Posted by baljit Singh
Punjab
22-10-2019 07:43 AM
आप अपने नज़दीकी पशुओं के स्टोर से EGG FORMULA नाम का पाउडर लाकर फीड में मिलाकर दे सकते है इसके साथ आप Ostovet कैल्शियम दें इसे 15 मि.ली. प्रति 100 मुर्गियों के हिसाब से दें

Posted by kashmir singh
Punjab
22-10-2019 07:31 AM
ਹਾਜੀ ਸਤਿ ਸ਼੍ਰੀ ਅਕਾਲ ਜੀ ਤੁਹਾਡੇ ਵੱਲੋਂ ਪੁੱਛੇ ਸਾਰੇ ਸਵਾਲਾਂ ਦਾ ਜਵਾਬ ਦਾ ਦਿੱਤਾ ਜਾ ਚੁੱਕਿਆ ਹੈ ਤੁਸੀ ਆਪਣੇ ਸਵਾਲਾਂ ਦੇ ਜਵਾਬ ਦੇਖਣ ਲਈ ਐਪ ਵਿੱਚ ਮੇਰੇ ਸਵਾਲ ਤੇ ਕਲਿੱਕ ਕਰਕੇ ਜਾਂ ਫਿਰ ਮੇਰੀ ਪ੍ਰੋਫਾਈਲ ਦੇ ਹੇਠਾ ਆਪਣੇ ਸਵਾਲ ਜਵਾਬ ਦੇਖ ਸਕਦੇ ਹੋ ਵੀ ਜੇਕਰ ਤੁਹਾਨੂੰ ਜਵਾਬ ਸਬੰਧੀ ਕਿਸੇ ਤਰਾਂ ਦੀ ਸਮੱਸਿਆ ਆ ਰਹੀ ਹੈ ਤਾਂ ਤੁਸੀ ਸਾਡੇ ਹੈਲਪਲਾਈਨ ਨੰਬਰ: 97799-77641 ਤੇ ਕਾਲ ਕਰ ਸਕਦੇ .... (Read More)
ਹਾਜੀ ਸਤਿ ਸ਼੍ਰੀ ਅਕਾਲ ਜੀ ਤੁਹਾਡੇ ਵੱਲੋਂ ਪੁੱਛੇ ਸਾਰੇ ਸਵਾਲਾਂ ਦਾ ਜਵਾਬ ਦਾ ਦਿੱਤਾ ਜਾ ਚੁੱਕਿਆ ਹੈ ਤੁਸੀ ਆਪਣੇ ਸਵਾਲਾਂ ਦੇ ਜਵਾਬ ਦੇਖਣ ਲਈ ਐਪ ਵਿੱਚ ਮੇਰੇ ਸਵਾਲ ਤੇ ਕਲਿੱਕ ਕਰਕੇ ਜਾਂ ਫਿਰ ਮੇਰੀ ਪ੍ਰੋਫਾਈਲ ਦੇ ਹੇਠਾ ਆਪਣੇ ਸਵਾਲ ਜਵਾਬ ਦੇਖ ਸਕਦੇ ਹੋ ਵੀ ਜੇਕਰ ਤੁਹਾਨੂੰ ਜਵਾਬ ਸਬੰਧੀ ਕਿਸੇ ਤਰਾਂ ਦੀ ਸਮੱਸਿਆ ਆ ਰਹੀ ਹੈ ਤਾਂ ਤੁਸੀ ਸਾਡੇ ਹੈਲਪਲਾਈਨ ਨੰਬਰ: 97799-77641 ਤੇ ਕਾਲ ਕਰ ਸਕਦੇ ਹੋਂ

Posted by jaspreet singh
Punjab
22-10-2019 07:26 AM
जस्प्रीत जी HD-3226 की उपज 57.5 क्विंटल प्रति हैक्टेयर और मध्यम ज़मीन में बोय सकते है

Posted by prabhjot singh
Punjab
22-10-2019 07:21 AM
Prabhjot singh ji is sall makki da sarkari rate 1760 hai, makki len lai tusi Jatinder Singh 8557000019 Boparai Trading Co. nal samparak kar sakde ho, Thankyou.
Posted by Mandeep Singh
Haryana
22-10-2019 07:12 AM
Mandeep Singh ji chicks lene ke liye aap Sumit Kumar 8006000291, 7906547529 (Sumit Kumar Poultry Farm) se samparak kar sakte hai, Thankyou.
Posted by Udai Pratap Singh
Uttar Pradesh
22-10-2019 07:04 AM
नाइट्रोजन 36 किलो (यूरिया 80 किलो), फासफोरस 16 किलो (एस एस पी 100 किलो), पोटाश 4 किलो (म्यूरेट ऑफ पोटाश 10 किलो) प्रति एकड़ में डालें फासफोरस और पोटाश की पूरी मात्रा और नाइट्रोजन की आधी मात्रा बिजाई के समय डालें नाइट्रोजन की बाकी बची मात्रा को दो भागों में बांटे, पहली मात्रा बिजाई के 40-50 दिन के बाद डालें और दूसरी मात्रा फूल.... (Read More)
नाइट्रोजन 36 किलो (यूरिया 80 किलो), फासफोरस 16 किलो (एस एस पी 100 किलो), पोटाश 4 किलो (म्यूरेट ऑफ पोटाश 10 किलो) प्रति एकड़ में डालें फासफोरस और पोटाश की पूरी मात्रा और नाइट्रोजन की आधी मात्रा बिजाई के समय डालें नाइट्रोजन की बाकी बची मात्रा को दो भागों में बांटे, पहली मात्रा बिजाई के 40-50 दिन के बाद डालें और दूसरी मात्रा फूल बनने से पहले डालें

Posted by maninder singh
Punjab
22-10-2019 07:01 AM
श्रीमान जी आप अपने नज़दीकी एग्रीकल्चर विभाग में ADO से पता कर सकते है

Posted by SUSHIL BERA
Rajasthan
22-10-2019 06:42 AM
sushil ji kripya aap btaye ke aapne konsi fasl ke mandi bhav ke bare men jankari leni hai taki aapko iske bare men poori jankari di ja sake.dhanywad

Posted by shubhash chhillar
Uttar Pradesh
22-10-2019 05:59 AM
श्रीमान जी गन्ने के Aretan और Agallol बीज को दवाई से बीज का उपचार कर सकते हैं

Posted by Manpreet singh
Punjab
22-10-2019 05:54 AM
ਤੁਸੀ ਉਸ ਨੂੰ ਪਹਿਲੇ ਦਿਨ Zoctum injection 2.5gm, Isoflud injection 5ml, CRB injection 20ml, Megludyne injection 20ml, V5 injection 5ml ਲਗਵਾਓ ਫਿਰ ਅਗਲੇ 2 ਦਿਨ ਤੁਸੀ Intacef Tezo injection 3375, Megludyne injection 20ml, CRB injection 20ml, ਲਗਵਾਓ, ਉਸ ਨੂੰ Isoflud 5ml ਇੰਜੇਕਸ਼ਨ ਅਤੇ V5 ਇੰਜੇਕਸ਼ਨ ਇਕ ਇਕ ਦਿਨ ਦੇ ਫਰਕ ਨਾਲ ਲਗਵਾਓ ਇਹਨਾਂ ਨਾਲ ਫਰਕ ਪੈ ਜਾਵੇਗਾ..

Posted by Manpreet singh
Punjab
22-10-2019 05:28 AM
BhaaG mastitis check karwao g 20g nimbu da sat 20din deo
Posted by रावत
Madhya Pradesh
21-10-2019 11:39 PM
गेंदा मिट्टी की व्यापक किस्मों में उगाया जा सकता है पर यह अच्छे जल निकास वाली उपजाऊ मिट्टी में उगाने पर अच्छे परिणाम देती है मिट्टी अच्छे निकास वाली होनी चाहिए क्योंकि यह फसल जल जमाव वाली मिट्टी में स्थिर नहीं रह सकती मिट्टी की pH 6.5 से 7.5 होनी चाहिए तेजाबी और खारी मिट्टी इसकी खेती के लिए अनुकूल नहीं है फ्रैंच .... (Read More)
गेंदा मिट्टी की व्यापक किस्मों में उगाया जा सकता है पर यह अच्छे जल निकास वाली उपजाऊ मिट्टी में उगाने पर अच्छे परिणाम देती है मिट्टी अच्छे निकास वाली होनी चाहिए क्योंकि यह फसल जल जमाव वाली मिट्टी में स्थिर नहीं रह सकती मिट्टी की pH 6.5 से 7.5 होनी चाहिए तेजाबी और खारी मिट्टी इसकी खेती के लिए अनुकूल नहीं है फ्रैंच गेंदे की किस्म हल्की मिट्टी में अच्छी वृद्धि करती है जबकि अफ्रीकी गेंदे की किस्म उच्च जैविक खाद वाली मिट्टी में अच्छी वृद्धि करती है प्रसिद्ध किस्में :- African Marigold: इस किस्म की फसल 90 सैं.मी. तक लम्बी होती है इसके फूल बड़े आकार के और लैमन, पीले, सुनहरे, संतरी और गहरे पीले रंग के होते हैं यह लम्बे समय की किस्म है इसकी अन्य किस्में जैसे Giant Double African Orange, Crown of Gold, Giant Double African Yellow, Chrysanthemum Charm, Golden Age, Cracker Jack आदि हैं French Marigold: यह छोटे कद की जल्दी पकने वाली किस्में हैं इसके फूल छोटे आकार के और पीले, संतरी, सुनहरे पीले, लाल जंग और महोगनी रंग के होते हैं इसकी अन्य किस्में जैसे Rusty Red, Butter Scotch, Red Borcade, Star of India, Lemon drop आदि हैं Pusa Basanti Gainda: यह लम्बे समय की किस्म है इसका पौधा 58.80 सैं.मी. लम्बा और गहरे हरे रंग के पत्ते होते हैं इसके फूल सल्फर पीले, दोहरे और कारनेशन किस्म के होते हैं Pusa Narangi Gainda: फूल निकलने के लिए 125-136 दिनों की आवश्यकता होती है इसका पौधा लम्बा और कद में 73.30 सैं.मी. का होता है और पत्ते गहरे हरे रंग के होते हैं इसके फूल संतरी रंग के और कारनेशन किस्म के होते हैं फूल घने और दोहरी परत वाले होते हैं इसके ताजे फूलों की पैदावार 140 क्विंटल प्रति एकड़ होती है मिट्टी के भुरभुरा होने तक खेत की जोताई करें मिट्टी की उपजाऊ शक्ति बढ़ाने के लिए आखिरी जोताई के समय 250 क्विंटल रूड़ी की खाद और अच्छी तरह से गला हुआ गाय का गोबर मिट्टी में मिलायें गेंदे की बिजाई एक वर्ष में कभी भी की जा सकती है बारिश के मौसम में इसकी बिजाई मध्य जून से मध्य जुलाई में करें सर्दियों में इसकी बिजाई मध्य सितंबर से मध्य अक्तूबर में पूरी कर लें नर्सरी बैड 3x1 मीटर आकार के तैयार करें गाय का गला हुआ गोबर मिलायें बैडों में नमी बनाए रखने के लिए पानी दें सूखे फूलों का चूरा करें और उनका कतार या बैड पर छिड़काव करें जब पौधों का कद 10-15 सैं.मी. हो जाये, तब वे रोपाई के लिए तैयार होते हैं फैंच किस्म को 35x35 सैं.मी. और अफ्रीकी किस्म को 45x45 सैं.मी. के फासले पर रोपाई करें नर्सरी बैड पर बीजों का छिड़काव करें बिजाई के लिए पनीरी ढंग का प्रयोग किया जाता है एक एकड़ खेत के लिए 600 से 800 ग्राम बीजों की आवश्यकता होती है जब फसल 30-45 दिन की हो जाए, तब पौधे के सिरे से उसे काट दें इससे पौधे को झाड़ीदार और घना होने में मदद मिलती है, इससे फूलों की गुणवत्ता और अच्छा आकार भी प्राप्त होता है बिजाई से पहले बीजों को एजोसपीरियम 200 ग्राम को 50 मि.ली. धान के चूरे में मिलाकर उपचार करें शुरूआती खुराक के तौर पर अच्छी वृद्धि के लिए नाइट्रोजन 32 किलो (यूरिया 70 किलो), फासफोरस 16 किलो (एस एस पी 100 किलो), पोटाश 32 किलो (म्यूरेट ऑफ पोटाश 53 किलो) प्रति एकड़ में डालें मिट्टी की किस्म के अनुसार खाद की खुराक बदल दें सही खुराक देने के लिए मिट्टी की जांच करवायें और उसके आधार पर खुराक दें नदीनों की संख्या के आधार पर गोडाई करें खेत में रोपाई के बाद तुरंत सिंचाई करें कली बनने से लेकर कटाई तक की अवस्था सिंचाई के लिए बहुत महत्तवपूर्ण होती है अप्रैल से जून के महीने में 4-5 दिनों के अंतराल पर लगातार सिंचाई करना आवश्यक होता है किस्म के आधार पर गेंदा 2 से 2.5 महीने में कटाई के लिए तैयार हो जाते हैं फ्रैंच गेंदे की किस्म 1.5 महीने में कटाई के लिए तैयार हो जाती है जबकि अफ्रीकी गेंदे की किस्म दो महीने में तैयार हो जाती है जब गेंदे का पूरा आकार विकसित हो जाये तब उसे तोड़ लें कटाई सुबह के समय और शाम के समय करें फूलों की तुड़ाई से पहले खेत को सिंचित करना चाहिए इससे फूलों की गुणवत्ता लंबे समय तक बनी रहती है धन्यवाद

Posted by naimish
Uttar Pradesh
21-10-2019 11:17 PM
तिलहनी फसलों के लिए हल्की से भारी ज़मीनें अच्छी होती हैं राया हर तरह की ज़मीन में उगाया जा सकता है पर तोरिये के लिए भारी ज़मीनें चाहिए तारामीरा के लिए आमतौर पर रेतली से मैरा रेतली ज़मीनें अच्छी होती हैं Narendra Ageti Rai 4: यह यू पी के सभी क्षेत्रों में खेती करने के लिए उपयुक्त है यह किस्म 95-100 दिनों में कटाई के लिए तैयार हो ज.... (Read More)
तिलहनी फसलों के लिए हल्की से भारी ज़मीनें अच्छी होती हैं राया हर तरह की ज़मीन में उगाया जा सकता है पर तोरिये के लिए भारी ज़मीनें चाहिए तारामीरा के लिए आमतौर पर रेतली से मैरा रेतली ज़मीनें अच्छी होती हैं Narendra Ageti Rai 4: यह यू पी के सभी क्षेत्रों में खेती करने के लिए उपयुक्त है यह किस्म 95-100 दिनों में कटाई के लिए तैयार हो जाती है इसकी औसतन पैदावार 6-8 क्विंटल प्रति एकड़ होती है Varuna (T 59): यह यू पी के मैदानी क्षेत्रों में खेती करने के लिए उपयुक्त है यह किस्म 125-130 दिनों में कटाई के लिए तैयार हो जाती है इसकी औसतन पैदावार 8-10 क्विंटल प्रति एकड़ होती है Vasanti: यह यू पी के मैदानी क्षेत्रों में खेती करने के लिए उपयुक्त है यह किस्म 130-135 दिनों में कटाई के लिए तैयार हो जाती है इसकी औसतन पैदावार 10-11 क्विंटल प्रति एकड़ होती है Rohini: यह यू पी के सभी क्षेत्रों में खेती करने के लिए उपयुक्त है यह किस्म 130-135 दिनों में कटाई के लिए तैयार हो जाती है इसकी औसतन पैदावार 9-11 क्विंटल प्रति एकड़ होती है Maya: यह यू पी के सभी क्षेत्रों में खेती करने के लिए उपयुक्त है यह किस्म 130-135 दिनों में कटाई के लिए तैयार हो जाती है इसकी औसतन पैदावार 10-11 क्विंटल प्रति एकड़ होती है Urvashi: यह यू पी के सभी क्षेत्रों में खेती करने के लिए उपयुक्त है यह किस्म 125-130 दिनों में कटाई के लिए तैयार हो जाती है इसकी औसतन पैदावार 8-10 क्विंटल प्रति एकड़ होती है Narendra Swarna Rai 8: यह यू पी के सभी क्षेत्रों में खेती करने के लिए उपयुक्त है यह किस्म 130-135 दिनों में कटाई के लिए तैयार हो जाती है इसकी औसतन पैदावार 8-10 क्विंटल प्रति एकड़ होती है सीड बैड पर बोयी फसल अच्छी अंकुरित होती है ज़मीन को देसी हल से दो या तीन बार जोताई करें और प्रत्येक जोताई के बाद सुहागा फेरें बीजों के एकसार अंकुरित होने के लिए बैड नर्म, गीले और समतल होने चाहिए बुंदेलखंड और आगरा क्षेत्रों के लिए, बिजाई के लिए सितंबर का आखिरी सप्ताह उचित समय होता है जबकि बाकी के क्षेत्रों के लिए 15 अक्तूबर तक बिजाई पूरी कर लें
असिंचित क्षेत्रों के लिए बिजाई का उपयुक्त समय सितंबर के दूसरे पखवाड़ा होता है

Posted by Yusuf Yusuf
Madhya Pradesh
21-10-2019 11:11 PM
Shrimaan ji, bharat mein nehron se sinchai san 1854 mein shuru ki gai thi yeh the ganga canal ke dawra ki gai thi , dhanywad

Posted by naimish
Uttar Pradesh
21-10-2019 11:10 PM
Shri maan g rainfed area mein urea 40kg per hectare and irrigated area mein urea 120 kg per hectare dall skte ho .....
Posted by VICKY BABA
Rajasthan
21-10-2019 11:06 PM
आप बीटल नस्ल की बकरियों को खरीदने के लिए खुशवंत सिंह 9783921249 Khushwant Beetal Goat farm से संपर्क कर सकते है
Posted by Navdeep Singh
Punjab
21-10-2019 10:31 PM
BhaaG 1quintal feed da formula Anaaj 40kg khal 30kg chokar or rice polish 30kg min mix 2kg namak 1kg mithha soda1kg
Posted by अजहरुद्दीन
Uttar Pradesh
21-10-2019 10:29 PM
भिंडी काफी तरह की मिट्टी में उगाई जा सकती है भिंडी की फसल के लिए उचित मिट्टी रेतली से चिकनी होती है, जिसमें जैविक तत्व भरपूर मात्रा में हों और जिसकी निकास प्रणाली भी अच्छी ढंग की हो यदि निकास अच्छे ढंग का हो तो यह भारी ज़मीनों में भी अच्छी उगती है मिट्टी का पी एच 6.0 से 6.5 होना चाहिए खारी, नमक वाली या घटिया निकास वा.... (Read More)
भिंडी काफी तरह की मिट्टी में उगाई जा सकती है भिंडी की फसल के लिए उचित मिट्टी रेतली से चिकनी होती है, जिसमें जैविक तत्व भरपूर मात्रा में हों और जिसकी निकास प्रणाली भी अच्छी ढंग की हो यदि निकास अच्छे ढंग का हो तो यह भारी ज़मीनों में भी अच्छी उगती है मिट्टी का पी एच 6.0 से 6.5 होना चाहिए खारी, नमक वाली या घटिया निकास वाली मिट्टी में इसकी खेती ना करें Pusa Mahakali: यह किस्म आई ए आर आई, नई दिल्ली द्वारा बनाई गई है इसके फल हलके हरे रंग के होते हैं Parbhani Kranti: इसके फल आकार में दरमियाने लंबे होते हैं और अच्छी क्वालिटी के कारण ज्यादा देर तक स्टोर किए जा सकते हैं यह चितकबरा रोग को सहनेयोग्य किस्म है यह 120 दिनों में पककर तैयार हो जाती है इसकी औसतन पैदावार 40-48 क्विंटल प्रति एकड़ होती है Pusa Sawani: यह किस्म आई ए आर आई, नई दिल्ली द्वारा बनाई गई है यह किस्म गर्मी और बरसात के मौसम में उगानेयोग्य किस्म है यह 50 दिनों में पककर तैयार हो जाती है इसके फल गहरे हरे रंग के और कटाई के समय 10-12 सैं.मी. लंबे होते हैं यह चितकबरा रोग को सहनेयोग्य किस्म है इसकी औसतन पैदावार 48-60 क्विंटल होता है Arka Anamika: यह किस्म आई आई एच आर बैंगलोर द्वारा तैयार की गई है यह चितकबरा रोग की रोधक किस्म है खेत की तैयारी करने के लिए ज़मीन की 5-6 बार गहरी जोताई करें फिर दो-तीन बार सुहागा मार कर ज़मीन को समतल करें आखिरी बार जोताई करते समय 100 क्विंटल प्रति एकड़ अच्छी रूड़ी की खाद मिट्टी में डालें खालियां और मेंड़ वाला ढंग बनाएं कईं बार भिंडियों को खेत में लगाई हुई मुख्य फसल के आस-पास भी लगा दिया जाता है और इसके लिए बिजाई का ढंग भी मुख्य फसल के साथ का ही प्रयोग किया जाता है इसे बिजाई वाली मशीन से, हाथों से गड्ढा खोदकर या हलों के पीछे बीज डालकर भी बोया जा सकता है उत्तर में यह वर्षा और बसंत के मौसम में उगाई जाती है वर्षा वाले मौसम में, इसकी बिजाई जून-जुलाई के महीने और बसंत ऋतु में फरवरी-मार्च के महीने में की जाती है पंक्तियों में फासला 45 सैं.मी. और पौधों में फासला 15-20 सैं.मी. रखना चाहिए बीज की गहराई बीज 1-2 सैं.मी. गहराई में बोयें बिजाई का ढंग:- इसकी बिजाई गड्ढा खोदकर की जाती है वर्षा ऋतु (जून-जुलाई) में टहनियों वाली किस्मों के लिए 4-6 किलो बीज प्रति एकड़, 60x30 सैं.मी. फासले पर बोयें बिना टहनियों वाली किस्मों के लिए 45x30 सैं.मी. का फासला रखें मध्य फरवरी तक 15-18 किलो बीज प्रति एकड़ डालें और मार्च में बिजाई के लिए 4-6 किलो बीज प्रति एकड़ बोयें शुरूआती खाद के तौर पर 120-150 कि्ंवटल अच्छी रूड़ी की खाद डालें भिंडी की फसल के लिए नाइट्रोजन 36 किलो (80 किलो यूरिया) प्रति एकड़ में प्रयोग करें नाइट्रोजन की आधी मात्रा बिजाई के समय और बाकी बची मात्रा पहली तुड़ाई के बाद डालें अच्छी पैदावार की प्राप्ती के लिए बिजाई से 10-15 दिनों के बाद 19:19:19 की 4-5 ग्राम प्रति लीटर पानी की स्प्रे करें अच्छे फूलों और फलों की प्राप्ती के लिए 00:52:34 की 50 ग्राम प्रति 10 लीटर पानी की स्प्रे फूल निकलने से पहले और फिर फल बनने के समय दोबारा करें अच्छी पैदावार और अच्छी क्वालिटी के फलों के लिए , फूल बनने के समय 13:00:45 (पोटाश्यिम नाइट्रेट) की 100 ग्राम प्रति 10 लीटर पानी की स्प्रे करें

Posted by Ajaib sandha
Punjab
21-10-2019 10:18 PM
ਉਸ ਨੂੰ ਤੁਸੀ Mifex 450ml ਬੋਤਲ ਲਗਵਾਓ, ਬੋਤਲ ਵਿਚ Injection Tonophos 20ml ਪਾਓ ਅਤੇ ਇਸ ਨੂੰ IV(slow) ਲਗਵਾਓ, ਬਾਕੀ ਉਸ ਨੂੰ Injection X-nil 1gm, Injection Megludyne 20ml, Tincal injection 20ml (IM) ਲਗਵਾਓ ਅਤੇ 3 ਦਿਨ ਲਗਾਓ ਬਾਕੀ ਨੂੰ Isoflud injection 5ml ਇਕ ਇਕ ਦਿਨ ਦੇ ਫਰਕ ਨਾਲ ਲਗਵਾਓ ਇਸ ਨਾਲ ਫਰਕ ਪੈ ਜਾਵੇਗਾ..

Posted by nitish
Chattisgarh
21-10-2019 10:16 PM
श्रीमान जी धान के नीचे से सूख जाने को शीथ ब्लाइट रोग कहते है इसकी रोकथाम के लिए Amistar top,Custodia,folicur,Nativoor Adexar का प्रयोग कर सकते है
Posted by m javed
Uttar Pradesh
21-10-2019 10:14 PM
M javed ji achhi kisam ke fruit plant lene ke liye aap Sulender 8736801125 Jai Shree Bag & Nursery se samparak kar sakte hai, Thankyou.
Posted by m javed
Uttar Pradesh
21-10-2019 10:12 PM
M javed ji achhi kisam ke fruit plant lene ke liye aap Sulender 8736801125 Jai Shree Bag & Nursery se samparak kar sakte hai, Thankyou.
Posted by Karnaday Mahato
Jharkhand
21-10-2019 10:10 PM
Karnaday Mahato ji duck ke chicks lene ke lia aap Malay Kumar Paul 9570159169 se samparak kar sakte hai, Thankyou.
Posted by mukesh singh
Uttar Pradesh
21-10-2019 09:58 PM
सबसे पहले आपके लिए यह जानना जरूरी है कि मुर्गी पालन दो तरह का होता है कि आप अंडों का व्यवसाय करना चाहते हैं या मीट का यदि आप अंडों का धंधा करना चाहते हैं तो आपको लेयर मुर्गियां पालनी पड़ेंगी और यदि आप मीट का धंधा करना चाहते हैं तो आपको ब्रॉयलर मुर्गियां पालनी पड़ेंगी यदि आप ब्रायलर मुर्गी पालन करना चाहते हैं त.... (Read More)
सबसे पहले आपके लिए यह जानना जरूरी है कि मुर्गी पालन दो तरह का होता है कि आप अंडों का व्यवसाय करना चाहते हैं या मीट का यदि आप अंडों का धंधा करना चाहते हैं तो आपको लेयर मुर्गियां पालनी पड़ेंगी और यदि आप मीट का धंधा करना चाहते हैं तो आपको ब्रॉयलर मुर्गियां पालनी पड़ेंगी यदि आप ब्रायलर मुर्गी पालन करना चाहते हैं तो कम से कम 10 हजार मुर्गियों का धंधा शुरू करना चाहते हैं तो आपको 4 से 5 लाख का इतज़ाम करना पड़ेगा, ये आप अपने बजट के हिसाब से कम पंक्षियों से भी शुरू कर सकते हैं बाकि आप इस काम को ट्रेनिंग लेकर शुरू करें जिसमें आपको इस काम के बारे में पूरी जानकारी दी जाएगी ट्रेनिंग लेने के लिए आप अपने नज़दीकी कृषि विज्ञान केंद्र से संपर्क करें आप वहां जाकर अपना ट्रेनिंग का फार्म भर आएं जब भी ट्रेनिंग होगी तो वो आपको फोन करके उसके बारे में बता देंगे..
Posted by anur kumar
Uttar Pradesh
21-10-2019 09:56 PM
WH 896: इस किस्म की सिंचित क्षेत्रों में समय पर बोने के लिए सिफारिश की गई है
PBW 373: यह अधिक उपज वाली किस्म है इसकी सिंचित क्षेत्रों में पिछेती बिजाई के लिए सिफारिश की गई है यह किस्म विभिन्न बीमारियों के प्रतिरोधक है
PBW 343: यह किस्म सिंचित और पिछेती बिजाई के क्षेत्रों के लिए उपयुक्त है यह किस्म 130-135 दिनों में कटाई क.... (Read More)
WH 896: इस किस्म की सिंचित क्षेत्रों में समय पर बोने के लिए सिफारिश की गई है
PBW 373: यह अधिक उपज वाली किस्म है इसकी सिंचित क्षेत्रों में पिछेती बिजाई के लिए सिफारिश की गई है यह किस्म विभिन्न बीमारियों के प्रतिरोधक है
PBW 343: यह किस्म सिंचित और पिछेती बिजाई के क्षेत्रों के लिए उपयुक्त है यह किस्म 130-135 दिनों में कटाई के लिए तैयार हो जाती है यह गर्दन तोड़, जल जमाव की स्थितियों के प्रतिरोधक किस्म है यह करनाल बंट के भी प्रतिरोधक और झुलस रोग को सहनेयोग्य किस्म है इसकी औसतन पैदावार 19 क्विंटल प्रति एकड़ होती है
HD 2643: यह किस्म सिंचित और पिछेती बिजाई के क्षेत्रों के लिए उपयुक्त है इस किस्म से अच्छी गुणवत्ता वाली रोटी बनती है यह पत्ता और धारीदार कुंगी के प्रतिरोधक और करनाल बंट को सहनेयोग्य किस्म है
UP 2425: यह सिंचित स्थितियों में पिछेती बिजाई के लिए उपयुक्त किस्म है
PBW-443: यह किस्म सिंचित हालातों में समय पर बोने के लिए उपयुक्त किस्म है
DBW-14: यह किस्म सिंचित हालातों में पिछेती बिजाई के लिए उपयुक्त है यह जल्दी पकने वाली किस्म है इसके दाने सख्त होते हैं
NW-2036: यह सिंचित हालातों में पिछेती बिजाई के लिए उपयुक्त किस्म है यह जल्दी पकने वाली किस्म है दूसरे शब्दों में, यह किस्म 108 दिनों में कटाई के लिए तैयार हो जाती है इसके दाने छोटे, सुनहरी और अर्द्ध सख्त होते हैं
MACS-6145: यह किस्म बारानी क्षेत्रों में समय पर बोने के लिए उपयुक्त है
HD-2824: यह किस्म सिंचित क्षेत्रों में समय पर बिजाई के लिए उपयुक्त है
PBW-502: यह किस्म पंजाब एग्रीकल्चर युनिवर्सिटी द्वारा विकसित की गई है यह किस्म सिंचित हालातों में समय पर बिजाई के लिए उपयुक्त है यह किस्म पत्ते और धारीदार कुंगी के प्रतिरोधक किस्म है
PDW-291: यह किस्म सिंचित हालातों में पिछेती बिजाई के लिए उपयुक्त किस्म है यह किस्म कुंगी, करनाल बंट और कांगियारी के प्रतिरोधक किस्म है
Posted by mukesh singh
Uttar Pradesh
21-10-2019 09:47 PM
यदि आप खुद मंडी में बेचते हैं तो आपको अंदाजन 5 से 10 रूपये प्रति किलो तक मुल्य मिल सकता है पर यदि आप किसी कंपनी से कॉन्ट्रैक्ट करते हो तो इसका रेट उस कंपनी की जरूरत और शर्तों के मुताबिक उस कंपनी के द्वारा तय होता है यह मुल्य आपकी उनके साथ डीलिंग पर निर्भर करता है

Posted by Jagar Singh
Punjab
21-10-2019 09:47 PM
ਇਸ ਤਰਾਂ ਦੱਸਣਾ ਮੁਸ਼ਕਿਲ ਹੈ ਕਿੳੇੁਕੀ ਸਾਨੂੰ ਇਹ ਨਹੀ ਪਤਾ ਕਿ ਤੁਹਾਡੇ ਕੋਲ ਜਮੀਂਨ ਕਿੰਨੀ ਹੈ, ਤੁਸੀ ਕਿਸ ਕੰਮ ਦਾ ਤਜ਼ਰਬਾ ਰੱਖਦੇ ਹੋ, ਤੁਹਾਡਾ ਕੀ ਕਰਨ ਦਾ ਕੰਮ ਹੈ ,ਕਿੳੇਕੀ ਜੇਕਰ ਕੋਈ ਖੇਤੀ ਨਾਲ ਜੁੜਿਆ ਕੰਮ ਕਰਨਾ ਹੈ ਤਾਂ ਵੀ ਦੱਸੋ , ਸਹਾਇੱਕ ਕਿੱਤੇ ਤਾਂ ਬਹੁਤ ਸਾਰੇ ਹਨ ਪਰ ਸਹੀ ਟ੍ਰੇਨਿੰਗ ਲੈ ਕੇ ਕੰਮ ਸ਼ੁਰੂ ਕਰਨਾ ਪਵੇਗਾ ਤੇ ਹੋਲੀ ਹੋਲੀ ਖੁਦ ਮੰਡੀਕਰਨ ਵੀ ਸਿੱਖਣਾ ਪਵੇਗਾ ਜੀ

Posted by vijay
Uttar Pradesh
21-10-2019 09:39 PM
Shri maan g kandua rog ki roktham k liye koside@500 gm per acre 120ltr pani mein spray kr skte ho...

Posted by balmukund
Chattisgarh
21-10-2019 09:37 PM
श्रीमान जी Buprofezin 300ml प्रति एकड़ की स्प्रे कर सकते हैं
Posted by Manmohan singh.
Punjab
21-10-2019 09:36 PM
manmohan ji kirpa karke daso ke tuc gobhi di kehdi bimari de bare jankari laina chahunde ho ta jo tuhanu is bare poori jankari diti ja sake.dhanwad
Posted by Pawan Deep Singh Randhawa
Punjab
21-10-2019 09:36 PM
pawan ji makhan ghah da beej lain layi tuc R K Singh 9888413150 nal sampark kar sakde ho.dhanwad
Posted by Ravi Kumar
Punjab
21-10-2019 09:31 PM
Ravi ji Tuhade walo bheji gyi audio upload nhi hoi hai kirpa krke dubara audio upload kro tan jo tuhanu sahi jankari diti ja ske.

Posted by Jagar Singh
Punjab
21-10-2019 09:31 PM
ਜਾਗਰ ਜੀ ਜੇਕਰ ਮੱਝ ਤਾਰਾ ਬਿਲਕੁਲ ਸਾਫ ਦੇ ਰਹੀ ਹੈ ਅਤੇ ਹੀਟ ਦੇ ਲੱਛਣ ਦਿਖਾ ਰਹੀ ਹੈ ਤਾਂ ਤੁਸੀ ਉਸ ਨੂੰ ਟੀਕਾ ਭਰਵਾਂ ਸਕਦੇ ਹੋ ਅਤੇ ਟੀਕਾ ਭਰਵਾਂ ਕੇ ਉਸ ਨੂੰ Pregstay gold ਪਾਊਡਰ 30 ਗ੍ਰਾਮ ਰੋਜਾਨਾ 20 ਦਿਨਾਂ ਤਕ ਦਿੰਦੇ ਰਹੋ

Posted by Sanket Pawar
Maharashtra
21-10-2019 09:28 PM
कृप्या आप अपना सवाल विस्तार से पूछें कि आप क्या जानकारी लेना चाहते है ताकि आपको सही जानकारी दी जा सके

Posted by Rahul rawat
Uttar Pradesh
21-10-2019 09:28 PM
यह फसल बहुत तरह की मिट्टी जैसे कि रेतली, नमक वाली, दोमट और चिकनी मिट्टी में उगाई जा सकती है अच्छे जल निकास वाली, जैविक तत्व भरपूर, रेतली से दरमियानी ज़मीन में फसल अच्छी पैदावार देती है यह फसल नमक वाली तेजाबी ज़मीनों में भी उगाई जा सकती है पर बहुत ज्यादा जल जमाव और खारी या नमक वाली ज़मीन इस फसल की खेती के लिए उचित नह.... (Read More)
यह फसल बहुत तरह की मिट्टी जैसे कि रेतली, नमक वाली, दोमट और चिकनी मिट्टी में उगाई जा सकती है अच्छे जल निकास वाली, जैविक तत्व भरपूर, रेतली से दरमियानी ज़मीन में फसल अच्छी पैदावार देती है यह फसल नमक वाली तेजाबी ज़मीनों में भी उगाई जा सकती है पर बहुत ज्यादा जल जमाव और खारी या नमक वाली ज़मीन इस फसल की खेती के लिए उचित नहीं होती Kufri Bahar: इस किस्म के पौधे लंबे और तने मोटे होते हैं तनों की संख्या 4-5 प्रति पौधा होती है इसके आलू बड़े, सफेद रंग के, गोलाकार से अंडाकार होते हैं और इसका गुद्दा सफेद रंग का होता है यह किस्म 100-110 दिनों में पक जाती है और इसकी औसतन पैदावार 125 क्विंटल प्रति एकड़ होती है इसे ज्यादा देर तक स्टोर करके रखा जा सकता है यह पिछेती और अगेती झुलस रोग और पत्ता मरोड़ रोग की रोधक है Kufri Badshah: इसके पौधे लंबे और 4-5 तने प्रति पौधा होते हैं इसके आलू बड़े से दरमियाने, गोलाकार और हल्के सफेद रंग के होते हैं इसके आलू स्वाद होते हैं यह किस्म 100-110 दिनों में पक जाती है यह किस्म कोहरे को सहनेयोग्य है और पिछेती, अगेती झुलस रोग की प्रतिरोधक है Kufri Sutlaj: इस किस्म के पौधे घने और मोटे तने वाले होते हैं पत्ते हल्के हरे रंग के होते हैं आलू बड़े आकार के, गोलाकार और नर्म छिल्के वाले होते हैं यह किस्म 90-100 दिनों में पकती है इसकी औसतन पैदावार 160 क्विंटल प्रति एकड़ होती है यह किस्म खाने के लिए अच्छी और स्वादिष्ट होती है इन आलुओं को पकाना आसान होता है यह नए उत्पाद बनाने के लिए उचित किस्म नहीं है Kufri Anand: यह मध्यम समय की किस्म है, जो कि पिछेते झुलस रोग और कोहरे के प्रतिरोधक है इसकी औसतन पैदावार 140-160 क्विंटल प्रति एकड़ होती है Kufri Pukhraj: इसके पौधे लंबे और तने संख्या में कम और दरमियाने मोटे होते हैं आलू सफेद, बड़े, गोलाकार और नर्म छिल्के वाले होते हैं यह किस्म 70-90 दिनों में पकती है इसकी औसतन पैदावार 130 क्विंटल प्रति एकड़ है यह अगेती झुलस रोग की रोधक किस्म है और नए उत्पाद बनाने के लिए उचित नहीं है Kufri Chipsona 2: इस किस्म के पौधे दरमियाने कद के और कम तनों वाले होते हैं इसके पत्ते गहरे हरे और फूल सफेद रंग के होते हैं आलू सफेद, दरमियाने आकार के, गोलाकार, अंडाकार और नर्म होते हैं इसकी औसतन पैदावार 140 क्विंटल प्रति एकड़ होती है यह पिछेती झुलस रोग की रोधक किस्म है यह किस्म चिपस और फरैंच फ्राइज़ बनाने के लिए उचित है Kufri Chipsona 1: यह किस्म 90-100 दिनों में पुटाई के लिए तैयार हो जाती है Kufri Chandramukhi: इस किस्म के आलू बड़े अंडाकार आकार के होते हैं इसकी औसतन पैदावार 10 टन प्रति एकड़ होती है यह किस्म 80-90 दिनों में पुटाई के लिए तैयार हो जाती है Kufri Jyoti: यह प्रोसेसिंग के लिए उपयुक्त किस्म है इसकी औसतन पैदावार 80-120 क्विंटल प्रति एकड़ होती है Kufri Ashoka: यह किस्म CPIU, शिमला द्वारा विकसित की गई है और बिहार, हरियाणा, उत्तर प्रदेश और पश्चिमी बंगाल में खेती के लिए उपयुक्त किस्म है यह लंबे कद की और मोटे तने वाली किस्म है यह किस्म 70-80 दिनों में पककर तैयार हो जाती है इसके आलू बड़े, गोलाकार, सफेद और नर्म छिल्के वाले होते हैं यह पिछेती झुलस रोग को सहने योग्य किस्म है Kufri Lalima: इस किस्म के आलू गोल, लाल और सफेद गुद्दे वाले होते हैं आलू बड़े से मध्यम आकार के होते हैं यह किस्म 100-110 दिनों में पुटाई के लिए तैयार हो जाती है इसकी औसतन पैदावार 16 टन प्रति एकड़ होती है खेत को एक बार 30 सैं.मी. गहरा जोतकर अच्छे ढंग से बैड बनाएं जोताई के बाद 2-3 बार तवियां फेरें और फिर 2-3 बार सुहागा फेरें बिजाई से पहले खेत में नमी की मात्रा बनाकर रखें बिजाई के लिए दो ढंग मुख्य तौर पर प्रयोग किए जाते हैं 1. मेंड़ और खालियों वाला ढंग 2. समतल बैडों वाला ढंग अगेती बिजाई के लिए, सितंबर के आखिरी सप्ताह से अक्तूबर का पहला सप्ताह खेती के लिए उपयुक्त होता है मुख्य फसल के लिए अक्तूबर का दूसरे से चौथा सप्ताह बिजाई के लिए उपयुक्त समय होता है गांठों के आकार के अनुसार रोपाई का फासला विभिन्न होता है बिजाई के लिए कतार से कतार में 60 सैं.मी. और पौधे से पौधे में 20 सैं.मी. फासले का प्रयोग करें बीज बोने के बाद बीजों को 8-10 सैं.मी. तक मिट्टी की परत से ढक दें रोपाई के लिए बड़ी आकार की गांठों का प्रयोग किया जाता है बिजाई के लिए 13-15 क्विंटल बीज प्रयोग किए जाते हैं यदि संभव हो, तो आलू की रोपाई से पहले, हरी खाद वाली फसलें जैसे सनई, जंतर आदि फसलें उगायें और उन्हें मिट्टी में अच्छी तरह दबायें यदि हरी खाद उपलब्ध ना हो तो गली सड़ी रूड़ी की खाद या गाय का गला हुआ गोबर 60-80 क्विंटल प्रति एकड़ में खेत की तैयारी के समय रोपाई से दो सप्ताह पहले डालें फसल की उचित वृद्धि के लिए नाइट्रोजन 40-50 किलो (90-110 किलो यूरिया), फासफोरस 24-32 किलो (150-200 किलो सिंगल सुपर फासफेट) और पोटाश 40-50 किलो (66-85 किलो म्यूरेट ऑफ पोटाश) की मात्रा प्रति एकड़ में डालें बिजाई के समय नाइट्रोजन का 3/4 हिस्सा और फासफोरस और पोटाश की पूरी मात्रा डालें बाकी बचा हुआ नाइट्रोजन का 1/4 हिस्सा बिजाई से 35-40 दिन बाद जड़ों में मिट्टी लगाने के समय डालें बिजाई से पहले सिंचाई करें बिजाई के बाद 10-12 दिनों के अंदर अंदर पहली सिंचाई करें दूसरी सिंचाई पहली सिंचाई के 7 दिनों के बाद करें बाकी की सिंचाइयां जलवायु की परिस्थितियों और जरूरत के अनुसार करें गांठे बनने की अवस्था सिंचाई के लिए बहुत महत्तवपूर्ण होती है इस अवस्था में पानी की कमी ना होने दें ज्यादा सिंचाई ना करें इससे गलने की बीमारी का खतरा बढ़ता है पुटाई से 10-12 दिन पहले सिंचाई बंद कर दें डंठलों की कटाई : आलुओं को विषाणु से बचाने के लिए यह क्रिया बहुत जरूरी है और इससे आलुओं का आकार और गिणती भी बढ़ जाती है इस क्रिया में सही समय पर पौधे को ज़मीन के नज़दीक से काट दिया जाता है इसका समय अलग अलग स्थानों पर अलग है और चेपे की जनसंख्या पर निर्भर करता है उत्तरी भारत में यह क्रिया दिसंबर महीने में की जाती है

Posted by Sanket Pawar
Maharashtra
21-10-2019 09:27 PM
shrimaan ji, kripya aap apna sawal visthar se puchein tajo apko iski puri jankari di ja sake, dhanywad

Posted by Sachin Kumar
Uttar Pradesh
21-10-2019 09:25 PM
खुम्ब की किस्में कई प्रकार की होती है जैसे कि बटन खुम्ब, डीगरी, शटाकी खुम्ब, पराली खुम्ब, और मिलकी खुम्ब इनमे से कुइ खुम्ब सर्दियो के मौसम में और कुछ गर्मीयों के मौसम में लगाये जाते है और हर खुम्ब को लगाने का समय अलग अलग है जैसे बटन खुम्ब का समय सितंबर से मार्च तक होता है इस समय में हम तीन फसले ले सकते है शटाकी ख.... (Read More)
खुम्ब की किस्में कई प्रकार की होती है जैसे कि बटन खुम्ब, डीगरी, शटाकी खुम्ब, पराली खुम्ब, और मिलकी खुम्ब इनमे से कुइ खुम्ब सर्दियो के मौसम में और कुछ गर्मीयों के मौसम में लगाये जाते है और हर खुम्ब को लगाने का समय अलग अलग है जैसे बटन खुम्ब का समय सितंबर से मार्च तक होता है इस समय में हम तीन फसले ले सकते है शटाकी खुम्ब का समय अक्तूबर से मध्य फरवरी तक हैं इस समय हम एक फसल ही ले सकते है पराली खुम्ब का समय अप्रैल से अगस्त तक है इस समय हम चार फसले ले सकते है मिलकी खुम्ब का समय अप्रैल से सितंबर तक है आप अब अप्रैल में मिलकी या पराली खुम्ब लगा सकते है पराली खुमब के लिए आपको पराली, बीज, बांस, सेबा, आदि की जरूरत है पराली के पूले, धानो की पराली 1-1 किलो के पूले दोनो सिरो से सेबे से बांध कर तैयार किये जाते है पूले के सिरे कांट कर एक सार कर लिए जाते है पूलो की क्यिारी लगाना पराली के पूलो को साफ पानी में 16-20 घंटो के लिए डूबो दे गिले पूलो को ढलान पर रख कर फालतू पानी को निकलने दे कमरे ईटो और बांस से एक पलेटफार्म बनाये इस पलेटफार्म पर 5 पूलो की एक तहय लगाये जिसके ऊपर 75 ग्राम बीज डाले इसके ऊपर की तहय उलट होती है इस प्रकार 5-5 पूलो की तहय में 300 ग्राम बीज डाल कर कियारी तैयार करे सबसे ऊपर दो पूलो को खोलकर रख दे खुम्बो का फूटना बिजाई से 7-9 दिनो के बाद खुम्ब फूटने लगती है पानी और हवा का संचार बिजाई के दो दिन के बाद हर रोज पानी का छिडका करे खुम्बो के फूटने के बाद हवा का संचार 6-8 घंटे प्रति दिन किया जाता है खुम्बो की तूडाई खुम्बो के फूटने के बाद 1-2 दिनो के बाद तोडाई के योग्य हो जाती है मिलकी खुम्ब मिलकी खुम्ब के लिए तूडी, बीज, मोमी लिफाफे, सेबा, केसिंग,मिट्टी आदि होने चाहिये तूडी की तैयारी सूकी तूडी को पक्के फर्श पर बिछा कर 16-20 घंटे पानी से गिला करे गिली तूडी को बोरी में भर कर सेबे से बांध दे इस बोरी को उबलते पानी में 45-50 मिनट रखें तूडी को निकालकर पक्के फर्श पर बिछा कर ठंडा करे यह तूडी बिजाई के लिए तैयार है बिजाई ठंडी तूडी में बीज मिलाकर मोमी लिफाफो में भर दें एक मोमी लिफाफें में लगभग 2 किलो गिली तूडी और 70-80 ग्राम बीज पडता है लिफाफे के मुंह को सेबे से अच्छी तरह बांध कर कमरे में रख दे केसिंग बिजाई के दो तीन हफतो के बाद लिफाफे खोलकर केसिंग की 1-1.5 की तहय लगा दें केसिंग में तूडी और रेतली मिट्टी होती है 24 घंटो के लिए 4 प्रतिशत फारमलेन के घोल से जीवाणु रहित किया जाता है खुम्बो का फूटना केसिंग मिट्टी डालने के लगभग दो हफतो में खुम्बो के छोटे छोटे किणके निकलने शुरू हो जाते है और 4-5 दिन के बाद तोडने योग्य हो जाते है खुम्बो की तूडाई लगभग 35-40 दिनो तक की जाती है इसका बीज लेने के लिए आप Mr. jai 8882876224 जी से संपर्क कर सकते है
Posted by ਬਿੱਟਾ
Punjab
21-10-2019 09:25 PM
ਬਿੱਟਾ ਜੀ, ਤੁਸੀ 1 ਏਕੜ ਵਿਚ ਚਿਕਿਤਸਕ ਬੂਟਿਆ ( medicinal plants ) ਦੀ ਬਿਜਾਈ ਕਰ ਸਕਦੇ ਹੋ , ਇਸ ਨਾਲ ਵੱਡਾ ਮੁਨਾਫ਼ਾ ਹੋ ਜਾਂਦਾ ਹੈ, ਜਿਆਦਾ ਜਾਣਕਾਰੀ ਲਈ ਤੁਸੀ Aushadhiya kheti vikas sansthan ਨਾਲ ਸੰਪਰਕ ਕਰੋ 6268536795 , ਧੰਨਵਾਦ

Posted by gaurav rana
Haryana
21-10-2019 08:57 PM
Rana ji inka pta apko usse lgg skta hai yaha se apko iss formule ke vare mai jankari mili hai ya fir koi feed bnnane wali company se pta lgg skta hai kyuki yeh buffer ka kam krte hai jo liver ke liye kam krta hai ..

Posted by gaurav rana
Haryana
21-10-2019 08:53 PM
Rana ji kripya aap apna swal vistar se pushen ki aap Calf ke bare mein kya jankari lena chahte hai tan jo apko sahi jankari di ja ske.

Posted by Arvind Tiwari
Bihar
21-10-2019 08:46 PM
मनोज जी, गेहूं के लिए आप बीज जैसे कि WH 896, PBW 373, PBW 343, HD 2643, UP 2425, PBW-443, DBW-14, NW-2036, MACS-6145, HD-2824. PBW-502, PDW-291, PBW-524, HD-2864, HI-8627, Ujiar(K-9006), Gangotri(K-9162), Prasad (K-8434), Halna (K-7903), Naina (K-9533). UP 2338 की बिजाई कर सकते हैं।

Posted by Rajesh Kumar
Bihar
21-10-2019 08:41 PM
Rabi pyaj me trichoderma ka upyog seed buwane se pehle seed treatment (4gm.per 1kg seed)ke liye kr skte ho....

Posted by amisha
Uttar Pradesh
21-10-2019 08:37 PM
श्रीमान जी, कृपया आप अपना सवाल विस्तार से पूछें ताकि आपको इसके बारे में पूरी जनकारी दी जा सके, धन्यवाद

Posted by Sanjay dangi
Madhya Pradesh
21-10-2019 08:34 PM
श्रीमान जी गेहूं की बिजाई अक्तूबर-नवंबर अंत तक कर सकते हैं
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