Posted by Vijay Singh
Rajasthan
05-11-2019 08:40 AM
विजय जी आप गेंहू की किस्मे जैसे Raj 1482: इस किस्म का गहरे हरे रंग का पौधा, जिसका कद 80-90 सैं.मी. होता है इसकी अधिक फलियां, मोटे दाने, चमकदार और हल्के रंग के दाने होते हैं इसकी औसतन पैदावार 15-16 क्विंटल प्रति एकड़ होती है यह किस्म 126-134 दिनों में परिपक्व होती है इसका मुख्य रूप से ब्रैड बनाने के लिए उपयोग किया जाता है इसमें .... (Read More)
विजय जी आप गेंहू की किस्मे जैसे Raj 1482: इस किस्म का गहरे हरे रंग का पौधा, जिसका कद 80-90 सैं.मी. होता है इसकी अधिक फलियां, मोटे दाने, चमकदार और हल्के रंग के दाने होते हैं इसकी औसतन पैदावार 15-16 क्विंटल प्रति एकड़ होती है यह किस्म 126-134 दिनों में परिपक्व होती है इसका मुख्य रूप से ब्रैड बनाने के लिए उपयोग किया जाता है इसमें प्रोटीन की मात्रा 11-12 प्रतिशत होती है
PBW 502: यह किस्म सिंचित क्षेत्रों में उगाने के अनुकूल है पौधे का कद 90-100 सैं.मी. होता है यह किस्म 130-135 दिनों में कटाई के लिए तैयार हो जाती है यह करनाल बंट के प्रतिरोधी है इसकी औसतन पैदावार 18-20 क्विंटल प्रति एकड़ होती है PBW 550: पौधे का कद 83-91 सैं.मी. होता है यह किस्म 128-135 दिनों में कटाई के लिए तैयार हो जाती है इसके दाने मोटे सुनहरे पीले रंग के होते हैं इसके 1000 दानों का भार लगभग 38 ग्राम होता है इसकी औसतन पैदावार 18-24 क्विंटल प्रति एकड़ होती है HD 2697: पौधे का कद 83-91 सैं.मी. होता है यह किस्म 128-133 दिनों में कटाई के लिए तैयार हो जाती है भारी ज़मीनें इस किस्म की खेती के लिए अच्छी रहती हैं इसके दाने मोटे सुनहरे रंग के होते हैं इसकी औसतन पैदावार 18-24 क्विंटल प्रति एकड़ होती है Raj 6560: यह किस्म सिंचित क्षेत्रों में उगाने के लिए अनुकूल है पौधे का कद 90-100 सैं.मी. होता है यह किस्म 130-135 दिनों में कटाई के लिए तैयार हो जाती है इसकी औसतन पैदावार 18-22 क्विंटल प्रति एकड़ होती है
Raj 3077: इस किस्म को वंडर गेहूं के नाम से जाना जाता है पौधे का कद 115-118 सैं.मी. होता है इसकी औसतन पैदावार 15-16 क्विंटल प्रति एकड़ होती है यह किस्म 126-134 दिनों में परिपक्व हो जाती है इसका प्रयोग मुख्य रूप से ब्रैड बनाने के लिए किया जाता है इसमें प्रोटीन की मात्रा 11-12.5 प्रतिशत होती है Raj 4079: यह किस्म 115-120 दिनों में कटाई के लिए तैयार हो जाती है इसके पौधे का कद 75-80 सैं.मी. होता है यह सामान्य और सिंचित हालातों में अच्छे परिणाम देती है यह गर्दन तोड़ के प्रतिरोधी किस्म है इसकी औसतन पैदावार 19-21 क्विंटल प्रति एकड़ होती है इसके दाने मोटे, मध्यम आकार के और सख्त होते हैं यह किस्म राजस्थान के गर्म जलवायु को सहने योग्य किस्म है और अच्छी उपज देती है
Raj 4037: इसके पौधे का कद 83-95 सैं.मी. होता है इसकी औसतन पैदावार 15-16 क्विंटल प्रति एकड़ होती है यह किस्म 120 दिनों में परिपक्व हो जाती है यह मुख्य रूप से ब्रैड बनाने के लिए उपयोग किया जाता है इसमें प्रोटीन की मात्रा 11-12 प्रतिशत होती है यह किस्म काली जंग और तने पर जंग के प्रतिरोधी है Raj 4120: यह किस्म 110-120 दिनों में कटाई के लिए तैयार हो जाती है इसके पौधे का कद 80-94 सैं.मी. होता है यह किस्म सामान्य और सिंचित हालातों में अच्छे परिणाम देती है इसका तना मजबूत होता है और गर्दन तोड़ के प्रतिरोधी होता है इसकी औसतन पैदावार 20-24 क्विंटल प्रति एकड़ होती है यह किस्म राजस्थान के गर्म जलवायु को सहने योग्य किस्म है और अच्छी उपज देती है DBW 17: इसके पौधे का कद 80-85 सैं.मी. होता है यह किस्म 130-132 दिनों में कटाई के लिए तैयार हो जाती है यह करनाल बंट के प्रतिरोधी किस्म है इसका तना मजबूत होता है जो कि यह दर्शाता है कि यह गर्दन तोड़ के प्रतिरोधी है इसके दाने मोटे, मध्यम आकार के और सख्त होते हैं यह किस्म सामान्य और सिंचित हालातों में अच्छे परिणाम देती है इसकी औसतन पैदावार 16-20 क्विंटल प्रति एकड़ होती है Raj 4238: यह किस्म 115-120 दिनों में कटाई के लिए तैयार हो जाती है इसके पौधे का कद 82-86 सैं.मी. होती है इसका तना मजबूत होता है जो कि फसल को गर्दन तोड़ से बचाता है यह करनाल बंट के प्रतिरोधी किस्म है इसके दाने मध्यम आकार के होते हैं और औसतन पैदावार 16-20 क्विंटल प्रति एकड़ होती है

Posted by rsc
Punjab
05-11-2019 08:29 AM
Jekar pashu nu milk fever hai tan uss nu Calcimust gel 300ml rojana 3 din deo ate Mifex botal 450ml lgwao, uss botal vich Tonophos injection 20ml ate Avil injection 10ml mix krke IV slow lgwao..

Posted by sushant
Maharashtra
05-11-2019 08:17 AM
BHARTIYA MANAV SWASTH EVAM SAMRADDHA SANSTHAN
बमोरिया मोती
सम्बर्धन केंद्र
( भारत का एक मात्र प्रशिक्षण केंद्र जहां देश विदेश से आते है लोग )
सुक्ष्म लघु मध्यम उद्यम भारत सरकार द्वारा पंजीकृत
कृषि मंत्री जी एवं मुख्या मंत्री जी द्वारा पुरुष्कृत
दैनिक भास्कर , राजिस्थान पत्रिका ,
सहारा समय ,बंसल NEWS आदि न्यूज़ चैनल द्वारा सत्याप.... (Read More)
BHARTIYA MANAV SWASTH EVAM SAMRADDHA SANSTHAN
बमोरिया मोती
सम्बर्धन केंद्र
( भारत का एक मात्र प्रशिक्षण केंद्र जहां देश विदेश से आते है लोग )
सुक्ष्म लघु मध्यम उद्यम भारत सरकार द्वारा पंजीकृत
कृषि मंत्री जी एवं मुख्या मंत्री जी द्वारा पुरुष्कृत
दैनिक भास्कर , राजिस्थान पत्रिका ,
सहारा समय ,बंसल NEWS आदि न्यूज़ चैनल द्वारा सत्यापित
मोती पालन से लाखो कैसे कमाए अब घर बैठे सीखे
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अगला प्रशिक्षण 9-10 NOV.
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Posted by Mangat
Punjab
05-11-2019 08:16 AM
Mangat ji lewa vdaun lai pashu nu suun ton 2 mahine pehla Vitum-H liquid 10-10ml swere sham dena suru krna chahida hai, hun tuci uss nu vdia hara chara deo, sahi dekhbhal kro ate suun ton badd Anabolite liquid 100-100ml swere sham ate Lactomax tablet 10 golia rojana 20 din tak deo, iss nal kamjori durr howegi ate dudh vdhh jawega..
Posted by Vishal RAJAN
Madhya Pradesh
05-11-2019 08:15 AM
Agronomy विज्ञान की वो शाखा है यहां मिट्टी प्रबंधन और फसल उत्पादन का काम होता है
Posted by Pushpendra Kumar
Uttar Pradesh
05-11-2019 08:11 AM
पुष्पेंद्र जी आप गेंहू की किस्मे जैसे WH 896: इस किस्म की सिंचित क्षेत्रों में समय पर बोने के लिए सिफारिश की गई है
PBW 373: यह अधिक उपज वाली किस्म है इसकी सिंचित क्षेत्रों में पिछेती बिजाई के लिए सिफारिश की गई है यह किस्म विभिन्न बीमारियों के प्रतिरोधक है
PBW 343: यह किस्म सिंचित और पिछेती बिजाई के क्षेत्रों के लिए .... (Read More)
पुष्पेंद्र जी आप गेंहू की किस्मे जैसे WH 896: इस किस्म की सिंचित क्षेत्रों में समय पर बोने के लिए सिफारिश की गई है
PBW 373: यह अधिक उपज वाली किस्म है इसकी सिंचित क्षेत्रों में पिछेती बिजाई के लिए सिफारिश की गई है यह किस्म विभिन्न बीमारियों के प्रतिरोधक है
PBW 343: यह किस्म सिंचित और पिछेती बिजाई के क्षेत्रों के लिए उपयुक्त है यह किस्म 130-135 दिनों में कटाई के लिए तैयार हो जाती है यह गर्दन तोड़, जल जमाव की स्थितियों के प्रतिरोधक किस्म है यह करनाल बंट के भी प्रतिरोधक और झुलस रोग को सहनेयोग्य किस्म है इसकी औसतन पैदावार 19 क्विंटल प्रति एकड़ होती है
HD 2643: यह किस्म सिंचित और पिछेती बिजाई के क्षेत्रों के लिए उपयुक्त है इस किस्म से अच्छी गुणवत्ता वाली रोटी बनती है यह पत्ता और धारीदार कुंगी के प्रतिरोधक और करनाल बंट को सहनेयोग्य किस्म है
UP 2425: यह सिंचित स्थितियों में पिछेती बिजाई के लिए उपयुक्त किस्म है
PBW-443: यह किस्म सिंचित हालातों में समय पर बोने के लिए उपयुक्त किस्म है
DBW-14: यह किस्म सिंचित हालातों में पिछेती बिजाई के लिए उपयुक्त है यह जल्दी पकने वाली किस्म है इसके दाने सख्त होते हैं
NW-2036: यह सिंचित हालातों में पिछेती बिजाई के लिए उपयुक्त किस्म है यह जल्दी पकने वाली किस्म है दूसरे शब्दों में, यह किस्म 108 दिनों में कटाई के लिए तैयार हो जाती है इसके दाने छोटे, सुनहरी और अर्द्ध सख्त होते हैं
MACS-6145: यह किस्म बारानी क्षेत्रों में समय पर बोने के लिए उपयुक्त है
HD-2824: यह किस्म सिंचित क्षेत्रों में समय पर बिजाई के लिए उपयुक्त है
PBW-502: यह किस्म पंजाब एग्रीकल्चर युनिवर्सिटी द्वारा विकसित की गई है यह किस्म सिंचित हालातों में समय पर बिजाई के लिए उपयुक्त है यह किस्म पत्ते और धारीदार कुंगी के प्रतिरोधक किस्म है
PDW-291: यह किस्म सिंचित हालातों में पिछेती बिजाई के लिए उपयुक्त किस्म है यह किस्म कुंगी, करनाल बंट और कांगियारी के प्रतिरोधक किस्म है
PBW-524: यह सिंचित हालातों में पिछेती बिजाई के लिए उपयुक्त किस्म है यह किस्म कुंगी, करनाल बंट और कांगियारी के प्रतिरोधक किस्म है
HD-2864: यह सिंचित हालातों में समय पर बिजाई के लिए उपयुक्त किस्म है यह किस्म पत्ते और धारीदार कुंगी के प्रतिरोधी और ताप को सहनेयोग्य किस्म है
HI-8627: यह किस्म बारानी क्षेत्रों में समय पर बिजाई के लिए उपयुक्त है यह धारीदार कुंगी और पैर गलन के प्रतिरोधक किस्म है
Ujiar(K-9006): यह किस्म सिंचित हालातों में समय पर बोने के लिए उपयुक्त है इसके दाने अर्द्ध सख्त और सुनहरी होते हैं यह किस्म करनाल बंट के प्रतिरोधक किस्म है
Posted by Ajmer singh
Punjab
05-11-2019 08:09 AM
ajmer ji kirpa karke swal vistar nal pucho ta jo tuhanu is bare poori jankari diti ja sake.dhanwad

Posted by gurbaj singh
Punjab
05-11-2019 08:01 AM
gurbaj ji the price of basmati is the decision of govt so we can t say anything this time.thank you

Posted by Aman
Punjab
05-11-2019 07:58 AM
aman ji kirpa karke isdi photo bhejo ta jo tuhanu is bare poori jankari diti ja sake.dhanwad

Posted by gurbaj singh
Punjab
05-11-2019 07:56 AM
gurbaj ji rate sarkar valo teh kite jande han is bare kuch nahi keha ja sakda.dhanwad

Posted by Jagdish Kumar kol
Madhya Pradesh
05-11-2019 07:55 AM
Jagdish Kumar kol ji Mushroom seed lene ke lia aap Mr. jai bhadouriya 8882876224 se samparak karsakte hai, Thankyou.
Posted by Shubham
Maharashtra
05-11-2019 07:52 AM
Shubhan ji aap 10 cow ke liye 1.5-2 ekad mai chara lgga skte hai, chara mai aap beersem, jayi, sarso, raai ghass, Lusan, maki J1006, bajra, jawar, makk chari, gini ghas lgga skde ho, yeh apne apne sme ke hisab se lgga skte hai, aur aap ek varr mai ekatha chara naa lgaya, pehle aap thodi jgah mai chara lgaye fir 15 din badd dusri jgah chara lgaye, iss trah apko pashu ke liye chare ki kami nahi aayegi..
Posted by खुमान सिंह कुशवाह
Madhya Pradesh
05-11-2019 07:49 AM
खुमान सिंह जी यह फंगस की वजह से होता है इसके लिए मैंकोजेब@4 ग्राम को प्रति लीटर पानी के हिसाब से स्प्रे करें धन्यवाद

Posted by rakesh kamboj
Haryana
05-11-2019 07:38 AM
उसे आप Lactomood होमियोपेथिक दवा की 10—10 बूंदें दिन में तीन बार दें और Leptaden गोलियां जो Alarsin कंपनी का प्रोडक्ट है इसकी 10—10 गोलियां सुबह शाम दें और Milkout पाउडर 2—2 चम्मच सुबह शाम दें इससे फर्क पड़ जाएगा.
Posted by rohit nagar
Madhya Pradesh
05-11-2019 07:31 AM
यह कई तरह की मिट्टी में उगाई जाती है इसकी पैदावार के लिए नमकीन, क्षारीय और पानी खड़ा होने वाली मिट्टी से बचाव करें यह बढ़िया निकास वाली मिट्टी जिसमे बढ़िया जैविक तत्व मौजूद हों, में बढ़िया परिणाम देती है इसके बढ़िया विकास के लिए मिट्टी का pH 5.5-7 होना चाहिए Drudriha Tulsi: यह मुख्य रूप से बंगाल, नेपाल, चटगांव और महाराष्ट्र क्ष.... (Read More)
यह कई तरह की मिट्टी में उगाई जाती है इसकी पैदावार के लिए नमकीन, क्षारीय और पानी खड़ा होने वाली मिट्टी से बचाव करें यह बढ़िया निकास वाली मिट्टी जिसमे बढ़िया जैविक तत्व मौजूद हों, में बढ़िया परिणाम देती है इसके बढ़िया विकास के लिए मिट्टी का pH 5.5-7 होना चाहिए Drudriha Tulsi: यह मुख्य रूप से बंगाल, नेपाल, चटगांव और महाराष्ट्र क्षेत्रों में पाई जाती है यह गले को सूखेपन से राहत देता है यह हाथों, पैरों और गठिया की सूजन से आराम देता है Ram/Kali Tulsi (Ocimum canum): यह चीन, ब्राज़ील, पूर्व नेपाल और साथ ही बंगाल, बिहार, चटगांव और भारत के दक्षिणी क्षेत्रों में पाई जाती है इसका तना जामुनी और पत्ते हरे रंग के और बहुत ज्यादा सुगंधित होते है इसमें उचित मात्रा में औषधीय गुण जैसे ऐज़ाडिरैकटिन, ऐंटीफंगल , ऐंटीबैक्टीरियल, और पाचन तंत्र को ठीक रखती है यह गर्म क्षेत्रों में बढ़िया उगता है Babi Tulsi: यह पंजाब से त्रिवेंद्रम, बंगाल और बिहार में भी पाई जाती है इसका पौधा 1-2 फीट लम्बा होता है पत्ते 1-2 इंच लम्बे, अंडाकार और नुकीले होते है इसके पत्तों का स्वाद लौंग की तरह और सब्जियों में स्वाद के लिए प्रयोग किया जाता है तुलसी की खेती के लिए, अच्छी तरह से शुष्क मिट्टी की मांग की जाती है मिट्टी के भुरभुरा होने तक हैरो के साथ खेत की जोताई करें, फिर रूड़ी की खाद मिट्टी में मिलाएं तुलसी की रोपाई सीड बैड पर करें फरवरी के तीसरे महीने में नर्सरी बैड तैयार करें पौधे के विकास के अनुसार, 4.5 x 1.0 x 0.2 मीटर के सीड बैड तैयार करें बीजों को 60x60 सैं.मी. के फैसले पर बोयें बीजों को 2 सैं.मी. की गहराई पर बोयें बिजाई के 6-7 हफ्ते बाद, फसल की रोपाई खेत में करें तुलसी की खेती के लिए 120 ग्राम बीजों का प्रयोग प्रति एकड़ में करें फसल को मिट्टी से पैदा होने वाली बीमारीयों से रोकथाम के लिए, बिजाई से पहले मैनकोजेब 5 ग्राम प्रति किलोग्राम से बीजों का उपचार करें फसल की बढ़िया पैदावार के लिए बिजाई से पहले 15 टन रूड़ी की खाद मिट्टी में डालें तुलसी के बीजों को तैयार बैडों के साथ उचित अंतराल पर बोयें मानसून आने के 8 हफ्ते पहले बीजों को बैड पर बोयें बीजों को 2 सैं.मी. की गहराई पर बोयें बिजाई के बाद, रूड़ी की खाद और मिट्टी की पतली परत बीजों पर बना दें इसकी सिंचाई फुवारा विधि द्वारा की जाती है रोपाई के 15-20 दिनों के बाद, नए पौधों को तंदरुस्त बनाने के लिए 2% यूरिया का घोल डालें 6 हफ्ते पुराने और 4-5 पत्तों के अंकुरण होने पर अप्रैल के महीने में नए पौधे तैयार होते है तैयार बैडों को रोपाई 24 घंटे पहले पानी लगाएं ताकि पौधों को आसानी से उखाड़ा जा सकें और रोपाई के समय जड़ें मुलायम और सूजी हुई हो खेत की तैयारी के समय, रूड़ी की खाद को मिट्टी में मिलाएं खाद के तौर पर नाइट्रोजन 48 किलो(यूरिया 104 किलो), फासफोरस 24 किलो(सिंगल सुपर फासफेट 150 किलो) और पोटाश 24 किलो(मिउरेट 40 किलो) प्रति एकड़ में डालें नए पौधे लगाने के समय नाइट्रोजन की आधी मात्रा और फासफेट पेंटोऑक्साइड की पूरी मात्रा शुरुआती समय में डालें Mn 50 पी पी एम कंसंट्रेशन और Co@100 पी पी एम कंसंट्रेशन सूक्ष्म-तत्व डालें बाकी की बची हुई नाइट्रोजन को 2 हिस्सों में पहली और दूसरी कटाई के बाद डालें खेत को नदीनों से मुक्त करने के लिए कसी की मदद से गोड़ाई करें नदीनों की रोकथाम कम न होने पर यह फसल को नुकसान पहुंचाते है रोपण के एक महीने बाद पहली गोड़ाई और पहली गोड़ाई के चार हफ्ते बाद दूसरी गोड़ाई करें रोपण के दो महीने बाद कसी से अनुकूल गोड़ाई करें गर्मियों में, एक महीने में 3 सिंचाइयां करें और बरसात के मौसम में, सिंचाई की आवश्यकता नहीं होती एक साल में 12-15 सिंचाइयां करनी चाहिए पहली सिंचाई रोपण के बाद करें और दूसरी सिंचाई नए पौधों के स्थिर होने पर करें 2 सिंचाइयां करनी आवश्यक है और बाकी की सिंचाई मौसम के आधार पर करें इसके मंडीकरण के लिए आप Aushadhiya kheti vikas sansthan 6268536795 से संपर्क कर सकते हैं
Posted by Surya Pratap Singh
Uttar Pradesh
05-11-2019 06:52 AM
surya ji aap isk uper quinalphos@4ml ko prati litre pani ke hisab se spray karen.dhanywad
Posted by nimma
Punjab
05-11-2019 06:49 AM
ਸ੍ਰੀ ਮਾਨ ਜੀ, HD 3086 (PusaGautam) : ਇਸ ਦਾ ਔਸਤਨ ਝਾੜ 23 ਕੁਇੰਟਲ ਪ੍ਰਤੀ ਏਕੜ ਹੁੰਦਾ ਹੈ ਇਹ ਪੱਤਿਆਂ ਦੇ ਪੀਲੇਪਣ ਅਤੇ ਭੂਰੇਪਣ ਦੀ ਬਿਮਾਰੀ ਤੋਂ ਰਹਿਤ ਹੁੰਦੀ ਹੈ ਵਧੀਆ ਕਿਸਮ ਦੇ ਬਰੈੱਡ ਬਣਾਉਣ ਦੇ ਸਾਰੇ ਗੁਣ/ਤੱਤ ਇਸ ਵਿਚ ਮੌਜੂਦ ਹਨ

Posted by sanjeet
Uttar Pradesh
05-11-2019 06:44 AM
Sanjeet ji yeh fungus ke karn ho raha hai iske liye aap carbendazim@4gram ko prati litre pani ke hisab se spray karen.dhanywad

Posted by manoj prajapati
Uttar Pradesh
05-11-2019 06:43 AM
Murgi ke chicks lene ke liye aap Sumit Kumar 8006000291, 7906547529 Sumit Kumar Poultry Farm se sampark kr skte hai..

Posted by Manpreet singh
Punjab
05-11-2019 05:39 AM
ਤੁਸੀ ਉਸ ਨੂੰ ਪੇਟ ਦੇ ਕੀੜਿਆਂ ਲਈ Easypet ਗੋਲੀਆਂ ਉਸਦੇ ਸਰੀਰ ਦੇ ਭਾਰ ਦੇ ਹਿਸਾਬ ਨਾਲ ਦਿਓ ਅਤੇ ਉਸ ਨੂੰ Sharkoferol pet liquid 10ml ਰੋਜਾਨਾ ਦਿਓ, ਬਾਕੀ ਉਸ ਨੂੰ ਵਧਿਆ ਫੀਡ ਦੇਣੀ ਸ਼ੁਰੂ ਕਰੋ ..

Posted by rajesh pandro
Madhya Pradesh
05-11-2019 05:35 AM

Posted by रू रूद्र सेन सिंह
Uttar Pradesh
05-11-2019 05:04 AM
फसल को खेत में लगाने के 10-15 दिन बाद 19:19:19 और सूक्ष्म तत्व 2.5-3 ग्राम प्रति लीटर पानी में मिलाकर स्प्रे करें

Posted by रू रूद्र सेन सिंह
Uttar Pradesh
05-11-2019 04:43 AM
Shri maan g gehu ki buwai October-November aur April mein harvesting ki jaati hai....

Posted by Suresh Vaishnav
Rajasthan
05-11-2019 12:52 AM
suresh ji kirpa karke swal vistar nal pucho ke tuc moringa tree bare ki jankari laina chahunde hota jo tuhanu is bare poori jankari diti ja sake.dhanwad

Posted by ਗੁਰਪਿੰਦਰ ਸਿੰਘ ਲਾਹੌਰੀਆ
Punjab
05-11-2019 12:30 AM
Gurpinder ji sahiwal cow da rate ate cow lenn lai tuci Gulam Ashraf 9915672525 Sahiwal dairy farm nal sampark kr skde ho..

Posted by keshu Ratiya
Gujarat
05-11-2019 12:06 AM
bhai sahib byane se pehle 2 mahine pehlan dudho chhod k rajwa hara chaara te 2kg feed rojana dyo byane k baad 1kg gahun ka dalia 500g gur ch rinh ke swer te itna hi shaam nu khuao Rajwa hara chaara te har 3kg dudh lai 1kg feed pao har 3 mahine baad pet ke kirhe nikalne ki dwaee deo

Posted by gurmindear singh
Punjab
04-11-2019 11:21 PM
ਸ੍ਰੀ ਮਾਨ ਜੀ ਕਣਕ ਦੇ ਵਿੱਚ DAP@55 ਕਿਲੋ ਪ੍ਰਤੀ ਏਕੜ ਪੈਂਦੀ ਹੈ
Posted by Raju.
Bihar
04-11-2019 11:10 PM
bhai sahib nazdik ke pashu palan adhikari or bank or krishi vigyan kendar se sampark karein

Posted by shailu
Madhya Pradesh
04-11-2019 11:05 PM
श्रीमान जी, आपके द्वारा बेजी गई ऑडियो साफ़ सुनाई नहीं दे रही है, कृपया आप इसे दुबारा रिकॉर्ड कर के भेजें, ताकि आपको उसका सही समाधान दिया जा सके, धन्यवाद

Posted by Beant somal
Punjab
04-11-2019 10:29 PM
benat ji jehde jga te beej ghat ugya hai othetuc dubara beejan di bijai karo.dhanwad
Posted by Deepak kumar
Haryana
04-11-2019 10:16 PM
मिट्टी की जांच के आधार पर खादों का प्रयोग करें मिट्टी की जांच की मदद से हम उचित खाद देकर मिट्टी में आवश्यक तत्वों कमी कमी को पूरा कर सकते हैं सिंचित क्षेत्रों में N:P:K@60:24:12 किलोग्राम प्रति एकड़ में यूरिया 130 किलोग्राम, एस एस पी 150 किलोग्राम और म्यूरेट ऑफ पोटाश 20 किलोग्राम प्रति एकड़ में डालें नाइट्रोजन की आधी मात.... (Read More)
मिट्टी की जांच के आधार पर खादों का प्रयोग करें मिट्टी की जांच की मदद से हम उचित खाद देकर मिट्टी में आवश्यक तत्वों कमी कमी को पूरा कर सकते हैं सिंचित क्षेत्रों में N:P:K@60:24:12 किलोग्राम प्रति एकड़ में यूरिया 130 किलोग्राम, एस एस पी 150 किलोग्राम और म्यूरेट ऑफ पोटाश 20 किलोग्राम प्रति एकड़ में डालें नाइट्रोजन की आधी मात्रा और फासफोरस और पोटाश की पूरी मात्रा बिजाई के समय डालें नाइट्रोजन की बाकी मात्रा को पहली सिंचाई के समय डालें असिंचित क्षेत्रों में N:P:K@12:6:0 यूरिया 26 किलो और एस एस पी 40 किलो प्रति एकड़ में प्रयोग करें नाइट्रोजन, पोटाश और फासफोरस की पूरी मात्रा बिजाई के समय डालें
फसल की पैदावार को बढ़ाने के लिए जिंक सलफेट 10 किलोग्राम प्रति एकड़ में डालें जिंक की कमी को जिंक सलफेट 0.5 प्रतिशत स्प्रे द्वारा पूरा किया जा सकता है 15 दिनों के अंतराल पर 2-3 स्प्रे करें
Posted by JAFAK KHAN
Uttar Pradesh
04-11-2019 10:02 PM
jafak ji aap malathion@2.5ml ko prati litre pani ke hisab se spray karen.dhanywad

Posted by shaad khan
Uttar Pradesh
04-11-2019 09:58 PM
बिजाई से 10 दिन पहले 20 टन रूड़ी की खाद डालें नाइट्रोजन 40 किलो(यूरिया 90 किलो), फासफोरस 20 किलो(सिंगल सुपर फासफेट 125 किलो) और पोटाश 20 किलो(मिउरेट ऑफ़ पोटाश 35 किलो) प्रति एकड़ डालें फासफोरस और पोटाश की पूरी मात्रा और नाइट्रोजन की आधी मात्रा रोपण के समय डालें बाकि बची हीउ नाइट्रोजन टॉप ड्रेसिंग (मिट्टी में मिलाना) के तौर प.... (Read More)
बिजाई से 10 दिन पहले 20 टन रूड़ी की खाद डालें नाइट्रोजन 40 किलो(यूरिया 90 किलो), फासफोरस 20 किलो(सिंगल सुपर फासफेट 125 किलो) और पोटाश 20 किलो(मिउरेट ऑफ़ पोटाश 35 किलो) प्रति एकड़ डालें फासफोरस और पोटाश की पूरी मात्रा और नाइट्रोजन की आधी मात्रा रोपण के समय डालें बाकि बची हीउ नाइट्रोजन टॉप ड्रेसिंग (मिट्टी में मिलाना) के तौर पर रोपण के चार हफ्ते बाद डालें
Posted by Shubham
Maharashtra
04-11-2019 09:50 PM
bhai sahib rajwa hara chaara 35-40 kg deo har 4kg dudh lai 1kg feed pao har 3 mahine baad pet ke kirhe nikalne ki dwaee deo
Posted by Mahaveer Yadav
Rajasthan
04-11-2019 09:41 PM
श्रीमान जी, इस फसल की खेती अलग-अलग मिट्टी की किस्मों में की जा सकती है जैसे कि रेतली, चिकनी, दोमट, काली, लाल मिट्टी, जिसमें पानी के निकास का सही प्रबंध हो इसकी अच्छी पैदावार के लिए इसे अच्छे निकास वाली रेतली मिट्टी में उत्तम जैविक तत्वों से उगाया जा सकता है अच्छे निकास वाली मिट्टी की पी एच 7-8.5 होनी चाहिए यह तेजा.... (Read More)
श्रीमान जी, इस फसल की खेती अलग-अलग मिट्टी की किस्मों में की जा सकती है जैसे कि रेतली, चिकनी, दोमट, काली, लाल मिट्टी, जिसमें पानी के निकास का सही प्रबंध हो इसकी अच्छी पैदावार के लिए इसे अच्छे निकास वाली रेतली मिट्टी में उत्तम जैविक तत्वों से उगाया जा सकता है अच्छे निकास वाली मिट्टी की पी एच 7-8.5 होनी चाहिए यह तेजाबी और खारी मिट्टी में भी उगने योग्य फसल है ज्यादा तेजाबी मिट्टी में खेती ना करें अगेती फसल के लिए हल्की मिट्टी लाभदायक है, जबकि अच्छी पैदावार के लिए चिकनी, दोमट और बारीक रेत वाली मिट्टी बहुत अच्छी है प्रसिद्ध किस्में :- Pusa Rubi,Pusa Early Dwarf,Punjab Chhuhara,Pusa 120,Roma Selection 120 टमाटर के बीजों को पहले नर्सरी में बोया जाता है और फिर हन्हें मुख्य खेत में रोपित किया जाता है मुख्य खेत की तैयार के लिए अच्छी जोताई और समतल मिट्टी की जरूरत होती है मिट्टी को भुरभुरा बनाने के लिए 4-5 बार जोताई करें फिर मिट्टी को समतल करने के लिए सुहागा फेरें आखिरी जोताई के समय गाय का गला हुआ गोबर 60 किलो को मिट्टी में अच्छी तरह मिलायें रोपाई के लिए 80-90 सैं.मी. चौड़े बैड तैयार करें बिजाई से एक महीना पहले मिट्टी को धूप में खुला छोड़ दें आवश्यक लंबाई और 80-90 सैं.मी. की चौड़ाई वाले बैडों पर टमाटर के बीजों को बोयें बिजाई के बाद बैडों को प्लास्टिक शीट से ढक दें और फूलों को पानी देने वाले डब्बे से रोज़ सुबह बैडों की सिंचाई करें रोगाणुओं के हमले से फसल को बचाने के लिए नर्सरी वाले बैडों को अच्छे नाइलोन के जाल से ढक दें पनीरी लगाने के 10-15 दिन बाद 19:19:19 के साथ सूक्ष्म तत्वों की 2.5-3 ग्राम प्रति लीटर पानी में मिलाकर स्प्रे करें पौधों को तंदरूस्त और मजबूत बनाने के लिए बिजाई के 20 दिन बाद लीहोसिन 1 मि.ली. प्रति लीटर पानी की स्प्रे करें प्रभावित पौधों को खेत में से उखाड़ दें ताकि पौधों का फासला सही रखा जा सके और निरोग पौधों को रोगाणुओं से भी बचाया जा सके रोगाणुओं से बचाव के लिए मिट्टी में नमी बनाये रखें यदि सूखा दिखे तो पौधों को रोपाई से पहले मैटालैक्सिल 2.5 ग्राम प्रति लीटर पानी में 2-3 बार भिगोयें बिजाई से 25-30 दिन बाद पनीरी वाले पौधे तैयार हो जाते हैं और इनके 3-4 पत्ते निकल आते हैं यदि पौधों की आयु 30 दिन से ज्यादा हो तो इसके उपचार के बाद इसे खेत में लगायें पनीरी उखाड़ने के 24 घंटे पहले बैडों को पानी लगायें ताकि पौधे आसानी से उखाड़े जा सकें बसंत के मौसम के लिए नर्सरी नवंबर-दिसंबर में तैयार करें जबकि सर्दियों में KE मौसम में सितंबर-अक्तूबर महीने में नर्सरी में बीजों को बोयें किस्म और विकास के ढंग मुताबिक 60x30 सैं.मी. या 75x60 सैं.मी. या 75x75 सैं.मी. का फासला रखें में छोटे कद वाली किस्म के लिए 75x30 सैं.मी. का फासला रखें और वर्षा वाले मौसम के लिए 120-150x30 सैं.मी. का फासला रखें नर्सरी में बीजों को 0-5 सैं.मी. गहराई में बोयें और मिट्टी से ढक दें पनीरी को उखाड़कर खेत में लगा दें एक एकड़ खेत में बिजाई के लिए 100-160 ग्राम बीज नए पौधे तैयार करने के लिए प्रयोग किए जाते हैं हाइब्रिड किस्मों के लिए 80-100 ग्राम बीज प्रति एकड़ में प्रयोग करें नाइट्रोजन 40-60 किलो (90-130 किलो यूरिया), फासफोरस 25 किलो (155 किलो एस एस पी) और पोटाश 25 किलो (42 किलो एम ओ पी) की मात्रा प्रति एकड़ में प्रयोग करें नए पौधों की रोपाई के 2-3 सप्ताह पहले फासफोरस और पोटाश की पूरी मात्रा और नाइट्रोजन की एक तिहाई मात्रा डालें बाकी बची नाइट्रोजन को दो भागों में बांटकर रोपाई 30 और 50 दिनों के बाद डालें लगातार गोडाई करें और जड़ों को मिट्टी लगाएं 45 दिनों तक खेत को नदीन रहित रखें यदि नदीन नियंत्रण से बाहर हो जायें तो यह 70-90 प्रतिशत पैदावार कम कर देंगे रोपाई से पहले मुख्य खेत में पैंडीमैथालीन 0.4 किलो को प्रति एकड़ में लगाएं यदि नदीनों की संख्या ज्यादा हो तो नदीनों के अंकुरण के बाद सैंकर 0.2 किलो की प्रति एकड़ में स्प्रे करें नदीनों को रोकने के साथ साथ मिट्टी के तापमान को कम करने के लिए मलचिंग भी प्रभावी तरीका है रोपाई के बाद दो से तीन दिन हल्की सिंचाई करें मिट्टी में नमी के आधार पर सर्दियों में 12 से 15 दिनों के अंतराल पर सिंचाई करें और गर्मियों में 6-7 दिनों के अंतराल पर सिंचाई करें फूल निकलने की अवस्था सिंचाई के लिए गंभीर होती हैं इस अवस्था में पानी की कमी से फूलों का गिरना बढ़ता है और फलों और उत्पादकता पर इसका गंभीर प्रभाव पड़ता है बहुत सारी जांचों के मुताबिक यह पता चला है कि हर पखवाड़े में आधा इंच सिंचाई करने से जड़ें ज्यादा फैलती हैं और इससे पैदावार भी अधिक हो जाती है अत्याधिक सिंचाई ना करें पनीरी लगाने के 70 दिन बाद पौधे फल देना शुरू कर देते हैं कटाई का समय इस बात पर निर्भर करता है कि फलों को दूरी वाले स्थानों पर लेकर जाना है या ताजे फलों को मंडी में ही बेचना है आदि पके हरे टमाटर जिनका 1/4 भाग गुलाबी रंग का हो, लंबी दूरी वाले स्थानों पर लेकर जाने के लिए प्रयोग किए जाते हैं ज्यादातर सारे फल गुलाबी या लाल रंग में बदल जाते हैं, पर सख्त गुद्दे वाले टमाटरों को नज़दीक की मंडी में बेचा जा सकता है अन्य उत्पाद बनाने और बीज तैयार करने के लिए पूरी तरह पके और नर्म गुद्दे वाले टमाटरों का प्रयोग किया जाता है कटाई के बाद आकार के आधार पर टमाटरों को छांट लिया जाता है इसके बाद टमाटरों को बांस की टोकरियों या लकड़ी के बक्सों में पैक कर लिया जाता है लंबी दूरी पर लिजाने के लिए टमाटरों को पहले ठंडा रखें ताकि इनके खराब होने की संभावना कम हो जाये पूरी तरह पके टमाटरों से जूस, सीरप और कैचअप आदि उत्पाद भी तैयार किए जाते हैं धन्यवाद

Posted by firoj
Madhya Pradesh
04-11-2019 09:38 PM

Posted by kulwant
Punjab
04-11-2019 09:31 PM
Kulwant ji, sava 1734 da jhaad 23-24 quintal prati acre de hisaab nal dasea ja reha hai, te ea kanak di variety peeli kungi ate macchr tele di pratirodhak hai dhanwad

Posted by sooraj kumar
Uttar Pradesh
04-11-2019 09:28 PM
Sooraj ji, uktha rog ki roktham ke liye ap folicur @ 200 ml, ya carbendazim @ 400 gm prati acre ke hisaab se spray karein, dhanywad
Posted by NirveshSingh
Uttar Pradesh
04-11-2019 09:23 PM
Nirvesh ji, yeh macchar ke hamle ki vajah se ho raha hai, iski roktham ke liye ap imidacloprid @ 60 ml prati acre ke hisaab se spray karein, dhanywad

Posted by Jagdish
Punjab
04-11-2019 09:17 PM
Jagdish ji, Punjab 88 is ready to harvest in 100days. It gives green pod yield of 62qtl/acre, Thank you
Posted by Arshad khan
Madhya Pradesh
04-11-2019 09:17 PM
खान जी इसके लिए common crop fish 500 पुंग छोड सकते है

Posted by sehbaj
Punjab
04-11-2019 09:15 PM
BhaaG isnu rajwa hara chaara te 1kg feed pao har 3 mahine baad malap rehat karo
Posted by Balvir Singh
Punjab
04-11-2019 09:10 PM
balvir ji Punjab vich adrak di kheti di university valo sifarish nahi kiti jandi.dhanwad
Posted by Ravi
Rajasthan
04-11-2019 09:06 PM
असली केसर सिर्फ जम्मू कश्मीर, ईरान और अफगानिस्तान में ही हो सकता है, यह कुसुम है, इसकी भी कई दवाई बनती है, यदि कोई और छक है तो जम्मू कश्मीर के इस किसान से बात करें, जिसके दादे, पड़दादे भी केसर की खेती करते थे और यह भी केसर की खेती करते है Javid Ahmed- 95964 93260 बाकि आप यह वीडियो देखें https://www.youtube.com/watchv=vl7c6L3ETnQ&t=8s बाकि यदि फिर भी यकीन नहीं .... (Read More)
असली केसर सिर्फ जम्मू कश्मीर, ईरान और अफगानिस्तान में ही हो सकता है, यह कुसुम है, इसकी भी कई दवाई बनती है, यदि कोई और छक है तो जम्मू कश्मीर के इस किसान से बात करें, जिसके दादे, पड़दादे भी केसर की खेती करते थे और यह भी केसर की खेती करते है Javid Ahmed- 95964 93260 बाकि आप यह वीडियो देखें https://www.youtube.com/watchv=vl7c6L3ETnQ&t=8s बाकि यदि फिर भी यकीन नहीं है तो तो आप अमृतपाल सिंह बराड़ प्रोफेसर, पीएयू लुधियाना इस वीडियो संबंधी विचार पड़ सकते हैं, यह फसल केसर की नहीं है, यह फसल कसुंबडे की है, इसे अंग्रेजी में Safflower कहते है, और विज्ञानं में इसे Carthamus tinctorius कहते है
Posted by Raju.
Bihar
04-11-2019 09:04 PM
राजू जी यह यूरिया खेत में डालने वाला ही होता है यूरिया के साथ सोध करते समय एक बात का ध्यान रखे कि यूरिया की मात्रा ज्यादा नहीं होनी चाहिए नहीं तो इसका नुक्सान हो सकता है धन्यवाद

Posted by bahadar Singh
Punjab
04-11-2019 09:03 PM
bahadar ji kripya aap iska poora nam btaye taki aapko iske bare men poori jankari di ja sake.dhanywad

Posted by Rajesh Gupta
Delhi
04-11-2019 09:02 PM
बकरी पालन बहुत ही लाभकारी काम है शुरूआत करने के लिए आप 10 बकरियों और 2 बकरे के साथ कर सकते हैं इन्हें खुराक कम चाहिए इसलिए इन्हें आसानी से पाल सकते हैं ये हर प्रकार के मौसम में पाली जा सकती हैं बकरियां 12-14 महीने में बच्चे देना शुरू कर देती है बकरी का गर्भ समय 150 दिन का होता है और साल में 1-5 बच्चे देती है साल में दो बच्.... (Read More)
बकरी पालन बहुत ही लाभकारी काम है शुरूआत करने के लिए आप 10 बकरियों और 2 बकरे के साथ कर सकते हैं इन्हें खुराक कम चाहिए इसलिए इन्हें आसानी से पाल सकते हैं ये हर प्रकार के मौसम में पाली जा सकती हैं बकरियां 12-14 महीने में बच्चे देना शुरू कर देती है बकरी का गर्भ समय 150 दिन का होता है और साल में 1-5 बच्चे देती है साल में दो बच्चे देना आम बात है बकरियां 8-10 वर्ष तक बच्चे देती हैं और अपन गिनती को तेजी से बढ़ा लेती हैं आप बारबरी,बीटल, सिरोही जैसी नसल पाल सकते हैं इसकी ट्रेनिेंग के लिए आप अपने कुषि विज्ञान केंद्र से संपर्क करे या फिर जो बकरी पालन का व्यवसाय कर रहा कोई किसान उसका फार्म स्वंय जाकर देखकर आयें तो और भी बारीकियों का पता चल जायेगा, आप बीटल नस्ल रख सकते है क्योंकि ये नस्ल मीट और दूध दोंनो कामों के लिए अच्छी रहती है..

Posted by Harveer singh
Uttar Pradesh
04-11-2019 08:57 PM
श्रीमान जी, गेंदे की खेती करना चाहते है से मिट्टी की व्यापक किस्मों में उगाया जा सकता है पर यह अच्छे जल निकास वाली उपजाऊ मिट्टी में उगाने पर अच्छे परिणाम देती है मिट्टी अच्छे निकास वाली होनी चाहिए क्योंकि यह फसल जल जमाव वाली मिट्टी में स्थिर नहीं रह सकती मिट्टी की pH 6.5 से 7.5 होनी चाहिए तेजाबी और खारी मिट्टी इस.... (Read More)
श्रीमान जी, गेंदे की खेती करना चाहते है से मिट्टी की व्यापक किस्मों में उगाया जा सकता है पर यह अच्छे जल निकास वाली उपजाऊ मिट्टी में उगाने पर अच्छे परिणाम देती है मिट्टी अच्छे निकास वाली होनी चाहिए क्योंकि यह फसल जल जमाव वाली मिट्टी में स्थिर नहीं रह सकती मिट्टी की pH 6.5 से 7.5 होनी चाहिए तेजाबी और खारी मिट्टी इसकी खेती के लिए अनुकूल नहीं है फ्रैंच गेंदे की किस्म हल्की मिट्टी में अच्छी वृद्धि करती है जबकि अफ्रीकी गेंदे की किस्म उच्च जैविक खाद वाली मिट्टी में अच्छी वृद्धि करती है प्रसिद्ध किस्में :- African Marigold: इस किस्म की फसल 90 सैं.मी. तक लम्बी होती है इसके फूल बड़े आकार के और लैमन, पीले, सुनहरे, संतरी और गहरे पीले रंग के होते हैं यह लम्बे समय की किस्म है इसकी अन्य किस्में जैसे Giant Double African Orange, Crown of Gold, Giant Double African Yellow, Chrysanthemum Charm, Golden Age, Cracker Jack आदि हैं French Marigold: यह छोटे कद की जल्दी पकने वाली किस्में हैं इसके फूल छोटे आकार के और पीले, संतरी, सुनहरे पीले, लाल जंग और महोगनी रंग के होते हैं इसकी अन्य किस्में जैसे Rusty Red, Butter Scotch, Red Borcade, Star of India, Lemon drop आदि हैं Pusa Basanti Gainda: यह लम्बे समय की किस्म है इसका पौधा 58.80 सैं.मी. लम्बा और गहरे हरे रंग के पत्ते होते हैं इसके फूल सल्फर पीले, दोहरे और कारनेशन किस्म के होते हैं Pusa Narangi Gainda: फूल निकलने के लिए 125-136 दिनों की आवश्यकता होती है इसका पौधा लम्बा और कद में 73.30 सैं.मी. का होता है और पत्ते गहरे हरे रंग के होते हैं इसके फूल संतरी रंग के और कारनेशन किस्म के होते हैं फूल घने और दोहरी परत वाले होते हैं इसके ताजे फूलों की पैदावार 140 क्विंटल प्रति एकड़ होती है मिट्टी के भुरभुरा होने तक खेत की जोताई करें मिट्टी की उपजाऊ शक्ति बढ़ाने के लिए आखिरी जोताई के समय 250 क्विंटल रूड़ी की खाद और अच्छी तरह से गला हुआ गाय का गोबर मिट्टी में मिलायें गेंदे की बिजाई एक वर्ष में कभी भी की जा सकती है बारिश के मौसम में इसकी बिजाई मध्य जून से मध्य जुलाई में करें सर्दियों में इसकी बिजाई मध्य सितंबर से मध्य अक्तूबर में पूरी कर लें नर्सरी बैड 3x1 मीटर आकार के तैयार करें गाय का गला हुआ गोबर मिलायें बैडों में नमी बनाए रखने के लिए पानी दें सूखे फूलों का चूरा करें और उनका कतार या बैड पर छिड़काव करें जब पौधों का कद 10-15 सैं.मी. हो जाये, तब वे रोपाई के लिए तैयार होते हैं फैंच किस्म को 35x35 सैं.मी. और अफ्रीकी किस्म को 45x45 सैं.मी. के फासले पर रोपाई करें नर्सरी बैड पर बीजों का छिड़काव करें बिजाई के लिए पनीरी ढंग का प्रयोग किया जाता है एक एकड़ खेत के लिए 600 से 800 ग्राम बीजों की आवश्यकता होती है जब फसल 30-45 दिन की हो जाए, तब पौधे के सिरे से उसे काट दें इससे पौधे को झाड़ीदार और घना होने में मदद मिलती है, इससे फूलों की गुणवत्ता और अच्छा आकार भी प्राप्त होता है बिजाई से पहले बीजों को एजोसपीरियम 200 ग्राम को 50 मि.ली. धान के चूरे में मिलाकर उपचार करें शुरूआती खुराक के तौर पर अच्छी वृद्धि के लिए नाइट्रोजन 32 किलो (यूरिया 70 किलो), फासफोरस 16 किलो (एस एस पी 100 किलो), पोटाश 32 किलो (म्यूरेट ऑफ पोटाश 53 किलो) प्रति एकड़ में डालें मिट्टी की किस्म के अनुसार खाद की खुराक बदल दें सही खुराक देने के लिए मिट्टी की जांच करवायें और उसके आधार पर खुराक दें नदीनों की संख्या के आधार पर गोडाई करें खेत में रोपाई के बाद तुरंत सिंचाई करें कली बनने से लेकर कटाई तक की अवस्था सिंचाई के लिए बहुत महत्तवपूर्ण होती है अप्रैल से जून के महीने में 4-5 दिनों के अंतराल पर लगातार सिंचाई करना आवश्यक होता है किस्म के आधार पर गेंदा 2 से 2.5 महीने में कटाई के लिए तैयार हो जाते हैं फ्रैंच गेंदे की किस्म 1.5 महीने में कटाई के लिए तैयार हो जाती है जबकि अफ्रीकी गेंदे की किस्म दो महीने में तैयार हो जाती है जब गेंदे का पूरा आकार विकसित हो जाये तब उसे तोड़ लें कटाई सुबह के समय और शाम के समय करें फूलों की तुड़ाई से पहले खेत को सिंचित करना चाहिए इससे फूलों की गुणवत्ता लंबे समय तक बनी रहती है इसे आप अपनी नजदीकी फूल मंडी में बेच कर इसे अपनी आय का साधन बना सकते है इसका बीज आप कृषि यूनिवर्सिटी से ले सकते है या नजदीकी नर्सरी से ले सकते है धन्यावद
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