
Posted by Nissan singh
Punjab
30-10-2019 02:06 PM
Nissan ji tuci ehh bakri nu v de skde ho, ehh 75 kg weight lai 1 goli deni hai, jekar weight 35-40kg tak hai tan adhi goli deo..

Posted by Dharmendra tyagi
Uttar Pradesh
30-10-2019 01:59 PM
टमाटर की खेती अलग-अलग मिट्टी की किस्मों में की जा सकती है जैसे कि रेतली, चिकनी, दोमट, काली, लाल मिट्टी, जिसमें पानी के निकास का सही प्रबंध हो इसकी अच्छी पैदावार के लिए इसे अच्छे निकास वाली रेतली मिट्टी में उत्तम जैविक तत्वों से उगाया जा सकता है अच्छे निकास वाली मिट्टी की पी एच 7-8.5 होनी चाहिए यह तेजाबी और खारी मि.... (Read More)
टमाटर की खेती अलग-अलग मिट्टी की किस्मों में की जा सकती है जैसे कि रेतली, चिकनी, दोमट, काली, लाल मिट्टी, जिसमें पानी के निकास का सही प्रबंध हो इसकी अच्छी पैदावार के लिए इसे अच्छे निकास वाली रेतली मिट्टी में उत्तम जैविक तत्वों से उगाया जा सकता है अच्छे निकास वाली मिट्टी की पी एच 7-8.5 होनी चाहिए यह तेजाबी और खारी मिट्टी में भी उगने योग्य फसल है ज्यादा तेजाबी मिट्टी में खेती ना करें अगेती फसल के लिए हल्की मिट्टी लाभदायक है, जबकि अच्छी पैदावार के लिए चिकनी, दोमट और बारीक रेत वाली मिट्टी बहुत अच्छी है प्रसिद्ध किस्में :- Pusa Rubi,Pusa Early Dwarf,Punjab Chhuhara,Pusa 120,Roma Selection 120 टमाटर के बीजों को पहले नर्सरी में बोया जाता है और फिर हन्हें मुख्य खेत में रोपित किया जाता है मुख्य खेत की तैयार के लिए अच्छी जोताई और समतल मिट्टी की जरूरत होती है मिट्टी को भुरभुरा बनाने के लिए 4-5 बार जोताई करें फिर मिट्टी को समतल करने के लिए सुहागा फेरें आखिरी जोताई के समय गाय का गला हुआ गोबर 60 किलो को मिट्टी में अच्छी तरह मिलायें रोपाई के लिए 80-90 सैं.मी. चौड़े बैड तैयार करें बिजाई से एक महीना पहले मिट्टी को धूप में खुला छोड़ दें आवश्यक लंबाई और 80-90 सैं.मी. की चौड़ाई वाले बैडों पर टमाटर के बीजों को बोयें बिजाई के बाद बैडों को प्लास्टिक शीट से ढक दें और फूलों को पानी देने वाले डब्बे से रोज़ सुबह बैडों की सिंचाई करें रोगाणुओं के हमले से फसल को बचाने के लिए नर्सरी वाले बैडों को अच्छे नाइलोन के जाल से ढक दें पनीरी लगाने के 10-15 दिन बाद 19:19:19 के साथ सूक्ष्म तत्वों की 2.5-3 ग्राम प्रति लीटर पानी में मिलाकर स्प्रे करें पौधों को तंदरूस्त और मजबूत बनाने के लिए बिजाई के 20 दिन बाद लीहोसिन 1 मि.ली. प्रति लीटर पानी की स्प्रे करें प्रभावित पौधों को खेत में से उखाड़ दें ताकि पौधों का फासला सही रखा जा सके और निरोग पौधों को रोगाणुओं से भी बचाया जा सके रोगाणुओं से बचाव के लिए मिट्टी में नमी बनाये रखें यदि सूखा दिखे तो पौधों को रोपाई से पहले मैटालैक्सिल 2.5 ग्राम प्रति लीटर पानी में 2-3 बार भिगोयें बिजाई से 25-30 दिन बाद पनीरी वाले पौधे तैयार हो जाते हैं और इनके 3-4 पत्ते निकल आते हैं यदि पौधों की आयु 30 दिन से ज्यादा हो तो इसके उपचार के बाद इसे खेत में लगायें पनीरी उखाड़ने के 24 घंटे पहले बैडों को पानी लगायें ताकि पौधे आसानी से उखाड़े जा सकें बसंत के मौसम के लिए नर्सरी नवंबर-दिसंबर में तैयार करें जबकि सर्दियों में KE मौसम में सितंबर-अक्तूबर महीने में नर्सरी में बीजों को बोयें किस्म और विकास के ढंग मुताबिक 60x30 सैं.मी. या 75x60 सैं.मी. या 75x75 सैं.मी. का फासला रखें में छोटे कद वाली किस्म के लिए 75x30 सैं.मी. का फासला रखें और वर्षा वाले मौसम के लिए 120-150x30 सैं.मी. का फासला रखें नर्सरी में बीजों को 0-5 सैं.मी. गहराई में बोयें और मिट्टी से ढक दें पनीरी को उखाड़कर खेत में लगा दें एक एकड़ खेत में बिजाई के लिए 100-160 ग्राम बीज नए पौधे तैयार करने के लिए प्रयोग किए जाते हैं हाइब्रिड किस्मों के लिए 80-100 ग्राम बीज प्रति एकड़ में प्रयोग करें नाइट्रोजन 40-60 किलो (90-130 किलो यूरिया), फासफोरस 25 किलो (155 किलो एस एस पी) और पोटाश 25 किलो (42 किलो एम ओ पी) की मात्रा प्रति एकड़ में प्रयोग करें नए पौधों की रोपाई के 2-3 सप्ताह पहले फासफोरस और पोटाश की पूरी मात्रा और नाइट्रोजन की एक तिहाई मात्रा डालें बाकी बची नाइट्रोजन को दो भागों में बांटकर रोपाई 30 और 50 दिनों के बाद डालें लगातार गोडाई करें और जड़ों को मिट्टी लगाएं 45 दिनों तक खेत को नदीन रहित रखें यदि नदीन नियंत्रण से बाहर हो जायें तो यह 70-90 प्रतिशत पैदावार कम कर देंगे रोपाई से पहले मुख्य खेत में पैंडीमैथालीन 0.4 किलो को प्रति एकड़ में लगाएं यदि नदीनों की संख्या ज्यादा हो तो नदीनों के अंकुरण के बाद सैंकर 0.2 किलो की प्रति एकड़ में स्प्रे करें नदीनों को रोकने के साथ साथ मिट्टी के तापमान को कम करने के लिए मलचिंग भी प्रभावी तरीका है रोपाई के बाद दो से तीन दिन हल्की सिंचाई करें मिट्टी में नमी के आधार पर सर्दियों में 12 से 15 दिनों के अंतराल पर सिंचाई करें और गर्मियों में 6-7 दिनों के अंतराल पर सिंचाई करें फूल निकलने की अवस्था सिंचाई के लिए गंभीर होती हैं इस अवस्था में पानी की कमी से फूलों का गिरना बढ़ता है और फलों और उत्पादकता पर इसका गंभीर प्रभाव पड़ता है बहुत सारी जांचों के मुताबिक यह पता चला है कि हर पखवाड़े में आधा इंच सिंचाई करने से जड़ें ज्यादा फैलती हैं और इससे पैदावार भी अधिक हो जाती है अत्याधिक सिंचाई ना करें पनीरी लगाने के 70 दिन बाद पौधे फल देना शुरू कर देते हैं कटाई का समय इस बात पर निर्भर करता है कि फलों को दूरी वाले स्थानों पर लेकर जाना है या ताजे फलों को मंडी में ही बेचना है आदि पके हरे टमाटर जिनका 1/4 भाग गुलाबी रंग का हो, लंबी दूरी वाले स्थानों पर लेकर जाने के लिए प्रयोग किए जाते हैं ज्यादातर सारे फल गुलाबी या लाल रंग में बदल जाते हैं, पर सख्त गुद्दे वाले टमाटरों को नज़दीक की मंडी में बेचा जा सकता है अन्य उत्पाद बनाने और बीज तैयार करने के लिए पूरी तरह पके और नर्म गुद्दे वाले टमाटरों का प्रयोग किया जाता है कटाई के बाद आकार के आधार पर टमाटरों को छांट लिया जाता है इसके बाद टमाटरों को बांस की टोकरियों या लकड़ी के बक्सों में पैक कर लिया जाता है लंबी दूरी पर लिजाने के लिए टमाटरों को पहले ठंडा रखें ताकि इनके खराब होने की संभावना कम हो जाये पूरी तरह पके टमाटरों से जूस, सीरप और कैचअप आदि उत्पाद भी तैयार किए जाते हैं

Posted by Varun Bhardwaj
Haryana
30-10-2019 01:55 PM
साइलेज के लिए खर्चा कम आता है पशुओं को 25 किलो हरा चारा, 2 किलो तूड़ी और 4 किलो फीड डालें
Posted by ਸੋਹਨ ਸਿੰਘ
Punjab
30-10-2019 01:51 PM
ਸ਼੍ਰੀਮਾਨ ਜੀ ਇਸਦੀ ਖੇਤੀ ਸੇਮ ਵਾਲੀ ਜਮੀਨ ਚ ਕੀਤੀ ਜਾ ਸਕਦੀ ਹੈ, ਮਾਲਾਬਾਰ ਨੀਮ ਦੀ ਨਰਸਰੀ ਤਿਆਰ ਕਾਰਨ ਲਈ ਮਾਰਚ - ਅਪ੍ਰੈਲ ਵਿਚ ਇਸਦੀ ਬਿਜਾਈ ਕੀਤੀ ਜਾਂਦੀ ਹੈ, ਸਾਫ ਅਤੇ ਸੁਕੇ ਬੀਜ ਨੂੰ ਨਰਸਰੀ ਬੈਡ ਤੇ ਇਕ ਡਰਿੱਲ ਨਾਲ 5 cm ਦੇ ਫਾਸਲੇ ਤੇ ਲਗਾਏ ਜਾਂਦੇ ਹਨ ਅਤੇ 90 ਦੀਨਾ ਬਾਅਦ ਨਿਕਲਦੇ ਹਨ ਨਰਸਰੀ ਤੋਂ ਬਾਅਦ ਇਹਨਾਂ ਨੂੰ ਬਾਹਰ ਲਗਾਉਣ ਲਈ 5x5 ਮੀਟਰ ਦੇ ਫਾਸਲਾ ਰੱਖਿਆ ਜਾਂਦਾ ਹੈ, ਧੰਨਵਾ.... (Read More)
ਸ਼੍ਰੀਮਾਨ ਜੀ ਇਸਦੀ ਖੇਤੀ ਸੇਮ ਵਾਲੀ ਜਮੀਨ ਚ ਕੀਤੀ ਜਾ ਸਕਦੀ ਹੈ, ਮਾਲਾਬਾਰ ਨੀਮ ਦੀ ਨਰਸਰੀ ਤਿਆਰ ਕਾਰਨ ਲਈ ਮਾਰਚ - ਅਪ੍ਰੈਲ ਵਿਚ ਇਸਦੀ ਬਿਜਾਈ ਕੀਤੀ ਜਾਂਦੀ ਹੈ, ਸਾਫ ਅਤੇ ਸੁਕੇ ਬੀਜ ਨੂੰ ਨਰਸਰੀ ਬੈਡ ਤੇ ਇਕ ਡਰਿੱਲ ਨਾਲ 5 cm ਦੇ ਫਾਸਲੇ ਤੇ ਲਗਾਏ ਜਾਂਦੇ ਹਨ ਅਤੇ 90 ਦੀਨਾ ਬਾਅਦ ਨਿਕਲਦੇ ਹਨ ਨਰਸਰੀ ਤੋਂ ਬਾਅਦ ਇਹਨਾਂ ਨੂੰ ਬਾਹਰ ਲਗਾਉਣ ਲਈ 5x5 ਮੀਟਰ ਦੇ ਫਾਸਲਾ ਰੱਖਿਆ ਜਾਂਦਾ ਹੈ, ਧੰਨਵਾਦ
Posted by Gurjit Singh
Punjab
30-10-2019 01:47 PM
ਗੁਰਜੀਤ ਜੀ, ਕਣਕ ਦੀ ਬਿਜਾਈ ਦਾ ਸਮਾਂ ਜਾਨਣ ਲਈ ਕਿਰਪਾ ਤੁਸੀ ਇਹ ਨਾਲ ਭੇਜੀ ਫੋਟੋ ਦੇਖੋ, ਧੰਨਵਾਦ
Posted by Suresh Rajput
Uttar Pradesh
30-10-2019 01:36 PM
बिजाई से पहले, बीज को 12-24 घंटे के लिए पानी में भिगोयें इससे इनकी अंकुरण प्रतिशतता में वृद्धि होती है मिट्टी से पैदा होने वाली फंगस से बचाने के लिए बिजाई से पहले, कार्बेनडाज़िम 2 ग्राम या थीरम 2.5 ग्राम से प्रति किलो बीज का उपचार करें रासायनिक उपचार के बाद ट्राइकोडरमा विराइड 4 ग्राम या स्यिूडोमोनास फ्लूरोसेंस 10 .... (Read More)
बिजाई से पहले, बीज को 12-24 घंटे के लिए पानी में भिगोयें इससे इनकी अंकुरण प्रतिशतता में वृद्धि होती है मिट्टी से पैदा होने वाली फंगस से बचाने के लिए बिजाई से पहले, कार्बेनडाज़िम 2 ग्राम या थीरम 2.5 ग्राम से प्रति किलो बीज का उपचार करें रासायनिक उपचार के बाद ट्राइकोडरमा विराइड 4 ग्राम या स्यिूडोमोनास फ्लूरोसेंस 10 ग्राम से प्रति किलो बीज का उपचार करें
Posted by ਹਰਵਿੰਦਰ ਸਿੰਘ
Punjab
30-10-2019 01:31 PM
tuci cow nu Bovimin-B, Minfa gold, agrimin koi v mineral mixture de skde ho, ehh tuci gaban pashu nu v de skde ho, tuci rojana 50gm de hisab nal de skde ho.
Posted by ਅਮਿ੍ਤ ਪਾਲ ਸਿੰਘ
Punjab
30-10-2019 01:23 PM
ਅੰਮ੍ਰਿਤ ਪਾਲ ਜੀ, ਪੰਜਾਬ ਵਿਚ ਸੇਬ ਦੀ ਖੇਤੀ ਕੀਤੀ ਜਾ ਸਕਦੀ ਹੈ,ਪਰ ਇਸਨੂੰ ਕੋਈ ਵੱਡੇ ਪੱਧਰ ਤੇ ਨਹੀਂ ਕਰ ਰਿਹਾ ਕੁੱਝ ਕਿਸਾਨਾਂ ਵਲੋਂ ਇਸਦੇ ਬੂਟੇ ਲਗਾਏ ਗਏ ਹਨ ਤੁਸੀ ਸੇਬ ਦੀ ਜਾਣਕਾਰੀ ਲੈਣ ਲਈ Hariman sharma ਜੀ ਨਾਲ ਸੰਪਰਕ ਸਕਦੇ ਹੋ (9418867209 ਜਾ 7018520244 ) ਇਹਨਾਂ ਵਲੋਂ ਇਕ ਸੇਬ ਦੀ ਕਿਸਮ ਤਿਆਰ ਕੀਤੀ ਗਈ ਹੈ ਜਿਸਦਾ ਨਾਮ HRM 99 ਹੈ ਜੋ ਕਿ 50* C ਸੇ ਤਾਪਮਾਨ ਤੇ ਵੀ ਫ਼ਲ ਦੇਣ ਵਿਚ ਸਫਲ ਹੈ, ਧੰਨਵਾਦ

Posted by guri singh
Punjab
30-10-2019 01:23 PM
ਸ਼੍ਰੀਮਾਨ ਜੀ, ਕੁਦਰਤੀ ਖੇਤੀ ਲਈ ਕਣਕ ਦੀ ਬਿਜਾਈ ਤੋਂ ਪਹਿਲਾ ਇਸ ਵਿਚ ਰੂੜੀ ਦੀ ਖਾਦ 5 -7 ਟੰਨ ਪ੍ਰਤੀ ਏਕੜ ਦੇ ਹਿਸਾਬ ਨਾਲ ਪਾਓ, ਅਤੇ ਕਣਕ ਦੀ ਫ਼ਸਲ ਦੇ ਵਿਕਾਸ ਲਈ ਪਾਥੀਆਂ ਦੇ ਪਾਣੀ ਦਾ ਘੋਲ ਬਣਾ ਕੇ ਸਪਰੇ ਕਰੋ, ਇਸਦਾ ਘੋਲ ਤਿਆਰ ਕਾਰਨ ਲਈ 5 -7 ਪਾਥੀਆਂ ਨੂੰ 50 ਲਿਟਰ ਪਾਣੀ ਚ 4 -5 ਦੀਨਾ ਲਈ ਰੱਖੋ ਜਦ ਪਾਣੀ 30 ਲਿਟਰ ਹੋ ਜਾਏ ਤਾਂ ਇਸ ਵਿਚ 90 ਲਿਟਰ ਪਾਣੀ ਹੋਰ ਮਿਲਾ ਕੇ ਇਸਦੀ ਸਪਰੇ ਕਰ ਦਿਓ, ਜੇਕਰ ਫ਼ਸਲ ਵ.... (Read More)
ਸ਼੍ਰੀਮਾਨ ਜੀ, ਕੁਦਰਤੀ ਖੇਤੀ ਲਈ ਕਣਕ ਦੀ ਬਿਜਾਈ ਤੋਂ ਪਹਿਲਾ ਇਸ ਵਿਚ ਰੂੜੀ ਦੀ ਖਾਦ 5 -7 ਟੰਨ ਪ੍ਰਤੀ ਏਕੜ ਦੇ ਹਿਸਾਬ ਨਾਲ ਪਾਓ, ਅਤੇ ਕਣਕ ਦੀ ਫ਼ਸਲ ਦੇ ਵਿਕਾਸ ਲਈ ਪਾਥੀਆਂ ਦੇ ਪਾਣੀ ਦਾ ਘੋਲ ਬਣਾ ਕੇ ਸਪਰੇ ਕਰੋ, ਇਸਦਾ ਘੋਲ ਤਿਆਰ ਕਾਰਨ ਲਈ 5 -7 ਪਾਥੀਆਂ ਨੂੰ 50 ਲਿਟਰ ਪਾਣੀ ਚ 4 -5 ਦੀਨਾ ਲਈ ਰੱਖੋ ਜਦ ਪਾਣੀ 30 ਲਿਟਰ ਹੋ ਜਾਏ ਤਾਂ ਇਸ ਵਿਚ 90 ਲਿਟਰ ਪਾਣੀ ਹੋਰ ਮਿਲਾ ਕੇ ਇਸਦੀ ਸਪਰੇ ਕਰ ਦਿਓ, ਜੇਕਰ ਫ਼ਸਲ ਵਿਚ ਕੀਤਾ ਦਾ ਹਮਲਾ ਨਾਜਰ ਆਉਂਦਾ ਹੈ ਤਾਂ ਉਸਦੀ ਰੋਕਥਾਮ ਲਈ ਨੀਮ ਦਾ ਤੇਲ 50 ml ਪ੍ਰਤੀ ਅਕਰੇ ਦੇ ਹਿਸਾਬ ਨਾਲ ਸਪਰੇ ਕਰੋ ਅਤੇ ਜੇਕਰ ਫ਼ਸਲ ਵਿਚ ਫੰਗਸ ਦਾ ਹਮਲਾ ਹੋ ਜਾਏ ਉਸਦੇ ਲਈ ਖੱਟੀ ਲੱਸੀ 3 liter ਪ੍ਰਤੀ ਏਕੜ ਦੇ ਹਿਸਾਬ ਨਾਲ ਸਪਰੇ ਕਰਨੀ ਹੁੰਦੀ ਹੈ, ਧੰਨਵਾਦ
Posted by Jayesh kalal
Rajasthan
30-10-2019 01:22 PM
श्रीमान जी, इन किस्मो की सिफारिश राजस्थान के लिए नहीं की गई है, धन्यवाद
Posted by ਅਮਿ੍ਤ ਪਾਲ ਸਿੰਘ
Punjab
30-10-2019 01:21 PM
Amritpal ji, jekar 191919 di spray admi te pe jawe tan kai tara diyan problems ho sakdiya han, jive ke skin problems , akhan vich jaan nal eyes damage ho sakdiya han ate hor vi health issues a sakde han, dhanwad
Posted by Iqbal Singh
Punjab
30-10-2019 01:21 PM
Iqbaal ji, eh fungus da hamla hoea hai, isdi roktham lai mencozeb @ 4gm prati liter pani de hisaab nal spray karo, dhnawad
Posted by Raju Singh Rathore
Rajasthan
30-10-2019 01:19 PM
german shepherd dog लेने के लिए आप Dhruv Pandey 18002004995 Dog kennel फार्म से संपर्क कर सकते है इस नस्ल का डोग रखवाली के लिए ठीक रहता है
Posted by PAWAN KUMAR SINGH
Uttar Pradesh
30-10-2019 01:18 PM
Pawan Kumar ji UP me Online ganna parchi dekhne ke lia aap apne phone me google par jakar CANEUP.IN likh kar search kare ge to aap sarkar duara chlai gaee website par chale jaege or ancre dekhe par click kar ke apna jila or mill ka name bhar kar apni parchi ki date dekh sakte hai, is ke bina aap 1800-121-3203, 1800-103-5823 toll free no. par samparak kar adhik jankari bhi le sakte hai, THankyou.

Posted by Lalan Kumar
Bihar
30-10-2019 01:17 PM
श्रीमान जी, फसल के लिए प्रयोग किया जाने वाला खेत नदीनों और पिछली फसल से मुक्त होना चाहिए मिट्टी को नर्म करने के लिए 6 से 7 बार जोताई करें खेत में 4-6 टन प्रति एकड़ रूड़ी की खाद और 10 पैकेट एसपरजिलियम के डालें खेत में 45-50 सैं.मी. के फासले पर खाल और मेंड़ बनाएं रबी के मौसम में खेती के लिए बिजाई 15 अक्तूबर से 10 नवंबर तक पूरी क.... (Read More)
श्रीमान जी, फसल के लिए प्रयोग किया जाने वाला खेत नदीनों और पिछली फसल से मुक्त होना चाहिए मिट्टी को नर्म करने के लिए 6 से 7 बार जोताई करें खेत में 4-6 टन प्रति एकड़ रूड़ी की खाद और 10 पैकेट एसपरजिलियम के डालें खेत में 45-50 सैं.मी. के फासले पर खाल और मेंड़ बनाएं रबी के मौसम में खेती के लिए बिजाई 15 अक्तूबर से 10 नवंबर तक पूरी कर लें मेंड़ों पर बिजाई करना ज्यादा लाभदायक रहता है क्योंकि इससे फसल को जल्दी अंकुरित होने में मदद मिलती है और फसल ठंड से भी बची रहती है रबी के मौसम में खेती के लिए 60x18 सैं.मी. फासले का प्रयोग करें बीजों को 4-5 सैं.मी. की गहराई पर बोयें बिजाई हाथों से गड्ढा खोदकर या आधुनिक तरीके से ट्रैक्टर और बिजाई वाली मशीन की मदद से मेंड़ बनाकर की जा सकती है धन्यवाद

Posted by Rahul
Gujarat
30-10-2019 01:17 PM
Red sandalwood, white sandalwood चंदन की किस्में हैं. इसकी खेती के लिए जमीन को अप्रैल-मई महीने में तैयार किया जाता है इसकी बिजाई मई-अक्टूबर महीने में की जाती है पर इसको बीजने का सबसे सही समय जुलाई-अगस्त महीना है पौधे से पौधे की दूरी 3 मीटर होनी चाहिए..यूरिया@50ग्राम/पेड़/साल , एसएसपी@100 ग्राम/पेड़/साल और मयूरिएट आफ पोटाश@40 ग्राम/पेड़/साल.... (Read More)
Red sandalwood, white sandalwood चंदन की किस्में हैं. इसकी खेती के लिए जमीन को अप्रैल-मई महीने में तैयार किया जाता है इसकी बिजाई मई-अक्टूबर महीने में की जाती है पर इसको बीजने का सबसे सही समय जुलाई-अगस्त महीना है पौधे से पौधे की दूरी 3 मीटर होनी चाहिए..यूरिया@50ग्राम/पेड़/साल , एसएसपी@100 ग्राम/पेड़/साल और मयूरिएट आफ पोटाश@40 ग्राम/पेड़/सालको दो हिस्सों में डालना चाहिए पहली डोज़ मार्च-अप्रैल महीने में और दूसरी डोज़ सितम्बर-अक्टूबर में दी जानी चाहिए इसके बारे में और जानकारी लेने के लिए आप अरुण खुरमी 9878123123 जी से संपर्क कर सकते है
Posted by baljinder singh
Punjab
30-10-2019 01:12 PM
Baljinder singh ji 1121 hathi vadhi da rate 2650/Q, ate Machine nal vadhi da rate 2550/Q chale reha hai, Thankyou.
Posted by pramod lal
Bihar
30-10-2019 01:11 PM
Pramod lal ji Strawberry Plants ke lia aap Prashant 8272000077 Mahadev Herbal Enterprises se samparak kar sakte hai. Thankyou.
Posted by Rahul Dedha
Uttar Pradesh
30-10-2019 01:06 PM
राहुल जी पशु को ब्याने से पहले Vitum-H liquid (Tineta Pharma Pvt. Ltd.) या Vitamor-h liquid (Provalis) कंपनी का दे सकते है ये आप ब्याने से दो महीने पहले 10—10 मि.ली. सुबह शाम दे सकते है

Posted by SATNAM SINGH
Punjab
30-10-2019 01:06 PM
ਵੈਸੇ ਮਿੱਟੀ ਪਰਖ ਕਰਵਾਉਣੀ ਜਰੂਰੀ ਹੈ ਜੇਕਰ ਤੁਸੀਂ ਝੋਨੇ ਚ ਪੋਟਾਸ਼ ਪਾਈ ਹੈ ਤਾ ਕਣਕ ਚ ਲੋੜ ਨਹੀ

Posted by Arpita Jain
Rajasthan
30-10-2019 01:06 PM
अर्पिता जैन जी ड्रैगन फल की खेती के लिए आप ड्रैग्न फल की कलमें लगाई जाती हैं यह वृक्ष गुजरात में होता है, एक एकड़ में तकरीबन इसकी 1600 कलमें लगाई जाती हैं और इन कलमों को पहले गमले में तैयार किया जाता है और फिर अप्रैल से सितंबर तक कभी भी खेत में लगा सकते हैं और एक कलम लगभग 70 रूपये की आती है, अधिक जानकारी के लिए आप नीच.... (Read More)
अर्पिता जैन जी ड्रैगन फल की खेती के लिए आप ड्रैग्न फल की कलमें लगाई जाती हैं यह वृक्ष गुजरात में होता है, एक एकड़ में तकरीबन इसकी 1600 कलमें लगाई जाती हैं और इन कलमों को पहले गमले में तैयार किया जाता है और फिर अप्रैल से सितंबर तक कभी भी खेत में लगा सकते हैं और एक कलम लगभग 70 रूपये की आती है, अधिक जानकारी के लिए आप नीचे दिए नंबर पर बात कर सकते हैं विजय कुमार-7065414241
Posted by Raju Singh Rathore
Rajasthan
30-10-2019 01:06 PM
राजू जी यदि आप ज्यादा दूध के लिए गाय लेना चाहते है तो एचएफ गाय रख सकते है ये आपको 25—30 लीटर दूध देने वाली गाय 60—65 हज़ार तक मिल सकती है लेकिन इसे बीमारियां ज्यादा लगती है जिसके कारण इसे ज्यादा देखभाल की जरूरत होती है इसके इलावा आप जर्सी, साहीवाल गाय भी रख सकते है
Posted by Gurjant singh
Chandigarh
30-10-2019 12:49 PM
ਸ੍ਰੀ ਮਾਨ ਜੀ PBW 677 ਕਿਸਮ 20ਨਵੰਬਰ ਤੋਂ 30ਨਵੰਬਰ ਤੱਕ ਬੀਜ ਸਕਦੇ ਹੋ

Posted by anil kumar
Haryana
30-10-2019 12:40 PM
Shri maan g PBW 343,HD 3086,HD-2967 uttam varieties hai and HD-3226, DBW-187,DBW-222 new varieties hai....
Posted by Gurjant singh
Chandigarh
30-10-2019 12:31 PM
Gurjant singh ji kanak di bijai is dia kisma de adhar te kiti jandi hai, is bare visthar vich jankari lai tusi answer nal diti gai photo dekho ji, Thankyou.
Posted by Harpal Singh
Punjab
30-10-2019 12:30 PM
ਸਾਡੇ ਕੋਲ ਹਰ ਟਾਈਮ ਵਰਮੀ ਕੰਪੋਸਟ ਤਿਆਰ ਮਿਲਦਾ ਹੈ ਜੀ ਤੁਸੀ ਸਾਨੂੰ 98726 24253 ਨੰਬਰ ਤੇ ਸੰਪਰਕ ਕਰੋ ਜੀ

Posted by yashpal
Madhya Pradesh
30-10-2019 12:25 PM
आप गाय को पेट के कीड़ों के लिए Fendikind plus गोली दें, उसे रोजाना 35—40 किलो हरा चारा दें और हर तीन महीने के बाद पेट के कीड़ों की गोली दें इसके साथ आप Enerdyna liquid 50-50ml सुबह शाम, Milkout powder 2—2 चम्मच सुबह शाम और Calcimust gold liquid 50-50ml रोजाना दें.
Posted by Avirender singh
Rajasthan
30-10-2019 12:25 PM
Raj 1482: इस किस्म का गहरे हरे रंग का पौधा, जिसका कद 80-90 सैं.मी. होता है इसकी अधिक फलियां, मोटे दाने, चमकदार और हल्के रंग के दाने होते हैं इसकी औसतन पैदावार 15-16 क्विंटल प्रति एकड़ होती है यह किस्म 126-134 दिनों में परिपक्व होती है इसका मुख्य रूप से ब्रैड बनाने के लिए उपयोग किया जाता है इसमें प्रोटीन की मात्रा 11-12 प्रतिशत होत.... (Read More)
Raj 1482: इस किस्म का गहरे हरे रंग का पौधा, जिसका कद 80-90 सैं.मी. होता है इसकी अधिक फलियां, मोटे दाने, चमकदार और हल्के रंग के दाने होते हैं इसकी औसतन पैदावार 15-16 क्विंटल प्रति एकड़ होती है यह किस्म 126-134 दिनों में परिपक्व होती है इसका मुख्य रूप से ब्रैड बनाने के लिए उपयोग किया जाता है इसमें प्रोटीन की मात्रा 11-12 प्रतिशत होती है
PBW 502: यह किस्म सिंचित क्षेत्रों में उगाने के अनुकूल है पौधे का कद 90-100 सैं.मी. होता है यह किस्म 130-135 दिनों में कटाई के लिए तैयार हो जाती है यह करनाल बंट के प्रतिरोधी है इसकी औसतन पैदावार 18-20 क्विंटल प्रति एकड़ होती है
PBW 550: पौधे का कद 83-91 सैं.मी. होता है यह किस्म 128-135 दिनों में कटाई के लिए तैयार हो जाती है इसके दाने मोटे सुनहरे पीले रंग के होते हैं इसके 1000 दानों का भार लगभग 38 ग्राम होता है इसकी औसतन पैदावार 18-24 क्विंटल प्रति एकड़ होती है
HD 2697: पौधे का कद 83-91 सैं.मी. होता है यह किस्म 128-133 दिनों में कटाई के लिए तैयार हो जाती है भारी ज़मीनें इस किस्म की खेती के लिए अच्छी रहती हैं इसके दाने मोटे सुनहरे रंग के होते हैं इसकी औसतन पैदावार 18-24 क्विंटल प्रति एकड़ होती है
Raj 6560: यह किस्म सिंचित क्षेत्रों में उगाने के लिए अनुकूल है पौधे का कद 90-100 सैं.मी. होता है यह किस्म 130-135 दिनों में कटाई के लिए तैयार हो जाती है इसकी औसतन पैदावार 18-22 क्विंटल प्रति एकड़ होती है
Raj 3077: इस किस्म को वंडर गेहूं के नाम से जाना जाता है पौधे का कद 115-118 सैं.मी. होता है इसकी औसतन पैदावार 15-16 क्विंटल प्रति एकड़ होती है यह किस्म 126-134 दिनों में परिपक्व हो जाती है इसका प्रयोग मुख्य रूप से ब्रैड बनाने के लिए किया जाता है इसमें प्रोटीन की मात्रा 11-12.5 प्रतिशत होती है
Raj 4079: यह किस्म 115-120 दिनों में कटाई के लिए तैयार हो जाती है इसके पौधे का कद 75-80 सैं.मी. होता है यह सामान्य और सिंचित हालातों में अच्छे परिणाम देती है यह गर्दन तोड़ के प्रतिरोधी किस्म है इसकी औसतन पैदावार 19-21 क्विंटल प्रति एकड़ होती है इसके दाने मोटे, मध्यम आकार के और सख्त होते हैं यह किस्म राजस्थान के गर्म जलवायु को सहने योग्य किस्म है और अच्छी उपज देती है
Raj 4037: इसके पौधे का कद 83-95 सैं.मी. होता है इसकी औसतन पैदावार 15-16 क्विंटल प्रति एकड़ होती है यह किस्म 120 दिनों में परिपक्व हो जाती है यह मुख्य रूप से ब्रैड बनाने के लिए उपयोग किया जाता है इसमें प्रोटीन की मात्रा 11-12 प्रतिशत होती है यह किस्म काली जंग और तने पर जंग के प्रतिरोधी है
Raj 4120: यह किस्म 110-120 दिनों में कटाई के लिए तैयार हो जाती है इसके पौधे का कद 80-94 सैं.मी. होता है यह किस्म सामान्य और सिंचित हालातों में अच्छे परिणाम देती है इसका तना मजबूत होता है और गर्दन तोड़ के प्रतिरोधी होता है इसकी औसतन पैदावार 20-24 क्विंटल प्रति एकड़ होती है यह किस्म राजस्थान के गर्म जलवायु को सहने योग्य किस्म है और अच्छी उपज देती है
DBW 17: इसके पौधे का कद 80-85 सैं.मी. होता है यह किस्म 130-132 दिनों में कटाई के लिए तैयार हो जाती है यह करनाल बंट के प्रतिरोधी किस्म है इसका तना मजबूत होता है जो कि यह दर्शाता है कि यह गर्दन तोड़ के प्रतिरोधी है इसके दाने मोटे, मध्यम आकार के और सख्त होते हैं यह किस्म सामान्य और सिंचित हालातों में अच्छे परिणाम देती है इसकी औसतन पैदावार 16-20 क्विंटल प्रति एकड़ होती है
Raj 4238: यह किस्म 115-120 दिनों में कटाई के लिए तैयार हो जाती है इसके पौधे का कद 82-86 सैं.मी. होती है इसका तना मजबूत होता है जो कि फसल को गर्दन तोड़ से बचाता है यह करनाल बंट के प्रतिरोधी किस्म है इसके दाने मध्यम आकार के होते हैं और औसतन पैदावार 16-20 क्विंटल प्रति एकड़ होती है
WH 1080: यह किस्म 127-133 दिनों में कटाई के लिए तैयार हो जाती है इसके पौधे का कद 85-101 सैं.मी. होती है सिंचित हालातों में यह 16-18 क्विंटल प्रति एकड़ उपज देती है इसके दाने सुनहरे, मध्यम मोटे और सख्त होते हैं
PBW 175: यह किस्म 130-132 दिनों में कटाई के लिए तैयार हो जाती है इसके पौधे का कद 15-16 सैं.मी. होता है इसके दाने सुनहरे, मध्यम मोटे और सख्त होते हैं इसकी औसतन पैदावार 15-16 क्विंटल प्रति एकड़ होती है
CCNNRVOI (Raj Molya Rodhak-1: यह सिंचित हालातों में समय पर बोने के लिए उपयुक्त किस्म है इसके पौधे का कद 84 सैं.मी. होता है इसके दाने सुनहरे, मध्यम सख्त और गोल आकार के होते हैं यह किस्म 120-125 दिनों में कटाई के लिए तैयार हो जाती है इसकी औसतन पैदावार 15-18 क्विंटल प्रति एकड़ होती है यह किस्म नेमाटोड से प्रभावित क्षेत्रों में प्रसिद्ध है
पिछेती बिजाई की किस्में
Raj 3765: यह किस्म दिसंबर से मध्य जनवरी के तीसरे सप्ताह में बोयी जा सकती है इसके पौधे का कद 85-95 सैं.मी. होता है यह किस्म 120 दिनों में कटाई के लिए तैयार हो जाती है इसकी औसतन पैदावार 16-20 क्विंटल प्रति एकड़ होती है
Raj 3777: यह किस्म 90-95 दिनों में परिपक्व हो जाती है यह किस्म मध्य नवरी में बोने के लिए अनुकूल है इसकी औसतन पैदावार 14-16 क्विंटल प्रति एकड़ होती है
रेतली मिट्टी वाली किस्में
इन किस्मों की वृद्धि के लिए कम पानी की आवश्यकता होती है
C 306: यह किस्म बंजर भूमि में उगाने के लिए प्रयोग की जाती है और इसे कम सिंचाई की आवश्यकता होती है इसका पौधे लंबे कद के होते हैं इसके मध्यम आकार के दाने और रंग में सुनहरे होते हैं इसकी औसतन उपज 14-16 प्रति एकड़ होती है
P.B.W. 299: इसके पौधे का कद 95 सैं.मी. होता है यह किस्म 150-160 दिनों में परिपक्व हो जाती है और इस किस्म की अगेती बिजाई की जाती है इसकी औसतन पैदावार 16-18 क्विंटल प्रति एकड़ होती है इन किस्मों के साथ PBW 396 और WH 147 की भी खेती की जाती है
क्षारीय मिट्टी की किस्में
क्षारीय क्षेत्रों में Raj 3077, K.R.L 1-4 और WH 157 जैसी किस्मों का प्रयोग करें, ये अच्छी उपज देती हैं
दूसरे राज्यों की किस्में
RAJ-3765: यह किस्म 120-125 दिनों में पक जाती है यह किस्म गर्मी को सहने योग्य, धारी जंग, भूरी जंग और करनाल बंट के प्रतिरोधी हैं इसकी औसत पैदावार 21 क्विंटल प्रति एकड़ है
UP-2338: यह किस्म 130 से 135 दिनों में पकती है इसके दाने सख्त, रंग शरबती और मध्यम आकार के होते हैं यह किस्म सिंचित क्षेत्रों के लिए उपयुक्त है उसकी औसत उपज 20-22 क्विंटल प्रति एकड़ है
UP-2328:यह किस्म 130 से 135 दिनों में पकती है इसके दाने सख्त, रंग शरबती और मध्यम आकार के होते हैं यह किस्म सिंचित क्षेत्रों के लिए उपयंक्त है असकी औसत उपज 20-22 क्विंटल प्रति एकड़ है
Sonalika: यह एक जल्दी पकने वाली, छोटे कद वाली गेहूं की किस्म है जो कि बहुत सारे हालातों के अनुकूल है इसके दाने सुनहरी होते हैं इसकी बुवाई पिछेती की जा सकती है और यह फंगस की बीमारियों से रहित होती है
Kalyansona: यह गेहूं की बहुत छोटे कद वाली किस्म है जो कि बहुत सारे हालातों के अनुकूल होती है और पूरे भारत में इसको बीजने की सलाह दी जाती है इसे बहुत जल्दी फंगस की बीमारी लगती है इसलिए इसे फंगस रहित क्षेत्रों में बीजने की सलाह दी जाती है
UP-(368): अधिक पैदावार वाली इस किस्म को पंतनगर द्वारा विकसित किया गया है यह फंगस और पीलेपन की और बीमारियों से रहित होती है
WL-(711): यह छोटे कद और अधिक पैदावार वाली और कम समय में पकने वाली किस्म है यह कुछ हद तक सफेद धब्बे ओर पीलेपन की बीमारी से रहित होती है
UP-(319): यह बहुत ज्यादा छोटे कद वाली गेहूं की किस्म है, जिसमें फंगस/उल्ली के प्रति प्रतिरोधकता काफी हद तक पाई जाती है दानों को टूटने से बचाने के लिए इसकी समय से कटाई कर लेनी चाहिए
देर से बोई जाने वाली किस्में
HD-2851, HD-2932, RAJ-3765, PBW-373, UP-2338, WH-306, 1025
PBW 590: यह किस्म पंजाब के सभी क्षेत्रों में उगाई जाती है यह 128 दिनों में कटाई के लिए तैयार हो जाती है यह किस्म पीले और भूरी जंग रोगों के लिए प्रतिरोधी किस्म है इसका औसतन कद 80 सैं.मी. होता है
PBW 509: यह किस्म पंजाब के उप पहाड़ी क्षेत्रों को छोड़कर बाकी सारे क्षेत्रों में उगाई जाती है यह 130 दिनों में कटाई के लिए तैयार हो जाती है यह किस्म पीले और भूरी जंग रोगों के लिए प्रतिरोधी किस्म है इसका औसतन कद 85 सैं.मी. होता है
PBW 373: यह किस्म पंजाब के सभी क्षेत्रों में उगाई जाती है यह 130 दिनों में कटाई के लिए तैयार हो जाती है यह किस्म भूरी जंग की बीमारी के प्रतिरोधी है इस किस्म का औसतन कद 90 सैं.मी. होता है

Posted by depak
Delhi
30-10-2019 12:25 PM
मोती की खेती एक बहुत ही अच्छा व्यवसाय है इस व्यवसाय को शुरू करने के लिए सबसे जरुरी है इसकी ट्रेनिंग, क्योकि इसमें बहुत सी ऐसी बारीकियें होती है जो हमें प्रेक्टिकल ट्रेनिंग में ही सीखने को मिलती है अगर आप इसकी ट्रेनिंग लेना चाहते है तो आप ग्लिटराटी पर्ल फार्मिंग ट्रेनिंग केंद्र प्रशिक्षण कार्य कर्म आयोजि.... (Read More)
मोती की खेती एक बहुत ही अच्छा व्यवसाय है इस व्यवसाय को शुरू करने के लिए सबसे जरुरी है इसकी ट्रेनिंग, क्योकि इसमें बहुत सी ऐसी बारीकियें होती है जो हमें प्रेक्टिकल ट्रेनिंग में ही सीखने को मिलती है अगर आप इसकी ट्रेनिंग लेना चाहते है तो आप ग्लिटराटी पर्ल फार्मिंग ट्रेनिंग केंद्र प्रशिक्षण कार्य कर्म आयोजित किया जा रहा है प्रशिक्षण कार्य कर्म में भाग लेने के लिए नीचे दिए गए नम्बर पर आज ही संपर्क करें और Rs 250/ से अपना रजिस्ट्रेशन करवाए अचल सिंह (फाउंडर )- 9711858258. धन्यवाद

Posted by GOURAV BANSAL
Uttar Pradesh
30-10-2019 12:23 PM
g sir laddu genda( kalkata vala ) ki kisem sab sa vadia ha app kolkata vala laddu genda laga sakta ho orange or yellow colour laga sakta ho

Posted by suraj
Uttar Pradesh
30-10-2019 12:12 PM
Uttar Pradesh mein ganne ki Co 0118, Co 0232, Co 0237, Co 0238, Co 0239, CoSe 01421, Co 05009, CoPK 05191, Co 89029, CoLk 94184 aur CoS 95255 kismein lgana upyukt hain.
Posted by jay
Gujarat
30-10-2019 12:04 PM
Jay ji apke dubara bheji gyi photo saff nazar nahi aa rehi hai yaddi yeh HF 10201 semen hai too iski DOB:
25-08-2014
Fat (%):
3.80
Dams Yield:
6600
Sire Dam s Yield:
6217
Posted by Surendra singh
Uttar Pradesh
30-10-2019 12:03 PM
बिजाई के लिए 13-15 क्विंटल बीज प्रयोग किए जाते हैं
Posted by Anshu uttam
Uttar Pradesh
30-10-2019 12:00 PM
मशरुम की किस्में कई प्रकार की होती है जैसे कि बटन मशरुम , डीगरी, शटाकी मशरुम , पराली मशरुम , और मिलकी मशरुम. इनमे से कुछ मशरुम सर्दियो के मौसम में और कुछ गर्मीयों के मौसम में लगाये जाते है और हर मशरुम को लगाने का समय अलग अलग है जैसे बटन मशरुम का समय सितंबर से मार्च तक होता है, इससे हम 2 फसले ले सकते है, शटाकी मशरु.... (Read More)
मशरुम की किस्में कई प्रकार की होती है जैसे कि बटन मशरुम , डीगरी, शटाकी मशरुम , पराली मशरुम , और मिलकी मशरुम. इनमे से कुछ मशरुम सर्दियो के मौसम में और कुछ गर्मीयों के मौसम में लगाये जाते है और हर मशरुम को लगाने का समय अलग अलग है जैसे बटन मशरुम का समय सितंबर से मार्च तक होता है, इससे हम 2 फसले ले सकते है, शटाकी मशरुम का समय अक्तूबर से मध्य फरवरी तक हैं, इससे हम 1 फसल ही ले सकते है, पराली मशरुम का समय अप्रैल से अगस्त तक है, इससे हम 4 फसले ले सकते है, मिलकी मशरुम का समय अप्रैल से सितंबर तक है, आप अब अप्रैल में मिलकी या पराली मशरुम लगा सकते है, पराली मशरुम के लिए आपको पराली, बीज, बांस, सेबा, आदि की जरूरत है, पराली के पूले: धान की पराली 1-1 किलो के पूले दोनो सिरो से सेबे के साथ बांध कर तैयार किये जाते है. पूले के सिरे काट कर बराबर कर लिए जाते हैं. पूलो की क्यिारी लगाना : पराली के पूलो को साफ पानी में 16-20 घंटो के लिए भिगो दें, गिले पूलो को ढलान पर रख कर अधिक पानी को निकलने दे, कमरे ईटो और बांस से एक पलेटफार्म बनाये, इस पलेटफार्म पर 5 पूलो की एक तहय लगाये, जिसके ऊपर 75 ग्राम बीज डाले. इसके ऊपर की सतह उलट होती है. इस प्रकार 5-5 पूलो की 4 सेट में 300 ग्राम बीज डाल कर कियारी तैयार की जाती है. सबसे ऊपर 2 पूलो को खोलकर रख दिए जाते हैं. मशरुम का फुटाव करना : बिजाई से 7-9 दिनो के बाद का फुटाव होने लगता है. पानी और हवा का संचार : बिजाई के 2 दिन के बाद हर रोज पानी का छिडका किया जाता है. मशरुम के फूटने के बाद हवा का संचार 6-8 घंटे प्रति दिन किया जाता है. मशरुम की तुड़ाई : मशरुम का फुटाव के बाद 1-2 दिनो के बाद तोडाई के योग्य हो जाती है. मिलकी मशरुम : मिलकी मशरुम के लिए तूडी, बीज, मोमी लिफाफे (12×16), सेबा, केसिंग,मिट्टी आदि चाहिए. तूडी की तैयारी : सूखी तुड़ी को पक्के फर्श पर खिलार कर 16-20 घंटे पा नी से गिला करे, गीली तूडी को बोरी में भर कर सेबे से बांध दे. इस बोरी को उबलते पानी में 45-50 मिनट रखें, तूडी को निकालकर पक्के फर्श पर खिलार कर ठंडा करे. यह तूडी बिजाई के लिए तैयार है. बिजाई : ठंडी तूडी में बीज मिलाकर मोमी लिफाफो में भर दें. एक मोमी लिफाफें में लगभग 2 किलो गिली तूडी और 70-80 ग्राम बीज डाला जाता है. लिफाफे के मुंह को सेबे से अच्छी तरह बांध कर कमरे में रख दे. केसिंग : बिजाई के दो तीन हफतो के बाद लिफाफे खोलकर केसिंग की 1-1.5 के सेट बना दें, केसिंग में रूडी और रेतली मिट्टी (4:1) होती है. 24 घंटो के लिए 4 प्रतिशत फारमलेन के घोल से जीवाणु रहित की जाती है. मशरुम का फुटाव: केसिंग मिट्टी डालने के लगभग 2 हफतो में मशरुम के छोटे-छोटे कण निकलने शुरू हो जाते है और 4-5 दिन के बाद तोडने योग्य हो जाते है. मशरुम की तुड़ाई लगभग 35-40 दिनो तक की जाती है
Posted by Gurtej Tiwana
Punjab
30-10-2019 11:58 AM
ਸ੍ਰੀ ਮਾਨ ਜੀ HD 3226 ਨਵੀਂ ਕਿਸਮ ਜਿਸਦਾ ਔਸਤਨ ਝਾੜ 22-30 ਕੁਇੰਟਲ ਪ੍ਰਤੀ ਏਕੜ ਹੈ, ਇਸਦੀ ਬਿਜਾਈ 25 ਅਕਤੂਬਰ ਤੋਂ 30ਨਵੰਬਰ ਤੱਕ 35ਕਿਲੋ ਬੀਜ ਪਾ ਸਕਦੇ ਹੋ ,ਇਸਦਾ ਨਾੜ ਮੋਟਾ ਹੋਣ ਕਰਕੇ ਨਹੀ ਡਿਗਦੀ
Posted by Gurmukh Singh Garry
Punjab
30-10-2019 11:57 AM
Shirman ji, kisi vi beej nu mila ke bijai karan di sifarish university valo nahi kiti jandi hai, kisan veer apne tajurbe de hisaab nal is di bijai kar lende han, dhanwad
Posted by surya prakash
Uttar Pradesh
30-10-2019 11:51 AM
श्रीमान जी, यह मच्छर का हमला हुआ है, इसकी रोकथाम के लिए आप imidacloprid @ 1.5 ml प्रति लीटर पानी के हिसाब से स्प्रे करें, धन्यवाद

Posted by gogi aswani
Himachal Pradesh
30-10-2019 11:40 AM
यह फसल अच्छे निकास वाली रेतली या चिकनी दोमट या लाल दोमट मिट्टी में उगाने पर अच्छे परिणाम देती है खेत में पानी खड़ा ना होने दें, क्योंकि यह फसल खड़े पानी को सहने योग्य नहीं है Palam Pitambar, Palam Lalima किस्में लगाने के लिए उपयुक्त हैं खेत को 2-3 बार जोत कर और सुहागे से समतल करके तैयार करें हल्दी की बिजाई के लिए बैड 15 सैं.मी. ऊंचे, .... (Read More)
यह फसल अच्छे निकास वाली रेतली या चिकनी दोमट या लाल दोमट मिट्टी में उगाने पर अच्छे परिणाम देती है खेत में पानी खड़ा ना होने दें, क्योंकि यह फसल खड़े पानी को सहने योग्य नहीं है Palam Pitambar, Palam Lalima किस्में लगाने के लिए उपयुक्त हैं खेत को 2-3 बार जोत कर और सुहागे से समतल करके तैयार करें हल्दी की बिजाई के लिए बैड 15 सैं.मी. ऊंचे, 1 मीटर चौड़े और आवश्यकनुसार लंबे होने चाहिए दो बैडों के बीच 50 सैं.मी. का फासला होना चाहिए अधिक पैदावार लेने के लिए बिजाई अप्रैल के अंत में करें इसे पनीरी लगा कर भी उगाया जा सकता है इसके लिए जून के पहले पखवाड़े तक पनीरी खेत में लगा दें पनीरी के लिए 35-45 दिनों के नए पौधों को खेत में लगा दें राइज़ोम्स को पंक्तियों में बोयें और कतार में फासला 30 सैं.मी. और दो पौधों में 20 सैं.मी. का फासला रखें बिजाई के बाद खेत में 2.5 टन प्रति एकड़ स्ट्रा मलच डालें बीज की गहराई 3 सैं.मी. से ज्यादा नहीं होनी चाहिए बिजाई के लिए साफ सुथरे ताजे और बीमारी रहित राइज़ोम्स का प्रयोग करें बीज की मात्रा 6-8 क्विंटल प्रति एकड़ बहुत होती है खेत की तैयारी के समय गाय का गला हुआ गोबर 150 क्विंटल प्रति एकड़ में डालें नाइट्रोजन 10 किलो (22 किलो यूरिया), फासफोरस 12 किलो (75 किलो एस एस पी) और पोटाश 26 किलो 42 किलो म्यूरेट ऑफ पोटाश की मात्रा प्रति एकड़ में प्रयोग करें सारी पोटाश और फासफोरस राइज़ोम्स की रोपाई के समय डालें नाइट्रोजन दो हिस्सों में डालें, आधी बिजाई से 75 दिन बाद और बाकी नाइट्रोजन बिजाई के 3 महीने बाद डालें यह कम वर्षा वाली फसल है, इसलिए वर्षा के अनुसार सिंचाई करें हल्की ज़मीन में फसल को कुल 35-40 सिंचाइयों की जरूरत पड़ती है बिजाई के बाद फसल को 40-60 क्विंटल प्रति एकड़ हरे पत्तों से ढक दें हर बार खाद डालने के बाद 30 क्विंटल प्रति एकड़ मलच डालें राइज़ोम की रोपाई के 2-3 दिनों के बाद पैंडीमैथालीन 30 ई.सी. 1300 मि.ली. या मैटरीब्यूज़िन 70 डब्लयू पी 400 ग्राम को 200 लीटर पानी में डालकर स्प्रे करें नदीन नाशक के प्रयोग के बाद खेत को हरे पत्तों या धान की तूड़ी से ढक दें जड़ों के विकास के लिए बिजाई से 50-60 दिनों के बाद और फिर 40 दिनों के बाद जड़ों को मिट्टी लगाएं किस्म के अनुसार 6-9 महीनों में कटाई करें पत्ते सूखने और पीले होने पर कटाई का अनुकूल समय होता है गांठों को उखाड़ कर बाहर निकालें और साफ करें गांठों को 2-3 दिनों के लिए छांव में सुखाएं कटाई के बाद राइज़ोम्स को उबाला जाता है और फिर धूप में सुखाया जाता है पहले 3-4 दिनों में 3-4 घंटों के लिए सुखाया जाता है और फिर लगातार सुखाया जाता है

Posted by Balwan singh
Punjab
30-10-2019 11:39 AM
balwan ji kirpa karke daso ke tuc isnu kehde dhang beejya hai.dhanywad

Posted by munendra kushwaha
Uttar Pradesh
30-10-2019 11:37 AM
इस समय आप खुम्ब, मटर, मूली, लहसुन, बैंगन, टमाटर, की खेती कर सकते हैं इस में मुनाफा भी अच्छा होता है
Posted by Ramchela
Uttar Pradesh
30-10-2019 11:34 AM
निम्नलिखित किस्में उत्तर प्रदेश में लगाने के लिए उपयुक्त हैं: Pusa Dwarf: इसके फल मध्यम आकार के और अंडाकार होते हैं यह सूखे को सहनेयोग्य किस्म है यह उच्च घनत्व में रोपाई के लिए लाभदायक है
Pusa Giant: इस किस्म के पौधे तेज हवा को सहनेयोग्य है यह बड़े फलों का उत्पादन करती है यह पैकिंग के लिए उपयुक्त किस्म है
CO 3: इसके फल बड़.... (Read More)
निम्नलिखित किस्में उत्तर प्रदेश में लगाने के लिए उपयुक्त हैं: Pusa Dwarf: इसके फल मध्यम आकार के और अंडाकार होते हैं यह सूखे को सहनेयोग्य किस्म है यह उच्च घनत्व में रोपाई के लिए लाभदायक है
Pusa Giant: इस किस्म के पौधे तेज हवा को सहनेयोग्य है यह बड़े फलों का उत्पादन करती है यह पैकिंग के लिए उपयुक्त किस्म है
CO 3: इसके फल बड़े आकार के और अंडाकार होते हैं इसे ज्यादा देर तक रखने की गुणवत्ता अच्छी होती है
CO 1: यह छोटे कद की किस्म है जिसके फल मध्यम आकार के होते हैं फल गोलाकार, नर्म हरा-पीला छिल्का और संतरी पीले रंग का गुद्दा होता है फल रसदार होता है और इसे ज्यादा देर तक रखने की गुणवत्ता अच्छी होती है
Coorg Honey Dew: इसे सीधे तौर पर खाने के लिए और प्रक्रिया के लिए प्रयोग किया जाता है इसके फल आयताकार और गुद्दा मोटा संतरी रंग का होता है
CO 2: यह मध्यम आकार की अंडाकार, हरे पीले रंग की किस्म है इसका गुद्दा नर्म और लाल रंग का होता है इसमें रस की मात्रा काफी होती है और इसे ज्यादा देर तक रखने की गुणवत्ता अच्छी होती है
Pusa Majesty: इसके फल मध्यम आकार के, गोल होते हैं इन्हें रखने की गुणवत्ता बहुत अच्छी होती है यह किस्म 146 दिनों में कटाई के लिए तैयार हो जाती है यह किस्म जड़ गलन निमाटोड के प्रतिरोधक किस्म है
Pusa Delicious: यह मध्यम लंबी किस्म है इसके फल मध्यम आकार के होते हैं, गुद्दा गहरे संतरी रंग का होता है इस किस्म को कतारों में लगाने के लिए प्रयोग किया जाता है
CO 5: यह किस्म दो वर्षों में 75-80 फल प्रति वृक्ष देती है
IIHR39 and IIHR54: यह किस्म IIHR, बैंगलोर द्वारा विकसित की गई है इसके फल मध्यम आकार के होते हैं इसमें टी एस एस की मात्रा उच्च होती है
Taiwan 785: यह छोटे कद की किस्म है इसके फल आयताकारा और गुद्दा मोटा संतरी रंग का होता है फलों को रखने की गुणवत्ता अच्छी होती है फलों को कतारों में प्रयोग किया जाता है और प्रक्रिया के लिए प्रयोग किया जाता है
Taiwan 786: इसके फलों को कतारों में और प्रक्रिया के लिए प्रयोग किया जाता है इसके फल स्वाद और कम बीज वाले होते हैं फलों को रखने की गुणवत्ता बहुत अच्छी होती है
Washington: यह कतारों में प्रयोग किए जाने वाली किस्म है इसके फल गोल, मध्यम आकार के और कम बीज वाले होते हैं फल का छिल्का गहरे पीले रंग का होता है नर और मादा पौधे अलग होते हैं
Solo: इसके फल छोट, गहरे गुलाबी रंग का गुद्दा होता है, जो कि स्वाद में मीठा होता है यह किस्म कतारों में प्रयोग की जाती है
Ranchi: फल आयताकार होते हैं और गुद्दा गहरे पीले रंग का होता है
Honey Dew: इस किस्म के फल बड़े आकार के और कम बीज वाले होते हैं फल स्वाद होते हैं और नर पौधे मादा पौधे से छोटे होते हैं इसका पौधा मध्यम कद का होता है

Posted by Dharminder Singh
Punjab
30-10-2019 11:32 AM
tusi dr Dr Allah Rang ji nal contact karo .98154 64786 eh Biocrave seed to hun ji. tohanu puri detail nal guide karange ji.
Posted by Dalvir Dhaliwal
Punjab
30-10-2019 11:20 AM
Pepsico India Company nal Agreement karan lai tusi 1800224020 No. te call kar ke register ho, fir tuhanu company valo call ah jandi hai tuhade farm di visit karan to baad agreement kita janda hai.

Posted by saini
Haryana
30-10-2019 11:13 AM
Saini ji is sall dhan ka bhav ( MSP ) 1815/Q Grade A 1835/Q hai, Thankyou.

Posted by Ravinder
Punjab
30-10-2019 11:00 AM
tuci iss nu Nutrich tablet 1 goli rojana 30 din tak deo ate Cipro 250mg tablet rojana 1 goli 6 din tak deo, iss nal frak paa jawega.
Posted by Amarjit Singh
Haryana
30-10-2019 10:52 AM
ਇਹ Pusa Narangi Gainda ਕਿਸਮ ਹੈ ਫੁੱਲ ਨਿਕਲਣ ਦੇ ਲਈ 125-136 ਦਿਨਾਂ ਦੀ ਲੋੜ ਹੁੰਦੀ ਹੈ ਇਸਦਾ ਪੌਦਾ ਲੰਬਾ ਅਤੇ 73.30 ਸੈ.ਮੀ. ਕੱਦ ਦਾ ਹੁੰਦਾ ਹੈ ਅਤੇ ਪੱਤੇ ਗੁੜੇ ਹਰੇ ਰੰਗ ਦੇ ਹੁੰਦੇ ਹਨ ਇਸਦੇ ਫੁੱਲ ਸੰਤਰੀ ਰੰਗ ਦੇ ਅਤੇ ਕਾਰਨੇਸ਼ਨ ਕਿਸਮ ਦੇ ਹੁੰਦੇ ਹਨ ਫੁੱਲ ਸੰਘਣੇ ਅਤੇ ਦੋਹਰੀ ਪਰਤ ਵਾਲੇ ਹੁੰਦੇ ਹਨ ਇਸਦੇ ਤਾਜ਼ੇ ਫੁੱਲਾਂ ਦਾ ਝਾੜ 140 ਕੁਇੰਟਲ ਪ੍ਰਤੀ ਏਕੜ ਹੁੰਦਾ ਹੈ

Posted by अंकित राजपूत
Madhya Pradesh
30-10-2019 10:43 AM
Shri maan g 1 acre mein 40-45 kg gehun boya ja skta hai.....
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