
Posted by harmanpreet singh
Punjab
22-10-2019 08:50 PM
Shri maan g 25 october nu wheat varieties PBW 343, HD 3086, HD 2967 beej skde ho .....
Posted by Tiku Choudhary
Himachal Pradesh
22-10-2019 08:50 PM
Tiku ji aap Goats ko turri khila skte hai yeh aap hare chare mai mix krke de skte hai iske ilawa aap feed milla kr v de skte hai...

Posted by jeetbahadur
Uttar Pradesh
22-10-2019 08:40 PM
take seed from private company and no training given by goverment...only private training

Posted by Sunil Kumar
Punjab
22-10-2019 08:38 PM
इसकी खेती के लिए अच्छे निकास वाली, उच्च उपजाऊ मिट्टी की आवश्यकता होती है मिट्टी की पी एच 6-7.5 होनी चाहिए यह चूना और क्लोरीन युक्त मिट्टी को भी सहनेयोग्य है इसकी खेती के लिए नदी के नज़दीक वाली मिट्टी भी उपयुक्त होती है Pant Mahima: यह लंबी और फैलने वाली किस्म है इसके फल हल्के हरे से हल्के भूरे रंग के होते हैं इसक कतारों म.... (Read More)
इसकी खेती के लिए अच्छे निकास वाली, उच्च उपजाऊ मिट्टी की आवश्यकता होती है मिट्टी की पी एच 6-7.5 होनी चाहिए यह चूना और क्लोरीन युक्त मिट्टी को भी सहनेयोग्य है इसकी खेती के लिए नदी के नज़दीक वाली मिट्टी भी उपयुक्त होती है Pant Mahima: यह लंबी और फैलने वाली किस्म है इसके फल हल्के हरे से हल्के भूरे रंग के होते हैं इसक कतारों में रखने के साथ साथ पकाने के लिए भी उपयुक्त किस्म है इसके फल का औसतन भाग लगभग 6.5 किलो होता है Pant Garima: यह लंबी और फैलने वाली किस्म है इसके फल हल्के हरे से हल्के भूरे रंग के होते हैं इसके फल का औसतन भाग लगभग 5 किलो होता है Singapore or Ceylon Jack: यह जल्दी फल देने वाली किस्म है इसके फल मध्यम आकार के मीठे होते हैं और गुद्दा कुरकुरा होता है इसका मादा प्रजनन अंग पीले रंग का, छोटा और गुठली से चिपका हुआ और तेज सुगंध वाला होता है गर्मियों में, रोपाई के लिए 1x1x1 मीटर आकार के गड्ढे खोदें और धूप में खुला छोड़ दें इससे हानिकारक बैक्टीरिया मर जायेंगे और फसल मिट्टी से पैदा होने वाले कीटों और बीमारियों से बचेगी उसके बाद गड्ढों को रूड़ी की खाद या गाय का गला हुआ गोबर 20-30 किलो, सिंगल सुपर फास्फेट 0.5 किलो और फोरेट 10-20 ग्राम से भरें प्रत्येक गड्ढे में 3-4 बीज बोयें कटहल की बिजाई के लिए जून - जुलाई का महीना उपयुक्त होता है बिजाई के लिए, आयताकार या वर्गाकार बिजाई ढंग प्रयोग किया जाता है कम उपजाऊ मिट्टी में षट्कोणीय प्रणाली का प्रयोग करें मिट्टी के आधार पर 8x8 मीटर या 10x10 मीटर या 12x12 मीटर फासले का प्रयोग किया जाता है बिजाई के लिए ताजे बीजों या एक महीने से कम स्टोर किए बीजों का प्रयोग किया जाता है बीजों को पहले पॉलीथीन बैग में बोया जाता है और फिर मुख्य खेत में रोपण किया जाता है बिजाई से पहले बीजों को NAA 25 पी पी एम के घोल में 24 घंटे के लिए भिगो कर रखें यह बीजों के जल्दी अंकुरण के साथ अच्छी वृद्धि में भी मदद करेगा कटहल खादों में अच्छे परिणाम देता है 1 से 3 वर्ष के पौधों मे नाइट्रोजन 200 ग्राम और फासफोरस 60 ग्राम प्रति वर्ष डालें चार से छ: वर्ष के पौधों के लिए नाइट्रोजन 400 ग्राम, फासफोरस 240 ग्राम और पोटाश 120 ग्राम प्रति वर्ष डालें नियमित कटाई और छंटाई की आवश्यकता नहीं होती, लेकिन फसल को कीटों और बीमारियों के हमले से बचाने के लिए कमज़ोर, बीमारी वाली और मरी हुई शाखाओं को बारिश के मौसम के अंत तक निकाल दें नदीनों की तीव्रता के आधार पर गोडाई करें नदीनों के हमले से फसल को बचाने के लिए मल्च का प्रयोग करें यह फसल की उचित वृद्धि में भी सहायता करेगा शुरूआती वर्षों के दौरान, जब फसल फल देने की अवस्था में पहुंच जाती है (वृक्ष 6-8 वर्ष में फल देना शुरू करता है) अंतरफसली जैसे मिर्च, बैंगन, और दालें जैसे लोबिया, कुलथी और काले चने को अंतरफसली के रूप में लिया जा सकता है बारिश के मौसम में सिंचाई की आवश्यकता नहीं होती बारिश की नियमितता और तीव्रता के आधार पर सिंचाई करें कटहल की फसल को शुरूआती 2-3 वर्षों में सिंचाई की आवश्यकता होती है उसके बाद सिंचाई की कोई आवश्यकता नहीं होती भारी बारिश में पानी खड़ा ना होने दें क्योंकि यह फसल जल जमाव की स्थिति को सहनेयोग्य नहीं है

Posted by sohan dass
Punjab
22-10-2019 08:35 PM
Sohan ji makki da rate 1760 rupaye prati quintal de hisab nal chal reha hai.dhanwad

Posted by DINESH KUMAR
Uttar Pradesh
22-10-2019 08:23 PM
मोती की खेती एक बहुत ही अच्छा व्यवसाय है इस व्यवसाय को शुरू करने के लिए सबसे जरुरी है इसकी ट्रेनिंग, क्योकि इसमें बहुत सी ऐसी बारीकियें होती है जो हमें प्रेक्टिकल ट्रेनिंग में ही सीखने को मिलती है अगर आप इसकी ट्रेनिंग लेना चाहते है तो आप ग्लिटराटी पर्ल फार्मिंग ट्रेनिंग केंद्र प्रशिक्षण कार्य कर्म आयोजि.... (Read More)
मोती की खेती एक बहुत ही अच्छा व्यवसाय है इस व्यवसाय को शुरू करने के लिए सबसे जरुरी है इसकी ट्रेनिंग, क्योकि इसमें बहुत सी ऐसी बारीकियें होती है जो हमें प्रेक्टिकल ट्रेनिंग में ही सीखने को मिलती है अगर आप इसकी ट्रेनिंग लेना चाहते है तो आप ग्लिटराटी पर्ल फार्मिंग ट्रेनिंग केंद्र प्रशिक्षण कार्य कर्म आयोजित किया जा रहा है प्रशिक्षण कार्य कर्म में भाग लेने के लिए नीचे दिए गए नम्बर पर आज ही संपर्क करें और Rs 250/ से अपना रजिस्ट्रेशन करवाए अचल सिंह (फाउंडर )- 9711858258. धन्यवाद
Posted by ritik
Uttar Pradesh
22-10-2019 08:18 PM
सबसे पहले आपके लिए यह जानना जरूरी है कि मुर्गी पालन दो तरह का होता है कि आप अंडों का व्यवसाय करना चाहते हैं या मीट का यदि आप अंडों का धंधा करना चाहते हैं तो आपको लेयर मुर्गियां पालनी पड़ेंगी और यदि आप मीट का धंधा करना चाहते हैं तो आपको ब्रॉयलर मुर्गियां पालनी पड़ेंगी यदि आप ब्रायलर मुर्गी पालन करना चाहते हैं त.... (Read More)
सबसे पहले आपके लिए यह जानना जरूरी है कि मुर्गी पालन दो तरह का होता है कि आप अंडों का व्यवसाय करना चाहते हैं या मीट का यदि आप अंडों का धंधा करना चाहते हैं तो आपको लेयर मुर्गियां पालनी पड़ेंगी और यदि आप मीट का धंधा करना चाहते हैं तो आपको ब्रॉयलर मुर्गियां पालनी पड़ेंगी यदि आप ब्रायलर मुर्गी पालन करना चाहते हैं तो कम से कम 10 हजार मुर्गियों का धंधा शुरू करना चाहते हैं तो आपको 4 से 5 लाख का इतज़ाम करना पड़ेगा, ये आप अपने बजट के हिसाब से कम पंक्षियों से भी शुरू कर सकते हैं बाकि आप इस काम को ट्रेनिंग लेकर शुरू करें जिसमें आपको इस काम के बारे में पूरी जानकारी दी जाएगी ट्रेनिंग लेने के लिए आप अपने नज़दीकी कृषि विज्ञान केंद्र से संपर्क करें आप वहां जाकर अपना ट्रेनिंग का फार्म भर आएं जब भी ट्रेनिंग होगी तो वो आपको फोन करके उसके बारे में बता देंगे..
Posted by kasim khan
Rajasthan
22-10-2019 08:14 PM
कासिम खान जी आप इसके पौधे को वर्मी कंपोस्ट 4 -5 किलो प्रति पौधा डाले इससे पौधे की ग्रोथ हो जाएगी धन्यवाद

Posted by Babbal
Punjab
22-10-2019 08:13 PM
Babbal ji kanak da rate 1840 rupaye prati quintal de hisab nal chal reha hai.dhanwad

Posted by Gurjeet singh
Punjab
22-10-2019 08:11 PM
श्रीमान जी गुलीडंडे के लिए Basf का JINDUA नाम का प्रोडक्ट है उसे गेहूं की बिजाई करके बट्टों पर स्प्रे करें गुलीडंडे की समस्या नहीं आएगी

Posted by Rohit Gupta
Madhya Pradesh
22-10-2019 08:06 PM
रोहित जी यह किस्म पर निर्भर करता है इसके लिए आप किस्म का नाम बताये ताकि आपको इसके बारे में पूरी जानकारी दी जा सके धन्यवाद

Posted by Sachin prajapati
Uttar Pradesh
22-10-2019 08:05 PM
सचिन जी ज्वर का scientific name Sorghum bicolor है धन्यवाद

Posted by palwinder singh
Punjab
22-10-2019 07:59 PM
श्रीमान जी एचडी 3226 गेहूं किस्म करनाल यूनिवर्सिटी की तरफ से निकाली गई है इसकी उपज 22—30 क्विंटल प्रति एकड़ है और ये 150 दिनों में तैयार हो जाती है इसकी लंबाई 105 सैं.मी. है इसका बीज 35 किलो पड़ता है
Posted by singham Kalawat
Madhya Pradesh
22-10-2019 07:55 PM
श्रीमान जी गेहूं अक्तूबर से नवंबर में बिजाई करना चाहिए।
Posted by singham Kalawat
Madhya Pradesh
22-10-2019 07:54 PM
प्याज़ आप 15 Octoberसे 25 November तक लग सकते हैं

Posted by palwinder singh
Punjab
22-10-2019 07:51 PM
palwinder ji tuhanu kise mahir ka contact number nahi dita ja sakda tuhada jo vi swal hai usnu app te hi pucho mahira valo tuhanu app te hi jwab dita jayega.dhanwad

Posted by shpinder
Punjab
22-10-2019 07:48 PM
tuci uss nu Sarakind plus tablet 1-1 goli swere sham deo ate usde gode te iodex di malish krke garam patti bnn deo, iss nal frak paa jawega..
Posted by Yashkumar
Madhya Pradesh
22-10-2019 07:47 PM
श्रीमान जी, लंबी किस्मों के लिए 32-40 किलो बीज प्रति एकड़ में प्रयोग करें और छोटे कद की किस्मों के लिए 50 किलो बीज प्रति एकड़ में प्रयोग करें धन्यवाद

Posted by Ajaib sandha
Punjab
22-10-2019 07:45 PM
ਉਸ ਨੂੰ ਤੁਸੀ Mifex 450ml ਬੋਤਲ ਲਗਵਾਓ, ਬੋਤਲ ਵਿਚ Injection Tonophos 20ml ਪਾਓ ਅਤੇ ਇਸ ਨੂੰ IV(slow) ਲਗਵਾਓ, ਬਾਕੀ ਉਸ ਨੂੰ Injection X-nil 1gm, Injection Megludyne 20ml, Tincal injection 20ml (IM) ਲਗਵਾਓ ਅਤੇ 3 ਦਿਨ ਲਗਾਓ ਬਾਕੀ ਨੂੰ Isoflud injection 5ml ਇਕ ਇਕ ਦਿਨ ਦੇ ਫਰਕ ਨਾਲ ਲਗਵਾਓ ਇਸ ਨਾਲ ਫਰਕ ਪੈ ਜਾਵੇਗਾ..

Posted by Avadhesh mishra
Uttar Pradesh
22-10-2019 07:44 PM
चुकंदर का बीज पलक के बीज जैसा ही होता है

Posted by shoeb
Maharashtra
22-10-2019 07:42 PM
कृप्या आप अपना सवाल विस्तार से पूछें कि आप क्या जानकारी लेना चाहते है ताकि आपको सही जानकारी दी जा सके
Posted by Sukhbeer Sandhu Sarpanch
Punjab
22-10-2019 07:40 PM
For training purpose, you need to visit the nearby Krishi Vigyan Kendra in your area and fill the training form. You will be informed whenever any training for pig farming will be organized by the KVK. At the end bank will check your details and tell your eligibility for loan.for pig farming loan, certificate of training is must. After getting training, a subsidy for 2 lac Rupees is available. If the total project is for 8 lac Rupees then you will get a subsidy for 2 lac Rupees.
Posted by jaswinder singh
Punjab
22-10-2019 07:39 PM
श्रीमान रोड़ो वाली ज़मीन में सल्फर 80 प्रतिशत 5—6 किलो प्रति एकड़ पहले पाली के समय डालेे
Posted by akhilesh Kumar srivastava
Uttar Pradesh
22-10-2019 07:26 PM
अच्छे जल निकास वाली हल्की या भारी, रेतली और चिकनी मिट्टी ज़मीनें इसके लिए अच्छी मानी जाती हैं खेत में पानी खड़ा ना होने दें, क्योंकि यह फसल खड़े पानी को सहने योग्य नहीं है प्रसिद्ध किस्में:- Punjab Haldi 1: यह मध्यम कद की, हरे और लंबे पत्तों वाली और मोटी गांठों वाली किस्म है इसका गुद्दा गहरे पीले रंग का और छिल्का भूरे रंग क.... (Read More)
अच्छे जल निकास वाली हल्की या भारी, रेतली और चिकनी मिट्टी ज़मीनें इसके लिए अच्छी मानी जाती हैं खेत में पानी खड़ा ना होने दें, क्योंकि यह फसल खड़े पानी को सहने योग्य नहीं है प्रसिद्ध किस्में:- Punjab Haldi 1: यह मध्यम कद की, हरे और लंबे पत्तों वाली और मोटी गांठों वाली किस्म है इसका गुद्दा गहरे पीले रंग का और छिल्का भूरे रंग का होता है यह किस्म 215 दिनों में पकती है और औसतन पैदावार 108 क्विंटल प्रति एकड़ है Punjab Haldi 2: यह लंबे कद की हरे और चौड़े पत्तों वाली और मोटी गांठ वाली किस्म है इसका गुद्दा पीले रंग का और छिल्का भूरे रंग का होता है यह किस्म 240 दिनों में पकती है और औसतन पैदावार 122 क्विंटल प्रति एकड़ है खेत को 2-3 बार जोत कर और सुहागे से समतल करके तैयार करें हल्दी की बिजाई के लिए बैड 15 सैं.मी. ऊंचे, 1 मीटर चौड़े और आवश्यकनुसार लंबे होने चाहिए दो बैडों के बीच 50 सैं.मी. का फासला होना चाहिए अधिक पैदावार लेने के लिए बिजाई अप्रैल के अंत में करें इसे पनीरी के साथ भी उगाया जा सकता है इसके लिए जून के पहले पखवाड़े तक पनीरी खेत में लगा दें पनीरी के लिए 35-45 दिनों के पौधों को खेत में लगा दें राईज़ोमस को पंक्तियों में बीजें और पंक्ति से पंक्ति का फासला 30 सैं.मी. और पौधों में 20 सैं.मी. का फासला रखें बिजाई के बाद खेत में 2.5 टन प्रति एकड़ स्ट्रा मलच डालें बीज की गहराई 3 सैं.मी. से ज्यादा नहीं होनी चाहिए इसकी बिजाई सीधे खेत में लगाकर या पनीरी लगाकर की जाती है बिजाई के लिए साफ-सुथरे ताजे और बीमारी रहित राईज़ोमस का प्रयोग करें बीज की मात्रा 6-8 क्विंटल प्रति एकड़ बहुत होती है बिजाई से पहले क्विनलफोस 25 ई.सी. को 20 मि.ली. + कार्बेनडाज़िम 10 ग्राम प्रति लीटर पानी में डालकर बीज का उपचार करें बाद में गांठों को 20 मिनट के लिए इस घोल में भिगोदें ताकि इन्हें फफूंद से बचाया जा सके नाइट्रोजन 10 किलो (25 किलो यूरिया), फासफोरस 10 किलो (60 किलो एस एस पी) और पोटाश 10 किलो (16 किलो म्यूरेट ऑफ पोटाश) की मात्रा प्रति एकड़ में प्रयोग करें सारी पोटाश और आधी फासफोरस बिजाई के समय डालें नाइट्रोजन दो हिस्सों में डालें, आधी बिजाई से 75 दिन बाद और बाकी नाइट्रोजन और आधी फासफोरस बिजाई के 3 महीने बाद डालें बिजाई के 2-3 दिनों के बाद पैंडीमैथालीन 30 ई.सी. 800 मि.ली. या मैटरीब्यूज़िन 70 डब्लयू पी 400 ग्राम को 200 लीटर पानी में डालकर स्प्रे करें नदीन नाशक के प्रयोग के बाद खेत को हरे पत्तों या धान की तूड़ी से ढक दें जड़ों के विकास के लिए बिजाई से 50-60 दिनों के बाद और फिर 40 दिनों के बाद जड़ों को मिट्टी लगाएं यह कम वर्षा वाली फसल है, इसलिए वर्षा के अनुसार सिंचाई करें हल्की ज़मीन में फसल को कुल 35-40 सिंचाइयों की जरूरत पड़ती है बिजाई के बाद फसल को 40-60 क्विंटल प्रति एकड़ हरे पत्तों से ढक दें हर बार खाद डालने के बाद 30 क्विंटल प्रति एकड़ मलच डालें किस्म के अनुसार 6-9 महीनों में कटाई करें पत्ते सूखने और पीले होने पर कटाई का अनुकूल समय होता है गांठों को उखाड़ कर बाहर निकालें और साफ करें गांठों को 2-3 दिनों के लिए छांव में सुखाएं इससे छिल्का सख्त हो जाता है और आसानी से उबलता है साफ करने के बाद गांठों को पानी में सोडियम बाइकार्बोनेट डालकर 1 घंटे के लिए उबालें गांठों को उबालने के लिए कड़ाही जैसे बर्तनों का प्रयोग करें अच्छी किस्म की हल्दी लेने के लिए झाग बनने, भाफ निकलने और महक आने तक उबालें उबालने के बाद इसे 10-15 दिनों तक सुखाएं सुखाने के बाद जाली, बोरियों या मशीन से चमकायें और आकार, बनतर और रंग के अनुसार बांटे
Posted by Gurbhej
Punjab
22-10-2019 07:22 PM
मटर की फसल में फंगीनाशी एम45 500 ग्राम प्रति एकड़ की स्प्रे करें और इसमें एनपीके 191919 एक किलो प्रति एकड़ को 100 लीटर पानी में मिलाकर स्प्रे करें
Posted by Gurmukh Singh Garry
Punjab
22-10-2019 07:20 PM
ਤੁਸੀ Butox ਦਵਾਈ ਨੂੰ 2ml/1 ਲਿਟਰ ਪਾਣੀ ਵਿਚ ਮਿਲਾ ਕੇ ਪਸ਼ੂਆਂ ਦੇ ਉਪਰ ਛਿੜਕਾਵ ਕਰ ਸਕਦੇ ਹੋ, ਜੇਕਰ ਪਸ਼ੂ ਚੱਟ ਲਵੇ ਤਾਂ ਇਸਦਾ ਨੁਕਸਾਨ ਨਹੀਂ ਹੈ, ਤੁਸੀ ਇਹ ਸਪਰੇ ਪਸ਼ੂ ਦੇ ਮੂੰਹ ਨੂੰ ਛੱਡ ਕੇ ਬਾਕੀ ਸਰੀਰ ਤੇ ਕਰ ਸਕਦੇ ਹੋ, ਤੁਸੀ ਇਹ ਓਹਨਾ ਦੇ ਚਾਰੇ, ਫੀਡ ਤੇ ਨਾ ਕਰੋ ਅਤੇ ਇਹ ਤੁਸੀ ਸ਼ਾਮ ਦੇ ਟਾਈਮ ਜਦੋ ਮੱਖੀਆਂ ਮੱਛਰ ਜ਼ਿਆਦਾ ਹੋਵੇ ਉਦੋਂ ਕਰ ਸਕਦੇ ਹੋ.

Posted by gurpreet
Punjab
22-10-2019 07:15 PM
आप बरसीम की बिजाई छिड़काव करके भी कर सकते है बरसीम की बिजाई के समय 22 किलो यूरिया और 150 किलो सिंगल सुपर फॉसफोर्स प्रति एकड़ डालें
Posted by Nawed
Madhya Pradesh
22-10-2019 07:13 PM
नावेद जी इसकी सूखी हुई टहनियों को काट कर इसके ऊपर आप बोर्डो पेस्ट लगाए

Posted by milan sharma
Madhya Pradesh
22-10-2019 07:07 PM
कृप्या आप अपना सवाल विस्तार से पूछें कि आप क्या जानकारी लेना चाहते है ताकि आपको सही जानकारी दी जा सके

Posted by chhama shankar Dwivedi
Uttar Pradesh
22-10-2019 07:05 PM
यह फसल बहुत तरह की मिट्टी जैसे कि रेतली, नमक वाली, दोमट और चिकनी मिट्टी में उगाई जा सकती है अच्छे जल निकास वाली, जैविक तत्व भरपूर, रेतली से दरमियानी ज़मीन में फसल अच्छी पैदावार देती है यह फसल नमक वाली तेजाबी ज़मीनों में भी उगाई जा सकती है पर बहुत ज्यादा जल जमाव और खारी या नमक वाली ज़मीन इस फसल की खेती के लिए उचित नह.... (Read More)
यह फसल बहुत तरह की मिट्टी जैसे कि रेतली, नमक वाली, दोमट और चिकनी मिट्टी में उगाई जा सकती है अच्छे जल निकास वाली, जैविक तत्व भरपूर, रेतली से दरमियानी ज़मीन में फसल अच्छी पैदावार देती है यह फसल नमक वाली तेजाबी ज़मीनों में भी उगाई जा सकती है पर बहुत ज्यादा जल जमाव और खारी या नमक वाली ज़मीन इस फसल की खेती के लिए उचित नहीं होती Kufri Bahar: इस किस्म के पौधे लंबे और तने मोटे होते हैं तनों की संख्या 4-5 प्रति पौधा होती है इसके आलू बड़े, सफेद रंग के, गोलाकार से अंडाकार होते हैं और इसका गुद्दा सफेद रंग का होता है यह किस्म 100-110 दिनों में पक जाती है और इसकी औसतन पैदावार 125 क्विंटल प्रति एकड़ होती है इसे ज्यादा देर तक स्टोर करके रखा जा सकता है यह पिछेती और अगेती झुलस रोग और पत्ता मरोड़ रोग की रोधक है Kufri Badshah: इसके पौधे लंबे और 4-5 तने प्रति पौधा होते हैं इसके आलू बड़े से दरमियाने, गोलाकार और हल्के सफेद रंग के होते हैं इसके आलू स्वाद होते हैं यह किस्म 100-110 दिनों में पक जाती है यह किस्म कोहरे को सहनेयोग्य है और पिछेती, अगेती झुलस रोग की प्रतिरोधक है Kufri Sutlaj: इस किस्म के पौधे घने और मोटे तने वाले होते हैं पत्ते हल्के हरे रंग के होते हैं आलू बड़े आकार के, गोलाकार और नर्म छिल्के वाले होते हैं यह किस्म 90-100 दिनों में पकती है इसकी औसतन पैदावार 160 क्विंटल प्रति एकड़ होती है यह किस्म खाने के लिए अच्छी और स्वादिष्ट होती है इन आलुओं को पकाना आसान होता है यह नए उत्पाद बनाने के लिए उचित किस्म नहीं है Kufri Anand: यह मध्यम समय की किस्म है, जो कि पिछेते झुलस रोग और कोहरे के प्रतिरोधक है इसकी औसतन पैदावार 140-160 क्विंटल प्रति एकड़ होती है Kufri Pukhraj: इसके पौधे लंबे और तने संख्या में कम और दरमियाने मोटे होते हैं आलू सफेद, बड़े, गोलाकार और नर्म छिल्के वाले होते हैं यह किस्म 70-90 दिनों में पकती है इसकी औसतन पैदावार 130 क्विंटल प्रति एकड़ है यह अगेती झुलस रोग की रोधक किस्म है और नए उत्पाद बनाने के लिए उचित नहीं है Kufri Chipsona 2: इस किस्म के पौधे दरमियाने कद के और कम तनों वाले होते हैं इसके पत्ते गहरे हरे और फूल सफेद रंग के होते हैं आलू सफेद, दरमियाने आकार के, गोलाकार, अंडाकार और नर्म होते हैं इसकी औसतन पैदावार 140 क्विंटल प्रति एकड़ होती है यह पिछेती झुलस रोग की रोधक किस्म है यह किस्म चिपस और फरैंच फ्राइज़ बनाने के लिए उचित है Kufri Chipsona 1: यह किस्म 90-100 दिनों में पुटाई के लिए तैयार हो जाती है Kufri Chandramukhi: इस किस्म के आलू बड़े अंडाकार आकार के होते हैं इसकी औसतन पैदावार 10 टन प्रति एकड़ होती है यह किस्म 80-90 दिनों में पुटाई के लिए तैयार हो जाती है Kufri Jyoti: यह प्रोसेसिंग के लिए उपयुक्त किस्म है इसकी औसतन पैदावार 80-120 क्विंटल प्रति एकड़ होती है Kufri Ashoka: यह किस्म CPIU, शिमला द्वारा विकसित की गई है और बिहार, हरियाणा, उत्तर प्रदेश और पश्चिमी बंगाल में खेती के लिए उपयुक्त किस्म है यह लंबे कद की और मोटे तने वाली किस्म है यह किस्म 70-80 दिनों में पककर तैयार हो जाती है इसके आलू बड़े, गोलाकार, सफेद और नर्म छिल्के वाले होते हैं यह पिछेती झुलस रोग को सहने योग्य किस्म है Kufri Lalima: इस किस्म के आलू गोल, लाल और सफेद गुद्दे वाले होते हैं आलू बड़े से मध्यम आकार के होते हैं यह किस्म 100-110 दिनों में पुटाई के लिए तैयार हो जाती है इसकी औसतन पैदावार 16 टन प्रति एकड़ होती है खेत को एक बार 30 सैं.मी. गहरा जोतकर अच्छे ढंग से बैड बनाएं जोताई के बाद 2-3 बार तवियां फेरें और फिर 2-3 बार सुहागा फेरें बिजाई से पहले खेत में नमी की मात्रा बनाकर रखें बिजाई के लिए दो ढंग मुख्य तौर पर प्रयोग किए जाते हैं 1. मेंड़ और खालियों वाला ढंग 2. समतल बैडों वाला ढंग अगेती बिजाई के लिए, सितंबर के आखिरी सप्ताह से अक्तूबर का पहला सप्ताह खेती के लिए उपयुक्त होता है मुख्य फसल के लिए अक्तूबर का दूसरे से चौथा सप्ताह बिजाई के लिए उपयुक्त समय होता है गांठों के आकार के अनुसार रोपाई का फासला विभिन्न होता है बिजाई के लिए कतार से कतार में 60 सैं.मी. और पौधे से पौधे में 20 सैं.मी. फासले का प्रयोग करें बीज बोने के बाद बीजों को 8-10 सैं.मी. तक मिट्टी की परत से ढक दें रोपाई के लिए बड़ी आकार की गांठों का प्रयोग किया जाता है बिजाई के लिए 13-15 क्विंटल बीज प्रयोग किए जाते हैं यदि संभव हो, तो आलू की रोपाई से पहले, हरी खाद वाली फसलें जैसे सनई, जंतर आदि फसलें उगायें और उन्हें मिट्टी में अच्छी तरह दबायें यदि हरी खाद उपलब्ध ना हो तो गली सड़ी रूड़ी की खाद या गाय का गला हुआ गोबर 60-80 क्विंटल प्रति एकड़ में खेत की तैयारी के समय रोपाई से दो सप्ताह पहले डालें फसल की उचित वृद्धि के लिए नाइट्रोजन 40-50 किलो (90-110 किलो यूरिया), फासफोरस 24-32 किलो (150-200 किलो सिंगल सुपर फासफेट) और पोटाश 40-50 किलो (66-85 किलो म्यूरेट ऑफ पोटाश) की मात्रा प्रति एकड़ में डालें बिजाई के समय नाइट्रोजन का 3/4 हिस्सा और फासफोरस और पोटाश की पूरी मात्रा डालें बाकी बचा हुआ नाइट्रोजन का 1/4 हिस्सा बिजाई से 35-40 दिन बाद जड़ों में मिट्टी लगाने के समय डालें बिजाई से पहले सिंचाई करें बिजाई के बाद 10-12 दिनों के अंदर अंदर पहली सिंचाई करें दूसरी सिंचाई पहली सिंचाई के 7 दिनों के बाद करें बाकी की सिंचाइयां जलवायु की परिस्थितियों और जरूरत के अनुसार करें गांठे बनने की अवस्था सिंचाई के लिए बहुत महत्तवपूर्ण होती है इस अवस्था में पानी की कमी ना होने दें ज्यादा सिंचाई ना करें इससे गलने की बीमारी का खतरा बढ़ता है पुटाई से 10-12 दिन पहले सिंचाई बंद कर दें डंठलों की कटाई : आलुओं को विषाणु से बचाने के लिए यह क्रिया बहुत जरूरी है और इससे आलुओं का आकार और गिणती भी बढ़ जाती है इस क्रिया में सही समय पर पौधे को ज़मीन के नज़दीक से काट दिया जाता है इसका समय अलग अलग स्थानों पर अलग है और चेपे की जनसंख्या पर निर्भर करता है उत्तरी भारत में यह क्रिया दिसंबर महीने में की जाती है
Posted by ritik
Uttar Pradesh
22-10-2019 07:01 PM
ऋतिक जी आप बिजाई से पहले बीजों को 2 घंटो के लिए पानी में भिगो कर रख सकते है
Posted by ritik
Uttar Pradesh
22-10-2019 06:58 PM
श्रीमान जी, अभी इसमें कुछ डालने की जरुरत नहीं है, जब किसी कीट का हमला होगा तभी आप इसमें दवा का इस्तेमाल करें, धन्यवाद
Posted by dharm veer
Uttar Pradesh
22-10-2019 06:57 PM
swal कंपनी का wuxal(micromix) नाम का प्रोडक्ट आता है लेकिन उसमें कैल्शियम नहीं है
Posted by ritik
Uttar Pradesh
22-10-2019 06:57 PM
श्रीमान जी , नाइट्रोजन 60 किलो (130 किलो यूरिया), फासफोरस 20 किलो (125 किलो सिंगल सुपर फासफेट) और पोटाश 20 किलो (35 किलो म्यूरेट ऑफ पोटाश) की मात्रा प्रति एकड़ में प्रयोग करें नाइट्रोजन की एक तिहाई मात्रा और फासफोरस और पोटाश की पूरी मात्रा आखिरी जोताई के समय डालें बाकी बची नाइट्रोजन को रोपाई के बाद 30 वें और 45वें दिन डालें .... (Read More)
श्रीमान जी , नाइट्रोजन 60 किलो (130 किलो यूरिया), फासफोरस 20 किलो (125 किलो सिंगल सुपर फासफेट) और पोटाश 20 किलो (35 किलो म्यूरेट ऑफ पोटाश) की मात्रा प्रति एकड़ में प्रयोग करें नाइट्रोजन की एक तिहाई मात्रा और फासफोरस और पोटाश की पूरी मात्रा आखिरी जोताई के समय डालें बाकी बची नाइट्रोजन को रोपाई के बाद 30 वें और 45वें दिन डालें फसल के शुरूआती विकास के समय हयूमिक तेजाब 1 लीटर प्रति एकड़ या 5 किलो प्रति एकड़ मिट्टी में मिलाकर डालें यह फसल की पैदावार और वृद्धि में बहुत मदद करता है पनीरी लगाने के 10-15 दिन बाद खेत में NPK 19:19:19 के साथ 2.5-3 ग्राम प्रति लीटर सूक्ष्म तत्वों की स्प्रे करें शुरूआती विकास के समय कईं बार कम तापमान के कारण पौधे सूक्ष्म तत्व नहीं ले पाते, जिस के कारण पौधा पीला पड़ जाता है और कमज़ोर दिखता है ऐसी स्थिति में NPK 19:19:19 या 12:61:00 की 5-7 ग्राम प्रति लीटर की स्प्रे करें आवश्यकतानुसार 10-15 दिन के बाद दोबारा स्प्रे करें पनीरी खेत में लगाने के 40-45 दिनों के बाद 20 प्रतिशत बोरोन 1 ग्राम में सूक्ष्म तत्व 2.5-3 ग्राम प्रति लीटर पानी से स्प्रे करें फसल में तत्वों की पूर्ति और पैदावार 10-15 प्रतिशत बढ़ाने के लिए 13:00:45 की 20 ग्राम प्रति लीटर पानी की दो स्प्रे करें पहली स्प्रे 50 दिनों के बाद और दूसरी स्प्रे पहली स्प्रे के 10 दिन बाद करें जब फूल या फल निकलने का समय हो तो 00:52:34 या 13:00:45 की 20 ग्राम प्रति लीटर पानी की स्प्रे करें नदीनों को रोकने, अच्छे विकास और उचित हवा के लिए दो - चार गोडाई करें काले रंग की पॉलिथीन शीट से पौधों को ढक दें जिससे नदीनों का विकास कम हो जाता है और ज़मीन का तापमान भी बना रहता हैं नदीनों को रोकने के लिए पौधे लगाने से पहले मिट्टी में फलूकलोरालिन 600-800 मि.ली. प्रति एकड़ या ऑक्साडायाज़ोन 400 ग्राम प्रति एकड़ डालें अच्छे परिणाम के लिए पौधे लगाने से पहले एलाकलोर 2 लीटर प्रति एकड़ की मिट्टी के तल पर स्प्रे करें धन्यवाद
Posted by अंकुर गोयत
Uttar Pradesh
22-10-2019 06:50 PM

Posted by Harveer singh
Uttar Pradesh
22-10-2019 06:47 PM
डेयरी फार्मिंग के लिए लोन अलग अलग कामों के लिए मिलता है जैसे शैड के लिए, पशुओं के लिए, डेयरी मशीनरी के लिए सबसे पहले आपने जिसके लिए लोन लेना है उस संबंधी आवेदन नज़दीक के डिप्टी डायरेक्टर को मिलकर दें, इसके लिए आपके पास डेयरी ट्रेनिंग होनी जरूरी है उसके सर्टीफिकेट के हिसाब से आपको लोन मिलेगा यह ट्रेनिंग आप अप.... (Read More)
डेयरी फार्मिंग के लिए लोन अलग अलग कामों के लिए मिलता है जैसे शैड के लिए, पशुओं के लिए, डेयरी मशीनरी के लिए सबसे पहले आपने जिसके लिए लोन लेना है उस संबंधी आवेदन नज़दीक के डिप्टी डायरेक्टर को मिलकर दें, इसके लिए आपके पास डेयरी ट्रेनिंग होनी जरूरी है उसके सर्टीफिकेट के हिसाब से आपको लोन मिलेगा यह ट्रेनिंग आप अपने नज़दीकी केवीके से प्राप्त कर सकते है वहां समय समय पर ट्रेनिंग दी जाती है आप वहां जाकर अपना फार्म भर आए जब भी वहां ट्रेनिंग होगी तो आपको फोन करके बता दिया जाएगा..

Posted by Harveer singh
Uttar Pradesh
22-10-2019 06:43 PM
करन वंदना (DBW 187) इसकी पैदावार 28 -30 क्विंटल प्रति एकड़ होती है, किस्म 120 दिन में तैयार हो जाती है। बीज लेने के लिए आप डॉ. dalip gosain 9215757800 ( pbw187, hd3226) (HR, UP) के साथ संम्पर्क कर सकते हैं।

Posted by Arshpreet Singh
Punjab
22-10-2019 06:33 PM
श्रीमान जी गेहूं की ज्यादा उपज देने वाली किस्म PBW 343 है इसे अक्तूबर से नवंबर के आखिर तक बोय सकते है

Posted by Harveer singh
Uttar Pradesh
22-10-2019 06:31 PM
कृप्या आप उसे नज़दीकी डॉक्टर से जांच करवायें जिससे उसकी जांच करके सही इलाज किया जा सके

Posted by sukhwinder singh
Punjab
22-10-2019 06:29 PM
श्रीमान जी अगेती किस्में DBW-187,HD 2733,PBW 343
पिछेती किस्में DBW173, PBW_590, DBW 71 PBW-435, PBW-373 .....
Posted by sohan lal
Himachal Pradesh
22-10-2019 06:29 PM
Shrimaan ji, yeh jayda nitrogen ki matra ka istemal karne se esa hua ap khaddon ki matra sahi se istemaal karein, dhanywad
Posted by dharmendra kumar
Bihar
22-10-2019 06:28 PM
dharmendra ji aap iske uper NPK 191919 ek kilo ko 150 litre pani ke hisab se spray karen.dhanywad

Posted by ANIT PADHAN
Odisha
22-10-2019 06:26 PM
ANIT PADHAN ji vermi compost lene ke lia aap Vikas jeswani 9425501344 Green Gold Vermicompost se samparak kar sakte hai, Thankyou.
Posted by ramanand kewat
Uttar Pradesh
22-10-2019 06:24 PM
Ramanand kewat ji india me hydroponic kamjab hai, is ke bare me or adhik jankari or farm dekhne ke lia aap Vikas Mishra 9807528308 and Somveer singh 9878733551 se samparak kar sakte hai, Thankyou.
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