
Posted by rajendra singh
Rajasthan
25-10-2019 08:12 PM
श्रीमान जी,भांग की कहती राजस्तान में नहीं की जा सकती, राजस्थान में नकदी फसलें जैसे के अफीम और तम्बाकू की बुवाई की जा सकती ही, धन्यवाद

Posted by abhishek
Uttar Pradesh
25-10-2019 08:12 PM
यह कई तरह की मिट्टी में उगाई जाती है इसकी पैदावार के लिए नमकीन, क्षारीय और पानी खड़ा होने वाली मिट्टी से बचाव करें यह बढ़िया निकास वाली मिट्टी जिसमे बढ़िया जैविक तत्व मौजूद हों, में बढ़िया परिणाम देती है इसके बढ़िया विकास के लिए मिट्टी का pH 5.5-7 होना चाहिए Drudriha Tulsi: यह मुख्य रूप से बंगाल, नेपाल, चटगांव और महाराष्ट्र क्ष.... (Read More)
यह कई तरह की मिट्टी में उगाई जाती है इसकी पैदावार के लिए नमकीन, क्षारीय और पानी खड़ा होने वाली मिट्टी से बचाव करें यह बढ़िया निकास वाली मिट्टी जिसमे बढ़िया जैविक तत्व मौजूद हों, में बढ़िया परिणाम देती है इसके बढ़िया विकास के लिए मिट्टी का pH 5.5-7 होना चाहिए Drudriha Tulsi: यह मुख्य रूप से बंगाल, नेपाल, चटगांव और महाराष्ट्र क्षेत्रों में पाई जाती है यह गले को सूखेपन से राहत देता है यह हाथों, पैरों और गठिया की सूजन से आराम देता है Ram/Kali Tulsi (Ocimum canum): यह चीन, ब्राज़ील, पूर्व नेपाल और साथ ही बंगाल, बिहार, चटगांव और भारत के दक्षिणी क्षेत्रों में पाई जाती है इसका तना जामुनी और पत्ते हरे रंग के और बहुत ज्यादा सुगंधित होते है इसमें उचित मात्रा में औषधीय गुण जैसे ऐज़ाडिरैकटिन, ऐंटीफंगल , ऐंटीबैक्टीरियल, और पाचन तंत्र को ठीक रखती है यह गर्म क्षेत्रों में बढ़िया उगता है Babi Tulsi: यह पंजाब से त्रिवेंद्रम, बंगाल और बिहार में भी पाई जाती है इसका पौधा 1-2 फीट लम्बा होता है पत्ते 1-2 इंच लम्बे, अंडाकार और नुकीले होते है इसके पत्तों का स्वाद लौंग की तरह और सब्जियों में स्वाद के लिए प्रयोग किया जाता है तुलसी की खेती के लिए, अच्छी तरह से शुष्क मिट्टी की मांग की जाती है मिट्टी के भुरभुरा होने तक हैरो के साथ खेत की जोताई करें, फिर रूड़ी की खाद मिट्टी में मिलाएं तुलसी की रोपाई सीड बैड पर करें फरवरी के तीसरे महीने में नर्सरी बैड तैयार करें पौधे के विकास के अनुसार, 4.5 x 1.0 x 0.2 मीटर के सीड बैड तैयार करें बीजों को 60x60 सैं.मी. के फैसले पर बोयें बीजों को 2 सैं.मी. की गहराई पर बोयें बिजाई के 6-7 हफ्ते बाद, फसल की रोपाई खेत में करें तुलसी की खेती के लिए 120 ग्राम बीजों का प्रयोग प्रति एकड़ में करें फसल को मिट्टी से पैदा होने वाली बीमारीयों से रोकथाम के लिए, बिजाई से पहले मैनकोजेब 5 ग्राम प्रति किलोग्राम से बीजों का उपचार करें फसल की बढ़िया पैदावार के लिए बिजाई से पहले 15 टन रूड़ी की खाद मिट्टी में डालें तुलसी के बीजों को तैयार बैडों के साथ उचित अंतराल पर बोयें मानसून आने के 8 हफ्ते पहले बीजों को बैड पर बोयें बीजों को 2 सैं.मी. की गहराई पर बोयें बिजाई के बाद, रूड़ी की खाद और मिट्टी की पतली परत बीजों पर बना दें इसकी सिंचाई फुवारा विधि द्वारा की जाती है रोपाई के 15-20 दिनों के बाद, नए पौधों को तंदरुस्त बनाने के लिए 2% यूरिया का घोल डालें 6 हफ्ते पुराने और 4-5 पत्तों के अंकुरण होने पर अप्रैल के महीने में नए पौधे तैयार होते है तैयार बैडों को रोपाई 24 घंटे पहले पानी लगाएं ताकि पौधों को आसानी से उखाड़ा जा सकें और रोपाई के समय जड़ें मुलायम और सूजी हुई हो खेत की तैयारी के समय, रूड़ी की खाद को मिट्टी में मिलाएं खाद के तौर पर नाइट्रोजन 48 किलो(यूरिया 104 किलो), फासफोरस 24 किलो(सिंगल सुपर फासफेट 150 किलो) और पोटाश 24 किलो(मिउरेट 40 किलो) प्रति एकड़ में डालें नए पौधे लगाने के समय नाइट्रोजन की आधी मात्रा और फासफेट पेंटोऑक्साइड की पूरी मात्रा शुरुआती समय में डालें Mn 50 पी पी एम कंसंट्रेशन और Co@100 पी पी एम कंसंट्रेशन सूक्ष्म-तत्व डालें बाकी की बची हुई नाइट्रोजन को 2 हिस्सों में पहली और दूसरी कटाई के बाद डालें खेत को नदीनों से मुक्त करने के लिए कसी की मदद से गोड़ाई करें नदीनों की रोकथाम कम न होने पर यह फसल को नुकसान पहुंचाते है रोपण के एक महीने बाद पहली गोड़ाई और पहली गोड़ाई के चार हफ्ते बाद दूसरी गोड़ाई करें रोपण के दो महीने बाद कसी से अनुकूल गोड़ाई करें गर्मियों में, एक महीने में 3 सिंचाइयां करें और बरसात के मौसम में, सिंचाई की आवश्यकता नहीं होती एक साल में 12-15 सिंचाइयां करनी चाहिए पहली सिंचाई रोपण के बाद करें और दूसरी सिंचाई नए पौधों के स्थिर होने पर करें 2 सिंचाइयां करनी आवश्यक है और बाकी की सिंचाई मौसम के आधार पर करें इसके मंडीकरण के लिए आप Aushadhiya kheti vikas sansthan 6268536795 से संपर्क कर सकते हैं

Posted by abhishek
Uttar Pradesh
25-10-2019 08:07 PM
Abhishek ji kali tulsi ki contact farming ke lia aap Aushadhiya kheti vikas sansthan 6268536795 se samparak kar sakte hai, Thankyou.

Posted by Narender Kumar
Punjab
25-10-2019 08:06 PM
Narender Kumar ji duck farming ki training aapki chandigarh central poultry development office se mil sakti hai ji or yeh kharidne ke liye aap 98554 55561 zodha singh maan ji se sampark kare ji.
Posted by Balkar Singh
Haryana
25-10-2019 08:02 PM
श्रीमान जी गेहूं की ज्यादा उपज देने वाली किस्में HD-3226 की उपज 22-30 क्विंटल, DBW-187 की उपज 24-30 क्विंटल, DBW-222 की उपज 22-30 क्विंटल प्रति एकड़ है
Posted by Gora, Bhullar
Punjab
25-10-2019 07:54 PM
श्रीमान जी बास्मती 1121 का रेट 3000 रूप्ये प्रति क्विंटल के आसपास चल रहा है

Posted by चरणसिह पुनिया
Rajasthan
25-10-2019 07:50 PM
श्रीमान जी गेहूं की किस्म HD-3086 HD-2967,PBW-343 की बिजाई कर सकते है

Posted by Jitu Yadav
Rajasthan
25-10-2019 07:49 PM
श्रीमान जी जिंक की कमी वाली ज़मीन में जिंक डाल सकते है

Posted by gurpreet
Punjab
25-10-2019 07:46 PM
ਤੁਸੀ ਨੇੜੇ ਦੇ ਪਸ਼ੂਆਂ ਵਾਲੇ ਮੈਡੀਕਲ ਸਟੋਰ ਤੋਂ EGG FORMULA ਨਾਮ ਦਾ ਪਾਊਡਰ ਲਿਆ ਕੇ ਫੀਡ ਦੇ ਵਿੱਚ ਮਿਲਾ ਕੇ ਦਿਓ, ਇਸਦੇ ਨਾਲ ਤੁਸੀ Ostovet ਕੈਲਸ਼ੀਅਮ ਦਿਓ , ਇਸ ਨੂੰ 15ml ਪ੍ਰਤੀ 100 ਮੁਰਗੀਆਂ ਦੇ ਹਿਸਾਬ ਨਾਲ ਦਿਓ .

Posted by kunal Pagare
Maharashtra
25-10-2019 07:43 PM
मोती की खेती एक बहुत ही अच्छा व्यवसाय है इस व्यवसाय को शुरू करने के लिए सबसे जरुरी है इसकी ट्रेनिंग, क्योकि इसमें बहुत सी ऐसी बारीकियें होती है जो हमें प्रेक्टिकल ट्रेनिंग में ही सीखने को मिलती है अगर आप इसकी ट्रेनिंग लेना चाहते है तो आप ग्लिटराटी पर्ल फार्मिंग ट्रेनिंग केंद्र प्रशिक्षण कार्य कर्म आयोजि.... (Read More)
मोती की खेती एक बहुत ही अच्छा व्यवसाय है इस व्यवसाय को शुरू करने के लिए सबसे जरुरी है इसकी ट्रेनिंग, क्योकि इसमें बहुत सी ऐसी बारीकियें होती है जो हमें प्रेक्टिकल ट्रेनिंग में ही सीखने को मिलती है अगर आप इसकी ट्रेनिंग लेना चाहते है तो आप ग्लिटराटी पर्ल फार्मिंग ट्रेनिंग केंद्र प्रशिक्षण कार्य कर्म आयोजित किया जा रहा है प्रशिक्षण कार्य कर्म में भाग लेने के लिए नीचे दिए गए नम्बर पर आज ही संपर्क करें और Rs 250/ से अपना रजिस्ट्रेशन करवाए अचल सिंह (फाउंडर )- 9711858258. धन्यवाद
Posted by नेमीचंद धायल
Rajasthan
25-10-2019 07:41 PM
श्रीमान जी आप सब्जिया जैसे के टमाटर, मिर्च, फूलगोभी, पियाज की बिजाई कर सकते हैं, धन्यवाद

Posted by Raj
Maharashtra
25-10-2019 07:41 PM
RAj ji, yah fungus ke karan ho raha hai, iski roktham ke liye ap mencozeb @ 4g prati liter pani ke hisaab se dalein, or tatvo ke liye ap vermicompost 7-8 kg prati podhe ke hisaab se dalein,dhanywad
Posted by Jagjit Hundal
Punjab
25-10-2019 07:34 PM
मटर में अच्छी उपज लेने के लिए एनपीके 13.0.45 एक किलो प्रति एकड़ के हिसाब से स्प्रे कर सकते है

Posted by bablu
Maharashtra
25-10-2019 07:29 PM
aap ASEEL, PUNJAB WHITE BATTER, KADAKNATH, SATLUJ naslo ko rakh skte hai, yeh sabhi eggs ke liye achi nasle hai inki growth v achi hoti hai..

Posted by ਯਾਦਵਿੰਦਰ ਸਿੰਘ
Punjab
25-10-2019 07:28 PM
श्रीमान जी किस्म HD-3086@ 45-50 किलो बीज प्रति एकड़ पड़ता है
Posted by deepakchouhan
Madhya Pradesh
25-10-2019 07:23 PM
Sir, All your questions have been answered. You can see the answers by clicking my question option in the app.if you any problem in app you can contact on our helpline number 9779977641

Posted by Gurdeep Singh virdi
Punjab
25-10-2019 07:18 PM
BhaaG tuci deputy director dairy development MOGA naal sampark karo Training 2 hafte di hundi ae

Posted by Nitin Kumar
Uttar Pradesh
25-10-2019 07:16 PM
Nitin ji bakre ka rate apko nazdiki market mai meat shop se pta krna pdega, kyuki inka rate weight ke hisab se hota hai ..

Posted by happy
Punjab
25-10-2019 07:11 PM
Happy ji kirpa krke apna swal vistar nal pusho ji tuci ki jankari lena chahunde ho tan jo tuhanu sahi jankari diti ja skee.
Posted by Mukesh Kumar
Jharkhand
25-10-2019 07:11 PM
मुकेश जी इसे आप Cholin chloride@500gm/tonn के हिसाब दें इससे फर्क पड़ जाएगा
Posted by indrapal singh
Uttar Pradesh
25-10-2019 07:05 PM
कृप्या आप अपना सवाल विस्तार से पूछें कि आप क्या जानकारी लेना चाहते है ताकि आपको सही जानकारी दी जा सके

Posted by jagsir Singh randhawa
Punjab
25-10-2019 07:01 PM
ਸ਼੍ਰੀਮਾਨ ਆਮ ਤੌਰ \'ਤੇ, ਕਣਕ ਵਿੱਚ ਗੁੱਲੀ ਡੰਡਾ 35-40 ਦਿਨਾਂ ਵਿਚ ਬਾਹਰ ਆ ਜਾਂਦੀ ਹੈ.ਜਦੋਂ ਤੁਸੀਂ ਪਹਿਲਾਂ ਪਾਣੀ ਲਗਾਉਂਦੇ ਹੋ, ਗੁੱਲੀ ਡੰਡਾ ਕਣਕ ਦੇ ਨਾਲ-ਨਾਲ ਵਧਣਾ ਸ਼ੁਰੂ ਹੋ ਜਾਂਦਾ ਹੈ. ਇਸ ਸਮੇਂ ਕਣਕ ਲਗਭਗ 40 ਦਿਨਾਂ ਦੀ ਹੋ ਜਾਂਦੀਹੈ. ਇਸ ਵੇਲੇ ਅਸੀਂ TOPIK@160GM ਜਾਂ AXIAL@400ML ਜਾਂ PUMA POWER@400ML ਜਾਂ LEADER@13GM ਜਾਂ SAFAL@13GM ਜਾਂ UPL ਦੀ SHAGUN 21-11@200gm ਨੂੰ 150 ਲੀਟਰ ਪਾਣੀ ਵਿੱਚ ਮਿਲਾਕੇ ਪ੍ਰਤੀ ਏਕੜ ਤੇ ਸਪਰੇ .... (Read More)
ਸ਼੍ਰੀਮਾਨ ਆਮ ਤੌਰ \'ਤੇ, ਕਣਕ ਵਿੱਚ ਗੁੱਲੀ ਡੰਡਾ 35-40 ਦਿਨਾਂ ਵਿਚ ਬਾਹਰ ਆ ਜਾਂਦੀ ਹੈ.ਜਦੋਂ ਤੁਸੀਂ ਪਹਿਲਾਂ ਪਾਣੀ ਲਗਾਉਂਦੇ ਹੋ, ਗੁੱਲੀ ਡੰਡਾ ਕਣਕ ਦੇ ਨਾਲ-ਨਾਲ ਵਧਣਾ ਸ਼ੁਰੂ ਹੋ ਜਾਂਦਾ ਹੈ. ਇਸ ਸਮੇਂ ਕਣਕ ਲਗਭਗ 40 ਦਿਨਾਂ ਦੀ ਹੋ ਜਾਂਦੀਹੈ. ਇਸ ਵੇਲੇ ਅਸੀਂ TOPIK@160GM ਜਾਂ AXIAL@400ML ਜਾਂ PUMA POWER@400ML ਜਾਂ LEADER@13GM ਜਾਂ SAFAL@13GM ਜਾਂ UPL ਦੀ SHAGUN 21-11@200gm ਨੂੰ 150 ਲੀਟਰ ਪਾਣੀ ਵਿੱਚ ਮਿਲਾਕੇ ਪ੍ਰਤੀ ਏਕੜ ਤੇ ਸਪਰੇ ਕਰੋ. ਇਹਨਾਂ ਵਿੱਚੋਂ ਕਿਸੇ ਵੀ ਇਕ ਸਪਰੇ ਦੀ ਵਰਤੋਂ ਕਰ ਸਕਦੇ ਹੋ ਜੇਕਰ ਬਾਥੂ ਹੈ ਤੋਂ ਉਸ ਲਈ algrip 10gm ਜਾਂ total16gm ਨੂੰ 150 ਲੀਟਰ ਪਾਣੀ ਵਿੱਚ ਮਿਲਾਕੇ ਸਪਰੇ ਕਰ ਸਕਦੇ ਹਨ.

Posted by harmit Singh
Punjab
25-10-2019 06:55 PM
ਸਾਡੇ ਕੋਲ ਹਰ ਟਾਈਮ ਵਰਮੀ ਕੰਪੋਸਟ ਤਿਆਰ ਮਿਲਦਾ ਹੈ ਤੇ ਗੰਡੋਏ ਵੀ ਮਿਲ ਜਾਣਗੇ ਜੀ ਤੁਸੀ ਸਾਨੂੰ 98726 24253 ਨੰਬਰ ਤੇ ਸੰਪਰਕ ਕਰੋ ਜੀ
Posted by Tiku Choudhary
Himachal Pradesh
25-10-2019 06:52 PM
बकरियों की अच्छी ग्रोथ के लिए आप उन्हें घर पर फीड तैयार करके दे सकते है फीड बनाने के लिए सामग्री: 1 किलो मिनरल मिक्सचर, 2 किलो नमक, मीटा सोडा 1 किलो, मक्की 30 किलो, गेहूं 25 किलो, सोया doc 10 किलो, सरसों की खल 10 किलो, चावल की doc 21 किलो इन सब चीज़ों को मिक्स करके फीड तैयार कर लें यह फीड आप बकरी के भार के हिसाब से दे सकते हैंं बकर.... (Read More)
बकरियों की अच्छी ग्रोथ के लिए आप उन्हें घर पर फीड तैयार करके दे सकते है फीड बनाने के लिए सामग्री: 1 किलो मिनरल मिक्सचर, 2 किलो नमक, मीटा सोडा 1 किलो, मक्की 30 किलो, गेहूं 25 किलो, सोया doc 10 किलो, सरसों की खल 10 किलो, चावल की doc 21 किलो इन सब चीज़ों को मिक्स करके फीड तैयार कर लें यह फीड आप बकरी के भार के हिसाब से दे सकते हैंं बकरी के भार की 5 प्रतिशत फीड डालनी चाहिए या फिर नई ब्याई बकरी को 300—400 ग्राम तक फीड दे सकते हैं यदि छोटे बच्चे हैं या फिर फंडर बकरी है उसे कम फीड देनी चाहिए यदि आपने हरा चारा खुद नहीं उगाया है तो आप अपने नज़दीक किसी किसान से हरा भी खरीद सकते है इसके इलावा आप साईलेज भी डाल सकते है

Posted by r k
Rajasthan
25-10-2019 06:51 PM
Aap uski janch nazdiki doctor se krwayen kyuki unki janch krke he sahi ilagg ho skta hai aur unke marne ka sahi karan ptaa lgg skta hai..

Posted by jagpal singh
Punjab
25-10-2019 06:47 PM
jagpal singh ji musroom farming layi tusi mere nal 94631 62531 number te gal karo ji.

Posted by jagpal singh
Punjab
25-10-2019 06:41 PM
prali di bani shed honi chahidi hai ji

Posted by nishan singh
Punjab
25-10-2019 06:34 PM
ਹਾਜੀ ਸਤਿ ਸ਼੍ਰੀ ਅਕਾਲ ਜੀ ਤੁਹਾਡੇ ਵੱਲੋਂ ਪੁੱਛੇ ਸਾਰੇ ਸਵਾਲਾਂ ਦਾ ਜਵਾਬ ਦਾ ਦਿੱਤਾ ਜਾ ਚੁੱਕਿਆ ਹੈ ਤੁਸੀ ਆਪਣੇ ਸਵਾਲਾਂ ਦੇ ਜਵਾਬ ਦੇਖਣ ਲਈ ਐਪ ਵਿੱਚ ਮੇਰੇ ਸਵਾਲ ਤੇ ਕਲਿੱਕ ਕਰਕੇ ਜਾਂ ਫਿਰ ਮੇਰੀ ਪ੍ਰੋਫਾਈਲ ਦੇ ਹੇਠਾ ਆਪਣੇ ਸਵਾਲ ਜਵਾਬ ਦੇਖ ਸਕਦੇ ਹੋ ਵੀ ਜੇਕਰ ਤੁਹਾਨੂੰ ਜਵਾਬ ਸਬੰਧੀ ਕਿਸੇ ਤਰਾਂ ਦੀ ਸਮੱਸਿਆ ਆ ਰਹੀ ਹੈ ਤਾਂ ਤੁਸੀ ਸਾਡੇ ਹੈਲਪਲਾਈਨ ਨੰਬਰ: 97799-77641 ਤੇ ਕਾਲ ਕਰ ਸਕਦੇ .... (Read More)
ਹਾਜੀ ਸਤਿ ਸ਼੍ਰੀ ਅਕਾਲ ਜੀ ਤੁਹਾਡੇ ਵੱਲੋਂ ਪੁੱਛੇ ਸਾਰੇ ਸਵਾਲਾਂ ਦਾ ਜਵਾਬ ਦਾ ਦਿੱਤਾ ਜਾ ਚੁੱਕਿਆ ਹੈ ਤੁਸੀ ਆਪਣੇ ਸਵਾਲਾਂ ਦੇ ਜਵਾਬ ਦੇਖਣ ਲਈ ਐਪ ਵਿੱਚ ਮੇਰੇ ਸਵਾਲ ਤੇ ਕਲਿੱਕ ਕਰਕੇ ਜਾਂ ਫਿਰ ਮੇਰੀ ਪ੍ਰੋਫਾਈਲ ਦੇ ਹੇਠਾ ਆਪਣੇ ਸਵਾਲ ਜਵਾਬ ਦੇਖ ਸਕਦੇ ਹੋ ਵੀ ਜੇਕਰ ਤੁਹਾਨੂੰ ਜਵਾਬ ਸਬੰਧੀ ਕਿਸੇ ਤਰਾਂ ਦੀ ਸਮੱਸਿਆ ਆ ਰਹੀ ਹੈ ਤਾਂ ਤੁਸੀ ਸਾਡੇ ਹੈਲਪਲਾਈਨ ਨੰਬਰ: 97799-77641 ਤੇ ਕਾਲ ਕਰ ਸਕਦੇ ਹੋਂ

Posted by Shripal Bhadana
Uttar Pradesh
25-10-2019 06:31 PM
श्रीमान जी , चुकुन्दर के लिए इक बीघे में 1.5 से 1.8 kg का बीज उपयोग होता है, धन्यवाद
Posted by Ranjit Singh
Punjab
25-10-2019 06:27 PM
ਇਹ ਦੋਨੋ ਅਲੱਗ ਅਲੱਗ ਹਨ ਜੀ ਤੁਸੀ ਦੋਨਾ ਵਿੱਚੋ ਇੱਕ ਪਾ ਸਕਦੇ ਹੋ, ਜੇਕਰ ਦੋਨੋ ਵੀ ਪਾਉਣਾ ਚਾਹੋ ਤਾਂ ਕੋਈ ਨੁਕਸਾਨ ਨਹੀ ਹੈ ਜੀ

Posted by Rainu Thakur
Uttar Pradesh
25-10-2019 06:24 PM
Rainu Thakur ji is sall dhan ka (MSP) 1815/q, Grade A 1835/q hai, Thankyou.

Posted by cs thakur
Uttar Pradesh
25-10-2019 06:18 PM
निम्नलिखित किस्में उत्तर प्रदेश में बोन के लिए उपयुक्त हैं: Kufri Bahar: इस किस्म के पौधे लंबे और तने मोटे होते हैं तनों की संख्या 4-5 प्रति पौधा होती है इसके आलू बड़े, सफेद रंग के, गोलाकार से अंडाकार होते हैं और इसका गुद्दा सफेद रंग का होता है यह किस्म 100-110 दिनों में पक जाती है और इसकी औसतन पैदावार 125 क्विंटल प्रति एकड़ हो.... (Read More)
निम्नलिखित किस्में उत्तर प्रदेश में बोन के लिए उपयुक्त हैं: Kufri Bahar: इस किस्म के पौधे लंबे और तने मोटे होते हैं तनों की संख्या 4-5 प्रति पौधा होती है इसके आलू बड़े, सफेद रंग के, गोलाकार से अंडाकार होते हैं और इसका गुद्दा सफेद रंग का होता है यह किस्म 100-110 दिनों में पक जाती है और इसकी औसतन पैदावार 125 क्विंटल प्रति एकड़ होती है इसे ज्यादा देर तक स्टोर करके रखा जा सकता है यह पिछेती और अगेती झुलस रोग और पत्ता मरोड़ रोग की रोधक है
Kufri Badshah: इसके पौधे लंबे और 4-5 तने प्रति पौधा होते हैं इसके आलू बड़े से दरमियाने, गोलाकार और हल्के सफेद रंग के होते हैं इसके आलू स्वाद होते हैं यह किस्म 100-110 दिनों में पक जाती है यह किस्म कोहरे को सहनेयोग्य है और पिछेती, अगेती झुलस रोग की प्रतिरोधक है
Kufri Sutlaj: इस किस्म के पौधे घने और मोटे तने वाले होते हैं पत्ते हल्के हरे रंग के होते हैं आलू बड़े आकार के, गोलाकार और नर्म छिल्के वाले होते हैं यह किस्म 90-100 दिनों में पकती है इसकी औसतन पैदावार 160 क्विंटल प्रति एकड़ होती है यह किस्म खाने के लिए अच्छी और स्वादिष्ट होती है इन आलुओं को पकाना आसान होता है यह नए उत्पाद बनाने के लिए उचित किस्म नहीं है
Kufri Anand: यह मध्यम समय की किस्म है, जो कि पिछेते झुलस रोग और कोहरे के प्रतिरोधक है इसकी औसतन पैदावार 140-160 क्विंटल प्रति एकड़ होती है
Kufri Pukhraj: इसके पौधे लंबे और तने संख्या में कम और दरमियाने मोटे होते हैं आलू सफेद, बड़े, गोलाकार और नर्म छिल्के वाले होते हैं यह किस्म 70-90 दिनों में पकती है इसकी औसतन पैदावार 130 क्विंटल प्रति एकड़ है यह अगेती झुलस रोग की रोधक किस्म है और नए उत्पाद बनाने के लिए उचित नहीं है
Kufri Chipsona 2: इस किस्म के पौधे दरमियाने कद के और कम तनों वाले होते हैं इसके पत्ते गहरे हरे और फूल सफेद रंग के होते हैं आलू सफेद, दरमियाने आकार के, गोलाकार, अंडाकार और नर्म होते हैं इसकी औसतन पैदावार 140 क्विंटल प्रति एकड़ होती है यह पिछेती झुलस रोग की रोधक किस्म है यह किस्म चिपस और फरैंच फ्राइज़ बनाने के लिए उचित है
Kufri Chipsona 1: यह किस्म 90-100 दिनों में पुटाई के लिए तैयार हो जाती है
Kufri Chandramukhi: इस किस्म के आलू बड़े अंडाकार आकार के होते हैं इसकी औसतन पैदावार 10 टन प्रति एकड़ होती है यह किस्म 80-90 दिनों में पुटाई के लिए तैयार हो जाती है
Kufri Jyoti: यह प्रोसेसिंग के लिए उपयुक्त किस्म है इसकी औसतन पैदावार 80-120 क्विंटल प्रति एकड़ होती है
Kufri Ashoka: यह किस्म CPIU, शिमला द्वारा विकसित की गई है और बिहार, हरियाणा, उत्तर प्रदेश और पश्चिमी बंगाल में खेती के लिए उपयुक्त किस्म है यह लंबे कद की और मोटे तने वाली किस्म है यह किस्म 70-80 दिनों में पककर तैयार हो जाती है इसके आलू बड़े, गोलाकार, सफेद और नर्म छिल्के वाले होते हैं यह पिछेती झुलस रोग को सहने योग्य किस्म है
Kufri Lalima: इस किस्म के आलू गोल, लाल और सफेद गुद्दे वाले होते हैं आलू बड़े से मध्यम आकार के होते हैं यह किस्म 100-110 दिनों में पुटाई के लिए तैयार हो जाती है इसकी औसतन पैदावार 16 टन प्रति एकड़ होती है बिजाई के लिए ट्रैक्टर से चलने वाली सेमी ऑटोमेटिक या ऑटोमैटिक प्लांटर का प्रयोग करें अगेती बिजाई के लिए, सितंबर के आखिरी सप्ताह से अक्तूबर का पहला सप्ताह खेती के लिए उपयुक्त होता है मुख्य फसल के लिए अक्तूबर का दूसरे से चौथा सप्ताह बिजाई के लिए उपयुक्त समय होता है
Posted by Mukesh Kumar Mehta
Bihar
25-10-2019 06:14 PM
मुकेश जी आप 5 से 7 दिन तक फसल की बिजाई कर सकते हैं। धन्यवाद

Posted by Amrit chahal
Punjab
25-10-2019 06:13 PM
ਤੁਸੀ 250 ਗ੍ਰਾਮ ਗੁੜ, 250 ਗ੍ਰਾਮ ਗੁਲਕੰਦ, 100 ਗ੍ਰਾਮ ਸੌੰਫ, 100 ਗ੍ਰਾਮ ਸੁਕੇ ਆਵਲੇ ਤੇ 50 ਗ੍ਰਾਮ ਅਜਵਾਇਨ ਉਬਾਲ ਕੇ ਠਾਰ ਕੇ 5 ਦਿਨ ਦੇਣੀ ਸ਼ੁਰੂ ਕਰੋ, ਤੁਸੀ ਉਸ ਨੂੰ Enerdyna liquid 100-100ml ਸਵੇਰੇ ਸ਼ਾਮ, Lactomax tablet 10-10 ਗੋਲੀਆਂ ਸਵੇਰੇ ਸ਼ਾਮ ਰੋਜਾਨਾ ਦਿਓ ਬਾਕੀ ਉਸ ਨੂੰ ਰੋਜਾਨਾ 35-40ਕਿਲੋ ਹਰਾ ਚਾਰਾ ਦਿਓ ਅਤੇ ਸੂਣ ਤੋਂ ਇਕ ਹਫਤੇ ਬਾਦ ਉਸਦੀ ਡਿਵਰਮਿੰਗ ਕਰ ਸਕਦੇ ਹਾਂ ਤੁਸੀ ਉਸ ਨੂੰ ਕਣਕ ਦਾ ਦਲੀਆ 2 ਕਿਲੋ, 250 ਗ੍ਰਾਮ .... (Read More)
ਤੁਸੀ 250 ਗ੍ਰਾਮ ਗੁੜ, 250 ਗ੍ਰਾਮ ਗੁਲਕੰਦ, 100 ਗ੍ਰਾਮ ਸੌੰਫ, 100 ਗ੍ਰਾਮ ਸੁਕੇ ਆਵਲੇ ਤੇ 50 ਗ੍ਰਾਮ ਅਜਵਾਇਨ ਉਬਾਲ ਕੇ ਠਾਰ ਕੇ 5 ਦਿਨ ਦੇਣੀ ਸ਼ੁਰੂ ਕਰੋ, ਤੁਸੀ ਉਸ ਨੂੰ Enerdyna liquid 100-100ml ਸਵੇਰੇ ਸ਼ਾਮ, Lactomax tablet 10-10 ਗੋਲੀਆਂ ਸਵੇਰੇ ਸ਼ਾਮ ਰੋਜਾਨਾ ਦਿਓ ਬਾਕੀ ਉਸ ਨੂੰ ਰੋਜਾਨਾ 35-40ਕਿਲੋ ਹਰਾ ਚਾਰਾ ਦਿਓ ਅਤੇ ਸੂਣ ਤੋਂ ਇਕ ਹਫਤੇ ਬਾਦ ਉਸਦੀ ਡਿਵਰਮਿੰਗ ਕਰ ਸਕਦੇ ਹਾਂ ਤੁਸੀ ਉਸ ਨੂੰ ਕਣਕ ਦਾ ਦਲੀਆ 2 ਕਿਲੋ, 250 ਗ੍ਰਾਮ ਗੁੜ ਵਿਚ ਰਿਨ ਕੇ ਦੇ ਸਕਦੇ ਹੋ, ਅਤੇ 5-7 ਦਿਨ ਬਾਦ ਥੋੜੀ ਥੋੜੀ ਫੀਡ ਦੇਣੀ ਸ਼ੁਰੂ ਕਰ ਸਕਦੇ ਹੋ ..

Posted by vijay kumar
Madhya Pradesh
25-10-2019 06:13 PM
असली केसर सिर्फ जम्मू कश्मीर, ईरान और अफगानिस्तान में ही हो सकता है, यह कुसुम है, इसकी भी कई दवाई बनती है, यदि कोई और छक है तो जम्मू कश्मीर के इस किसान से बात करें, जिसके दादे, पड़दादे भी केसर की खेती करते थे और यह भी केसर की खेती करते है Javid Ahmed- 95964 93260 बाकि आप यह वीडियो देखें https://www.youtube.com/watchv=vl7c6L3ETnQ&t=8s बाकि यदि फिर भी यकीन नहीं .... (Read More)
असली केसर सिर्फ जम्मू कश्मीर, ईरान और अफगानिस्तान में ही हो सकता है, यह कुसुम है, इसकी भी कई दवाई बनती है, यदि कोई और छक है तो जम्मू कश्मीर के इस किसान से बात करें, जिसके दादे, पड़दादे भी केसर की खेती करते थे और यह भी केसर की खेती करते है Javid Ahmed- 95964 93260 बाकि आप यह वीडियो देखें https://www.youtube.com/watchv=vl7c6L3ETnQ&t=8s बाकि यदि फिर भी यकीन नहीं है तो तो आप अमृतपाल सिंह बराड़ प्रोफेसर, पीएयू लुधियाना इस वीडियो संबंधी विचार पड़ सकते हैं, यह फसल केसर की नहीं है, यह फसल कसुंबडे की है, इसे अंग्रेजी में Safflower कहते है, और विज्ञानं में इसे Carthamus tinctorius कहते है
Posted by ਸੁਖਚੈਨ ਸਿੰਘ
Punjab
25-10-2019 05:58 PM
Sukhchain ji feed tuhanu Godrej feed khanna ton mill skdi hai..
Posted by ਸੁਖਚੈਨ ਸਿੰਘ
Punjab
25-10-2019 05:55 PM
ਹਾਂਜੀ ਇਸਦੀ ਖੇਤੀ ਪੰਜਾਬ ਵਿਚ ਹੋ ਜਾਂਦੀ ਹੈ ਇਸਨੂੰ ਬਹੁਤ ਤਰ੍ਹਾਂ ਦੀਆਂ ਮਿੱਟੀਆਂ ਵਿੱਚ ਉਗਾਇਆ ਜਾ ਸਕਦਾ ਹੈ ਇਹ ਮਾੜੇ ਨਿਕਾਸ ਪ੍ਰਬੰਧ ਨੂੰ ਵੀ ਸਹਿਣ ਕਰ ਸਕਦੀ ਹੈ ਇਹ ਸੈਲਾਬੀ ਦਲਦਲੀ ਮਿੱਟੀ ਵਿੱਚ ਵਧੀਆ ਪੈਦਾਵਾਰ ਦਿੰਦੀ ਹੈ ਇਸਨੂੰ ਦਲਦਲੀ ਇਲਾਕਿਆਂ, ਨਹਿਰਾਂ ਅਤੇ ਹੋਰ ਜਲ ਸ੍ਰੋਤਾਂ de nede ਉਗਾਇਆ ਜਾ ਸਕਦਾ ਹੈ ਇਸਦੇ ਵਧੀਆ ਵਿਕਾਸ ਲਈ ਇਸਨੂੰ ਤੇਜ਼ਾਬੀ ਮਿੱਟੀ ਦੀ ਲੋੜ ਹੁੰਦੀ ਹੈ

Posted by Baldev
Punjab
25-10-2019 05:46 PM
BhaaG deputy director dairy development KAPURTHALA NAAL SAMPARK KARO G
Posted by Narender
Haryana
25-10-2019 05:43 PM
PBT 37: यह अगेती पकने वाली किस्म है जो कि 91 दिनों में पकती है यह तोरिया - गेहूं फसल चक्र के लिए अनुकूल है इस किस्म के बीज गहरे भूरे रंग के और मोटे होते हैं इसकी औसतन पैदावार 5.4 क्विंटल प्रति एकड़ है और तेल की मात्रा 41.7 प्रतिशत है TL 15: यह अगेती पकने वाली किस्म है यह 88 दिनों में पक जाती है इसकी औसतन पैदावार 4.5 क्विंटल प्रति .... (Read More)
PBT 37: यह अगेती पकने वाली किस्म है जो कि 91 दिनों में पकती है यह तोरिया - गेहूं फसल चक्र के लिए अनुकूल है इस किस्म के बीज गहरे भूरे रंग के और मोटे होते हैं इसकी औसतन पैदावार 5.4 क्विंटल प्रति एकड़ है और तेल की मात्रा 41.7 प्रतिशत है TL 15: यह अगेती पकने वाली किस्म है यह 88 दिनों में पक जाती है इसकी औसतन पैदावार 4.5 क्विंटल प्रति एकड़ है TL 17: यह किस्म 90 दिनों में पककर कटाई के लिए तैयार हो जाती है यह किस्म एक से ज्यादा फसलें उगाने के लिए अनुकूल है यह किस्म 5.2 क्विंटल प्रति एकड़ औसतन पैदावार देती है RLM 619: इस किस्म की सिंचित और बारानी क्षेत्रों में खेती करने के लिए सिफारिश की गई है यह किस्म 143 दिनों में कटाई के लिए तैयार हो जाती है इसके बीज मोटे होते हैं और इनमें 43 प्रतिशत तेल की मात्रा होती है यह किस्म सफेद कुंगी, झुलस रोग और पत्तों के निचले धब्बों की प्रतिरोधक है इसकी औसतन पैदावार 8 क्विंटल प्रति एकड़ होती है
PBR 91: यह किस्म 145 दिनों में कटाई के लिए तैयार हो जाती है यह झुलस रोग, कुंगी और कीटों के प्रतिरोधक है इसकी औसतन पैदावार 8.1 क्विंटल प्रति एकड़ होती है
PBR 97: यह किस्म बारानी हालातों में बोने के लिए उपयुक्त किसम है यह 136 दिनों में कटाई के लिए तैयार हो जाती है इसके दाने मध्यम मोटे होते हैं दानों में तेल की मात्रा 39.8 प्रतिशत होती है इसकी औसतन पैदावार 5.2 क्विंटल प्रति एकड़ होती है PBR 210: यह किस्म सिंचित हालातों में और समय पर बोने के लिए उपयुक्त किस्म है यह 150 दिनों में कटाई के लिए तैयार हो जाती है इसकी औसतन पैदावार 6 क्विंटल प्रति एकड़ होती है RLC 3: यह लंबी प्रकार की किस्म 145 दिनों में कटाई के लिए तैयार हो जाती है इसकी औसतन पैदावार 7.3 क्विंटल प्रति एकड़ होती है इसमें तेल की मात्रा 41.5 प्रतिशत होती है GSL 1: यह छोटे कद की और कम गिरने वाली किस्म है जो कि 160 दिनों में तैयार हो जाती है इसकी औसतन पैदावार 6.7 कि्ंवटल प्रति एकड़ और इसमें तेल की मात्रा 44.5 प्रतिशत होती है
PGSH51 : यह ऊंचे कद की और अधिक पैदावार देने वाली दोगली किस्म है जो कि 162 दिनों में पकती है इसकी औसतन पैदावार 7.9 क्विंटल प्रति एकड़ और इसमें तेल की मात्रा 44.5 प्रतिशत होती है
Gobhi sarson (canola type) : कनोला किस्म का तेल मनुष्य की सेहत के लिए लाभदायक है
Hyola PAC 401: यह दरमियाने कद की किस्म है और 150 दिनों में पकती है इसके बीज भूरे काले होते हैं जिनमें तेल की मात्रा 42 प्रतिशत होती है इसकी औसतन पैदावार 6.74 क्विंटल प्रति एकड़ होती है GSC 6 : इस किस्म की सही समय और सिंचित हालातों में बिजाई के लिए सिफारिश की गई है इसके बीज मोटे होते हैं जिनमें तेल की मात्रा 39.1 प्रतिशत होती है इसकी औसतन पैदावार 6.07 क्विंटल प्रति एकड़ होती है सरसों की बिजाई का सही समय सितंबर से अक्तूबर है तोरिया फसल की लिए बिजाई सितंबर के पहले पखवाड़े से मध्य अक्तूबर तक कर लेनी चाहिए अफ्रीकी सरसों और तारामीरा की फसल अक्तूबर के आखिर तक बोयी जा सकती है राया फसल की बिजाई मध्य अक्तूबर से नवंबर के आखिर तक की जाती है जब तारामीरा को मुख्य फसल के बीच उगाया जाता है तो इसकी बिजाई मुख्य फसल पर निर्भर करती है तारामीरा-सरसों की बिजाई के लिए पंक्ति से पंक्ति का फासला 30 सैं.मी. और पौधे से पौधे का फासला 10 से 15 सैं.मी. रखें गोभी सरसों की बिजाई के लिए पंक्तियों का फासला 45 सैं.मी. और पौधे से पौधे का फासला 10 सैं.मी. रखें बीज 4-5 सैं.मी. गहरे बीजने चाहिए
Posted by ਸੁਖਚੈਨ ਸਿੰਘ
Punjab
25-10-2019 05:31 PM
MSP ਤੋ ਥੱਲੇ ਸੇਲ ਹੁੰਦੀ ਹੈ ਜੀ ਸਰੋਂ ਦਾ ਰੇਟ ਲੱਗਭੱਗ 3700-3800 ਹੈ ਜੀ
Posted by sagandeep
Punjab
25-10-2019 05:23 PM
ਖੁੰਬਾਂ ਦੀ ਕਾਸ਼ਤ ਬਿਲਕੁੱਲ ਲਾਹੇਵੰਦ ਹੈ ਜੀ ਪਰ ਤੁਸੀ ਟ੍ਰੇਨਿੰਗ ਲੈ ਕੇ ਕਿਸੇ ਹੋਰ ਕਿਸਾਨ ਦੇ ਫਾਰਮ ਤੇ ਜਾ ਕੇ ਵੀ ਜਾਣਕਰੀ ਲੈ ਕੇ ਕੰਮ ਸ਼ੁਰੂ ਕਰੋ

Posted by ਹਰਨੇਕ ਸਿੰਘ
Punjab
25-10-2019 05:18 PM
ਹਰਨੇਕ ਸਿੰਘ ਜੀ ਸਾਡੇ ਕੋਲੋ ਮਿਲ ਜਾਵੇਗੀ ਜੀ ਤੁਸੀ 97810 41978 ਨੰਬਰ ਤੇ ਕਾਲ ਕਰੋ ਜੀ
Posted by PANKAJ Kumar
Uttar Pradesh
25-10-2019 05:16 PM
यदि आप डेयरी फार्मिंग शुरू करना चाहते है तो आप इस काम को पूरी तरह ट्रेनिंग लेकर शुरू करें आप एक बार में इक्ट्ठी गाय/भैंसे ना खरीदें, गायों/भैंसो को 2-2 महीनों के फासले पर खरीदें या फिर 3 पहले खरीदें ओर 3 महीने बाद फिर खरीद लें इससे दूध की कमी नहीं आयेगी पशु की नसल सबसे ज्यादा जरूरी है पशु खरीदने के समय कोशिश करें .... (Read More)
यदि आप डेयरी फार्मिंग शुरू करना चाहते है तो आप इस काम को पूरी तरह ट्रेनिंग लेकर शुरू करें आप एक बार में इक्ट्ठी गाय/भैंसे ना खरीदें, गायों/भैंसो को 2-2 महीनों के फासले पर खरीदें या फिर 3 पहले खरीदें ओर 3 महीने बाद फिर खरीद लें इससे दूध की कमी नहीं आयेगी पशु की नसल सबसे ज्यादा जरूरी है पशु खरीदने के समय कोशिश करें कि दिन में तीन बार दूध निकालकर ही पशु खरीदें भैंसो का एक दिन का दूध 12 लीटर और गायों को दूध 16-17 लीटर से कम ना हो गाभिनों को खरीदने का सही समय रखड़ियों से लेकर वैशाखी तक का होता है क्योंकि इस समय मौसम अच्छा होने के कारण हरा चारा भी खुला होता है गाभिनों के लिए शैड आवाजाई वाली सड़क पर ना बनायें और शैड सड़क से कम से कम 100 गज दूर हो शैड को धूप और हवा का ध्यान रखकर ही बनायें शैड हमेशा खेत या आस पास से 2 फुट ऊंचा बनायें क्योंकि निचले स्थान पर पानी खड़ा हो जाता है जिस कारण गंदगी पैदा हो जाती है और बाकी पशुओं का मल मूत्र का निकास भी आसानी से हो जाता है पशुओं के लिए बनायी जाने वाली खुरली ढाई तीन फुट चौड़ी होनी चाहिए खुरली पर खड़ने के लिए एक पशु को तकरीबन चार फुट जगह चाहिए मतलब 10 पशुओं के लिए 40 फुट लंबी खुरली बनेगी डेयरी फार्म से संबंधित सामान रखने के लिए स्टोर बनायें पशुओं का वितरण/दाना स्टोर करने के लिए कमरा सैलाब से रहित होना चाहिए शैड का फर्श पक्क, फिसलन रहित और जल्दी साफ होने वाला हो शैड में जितना हो सके पशुओं को खुला छोंड़े और पानी और दाना पूरा डालें पशु को खुला छोड़ने से पशुओं में अफारे की समस्या कम आती है बाकी अपनी आवश्यकता और क्षमता के मुताबिक ही सामान खरीदें और आर्थिक नुकसान से बचने के लिए प्रत्येक गाभिन का बीमा जरूर करवायें..
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