Experts Q&A Search

Posted by Gurdeep Singh
Punjab
20-10-2019 11:09 AM
Punjab
10-22-2019 01:18 PM
ਗੁਰਦੀਪ ਸਿੰਘ ਜੀ, ਕ੍ਰਿਪਾ ਕਰ ਕੇ ਦੱਸੋ ਕੇ ਤੁਹਾਨੂੰ ਇਹ ਬੂਟਾ ਲਗਾਏ ਨੂੰ ਕਿੰਨੀ ਦੇਰ ਹੋ ਗਈ ਹੈ, ਕਿਉਕਿ ਨਵੇਂ ਬੂਟੇ ਦੀ ਜੜ ਨੂੰ ਵਧਣ ਤੇ ਸਮਾਂ ਲੱਗ ਜਾਂਦਾ ਹੈ, ਜਿਸਦੀ ਵਜ੍ਹਾ ਨਾਲ ਇਹ ਸੁਕਦਾ ਹੈ, ਕਿਰਪਾ ਕਰਕੇ ਇਹ ਵੀ ਦੱਸੋ ਕੇ ਤੁਸੀ ਇਸ ਨੂੰ ਕਿਹੜੀ ਖਾਦ ਪਾਈ ਹੈ, ਤਾਂਜੋ ਤੁਹਾਨੂੰ ਇਸ ਦਾ ਹਾਲ ਦੱਸਿਆ ਜਾ ਸਕੇ, ਧੰਨਵਾਦ
Posted by Akash Brar
Punjab
20-10-2019 11:09 AM
Punjab
10-22-2019 01:20 PM
Posted by ashok tiwari
Madhya Pradesh
20-10-2019 11:07 AM
Punjab
10-30-2019 04:14 PM
Ashok tiwari ji Shtavari ki contract farming ke lia aap Aushadhiya kheti vikas sansthan 6268536795 in se aap ko is ke bare me puri jankari bhi mil jaegi, iske seed bhi or fasal tyar hone ke bhad bechne ki bhi koi dikat nai rahegi, Thankyou.
Posted by Durgesh verma
Uttar Pradesh
20-10-2019 11:07 AM
Punjab
10-22-2019 02:22 PM
दुर्गेश जी, यह fungus के हमले के कारन हुआ है, इसके लिए आप copper oxychloride @ 3gm प्रति लीटर पानी के हिसाब से स्प्रे कर दें, धन्यवाद
Posted by Gurdeep Singh
Punjab
20-10-2019 11:06 AM
Punjab
11-27-2019 02:48 PM
ਇਸ ਵਿੱਚ ਤੱਤਾਂ ਦੀ ਘਾਟ ਨੂੰ ਪੂਰਾ ਕਰਨ ਲਈ Vermicompost @3-4 ਕਿਲੋ ਪ੍ਰਤੀ ਪੌਦਾ ਪਾਓ ਅਤੇ ਪੱਤਿਆਂ ਦੇ ਗਲਣ ਤੋਂ copper oxychloride @ 3 ਗ੍ਰਾਮ ਪ੍ਰਤੀ ਲੀਟਰ ਪਾਣੀ ਦੇ ਹਿਸਾਬ ਨਾਲ ਸਪਰੇਅ ਕਰੋ
Posted by T s sandhu
Punjab
20-10-2019 11:05 AM
Punjab
10-22-2019 03:24 PM
ਸ਼੍ਰੀਮਾਨ ਜੀ, 1121 ਦਾ rate 3000-3300 ਰੁਪਏ ਪ੍ਰਤੀ ਕੁਇੰਟਲ ਚੱਲ ਰਿਹਾ ਹੈ, ਧੰਨਵਾਦ
Posted by ashok tiwari
Madhya Pradesh
20-10-2019 11:05 AM
Punjab
10-31-2019 03:46 PM
Ashok tiwari ji Karan vandhan ka saad lene ke lia aap Dr Dalip Gosain 9215757800 se samparak kar sakte hai, Thankyou.
Posted by manoj
Rajasthan
20-10-2019 10:57 AM
Punjab
10-21-2019 05:58 PM
बीज को थीरम 2 ग्राम प्रति किलो + बैनोमाईल 50 डब्लयु पी 1 ग्राम प्रति लीटर पानी से उपचार कर उखेड़ा रोग और कांगियारी से बचाया जा सकता है रासायण प्रयोग करने के बाद, बीज को टराइकोडरमा विराइड 2 ग्राम प्रति किलो बीज से उपचार कर इसे मिट्टी की बीमारियों से बचाया जा सकता है
Posted by Ummed Ali
Uttar Pradesh
20-10-2019 10:56 AM
Punjab
10-20-2019 11:27 AM
आप भैंस को पेट के कीड़ों के लिए Zenvet गोली दें इसके साथ आप 3D red liquid 50-50ml सुबह शाम, Milkout powder 2—2 चम्मच सुबह शाम और Calcimust gold liquid 50-50ml रोजाना दें बाकि आप उसे रोजाना 35—40 किलो हरा चारा दें और हर तीन महीने के बाद पेट के कीड़ों की गोली दें
Posted by arun
Uttar Pradesh
20-10-2019 10:51 AM
Punjab
10-23-2019 11:25 AM
Arun ji, apke dhan par fungus ka hamla huya hai, iski roktham ke liye ap Tilt @ 200 ml prati acre ke hisab se spray kar dein, dhanywad
Posted by Bharmal ram
Rajasthan
20-10-2019 10:46 AM
Punjab
10-23-2019 11:27 AM
भारमल जी, जीरे की बिजाई के लिए 15 से 30 नवंबर सही समय होता है धन्यवाद
Posted by Ummed Ali
Uttar Pradesh
20-10-2019 10:45 AM
Punjab
10-20-2019 11:23 AM
कृप्या आप अपना सवाल विस्तार से पूछें कि आप क्या जानकारी लेना चाहते है ताकि आपको सही जानकारी दी जा सके
Posted by Kailash Chandra lohar
Rajasthan
20-10-2019 10:42 AM
Punjab
12-03-2019 05:26 PM
Dragon fruit ki kheti ke liye Dragon fruit ki kalmei lgayi jati hai ye ped gujrat mei hota hai eik acre mei takriban iski 1600 kalmei lagti hai aur in kalmo ko pehle gamle mei tyar kiya jata hai aur fir april se September tak kabhi bhi field mei lga skte hai aur eik kalam lagbhagg 70 rs ki ati hai. Adhik jaankari ke liye aap niche diye number par baat kr skte hain: vijay kumar -7065414241 , dhanywad
Posted by Kailash Chandra lohar
Rajasthan
20-10-2019 10:37 AM
Punjab
11-27-2019 03:01 PM
फसलों के लिए मिट्टी का नमूना लेने के लिए ज़मीन की ऊपरी सतह से घास फूस हटा कर खुरपे से 6 इंच गहरा गड्ढा खोदकर एक ओर एक ​इंच की मिट्टी की सतह ऊपर से नीचे तक एकसमान करें इस मिट्टी को साफ कपड़े या बर्तन में डालेंं इस तरह 7—8 अन्य स्थानों से मिट्टी लें इस मिट्टी को आपस में अच्छी तरह से मिलाकर उसमें से आधा किलो मिट्टी .... (Read More)
फसलों के लिए मिट्टी का नमूना लेने के लिए ज़मीन की ऊपरी सतह से घास फूस हटा कर खुरपे से 6 इंच गहरा गड्ढा खोदकर एक ओर एक ​इंच की मिट्टी की सतह ऊपर से नीचे तक एकसमान करें इस मिट्टी को साफ कपड़े या बर्तन में डालेंं इस तरह 7—8 अन्य स्थानों से मिट्टी लें इस मिट्टी को आपस में अच्छी तरह से मिलाकर उसमें से आधा किलो मिट्टी लें यदि मिट्टी गीली हो तो छांव में सुखाएं इस नमूने को कपड़े की थैली में डालकर किसान का नाम, पता और खेत नंबर ​लिखकर एक पर्ची उस पर रख दें इस तरीके से खेत में मिला हुआ नमूना लेना चाहिए यदि किसी खेत के कुछ हिस्से में ज़मीन की किस्म और उपजाऊ शक्ति अलग हो उस हिस्से की मिट्टी का अलग नमूना लें कल्लर वाली ज़मीन में से मिट्टी का नमूना लेने के लिए ज़मीन में 3 फुट गहरा गड्ढा खोदकर सीधी ओर ऊपर से शुरू करके नीचे 6 इंच तक 1 फुट और 2 फुट की गहराई पर ​निशानलगाएं हर गहराई से खुरपे की मदद से तकरीबन 1 इंच मोटी सतह उतारकर आधा ग्राम मिट्टी लें इस तरह कुल 4 नमूने लें हर गहराई से नमूने लेकर विधि 1 तरह संभालें पर्ची पर नमूने की गहराई भी लिखें बाग लगाने के लिए मिट्टी की जांच के लिए नमूना लेने के लिए खेत में 6 फुट गहरा गड्ढा खोदकर सीधी ओर से ऊपर से नीचे की तरफ निशान लाकर निशान 6 इंच से 2 निशान 1 फुट पर लाकर हर फुट पर निशान लगाए खुरपे से 6 इंच के निशान तक 1 इंच मोटी तह एक समान लगाएं जिसका भार लगभग आधा किलोग्राम हो इस तरह 6 नमूने 1—1 फुट दूरी पर लें और अलग अलग थैलियों में डालें जिसकी गिनती 7 हो जायेगी थैली के किसान और खेतों की पूरी जानकारी लिखकर डाली जाये यदि किसी गहराई पर कोई रोड़ियों की तह हो उसका नमूना अलग लेकर अलग थैली में डालना चाहिए जिसमें एक पर्ची पर तह की गहराई लिखी जाये कल्लर वाली ज़मीन और बागों के लिए मिट्टी का नमूना बरमे की मदद से भी लिया जा सकता है और इसकी जांच आप मिट्टी जांच केंद्र से या के वी के से करवा सकते हैं
Posted by Ravindra kumar
Bihar
20-10-2019 10:35 AM
Punjab
10-24-2019 11:14 AM
Ravinder ji ap pioneer ke makka beej jaise k P3522 or P3533 ki buyai kar sakte hai, dhanywad
Posted by jaswinder
Punjab
20-10-2019 10:26 AM
Punjab
12-03-2019 05:21 PM
Shrimaan ji, 1121 date is samay rajpura ch 2825 to 2870 rupay prati quintal de hisaab nal chal reha hai ,ate ambale mandi ch 2690 rupay prati quintal de hisaab se chal raha hai, 1509 da rate is samay mandi ch 2375 to 2535 rupay prati quintal de hisaab nal chal reha hai, dhanwad
Posted by Ritik maurya
Uttar Pradesh
20-10-2019 10:20 AM
Punjab
12-03-2019 05:22 PM
मोती की खेती एक बहुत ही अच्छा व्यवसाय है इस व्यवसाय को शुरू करने के लिए सबसे जरुरी है इसकी ट्रेनिंग, क्योकि इसमें बहुत सी ऐसी बारीकियें होती है जो हमें प्रेक्टिकल ट्रेनिंग में ही सीखने को मिलती है अगर आप इसकी ट्रेनिंग लेना चाहते है तो आप ग्लिटराटी पर्ल फार्मिंग ट्रेनिंग केंद्र प्रशिक्षण कार्य कर्म आयोजि.... (Read More)
मोती की खेती एक बहुत ही अच्छा व्यवसाय है इस व्यवसाय को शुरू करने के लिए सबसे जरुरी है इसकी ट्रेनिंग, क्योकि इसमें बहुत सी ऐसी बारीकियें होती है जो हमें प्रेक्टिकल ट्रेनिंग में ही सीखने को मिलती है अगर आप इसकी ट्रेनिंग लेना चाहते है तो आप ग्लिटराटी पर्ल फार्मिंग ट्रेनिंग केंद्र प्रशिक्षण कार्य कर्म आयोजित किया जा रहा है प्रशिक्षण कार्य कर्म में भाग लेने के लिए नीचे दिए गए नम्बर पर आज ही संपर्क करें और Rs 250/ से अपना रजिस्ट्रेशन करवाए अचल सिंह (फाउंडर )- 9711858258. धन्यवाद
Posted by Ankit Gupta
Uttar Pradesh
20-10-2019 10:18 AM
Punjab
10-24-2019 09:48 AM
अंकित जी, कृपया आप अपने धान की फोटो भेजें ताकि आपको देख कर उसका सही उपाय बताया जा सके, धन्यवाद
Posted by Ritik maurya
Uttar Pradesh
20-10-2019 10:11 AM
Punjab
12-03-2019 05:23 PM
मोती की खेती एक बहुत ही अच्छा व्यवसाय है इस व्यवसाय को शुरू करने के लिए सबसे जरुरी है इसकी ट्रेनिंग, क्योकि इसमें बहुत सी ऐसी बारीकियें होती है जो हमें प्रेक्टिकल ट्रेनिंग में ही सीखने को मिलती है अगर आप इसकी ट्रेनिंग लेना चाहते है तो आप ग्लिटराटी पर्ल फार्मिंग ट्रेनिंग केंद्र प्रशिक्षण कार्य कर्म आयोजि.... (Read More)
मोती की खेती एक बहुत ही अच्छा व्यवसाय है इस व्यवसाय को शुरू करने के लिए सबसे जरुरी है इसकी ट्रेनिंग, क्योकि इसमें बहुत सी ऐसी बारीकियें होती है जो हमें प्रेक्टिकल ट्रेनिंग में ही सीखने को मिलती है अगर आप इसकी ट्रेनिंग लेना चाहते है तो आप ग्लिटराटी पर्ल फार्मिंग ट्रेनिंग केंद्र प्रशिक्षण कार्य कर्म आयोजित किया जा रहा है प्रशिक्षण कार्य कर्म में भाग लेने के लिए नीचे दिए गए नम्बर पर आज ही संपर्क करें और Rs 250/ से अपना रजिस्ट्रेशन करवाए अचल सिंह (फाउंडर )- 9711858258. धन्यवाद
Posted by Satish Yadav
Uttar Pradesh
20-10-2019 10:11 AM
Punjab
12-03-2019 05:38 PM
Shrimaan ji, kirpya fasal ka nam bataye ke aap kis fasal ko bechne ki baat kar rahe hain, tajo apko iske bare mein jankari di ja sake, dhanywad
Posted by Ajeet singh
Uttar Pradesh
20-10-2019 10:10 AM
Punjab
10-24-2019 09:22 AM
अजीत जी, इस समय फसलें जैसे कि गेहूं, बरसीम, जौं, मक्का, लूसर्न, सेंजी हाइब्रिड, अलसी, कुसुम, सरसों, चने, मसूर, आलू, बैंगन, मटर, लहसुन, मूली की बुवाई कर सकते है, धन्यवाद
Posted by Amarjit Singh
Punjab
20-10-2019 10:09 AM
Punjab
03-13-2020 06:07 PM
Amarjit Singh ji Mushroom ki kheti puri jankari or is ki training ja fir is ki contract farming ke lia aap Nirmal singh 9888251157 KMD Group Mashroom nal samparak kar sakde ho, Thankyou.
Posted by gurbaj singh
Punjab
20-10-2019 10:08 AM
Punjab
10-24-2019 11:18 AM
Gurbhaj ji, tuc tele di roktham lai is upar buprofenzim @ 250 ml prati acre de hisaab nal spray karo , dhanwad
Posted by Bhawar Singh
Madhya Pradesh
20-10-2019 10:03 AM
Punjab
10-22-2019 03:53 PM
Bhawar ji, yeh mealy bug ka hamla hai, iske liye ap imidaclporid @ 1.5 ml prati liter pani ke hisaab se spray kar dein esa karne se yah theek ho jae ga, dhanywad
Posted by Arjun ram
Rajasthan
20-10-2019 09:58 AM
Punjab
10-24-2019 11:24 AM
अर्जुन जी, कृपया आप बताएं कि अपने कौन सी खादों का इसतमाल कर लिया है, ताकि आपको इसका सही समाधान बताया जा सके, आप इस पर NPK 19.19.19 @ 10 g प्रति लीटर पानी के हिसाब से स्प्रे कर सकते हैं, धन्यवाद
Posted by Rahul sahani
Bihar
20-10-2019 09:56 AM
Punjab
10-24-2019 09:30 AM
Rahul ji, aap brinjal ki achi paidawar ke liye isme NPK @ 19.19.19 @ 10 g per liter pani ke hisaab se spray kare, dhanywad
Posted by anil kumar singh
Uttar Pradesh
20-10-2019 09:52 AM
Punjab
10-20-2019 10:38 AM
Anil ji Barbari nasal ki bakri lene ke liye aap Firoz Alam 9616009911 Nabi Goat Farm se sampark kr skte hai.
Posted by Ravi sharma
Rajasthan
20-10-2019 09:50 AM
Punjab
12-03-2019 05:24 PM
यह कई तरह की मिट्टी में उगाई जाती है इसकी पैदावार के लिए नमकीन, क्षारीय और पानी खड़ा होने वाली मिट्टी से बचाव करें यह बढ़िया निकास वाली मिट्टी जिसमे बढ़िया जैविक तत्व मौजूद हों, में बढ़िया परिणाम देती है इसके बढ़िया विकास के लिए मिट्टी का pH 5.5-7 होना चाहिए Drudriha Tulsi: यह मुख्य रूप से बंगाल, नेपाल, चटगांव और महाराष्ट्र क्ष.... (Read More)
यह कई तरह की मिट्टी में उगाई जाती है इसकी पैदावार के लिए नमकीन, क्षारीय और पानी खड़ा होने वाली मिट्टी से बचाव करें यह बढ़िया निकास वाली मिट्टी जिसमे बढ़िया जैविक तत्व मौजूद हों, में बढ़िया परिणाम देती है इसके बढ़िया विकास के लिए मिट्टी का pH 5.5-7 होना चाहिए Drudriha Tulsi: यह मुख्य रूप से बंगाल, नेपाल, चटगांव और महाराष्ट्र क्षेत्रों में पाई जाती है यह गले को सूखेपन से राहत देता है यह हाथों, पैरों और गठिया की सूजन से आराम देता है Ram/Kali Tulsi (Ocimum canum): यह चीन, ब्राज़ील, पूर्व नेपाल और साथ ही बंगाल, बिहार, चटगांव और भारत के दक्षिणी क्षेत्रों में पाई जाती है इसका तना जामुनी और पत्ते हरे रंग के और बहुत ज्यादा सुगंधित होते है इसमें उचित मात्रा में औषधीय गुण जैसे ऐज़ाडिरैकटिन, ऐंटीफंगल , ऐंटीबैक्टीरियल, और पाचन तंत्र को ठीक रखती है यह गर्म क्षेत्रों में बढ़िया उगता है Babi Tulsi: यह पंजाब से त्रिवेंद्रम, बंगाल और बिहार में भी पाई जाती है इसका पौधा 1-2 फीट लम्बा होता है पत्ते 1-2 इंच लम्बे, अंडाकार और नुकीले होते है इसके पत्तों का स्वाद लौंग की तरह और सब्जियों में स्वाद के लिए प्रयोग किया जाता है तुलसी की खेती के लिए, अच्छी तरह से शुष्क मिट्टी की मांग की जाती है मिट्टी के भुरभुरा होने तक हैरो के साथ खेत की जोताई करें, फिर रूड़ी की खाद मिट्टी में मिलाएं तुलसी की रोपाई सीड बैड पर करें फरवरी के तीसरे महीने में नर्सरी बैड तैयार करें पौधे के विकास के अनुसार, 4.5 x 1.0 x 0.2 मीटर के सीड बैड तैयार करें बीजों को 60x60 सैं.मी. के फैसले पर बोयें बीजों को 2 सैं.मी. की गहराई पर बोयें बिजाई के 6-7 हफ्ते बाद, फसल की रोपाई खेत में करें तुलसी की खेती के लिए 120 ग्राम बीजों का प्रयोग प्रति एकड़ में करें फसल को मिट्टी से पैदा होने वाली बीमारीयों से रोकथाम के लिए, बिजाई से पहले मैनकोजेब 5 ग्राम प्रति किलोग्राम से बीजों का उपचार करें फसल की बढ़िया पैदावार के लिए बिजाई से पहले 15 टन रूड़ी की खाद मिट्टी में डालें तुलसी के बीजों को तैयार बैडों के साथ उचित अंतराल पर बोयें मानसून आने के 8 हफ्ते पहले बीजों को बैड पर बोयें बीजों को 2 सैं.मी. की गहराई पर बोयें बिजाई के बाद, रूड़ी की खाद और मिट्टी की पतली परत बीजों पर बना दें इसकी सिंचाई फुवारा विधि द्वारा की जाती है रोपाई के 15-20 दिनों के बाद, नए पौधों को तंदरुस्त बनाने के लिए 2% यूरिया का घोल डालें 6 हफ्ते पुराने और 4-5 पत्तों के अंकुरण होने पर अप्रैल के महीने में नए पौधे तैयार होते है तैयार बैडों को रोपाई 24 घंटे पहले पानी लगाएं ताकि पौधों को आसानी से उखाड़ा जा सकें और रोपाई के समय जड़ें मुलायम और सूजी हुई हो खेत की तैयारी के समय, रूड़ी की खाद को मिट्टी में मिलाएं खाद के तौर पर नाइट्रोजन 48 किलो(यूरिया 104 किलो), फासफोरस 24 किलो(सिंगल सुपर फासफेट 150 किलो) और पोटाश 24 किलो(मिउरेट 40 किलो) प्रति एकड़ में डालें नए पौधे लगाने के समय नाइट्रोजन की आधी मात्रा और फासफेट पेंटोऑक्साइड की पूरी मात्रा शुरुआती समय में डालें Mn 50 पी पी एम कंसंट्रेशन और Co@100 पी पी एम कंसंट्रेशन सूक्ष्म-तत्व डालें बाकी की बची हुई नाइट्रोजन को 2 हिस्सों में पहली और दूसरी कटाई के बाद डालें खेत को नदीनों से मुक्त करने के लिए कसी की मदद से गोड़ाई करें नदीनों की रोकथाम कम न होने पर यह फसल को नुकसान पहुंचाते है रोपण के एक महीने बाद पहली गोड़ाई और पहली गोड़ाई के चार हफ्ते बाद दूसरी गोड़ाई करें रोपण के दो महीने बाद कसी से अनुकूल गोड़ाई करें गर्मियों में, एक महीने में 3 सिंचाइयां करें और बरसात के मौसम में, सिंचाई की आवश्यकता नहीं होती एक साल में 12-15 सिंचाइयां करनी चाहिए पहली सिंचाई रोपण के बाद करें और दूसरी सिंचाई नए पौधों के स्थिर होने पर करें 2 सिंचाइयां करनी आवश्यक है और बाकी की सिंचाई मौसम के आधार पर करें इसके मंडीकरण के लिए आप Aushadhiya kheti vikas sansthan 6268536795 से संपर्क कर सकते हैं धन्यवाद
Posted by Hargovind Lodhi
Madhya Pradesh
20-10-2019 09:49 AM
Punjab
10-24-2019 11:26 AM
हरगोविंग जी , चने की खेती के लिए आप सभी किस्मों के लिए, नाइट्रोजन 9 किलो (यूरिया 20 किलो), फासफोरस 24 किलो (एस एस पी 150 किलो), पोटाश 9 किलो (म्यूरेट ऑफ पोटाश 15 किलो) और सल्फर 8 किलो प्रति एकड़ में डालें बारानी क्षेत्रों के लिए यूरिया 200 ग्राम को 10 लीटर पानी में मिलाकर फूल बनने के समय डालें फासफोरस, पोटाश की पूरी मात्रा और ना.... (Read More)
हरगोविंग जी , चने की खेती के लिए आप सभी किस्मों के लिए, नाइट्रोजन 9 किलो (यूरिया 20 किलो), फासफोरस 24 किलो (एस एस पी 150 किलो), पोटाश 9 किलो (म्यूरेट ऑफ पोटाश 15 किलो) और सल्फर 8 किलो प्रति एकड़ में डालें बारानी क्षेत्रों के लिए यूरिया 200 ग्राम को 10 लीटर पानी में मिलाकर फूल बनने के समय डालें फासफोरस, पोटाश की पूरी मात्रा और नाइट्रोजन की आधी मात्रा बिजाई के समय डालें नाइट्रोजन की बाकी बची मात्रा बिजाई के 4-5 सप्ताह बाद डालें धन्यवाद
Posted by Manoj Kumar Ray
Bihar
20-10-2019 09:47 AM
Punjab
10-24-2019 10:15 AM
Manoj ji, gehun ke liye aap beej jaise k WH 896, PBW 373, PBW 343, HD 2643, UP 2425, PBW-443, DBW-14, NW-2036, MACS-6145, HD-2824. PBW-502, PDW-291, PBW-524, HD-2864, HI-8627, Ujiar(K-9006), Gangotri(K-9162), Prasad (K-8434), Halna (K-7903), Naina (K-9533). UP 2338 kibijai kar sakte ho, dhanywad
Posted by Reena
Madhya Pradesh
20-10-2019 09:45 AM
Punjab
10-20-2019 10:41 AM
Reena ji pashu ka duudh usdi achi nasal, uski khurak aur sahi dekhbhal per nirbhar krta hai, kush cow byane se ek mahine pehle tak v duudh detti rehti hai aur kush pehle bnnd kr dete hai aur khurak, mousam ke hisab se duudh jyada kam hota rehnta hai, iske ilawa aap aur koi v jankari lena chahte hai aap App mai apna swal push skte hai apko App mai uska sahi jwab mill jayega..
Posted by ramsingh rewari
Rajasthan
20-10-2019 09:43 AM
Rajasthan
10-20-2019 10:44 AM
वैसे तो बाजार में बहुत सारी कंपनियों की फीड्ज़ आती हैं जो कंपनी वाले अपने हिसाब से तैयार करके देते है यदि आप खुद तैयार करके देना चाहते हैं तो इस तरीके से तैयार करके दे सकते है जिसमें सभी जरूरी तत्व होते है यह फीड थोड़ी महंगी होती है पर इससे पशु को फायदा बहुत होता है बाकी यदि आप ज्यादा महंगी फीड प्रयोग नहीं क.... (Read More)
वैसे तो बाजार में बहुत सारी कंपनियों की फीड्ज़ आती हैं जो कंपनी वाले अपने हिसाब से तैयार करके देते है यदि आप खुद तैयार करके देना चाहते हैं तो इस तरीके से तैयार करके दे सकते है जिसमें सभी जरूरी तत्व होते है यह फीड थोड़ी महंगी होती है पर इससे पशु को फायदा बहुत होता है बाकी यदि आप ज्यादा महंगी फीड प्रयोग नहीं करना चाहते तो आप बाजार में किसी भी कंपनी की फीड दे सकते हैं उससे भी पशु से दूध लिया जा सकता है संतुलित खुराक 100 किलो बनाने के लिए आवश्यक सामग्री चाहिए जैसे 25 किलो अनाज (ज्वार, बाजरी (सर्दियां), गेहूं, जौं (गर्मियां)इनमें से कोई एक), दाल चूरी 20 किलो (मूंग चूरी, मांह चूरी, मोठ चूरी (केवल सर्दियों के लिए), मसूर चूरी, अरहर (इनमें से एक), डी ओ सी 25 किलो (धान का चूरा), फाइबर छिल्का 15 किलो (गेहूं, चौकर, चना छिल्का, मटर छिल्का, इनमें से एक), खल 15 किला (सरसों, बिनौला या सोया (इनमें से कोई एक), मीठा सोडा 250 ग्राम, 1 किलो नमक, गुड़ 1 किला, 1 किलो हल्दी (सर्दियां में) इन्हें मिला लें यह फीड पशु के लिए बहुत लाभदायक होती है
Posted by Rajkumar Baghel
Madhya Pradesh
20-10-2019 09:41 AM
Punjab
10-20-2019 10:45 AM
राजकुमार जी कृप्या आप अपना सवाल विस्तार से पूछें कि आप क्या जानकारी लेना चाहते है ताकि आपको सही जानकारी दी जा सके
Posted by Mahendra dhakad
Madhya Pradesh
20-10-2019 09:37 AM
Punjab
10-24-2019 11:39 AM
rabi ki fasl jise ke gehun, bengalgram ( chitte channe) matar, alsi, sunflower, sarson or jowar hai, dhanywad
Posted by satinderbir singh
Punjab
20-10-2019 09:35 AM
Maharashtra
10-21-2019 03:03 PM
satinder ji punjab vich bahut sare fruit plants lagde han kirpa karke daso ek tuc kehde fruit plant bare jankari laina chahunde ho ta jo tuhanu osde hisab nal jankari diti ja sake,dhanwad
Posted by raman
Punjab
20-10-2019 09:35 AM
Punjab
10-20-2019 10:07 AM
हल्दी की सफल खेती के टिप्स पंजाब की कृषि अर्थव्यवस्था मुख्य रूप से धान और गेहूं की फसलों पर निर्भर करती है लेकिन धान और गेहूं के फसल चक्र को लगातार अपनाने के कारण कई समस्याएं हो रही हैं और धान और गेहूं से लाभ भी कम हो रहा है इसलिए, फसल विविधीकरण को अपनाते हुए अन्य फसलों को ध्यान में रखा जाना चाहिए हल्की फसल.... (Read More)
हल्दी की सफल खेती के टिप्स पंजाब की कृषि अर्थव्यवस्था मुख्य रूप से धान और गेहूं की फसलों पर निर्भर करती है लेकिन धान और गेहूं के फसल चक्र को लगातार अपनाने के कारण कई समस्याएं हो रही हैं और धान और गेहूं से लाभ भी कम हो रहा है इसलिए, फसल विविधीकरण को अपनाते हुए अन्य फसलों को ध्यान में रखा जाना चाहिए हल्की फसलें विविधता में अच्छा योगदान दे सकती हैं हल्दी की खेती न केवल हमारी खुद की जरूरतों को पूरा करेगी बल्कि हमारे प्रांत और देश में व्यापार को भी बढ़ाएगी इसकी गंध के कारण हल्दी की खेती की जाती है इसके नोड्स का पीला रंग इसके विशिष्ट तत्व करक्यूमिन (1.8 से 5.4 प्रतिशत) के कारण होता है हल्दी के बर्तनों में एक विशेष प्रकार का तेल (2.5 से 7.2 प्रतिशत) होता है जिसे टर्मरोल कहा जाता है हल्दी का उपयोग मुख्य रूप से रसोई में मसाले के रूप में सुगंधित और रंगीन खाद्य सामग्री देने के लिए किया जाता है इसके अलावा, विभिन्न दवाओं और सौंदर्य प्रसाधनों में इसका विशेष गुणों के कारण उपयोग किया जाता है इसके उचित विकास के लिए गर्म और आर्द्र वातावरण की आवश्यकता होती है पंजाब में, इसकी खेती सेनजू क्षेत्र में की जा सकती है मध्यम से लेकर उच्च कार्बनिक पदार्थ इसकी खेती के लिए अधिक उपयुक्त हैं हल्दी की फसल के बाद गेहूं या प्याज लगाया जा सकता है निम्नलिखित तकनीकी विचारों पर विचार करके उच्च पैदावार प्राप्त की जा सकती है उन्नत किस्में: अधिकतम फसल उपज के लिए केवल अनुशंसित किस्मों की खेती की जानी चाहिए पंजाब में हल्दी की खेती के लिए दो प्रकार की हल्दी की सिफारिश की जाती है, जिनका विवरण निम्नानुसार है: पंजाब हल्दी 1: इस प्रकार की हल्दी की झाड़ियाँ मध्यम ऊँचाई और सीधी होती हैं इस प्रकार के झाड़ीदार पत्ते हरे, मध्यम चौड़े और थोड़े लम्बे होते हैं इसके गांठों के शीर्ष पर पैलेट का रंग भूरा होता है जबकि गद्दे के अंदर का रंग गहरा पीला होता है इस किस्म को परिपक्व होने में लगभग 215 दिन लगते हैं और इसकी औसत उपज 108 क्विंटल प्रति एकड़ है पंजाब हल्दी 2: इस प्रकार की हल्दी की झाड़ियाँ लंबी और सीधी होती हैं इस तरह के झाड़ीदार पत्ते हल्के हरे और बहुत बड़े होते हैं इसकी गांठें मोटी और लंबी होती हैं गद्दे के ऊपर की खोपड़ी का रंग भूरा है और अंदर का गद्दा पीला है इस किस्म को परिपक्व होने में लगभग 240 दिन लगते हैं और इसकी औसत उपज 122 क्विंटल प्रति एकड़ होती है फील्ड तैयारी: हल्दी को उसकी गांठों (जमीन की चड्डी) के लिए उगाया जाता है उचित मिट्टी का कटाव - विकास के लिए भूमि का नरम होना बहुत महत्वपूर्ण है इसलिए, बुवाई से पहले दो और तीन बार बुवाई और सुई को मारकर खेत को अच्छी तरह तैयार करना चाहिए यदि पिछली फसल की मुख्य और अन्य गंदगी खेत की तैयारी के दौरान पकी है, तो उन्हें खेत की तैयारी के दौरान हटा दिया जाना चाहिए बीजों की मात्रा: हल्दी की बुवाई समुद्री मील द्वारा की जाती है बुवाई के लिए उपयोग किए गए घावों को ताजा और रोग मुक्त होना चाहिए एक एकड़ बुवाई के लिए 6 से 8 क्विंटल ताजे बेल की आवश्यकता होती है 4-5 किलोग्राम गांठ एक माला (25 वर्ग मीटर) क्षेत्र के लिए पर्याप्त होती है अगर इसे घरेलू स्तर पर छोटे पैमाने पर बोया जाए बुवाई विधि: हल्दी की ताजा और रोगग्रस्त गांठों की बुवाई के लिए चुना जाना चाहिए हल्दी की बुवाई 1 फुट (30 सेमी) की दूरी पर लाइनों के बीच 8 इंच (20 सेमी) व्यास में करके की जानी चाहिए बुवाई के बाद धान का पुआल 25-36 क्विंटल प्रति एकड़ रखा जाना चाहिए भूसे के उपयोग से भूसा जल्दी हरा हो जाता है मैदान को नम स्थान पर रखा जाना चाहिए जब तक कि गांठें हरी न हों
Posted by Mahendra dhakad
Madhya Pradesh
20-10-2019 09:34 AM
Punjab
10-23-2019 06:51 PM
महेन्दर जी, सरसों की खेती के लिए तापमान 22 -25 * C होना चाहिए तिलहनी फसलों के लिए हल्की से भारी ज़मीनें अच्छी होती हैं राया हर तरह की ज़मीन में उगाया जा सकता है पर तोरिये के लिए भारी ज़मीनें चाहिए तारामीरा के लिए आमतौर पर रेतली से मैरा रेतली ज़मीनें अच्छी होती हैं सिंचित क्षेत्रों के लिए किस्मे जैसे के Narendra Ageti Rai 4, varuna, vasanti.... (Read More)
महेन्दर जी, सरसों की खेती के लिए तापमान 22 -25 * C होना चाहिए तिलहनी फसलों के लिए हल्की से भारी ज़मीनें अच्छी होती हैं राया हर तरह की ज़मीन में उगाया जा सकता है पर तोरिये के लिए भारी ज़मीनें चाहिए तारामीरा के लिए आमतौर पर रेतली से मैरा रेतली ज़मीनें अच्छी होती हैं सिंचित क्षेत्रों के लिए किस्मे जैसे के Narendra Ageti Rai 4, varuna, vasanti, rohini, maya, urvashi, Narendra swarna rai 8, Narendra rai, असिंचित क्षेत्रों के लिए किस्मे जैसे के vaibhav, varuna, पिछेती बिजाई के लिए ashirwad, vardhan, लवणी मिट्टी के लिए narindra rai, CS52, CS 54 सीड बैड पर बोयी फसल अच्छी अंकुरित होती है ज़मीन को देसी हल से दो या तीन बार जोताई करें और प्रत्येक जोताई के बाद सुहागा फेरें बीजों के एकसार अंकुरित होने के लिए बैड नर्म, गीले और समतल होने चाहिए बुंदेलखंड और आगरा क्षेत्रों के लिए, बिजाई के लिए सितंबर का आखिरी सप्ताह उचित समय होता है जबकि बाकी के क्षेत्रों के लिए 15 अक्तूबर तक बिजाई पूरी कर लें असिंचित क्षेत्रों के लिए बिजाई का उपयुक्त समय सितंबर के दूसरे पखवाड़ा होता है तारामीरा-सरसों की बिजाई के लिए पंक्ति से पंक्ति का फासला 30 सैं.मी. और पौधे से पौधे का फासला 10 से 15 सैं.मी. रखें गोभी सरसों की बिजाई के लिए पंक्तियों का फासला 45 सैं.मी. और पौधे से पौधे का फासला 10 सैं.मी. रखें बीजों को 4-5 सैं.मी. की गहराई में बोयें बिजाई के लिए सीड ड्रिल विधि का प्रयोग करें सिंचित और असिंचित क्षेत्रों के लिए 2-2.5 किलो बीज प्रति एकड़ में प्रयोग करें बिजाई के 3-4 सप्ताह पहले 8-10 किलो गली हुई रूड़ी की खाद या अच्छी तरह से गला हुआ गाय का गोबर मिट्टी में मिलायें खादों की उचित मात्रा के लिए मिट्टी की जांच करना जरूरी है सिंचित हालातों में नाइट्रोजन 50 किलो (यूरिया 110 किलो), फासफोरस 24 किलो (सुपर फास्फेट 150 किलो) और पोटाश 24 किलो (म्यूरेट ऑफ पोटाश 40 किलो) प्रति एकड़ में डालें बिजाई के समय नाइट्रोजन की आधी मात्रा और फासफोरस की पूरी मात्रा डालें और बाकी बची नाइट्रोजन पहली सिंचाई के समय डालें धन्यवाद
Posted by satinderbir singh
Punjab
20-10-2019 09:34 AM
Punjab
10-21-2019 03:02 PM
satinderjit ji har fruit da alag sma hunda hai kripa karke daso ek tuc kehde fal bare jankari laina chahunde ho ta jo tuhanu osde hisab nal jankari diti ja sake.dhanwad
Posted by ramsingh rewari
Rajasthan
20-10-2019 09:23 AM
Punjab
12-03-2019 05:31 PM
श्रीमान जी, नेपियर घास की खेती के लिए सर्वोत्तम माने जाते हैं लगभग 200 सेमी० वार्षिक वाले क्षेत्र इसकी खेती के लिए उत्तम हैं अधिक ठण्डी जलवायु मे फसल की अच्छी वृद्धि होती हैं पाले का इस पर बहुत हानिकारक प्रभाव पड़ता हैं इसे विभिन्न प्रकार की भूमि मे उगा सकते हैं परन्तु फसल की उपज भारी भूमियों की अपेक्षा हल्की .... (Read More)
श्रीमान जी, नेपियर घास की खेती के लिए सर्वोत्तम माने जाते हैं लगभग 200 सेमी० वार्षिक वाले क्षेत्र इसकी खेती के लिए उत्तम हैं अधिक ठण्डी जलवायु मे फसल की अच्छी वृद्धि होती हैं पाले का इस पर बहुत हानिकारक प्रभाव पड़ता हैं इसे विभिन्न प्रकार की भूमि मे उगा सकते हैं परन्तु फसल की उपज भारी भूमियों की अपेक्षा हल्की भूमि मे अधिक होती हैं उत्तम उपज के लिए दोमट अथवा बलुअर दोमट मृदा उपयुक्त हैं खेत की तैयार के लिए पहली जुताई मिट्टी पलटने वाले हल से की जाती हैं इसके बाद 2-5 जुताइयाँ देशी हल से करते हैं मिट्टी को भुरभुरा करने के लिए प्रत्येक जुताई के बाद पाटे का प्रयोग किया जाता हैं भारत मे नेपियर घास की फसल रबी की फसल की कटाई के पश्चात खरीफ ऋतु मे तथा बसन्त ऋतु (फरवरी - मार्च) में बोई जाती हैं अत: इन्ही के आधार पर खेती की तैयारी की जाती हैं जिन स्थानों पर सिचाई की सुविधाएं उपलब्ध नही होती हैं वहाँ पर नेपियर घास की बुवाई वर्षा ऋतु में जुलाई से अगस्त तक की जाती हैं बसन्त ऋतु की बुवाई:-नेपियर घास की बुवाई का यह सबसे उत्तम समय (फरवरी से मार्च) होता हैं परन्तु इस समय फसल की बुवाई उन स्थानों पर की जाती हैं जहाँ सिचाई की सुविधायें उपलब्ध हों नेपियर घास की कटाई लेने के लिए आप Bharat Bhushan 9412568747 से सम्पर्क कर सख्त हैं, धन्यवाद
Posted by sukhdeep singh
Punjab
20-10-2019 09:22 AM
Punjab
10-20-2019 09:26 AM
Sukhdeep ji pashu de pett de kirre marnn di kirriya nu deworming keha jnda hai, pashu jo chara, dana, feed khnda hai uss nal mitti, rett de kann anndar jnde rehnde hai jiss nal pett de kirre bnnde hai ohna nu khtm krnn nu deworming bolde hai..
Posted by ramsingh rewari
Rajasthan
20-10-2019 09:20 AM
Punjab
12-03-2019 05:34 PM
Shrimaan ji yeh acha rehta hai aap ek din 1.5-2kg tak de skte hai, dhanywad
Posted by Dildar Singh
Punjab
20-10-2019 09:04 AM
Punjab
11-27-2019 03:05 PM
WH1105 ਕਿਸਮ ਸਮੇਂ ਸਿਰ ਬਿਜਾਈ ਲਈ ਵਰਤੀ ਜਾਂਦੀ ਹੈ ਇਹ ਭਾਰੀ, ਦਰਮਿਆਨੀ ਅਤੇ ਹਲਕੀ ਜਮੀਨ ਵਿੱਚ ਬੀਜ ਸਕਦੇ ਹੋ ਅਤੇ ਇਸ ਦਾ ਔਸਤਨ ਝਾੜ 23.1 ਕੁਇੰਟਲ ਪ੍ਰਤੀ ਏਕੜ ਨਿਕਲ ਸਕਦਾ ਹੈ
Posted by Neelam Kashyap
Maharashtra
20-10-2019 08:58 AM
Punjab
10-22-2019 04:00 PM
Neelam ji, chawal ki kheti sabe jyada uttar pradesh mein hoti hai, dhanywad
Posted by Neelam Kashyap
Maharashtra
20-10-2019 08:57 AM
Punjab
10-24-2019 11:49 AM
Neelam ji, sabse jayda gehun ki kheti Uttar Pradesh mein hoti hai, dhanywad
Posted by Dharmnath kumar
Bihar
20-10-2019 08:54 AM
Punjab
12-03-2019 05:15 PM
मोती की खेती एक बहुत ही अच्छा व्यवसाय है इस व्यवसाय को शुरू करने के लिए सबसे जरुरी है इसकी ट्रेनिंग, क्योकि इसमें बहुत सी ऐसी बारीकियें होती है जो हमें प्रेक्टिकल ट्रेनिंग में ही सीखने को मिलती है अगर आप इसकी ट्रेनिंग लेना चाहते है तो आप ग्लिटराटी पर्ल फार्मिंग ट्रेनिंग केंद्र प्रशिक्षण कार्य कर्म आयोजि.... (Read More)
मोती की खेती एक बहुत ही अच्छा व्यवसाय है इस व्यवसाय को शुरू करने के लिए सबसे जरुरी है इसकी ट्रेनिंग, क्योकि इसमें बहुत सी ऐसी बारीकियें होती है जो हमें प्रेक्टिकल ट्रेनिंग में ही सीखने को मिलती है अगर आप इसकी ट्रेनिंग लेना चाहते है तो आप ग्लिटराटी पर्ल फार्मिंग ट्रेनिंग केंद्र प्रशिक्षण कार्य कर्म आयोजित किया जा रहा है प्रशिक्षण कार्य कर्म में भाग लेने के लिए नीचे दिए गए नम्बर पर आज ही संपर्क करें और Rs 250/ से अपना रजिस्ट्रेशन करवाए अचल सिंह (फाउंडर )- 9711858258. धन्यवाद
Posted by sukhdeep singh
Punjab
20-10-2019 08:53 AM
Punjab
12-03-2019 05:06 PM
Shrimaan ji, is vich tuc full aun de smaay te NPK 130045 @ 10 gm prati liter pani de hisaab nal spray karo, ate is vich vermicompost 4-5 kg prati podhe de hisaab nal pao dhanwad