
Posted by pradeep Singh
Haryana
18-10-2019 12:17 PM
मोती की खेती एक बहुत ही अच्छा व्यवसाय है इस व्यवसाय को शुरू करने के लिए सबसे जरुरी है इसकी ट्रेनिंग, क्योकि इसमें बहुत सी ऐसी बारीकियें होती है जो हमें प्रेक्टिकल ट्रेनिंग में ही सीखने को मिलती है अगर आप इसकी ट्रेनिंग लेना चाहते है तो आप ग्लिटराटी पर्ल फार्मिंग ट्रेनिंग केंद्र यहाँ जून और जुलाई महीने में 3 .... (Read More)
मोती की खेती एक बहुत ही अच्छा व्यवसाय है इस व्यवसाय को शुरू करने के लिए सबसे जरुरी है इसकी ट्रेनिंग, क्योकि इसमें बहुत सी ऐसी बारीकियें होती है जो हमें प्रेक्टिकल ट्रेनिंग में ही सीखने को मिलती है अगर आप इसकी ट्रेनिंग लेना चाहते है तो आप ग्लिटराटी पर्ल फार्मिंग ट्रेनिंग केंद्र यहाँ जून और जुलाई महीने में 3 दिन का प्रशिक्षण कार्य कर्म आयोजित किया जा रहा है प्रशिक्षण कार्य कर्म में भाग लेने के लिए नीचे दिए गए नम्बर पर आज ही संपर्क करें और Rs 250/ से अपना रजिस्ट्रेशन करवाए जून - 22,23,24 (प्रशिक्षण की तारीख ) जुलाई - 20,21,22 (प्रशिक्षण की तारीख ) अचल सिंह (फाउंडर )- 9711858258. धन्यवाद

Posted by PARMESHWAR
Chattisgarh
18-10-2019 12:05 PM
PARMESHWAR ji Plant lene ke lia aap Rajindra 9822534678 Plants Paradise Nursery se samparak kar sakte hai, Thankyou.
Posted by Beerbal Singh Rajput
Madhya Pradesh
18-10-2019 12:05 PM
Beerbal Singh Rajput ji seed lene ke lia aap Shine Brand Seeds 8770896002 se samparak kar sakte hai, Thankyou.

Posted by pradeep Singh
Haryana
18-10-2019 12:00 PM
COJ 64: यह अगेती पकने वाली किस्म है यह किस्म अच्छा अंकुरण देती है, अच्छी जोताई वाली ज़मीन में बोयी जाती है इससे अच्छी गुणवत्ता के गुड़ का उत्पादन होता है यह लाल जंग के प्रति उच्च संवेदनशील है इसकी औसतन पैदावार 300 क्विंटल प्रति एकड़ होती है
COH 56: यह अगेती पकने वाली और उच्च पैदावार वाली किस्म है यह गर्दन तोड़ और लाल जं.... (Read More)
COJ 64: यह अगेती पकने वाली किस्म है यह किस्म अच्छा अंकुरण देती है, अच्छी जोताई वाली ज़मीन में बोयी जाती है इससे अच्छी गुणवत्ता के गुड़ का उत्पादन होता है यह लाल जंग के प्रति उच्च संवेदनशील है इसकी औसतन पैदावार 300 क्विंटल प्रति एकड़ होती है
COH 56: यह अगेती पकने वाली और उच्च पैदावार वाली किस्म है यह गर्दन तोड़ और लाल जंग के प्रतिरोधी है इसकी औसतन पैदावार 300 क्विंटल प्रति एकड़ होती है
COH 92: यह अगेती पकने वाली किस्म है इसकी औसतन पैदावार 250 क्विंटल प्रति एकड़ होती है
COH 99: यह मध्यम समय की किस्म है, जिसमें टी एस एस की मात्रा 17.5 प्रतिशत होती है यह किस्म सूखे के मौसम में भी खड़ी रह सकती है इस किस्म की सिफारिश पूरे हरियाणा में खेती करने के लिए की गई है इसकी औसतन पैदावार 280 क्विंटल प्रति एकड़ होती है
CO 7717: यह मध्यम समय की किस्म है इसमें टी एस एस की मात्रा 17 प्रतिशत है यह किस्म गर्दन तोड़ के प्रतिरोधी है यह लाल जंग के प्रतिरोधी किस्म है इसमें रस की मात्रा अधिक होती है, इसकी यह विशेषता लंबे समय तक रहती है इसकी औसतन पैदावार 350 क्विंटल प्रति एकड़ होती है
CoS 8436: यह मध्यम मौसम की किस्म है यह मोटी मजबूत हरे पीले रंग की छोटी लाल किस्म है यह किस्म गर्दन तोड़ के प्रतिरोधी है और यह लाल जंग को सहने योग्य है यह नियमित सिंचाई के साथ अच्छी उपजाऊ वाली भूमि में बहुत बढ़िया पैदावार देती है इसकी औसतन पैदावार 307 क्विंटल प्रति एकड़ होती है
CoH 119 : यह मध्य मौसम की किस्म है इसके लंबे, मोटे हरे रंग के गन्ने होते हैं और विशिष्ट मौसम में होते हैं यह किस्म रतुआ रोग और चोटी बेधक को सहनेयोग्य है यह औसतन मोढ़ी की फसल है इसकी औसतन पैदावार 340 क्विंटल प्रति एकड़ होती है
CoJ 238: यह मध्य मौसम की किस्म है इसके लंबे, मोटे हरे रंग के गन्ने होते हैं और विशिष्ट मौसम में होते हैं यह किस्म रतुआ रोग और चोटी बेधक को सहनेयोग्य है यह औसतन मोढ़ी की फसल है इसकी औसतन पैदावार 365 क्विंटल प्रति एकड़ होती है
Co 1148: यह किस्म पिछेती बिजाई के लिए अनुकूल है यदि अच्छी जोताई की जाए तो इसका अंकुरण अच्छा होता है और गुलियां भी अच्छी बनती हैं यह मध्यम गुणवत्ता के गुड़ का उत्पादन करती है यह लाल जंग के प्रति अधिक संवेदनशील है इसकी औसतन पैदावार 375 क्विंटल प्रति एकड़ होती है
CoH - 35 (Haryana 35): यह किस्म पिछेती बिजाई के लिए अनुकूल है इसके गन्ने मोटे और रसदार होते हैं इसमें टी एस एस की मात्रा 18-20 प्रतिशत होती है इसकी औसतन पैदावार 320 क्विंटल प्रति एकड़ होती है
COS 767: यह किस्म दिसंबर महीने में कटाई के लिए तैयार होती है यह सूखे और जल जमाव के हालातों में खड़ी रह सकती है इसकी औसतन पैदावार 300 क्विंटल प्रति एकड़ और इसमें टी एस एस की मात्रा 16-18 प्रतिशत है

Posted by ARJUN yadav
Uttar Pradesh
18-10-2019 12:00 PM
श्रीमान जी, आप इसमें quinalphos @1.5 ml प्रति लीटर पानी के हिसाब से स्प्रे करें, और इसमें vermicompost 5 से 6 kg डालें धन्यवाद

Posted by PARMESHWAR
Chattisgarh
18-10-2019 11:58 AM
PARMESHWAR ji Plant lene ke lia aap Rajindra 9822534678 Plants Paradise Nursery se samparak kar sakte hai, Thankyou.

Posted by PARMESHWAR
Chattisgarh
18-10-2019 11:56 AM
इसके सख्त होने की वजह से इसे मिट्टी की हर किस्म में उगाया जा सकता है इसे हल्की तेजाबी और लूणी ज़मीन में उगाया जा सकता है और चूने वाली ज़मीन में भी इसे उगाया जा सकता हैं जब इसकी खेती अच्छे जल निकास वाली और उपजाऊ - चिकनी मिट्टी में की जाती है तो यह अच्छी पैदावार देती है यह खारी मिट्टी को भी सहने योग्य है इस फसल की खे.... (Read More)
इसके सख्त होने की वजह से इसे मिट्टी की हर किस्म में उगाया जा सकता है इसे हल्की तेजाबी और लूणी ज़मीन में उगाया जा सकता है और चूने वाली ज़मीन में भी इसे उगाया जा सकता हैं जब इसकी खेती अच्छे जल निकास वाली और उपजाऊ - चिकनी मिट्टी में की जाती है तो यह अच्छी पैदावार देती है यह खारी मिट्टी को भी सहने योग्य है इस फसल की खेती के लिए मिट्टी की पी एच 6.5-9.5 होनी चाहिए भारी ज़मीनों में इसकी खेती करने से परहेज करें प्रसिद्ध किस्में:- Narendra 6,Narendra 7 (Promising variety),Krishna,Balwant.आंवला की खेती के लिए अच्छी तरह से जोती गई ज़मीन और जैविक मिट्टी की आवश्यकता होती है पौध रोपण से पहले ज़मीन की अच्छी तरह जोताई करें जब तक मिट्टी भुरभुरी ना हो जाये जैविक खाद जैसे कि FYM को मिट्टी में मिलायें उसके बाद 2.5 सैं.मी. गहरा और 15 सैं.मी. x 15 सैं.मी. आकार के नर्सरी बैड तैयार करें आंवला की खेती जुलाई से सितंबर के महीने में की जाती है उदयपुर में इसकी खेती जनवरी से फरवरी महीने में की जाती है मई-जून के महीने में नए अंकुरित पौधे 4.5 मी x 4.5 मी के फासले पर लगाएं 1 मीटर गहरा गड्ढा खोदें और उसे सूरज की रोशनी में 15-20 दिनों के लिए खुला छोड़ दें मुख्य खेत में नए अंकुरित पौधे लगाएं अच्छी वृद्धि के लिए 200 ग्राम बीजों को प्रति एकड़ में प्रयोग करें बीजों को मिट्टी से पैदा होने वाले कीटों और बीमारियों से बचाने के लिए और अच्छे अंकुरन के लिए बिजाई से पहले जिबरैलिक एसिड 200-500 पी पी एम से उपचार करें रासायनिक उपचार के बाद बीजों को हवा में सुखाएं खेत की तैयारी के समय 10 किलो FYM को मिट्टी में अच्छी तरह मिलाएं नाइट्रोजन 100 ग्राम , फासफोरस 50 ग्राम और पोटाश्यिम 100 ग्राम प्रति पौधे में प्रयोग करें यह खाद एक वर्ष पुराने पौधे में दें और 10 वर्ष के पौधे में इसकी मात्रा बढ़ा दें फासफोरस की पूरी मात्रा और पोटाशियम की आधी मात्रा और नाइट्रोजन को जनवरी फरवरी के शुरूआती खुराक के तौर पर दें बाकी की मात्रा अगस्त के महीने में दें क्षारीय मिट्टी में बोरोन और जिंक सल्फेट 100-500 ग्राम वृक्ष की आयु के अनुसार दें गर्मियों के मौसम में 15 दिनों के अंतराल पर सिंचाई करें और सर्दियों में अक्तूबर दिसंबर के महीने में 25-30 लीटर प्रति दिन प्रति वृक्ष दें मॉनसून के महीने में सिंचाई की आवश्यकता नहीं होती फूल आने के समय सिंचाई करने से परहेज़ करें लगातार नदीनों को हटाकर खेत को नदीन मुक्त रखें कटाई और छंटाई आवश्य करें क्रॉस शाखाओं को काट दें सिर्फ 4-5 शाखाएं वृद्धि के लिए छोड़ दें नदीनों को हटाने के लिए मलचिंग एक सबसे बेहतर तरीका है गर्मियों में वृक्ष की जड़ से लेकर 10-15 सैं.मी. ऊपर तक मलचिंग करें पौधा रोपाई के 7-8 वर्ष बाद उपज देना शुरू करता है जब फूल हरे रंग के हो जाएं और इनमें एसकार्बिक एसिड की अधिक मात्रा हो जाए तो फरवरी के महीने में कटाई कर दें इसकी तुड़ाई वृक्ष को हिलाकर की जाती है जब फूल पूरी तरह से परिपक्व हो जाते हैं तो यह हरे पीले रंग के हो जाते हैं बीजों के लिए परिपक्व फूलों का प्रयोग किया जाता है

Posted by PARMESHWAR
Chattisgarh
18-10-2019 11:54 AM
इसकी खेती के लिए अच्छे निकास वाली, उच्च उपजाऊ मिट्टी की आवश्यकता होती है मिट्टी की पी एच 6-7.5 होनी चाहिए यह चूना और क्लोरीन युक्त मिट्टी को भी सहनेयोग्य है इसकी खेती के लिए नदी के नज़दीक वाली मिट्टी भी उपयुक्त होती है Pant Mahima: यह लंबी और फैलने वाली किस्म है इसके फल हल्के हरे से हल्के भूरे रंग के होते हैं इसक कतारों म.... (Read More)
इसकी खेती के लिए अच्छे निकास वाली, उच्च उपजाऊ मिट्टी की आवश्यकता होती है मिट्टी की पी एच 6-7.5 होनी चाहिए यह चूना और क्लोरीन युक्त मिट्टी को भी सहनेयोग्य है इसकी खेती के लिए नदी के नज़दीक वाली मिट्टी भी उपयुक्त होती है Pant Mahima: यह लंबी और फैलने वाली किस्म है इसके फल हल्के हरे से हल्के भूरे रंग के होते हैं इसक कतारों में रखने के साथ साथ पकाने के लिए भी उपयुक्त किस्म है इसके फल का औसतन भाग लगभग 6.5 किलो होता है Pant Garima: यह लंबी और फैलने वाली किस्म है इसके फल हल्के हरे से हल्के भूरे रंग के होते हैं इसके फल का औसतन भाग लगभग 5 किलो होता है Singapore or Ceylon Jack: यह जल्दी फल देने वाली किस्म है इसके फल मध्यम आकार के मीठे होते हैं और गुद्दा कुरकुरा होता है इसका मादा प्रजनन अंग पीले रंग का, छोटा और गुठली से चिपका हुआ और तेज सुगंध वाला होता है गर्मियों में, रोपाई के लिए 1x1x1 मीटर आकार के गड्ढे खोदें और धूप में खुला छोड़ दें इससे हानिकारक बैक्टीरिया मर जायेंगे और फसल मिट्टी से पैदा होने वाले कीटों और बीमारियों से बचेगी उसके बाद गड्ढों को रूड़ी की खाद या गाय का गला हुआ गोबर 20-30 किलो, सिंगल सुपर फास्फेट 0.5 किलो और फोरेट 10-20 ग्राम से भरें प्रत्येक गड्ढे में 3-4 बीज बोयें कटहल की बिजाई के लिए जून - जुलाई का महीना उपयुक्त होता है बिजाई के लिए, आयताकार या वर्गाकार बिजाई ढंग प्रयोग किया जाता है कम उपजाऊ मिट्टी में षट्कोणीय प्रणाली का प्रयोग करें मिट्टी के आधार पर 8x8 मीटर या 10x10 मीटर या 12x12 मीटर फासले का प्रयोग किया जाता है बिजाई के लिए ताजे बीजों या एक महीने से कम स्टोर किए बीजों का प्रयोग किया जाता है बीजों को पहले पॉलीथीन बैग में बोया जाता है और फिर मुख्य खेत में रोपण किया जाता है बिजाई से पहले बीजों को NAA 25 पी पी एम के घोल में 24 घंटे के लिए भिगो कर रखें यह बीजों के जल्दी अंकुरण के साथ अच्छी वृद्धि में भी मदद करेगा कटहल खादों में अच्छे परिणाम देता है 1 से 3 वर्ष के पौधों मे नाइट्रोजन 200 ग्राम और फासफोरस 60 ग्राम प्रति वर्ष डालें चार से छ: वर्ष के पौधों के लिए नाइट्रोजन 400 ग्राम, फासफोरस 240 ग्राम और पोटाश 120 ग्राम प्रति वर्ष डालें नियमित कटाई और छंटाई की आवश्यकता नहीं होती, लेकिन फसल को कीटों और बीमारियों के हमले से बचाने के लिए कमज़ोर, बीमारी वाली और मरी हुई शाखाओं को बारिश के मौसम के अंत तक निकाल दें नदीनों की तीव्रता के आधार पर गोडाई करें नदीनों के हमले से फसल को बचाने के लिए मल्च का प्रयोग करें यह फसल की उचित वृद्धि में भी सहायता करेगा शुरूआती वर्षों के दौरान, जब फसल फल देने की अवस्था में पहुंच जाती है (वृक्ष 6-8 वर्ष में फल देना शुरू करता है) अंतरफसली जैसे मिर्च, बैंगन, और दालें जैसे लोबिया, कुलथी और काले चने को अंतरफसली के रूप में लिया जा सकता है बारिश के मौसम में सिंचाई की आवश्यकता नहीं होती बारिश की नियमितता और तीव्रता के आधार पर सिंचाई करें कटहल की फसल को शुरूआती 2-3 वर्षों में सिंचाई की आवश्यकता होती है उसके बाद सिंचाई की कोई आवश्यकता नहीं होती भारी बारिश में पानी खड़ा ना होने दें क्योंकि यह फसल जल जमाव की स्थिति को सहनेयोग्य नहीं है

Posted by PARMESHWAR
Chattisgarh
18-10-2019 11:53 AM
PARMESHWAR ji Plant lene ke lia aap Rajindra 9822534678 Plants Paradise Nursery se samparak kar sakte hai, Thankyou.
Posted by ਹਰਪਾਲ ਸਿੰਘ
Punjab
18-10-2019 11:46 AM
Hanji Harpal ji ehh Murrah nasal di majh hai, isda milk record v vdia howega tuci isdi khurak ate dekhbhal da pura dian rkho jiss nal iss ton vdia duudh leya ja skee ate rate de hisab nal v vdia majh hai ate isda bacha v murrah nasal da hai..
Posted by Gurmukh Singh Garry
Punjab
18-10-2019 11:39 AM
Garry ji tuci uss nu Cargill di Transition mix feed de skde ho ate uss nu Vitum-H liquid 10-10 ml swere sham deo, iss nal vdia lewa ate sarir di growth howegi.
Posted by Jaspreet Singh
Punjab
18-10-2019 11:38 AM
tuci uss nu nazdiki doctor ton bhukar check krwao ate usdi janch krwao jiss nal usde duudh naa penn ate chara, dana naa khann vare ptaa lgg skee ate uss nu Pett de kiria lai Piperzine liquid 30ml deo ate Broton liquid 10-10ml swere sham deo, iss nal bhukhh sahi trike nal lggdi hai.
Posted by Gurmukh Singh Garry
Punjab
18-10-2019 11:32 AM
Hnji tuci suun wali majh nu feed vich chana churi de skde ho, baki uss nu Broton liquid 50ml rojana ate vitum-H liquid 10-10ml swere sham deo, ehna nal lewa vdia howega ate sarir di vdia growth howegi.
Posted by ਸੁਖਮਨਦੀਪ ਸਿੰਘ
Punjab
18-10-2019 11:27 AM
ਗੇਂਦੇ ਦੀ ਬਿਜਾਈ ਇੱਕ ਸਾਲ ਵਿੱਚ ਕਿਸੇ ਵੀ ਸਮੇਂ ਕੀਤੀ ਜਾ ਸਕਦੀ ਹੈ ਮੀਂਹ ਦੇ ਮੋਸਮ ਵਿੱਚ ਇਸਦੀ ਬਿਜਾਈ ਅੱਧ ਜੂਨ ਤੋਂ ਅੱਧ ਜੁਲਾਈ ਵਿੱਚ ਕਰੋਂ ਸਰਦੀਆਂ ਵਿੱਚ ਇਸਦੀ ਬਿਜਾਈ ਅੱਧ ਸੰਤਬਰ ਤੋਂ ਅੱਧ ਅਕਤੂਬਰ ਵਿੱਚ ਪੂਰੀ ਕਰ ਲਓ ਨਰਸਰੀ ਬੈੱਡ 3x1 ਮੀਟਰ ਆਕਾਰ ਦੇ ਤਿਆਰ ਕਰੋਂ ਗਾਂ ਦਾ ਗੋਬਰ ਮਿਲਾਓ ਬੈੱਡਾ ਨੂੰ ਪਾਣੀ ਦਿਓ ਅਤੇ ਨਮੀ ਬਣਾਏ ਰੱਖੋ ਸੁੱਕੇ ਫੁੱਲਾਂ ਦਾ ਚੂਰਾ ਕਰਕੇ ਉਨ੍ਹਾਂ ਨੂੰ .... (Read More)
ਗੇਂਦੇ ਦੀ ਬਿਜਾਈ ਇੱਕ ਸਾਲ ਵਿੱਚ ਕਿਸੇ ਵੀ ਸਮੇਂ ਕੀਤੀ ਜਾ ਸਕਦੀ ਹੈ ਮੀਂਹ ਦੇ ਮੋਸਮ ਵਿੱਚ ਇਸਦੀ ਬਿਜਾਈ ਅੱਧ ਜੂਨ ਤੋਂ ਅੱਧ ਜੁਲਾਈ ਵਿੱਚ ਕਰੋਂ ਸਰਦੀਆਂ ਵਿੱਚ ਇਸਦੀ ਬਿਜਾਈ ਅੱਧ ਸੰਤਬਰ ਤੋਂ ਅੱਧ ਅਕਤੂਬਰ ਵਿੱਚ ਪੂਰੀ ਕਰ ਲਓ ਨਰਸਰੀ ਬੈੱਡ 3x1 ਮੀਟਰ ਆਕਾਰ ਦੇ ਤਿਆਰ ਕਰੋਂ ਗਾਂ ਦਾ ਗੋਬਰ ਮਿਲਾਓ ਬੈੱਡਾ ਨੂੰ ਪਾਣੀ ਦਿਓ ਅਤੇ ਨਮੀ ਬਣਾਏ ਰੱਖੋ ਸੁੱਕੇ ਫੁੱਲਾਂ ਦਾ ਚੂਰਾ ਕਰਕੇ ਉਨ੍ਹਾਂ ਨੂੰ ਕਤਾਰਾਂ ਅਤੇ ਬੈੱਡਾ ਤੇ ਛਿੱੜਕ ਦਿਓ ਜਦੋਂ ਪੌਦਿਆਂ ਦਾ ਕੱਦ 10-15 ਸੈ.ਮੀ. ਹੋ ਜਾਵੇਂ ਤਾਂ ਇਹ ਪਨੀਰੀ ਲਗਾਉਣ ਲਈ ਤਿਆਰ ਹੁੰਦੇ ਹਨ ਫਰੈਂਚ ਕਿਸਮ ਨੂੰ 35x35 ਸੈ.ਮੀ. ਅਤੇ ਅਫਰੀਕੀ ਕਿਸਮ ਨੂੰ 45x45 ਸੈ.ਮੀ, ਦੇ ਫਾਸਲੇ ਤੇ ਪਨੀਰੀ ਲਾਉ ਬਿਜਾਈ ਦੇ ਲਈ ਪਨੀਰੀ ਵਾਲੇ ਢੰਗ ਦੀ ਵਰਤੋਂ ਕੀਤੀ ਜਾਂਦੀ ਹੈ ਨਰਸਰੀ ਬੈੱਡਾ ਤੇ ਬੀਜਾਂ ਦਾ ਛਿੱੜਕਾਅ ਕਰੋਂ

Posted by Rajshekhar Ramnaresh Tripathee
Madhya Pradesh
18-10-2019 11:27 AM
राजशेखर जी आप इसकी रोकथाम के लिए tilt @200ml को प्रति एकड़ के हिसाब से स्प्रे करें धन्यवाद

Posted by bhimsain
Punjab
18-10-2019 11:24 AM
subsidy lyi wait kro hor jankari lyii 9646457187 te. call kro

Posted by Deewan Rajput
Madhya Pradesh
18-10-2019 11:19 AM
Deewan ji aap kripya aap btaye ke polyhouse kitni jameen me lgana chahte hai taki aapko uske hisab se jankari di ja sake.dhanywad

Posted by PARMESHWAR
Chattisgarh
18-10-2019 11:15 AM
इसकी खेती के लिए अच्छे निकास वाली, उच्च उपजाऊ मिट्टी की आवश्यकता होती है मिट्टी की पी एच 6-7.5 होनी चाहिए यह चूना और क्लोरीन युक्त मिट्टी को भी सहनेयोग्य है इसकी खेती के लिए नदी के नज़दीक वाली मिट्टी भी उपयुक्त होती है Pant Mahima: यह लंबी और फैलने वाली किस्म है इसके फल हल्के हरे से हल्के भूरे रंग के होते हैं इसक कतारों म.... (Read More)
इसकी खेती के लिए अच्छे निकास वाली, उच्च उपजाऊ मिट्टी की आवश्यकता होती है मिट्टी की पी एच 6-7.5 होनी चाहिए यह चूना और क्लोरीन युक्त मिट्टी को भी सहनेयोग्य है इसकी खेती के लिए नदी के नज़दीक वाली मिट्टी भी उपयुक्त होती है Pant Mahima: यह लंबी और फैलने वाली किस्म है इसके फल हल्के हरे से हल्के भूरे रंग के होते हैं इसक कतारों में रखने के साथ साथ पकाने के लिए भी उपयुक्त किस्म है इसके फल का औसतन भाग लगभग 6.5 किलो होता है Pant Garima: यह लंबी और फैलने वाली किस्म है इसके फल हल्के हरे से हल्के भूरे रंग के होते हैं इसके फल का औसतन भाग लगभग 5 किलो होता है Singapore or Ceylon Jack: यह जल्दी फल देने वाली किस्म है इसके फल मध्यम आकार के मीठे होते हैं और गुद्दा कुरकुरा होता है इसका मादा प्रजनन अंग पीले रंग का, छोटा और गुठली से चिपका हुआ और तेज सुगंध वाला होता है गर्मियों में, रोपाई के लिए 1x1x1 मीटर आकार के गड्ढे खोदें और धूप में खुला छोड़ दें इससे हानिकारक बैक्टीरिया मर जायेंगे और फसल मिट्टी से पैदा होने वाले कीटों और बीमारियों से बचेगी उसके बाद गड्ढों को रूड़ी की खाद या गाय का गला हुआ गोबर 20-30 किलो, सिंगल सुपर फास्फेट 0.5 किलो और फोरेट 10-20 ग्राम से भरें प्रत्येक गड्ढे में 3-4 बीज बोयें कटहल की बिजाई के लिए जून - जुलाई का महीना उपयुक्त होता है बिजाई के लिए, आयताकार या वर्गाकार बिजाई ढंग प्रयोग किया जाता है कम उपजाऊ मिट्टी में षट्कोणीय प्रणाली का प्रयोग करें मिट्टी के आधार पर 8x8 मीटर या 10x10 मीटर या 12x12 मीटर फासले का प्रयोग किया जाता है बिजाई के लिए ताजे बीजों या एक महीने से कम स्टोर किए बीजों का प्रयोग किया जाता है बीजों को पहले पॉलीथीन बैग में बोया जाता है और फिर मुख्य खेत में रोपण किया जाता है बिजाई से पहले बीजों को NAA 25 पी पी एम के घोल में 24 घंटे के लिए भिगो कर रखें यह बीजों के जल्दी अंकुरण के साथ अच्छी वृद्धि में भी मदद करेगा कटहल खादों में अच्छे परिणाम देता है 1 से 3 वर्ष के पौधों मे नाइट्रोजन 200 ग्राम और फासफोरस 60 ग्राम प्रति वर्ष डालें चार से छ: वर्ष के पौधों के लिए नाइट्रोजन 400 ग्राम, फासफोरस 240 ग्राम और पोटाश 120 ग्राम प्रति वर्ष डालें नियमित कटाई और छंटाई की आवश्यकता नहीं होती, लेकिन फसल को कीटों और बीमारियों के हमले से बचाने के लिए कमज़ोर, बीमारी वाली और मरी हुई शाखाओं को बारिश के मौसम के अंत तक निकाल दें नदीनों की तीव्रता के आधार पर गोडाई करें नदीनों के हमले से फसल को बचाने के लिए मल्च का प्रयोग करें यह फसल की उचित वृद्धि में भी सहायता करेगा शुरूआती वर्षों के दौरान, जब फसल फल देने की अवस्था में पहुंच जाती है (वृक्ष 6-8 वर्ष में फल देना शुरू करता है) अंतरफसली जैसे मिर्च, बैंगन, और दालें जैसे लोबिया, कुलथी और काले चने को अंतरफसली के रूप में लिया जा सकता है बारिश के मौसम में सिंचाई की आवश्यकता नहीं होती बारिश की नियमितता और तीव्रता के आधार पर सिंचाई करें कटहल की फसल को शुरूआती 2-3 वर्षों में सिंचाई की आवश्यकता होती है उसके बाद सिंचाई की कोई आवश्यकता नहीं होती भारी बारिश में पानी खड़ा ना होने दें क्योंकि यह फसल जल जमाव की स्थिति को सहनेयोग्य नहीं है

Posted by धनराज गुजर
Rajasthan
18-10-2019 11:10 AM
धनराज जी कृप्या आप अपना सवाल विस्तार से पूछें कि आप क्या जानकारी लेना चाहते है ताकि आपको सही जानकारी दी जा सके

Posted by ravi kumar
Madhya Pradesh
18-10-2019 11:05 AM
धनराज जी कृप्या आप अपना सवाल विस्तार से पूछें कि आप क्या जानकारी लेना चाहते है ताकि आपको सही जानकारी दी जा सके
Posted by sukhpinder singh bhullar
Punjab
18-10-2019 11:03 AM
ਕਾਲੀ ਕਣਕ ਦਾ ਬੀਜ ਲਈ ਤੁਸੀ ਮੇਰੇ ਨਾਲ 86995 55651 ਨੰਬਰ ਤੇ ਗੱਲ ਕਰ ਲਿਓ ਜੀ
Posted by Satnam singh gill
Punjab
18-10-2019 10:47 AM
Shirmaan ji, tuc HD 2967 yan HD 3086 di bijai kar sakde ho, dhanwad

Posted by nisha
Madhya Pradesh
18-10-2019 10:37 AM
असली केसर सिर्फ जम्मू कश्मीर, ईरान और अफगानिस्तान में ही हो सकता है, यह कुसुम है, इसकी भी कई दवाई बनती है, यदि कोई और छक है तो जम्मू कश्मीर के इस किसान से बात करें, जिसके दादे, पड़दादे भी केसर की खेती करते थे और यह भी केसर की खेती करते है Javid Ahmed- 95964 93260 बाकि आप यह वीडियो देखें https://www.youtube.com/watchv=vl7c6L3ETnQ&t=8s बाकि यदि फिर भी यकीन नहीं .... (Read More)
असली केसर सिर्फ जम्मू कश्मीर, ईरान और अफगानिस्तान में ही हो सकता है, यह कुसुम है, इसकी भी कई दवाई बनती है, यदि कोई और छक है तो जम्मू कश्मीर के इस किसान से बात करें, जिसके दादे, पड़दादे भी केसर की खेती करते थे और यह भी केसर की खेती करते है Javid Ahmed- 95964 93260 बाकि आप यह वीडियो देखें https://www.youtube.com/watchv=vl7c6L3ETnQ&t=8s बाकि यदि फिर भी यकीन नहीं है तो तो आप अमृतपाल सिंह बराड़ प्रोफेसर, पीएयू लुधियाना इस वीडियो संबंधी विचार पड़ सकते हैं, यह फसल केसर की नहीं है, यह फसल कसुंबडे की है, इसे अंग्रेजी में Safflower कहते है, और विज्ञानं में इसे Carthamus tinctorius कहते है

Posted by dhirendra.pratap.singh
Uttar Pradesh
18-10-2019 10:27 AM
Dhirendra pratap singh ji Kele ke ashe plant lene ke lia aap A K Mani 9431232333 Hecure Agro Plants Pvt Lmt se samparak kar sakte hai, Thankyou.
Posted by Ram Vriksh Maurya
Uttar Pradesh
18-10-2019 10:25 AM
राम जी आप इसकी रोकथाम के लिए tilt @200ml को प्रति एकड़ के हिसाब से स्प्रे करें धन्यवाद

Posted by Amit Chhoker
Haryana
18-10-2019 10:19 AM
Amit ji kripya aap apna swal vistar se pushen ki apki bhains ko kya smasya aa rahi hai tan jo apko uske bare mai sahi jankari di ja ske.

Posted by kartik Rajput
Madhya Pradesh
18-10-2019 10:19 AM
कार्तिक जी कृप्या आप अपना सवाल विस्तार से पूछें ताकि आपको सही जानकारी दी जा सके
Posted by shivam rajpoot
Madhya Pradesh
18-10-2019 10:14 AM
Shivam ji inko aap High protien wali khruak den usse jldi growth ho jayegi, baki inn dino mai machlia khurak v kam khayegi aur growth v kam kregi..

Posted by surya
Madhya Pradesh
18-10-2019 10:12 AM
सूर्य जी आप इसके ऊपर mancozeb @4 ग्राम को प्रति लीटर पानी के हिसाब से स्प्रे करें धन्यवाद
Posted by pargat singh
Punjab
18-10-2019 10:09 AM
ਪ੍ਰਗਟ ਜੀ ਬੱਚਿਆਂ ਦੀ ਵਧਿਆ ਗਰੋਥ ਲਈ ਤੁਸੀ ਓਹਨਾ ਨੂੰ ਇਕ ਮਹੀਨੇ ਤਕ ਮਾਂ ਦਾ ਰੱਜਵਾਂ ਦੁੱਧ ਪਿਲਾਓ, ਜਿਨ੍ਹਾਂ ਆਸਾਨੀ ਨਾਲ ਹਜ਼ਮ ਕਰ ਸਕੇ, ਉਸ ਨੂੰ ਖੁਲਾ ਰੱਖੋ ਜਿਸ ਨਾਲ ਉਹ ਭੱਜ ਭੱਜ ਕੇ ਕਸਰਤ ਕਰਦੀ ਰਹੇ, ਇਕ ਮਹੀਨੇ ਦਾ ਹੋਣ ਤੋਂ ਬਾਦ ਤੁਸੀ ਕਾਰਗਿਲ ਦਾ Calf starter ਦੇਣਾ ਸ਼ੁਰੂ ਕਰੋ, ਇਸ ਨੂੰ ਦੁੱਧ ਵਿਚ ਮਿਕਸ ਕਰਕੇ ਦੇ ਸਕਦੇ ਹੋ, 3 ਮਹੀਨਿਆਂ ਦਾ ਹੋਣ ਤੋਂ ਬਾਦ Calf grower ਦੇਣਾ ਸ਼ੁਰੂ ਕਰੋ, 8 ਮਹੀਨਿਆ.... (Read More)
ਪ੍ਰਗਟ ਜੀ ਬੱਚਿਆਂ ਦੀ ਵਧਿਆ ਗਰੋਥ ਲਈ ਤੁਸੀ ਓਹਨਾ ਨੂੰ ਇਕ ਮਹੀਨੇ ਤਕ ਮਾਂ ਦਾ ਰੱਜਵਾਂ ਦੁੱਧ ਪਿਲਾਓ, ਜਿਨ੍ਹਾਂ ਆਸਾਨੀ ਨਾਲ ਹਜ਼ਮ ਕਰ ਸਕੇ, ਉਸ ਨੂੰ ਖੁਲਾ ਰੱਖੋ ਜਿਸ ਨਾਲ ਉਹ ਭੱਜ ਭੱਜ ਕੇ ਕਸਰਤ ਕਰਦੀ ਰਹੇ, ਇਕ ਮਹੀਨੇ ਦਾ ਹੋਣ ਤੋਂ ਬਾਦ ਤੁਸੀ ਕਾਰਗਿਲ ਦਾ Calf starter ਦੇਣਾ ਸ਼ੁਰੂ ਕਰੋ, ਇਸ ਨੂੰ ਦੁੱਧ ਵਿਚ ਮਿਕਸ ਕਰਕੇ ਦੇ ਸਕਦੇ ਹੋ, 3 ਮਹੀਨਿਆਂ ਦਾ ਹੋਣ ਤੋਂ ਬਾਦ Calf grower ਦੇਣਾ ਸ਼ੁਰੂ ਕਰੋ, 8 ਮਹੀਨਿਆਂ ਦੀ ਉਮਰ ਤੋਂ ਬਾਦ Heifer dry ਫੀਡ ਦੇਣੀ ਸ਼ੁਰੂ ਕਰੋ, ਇਹ ਸਾਰਾ ਕੁਜ ਉੱਨੀ ਮਾਤਰਾ ਵਿਚ ਦਿਓ ਜਿਨ੍ਹਾਂ ਉਹ ਆਸਾਨੀ ਨਾਲ ਹਜ਼ਮ ਕਰ ਸਕੇ ਇਨ੍ਹਾਂ ਦੇ ਨਾਲ ਨਾਲ ਤੁਸੀ ਗਰੋਥ ਦੇ ਲਈ Growth Mantra ਪਾਊਡਰ ਦੇਣਾ ਸ਼ੁਰੂ ਕਰੋ ਜਾਂ ਤੁਸੀ puberaid ਪਾਊਡਰ ਵੀ ਦੇ ਸਕਦੇ ਹੋ, ਇਨ੍ਹਾਂ ਨੂੰ 2 ਮਹੀਨਿਆਂ ਦੀ ਉਮਰ ਤੋਂ ਬਾਅਦ ਦੇਣਾ ਸ਼ੁਰੂ ਕਰਨਾ ਚਾਹੀਦਾ ਹੈ, ਜੇਕਰ ਉਮਰ 2 ਮਹੀਨੇ ਤੋਂ ਜ਼ਿਆਦਾ ਹੈ ਤਾਂ 20 ਗ੍ਰਾਮ ਪਾਊਡਰ ਦੇਣਾ ਹੈ, 4 ਮਹੀਨਿਆਂ ਤੋਂ ਜ਼ਿਆਦਾ ਹੋਣ ਤੇ 25 ਗ੍ਰਾਮ ਦਿਓ, ਇਸ ਤਰ੍ਹਾਂ ਉਮਰ ਦੇ ਹਿਸਾਬ ਨਾਲ 5-5 ਗ੍ਰਾਮ ਵਧਾ ਦਿਓ. ਬਾਕੀ ਤੁਸੀ ਉਸਦੀ ਡੇਵਰਮਿੰਗ ਦਾ ਵੀ ਪੂਰਾ ਧਿਆਨ ਰੱਖੋ ਜੀ..

Posted by Sunil Chauhan Chauhan
Madhya Pradesh
18-10-2019 10:09 AM
डेयरी फार्मिंग के लिए लोन अलग अलग कामों के लिए मिलता है जैसे शैड के लिए, पशुओं के लिए, डेयरी मशीनरी के लिए सबसे पहले आपने जिसके लिए लोन लेना है उस संबंधी आवेदन नज़दीक के डिप्टी डायरेक्टर को मिलकर दें ,इसके लिए आपके पास डेयरी ट्रेनिंग होनी जरूरी है उसके सर्टीफिकेट के हिसाब से आपको लोन मिलेगा यह ट्रेनिंग आप अप.... (Read More)
डेयरी फार्मिंग के लिए लोन अलग अलग कामों के लिए मिलता है जैसे शैड के लिए, पशुओं के लिए, डेयरी मशीनरी के लिए सबसे पहले आपने जिसके लिए लोन लेना है उस संबंधी आवेदन नज़दीक के डिप्टी डायरेक्टर को मिलकर दें ,इसके लिए आपके पास डेयरी ट्रेनिंग होनी जरूरी है उसके सर्टीफिकेट के हिसाब से आपको लोन मिलेगा यह ट्रेनिंग आप अपने नज़दीकी केवीके से प्राप्त कर सकते है वहां समय समय पर ट्रेनिंग दी जाती है आप वहां जाकर अपना फार्म भर आए जब भी वहां ट्रेनिंग होगी तो आपको फोन करके बता दिया जाएगा
Posted by Jhamman Das
Chattisgarh
18-10-2019 10:03 AM
yeh tele ke kaarn ho rha hai, iski roktham ke lie buprofezin@250ml prti acre ke hisaab se istemaal krein.

Posted by Lakhbir sohi Golu
Punjab
18-10-2019 09:57 AM
श्रीमान जी धान में Buprofenzin @300 ml प्रति एकड़ या Dichlorovos @200 ml प्रति एकड़ के हिसाब से स्प्रे कर सकते है
Posted by pargat singh
Punjab
18-10-2019 09:54 AM
tuci uss nu Broton liquid 50-50ml rojana dena suru kro ate uss nu her 3 mahine badd pett de kiria lai goli jrur deo, baki tuci uss nu turri ate hara chara mix krke deo ate feed tuci chara vich mila ke de skde ho..

Posted by anuraj verma
Uttar Pradesh
18-10-2019 09:52 AM
Shirmaan ji, isme fungus ka hamla hua hai, iski roktham ke liye ap folicur @ 200 ml prati acre ke hisaab se spray karein,dhanywad

Posted by dhanraj rathod
Karnataka
18-10-2019 09:47 AM
खुश खबरी मोती पालन एवं इंटीग्रेटेड फार्मिंग प्रशिक्षण 19-20 oct सीट सिमित है शीघ्र संपर्क करे मोती पालन से कमाए 4-5 लाख सालाना Good news for all farmers, Businessman बमोरिया फार्म एवं प्रशिक्षण केंद्र ( सूक्ष्म , लघु ,मध्यम उद्यम मंत्रालय भारत सरकार से पंजीकृत ) मोती पालन और इंटीग्रेटेड फार्मिंग प्रशिक्षण में भारत सरकार की और सब्सिड़ी भ.... (Read More)
खुश खबरी मोती पालन एवं इंटीग्रेटेड फार्मिंग प्रशिक्षण 19-20 oct सीट सिमित है शीघ्र संपर्क करे मोती पालन से कमाए 4-5 लाख सालाना Good news for all farmers, Businessman बमोरिया फार्म एवं प्रशिक्षण केंद्र ( सूक्ष्म , लघु ,मध्यम उद्यम मंत्रालय भारत सरकार से पंजीकृत ) मोती पालन और इंटीग्रेटेड फार्मिंग प्रशिक्षण में भारत सरकार की और सब्सिड़ी भारत के प्रसिद्ध/ विख्यात और्वेदाचार्य एवं सफल किसान द्वारा खेती या व्यवसाय करके लाखो रूपये कैसे कमाए हेतु प्रशिक्षिण कार्यक्रम ( Integrated farming ) 19 -20-/10/19आयोजित किया जा रहा है दो दिवशीय प्रशिक्षिण कार्यक्रम के मुख्या विषय निम्नलिखित है . 1-मोती पालन या सीप पालन ( घर ,छत ,आँगन या बड़े तालाब में ) एक एकर में खेती करके कमाए 4-5 लाख 2-मछली पालन 3- बतख पालन 4- कड़कनाथ मुर्गा पालन 5-जापानी बटेर पालन 6-मोती भस्म 7-सीप भस्म 8-शंक भस्म इसके अलावा बमोरिया फार्म और भारत सरकार की योजनाओ के साथ प्रतिमाह 2-3 लाख रूपये कैसे कमाए स्वस्थ एवं समृद्ध भारत अभियान के अंतर्गत ग्राम स्वराज महिला स्वस्थ एवं हाईजीन मधुमेह मुक्त भारत आदि योजनाओ को जानकारी भी दी जायगी जिससे आप और आपका परिवार स्वस्थ तो रहेगा ही साथ ही आप हमारे साथ काम करके लाखो रूपये भी कमा सकते है अधिक जानकारी के लिए संपर्क करे , अमित बमोरिया 9770085381 9893232938 #बमोरिया मोती सम्बर्धन केंद्र एवं एग्रो फार्म (अमित बमोरिया ) # @@@ केंद्रीय राज्य कृषि मंत्री श्री रूपाला जी द्वारा सम्मानित मध्य प्रदेश सरकार द्वारा holistic farmer का अवार्ड @@@ भारत के प्रमुख अखवार दैनिक भास्कर एवं पत्रिका द्वारा प्रथम पेज द्वारा सत्यापित.. @@@@ प्रमुख ટીવી news चैनल सहारा समय एवं बंसल news पर सफल साक्षात्कार.. प्रमुख कार्य मोती सम्बर्धन (मोती पालन ) मछली पालन बतख पालन जापानी बटेर पालन कड़कनाथ मुर्गा सुगर फ्री स्टेविआ की खेती विशेष उद्यानकी ट्रेनिंग सेण्टर मकान नंबर 22 श्रीरंग कॉलोनी बुधवारा रोड होशंगाबाद 461001 https://youtu.be/g4wqW8anr

Posted by shyamsundar
Madhya Pradesh
18-10-2019 09:42 AM
आलुओं के अंकुरन से पहले मैटरीबिउज़िन 70 डब्लयु पी 200 ग्राम या एलाकलोर 2 लीटर प्रति एकड़ डालें यदि नदीनों का हमला कम हो तो बिजाई के 25 दिन बाद मैदानी इलाकों में और 40-45 दिनों के बाद पहाड़ी इलाकों में जब फसल 8-10 सैं.मी. कद की हो जाये तो नदीनों को हाथों से उखाड़ दें आमतौर पर आलुओं की फसल में नदीन नाशक की जरूरत नहीं पड़ती, क्योंक.... (Read More)
आलुओं के अंकुरन से पहले मैटरीबिउज़िन 70 डब्लयु पी 200 ग्राम या एलाकलोर 2 लीटर प्रति एकड़ डालें यदि नदीनों का हमला कम हो तो बिजाई के 25 दिन बाद मैदानी इलाकों में और 40-45 दिनों के बाद पहाड़ी इलाकों में जब फसल 8-10 सैं.मी. कद की हो जाये तो नदीनों को हाथों से उखाड़ दें आमतौर पर आलुओं की फसल में नदीन नाशक की जरूरत नहीं पड़ती, क्योंकि जड़ों को मिट्टी लगाने से सारे नदीन नष्ट हो जाते हैं
नदीनों के हमले को कम करने के लिए और मिट्टी की नमी को बचाने के लिए मलचिंग का तरीका भी प्रयोग किया जा सकता है, जिसमें मिट्टी पर धान की पराली और खेत के बची-कुची सामग्री बिछायी जा सकती है बिजाई के 20-25 दिन बाद मलचिंग को हटा दें

Posted by Sudhir Kumar Srivastava
Uttar Pradesh
18-10-2019 09:27 AM
Sudhir Kumar Srivastava ji Shtavar ki contract farming ke lia aap Aushadhiya kheti vikas sansthan 6268536795 se samparak kar sakte hai, Thankyou.
Posted by gurwinder kaur
Punjab
18-10-2019 09:12 AM
jekar ohh heat de lashan dekha rehi hai tan tuci uss nu tika bhrwa skde ho ate tika bhrwa ke uss nu Pregstay gold powder 30gm rojana 20 din tak deo, iss nal pashu de gaban rehnd di ass vdhh jndi hai..

Posted by Thakur Praveen Singh
Uttar Pradesh
18-10-2019 09:11 AM
Sir, we apologise for the inconvenience , please send your district, tehsil and village on our helpline number i.e 9779977641 , thank you
Posted by loknath singh
Uttar Pradesh
18-10-2019 09:09 AM
Shrimaan ji, kripya ap bataye ke ap kis fasal ke kharpatvaro ka niyantran ke bare mein jankari lena chahte hain, tajo apko iske bre mein bataya ja sake, dhanywad

Posted by Ravindra Tiwari
Uttar Pradesh
18-10-2019 09:08 AM
अच्छी उपज प्राप्त करने के लिए बिजाई अक्तूबर से नवंबर के मध्य में पूरी कर लें बिजाई में देरी होने से उपज में काफी नुकसान होता है

Posted by Lalit Markam
Chattisgarh
18-10-2019 09:04 AM
श्रीमान जी इसकी रोकथाम के लिए टिल्ट 250 मि.ली. प्रति एकड़ के हिसाब से स्प्रे कर सकते है
Posted by baljit Singh
Punjab
18-10-2019 09:04 AM
बलजीत जी आप इन्हें Broton liquid 20ml/100birds के हिसाब से दे सकते है इससे हाज़मा सही हो जाएगा और फर्क पड़ जाएगा

Posted by VISHNU SINGH
Uttar Pradesh
18-10-2019 09:03 AM
Shrimaan ji, safeda Tamil Nadu, Andhra Pradesh, Gujrat, Haryana, Mysore, Kerala or the Nilgiri Hill mein sabse jayda lgaye jata hai, dhanywad

Posted by Thakur Praveen Singh
Uttar Pradesh
18-10-2019 08:54 AM
श्रीमान जी, बुंदेलखंड और आगरा क्षेत्रों के लिए, बिजाई के लिए सितंबर का आखिरी सप्ताह उचित समय होता है जबकि बाकी के क्षेत्रों के लिए 15 अक्तूबर तक बिजाई पूरी कर लें असिंचित क्षेत्रों के लिए बिजाई का उपयुक्त समय सितंबर के दूसरे पखवाड़ा होता है धन्यवाद
Posted by Vipin Singh
Uttar Pradesh
18-10-2019 08:48 AM
Vipin Singh ji chane ka MSP 4875/Q hai, Thankyou.
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