Posted by Gurdeep Dholran
Punjab
25-10-2019 06:11 AM
ਸ੍ਰੀ ਮਾਨ ਜੀ ਇਹ ਝੁਲਸ ਰੋਗ ਹੈ ਇਸਦੀ ਰੋਕਥਾਮ ਲਈ ਟਿਲਟ @200 ਮਿਲੀਲਿਟਰ ਦਵਾਈ ਨੂੰ 150 ਲੀਟਰ ਪਾਣੀ ਨਾਲ ਸਪਰੇਅ ਕਰ ਸਕਦੇ ਹੋ

Posted by kismat ali Khan
Uttar Pradesh
25-10-2019 02:57 AM
खुम्ब की किस्में कई प्रकार की होती है जैसे कि बटन खुम्ब, डीगरी, शटाकी खुम्ब, पराली खुम्ब, और मिलकी खुम्ब इनमे से कुइ खुम्ब सर्दियो के मौसम में और कुछ गर्मीयों के मौसम में लगाये जाते है और हर खुम्ब को लगाने का समय अलग अलग है जैसे बटन खुम्ब का समय सितंबर से मार्च तक होता है इस समय में हम तीन फसले ले सकते है शटाकी ख.... (Read More)
खुम्ब की किस्में कई प्रकार की होती है जैसे कि बटन खुम्ब, डीगरी, शटाकी खुम्ब, पराली खुम्ब, और मिलकी खुम्ब इनमे से कुइ खुम्ब सर्दियो के मौसम में और कुछ गर्मीयों के मौसम में लगाये जाते है और हर खुम्ब को लगाने का समय अलग अलग है जैसे बटन खुम्ब का समय सितंबर से मार्च तक होता है इस समय में हम तीन फसले ले सकते है शटाकी खुम्ब का समय अक्तूबर से मध्य फरवरी तक हैं इस समय हम एक फसल ही ले सकते है पराली खुम्ब का समय अप्रैल से अगस्त तक है इस समय हम चार फसले ले सकते है मिलकी खुम्ब का समय अप्रैल से सितंबर तक है आप अब अप्रैल में मिलकी या पराली खुम्ब लगा सकते है पराली खुमब के लिए आपको पराली, बीज, बांस, सेबा, आदि की जरूरत है पराली के पूले, धानो की पराली 1-1 किलो के पूले दोनो सिरो से सेबे से बांध कर तैयार किये जाते है पूले के सिरे कांट कर एक सार कर लिए जाते है पूलो की क्यिारी लगाना पराली के पूलो को साफ पानी में 16-20 घंटो के लिए डूबो दे गिले पूलो को ढलान पर रख कर फालतू पानी को निकलने दे कमरे ईटो और बांस से एक पलेटफार्म बनाये इस पलेटफार्म पर 5 पूलो की एक तहय लगाये जिसके ऊपर 75 ग्राम बीज डाले इसके ऊपर की तहय उलट होती है इस प्रकार 5-5 पूलो की तहय में 300 ग्राम बीज डाल कर कियारी तैयार करे सबसे ऊपर दो पूलो को खोलकर रख दे खुम्बो का फूटना बिजाई से 7-9 दिनो के बाद खुम्ब फूटने लगती है पानी और हवा का संचार बिजाई के दो दिन के बाद हर रोज पानी का छिडका करे खुम्बो के फूटने के बाद हवा का संचार 6-8 घंटे प्रति दिन किया जाता है खुम्बो की तूडाई खुम्बो के फूटने के बाद 1-2 दिनो के बाद तोडाई के योग्य हो जाती है मिलकी खुम्ब मिलकी खुम्ब के लिए तूडी, बीज, मोमी लिफाफे, सेबा, केसिंग,मिट्टी आदि होने चाहिये तूडी की तैयारी सूकी तूडी को पक्के फर्श पर बिछा कर 16-20 घंटे पानी से गिला करे गिली तूडी को बोरी में भर कर सेबे से बांध दे इस बोरी को उबलते पानी में 45-50 मिनट रखें तूडी को निकालकर पक्के फर्श पर बिछा कर ठंडा करे यह तूडी बिजाई के लिए तैयार है बिजाई ठंडी तूडी में बीज मिलाकर मोमी लिफाफो में भर दें एक मोमी लिफाफें में लगभग 2 किलो गिली तूडी और 70-80 ग्राम बीज पडता है लिफाफे के मुंह को सेबे से अच्छी तरह बांध कर कमरे में रख दे केसिंग बिजाई के दो तीन हफतो के बाद लिफाफे खोलकर केसिंग की 1-1.5 की तहय लगा दें केसिंग में तूडी और रेतली मिट्टी होती है 24 घंटो के लिए 4 प्रतिशत फारमलेन के घोल से जीवाणु रहित किया जाता है खुम्बो का फूटना केसिंग मिट्टी डालने के लगभग दो हफतो में खुम्बो के छोटे छोटे किणके निकलने शुरू हो जाते है और 4-5 दिन के बाद तोडने योग्य हो जाते है खुम्बो की तूडाई लगभग 35-40 दिनो तक की जाती है इसका बीज लेने के लिए आप Mr. jai 8882876224 जी से संपर्क कर सकते है
Posted by Manjor Ansari
Madhya Pradesh
25-10-2019 12:48 AM
नर्सरी तैयार करने के उचित समय मध्य-अक्तूबर से मध्य-नवबंर होता है नए पौधे मध्य-दिसंबर से मध्य-जनवरी तक रोपाई के लिए तैयार हो जाते है रोपाई के लिए 10-15 सैं.मी. कद के पौधे चुनें

Posted by kalam
Uttar Pradesh
24-10-2019 11:46 PM
Kalam ji bakri ka rate iske weight ke hisab se hota hai jo apki market mai rate chlta hai uske hisab se iski sale hoti hai, vase iss nasal ki growth v jldi hoti hai, iske ilawa isko 5-6 kg tak chara de skte hai aur usme feed mix krke de skte hai, iska khrach uski growth per nirbhar krta hai jaise bakri choti hogi too woh chara aur feed kam khati hai jaise jaise uski growth hoti rehti hai fir woh uss hisab se chara dana khana suru krti hai.

Posted by govinda
Chattisgarh
24-10-2019 11:36 PM
गोबिंदा जी कृप्या आप अपना सवाल विस्तार से पूछें कि आप क्या जानकारी लेना चाहते है ताकि आपको सही जानकारी दी जा सके

Posted by Vivek singh
Gujarat
24-10-2019 11:08 PM
मोती की खेती एक बहुत ही अच्छा व्यवसाय है इस व्यवसाय को शुरू करने के लिए सबसे जरुरी है इसकी ट्रेनिंग, क्योकि इसमें बहुत सी ऐसी बारीकियें होती है जो हमें प्रेक्टिकल ट्रेनिंग में ही सीखने को मिलती है अगर आप इसकी ट्रेनिंग लेना चाहते है तो आप ग्लिटराटी पर्ल फार्मिंग ट्रेनिंग केंद्र प्रशिक्षण कार्य कर्म आयोजि.... (Read More)
मोती की खेती एक बहुत ही अच्छा व्यवसाय है इस व्यवसाय को शुरू करने के लिए सबसे जरुरी है इसकी ट्रेनिंग, क्योकि इसमें बहुत सी ऐसी बारीकियें होती है जो हमें प्रेक्टिकल ट्रेनिंग में ही सीखने को मिलती है अगर आप इसकी ट्रेनिंग लेना चाहते है तो आप ग्लिटराटी पर्ल फार्मिंग ट्रेनिंग केंद्र प्रशिक्षण कार्य कर्म आयोजित किया जा रहा है प्रशिक्षण कार्य कर्म में भाग लेने के लिए नीचे दिए गए नम्बर पर आज ही संपर्क करें और Rs 250/ से अपना रजिस्ट्रेशन करवाए अचल सिंह (फाउंडर )- 9711858258. धन्यवाद

Posted by kalam
Uttar Pradesh
24-10-2019 10:47 PM
बकरी पालन बहुत ही लाभकारी काम है शुरूआत करने के लिए आप 10 बकरियों और 2 बकरे के साथ कर सकते हैं इन्हें खुराक कम चाहिए इसलिए इन्हें आसानी से पाल सकते हैं ये हर प्रकार के मौसम में पाली जा सकती हैं बकरियां 12-14 महीने में बच्चे देना शुरू कर देती है बकरी का गर्भ समय 150 दिन का होता है और साल में 1-5 बच्चे देती है साल में दो बच्.... (Read More)
बकरी पालन बहुत ही लाभकारी काम है शुरूआत करने के लिए आप 10 बकरियों और 2 बकरे के साथ कर सकते हैं इन्हें खुराक कम चाहिए इसलिए इन्हें आसानी से पाल सकते हैं ये हर प्रकार के मौसम में पाली जा सकती हैं बकरियां 12-14 महीने में बच्चे देना शुरू कर देती है बकरी का गर्भ समय 150 दिन का होता है और साल में 1-5 बच्चे देती है साल में दो बच्चे देना आम बात है बकरियां 8-10 वर्ष तक बच्चे देती हैं और अपन गिनती को तेजी से बढ़ा लेती हैं आप बारबरी, ब्लैक बंगाल, जैसी नसल पाल सकते हैं इसकी ट्रेनिेंग के लिए आप अपने कुषि विज्ञान केंद्र से संपर्क करे या फिर जो बकरी पालन का व्यवसाय कर रहा कोई किसान उसका फार्म स्वंय जाकर देखकर आयें तो और भी बारीकियों का पता चल जायेगा, इसके इलावा आप बीटल नस्ल का रख सकते है क्योंकि ये नस्ल मीट और दूध दोंनो कामों के लिए अच्छी रहती है..
Posted by Niranjan lal
Uttar Pradesh
24-10-2019 10:32 PM
Seed rate of wheat is 40 kg per acre and fertilizer dose 35 kg urea and 25 kg broadcasting at the ploughing tine and 50 kg DAP drill with wheat seed..

Posted by shoaib mohammad
Uttar Pradesh
24-10-2019 10:25 PM
bhai sahib rajwa hara chaara te har 3 kg dudh lai 1kg wadhya feed pao har 3 mahine baad pet ke kirhe nikalne ki dwaee deo Agar hara chaara bahut naram howe to 2-3 kg sukha chaara iss mein mila lo

Posted by surya
Madhya Pradesh
24-10-2019 10:17 PM
surya ji aap kisme Desi (JG 315, JG 74, JG 322, JG 11, JG 130, JG 16, JAKI 9218, JG 63, JG 412, JG 226 and JG 6), Kabuli (JGK 1, KGK 2, aur JGK 3) ki bijai kar sakte hai.dhanywad

Posted by Saurabh gurjar
Madhya Pradesh
24-10-2019 10:12 PM
Saurabh ji aap dhan ki ktayi se 15 din pehle pani dena band kar de.dhanywad

Posted by Saurabh gurjar
Madhya Pradesh
24-10-2019 10:11 PM
Saurabh ji dhan mein pani ktayi se 15 din pehle dena band kar de.dhanywad

Posted by Jitu Yadav
Rajasthan
24-10-2019 10:08 PM
Jitu ji yeh 4 saal ki hoti hai aur iski fees college ke according hoti hai agar private college hai to uski fees jyada hai agar govt college ki entrance clear karke bsc karte hai to uski fees kam hoti hai.

Posted by Manpreet singh
Punjab
24-10-2019 10:05 PM
ਮਨਪ੍ਰੀਤ ਜੀ Zostum injection ਵਿਚ Sulbactam & Cefoperazone ਸਾਲਟ ਹੁੰਦਾ ਹੈ, Isoflud injection ਵਿਚ Isoflupredone acetate ਸਾਲਟ ਹੁੰਦਾ ਹੈ, CRB injection ਵਿਚ Ascorbic acid ਸਾਲਟ ਹੁੰਦਾ ਹੈ, Megludyne injection ਵਿਚ Flunixin meglumine ਸਾਲਟ ਹੁੰਦਾ ਹੈ, Vitum-H injection ਵਿਚ Vitamin A, D3, E & H ਹੁੰਦਾ ਹੈ, Intacef Tazo injection ਵਿਚ Ceftriaxone & Tazobactam ਸਾਲਟ ਹੁੰਦਾ ਹੈ, ਤੁਸੀ ਇਹ ਨਜ਼ਦੀਕੀ ਮੈਡੀਕਲ ਸਟੋਰ ਤੋਂ ਲੈ ਸਕਦੇ ਹੋ
Posted by Niranjan lal
Uttar Pradesh
24-10-2019 10:02 PM
Niranjan ji For western UP, for irrigated and normal sowing condition, complete sowing from 1st November to 15th November and in late sowing conditions, complete sowing from 1st to 25th December. For Eastern U.P, complete sowing from 1st November to 15th November for Irrigated and normal sowing areas.
Whereas for late sowing complete sowing from 1st to 20th December.For Higher Hilly areas, 2nd Fortnight of October to 1st Fortnight of November is optimum time for normal sowing and irrigated areas whereas for late sowing complete sowing from 1st to 20th December.For lower hills, for Irrigated conditions and normal sowing complete sowing from last week of October to middle of November whereas for late sowing complete sowing in second fortnight of November. the optimum time for 21-26°C. than.... (Read More)
Niranjan ji For western UP, for irrigated and normal sowing condition, complete sowing from 1st November to 15th November and in late sowing conditions, complete sowing from 1st to 25th December. For Eastern U.P, complete sowing from 1st November to 15th November for Irrigated and normal sowing areas.
Whereas for late sowing complete sowing from 1st to 20th December.For Higher Hilly areas, 2nd Fortnight of October to 1st Fortnight of November is optimum time for normal sowing and irrigated areas whereas for late sowing complete sowing from 1st to 20th December.For lower hills, for Irrigated conditions and normal sowing complete sowing from last week of October to middle of November whereas for late sowing complete sowing in second fortnight of November. the optimum time for 21-26°C. thank you

Posted by Jitu Yadav
Rajasthan
24-10-2019 09:57 PM
Yadav ji aap 1 unit v mngwa skte hai, iska rate apko yaha se inn semen ki detail nikali hai waha se ptaa lgg skta hai waha order ki option per click krke jankari mill skti hai kyuki milk production ke hisab se inka rate v alag alag hota hai..

Posted by Aman
Punjab
24-10-2019 09:50 PM
ज्यादा उपज के लिए फसल को अक्तूबर से नवंबर के पहले 15 दिनों में बिजाई करें और पिछेती फसल की बिजाई करने से उपज कम होती है अगेती मंडीकरण के लिए मटरों को अक्तूबर के 15 दिनों में उगाएं

Posted by Harman Sidhu
Chattisgarh
24-10-2019 09:49 PM
Harman Sidhu ji baler lenate is bare puri jankari lai tusi Kuldeep Singh 9872028219, 9815387219 Dashmesh Amarghar nal samparak kar sakde ho, Thankyou.

Posted by vishnu bhati
Rajasthan
24-10-2019 09:47 PM
जीरा भारत का महत्तवपूर्ण मसाला है अच्छे निकास वाली और उच्च कार्बनिक पदार्थों वाली मिट्टी जीरे की खेती के लिए उपयुक्त होती है जीरे की खेती के लिए उस ज़मीन का चयन करें जहां 3-4 वर्ष जीरे की खेती ना की गई हो प्रसिद्ध किस्में:-RZ 19,RZ 209,Gujarat Jeera 2,RZ 223,GC 4 जीरे की खेती के लिए अच्छी तरह से जोती गई और समतल ज़मीन की आवश्यकता होती है म.... (Read More)
जीरा भारत का महत्तवपूर्ण मसाला है अच्छे निकास वाली और उच्च कार्बनिक पदार्थों वाली मिट्टी जीरे की खेती के लिए उपयुक्त होती है जीरे की खेती के लिए उस ज़मीन का चयन करें जहां 3-4 वर्ष जीरे की खेती ना की गई हो प्रसिद्ध किस्में:-RZ 19,RZ 209,Gujarat Jeera 2,RZ 223,GC 4 जीरे की खेती के लिए अच्छी तरह से जोती गई और समतल ज़मीन की आवश्यकता होती है मिट्टी के भुरभुरा होने तक खेत की जोताई करें और मिट्टी को समतल करने के लिए सुहागा फेरें जीरे की बिजाई के लिए 15 से 30 नवंबर सही समय होता है कतारों में बिजाई के लिए दो पंक्तियों में 30 सैं.मी. फासले का प्रयोग करें बीजों को 10 सैं.मी. की गहराई में बोयें बिजाई के लिए बुरकाव ढंग या कतार में बिजाई ढंग का प्रयोग करें एक एकड़ खेत में बिजाई के लिए 4-6 किलो बीज पर्याप्त होते हैं बिजाई से पहले कार्बेनडाज़िम 2 ग्राम से प्रति किलो बीजों का उपचार करें यह बीजों का फंगस संक्रमक से बचाव करेगा खादों की सही मात्रा के लिए और अतिरिक्त प्रयोग ना करने के लिए मिट्टी की जांच सबसे महत्तवपूर्ण कदम है फसल की अच्छी वृद्धि और अच्छी उपज के लिए नाइट्रोजन 15 किलो (यूरिया 32 किलो) फासफोरस 11 किलो (एस एस पी 66 किलो) और पोटाश 7 किलो (म्यूरेट ऑफ पोटाश 12 किलो) को गाय के गले हुए गोबर 2 टन के साथ प्रति एकड़ में डालें नाइट्रोजन की आधी मात्रा और फासफोरस और पोटाश की पूरी मात्रा बिजाई के समय डालें बाकी बची नाइट्रोजन की आधी मात्रा बिजाई के 35 दिनों के बाद डालें बिजाई के तुरंत बाद हल्की सिंचाई करें दूसरी सिंचाई बिजाई के 10 दिनों के बाद अंकुरण के समय करें उसके बाद तीन सिंचाइयां पर्याप्त होती हैं बाकी की सिंचाइयां बिजाई के 35वें, 60वें और 85वें दिन बाद करें एक बार फसल पक जाये तब सिंचाई ना करें बीज भरने की अवस्था में सिंचाई पत्तों के ऊपरी धब्बा रोग, चेपे और झुलस रोग के हमले को बढ़ाती है जीरे की फसल में नदीन गंभीर समस्या होते हैं नदीनों की जांच के लिए लगातार गोडाई और निराई करें पहली गोडाई बिजाई के 30-35 दिनों के बाद करें जब जीरे की फसल 5 सैं.मी. कद की हो जाये दूसरी गोडाई पहली गोडाई के 20-25 दिन बाद करें और खेत को नदीन रहित रखें रासायनिक रोकथाम के लिए बिजाई के 1-2 दिन बाद पैंडीमैथालीन 1 लीटर को 200 लीटर पानी में मिलाकर स्प्रे करें जीरे की फसल 100-115 दिनों में कटाई के लिए तैयार हो जाती है कटाई दरांती की सहायता से की जाती है फसल की कटाई के बाद पौधों को फर्श पर खिलार दें और धूप में सुखाने के लिए छोड़ दें धूप में अच्छे से सुखाने के बाद पौधों से दाने अलग कर लें
Posted by Karan Deep
Punjab
24-10-2019 09:46 PM
tuci uss nu vdia khurak deni suru kro ate khurak de nal nal uss nu Groviplex liquid 5-7ml de skde hai, iss nal vdia growth howegi ate uss nu tuci Broton liquid 7ml rojana de skde ho..
Posted by Harman Dhillon
Punjab
24-10-2019 09:05 PM
नहीं जी पीएयू यूनिर्वसिटी इसे तैयार नहीं करती आपको स्ट्रावरी की कोई भी किस्म चाहिए तो आप NS Berry Orchard से 98725-95194 ले सकते है

Posted by HAFEEZ KHAN
Uttar Pradesh
24-10-2019 09:03 PM
इन्हें आप पेट के कीड़ों के लिए Nilzan liquid 1ml/3kg शरीर के भार के हिसाब से दें और आप Broton liquid 10 मि.ली. रोजाना दें इससे भूख लगने लगेगी और इसके साथ आप Groviplex liquid 10ml रोजाना दें इससे अच्छी ग्रोथ हो जाएगी.

Posted by ਜਗਦੀਪ
Punjab
24-10-2019 08:55 PM
ਜਗਦੀਪ ਜੀ ਇਸਦਾ ਹੁਣ ਇਲਾਜ ਮੁਸ਼ਕਿਲ ਹੈ ਹੁਣ ਜਦੋ ਇਹ ਦੁਬਾਰਾ ਗੱਭਣ ਹੋਵੇਗੀ ਤਾਂ ਤੁਸੀ ਇਸਦੇ ਸੂਣ ਤੋਂ 2 ਮਹੀਨੇ ਪਹਿਲਾ ਦੇਸੀ ਤਰੀਕੇ ਵਰਤ ਸਕਦੇ ਹੋ ਜਿਸ ਨਾਲ ਸੂਣ ਤੋਂ ਬਾਦ ਥਨ ਚਲ ਸਕਦਾ ਹੈ, ਬਾਕੀ ਹੁਣ ਤੁਸੀ ਇਸ ਨੂੰ Vitum-h liquid 10-10ml ਸਵੇਰੇ ਸ਼ਾਮ ਅਤੇ Milkout ਪਾਊਡਰ 2-2 ਚਮਚ ਸਵੇਰੇ ਸ਼ਾਮ ਦਿਓ ..

Posted by Rakesh Kumar
Haryana
24-10-2019 08:52 PM
अपने घर से एक कमरा चुन लें जिस मे वायू को आसानी से पहुचा सको और उस कमरे में पानी का नुकसान आप को महशूस ना लगे उस कमरे में मशरूम की खेती करनी चाहिए मशरूम की खेती से अगर आप अपना बिजनेस शुरू करना चाहते हैं तो आपको अक्टूबर में शुरुआत करना पड़ेगा उससे पहले कहीं आपके नजदीक मशरूम की उत्पादन यूनिट लगी हुई है तो वहां भ्.... (Read More)
अपने घर से एक कमरा चुन लें जिस मे वायू को आसानी से पहुचा सको और उस कमरे में पानी का नुकसान आप को महशूस ना लगे उस कमरे में मशरूम की खेती करनी चाहिए मशरूम की खेती से अगर आप अपना बिजनेस शुरू करना चाहते हैं तो आपको अक्टूबर में शुरुआत करना पड़ेगा उससे पहले कहीं आपके नजदीक मशरूम की उत्पादन यूनिट लगी हुई है तो वहां भ्रमण करें उससे आपको मशरूम के फार्म का डिजाइन मशरूम फार्म के अंदर किस तरीके से हवाएं देनी होती हैं फार्म के अंदर से किस तरह गए से बाहर निकाली जाती हैं और मशरूम फार्म के अंदर किस तरह से टेंपरेचर और नमी मेंटेन किया जाता है एक सफल किसान के लिए इन बहुत सारी बातों की जानकारी होना अति आवश्यक है नहीं तो हम जैसे लोगों के द्वारा दिए गए जवाबों को तोड़ मरोड़ करके बहुत सारे लोग गलत जवाब देने पर लगे हुए हैं जिससे किसानों को नुकसान भी होने के चांस बढ़ जाएंगे आपके नजदीक जहां कोई सरकारी संस्था ट्रेनिंग करवाती हो आप उनसे मिली है आपके जिले के नजदीक कृषि विज्ञान केंद्र मैं जाइए वहां कृषि वैज्ञानिकों की सलाह लेना जो यह बड़ा ही लिखकर बताते हैं यह वह लोग आपको किस वैरायटी का किस समय में कितने टेंपरेचर पर खेती की जाती है बता देंगे उसका आपको फायदा मिलेगा
Posted by Basu
Karnataka
24-10-2019 08:51 PM
बासू जी कृपया अपने सवाल विस्तार से पूछें, ताकि हम आपको आपके प्रश्न के बारे में पूरी जानकारी प्रदान कर सकें, धन्यवाद

Posted by sehaj brar
Punjab
24-10-2019 08:48 PM
कृप्या आप अपना सवाल विस्तार से पूछें कि आप क्या जानकारी लेना चाहते है ताकि आपको सही जानकारी दी जा सके
Posted by Basu
Karnataka
24-10-2019 08:45 PM
बासू जी कृपया अपने सवाल विस्तार से पूछें, ताकि हम आपको आपके प्रश्न के बारे में पूरी जानकारी प्रदान कर सकें, धन्यवाद
Posted by Basu
Karnataka
24-10-2019 08:42 PM
कृप्या आप अपना सवाल विस्तार से पूछें ताकि आपको सही जानकारी दी जा सके
Posted by Sukhdev singh
Uttar Pradesh
24-10-2019 08:41 PM
श्रीमान जी बास्मती 1121 का रेट 3000 रूप्ये प्रति क्विंटल लगभग चल रहा है
Posted by BAHAL
Punjab
24-10-2019 08:39 PM
ਜਮੀਨ ਨੂੰ ਚੰਗੀ ਤਰਾਂ ਵਾਹ ਕੇ,ਮਿੱਟੀ ਬਰੀਕ ਕਰ ਲਵੋ ਡਲਿਆਂ ਤੇ ਫਸਲ ਦੀ ਰਹਿੰਦ ਖੂੰਹਦ ਤੋਂ ਰਹਿਤ ਹੋਣੀ ਚਾਹੀਦੀ ਮਿੱਟੀ ,ਉਸ ਤੋਂ ਬਾਅਦ 3 ਫੁੱਟ ਚੌੜੀਆਂ,5 ਫੁੱਟ ,ਲੰਮੀਆਂ ਕਿਆਰੀਆਂ ਬਣਾ ਲਵੋ ਕਿਆਰੀ ਨੂੰ ਪੱਧਰ ਕਰਕੇ ,ਲਾਇਨਾਂ ਮਾਰ ਕੇ ਹੱਥ ਨਾਲ ਬੀਜ ਨੂੰ ਬੀਜੋ ਉਸ ਤੋਂ ਬਾਅਦ ਰੇਤਾ ਤੇ ਸੁਆਹ ਨੂੰ ਛਾਣ ਕੇ ਬੀਜ ਉੱਪਰ ਧੂੜਾ ਦੇ ਦਿਓ ਉਸ ਤੋਂ ਬਾਅਦ ਪਹਿਲਾ ਪਾਣੀ ਫੁਹਾਰੇ ਨਾਲ ਦਿਓ 7 ਘੰਟਿ.... (Read More)
ਜਮੀਨ ਨੂੰ ਚੰਗੀ ਤਰਾਂ ਵਾਹ ਕੇ,ਮਿੱਟੀ ਬਰੀਕ ਕਰ ਲਵੋ ਡਲਿਆਂ ਤੇ ਫਸਲ ਦੀ ਰਹਿੰਦ ਖੂੰਹਦ ਤੋਂ ਰਹਿਤ ਹੋਣੀ ਚਾਹੀਦੀ ਮਿੱਟੀ ,ਉਸ ਤੋਂ ਬਾਅਦ 3 ਫੁੱਟ ਚੌੜੀਆਂ,5 ਫੁੱਟ ,ਲੰਮੀਆਂ ਕਿਆਰੀਆਂ ਬਣਾ ਲਵੋ ਕਿਆਰੀ ਨੂੰ ਪੱਧਰ ਕਰਕੇ ,ਲਾਇਨਾਂ ਮਾਰ ਕੇ ਹੱਥ ਨਾਲ ਬੀਜ ਨੂੰ ਬੀਜੋ ਉਸ ਤੋਂ ਬਾਅਦ ਰੇਤਾ ਤੇ ਸੁਆਹ ਨੂੰ ਛਾਣ ਕੇ ਬੀਜ ਉੱਪਰ ਧੂੜਾ ਦੇ ਦਿਓ ਉਸ ਤੋਂ ਬਾਅਦ ਪਹਿਲਾ ਪਾਣੀ ਫੁਹਾਰੇ ਨਾਲ ਦਿਓ 7 ਘੰਟਿਆਂ ਬਾਅਦ ਫਿਰ ਪਾਣੀ ਦਿਓ

Posted by Ramakant niranjan
Uttar Pradesh
24-10-2019 08:35 PM
Shrimaan ji, mitti ko safed se kali mitti mein tapdeel nahi kiya ja sakta hai, iske upar ap hari khaad ki buvai kar skate hain dhanywad

Posted by sarwan
Punjab
24-10-2019 08:29 PM
श्रीमान जी WH 1105 किस्म बीज सकते है ये छोटे कद वाली किस्म है इसकी औसतन लंबाई 97 सैं. मी है ये लगभग 157 दिनों में तैयार होती है इसकी उपज 23.1 क्विंटल प्रति एकड़ है

Posted by santosh kumar shukla
Uttar Pradesh
24-10-2019 08:28 PM
अदरक भारत की एक अहम मसाले वाली फसल है यह फसल अच्छे जल निकास वाली चिकनी, रेतली और लाल हर तरह की मिट्टी में उगाई जा सकती है खेत में पानी ना खड़ा होने दें क्योंकि खड़े पानी में यह ज्यादा देर बच नहीं पाएगी फसल की वृद्धि के लिए 6-6.5 पी एच वाली मिट्टी अच्छी मानी जाती है उस खेत में अदरक की फसल ना उगाएं जहां पिछली बार अदरक की.... (Read More)
अदरक भारत की एक अहम मसाले वाली फसल है यह फसल अच्छे जल निकास वाली चिकनी, रेतली और लाल हर तरह की मिट्टी में उगाई जा सकती है खेत में पानी ना खड़ा होने दें क्योंकि खड़े पानी में यह ज्यादा देर बच नहीं पाएगी फसल की वृद्धि के लिए 6-6.5 पी एच वाली मिट्टी अच्छी मानी जाती है उस खेत में अदरक की फसल ना उगाएं जहां पिछली बार अदरक की फसल उगाई गई हो हर साल एक ही ज़मीन पर अदरक की फसल ना लगाएं प्रसिद्ध किस्में :-Himgiri, IISR Varanda, IISR Mahima,Suprabha, Suruchi, IISR Rejatha खेत को दो तीन बार जोतें और सुहागे से समतल करें अदरक की बिजाई के लिए आवश्यक लंबाई के 15 सैं.मी. ऊंचे और 1 मीटर चौड़े बैड तैयार करें दो बैडों के बीच 50 सैं.मी. का फासला रखें नदीनों कीटों और बीमारियों की जांच के लिए बैड की मिट्टी को धूप लगवायें इसके लिए बैड को पॉलीथीन शीट से 20-30 दिनों के लिए ढकें रोपाई के समय नीम केक 25 ग्राम को प्रति गड्ढे में डालें और मिट्टी में अच्छी तरह मिलायें अच्छी उपज प्राप्त करने के लिए राइज़ोम की बिजाई मई के पहले सप्ताह में पूरी कर लें राइज़ोम को कतारों में बोयें और कतार में 40-45 सैं.मी. और दो पौधों में 30 सैं.मी. फासला रखें राइज़ोम की रोपाई के बाद खेत में 50 क्विंटल हरे पत्तों की मलचिंग प्रति एकड़ में करें दूसरी मलचिंग 20 क्विंटल हरे पत्तों के साथ 40 दिनों के बाद करें बीज की गहराई 3-4 सैं.मी. के करीब होनी चाहिए अदरक की बिजाई सीधे ढंग से और पनीरी लगाकर की जा सकती है बिजाई के लिए ताजे और बीमारी रहित गांठों का प्रयोग करें बिजाई के लिए 5-6.5 क्विंटल प्रति एकड़ बीज का प्रयोग करें बिजाई से पहले गांठों को मैनकोजेब 3 ग्राम प्रति लीटर पानी से उपचार करें गांठों को 30 मिनट के लिए घोल में भिगो दें इससे गांठों को फफूंदी से बचाया जा सकता है उपचार के बाद गांठों को 3-4 घंटें के लिए छांव में सुखाएं खेत की तैयारी के समय 60 क्विंटल रूड़ी की खाद प्रति एकड़ मिट्टी में डालें नाइट्रोजन 24 किलो (52 किलो यूरिया), फासफोरस 20 किलो (125 किलो सिंगल सुपर फासफेट) और पोटाश 20 किलो (35 किलो म्यूरेट ऑफ पोटाश) की मात्रा प्रति एकड़ में प्रयोग करें रूड़ी की खाद या गाय का गोबर 60 क्विंटल प्रति एकड़ में डालें पोटाश और फासफोरस की पूरी मात्रा बिजाई के समय डालें नाइट्रोजन की दूसरी मात्रा 20 किलो (45 किलो यूरिया) बिजाई के 45 दिनों के बाद, जबकि बिजाई के 120 दिनों के बाद नाइट्रोजन की तीसरी मात्रा 16 किलो (यूरिया 35 किलो) डालें रोपाई के बाद पहली सिंचाई करें इसे बारानी फसल के तौर पर उगाया जाता है इसलिए बारिश की तीव्रता और नियमितता के आधार पर सिंचाई करें बारिश की अनुपस्थिति में, बाकी की सिंचाई 10 दिनों के अंतराल पर करें अदरक की पूरी फसल को कुल 16-18 सिंचाइयों की आवश्यकता होती है बिजाई के 3 दिन बाद एट्राज़िन 4-5 ग्राम प्रति लीटर पानी की नमी वाली मिट्टी पर स्प्रे करें उन नदीनों को खत्म करने के लिए जो पहली नदीन नाशक स्प्रे के बाद पैदा होते हैं, बिजाई के 12-15 दिनों के बाद गलाइफोसेट 4-5 ग्राम प्रति लीटर पानी की स्प्रे करें नदीन नाशक की स्प्रे करने के बाद खेत को हरी खाद से या धान की पराली से ढक दें जड़ों के विकास के लिए जड़ों में मिट्टी लगाएं बिजाई के 50-60 दिनों के बाद पहली बार जड़ों में मिट्टी लगाएं और उसके 40 दिन बाद दोबारा मिट्टी लगाएं

Posted by Raju Kumar
Bihar
24-10-2019 08:26 PM
मिट्टी में नमी की मौजूदगी के अनुसार सिंचाई करनी चाहिए बीजों को बोने के बाद तुरंत पहली सिंचाई करें 10 से 12 दिनों के अंतराल पर लगातार सिंचाई करें

Posted by gosal
Punjab
24-10-2019 08:26 PM
ਤੁਸੀ ਪੰਜਾਬ ਦੇ ਵਿਚ ਐਲੋਵੇਰਾ ਦੀ ਖੇਤੀ ਕਰ ਸਕਦੇ ਹੋI ਐਲੋਵੀਰਾ ਦੀ ਵਰਤੋ ਆਯੂਰਵੈਦਿਕ ਦਵਾਈਆਂ ਵਿੱਚ ਵੱਡੇ ਪੱਧਰ ਤੇ ਹੁੰਦੀ ਹੈ ਅੱਜਕਲ ਕਈ ਨੇਸ਼ਨਲ ਅਤੇ ਇੰਟਰ ਨੇਸ਼ਨਲ ਕੰਪਨਿਆ ਇਸਦੀ ਵਰਤੋ ਚਿਕਤਸਾ ਦੇ ਨਾਲ ਨਾਲ ਸੁੰਦਰਤਾ ਉਤਪਾਦ ਜਿਵੇਂ ਫੇਸਵਾਸ ਕਰੀਮ ,ਸ਼ੇੰਪੂ , ਦੰਤ ਪੇਸਟ ਹੋਰ ਕਈ ਸਾਰੇ ਪ੍ਰੋਡਕਟਸ ਵਿੱਚ ਇਸਦਾ ਇਤੇਮਾਲ ਹੁੰਦਾ ਹੈ ਖੇਤ ਦੀ ਤਿਆਰੀ ਵੇਸੇ ਐਲੋਵੇਰਾ ਦੇ ਪੌਦਿਆਂ ਨ.... (Read More)
ਤੁਸੀ ਪੰਜਾਬ ਦੇ ਵਿਚ ਐਲੋਵੇਰਾ ਦੀ ਖੇਤੀ ਕਰ ਸਕਦੇ ਹੋI ਐਲੋਵੀਰਾ ਦੀ ਵਰਤੋ ਆਯੂਰਵੈਦਿਕ ਦਵਾਈਆਂ ਵਿੱਚ ਵੱਡੇ ਪੱਧਰ ਤੇ ਹੁੰਦੀ ਹੈ ਅੱਜਕਲ ਕਈ ਨੇਸ਼ਨਲ ਅਤੇ ਇੰਟਰ ਨੇਸ਼ਨਲ ਕੰਪਨਿਆ ਇਸਦੀ ਵਰਤੋ ਚਿਕਤਸਾ ਦੇ ਨਾਲ ਨਾਲ ਸੁੰਦਰਤਾ ਉਤਪਾਦ ਜਿਵੇਂ ਫੇਸਵਾਸ ਕਰੀਮ ,ਸ਼ੇੰਪੂ , ਦੰਤ ਪੇਸਟ ਹੋਰ ਕਈ ਸਾਰੇ ਪ੍ਰੋਡਕਟਸ ਵਿੱਚ ਇਸਦਾ ਇਤੇਮਾਲ ਹੁੰਦਾ ਹੈ ਖੇਤ ਦੀ ਤਿਆਰੀ ਵੇਸੇ ਐਲੋਵੇਰਾ ਦੇ ਪੌਦਿਆਂ ਨੂੰ ਕਿਸੇ ਵੀ ਪ੍ਰਕਾਰ ਦੀ ਉਪਜਾਊ ਅਨੁਪਜਾਊ ਮਿੱਟੀ ਵਿੱਚ ਆਸਾਨੀ ਨਾਲ ਉਗ ਜਾਂਦੇ ਹੈ ਬਸ ਤੁਹਾਨੂੰ ਇੱਕ ਗੱਲ ਦਾ ਧਿਆਨ ਰੱਖਣਾ ਹੈ ਕੀ ਪੋਦਾ ਜਿਆਦਾ ਪਾਣੀ ਵਾਲੀ (ਸੇਮ) ਅਤੇ ਪਾਲਾ ਪੈਣ ਵਾਲੀ ਜਗ੍ਹਾ ਉੱਤੇ ਨਹੀ ਲਗਾਉਣਾ ਹੈ ਘੱਟ ਪਾਣੀ ਤੇ ਰੇਤਲੇ ਵਾਹਨ ਵਿਚ ਲਾਉਣ ਲਈ ਇਹ ਸਭ ਤੋਂ ਵਧੀਆ ਫ਼ਸਲ ਹੈ ਖੇਤ ਦੀ ਤਿਆਰੀ ਲਈ ਸਭ ਤੋਂ ਪਹਿਲਾਂ ਖੇਤ ਦੀ 2 ਵਾਰ ਚੰਗੀ ਤਰਾਂ ਵਾਹ ਕੇ ਉਸ ਵਿਚ ਪ੍ਰਤੀ ਹੇਕਟਰ 10 ਤੋਂ 20 ਟਨ ਦੇ ਵਿੱਚ ਪੁਰਾਣੀ ਰੂੜੀ ਦੀ ਖਾਦ ਪਾਓ ਨਾਲ ਵਿੱਚ 120 ਕਿੱਲੋਗ੍ਰਾਮ ਯੂਰੀਆ + 150 ਕਿੱਲੋਗ੍ਰਾਮ ਫਾਸਫੋਰਸ + 30 ਕਿੱਲੋਗ੍ਰਾਮ ਪੋਟਾਸ਼ ਇਨ੍ਹਾਂ ਨੂੰ ਖੇਤ ਵਿੱਚ ਸਮਾਨ ਰੂਪ ਨਾਲ ਬਖੇਰ ਦੇਵੋ ਫਿਰ ਇੱਕ ਵਾਰ ਹੱਲਕੀ ਵਹਾਈ ਤੇ ਕਰਾਹੇ ਨਾਲ ਵਾਹਨ ਨੂੰ ਪੱਧਰਾ ਕਰ ਲਾਓ ਫਿਰ ਖੇਤ ਵਿੱਚ 50×50 ਸੇਮੀ . ਦੀ ਦੁਰੀ ਉੱਤੇ ਵੱਟਾਂ ਬਣਾ ਲਾਓ ਪੌਦੇ ਦੀ ਰੋਪਾਈ ਅਤੇ ਸਾਂਭ ਸੰਭਾਲ ਪੌਦੇ ਦੀ ਰੋਪਾਈ ਕਿਸੇ ਵੀ ਸਮੇ ਵਿਚ ਕੀਤੀ ਜਾ ਸਕਦੀ ਹੈ ਪਰ ਚੰਗੀ ਉਪਜ ਪ੍ਰਾਪਤ ਕਰਨ ਲਈ ਜੂਨ-ਜੁਲਾਈ ਜਾਂ ਫਰਵਰੀ-ਮਾਰਚ ਦੇ ਵਿੱਚ ਕਰ ਸੱਕਦੇ ਹੋਂ ਐਲੋਵੇਰਾ ਦੀ ਰੋਪਾਈ ਵੱਟਾਂ ਉੱਤੇ ਹੁੰਦੀ ਹੈ ਇਹ ਪੌਦੇ ਕਿਸੇ ਪੁਰਾਣੇ ਐਲੋਵੇਰਾ ਫਾਰਮ ਜਾ ਨਰਸਰੀ ਤੋਂ ਪ੍ਰਾਪਤ ਕੀਤੇ ਜਾ ਸਕਦੇ ਹਨ ਅਸਲ ਵਿਚ ਐਲੋਵੇਰਾ ਦੇ ਇਕ ਵੱਡੇ ਪੌਦੇ ਦੇ ਨਾਲ ਛੋਟੇ ਛੋਟੇ 3-2 ਪਤੀਆਂ ਵਾਲੇ ਅਲੋਵੇਰਾ ਦੇ ਪੌਦੇ ਉੱਗ ਆਉਂਦੇ ਹਨ ਇਹੀ ਪੌਦੇ ਬਾਅਦ ਵਿਚ ਪਨੀਰੀ ਤੋਰ ਤੇ ਵਰਤੇ ਜਾਂਦੇ ਹਨ ਇਸ ਵਿਧੀ ਨੂੰ ਰੂਟ ਸ਼ੱਕਰ(ROOT SUCKER) ਕਿਹਾ ਜਾਂਦਾ ਹੈ ਚੰਗੀ ਉਪਜ ਲਈ ਕਿਸਮਾਂ ਸਿਮ – ਸਿਤਲ, L 1 , 2 , 5 ਅਤੇ 49 ਲਗਾਓ ਜਿਸ ਵਿੱਚ ਜੈਲ੍ਹ ਦੀ ਮਾਤਰਾ ਜਿਅਾਦਾ ਪਾਈ ਜਾਂਦੀ ਹੈ ਇਸ ਤੋ ਇਲਾਵਾ ਨੈਸ਼ਨਲ ਬੋਟਨੀਕਲ ਅਤੇ ਪਲਾਂਟ ਜੈਨੇਟਿਕ ਰਿਸੋਰਸ, ਆਈ.ਸੀ.ਏ.ਆਰ. ਦੁਆਰਾ ਰਿਲੀਜ਼ ਕੀਤੀਆਂ ਕਿਸਮਾਂ IC111271, IC111269, IC111280 ਆਦਿ ਹਨ ਵੱਟਾਂ ਉੱਤੇ 50 & 50 ਸੇਮੀ ਦੀ ਦੂਰੀ ਉੱਤੇ ਬੂਟੀਆਂ ਨੂੰ ਲਗਾਓ ਬੂਟੇ ਤੋਂ ਬੂਟੇ ਦੀ ਦੂਰੀ 50 ਸੇਮੀ ਰੱਖਣ ਉੱਤੇ ਪ੍ਰਤੀ ਏਕੜ 15000 ਬੂਟੀਆਂ ਦੀ ਲੋੜ ਰੋਪਾਈ ਲਈ ਹੋਵੇਗੀ ਸਿਚਾਈ ਸਾਲ ਭਰ ਵਿੱਚ ਇਸਨੂੰ ਸਿਰਫ 4 ਜਾਂ 5 ਵਾਰ ਸਿਚਾਈ ਦੀ ਲੋੜ ਹੁੰਦੀ ਹੈ ਸਿਚਾਈ ਲਈ ਡਰੀਪ ਪ੍ਰਣਾਲੀ ਚੰਗੀ ਰਹਿੰਦੀ ਹੈ ਇਸਤੋਂ ਇਸਦੀ ਉਪਜ ਵਿੱਚ ਵਾਧਾ ਹੁੰਦਾ ਹੈ ਗਰਮੀ ਦੇ ਦਿਨਾਂ ਵਿੱਚ 25 ਦਿਨਾਂ ਦੇ ਅੰਤਰਾਲ ਵਿੱਚ ਸਿਚਾਈ ਕਰਨੀ ਚਾਹੀਦੀ ਹੈ ਕੀੜੇ ਅਤੇ ਬਿਮਾਰੀਆ ਵੇਸੇ ਤਾਂ ਇਸ ਫਸਲ ਉੱਤੇ ਕੋਈ ਵਿਸ਼ੇਸ਼ ਕੀਟ ਅਤੇ ਰੋਗਾਂ ਦਾ ਪ੍ਰਭਾਵ ਨਹੀ ਹੁੰਦਾ ਹੈ ਪਰ ਕੀਤੇ-ਕੀਤੇ ਤਾਣੇ ਦੇ ਸੜਨ ਅਤੇ ਪੱਤੀਆਂ ਉੱਤੇ ਦਾਗ ਵਾਲੀ ਬੀਮਾਰਿਆ ਦਾ ਅਸਰ ਵੇਖਿਆ ਗਿਆ ਹੈ ਜੋ ਇੱਕ ਉੱਲੀ ਰੋਗ ਹੁੰਦਾ ਹੈ ਉਸਦੇ ਉਪਚਾਰ ਲਈ ਮੇਂੰਕੋਜੇਬ 3 ਗਰਾਮ ਪ੍ਰਤੀ ਲਿਟਰ ਦੇ ਹਿਸਾਬ ਨਾਲ ਛਿਡਕਾਵ ਕਰਨਾ ਚਾਹੀਦਾ ਹੈ ਐਲੋਵੇਰਾ ਦੀ ਕਟਾਈ ਇਹ ਫਸਲ ਇੱਕ ਸਾਲ ਬਾਅਦ ਕੱਟਣ ਲਾਇਕ ਹੋ ਜਾਂਦੀ ਹੈ ਕਟਾਈ ਦੇ ਦੋਰਾਨ ਪੌਦਿਆਂ ਦੀ ਸਭ ਤੋਂ ਪਹਿਲਾਂ ਹੇਠਲੀ ਠੋਸ 3 ਜਾਂ 4 ਪੱਤਾਂ ਦੀ ਕਟਾਈ ਕਰੋ ਉਸਦੇ ਬਾਅਦ ਲੱਗਭੱਗ ਇੱਕ ਮਹੀਨੇ ਦੇ ਬਾਅਦ ਉਸ ਨਾਲ ਉਪਰ ਵਾਲੀ ਪੱਤੀਆਂ ਦੀ ਕਟਾਈ ਕਰਨੀ ਚਾਹੀਦੀ ਹੈ ਕਦੇ ਵੀ ਉਪਰ ਵਾਲੀ ਨਵੀਂ ਨਾਜਕ ਪੱਤੀਆਂ ਦੀ ਕਟਾਈ ਨਾ ਕਰੋ ਕਟੇ ਹੋਏ ਪਤੀਆਂ ਵਿੱਚ ਫਿਰ ਨਾਲ ਨਵੀਂ ਪੱਤੀਆ ਬਣਨੀ ਸ਼ੁਰੂ ਹੋ ਜਾਂਦੀ ਹੈ ਪ੍ਰਤੀ ਹੇਕਟਰ 50 ਤੋਂ 60 ਟਨ ਤਾਜੀ ਪੱਤੀਆ ਪ੍ਰਤੀ ਸਾਲ ਮਿਲ ਜਾਂਦੀਆਂ ਹਨ ਦੂਜੇ ਸਾਲ ਵਿੱਚ 15 ਤੋਂ 20 ਫ਼ੀਸਦੀ ਵਾਧਾ ਹੁੰਦਾ ਹੈ ਬਾਜ਼ਾਰ ਵਿੱਚ ਇਸ ਦੀਆਂ ਪੱਤੀਆਂ ਦੀ ਅਨੁਮਾਨਿਤ ਕੀਮਤ 3 ਤੋਂ 6 ਰੂਪਏ ਕਿੱਲੋ ਹੁੰਦੀ ਹੈ ਇੱਕ ਤੰਦੁਰੁਸਤ ਪੌਦੇ ਤੋਂ ਇਕ ਸਾਲ ਵਿਚ ਲਗਭਗ 3-4 ਕਿੱਲੋ ਪੱਤੀਆ ਲਈਆਂ ਜਾ ਸਕਦੀਆਂ ਹਨ ਇਸ ਤਰਾਂ ਇਕ ਸਾਲ ਵਿਚ ਇਕ ਏਕੜ ਵਿਚੋਂ 1.5 ਤੋਂ 3 ਲੱਖ ਦੀ ਫ਼ਸਲ ਹੋ ਜਾਂਦੀ ਹੈ ਐਲੋਵੇਰਾ ਦਾ ਵਰਤੋ ਤੰਦੁਰੁਸਤ ਪੱਤੀਆਂ ਦੀ ਕਟਾਈ ਦੇ ਬਾਅਦ ਸਾਫ਼ ਪਾਣੀ ਨਾਲ ਧੋ ਕੇ ਪੱਤੀਆਂ ਦੇ ਹੇਠਲੇ ਹਿੱਸੇ ਵਿੱਚ ਬਲੇਡ ਜਾਂ ਚਾਕੂ ਨਾਲ ਕਟ ਲਗਾ ਕੇ ਥੋੜ੍ਹੇ ਸਮਾਂ ਲਈ ਛੱਡ ਦਿੰਦੇ ਹਨ ਜਿਸ ਵਿੱਚ ਪਿੱਲੇ ਰੰਗ ਦਾ ਗਾਡਾ ਚਿਪਚਿਪਾ ਰਸ ( ਜੇਲ੍ਹ ) ਨਿਕਲਦਾ ਹੈ ਉਸਨੂੰ ਇੱਕ ਟੈਂਕ ਵਿੱਚ ਇੱਕਠਾ ਕਰਕੇ ਇਸ ਰਸ ਨੂੰ ਸੁਖਾ ਲਿਆ ਜਾਂਦਾ ਹੈ ਇਸ ਸੁੱਕੇ ਹੋਏ ਰਸ ਨੂੰ ਵੱਖ ਵੱਖ ਢੰਗ ਨਾਲ ਤਿਆਰ ਕਰਨ ਦੇ ਬਾਅਦ ਵੱਖ ਵੱਖ ਨਾਮਾਂ ਨਾਲ ਜਾਣਿਆ ਜਾਂਦਾ ਹੈ ਜਿਵੇਂ ਕੀ ਸਕੋਤਰਾ , ਕੇਪ.. ਜਦੋ ਫਸਲ ਪੂਰੀ ਤਰਾਂ ਤਿਆਰ ਹੋ ਜਾਵੇ ਅਤੇ ਉਸਦੀ ਕਟਾਈ ਕਰ ਲਈ ਜਾਵੇ ਤਾਂ ਉਸ ਨੂੰ ਤੁਸੀ ਸਬਜੀ ਮੰਡੀ ਵਿੱਚ ਸਿੱਧੇ ਤੌਰ ਤੇ ਵੇਚ ਸਕਦੇ ਹੋਂ ਜੇਕਰ ਤੁਸੀ ਖੁਦ ਮੰਡੀ ਵਿੱਚ ਵੇਚਦੇ ਹੋ ਤਾਂ ਤੁਹਾਨੂੰ ਅੰਦਾਜਨ 5 ਤੋਂ 10 ਰੁਪਏ ਪ੍ਰਤੀ ਕਿੱਲੋ ਤੱਕ ਮੁੱਲ ਮਿਲ ਸਕਦਾ ਹੈ ਪਰ ਜੇਕਰ ਤੁਸੀ ਕਿਸੇ ਕੰਪਨੀ ਨਾਲ ਕੋਨਟ੍ਰੈਕਟ ਕਰਦੇ ਹੋ ਤਾਂ ਇਸਦਾ ਰੇਟ ਉਸ ਕੰਪਨੀ ਦੀ ਲੋੜ ਅਤੇ ਸ਼ਰਤਾਂ ਦੇ ਮੁਤਾਬਿਕ ਉਸ ਕੰਪਨੀ ਦੁਆਰਾ ਹੀ ਤੈਅ ਹੁੰਦਾ ਹੈ ਇਹ ਮੁੱਲ ਤੁਹਾਡੀ ਉਹਨਾਂ ਨਾਲ ਡੀਲਿੰਗ ਤੇ ਨਿਰਭਰ ਕਰਦਾ ਹੈ,ਕੋਨਟ੍ਰੈਕਟ ਖੇਤੀ ਕਰਨ ਲਈ ਤੁਸੀ Aushadhiya kheti vikas sansthan 6268536795 ਨਾਲ ਸੰਪਰਕ ਕਰ ਸਕਦੇ ਹੋ ਧੰਨਵਾਦ

Posted by Ankit Kumar Rajak
Bihar
24-10-2019 08:23 PM
मोती की खेती एक बहुत ही अच्छा व्यवसाय है इस व्यवसाय को शुरू करने के लिए सबसे जरुरी है इसकी ट्रेनिंग, क्योकि इसमें बहुत सी ऐसी बारीकियें होती है जो हमें प्रेक्टिकल ट्रेनिंग में ही सीखने को मिलती है अगर आप इसकी ट्रेनिंग लेना चाहते है तो आप ग्लिटराटी पर्ल फार्मिंग ट्रेनिंग केंद्र प्रशिक्षण कार्य कर्म आयोजि.... (Read More)
मोती की खेती एक बहुत ही अच्छा व्यवसाय है इस व्यवसाय को शुरू करने के लिए सबसे जरुरी है इसकी ट्रेनिंग, क्योकि इसमें बहुत सी ऐसी बारीकियें होती है जो हमें प्रेक्टिकल ट्रेनिंग में ही सीखने को मिलती है अगर आप इसकी ट्रेनिंग लेना चाहते है तो आप ग्लिटराटी पर्ल फार्मिंग ट्रेनिंग केंद्र प्रशिक्षण कार्य कर्म आयोजित किया जा रहा है प्रशिक्षण कार्य कर्म में भाग लेने के लिए नीचे दिए गए नम्बर पर आज ही संपर्क करें और Rs 250/ से अपना रजिस्ट्रेशन करवाए अचल सिंह (फाउंडर )- 9711858258. धन्यवाद

Posted by gosal
Punjab
24-10-2019 08:23 PM
Gosal ji guar da bhav 3342 - 3795 de lag bhag chal reha hai, Thankyou.

Posted by Suraj Gupta
Chattisgarh
24-10-2019 08:12 PM
श्रीमान जी, इसकी विधि को रोकने के लिए आप उसकी ऊपर की पत्तिया काट दें, धन्यवाद

Posted by Gajanand Yadav
Madhya Pradesh
24-10-2019 08:01 PM
Yadav ji, mirch ka size bdane ke liye aap NPK 19.19.19 @ 10 gm prati liter pani mein milakar spray kre, dhanywad
Posted by रामचन्द्र राजपूत
Uttar Pradesh
24-10-2019 07:56 PM
श्रीमान जी कृप्या धान की फसल की फोटो भेंजे ताकि आपको सही जानकारी दी जा सके
Posted by sikandar prajapati
Uttar Pradesh
24-10-2019 07:51 PM
गेंदे की खेती करना चाहते है से मिट्टी की व्यापक किस्मों में उगाया जा सकता है पर यह अच्छे जल निकास वाली उपजाऊ मिट्टी में उगाने पर अच्छे परिणाम देती है मिट्टी अच्छे निकास वाली होनी चाहिए क्योंकि यह फसल जल जमाव वाली मिट्टी में स्थिर नहीं रह सकती मिट्टी की pH 6.5 से 7.5 होनी चाहिए तेजाबी और खारी मिट्टी इसकी खेती के ल.... (Read More)
गेंदे की खेती करना चाहते है से मिट्टी की व्यापक किस्मों में उगाया जा सकता है पर यह अच्छे जल निकास वाली उपजाऊ मिट्टी में उगाने पर अच्छे परिणाम देती है मिट्टी अच्छे निकास वाली होनी चाहिए क्योंकि यह फसल जल जमाव वाली मिट्टी में स्थिर नहीं रह सकती मिट्टी की pH 6.5 से 7.5 होनी चाहिए तेजाबी और खारी मिट्टी इसकी खेती के लिए अनुकूल नहीं है फ्रैंच गेंदे की किस्म हल्की मिट्टी में अच्छी वृद्धि करती है जबकि अफ्रीकी गेंदे की किस्म उच्च जैविक खाद वाली मिट्टी में अच्छी वृद्धि करती है प्रसिद्ध किस्में :- African Marigold: इस किस्म की फसल 90 सैं.मी. तक लम्बी होती है इसके फूल बड़े आकार के और लैमन, पीले, सुनहरे, संतरी और गहरे पीले रंग के होते हैं यह लम्बे समय की किस्म है इसकी अन्य किस्में जैसे Giant Double African Orange, Crown of Gold, Giant Double African Yellow, Chrysanthemum Charm, Golden Age, Cracker Jack आदि हैं French Marigold: यह छोटे कद की जल्दी पकने वाली किस्में हैं इसके फूल छोटे आकार के और पीले, संतरी, सुनहरे पीले, लाल जंग और महोगनी रंग के होते हैं इसकी अन्य किस्में जैसे Rusty Red, Butter Scotch, Red Borcade, Star of India, Lemon drop आदि हैं Pusa Basanti Gainda: यह लम्बे समय की किस्म है इसका पौधा 58.80 सैं.मी. लम्बा और गहरे हरे रंग के पत्ते होते हैं इसके फूल सल्फर पीले, दोहरे और कारनेशन किस्म के होते हैं Pusa Narangi Gainda: फूल निकलने के लिए 125-136 दिनों की आवश्यकता होती है इसका पौधा लम्बा और कद में 73.30 सैं.मी. का होता है और पत्ते गहरे हरे रंग के होते हैं इसके फूल संतरी रंग के और कारनेशन किस्म के होते हैं फूल घने और दोहरी परत वाले होते हैं इसके ताजे फूलों की पैदावार 140 क्विंटल प्रति एकड़ होती है मिट्टी के भुरभुरा होने तक खेत की जोताई करें मिट्टी की उपजाऊ शक्ति बढ़ाने के लिए आखिरी जोताई के समय 250 क्विंटल रूड़ी की खाद और अच्छी तरह से गला हुआ गाय का गोबर मिट्टी में मिलायें गेंदे की बिजाई एक वर्ष में कभी भी की जा सकती है बारिश के मौसम में इसकी बिजाई मध्य जून से मध्य जुलाई में करें सर्दियों में इसकी बिजाई मध्य सितंबर से मध्य अक्तूबर में पूरी कर लें नर्सरी बैड 3x1 मीटर आकार के तैयार करें गाय का गला हुआ गोबर मिलायें बैडों में नमी बनाए रखने के लिए पानी दें सूखे फूलों का चूरा करें और उनका कतार या बैड पर छिड़काव करें जब पौधों का कद 10-15 सैं.मी. हो जाये, तब वे रोपाई के लिए तैयार होते हैं फैंच किस्म को 35x35 सैं.मी. और अफ्रीकी किस्म को 45x45 सैं.मी. के फासले पर रोपाई करें नर्सरी बैड पर बीजों का छिड़काव करें बिजाई के लिए पनीरी ढंग का प्रयोग किया जाता है एक एकड़ खेत के लिए 600 से 800 ग्राम बीजों की आवश्यकता होती है जब फसल 30-45 दिन की हो जाए, तब पौधे के सिरे से उसे काट दें इससे पौधे को झाड़ीदार और घना होने में मदद मिलती है, इससे फूलों की गुणवत्ता और अच्छा आकार भी प्राप्त होता है बिजाई से पहले बीजों को एजोसपीरियम 200 ग्राम को 50 मि.ली. धान के चूरे में मिलाकर उपचार करें शुरूआती खुराक के तौर पर अच्छी वृद्धि के लिए नाइट्रोजन 32 किलो (यूरिया 70 किलो), फासफोरस 16 किलो (एस एस पी 100 किलो), पोटाश 32 किलो (म्यूरेट ऑफ पोटाश 53 किलो) प्रति एकड़ में डालें मिट्टी की किस्म के अनुसार खाद की खुराक बदल दें सही खुराक देने के लिए मिट्टी की जांच करवायें और उसके आधार पर खुराक दें नदीनों की संख्या के आधार पर गोडाई करें खेत में रोपाई के बाद तुरंत सिंचाई करें कली बनने से लेकर कटाई तक की अवस्था सिंचाई के लिए बहुत महत्तवपूर्ण होती है अप्रैल से जून के महीने में 4-5 दिनों के अंतराल पर लगातार सिंचाई करना आवश्यक होता है किस्म के आधार पर गेंदा 2 से 2.5 महीने में कटाई के लिए तैयार हो जाते हैं फ्रैंच गेंदे की किस्म 1.5 महीने में कटाई के लिए तैयार हो जाती है जबकि अफ्रीकी गेंदे की किस्म दो महीने में तैयार हो जाती है जब गेंदे का पूरा आकार विकसित हो जाये तब उसे तोड़ लें कटाई सुबह के समय और शाम के समय करें फूलों की तुड़ाई से पहले खेत को सिंचित करना चाहिए इससे फूलों की गुणवत्ता लंबे समय तक बनी रहती है इसे आप अपनी नजदीकी फूल मंडी में बेच कर इसे अपनी आय का साधन बना सकते है इसका बीज आप कृषि यूनिवर्सिटी से ले सकते है या नजदीकी नर्सरी से ले सकते है जा फिर गेंदे और गुलाब के बीज लेने के लिए आप Dr N.K Saxena 9811315738 से सम्पर्क करे धन्यवाद

Posted by Ashish ratnakar
Chattisgarh
24-10-2019 07:50 PM
Ashish ratnakar ji desi chicks lene ke lia aap Sumit Kumar 8006000291, 7906547529 (Sumit Kumar Poultry Farm) se samparak kar sakte hai, Thankyou.
Posted by Aadarsh
Uttar Pradesh
24-10-2019 07:46 PM
श्रीमान जी ये रोग है इसकी रोकथाम के लिए koside@500 gm प्रति एकड़ 120 लीटर पानी में मिलाकर स्प्रे कर सकते है
Expert Communities
We do not share your personal details with anyone
We do not share your personal details with anyone
Sign In
Registering to this website, you accept our Terms of Use and our Privacy Policy.
Your mobile number and password is invalid
We have sent your password on your mobile number
All fields marked with an asterisk (*) are required:
Sign Up
Registering to this website, you accept our Terms of Use and our Privacy Policy.
All fields marked with an asterisk (*) are required:
Please select atleast one option
Please select text along with image












.png)
.jpg)

