Posted by vijay kumar
Uttar Pradesh
04-11-2019 06:23 PM
बसंत के मौसम के लिए नर्सरी नवंबर-दिसंबर में तैयार करें जबकि सर्दियों के मौसम में सितंबर-अक्तूबर महीने में नर्सरी में बीजों को बोयें
Posted by mandeep singh
Punjab
04-11-2019 06:22 PM
shrimaan g jekar tuc pehla hi urea di full dose pa rakhi hai tn hun urea na pao g..

Posted by sidharath
Himachal Pradesh
04-11-2019 06:19 PM
Sidharath ji aap inko use kr skte hai, isse pashu jldi heat mai aa jata hai, inka pashu ko nuksan nhi hai, baki aap pashu nu mineral mixture jrur den, jise pashu ke sarir ki kami purri hoti rehti hai..

Posted by sehbaj
Punjab
04-11-2019 06:17 PM
Sehbaj ji tuci isdi varto kr skde ho, jekar tuhade pashu iss feed nu asani nal khaa lende hai ate hajam krr lende hai tan tuci isdi varto kr skde ho, baki uss nu rojana vdia company da mineral mixture jiwe Agrimin powder, Bovimin-B powder, Minfa gold powder rojana 50gm dena suru kren, isse pashu ki achi growth hoti hai..
Posted by Harpreet Sándhu
Punjab
04-11-2019 06:08 PM
hapreet ji jekar tuc ralli gold di varto kiti hai ta tuhanu hale kuch hor paun di lod nahi hai.isde nal hi matra da futav vadia hona shuru ho jayega.dhanwad

Posted by राजवीर सिंह
Madhya Pradesh
04-11-2019 06:06 PM
Rajveer ji shatavari ki kheti puri lagat 5000 rupay prati acre ki hoti hai, or income 14600 rupay ke kareeb a jati hai, or 9600 rupay profit prati acre ke hisaab se ho jata hai, dhanywad

Posted by शनि कुमार
Uttar Pradesh
04-11-2019 06:00 PM
शनि जी आप आलू की किस्मे जैसे Kufri Bahar: इस किस्म के पौधे लंबे और तने मोटे होते हैं तनों की संख्या 4-5 प्रति पौधा होती है इसके आलू बड़े, सफेद रंग के, गोलाकार से अंडाकार होते हैं और इसका गुद्दा सफेद रंग का होता है यह किस्म 100-110 दिनों में पक जाती है और इसकी औसतन पैदावार 125 क्विंटल प्रति एकड़ होती है इसे ज्यादा देर तक स्टोर कर.... (Read More)
शनि जी आप आलू की किस्मे जैसे Kufri Bahar: इस किस्म के पौधे लंबे और तने मोटे होते हैं तनों की संख्या 4-5 प्रति पौधा होती है इसके आलू बड़े, सफेद रंग के, गोलाकार से अंडाकार होते हैं और इसका गुद्दा सफेद रंग का होता है यह किस्म 100-110 दिनों में पक जाती है और इसकी औसतन पैदावार 125 क्विंटल प्रति एकड़ होती है इसे ज्यादा देर तक स्टोर करके रखा जा सकता है यह पिछेती और अगेती झुलस रोग और पत्ता मरोड़ रोग की रोधक है
Kufri Badshah: इसके पौधे लंबे और 4-5 तने प्रति पौधा होते हैं इसके आलू बड़े से दरमियाने, गोलाकार और हल्के सफेद रंग के होते हैं इसके आलू स्वाद होते हैं यह किस्म 100-110 दिनों में पक जाती है यह किस्म कोहरे को सहनेयोग्य है और पिछेती, अगेती झुलस रोग की प्रतिरोधक है
Kufri Sutlaj: इस किस्म के पौधे घने और मोटे तने वाले होते हैं पत्ते हल्के हरे रंग के होते हैं आलू बड़े आकार के, गोलाकार और नर्म छिल्के वाले होते हैं यह किस्म 90-100 दिनों में पकती है इसकी औसतन पैदावार 160 क्विंटल प्रति एकड़ होती है यह किस्म खाने के लिए अच्छी और स्वादिष्ट होती है इन आलुओं को पकाना आसान होता है यह नए उत्पाद बनाने के लिए उचित किस्म नहीं है
Kufri Anand: यह मध्यम समय की किस्म है, जो कि पिछेते झुलस रोग और कोहरे के प्रतिरोधक है इसकी औसतन पैदावार 140-160 क्विंटल प्रति एकड़ होती है
Kufri Pukhraj: इसके पौधे लंबे और तने संख्या में कम और दरमियाने मोटे होते हैं आलू सफेद, बड़े, गोलाकार और नर्म छिल्के वाले होते हैं यह किस्म 70-90 दिनों में पकती है इसकी औसतन पैदावार 130 क्विंटल प्रति एकड़ है यह अगेती झुलस रोग की रोधक किस्म है और नए उत्पाद बनाने के लिए उचित नहीं है
Kufri Chipsona 2: इस किस्म के पौधे दरमियाने कद के और कम तनों वाले होते हैं इसके पत्ते गहरे हरे और फूल सफेद रंग के होते हैं आलू सफेद, दरमियाने आकार के, गोलाकार, अंडाकार और नर्म होते हैं इसकी औसतन पैदावार 140 क्विंटल प्रति एकड़ होती है यह पिछेती झुलस रोग की रोधक किस्म है यह किस्म चिपस और फरैंच फ्राइज़ बनाने के लिए उचित है
Kufri Chipsona 1: यह किस्म 90-100 दिनों में पुटाई के लिए तैयार हो जाती है
Posted by लक्ष्मीनारायण नागर
Madhya Pradesh
04-11-2019 05:57 PM
लक्ष्मीनारायण जी आप इसके ऊपर planofix @4ml को प्रति 15 लीटर पानी के हिसाब से स्प्रे करें धन्यवा

Posted by दीनदयाल तिवारी
Uttar Pradesh
04-11-2019 05:54 PM
दीनदयाल जी आप इसके ऊपर NPK 130045 @1 किलो को 150 लीटर पानी के हिसाब से स्प्रे करें धन्यवाद

Posted by arun
Haryana
04-11-2019 05:51 PM
यह कई तरह की मिट्टी में उगाई जाती है इसकी पैदावार के लिए नमकीन, क्षारीय और पानी खड़ा होने वाली मिट्टी से बचाव करें यह बढ़िया निकास वाली मिट्टी जिसमे बढ़िया जैविक तत्व मौजूद हों, में बढ़िया परिणाम देती है इसके बढ़िया विकास के लिए मिट्टी का pH 5.5-7 होना चाहिए Drudriha Tulsi: यह मुख्य रूप से बंगाल, नेपाल, चटगांव और महाराष्ट्र क्ष.... (Read More)
यह कई तरह की मिट्टी में उगाई जाती है इसकी पैदावार के लिए नमकीन, क्षारीय और पानी खड़ा होने वाली मिट्टी से बचाव करें यह बढ़िया निकास वाली मिट्टी जिसमे बढ़िया जैविक तत्व मौजूद हों, में बढ़िया परिणाम देती है इसके बढ़िया विकास के लिए मिट्टी का pH 5.5-7 होना चाहिए Drudriha Tulsi: यह मुख्य रूप से बंगाल, नेपाल, चटगांव और महाराष्ट्र क्षेत्रों में पाई जाती है यह गले को सूखेपन से राहत देता है यह हाथों, पैरों और गठिया की सूजन से आराम देता है Ram/Kali Tulsi (Ocimum canum): यह चीन, ब्राज़ील, पूर्व नेपाल और साथ ही बंगाल, बिहार, चटगांव और भारत के दक्षिणी क्षेत्रों में पाई जाती है इसका तना जामुनी और पत्ते हरे रंग के और बहुत ज्यादा सुगंधित होते है इसमें उचित मात्रा में औषधीय गुण जैसे ऐज़ाडिरैकटिन, ऐंटीफंगल , ऐंटीबैक्टीरियल, और पाचन तंत्र को ठीक रखती है यह गर्म क्षेत्रों में बढ़िया उगता है Babi Tulsi: यह पंजाब से त्रिवेंद्रम, बंगाल और बिहार में भी पाई जाती है इसका पौधा 1-2 फीट लम्बा होता है पत्ते 1-2 इंच लम्बे, अंडाकार और नुकीले होते है इसके पत्तों का स्वाद लौंग की तरह और सब्जियों में स्वाद के लिए प्रयोग किया जाता है तुलसी की खेती के लिए, अच्छी तरह से शुष्क मिट्टी की मांग की जाती है मिट्टी के भुरभुरा होने तक हैरो के साथ खेत की जोताई करें, फिर रूड़ी की खाद मिट्टी में मिलाएं तुलसी की रोपाई सीड बैड पर करें फरवरी के तीसरे महीने में नर्सरी बैड तैयार करें पौधे के विकास के अनुसार, 4.5 x 1.0 x 0.2 मीटर के सीड बैड तैयार करें बीजों को 60x60 सैं.मी. के फैसले पर बोयें बीजों को 2 सैं.मी. की गहराई पर बोयें बिजाई के 6-7 हफ्ते बाद, फसल की रोपाई खेत में करें तुलसी की खेती के लिए 120 ग्राम बीजों का प्रयोग प्रति एकड़ में करें फसल को मिट्टी से पैदा होने वाली बीमारीयों से रोकथाम के लिए, बिजाई से पहले मैनकोजेब 5 ग्राम प्रति किलोग्राम से बीजों का उपचार करें फसल की बढ़िया पैदावार के लिए बिजाई से पहले 15 टन रूड़ी की खाद मिट्टी में डालें तुलसी के बीजों को तैयार बैडों के साथ उचित अंतराल पर बोयें मानसून आने के 8 हफ्ते पहले बीजों को बैड पर बोयें बीजों को 2 सैं.मी. की गहराई पर बोयें बिजाई के बाद, रूड़ी की खाद और मिट्टी की पतली परत बीजों पर बना दें इसकी सिंचाई फुवारा विधि द्वारा की जाती है रोपाई के 15-20 दिनों के बाद, नए पौधों को तंदरुस्त बनाने के लिए 2% यूरिया का घोल डालें 6 हफ्ते पुराने और 4-5 पत्तों के अंकुरण होने पर अप्रैल के महीने में नए पौधे तैयार होते है तैयार बैडों को रोपाई 24 घंटे पहले पानी लगाएं ताकि पौधों को आसानी से उखाड़ा जा सकें और रोपाई के समय जड़ें मुलायम और सूजी हुई हो खेत की तैयारी के समय, रूड़ी की खाद को मिट्टी में मिलाएं खाद के तौर पर नाइट्रोजन 48 किलो(यूरिया 104 किलो), फासफोरस 24 किलो(सिंगल सुपर फासफेट 150 किलो) और पोटाश 24 किलो(मिउरेट 40 किलो) प्रति एकड़ में डालें नए पौधे लगाने के समय नाइट्रोजन की आधी मात्रा और फासफेट पेंटोऑक्साइड की पूरी मात्रा शुरुआती समय में डालें Mn 50 पी पी एम कंसंट्रेशन और Co@100 पी पी एम कंसंट्रेशन सूक्ष्म-तत्व डालें बाकी की बची हुई नाइट्रोजन को 2 हिस्सों में पहली और दूसरी कटाई के बाद डालें खेत को नदीनों से मुक्त करने के लिए कसी की मदद से गोड़ाई करें नदीनों की रोकथाम कम न होने पर यह फसल को नुकसान पहुंचाते है रोपण के एक महीने बाद पहली गोड़ाई और पहली गोड़ाई के चार हफ्ते बाद दूसरी गोड़ाई करें रोपण के दो महीने बाद कसी से अनुकूल गोड़ाई करें गर्मियों में, एक महीने में 3 सिंचाइयां करें और बरसात के मौसम में, सिंचाई की आवश्यकता नहीं होती एक साल में 12-15 सिंचाइयां करनी चाहिए पहली सिंचाई रोपण के बाद करें और दूसरी सिंचाई नए पौधों के स्थिर होने पर करें 2 सिंचाइयां करनी आवश्यक है और बाकी की सिंचाई मौसम के आधार पर करें इसके मंडीकरण के लिए आप Aushadhiya kheti vikas sansthan 6268536795 से संपर्क कर सकते हैं
Posted by Sonu Bansal
Haryana
04-11-2019 05:44 PM
इसकी पैकिंग करके सीधे तौर पर बेचे, शोशल मीडिया पर वर्मी कंपोस्ट के फायदे बताएं, जैविक खेती के लिए किसान आपको खुद संपर्क करेंगे धीरे धीरे आपके लिंक बनने लगेगे रप आपको शुरूआत इस तरीके से करनी पड़ेगी बाकि किसान मेलों में स्टाल लगाकर इसे बेच सकते है

Posted by Bipin Kumar Singh
Uttar Pradesh
04-11-2019 05:40 PM
कृप्या बताएं आप कौनसी खेती करना चाहते है ताकि आपको सही जानकारी दी जा सके

Posted by Dhillon Saab
Punjab
04-11-2019 05:38 PM
Hanji tuci saro da tel 100ml rojana de skde ho, ehh tuci feed vich milla ke de skde ho, baki uss nu Vitum-H liquid 10-10ml swere sham, Metabolite powder di rojana 1 pudi deo, iss nal frak paa jawega.
Posted by JASS
Punjab
04-11-2019 05:08 PM
jass ji kirpa karke isdi kisam da nam daso ta jo tuhanu is bare poori jankari diti ja sake.dhanwad
Posted by Suresh Rajput
Uttar Pradesh
04-11-2019 05:04 PM
Suresh ji, ap iske liye NPK 191919 @ 10 gm prati liter pani ke hisaab se spray karein, dhanwad

Posted by ਅਰਸ਼ਪ੍ਰੀਤ ਸਿੰਘ
Punjab
04-11-2019 05:02 PM
ਫੀਡ ਦੀ ਟੈਸਟਿੰਗ ਲਈ ਤੁਸੀ ਗੁਰੁ ਅੰਗਦ ਦੇਵ ਵੈਟਨਰੀ ਯੂਨੀਵਰਸਿਟੀ ਲੁਧਿਆਣਾ ਦੇ ਪਸ਼ੂ ਆਹਾਰ ਵਿਭਾਗ ਵਿੱਚ ਸੰਪਰਕ ਕਰ ਸਕਦੇ ਹੋ ਜੀ

Posted by शनि कुमार
Uttar Pradesh
04-11-2019 05:02 PM
शनि जी आप किस्मे जैसे Kufri Bahar,Kufri Badshah,Kufri Sutlaj,Kufri Anand की बिजाई कर सकते है धन्यवाद
Posted by Balram Dairu
Rajasthan
04-11-2019 04:59 PM
जीरे की फसल में नदीन गंभीर समस्या होते हैं नदीनों की जांच के लिए लगातार गोडाई और निराई करें पहली गोडाई बिजाई के 30-35 दिनों के बाद करें जब जीरे की फसल 5 सैं.मी. कद की हो जाये दूसरी गोडाई पहली गोडाई के 20-25 दिन बाद करें और खेत को नदीन रहित रखें रासायनिक रोकथाम के लिए बिजाई के 1-2 दिन बाद पैंडीमैथालीन 1 लीटर को 200 लीटर पा.... (Read More)
जीरे की फसल में नदीन गंभीर समस्या होते हैं नदीनों की जांच के लिए लगातार गोडाई और निराई करें पहली गोडाई बिजाई के 30-35 दिनों के बाद करें जब जीरे की फसल 5 सैं.मी. कद की हो जाये दूसरी गोडाई पहली गोडाई के 20-25 दिन बाद करें और खेत को नदीन रहित रखें रासायनिक रोकथाम के लिए बिजाई के 1-2 दिन बाद पैंडीमैथालीन 1 लीटर को 200 लीटर पानी में मिलाकर स्प्रे करें
Posted by aniket panwar
Uttar Pradesh
04-11-2019 04:58 PM
जीव अमृत बनाने के लिए आवश्यक चीज़ें प्लास्टिक का एक बड़ा 200 लीटर का ढोल (ढोल लोहे का नहीं होना चाहिए) 10 किलो गोबर (गाय या भैंस का पुराना गोबर) 10 लीटर पेशाब (गाय, बैल या भैंस का) 1 किलो गुड़ (पुराना या खराब और बारीक किया हुआ जो कि आसानी से पानी में घुलनशील हो) 1 किलो पिसी हुई दाल (बेसन, मांह, मसूर) 1 किलो पुरानी मिट्टी जो कि.... (Read More)
जीव अमृत बनाने के लिए आवश्यक चीज़ें प्लास्टिक का एक बड़ा 200 लीटर का ढोल (ढोल लोहे का नहीं होना चाहिए) 10 किलो गोबर (गाय या भैंस का पुराना गोबर) 10 लीटर पेशाब (गाय, बैल या भैंस का) 1 किलो गुड़ (पुराना या खराब और बारीक किया हुआ जो कि आसानी से पानी में घुलनशील हो) 1 किलो पिसी हुई दाल (बेसन, मांह, मसूर) 1 किलो पुरानी मिट्टी जो कि पीपल या बर्गद के नीचे से ली गई हो जीव अमृत बनाने की विधि इन सब चीज़ों को अच्छी तरह से आपस में मिलाएं और ढोल में डाल दें इस ढोल को 150 लीटर पानी से भर दें इस ढोल का 1/4 भाग खाली छोड़ दें यह 1/4 भाग खाली छोड़ने से उबाला मारने का खतरा कम हो जाता है इस घोल को छांव में रखें और दिन में दो बार सुबह- शाम डंडे से हिलाएं ताकि ढोल के अंदर की सामग्री अच्छी तरह घुल जाये इसे गर्मियों में 48 घंटों के लिए छांव में रखें इस ढोल को बोरी से अच्छी तरह ढक दें इस तरह एक एकड़ का जीव अमृत 2-4 दिनों में तैयार हो जाता है जीव अमृत प्रयोग करने की विधि यदि आप खेत की सिंचाई आम तरीके से कर रहे हैं तो इस घोल को टूटी के द्वारा या किसी बर्तन से पानी में मिलाते रहें ताकि जीव अमृत आसानी से सारे खेत में फैल सके यह सबसे सस्ते और फायदेमंद सूक्ष्म तत्व हैं जो कि नाइट्रोजन, कैल्शियम जैसे तत्वों की मिट्टी में पूर्ति करते हैं इसे तैयार करने के बाद 10-15 दिनों में प्रयोग कर लेना चाहिए कनोला सरसों की कुदरती/जैविक खेती जैविक या कुदरती तरीके से खेती करने से ज़मीन की क्षमता और उपजाऊपन बढ़ता है यह मिट्टी में नमी बनाए रखने में भी मदद करती है इससे पौधे का विकास भी अच्छे से होता है जैसे कि आप देख सकते हैं कि पौधे के पत्ते का आकार सामान्य पत्तों के आकार से काफी बड़ा है और पत्ता जितना बड़ा होगा प्रकाश संश्लेषण क्रिया भी उतने अच्छे से होगी इससे पौधा तंदरूस्त रहता है और पौधा जितना तंदरूस्त होगा उसका फल भी उतना ही तंदरूस्त होगा हमें कोशिश करनी चाहिए कि खेती करते समय रासायनिक खादों का प्रयोग कम से कम करें ड्राई जीव अमृत बनाने की विधि जब किसान यह सोचता है कि मुझे रासायनिक खादों के बिना खेती करनी है तो सबसे पहले उसका ध्यान रूड़ी की खाद के ढेर की तरफ जाता है कि जो रूड़ी हमने खेत में डाली है क्या वह लाभदायक है क्या उससे हमें लाभ मिल सकता है हां बिल्कुल मिल सकता है लेकिन हमें रूड़ी का प्रयोग खेत में सीधे तौर पर नहीं करना है क्योंकि इससे कईं प्रकार की दीमक और फंगस खेत में पैदा होती है यह फायदा करने की बजाए नुकसान करती है इसलिए खाद बनाने के लिए जीव अमृत का स्प्रे करके नया ढंग अपनाया है अब हम आपको दिखाते हैं कि खाद कैसे बनाई जाती है आप जो ये खाद देख रहे हैं यह पहले कच्ची रूड़ी की खाद थी जो कि जीव अमृत की स्प्रे करने से बिल्कुल सूख चुकी है इसे कैसे तैयार करना है 10 दिनों के अंतराल पर हमने इस पर 4 ढोल जीव अमृत के डाले हैं अर्थात् 16 ढोल जीव अमृत के डाले हैं 40 दिनों में ड्राई जीव अमृत फसलों के लिए तैयार हो जाती है जब हम खेत में ड्राई जीव अमृत का प्रयोग करेंगे तब यह पानी के संपर्क में आते ही सक्रिय हो जायेगा और अच्छे से काम करेगा

Posted by sunil Kumar
Uttar Pradesh
04-11-2019 04:53 PM
सुनील जी आप इसके ऊपर NPK 130045 @1 किलो को 150 लीटर पानी के हिसाब से स्प्रे करें धन्यवाद
Posted by Sewak .lSingh
Punjab
04-11-2019 04:52 PM
ਤੁਸੀ ਕਿਸੇ ਫਾਰਮ ਤੋ ਚੰਗੀ HF ਨਸਲ ਦੀ ਗਾ ਖਰੀਦੋ ਜੀ ਤੇ ਹੋਲੀ ਹੋਲੀ ਇੱਕ ਇੱਕ ਕਰਕੇ ਹੋਰ ਗਾਵਾਂ ਖਰੀਦ ਲਵੋ ਜੀ
Posted by Gyan Singh Kanwar
Chattisgarh
04-11-2019 04:50 PM
ज्ञान जी कृपया आप कीड़ों की फोटो भेजे ताकि आपको इसके बारे में पूरी जानकारी दी जा सके धन्यवाद

Posted by MAHAVEER SUMAN
Rajasthan
04-11-2019 04:46 PM
Dragon fruit ki kheti ke liye Dragon fruit ki kalmei lgayi jati hai ye ped gujrat mei hota hai eik acre mei takriban iski 1600 kalmei lagti hai aur in kalmo ko pehle gamle mei tyar kiya jata hai aur fir april se September tak kabhi bhi field mei lga skte hai aur eik kalam lagbhagg 70 rs ki ati hai. Adhik jaankari ke liye aap niche diye number par baat kr skte hain: vijay kumar -7065414241.Thank you

Posted by Raghvir Singh
Punjab
04-11-2019 04:37 PM
श्रीमान जी अच्छी किस्में HD-3086 ,HD-2967, PBW 343 और नई किस्में HD-3226, DBW-187, DBW-222 है

Posted by sunil Kumar
Uttar Pradesh
04-11-2019 04:32 PM
सुनील जी कृपया सवाल विस्तार से पूछे ताकि आपको इसके बारे में पूरी जानकारी दी जा सके धन्यवाद

Posted by Vijay Kumar
Rajasthan
04-11-2019 04:31 PM
विजय जी आप इसकी खुराक में प्रोटीन की मात्रा ज्यादा करें आप फीड में सोयावीन खल का प्रयोग कर सकते है और इन्हें Ostovet calcium 30ml/100 birds के हिसाब से दे सकते है

Posted by Azad Asthana
Uttar Pradesh
04-11-2019 04:23 PM
बकरी पालन बहुत ही लाभकारी काम है शुरूआत करने के लिए आप 10 बकरियों और 2 बकरे के साथ कर सकते हैं इन्हें खुराक कम चाहिए इसलिए इन्हें आसानी से पाल सकते हैं ये हर प्रकार के मौसम में पाली जा सकती हैं बकरियां 12-14 महीने में बच्चे देना शुरू कर देती है बकरी का गर्भ समय 150 दिन का होता है और साल में 1-5 बच्चे देती है साल में दो बच्.... (Read More)
बकरी पालन बहुत ही लाभकारी काम है शुरूआत करने के लिए आप 10 बकरियों और 2 बकरे के साथ कर सकते हैं इन्हें खुराक कम चाहिए इसलिए इन्हें आसानी से पाल सकते हैं ये हर प्रकार के मौसम में पाली जा सकती हैं बकरियां 12-14 महीने में बच्चे देना शुरू कर देती है बकरी का गर्भ समय 150 दिन का होता है और साल में 1-5 बच्चे देती है साल में दो बच्चे देना आम बात है बकरियां 8-10 वर्ष तक बच्चे देती हैं और अपन गिनती को तेजी से बढ़ा लेती हैं आप बारबरी, ब्लैक बंगाल, जैसी नसल पाल सकते हैं इसकी ट्रेनिेंग के लिए आप अपने कुषि विज्ञान केंद्र से संपर्क करे या फिर जो बकरी पालन का व्यवसाय कर रहा कोई किसान उसका फार्म स्वंय जाकर देखकर आयें तो और भी बारीकियों का पता चल जायेगा, इसके इलावा आप बीटल नस्ल का रख सकते है क्योंकि ये नस्ल मीट और दूध दोंनो कामों के लिए अच्छी रहती है..

Posted by Azad Asthana
Uttar Pradesh
04-11-2019 04:21 PM
एक बकरी के लिए 12—15 फीट जगह कवर और 25—30 फीट जगह खुली होनी चाहिए इस हिसाब से आप बकरियों के हिसाब से शेड तैयार कर सकते है बकरी पालन बहुत ही लाभकारी काम है शुरूआत करने के लिए आप 10 बकरियों और 2 बकरे के साथ कर सकते हैं इन्हें खुराक कम चाहिए इसलिए इन्हें आसानी से पाल सकते हैं ये हर प्रकार के मौसम में पाली जा सकती हैं बकरिय.... (Read More)
एक बकरी के लिए 12—15 फीट जगह कवर और 25—30 फीट जगह खुली होनी चाहिए इस हिसाब से आप बकरियों के हिसाब से शेड तैयार कर सकते है बकरी पालन बहुत ही लाभकारी काम है शुरूआत करने के लिए आप 10 बकरियों और 2 बकरे के साथ कर सकते हैं इन्हें खुराक कम चाहिए इसलिए इन्हें आसानी से पाल सकते हैं ये हर प्रकार के मौसम में पाली जा सकती हैं बकरियां 12-14 महीने में बच्चे देना शुरू कर देती है बकरी का गर्भ समय 150 दिन का होता है और साल में 1-5 बच्चे देती है साल में दो बच्चे देना आम बात है बकरियां 8-10 वर्ष तक बच्चे देती हैं और अपन गिनती को तेजी से बढ़ा लेती हैं आप बारबरी, ब्लैक बंगाल, जैसी नसल पाल सकते हैं इसकी ट्रेनिेंग के लिए आप अपने कुषि विज्ञान केंद्र से संपर्क करे या फिर जो बकरी पालन का व्यवसाय कर रहा कोई किसान उसका फार्म स्वंय जाकर देखकर आयें तो और भी बारीकियों का पता चल जायेगा, इसके इलावा आप बीटल नस्ल का रख सकते है क्योंकि ये नस्ल मीट और दूध दोंनो कामों के लिए अच्छी रहती है..
Posted by sunil
Haryana
04-11-2019 04:20 PM
सुनील जी यह फंगस है इसकी रोकथाम के लिए आप carbendazim @400 ग्राम को प्रति एकड़ के हिसाब से स्प्रे करें धन्यवाद

Posted by Harmanpreet Singh
Punjab
04-11-2019 04:10 PM
Harmanpreet Singh ji tusi apni kheti HELPLINE NO. 9779977641 number te call karo ji.

Posted by Gursharn singh
Punjab
04-11-2019 04:10 PM
gursharn ji eh fungus hai isde layi tuc m-45@4 gram nu prati litre pani de hisab nal spray karo.dhanwad

Posted by sintu kumar
Bihar
04-11-2019 04:09 PM
कृप्या आप इसे नज़दीकी डॉक्टर से जांच करवायें इसकी जांच करके इसका सही इलाज हो सकता है

Posted by balwinder sidhu
Punjab
04-11-2019 04:03 PM
balwinder sidhu ji tusi ik var sade helpline no. 9779977641 te call karo te detail vich daso ji kis tarah de product chahide hai ji.

Posted by jasvir singh
Punjab
04-11-2019 04:02 PM
tuci uss nu mitha soda rojana 20-25gm dena suru kro ate Necleotone powder rojana 10gm sare pashua nu deo, jo pashu thik hai ohna nu v deo ate 10din tak dinde rho, iss nal frak paa jawega, ehh Animax pharma company da product hai.

Posted by parnam sidhu
Punjab
04-11-2019 04:02 PM
beetal bakri de bache lain layi tusi 93175 17763 number te sandeep ji nal gall karo ji.
Posted by Gursewak Singh Doad
Punjab
04-11-2019 03:55 PM
tuci uss nu khurak vdia deo, bache de janam ton badd uss nu thnnd ton bacha ke rkho ate kisi bnnd room vich rakh skde ho jiss nal swere ate sham di thndi hwaa to bach skee ate uss vdia matra vich maa da dudh pilao jina oh asani nal hajam krr skee, baki bakri nu v assani nal hajam honn wala chara deo..

Posted by ranjan
Madhya Pradesh
04-11-2019 03:40 PM
बमोरिया मोती
सम्बर्धन केंद्र
( भारत का एक मात्र प्रशिक्षण केंद्र जहां देश विदेश से आते है लोग )
सुक्ष्म लघु मध्यम उद्यम भारत सरकार द्वारा पंजीकृत
कृषि मंत्री जी एवं मुख्या मंत्री जी द्वारा पुरुष्कृत
दैनिक भास्कर , राजिस्थान पत्रिका ,
सहारा समय ,बंसल NEWS आदि न्यूज़ चैनल द्वारा सत्यापित
मोती पालन से ला.... (Read More)
बमोरिया मोती
सम्बर्धन केंद्र
( भारत का एक मात्र प्रशिक्षण केंद्र जहां देश विदेश से आते है लोग )
सुक्ष्म लघु मध्यम उद्यम भारत सरकार द्वारा पंजीकृत
कृषि मंत्री जी एवं मुख्या मंत्री जी द्वारा पुरुष्कृत
दैनिक भास्कर , राजिस्थान पत्रिका ,
सहारा समय ,बंसल NEWS आदि न्यूज़ चैनल द्वारा सत्यापित
मोती पालन से लाखो कैसे कमाए अब घर बैठे सीखे
WHATAPP FOR ONLINE TRAINING 9770085381 ( TEXT - ONLINE TRAINING )
https://youtu.be/MMvKOBzkgFA
अगला प्रशिक्षण 9-10 NOV.
सीट बुक करने के लिए भी उपरोक्त न. पर करे
Registration Shulk 100/-
CONT FOR MORE DETAIL 9770085381
9407461361
Posted by Kamlesh
Uttar Pradesh
04-11-2019 03:26 PM
Madan ji, ap gehun ki ksime jaise ke PBW 1 Zn, UNNAT PBW 343, WH 542, PBW 725, PBW 677, HD 2851, WHD-912, HD 3043, WH 1105, PBW 660, PBW-502, HD 3086 (PusaGautam), HD 2967, DBW17, PBW 621, UNNAT PBW 550, TL 2908, PBW 175, PBW 527, WHD 943, PDW 291, PDW 233, UP-2328, PBW 590, PBW 509, PBW 373 ki bijai kar sakte hain , dhanywad

Posted by Harsh Deep Singh
Punjab
04-11-2019 03:21 PM
Iss vich vitamins hunde hai jiss nal janwar di kamjori durr hundi hai ehh energy tonic de toor te kam krda hai ate janwar de sarir di vdia growth hundi hai, ehh badde janwar nu 50-100ml tak rojana de skde ho..

Posted by KARANVIR SINGH ROMANA
Punjab
04-11-2019 03:09 PM
you can contact to parmjit singh 97810 41978 for bansi variety of wheat.
Posted by Vikram Singh gurjar
Rajasthan
04-11-2019 03:03 PM
vikram ji aap kisme jaise Raj 1482,PBW 502,PBW 550,HD 2697,Raj 6560,Raj 3077,Raj 4079,Raj 4037,Raj 4120,DBW 17 ki bijai kar sakte hai.dhanywad
Posted by Neetesh Rawat
Madhya Pradesh
04-11-2019 03:00 PM
यदि आप मुर्गी पालन के बारे में जानकारी लेना चाहते है तो सबसे पहले आपके लिए यह जानना जरूरी है कि मुर्गी पालन दो तरह का होता है कि आप अंडों का व्यवसाय करना चाहते हैं या मीट का यदि आप अंडों का धंधा करना चाहते हैं तो आपको लेयर मुर्गियां पालनी पड़ेंगी और यदि आप मीट का धंधा करना चाहते हैं तो आपको ब्रॉयलर मुर्गियां प.... (Read More)
यदि आप मुर्गी पालन के बारे में जानकारी लेना चाहते है तो सबसे पहले आपके लिए यह जानना जरूरी है कि मुर्गी पालन दो तरह का होता है कि आप अंडों का व्यवसाय करना चाहते हैं या मीट का यदि आप अंडों का धंधा करना चाहते हैं तो आपको लेयर मुर्गियां पालनी पड़ेंगी और यदि आप मीट का धंधा करना चाहते हैं तो आपको ब्रॉयलर मुर्गियां पालनी पड़ेंगी यदि आप ब्रायलर मुर्गी पालन करना चाहते हैं तो कम से कम 10 हजार मुर्गियों का धंधा शुरू करना चाहते हैं तो आपको 4 से 5 लाख का इतज़ाम करना पड़ेगा, ये आप अपने बजट के हिसाब से कम पंक्षियों से भी शुरू कर सकते हैं बाकि आप इस काम को ट्रेनिंग लेकर शुरू करें जिसमें आपको इस काम के बारे में पूरी जानकारी दी जाएगी ट्रेनिंग लेने के लिए आप अपने नज़दीकी कृषि विज्ञान केंद्र से संपर्क करें आप वहां जाकर अपना ट्रेनिंग का फार्म भर आएं जब भी ट्रेनिंग होगी तो वो आपको फोन करके उसके बारे में बता देंगे और ट्रेनिंग में आपको लोन और सब्सिड़ी के बारे में जानकारी प्राप्त हो जाएगी
Posted by harpal singh sandhu
Punjab
04-11-2019 02:50 PM
harpal ji tuc matr de uper NPK 191919 ik kilo nu 150 litre pani de hisab nal spray karo.dhanwad
Posted by abhay kumar
Uttar Pradesh
04-11-2019 02:47 PM
abhay ji baingan ki paidavar bdhane ke liye aap NPK 130045@1 kilo ko 150 litre pani men mila kar spray karen.dhanywad

Posted by Gursahib singh
Punjab
04-11-2019 02:44 PM
ਸ੍ਰੀ ਮਾਨ ਜੀ ਮੈਨੂੰ ਬੱਕਰੀ ਪਾਲਣ ਤੇ ਸੂਰ ਪਾਲਣ ਸੰਬੰਧੀ ਟਰੇਨਿੰਗ ਬਾਰੇ ਜਾਣਕਾਰੀ ਦੇਣ ਦੀ ਕ੍ਰਿਪਾਲਤਾ ਕੀਤੀ ਜਾਵੇ ਜੀ ?
BhaaG deputy director animal husbandry TARNTARAN naal sampark karo g or krishi vigyan kendar Booh TARNTARAN ton v training mil jaegi
Posted by Indra Ram
Rajasthan
04-11-2019 02:39 PM
bhai sahib nazdik ke pashu palan adhikari or krishi vigyan kendar se sampark karein or training lein phir shuroo krain
Posted by Kailash kumar
Uttar Pradesh
04-11-2019 02:38 PM
पश्चिमी यू पी में, सिंचित और सामान्य बिजाई स्थितियों में 1 नवंबर से 15 नवंबर तक बिजाई पूरी कर लें और पिछेती बिजाई की स्थितियों में 1 से 25 दिसंबर तक बिजाई पूरी कर लें
पूर्वी यू पी के लिए, सिंचित और सामान्य बिजाई का उचित समय 1 नवंबर से 15 नवंबर तक है, जबकि पिछेती बिजाई के लिए 1 से 20 दिसंबर का समय उचित है
ऊंचे पहाड़ी क्ष.... (Read More)
पश्चिमी यू पी में, सिंचित और सामान्य बिजाई स्थितियों में 1 नवंबर से 15 नवंबर तक बिजाई पूरी कर लें और पिछेती बिजाई की स्थितियों में 1 से 25 दिसंबर तक बिजाई पूरी कर लें
पूर्वी यू पी के लिए, सिंचित और सामान्य बिजाई का उचित समय 1 नवंबर से 15 नवंबर तक है, जबकि पिछेती बिजाई के लिए 1 से 20 दिसंबर का समय उचित है
ऊंचे पहाड़ी क्षेत्रों के लिए, सिंचित और सामान्य बिजाई का उचित समय अक्तूबर के दूसरे पखवाड़े से लेकर नवंबर का पहला पखवाड़ा है जबकि पिछेती बिजाई के लिए 1 दिसंबर से 20 दिसंबर का समय उचित है
निचले पहाड़ी क्षेत्रों के लिए, सिंचित और सामान्य बिजाई का उचित समय अक्तूबर के आखिरी सप्ताह से लेकर मध्य नवंबर तक का है जबकि पिछेती बिजाई के लिए नवंबर का दूसरा पखवाड़ा उचित समय है
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