
Posted by sandeep singh
Punjab
24-10-2019 12:31 PM
sandeep ji gamle vich vela valiyan sabjiyan lag sakdiyan han jive kaddu, krela ja tuc vadde gamle vich mirchan di bijai kar sakde ho.dhanwad

Posted by UDAY SHARMA
Bihar
24-10-2019 12:24 PM
उदय जी कृपया आप इसकी फोटो भेजे ताकि आपको इसके बारे में पूरी जानकारी दी जा सके धन्यवाद
Posted by Rajnish kumar
Bihar
24-10-2019 12:20 PM
Rajnish ji usko aap Sarakind plus bolus 2-2 goli subah sham den aur uso Broton liquid 50-50ml subah sham, Aptifast tablet 1-1 goli subah sham den, isse frak padd jayega..
Posted by Ajay Kumar
Himachal Pradesh
24-10-2019 12:13 PM
यदि आपकी गाय/भैंस को खुर पका की बीमारी हो गई है तो आप उसे Avil injection 10ml, DCR injection 2.5 ग्राम, Nonavet injection 15ml लगवाएं, ये आप तीन दिन तक लगवायें इससे फर्क पड़ जाएगा

Posted by harman
Haryana
24-10-2019 12:13 PM
ਹਰਮਨ ਜੀ ਕਣਕ ਦੀ ਬਿਜਾਈ ਸਹੀ ਸਮੇਂ ਤੇ ਕਰਨੀ ਜਰੂਰੀ ਹੈ ਪਿਛੇਤੀ ਬਿਜਾਈ ਦਾ ਫਸਲ ਦੀ ਪੈਦਾਵਾਰ ਤੇ ਬੁਰਾ ਅਸਰ ਪੈਂਦਾ ਹੈ ਕਣਕ ਦੀ ਬਿਜਾਈ 25 ਅਕ੍ਤੂਬਰ ਤੋਂ ਨਵੰਬਰ ਮਹੀਨੇ ਵਿੱਚ ਕੀਤੀ ਜਾਂਦੀ ਹੈ ਖਾਦਾਂ ਦੀ ਵਰਤੋਂ ਮਿੱਟੀ ਪਰਖ਼ ਆਧਾਰ ਤੇ ਕਰੋ ਜੇ ਮਿੱਟੀ ਦੀ ਪਰਖ਼ ਨਹੀਂ ਕਰਵਾਈ ਤਾਂ ਕਣਕ ਲਈ ਦਰਮਿਆਨੀ ਉਪਜਾਊ ਜ਼ਮੀਨ ਲਈ 55 ਕਿਲੋ ਡੀ ਏ ਪੀ ਪ੍ਰਤੀ ਏਕੜ ਬਿਜਾਈ ਸਮੇਂ ਪੋਰ ਦਿਓ
ਉਪਰੰਤ ਪਹਿਲੇ .... (Read More)
ਹਰਮਨ ਜੀ ਕਣਕ ਦੀ ਬਿਜਾਈ ਸਹੀ ਸਮੇਂ ਤੇ ਕਰਨੀ ਜਰੂਰੀ ਹੈ ਪਿਛੇਤੀ ਬਿਜਾਈ ਦਾ ਫਸਲ ਦੀ ਪੈਦਾਵਾਰ ਤੇ ਬੁਰਾ ਅਸਰ ਪੈਂਦਾ ਹੈ ਕਣਕ ਦੀ ਬਿਜਾਈ 25 ਅਕ੍ਤੂਬਰ ਤੋਂ ਨਵੰਬਰ ਮਹੀਨੇ ਵਿੱਚ ਕੀਤੀ ਜਾਂਦੀ ਹੈ ਖਾਦਾਂ ਦੀ ਵਰਤੋਂ ਮਿੱਟੀ ਪਰਖ਼ ਆਧਾਰ ਤੇ ਕਰੋ ਜੇ ਮਿੱਟੀ ਦੀ ਪਰਖ਼ ਨਹੀਂ ਕਰਵਾਈ ਤਾਂ ਕਣਕ ਲਈ ਦਰਮਿਆਨੀ ਉਪਜਾਊ ਜ਼ਮੀਨ ਲਈ 55 ਕਿਲੋ ਡੀ ਏ ਪੀ ਪ੍ਰਤੀ ਏਕੜ ਬਿਜਾਈ ਸਮੇਂ ਪੋਰ ਦਿਓ
ਉਪਰੰਤ ਪਹਿਲੇ ਅਤੇ ਦੂਜੇ ਪਾਣੀ ਨਾਲ 45 ਕਿੱਲੋ ਯੂਰੀਆ ਪ੍ਰਤੀ ਏਕੜ ਪਾਓ
ਜੇ ਬਾਰਿਸ਼ਾਂ ਕਾਰਨ ਦੂਜੇ ਪਾਣੀ ਵਿਚ ਦੇਰੀ ਹੋਵੇ ਤਾਂ ਯੂਰੀਆ ਦੀ ਦੂਜੀ ਕਿਸ਼ਤ ਬਿਜਾਈ ਤੋਂ 55 ਦਿਨਾਂ ਬਾਅਦ ਜ਼ਰੂਰ ਦੇ ਦੇਣੀ ਚਾਹੀਦੀ ਹੈ
ਪੋਟਾਸ਼ ਤੱਤ ਦੀ ਘਾਟ ਵਾਲੀਆ ਜਮੀਨਾ ਵਿੱਚ 12 ਕਿਲੋ ਪੋਟਾਸ਼ (20 ਕਿਲੋ ਮਿਊਰੇਟ ਆਫ ਪੋਟਾਸ਼) ਪ੍ਰਤੀ ਏਕੜ ਪਾਓ ਗੁਰਦਾਸਪੁਰ, ਹੁਸ਼ਿਆਰਪੁਰ, ਰੋਪੜ ਅਤੇ ਸ਼ਹੀਦ ਭਗਤ ਸਿੰਘ ਨਗਰ ਜ਼ਿਲ੍ਹਿਆਂ ਲਈ 24 ਕਿਲੋ ਪੋਟਾਸ਼ (40 ਕਿਲੋ ਮਿਊਰੇਟ ਆਫ ਪੋਟਾਸ਼) ਪ੍ਰਤੀ ਏਕੜ ਪਾਓ
Posted by Gurdhian singh Anttal
Haryana
24-10-2019 12:09 PM
श्रीमान जी HD-3086 किस्म पकने के लिए 143 दिन लेती है

Posted by Rajwinder singh Dhillon
Punjab
24-10-2019 12:07 PM
ਰਾਜਵਿੰਦਰ ਜੀ, ਇਹ boron ਤੱਤ ਦੀ ਕਮੀ ਕਰਕੇ ਹੁੰਦਾ ਹੈ, ਇਸਦੀ ਰੋਕਥਾਮ ਲਈ ਤੁਸੀ boron @ 1g ਪ੍ਰਤੀ ਲਿਟਰ ਪਾਣੀ ਦੇ ਹਿਸਾਬ ਨਾਲ ਸਪਰੇ ਕਰੋ ਅਤੇ ਇਸ ਵਿਚ copper oxychloride @ 3g ਪ੍ਰਤੀ ਲਿਟਰ ਪਾਣੀ ਚ ਮਿਲਾ ਕੇ ਸਪਰੇ ਕਰ ਸਕਦੇ ਹੋ, ਧੰਨਵਾਦ

Posted by ਮਲਕੀਤ ਸਿੰਘ
Punjab
24-10-2019 12:02 PM
1718 ਦਾ ਰੇਟ 2570 -2600 ਰੁਪਏ ਪ੍ਰਤੀ ਕੁਇੰਟਲ ਦੇ ਹਿਸਾਬ ਨਾਲ ਚਲ ਰਿਹਾ ਹੈ ਧੰਨਵਾਦ

Posted by रंजीत कुमार
Jharkhand
24-10-2019 11:58 AM
पपीता को मिट्टी की व्यापक किस्मों में उगाया जा सकता है अच्छे निकास वाली पहाड़ी मिट्टी पपीते की खेती के लिए उपयुक्त होती है रेतली और भारी मिट्टी में इसकी खेती ना करें पपीते की खेती के लिए मिट्टी की पी एच 6.5-7.0 होनी चाहिए पपीते की खेती के लिए नदीन रहित भूमि का प्रयोग करें मिट्टी के भुरभुरा होने तक खेत की जोताई कर.... (Read More)
पपीता को मिट्टी की व्यापक किस्मों में उगाया जा सकता है अच्छे निकास वाली पहाड़ी मिट्टी पपीते की खेती के लिए उपयुक्त होती है रेतली और भारी मिट्टी में इसकी खेती ना करें पपीते की खेती के लिए मिट्टी की पी एच 6.5-7.0 होनी चाहिए पपीते की खेती के लिए नदीन रहित भूमि का प्रयोग करें मिट्टी के भुरभुरा होने तक खेत की जोताई करें आप इसकी किस्मे जैसे Washington Coorg Honey Pusa Delicious Pusa Dwarf की बिजाई कर सकते है आखिरी जोताई के समय अच्छी तरह से गली हुई रूड़ी की खाद या गाय का गला हुआ गोबर मिट्टी में अच्छी तरह मिलाकर डालें सिफारिश किए गए फासलों पर 1 मीटर x 1 मीटर x 1 मीटर आकार के गड्ढे खोदें गड्ढों को मिट्टी और रूड़ी की खाद या गाय के गले हुए गोबर से भरें प्रयोग की गई किस्म के आधार पर प्रत्येक गड्ढे पर 2-4 नए पौधों की रोपाई करें रोपाई के बाद हल्की सिंचाई करें हवा से बचाव के लिए खूंटा लगाएं एक एकड़ में 104 ग्राम बीज प्रति एकड़ में प्रयोग करें कम बारिश वाले क्षेत्रों में जून - जुलाई के महीने में बिजाई की जानी चाहिए और तराई और अधिक बारिश वाले क्षेत्रों में सितंबर महीने में बिजाई की जानी चाहिए और क्षेत्र जहां सिंचाई की सुविधाएं उपलब्ध हो वहां पर फरवरी - मार्च के महीने में बिजाई की जानी चाहिए आमतौर पर 1.8 मीटर x 1.8 मीटर फासले का प्रयोग किया जाता है उच्च घनता की रोपाई के लिए 1.5 मीटर x 1.5 मीटर फासले का प्रयोग किया जाता है नर्सरी में बीज को 10 सैं.मी. की गहराई पर बोयें बीजो की खेत में सीधे बिजाई या मुख्य खेत में नए पौधों की रोपाई की जाती है बीजों को 150 गेज़ की मोटाई वाले, 25 x 10 सैं.मी. के पॉलीथीन बैग में बोयें पानी के उचित निकास के लिए पॉलीथीन बैग के निचले हिस्से में 1 मि.मी. अर्द्धव्यास का छेद करें उसके बाद पॉलीथीन बैग में समान अनुपात में रूड़ी की खाद, मिट्टी और रेत डालें बिजाई से पहले बीजों का उपचार करें रोपाई के लिए 6-7 सप्ताह के पौधों का प्रयोग करें पौधे की प्रौढ़ अवस्था के दौरान नदीनों की रोकथाम जरूरी होती है नदीनों की तीव्रता के आधार पर, नियमित और हल्की गोडाई करें फ्लूक्लोरालिन या बूटाक्लोर 0.8 किलो प्रति एकड़ में डालें नदीनों की रोकथाम के लिए मलचिंग भी एक प्रभावी तरीका है पौधों की रोपाई के कुछ दिनों बाद प्लास्टिक शीट या धान की पराली या गन्ने के बचे कुचे को मलच के रूप में डालें मुख्यत: फल के पूरा आकार लेने और हरे से हल्का पीला रंग होने पर तुड़ाई की जाती है पहली तुड़ाई रोपाई के 14-15 महीनों के बाद की जा सकती है 4-5 तुड़ाइयां प्रति मौसम की जा सकती हैं तुड़ाई एक एक फल को हाथों से तोड़कर की जाती है फलों को सुबह के समय तोड़ें धन्यवाद

Posted by Arshdeep Singh
Punjab
24-10-2019 11:55 AM
ਅਰਸ਼ ਜੀ, PBW 725 ਦਾ ਝਾੜ 22.9 ਕੁਇੰਟਲ ਪ੍ਰਤੀ ਏਕੜ ਹੈ ਅਤੇ ਇਸ ਦੀ ਬਿਜਾਈ ਦਾ ਸਮਾਂ ਅਕਤੂਬਰ ਦੇ ਚੋਥੇ ਹਫਤੇ ਤੋਂ ਨਵੰਬਰ ਦੇ ਚੋਥੇ ਹਫਤੇ ਤਕ ਹੈ, ਧੰਨਵਾਦ

Posted by सुदमा
Uttar Pradesh
24-10-2019 11:54 AM
sudma ji kripya aap apna swal vistar se pooche taki aapko iske bare men poori jankari di ja sake.dhanywad

Posted by रंजीत कुमार
Jharkhand
24-10-2019 11:46 AM
पपीता को मिट्टी की व्यापक किस्मों में उगाया जा सकता है अच्छे निकास वाली पहाड़ी मिट्टी पपीते की खेती के लिए उपयुक्त होती है रेतली और भारी मिट्टी में इसकी खेती ना करें पपीते की खेती के लिए मिट्टी की पी एच 6.5-7.0 होनी चाहिए पपीते की खेती के लिए नदीन रहित भूमि का प्रयोग करें मिट्टी के भुरभुरा होने तक खेत की जोताई कर.... (Read More)
पपीता को मिट्टी की व्यापक किस्मों में उगाया जा सकता है अच्छे निकास वाली पहाड़ी मिट्टी पपीते की खेती के लिए उपयुक्त होती है रेतली और भारी मिट्टी में इसकी खेती ना करें पपीते की खेती के लिए मिट्टी की पी एच 6.5-7.0 होनी चाहिए पपीते की खेती के लिए नदीन रहित भूमि का प्रयोग करें मिट्टी के भुरभुरा होने तक खेत की जोताई करें आप इसकी किस्मे जैसे Washington Coorg Honey Pusa Delicious Pusa Dwarf की बिजाई कर सकते है आखिरी जोताई के समय अच्छी तरह से गली हुई रूड़ी की खाद या गाय का गला हुआ गोबर मिट्टी में अच्छी तरह मिलाकर डालें सिफारिश किए गए फासलों पर 1 मीटर x 1 मीटर x 1 मीटर आकार के गड्ढे खोदें गड्ढों को मिट्टी और रूड़ी की खाद या गाय के गले हुए गोबर से भरें प्रयोग की गई किस्म के आधार पर प्रत्येक गड्ढे पर 2-4 नए पौधों की रोपाई करें रोपाई के बाद हल्की सिंचाई करें हवा से बचाव के लिए खूंटा लगाएं एक एकड़ में 104 ग्राम बीज प्रति एकड़ में प्रयोग करें कम बारिश वाले क्षेत्रों में जून - जुलाई के महीने में बिजाई की जानी चाहिए और तराई और अधिक बारिश वाले क्षेत्रों में सितंबर महीने में बिजाई की जानी चाहिए और क्षेत्र जहां सिंचाई की सुविधाएं उपलब्ध हो वहां पर फरवरी - मार्च के महीने में बिजाई की जानी चाहिए आमतौर पर 1.8 मीटर x 1.8 मीटर फासले का प्रयोग किया जाता है उच्च घनता की रोपाई के लिए 1.5 मीटर x 1.5 मीटर फासले का प्रयोग किया जाता है नर्सरी में बीज को 10 सैं.मी. की गहराई पर बोयें बीजो की खेत में सीधे बिजाई या मुख्य खेत में नए पौधों की रोपाई की जाती है बीजों को 150 गेज़ की मोटाई वाले, 25 x 10 सैं.मी. के पॉलीथीन बैग में बोयें पानी के उचित निकास के लिए पॉलीथीन बैग के निचले हिस्से में 1 मि.मी. अर्द्धव्यास का छेद करें उसके बाद पॉलीथीन बैग में समान अनुपात में रूड़ी की खाद, मिट्टी और रेत डालें बिजाई से पहले बीजों का उपचार करें रोपाई के लिए 6-7 सप्ताह के पौधों का प्रयोग करें पौधे की प्रौढ़ अवस्था के दौरान नदीनों की रोकथाम जरूरी होती है नदीनों की तीव्रता के आधार पर, नियमित और हल्की गोडाई करें फ्लूक्लोरालिन या बूटाक्लोर 0.8 किलो प्रति एकड़ में डालें नदीनों की रोकथाम के लिए मलचिंग भी एक प्रभावी तरीका है पौधों की रोपाई के कुछ दिनों बाद प्लास्टिक शीट या धान की पराली या गन्ने के बचे कुचे को मलच के रूप में डालें मुख्यत: फल के पूरा आकार लेने और हरे से हल्का पीला रंग होने पर तुड़ाई की जाती है पहली तुड़ाई रोपाई के 14-15 महीनों के बाद की जा सकती है 4-5 तुड़ाइयां प्रति मौसम की जा सकती हैं तुड़ाई एक एक फल को हाथों से तोड़कर की जाती है फलों को सुबह के समय तोड़ें धन्यवाद

Posted by niraj
Gujarat
24-10-2019 11:44 AM
dairy farming ki training ke liye aap apne nazdiki KVK me jakar mile or iske elava apne nazdiki pashu palan department se bhi contact kare ji.

Posted by Vasu Dhage
Maharashtra
24-10-2019 11:40 AM
मोती की खेती एक बहुत ही अच्छा व्यवसाय है इस व्यवसाय को शुरू करने के लिए सबसे जरुरी है इसकी ट्रेनिंग, क्योकि इसमें बहुत सी ऐसी बारीकियें होती है जो हमें प्रेक्टिकल ट्रेनिंग में ही सीखने को मिलती है अगर आप इसकी ट्रेनिंग लेना चाहते है तो आप ग्लिटराटी पर्ल फार्मिंग ट्रेनिंग केंद्र प्रशिक्षण कार्य कर्म आयोजि.... (Read More)
मोती की खेती एक बहुत ही अच्छा व्यवसाय है इस व्यवसाय को शुरू करने के लिए सबसे जरुरी है इसकी ट्रेनिंग, क्योकि इसमें बहुत सी ऐसी बारीकियें होती है जो हमें प्रेक्टिकल ट्रेनिंग में ही सीखने को मिलती है अगर आप इसकी ट्रेनिंग लेना चाहते है तो आप ग्लिटराटी पर्ल फार्मिंग ट्रेनिंग केंद्र प्रशिक्षण कार्य कर्म आयोजित किया जा रहा है प्रशिक्षण कार्य कर्म में भाग लेने के लिए नीचे दिए गए नम्बर पर आज ही संपर्क करें और Rs 250/ से अपना रजिस्ट्रेशन करवाए अचल सिंह (फाउंडर )- 9711858258. धन्यवाद
Posted by Sukhbeer Sandhu Sarpanch
Punjab
24-10-2019 11:18 AM
ਸਭ ਤੋਂ ਪਹਿਲਾਂ ਪੇਟ ਦੇ ਕੀੜਿਆ ਲਈ Flukarid-Ds ਦਵਾਈ ਦਿਓ ਉਸ ਤੋਂ ਬਾਅਦ ਤੁਸੀ ਸ਼ਰੀ੍ਹ ਦੇ ਪੱਤੇ ਕੁੱਟ ਕੇ ਗਿਲਾਸ ਪਾਣੀ ਦਾ ਪਾ ਕੇ ਕੱਪੜੇ ਨਾਲ ਛਾਣ ਕੇ ਅੱਖਾਂ ਵਿੱਚ ਛਿੱਟੇ ਮਾਰੋ ਜੇ ਸ਼ਰੀਹ ਨਹੀ ਮਿਲਦਾ ਤਾਂ ਬੋਰਿਕ ਐਸਿਡ ਜੋ ਕਿ ਤੁਸੀ ਮੈਡੀਕਲ ਸਟੋਰ ਤੋਂ ਪਤਾ ਕਰ ਲਵੋ ਮਿਲ ਜਾਵੇਗਾ , ਪਾਊਡਰ ਦਾ ਚਮਚ ਦਾ ਚੋਥਾਂ ਹਿੱਸਾ ਅੱਧੇ ਗਿਲਾਸ ਪਾਣੀ ਵਿੱਚ ਘੋਲ ਕੇ ਦੋ ਤੋਂ ਤਿੰਂਨ ਲਗਾਤਾਰ ਅੱਖ ਵਿੱਚ ਛਿ.... (Read More)
ਸਭ ਤੋਂ ਪਹਿਲਾਂ ਪੇਟ ਦੇ ਕੀੜਿਆ ਲਈ Flukarid-Ds ਦਵਾਈ ਦਿਓ ਉਸ ਤੋਂ ਬਾਅਦ ਤੁਸੀ ਸ਼ਰੀ੍ਹ ਦੇ ਪੱਤੇ ਕੁੱਟ ਕੇ ਗਿਲਾਸ ਪਾਣੀ ਦਾ ਪਾ ਕੇ ਕੱਪੜੇ ਨਾਲ ਛਾਣ ਕੇ ਅੱਖਾਂ ਵਿੱਚ ਛਿੱਟੇ ਮਾਰੋ ਜੇ ਸ਼ਰੀਹ ਨਹੀ ਮਿਲਦਾ ਤਾਂ ਬੋਰਿਕ ਐਸਿਡ ਜੋ ਕਿ ਤੁਸੀ ਮੈਡੀਕਲ ਸਟੋਰ ਤੋਂ ਪਤਾ ਕਰ ਲਵੋ ਮਿਲ ਜਾਵੇਗਾ , ਪਾਊਡਰ ਦਾ ਚਮਚ ਦਾ ਚੋਥਾਂ ਹਿੱਸਾ ਅੱਧੇ ਗਿਲਾਸ ਪਾਣੀ ਵਿੱਚ ਘੋਲ ਕੇ ਦੋ ਤੋਂ ਤਿੰਂਨ ਲਗਾਤਾਰ ਅੱਖ ਵਿੱਚ ਛਿੱਟੇ ਮਾਰੋ

Posted by Dharminder singh
Punjab
24-10-2019 11:14 AM
श्रीमान जी सुपर 272 की उपज 26 क्विंटल प्रति एकड़, लंबाई 105 सैं.मी. 120 दिन की किस्म है
Posted by lakhvir Brar
Punjab
24-10-2019 11:05 AM
lakhvir Brar ji tusi animal husbandry department punjab de director Dr. inderjeet singh ji nal contact kar sakde ho.

Posted by Sunil Kumar
Uttar Pradesh
24-10-2019 10:53 AM
डेयरी फार्मिंग के लिए लोन अलग अलग कामों के लिए मिलता है जैसे शैड के लिए, पशुओं के लिए, डेयरी मशीनरी के लिए सबसे पहले आपने जिसके लिए लोन लेना है उस संबंधी आवेदन नज़दीक के डिप्टी डायरेक्टर को मिलकर दें, इसके लिए आपके पास डेयरी ट्रेनिंग होनी जरूरी है उसके सर्टीफिकेट के हिसाब से आपको लोन मिलेगा यह ट्रेनिंग आप अप.... (Read More)
डेयरी फार्मिंग के लिए लोन अलग अलग कामों के लिए मिलता है जैसे शैड के लिए, पशुओं के लिए, डेयरी मशीनरी के लिए सबसे पहले आपने जिसके लिए लोन लेना है उस संबंधी आवेदन नज़दीक के डिप्टी डायरेक्टर को मिलकर दें, इसके लिए आपके पास डेयरी ट्रेनिंग होनी जरूरी है उसके सर्टीफिकेट के हिसाब से आपको लोन मिलेगा यह ट्रेनिंग आप अपने नज़दीकी केवीके से प्राप्त कर सकते है वहां समय समय पर ट्रेनिंग दी जाती है आप वहां जाकर अपना फार्म भर आए जब भी वहां ट्रेनिंग होगी तो आपको फोन करके बता दिया जाएगा, आप एक बार में इक्ट्ठी गाय ना खरीदें गायों को 2-2 महीनों के फासले पर खरीदें या फिर 3 पहले खरीदें ओर 3 महीने बाद फिर खरीद लें इससे दूध की कमी नहीं आयेगी पशु की नसल सबसे ज्यादा जरूरी है पशु खरीदने के समय कोशिश करें कि दिन में तीन बार दूध निकालकर ही पशु खरीदें भैंसो का एक दिन का दूध 12 लीटर और गायों को दूध 16-17 लीटर से कम ना हो गाभिनों को खरीदने का सही समय रखड़ियों से लेकर वैशाखी तक का होता है क्योंकि इस समय मौसम अच्छा होने के कारण हरा चारा भी खुला होता है गाभिनों के लिए शैड आवाजाई वाली सड़क पर ना बनायें और शैड सड़क से कम से कम 100 गज दूर हो शैड को धूप और हवा का ध्यान रखकर ही बनायें शैड हमेशा खेत या आस पास से 2 फुट ऊंचा बनायें क्योंकि निचले स्थान पर पानी खड़ा हो जाता है जिस कारण गंदगी पैदा हो जाती है और बाकी पशुओं का मल मूत्र का निकास भी आसानी से हो जाता है पशुओं के लिए बनायी जाने वाली खुरली ढाई तीन फुट चौड़ी होनी चाहिए खुरली पर खड़ने के लिए एक पशु को तकरीबन चार फुट जगह चाहिए मतलब 10 पशुओं के लिए 40 फुट लंबी खुरली बनेगी डेयरी फार्म से संबंधित सामान रखने के लिए स्टोर बनायें पशुओं का वितरण/दाना स्टोर करने के लिए कमरा सैलाब से रहित होना चाहिए शैड का फर्श पक्क, फिसलन रहित और जल्दी साफ होने वाला हो शैड में जितना हो सके पशुओं को खुला छोंड़े और पानी और दाना पूरा डालें पशु को खुला छोड़ने से पशुओं में अफारे की समस्या कम आती है बाकी अपनी आवश्यकता और क्षमता के मुताबिक ही सामान खरीदें और आर्थिक नुकसान से बचने के लिए प्रत्येक गाभिन का बीमा जरूर करवायें

Posted by sikandersindh.
Punjab
24-10-2019 10:52 AM
ਸਿਕੰਦਰ ਜੀ SSP ਦੇ ਵਿਚ calcium ਮੌਜੂਦ ਹੁੰਦਾ ਹੈ ਧੰਨਵਾਦ

Posted by heeralal gurjar
Rajasthan
24-10-2019 10:49 AM
Heeralal ji aap iske patton ke neeche machar ka hamla check karen agar maujood hai to aap imidacloprid @1.5ml ko prati litre pani ke hisab se spray karen.dhanywad

Posted by sikandersindh.
Punjab
24-10-2019 10:47 AM
Sikandersindh ji Shri ram 272 kanak di 40kg di packing da rate 2100/- hai, Thankyou.
Posted by Sourav Jaiswal
Jharkhand
24-10-2019 10:42 AM
Sourav ji sbse pehle aap apni nazdiki market mai egg shop per iski market ka pta kren yaddi iski achi market hai too fir aap iss kam ko kr skte hai, iss kam ko aap pehle chote level per suru kren fir jaise jaise apko iss kam ki jankari milti rehegi fir aap iss kam ko vdha skte hai aap iss kam ki Training apne nazdiki KVK se lekar suru kren jisme apko iss kam ko krne ki purri jankari mill jayegi..

Posted by santosh kumar yadu
Chattisgarh
24-10-2019 10:35 AM
संतोष जी आप सब्जियां जैसे गाजर, शलगम, फूलगोभी, आलू, टमाटर, काली सरसों के बीज, मूली, पालक, पत्ता गोभी, कोहीराबी, धनिया, सौंफ के बीज, राजमा, मटर, ब्रोकोली, सलाद, बैंगन, हरी प्याज, ब्रसल्स स्प्राउट, लहसुन की बिजाई कर सकते है

Posted by Aashish Patel
Madhya Pradesh
24-10-2019 10:35 AM
Aashish Patel ji is sall 2019-2020 me soyabeen ka MSP 3710/q hai, Thankyou.

Posted by ਸੁਲੱਖਣ ਸਿੰਘ
Punjab
24-10-2019 10:30 AM
tuci uss nu Nurokind plus liquid 10-10ml swere sham deo ehh Vet mankind company da product hai, bakki uss nu Broton liquid 10ml rojana deo, iss nal frak paa jawega.
Posted by kala sandhu
Punjab
24-10-2019 10:26 AM
ਤੁਸੀ ਕੜਕਨਾਥ ਮੁਰਗੀ ਦਾ ਕੰਮ ਪੰਜਾਬ ਵਿਚ ਕਰ ਸਕਦੇ ਹੋ, ਕੜਕਨਾਥ ਮੱਧ ਪ੍ਰਦੇਸ਼ ਦੀ ਪਿਓਰ ਨਸਲ ਹੈ ਇਸ ਦੀ ਚਮੜੀ ਕਾਲੀ ਚਮਕੀਲੀ ਹੁੰਦੀ ਹੈ, ਕਲਗੀ ਵੀ ਕਾਲੀ ਹੁੰਦੀ ਹੈ ਤੇ ਇਸਦੀ ਚੁੰਝ ਤੇ ਜੀਭ ਵੀ ਕਾਲੇ ਰੰਗ ਦੀ ਹੁੰਦੀ ਹੈ ਅੰਡੇ ਦੇਸੀ ਅੰਡਿਆ ਦੀ ਤਰ੍ਹਾਂ ਹੁੰਦੇ ਹਨ ਤੇ ਖੂਨ ਲਾਲ ਨਾਲੋਂ ਥੋੜਾ ਗੂੜਾ ਲਾਲ ਹੁੰਦਾ ਹੈ ਇਸਦੇ ਅੰਡੇ ਵਿੱਚ ਪ੍ਰੋਟੀਨ ਦੀ ਮਾਤਰਾ ਜਿਆਦਾ ਹੁੰਦੀ ਹੈ ਤੇ ਫੈਟ ਬਿਲ.... (Read More)
ਤੁਸੀ ਕੜਕਨਾਥ ਮੁਰਗੀ ਦਾ ਕੰਮ ਪੰਜਾਬ ਵਿਚ ਕਰ ਸਕਦੇ ਹੋ, ਕੜਕਨਾਥ ਮੱਧ ਪ੍ਰਦੇਸ਼ ਦੀ ਪਿਓਰ ਨਸਲ ਹੈ ਇਸ ਦੀ ਚਮੜੀ ਕਾਲੀ ਚਮਕੀਲੀ ਹੁੰਦੀ ਹੈ, ਕਲਗੀ ਵੀ ਕਾਲੀ ਹੁੰਦੀ ਹੈ ਤੇ ਇਸਦੀ ਚੁੰਝ ਤੇ ਜੀਭ ਵੀ ਕਾਲੇ ਰੰਗ ਦੀ ਹੁੰਦੀ ਹੈ ਅੰਡੇ ਦੇਸੀ ਅੰਡਿਆ ਦੀ ਤਰ੍ਹਾਂ ਹੁੰਦੇ ਹਨ ਤੇ ਖੂਨ ਲਾਲ ਨਾਲੋਂ ਥੋੜਾ ਗੂੜਾ ਲਾਲ ਹੁੰਦਾ ਹੈ ਇਸਦੇ ਅੰਡੇ ਵਿੱਚ ਪ੍ਰੋਟੀਨ ਦੀ ਮਾਤਰਾ ਜਿਆਦਾ ਹੁੰਦੀ ਹੈ ਤੇ ਫੈਟ ਬਿਲਕੁੱਲ ਘੱਟ ਹੁੰਦੀ ਹੈ ਸੂਗਰ ਦੇ ਮਰੀਜ਼ਾਂ ਲਈ ਵੀ ਇਹ ਫਾਇਦੇਮੰਦ ਹਨ ਇਸ ਦੇ ਚਿਕਨ ਦਾ 800 ਰੁਪਏ ਕਿਲੋ ਤੱਕ ਰੇਟ ਹੈ ਤੇ ਛੋਟੇ ਬੱਚੇ ਜੇਕਰ ਮੱਧ ਪ੍ਰਦੇਸ਼ ਤੋਂ ਮਗਵਾਉਂਦੇ ਹੋ ਤਾਂ ਪ੍ਰਤੀ ਬੱਚਾ 90-100 ਰੁਪਏ ਤੁਹਾਨੂੰ ਮਿਲੇਗਾ ਇਸ ਦਾ ਅੰਡਾ 45-50 ਰੁਪਏ ਪ੍ਰਤੀ ਅੰਡਾ ਸੇਲ ਹੋ ਜਾਂਦਾ ਹੈ 3 ਮਹੀਨੇ ਤੱਕ ਇੱਕ ਬੱਚੇ ਦੇ ਪਾਲਣ ਤੇ ਖਰਚਾ 150 ਰੁਪਏ ਹੁੰਦਾ ਹੈ ਤੇ ਜਦੋਂ ਚੂਚੇ ਵੱਡੇ ਹੋ ਜਾਂਦੇ ਹਨ ਤਾਂ 1500 ਰੁਪਏ ਆਮਦਨ ਹੋ ਜਾਂਦੀ ਹੈ ਇਸ ਨੂੰ ਫੀਡ ਨਾਰਮਲ ਬਰੈਲਰ ਵਾਲੀ ਦੇ ਸਕਦੇ ਹੋ ਜਾਂ ਇਸ ਦੇ ਨਾਲ ਪਾਲਕ ਵੀ ਖਵਾ ਸਕਦੇ ਹੋ ਜਿਸ ਵਿੱਚ ਆਇਰਨ ਹੁੰਦਾ ਹੈ ਜੋ ਇਸ ਲਈ ਫਾਇਦੇਮੰਦ ਹੁੰਦਾ ਹੈ ਅਤੇ ਕੜਕਨਾਥ ਮੁਰਗੀ ਸਾਲ ਵਿਚ 120-130 ਅੰਡੇ ਦਿੰਦੀ ਹੈ ਅਤੇ ਕੜਕਨਾਥ ਲੈਣ ਲਈ ਮੇਰੇ ਨਾਲ 9781589637 ਸੰਪਰਕ ਕਰ ਸਕਦੇ ਹੋ

Posted by Suresh kumar
Uttar Pradesh
24-10-2019 10:25 AM
इसके बहुत सारे कारन हो सकते है जी आप अपने ज़िले के ADO से मिले वह चेक कर सकते है जी

Posted by pravin
Bihar
24-10-2019 10:20 AM
श्रीमान जी नवंबर में गेहूं, सरसों, चना और जों की बिजाई कर सकते है

Posted by Shivam Mittal
Punjab
24-10-2019 10:13 AM
यदि आप डेयरी फार्मिंग का काम शुरू करना चाहते है तो सबसे पहले आप इस काम को ट्रेनिंग लेकर शुरू करें और एक बार में इक्ट्ठी गाय ना खरीदें गायों को 2-2 महीनों के फासले पर खरीदें या फिर 3 पहले खरीदें ओर 3 महीने बाद फिर खरीद लें इससे दूध की कमी नहीं आयेगी पशु की नसल सबसे ज्यादा जरूरी है पशु खरीदने के समय कोशिश करें कि दिन.... (Read More)
यदि आप डेयरी फार्मिंग का काम शुरू करना चाहते है तो सबसे पहले आप इस काम को ट्रेनिंग लेकर शुरू करें और एक बार में इक्ट्ठी गाय ना खरीदें गायों को 2-2 महीनों के फासले पर खरीदें या फिर 3 पहले खरीदें ओर 3 महीने बाद फिर खरीद लें इससे दूध की कमी नहीं आयेगी पशु की नसल सबसे ज्यादा जरूरी है पशु खरीदने के समय कोशिश करें कि दिन में तीन बार दूध निकालकर ही पशु खरीदें भैंसो का एक दिन का दूध 12 लीटर और गायों को दूध 16-17 लीटर से कम ना हो गाभिनों को खरीदने का सही समय रखड़ियों से लेकर वैशाखी तक का होता है क्योंकि इस समय मौसम अच्छा होने के कारण हरा चारा भी खुला होता है गाभिनों के लिए शैड आवाजाई वाली सड़क पर ना बनायें और शैड सड़क से कम से कम 100 गज दूर हो शैड को धूप और हवा का ध्यान रखकर ही बनायें शैड हमेशा खेत या आस पास से 2 फुट ऊंचा बनायें क्योंकि निचले स्थान पर पानी खड़ा हो जाता है जिस कारण गंदगी पैदा हो जाती है और बाकी पशुओं का मल मूत्र का निकास भी आसानी से हो जाता है पशुओं के लिए बनायी जाने वाली खुरली ढाई तीन फुट चौड़ी होनी चाहिए खुरली पर खड़ने के लिए एक पशु को तकरीबन चार फुट जगह चाहिए मतलब 10 पशुओं के लिए 40 फुट लंबी खुरली बनेगी डेयरी फार्म से संबंधित सामान रखने के लिए स्टोर बनायें पशुओं का वितरण/दाना स्टोर करने के लिए कमरा सैलाब से रहित होना चाहिए शैड का फर्श पक्क, फिसलन रहित और जल्दी साफ होने वाला हो शैड में जितना हो सके पशुओं को खुला छोंड़े और पानी और दाना पूरा डालें पशु को खुला छोड़ने से पशुओं में अफारे की समस्या कम आती है बाकी अपनी आवश्यकता और क्षमता के मुताबिक ही सामान खरीदें और आर्थिक नुकसान से बचने के लिए प्रत्येक गाभिन का बीमा जरूर करवायें, डेयरी फार्मिंग के लिए लोन अलग अलग कामों के लिए मिलता है जैसे शैड के लिए, पशुओं के लिए, डेयरी मशीनरी के लिए सबसे पहले आपने जिसके लिए लोन लेना है उस संबंधी आवेदन नज़दीक के डिप्टी डायरेक्टर को मिलकर दें, इसके लिए आपके पास डेयरी ट्रेनिंग होनी जरूरी है उसके सर्टीफिकेट के हिसाब से आपको लोन मिलेगा यह ट्रेनिंग आप अपने नज़दीकी केवीके से प्राप्त कर सकते है वहां समय समय पर ट्रेनिंग दी जाती है आप वहां जाकर अपना फार्म भर आए जब भी वहां ट्रेनिंग होगी तो आपको फोन करके बता दिया जाएगा..
Posted by Rakesh Kumar
Uttar Pradesh
24-10-2019 10:13 AM
आलू की खेती के लिए तापमान 14-25* C होना चाहिए यह फसल बहुत तरह की मिट्टी जैसे कि रेतली, नमक वाली, दोमट और चिकनी मिट्टी में उगाई जा सकती है अच्छे जल निकास वाली, जैविक तत्व भरपूर, रेतली से दरमियानी ज़मीन में फसल अच्छी पैदावार देती है यह फसल नमक वाली तेजाबी ज़मीनों में भी उगाई जा सकती है पर बहुत ज्यादा जल जमाव और खारी या न.... (Read More)
आलू की खेती के लिए तापमान 14-25* C होना चाहिए यह फसल बहुत तरह की मिट्टी जैसे कि रेतली, नमक वाली, दोमट और चिकनी मिट्टी में उगाई जा सकती है अच्छे जल निकास वाली, जैविक तत्व भरपूर, रेतली से दरमियानी ज़मीन में फसल अच्छी पैदावार देती है यह फसल नमक वाली तेजाबी ज़मीनों में भी उगाई जा सकती है पर बहुत ज्यादा जल जमाव और खारी या नमक वाली ज़मीन इस फसल की खेती के लिए उचित नहीं होती इसकी किस्मे जैसे के Kufri Bahar, Kufri Badshah, Kufri Sutlaj, Kufri Anand, Kufri Pukhraj, Kufri Chipsona 2, Kufri Chipsona 1, Kufri Chandramukhi, Kufri Jyoti, Kufri Ashoka, Kufri Lalima की बुवाई कर सकते है खेत को एक बार 30 सैं.मी. गहरा जोतकर अच्छे ढंग से बैड बनाएं जोताई के बाद 2-3 बार तवियां फेरें और फिर 2-3 बार सुहागा फेरें बिजाई से पहले खेत में नमी की मात्रा बनाकर रखें बिजाई के लिए दो ढंग मुख्य तौर पर प्रयोग किए जाते हैं 1. मेंड़ और खालियों वाला ढंग 2. समतल बैडों वाला ढंग अगेती बिजाई के लिए, सितंबर के आखिरी सप्ताह से अक्तूबर का पहला सप्ताह खेती के लिए उपयुक्त होता है मुख्य फसल के लिए अक्तूबर का दूसरे से चौथा सप्ताह बिजाई के लिए उपयुक्त समय होता है गांठों के आकार के अनुसार रोपाई का फासला विभिन्न होता है बिजाई के लिए कतार से कतार में 60 सैं.मी. और पौधे से पौधे में 20 सैं.मी. फासले का प्रयोग करें बीज बोने के बाद बीजों को 8-10 सैं.मी. तक मिट्टी की परत से ढक दें बिजाई के लिए ट्रैक्टर से चलने वाली सेमी ऑटोमेटिक या ऑटोमैटिक प्लांटर का प्रयोग करें रोपाई के लिए बड़ी आकार की गांठों का प्रयोग किया जाता है बिजाई के लिए 13-15 क्विंटल बीज प्रयोग किए जाते हैं बिजाई के लिए सेहतमंद आलू ही चुने बिजाई से पहले आलुओं को कोल्ड स्टोर से निकालकर 1-2 सप्ताह के लिए छांव वाले स्थान पर रखें ताकि वे अंकुरित हो जायें आलुओं के सही अंकुरन के लिए उन्हें जिबरैलिक एसिड 1 ग्राम प्रति 10 लीटर पानी में मिलाकर एक घंटे के लिए उपचार करें फिर छांव में सुखाएं और 10 दिनों के लिए हवादार कमरे में रखें फिर काटकर आलुओं को मैनकोजेब 0.5 प्रतिशत घोल (5 ग्राम प्रति लीटर पानी) में 10 मिनट के लिए भिगो दें इससे आलुओं को शुरूआती समय में गलने से बचाया जा सकता है आलुओं को गलने और जड़ों में कालापन रोग से बचाने के लिए साबुत और काटे हुए आलुओं को 6 प्रतिशत मरकरी के घोल (टैफासन) 0.25 प्रतिशत (2.5 ग्राम प्रति लीटर पानी) में डालें यदि संभव हो, तो आलू की रोपाई से पहले, हरी खाद वाली फसलें जैसे सनई, जंतर आदि फसलें उगायें और उन्हें मिट्टी में अच्छी तरह दबायें यदि हरी खाद उपलब्ध ना हो तो गली सड़ी रूड़ी की खाद या गाय का गला हुआ गोबर 60-80 क्विंटल प्रति एकड़ में खेत की तैयारी के समय रोपाई से दो सप्ताह पहले डालें फसल की उचित वृद्धि के लिए नाइट्रोजन 40-50 किलो (90-110 किलो यूरिया), फासफोरस 24-32 किलो (150-200 किलो सिंगल सुपर फासफेट) और पोटाश 40-50 किलो (66-85 किलो म्यूरेट ऑफ पोटाश) की मात्रा प्रति एकड़ में डालें बिजाई से पहले सिंचाई करें बिजाई के बाद 10-12 दिनों के अंदर अंदर पहली सिंचाई करें दूसरी सिंचाई पहली सिंचाई के 7 दिनों के बाद करें बाकी की सिंचाइयां जलवायु की परिस्थितियों और जरूरत के अनुसार करें गांठे बनने की अवस्था सिंचाई के लिए बहुत महत्तवपूर्ण होती है इस अवस्था में पानी की कमी ना होने दें ज्यादा सिंचाई ना करें इससे गलने की बीमारी का खतरा बढ़ता है पुटाई से 10-12 दिन पहले सिंचाई बंद कर दें धन्यवाद

Posted by pravin
Bihar
24-10-2019 10:12 AM
प्रवीण जी अभी आप सब्जियां जैसे गाजर, शलगम, फूलगोभी, आलू, टमाटर, काली सरसों के बीज, मूली, पालक, पत्ता गोभी, कोहीराबी, धनिया, सौंफ के बीज, राजमा, मटर, ब्रोकोली, सलाद, बैंगन, हरी प्याज, ब्रसल्स स्प्राउट, लहसुन की बिजाई कर सकते है धन्यवाद

Posted by Sunil Hittinahalli
Karnataka
24-10-2019 10:07 AM
सुनील जी मूंगफली की कटाई बिजाई से 125—150 दिनों बाद होती है

Posted by Amritpal singh
Punjab
24-10-2019 10:02 AM
ਤੁਸੀ ਮੱਕੀ ਅਤੇ ਚਰੀ ਦਾ ਇਕੱਠਾ ਅਚਾਰ ਬਣਾ ਸਕਦੇ ਹੋ, ਸਿਰਫ ਇਸ ਗੱਲ ਦਾ ਦੀਆਂ ਰੱਖਣਾ ਜਰੂਰੀ ਹੈ ਕਿ ਅਚਾਰ ਤਿਆਰ ਕਰਦੇ ਸਮੇ ਟੋਆ ਬਿਲਕੁਲ ਹਵਾ ਰਹਿਤ ਹੋਣਾ ਚਾਹੀਦਾ ਹੈ. ਸਾਈਲੇਜ ਤਿਆਰ ਕਰਨ ਲਈ ਟੋਆ: ਟੋਏ ਦਾ ਆਕਾਰ, ਪਸ਼ੁਆਂ ਦੀ ਗਿਣਤੀ, ਹਰੇ ਚਾਰੇ ਦੀ ਮਿਕਦਾਰ ਅਤੇ ਉਸ ਨੂੰ ਜਿੰਨੇ ਸਮੇਂ ਲਈ ਚਾਰਨਾ ਹੈ, ਤੇ ਨਿਰਭਰ ਕਰਦਾ ਹੈ ਆਮ ਤੌਰ ਤੇ ਇਕ ਘਣ ਮੀਟਰ ਥਾਂ ਤੇ 5-6 ਕੁਇੰਟਲ ਕੱਟਿਆ ਹੋਇਆ ਹਰਾ ਚਾਰ.... (Read More)
ਤੁਸੀ ਮੱਕੀ ਅਤੇ ਚਰੀ ਦਾ ਇਕੱਠਾ ਅਚਾਰ ਬਣਾ ਸਕਦੇ ਹੋ, ਸਿਰਫ ਇਸ ਗੱਲ ਦਾ ਦੀਆਂ ਰੱਖਣਾ ਜਰੂਰੀ ਹੈ ਕਿ ਅਚਾਰ ਤਿਆਰ ਕਰਦੇ ਸਮੇ ਟੋਆ ਬਿਲਕੁਲ ਹਵਾ ਰਹਿਤ ਹੋਣਾ ਚਾਹੀਦਾ ਹੈ. ਸਾਈਲੇਜ ਤਿਆਰ ਕਰਨ ਲਈ ਟੋਆ: ਟੋਏ ਦਾ ਆਕਾਰ, ਪਸ਼ੁਆਂ ਦੀ ਗਿਣਤੀ, ਹਰੇ ਚਾਰੇ ਦੀ ਮਿਕਦਾਰ ਅਤੇ ਉਸ ਨੂੰ ਜਿੰਨੇ ਸਮੇਂ ਲਈ ਚਾਰਨਾ ਹੈ, ਤੇ ਨਿਰਭਰ ਕਰਦਾ ਹੈ ਆਮ ਤੌਰ ਤੇ ਇਕ ਘਣ ਮੀਟਰ ਥਾਂ ਤੇ 5-6 ਕੁਇੰਟਲ ਕੱਟਿਆ ਹੋਇਆ ਹਰਾ ਚਾਰਾ ਸੰਭਾਲਿਆ ਜਾ ਸਕਦਾ ਹੈ 10 ਮੀਟਰ ਲੰਮਾ, 3 ਮੀਟਰ ਚੌੜਾ ਤੇ 1.5 ਮੀਟਰ ਡੂੰਘਾ ਟੋਆ 350-400 ਕੁਇੰਟਲ ਹਰਾ ਚਾਰਾ ਸੰਭਾਲਣ ਦੀ ਸਮਰੱਥਾ ਰੱਖਦਾ ਹੈ ਟੋਏ ਦੀ ਲੰਬਾਈ, ਚੌੜਾਈ ਪਸ਼ੂਆਂ ਦੀ ਗਿਣਤੀ ਅਤੇ ਉਨ੍ਹਾਂ ਦੀ ਜ਼ਰੂਰਤ ਅਨੁਸਾਰ ਘੱਟ ਵੱਧ ਹੋ ਸਕਦੀ ਹੈ ਪ੍ਰੰਤੂ ਡੂੰਘਾਈ ਹਮੇਸ਼ਾ 1.5 ਤੋਂ 2 ਮੀਟਰ ਹੋਣੀ ਚਾਹੀਦੀ ਹੈ ਟੋਆ ਪਸ਼ੂਆਂ ਦੇ ਢਾਰੇ ਦੇ ਨੇੜੇ ਉੱਚੀ ਥਾਂ ਤੇ ਬਣਾਉਣਾ ਚਾਹੀਦਾ ਹੈ ਇਹ ਪੱਕਾ ਅਤੇ ਸੀਮਿੰਟ ਨਾਲ ਪਲੱਸਤਰ ਕੀਤਾ ਹੋਣਾ ਚਾਹੀਦਾ ਹੈ ਅਚਾਰ ਬਨਾਉਣ ਦੇ ਢੰਗ: (੧) ਕੱਟੀ ਹੋਈ ਫ਼ਸਲ ਦਾ 5 ਤੋਂ 8 ਸੈਂਟੀਮੀਟਰ ਦੇ ਹਿਸਾਬ ਨਾਲ ਕੁਤਰਾ ਕਰ ਲਓ ਤੇ ਇਸ ਨੂੰ ਟੋਏ ਵਿਚ ਭਰ ਦਿਓ (੨) ਟੋਏ ਵਿਚ ਕੁਤਰ ਕੇ ਪਾਏ ਚਾਰੇ ਨੂੰ ਟਰੈਕਟਰ ਜਾਂ ਬਲਦਾਂ ਦੀ ਸਹਾਇਤਾ ਨਾਲ ਚੰਗੀ ਤਰ੍ਹਾਂ ਦਬਾ ਦਿਓ ਤੇ ਇਸ ਨੂੰ ਜ਼ਮੀਨ ਦੀ ਸਤਹ ਤੋਂ ਇਕ ਮੀਟਰ ਉੱਚਾ ਰੱਖੋ ਵਧੀਆ ਆਚਾਰ ਤਿਆਰ ਕਰਨ ਲਈ ਜ਼ਰੂਰੀ ਹੈ ਕਿ ਹਰ ਅੱਧ ਮੀਟਰ ਦੀ ਚਾਰੇ ਦੀ ਤਹਿ ਨੂੰ ਚੰਗੀ ਤਰ੍ਹਾਂ ਦਬਾਇਆ ਜਾਵੇ (੩) ਇਸ ਨੂੰ ਉਪਰੋਂ ਕੜਬ ਜਾਂ ਤੂੜੀ ਦੀ 10-15 ਸੈਂਟੀਮੀਟਰ ਮੋਟੀ ਤਹਿ ਨਾਲ ਢੱਕ ਦਿਓ ਫਿਰ ਇਸ ਉੱਪਰ ਮਿੱਟੀ ਪਾ ਕੇ ਲਿਪ ਦਿਉ ਇਹ ਧਿਆਨ ਰੱਖੋ ਕਿ ਟੋਇਆ ਪੂਰੀ ਤਰ੍ਹਾਂ ਹਵਾ ਬੰਦ ਹੋਵੇ (੪) ਇਸ ਕੰਮ ਲਈ ਦੱਬੇ ਹੋਏ ਚਾਰੇ ਉੱਪਰ ਪਲਾਸਟਿਕ ਦੀ ਚਾਦਰ ਵਿਛਾ ਕੇ ਇਸ ਦੇ ਕਿਨਾਰੇ ਗੋਹੇ ਰਲੀ ਮਿੱਟੀ ਨਾਲ ਵੀ ਬੰਦ ਕੀਤੇ ਜਾ ਸਕਦੇ ਹਨ (੫) ਇਸ ਦੀ ਪੂਰੀ ਨਿਗਰਾਨੀ ਰੱਖੋ ਕਿ ਚਾਰੇ ਦੇ ਲੇਪ ਉੱਪਰ ਕੋਈ ਮੋਰੀ ਜਾਂ ਤ੍ਰੇੜ ਨਾ ਆਵੇ ਜੇਕਰ ਅਜਿਹਾ ਹੋ ਜਾਵੇ ਤਾਂ ਇਸ ਨੂੰ ਛੇਤੀ ਬੰਦ ਕਰ ਦਿਓ ਅਚਾਰ 45 ਦਿਨਾਂ ਤੱਕ ਤਿਆਰ ਹੋ ਜਾਵੇਗਾ (੬) ਵਰਤਣ ਵੇਲੇ ਅਚਾਰ ਦੇ ਟੋਏ ਨੂੰ ਇਕ ਪਾਸੇ ਤੋਂ ਖੋਲ੍ਹੋ ਹਰ ਰੋਜ਼ ਦੀ ਵਰਤੋਂ ਅਨੁਸਾਰ ਚਾਰਾ ਕੱਢ ਕੇ ਬਾਕੀ ਰਹਿੰਦਾ ਚਾਰਾ ਚੰਗੀ ਤਰ੍ਹਾਂ ਬੰਦ ਕਰ ਦਿਉ ਇਸ ਤਰ੍ਹਾਂ ਚਾਰਾ ਜ਼ਿਆਦਾ ਦੇਰ ਤੱਕ ਠੀਕ ਰਹੇਗਾ ਪਸ਼ੂਆਂ ਨੂੰ ਅਚਾਰ ਖਵਾਉਣਾ : ਹੋ ਸਕਦਾ ਹੈ ਕਿ ਪਸ਼ੂ ਪਹਿਲੇ ਕੁਝ ਦਿਨ ਅਚਾਰ ਪਸੰਦ ਨਾ ਕਰਨ ਇਸ ਲਈ ਪਹਿਲੇ 5-6 ਦਿਨ 5-10 ਕਿਲੋ ਅਚਾਰ ਹਰੇ ਚਾਰੇ ਵਿਚ ਰਲਾ ਕੇ ਉਨ੍ਹਾਂ ਨੂੰ ਪਾਓ ਬਾਅਦ ਵਿਚ ਹਰ ਪਸ਼ੂ ਨੂੰ 20-30 ਕਿਲੋ ਅਚਾਰ ਰੋਜ਼ਾਨਾ ਦੂਸਰੇ ਚਾਰਿਆਂ ਨਾਲ ਮਿਲਾ ਕੇ ਦਿੱਤਾ ਜਾ ਸਕਦਾ ਹੈ..

Posted by Rajwinder singh Dhillon
Punjab
24-10-2019 09:58 AM
rajwinder ji eh boron di kami de karn hundi hai isde layi tuc boron@1-1.5 gram nu prati litre pani de hisab nal spray karo. isto ilava tuc isda sinchai parbandhan sahi karo.dhanwad
Posted by surendra
Uttar Pradesh
24-10-2019 09:55 AM
बास्मती 1121 (2860-3280), 1509 (2470-2730) के आस पास चल रहा है
Posted by T s sandhu
Punjab
24-10-2019 09:46 AM
Tindar SARPANCH ji 1121 da rate 2970 - 3290 de lag bhag chal reha hai, Thankyou.

Posted by Tera Deep
Punjab
24-10-2019 09:31 AM
ਬੱਕਰੀ ਪਾਲਣ ਸ਼ੁਰੂਆਤ ਕਰਨ ਲਈ ਤੁਸੀ 10 ਬੱਕਰੀਆਂ ਅਤੇ 2 ਬਕਰਿਆਂ ਨਾਲ ਕਰ ਸਕਦੇ ਹੋ ਇਹਨਾਂ ਦੀ ਖੁਰਾਕ ਅਵਸਥਾ ਘਟ ਹੁੰਦੀ ਹੈ ਇਸ ਲਈ ਅਸੀਂ ਇਹਨਾਂ ਨੂੰ ਅਸਾਨੀ ਨਾਲ ਪਾਲ ਸਕਦੇ ਹਾਂ ਇਹ ਹਰ ਪ੍ਰਕਾਰ ਦੇ ਵਾਤਾਵਰਨ ਵਿੱਚ ਪਾਲੀਆਂ ਜਾ ਸਕਦੀਆਂ ਹਨ ਬਕਰੀਆਂ12-14 ਮਹੀਨਿਆਂ ਵਿੱਚ ਬੱਚੇ ਦੇਣਾ ਸ਼ੁਰੂ ਕਰ ਦੇਂਦੀਆਂ ਹਨ ਬਕਰੀ ਦਾ ਗਰਬ ਸਮਾਂ 150 ਦਿਨ ਦਾ ਹੁੰਦਾ ਹੈ ਅਤੇ ਸਾਲ ਵਿੱਚ 1-5 ਬੱਚੇ ਦਿੰਦਿਆਂ ਹਨ ਸ.... (Read More)
ਬੱਕਰੀ ਪਾਲਣ ਸ਼ੁਰੂਆਤ ਕਰਨ ਲਈ ਤੁਸੀ 10 ਬੱਕਰੀਆਂ ਅਤੇ 2 ਬਕਰਿਆਂ ਨਾਲ ਕਰ ਸਕਦੇ ਹੋ ਇਹਨਾਂ ਦੀ ਖੁਰਾਕ ਅਵਸਥਾ ਘਟ ਹੁੰਦੀ ਹੈ ਇਸ ਲਈ ਅਸੀਂ ਇਹਨਾਂ ਨੂੰ ਅਸਾਨੀ ਨਾਲ ਪਾਲ ਸਕਦੇ ਹਾਂ ਇਹ ਹਰ ਪ੍ਰਕਾਰ ਦੇ ਵਾਤਾਵਰਨ ਵਿੱਚ ਪਾਲੀਆਂ ਜਾ ਸਕਦੀਆਂ ਹਨ ਬਕਰੀਆਂ12-14 ਮਹੀਨਿਆਂ ਵਿੱਚ ਬੱਚੇ ਦੇਣਾ ਸ਼ੁਰੂ ਕਰ ਦੇਂਦੀਆਂ ਹਨ ਬਕਰੀ ਦਾ ਗਰਬ ਸਮਾਂ 150 ਦਿਨ ਦਾ ਹੁੰਦਾ ਹੈ ਅਤੇ ਸਾਲ ਵਿੱਚ 1-5 ਬੱਚੇ ਦਿੰਦਿਆਂ ਹਨ ਸਾਲ ਵਿੱਚ 2 ਬੱਚੇ ਦੇਨਾ ਆਮ ਗੱਲ ਹੁੰਦੀ ਹੈ ਬਕਰੀਆਂ 8-10 ਸਾਲ ਤਕ ਬੱਚੇ ਦਿੰਦਿਆਂ ਹਨ ਅਤੇ ਆਪਣੀ ਗਿਣਤੀ ਵਿੱਚ ਤੇਜੀ ਨਾਲ ਵਾਧਾ ਕਰ ਲੈਂਦਿਆਂ ਹਨ ਪੰਜਾਬ ਵਿੱਚ ਤੁਸੀ ਬਰਬਰੀ, ਬਲੈਕ ਬੰਗਾਲ, ਸਿਰੋਹੀ ਆਦਿ ਨਸਲ ਪਾਲ ਸਕਦੇ ਹੋ ਇਹ ਤੁਹਾਨੂੰ ਨੇੜੇ ਦੇ ਕਿਸੇ ਸਫਲ ਬੱਕਰੀ ਪਾਲਕ ਜਾਂ ਵੈਟਨਰੀ ਯੂਨੀਵਰਸਿਟੀ ਤੋਂ ਪ੍ਰਾਪਤ ਕਰ ਸਕਦੇ ਹੋ ਬਾਕੀ ਤੁਸੀਂ ਉਸ ਕਿਸਾਨ ਨੂੰ ਮਿਲ ਸਕਦੇ ਹੋ ਜੋ ਪਹਿਲਾਂ ਕਈ ਸਾਲਾਂ ਤੋਂ ਬੱਕਰੀ ਫਾਰਮ ਚਲਾ ਰਿਹਾ ਹੋਵੇ.

Posted by Swapnil Rajpoot
Madhya Pradesh
24-10-2019 09:24 AM
मिट्टी की जांच के आधार पर खादें डालें मिट्टी की जांच के अनुसार ही हम मिट्टी में आवश्यक खादों की मात्रा दे सकते हैं
सिंचित क्षेत्रों के लिए, नाइट्रोजन 60 किलो (यूरिया 130 किलो), फासफोरस 24 किलो (एस एस पी 150 किलो), पोटाश 12 किलो (म्यूरेट ऑफ पोटाश 20 किलो) प्रति एकड़ में डालें नाइट्रोजन की आधी मात्रा और फासफोरस और पोटाश क.... (Read More)
मिट्टी की जांच के आधार पर खादें डालें मिट्टी की जांच के अनुसार ही हम मिट्टी में आवश्यक खादों की मात्रा दे सकते हैं
सिंचित क्षेत्रों के लिए, नाइट्रोजन 60 किलो (यूरिया 130 किलो), फासफोरस 24 किलो (एस एस पी 150 किलो), पोटाश 12 किलो (म्यूरेट ऑफ पोटाश 20 किलो) प्रति एकड़ में डालें नाइट्रोजन की आधी मात्रा और फासफोरस और पोटाश की पूरी मात्रा बिजाई के समय डालें बाकी नाइट्रोजन को पहली सिंचाई के समय डालें
बारानी क्षेत्रों के लिए, नाइट्रोजन 24 किलो (यूरिया 52 किलो), फासफोरस 12 किलो (एस एस पी 75 किलो), पोटाश 8 किलो (म्यूरेट ऑफ पोटाश 15 किलो) प्रति एकड़ में डालें नाइट्रोज, फासफोरस और पोटाश की पूरी मात्रा बिजाई के समय डालें
सिंचित क्षेत्रों में पिछेती बिजाई के लिए, नाइट्रोजन 50 किलो (यूरिया 110 किलो), फासफोरस 12 किलो (एस एस पी 75 किलो), पोटाश 16 किलो (म्यूरेट ऑफ पोटाश 27 किलो) प्रति एकड़ में डालें नाइट्रोजन की एक तिहाई मात्रा और फासफोरस और पोटाश की पूरी मात्रा बिजाई के समय डालें बाकी बची नाइट्रोजन की दो तिहाई मात्रा बिजाई के 35-40 दिनों के बाद डालें
यह पाया गया है कि जिंक सल्फेट 10 किलो प्रति एकड़ में डालने से उपज में वृद्धि होती है जिंक की कमी को पूरा करने के लिए जिंक सल्फेट 0.5 प्रतिशत की फोलियर स्प्रे करें 15 दिनों के अंतराल पर दो से तीन स्प्रे करें

Posted by Vivek nishad
Uttar Pradesh
24-10-2019 09:12 AM
विवेक जी कृप्या आप अपना सवाल विस्तार से पूछें कि आप क्या जानकारी लेना चाहते है ताकि आपको सही जानकारी दी जा सके
Posted by jitendra kr.bharti
Jharkhand
24-10-2019 09:09 AM
यह तरीका छोटे और दरमियाने मिकदार में मशरूम पैदा करने वाले काश्तकार के लिए तैयार किया गया है यह तरीका आसान और सस्ता है इसके लिए तापमान और नमी को नियंत्रण रखने के जटिल ढंग प्रयोग करने की जरुरत नहीं है और ना ही इस के लिए अलग कमरे की जरुरत होती है पंजाब और इसके साथ वाले मैदानी इलाकों में आम तौर पर लम्बे तरीके से .... (Read More)
यह तरीका छोटे और दरमियाने मिकदार में मशरूम पैदा करने वाले काश्तकार के लिए तैयार किया गया है यह तरीका आसान और सस्ता है इसके लिए तापमान और नमी को नियंत्रण रखने के जटिल ढंग प्रयोग करने की जरुरत नहीं है और ना ही इस के लिए अलग कमरे की जरुरत होती है पंजाब और इसके साथ वाले मैदानी इलाकों में आम तौर पर लम्बे तरीके से ही कंपोस्ट तैयार की जाती है ये तरीके संक्षिप्त में नीचे लिखे अनुसार ही प्रयोग किए जाते हैं ड़ी या कटी हुई पराली को पक्के फर्श पर बिछा कर साफ पानी से अच्छी तरह गीला कर दिया जाता है फिर इसे एक ढीली सी ढेरी के रूप में 48 घंटों के लिए रहने दिया जाता है ताकि यह काफी पानी ( 70 -75 % ) चूस ले, साथ ही खादों और गेहूं की छानस को सूख मिला लिया जाता है इस तरह तैयार हुए मिश्रण पर पानी डाला जाता है ताकि छानस पानी को अच्छी तरह सोख ले इस मिश्रण की ढेरी सी बनाकर रात भर रखी जाती है और उस पर गीली बोरी डाल दी जाती है उसके बाद पराली को पक्के फर्श पर तंगली से बिखेर दिया जाता है और उस पर खाद मिश्रित छानस का बुरकाव कर अच्छी तरह मिला दिया जाता है इस मिश्रण को लकड़ी के एक सांचे में जो कि 5 फुट चौड़ा, 5 फुट लंबा और 5 फुट ऊँचा होता है, जमा दिया जाता है तैयार की जाने वाली कंपोस्ट की मिकदार के हिसाब से सांचे की लंबाई अधिक या कम की जा सकती है
लेकिन अच्छा यही है कि सांचे की ऊँचाई और चौड़ाई 5—5 फुट से अधिक ना रखी जाए ढेर लगाने के बाद लकड़ी के फट्टे उतार दिए जाते हैं यह अच्छी आकार में बनी ढेरी के तौर पर एक बढ़िया कंपोस्ट तैयार होती है जिससे खुंब की उपज बढ़ जाती है तीन क्विंटल तूड़ी से लगभग 570—580 किलो कंपोस्ट तैयार हो जाती है जिसमें 67—70% नमी होती है जो कि 12 वर्ग मीटर क्षेत्र में 50 किलो/वर्ग मीटर कंपोस्ट के हिसाब से बोयी जाती है इसके लिए 60 फलों की खाली पेटियां (7 गहरी ) या 24 x 16 के प्लास्टिक के लिफाफे चाहिए

Posted by gurpal singh
Punjab
24-10-2019 09:04 AM
ਗੁਰਪਾਲ ਜੀ ਕਿਰਪਾ ਕਰਕੇ ਇਹ ਦਸੋ ਤੁਸੀ ਆਪਣੇ ਪਾਣੀ ਦਾ ਖਾਰਾਪਨ ਚੈੱਕ ਕਰਵਾਇਆ ਹੈ ਅਤੇ ਉਹ ਕਿੰਨਾ ਆਇਆ ਹੈ ਤਾਂ ਜੋ ਤੁਹਾਨੂੰ ਉਸਦੇ ਹਿਸਾਬ ਨਾਲ ਸਹੀ ਜਾਣਕਾਰੀ ਦਿਤੀ ਜਾ ਸਕੇ

Posted by ਜੁਗਰਾਜ ਸਿੰਘ ਔਲਖ
Punjab
24-10-2019 09:02 AM
22 g phli de minti kis tra kiti jandi va kis tra foot nu kanal ch ja Marla ch convert kita Jada va ?
Jugraj singh ji 1 marle vich 272 square feet hunde hai, 20marlea da 1 knal hunda hai ate 8knal da 1 aker hunda hai, Thankyou.

Posted by संजय कुमार शर्मा
Rajasthan
24-10-2019 08:55 AM
श्रीमान जी जों की बिजाई नवंबर के आखिर से दिसंबर के आखिर तक बोय सकते है

Posted by Balraj Aulakh
Punjab
24-10-2019 08:36 AM
tuci uss nu Lupid tablet rojana 1 goli, Cipro 150mg tablet 1 goli rojana deo ate uss nu Broton liquid 2ml rojana deo..
Posted by Arun
Uttar Pradesh
24-10-2019 08:18 AM
श्रीमान जी ये हल्दी रोग है इसकी रोकथाम के लिए koside@500 gm प्रति एकड़ 120 लीटर पानी में स्प्रे कर सकते है
Posted by pappu yadav
Bihar
24-10-2019 08:17 AM
Pappu yadav ji Mushroom seed ka rate kisam ke adhar par alag alag hai, seed len lai tusi Mr. jai bhadouriya 8882876224 nal samparak kar sakde ho, Thankyou.
Posted by Sudheer Rana
Uttar Pradesh
24-10-2019 08:14 AM
मिट्टी की जांच के आधार पर खादें डालें मिट्टी की जांच के अनुसार ही हम मिट्टी में आवश्यक खादों की मात्रा दे सकते हैं
सिंचित क्षेत्रों के लिए, नाइट्रोजन 60 किलो (यूरिया 130 किलो), फासफोरस 24 किलो (एस एस पी 150 किलो), पोटाश 12 किलो (म्यूरेट ऑफ पोटाश 20 किलो) प्रति एकड़ में डालें नाइट्रोजन की आधी मात्रा और फासफोरस और पोटाश क.... (Read More)
मिट्टी की जांच के आधार पर खादें डालें मिट्टी की जांच के अनुसार ही हम मिट्टी में आवश्यक खादों की मात्रा दे सकते हैं
सिंचित क्षेत्रों के लिए, नाइट्रोजन 60 किलो (यूरिया 130 किलो), फासफोरस 24 किलो (एस एस पी 150 किलो), पोटाश 12 किलो (म्यूरेट ऑफ पोटाश 20 किलो) प्रति एकड़ में डालें नाइट्रोजन की आधी मात्रा और फासफोरस और पोटाश की पूरी मात्रा बिजाई के समय डालें बाकी नाइट्रोजन को पहली सिंचाई के समय डालें
बारानी क्षेत्रों के लिए, नाइट्रोजन 24 किलो (यूरिया 52 किलो), फासफोरस 12 किलो (एस एस पी 75 किलो), पोटाश 8 किलो (म्यूरेट ऑफ पोटाश 15 किलो) प्रति एकड़ में डालें नाइट्रोज, फासफोरस और पोटाश की पूरी मात्रा बिजाई के समय डालें
सिंचित क्षेत्रों में पिछेती बिजाई के लिए, नाइट्रोजन 50 किलो (यूरिया 110 किलो), फासफोरस 12 किलो (एस एस पी 75 किलो), पोटाश 16 किलो (म्यूरेट ऑफ पोटाश 27 किलो) प्रति एकड़ में डालें नाइट्रोजन की एक तिहाई मात्रा और फासफोरस और पोटाश की पूरी मात्रा बिजाई के समय डालें बाकी बची नाइट्रोजन की दो तिहाई मात्रा बिजाई के 35-40 दिनों के बाद डालें
यह पाया गया है कि जिंक सल्फेट 10 किलो प्रति एकड़ में डालने से उपज में वृद्धि होती है जिंक की कमी को पूरा करने के लिए जिंक सल्फेट 0.5 प्रतिशत की फोलियर स्प्रे करें 15 दिनों के अंतराल पर दो से तीन स्प्रे करें

Posted by Vikas Thory
Haryana
24-10-2019 08:00 AM
आप भैंस को Amoxirum forte injection 4.5gm, Megludyne injection 20ml, CRB injection 20ml, vitum-H injection 5ml, Isoflud injection 5ml लगवायें ये आपने 3 दिन लगाने है और उसे Mammidium पाउडर 50 ग्राम रोजाना दें सिर्फ Isoflud injection 5ml पहले और तीसरे दिन लगाना है इससे फर्क पड़ जाएगा
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