइयो के लिए खुसखबरी इंटीग्रेटेड फार्मिंग से एक एकड़ में 4-5 लाख कैसे कमाए हेतु सभी कोर्स ऑनलाइन उपलब्ध साथ ही हमारे बिज़नेस पार्टनर बनकर प्रतिमाह कमाए लाखो बमोरिया फार्म एवं प्रशिक्षण केंद्र ( सूक्ष्म , लघु ,मध्यम उद्यम मंत्रालय भारत सरकार से पंजीकृत ) केंद्रीय राज्य कृषि मंत्री श्री रूपाला जी द्वारा सम्मानित मध्य प्रदेश सरकार द्वारा holistic farmer का अवार्ड भारत के प्रमुख अखवार दैनिक भास्कर एवं पत्रिका द्वारा प्रथम पेज द्वारा सत्यापित.. प्रमुख ટીવી news चैनल सहारा समय एवं बंसल news पर सफल साक्षात्कार.. Online farming Training cource Pearl Farming Fish Farming Duck farming Kadaknath Murga Japanese quials Floated Farming Stevia Plant Roof Kitchen garden Shells jewellery Moti bhasma Seep bhasma Shank bhasma How to cure Diabetes How to cure Arthritis Business Partner With Bamoriya Farm # Business Partner for Farming Training # Business partner with women health hygiene # Business partner with Diabetes free india Contact for more detail Bamoriya farm 9770085381 9893232938
Posted by ਗੁਰਵਿੰਦਰ ਸਿੰਘ
Punjab
16-10-2019 10:31 PM
gurwinder ji ik knal vich saro da beej 185 gram de hisab nal vartya jayega.dhanywad

Posted by raghvendrs singh
Madhya Pradesh
16-10-2019 10:23 PM
कृप्या आप अपना सवाल विस्तार से पूछें कि आप क्या जानकारी लेना चाहते है ताकि आपको सही जानकारी दी जा सके
Posted by Virendra Singh Bhati
Rajasthan
16-10-2019 10:16 PM
श्रीमान जी , 1 हेक्टेयर में तरबूज लगाने के लिए कुल खर्चा लगभग 50000 रूपए लगता है तरबूज़ गहरी उपजाऊ और अच्छे निकास वाली मिट्टी में अच्छा उगता है यह रेतली या रेतली दोमट मिट्टी में उगाने पर ज्यादा पैदावार देता है पानी के घटिया निकास वाली मिट्टी इसकी खेती के लिए उपयुक्त नहीं है इस फसल के लिए फसली चक्र अपनायें, क्य.... (Read More)
श्रीमान जी , 1 हेक्टेयर में तरबूज लगाने के लिए कुल खर्चा लगभग 50000 रूपए लगता है तरबूज़ गहरी उपजाऊ और अच्छे निकास वाली मिट्टी में अच्छा उगता है यह रेतली या रेतली दोमट मिट्टी में उगाने पर ज्यादा पैदावार देता है पानी के घटिया निकास वाली मिट्टी इसकी खेती के लिए उपयुक्त नहीं है इस फसल के लिए फसली चक्र अपनायें, क्योंकि एक ही खेत में बार-बार एक ही फसल उगाने से पोषक तत्व नष्ट होते हैं, पैदावार कम होती है और बीमारियों का हमला ज्यादा होता है मिट्टी की पी एच 6-7 के बीच होनी चाहिए मिट्टी के भुरभुरा होने तक खेत की जोताई करें तरबूज़ की बिजाई सीधी भी की जा सकती है और पनीरी लगाकर भी की जा सकती है तरबूज की खेती के लिए मध्य फरवरी से मध्य मार्च का समय अनुकूल होता है इसका फासला बिजाई के अलग-अलग तरीकों पर निर्भर करता है गड्ढा विधि द्वारा कतार से कतार की दूरी 2-3.5 मी. और पौधे से पौधे में 0.6-1.2 मी. की दूरी होनी चाहिए पौधे के बीज की गहराई 2-4 सैं.मी होनी चाहिए इसकी बिजाई के अलग अलग तरीके हैं जैसे क्यारियों पर लगाना, गड्ढा खोद के लगाना, मेड़ में मौसम और ऋतु के अनुसार लगाना क्यारियों में लगाना : बीज को क्यारी के एक ओर लगाएं एक समय पर 3-4 बीज बोयें और जमाव के बाद एक सेहतमंद बूटा रखें पौधों का आपस में फासला 60-90 सैं.मी. रखें गड्ढा खोद के लगाना : एक टोए में 4 बीज बोयें गड्ढा 60x60x60 सैं.मी. का रखें दो कतारों में फासला 2-3.5 मीटर और पौधों में फासला 0.6-1.2 मीटर रखें गड्ढों को अच्छी तरह रूड़ी और मिट्टी से भरें जमाव के बाद एक बूटा एक गड्ढे में रखें मेड़ पर लगाना : यह तरीका गड्ढे खोदने वाले तरीके जैसा ही है इस में 30x30x30 सै.मी. के गड्ढे 1-1.5 मीटर के फासले पर लगाएं दो बीज एक मेड़ पर लगाएं एक एकड़ की बिजाई के लिए 1.5 से 2 किलो बीज की जरूरत होती है बिजाई से पहले, कार्बेनडाज़िम 2 ग्राम से प्रति किलो बीज का उपचार करें रासायनिक उपचार के बाद बीज को 4 ग्राम ट्राईकोडर्मा विराइड से उपचार करें बीज को छांव में सुखाएं और बीज दें बिजाई के 20-25 दिन पहले 6 टन रूड़ी की खाद खेत में डालें खेत में 20 किलो नाइट्रोजन (45 किलो यूरिया),10 किलो फासफोरस (65 किलो सिंगल सुपरफासफेट) और 10 किलो पोटाश (18 किलो म्यूरेट ऑफ पोटाश) प्रति एकड़ में डालें पूरी फासफोरस, पोटाश और एक तिहाई नाइट्रोजन बीज बोने के समय खेत में डालें बिजाई के 30-45 दिनों के बाद बाकी की नाइट्रोजन की दूसरी किश्त बेलों के आस पास डालें और मिट्टी में पूरी तरह मिला दें फसल के 10-15 दिन बीजने के बाद एन पी के (19:19:19) + लघु तत्व 2-3 ग्राम प्रति लीटर पानी में मिला के स्प्रे करें फूलों को गिरने से बचाने के लिए और ज्यादा पैदावार लेने के लिए 10 प्रतिशत 3 मि.ली. हयूमिक एसिड + 5 ग्राम एम ए पी प्रति लीटर का फूल आने पर प्रयोग करें सैलीसाइलिक एसिड (एसपरिन 350 एम जी 4-5 गोलियां) प्रति 15 लीटर फूल आने पर , पकने पर 35 दिनों बाद स्प्रे करें फसल बीजने के 55 दिनों के बाद 100 ग्राम 13:00:45+25 मि.ली. हैकसाकोनाज़ोल प्रति 15 लीटर को फलों के अच्छे विकास और सफेद रोग से बचाने के लिए स्प्रे करें फल के अच्छे आकार के लिए मिठास और रंग के लिए बीजने के 65 दिनों बाद 1.5 किलो 0:0:50 प्रति एकड़ को 100 ग्राम प्रति 15 लीटर पानी में घोल के स्प्रे करें शुरूआत में बैडों को नदीनों से मुक्त रखें नदीनों की समय पर रोकथाम ना करने पर 30 प्रतिशत पैदावार कम हो जाती है बीजने से 15-20 दिनों के बाद गोडाई करनी चाहिए नदीनों की रोकथाम के लिए 2 या 3 गोडाई की जरूरत पड़ती है बीजों के जल्दी अंकुरण के लिए बिजाई के तुरंत बाद सिंचाई करें बाकी की सिंचाई 5-7 दिनों के अंतराल पर करें फसल पकने पर जरूरत के अनुसार पानी लगाएं फसल में पानी ना खडा होने दें पानी लगाते समय मेंड़ों को गीला ना होने दें, विशेष कर फूलों और फलों को पानी ना लगने दें भारी ज़मीनों को लगातार पानी ना लगाएं ज्यादा मिठास और अच्छे स्वाद के लिए फसल काटने पर 3-6 दिन पहले पानी लगाएं जब तने के साथ वाले रेशे सूख जाएं और ज़मीन में लगा फल पीला हो जाए और फल सफेद होने लग जाए तब फल तोड़ लें फल को थप-थपाने से भद्दी सी आवाज़ देना इसके पकने की निशानी है फल को पूरा पकने के बाद ही तोड़ना चाहिए आधे पके फलों में मिठास और रंग कम होता है पके फलों को चाकू से काट लें फलों को ठंडे और नमी वाले वातावरण में रखें धन्यवाद

Posted by Ajaib sandha
Punjab
16-10-2019 10:12 PM
kirpa krke tuci usde godde di photo bhejo ji jiss nu dekh ke tuhanu sahi jankari diti ja skee..

Posted by Amritpal singh
Punjab
16-10-2019 10:06 PM
BhaaG isnu 1kg kanak da dalia 500g gur ch rinh ke swer te aina hi shaam nu 7din khuao Rajwa hara chaara te har 2.5 kg dudh lai 1kg wadhya feed pao Dudh aap pio majh nu pia k ki labh hou baaki har 3 mahine baad malap rehat kar deo

Posted by Jagar Singh
Punjab
16-10-2019 10:00 PM
BhaaG isnu rajwa hara chaara te har 3kg dudh lai majh nu 1kg wadhya feed pao baaki tuci calcium dian 1-2bottle doctor ton khoon wali naarh wich lagwa lao har 3 mahine baad malap rehat karo Pashu di synh ton pehlan dab ke sewa karni chahidy hai jiwe 10 kg dudh wali di karde ne

Posted by ਗੁਰਦਿੱਤ ਸਿੰਘ
Punjab
16-10-2019 09:52 PM
Gurdit singh ji same same te kisana di mang de mutabik training chaldia hi rehdia han training len lai tusi apna jile de Krishi Vigyan Kendra Mansa Village Khokhar Khurd, Mansa District Mansa Punjab - India. Phone: 01652-280843 nal samparak karo ate apna training farm bhar ke ao jida hi training di date rakhi jave vi tuhanu call kar ke das dita javega, Thankyou.

Posted by Prashant
Madhya Pradesh
16-10-2019 09:48 PM
bhai sahib rajwa hara chaara te har 3 kg dudh lai 1kg feed pao har 3 mahine baad malap rehat karo swer shaam taaran v dekho jab taaran dekho is ka garbdan karwao Bhais ki taaran nazdik ki lab se culture karwa ke dasi pashuan wali dwaee doctor se bachedani me bharwayen

Posted by Radheshyamchouhan
Madhya Pradesh
16-10-2019 09:41 PM
आप अभी सब्ज़ियों, गेहूं या चारे की बिजाई कर सकते है

Posted by Vinay Yadav
Uttar Pradesh
16-10-2019 09:40 PM
bhai sahib rajwa hara chaara te har 3 kg dudh lai 1kg wadhya feed pao har 3 mahine baad pet ke kirhe nikalne ki dwaee deo

Posted by Vinay Yadav
Uttar Pradesh
16-10-2019 09:38 PM
गेंहूं की बिजाई सही समय पर करनी जरूरी है पिछेती बिजाई की फसल की पैदावार पर बुरा असर पड़ता है गेहूं की बिजाई 25 अक्तूबर से नवंबर के महीने में की जाती है फसल की अच्छी पैदावार के लिए कतारों में 20-22.5 सै.मी. का अंतर होना जरूरी है पिछेती बीजी गई फसल में कतारों में 15-18 सै.मी. तक का अंतर होना जरूरी है बीज की गहराई 4-5 सैंमी हो.... (Read More)
गेंहूं की बिजाई सही समय पर करनी जरूरी है पिछेती बिजाई की फसल की पैदावार पर बुरा असर पड़ता है गेहूं की बिजाई 25 अक्तूबर से नवंबर के महीने में की जाती है फसल की अच्छी पैदावार के लिए कतारों में 20-22.5 सै.मी. का अंतर होना जरूरी है पिछेती बीजी गई फसल में कतारों में 15-18 सै.मी. तक का अंतर होना जरूरी है बीज की गहराई 4-5 सैंमी होनी चाहिए बिजाई छींटा देना विधि या बिजाई वाली मशीन द्वारा की जाती है धन्यवाद

Posted by Radheshyamchouhan
Madhya Pradesh
16-10-2019 09:37 PM
यदि आप चारे की फसल लगाना चाहते है तो आप आप बरसीम,ज्वी, राईघास की बिजाई कर सकते है

Posted by vishal098
Uttarakhand
16-10-2019 09:33 PM
bhai sahib rajwa hara chaara te 2kg feed rojana dyo Pet ke kirhe nikalne ki dwaee deo Unj dudh 2 mahine pehlan dudho chhod na hota ae

Posted by Prashant
Madhya Pradesh
16-10-2019 09:16 PM
Prashant ji yadi apki bhains heat mai nahi aa rehi hai to usko aap pett ke kirro ke liye Flukarid-Ds bolus den aur usko Bovimin-B powder 100gm rojana aur Minotas tablet rojana 1 goli den aur 21 din tak dete rehen, isse heat mai aa jayegi, yaddi aap koi aur jankari lena chahte hai too aap dubara apna swal push skte hai..

Posted by सी एल मीना
Rajasthan
16-10-2019 09:14 PM
मिर्च रेतली से भारी चिकनी हर तरह की मिट्टी में उगाई जा सकती है अच्छे विकास के लिए हल्की उपजाऊ और पानी के अच्छे निकास वाली ज़मीन जिसमे नमी सोखने की क्षमता हो, इसके लिए अनुकूल होती है हल्की ज़मीनें भारी ज़मीनों के मुकाबले अच्छी क्वालिटी की पैदावार देती हैं मिर्च के अच्छे विकास के लिए ज़मीन की pH 6-7 अनुकूल है आप इसकी .... (Read More)
मिर्च रेतली से भारी चिकनी हर तरह की मिट्टी में उगाई जा सकती है अच्छे विकास के लिए हल्की उपजाऊ और पानी के अच्छे निकास वाली ज़मीन जिसमे नमी सोखने की क्षमता हो, इसके लिए अनुकूल होती है हल्की ज़मीनें भारी ज़मीनों के मुकाबले अच्छी क्वालिटी की पैदावार देती हैं मिर्च के अच्छे विकास के लिए ज़मीन की pH 6-7 अनुकूल है आप इसकी किस्मे जैसे Arka Meghana,Arka Sweta,Kashi Early, Kashi Surkh की बिजाई कर सकते है खेत को तैयार करने के लिए 2-3 बार जोताई करें और प्रत्येक जोताई के बाद डलियों को तोड़ें बिजाई से 15-20 दिन पहले रूड़ी की खाद 150-200 क्विंटल प्रति एकड़ डालकर मिट्टी में अच्छी तरह मिला दें टमाटर और मिर्च की खेती एक ही या नज़दीक वाले खेत में ना करें, क्योंकि दोनों की बीमारियां एक जैसी होती हैं और इस कारण एंथ्राक्नोस और बैक्टीरिया वाली बीमारीयों के बढ़ने का खतरा बढ़ जाता है मिर्च की खेती पूरे वर्ष की जाती है खरीफ की फसल के लिए मई-जून और गर्मियों की फसल के लिए फरवरी - मार्च का समय मिर्च की रोपाई के लिए उपयुक्त होता है खरीफ के मौसम में 60-75 सैं.मी. x 45 सैं.मी. और सिंचित क्षेत्रों में 60 x 60 सैं.मी. फासले का प्रयोग करें नर्सरी में बीजों को 3-5 सैं.मी. की गहराई में बोयें और फिर मिट्टी से ढक दें इसकी मुख्य खेत में रोपाई की जाती है 1 मीटर चौड़े और आवश्यकतानुसार लंबे बैड बनाएं कीटाणु रहित कोकोपिट 300 किलो, 5 किलो नीम केक को मिलाए और 1-1किलो एज़ोसपीरिलियम और फासफोबैक्टीरिया भी डालें उपचार किए हुए बीज ट्रे में एक बीज प्रति सैल बोयें बीज को कोकोपिट से ढक दें और ट्रे एक- दूसरे के साथ रखें बीज अंकुरन तक इन्हें पॉलीथीन से ढक दें नर्सरी में बीज बीजने के बाद बैडों को 400 मैश नाइलोन जाल या पतले सफेद कपड़े से ढक दें यह नए पौधों को कीड़े-मकौड़े और बीमारियों के हमले से बचाता है 6 दिनों के बाद, ट्रे में लगे नए पौधों को एक एक करके जाल की छांव के नीचे बैडों में लगाएं बीज अंकुरन तक पानी देने वाले बर्तन की मदद से पानी दें बिजाई के 18 दिन बाद 19:19:19 की 0.5 % (5 ग्राम प्रति लीटर ) की स्प्रे करें किस्मों के लिए 200 ग्राम बीज और हाइब्रिड के लिए 80-100 ग्राम बीज प्रति एकड़ में प्रयोग करें बारानी क्षेत्रों के लिए, नाइट्रोजन 50 किलो (110 किलो यूरिया), फासफोरस 16 किलो (सिंगल सुपर फासफेट 100 किलो) और पोटाश 20 किलो (म्यूरेट ऑफ पोटाश 35 किलो) प्रति एकड़ डालें नाइट्रोजन की आधी मात्रा, फासफोरस और पोटाश की पूरी मात्रा पनीरी खेत में लगाने के समय डालें रोपाई के बाद बाकी बची नाइट्रोजन दो बराबर हिस्सों में 30वें और 50वें दिन डालें सिंचित क्षेत्रों के लिए, नाइट्रोजन 84 किलो (182 किलो यूरिया), फासफोरस 24 किलो (सिंगल सुपर फासफेट 150 किलो) और पोटाश 24 किलो (म्यूरेट ऑफ पोटाश 40 किलो) प्रति एकड़ डालें रोपाई से पहले 24 किलो नाइट्रोजन (यूरिया 52 किलो), फासफोरस की पूरी मात्रा और पोटाश की आधी मात्रा प्रति एकड़ में डालें बाकी बची नाइट्रोजन को पांच भागों में बांटें और पोटाश को तीन बराबर भागों में बांटें नाइट्रोजन 12 किलो (यूरिया 26 किलो) को बिजाई के बाद 45वें, 60वें, 75वें, 95वें और 115वें दिन डालें और पोटाश 4 किलो को बिजाई के बाद 45वें, 60वें, और 75वें दिन डालें 45 दिनों तक गोडाई करें, कही की मदद से मिट्टी चढ़ाएं और खेत को नदीन मुक्त रखें यदि नदीनों की रोकथाम ना की जाये तो यह 70-90 % पैदावार कम कर देते हैं रोपाई से पहले मुख्य खेत में पैंडीमैथालीन 1 लीटर प्रति एकड़ में डालें यदि नदीनों की संख्या ज्यादा हो तो उनके अंकुरण के बाद सेन्कोर 800 मि.ली की स्प्रे प्रति एकड़ में करें नदीनों की रोकथाम के साथ मिट्टी में नमी को बनाए रखने के लिए मलचिंग एक प्रभावी तरीका है मिट्टी में नमी के आधार पर सर्दियों में 6-7 दिनों के अंतराल पर और गर्मियों में 4-5 दिनों के अंतराल पर सिंचाई करें फूल निकलने की अवस्था सिंचाई के लिए गंभीर होती है इस अवस्था पर पानी की कमी से फल गिरते हैं जिससे फलों के उत्पादन में कमी होती है विभिन्न खोजों में यह पाया गया है, कि प्रत्येक पखवाड़े में आधा इंच सिंचाई से जड़ों में नमी ज्यादा होती है जिससे वे अधिक उपज देती हैं मिर्चों की तुड़ाई हरा रंग आने पर करें या फिर पकने के लिए पौधे पर ही रहने दें मिर्चों का पकने के बाद वाला रंग किस्म पर निर्भर करता है अधिक तुड़ाइयां लेने के लिए यूरिया 10 ग्राम प्रति लीटर और घुलनशील K @ 10 ग्राम प्रति लीटर पानी (1 प्रतिशत प्रत्येक का घोल) की स्प्रे 15 दिनों के फासले पर कटाई के समय करें पैकिंग के लिए मिर्चें पक्की और लाल रंग की होने पर तोड़ें सुखाने के लिए प्रयोग की जाने वाली मिर्चों की पूरी तरह पकने के बाद ही तुड़ाई करें

Posted by Prashant
Madhya Pradesh
16-10-2019 09:12 PM
यदि आपकी भैंस बार बार रिपीट हो रही है तो आप भैंस को Metricef-iu 2 दिन दवाई बच्चेदानी में भरवा दें, दवाई भरवाने के बाद भैंस को Agrimin super powder देना शुरू कर दें इसे 100 ग्राम रोज़ाना दें, और लगभग 2 किलो तक दें, इसके साथ आप Concimax गोलियां रोज़ाना एक गोली दें, और 14 दिन तक देते रहें, फिर अगली बार हीट में आने पर उसे टीका भरवा कर ये गोलियां 14 दिन द.... (Read More)
यदि आपकी भैंस बार बार रिपीट हो रही है तो आप भैंस को Metricef-iu 2 दिन दवाई बच्चेदानी में भरवा दें, दवाई भरवाने के बाद भैंस को Agrimin super powder देना शुरू कर दें इसे 100 ग्राम रोज़ाना दें, और लगभग 2 किलो तक दें, इसके साथ आप Concimax गोलियां रोज़ाना एक गोली दें, और 14 दिन तक देते रहें, फिर अगली बार हीट में आने पर उसे टीका भरवा कर ये गोलियां 14 दिन देते रहें, इस तरह ये गाभिन रह जाएगी, यदि आपका कोई ओर सवाल है तो आप दोबारा पूछ सकते हैं..
Posted by देवराज
Uttar Pradesh
16-10-2019 09:10 PM
Dev raj ji tulsi ki contract farming ke lia aap Manoj Shani 7694899000 Dwarkapati Agri Trade Pvt. Ltd. se samparak kar sakte hai, Thankyou.
Posted by sushil
Uttar Pradesh
16-10-2019 08:57 PM
नर्सरी का रजिस्ट्रेशन कराने के लिए आप अपने जिला उद्यान अधिकारी के यहां पर संपर्क करें

Posted by Sunil Kumar
Haryana
16-10-2019 08:54 PM
आप भैंस को Metricef-iu 2 दिन दवाई भरवा दें, दवाई भरवाने के बाद भैंस को Agrimin super powder देना शुरू कर दें इसे 100 ग्राम रोज़ाना दें, और लगभग 2 किलो तक दें, इसके साथ आप Concimax गोलियां रोज़ाना एक गोली दें, और 14 दिन तक देते रहें, फिर अगली बार हीट में आने पर उसे टीका भरवा कर ये गोलियां 14 दिन देते रहें, इस तरह ये गाभिन रह जाएगी, यदि आपका कोई ओर सवाल .... (Read More)
आप भैंस को Metricef-iu 2 दिन दवाई भरवा दें, दवाई भरवाने के बाद भैंस को Agrimin super powder देना शुरू कर दें इसे 100 ग्राम रोज़ाना दें, और लगभग 2 किलो तक दें, इसके साथ आप Concimax गोलियां रोज़ाना एक गोली दें, और 14 दिन तक देते रहें, फिर अगली बार हीट में आने पर उसे टीका भरवा कर ये गोलियां 14 दिन देते रहें, इस तरह ये गाभिन रह जाएगी, यदि आपका कोई ओर सवाल है तो आप दोबारा पूछ सकते हैं..

Posted by Mandeep Singh
Punjab
16-10-2019 08:51 PM
ਸੂਰ ਪਾਲਣ ਦੇ ਕੰਮ ਨੂੰ ਟ੍ਰੇਨਿੰਗ ਤੋਂ ਬਿਨਾ ਨਾ ਸ਼ੁਰੂ ਕੀਤਾ ਜਾਵੇ ਸੂਰ ਪਾਲਣ ਲਈ ਤੁਸੀ large white yorkshire ਨਸਲ ਰੱਖ ਸਕਦੇ ਹੋ ਬਾਕੀ ਸ਼ੁਰੂ ਕਰਨ ਲਈ ਪਹਿਲਾਂ ਤੁਸੀ ਕਿਸੇ ਸਫਲ ਸੂਰ ਪਾਲਕ ਦੇ ਫਾਰਮ ਤੇ ਖੁਦ ਜਾ ਕੇ ਬਾਕੀ ਸ਼ੈਡ ਬਣਾਉਣ ਲਈ ਫਾਰਮ ਤੇ ਜਾ ਕੇ ਖੁਦ ਸਮਝਨਾ ਪੈਣਾ ਕਿਉਕੀ ਇਹ ਅਲੱਗ ਅਲੱਗ ਜਗਾਂ ਦੇ ਹਿਸਾਬ ਨਾਲ ਸੈਟ ਕਰਨਾ ਪੈਂਦਾ ਹੈ ਸਬਸਿਡੀ - ਟ੍ਰੇਨਿੰਗ ਕਰਨ ਤੋਂ ਬਾਅਦ ਸੂਰ ਪਾਲਣ ਤੇ 2 ਲੱ.... (Read More)
ਸੂਰ ਪਾਲਣ ਦੇ ਕੰਮ ਨੂੰ ਟ੍ਰੇਨਿੰਗ ਤੋਂ ਬਿਨਾ ਨਾ ਸ਼ੁਰੂ ਕੀਤਾ ਜਾਵੇ ਸੂਰ ਪਾਲਣ ਲਈ ਤੁਸੀ large white yorkshire ਨਸਲ ਰੱਖ ਸਕਦੇ ਹੋ ਬਾਕੀ ਸ਼ੁਰੂ ਕਰਨ ਲਈ ਪਹਿਲਾਂ ਤੁਸੀ ਕਿਸੇ ਸਫਲ ਸੂਰ ਪਾਲਕ ਦੇ ਫਾਰਮ ਤੇ ਖੁਦ ਜਾ ਕੇ ਬਾਕੀ ਸ਼ੈਡ ਬਣਾਉਣ ਲਈ ਫਾਰਮ ਤੇ ਜਾ ਕੇ ਖੁਦ ਸਮਝਨਾ ਪੈਣਾ ਕਿਉਕੀ ਇਹ ਅਲੱਗ ਅਲੱਗ ਜਗਾਂ ਦੇ ਹਿਸਾਬ ਨਾਲ ਸੈਟ ਕਰਨਾ ਪੈਂਦਾ ਹੈ ਸਬਸਿਡੀ - ਟ੍ਰੇਨਿੰਗ ਕਰਨ ਤੋਂ ਬਾਅਦ ਸੂਰ ਪਾਲਣ ਤੇ 2 ਲੱਖ ਦੀ ਸਬਸਿਡੀ ਹੁੰਦੀ ਹੈ ਕੁੱਲ ਪ੍ਰੋਜੇਕਟ 8 ਲੱਖ ਦਾ ਹੁੰਦਾ ਹੈ ਉਸ ਵਿੱਚੋ 2 ਲੱਖ ਸਬਸਿਡੀ ਹੁੰਦੀ ਹੈ ਜੇ ਤੁਸੀ ਆਪਣੇ ਪੱਧਰ ਤੇ ਕਰਨਾ ਹੈ ਤਾਂ ਤੁਸੀ 2-2.50 ਲੱਖ ਵਿੱਚ ਇੱਕ ਵਾਰ ਛੋਟੇ ਲੈਵਲ ਤੋਂ ਸ਼ੁਰੂ ਕਰ ਸਕਦੇ ਹੋਂ ਟ੍ਰੇਨਿੰਗ ਕਰਵਾਉਣ ਲਈ ਸਰਕਾਰੀ ਸੂਰ ਫਾਰਮ ਬਣੇ ਹਨ ਜਿਵੇ ਮੱਲੋਵਾਲ, ਖਰੜ, ਨਾਭਾ , ਗੁਰਦਾਸਪੁਰ ਵਿੱਚ ਜਿੱਥੇ 5 ਦਿਨ ਦੀ ਮੁਫਤ ਟ੍ਰੇਨਿੰਗ ਦਿੱਤੀ ਜਾਂਦੀ ਹੈ. ਸਫ਼ਲ ਸੂ੍ਰ ਪਾਲਕਾ ਦੇ ਤਜ਼ਰਬੇ ਅਨੁਸਾਰ ਇੱਕ ਸੂਰੀ ਇੱਕ ਸਾਲ ਵਿੱਚ ਦੋ ਤੋਂ ਢਾਈ ਵਾਰ ਬੱਚੇ ਦਿੰਦੀ ਹੈ ਪਹਿਲੇ ਸੂਏ 6-7 ਬੱਚੇ ਦਿੰਦੀ ਹੈ ਤੇ ਦੂਜੇ ਸੂਏ 10-14 ਬੱਚੇ ਦਿੰਦੀ ਹੈ ਜੇਕਰ ਤੁਸੀ ਸੂਰ ਮੀਟ ਲਈ ਤਿਆਰ ਕਰ ਰਹੇ ਹੋਂ ਤਾਂ ਇੱਕ ਸੂਰ 7-8 ਮਹੀਨਿਆਂ ਵਿੱਚ ਲੱਗਭੱਗ 1 ਕੁਇੰਟਲ ਦਾ ਹੋ ਜਾਂਦਾ ਹੈ ਤੇ ਉਸ ਤੋਂ 100 ਰੁਪਏ ਪ੍ਰਤੀ ਕਿਲੋ ਦੇ ਹਿਸਾਬ ਨਾਲ ਵਿਕ ਜਾਂਦਾਂ ਹੈ ਤੇ ਗੱਭਣ ਸੂਰੀ 150-200 ਰੁਪਏ ਪ੍ਰਤੀ ਕਿਲੋ ਦੇ ਹਿਸਾਬ ਨਾਲ ਵੇਚੀ ਜਾ ਸਕਦੀ ਹੈ ਸੂਰਾਂ ਦੀ ਮਾਰਕੀਟਿੰਗ ਦੀ ਵੀ ਕੋਈ ਦਿੱਕਤ ਨਹੀ ਕਿੳਂਕੀ ਵਪਾਰੀ ਖੁਦ ਫਾਰਮ ਤੋਂਂ ਆ ਕੇ ਸੂਰ ਲੈ ਜਾਂਦੇ ਹਨ ਮਂੱਨ ਲਵੋ ਅੱਜ ਸੂਰੀ ਗੱਭਣ ਕਰਵਾਈ ਉਸ ਤੋਂ 115 ਦਿਨਾਂ ਬਾਅਦ ਬੱਚੇ ਦੇ ਦਿੰਦੀ ਹੈ ਫਿਰ 1 ਮਹੀਨਾ ਬੱਚਿਆਂ ਨੂੰ ਦੁੱਧ ਪਿਆਉਣਾ ਹੈ ਤੇ ਉਸ ਤੋਂ ਬਾਅਦ ਉਨਾਂ ਨੂੰ ਅਲੱਗ ਕੀਤਾ ਜਾਂਦਾ ਹੈ ਜਦੋੰ ਸੂਰੀ ਤੋਂਂ ਬੱਚੇ ਵੱਖ ਕੀਤੇ ਫਿਰ 5-7 ਦਿਨਾਂ ਬਾਅਦ ਫਿਰ ਦੁਬਾਰਾ ਗੱਬਣ ਹੋ ਜਾਂਦੀ ਹੈ ਸੂਰੀ ਇਸ ਤਰਾਂ ਇਹ ਦੁਬਾਰਾ ਫਿਰ ਸਰਕਲ ਚੱਲਦਾ ਰਹਿੰਦਾ ਹੈ ਇਥੇ ਗੱਲ ਧਿਆਨ ਰੱਖਣ ਵਾਲੀ ਹੈ ਕਿ ਇਹ ਸਰਕਲ ਤਾਂ ਹੀ ਸਹੀ ਚੱਲੇਗਾ ਜੇਕਰ ਫੀਡ ਸਹੀ ਪਾਉਦੇ ਰਹਾਂਗੇ ਜੇਕਰ ਆਪਾਂ ਫੀਡ ਸਹੀ ਨਾ ਪਾਈ ਤੇ 2 ਮਹੀਂਨੇ ਤੱਕ ਦੁੱਧ ਪਿਆਉਦੇ ਰਹੇ ਤੇ ਬੱਚਿਆਂ ਨੂੰ ਵੱਖ ਨਾ ਕੀਤਾ ਤਾਂ ਸਰਕਲ ਖਰਾਬ ਹੋ ਜਾਵੇਗਾ ਸੋ ਫੀਡ ਤੇ ਖਰਚਾ ਤਾਂ ਜਿਆਦਾ ਆਉਦਾ ਹੈ ਤੇ ਮੁਨਾਫਾ ਵੀ ਪੂਰਾ ਮਿਲ ਜਾਂਦਾ ਹੈ ਪੰਜ ਗੱਭਣ ਸੂਰੀਆ 10-11 ਮਹੀਨਿਆ ਬਾਅਦ ਪਹਿਲੀ ਇਨਕਮ ਆਉਸੀ ਹੈ ਤੇ ਲੱਗਭੱਗ ਇੱਕ ਸੂਰੀ 3500 ਰੁਪਏ ਮਹੀਨੇ ਦੀ ਇਨਕਮ ਆਉਦੀ ਹੈ ਇਸ ਹਿਸਾਬ ਨਾਲ ਤੁਸੀ ਅੰਦਾਜ਼ਾ ਲਾ ਸਕਦੇ ਹੋ.
Expert Communities
We do not share your personal details with anyone
We do not share your personal details with anyone
Sign In
Registering to this website, you accept our Terms of Use and our Privacy Policy.
Your mobile number and password is invalid
We have sent your password on your mobile number
All fields marked with an asterisk (*) are required:
Sign Up
Registering to this website, you accept our Terms of Use and our Privacy Policy.
All fields marked with an asterisk (*) are required:
Please select atleast one option
Please select text along with image










