
Posted by mandeep
Punjab
02-11-2019 04:54 AM
ਸਿਉਂਕ ਦੀ ਰੋਕਥਾਮ ਦੇ ਲਈ ਤੁਸੀ chlorpyriphos @1 ਲੀਟਰ ਨੂੰ 60 ਕਿਲੋ ਰੇਤ ਵਿਚ ਮਿਲਾ ਕੇ ਪ੍ਰਤੀ ਏਕੜ ਦੇ ਹਿਸਾਬ ਨਾਲ ਛਿੱਟਾ ਦਿਓ ਧੰਨਵਾਦ
Posted by suner singh
Madhya Pradesh
02-11-2019 03:53 AM
चुकंदर के लिए दोमट मिट्टी सबसे अच्छी होती है मिट्टी की 9.5 पी एच की आवश्यकता होती है इस फसल को सामान्य मिट्टी में भी उगाया जा सकता है प्रसिद्ध किस्में :- Crimson Globe, Detrict Dark Red खेत में 3-4 बार हैरो से जोताई करें बीज के अच्छे उत्पादन के लिए, ज़मीन को अच्छे से तैयार करें और उसमें उपयुक्त नमी बनाये रखें बिजाई के लिए सितंबर के आखि.... (Read More)
चुकंदर के लिए दोमट मिट्टी सबसे अच्छी होती है मिट्टी की 9.5 पी एच की आवश्यकता होती है इस फसल को सामान्य मिट्टी में भी उगाया जा सकता है प्रसिद्ध किस्में :- Crimson Globe, Detrict Dark Red खेत में 3-4 बार हैरो से जोताई करें बीज के अच्छे उत्पादन के लिए, ज़मीन को अच्छे से तैयार करें और उसमें उपयुक्त नमी बनाये रखें बिजाई के लिए सितंबर के आखिरी सप्ताह से मध्य अक्तूबर का समय उपयुक्त होता है बिजाई के लिए कतारों में 45-50 सैं.मी. फासले का प्रयोग करें बीजों को 3 सैं.मी. की गहराई में बोयें 1.5-2.5 किलो बीज प्रति एकड़ में प्रयोग करें बिजाई से पहले कार्बेनडाज़िम 50 डब्लयू पी या थीरम 2 ग्राम से प्रति किलो बीज का उपचार करें खेत की तैयारी के समय 5 टन गाय का गोबर प्रयोग करें खादों की मात्रा नाइट्रोजन 12 किलो (यूरिया 25 किलो), फासफोरस 5 किलो (एस एस पी 12 किलो) और पोटाशियम 20 किलो (म्यूरेट ऑफ पोटाश 30 किलो) प्रति एकड़ में प्रयोग करें फासफोरस और पोटाश की पूरी मात्रा और नाइट्रोजन की आधी मात्रा बिजाई से पहले आखिरी जोताई के समय मिट्टी में मिलायें इसी समय बोरैक्स पाउडर 2 किलो प्रति एकड़ में मिलायें बिजाई के दो महीने बाद नाइट्रोजन की बाकी बची मात्रा डालें चुकंदर को 8 सिंचाइयों द्वारा 80-100 सैं.मी. की आवश्यकता होती है पहली सिंचाई बिजाई के 25 दिन बाद और अगली 4 सिंचाइयां 25 दिनों के अंतराल पर करें और बाकी की सिंचाइयां 20 दिनों के अंतराल पर करें अंकुरण के 25-30 दिनों के बाद कमज़ोर नए पौधों की गोडाई करें पौधे से पौधे में 15-20 सैं.मी. का फासला जरूर होना चाहिए दूसरी गोडाई पहली गोडाई के 15-20 दिनों के बाद करें खरपतवार नियंत्रण के लिए 2-3 गोडाइयों की आवश्यकता होती है इस फसल की तुड़ाई अंत मार्च से मई महीने में की जाती है जब पत्तों की निचली सतह पीले रंग की हो जाये तब तुड़ाई की जाती है कटाई के 1-3 दिन पहले हल्की सिंचाई की आवश्यकता होती है यह चुकंदर की औसतन पैदावार 30- 40 क्विंटल प्रति एकड़ और हरे चारे की पैदावार 5-10 क्विंटल प्रति एकड़ देती है
Posted by naresh meena
Madhya Pradesh
02-11-2019 01:40 AM
श्रीमान जी इसे मिट्टी की विभिन्न किस्मों जैसे भारी चिकनी दोमट और रेतली दोमट मिट्टी में उगाया जा सकता है यह उपजाऊ मिट्टी में भी अच्छी उगती है जलजमाव, नमक वाली और क्षारीय मिट्टी में पान की खेती ना करें हल्की मिट्टी के साथ साथ अच्छी गहराई वाली भारी लाल दोमट मिट्टी भी इसकी खेती के लिए उपयुक्त होती है इसकी किस.... (Read More)
श्रीमान जी इसे मिट्टी की विभिन्न किस्मों जैसे भारी चिकनी दोमट और रेतली दोमट मिट्टी में उगाया जा सकता है यह उपजाऊ मिट्टी में भी अच्छी उगती है जलजमाव, नमक वाली और क्षारीय मिट्टी में पान की खेती ना करें हल्की मिट्टी के साथ साथ अच्छी गहराई वाली भारी लाल दोमट मिट्टी भी इसकी खेती के लिए उपयुक्त होती है इसकी किस्मे जैसे के Desi Bangl, Calcutta and Deswari की बिजाई कर सकते है मिट्टी के भुरभुरा होने तक खेत की चार से पांच बार जोताई करें फिर पास के क्षेत्रों से 5-10 सैं.मी. की दूरी पर ज़मीन तैयार करें और दोनों भागों पर उचित ढलान दें इससे अतिरिक्त पानी के निकास में मदद मिलेगी फिर 15 सैं.मी. ऊंचे और 30 सैं.मी. चौड़े आवश्यक बैड तैयार करें पान की खेती के लिए जनवरी-फरवरी और अक्तूबर से नवंबर का समय उपयुक्त होता है भारत में पान की खेती के लिए दो प्रणालियों का प्रयोग किया जाता है खुली प्रणाली जिसमें दूसरे पौधे को सहारे के लिए प्रयोग किया जाता है बंद प्रणाली जिसमें बनावटी आयताकार ढांचे होते हैं, जिन्हें बोरोजस कहा जाता है, उन्हें सहारे के लिए प्रयोग किया जाता है तने के काटे हुए भाग का रोपण किया जाता है खुली प्रणाली में एक एकड़ खेत के लिए 16000-3000 कटिंग का प्रयोग किया जाता है जबकि बंद प्रणाली में खेती के लिए 40000-48000 कटिंग का प्रति एकड़ में प्रयोग किया जाता हैं फसल को सूखे और बीमारियों से बचाव के लिए बीजों को 30 मिनट के लिए स्ट्रेप्टोसाइक्लिन 500 मि.ग्रा.+ बॉर्डीऑक्स मिश्रण 0.5 ग्राम को प्रति लीटर पानी में भिगोयें पान की पूरी फसल को नाइट्रोजन 60 किलो (यूरिया 130 किलो), फासफोरस 8 किलो (एस एस पी 40 किलो) और पोटाश 8 किलो (म्यूरेट ऑफ पोटाश 12 किलो) प्रति एकड़ में प्रति वर्ष डालें शुरूआती खुराक के तौर पर नाइट्रोजन 15 किलो (यूरिया 35 किलो) के साथ फासफोरस और पोटाश की पूरी मात्रा डालें बाकी बची नाइट्रोजन को तीन भागों में बांटे - पहले भाग को बेलों के चढ़ने के 15 दिन बाद और दूसरी और तीसरी मात्रा 40-45 दिनों के अंतराल पर डालें अच्छी वृद्धि और अच्छी उपज के लिए मिट्टी में पर्याप्त नमी मौजूद होनी चाहिए इसलिए जलवायु परिस्थितियों के आधार पर लगातार हल्की सिंचाई करें यह जल जमाव स्थिति के प्रति संवेदनशील है अतिरिक्त पानी के निकास का उचित प्रबंध करें 15-20 सैं.मी. के अंतराल पर बेल को केले के फाइबर से ढीला बांधकर सिधाई की जाती है बेल की वृद्धि के आधार पर प्रत्येक 15-20 दिनों के अंतराल पर सिंधाई की जाती है पान की फसल रोपाई के 2-3 महीनों में कटाई के लिए तैयार हो जाती है जैसे कि जब बेल 1.2-1.8 मीटर की वृद्धि कर जाये तो इसके बाद प्रत्येक 15-25 दिनों के लिए तुड़ाई कर लें तने के निचले भाग से पत्तों की तुड़ाई करें पंखुड़ियों के भाग के साथ पके हुए पत्तों को तोड़ें तुड़ाई हाथों से से की जाती है एक एकड़ खेत से प्रतिवर्ष 30-40 लाख पत्ते प्राप्त किए जाते हैं धन्यवाद
Posted by Ravi
Haryana
01-11-2019 11:10 PM
मिट्टी की जांच के आधार पर खादों का प्रयोग करें, मिट्टी की जांच की मदद से हम उचित खाद देकर मिट्टी में आवश्यक तत्वों की कमी को पूरा कर सकते हैं सिंचित क्षेत्रों में यूरिया 130 किलोग्राम, एस एस पी 150 किलोग्राम और म्यूरेट ऑफ पोटाश 20 किलोग्राम प्रति एकड़ में डालें नाइट्रोजन की आधी मात्रा और फासफोरस और पोटाश की पूरी म.... (Read More)
मिट्टी की जांच के आधार पर खादों का प्रयोग करें, मिट्टी की जांच की मदद से हम उचित खाद देकर मिट्टी में आवश्यक तत्वों की कमी को पूरा कर सकते हैं सिंचित क्षेत्रों में यूरिया 130 किलोग्राम, एस एस पी 150 किलोग्राम और म्यूरेट ऑफ पोटाश 20 किलोग्राम प्रति एकड़ में डालें नाइट्रोजन की आधी मात्रा और फासफोरस और पोटाश की पूरी मात्रा बिजाई के समय डालें नाइट्रोजन की बाकी मात्रा को पहली सिंचाई के समय डालें असिंचित क्षेत्रों में यूरिया 26 किलो और एस एस पी 40 किलो प्रति एकड़ में प्रयोग करें नाइट्रोजन, पोटाश और फासफोरस की पूरी मात्रा बिजाई के समय डालें फसल की पैदावार को बढ़ाने के लिए जिंक सलफेट 10 किलोग्राम प्रति एकड़ में डालें, जिंक की कमी को जिंक सलफेट 0.5 प्रतिशत स्प्रे द्वारा पूरा किया जा सकता है, 15 दिनों के अंतराल पर 2-3 स्प्रे करें
Posted by Gaurav yadav
Uttar Pradesh
01-11-2019 10:37 PM
bhai sahib teeke ki nasal jaan lein teeke ooper likhi jaankari lein k dudh ki samratha kitni ae

Posted by Dsvirk Shab
Punjab
01-11-2019 10:05 PM
ਸ੍ਰੀ ਮਾਨ ਜੀ HD 3226 ਨਵੀਂ ਕਿਸਮ ਜਿਸਦਾ ਔਸਤਨ ਝਾੜ 22-30 ਕੁਇੰਟਲ ਪ੍ਰਤੀ ਏਕੜ ਹੈ, ਇਸਦੀ ਬਿਜਾਈ 25 ਅਕਤੂਬਰ ਤੋਂ 30ਨਵੰਬਰ ਤੱਕ 35ਕਿਲੋ ਬੀਜ ਪਾ ਸਕਦੇ ਹੋ ,ਇਸਦਾ ਨਾੜ ਮੋਟਾ ਹੋਣ ਕਰਕੇ ਨਹੀ ਡਿਗਦੀ
Posted by khetsingh
Rajasthan
01-11-2019 10:01 PM
RZ 19: यह किस्म राजस्थान के सभी क्षेत्रों में उगाने के लिए उपयुक्त है यह 125 दिनों में कटाई के लिए तैयार हो जाती है इसका पौधा लंबा, फूल गुलाबी रंग के, और दाने बड़े होते हैं इसकी औसतन पैदावार 4.2 क्विंटल प्रति एकड़ होती है
RZ 209: यह किस्म राजस्थान के सभी क्षेत्रों में उगाने के लिए उपयुक्त है इसके दाने स्वाह जैसे भूरे रं.... (Read More)
RZ 19: यह किस्म राजस्थान के सभी क्षेत्रों में उगाने के लिए उपयुक्त है यह 125 दिनों में कटाई के लिए तैयार हो जाती है इसका पौधा लंबा, फूल गुलाबी रंग के, और दाने बड़े होते हैं इसकी औसतन पैदावार 4.2 क्विंटल प्रति एकड़ होती है
RZ 209: यह किस्म राजस्थान के सभी क्षेत्रों में उगाने के लिए उपयुक्त है इसके दाने स्वाह जैसे भूरे रंग के होते हैं यह किस्म 120-125 दिनों में कटाई के लिए तैयार हो जाती है इसकी औसतन पैदावार 2.4-2.8 क्विंटल प्रति एकड़ होती है यह किस्म पत्तों के ऊपरी धब्बा रोगों की प्रतिरोधक है
Gujarat Jeera 2: यह किस्म गुजरात कृषि विश्वविद्यालय द्वारा विकसित की गई है इसकी औसतन पैदावार 2.8 क्विंटल प्रति एकड़ होती है यह किस्म 100 दिनों में कटाई के लिए तैयार हो जाती है
RZ 223: यह मध्यम समय की किस्म है यह किस्म 120-130 दिनों में कटाई के लिए तैयार हो जाती है इसकी औसतन पैदावार 2.4 क्विंटल प्रति एकड़ होती है
GC 4: यह किस्म राजस्थान के सभी क्षेत्रों में उगाने के लिए उपयुक्त है इसके दाने स्वाह जैसे भूरे रंग के होते हैं यह किस्म 120 दिनों में कटाई के लिए तैयार हो जाती है इसकी औसतन पैदावार 2.4-2.8 क्विंटल प्रति एकड़ होती है
Posted by khetsingh
Rajasthan
01-11-2019 10:00 PM
Khet ji aap mitti ki janch Krishi Vigyan Kendra,Village Danta,Post - Marudi,
Barmer se karva sakte hai.

Posted by Dsvirk Shab
Punjab
01-11-2019 09:54 PM
ਸ੍ਰੀ ਮਾਨ ਜੀ HD 3226 ਨਵੀਂ ਕਿਸਮ ਜਿਸਦਾ ਔਸਤਨ ਝਾੜ 22-30 ਕੁਇੰਟਲ ਪ੍ਰਤੀ ਏਕੜ ਹੈ, ਇਸਦੀ ਬਿਜਾਈ 25 ਅਕਤੂਬਰ ਤੋਂ 30ਨਵੰਬਰ ਤੱਕ 35ਕਿਲੋ ਬੀਜ ਪਾ ਸਕਦੇ ਹੋ ,ਇਸਦਾ ਨਾੜ ਮੋਟਾ ਹੋਣ ਕਰਕੇ ਨਹੀ ਡਿਗਦੀ,ਇਸਦਾ ਔਸਤਨ ਕੱਦ 105 ਸੈਂਟੀਮੀਟਰ ਹੁੰਦਾ ਹੈ

Posted by Dsvirk Shab
Punjab
01-11-2019 09:52 PM
virk ji kirpa karke apna swal vistar nal pucho ta jo tuhanu is bare poori jankari diti ja sake.dhanwad

Posted by purushottam meena
Rajasthan
01-11-2019 09:44 PM
purushottam ji aap iske uper copper oxychloride@3 gram ko prati litre pani ke hisab se spray karen.dhanywad
Posted by Rg Pawar
Madhya Pradesh
01-11-2019 09:43 PM
pawar ji kripya btaye ke dhan ke men kya dikkat aa rahi hai taki aapko iske bare men poori jankari di ja sake.dhanywad

Posted by Rand Johnson
Punjab
01-11-2019 09:39 PM
725 di bijai october de chauthe hafte to november de chauthe hafte tak isdi bijai karo.dhanwad

Posted by navin sharma
Uttar Pradesh
01-11-2019 09:31 PM
बसंत के मौसम के लिए नर्सरी नवंबर-दिसंबर में तैयार करें जबकि सर्दियों में KE मौसम में सितंबर-अक्तूबर महीने में नर्सरी में बीजों को बोयें

Posted by imran khan
Uttar Pradesh
01-11-2019 09:29 PM
UP-(368): अधिक पैदावार वाली इस किस्म को पंतनगर द्वारा विकसित किया गया है यह फंगस और पीलेपन की और बीमारियों से रहित होती है इसकी पैदावार 13 -14 क्विंटल प्रति एकड़ के हिसाब से है धन्यवाद

Posted by tinku
Punjab
01-11-2019 09:28 PM
टींकू जी ये नस्लें पंजाब नहीं रखी जाती हैं ये आपको बरेली से मिल सकती है ICAR-Indian Veterinary Research Institute Izatnagar - Bareilly (UP) -243122 की तरफ से तैयार की गई है ये आपको यूनिर्वसिटी से मिल जाएगी बाकि आप dr. ram suman 94180 70583 से संपर्क कर सकते है

Posted by vishesh kumar
Uttar Pradesh
01-11-2019 09:23 PM
रजनीगंधा की खेती के लिए, ज़मीन को अच्छी तरह से तैयार करें मिट्टी को भुरभुरा करने के लिए, 2-3 बार जोताई करना आवश्यक है रोपण के समय, 10-12 टन रूडी की खाद मिट्टी में मिलाएं प्रति एकड़ के लिए 2100-2500 गांठों का प्रयोग करें बिजाई के लिए मार्च-अप्रैल महीने का समय उचित है रोपण के लिए 45 सैं.मी. फासले पर 90 सैं.मी. चौड़े नर्सरी बैड तैया.... (Read More)
रजनीगंधा की खेती के लिए, ज़मीन को अच्छी तरह से तैयार करें मिट्टी को भुरभुरा करने के लिए, 2-3 बार जोताई करना आवश्यक है रोपण के समय, 10-12 टन रूडी की खाद मिट्टी में मिलाएं प्रति एकड़ के लिए 2100-2500 गांठों का प्रयोग करें बिजाई के लिए मार्च-अप्रैल महीने का समय उचित है रोपण के लिए 45 सैं.मी. फासले पर 90 सैं.मी. चौड़े नर्सरी बैड तैयार करें गांठों को 5-7 सैं.मी. गहराई पर मिट्टी में बोयें बिजाई प्रजनन विधी द्वारा की जाती है इस फसल का प्रजनन गांठों द्वारा किया जाता है 1.5-2.0 सैं.मी. व्यास और 30 ग्राम से ज्यादा भार वाली गांठे प्रजनन के लिए प्रयोग की जाती है एक तुड़ाई के लिए, एक साल पुरानी फसल की 1 या 2 या 3 गांठे या गांठों के एक गुच्छे को एक जगह पर बोयें और एक साल से ज्यादा पुरानी फसल की 1 या 2 गांठे एक जगह पर बोयें दोहरी तुड़ाई के लिए एक साल पुरानी फसल की एक गांठ ही बोयें खेत को नदीन मुक्त करने के लिए, 3-4 बार हाथों से गोड़ाई करें नए पौधे लगाने के तुरंत बाद और रोपण के 45 दिनों बाद, ऐट्राजिन 0.6 किलोग्राम प्रति एकड़ या ऑक्सीफ्लोरफेन 0.2 किलोग्राम प्रति एकड़ या पेंडीमैथलीन 800 मि.ली. प्रति एकड़ को 200 लीटर पानी में मिलाकर नदीनों के उगने से पहले पूरे खेत में स्प्रे करें

Posted by imran khan
Uttar Pradesh
01-11-2019 09:18 PM
Imran ji, kripya ap apne najdeeki doctor se sampark karein, or app par ap faslon or pashuon se sambandhit hi sawal karein, dhanywad
Posted by लक्ष्मीनारायण नागर
Madhya Pradesh
01-11-2019 09:17 PM
लक्ष्मीनारायण जी कृपया आप इसकी फोटो भेजे ताकि आपको इसके बारे में पूरी जानकारी दी जा सके धन्यवाद

Posted by Shivendra pratap singh
Madhya Pradesh
01-11-2019 08:57 PM

Posted by Ankush Parmar
Himachal Pradesh
01-11-2019 08:57 PM
ankush ji aap 1121 ki bijai kar sakte hai.dhanywad

Posted by आशुतोष
Madhya Pradesh
01-11-2019 08:50 PM
आशुतोष जी आप मक्का की किस्मे जैसे Madhuri , Priya, P3522, P1864, KMH-25K45 की बिजाई कर सकते है धन्यवाद
Posted by Shantilal Aanjna
Madhya Pradesh
01-11-2019 08:44 PM
खेत की तैयारी के समय रूड़ी की खाद या गाय का गला हुआ गोबर 20 टन प्रति एकड़ में डालें नाइट्रोजन 40 किलो (यूरिया 90 किलो), फासफोरस 20 किलो (एस एस पी 125 किलो) और पोटाश 20 किलो (म्यूरेट ऑफ पोटाश 35 किलो) प्रति एकड़ में डालें फासफोरस और पोटाश की पूरी मात्रा और नाइट्रोजन की आधी मात्रा लहसुन की बिजाई के 2 दिन पहले डालें बाकी बची नाइट्.... (Read More)
खेत की तैयारी के समय रूड़ी की खाद या गाय का गला हुआ गोबर 20 टन प्रति एकड़ में डालें नाइट्रोजन 40 किलो (यूरिया 90 किलो), फासफोरस 20 किलो (एस एस पी 125 किलो) और पोटाश 20 किलो (म्यूरेट ऑफ पोटाश 35 किलो) प्रति एकड़ में डालें फासफोरस और पोटाश की पूरी मात्रा और नाइट्रोजन की आधी मात्रा लहसुन की बिजाई के 2 दिन पहले डालें बाकी बची नाइट्रोजन को बिजाई के एक महीना बाद डालें फसल को खेत में लगाने के 10-15 दिन बाद 19:19:19 और सूक्ष्म तत्व 2.5-3 ग्राम प्रति लीटर पानी में मिलाकर स्प्रे करें

Posted by नीरेश कुमार
Uttar Pradesh
01-11-2019 08:43 PM
नीरेश जी कृपया आप अपना सवाल विस्तार से पूछे ताकि आपको इसके बारे में पूरी जानकारी दी जा सके धन्यवाद

Posted by Ranjodh Singh aulakh
Punjab
01-11-2019 08:43 PM
ranjodh ji eh dono hybrid kisman han ehna da jhaad 200-250 tonn prati acre de hisab nal nikal aunda hai ate eh 6-8 var ktayi kiti ja sakdi hai.dhanwad

Posted by dilkhush
Rajasthan
01-11-2019 08:39 PM
Dilkush ji moongfali ka bhav 4100-5500 rupaye prati quinatl ke hisab se chal raha hai.dhanywad
Posted by Harmeet singh
Punjab
01-11-2019 08:39 PM
ਬੂਈਂ ਬਰਸੀਮ ਦਾ ਖਤਰਨਾਕ ਨਦੀਨ ਹੈ ਇਸਦੀ ਰੋਕਥਾਮ ਲਈ ਫਲੋਕਲਾਰਾਲਿਨ 400 ਮਿ.ਲੀ. ਨੂੰ 200 ਲੀ. ਪਾਣੀ ਪ੍ਰਤੀ ਏਕੜ ਵਿੱਚ ਮਿਲਾ ਕੇ ਛਿੜਕਾਅ ਕਰੋ ਬਰਸੀਮ ਨੂੰ ਜਲਦੀ ਤਿਆਰ ਕਰਨ ਦੇ ਲਈ ਤੁਸੀ hoshi @400 ml ਨੂੰ ਪ੍ਰਤੀ ਏਕੜ ਦੇ ਹਿਸਾਬ ਨਾਲ ਸਪਰੇ ਕਰੋ ਧੰਨਵਾਦ

Posted by Gurvail singh
Haryana
01-11-2019 08:28 PM
ਸ੍ਰੀ ਮਾਨ ਜੀ WH1124 ਕਿਸਮ ਦਾ ਔਸਤਨ ਝਾੜ 20.8 ਕੁਇੰਟਲ ਪ੍ਰਤੀ ਏਕੜ ਨਿਕਲ ਹੈ
Posted by harsh kumar
Uttar Pradesh
01-11-2019 08:20 PM
Harash Kumar ji sharbati Dhan ka mandi Bhaav 1600 - 1850/Q chal reha hai, Thankyou.

Posted by choudhey Mahesh
Rajasthan
01-11-2019 08:14 PM
राजस्थान में यह समय इसकी खेती करने के लिए उपयुक्त है मिर्च रेतली से भारी चिकनी हर तरह की मिट्टी में उगाई जा सकती है अच्छे विकास के लिए हल्की उपजाऊ और पानी के अच्छे निकास वाली ज़मीन जिस में नमी हो, इसके लिए अनुकूल होती है हल्की ज़मीनें भारी ज़मीनों के मुकाबले अच्छी क्वालिटी की पैदावार देती हैं मिर्च के अच्छे .... (Read More)
राजस्थान में यह समय इसकी खेती करने के लिए उपयुक्त है मिर्च रेतली से भारी चिकनी हर तरह की मिट्टी में उगाई जा सकती है अच्छे विकास के लिए हल्की उपजाऊ और पानी के अच्छे निकास वाली ज़मीन जिस में नमी हो, इसके लिए अनुकूल होती है हल्की ज़मीनें भारी ज़मीनों के मुकाबले अच्छी क्वालिटी की पैदावार देती हैं मिर्च के अच्छे विकास के लिए ज़मीन की पी एच 6-7 अनुकूल है निम्नलिखित किस्में राजस्थान में लगाने के लिए उपयुक्त हैं: Pusa Jwala: इस किस्म के पौधे छोटे कद के, झाड़ियों वाले और हल्के हरे रंग के होते हैं इसके फल 9-10 सैं.मी. लंबे, हल्के हरे और बहुत तीखी होती है यह किस्म थ्रिप और मकौड़ा जुंओं की प्रतिरोधक है इसकी औसतन पैदावार 85 क्विंटल (हरी मिर्चें) और 18 क्विंटल (सूखी मिर्चें) प्रति एकड़ होती है
Pant C-1: यह किस्म अन्य किस्मों से आसानी से अलग है क्योंकि इसके फल की फलियां सीधी होती हैं इसके फल अत्याधिक तीखे, आकार में छोटे, आधार चौड़ा और सिरा पतला होता है यह किस्म चितकबरा और पत्ता मरोड़ रोग की कुछ हद तक प्रतिरोधक है इस किस्म की हरी फलियों की औसतन पैदावार 110 क्विंटल प्रति एकड़ होती है सूखी फलियों की पैदावार 20 क्विंटल प्रति एकड़ होती है
Pusa Sadabahar: इसके पौधे सीधे, सदाबहार (2-3 वर्ष), 60-80 सैं.मी. कद के होते हैं इसके फल 6-8 सैं.मी. लंबे होते हैं फल गुच्छों में लगते हैं और प्रत्येक गुच्छे में 6-14 फल होते हैं पकने के समय फल गहरे लाल रंग के और कड़वे होते हैं यह किस्म CMV, TMV और पत्ता मरोड़ की रोधक है इसकी पहली तुड़ाई पनीरी लगाने के 75-80 दिन बाद की जा सकती है इसकी औसतन पैदावार 95 क्विंटल (हरी मिर्चें) और 20 क्विंटल (सूखी मिर्चें) प्रति एकड़ है
NP-46A: यह उच्च उपज वाली किस्म है इसके मध्यम आकार के फल होते हैं इसकी औसतन पैदावार 40 क्विंटल प्रति एकड़ होती है
G 5 : मिर्च मोटी, चमकदार और गहरे लाल रंग की होती है इसकी औसतन पैदावार 20 क्विंटल प्रति एकड़ होती है
G 3 : यह बारानी और सिंचित हालातों में उगाने के लिए उपयुक्त किस्म है इस किस्म की मिर्च अत्याधिक तीखी होती है इसकी औसतन पैदावार 16 क्विंटल प्रति एकड़ होती है खेत को तैयार करने के लिए 2-3 बार जोताई करें और प्रत्येक जोताई के बाद डलियों को तोड़ें बिजाई से 15-20 दिन पहले रूड़ी की खाद 150-200 क्विंटल प्रति एकड़ डालकर मिट्टी में अच्छी तरह मिला दें टमाटर और मिर्च की खेती एक ही या नज़दीक वाले खेत में ना करें, क्योंकि दोनों की बीमारियां एक जैसी होती हैं और इस कारण एंथ्राक्नोस और बैक्टीरिया वाली बीमारियों के बढ़ने का खतरा बढ़ जाता है खरीफ की फसल के लिए कतार से कतार में 45 सैं.मी. और पौधे से पौधे में 30-45 सैं.मी. फासले का प्रयोग करें, जबकि गर्मियों के मौसम की फसल के लिए कतार से कतार में 60 सैं.मी. और पौधे से पौधे में 30-45 सैं.मी. फासले का प्रयोग करें नर्सरी में बीजों को 3-5 सैं.मी. की गहराई में बोयें और फिर मिट्टी से ढक दें एक एकड़ खेत में बिजाई के लिए 400-600 ग्राम बीजों का प्रयोग करें नाइट्रोजन 30 किलो (65 किलो यूरिया), फासफोरस 20 किलो (सिंगल सुपर फासफेट 125 किलो) और पोटाश 20 किलो (म्यूरेट ऑफ पोटाश 35 किलो) प्रति एकड़ डालें नाइट्रोजन की आधी मात्रा, फासफोरस और पोटाश की पूरी मात्रा पनीरी खेत में लगाने के समय डालें रोपाई के बाद बाकी बची नाइट्रोजन दो बराबर हिस्सों में 30वें और 50वें दिन डालें 45 दिनों तक गोडाई करें, कही की मदद से मिट्टी चढ़ाएं और खेत को नदीन मुक्त रखें यदि नदीनों की रोकथाम ना की जाये तो यह 70-90 प्रतिशत पैदावार कम कर देते हैं रोपाई से पहले मुख्य खेत में पैंडीमैथालीन 1 लीटर प्रति एकड़ में डालें यदि नदीनों की संख्या ज्यादा हो तो उनके अंकुरण के बाद सैंकोर 800 मि.ली की स्प्रे प्रति एकड़ में करें नदीनों की रोकथाम के साथ मिट्टी में नमी को बनाए रखने के लिए मलचिंग एक प्रभावी तरीका है मिट्टी में नमी के आधार पर सर्दियों में 6-7 दिनों के अंतराल पर और गर्मियों में 4-5 दिनों के अंतराल पर सिंचाई करें फूल निकलने की अवस्था सिंचाई के लिए गंभीर होती है इस अवस्था पर पानी की कमी से फल गिरते हैं जिससे फलों के उत्पादन में कमी होती है विभिन्न खोजों में यह पाया गया है कि प्रत्येक पखवाड़े में आधा इंच सिंचाई से जड़ों में नमी ज्यादा होती है जिससे वे अधिक उपज देती हैं मिर्चों की तुड़ाई हरा रंग आने पर करें या फिर पकने के लिए पौधे पर ही रहने दें मिर्चों का पकने के बाद वाला रंग किस्म पर निर्भर करता है अधिक तुड़ाइयां लेने के लिए यूरिया 10 ग्राम प्रति लीटर और घुलनशील K @ 10 ग्राम प्रति लीटर पानी (1 प्रतिशत प्रत्येक का घोल) की स्प्रे 15 दिनों के फासले पर कटाई के समय करें पैकिंग के लिए मिर्चें पक्की और लाल रंग की होने पर तोड़ें सुखाने के लिए प्रयोग की जाने वाली मिर्चों की पूरी तरह पकने के बाद ही तुड़ाई करें
Posted by Raj kumar Patel
Uttar Pradesh
01-11-2019 08:11 PM
यह फसल रेतली दोमट से चिकनी किसी भी तरह की मिट्टी में उगाई जा सकती हैं पिछेती बिजाई की किस्मों के लिए चिकनी दोमट मिट्टी को पहल दी जाती है और जल्दी पकने वाली किस्मों के लिए रेतली दोमट मिटटी की सिफारिश की जाती है मिट्टी का pH 6-7 होना चाहिए मिट्टी का pH कम होने पर उसमें चूना डालें निम्नलिखित किस्में उत्तर प्रदेश म.... (Read More)
यह फसल रेतली दोमट से चिकनी किसी भी तरह की मिट्टी में उगाई जा सकती हैं पिछेती बिजाई की किस्मों के लिए चिकनी दोमट मिट्टी को पहल दी जाती है और जल्दी पकने वाली किस्मों के लिए रेतली दोमट मिटटी की सिफारिश की जाती है मिट्टी का pH 6-7 होना चाहिए मिट्टी का pH कम होने पर उसमें चूना डालें निम्नलिखित किस्में उत्तर प्रदेश में लगाने के लिए उपयुक्त हैं: Early Kunwari: यह जल्दी पकने वाली किस्म है इसके फल क्रीम रंग के और आकार में छोटे होते हैं यह किस्म 60-70 दिनों में तैयार हो जाती है और इसकी औसतन पैदावार 25-37.5 क्विंटल प्रति एकड़ है Improved Japani: इस किस्म के फूल सख्त और सफेद रंग के होते है, इसके बीज मध्य-जुलाई महीने में बोयें जाते हैं और मध्य-अगस्त महीने में रोपण किया जाता है इसकी औसतन पैदावार 83-94 क्विंटल प्रति एकड़ होती है Pusa Snowball K-1: यह किस्म सनोबाल 1 से देरी में पकने वाली किस्म है इसके बाहरी पत्ते ऊपर की तरफ सीधे और बीच वाला फूल घना और फूल बर्फ के जैसे सफेद होते हैं यह 110-120 दिनों में तैयार हो जाती है इसकी औसतन पैदावार 72-87.5 क्विंटल प्रति एकड़ होती है

Posted by HARKAMAL RAHI
Punjab
01-11-2019 08:10 PM
Harkamal Rahi ji Animal Silage len lai tusi Prince 9646969383 Punjab Silage Private Limited nal samparak kar sakde ho, Thankyou.
Posted by Abhishek
Rajasthan
01-11-2019 08:08 PM
Abhishek ji aap drip irrigation lagvane ke liye Parbhat Shirvastav :-9414055432 ji se sampark kar sakte hai.dhanywad

Posted by Anand Pal
Uttar Pradesh
01-11-2019 08:08 PM
Anand Pal ji kirpya aap apna swal visthar se pushe ke aap kis fasal ke bare me jankari lena chahte hai ta jo aap ko us fasal ki puri jankari di ja sake, Thankyou.

Posted by Anand Pal
Uttar Pradesh
01-11-2019 08:04 PM
Anand ji kripya aap apna swal vistar se pooche taki aapko iske bare men poori jankari di ja sake.dhanywad

Posted by MUNISH
Punjab
01-11-2019 08:04 PM
isde ptte jan beej fungus de kaarn is trh ho rhe hn. isdi roktham lyi copper oxychloride ja Carbendazim@3gm prti litre de hisaab nal spray kro.
Posted by Abhishek
Rajasthan
01-11-2019 08:03 PM
bhai sahib rajwa hara chaara te har 3kg dudh lai 1kg wadhya feed pao 1kg gahun ka dalia 500g gur mein rinh ke swer te itna hi shaam nu khuao
Posted by Abhishek
Rajasthan
01-11-2019 08:01 PM
iski growth ke lie Vermicompost@3-4kilo prti boote ke hisaab se istemaal kro.

Posted by umacharan
Uttar Pradesh
01-11-2019 08:00 PM
umacharan ji yeh aapko Pusa, New Delhi de hi milega.iski keemat 5 rupaye prati capsule hai.dhanywad

Posted by Kp Meena Plasawa
Rajasthan
01-11-2019 08:00 PM
बिजाई के लिए 25 किलो बीज प्रति बीघा में प्रयोग करें

Posted by Jaspreet
Punjab
01-11-2019 07:59 PM
ਤੁਸੀ ਮੱਛੀ ਪਾਲਣ ਦਾ ਕੰਮ ਸ਼ੁਰੂ ਕਰਨਾ ਹੈ ਤਾ ਸਭ ਤੋਂ ਜਰੂਰੀ ਹੈ ਟ੍ਰੇਨਿੰਗ ਇਹ ਟ੍ਰੇਨਿੰਗ ਤੁਹਾਨੂੰ FFDA(fish farmer development aggency) ਜੋ ਕਿ ਲੱਗਭੱਗ ਹਰ ਜ਼ਿਲੇ ਵਿੱਚ ਹੁੰਦੀ ਹੈ ਜਾਂ ਉੱਥੇ ਜਾ ਕੇ ਐਪਲੀਕੇਸ਼ਨ ਫਾਰਮ ਭਰੋ ਉਸ ਤੋਂ ਬਾਅਦ ਤੁਹਾਨੂੰ 5 ਦਿਨ ਦੀ ਮੁਫਤ ਟ੍ਰੇਨਿੰਗ ਦਿੱਤੀ ਜਾਵੇਗੀ ਟ੍ਰੇਨਿੰਗ ਲਈ ਦਸਵੀ ਪਾਸ ਹੋਣਾ ਜਰੂਰੀ ਹੈ ਤੇ ਇਹ ਡਿਪਾਰਮੈ੍ਟ ਜਿੱਥੇ ਖੇਤੀਬਾੜੀ ਅਫਸਰ ਬੈਠਦਾ ਹੈ ਜਿਵ.... (Read More)
ਤੁਸੀ ਮੱਛੀ ਪਾਲਣ ਦਾ ਕੰਮ ਸ਼ੁਰੂ ਕਰਨਾ ਹੈ ਤਾ ਸਭ ਤੋਂ ਜਰੂਰੀ ਹੈ ਟ੍ਰੇਨਿੰਗ ਇਹ ਟ੍ਰੇਨਿੰਗ ਤੁਹਾਨੂੰ FFDA(fish farmer development aggency) ਜੋ ਕਿ ਲੱਗਭੱਗ ਹਰ ਜ਼ਿਲੇ ਵਿੱਚ ਹੁੰਦੀ ਹੈ ਜਾਂ ਉੱਥੇ ਜਾ ਕੇ ਐਪਲੀਕੇਸ਼ਨ ਫਾਰਮ ਭਰੋ ਉਸ ਤੋਂ ਬਾਅਦ ਤੁਹਾਨੂੰ 5 ਦਿਨ ਦੀ ਮੁਫਤ ਟ੍ਰੇਨਿੰਗ ਦਿੱਤੀ ਜਾਵੇਗੀ ਟ੍ਰੇਨਿੰਗ ਲਈ ਦਸਵੀ ਪਾਸ ਹੋਣਾ ਜਰੂਰੀ ਹੈ ਤੇ ਇਹ ਡਿਪਾਰਮੈ੍ਟ ਜਿੱਥੇ ਖੇਤੀਬਾੜੀ ਅਫਸਰ ਬੈਠਦਾ ਹੈ ਜਿਵੇ ਕਚਿਹਰੀਆਂ , ਡੀ ਸੀ ਆਫਿਸ ਕਹਿੰ ਦਿੰਦੇ ਹਾਂ ਉਸ ਵਿੱਚ ਬਣਿਆ ਹੁੰਦਾ ਹੈ ਮੱਛੀ ਪਾਲਣ ਲਈ ਸੇਮ ਵਾਲੇ ਇਲਾਕੇ ਵਿੱਚ 90% ਸਬਸਿਡੀ ਹੁੰਦੀ ਹੈ ਤੇ ਬਾਕੀ ਇਲਾਕਿਆ ਵਿੱਚ 40 % ਸਬਸਿਡੀ ਹੁੰਦੀ ਹੈ ਤੁਸੀ ਆਪਣੇ ਜ਼ਿਲੇ ਦੇ FFDA ( fish farming development agency ) ਦਫਤਰ ਵਿੱਚ ਜਾਓ ਜੋ ਕਿ ਆਮ ਤੌਰ ਤੇ ਡੀਸੀ ਦਫਤਰ ਜਾਂ ਕਚਿਹਰੀਆਂ ਵਿੱਚ ਬਣਿਆ ਹੁੰਦਾ ਹੈ ਤੁਸੀ ਉੱਥੇ ਆਪਣੇ ਜਮੀਂਨ ਦੀ ਫਰਦ , 10th ਸਰਟੀਫਿਕੇਟ ਤੇ ਜਿੱਥੇ ਤਲਾਬ ਬਣਾਉਣਾ ਹੈ ਉੱਥੋ ਦੀਆਂ 2 ਫੋਟੋ ਲੈ ਕੇ ਜਾਓ ਉਸ ਤੋਂ ਬਾਅਦ FFDA ਦੇ ਅਫਸਰ ਤੁਹਾਨੂੂੰ ਫਾਈਲ ਤਿਆਰ ਕਰਵਾਉਣਗੇ ਤੇ ਤੁਹਾਡੀ ਜਮੀਨ ਦੇਖ ਕੇ ਤਲਾਬ ਬਣਾਉਣ ਦਾ ਤਰੀਕਾ ਦੱਸਣਗੇ ਤੇ ਫਿਰ ਤੁਹਾਨੂੰ 40% ਸਬਸਿਡੀ ਲਈ ਫਾਈ਼ਲ ਤਿਆਰ ਕਰਕੇ ਲੋਨ ਅਪਲਾਈ ਬਾਰੇ ਸਮਝਾ ਦੇਣਗੇ..

Posted by Balwan parmar
Madhya Pradesh
01-11-2019 07:57 PM
पौधे की बढ़वार के लिए N:P:K 19:19:19@10ग्राम प्रति लीटर पानी के हिसाब से स्प्रे करें

Posted by nishan singh
Punjab
01-11-2019 07:54 PM
nishan ji matar nu pani ful aun to bad launa chaida hai jyada pani laun de nal v matar peele ho jande han.dhanwad

Posted by amarpal singh
Punjab
01-11-2019 07:50 PM
Shri maan g Kanak de vich total 110kg urea paya janda hai..iss nu tuc 2-3 hissya de vich vand ke paa skde ho..kanak de vich DAP@55kg per acre de hisab nal payi jandi hai...Tuc ikk acre de hisab nal DAP da ikk gatta pa skde ho. Jekar SSP di varto kr rhe ho tan SSP@150kg per acre de hisaab nal vart skde ho. DAP nu kanak de beej nal mix kr ke beej deo. Isse dhang nal beej de nal SSP di v varto kr skde ho nahi tan kanak de lyi vaahn tyaar krde sme khet de vich shitta de skde ho..DAP ate SSP de vicho kise v ikk di varto krni hai. jekar vaahn de vich potash di kami hai tan POTASH@20kg per acre de hisaab nal tuc vart skde ho.
Posted by Raj kumar Patel
Uttar Pradesh
01-11-2019 07:50 PM
Patel ji HF cow lene ke liye aap Gourav Chauhan 7838808938 Dairy Farm se sampark kr skte hai..
Posted by ਸਰਦਾਰ ਗੁਰਭੇਜ ਸਿੰਘ
Punjab
01-11-2019 07:48 PM
ਸਭ ਤੋਂ ਪਹਿਲਾਂ ਤੁਹਾਡੇ ਲਈ ਇਹ ਜਾਨਣਾ ਜਰੂਰੀ ਹੈ ਕਿ ਮੁਰਗੀ ਪਾਲਣ ਦਾ ਧੰਦਾ ਦੋ ਤਰ੍ਹਾਂ ਦਾ ਹੁੰਦਾ ਹੈ ਕਿ ਤੁਸੀ ਆਂਡਿਆਂ ਦਾ ਧੰਦਾ ਕਰਨਾ ਚਾਹੁੰਦੇ ਹੋ ਜਾਂ ਮੀਟ ਦਾ ਜੇਕਰ ਤੁਸੀ ਆਂਡਿਆਂ ਦਾ ਧੰਦਾ ਕਰਨਾ ਚਾਹੁੰਦੇ ਹੋ ਤਾਂ ਤੁਹਾਨੂੰ ਲੇਇਰ ਮੁਰਗੀਆਂ ਪਾਲਣੀਆਂ ਪੈਣਗੀਆਂ ਅਤੇ ਜੇਕਰ ਤੁਸੀ ਮੀਟ ਦਾ ਧੰਦਾ ਕਰਨਾ ਚਾਹੁੰਦੇ ਹੋ ਤਾਂ ਤੁਹਾਨੂੰ ਬਰਾਇਲਰ ਮੁਰਗੀਆਂ ਪਾਲਣੀਆਂ ਪੈਣਗੀਆਂ ਜੇਕ.... (Read More)
ਸਭ ਤੋਂ ਪਹਿਲਾਂ ਤੁਹਾਡੇ ਲਈ ਇਹ ਜਾਨਣਾ ਜਰੂਰੀ ਹੈ ਕਿ ਮੁਰਗੀ ਪਾਲਣ ਦਾ ਧੰਦਾ ਦੋ ਤਰ੍ਹਾਂ ਦਾ ਹੁੰਦਾ ਹੈ ਕਿ ਤੁਸੀ ਆਂਡਿਆਂ ਦਾ ਧੰਦਾ ਕਰਨਾ ਚਾਹੁੰਦੇ ਹੋ ਜਾਂ ਮੀਟ ਦਾ ਜੇਕਰ ਤੁਸੀ ਆਂਡਿਆਂ ਦਾ ਧੰਦਾ ਕਰਨਾ ਚਾਹੁੰਦੇ ਹੋ ਤਾਂ ਤੁਹਾਨੂੰ ਲੇਇਰ ਮੁਰਗੀਆਂ ਪਾਲਣੀਆਂ ਪੈਣਗੀਆਂ ਅਤੇ ਜੇਕਰ ਤੁਸੀ ਮੀਟ ਦਾ ਧੰਦਾ ਕਰਨਾ ਚਾਹੁੰਦੇ ਹੋ ਤਾਂ ਤੁਹਾਨੂੰ ਬਰਾਇਲਰ ਮੁਰਗੀਆਂ ਪਾਲਣੀਆਂ ਪੈਣਗੀਆਂ ਜੇਕਰ ਤੁਸੀ ਬਰਾਇਲਰ ਮੁਰਗੀ ਫਾਰਮਿੰਗ ਕਰਨਾ ਚਾਹੁੰਦੇ ਹੋ ਅਤੇ ਘੱਟ ਤੋਂ ਘੱਟ 10 ਹਜਾਰ ਮੁਰਗੀਆਂ ਦਾ ਧੰਦਾ ਸ਼ੁਰੂ ਕਰਨਾ ਚਾਹੁੰਦੇ ਹੋ ਤਾਂ ਤੁਹਾਨੂੰ 4 ਤੋਂ 5 ਲੱਖ ਦਾ ਇੰਤਜਾਮ ਕਰਨਾ ਪਵੇਗਾ , ਜੇਕਰ ਤੁਸੀ ਆਡਿਆਂ ਲਈ 500 ਮੁਰਗੀਆਂ ਨਾਲ ਲੇਇਰ ਫਾਰਮਿੰਗ ਕਰਨਾ ਚਾਹੁੰਦੇ ਹੋ ਤਾਂ ਇੱਕ ਮੁਰਗੀ ਦੇ ਇੱਕ ਬੱਚੇ ਤੇ ਤੇ ਜਨਮ ਤੋਂ ਲੈ ਕੇ ਅੰਡੇ ਦੇਣ ਤੱਕ 250-300 ਤੱਕ ਖਰਚਾ ਆ ਜਾਵੇਗਾ ਤੇ ਇਸ ਲਈ 1250 ਸਕੇਅਰ ਫੁੱਟ ਦੇ ਸ਼ੈੱਡ ਜਗਾਂ ਦੀ ਜਰੂਰਤ ਪਵੇਗੀ ਜੇਕਰ ਤੁਸੀ ਪੋਲਟਰੀ ਦੀ ਟ੍ਰੇਨਿੰਗ ਲੈ ਕੇ ਨਾਬਾਰਡ ਤੋਂ ਲੋਨ ਲੈਂਦੇ ਹੋ ਤਾਂ ਤੁਹਾਨੂੰ 25 ਤੋਂ 35 % ਤੱਕ ਸਬਸਿਡੀ ਮਿਲ ਜਾਂਦੀ ਹੈ ਲੋਨ ਅਪਲਾਈ ਕਰਨ ਦੀ ਪੂਰੀ ਜਾਣਕਾਰੀ ਤੁਹਾਨੂੰ ਵਿੱਭਾਗ ਵੱਲੋਂ ਟ੍ਰੇਨਿੰਗ ਤੋਂ ਬਾਅਦ ਦਿਤੀ ਜਾਂਦੀ ਹੈ ਟ੍ਰੇਨਿੰਗ ਲੈਣ ਲਈ ਤੁਸੀ ਆਪਣੇ ਨਜ਼ਦੀਕੀ ਕ੍ਰਿਸ਼ੀ ਵਿਗਿਆਨ ਕੇਦਰ ਤੋਂ ਜਾਂ ਗੁਰੂ ਅੰਗਦ ਦੇਵ ਵੈਟਨਰੀ ਯੂਨੀਵਰਸਿਟੀ ਨਾਲ ਸੰਪਰਕ ਕਰ ਸਕਦੇ ਹੋਂ ਜਾਂ ਫਿਰ ਤੁਸੀ ਕਿਸੇ ਵੀ ਦਿਨ ਆਪਣੇ ਨਜ਼ਦੀਕੀ ਕ੍ਰਿਸ਼ੀ ਵਿਗਿਆਨ ਕੇਦਰ ਤੇ ਪਹੁੰਚ ਕੇ ਟ੍ਰੇਨਿੰਗ ਲੈਣ ਲਈ ਫਾਰਮ ਭਰ ਆਊ ਉਸ ਤੋਂ ਬਾਅਦ ਜਦੋਂ ਵੀ ਪੋਲਟਰੀ ਦੀ ਟ੍ਰੇਨਿੰਗ ਆਵੇਗੀ ਤਾਂ ਤੁਹਾਨੂੰ ਕ੍ਰਿਸ਼ੀ ਵਿਗਿਆਨ ਕੇਦਰ ਵੱਲੋਂ ਕਾਲ ਕਰਕੇ ਦੱਸ ਦਿੱਤਾ ਜਾਦਾ ਹੈ ਬਹੁਤ ਵਧੀਆ ਕੰਮ ਹੈ ਜੀ ਪੋਲਟਰੀ ਦਾ ਜੇਕਰ ਤੁਸੀ ਬ੍ਰਾਇਲਰ ਰੱਖਦੇ ਹੋਂ ਤਾਂ ਪੰਜ ਤੋਂ ਛੇ ਹਫਤਿਆਂ ਦੇ ਅੰਦਰ ਅੰਦਰ ਮੰਡੀਕਰਣ ਲਈ ਤਿਆਰ ਹੋ ਜਾਂਦੇ ਹਨ ਤਕਰੀਬਨ ਪੰਜ ਮਹੀਨਿਆਂ ਵਿੱਚ ਅੰੰਡਿਆ ਦੀ ਉਪਜ ਸ਼ੁਰੂ ਹੋ ਜਾਂਦੀ ਹੈ ਸਾਰਾ ਸਾਲ ਦੀ ਆਮਦਨ ਵਾਲਾ ਕੰਮ ਹੈ ਜੀ ਜਿਆਦਾ ਮਿਹਨਤ ਵੀ ਨਹੀ ਲੱਗਦੀ ਇਹ ਨਾਜੁਕ ਕਿਸਮ ਦੇ ਜਾਨਵਰ ਹੁੰਦੇ ਹਨ ਕੁੱਝ ਕੁ ਖਤਰਨਾਕ ਬਿਮਾਰੀਆ ਵੀ ਹਨ ਜਿੰਨਾਂ ਤੋੰ ਬਚਣ ਲਈ ਖਾਸ ਧਿਆਨ ਰੱਖਣ ਦੀ ਜਰੂਰਤ ਹੂੰਦੀ ਹੈ..
Posted by Sarkar kisku
Jharkhand
01-11-2019 07:47 PM
यदि आप सुअर पालन के बारे में जानकारी लेना चाहते है तो सुअर पालन में तभी फायदा होता है यदि आप इस काम को पूरी जानकारी लेकर और सही ट्रेनिंग प्राप्त करके शुरू करते है जिसमें आपको इस काम में मुनाफा कमाने का सही तरीका पता लगता है सुअर पालन का काम भी ट्रेनिंग से बिना न शुरू करें, शुरू करने से पहले आप किसी सफल सुअर पा.... (Read More)
यदि आप सुअर पालन के बारे में जानकारी लेना चाहते है तो सुअर पालन में तभी फायदा होता है यदि आप इस काम को पूरी जानकारी लेकर और सही ट्रेनिंग प्राप्त करके शुरू करते है जिसमें आपको इस काम में मुनाफा कमाने का सही तरीका पता लगता है सुअर पालन का काम भी ट्रेनिंग से बिना न शुरू करें, शुरू करने से पहले आप किसी सफल सुअर पालक के फार्म पर खुद जाकर बाकी शैड बनाने के लिए फार्म पर जाकर खुद समझना पड़ेगा क्योंकि यह अलग अलग जगह के हिसाब से सैट करना पड़ता है सफल सुअर पाल के तजुर्बे के अनुसार एक सुअरी एक वर्ष में 2—2.5 बार बच्चे देती है पहले ब्यांत में 6—7 बच्चे देती है और दूसरे ब्यांत में 10—14 बच्चे देती है यदि आप सुअर मीट के लिए तैयार कर रहे हैं तो एक सुअर 7—8 महीनों में लगभग 1 क्विंटल का हो जाता है और उससे 100 रूपये प्रति किलो के हिसाब से बिमक जाता है और गाभिन सुअरी 150—200 रूपये प्रति किलो के हिसाब से बेची जाती है सुअरों की मार्किटिंग की भी कोई दिक्कत नहीं है क्योंकि व्यापारी खुद फार्म से आकर सुअर ले जाते हैं उसके बाद फीड सही खिलाकर उन्हें आगे बेच देना बाकी लोन के लिए ट्रेनिंग स्र्टीफिकेट तो जरूरी है ही पर सिर्फ स्र्टीफिकेट ही नहीं और भी कागज़ों की जरूरत पड़ेगी क्योंकि यह सारा कुछ बैंकों पर निर्भर करता है कि बैंक को लोन पास करने के लिए कौन से दस्तावेज चाहिए यह अलग अलग बैंकों के अनुसार कम ज्यादा हो सकता है क्योंकि कोई बैंक कैसे वैरीफिकेशन करता है कोई कैसे पांच सुअरी गाभिन 10—11 महीनों के बाद पहली इनकम आती है और लगभग एक सुअरी 3500 रूपये महीने की इनकम आती है,इस तरह आप सुअर पालन का काम शुरू कर सकते है, सुअर पालन के लिए आप large white yorkshire नस्ल रख सकते हैं, इसकी ट्रेनिंग आप अपने नज़दीकी केवीके में प्राप्त कर सकते है आप वहां जाकर टे्रनिंग का फार्म आए जब भी वहां ट्रेनिंग होगी तो वो आपको फोन करके बता देंगे
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