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Posted by giriraj dangi
Madhya Pradesh
30-10-2019 08:09 PM
Maharashtra
10-31-2019 03:32 PM
गेंदे की खेती करना चाहते है से मिट्टी की व्यापक किस्मों में उगाया जा सकता है पर यह अच्छे जल निकास वाली उपजाऊ मिट्टी में उगाने पर अच्छे परिणाम देती है मिट्टी अच्छे निकास वाली होनी चाहिए क्योंकि यह फसल जल जमाव वाली मिट्टी में स्थिर नहीं रह सकती मिट्टी की pH 6.5 से 7.5 होनी चाहिए तेजाबी और खारी मिट्टी इसकी खेती के ल.... (Read More)
गेंदे की खेती करना चाहते है से मिट्टी की व्यापक किस्मों में उगाया जा सकता है पर यह अच्छे जल निकास वाली उपजाऊ मिट्टी में उगाने पर अच्छे परिणाम देती है मिट्टी अच्छे निकास वाली होनी चाहिए क्योंकि यह फसल जल जमाव वाली मिट्टी में स्थिर नहीं रह सकती मिट्टी की pH 6.5 से 7.5 होनी चाहिए तेजाबी और खारी मिट्टी इसकी खेती के लिए अनुकूल नहीं है फ्रैंच गेंदे की किस्म हल्की मिट्टी में अच्छी वृद्धि करती है जबकि अफ्रीकी गेंदे की किस्म उच्च जैविक खाद वाली मिट्टी में अच्छी वृद्धि करती है प्रसिद्ध किस्में :- African Marigold: इस किस्म की फसल 90 सैं.मी. तक लम्बी होती है इसके फूल बड़े आकार के और लैमन, पीले, सुनहरे, संतरी और गहरे पीले रंग के होते हैं यह लम्बे समय की किस्म है इसकी अन्य किस्में जैसे Giant Double African Orange, Crown of Gold, Giant Double African Yellow, Chrysanthemum Charm, Golden Age, Cracker Jack आदि हैं French Marigold: यह छोटे कद की जल्दी पकने वाली किस्में हैं इसके फूल छोटे आकार के और पीले, संतरी, सुनहरे पीले, लाल जंग और महोगनी रंग के होते हैं इसकी अन्य किस्में जैसे Rusty Red, Butter Scotch, Red Borcade, Star of India, Lemon drop आदि हैं Pusa Basanti Gainda: यह लम्बे समय की किस्म है इसका पौधा 58.80 सैं.मी. लम्बा और गहरे हरे रंग के पत्ते होते हैं इसके फूल सल्फर पीले, दोहरे और कारनेशन किस्म के होते हैं Pusa Narangi Gainda: फूल निकलने के लिए 125-136 दिनों की आवश्यकता होती है इसका पौधा लम्बा और कद में 73.30 सैं.मी. का होता है और पत्ते गहरे हरे रंग के होते हैं इसके फूल संतरी रंग के और कारनेशन किस्म के होते हैं फूल घने और दोहरी परत वाले होते हैं इसके ताजे फूलों की पैदावार 140 क्विंटल प्रति एकड़ होती है मिट्टी के भुरभुरा होने तक खेत की जोताई करें मिट्टी की उपजाऊ शक्ति बढ़ाने के लिए आखिरी जोताई के समय 250 क्विंटल रूड़ी की खाद और अच्छी तरह से गला हुआ गाय का गोबर मिट्टी में मिलायें गेंदे की बिजाई एक वर्ष में कभी भी की जा सकती है बारिश के मौसम में इसकी बिजाई मध्य जून से मध्य जुलाई में करें सर्दियों में इसकी बिजाई मध्य सितंबर से मध्य अक्तूबर में पूरी कर लें नर्सरी बैड 3x1 मीटर आकार के तैयार करें गाय का गला हुआ गोबर मिलायें बैडों में नमी बनाए रखने के लिए पानी दें सूखे फूलों का चूरा करें और उनका कतार या बैड पर छिड़काव करें जब पौधों का कद 10-15 सैं.मी. हो जाये, तब वे रोपाई के लिए तैयार होते हैं फैंच किस्म को 35x35 सैं.मी. और अफ्रीकी किस्म को 45x45 सैं.मी. के फासले पर रोपाई करें नर्सरी बैड पर बीजों का छिड़काव करें बिजाई के लिए पनीरी ढंग का प्रयोग किया जाता है एक एकड़ खेत के लिए 600 से 800 ग्राम बीजों की आवश्यकता होती है जब फसल 30-45 दिन की हो जाए, तब पौधे के सिरे से उसे काट दें इससे पौधे को झाड़ीदार और घना होने में मदद मिलती है, इससे फूलों की गुणवत्ता और अच्छा आकार भी प्राप्त होता है बिजाई से पहले बीजों को एजोसपीरियम 200 ग्राम को 50 मि.ली. धान के चूरे में मिलाकर उपचार करें शुरूआती खुराक के तौर पर अच्छी वृद्धि के लिए नाइट्रोजन 32 किलो (यूरिया 70 किलो), फासफोरस 16 किलो (एस एस पी 100 किलो), पोटाश 32 किलो (म्यूरेट ऑफ पोटाश 53 किलो) प्रति एकड़ में डालें मिट्टी की किस्म के अनुसार खाद की खुराक बदल दें सही खुराक देने के लिए मिट्टी की जांच करवायें और उसके आधार पर खुराक दें नदीनों की संख्या के आधार पर गोडाई करें खेत में रोपाई के बाद तुरंत सिंचाई करें कली बनने से लेकर कटाई तक की अवस्था सिंचाई के लिए बहुत महत्तवपूर्ण होती है अप्रैल से जून के महीने में 4-5 दिनों के अंतराल पर लगातार सिंचाई करना आवश्यक होता है किस्म के आधार पर गेंदा 2 से 2.5 महीने में कटाई के लिए तैयार हो जाते हैं फ्रैंच गेंदे की किस्म 1.5 महीने में कटाई के लिए तैयार हो जाती है जबकि अफ्रीकी गेंदे की किस्म दो महीने में तैयार हो जाती है जब गेंदे का पूरा आकार विकसित हो जाये तब उसे तोड़ लें कटाई सुबह के समय और शाम के समय करें फूलों की तुड़ाई से पहले खेत को सिंचित करना चाहिए इससे फूलों की गुणवत्ता लंबे समय तक बनी रहती है इसे आप अपनी नजदीकी फूल मंडी में बेच कर इसे अपनी आय का साधन बना सकते है इसका बीज आप कृषि यूनिवर्सिटी से ले सकते है या नजदीकी नर्सरी से ले सकते है जा फिर गेंदे और गुलाब के बीज लेने के लिए आप प्रेम राज सैनी 9719432296 से सम्पर्क करे धन्यवाद
Posted by Vikash choudhary
Rajasthan
30-10-2019 08:00 PM
Punjab
10-31-2019 02:57 PM
उसे Vitum-H liquid 10—10 मि.ली. सुबह शाम दें और Metabolite पाउडर की रोजाना एक पुडिया देनी शुरू करें और अच्छी मात्रा में हरा चारा डालें..
Posted by Darshan Singh
Punjab
30-10-2019 07:59 PM
Punjab
11-02-2019 12:30 PM
ਦਰਸ਼ਨ ਜੀ , ਬੈਂਗਣ ਦੇ ਬੀਜ 3 ਮੀ.ਲੰਬੇ, 1 ਮੀ.ਚੌੜੇ ਅਤੇ 15 ਸੈ.ਮੀ. ਉੱਚੇ ਬੈੱਡਾਂ ਤੇ ਬੀਜੇ ਜਾਂਦੇ ਹਨ ਪਹਿਲਾਂ ਬੈੱਡਾਂ ਵਿੱਚ ਵਧੀਆ ਰੂੜੀ ਦੀ ਖਾਦ ਪਾਓ ਫਿਰ ਬਿਜਾਈ ਤੋਂ ਦੋ ਦਿਨ ਪਹਿਲਾਂ ਕਪਤਾਨ ਦਾ ਘੋਲ ਪਾਓ ਤਾਂ ਜੋ ਨਰਸਰੀ ਬੈੱਡਾਂ ਵਿਚਲੇ ਪੌਦਿਆਂ ਨੂੰ ਨਸ਼ਟ ਹੋਣ ਤੋਂ ਬਚਾਇਆ ਜਾ ਸਕੇ ਫਿਰ 5 ਸੈ.ਮੀ. ਦੇ ਫਾਸਲੇ ਤੇ ਬਿਜਾਈ ਕਰ ਕੇ ਬੈੱਡਾਂ ਨੂੰ ਗਲ਼ੀ ਹੋਈ ਖਾਦ ਜਾਂ ਸੁੱਕੇ ਪੱਤਿਆਂ ਨਾਲ ਢੱਕ ਦ.... (Read More)
ਦਰਸ਼ਨ ਜੀ , ਬੈਂਗਣ ਦੇ ਬੀਜ 3 ਮੀ.ਲੰਬੇ, 1 ਮੀ.ਚੌੜੇ ਅਤੇ 15 ਸੈ.ਮੀ. ਉੱਚੇ ਬੈੱਡਾਂ ਤੇ ਬੀਜੇ ਜਾਂਦੇ ਹਨ ਪਹਿਲਾਂ ਬੈੱਡਾਂ ਵਿੱਚ ਵਧੀਆ ਰੂੜੀ ਦੀ ਖਾਦ ਪਾਓ ਫਿਰ ਬਿਜਾਈ ਤੋਂ ਦੋ ਦਿਨ ਪਹਿਲਾਂ ਕਪਤਾਨ ਦਾ ਘੋਲ ਪਾਓ ਤਾਂ ਜੋ ਨਰਸਰੀ ਬੈੱਡਾਂ ਵਿਚਲੇ ਪੌਦਿਆਂ ਨੂੰ ਨਸ਼ਟ ਹੋਣ ਤੋਂ ਬਚਾਇਆ ਜਾ ਸਕੇ ਫਿਰ 5 ਸੈ.ਮੀ. ਦੇ ਫਾਸਲੇ ਤੇ ਬਿਜਾਈ ਕਰ ਕੇ ਬੈੱਡਾਂ ਨੂੰ ਗਲ਼ੀ ਹੋਈ ਖਾਦ ਜਾਂ ਸੁੱਕੇ ਪੱਤਿਆਂ ਨਾਲ ਢੱਕ ਦਿੱਤਾ ਜਾਂਦਾ ਹੈ ਹਲਕੀ ਸਿੰਚਾਈ ਕਰੋ ਪੌਦਿਆਂ ਦੇ ਪੁੰਗਰਣ ਤੱਕ ਬੈੱਡਾਂ ਨੂੰ ਕਾਲੇ ਰੰਗ ਦੀ ਪੋਲੀਥੀਨ ਸ਼ੀਟ ਜਾਂ ਪਰਾਲੀ ਨਾਲ ਢੱਕ ਦਿਓ ਤੰਦਰੁਸਤ ਪੌਦੇ ਜਿਨ੍ਹਾਂ ਦੇ 3-4 ਪੱਤੇ ਨਿਕਲੇ ਹੋਣ ਅਤੇ ਕੱਦ 12-15 ਸੈ.ਮੀ. ਹੋਵੇ, ਖੇਤ ਵਿੱਚ ਪਨੀਰੀ ਲਗਾਉਣ ਲਈ ਤਿਆਰ ਹੁੰਦੇ ਹਨ ਖੇਤ ਵਿੱਚ ਪਨੀਰੀ ਸ਼ਾਮ ਦੇ ਸਮੇਂ ਹੀ ਲਗਾਓ ਅਤੇ ਪਨੀਰੀ ਲਗਾਉਣ ਤੋਂ ਬਾਅਦ ਹਲਕੀ ਸਿੰਚਾਈ ਕਰੋ ਧੰਨਵਾਦ
Posted by Rattan Bhushan
Himachal Pradesh
30-10-2019 07:58 PM
Punjab
11-02-2019 12:38 PM
Rattan ji, kripya ap apna sawal visthar se puche ke ap konsi fasal ke bare mein jankari lena chahte hia, taki apko uski puri jankari di ja sake, dhanywad
Posted by Rupesh singh
Madhya Pradesh
30-10-2019 07:57 PM
Punjab
11-04-2019 11:06 AM
Rupesh singh ji kirpya aap je btae ke aap kesi fasal ki kheti karna chahte hai ta jo aap ko puri jankari di ja sake, kheti training ke lia har Ik jille me Krishi Vigyan Kendra bane hua hai, jin me same-same pe kisano ki mang pe training chalti hi rehti hai so aap apne jile ke Krishi Vigyan Kendra, New Jwalamukhi colony, Umaria, Distt. Umaria (M.P.) Pin-484661 se samparak kar sakte hai, Thankyou.
Posted by ravi jaat
Madhya Pradesh
30-10-2019 07:56 PM
Punjab
11-02-2019 12:44 PM
रवि जी, आप गेहूं की सही संभल करें और उसको किसी कीट या बीमारी के हमले से बचाए, ऐसा करने से इसका रंग भी सही रहे गा और उत्पादन भी अच्छा आएगा , धन्यवाद
Posted by Sukhvir Singh
Punjab
30-10-2019 07:52 PM
Punjab
10-30-2019 08:51 PM
55ਤੋਂ 75 ਮਣ ਤਕ ਹੈ ਜੀ
Posted by Ashish Rana
Punjab
30-10-2019 07:51 PM
Punjab
10-30-2019 08:54 PM
उपज बढ़ाने के लिए आप जिंक और मैगनीज की स्प्रे 28 दिन और एक सप्ताह के बाद जिंक और 13045 की स्प्रे और जब गेहूं pipe में आ जाए तब आप बोरोन 100 ग्राम और 1 किलो पोटाश 100 लीटर पानी में स्प्रे करें जिंक 100 से 150 ग्राम प्रयोग करें
Posted by Vikash choudhary
Rajasthan
30-10-2019 07:50 PM
Punjab
11-02-2019 12:47 PM
विकास जी, ग्रीन ग्राम का बीज उपचार करने के लिए बिजाई से पहले बीजों को कप्तान या थीरम से 3 ग्राम प्रति किलोग्राम बीज का उपचार करें धन्यवाद
Posted by Vikash choudhary
Rajasthan
30-10-2019 07:47 PM
Punjab
11-02-2019 12:50 PM
Vikas ji ap varities jaise ke RH 30 ya T 59 ki bijai kar sakte hai, dhanywad
Posted by Karishan kumar sen
Madhya Pradesh
30-10-2019 07:46 PM
Punjab
10-31-2019 02:59 PM
कृप्या आप अपना सवाल विस्तार से पूछें कि आप गेहूं की फसल के बारे में क्या जानकारी लेना चाहते है ताकि आपको सही जानकारी दी जा सके
Posted by guggu singh
Punjab
30-10-2019 07:44 PM
Punjab
11-02-2019 01:03 PM
Guggu ji, Pusa 44 ate pilli pusa dono ik hi kisam de nam han ate ehna da jhaad ik brabaar hi hovega , dhanwad
Posted by Gurkirpal singh
Punjab
30-10-2019 07:42 PM
Punjab
10-30-2019 08:09 PM
श्रीमान जी HD 3226 नई किस्म ​जिसकी औसतन उपज 22—30 क्विंटल प्रति एकड़ है इसकी बिजाई 25 अक्तूबर से 30 नवंबर तक 35 किलो बीज डाल सकते है इसका पौधा मोटा होने के कारण ​गिरती नहीं है
Posted by Rupesh singh
Madhya Pradesh
30-10-2019 07:35 PM
Punjab
03-12-2020 08:13 PM
Rupesh singh ji aap KCC Scheme ka labh utha sakte hai is ke lia aap apne jameen ke sabhi kagjat lekar apne najdiki SBI bank se samparak kar sakte hai, Thankyou.
Posted by Krishna jaat Berwal
Uttar Pradesh
30-10-2019 07:31 PM
Punjab
11-29-2019 11:42 AM
श्रीमान जी, आप इसमें NPK 191919 @ 1kg को 150 लीटर पानी में मिला के प्रति एकड़ के हिसाब से स्प्रे करें, धन्यवाद
Posted by kulwinder singh
Punjab
30-10-2019 07:29 PM
Punjab
10-31-2019 12:29 PM
BhaaG isnu rajwa hara chaara te har 3kg dudh lai majh nu 1kg wadhya feed pao har 3 mahine baad malap rehat karo Tuci 1-2bottle calcium dian doctor ton khoon wali naarh wich lagwa lao Baaki te nasal te nirbhar karda ae
Posted by Vikash choudhary
Rajasthan
30-10-2019 07:27 PM
Punjab
11-05-2019 10:13 AM
Vikash ji, Brassica oleracea ki buvai ka sahi samay october se novembr tak ka jhai, dhanywad
Posted by दीपक तिवारी
Uttar Pradesh
30-10-2019 07:26 PM
Punjab
11-02-2019 01:14 PM
दीपक जी , प्याज़ एक प्रसिद्ध व्यापक सब्जी वाली प्रजाति है इसकी खेती अलग-अलग किस्म की मिट्टी जैसे की रेतली दोमट, चिकनी, गार और भारी मिट्टी में की जा सकती है यह गहरी दोमट और जलोढ़ मिट्टी, जिसका निकास प्रबंध बढ़िया, नमी को बरकरार रखने की समर्थता, जैविक तत्वों वाली मिट्टी में बढ़िया परिणाम देती है विरली और रेतली मिट्.... (Read More)
दीपक जी , प्याज़ एक प्रसिद्ध व्यापक सब्जी वाली प्रजाति है इसकी खेती अलग-अलग किस्म की मिट्टी जैसे की रेतली दोमट, चिकनी, गार और भारी मिट्टी में की जा सकती है यह गहरी दोमट और जलोढ़ मिट्टी, जिसका निकास प्रबंध बढ़िया, नमी को बरकरार रखने की समर्थता, जैविक तत्वों वाली मिट्टी में बढ़िया परिणाम देती है विरली और रेतली मिट्टी इसकी खेती के लिए बढ़िया नहीं मानी जाती है, क्योंकि मिट्टी के घटिया जमाव के कारण इसमें गांठों का उत्पादन सही नहीं होता है इसकी खेती के लिए मिट्टी का pH 6-7 होना चाहिए प्रसिद्ध किस्में:-alyanpur Red Round: यह उत्तर प्रदेश की प्रसद्धि किस्म है इसकी गांठे भूरे रंग की और गोलाकार आकार की होती हैं इसके पौधे 150-160 दिनों में कटाई के लिए तैयार हो जाते हैं इसकी औसतन पैदावार 8-10 टन प्रति एकड़ होती है Bhima Shakti: यह खरीफ के साथ साथ रबी के मौसम में उगाने के लिए उपयुक्त है यह किस्म रोपाई के 130 दिन बाद कटाई के लिए तैयार हो जाती है इसकी औसतन पैदावारा 170 क्विंटल प्रति एकड़ होती है Arka Kalyan: इसकी गांठे गहरे गुलाबी रंग की होती हैं इसकी औसतन पैदावार 135 क्विंटल प्रति एकड़ होती है Pusa White Round: इसकी गांठे सफेद, गोल और समतल होती हैं इसकी औसतन पैदावार 120 क्विंटल प्रति एकड़ होती है Pusa white flat: इसकी गांठे सफेद, चपटी और मध्यम से बड़े आकार की होती हैं यह किस्म डीहाइड्रेशन के लिए उपयुक्त है मिट्टी को भुरभुरा बनाने के लिए तीन-चार बार गहराई से जोताई करें मिट्टी में जैविक तत्वों की मात्रा बढ़ाने के लिए रूड़ी की खाद डालें फिर खेत को छोटे-छोटे प्लाटों में बांट दे नर्सरी तैयार करने के उचित समय मध्य-अक्तूबर से मध्य-नवबंर होता है नए पौधे मध्य-दिसंबर से मध्य-जनवरी तक रोपाई के लिए तैयार हो जाते है रोपाई के लिए 10-15 सैं.मी. कद के पौधे चुनें खरीफ के मौसम में रोपाई के लिए मई से जून का महीना नर्सरी तैयार करने के लिए उपयुक्त होता है बिजाई के 6-8 सप्ताह बाद नए पौधे रोपाई के लिए तैयार हो जाते हैं जुलाई -अगस्त के महीने में रोपण कर दें रोपण के समय, पंक्तियों के बीच 15 सैं.मी. और पौधों के बीच 10 सैं.मी. का फासला रखें नर्सरी में बीज 1-2 सैं.मी. गहराई पर बोयें बिजाई के लिए रोपण विधि का प्रयोग करें एक एकड़ के लिए 2-3 किलो बीज का प्रयोग करें उखेड़ा रोग और कांव-गियारी से बचाव के लिए थीरम 2 ग्राम+बैनोमाइल 50 डब्लयू पी 1 ग्राम प्रति लीटर पानी से प्रति किलो बीजों का उपचार करें रासायनिक उपचार के बाद बायो एजेंट ट्राईकोडर्मा विराइड 2 ग्राम के साथ प्रति किलो बीजों का उपचार करने की सिफारिश की जाती है इस तरह करने से नए पौधे मिट्टी से पैदा होने वाली और अन्य बीमारीयों से बच जाते है बिजाई से 10 दिन पहले 20 टन रूड़ी की खाद डालें नाइट्रोजन 30 किलो(यूरिया 65 किलो), फासफोरस 16 किलो(सिंगल सुपर फासफेट 100 किलो) और पोटाश 16 किलो(मिउरेट ऑफ़ पोटाश 30 किलो) प्रति एकड़ डालें फासफोरस और पोटाश की पूरी मात्रा और नाइट्रोजन की आधी मात्रा रोपण के समय डालें बाकी बची नाइट्रोजन को दो भागों में बांटकर रोपाई के बाद टॉप ड्रेसिंग के तौर पर 30वें और 45वें दिन डालें मिट्टी की किसम और जलवायु के आधार पर सिंचाई की मात्रा और आवर्ती का फैसला करें आमतौर पर, इसे 5-8 सिंचाइयों की आवश्यकता होती है पहली सिंचाई बिजाई के तुरंत बाद करें और दूसरी सिंचाई रोपाई के तीन दिन बाद करें बाकी की सिंचाई आवश्यकता और मिट्टी में नमी के आधार पर 7-10 दिनों के अंतराल पर करें पुटाई के 10-15 दिन पहले सिंचाई बंद कर दें अत्याधिक सिंचाई ना करें शुरुआत में नए पौधे धीरे-धीरे बढ़ते है इसलिए नुकसान से बचाव के लिए गोड़ाई की जगह रासायनिक नदीन-नाशक का प्रयोग करें रोकथाम के लिए बिजाई से 72 घंटे में पेंडीमैथालीन(स्टंप) 1 लीटर को 200 लीटर पानी में मिलाकर प्रति एकड़ में स्प्रे करें नदीनों के अंकुरण उपरांत बिजाई से 7 दिन बाद आक्सीफ्लोरफैन 425 मि.ली. को 200 लीटर पानी में मिलाकर प्रति एकड़ में स्प्रे करें नदीनों की रोकथाम के लिए 2-3 गोड़ाईयों की सिफारिश की जाती है पहली गोड़ाई बिजाई से एक महीने बाद और दूसरी गोड़ाई, पहली से एक महीने बाद करें सही समय पर पुटाई करना बहुत जरूरी है पुटाई का समय किस्म,ऋतु,मंडी रेट आदि पर निर्भर करता है 50% पौधे की पत्तियां नीचे की तरफ गिरना दर्शाता है कि फसल पुटाई के लिए तैयार है फसल की पुटाई हाथों से प्याज़ को उखाड़ कर की जाती है पुटाई के बाद इनको 2-3 दिन के लिए अनावश्यक नमी निकालने के लिए खेत में छोड़ दे धन्यवाद
Posted by मोहनलाल मीणा
Rajasthan
30-10-2019 07:25 PM
Punjab
11-29-2019 11:22 AM
श्रीमान जी, gehun ke liye ap kisme jaise ke Raj 1482, PBW 502, PBW 550, HD 2697, Raj 6560, Raj 3077, Raj 4079, Raj 4037, Raj 4120, DBW 17, Raj 4238, WH 1080, PBW 175, CCNNRVOI (Raj Molya Rodhak-1, picheti bijai ke liye kisme jaise ke Raj 3765, Raj 3777 retli miti ke liye kisme jaise ke C 306, P.B.W. 299, kashriye khetron ke liye kisme jaise ke Raj 3077, K.R.L 1-4 और WH 157 ki buyai ki ja skati hai, dhanywad
Posted by दीपक तिवारी
Uttar Pradesh
30-10-2019 07:23 PM
Maharashtra
11-04-2019 12:16 PM
दीपक जी , प्याज़ एक प्रसिद्ध व्यापक सब्जी वाली प्रजाति है इसकी खेती अलग-अलग किस्म की मिट्टी जैसे की रेतली दोमट, चिकनी, गार और भारी मिट्टी में की जा सकती है यह गहरी दोमट और जलोढ़ मिट्टी, जिसका निकास प्रबंध बढ़िया, नमी को बरकरार रखने की समर्थता, जैविक तत्वों वाली मिट्टी में बढ़िया परिणाम देती है विरली और रेतली मिट्.... (Read More)
दीपक जी , प्याज़ एक प्रसिद्ध व्यापक सब्जी वाली प्रजाति है इसकी खेती अलग-अलग किस्म की मिट्टी जैसे की रेतली दोमट, चिकनी, गार और भारी मिट्टी में की जा सकती है यह गहरी दोमट और जलोढ़ मिट्टी, जिसका निकास प्रबंध बढ़िया, नमी को बरकरार रखने की समर्थता, जैविक तत्वों वाली मिट्टी में बढ़िया परिणाम देती है विरली और रेतली मिट्टी इसकी खेती के लिए बढ़िया नहीं मानी जाती है, क्योंकि मिट्टी के घटिया जमाव के कारण इसमें गांठों का उत्पादन सही नहीं होता है इसकी खेती के लिए मिट्टी का pH 6-7 होना चाहिए प्रसिद्ध किस्में:-alyanpur Red Round: यह उत्तर प्रदेश की प्रसद्धि किस्म है इसकी गांठे भूरे रंग की और गोलाकार आकार की होती हैं इसके पौधे 150-160 दिनों में कटाई के लिए तैयार हो जाते हैं इसकी औसतन पैदावार 8-10 टन प्रति एकड़ होती है Bhima Shakti: यह खरीफ के साथ साथ रबी के मौसम में उगाने के लिए उपयुक्त है यह किस्म रोपाई के 130 दिन बाद कटाई के लिए तैयार हो जाती है इसकी औसतन पैदावारा 170 क्विंटल प्रति एकड़ होती है Arka Kalyan: इसकी गांठे गहरे गुलाबी रंग की होती हैं इसकी औसतन पैदावार 135 क्विंटल प्रति एकड़ होती है Pusa White Round: इसकी गांठे सफेद, गोल और समतल होती हैं इसकी औसतन पैदावार 120 क्विंटल प्रति एकड़ होती है Pusa white flat: इसकी गांठे सफेद, चपटी और मध्यम से बड़े आकार की होती हैं यह किस्म डीहाइड्रेशन के लिए उपयुक्त है मिट्टी को भुरभुरा बनाने के लिए तीन-चार बार गहराई से जोताई करें मिट्टी में जैविक तत्वों की मात्रा बढ़ाने के लिए रूड़ी की खाद डालें फिर खेत को छोटे-छोटे प्लाटों में बांट दे नर्सरी तैयार करने के उचित समय मध्य-अक्तूबर से मध्य-नवबंर होता है नए पौधे मध्य-दिसंबर से मध्य-जनवरी तक रोपाई के लिए तैयार हो जाते है रोपाई के लिए 10-15 सैं.मी. कद के पौधे चुनें खरीफ के मौसम में रोपाई के लिए मई से जून का महीना नर्सरी तैयार करने के लिए उपयुक्त होता है बिजाई के 6-8 सप्ताह बाद नए पौधे रोपाई के लिए तैयार हो जाते हैं जुलाई -अगस्त के महीने में रोपण कर दें रोपण के समय, पंक्तियों के बीच 15 सैं.मी. और पौधों के बीच 10 सैं.मी. का फासला रखें नर्सरी में बीज 1-2 सैं.मी. गहराई पर बोयें बिजाई के लिए रोपण विधि का प्रयोग करें एक एकड़ के लिए 2-3 किलो बीज का प्रयोग करें उखेड़ा रोग और कांव-गियारी से बचाव के लिए थीरम 2 ग्राम+बैनोमाइल 50 डब्लयू पी 1 ग्राम प्रति लीटर पानी से प्रति किलो बीजों का उपचार करें रासायनिक उपचार के बाद बायो एजेंट ट्राईकोडर्मा विराइड 2 ग्राम के साथ प्रति किलो बीजों का उपचार करने की सिफारिश की जाती है इस तरह करने से नए पौधे मिट्टी से पैदा होने वाली और अन्य बीमारीयों से बच जाते है बिजाई से 10 दिन पहले 20 टन रूड़ी की खाद डालें नाइट्रोजन 30 किलो(यूरिया 65 किलो), फासफोरस 16 किलो(सिंगल सुपर फासफेट 100 किलो) और पोटाश 16 किलो(मिउरेट ऑफ़ पोटाश 30 किलो) प्रति एकड़ डालें फासफोरस और पोटाश की पूरी मात्रा और नाइट्रोजन की आधी मात्रा रोपण के समय डालें बाकी बची नाइट्रोजन को दो भागों में बांटकर रोपाई के बाद टॉप ड्रेसिंग के तौर पर 30वें और 45वें दिन डालें मिट्टी की किसम और जलवायु के आधार पर सिंचाई की मात्रा और आवर्ती का फैसला करें आमतौर पर, इसे 5-8 सिंचाइयों की आवश्यकता होती है पहली सिंचाई बिजाई के तुरंत बाद करें और दूसरी सिंचाई रोपाई के तीन दिन बाद करें बाकी की सिंचाई आवश्यकता और मिट्टी में नमी के आधार पर 7-10 दिनों के अंतराल पर करें पुटाई के 10-15 दिन पहले सिंचाई बंद कर दें अत्याधिक सिंचाई ना करें शुरुआत में नए पौधे धीरे-धीरे बढ़ते है इसलिए नुकसान से बचाव के लिए गोड़ाई की जगह रासायनिक नदीन-नाशक का प्रयोग करें रोकथाम के लिए बिजाई से 72 घंटे में पेंडीमैथालीन(स्टंप) 1 लीटर को 200 लीटर पानी में मिलाकर प्रति एकड़ में स्प्रे करें नदीनों के अंकुरण उपरांत बिजाई से 7 दिन बाद आक्सीफ्लोरफैन 425 मि.ली. को 200 लीटर पानी में मिलाकर प्रति एकड़ में स्प्रे करें नदीनों की रोकथाम के लिए 2-3 गोड़ाईयों की सिफारिश की जाती है पहली गोड़ाई बिजाई से एक महीने बाद और दूसरी गोड़ाई, पहली से एक महीने बाद करें सही समय पर पुटाई करना बहुत जरूरी है पुटाई का समय किस्म,ऋतु,मंडी रेट आदि पर निर्भर करता है 50% पौधे की पत्तियां नीचे की तरफ गिरना दर्शाता है कि फसल पुटाई के लिए तैयार है फसल की पुटाई हाथों से प्याज़ को उखाड़ कर की जाती है पुटाई के बाद इनको 2-3 दिन के लिए अनावश्यक नमी निकालने के लिए खेत में छोड़ दे धन्यवाद
Posted by Deepak raghuwanshi
Madhya Pradesh
30-10-2019 07:20 PM
Punjab
11-05-2019 10:00 AM
दीपक जी, यदि पानी उपलब्ध हो तो पहली सिंचाई बिजाई के 40-45 दिनों के बाद, फूल निकलने के बाद करें और अगली सिंचाई फली के विकास के बाद करें यदि सिर्फ एक सिंचाई उपलब्ध हो तो बिजाई के 60 दिनों के बाद करें धन्यवाद
Posted by joginder baba
Haryana
30-10-2019 07:20 PM
Punjab
10-30-2019 08:08 PM
Joginder ji sahiwal cow lene ke liye aap Dilbag Singh 9813144108, 9050944108 Desi Cow Farm se sampark kr skte hai..
Posted by Deepak raghuwanshi
Madhya Pradesh
30-10-2019 07:19 PM
Punjab
11-05-2019 11:03 AM
दीपक जी ,चने की फसल के लिए ज्यादा समतल बैडों की जरूरत नहीं होती यदि इसे मिक्स फसल के तौर पर उगाया जाये तो खेत की अच्छी तरह से जोताई होनी चाहिए यदि इस फसल को खरीफ की फसल के तौर पर बीजना हो, तो खेत को मॉनसून आने पर गहरी जोताई करें, जो बारिश के पानी को संभालने में मदद करेगा बिजाई से पहले खेत की एक बार जोताई करें यदि .... (Read More)
दीपक जी ,चने की फसल के लिए ज्यादा समतल बैडों की जरूरत नहीं होती यदि इसे मिक्स फसल के तौर पर उगाया जाये तो खेत की अच्छी तरह से जोताई होनी चाहिए यदि इस फसल को खरीफ की फसल के तौर पर बीजना हो, तो खेत को मॉनसून आने पर गहरी जोताई करें, जो बारिश के पानी को संभालने में मदद करेगा बिजाई से पहले खेत की एक बार जोताई करें यदि मिट्टी में नमी की कमी नज़र आये तो बिजाई से एक सप्ताह पहले सुहागा फेरें बारानी क्षेत्रों के लिए, अक्तूबर का दूसरा या तीसरा सप्ताह चने की खेती के लिए उपयुक्त होता है सिंचित क्षेत्रों के लिए, बिजाई नवंबर के दूसरे सप्ताह में पूरी कर लें चने की पिछेती बिजाई दिसंबर के पहले सप्ताह तक पूरी कर लें बिजाई के लिए, कतार से कतार में 20-25 सैं.मी. और पौधे से पौधे में 10 सैं.मी. फासले का प्रयोग करें बीज को 6-8 सैं.मी. की गहराई पर बोयें बीज को सीड ड्रिल या लोकल हल की सहायता से बोयें छोटे दानों के लिए 30-32 किलो बीज प्रति एकड़ में प्रयोग करें और मोटे दानों के लिए 36-40 किलो बीज प्रति एकड़ में प्रयोग करें धन्यवाद
Posted by ਰਾਜਵੀਰ ਸਿੰਘ
Punjab
30-10-2019 07:18 PM
Punjab
11-04-2019 11:49 AM
Rajveer singh ji 1 kille(ekcr) lai 40 - 45kg beej kafi hai, hor poan di koi jrurat nai, Thankyou.
Posted by kulwinder singh
Punjab
30-10-2019 07:17 PM
Punjab
10-30-2019 08:03 PM
ਪਸ਼ੂਆਂ ਤੇ ਡਾਲਡਾ ਘਿਓ ਦੀ ਮਾਲਿਸ਼ ਕਰੋ ਜੀ ਤੇ ਪਸ਼ੂਆ ਦਾ ਆਲਾ ਦੁਆਲਾ ਸਾਫ ਰੱਖੋ ਤੇ ਆਸ-ਪਾਸ ਚੂਨਾ ਕਲੀ ਪਾਉ, ਪਸ਼ੂਆਂ ਨੂੰ 100 ਗ੍ਰਾਮ ਤਾਰਾਮੀਰਾ ਦਾ ਤੇਲ ਰੋਜਾਨਾ 20 ਦਿਨ ਦਿਉ ਅਤੇ ਤੁਸੀ taktic 2ml/1liter ਸਪਰੇ ਵੀ ਵਰਤੋਂ, ਇਹ ਸਪਰੇ ਪਸ਼ੂਆਂ ਦੇ ਉਪਰ ਅਤੇ ਆਸ ਪਾਸ ਵੀ ਕਰੋ..
Posted by pramod kumar sahni
Bihar
30-10-2019 07:15 PM
Punjab
10-30-2019 08:02 PM
प्रमोद जी कृप्या आप अपना सवाल विस्तार से पूछें गाय को क्या समस्या आ रही है वो बार बार रिपीट हो रही है या कोई ओर समस्या है ताकि आपको सही जानकारी दी जा सके
Posted by Jas karan
Uttar Pradesh
30-10-2019 07:15 PM
Punjab
11-04-2019 11:11 AM
Jas karan ji kirpya aap aap apna swal visthar se pushe ke aap gehu beej ke bare me kya jankari chahte hai ta jo aap ko puri jankari di ja sake, Thankyou.
Posted by Jagjit Hundal
Punjab
30-10-2019 07:06 PM
Maharashtra
11-01-2019 05:13 PM
jagjit ji jekar tuc DAP di varto kiti hai ta tuc SSP di varto di lod nahi hai. ehna dona da kam ik hi hai.dhanwad
Posted by arun
Haryana
30-10-2019 07:02 PM
Maharashtra
11-04-2019 12:12 PM
यह कई तरह की मिट्टी में उगाई जाती है इसकी पैदावार के लिए नमकीन, क्षारीय और पानी खड़ा होने वाली मिट्टी से बचाव करें यह बढ़िया निकास वाली मिट्टी जिसमे बढ़िया जैविक तत्व मौजूद हों, में बढ़िया परिणाम देती है इसके बढ़िया विकास के लिए मिट्टी का pH 5.5-7 होना चाहिए Drudriha Tulsi: यह मुख्य रूप से बंगाल, नेपाल, चटगांव और महाराष्ट्र क्ष.... (Read More)
यह कई तरह की मिट्टी में उगाई जाती है इसकी पैदावार के लिए नमकीन, क्षारीय और पानी खड़ा होने वाली मिट्टी से बचाव करें यह बढ़िया निकास वाली मिट्टी जिसमे बढ़िया जैविक तत्व मौजूद हों, में बढ़िया परिणाम देती है इसके बढ़िया विकास के लिए मिट्टी का pH 5.5-7 होना चाहिए Drudriha Tulsi: यह मुख्य रूप से बंगाल, नेपाल, चटगांव और महाराष्ट्र क्षेत्रों में पाई जाती है यह गले को सूखेपन से राहत देता है यह हाथों, पैरों और गठिया की सूजन से आराम देता है Ram/Kali Tulsi (Ocimum canum): यह चीन, ब्राज़ील, पूर्व नेपाल और साथ ही बंगाल, बिहार, चटगांव और भारत के दक्षिणी क्षेत्रों में पाई जाती है इसका तना जामुनी और पत्ते हरे रंग के और बहुत ज्यादा सुगंधित होते है इसमें उचित मात्रा में औषधीय गुण जैसे ऐज़ाडिरैकटिन, ऐंटीफंगल , ऐंटीबैक्टीरियल, और पाचन तंत्र को ठीक रखती है यह गर्म क्षेत्रों में बढ़िया उगता है Babi Tulsi: यह पंजाब से त्रिवेंद्रम, बंगाल और बिहार में भी पाई जाती है इसका पौधा 1-2 फीट लम्बा होता है पत्ते 1-2 इंच लम्बे, अंडाकार और नुकीले होते है इसके पत्तों का स्वाद लौंग की तरह और सब्जियों में स्वाद के लिए प्रयोग किया जाता है तुलसी की खेती के लिए, अच्छी तरह से शुष्क मिट्टी की मांग की जाती है मिट्टी के भुरभुरा होने तक हैरो के साथ खेत की जोताई करें, फिर रूड़ी की खाद मिट्टी में मिलाएं तुलसी की रोपाई सीड बैड पर करें फरवरी के तीसरे महीने में नर्सरी बैड तैयार करें पौधे के विकास के अनुसार, 4.5 x 1.0 x 0.2 मीटर के सीड बैड तैयार करें बीजों को 60x60 सैं.मी. के फैसले पर बोयें बीजों को 2 सैं.मी. की गहराई पर बोयें बिजाई के 6-7 हफ्ते बाद, फसल की रोपाई खेत में करें तुलसी की खेती के लिए 120 ग्राम बीजों का प्रयोग प्रति एकड़ में करें फसल को मिट्टी से पैदा होने वाली बीमारीयों से रोकथाम के लिए, बिजाई से पहले मैनकोजेब 5 ग्राम प्रति किलोग्राम से बीजों का उपचार करें फसल की बढ़िया पैदावार के लिए बिजाई से पहले 15 टन रूड़ी की खाद मिट्टी में डालें तुलसी के बीजों को तैयार बैडों के साथ उचित अंतराल पर बोयें मानसून आने के 8 हफ्ते पहले बीजों को बैड पर बोयें बीजों को 2 सैं.मी. की गहराई पर बोयें बिजाई के बाद, रूड़ी की खाद और मिट्टी की पतली परत बीजों पर बना दें इसकी सिंचाई फुवारा विधि द्वारा की जाती है रोपाई के 15-20 दिनों के बाद, नए पौधों को तंदरुस्त बनाने के लिए 2% यूरिया का घोल डालें 6 हफ्ते पुराने और 4-5 पत्तों के अंकुरण होने पर अप्रैल के महीने में नए पौधे तैयार होते है तैयार बैडों को रोपाई 24 घंटे पहले पानी लगाएं ताकि पौधों को आसानी से उखाड़ा जा सकें और रोपाई के समय जड़ें मुलायम और सूजी हुई हो खेत की तैयारी के समय, रूड़ी की खाद को मिट्टी में मिलाएं खाद के तौर पर नाइट्रोजन 48 किलो(यूरिया 104 किलो), फासफोरस 24 किलो(सिंगल सुपर फासफेट 150 किलो) और पोटाश 24 किलो(मिउरेट 40 किलो) प्रति एकड़ में डालें नए पौधे लगाने के समय नाइट्रोजन की आधी मात्रा और फासफेट पेंटोऑक्साइड की पूरी मात्रा शुरुआती समय में डालें Mn 50 पी पी एम कंसंट्रेशन और Co@100 पी पी एम कंसंट्रेशन सूक्ष्म-तत्व डालें बाकी की बची हुई नाइट्रोजन को 2 हिस्सों में पहली और दूसरी कटाई के बाद डालें खेत को नदीनों से मुक्त करने के लिए कसी की मदद से गोड़ाई करें नदीनों की रोकथाम कम न होने पर यह फसल को नुकसान पहुंचाते है रोपण के एक महीने बाद पहली गोड़ाई और पहली गोड़ाई के चार हफ्ते बाद दूसरी गोड़ाई करें रोपण के दो महीने बाद कसी से अनुकूल गोड़ाई करें गर्मियों में, एक महीने में 3 सिंचाइयां करें और बरसात के मौसम में, सिंचाई की आवश्यकता नहीं होती एक साल में 12-15 सिंचाइयां करनी चाहिए पहली सिंचाई रोपण के बाद करें और दूसरी सिंचाई नए पौधों के स्थिर होने पर करें 2 सिंचाइयां करनी आवश्यक है और बाकी की सिंचाई मौसम के आधार पर करें इसके मंडीकरण के लिए आप Aushadhiya kheti vikas sansthan 6268536795 से संपर्क कर सकते हैं
Posted by gursharan sandhu
Punjab
30-10-2019 06:57 PM
Punjab
11-29-2019 10:43 AM
Shrimaan ji, ehna vich tuc vermicompost @5-6 kg prati podhe de hisaab nal pao, dhanwad
Posted by Vikram Singh
Uttar Pradesh
30-10-2019 06:56 PM
Maharashtra
11-01-2019 12:14 PM
यह कई तरह की मिट्टी में उगाई जाती है इसकी पैदावार के लिए नमकीन, क्षारीय और पानी खड़ा होने वाली मिट्टी से बचाव करें यह बढ़िया निकास वाली मिट्टी जिसमे बढ़िया जैविक तत्व मौजूद हों, में बढ़िया परिणाम देती है इसके बढ़िया विकास के लिए मिट्टी का pH 5.5-7 होना चाहिए Drudriha Tulsi: यह मुख्य रूप से बंगाल, नेपाल, चटगांव और महाराष्ट्र क्ष.... (Read More)
यह कई तरह की मिट्टी में उगाई जाती है इसकी पैदावार के लिए नमकीन, क्षारीय और पानी खड़ा होने वाली मिट्टी से बचाव करें यह बढ़िया निकास वाली मिट्टी जिसमे बढ़िया जैविक तत्व मौजूद हों, में बढ़िया परिणाम देती है इसके बढ़िया विकास के लिए मिट्टी का pH 5.5-7 होना चाहिए Drudriha Tulsi: यह मुख्य रूप से बंगाल, नेपाल, चटगांव और महाराष्ट्र क्षेत्रों में पाई जाती है यह गले को सूखेपन से राहत देता है यह हाथों, पैरों और गठिया की सूजन से आराम देता है Ram/Kali Tulsi (Ocimum canum): यह चीन, ब्राज़ील, पूर्व नेपाल और साथ ही बंगाल, बिहार, चटगांव और भारत के दक्षिणी क्षेत्रों में पाई जाती है इसका तना जामुनी और पत्ते हरे रंग के और बहुत ज्यादा सुगंधित होते है इसमें उचित मात्रा में औषधीय गुण जैसे ऐज़ाडिरैकटिन, ऐंटीफंगल , ऐंटीबैक्टीरियल, और पाचन तंत्र को ठीक रखती है यह गर्म क्षेत्रों में बढ़िया उगता है Babi Tulsi: यह पंजाब से त्रिवेंद्रम, बंगाल और बिहार में भी पाई जाती है इसका पौधा 1-2 फीट लम्बा होता है पत्ते 1-2 इंच लम्बे, अंडाकार और नुकीले होते है इसके पत्तों का स्वाद लौंग की तरह और सब्जियों में स्वाद के लिए प्रयोग किया जाता है तुलसी की खेती के लिए, अच्छी तरह से शुष्क मिट्टी की मांग की जाती है मिट्टी के भुरभुरा होने तक हैरो के साथ खेत की जोताई करें, फिर रूड़ी की खाद मिट्टी में मिलाएं तुलसी की रोपाई सीड बैड पर करें फरवरी के तीसरे महीने में नर्सरी बैड तैयार करें पौधे के विकास के अनुसार, 4.5 x 1.0 x 0.2 मीटर के सीड बैड तैयार करें बीजों को 60x60 सैं.मी. के फैसले पर बोयें बीजों को 2 सैं.मी. की गहराई पर बोयें बिजाई के 6-7 हफ्ते बाद, फसल की रोपाई खेत में करें तुलसी की खेती के लिए 120 ग्राम बीजों का प्रयोग प्रति एकड़ में करें फसल को मिट्टी से पैदा होने वाली बीमारीयों से रोकथाम के लिए, बिजाई से पहले मैनकोजेब 5 ग्राम प्रति किलोग्राम से बीजों का उपचार करें फसल की बढ़िया पैदावार के लिए बिजाई से पहले 15 टन रूड़ी की खाद मिट्टी में डालें तुलसी के बीजों को तैयार बैडों के साथ उचित अंतराल पर बोयें मानसून आने के 8 हफ्ते पहले बीजों को बैड पर बोयें बीजों को 2 सैं.मी. की गहराई पर बोयें बिजाई के बाद, रूड़ी की खाद और मिट्टी की पतली परत बीजों पर बना दें इसकी सिंचाई फुवारा विधि द्वारा की जाती है रोपाई के 15-20 दिनों के बाद, नए पौधों को तंदरुस्त बनाने के लिए 2% यूरिया का घोल डालें 6 हफ्ते पुराने और 4-5 पत्तों के अंकुरण होने पर अप्रैल के महीने में नए पौधे तैयार होते है तैयार बैडों को रोपाई 24 घंटे पहले पानी लगाएं ताकि पौधों को आसानी से उखाड़ा जा सकें और रोपाई के समय जड़ें मुलायम और सूजी हुई हो खेत की तैयारी के समय, रूड़ी की खाद को मिट्टी में मिलाएं खाद के तौर पर नाइट्रोजन 48 किलो(यूरिया 104 किलो), फासफोरस 24 किलो(सिंगल सुपर फासफेट 150 किलो) और पोटाश 24 किलो(मिउरेट 40 किलो) प्रति एकड़ में डालें नए पौधे लगाने के समय नाइट्रोजन की आधी मात्रा और फासफेट पेंटोऑक्साइड की पूरी मात्रा शुरुआती समय में डालें Mn 50 पी पी एम कंसंट्रेशन और Co@100 पी पी एम कंसंट्रेशन सूक्ष्म-तत्व डालें बाकी की बची हुई नाइट्रोजन को 2 हिस्सों में पहली और दूसरी कटाई के बाद डालें खेत को नदीनों से मुक्त करने के लिए कसी की मदद से गोड़ाई करें नदीनों की रोकथाम कम न होने पर यह फसल को नुकसान पहुंचाते है रोपण के एक महीने बाद पहली गोड़ाई और पहली गोड़ाई के चार हफ्ते बाद दूसरी गोड़ाई करें रोपण के दो महीने बाद कसी से अनुकूल गोड़ाई करें गर्मियों में, एक महीने में 3 सिंचाइयां करें और बरसात के मौसम में, सिंचाई की आवश्यकता नहीं होती एक साल में 12-15 सिंचाइयां करनी चाहिए पहली सिंचाई रोपण के बाद करें और दूसरी सिंचाई नए पौधों के स्थिर होने पर करें 2 सिंचाइयां करनी आवश्यक है और बाकी की सिंचाई मौसम के आधार पर करें इसके मंडीकरण के लिए आप Aushadhiya kheti vikas sansthan 6268536795 से संपर्क कर सकते हैं
Posted by Om Bilavaliya
Madhya Pradesh
30-10-2019 06:52 PM
Maharashtra
11-14-2019 01:34 PM
इसे भारत की मिट्टी की कई किस्मों में उगाया जा सकता है गेहूं की खेती के लिए चिकनी दोमट या दोमट बनतर, अच्छे ढांचे और पानी सोखने की सामान्य क्षमता वाली मिट्टी उचित होती है छिद्रित और पानी कम सोखने वाली मिट्टी गेहूं की खेती के लिए उपयुक्त नहीं होती सूखे हालातों, अच्छे जल निकास वाली भारी मिट्टी इसकी खेती के लिए अ.... (Read More)
इसे भारत की मिट्टी की कई किस्मों में उगाया जा सकता है गेहूं की खेती के लिए चिकनी दोमट या दोमट बनतर, अच्छे ढांचे और पानी सोखने की सामान्य क्षमता वाली मिट्टी उचित होती है छिद्रित और पानी कम सोखने वाली मिट्टी गेहूं की खेती के लिए उपयुक्त नहीं होती सूखे हालातों, अच्छे जल निकास वाली भारी मिट्टी इसकी खेती के लिए अनुकूल होती है भारी मिट्टी जिसका घटिया ढांचा और घटिया जल निकास हो इसकी खेती के लिए उपयुक्त नहीं होती क्योंकि गेहूं की फसल जल जमाव के प्रति संवेदनशील होती है इसकी किस्मे जैसे के Raj 1482, PBW 502, PBW 550, HD 2697, Raj 6560, Raj 3077, Raj 4079, Raj 4037, Raj 4120, DBW 17, Raj 4238, WH 1080, PBW 175, CCNNRVOI (Raj Molya Rodhak-1 पिछेती बिजाई की किस्में Raj 3765, Raj 3777 रेतली मिट्टी वाली किस्में : इन किस्मों की वृद्धि के लिए कम पानी की आवश्यकता होती है C 306, P.B.W. 299 क्षारीय मिट्टी की किस्में : क्षारीय क्षेत्रों में Raj 3077, K.R.L 1-4 और WH 157 जैसी किस्मों का प्रयोग करें, ये अच्छी उपज देती हैं गेहूं की फसल को अच्छे अंकुरन के लिए अच्छी तरह से तैयार, पर ठोस बीज बैड की आवश्यकता होती है पिछली फसल की कटाई के बाद खेत की अच्छे तरीके से ट्रैक्टर की मदद से जोताई की जानी चाहिए खेत को आमतौर पर ट्रैक्टर के साथ तवियां जोड़कर जोता जाता है और उसके बाद दो या तीन बार हल या सुहागे से जोता जाता है बारानी क्षेत्रों में खेत इस तरह से तैयार करना चाहिए कि वह नमी को सोख सके खेत की एक बार आयरन के हल से गहरी जोताई या सामान्य हल से दो या तीन बार जोताई करें और सुहागा फेरें खेत की जोताई शाम के समय की जानी चाहिए और रोपाई की गई ज़मीन को पूरी रात खुला छोड़ देना चाहिए ताकि वह ओस की बूंदों से नमी सोख सके प्रत्येक जोताई के बाद सुहागा फेरना चाहिए आखिरी जोताई के समय यूरिया 35-40 किलो प्रति एकड़ में डालें इससे गेहूं की अंकुरन प्रतिशतता में वृद्धि होती है अज़ोटोबैक्टर 2.5 किलो + फास्फेटिक 2.5 किलो + ट्राइकोडरमा 2.5 किलो को 100 किलो-125 किलो रूड़ी की खाद या गाय के गले हुए गोबर में मिलाकर आखिरी जोताई के समय खिलार दें गेहूं की बिजाई सही समय पर करनी जरूरी है बारानी क्षेत्रों के लिए बिजाई नवंबर के पहले से तीसरे सप्ताह में पूरी कर लें, जबकि सिंचित क्षेत्रों में बिजाई अक्तूबर से 15 नवंबर तक पूरी कर लें सामान्य बिजाई के लिए कतारों में 20 सैं.मी. के फासले की सलाह दी जाती है यदि बिजाई देरी से करनी हो तो 18 सैं.मी. का फासला होना चाहिए 4-5 सैं.मी. की गहराई में बिजाई करनी चाहिए बिजाई का ढंग : बीज ड्रिल, बुरकाव विधि , जीरो टिलेज़ ड्रिल, रोटावेटरबीज की मात्रा बिजाई के लिए 40 किलो बीज प्रति एकड़ में प्रयोग करें हल्की मिट्टी : यदि बिजाई देरी से की जाये तो नवंबर के आखिरी सप्ताह से दिसंबर के दूसरे सप्ताह तक बिजाई 50 किलो बीज प्रति एकड़ में प्रयोग करके पूरी कर लें देरी से बिजाई के लिए कम समय की किस्मों का प्रयोग करें भारी मिट्टी : सामान्य स्थितियों में बिजाई नवंबर केपहले से तीसरे सप्ताह में पूरी कर लें, जब कि सिंचित हालातों में दिसंबर महीने में बिजाई पूरी कर लें बीज की मात्रा 50 किलोग्राम प्रति एकड़ में रखें बीज का उपचार : बीजों को दीमक, फफूंद, झुलस रोग जैसे बीमारियों से बचाने के लिए बीजने से 24 घंटे पहले एक किलो बीजों का 4 मि.ली. क्लोरपाइरीफॉस या 1.5 - 1.87 ग्राम टेबुकोनाज़ोल 2 डी.एस या 2 ग्राम कार्बेनडाज़िम या थीरम मिलानी चाहिए रासायनिक उपचार के बाद बीजों को टी विराइड 1.15 प्रतिशत डब्लयु पी 4 ग्राम से प्रति किलो बीजों का उपचार करें IPM में टी विराइड 4 ग्राम + कार्बोक्सिन 75 डब्लयु पी 1.25 ग्राम या टैबुकोनाज़ोल 1.0 ग्राम से प्रति किलो बीजों का उपचार झूठी कांगियारी को रोकने के लिए किया जाता है उसके बाद दीमक से बचाव के लिए बिजाई से 15 दिनों के बाद मिट्टी का क्लोरोपाइरीफोस 1 लीटर को प्रति एकड़ में बुरकाव करके उपचार करें मिट्टी की जांच के आधार पर खादों का प्रयोग करें मिट्टी की जांच की मदद से हम खादों को मिट्टी की आवश्यकता के आधार पर दे सकते हैं गेहूं की समय पर बिजाई के लिए नाइट्रोजन 37-50 किलो (यूरिया 80-100 किलो), फासफोरस 8-15 किलो (एस एस पी 50-90 किलो) और पोटाश 12.5 किलो (म्यूरेट ऑफ पोटाश 20 किलो) प्रति एकड़ में डालें नाइट्रोजन की आधी मात्रा, पोटाश और फासफोरस की पूरी मात्रा बिजाई के समय डालें पहली सिंचाई के बाद नाइट्रोजन की बाकी बची आधी मात्रा डाल दें पहली सिंचाई बिजाई के 20-25 दिनों के बाद करनी चाहिए यह अवस्था जड़ गलन और नमी तनाव का समय होता है जिसके कारण उपज में कमी होती है दूसरी सिंचाई बिजाई के 40-45 दिनों के बाद पौधा बाहर निकलने के समय करनी चाहिए तीसरी सिंचाई 70-75 दिनों के बाद तना बनने के समय करनी चाहिए चौथी सिंचाई 90-95 दिनों के बाद फूल बनने के समय करनी चाहिए पांचवी सिंचाई 110-115 दिनों के बाद दूधिया अवस्था में करनी चाहिए रासायनिक नदीन रोकथाम : इसमें कम मेहनत और हाथों से नदीनों को उखाड़ने से होने वाली हानि ना होने कारण ज्यादातर यह तरीका ही अपनाया जाता है नुकसान से बचने के लिए पैंडीमैथालीन स्टांप (30 ई.सी.) 1 लीटर को 500 लीटर पानी के घोल में मिलाके बीजने के 0-3 दिनों के अंदर अंदर छिड़काव करना चाहिए चौड़े पत्तों वाले नदीनों की रोकथाम के लिए 2,4-डी 250 मि.ली. को 150 लीटर पानी में घोलकर प्रयोग करें उच्च पैदावार वाली फसलों की किस्मों की कटाई पत्तों और तने के पीले पड़ने और सूखने के बाद की जाती है हानि से बचने के लिए फसल की कटाई इसके पके हुए बूटों के सूखने से पहले की जानी चाहिए ग्राहक की तरफ से इसे स्वीकारने और इसकी अच्छी गुण्वत्ता के लिए इसको सही समय पर काटना चाहिए जब दानों में 25-30 प्रतिशत नमी रह जाती है तो यह इसे काटने का सही समय होता है हाथ से गेहूं काटने के समय तेज धार वाली द्राती का प्रयोग करना चाहिए कटाई के लिए कंबाइने भी उपलब्ध हैं, जिनकी सहायता से गेहूं की फसल की कटाई, दाने निकालना और छंटाई एक ही बार में की जा सकती है धन्यवाद
Posted by Devashish Patel
Uttar Pradesh
30-10-2019 06:52 PM
Punjab
10-30-2019 06:55 PM
Patel ji inko aap pett ke kirro ke liye Bendikind plus bolus den aur Bovimin-B powder 100gm rojana aur Ovumin advance bolus rojana 1 goli den aur 21 din tak dete rehen, isse heat mai aa jayegi.
Posted by Mahendra Singh Patel
Uttar Pradesh
30-10-2019 06:51 PM
Punjab
11-29-2019 11:52 AM
श्रीमान जी, आप सल्फर 3 kg प्रति एकड़ के हिसाब से डालें, धन्यवाद
Posted by gursharan sandhu
Punjab
30-10-2019 06:44 PM
Punjab
10-31-2019 02:55 PM
Gursharan ji, is vich fungus da hamla hai, kripa tuc is vich carbendazim @ 4g prati liter pani de hisaab nal spray karo, or isvich tuc NPK !91919 @ 10 gm prati liter pani de hisaab nal spray karo, dhanwaad
Posted by Radheshyam
Rajasthan
30-10-2019 06:42 PM
Punjab
11-14-2019 06:02 PM
राधे श्याम जी इस एप में मुखय पेज पर पशु पर क्लिक करे उसके बाद आपको सभी पशुओ की जानकारी दी गयी है जी , आप वह पर पढ़ सकते है इसके इलावा कोई सवाल है तो दोबारा सवाल पूछ सकते है जी
Posted by gursharan sandhu
Punjab
30-10-2019 06:41 PM
Punjab
11-06-2019 06:11 PM
Gursharan ji, is vich fungus da hamla hoea hai, isde lai tuc is upar carbendazim@ 4gm prati liter pani de hisaab nal pao ate is vich vermicompost 3-4 kg pao, dhanwad
Posted by vinay singh
Uttar Pradesh
30-10-2019 06:36 PM
Punjab
11-01-2019 01:13 PM
किसान का मित्र केंचुए को कहते हैं केंचुआ एक ऐसा जीव है जो किसान को खेती में बहुत लाभदायक है
Posted by gursharan sandhu
Punjab
30-10-2019 06:35 PM
Punjab
10-31-2019 02:34 PM
Gursharan ji, is vich fungus da hamla hoea hai , isdi rioktam lai tuc copper oxychloride @ 3g prati liyter de hisaab nal spray karo ate is vich vermicompost @ 7-8 kg prati butte de hisaab nal ao, dhanwad
Posted by sarwan
Punjab
30-10-2019 06:34 PM
Punjab
11-29-2019 11:55 AM
Shrimaan ji, beej khraab nahi hoe ga , ug jaye ga par waste decomposer nal beej di sodh kar ke us nu shaa vich sukka ke bijea janda hai, dhanwad
Posted by Tanu
Punjab
30-10-2019 06:31 PM
Maharashtra
10-31-2019 04:20 PM
UNNAT PBW 343: ਇਹ ਕਿਸਮ ਸਿੰਚਾਈ ਵਾਲੇ ਖੇਤਰਾਂ ਵਿੱਚ ਲਗਾਉਣ ਯੋਗ ਹੈ ਪੱਕਣ ਦੇ ਲਈ ਇਹ 155 ਦਿਨਾਂ ਦਾ ਸਮਾਂ ਲੈਦੀ ਹੈ ਇਹ ਕਰਨਾਲ ਬੰਟ ਦੀ ਪ੍ਰਤਿਰੋਧੀ ਅਤੇ ਬਲਾਈਟ ਨੂੰ ਵੀ ਸਹਿਣ ਯੋਗ ਹੈ ਇਸਦੀ ਔਸਤ ਪੈਦਾਵਾਰ 23.2 ਕੁਇੰਟਲ ਪ੍ਰਤੀ ਏਕੜ ਹੈ
Posted by ਜੱਸਪਰੀਤ ਸਿੰਘ
Punjab
30-10-2019 06:30 PM
Punjab
10-30-2019 07:21 PM
ਭਾਜੀ ਬਰਨਾਲਾ ਕੋਲ ਹੰਢਿਆਇਆ ਦੇ ਕ੍ਰਿਸ਼ੀ ਵਿਗਿਆਨ ਕੇਂਦਰ ਤੋਂ ਯੂਨੀਵਰਸਿਟੀ ਦੀਆਂ ਕਿਤਾਬਾਂ ਲਓ
Posted by Radheshyam
Rajasthan
30-10-2019 06:29 PM
Chandigarh
11-23-2019 02:34 PM
iski roktham ke liye Buprofenzin@250ml prti acre ke hisaab se istemaal krein.
Posted by gurpreet
Punjab
30-10-2019 06:28 PM
Punjab
10-30-2019 06:58 PM
Gurpreet ji aap Flukarid-Ds bolus ko pess ker roti mai de skte hai, yeh aap gabhin pashu ja dusre pashuo ko v de skte hai..
Posted by KARAMJIT SINGH
Punjab
30-10-2019 06:20 PM
Punjab
10-30-2019 06:59 PM
tuci Beetal nasal di bakri rakh skde ho, ehh meat ate dudh lai vdia nasal hai..
Posted by Gurtej Singh
Punjab
30-10-2019 06:19 PM
Maharashtra
11-14-2019 05:42 PM
HD2851 kisam pakkan de lyi 126-134 din laindi hai. iss di height shotti hundi hai. iss di toodi bhut ghat bndi hai. iss di height 80-90cm hi hundi hai. iss da jhaad change vaahna de vich 23 qtl chla janda hai. par jo iss da jhaad sifarish kita janda hai ohh 18 qtl prati acre hi hai. iss da jhaad iss de mote daanya kr ke vadh hunda hai. iss di roti v wdia bndi hai,tuc isdi bijai lyi beej 40 to 45 kg/acre hisab naal pao...ihh narme wale vaahn de vich kaamjab hai..
Posted by suraj lowanshii
Madhya Pradesh
30-10-2019 06:17 PM
Maharashtra
11-14-2019 05:31 PM
इसे मिट्टी की व्यापक किस्मों जैसे दोमट रेतली से चिकनी दोमट मिट्टी में उगाया जा सकता है मक्की की खेती के लिए अच्छे निकास वाली, उपजाऊ रेतली दोमट से गारी दोमट मिट्टी उपयुक्त होती है अच्छी उपज के लिए उच्च जैविक पदार्थ युक्त मिट्टी, जिसमें पानी सोखने की क्षमता अच्छी हो, की आवश्यकता होती है मिट्टी की पी एच 5.5-7.5 होन.... (Read More)
इसे मिट्टी की व्यापक किस्मों जैसे दोमट रेतली से चिकनी दोमट मिट्टी में उगाया जा सकता है मक्की की खेती के लिए अच्छे निकास वाली, उपजाऊ रेतली दोमट से गारी दोमट मिट्टी उपयुक्त होती है अच्छी उपज के लिए उच्च जैविक पदार्थ युक्त मिट्टी, जिसमें पानी सोखने की क्षमता अच्छी हो, की आवश्यकता होती है मिट्टी की पी एच 5.5-7.5 होनी चाहिए भारी चिकनी मिट्टी इसकी खेती के लिए उपयुक्त नहीं होती मिट्टी में किसी भी तत्व की कमी जानने के लिए मिट्टी की जांच जरूर करवायें प्रसिद्ध किस्में :- Ganga 2,Ganga-II,Tarun,Naveen खेती के लिए नदीन रहित और पिछली फसल से मुक्त खेत का ही चयन करें 10-15 सैं.मी. की गहराई पर जोताई करें मिट्टी के भुरभुरा होने तक खेत की 6-7 बार जोताई करें गाय का गला हुआ गोबर 4-6 टन प्रति एकड़ में डालें और खेत में 10 पैकेट एज़ोसपीरीलियम के डालें 45 से 50 सैं.मी. के फासले पर खालियां और मेंड़ तैयार करें सिंचित क्षेत्रों में बिजाई मॉनसून के शुरू होने से 10-15 दिन पहले करें इससे उपज में 10-15 प्रतिशत वृद्धि होगी बारानी क्षेत्रों में बिजाई मॉनसून के शुरू होने पर करें ताकि मिट्टी में उचित नमी विकसित हो सके उचित अंकुरण के लिए मिट्टी में नमी होना आवश्यक है अच्छी वृद्धि और अच्छी उपज के लिए पौधों में सही मात्रा का होना जरूरी है खरीफ की फसल के लिए कतार से कतार में 70 सैं.मी. और पौधे से पौधे में 22 सैं.मी. फासले का प्रयोग करें आसानी से अंकुरण के लिए समतल मिट्टी पर बीजों को 3-5 सैं.मी. की गहराई पर बोयें बिजाई हाथों से गड्ढा खोदकर या आधुनिक तरीके से ट्रैक्टर और सीड डरिल की सहायता से मेंड़ बनाकर की जा सकती है उद्देश्य, बीज का आकार, मौसम, पौधे की किस्म, बिजाई का तरीका आदि बीज की दर को प्रभावित करते हैं खरीफ के मक्की के लिए 7-8 किलो बीज प्रति एकड़ में प्रयोग करें अच्छी उपज के लिए नाइट्रोजन 24-50 किलो (यूरिया 52-110 किलो), फासफोरस 16-25 किलो (एस एस पी 100-160 किलो) और पोटाश 16 किलो (म्यूरेट ऑफ पोटाश 27 किलो) प्रति एकड़ में डालें फासफोरस और पोटाश की पूरी मात्रा और 1/4 नाइट्रोजन बिजाई के समय डालें खादों को 5-7 सैं.मी. की गहराई पर डालें बाकी की नाइट्रोजन को दो भागों में, पहला फसल के घुटने तक आने की अवस्था में और दूसरा बालियां निकलने के समय डालें मक्की की फसल में जिंक और मैग्नीशियम की कमी होना सामान्य है इसे पूरा करने के लिए 10 किलो शुरूआती खुराक के तौर पर डालें जिंक और मैग्नीशियम के साथ ही आयरन की कमी भी देखी जा सकती है इसके कारण पूरा पौधा पीले रंग का दिखाई देता है इसे पूरा करने के लिए सूक्ष्म तत्व मिश्रण 25 किलो को 18 किलो रेत के साथ मक्की के बीज बोने के बाद डालें मक्की की फसल में हाथों से 1-2 गोडाई आवश्य करें पहली गोडाई बिजाई के 20-25 दिनों के बाद और दूसरी बिजाई के 40-45 दिनों के बाद करें नदीनों की जांच के लिए एट्राज़िन 500 ग्राम को 100 लीटर पानी में मिलाकर बिजाई के बाद और नदीनों के अंकुरण से पहले स्प्रे करें गोडाई के बाद खादों को टॉप ड्रेसिंग के तौर पर डालें और उसके बाद मेंड़ो पर मिट्टी चढ़ाएं छंटाई का अर्थ अत्याधिक पौधे को निकालना और सिर्फ सेहतमंद पौधों को ही रखना और पौधे से पौधे में 20 सैं.मी. के फासले को बनाकर रखना पहली गोडाई के समय छंटाई की प्रक्रिया की जाती है पहली सिंचाई के समय जब पौधे मुख्य फसल से 4-6 दिन के हो जाये, उस समय खाली जगहों को भरें बारिश की तीव्रता, आवृत्ति और तापमान के आधार पर सिंचाई करें नए पौधे, घुटने तक आने की अवस्था, फूल निकलना और दानें भरना सिंचाई के लिए बहुत गंभीर अवस्थाएं होती हैं इन अवस्थाओं पर पानी की कमी उपज में बहुत नुकसान कर सकती है पानी की कमी होने पर खालियां बनाकर सिंचाई करें यह पानी को भी बचाता है छल्लियों के बाहरले पर्दे हरे से सफेद रंग के होने पर फसल की कटाई करें तने के सूखने और दानों में पानी की मात्रा 17-20 प्रतिशत होने की सूरत में कटाई करना इसके लिए अनुकूल समय है प्रयोग की जाने वाली जगह और यंत्र साफ, सूखे और रोगाणुओं से मुक्त होने चाहिए
Posted by jitendra singh
Rajasthan
30-10-2019 06:16 PM
Punjab
11-23-2019 02:38 PM
कृपया एक बार चैक करें इसमें दीमक लगी हुई है, इसकी रोकथाम के लिए क्लोरपाइरीफोस@4मि.ली प्रति लीटर के हिसाब से इस्तेमाल करें
Posted by Rajan Singh
Uttar Pradesh
30-10-2019 06:05 PM
Punjab
11-29-2019 11:32 AM
Shrimaan ji K 1317 ik ashincit kshetron ke liye kisam hai jaha kheti sirf barish ke adaar par hoti hai, iske ilawa yeh sinchit kshetron mein bhi ki ja sakti hai, yeh labgah 125 din mein pak kar tiyar ho jati hai, yeh ageti or picheti kismon dono ke liye sifarish ki jati hi, iska kad 92 cm hai, iski asinchit kshetron mein paidawaar 18 se 2 0 quintal parti acre dasea ja reha hai ate sinchit kshetran ch isdi paidawaar 25-30 quintal tak batai ja rahi hai, dhanywad