Experts Q&A Search

Posted by धर्म वीर सिंह
Uttar Pradesh
20-10-2019 02:55 PM
Maharashtra
10-21-2019 04:37 PM
धर्मवीर जी आप इसकी रोकथाम के लिए tilt @200ml को प्रति एकड़ के हिसाब से स्प्रे करें धन्यवाद
Posted by ਜਸਵਿੰਦਰ ਸਿੰਘ
Punjab
20-10-2019 02:42 PM
Punjab
10-20-2019 03:52 PM
Jaswinder ji tuci iss nu Pregstay gold powder 30gm rojana 20 dina tak deo, jekar ehh gaban hoii tan rukk jawegi jekar gaban naa hoi tan dubara heat vich aa jawegi..
Posted by manohar
Bihar
20-10-2019 02:41 PM
Punjab
10-21-2019 04:47 PM
मनोहर जी तोरी का एक एकड़ में 2 किलो बीज डाला जाता है, धन्यवाद
Posted by Himanshu Upadhyay
Uttar Pradesh
20-10-2019 02:36 PM
Maharashtra
10-21-2019 05:12 PM
himashu ji kripya aap iska poora name btaye taki aapko iske bare men poori jankari di ja sake,dhanywad
Posted by Jitendra Kumar
Uttar Pradesh
20-10-2019 02:34 PM
Punjab
10-20-2019 03:55 PM
Posted by mohan sharma
Uttar Pradesh
20-10-2019 02:27 PM
Punjab
10-21-2019 04:42 PM
अरंडी मुख्य रूप से इसके बीजों के लिए उगाया जाने वाला वार्षिक पौधा है इसके बीजों से निकाला गया तेल खाने के लिए प्रयोग नहीं होता है, पर इसका उद्योगिक स्तर पर काफी प्रयोग होता है इसके अलावा औषधीय और प्रकाश उद्देश्य से भी इसका उपयोग किया जाता है तेल निकालने के बाद बाकी बचे तेल केक को जैविक खाद के रूप में प्रयोग क.... (Read More)
अरंडी मुख्य रूप से इसके बीजों के लिए उगाया जाने वाला वार्षिक पौधा है इसके बीजों से निकाला गया तेल खाने के लिए प्रयोग नहीं होता है, पर इसका उद्योगिक स्तर पर काफी प्रयोग होता है इसके अलावा औषधीय और प्रकाश उद्देश्य से भी इसका उपयोग किया जाता है तेल निकालने के बाद बाकी बचे तेल केक को जैविक खाद के रूप में प्रयोग किया जाता है भारत अरंडी का मुख्य उत्पादक देश है और भारत में गुजरात, आंध्र प्रदेश और राजस्थान मुख्य अरंडी उत्पादक राज्य हैं व्यापारिक खेती के लिए कम उपजाऊ भूमि का प्रयोग अरंडी की खेती के लिए किया जाता है पर यह गहरी, अच्छे निकास वाली, उपजाऊ, हल्की तेजाबी रेतली दोमट मिट्टी में उगाने पर अच्छे परिणाम देती है मिट्टी की पी एच 5 से 8.5 होनी चाहिए गर्मियों में खेत की तीन से चार बार गहरी जोताई करें इससे नदीनों को खत्म करने और मिट्टी में नमी रखने में मदद मिलेगी डलियों को तोड़ने के लिए जोताई के बाद तवियों से जोताई करें फिर मिट्टी के स्तर को समतल करें ताकि खेत में पानी ना खड़ा रह सके अरंडी को पूरे वर्ष उगाया जा सकता है, जहां सिंचाई की सुविधा उपलब्ध हो अरंडी की खेती के लिए जुलाई के दूसरे सप्ताह से लेकर अगस्त का पहला सप्ताह उपयुक्त होता है फासला किस्म और बिजाई के समय पर आधारित होता है सिंचित हालातों में 90सैं.मी.x60 सैं.मी. या 120 सैं.मी.x 60 सैं.मी.फासले का प्रयोग करें जब कि बारानी हालातों में 60 सैं.मी.x45 सैं.मी. फासले का प्रयोग करें बीजों को ज्यादा गहराई में बोने से परहेज़ करें इन्हें 5 सैं.मी. की गहराई में बोयें इसकी बिजाई गड्ढा खोदकर की जाती है किस्म के आधार पर फसल 145-180 दिनों में कटाई के लिए तैयार हो जाती है जब एक या दो फल सूखते या पीले होते दिखाई दें, तो अरंडी की गुच्छों में कटाई शुरू करें सभी गुच्छे समान समय पर नहीं पकते इसलिए दो-तीन तुड़ाइयां आवश्यक हैं तुड़ाई के बाद गुच्छों को धूप में चार से पांच दिन सुखाएं अच्छी तरह से सूखने के बाद बीजों को अलग कर लें फलों की जल्दी कटाई ना करें इससे तेल की प्रतिशतता कम हो जाती है यह बिजाई के ढंग पर आधारित होती है यदि बीजों को हल के पीछे डालना है तो ज्यादा बीजों की मात्रा 4.5 से 6 किलोग्राम प्रति एकड़ में आवश्यकता होती है यदि गड्ढा खोदकर बिजाई की जाए तो 2.5 से 3.3 किलोग्राम प्रति एकड़ की आवश्यकता होती है फसल को मिट्टी से होने वाली बीमारियों से बचाने के लिए बिजाई से पहले कार्बेनडाज़िम 2 ग्राम से प्रति किलो बीजों का उपचार करें अच्छी तरह से सूखे हुए फलों में से बीजों को अलग कर लें उसके बाद बीजों से अरंडी का तेल निकाल लें तेल निकालने के बाद तेल केक में 8-10 प्रतिशत अरंडी का तेल होता है तेल केक का प्रयोग खेत में जैविक खाद के रूप में प्रयोग किया जा सकता है अरंडी की पूरी फसल को 17-20 सिंचाइयों की आवश्यकता होती है बारिश के मौसम में सिंचाई की आवश्यकता नहीं होती शुरूआती अवस्था में नदीनों की रोकथाम बहुत महत्तवपूर्ण है बिजाई के 20वें और 50वें दिन बाद हाथों से दो बार गोडाई करें बिजाई के दूसरे और तीसरे दिन बाद पैंडीमैथालीन 1 लीटर को 250 लीटर पानी में मिलाकर डालें यह घास और चौड़े पत्तों वाले नदीनों को रोकने में सहायक होगा
Posted by sidhu
Punjab
20-10-2019 02:20 PM
Punjab
10-23-2019 11:23 AM
Bicky sidhu ji, kale gehun ki jankari ke liye ap Malwinder singh Nelowalia 9888399412 se samparak karein, dhanywad
Posted by Arpit kalmodiya
Madhya Pradesh
20-10-2019 02:13 PM
Punjab
10-20-2019 03:54 PM
आप उसे रोजाना 35—40 किलो हरा चारा डालें इसे अच्छी खुराक के साथ साथ पेट के कीड़ों के लिए Flukarid-DS bolus दें और Anabolite liquid 100ml रोजाना और Milkout पाउडर 2—2 चम्मच सुबह शाम दें इनका दूध बढ़ाने में अच्छा परिणाम है, बाकि आप इसे गेहूं का दलिया भी बनाकर खिला सकते हैं
Posted by Davinder singh
Punjab
20-10-2019 01:50 PM
Chandigarh
11-23-2019 04:20 PM
ਹਰੇ ਚਾਰੇ ਵਿੱਚ ਤੁਸੀਂ ਬਰਸੀਮ ਅਤੇ ਜਵੀ ਦੀ ਬਿਜਾਈ ਕਰ ਸਕਦੇ ਹੋਂ ਬਰਸੀਮ ਦੀਆਂ BL 1, BL 10, BL 42, BL 43 ਅਤੇ ਜਵੀ ਦੀਆਂ OL 10, OL 9, OL 11, Weston 11, Kent ਕਿਸਮਾਂ ਬੀਜ ਸਕਦੇ ਹੋਂ
Posted by ruchin
Uttar Pradesh
20-10-2019 01:45 PM
Maharashtra
10-21-2019 04:58 PM
Ruchin ji aap iske uper NPK 191919 ek kilo ko 150 litre pani ke hisab se spray karen.dhanywad
Posted by Talwinder singh
Punjab
20-10-2019 01:39 PM
Punjab
10-21-2019 04:59 PM
ਤਲਵਿੰਦਰ ਜੀ ਤੁਸੀ ਇਹਨਾਂ ਦੋਨਾਂ ਨੂੰ ਰਲਾ ਕੇ ਖੇਤ ਵਿਚ ਬੀਜ ਸਕਦੇ ਹੋ
Posted by sidhu
Punjab
20-10-2019 01:36 PM
Haryana
10-21-2019 05:10 PM
ਤੁਸੀ ਕਣਕ ਦੀਆਂ ਹੇਠ ਦਿਤੀਆਂ ਕਿਸਮਾਂ ਦੀ ਬਿਜਾਈ ਕਰ ਸਕਦੇ ਹੋ :-UNNAT PBW 343: ਇਹ ਕਿਸਮ ਸਿੰਚਾਈ ਵਾਲੇ ਖੇਤਰਾਂ ਵਿੱਚ ਲਗਾਉਣ ਯੋਗ ਹੈ ਪੱਕਣ ਦੇ ਲਈ ਇਹ 155 ਦਿਨਾਂ ਦਾ ਸਮਾਂ ਲੈਦੀ ਹੈ ਇਹ ਕਰਨਾਲ ਬੰਟ ਦੀ ਪ੍ਰਤਿਰੋਧੀ ਅਤੇ ਬਲਾਈਟ ਨੂੰ ਵੀ ਸਹਿਣ ਯੋਗ ਹੈ ਇਸਦੀ ਔਸਤ ਪੈਦਾਵਾਰ 23.2 ਕੁਇੰਟਲ ਪ੍ਰਤੀ ਏਕੜ ਹੈ UNNAT PBW 550: ਇਹ ਕਿਸਮ ਪੰਜਾਬ ਦੇ ਸਾਰਿਆਂ ਇਲਾਕਿਆਂ ਵਿੱਚ ਉਗਾਈ ਜਾਂਦੀ ਹੈ ਇਹ ਕਿਸਮ 145 ਦਿਨਾਂ ਵ.... (Read More)
ਤੁਸੀ ਕਣਕ ਦੀਆਂ ਹੇਠ ਦਿਤੀਆਂ ਕਿਸਮਾਂ ਦੀ ਬਿਜਾਈ ਕਰ ਸਕਦੇ ਹੋ :-UNNAT PBW 343: ਇਹ ਕਿਸਮ ਸਿੰਚਾਈ ਵਾਲੇ ਖੇਤਰਾਂ ਵਿੱਚ ਲਗਾਉਣ ਯੋਗ ਹੈ ਪੱਕਣ ਦੇ ਲਈ ਇਹ 155 ਦਿਨਾਂ ਦਾ ਸਮਾਂ ਲੈਦੀ ਹੈ ਇਹ ਕਰਨਾਲ ਬੰਟ ਦੀ ਪ੍ਰਤਿਰੋਧੀ ਅਤੇ ਬਲਾਈਟ ਨੂੰ ਵੀ ਸਹਿਣ ਯੋਗ ਹੈ ਇਸਦੀ ਔਸਤ ਪੈਦਾਵਾਰ 23.2 ਕੁਇੰਟਲ ਪ੍ਰਤੀ ਏਕੜ ਹੈ UNNAT PBW 550: ਇਹ ਕਿਸਮ ਪੰਜਾਬ ਦੇ ਸਾਰਿਆਂ ਇਲਾਕਿਆਂ ਵਿੱਚ ਉਗਾਈ ਜਾਂਦੀ ਹੈ ਇਹ ਕਿਸਮ 145 ਦਿਨਾਂ ਵਿੱਚ ਪੱਕ ਕੇ ਤਿਆਰ ਹੋ ਜਾਂਦੀ ਹੈ ਇਹ ਪੀਲੀ ਅਤੇ ਭੂਰੀ ਕੁੰਗੀ ਦੀ ਰੋਧਕ ਕਿਸਮ ਹੈ ਇਸਦਾ ਔਸਤਨ ਕੱਦ 86 ਸੈ.ਮੀ. ਹੁੰਦਾ ਹੈ ਇਸ ਦਾ ਔਸਤਨ ਝਾੜ 23 ਕੁਇੰਟਲ ਪ੍ਰਤੀ ਏਕੜ ਹੁੰਦਾ ਹੈ PBW 1 Zn: ਇਸ ਕਿਸਮ ਦੇ ਪੌਦੇ ਦਾ ਔਸਤਨ ਕੱਦ 103 ਸੈ.ਮੀ. ਹੁੰਦਾ ਹੈ ਇਹ ਕਿਸਮ 151 ਦਿਨਾਂ ਵਿੱਚ ਕਟਾਈ ਲਈ ਤਿਆਰ ਹੋ ਜਾਂਦੀ ਹੈ ਇਸ ਦਾ ਔਸਤਨ ਝਾੜ 22.5 ਕੁਇੰਟਲ ਪ੍ਰਤੀ ਏਕੜ ਹੁੰਦਾ ਹੈ PBW 725: ਇਹ ਕਿਸਮ ਪੀ ਏ ਯੂ, ਐਗਰੀਕਲਚਰ ਯੂਨੀਵਰਸਿਟੀ ਦੁਆਰਾ ਸਿਫਾਰਿਸ਼ ਕੀਤੀ ਗਈ ਹੈ ਇਹ ਇੱਕ ਮੱਧਰੀ ਕਿਸਮ ਹੈ ਅਤੇ ਇਹ ਸਿੰਚਾਈ ਵਾਲੇ ਖੇਤਰਾਂ ਵਿੱਚ ਲਗਾਈ ਜਾਂਦੀ ਹੈ ਇਹ ਪੀਲੇ ਅਤੇ ਭੂਰੇ ਜੰਗ ਦੀ ਪ੍ਰਤਿਰੋਧੀ ਕਿਸਮ ਹੈ ਇਸਦੇ ਦਾਣੇ ਮੋਟੇ , ਅਤੇ ਗਹਿਰੇ ਰੰਗ ਦੇ ਹੁੰਦੇ ਹਨ ਇਹ 155 ਦਿਨਾਂ ਵਿੱਚ ਪੱਕ ਕੇ ਤਿਆਰ ਹੋ ਜਾਂਦੀ ਹੈ ਇਸਦੀ ਸਲਾਨਾ ਔਸਤ ਝਾੜ 23 ਕੁਇੰਟਲ ਪ੍ਰਤੀ ਏਕੜ ਹੈ PBW 677: ਇਹ ਕਿਸਮ 160 ਦਿਨਾਂ ਵਿੱਚ ਕਟਾਈ ਲਈ ਤਿਆਰ ਹੋ ਜਾਂਦੀ ਹੈ ਇਸਦਾ ਔਸਤ ਝਾੜ 22.4 ਕੁਇੰਟਲ ਪ੍ਰਤੀ ਏਕੜ ਹੈ HD 3086 (PusaGautam) : ਇਸ ਦਾ ਔਸਤਨ ਝਾੜ 23 ਕੁਇੰਟਲ ਪ੍ਰਤੀ ਏਕੜ ਹੁੰਦਾ ਹੈ ਇਹ ਪੱਤਿਆਂ ਦੇ ਪੀਲੇਪਣ ਅਤੇ ਭੂਰੇਪਣ ਦੀ ਬਿਮਾਰੀ ਤੋਂ ਰਹਿਤ ਹੁੰਦੀ ਹੈ ਵਧੀਆ ਕਿਮਸ ਦੇ ਬਰੈੱਡ ਬਣਾਉਣ ਦੇ ਸਾਰੇ ਗੁਣ/ਤੱਤ ਇਸ ਵਿਚ ਮੌਜੂਦ ਹਨ WH 1105: ਇਸ ਦੀ ਕਾਢ ਪੰਜਾਬ ਖੇਤੀਬਾੜੀ ਯੂਨੀਵਰਸਿਟੀ ਵੱਲੋਂ ਕੀਤੀ ਗਈ ਹੈ ਇਹ ਇੱਕ ਛੋਟੇ ਕੱਦ ਵਾਲੀ ਕਿਸਮ ਹੈ ਜਿਸ ਵਿਚ ਬੂਟੇ ਦਾ ਔਸਤਨ ਕੱਦ 97 ਸੈ.ਮੀ. ਤੱਕ ਹੁੰਦਾ ਹੈ ਇਸ ਦੇ ਦਾਣੇ ਸੁਨਹਿਰੇ, ਮਧਰੇ, ਸਖਤ ਅਤੇ ਚਮਕਦਾਰ ਹੁੰਦੇ ਹਨ ਇਹ ਪੱਤਿਆਂ ਦੇ ਪੀਲੇਪਣ ਅਤੇ ਭੂਰੇਪਣ ਦੀ ਬਿਮਾਰੀ ਤੋਂ ਰਹਿਤ ਹੁੰਦੀ ਹੈ ਪਰੰਤੂ ਇਹ ਦਾਣਿਆਂ ਦੇ ਖਰਾਬ ਹੋਣ ਅਤੇ ਸਿੱਟਿਆਂ ਦੇ ਭੂਰੇ ਪੈਣ ਦੀ ਬਿਮਾਰੀ ਪ੍ਰਤੀ ਸੰਵੇਦਨਸ਼ੀਲ ਹੈ ਇਹ ਲਗਭਗ 157 ਦਿਨਾਂ ਵਿੱਚ ਪੱਕ ਜਾਂਦੀ ਹੈ ਇਸ ਦੀ ਔਸਤਨ ਪੈਦਾਵਾਰ 23.1 ਕੁਇੰਟਲ ਪ੍ਰਤੀ ਏਕੜ ਹੈ HD 2967: ਇਹ ਵੱਡੇ ਕੱਦ ਦੀ ਕਿਸਮ ਹੈ ਜਿਸ ਵਿਚ ਬੂਟੇ ਦਾ ਔਸਤਨ ਕੱਦ 101 ਸੈ.ਮੀ. ਤੱਕ ਹੁੰਦਾ ਹੈ ਇਸ ਦੇ ਦਾਣੇ ਸੁਨਹਿਰੇ, ਮਧਰੇ, ਸਖਤ ਅਤੇ ਚਮਕਦਾਰ ਹੁੰਦੇ ਹਨ ਇਹ ਲਗਭਗ 157 ਦਿਨਾਂ ਵਿੱਚ ਪੱਕ ਜਾਂਦੀ ਹੈ ਇਸ ਦੀ ਔਸਤਨ ਪੈਦਾਵਾਰ 21.5 ਕੁਇੰਟਲ ਪ੍ਰਤੀ ਏਕੜ ਹੈ PBW 621: ਇਹ ਕਿਸਮ ਪੰਜਾਬ ਦੇ ਸਾਰਿਆਂ ਇਲਾਕਿਆਂ ਵਿੱਚ ਉਗਾਈ ਜਾਂਦੀ ਹੈ ਇਹ ਕਿਸਮ 158 ਦਿਨਾਂ ਵਿੱਚ ਪੱਕ ਕੇ ਤਿਆਰ ਹੋ ਜਾਂਦੀ ਹੈ ਇਹ ਪੀਲੀ ਅਤੇ ਭੂਰੀ ਕੁੰਗੀ ਦੀ ਰੋਧਕ ਕਿਸਮ ਹੈ ਇਸਦਾ ਔਸਤਨ ਕੱਦ 100 ਸੈ.ਮੀ. ਹੁੰਦਾ ਹੈI HD 3226:- jhaad 24 qtl / acre.
Posted by NIGAM SINGH
Uttar Pradesh
20-10-2019 01:29 PM
Punjab
10-20-2019 01:58 PM
उसे आप Lactomood होमियोपेथिक दवा की 10—10 बूंदें दिन में तीन बार दें और Leptaden गोलियां जो Alarsin कंपनी का प्रोडक्ट है इसकी 10—10 गोलियां सुबह शाम दें और Milkout पाउडर 2—2 चम्मच सुबह शाम दें इससे फर्क पड़ जाएगा.
Posted by m javed
Uttar Pradesh
20-10-2019 01:28 PM
Punjab
10-20-2019 02:00 PM
aap chicks khridne ke liye Sumit Kumar 8006000291, 7906547529 Sumit Kumar Poultry Farm se sampark kr skte hai, duck khridne ke liye aap Devanand Singh 8797333083, 8271214246 se sampark kr skte hai..
Posted by Dinesh Kumar Dikshit
Uttar Pradesh
20-10-2019 01:09 PM
Maharashtra
10-21-2019 05:09 PM
पुदीना मैंथा के नाम से जानी जाने वाली एक क्रियाशील जड़ी बूटी है पुदीने को मिट्टी की कई किस्मों जैसे दरमियाने से गहरी उपजाऊ मिट्टी, जिसमें पानी को सोखने की क्षमता ज्यादा हो, में उगाया जाता है इसको जल-जमाव वाली मिट्टी में भी उगाया जा सकता है उच्च नमी वाली मिट्टी में यह अच्छे परिणाम देती है इस फसल के लिए मिट्टी .... (Read More)
पुदीना मैंथा के नाम से जानी जाने वाली एक क्रियाशील जड़ी बूटी है पुदीने को मिट्टी की कई किस्मों जैसे दरमियाने से गहरी उपजाऊ मिट्टी, जिसमें पानी को सोखने की क्षमता ज्यादा हो, में उगाया जाता है इसको जल-जमाव वाली मिट्टी में भी उगाया जा सकता है उच्च नमी वाली मिट्टी में यह अच्छे परिणाम देती है इस फसल के लिए मिट्टी का pH 6-7.5 होना चाहिए प्रसिद्ध किस्में:- MAS-1: यह छोटे कद की किस्म है जिसकी ऊंचाई 30-45 सैं.मी. होती है यह बीमारीयों की रोधक और जल्दी पकने वाली किस्म है इसमें मैन्थोल की मात्रा 70-80% होती है इसकी औसतन पैदावार 80 क्विंटल प्रति एकड़ जड़ी-बूटियां के तौर पर और 50-60 किलोग्राम प्रति एकड़ तेल के तौर पर होती है Hybrid-77: इसकी ऊंचाई 50-60 सैं.मी. होती है यह किस्म पत्तों के धब्बा रोग और कुंगी के रोधक होती है, और यह जल्दी पकने वाली किस्म है इसमें मैन्थोल की मात्रा 80-85% होती है इसकी औसतन पैदावार 80 क्विंटल प्रति एकड़ जड़ी-बूटियां के तौर पर और 50-60 किलोग्राम प्रति एकड़ तेल के तौर पर होती है यह रेतली दोमट मिट्टी में बढ़िया पैदावार देती है औरऐसी शुष्क मौसम में की आवश्यकता होती है Shivalik: यह चीन की खेती से चुनी गई किस्म है यह किस्म उत्तर प्रदेश के तराई क्षेत्रों और उत्तरांचल में अच्छी वृद्धि करती है इसमें मैन्थोल की मात्रा 65-70% होती है इसकी औसतन पैदावार 120 क्विंटल प्रति एकड़ जड़ी-बूटियां के तौर पर और 72 किलोग्राम प्रति एकड़ तेल के तौर पर होती है यह किस्म फंगस रोगों से जल्दी प्रभावित होती है EC-41911: यह किस्म रूसी जर्मप्लाज्म से ली गई है यह किस्म पानी की रोधक और आकार में सीधी होती है इसमें मैन्थोल की मात्रा 70%पायी जाती है इसकी औसतन पैदावार 120 क्विंटल प्रति एकड़ जड़ी-बूटियां के तौर पर और 72 किलोग्राम प्रति एकड़ तेल के तौर पर होती है इस किस्म से तैयार तेल का प्रयोग विभिन्न व्यंजनों में स्वाद के लिए किया जाता है Gomti: यह किस्म रंग में हल्के लाल रंग की होती है इसकी पैदावार बाकी किस्मों की पैदावार से कम होती है इसमें मैन्थोल की मात्रा 78-80% होती है Himalaya: इसके पत्तों का आकार बाकी किस्मों से बड़ा होता है यह किस्म कुंगी, झुलस, सफेद धब्बे और पत्तों पर धब्बे रोग की रोधक है इसमें मैन्थोल की मात्रा 78-80% होती है इसकी औसतन पैदावार 160 क्विंटल प्रति एकड़ जड़ी-बूटियां के तौर पर और 80-100 किलोग्राम प्रति एकड़ तेल के तौर पर होती है Kosi: यह किस्म 90 दिनों में पक जाती है यह किस्म कुंगी, झुलस, सफेद धब्बे और पत्तों के धब्बे रोग की प्रतिरोधक है इसमें मैन्थोल की मात्रा 75-80 प्रतिशत होती है और तेल की पैदावार 80-100 किलोग्राम प्रति एकड़ होती है Saksham: यह किस्म सी वी हिमालय की तरफ से टिशू कल्चर द्वारा तैयार की गई है इसमें मैन्थोल की मात्रा 80% होती है और तेल की पैदावार 90-100 किलोग्राम प्राप्त होती है पुदीने की बिजाई के लिए सुविधाजनक आकार के बैड तैयार करें खेत की तैयारी के समय खेत की अच्छी तरह जोताई करें जैविक खाद जैसे रूड़ी की खाद 100-120 क्विंटल प्रति एकड़ रूड़ी की खाद डालें रूड़ी की खाद के बाद हरी खाद डालें इसकी बिजाई के लिए दिसंबर-जनवरी का समय अनुकूल होता है पौधे के भागों की बिजाई 40 सैं.मी. के फासले पर और पंक्तियों के बीच का फासला 60 सैं.मी होना चाहिए बीज को 2-3 सैं.मी. की गहराई में बोयें पौधे के जड़ वाले भाग को मुख्य खेत में बोया जाता है खेत की तैयारी के समय रूड़ी की खाद 80-120 क्विंटल प्रति एकड़ में डालें और अच्छी तरह मिलायें नाइट्रोजन 58 किलो (यूरिया 130 किलो), फासफोरस 32-40 किलो (सिंगल सुपर फासफेट 80-100 किलो), पोटाशियम 20 किलो (म्यूरेट ऑफ पोटाश 33 किलो) प्रति एकड़ में डालें गर्मियों में मॉनसून से पहले जलवायु और मिट्टी के आधार पर 6-9 सिंचाइयां जरूर की जानी चाहिए मॉनसून के बाद 3 सिंचाइयों की आवश्यकता होती है पहली सिंचाई सितंबर महीने में, दूसरी अक्तूबर में और तीसरी नवंबर महीने में की जानी चाहिए सर्दियों में ज्यादा सिंचाई की आवश्यकता नहीं होती, लेकिन यदि सर्दियों में बारिश ना पड़े तो एक सिंचाई जरूर देनी चाहिए पौधे 100-120 दिनों में कटाई के लिए तैयार हो जाते हैं जब निचले पत्ते पीले रंग के होने शुरू हो जायें, तब कटाई करें कटाई दराती से और बूटियों को मिट्टी की सतह के 2-3 सैं.मी. ऊपर से निकालें अगली कटाई पहली कटाई के बाद 80 दिनों के अंतराल पर करें ताजी पत्तियों को उत्पाद बनाने के लिए प्रयोग किया जाता है, धन्यवाद
Posted by shailendra singh
Uttar Pradesh
20-10-2019 01:09 PM
Punjab
10-20-2019 02:02 PM
उसे आप 250 ग्राम गुड, 250 ग्राम गुलकंद, 100 ग्राम सौंफ और 100 ग्राम सूखे आंवले और 50 ग्राम अज्वाइण उबाल कर फिर ठंडा करके 5—7 दिन दें बाकि उसे Anabolite liquid 100ml रोजाना देना शुरू करें और Lactomax रोजाना 10 गोलियां दें और 20 दिनों तक देते रहें इससे फर्क पड़ जाएगा
Posted by Yamun Sharma
Bihar
20-10-2019 01:06 PM
Punjab
10-22-2019 03:32 PM
यमुन जी, यह Fungus का हमला है, इसके लिए आप tilt @ 200 ml प्रति एकड़ के हिसाब से स्प्रे करें, धन्यवाद
Posted by Pramod Boudh
Uttar Pradesh
20-10-2019 12:56 PM
Punjab
12-03-2019 05:08 PM
मोती की खेती एक बहुत ही अच्छा व्यवसाय है इस व्यवसाय को शुरू करने के लिए सबसे जरुरी है इसकी ट्रेनिंग, क्योकि इसमें बहुत सी ऐसी बारीकियें होती है जो हमें प्रेक्टिकल ट्रेनिंग में ही सीखने को मिलती है अगर आप इसकी ट्रेनिंग लेना चाहते है तो आप ग्लिटराटी पर्ल फार्मिंग ट्रेनिंग केंद्र प्रशिक्षण कार्य कर्म आयोजि.... (Read More)
मोती की खेती एक बहुत ही अच्छा व्यवसाय है इस व्यवसाय को शुरू करने के लिए सबसे जरुरी है इसकी ट्रेनिंग, क्योकि इसमें बहुत सी ऐसी बारीकियें होती है जो हमें प्रेक्टिकल ट्रेनिंग में ही सीखने को मिलती है अगर आप इसकी ट्रेनिंग लेना चाहते है तो आप ग्लिटराटी पर्ल फार्मिंग ट्रेनिंग केंद्र प्रशिक्षण कार्य कर्म आयोजित किया जा रहा है प्रशिक्षण कार्य कर्म में भाग लेने के लिए नीचे दिए गए नम्बर पर आज ही संपर्क करें और Rs 250/ से अपना रजिस्ट्रेशन करवाए अचल सिंह (फाउंडर )- 9711858258. धन्यवाद
Posted by ਭੰਗੂ
Punjab
20-10-2019 12:54 PM
Maharashtra
10-21-2019 05:18 PM
ਇਸਨੂੰ ਕਿਸੇ ਤਰ੍ਹਾਂ ਦੀ ਜ਼ਮੀਨ ‘ਤੇ ਵੀ ਉਗਾਇਆ ਜਾ ਸਕਦਾ ਹੈ ਪਰ ਵਧੀਆ ਜਲ ਨਿਕਾਸ ਵਾਲੀ ਹਲਕੀ ਜ਼ਮੀਨ ਇਸ ਲਈ ਸਭ ਤੋਂ ਵਧੀਆ ਹੈ ਜ਼ਮੀਨ ਦਾ pH 5.5-6.5 ਵਧੀਆ ਹੈ ਪਰ ਇਹ ਤੇਜ਼ਾਬੀ ਜ਼ਮੀਨ ਵਿੱਚ ਵੀ ਉਗਾਈ ਜਾ ਸਕਦੀ ਹੈ Golden Acre, Pusa Mukta, Pusa Drumhead, K-1, Pride of india, Kopan hagen, Ganga, Pusa synthetic, Shriganesh gol, Hariana, Kaveri, Bajrang. ਇਹਨਾਂ ਕਿਸਮਾਂ ਦਾ ਔਸਤਨ ਝਾੜ 75-80 ਕੁਇੰਟਲ ਪ੍ਰਤੀ ਏਕੜ ਹੁੰਦਾ ਹੈ ਜਮੀਨ ਨੂੰ ਵਾਹ ਕੇ ਨਰਮ ਕਰੋ ਅਤੇ 3-4 ਵਾਰ ਵਾਉਣ ਤੋ.... (Read More)
ਇਸਨੂੰ ਕਿਸੇ ਤਰ੍ਹਾਂ ਦੀ ਜ਼ਮੀਨ ‘ਤੇ ਵੀ ਉਗਾਇਆ ਜਾ ਸਕਦਾ ਹੈ ਪਰ ਵਧੀਆ ਜਲ ਨਿਕਾਸ ਵਾਲੀ ਹਲਕੀ ਜ਼ਮੀਨ ਇਸ ਲਈ ਸਭ ਤੋਂ ਵਧੀਆ ਹੈ ਜ਼ਮੀਨ ਦਾ pH 5.5-6.5 ਵਧੀਆ ਹੈ ਪਰ ਇਹ ਤੇਜ਼ਾਬੀ ਜ਼ਮੀਨ ਵਿੱਚ ਵੀ ਉਗਾਈ ਜਾ ਸਕਦੀ ਹੈ Golden Acre, Pusa Mukta, Pusa Drumhead, K-1, Pride of india, Kopan hagen, Ganga, Pusa synthetic, Shriganesh gol, Hariana, Kaveri, Bajrang. ਇਹਨਾਂ ਕਿਸਮਾਂ ਦਾ ਔਸਤਨ ਝਾੜ 75-80 ਕੁਇੰਟਲ ਪ੍ਰਤੀ ਏਕੜ ਹੁੰਦਾ ਹੈ ਜਮੀਨ ਨੂੰ ਵਾਹ ਕੇ ਨਰਮ ਕਰੋ ਅਤੇ 3-4 ਵਾਰ ਵਾਉਣ ਤੋਂ ਬਾਅਦ ਪੱਧਰਾ ਕਰੋ ਆਖਰੀ ਵਾਹੀ ਵੇਲੇ ਰੂੜੀ ਦੀ ਖਾਦ ਨੂੰ ਮਿੱਟੀ ਵਿੱਚ ਚੰਗੀ ਤਰ੍ਹਾਂ ਮਿਲਾਉ ਸਤੰਬਰ ਤੋਂ ਅਕਤੂਬਰ ਮਹੀਨਾ ਸਮਤਲ ਖੇਤਰਾਂ ਵਿੱਚ ਫਸਲ ਉਗਾਉਣ ਦਾ ਸਹੀ ਸਮਾਂ ਹੈ ਛੇਤੀ ਬੀਜੀ ਫ਼ਸਲ ਵਿੱਚ ਫਾਸਲਾ 45x45 ਸੈਂਟੀਮੀਟਰ ਅਤੇ ਦੇਰ ਨਾਲ ਬੀਜੀ ਫ਼ਸਲ ਲਈ 60x45 ਸੈਂਟੀਮੀਟਰ ਹੋਣਾ ਚਾਹੀਦਾ ਹੈ ਬੀਜ 1-2 ਸੈਂਟੀਮੀਟਰ ਡੂੰਘੇ ਬੀਜਣੇ ਚਾਹੀਦੇ ਹਨ ਇਸ ਦੀ ਬਿਜਾਈ ਲਈ ਦੋ ਢੰਗ ਵਰਤੇ ਜਾਂਦੇ ਹਨ: 1. ਟੋਆ ਪੁੱਟ ਕੇ 2 ਖੇਤ ਵਿੱਚ ਰੁਪਾਈ ਕਰ ਕੇ ਬੀਜ ਨੂੰ ਨਰਸਰੀ ਵਿੱਚ ਬੀਜੋ ਅਤੇ ਸਿੰਚਾਈ ਕਰੋ, ਖਾਦਾਂ ਲੋੜ ਅਨੁਸਾਰ ਪਾਉ ਨਵੇ ਪੌਦੇ ਬੀਜਣ ਤੋ 25-30 ਦਿਨ ਬਾਅਦ ਨਵੇ ਖੇਤ ਵਿੱਚ ਲਗਾਉਣ ਲਈ ਤਿਆਰ ਹੋ ਜਾਂਦੇ ਹਨ ਪਨੀਰੀ ਲਗਾਉਣ ਲਈ 3 ਜਾਂ 4 ਹਫਤੇ ਪੁਰਾਣੇ ਪੌਦੇ ਵਰਤੋ ਬਿਜਾਈ ਲਈ 200-250 ਗ੍ਰਾਮ ਬੀਜ ਪ੍ਰਤੀ ਏਕੜ ਲਈ ਜਰੂਰਤ ਹੁੰਦੀ ਹੈ
Posted by Aaditya yadav
Uttar Pradesh
20-10-2019 12:52 PM
Punjab
10-21-2019 05:20 PM
मोटे आलुओं की पैदावार के लिए 13:0:45 की 2 किलो और मैगनीश्यिम ई डी टी ए 100 ग्राम प्रति एकड़ की स्प्रे करें बीमारियों के हमले को रोकने के लिए फंगसनाशी प्रॉपीनेब 3 ग्राम प्रति लीटर पानी डालें आलुओं का आकार और गिणती बढ़ाने के लिए हयूमिक एसिड (12 प्रतिशत) 3 ग्राम + एम ए पी 12:61:0 की 8 ग्राम या डी ए पी 15 ग्राम प्रति लीटर की स्प्रे पौध.... (Read More)
मोटे आलुओं की पैदावार के लिए 13:0:45 की 2 किलो और मैगनीश्यिम ई डी टी ए 100 ग्राम प्रति एकड़ की स्प्रे करें बीमारियों के हमले को रोकने के लिए फंगसनाशी प्रॉपीनेब 3 ग्राम प्रति लीटर पानी डालें आलुओं का आकार और गिणती बढ़ाने के लिए हयूमिक एसिड (12 प्रतिशत) 3 ग्राम + एम ए पी 12:61:0 की 8 ग्राम या डी ए पी 15 ग्राम प्रति लीटर की स्प्रे पौधे की वृद्धि के समय करें
Posted by prashant shakya
Uttar Pradesh
20-10-2019 12:50 PM
Maharashtra
10-21-2019 05:22 PM
प्रशांत जी यह फंगस के कारण हो रहे है इसके लिए आप mancozeb @4 ग्राम को प्रति लीटर पानी के हिसाब से स्प्रे करें धन्यवाद
Posted by sonu singh
Madhya Pradesh
20-10-2019 12:47 PM
Punjab
10-20-2019 03:46 PM
Sonu ji usko aap ciprofloxacin 500mg 1-1 goli subah sham 3 din tak den aur banminth forte tablet 1 goli ajj aur ek 2 dino ke badd den aur usko Broton liquid 10ml rojana den, isse frak padd jayega..
Posted by ajay
Uttar Pradesh
20-10-2019 12:39 PM
Punjab
10-20-2019 12:41 PM
Posted by bhisma pratap
Bihar
20-10-2019 12:34 PM
Maharashtra
10-21-2019 05:29 PM
इसे किसी भी तरह की हल्की से भारी ज़मीनों में उगाया जा सकता है गहरी मैरा, अच्छी जल निकास वाली, पानी को बांध कर रखने वाली और अच्छी जैविक खनिजों वाली ज़मीन सब से अच्छी रहती है नर्म और रेतली ज़मीनें इसके लिए अच्छी नहीं होती क्योंकि इसमें बनी गांठे जल्दी खराब हो जाती हैं ज़मीन की तैयारी के लिए मिट्टी के भुरभुरा होने त.... (Read More)
इसे किसी भी तरह की हल्की से भारी ज़मीनों में उगाया जा सकता है गहरी मैरा, अच्छी जल निकास वाली, पानी को बांध कर रखने वाली और अच्छी जैविक खनिजों वाली ज़मीन सब से अच्छी रहती है नर्म और रेतली ज़मीनें इसके लिए अच्छी नहीं होती क्योंकि इसमें बनी गांठे जल्दी खराब हो जाती हैं ज़मीन की तैयारी के लिए मिट्टी के भुरभुरा होने तक खेत को 3-4 बार जोताई करें और मिट्टी में जैविक खनिजों को बढ़ाने के लिए रूड़ी की खाद डालें खेत को समतल करके क्यारियों और खालियों में बांट दें बिजाई के लिए सही समय सितंबर के आखिरी सप्ताह से अक्तूबर का पहला सप्ताह माना जाता है पौधे से पौधे का फासला 7.5 सैं.मी. और कतारों में फासला 15 सैं.मी. रखें लहसुन की गांठों को 3-5 सैं.मी. गहरा और उसका उगने वाला हिस्सा ऊपर की तरफ रखें इसकी बिजाई के लिए केरा ढंग का प्रयोग करें बिजाई हाथों से या मशीन से की जा सकती है लहसुन की गांठों को मिट्टी से ढककर हल्की सिंचाई करें बीज की मात्रा 225-250 किलोग्राम बीज प्रति एकड़ में प्रयोग करें बिजाई से 10 दिन पहले खेत में 2 टन रूड़ी की खाद डालें 50 किलो नाइट्रोजन (110 किलो यूरिया) और 25 किलो फासफोरस (155 किलो एस एस पी) प्रति एकड़ डालें सारी एस एस पी बिजाई से पहले और नाइट्रोजन तीन हिस्सों में बिजाई के 30, 45 और 60 दिन बाद डालें शुरू में लहसुन का पौधा धीरे धीरे बढ़ता है इसलिए नदीन नाशकों का प्रयोग गोडाई से बढ़िया रहता है नदीनों को रोकने के लिए पैंडीमैथालीन 1 लीटर प्रति 200 लीटर पानी प्रति एकड़ में डालकर बिजाई से 72 घंटो में स्प्रे करें इसके बिना नदीन नाशक ऑक्सीफ्लोरफेन 425 मि.ली. प्रति 200 लीटर पानी में डालकर स्प्रे बिजाई के 7 दिन बाद करें नदीनों की रोकथाम के लिए 2 गोडाई की जरूरत है पहली गोडाई बिजाई से 1 महीने बाद और दूसरी गोडाई बिजाई के 2 महीने बाद करें वातावरण और मिट्टी की किस्म के आधार पर सिंचाई करें बिजाई के तुरंत बाद पहली सिंचाई करें और आवश्यकता के आधार पर 10-15 दिनों के अंतराल पर आवश्यकतानुसार सिंचाई करें कटाई करने और सूखाने के बाद गांठों को आकार के अनुसार छांटे प्याज की बुवाई :- मिट्टी को भुरभुरा बनाने के लिए तीन-चार बार गहराई से जोताई करें मिट्टी में जैविक तत्वों की मात्रा बढ़ाने के लिए रूड़ी की खाद डालें फिर खेत को छोटे-छोटे प्लाटों में बांट दे नर्सरी तैयार करने के उचित समय मध्य-अक्तूबर से मध्य-नवबंर होता है नए पौधे मध्य-दिसंबर से मध्य-जनवरी तक रोपाई के लिए तैयार हो जाते है रोपाई के लिए 10-15 सैं.मी. कद के पौधे चुनें खरीफ के मौसम में रोपाई के लिए मई से जून का महीना नर्सरी तैयार करने के लिए उपयुक्त होता है बिजाई के 6-8 सप्ताह बाद नए पौधे रोपाई के लिए तैयार हो जाते हैं जुलाई -अगस्त के महीने में रोपण कर दें रोपण के समय, पंक्तियों के बीच 15 सैं.मी. और पौधों के बीच 10 सैं.मी. का फासला रखें नर्सरी में बीज 1-2 सैं.मी. गहराई पर बोयें बिजाई के लिए रोपण विधि का प्रयोग करें एक एकड़ के लिए 2-3 किलो बीज का प्रयोग करें उखेड़ा रोग और कांव-गियारी से बचाव के लिए थीरम 2 ग्राम+बैनोमाइल 50 डब्लयू पी 1 ग्राम प्रति लीटर पानी से प्रति किलो बीजों का उपचार करें रासायनिक उपचार के बाद बायो एजेंट ट्राईकोडर्मा विराइड 2 ग्राम के साथ प्रति किलो बीजों का उपचार करने की सिफारिश की जाती है इस तरह करने से नए पौधे मिट्टी से पैदा होने वाली और अन्य बीमारीयों से बच जाते है बिजाई से 10 दिन पहले 20 टन रूड़ी की खाद डालें नाइट्रोजन 30 किलो(यूरिया 65 किलो), फासफोरस 16 किलो(सिंगल सुपर फासफेट 100 किलो) और पोटाश 16 किलो(मिउरेट ऑफ़ पोटाश 30 किलो) प्रति एकड़ डालें फासफोरस और पोटाश की पूरी मात्रा और नाइट्रोजन की आधी मात्रा रोपण के समय डालें बाकी बची नाइट्रोजन को दो भागों में बांटकर रोपाई के बाद टॉप ड्रेसिंग के तौर पर 30वें और 45वें दिन डालें मिट्टी की किसम और जलवायु के आधार पर सिंचाई की मात्रा और आवर्ती का फैसला करें आमतौर पर, इसे 5-8 सिंचाइयों की आवश्यकता होती है पहली सिंचाई बिजाई के तुरंत बाद करें और दूसरी सिंचाई रोपाई के तीन दिन बाद करें बाकी की सिंचाई आवश्यकता और मिट्टी में नमी के आधार पर 7-10 दिनों के अंतराल पर करें पुटाई के 10-15 दिन पहले सिंचाई बंद कर दें अत्याधिक सिंचाई ना करें शुरुआत में नए पौधे धीरे-धीरे बढ़ते है इसलिए नुकसान से बचाव के लिए गोड़ाई की जगह रासायनिक नदीन-नाशक का प्रयोग करें रोकथाम के लिए बिजाई से 72 घंटे में पेंडीमैथालीन(स्टंप) 1 लीटर को 200 लीटर पानी में मिलाकर प्रति एकड़ में स्प्रे करें नदीनों के अंकुरण उपरांत बिजाई से 7 दिन बाद आक्सीफ्लोरफैन 425 मि.ली. को 200 लीटर पानी में मिलाकर प्रति एकड़ में स्प्रे करें नदीनों की रोकथाम के लिए 2-3 गोड़ाईयों की सिफारिश की जाती है पहली गोड़ाई बिजाई से एक महीने बाद और दूसरी गोड़ाई, पहली से एक महीने बाद करें सही समय पर पुटाई करना बहुत जरूरी है पुटाई का समय किस्म,ऋतु,मंडी रेट आदि पर निर्भर करता है 50% पौधे की पत्तियां नीचे की तरफ गिरना दर्शाता है कि फसल पुटाई के लिए तैयार है फसल की पुटाई हाथों से प्याज़ को उखाड़ कर की जाती है पुटाई के बाद इनको 2-3 दिन के लिए अनावश्यक नमी निकालने के लिए खेत में छोड़ दे धन्यवाद
Posted by m javed
Uttar Pradesh
20-10-2019 12:33 PM
Punjab
10-24-2019 10:07 AM
Javed ji, aam ke podhe ko lagane ka sahi samey August se September tak ka hai yan fir ap ise February se march mein bhi lga sakte hai, iski kisme jaise k Dusheri, Langra, Chausa, Ambika, Arunika ke podha lga sakte hai, dhanywad
Posted by meghnath sahu
Chattisgarh
20-10-2019 12:30 PM
Maharashtra
10-21-2019 05:32 PM
मेघनाथ जी यह mealy bug का हमला है इसकी रोकथाम के लिए आप imidacloprid @1.5 ml को प्रति लीटर पानी के हिसाब से स्प्रे करें धन्यवाद
Posted by Davinder singh
Punjab
20-10-2019 12:30 PM
Punjab
12-03-2019 05:36 PM
Shrimaan ji, usnu pet de kiria lai piperazine liquid deo ate Cargill di Calf grower feed deo ate cafplan powder 50-50gm rojana deo..
Posted by mahendra
Uttar Pradesh
20-10-2019 12:27 PM
Maharashtra
10-21-2019 05:35 PM
महेंद्र जी कृपया आप बताएं कि आपने इसमें क्या क्या खाद डाली है ताकि आपको इसके बारे में पूरी जानकारी दी जा सके धन्यवाद
Posted by sukhwinder
Punjab
20-10-2019 12:21 PM
Punjab
10-21-2019 05:40 PM
sukhwinder ji university koi vi beej nu rlaun di sifarish nahi kardi par kisan kisman da beej rla ke bijai karde han par university isdi sifarish nahi kardi.dhanwad
Posted by vakil singh
Punjab
20-10-2019 12:21 PM
Haryana
10-21-2019 05:46 PM
ਤੁਸੀ ਕਣਕ ਦੀਆਂ ਹੇਠ ਦਿਤੀਆਂ ਕਿਸਮਾਂ ਦੀ ਬਿਜਾਈ ਕਰ ਸਕਦੇ ਹੋ :-UNNAT PBW 343: ਇਹ ਕਿਸਮ ਸਿੰਚਾਈ ਵਾਲੇ ਖੇਤਰਾਂ ਵਿੱਚ ਲਗਾਉਣ ਯੋਗ ਹੈ ਪੱਕਣ ਦੇ ਲਈ ਇਹ 155 ਦਿਨਾਂ ਦਾ ਸਮਾਂ ਲੈਦੀ ਹੈ ਇਹ ਕਰਨਾਲ ਬੰਟ ਦੀ ਪ੍ਰਤਿਰੋਧੀ ਅਤੇ ਬਲਾਈਟ ਨੂੰ ਵੀ ਸਹਿਣ ਯੋਗ ਹੈ ਇਸਦੀ ਔਸਤ ਪੈਦਾਵਾਰ 23.2 ਕੁਇੰਟਲ ਪ੍ਰਤੀ ਏਕੜ ਹੈ UNNAT PBW 550: ਇਹ ਕਿਸਮ ਪੰਜਾਬ ਦੇ ਸਾਰਿਆਂ ਇਲਾਕਿਆਂ ਵਿੱਚ ਉਗਾਈ ਜਾਂਦੀ ਹੈ ਇਹ ਕਿਸਮ 145 ਦਿਨਾਂ ਵ.... (Read More)
ਤੁਸੀ ਕਣਕ ਦੀਆਂ ਹੇਠ ਦਿਤੀਆਂ ਕਿਸਮਾਂ ਦੀ ਬਿਜਾਈ ਕਰ ਸਕਦੇ ਹੋ :-UNNAT PBW 343: ਇਹ ਕਿਸਮ ਸਿੰਚਾਈ ਵਾਲੇ ਖੇਤਰਾਂ ਵਿੱਚ ਲਗਾਉਣ ਯੋਗ ਹੈ ਪੱਕਣ ਦੇ ਲਈ ਇਹ 155 ਦਿਨਾਂ ਦਾ ਸਮਾਂ ਲੈਦੀ ਹੈ ਇਹ ਕਰਨਾਲ ਬੰਟ ਦੀ ਪ੍ਰਤਿਰੋਧੀ ਅਤੇ ਬਲਾਈਟ ਨੂੰ ਵੀ ਸਹਿਣ ਯੋਗ ਹੈ ਇਸਦੀ ਔਸਤ ਪੈਦਾਵਾਰ 23.2 ਕੁਇੰਟਲ ਪ੍ਰਤੀ ਏਕੜ ਹੈ UNNAT PBW 550: ਇਹ ਕਿਸਮ ਪੰਜਾਬ ਦੇ ਸਾਰਿਆਂ ਇਲਾਕਿਆਂ ਵਿੱਚ ਉਗਾਈ ਜਾਂਦੀ ਹੈ ਇਹ ਕਿਸਮ 145 ਦਿਨਾਂ ਵਿੱਚ ਪੱਕ ਕੇ ਤਿਆਰ ਹੋ ਜਾਂਦੀ ਹੈ ਇਹ ਪੀਲੀ ਅਤੇ ਭੂਰੀ ਕੁੰਗੀ ਦੀ ਰੋਧਕ ਕਿਸਮ ਹੈ ਇਸਦਾ ਔਸਤਨ ਕੱਦ 86 ਸੈ.ਮੀ. ਹੁੰਦਾ ਹੈ ਇਸ ਦਾ ਔਸਤਨ ਝਾੜ 23 ਕੁਇੰਟਲ ਪ੍ਰਤੀ ਏਕੜ ਹੁੰਦਾ ਹੈ PBW 1 Zn: ਇਸ ਕਿਸਮ ਦੇ ਪੌਦੇ ਦਾ ਔਸਤਨ ਕੱਦ 103 ਸੈ.ਮੀ. ਹੁੰਦਾ ਹੈ ਇਹ ਕਿਸਮ 151 ਦਿਨਾਂ ਵਿੱਚ ਕਟਾਈ ਲਈ ਤਿਆਰ ਹੋ ਜਾਂਦੀ ਹੈ ਇਸ ਦਾ ਔਸਤਨ ਝਾੜ 22.5 ਕੁਇੰਟਲ ਪ੍ਰਤੀ ਏਕੜ ਹੁੰਦਾ ਹੈ PBW 725: ਇਹ ਕਿਸਮ ਪੀ ਏ ਯੂ, ਐਗਰੀਕਲਚਰ ਯੂਨੀਵਰਸਿਟੀ ਦੁਆਰਾ ਸਿਫਾਰਿਸ਼ ਕੀਤੀ ਗਈ ਹੈ ਇਹ ਇੱਕ ਮੱਧਰੀ ਕਿਸਮ ਹੈ ਅਤੇ ਇਹ ਸਿੰਚਾਈ ਵਾਲੇ ਖੇਤਰਾਂ ਵਿੱਚ ਲਗਾਈ ਜਾਂਦੀ ਹੈ ਇਹ ਪੀਲੇ ਅਤੇ ਭੂਰੇ ਜੰਗ ਦੀ ਪ੍ਰਤਿਰੋਧੀ ਕਿਸਮ ਹੈ ਇਸਦੇ ਦਾਣੇ ਮੋਟੇ , ਅਤੇ ਗਹਿਰੇ ਰੰਗ ਦੇ ਹੁੰਦੇ ਹਨ ਇਹ 155 ਦਿਨਾਂ ਵਿੱਚ ਪੱਕ ਕੇ ਤਿਆਰ ਹੋ ਜਾਂਦੀ ਹੈ ਇਸਦੀ ਸਲਾਨਾ ਔਸਤ ਝਾੜ 23 ਕੁਇੰਟਲ ਪ੍ਰਤੀ ਏਕੜ ਹੈ PBW 677: ਇਹ ਕਿਸਮ 160 ਦਿਨਾਂ ਵਿੱਚ ਕਟਾਈ ਲਈ ਤਿਆਰ ਹੋ ਜਾਂਦੀ ਹੈ ਇਸਦਾ ਔਸਤ ਝਾੜ 22.4 ਕੁਇੰਟਲ ਪ੍ਰਤੀ ਏਕੜ ਹੈ HD 3086 (PusaGautam) : ਇਸ ਦਾ ਔਸਤਨ ਝਾੜ 23 ਕੁਇੰਟਲ ਪ੍ਰਤੀ ਏਕੜ ਹੁੰਦਾ ਹੈ ਇਹ ਪੱਤਿਆਂ ਦੇ ਪੀਲੇਪਣ ਅਤੇ ਭੂਰੇਪਣ ਦੀ ਬਿਮਾਰੀ ਤੋਂ ਰਹਿਤ ਹੁੰਦੀ ਹੈ ਵਧੀਆ ਕਿਮਸ ਦੇ ਬਰੈੱਡ ਬਣਾਉਣ ਦੇ ਸਾਰੇ ਗੁਣ/ਤੱਤ ਇਸ ਵਿਚ ਮੌਜੂਦ ਹਨ WH 1105: ਇਸ ਦੀ ਕਾਢ ਪੰਜਾਬ ਖੇਤੀਬਾੜੀ ਯੂਨੀਵਰਸਿਟੀ ਵੱਲੋਂ ਕੀਤੀ ਗਈ ਹੈ ਇਹ ਇੱਕ ਛੋਟੇ ਕੱਦ ਵਾਲੀ ਕਿਸਮ ਹੈ ਜਿਸ ਵਿਚ ਬੂਟੇ ਦਾ ਔਸਤਨ ਕੱਦ 97 ਸੈ.ਮੀ. ਤੱਕ ਹੁੰਦਾ ਹੈ ਇਸ ਦੇ ਦਾਣੇ ਸੁਨਹਿਰੇ, ਮਧਰੇ, ਸਖਤ ਅਤੇ ਚਮਕਦਾਰ ਹੁੰਦੇ ਹਨ ਇਹ ਪੱਤਿਆਂ ਦੇ ਪੀਲੇਪਣ ਅਤੇ ਭੂਰੇਪਣ ਦੀ ਬਿਮਾਰੀ ਤੋਂ ਰਹਿਤ ਹੁੰਦੀ ਹੈ ਪਰੰਤੂ ਇਹ ਦਾਣਿਆਂ ਦੇ ਖਰਾਬ ਹੋਣ ਅਤੇ ਸਿੱਟਿਆਂ ਦੇ ਭੂਰੇ ਪੈਣ ਦੀ ਬਿਮਾਰੀ ਪ੍ਰਤੀ ਸੰਵੇਦਨਸ਼ੀਲ ਹੈ ਇਹ ਲਗਭਗ 157 ਦਿਨਾਂ ਵਿੱਚ ਪੱਕ ਜਾਂਦੀ ਹੈ ਇਸ ਦੀ ਔਸਤਨ ਪੈਦਾਵਾਰ 23.1 ਕੁਇੰਟਲ ਪ੍ਰਤੀ ਏਕੜ ਹੈ HD 2967: ਇਹ ਵੱਡੇ ਕੱਦ ਦੀ ਕਿਸਮ ਹੈ ਜਿਸ ਵਿਚ ਬੂਟੇ ਦਾ ਔਸਤਨ ਕੱਦ 101 ਸੈ.ਮੀ. ਤੱਕ ਹੁੰਦਾ ਹੈ ਇਸ ਦੇ ਦਾਣੇ ਸੁਨਹਿਰੇ, ਮਧਰੇ, ਸਖਤ ਅਤੇ ਚਮਕਦਾਰ ਹੁੰਦੇ ਹਨ ਇਹ ਲਗਭਗ 157 ਦਿਨਾਂ ਵਿੱਚ ਪੱਕ ਜਾਂਦੀ ਹੈ ਇਸ ਦੀ ਔਸਤਨ ਪੈਦਾਵਾਰ 21.5 ਕੁਇੰਟਲ ਪ੍ਰਤੀ ਏਕੜ ਹੈ PBW 621: ਇਹ ਕਿਸਮ ਪੰਜਾਬ ਦੇ ਸਾਰਿਆਂ ਇਲਾਕਿਆਂ ਵਿੱਚ ਉਗਾਈ ਜਾਂਦੀ ਹੈ ਇਹ ਕਿਸਮ 158 ਦਿਨਾਂ ਵਿੱਚ ਪੱਕ ਕੇ ਤਿਆਰ ਹੋ ਜਾਂਦੀ ਹੈ ਇਹ ਪੀਲੀ ਅਤੇ ਭੂਰੀ ਕੁੰਗੀ ਦੀ ਰੋਧਕ ਕਿਸਮ ਹੈ ਇਸਦਾ ਔਸਤਨ ਕੱਦ 100 ਸੈ.ਮੀ. ਹੁੰਦਾ ਹੈI HD 3226:- jhaad 24 qtl / acre.
Posted by Bhagwan Shahay Choudhary
Rajasthan
20-10-2019 12:17 PM
Punjab
10-22-2019 01:48 PM
भगवान जी, आप कृपया अपनी खेजड़ी की फोटो भेजें ताकि आपको देख कर उसका सही समाधान दिया जा सके, धन्यवाद
Posted by Shivkumar nirgule
Maharashtra
20-10-2019 12:15 PM
Madhya Pradesh
10-21-2019 03:17 PM
किसान￰ भाइयो के लिए खुसखबरी इंटीग्रेटेड फार्मिंग से एक एकड़ में 4-5 लाख कैसे कमाए हेतु सभी कोर्स ऑनलाइन उपलब्ध साथ ही हमारे बिज़नेस पार्टनर बनकर प्रतिमाह कमाए लाखो बमोरिया फार्म एवं प्रशिक्षण केंद्र ( सूक्ष्म , लघु ,मध्यम उद्यम मंत्रालय भारत सरकार से पंजीकृत ) केंद्रीय राज्य कृषि मंत्री श्री रूपाला जी द्वार.... (Read More)
किसान￰ भाइयो के लिए खुसखबरी इंटीग्रेटेड फार्मिंग से एक एकड़ में 4-5 लाख कैसे कमाए हेतु सभी कोर्स ऑनलाइन उपलब्ध साथ ही हमारे बिज़नेस पार्टनर बनकर प्रतिमाह कमाए लाखो बमोरिया फार्म एवं प्रशिक्षण केंद्र ( सूक्ष्म , लघु ,मध्यम उद्यम मंत्रालय भारत सरकार से पंजीकृत ) केंद्रीय राज्य कृषि मंत्री श्री रूपाला जी द्वारा सम्मानित मध्य प्रदेश सरकार द्वारा holistic farmer का अवार्ड भारत के प्रमुख अखवार दैनिक भास्कर एवं पत्रिका द्वारा प्रथम पेज द्वारा सत्यापित.. प्रमुख ટીવી news चैनल सहारा समय एवं बंसल news पर सफल साक्षात्कार.. Mission के उद्देश्य किसी भी देश को विकसित देश तभी माना जाता है जब वहां की महिला और किसान वर्ग स्वस्थ और समृद्ध हो तो ,आओ मिलकर अपने भारत को समृद्ध बनाये Healthy and Prosperous Farmer and Women s # एक एकड क्षेत्र में खेती करके 4-5 लाख सालाना कैसे कमाए / हेतु प्रशिक्षण उचित मार्गदर्शन # महिलाओ को स्वस्थता ,स्वच्छता की जानकरी देकर रोजगार उपलब्ध करना # शिक्षा के क्षेत्र में ऐसे कोर्स जिनकी फीस लाखो रूपये होती है ऐसे कोर्स मुफ्त या कम कीमत में सभी बच्चो को उपलब्ध करना # इंटिग्रेड फार्मिंग या एक गाय से प्रतिमाह 40-50 हजार कैसे कमाए # निरंतर गिरते जल स्तर को बढ़ाना ..वायु प्रदुषण कम करना या जैवविविधता बनाये रखना # Business Partner for Farming Training ( प्रतिमाह 1-2 लाख की आय प्राप्त करना चाहते है तो संपर्क करे ) # Business partner with women health hygiene # Business partner with Diabetes free India 9770085381 9893232938
Posted by Ajit kumar
Uttar Pradesh
20-10-2019 12:12 PM
Maharashtra
10-21-2019 05:47 PM
ajit ji kripya aap iski photo bheje taki aapko iske bare men poori jankari di ja sake.dhanywad
Posted by Joban chhina
Punjab
20-10-2019 12:10 PM
Punjab
10-22-2019 01:30 PM
Joban ji, Onion seeds are sown on nursery beds to raise seedlings for transplanting in the field. Raised beds of size 3 x 0.6 m and 10-15 cm in height are prepared. About 70 cm distance is kept between two beds to carry out operations of watering, weeding, etc.Optimum time for raising nursery is middle of October to middle of November month. Seedlings are ready for transplantation in middle of December to Middle of January month. For transplanting, select 10-15 cm heighted healthy seedlings. Varieties like PRO 6, Punjab Naroya, Punjab White can be sown, thank you
Posted by Amarjeet Singh
Punjab
20-10-2019 12:09 PM
Punjab
10-21-2019 06:38 PM
ਛੋਟੇ ਪੱਧਰ ਤੇ ਖੇਤੀ ਕਰਨ ਲਈ ਗੇਂਦਾ ਇੱਕ ਵਧੀਆ ਫੁੱਲ ਹੈ ਜਿਸਦੀ ਮਾਰਕਿਟਿੰਗ ਹਰ ਛੋਟੇ ਵੱਡੇ ਸ਼ਹਿਰ ਵਿੱਚ ਹੋ ਜਾਂਦੀ ਹੈ ਸਬਜ਼ੀਆਂ ਅਤੇ ਗੰਨੇ ਨਾਲ ਇਟਰਕਰਾਪਿੰਗ ਵੀ ਹੋ ਸਕਦੀ ਹੈ ਹੁਣ ਜਾਫ਼ਰੀ ਦਾ ਸਮਾਂ ਚੱਲ ਰਿਹਾ ਹੈ
Posted by Dharminder Singh
Punjab
20-10-2019 12:08 PM
Punjab
10-20-2019 12:14 PM
Dharminder ji yaddi aap goat ki growth ke vare mai push rehe tan too aap unko achi khurak deni suru kren aur pett ke kirro ke liye Nilzan liquid 1ml/3kg sarir ke bhar ke hisab se den aur Groviplex liquid 10-20ml sarir ki growth ke hisab se de skte hai, isse achi growth ho jayegi.
Posted by Davinder singh
Punjab
20-10-2019 11:59 AM
Punjab
10-20-2019 12:11 PM
ਤੁਸੀ ਓਹਨਾ ਨੂੰ ਪੇਟ ਦੇ ਕੀੜਿਆਂ ਲਈ Bendikind plus ਗੋਲੀ ਦਿਓ ਅਤੇ ਓਹਨਾ ਨੂੰ ਤੁਸੀ Enerdyna liquid 100-100ml ਸਵੇਰੇ ਸ਼ਾਮ ਰੋਜ, Gouge ਪਾਊਡਰ ਦੇ 1-1 ਪਾਉਚ ਸਵੇਰੇ ਸ਼ਾਮ ਦਿਓ, ਅਤੇ Calcimust gold liquid 50ml ਰੋਜਾਨਾ ਦਿਓ ਇਸਦਾ ਵੀ ਦੁੱਧ ਵਧਾਉਣ ਵਿਚ ਵਧਿਆ ਰਿਜਲਟ ਹੈ ਬਾਕੀ ਤੁਸੀ ਖੁਰਾਕ ਦਾ ਪੂਰਾ ਧਿਆਨ ਰੱਖੋ.
Posted by pargat singh
Punjab
20-10-2019 11:47 AM
Punjab
10-23-2019 11:31 AM
Pargat ji, tuhanu kise vi expert da number nahi dita ja sakda tuhada jo vi sawal hai tuc application dawara puch sakde hai, tuhanu os sawal da jawab experts valo de dita jave ga, dhanwad
Posted by Davinder singh
Punjab
20-10-2019 11:43 AM
Punjab
10-20-2019 12:08 PM
Hanji tuci ehh goli de skde ho isda koi darr nhi hai..
Posted by Prince Pal
Punjab
20-10-2019 11:33 AM
Punjab
10-20-2019 12:09 PM
बकरी पालन बहुत ही लाभकारी काम है शुरूआत करने के लिए आप 10 बकरियों और 2 बकरे के साथ कर सकते हैं इन्हें खुराक कम चाहिए इसलिए इन्हें आसानी से पाल सकते हैं ये हर प्रकार के मौसम में पाली जा सकती हैं बकरियां 12-14 महीने में बच्चे देना शुरू कर देती है बकरी का गर्भ समय 150 दिन का होता है और साल में 1-5 बच्चे देती है साल में दो बच्.... (Read More)
बकरी पालन बहुत ही लाभकारी काम है शुरूआत करने के लिए आप 10 बकरियों और 2 बकरे के साथ कर सकते हैं इन्हें खुराक कम चाहिए इसलिए इन्हें आसानी से पाल सकते हैं ये हर प्रकार के मौसम में पाली जा सकती हैं बकरियां 12-14 महीने में बच्चे देना शुरू कर देती है बकरी का गर्भ समय 150 दिन का होता है और साल में 1-5 बच्चे देती है साल में दो बच्चे देना आम बात है बकरियां 8-10 वर्ष तक बच्चे देती हैं और अपन गिनती को तेजी से बढ़ा लेती हैं आप बारबरी, ब्लैक बंगाल, जैसी नसल पाल सकते हैं इसकी ट्रेनिेंग के लिए आप अपने कुषि विज्ञान केंद्र से संपर्क करे या फिर जो बकरी पालन का व्यवसाय कर रहा कोई किसान उसका फार्म स्वंय जाकर देखकर आयें तो और भी बा​रीकियों का पता चल जायेगा, आप ब्लैक बंगाल, बीटल, सिरोही, जमुनापरी, बरबरी नस्ल रख सकते हैं.
Posted by ਗੁਰਦੌਰ ਸਿੰਘ ਬੈਂਸ
Punjab
20-10-2019 11:25 AM
Punjab
10-21-2019 06:57 PM
ਪਹਿਲੇ ਪਾਣੀ ਚ ਵੱਟਾਂ ਦੁਆਲੇ ਕਲੋਰੋ ਪਾ ਦਿਓ ਬੀਜ ਨੂੰ ਇਕ ਘੰਟਾ ਪਾਣੀ ਚ ਭਿਉਂ ਕੇ ਛੱਟਾ ਦਿਓ
Posted by mahendra
Uttar Pradesh
20-10-2019 11:22 AM
Punjab
10-22-2019 01:05 PM
महेंद्र जी, यह अमरुद की मक्खी का हमला हुआ है, इसके लिए आप fenvalerate @ 2g प्रति लीटर पानी के हिसाब से स्प्रे करें और जो खराब ही चुके फल है उन्हें आप तोड़ कर मिटटी में दबा दें ताकि यह मक्खी फ़ैल न सके, धन्यवाद
Posted by Lovepreet singh
Punjab
20-10-2019 11:16 AM
Punjab
12-03-2019 05:41 PM
shrimaan ji, tuci tuddi di 1 pannd jo ki 1 quintal di toll ke vart skde ho, iss hisab nal tuci 1-1 quintal turri toll ke 10 quintal turri di varto kr skde ho ate uss nu mashroom lai v use kr skde ho, dhanwad
Posted by Davinder singh
Punjab
20-10-2019 11:09 AM

?

Punjab
10-20-2019 11:35 AM
Kripa krke tuci apna svaal visthar pucho taki tuhanu poori jankari diti ja ske..