Posted by किशोर मल भादू
Rajasthan
31-10-2019 08:44 AM
किशोर जी, खरीफ की फसल के लिए बीजों को मई-जून महीने में नर्सरी में बोयें गर्मियों के मौसम में नर्सरी फरवरी-मार्च महीने में तैयार करें खरीफ की फसल के लिए कतार से कतार में 45 सैं.मी. और पौधे से पौधे में 30-45 सैं.मी. फासले का प्रयोग करें, जबकि गर्मियों के मौसम की फसल के लिए कतार से कतार में 60 सैं.मी. और पौधे से पौधे में 30-45 स.... (Read More)
किशोर जी, खरीफ की फसल के लिए बीजों को मई-जून महीने में नर्सरी में बोयें गर्मियों के मौसम में नर्सरी फरवरी-मार्च महीने में तैयार करें खरीफ की फसल के लिए कतार से कतार में 45 सैं.मी. और पौधे से पौधे में 30-45 सैं.मी. फासले का प्रयोग करें, जबकि गर्मियों के मौसम की फसल के लिए कतार से कतार में 60 सैं.मी. और पौधे से पौधे में 30-45 सैं.मी. फासले का प्रयोग करें नर्सरी में बीजों को 3-5 सैं.मी. की गहराई में बोयें और फिर मिट्टी से ढक दें मिर्च की बिजाई पनीरी लगाकर की जाती है
एक एकड़ खेत में बिजाई के लिए 400-600 ग्राम बीजों का प्रयोग करें फसल को मिट्टी से पैदा होने वाली बीमारियों से बचाने के लिए बीज का उपचार करना बहुत जरूरी है बिजाई से पहले बीज को 3 ग्राम थीरम या 2 ग्राम कार्बेनडाज़िम प्रति किलो बीज से उपचार करें रासायनिक उपचार के बाद बीज को 5 ग्राम ट्राइकोडरमा या 10 ग्राम सीडियूमोनस फ्लोरीसैन्स प्रति किलो बीज से उपचार करें और छांव में रखें फिर यह बीज, बिजाई के लिए प्रयोग करें फूलों को पानी देने वाले बर्तन से पानी दें कॉपर ऑक्सीक्लोराइड 2.5 ग्राम प्रति लीटर पानी नर्सरी में 15 दिनों के फासले पर डालें इससे मुरझाना रोग से पौधों को बचाया जा सकता है फसल को उखेड़ा रोग और रस चूसने वाले कीड़ों से बचाने के लिए बिजाई से पहले जड़ों को 15 मिनट के लिए ट्राइकोर्डमा हर्जीनम 20 ग्राम प्रति लीटर+0.5 मि.ली. प्रति लीटर इमीडाक्लोप्रिड में डुबोयें पौधों को तंदरूस्त रखने के लिए वी ए एम के साथ नाइट्रोजन फिक्सिंग बैक्टीरिया डालें इस तरह करने से हम 50 प्रतिशत सुपर फासफेट और 25 प्रतिशत नाइट्रोजन बचा सकते हैं धन्यवाद
Posted by sanjeev Kumar
Punjab
31-10-2019 08:42 AM
sanjeev ji kirpa karke swal vistar nal pucho ta jo tuhanu is bare poori jankari diti ja sake.dhanwad

Posted by Dsvirk Shab
Punjab
31-10-2019 08:41 AM
ਉਸ ਨੂੰ ਪੇਟ ਦੇ ਕੀੜਿਆਂ ਲਈ Bendikind plus ਗੋਲੀ ਦਿਓ ਅਤੇ ਉਸ ਨੂੰ Minfa gold ਪਾਊਡਰ 100 ਗ੍ਰਾਮ ਰੋਜਾਨਾ, Milkout powder 2-2 ਚਮਚ ਸਵੇਰੇ ਸ਼ਾਮ ਦਿਓ ਅਤੇ ਉਸ ਨੂੰ ਵਧਿਆ ਮਾਤਰਾ ਵਿਚ ਹਰਾ ਚਾਰਾ ਦਿਓ..
Posted by Narender Kumar
Haryana
31-10-2019 08:36 AM
Narendra ji, please tell us the full name of this wheat variety so that we can provide you full information regarding this, thank you

Posted by maninder singh
Punjab
31-10-2019 08:32 AM
SIr jvi nu kala tela pe reha g main thithaxom 25 di spray kiti aa control krugi ja hor spray kriye ?
maninder ji isde nal control ho jayegi . tuc isde asar da intjar karo jekar isda asar na ghatya ta tuc imidacloprid@60ml di spray vi kar sakde ho.dhanwad

Posted by ravi singh
Uttar Pradesh
31-10-2019 08:31 AM
Ravi Singh ji Shri ram ki 272 Wheat ki kisam hai sarso me hybrid me in ki kisam 1666, 1644 hai or kisamo ki photo aap ko answer ke sath bhej di gae hai, Thankyou.
Posted by MD irsad Ansari
Jharkhand
31-10-2019 08:21 AM
MD irsad Ansari ji cm Aashirwad yojna list jharkhand ke bare me puri jankari ke lia aap dia gae link par click kare https://pmil.in/jharkhand-govt-scheme/mukhyamantri-krishi-ashirwad-yojana-list/

Posted by Yash Vardhan Sharma
Rajasthan
31-10-2019 08:19 AM
हल्दी की बुवाई अप्रैल से मई तक की जा सकती है बीज की किस्में जैसे पंजाब नंबर 1, पंजाब नंबर 2, राजिंद्र सोनी, स्टेट्स पुरी की बिजाई कर सकते हैं बीज की मात्रा एक एकड़ में 5 से 7 क्विंटल की ज़रूरत पड़ती है बुवाई की विधि के लिए कतार से कतार 26 इंच और पौधे से पौधे 5 इंच का फासला रखें इसकी एक एकड़ में उपज लगभग 120 क्विंटल तक निकल आ.... (Read More)
हल्दी की बुवाई अप्रैल से मई तक की जा सकती है बीज की किस्में जैसे पंजाब नंबर 1, पंजाब नंबर 2, राजिंद्र सोनी, स्टेट्स पुरी की बिजाई कर सकते हैं बीज की मात्रा एक एकड़ में 5 से 7 क्विंटल की ज़रूरत पड़ती है बुवाई की विधि के लिए कतार से कतार 26 इंच और पौधे से पौधे 5 इंच का फासला रखें इसकी एक एकड़ में उपज लगभग 120 क्विंटल तक निकल आती है इसकी एक एकड़ में लाकत 35 से 40 हजार रूपये तक की होती है

Posted by Kailash chandrawanshi
Madhya Pradesh
31-10-2019 08:08 AM
गेहूं की बिजाई के लिए JW 1201 (21.2क्विंटल/एकड़), GW 322 (22-24क्विंटल/एकड़), HI 8498 (22-24क्विंटल/एकड़), HI 1544 (22-24क्विंटल/एकड़), JW 1203 (16.8-18क्विंटल/एकड़) की बिजाई कर सकते हो
Posted by Nirmal Singh
Punjab
31-10-2019 08:05 AM
BhaaG taaran culture kise v laboratory cho culture karva ke dasi pashuan wali dwaee doctor ton bachedani ch bharwao lao te jad taaran kare uss nu aas karwa lao jine din taarran disan une din teeka lagwao
Posted by sipahi kumar yadav
Bihar
31-10-2019 07:28 AM
श्रीमान जी अच्छे जल निकास वाली गहरी, दोमट मिट्टी जिसमें भूमिगत-जल का स्तर ज़मीन से 1.5-2 मी. के नीचे हो और अच्छी जल धारण क्षमता वाली ज़मीन गन्ने की खेती के लिए लाभदायक है यह फसल काफी अम्लीय और खारेपन को सहन कर सकती है इसलिए इसे मिट्टी जिसका pH 5 से 8.5 हो, में उगाई जा सकती है यदि मिट्टी का pH 5 से कम हो तो इसमें चूना (कली) डाले.... (Read More)
श्रीमान जी अच्छे जल निकास वाली गहरी, दोमट मिट्टी जिसमें भूमिगत-जल का स्तर ज़मीन से 1.5-2 मी. के नीचे हो और अच्छी जल धारण क्षमता वाली ज़मीन गन्ने की खेती के लिए लाभदायक है यह फसल काफी अम्लीय और खारेपन को सहन कर सकती है इसलिए इसे मिट्टी जिसका pH 5 से 8.5 हो, में उगाई जा सकती है यदि मिट्टी का pH 5 से कम हो तो इसमें चूना (कली) डालें और यदि मिट्टी का pH 9.5 से ज्यादा हो तो इसमें जिप्सम डालें आप इसकी किस्मे जैसे Co 8014 (Mahalakshami) ,Vasant 1,Co 86032 ,Co 92005 की बिजाई कर सकते है पतझड़ के मौसम में 15 अक्तूबर से २० नवंबर तक बिजाई की जाती है, बसंत के मौसम में बिजाई 15 फरवरी तक और गर्मियों के मौसम में 15 जुलाई से 15 सितंबर तक बिजाई की जाती है बिजाई के लिए सुधरे ढंग जैसे कि (गहरी खालियां, मेंड़ बनाकर,पंक्तियों में जोड़े बनाकर और गड्ढा खोदकर बिजाई ) प्रयोग किये जाते हैं 1) खालियां और मेंड़ बनाकर सूखी बिजाई: ट्रैक्टर द्वारा मेंड़ बनाने वाली मशीन की मदद से मेंड़ और खालियां बनाएं और इन मेड़ और खालियों में बिजाई करें मेड़ और खालियों में 90 सैं.मी. का फासला होना चाहिए गन्ने की गुलियों को मिट्टी में दबाएं और उसके बाद हल्की सिंचाई करें 2) पंक्तियों के जोड़े बनाकर बिजाई: खालियां बनाने वाले यंत्र के प्रयोग से खेत में 150 सैं.मी. के फासले पर खालियां बनाएं और उनमें 30:30-90-30:30 सैं.मी. के फासले पर गन्ने की रोपाई करें इस तरीके से मेड़ वाली बिजाई से अधिक पैदावार मिलती है 3) गड्ढा खोदकर बिजाई: गड्ढे खोदने वाली मशीन से 60 सैं.मी. व्यास के 30 सैं.मी. गहरे गड्ढे खोदें जिनमें 60 सैं.मी. का फासला हो इससे गन्ना 2-3 बार उगाया जा सकता है और मेड़ वाली बिजाई से 25-50 % अधिक पैदावार आती है B) एक आंख वाले गन्नों की बिजाई: रोपाई के लिए सेहतमंद गुलियां चुनें और 75-90 सैं.मी. के अंतर पर खालियों में बिजाई करें गुलियां एक आंख वाली होनी चाहिए यदि गन्ने के ऊपरी भाग में छोटी डलियां चुनी गई हों तो बिजाई 6 -9 सैं.मी. के अंतर पर करें फसल के अच्छे उगने के लिए आंखों को ऊपर की ओर रखें और हल्की सिंचाई करें पतझड़ के मौसम में 14500-16500 तीन आंख वाले बीज प्रति एकड़ में प्रयोग करें और बसंत के मौसम में 16500-25000 तीन आंख वाले बीज और 21600-25000 दो आंख वाले बीज प्रति एकड़ में प्रयोग करें गन्ने में नदीनों के कारण 12-72 % पैदावार का नुकसान होता है शुरूआती 60-120 दिनों तक नदीनों की रोकथाम बहुत जरूरी है इसलिए रोपाई के बाद 3-4 महीने बाद फसल की नदीनों की रोकथाम करें नीचे लिखे तरीकों से नदीनों को रोका जा सकता है 1) हाथों से गोडाई करके: गन्ना एक व्यापक जगह लेने वाली फसल है इसलिए नदीनों को गोडाई करके रोका जा सकता है इसके इलावा प्रत्येक सिंचाई के बाद 3-4 गोडाई जरूरी है 2) काश्तकारी ढंग: इस प्रक्रिया में खेती के तरीके, अंतरफसली और मलचिंग तरीके शामिल हैं बहुफसली के कारण नदीनों का हमला ज्यादा होता है इसकी रोकथाम के लिए चारे वाली फसलें और हरी खाद वाली फसलों के आधार वाला फसली चक्र गन्ने में नदीनों की रोकथाम करता है गन्ना एक व्यापक जगह लेने वाली भी फसल है जिससे नदीनों के हमले का खतरा भी ज्यादा होता है यदि गन्ने को कम समय वाली फसलों के साथ अंतरफसली किया जाए तो इससे नदीनों को कम किया जा सकता है और ज्यादा लाभ भी मिल सकता है गन्ने के अंकुरन के बाद गन्ने की कतारों में 10-12 सैं.मी. मोटी तह बिछा दी जाती है यह सूर्य की रोशनी को सोखता है जिससे नदीन कम होते हैं यह मिट्टी में नमी को भी बचाता है 3) रासायनिक तरीके: नदीनों की रोकथाम के लिए, सिमाज़ीन या एट्राज़ीन 600-800 ग्राम या मैट्रीब्यूज़िन 800 ग्राम या ड्यूरॉन 1-1.2 किलोग्राम प्रति एकड़ में बिजाई के तुरंत बाद प्रयोग करना चाहिए इसके इलावा चौड़े पत्ते वाले नदीनों की रोकथाम के लिए 2, 4-डी@ 300-400 ग्राम का प्रयोग प्रति एकड़ के हिसाब से करें नाइट्रोजन 62 किलो, फासफोरस 32 किलो और पोटाश 42 किलो प्रति एकड़ में डालें बिजाई से पहले नाइट्रोजन की 1/3 मात्रा और फासफोरस और पोटाश की पूरी मात्रा डालें बाकी बची नाइट्रोजन की दो मात्रा को टॉप ड्रेसिंग के तौर पर डालें नाइट्रोजन की पहली मात्रा को बीज वाली आंख के अंकुरण के समय और दूसरी मात्रा को बीज अंकुरण के 45 दिन बाद डालें 3 वर्षों के बाद गन्ने की गुलियों में 40-50 क्विंटल गाय का गोबर प्रति एकड़ में डालें पतझड़ के मौसम में 90-100 दिनों में नाइट्रोजन को टॉप ड्रेसिंग के तौर पर डालें और बसंत के मौसम में 150-160 दिन बाद डालनी चाहिए सिंचाई की संख्या मिट्टी की किस्म और पानी की उपलब्धता पर निर्भर करती है गर्मी के महीने में गर्म हवाओं और सूखे में वृद्धि होने के कारण फसल को पानी की जरूरत पड़ती है पहली सिंचाई फसल के 20-25 % अंकुरित होने पर करें मानसून में गन्ने को पानी और बारिश के आधार पर लगाएं कम वर्षा में सिंचाई 10 दिनों के अंतराल पर करें इसके बाद सिंचाई के अंतराल को बढ़ाकर 20-25 दिनों के अंतराल पर सिंचाई करें जमीन में नमी संभालने के लिए गन्ने की पंक्तियों में मलचिंग का प्रयोग करें अप्रैल जून के महीने में पानी की कमी ना होने दें इससे पैदावार कम होगी इसके इलावा बारिश के दिनों में पानी ना खड़ा होने दें जोताई का समय, वृद्धि का समय और अधिक विकास का समय सिंचाई के लिए बहुत नाज़ुक होता है मिट्टी को मेंड़ पर चढ़ाना: कसी की मदद से खालियों में और पौधे के किनारों पर मिट्टी चढ़ाई जाती है यह मिट्टी में अच्छी तरह से तैयार की गई खाद को अच्छी तरह से मिश्रित होने में मदद करती है पौधे को सहारा देने और उसे गिरने से बचाने में भी मदद करती है ज्यादा पैदावार और चीनी प्राप्त करने के लिए गन्ने की सही समय पर कटाई जरूरी है समय से पहले या बाद में कटाई करने से पैदावार पर प्रभाव पड़ता है किसान शूगर रीफरैक्टोमीटर का प्रयोग करके कटाई का समय पता लगा सकते हैं गन्ने की कटाई द्राती की सहायता से की जाती है गन्ना धरती से ऊपर थोड़ा हिस्सा छोड़कर काटा जाता है क्योंकि गन्ने में चीनी की मात्रा ज्यादा होती है कटाई के बाद गन्ना फैक्टरी में लेकर जाना जरूरी होता है धन्यवाद
Posted by Shivam Pratap Lodhi
Uttar Pradesh
31-10-2019 06:54 AM
Shivam ji, kripya ap yeh bataye ki apne kin khaadon ka kis matran mein istemaal kiya hai, taki apko iske bare mein puri jakari di ja sake, dhanywad

Posted by TARUN THAKUR
Himachal Pradesh
31-10-2019 05:58 AM
धान भारत की एक महत्तवपूर्ण फसल है जो कि जोताई योग्य क्षेत्र के लगभग एक चौथाई हिस्से में उगाई जाती है और भारत की लगभग आधी आबादी इसे मुख्य भोजन के रूप में प्रयोग करती है यह उत्तर प्रदेश की मुख्य फसल है और उत्तर प्रदेश के लगभग 5.4 मिलियन हेक्टेयर क्षेत्र में धान की खेती की जाती है Basmati, Kalajeera, Vishnu Parag आदि धान की कुछ उच्च ग.... (Read More)
धान भारत की एक महत्तवपूर्ण फसल है जो कि जोताई योग्य क्षेत्र के लगभग एक चौथाई हिस्से में उगाई जाती है और भारत की लगभग आधी आबादी इसे मुख्य भोजन के रूप में प्रयोग करती है यह उत्तर प्रदेश की मुख्य फसल है और उत्तर प्रदेश के लगभग 5.4 मिलियन हेक्टेयर क्षेत्र में धान की खेती की जाती है Basmati, Kalajeera, Vishnu Parag आदि धान की कुछ उच्च गुणवत्ता वाली किस्में हैं जिनकी खेती उत्तर प्रदेश में की जाती है मिट्टी इस फसल को मिट्टी की अलग अलग किस्मों, जिनमें पानी सोखने की क्षमता कम होती है और जिनकी पी एच 5.0 से 9.5 के बीच में होती है, में भी उगाया जा सकता है धान की पैदावार के लिए रेतली से लेकर गारी मिट्टी तक, और गारी से चिकनी मिट्टी जिसमें पानी को सोखने की क्षमता कम होती है इस फसल के लिए अच्छी मानी जाती है प्रसिद्ध किस्में और पैदावार Jaya: यह छोटे कद की और अधिक उपज देने वाली किस्म गर्दन तोड़ के प्रतिरोधक है यह किस्म 142 दिनों में कटाई के लिए तैयार हो जाती है इसके दाने बड़े और लंबे होते हैं इसकी औसतन पैदावार 26 क्विंटल प्रति एकड़ होती है Chakia 59: यह किस्म कम जल जमाव वाले हालातों में उगाने के लिए उपयुक्त है Govind: यह किस्म पंतनगर द्वारा विकसित की गई है यह किस्म 105 दिनों में कटाई के लिए तैयार हो जाती है Indrasan: यह तराई क्षेत्रों की प्रसिद्ध किस्म है Mahsud: यह किस्म निचले क्षेत्रों में बारानी स्थितियों में उगाने के लिए उपयुक्त है Majhera 3: यह लंबी किस्म सूखे को सहनेयोग्य है और ऊंचे क्षेत्रों में उगाने के लिए उपयुक्त है Nagina 22: यह ऊंचे क्षेत्रों में बारानी हालातों में उगाने के लिए उपयुक्त है इसके दाने छोटे और मोटे होते हैं Narendra-1 and Narendra-2: यह किस्म 105 और 115 दिनों में कटाई के लिए तैयार हो जाती है Pant Dhan 6: यह किस्म निम्न और मध्यम ऊंचाई वाले पहाड़ी क्षेत्रों में रोपाई के लिए उपयुक्त है Saket 4: यह अगेते समय की किस्म है और 115 दिनों में कटाई के लिए तैयार हो जाती है यह यू पी की सबसे प्रसिद्ध किस्म है T9: यह देरी से बोयी जाने वाली सुगंधित किस्म है इसके दाने बेलनाकार होते हैं VL Dhan 16: यह निम्न और मध्यम क्षेत्रों में रोपाई के लिए उपयुक्त किस्म है VL 206: यह लंबी किस्म निम्न और मध्यम ऊंचाई वाले क्षेत्रों में उगाने के लिए उपयुक्त है Usar 1: यह किस्म कानपुर में विकसित की गई यह क्षारीय और लवणीय मिट्टी में खेती करने के लिए उपयुक्त है बासमती किस्में Taraori Basmati: यह सिंचित क्षेत्रों में अगेती बिजाई के लिए उपयुक्त है यह किस्म 145-155 दिनों में कटाई के लिए तैयार हो जाती है इसकी औसतन पैदावार 10 क्विंटल प्रति एकड़ होती है Haryana Basmati no 1: यह अर्द्ध छोटे कद की किस्म है और सिंचित क्षेत्रों के लिए उपयुक्त है यह किस्म 140 दिनों में कटाई के लिए तैयार हो जाती है इसकी औसतन पैदावार 16 क्विंटल प्रति एकड़ होती है Pusa Basmati 1121, Pusa Basmati 1, CSR 30, Shabnam दूसरे राज्यों की किस्में Hybrid 6201: यह सिंचित क्षेत्रों में उगाने के लिए उपयुक्त किस्म है यह भुरड़ रोग के प्रतिरोधक किस्म है इसकी औसतन पैदावार 25 क्विंटल प्रति एकड़ होती है Vivek Dhan 62: यह सिंचित और पहाड़ी क्षेत्रों में उगाने के लिए उपयुक्त किस्म है इसके दाने छोटे और मोटे होते हैं यह भुरड़ रोग के प्रतिरोधक किस्म है यह गर्दन तोड़ और कम तापमान वाले क्षेत्रों को भी सहन कर सकती है इसकी औसतन पैदावार 19 क्विंटल प्रति एकड़ होती है Karnataka Rice Hybrid 2: यह सिंचित और समय से बिजाई वाले क्षेत्रों में उगाने के लिए उपयुक्त है यह पत्तों के झुलस रोग और अन्य बीमारियों को सहनेयोग्य किस्म है इसकी औसतन पैदावार 35 क्विंटल प्रति एकड़ होती है Kanak: यह दरमियाने क्षेत्रों में बिजाई के लिए उपयुक्त किस्म है इसके दाने लंबे और मोटे होते हैं यह बैक्टीरियल झुलस रोग के प्रतिरोधक किस्म है इसकी औसतन पैदावार 18 क्विंटल प्रति एकड़ होती है Ratnagiri 1 and 2: सिंचित क्षेत्रों के लिए जबकि निचले क्षेत्रों के लिए उपयुक्त है ये अर्द्ध छोटे कद की किस्म हैं इनकी औसतन पैदावार 19 क्विंटल और 21 क्विंटल प्रति एकड़ होती है ज़मीन की तैयारी शुष्क खेतों को अच्छा बनाने, नदीन रहित और सेहतमंद वृद्धि के लिए ग्लाफोसेट डालनी चाहिए गेहूं की कटाई के बाद ज़मीन पर हरी खाद के तौर पर मई के पहले सप्ताह ढैंचा (बीज दर 20 किलोग्राम प्रति एकड़), या सन (बीज दर 20 किलोग्राम प्रति एकड़) या लोबीया (बीज दर 12 किलोग्राम प्रति एकड़) की बिजाई करनी चाहिए जब फसल 6 से 8 सप्ताह की हो जाए तो इसे खेत में कद्दू करने से एक दिन खेत में ही जोत देना चाहिए इस तरह प्रति एकड़ 25 किलो नाइट्रोजन खाद की बचत होती है भूमि को समतल करने के लिए लेज़र लेवलर का प्रयोग किया जाता है इसके बाद खेत में पानी खड़ा कर दें ताकि भूमि के अंदर ऊंचे नीचे स्थानों की पहचान हो सके इस तरह पानी के रसाव के कारण पानी की होने वाले बर्बादी को कम किया जा सके बिजाई बिजाई का समय यू पी के सिंचित और निम्न बारानी क्षेत्रों में मध्य जून से शुरूआती जुलाई तक का समय उपयुक्त होता है बीज की गहराई पौधे की गहराई 2-3 सैं.मी. होनी चाहिए फासला बनाकर लगाने से पौधे ज्यादा पैदावार देते हैं फासला उपजाऊ मिट्टी में 20 सैं.मी. x 15 सैं.मी. फासले का प्रयोग करें जबकि हल्की मिट्टी में रोपाई के लिए 15 सैं.मी. x 10 सैं.मी. फासले का प्रयोग करें जल जमाव वाले क्षेत्रों में 20 x 20 सैं.मी. फासले का प्रयोग करें बिजाई का ढंग सिंचित और कम बारानी क्षेत्रों में रोपाई ढंग प्रयोग किया जाता है रोपाई के लिए 25-30 दिनों के पौधों का प्रयोग करें जल जमाव वाले क्षेत्रों में 30-35 दिनों के पौधे रोपाई के लिए प्रयोग करें ऊंचे क्षेत्रों में, शुष्क और गीली मिट्टी में रोपाई ढंग का प्रयोग करें बीज बीज की मात्रा एक एकड़ खेत में 6-8 किलो बीज प्रति एकड़ में प्रयोग करें बीज का उपचार बिजाई से पहले 10 लीटर पानी में 20 ग्राम कार्बेनडाज़िम $ 1 ग्राम स्ट्रैप्टोसाईक्लिन घोल लें और इस घोल में बीजो को 8-10 घंटे तक भिगोयें उसके बाद बीजों को छांव में सुखाएं और फिर बिजाई के लिए प्रयोग करें पनीरी की देख-रेख और रोपण वैट बैड नर्सरी : यह तकनीक उन क्षेत्रों में अपनाई जाती है जहां पर पानी ज्यादा मात्रा में पाया जाता है नर्सरी का 1/10 हिस्सा दूसरे खेत में लगाया जाता है इसकी बिजाई छींटे द्वारा की जाती है यहां पर खेत की जोताई और खेत को समतल किया जाता है बैडों पर कईं दिन तक नमी बनाए रखनी चाहिए पानी से खेत को ज्यादा ना भरें जब नर्सरी 2 सैं.मी. से वृद्धि कर जाए तब पानी को खेत में लगाते रहना चाहिए बिजाई के 15 दिन बाद 26 किलो यूरिया डालना चाहिए जब नर्सरी 25-30 सैं.मी. तक लंबी हो जाए तब उसे 15-21 दिन बाद दूसरे खेत में लगा देना चाहिए और खेत को लगातार पानी लगाते रहना चाहिए सूखे बैड वाली नर्सरी : यह तकनीक शुष्क क्षेत्रों में अपनाई जाती है जो बैड बनाया जाता है वो बिजाई वाले खेत का 1/10 हिस्से में बीज बोया जाता है बैड का आकार सीमित होना चाहिए और उसकी ऊंचाई 6-10 से.मी होनी चाहिए धान का आधा जला हुआ छिलका बैड पर बिखेर देना चाहिए इससे जड़ें मजबूत होती हैं सही समय पर सिंचाई करते रहना चाहिए और नमी बनाए रखना चाहिए ताकि नए पौधे नष्ट ना हों तत्वों की पूर्ति के लिए खाद डालना जरूरी है मॉडीफाईड मैट नर्सरी : यह नर्सरी लगाने का एक ऐसा तरीका है जिसमें कम जगह और कम बीजों की जरूरत होती है यह नर्सरी किसी भी जगह पर बनाई जा सकती हैं जहां पर समतल जगह हो और पानी की सुविधा हो इसकी पनीरी लगाने के लिए 1% खेत की जरूरत होती है 4 से.मी की सतह पर नए पौधे लगाए जाते हैं इसे बनाने के लिए 1 मीटर चौड़े और 20-30 मीटर लंबे जमीन के टुकड़े की जरूरत होती है इसके ऊपर बिछाने के लिए पॉलीथीन और केले के पत्तों की जरूरत होती है इसके इलावा एक लकड़ी का बकसा जो कि 4 से.मी गहरा होता हैं मिट्टी के मिश्रण से भरा होता है बीजों को इसके अंदर रख देना चाहिए और फिर बीजों को सूखी मिट्टी के साथ ढक देना चाहिए इसके बाद पानी का छिड़काव कर देना चाहिए लकड़ी के बक्से को नमी देते रहना चाहिए बिजाई से 11-14 दिनों के बाद पौध तैयार हो जाती है जब पौध तैयार हो जाती है तब मैट से पौध को दूसरे खेत में रोपण कर दिया जाता है फासला: पौधों का फासला 20x20 सैं.मी. या 25x25 सैं.मी. होना चाहिए खेत में पौध रोपण पनीरी लगाने का ढंग 1. कद्दू करके लगाई जाने वाली पनीरी : आमतौर पर पंक्ति में लगाए जाने वाले पौधे 20x15 सैं.मी. दूरी पर लगाए जाते हैं और देरी से लगाई जाने वाली पनीरी 15x15 सैं.मी. पर लगाई जाती है नए पौधों की गहराई 2-3 सैं.मी. होनी चाहिए 2. बैड बनाकर लगाई जाने वाली पनीरी : यह बैड भारी ज़मीनों के लिए बनाए जाते हैं पनीरी लगाने से पहले खालियों में पानी लगाना चाहिए और फिर पनीरी को खेत में लगाना चाहिए पौधे से पौधे का फासला 9 सैं.मी. होना चाहिए 3. मशीनी ढंग से लगाई जाने वाली पनीरी : मैट पनीरी के लिए मशीनों का प्रयोग किया जाता है यह मशीन 30x12 सैं.मी. के फासले पर पनीरी लगानी चाहिए खरपतवार नियंत्रण रोपाई के 2 से 3 दिन बाद नदीनों के अंकुरण से पहले बूटाक्लोर 50 ई सी 1200 मि.ली. या थायोबेनकार्ब 50 ई सी 1200 मि.ली. या पैंडीमैथालीन 30 ई सी या प्रैटीलाक्लोर 50 ई सी 600 मि.ली. प्रति एकड़ में डालें इनमें से किसी एक नदीननाशक को 60 किलो रेत में मिलाकर 4-5 सैं.मी. गहरे खड़े पानी में बुरकाव करें चौड़े पत्ते वाले नदीनों की रोकथाम के लिए मेटसलफुरॉन 20 डब्लयु पी 30 ग्राम को 150 लीटर पानी में मिलाकर नदीनों के अंकुरण के बाद रोपाई के 20-25 दिन बाद डालें स्प्रे से पहले खेत में खड़े पानी का निकास कर दें और स्प्रे के एक दिन बाद सिंचाई करें नदीनों के अंकुरण से पहले बूटाक्लोर 1 लीटर को बिजाई के 6 से 7 दिनों के बाद प्रति एकड़ में स्प्रे करें सिंचाई पनीरी लगाने के बाद खेत में दो सप्ताह तक अच्छी तरह पानी खड़ा रहने देना चाहिए जब सारा पानी सूख जाए तो उसके दो दिन बाद फिर से पानी को लगाना चाहिए खड़े पानी की गहराई 10 सै.मी. से ज्यादा नहीं होनी चाहिए खेत में से बूटी और नदीनों को निकालने से पहले खेत में से सारा पानी निकाल देना चाहिए ओर इस प्रक्रिया के पूरे होने के बाद खेत की फिर से सिंचाई करनी चाहिए पकने से 15 दिन पहले सिंचाई करनी बंद करनी चाहिए ताकि फसल को आसानी से काटा जा सके ऊंची भूमि पर सिंचाई पूरी तरह से बारिश पर निर्भर करती है बारिश की तीव्रता और नियमितता के आधार पर और पानी की उपलब्धता के आधार पर गंभीर अवस्थाओं में सिंचाई करें
Posted by abhishek kumar
Uttar Pradesh
31-10-2019 05:25 AM
Abhishek ji, kripya ap khet ki fencing karein, tajo jangli janvar ismein hamla na kar sakein, dhanywad

Posted by Prabhjot Kaur
Punjab
31-10-2019 04:23 AM
DBW-187 is the new wheat variety released in Punjab....

Posted by Roy Ashok
Bihar
31-10-2019 04:09 AM
अशोक जी , अश्वगंधा की खेती के लिए जून-जुलाई के महीने में नर्सरी तैयार करें, धन्यवाद

Posted by श्री प्रसाद साह
Bihar
31-10-2019 04:08 AM
Shri maan g yeh haldi rog hai iski roktham ke liye koside@500 gm per acre 120ltr pani mein spray kr skte ho.....

Posted by Roy Ashok
Bihar
31-10-2019 04:02 AM
अशोक जी, अश्वगंधा की खेती के लिए जून-जुलाई के महीने में नर्सरी तैयार करें, धन्यवाद
Posted by Bhagwan Sen Banor
Rajasthan
31-10-2019 12:19 AM
bhagwan ji foolon ki kheti jyadatar retli mitti me ki jati hai iske liye aap french marigold ya african marigold ki bijai kar sakte hai.dhanywad

Posted by parth Ganguly
Chattisgarh
30-10-2019 11:10 PM
bhai sahib nazdik ke pashu palan adhikari or krishi vigyan kendar se sampark karein or training lein
Posted by PRASANTA HALOI
Assam
30-10-2019 11:03 PM
PRASANTA ji kripya aap apna swal vistar se pooche taki aapko iske bare men poori jankari di ja sake.dhanywad

Posted by Dr. Anand Mishra
Uttar Pradesh
30-10-2019 10:52 PM
मोती की खेती एक बहुत ही अच्छा व्यवसाय है इस व्यवसाय को शुरू करने के लिए सबसे जरुरी है इसकी ट्रेनिंग, क्योकि इसमें बहुत सी ऐसी बारीकियें होती है जो हमें प्रेक्टिकल ट्रेनिंग में ही सीखने को मिलती है अगर आप इसकी ट्रेनिंग लेना चाहते है तो आप ग्लिटराटी पर्ल फार्मिंग ट्रेनिंग केंद्र प्रशिक्षण कार्य कर्म आयोजि.... (Read More)
मोती की खेती एक बहुत ही अच्छा व्यवसाय है इस व्यवसाय को शुरू करने के लिए सबसे जरुरी है इसकी ट्रेनिंग, क्योकि इसमें बहुत सी ऐसी बारीकियें होती है जो हमें प्रेक्टिकल ट्रेनिंग में ही सीखने को मिलती है अगर आप इसकी ट्रेनिंग लेना चाहते है तो आप ग्लिटराटी पर्ल फार्मिंग ट्रेनिंग केंद्र प्रशिक्षण कार्य कर्म आयोजित किया जा रहा है प्रशिक्षण कार्य कर्म में भाग लेने के लिए नीचे दिए गए नम्बर पर आज ही संपर्क करें और Rs 250/ से अपना रजिस्ट्रेशन करवाए अचल सिंह (फाउंडर )- 9711858258. धन्यवाद

Posted by sunil
Madhya Pradesh
30-10-2019 10:30 PM
उसे आप Nilzan liquid 1ml/3kg शरीर के भार के हिसाब से दें और Biotrim injection 2ml लगवायें, Broton liquid 10ml रोजाना दें इससे फर्क पड़ जाएगा..

Posted by Rohit
Punjab
30-10-2019 10:21 PM
BhaaG isnu rajwa hara chaara te 2kg feed rojana dyo Malap rehat karo doctor ton 1-2bottle calcium dian khoon wali naarh wich lagwa lao

Posted by Vijay Kumar
Rajasthan
30-10-2019 10:10 PM
हीं जी इसमें मछली पालन करना तो मुशिक्ल होगा जी आप इसमें मछली का सीड तो तैयार कर सकते है जी

Posted by rao rihan
Uttar Pradesh
30-10-2019 09:38 PM
Rao rihan ji Namaskar kirpya aap apna swal visthar se pushe ta jo aap ko sahi jankari di ja sake, Thankyou.
Posted by ਜਗਦੀਪ ਗਿੱਲ
Haryana
30-10-2019 09:32 PM
ਜਗਦੀਪ ਜੀ, ਨੁਕਸਾਨ ਤੋਂ ਬਚਣ ਲਈ ਇੱਕ ਏਕੜ ਪਿੱਛੇ ਪੈਂਡੀਮੈਥਾਲਿਨ 1 ਲੀਟਰ ਨੂੰ 200 ਲੀਟਰ ਪਾਣੀ ਵਿਚ ਮਿਲਾ ਕੇ ਬੀਜਣ ਤੋਂ 0-3 ਦਿਨਾਂ ਤੋਂ ਪਹਿਲਾਂ ਜਾਂ ਬਾਅਦ ਵਿੱਚ ਛਿੜਕਾਅ ਕਰਨਾ ਚਾਹੀਦਾ ਹੈ ਧੰਨਵਾਦ
Posted by ਮਨਦੀਪ ਸਿੰਘ
Punjab
30-10-2019 09:26 PM
Mandeep ji, apple ber upar fungus da hamla hoea hai, is upar tuc copper oxychloride @ 3g prati liter pani de hisaab nal spray karo, dhanwaad
Posted by manish jakhar
Rajasthan
30-10-2019 09:25 PM
Manish jakhar ji jevik gehu lene ke lia aap Navroop Singh 9649038200 ji se samparak kar sakte hai, Thankyou.

Posted by Bharat Laxkar Ji
Madhya Pradesh
30-10-2019 09:23 PM
Shri maan g Dhan mein tanna shedak ki roktham ke liye coragen,Barazide, Ampligo ki spray kr skte ho...

Posted by ankur verma
Uttar Pradesh
30-10-2019 09:13 PM
वर्मा जी आपके द्धारा भेजी गई ओडियो में आवाज समझ नहीं आ रही है कृप्या आप दोबारा ओडियो अपलोड करें ताकि आपको सही जवाब दिया जा सके

Posted by pk
Punjab
30-10-2019 09:10 PM
pk ji you can go for vegetable cultivation or you can grow flowers.thank you
Posted by ਪਰਮਜੀਤ ਸਿੰਘ
Punjab
30-10-2019 09:10 PM
ਪਰਮਜੀਤ ਜੀ, 1121 ਦਾ ਹੱਥੀਂ ਵੱਡੀ ਫ਼ਸਲ ਦਾ rate 2650 ਰੁਪਏ ਪ੍ਰਤੀ ਕੁਇੰਟਲ ਹੈ ਅਤੇ ਮਸ਼ੀਨ ਨਾਲ ਵੱਡੀ ਫ਼ਸਲ ਦਾ rate 2550 ਰੁਪਏ ਪ੍ਰਤੀ ਕੁਇੰਟਲ ਹੈ, ਧੰਨਵਾਦ
Posted by Rahul Dedha
Uttar Pradesh
30-10-2019 09:08 PM
यदि आपने पशुओं के लिए घर में 100 किलो खुराक तैयार करनी है तो 25 किलो अनाज (ज्वार, बाजरी (सर्दियां), गेहूं, जौं (गर्मियां)इनमें से कोई एक), दाल चूरी 20 किलो (मूंग चूरी, मांह चूरी, मोठ चूरी (केवल सर्दियों के लिए), मसूर चूरी, अरहर (इनमें से एक), डी ओ सी 25 किलो (धान का चूरा), फाइबर छिल्का 15 किलो (गेहूं, चौकर, चना छिल्का, मटर छिल्का, इन.... (Read More)
यदि आपने पशुओं के लिए घर में 100 किलो खुराक तैयार करनी है तो 25 किलो अनाज (ज्वार, बाजरी (सर्दियां), गेहूं, जौं (गर्मियां)इनमें से कोई एक), दाल चूरी 20 किलो (मूंग चूरी, मांह चूरी, मोठ चूरी (केवल सर्दियों के लिए), मसूर चूरी, अरहर (इनमें से एक), डी ओ सी 25 किलो (धान का चूरा), फाइबर छिल्का 15 किलो (गेहूं, चौकर, चना छिल्का, मटर छिल्का, इनमें से एक), खल 15 किला (सरसों, बिनौला या सोया (इनमें से कोई एक), मीठा सोडा 250 ग्राम, 1 किलो नमक, गुड़ 1 किलो , 1 किलो हल्दी इन्हें मिला लें यह फीड पशु के लिए बहुत लाभदायक होती है.
Posted by paramjit singh sandhu
Punjab
30-10-2019 09:08 PM
ਸਫੇਦਾ ਮਿਰਟਾਸਿਆਈ ਜਾਤੀ ਨਾਲ ਸੰਬੰਧ ਰੱਖਦਾ ਹੈ ਅਤੇ ਇਸਦੀਆਂ 300 ਜਾਤੀਆਂ ਹਨ ਇਸਦੇ ਵਧੀਆ ਵਿਕਾਸ ਲਈ ਚੰਗੇ ਜਲ ਨਿਕਾਸ ਵਾਲੀ ਮਿੱਟੀ ਦੀ ਲੋੜ ਹੁੰਦੀ ਹੈ ਇਹ ਬਹੁਤ ਤਰ੍ਹਾਂ ਦੀਆਂ ਮਿੱਟੀਆਂ ਵਿੱਚ ਉਗਾਇਆ ਜਾਂਦਾ ਹੈ, ਪਰ ਇਹ ਚੰਗੇ ਨਿਕਾਸ ਵਾਲੀ, ਜੈਵਿਕ ਤੱਤਾਂ ਨਾਲ ਭਰਪੂਰ ਦੋਮਟ ਮਿੱਟੀ ਵਿੱਚ ਵਧੀਆ ਪੈਦਾਵਾਰ ਦਿੰਦਾ ਹੈ ਪਾਣੀ ਸੋਖਣ ਵਾਲੀ, ਖਾਰੀ ਅਤੇ ਲੂਣੀ ਮਿੱਟੀ ਸਫੈਦੇ ਦੀ ਪੈਦਾਵਾਰ .... (Read More)
ਸਫੇਦਾ ਮਿਰਟਾਸਿਆਈ ਜਾਤੀ ਨਾਲ ਸੰਬੰਧ ਰੱਖਦਾ ਹੈ ਅਤੇ ਇਸਦੀਆਂ 300 ਜਾਤੀਆਂ ਹਨ ਇਸਦੇ ਵਧੀਆ ਵਿਕਾਸ ਲਈ ਚੰਗੇ ਜਲ ਨਿਕਾਸ ਵਾਲੀ ਮਿੱਟੀ ਦੀ ਲੋੜ ਹੁੰਦੀ ਹੈ ਇਹ ਬਹੁਤ ਤਰ੍ਹਾਂ ਦੀਆਂ ਮਿੱਟੀਆਂ ਵਿੱਚ ਉਗਾਇਆ ਜਾਂਦਾ ਹੈ, ਪਰ ਇਹ ਚੰਗੇ ਨਿਕਾਸ ਵਾਲੀ, ਜੈਵਿਕ ਤੱਤਾਂ ਨਾਲ ਭਰਪੂਰ ਦੋਮਟ ਮਿੱਟੀ ਵਿੱਚ ਵਧੀਆ ਪੈਦਾਵਾਰ ਦਿੰਦਾ ਹੈ ਪਾਣੀ ਸੋਖਣ ਵਾਲੀ, ਖਾਰੀ ਅਤੇ ਲੂਣੀ ਮਿੱਟੀ ਸਫੈਦੇ ਦੀ ਪੈਦਾਵਾਰ ਲਈ ਉਚਿੱਤ ਨਹੀਂ ਮੰਨੀ ਜਾਂਦੀ ਹੈ ਕਿਸਮਾਂ: Eucalyptus camaldulensis, FRI 4 and FRI 6, Eucalyptus globules, Eucalyptus citriodora.ਸਫੇਦੇ ਦੀ ਖੇਤੀ ਮੁੱਖ ਤੌਰ ਤੇ ਉਦਯੋਗਿਕ ਕੰਮਾਂ ਲਈ ਕੀਤੀ ਜਾਂਦੀ ਹੈ ਵਪਾਰਕ ਖੇਤੀ ਲਈ ਜ਼ਮੀਨ ਚੋਂ ਨਦੀਨ ਅਤੇ ਮੁੱਢ ਕੱਢ ਦਿਓ ਜ਼ਮੀਨ ਨੂੰ ਭੁਰਭੁਰਾ ਕਰਨ ਲਈ 2-3 ਵਾਰ ਵਾਹੋ ਬਿਜਾਈ ਲਈ 30x30x30 ਸੈ.ਮੀ. ਜਾਂ 45x45x45 ਸੈ.ਮੀ. ਦੇ ਟੋਏ ਪੁੱਟੋ ਇਸਦੀ ਬਿਜਾਈ ਦਾ ਉਚਿੱਤ ਸਮਾਂ ਜੂਨ ਤੋਂ ਅਕਤੂਬਰ ਹੁੰਦਾ ਹੈ ਜ਼ਿਆਦਾ ਘਣਤਾ ਨਾਲ ਬਿਜਾਈ ਲਈ 1.5x1.5 ਮੀਟਰ ਦੇ ਫਾਸਲੇ ਤੇ(ਲਗਭਗ 1690 ਪੌਦੇ ਪ੍ਰਤੀ ਏਕੜ) ਜਾਂ 2x2 ਮੀਟਰ ਫਾਸਲ ਤੇ(ਲਗਭਗ 1200 ਪੌਦੇ ਪ੍ਰਤੀ ਏਕੜ) ਬਿਜਾਈ ਕਰੋ ਸ਼ੁਰੂਆਤੀ ਸਾਲਾਂ ਵਿੱਚ ਅੰਤਰ-ਫਸਲਾਂ ਵੀ ਉਗਾਈਆਂ ਜਾ ਸਕਦੀਆਂ ਹਨ ਅੰਤਰ-ਫਸਲੀ ਸਮੇਂ ਫਾਸਲਾ 4x2 ਮੀਟਰ(ਲਗਭਗ 600 ਪੌਦੇ) ਜਾਂ 6x1.5 ਜਾਂ 8x1 ਮੀਟਰ ਦਾ ਫਾਸਲਾ ਰੱਖੋ ਹਲਦੀ ਅਤੇ ਅਦਰਕ ਵਰਗੀਆਂ ਫਸਲਾਂ ਜਾਂ ਚਿਕਿਤਸਕ ਪੌਦੇ ਅੰਤਰ-ਫਸਲਾਂ ਦੇ ਤੌਰ ਤੇ ਲਈਆਂ ਜਾ ਸਕਦੀਆਂ ਹਨ 2x2 ਮੀਟਰ ਦਾ ਫਾਸਲਾ ਜ਼ਿਆਦਾਤਰ ਵਰਤਿਆ ਜਾਂਦਾ ਹੈ ਇਸਦੀ ਬਿਜਾਈ ਮੁੱਖ ਖੇਤ ਵਿੱਚ ਪਨੀਰੀ ਲਗਾ ਕੇ ਕੀਤੀ ਜਾਂਦੀ ਹੈ 1.5x1.5 ਮੀਟਰ ਦੇ ਫਾਸਲੇ ਤੇ ਬਿਜਾਈ ਕਰਨ ਨਾਲ ਲਗਭਗ 1690 ਪੌਦੇ ਪ੍ਰਤੀ ਏਕੜ ਪ੍ਰਾਪਤ ਕੀਤੇ ਜਾ ਸਕਦੇ ਹਨ, ਜਦਕਿ 2x2 ਮੀਟਰ ਦੇ ਫਾਸਲੇ ਨਾਲ ਲਗਭਗ 1200 ਪੌਦੇ ਪ੍ਰਤੀ ਏਕੜ ਪ੍ਰਾਪਤ ਕੀਤੇ ਜਾ ਸਕਦੇ ਹਨ ਇਸ ਫਸਲ ਲਈ ਬੀਜ ਸੋਧਣ ਦੀ ਜ਼ਰੂਰਤ ਨਹੀਂ ਹੁੰਦੀ ਹੈ ਇਸਦਾ ਪ੍ਰਜਣਨ ਬੀਜਾਂ ਜਾਂ ਪੌਦੇ ਦੇ ਭਾਗਾਂ ਦੁਆਰਾ ਹੁੰਦਾ ਹੈ ਨਰਸਰੀ ਲਈ ਛਾਂ ਵਿੱਚ ਬੈੱਡ ਤਿਆਰ ਕਰੋ ਅਤੇ ਉਸ ਤੇ ਬੀਜ ਬੀਜੋ 25-35° ਸੈ. ਤਾਪਮਾਨ ਤੇ ਨਵੇਂ ਪੌਦਿਆਂ ਦਾ ਤੇਜ਼ੀ ਨਾਲ ਵਾਧਾ ਹੁੰਦਾ ਹੈ 6 ਹਫਤਿਆਂ ਵਿੱਚ ਪੌਦੇ, ਜਦੋਂ ਇਨ੍ਹਾਂ ਦਾ ਦੂਜਾ ਪੱਤਾ ਨਿਕਲਣਾ ਸ਼ੁਰੂ ਹੋ ਜਾਂਦਾ ਹੈ, ਤਾਂ ਇਹ ਪੋਲੀਥੀਨ ਦੇ ਲਿਫਾਫੇ ਵਿੱਚ ਲਗਾਉਣ ਲਈ ਤਿਆਰ ਹੋ ਜਾਂਦੇ ਹਨ ਬਿਜਾਈ ਤੋਂ 3-5 ਮਹੀਨੇ ਬਾਅਦ ਇਹ ਪੌਦੇ ਮੁੱਖ ਖੇਤ ਵਿੱਚ ਲਗਾਉਣ ਲਈ ਤਿਆਰ ਹੋ ਜਾਂਦੇ ਹਨ ਮੁੱਖ ਖੇਤ ਵਿੱਚ ਪਨੀਰੀ ਜ਼ਿਆਦਾਤਰ ਵਰਖਾ ਦੇ ਮੌਸਮ ਵਿੱਚ ਲਗਾਈ ਜਾਂਦੀ ਹੈ ਬਿਜਾਈ ਤੋਂ 3-5 ਮਹੀਨੇ ਬਾਅਦ ਨਵੇਂ ਪੌਦੇ ਮੁੱਖ ਖੇਤ ਵਿੱਚ ਲਗਾਏ ਜਾਂਦੇ ਹਨ ਨਵੇਂ ਪੌਦੇ ਟੋਇਆਂ ਵਿੱਚ ਮਾਨਸੂਨ ਦੇ ਸ਼ੁਰੂ ਵਿੱਚ ਲਗਾਏ ਜਾਂਦੇ ਹਨ ਬਿਜਾਈ ਸਮੇਂ ਨਿੰਮ ਦੇ ਤੱਤਾਂ ਦੇ ਨਾਲ-ਨਾਲ ਫਾਸਫੇਟ 50 ਗ੍ਰਾਮ ਅਤੇ ਵਰਮੀ-ਕੰਪੋਸਟ 250 ਗ੍ਰਾਮ ਪ੍ਰਤੀ ਟੋਆ ਪਾਓ ਨਿੰਮ ਵਾਲੇ ਤੱਤ ਪੌਦਿਆਂ ਨੂੰ ਸਿਉਂਕ ਤੋਂ ਬਚਾਉਂਦੇ ਹਨ ਪਹਿਲੇ ਸਾਲ NPK ਦੀ 50 ਗ੍ਰਾਮ ਮਾਤਰਾ ਪਾਓ ਦੂਜੇ ਸਾਲ 17:17:17@ 50 ਗ੍ਰਾਮ ਪ੍ਰਤੀ ਪੌਦਾ ਪਾਓ ਹੱਥੀਂ ਗੋਡੀ ਵੀ ਕਰਦੇ ਰਹੋ ਅਤੇ ਨਦੀਨਾਂ ਦੇ ਹਮਲੇ ਨੂੰ ਚੈੱਕ ਕਰਦੇ ਰਹੋ ਖੇਤ ਨੂੰ ਨਦੀਨ-ਮੁਕਤ ਰੱਖਣ ਲਈ ਸ਼ੁਰੂਆਤੀ ਸਮੇਂ ਵਿੱਚ, 2-3 ਗੋਡੀਆਂ ਕਰੋ ਮੁੱਖ ਖੇਤ ਵਿੱਚ ਪਨੀਰੀ ਲਗਾਉਣ ਤੋਂ ਤੁਰੰਤ ਬਾਅਦ ਸਿੰਚਾਈ ਕਰੋ ਮਾਨਸੂਨ ਵਿੱਚ ਸਿੰਚਾਈ ਦੀ ਲੋੜ ਨਹੀਂ ਹੈ, ਪਰ ਜੇਕਰ ਮਾਨਸੂਨ ਵਿੱਚ ਦੇਰੀ ਹੋਵੇ ਜਾਂ ਵਧੀਆ ਤਰ੍ਹਾਂ ਨਾਲ ਨਾ ਹੋਵੇ ਤਾਂ ਸੁਰੱਖਿਅਤ ਸਿੰਚਾਈ ਕਰੋ ਸਫੈਦਾ ਸੋਕੇ ਨੂੰ ਸਹਾਰਨਯੋਗ ਫਸਲ ਹੈ, ਪਰ ਉਚਿੱਤ ਪੈਦਾਵਾਰ ਲਈ ਪੂਰੇ ਵਿਕਾਸ ਵਾਲੇ ਸਮੇਂ ਵਿੱਚ ਕੁੱਲ 25 ਸਿੰਚਾਈਆਂ ਦੀ ਲੋੜ ਹੁੰਦੀ ਹੈ ਸਿੰਚਾਈ ਦੀ ਜ਼ਿਆਦਾਤਰ ਲੋੜ ਗਰਮੀਆਂ ਵਿੱਚ ਅਤੇ ਕਾਫੀ ਹੱਦ ਤੱਕ ਸਰਦੀਆਂ ਵਿੱਚ ਹੁੰਦੀ ਹੈ ਟਿਸ਼ੂ ਦੁਆਰਾ ਬਿਜਾਈ ਤੋਂ ਪੰਜ ਸਾਲਾਂ ਵਿੱਚ 50 ਤੋਂ 76 ਮਿਲੀ ਟਨ ਝਾੜ ਪ੍ਰਾਪਤ ਕੀਤਾ ਜਾਂਦਾ ਹੈ, ਜਦਕਿ ਮੂਲ ਬਿਜਾਈ ਤੋਂ 30 ਤੋਂ 50 ਮਿਲੀ ਟਨ ਝਾੜ ਪ੍ਰਾਪਤ ਹੁੰਦਾ ਹੈ ਫਸਲ ਦਾ ਝਾੜ ਖੇਤ ਪ੍ਰਬੰਧ, ਪੌਦੇ ਦੀ ਘਣਤਾ, ਜਲਵਾਯੂ ਆਦਿ ਅਨੁਸਾਰ ਘੱਟ-ਵੱਧ ਵੀ ਸਕਦਾ ਹੈ

Posted by Vikram
Rajasthan
30-10-2019 08:56 PM
विक्रम जी यह white grub की रोकथाम के लिए इस्तेमाल किया जाता है इसे जियान से कंटरोल किया जा सकता है आप एक बार यह कुदरती फॉर्मूला जरूर अपनाकर देखें 5 लीटर घोल तैयार करने के लिए जरूरी चीजे ह 200 ग्राम नीम के पत्तो का अर्क 200 ग्राम धतुरे के पत्तो का अर्क 200 ग्राम अक्क के पत्तो का अर्क 200 ग्राम करंज के पत्तो का अर्क 200 ग्राम तुम.... (Read More)
विक्रम जी यह white grub की रोकथाम के लिए इस्तेमाल किया जाता है इसे जियान से कंटरोल किया जा सकता है आप एक बार यह कुदरती फॉर्मूला जरूर अपनाकर देखें 5 लीटर घोल तैयार करने के लिए जरूरी चीजे ह 200 ग्राम नीम के पत्तो का अर्क 200 ग्राम धतुरे के पत्तो का अर्क 200 ग्राम अक्क के पत्तो का अर्क 200 ग्राम करंज के पत्तो का अर्क 200 ग्राम तुमो का अर्क 50 ग्राम लसहुन का अर्क 50 ग्राम तंबाकू के पत्तो का अर्क 4 लीटर गाय मूत्र/भैंस का मूत्र यदि देसी गाय हो तो बहुत अच्छा है तैयार करने का तरीका इन सभी चीजो को मिलाकर 12-12 घंटे के अंतराल से धीमी आग पर उबाल कर ठंडा करे 3 बार 12-12 घंटे के अंतराल से गर्म करके ठंडा करने पर यह प्रयोग करने के लिए तैयार हो जायेगा इसे छांव में जितना समय रखना चाहे रख सकते है यह खराब नहीं होता
Posted by Mahendra Bairwa
Rajasthan
30-10-2019 08:49 PM
इसे मिट्टी की कई किस्मों, रेतली दोमट से चिकनी मिट्टी में उगाया जा सकता है अच्छे निकास वाली मिट्टी जिसकी पी एच 6 से 7.5 हो, में उगाने पर यह अच्छे परिणाम देती है यह फसल जलजमाव वाले हालातों में खड़ी नहीं रह सकती अम्लीय मिट्टी के लिए, चूना डालें Arkal: यह छोटे कद की और जल्दी पकने वाली किस्म है इसकी फलियां लंबी और गहरे हरे .... (Read More)
इसे मिट्टी की कई किस्मों, रेतली दोमट से चिकनी मिट्टी में उगाया जा सकता है अच्छे निकास वाली मिट्टी जिसकी पी एच 6 से 7.5 हो, में उगाने पर यह अच्छे परिणाम देती है यह फसल जलजमाव वाले हालातों में खड़ी नहीं रह सकती अम्लीय मिट्टी के लिए, चूना डालें Arkal: यह छोटे कद की और जल्दी पकने वाली किस्म है इसकी फलियां लंबी और गहरे हरे रंग की होती हैं इसकी औसतन पैदावार 16-18 क्विंटल प्रति एकड़ होती है Bonneville: यह मध्यम समय की किस्म है इसके फलियां मीठे दानों वाली होती हैं इसकी औसतन पैदावार 36 क्विंटल प्रति एकड़ होती है Multi Freezer: यह देरी से पकने वाली किस्म है इसकी फलियां मीठी और नर्म होती हैं यह ठंड को सहनेयोग्य किस्म हैं इसकी औसतन पैदावार 25 क्विंटल प्रति एकड़ होती है Azad P-I: यह छोटे कद की किस्म है इसके दाने झुर्रीदार होते हैं इसकी औतसन पैदावार 16 क्विंटल प्रति एकड़ होती है Early E-6: यह किस्म पंजाब एग्रीकल्चर यूनिवर्सिटी द्वारा विकसित की गई है इसकी औसतन पैदावार 40 क्विंटल प्रति एकड़ होती है खरीफ ऋतु की फसल की कटाई के बाद, सीड बैड तैयार करने के लिए हल से 1 या 2 बार जोताई करें हल से जोतने के बाद 2 या 3 बार तवियों से जोताई करें जल जमाव से रोकने के लिए खेत को अच्छी तरह समतल कर लेना चाहिए बिजाई से पहले, खेत की एक बार सिंचाई करें जो कि फसल के अच्छे अंकुरन में सहायक होती है फसल को मिट्टी से पैदा होने वाले कीटों और बीमारियों से बचाने के लिए ट्राइकोडरमा विराइड 10 किलो को अच्छी तरह से गले हुए गाय के गोबर 25-30 किलो को आखिरी जोताई के समय प्रति एकड़ में डालें अच्छी उपज प्राप्त करने के लिए बिजाई अक्तूबर से नवंबर के मध्य में पूरी कर लें बिजाई में देरी होने से उपज में काफी नुकसान होता है कतारों में 30-40 सैं.मी. और पौधें में 3-5 सैं.मी. फासले का प्रयोग करें लंबी किस्मों के लिए 32-40 किलो बीज प्रति एकड़ में प्रयोग करें और छोटे कद की किस्मों के लिए 50 किलो बीज प्रति एकड़ में प्रयोग करें बिजाई के समय नाइट्रोजन 13 किलो (30 किलो यूरिया), फासफोरस 24 किलो (150 किलो सिंगल सुपर फासफेट) और पोटाश 18 किलो (म्यूरेट ऑफ पोटाश 30 किलो) की मात्रा प्रति एकड़ में प्रयोग करें फासफोरस, पोटाश की पूरी मात्रा और नाइट्रोजन की आधी मात्रा बिजाई के समय डालें बाकी बची नाइट्रोजन को बिजाई के एक महीने बाद डालें छोटे कद की किस्मों के लिए नाइट्रोजन की 8 किलो मात्रा बिजाई के समय डालें एक या दो गोडाई करना यह किस्म पर निर्भर करता है पहली गोडाई, फसल की बिजाई के 3-4 सप्ताह बाद या जब फसल 2 या 3 पत्ते निकाल लेती है और दूसरी गोडाई, फूल निकलने से पहले करें मटरों की खेती के लिए नदीन नाशकों का प्रयोग बहुत प्रभावशाली होता है फ्लूक्लोरालिन 45 ई सी 800 मि.ली. को 100-150 लीटर पानी में मिलाकर बीज बोने से पहले खेत में डालें नदीनों की रोकथाम के लिए पैंडीमैथालीन 1 लीटर प्रति एकड़ या बसालिन 1 लीटर प्रति एकड़ का प्रयोग फसल बीजने से 48 घंटों के अंदर करें

Posted by JAGTAR SINGH
Punjab
30-10-2019 08:44 PM
Jagtar Singh ji same same te kisana di mang te training chaldia hi rehdia han, is lai tusi apne najdiki KVK nal samparak kar uthe apna training form bhar ke ao, fir jida hi training di date rakhi javegi tuhanu call kar ke das dita javega, goat farming di training lai tusi Krishi Vigyan Kendra, Address: National Highway 71 Sangrur, Punjab 148001 nal samparak kar sakde ho, Thankyou.
Posted by Om Panwar Jhinjhinyali
Rajasthan
30-10-2019 08:42 PM
जीरा भारत का महत्तवपूर्ण मसाला है अच्छे निकास वाली और उच्च कार्बनिक पदार्थों वाली मिट्टी जीरे की खेती के लिए उपयुक्त होती है जीरे की खेती के लिए उस ज़मीन का चयन करें जहां 3-4 वर्ष जीरे की खेती ना की गई हो प्रसिद्ध किस्में:-RZ 19,RZ 209,Gujarat Jeera 2,RZ 223,GC 4 जीरे की खेती के लिए अच्छी तरह से जोती गई और समतल ज़मीन की आवश्यकता होती है म.... (Read More)
जीरा भारत का महत्तवपूर्ण मसाला है अच्छे निकास वाली और उच्च कार्बनिक पदार्थों वाली मिट्टी जीरे की खेती के लिए उपयुक्त होती है जीरे की खेती के लिए उस ज़मीन का चयन करें जहां 3-4 वर्ष जीरे की खेती ना की गई हो प्रसिद्ध किस्में:-RZ 19,RZ 209,Gujarat Jeera 2,RZ 223,GC 4 जीरे की खेती के लिए अच्छी तरह से जोती गई और समतल ज़मीन की आवश्यकता होती है मिट्टी के भुरभुरा होने तक खेत की जोताई करें और मिट्टी को समतल करने के लिए सुहागा फेरें जीरे की बिजाई के लिए 15 से 30 नवंबर सही समय होता है कतारों में बिजाई के लिए दो पंक्तियों में 30 सैं.मी. फासले का प्रयोग करें बीजों को 10 सैं.मी. की गहराई में बोयें बिजाई के लिए बुरकाव ढंग या कतार में बिजाई ढंग का प्रयोग करें एक एकड़ खेत में बिजाई के लिए 4-6 किलो बीज पर्याप्त होते हैं बिजाई से पहले कार्बेनडाज़िम 2 ग्राम से प्रति किलो बीजों का उपचार करें यह बीजों का फंगस संक्रमक से बचाव करेगा खादों की सही मात्रा के लिए और अतिरिक्त प्रयोग ना करने के लिए मिट्टी की जांच सबसे महत्तवपूर्ण कदम है फसल की अच्छी वृद्धि और अच्छी उपज के लिए नाइट्रोजन 15 किलो (यूरिया 32 किलो) फासफोरस 11 किलो (एस एस पी 66 किलो) और पोटाश 7 किलो (म्यूरेट ऑफ पोटाश 12 किलो) को गाय के गले हुए गोबर 2 टन के साथ प्रति एकड़ में डालें नाइट्रोजन की आधी मात्रा और फासफोरस और पोटाश की पूरी मात्रा बिजाई के समय डालें बाकी बची नाइट्रोजन की आधी मात्रा बिजाई के 35 दिनों के बाद डालें बिजाई के तुरंत बाद हल्की सिंचाई करें दूसरी सिंचाई बिजाई के 10 दिनों के बाद अंकुरण के समय करें उसके बाद तीन सिंचाइयां पर्याप्त होती हैं बाकी की सिंचाइयां बिजाई के 35वें, 60वें और 85वें दिन बाद करें एक बार फसल पक जाये तब सिंचाई ना करें बीज भरने की अवस्था में सिंचाई पत्तों के ऊपरी धब्बा रोग, चेपे और झुलस रोग के हमले को बढ़ाती है जीरे की फसल में नदीन गंभीर समस्या होते हैं नदीनों की जांच के लिए लगातार गोडाई और निराई करें पहली गोडाई बिजाई के 30-35 दिनों के बाद करें जब जीरे की फसल 5 सैं.मी. कद की हो जाये दूसरी गोडाई पहली गोडाई के 20-25 दिन बाद करें और खेत को नदीन रहित रखें रासायनिक रोकथाम के लिए बिजाई के 1-2 दिन बाद पैंडीमैथालीन 1 लीटर को 200 लीटर पानी में मिलाकर स्प्रे करें जीरे की फसल 100-115 दिनों में कटाई के लिए तैयार हो जाती है कटाई दरांती की सहायता से की जाती है फसल की कटाई के बाद पौधों को फर्श पर खिलार दें और धूप में सुखाने के लिए छोड़ दें धूप में अच्छे से सुखाने के बाद पौधों से दाने अलग कर लें

Posted by सुरेश कुमार शर्मा
Chattisgarh
30-10-2019 08:40 PM
सुरेश जी, येह तत्वों की कमी के कारन हो रहा है, कृपया आप इसमें NPK 130045 @ 10 gm प्रति लीटर पानी के हिसाब से स्प्रे करें, धन्यवाद
Posted by Amritpal Singh
Punjab
30-10-2019 08:38 PM
ਜੀ 1105 ਵਧੀਆ ਵਰਾਇਟੀ ਹੈ ਪਰ ਇਸਦਾ ਬੀਜ 50 ਤੋਂ 55 ਕਿੱਲੋ ਪ੍ਰਤੀ ਕਿੱਲਾ ਵਰਤੋ ਬਾਕੀ ਖਾਦਾ ਦੂਜੀ ਕਣਕ ਵਾਂਗ ਹੀ ਹਨ

Posted by ਰਾਜਵੀਰ ਸਿੰਘ
Punjab
30-10-2019 08:36 PM
राजवीर जी आप रूटावेटर से 45—50 किलो बीज डालें क्योंकि रूटावेटर के साथ कुछ बीज गहराई में चले जाते है और पुंगरते कम है
Posted by Jay Rao
Rajasthan
30-10-2019 08:31 PM
bhai sahib nazdik ke pashu palan adhikari se sampark karein Agar ho sake to Murrah nasal ka teeka lagwao
Posted by Jay Rao
Rajasthan
30-10-2019 08:28 PM
bhai sahib rajwa hara chaara dio har 3kg dudh lai 1kg wadhya feed pao har 3 mahine baad pet ke kirhe nikalne ki dwaee deo or to nasal pe nirbhar karta ae
Posted by Mandeep dhillon
Punjab
30-10-2019 08:22 PM
Mandeep dhillon ji 1121 hath na ktaee da rate 2650/Q ate Machine nal 2570/Q chal reha hai, 1718 da rate 2400/Q de lagbhag chal reha hai, Thankyou.

Posted by बबलू पटैल
Madhya Pradesh
30-10-2019 08:13 PM
babalu ji app us par copper oxycloride (blue copper) 500gm per acre use kro
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