
Posted by kamlesh
Uttar Pradesh
05-11-2019 01:19 PM
kamlesh ji kripya aap swal vistar se pooche ke aap iske beej ke rate ke bare men jankari lena chahte ya isko bechne ke bare men jankari lena chahte hai taki aapko iske bare men poori jankari di ja sake.dhanywad
Posted by Harpreet Singh Grewal
Punjab
05-11-2019 01:15 PM
ਸ਼੍ਰੀਮਾਨ ਜੀ ਕਿਰਪ ਕਰ ਕੇ ਕਿਸਮ ਦਾ ਪੂਰਾ ਨਾਮ ਦੱਸੋ ਤਾਂਜੋ ਤੁਹਾਨੂੰ ਉਸ ਬਾਰੇ ਪੂਰੀ ਜਾਣਕਾਰੀ ਦਿਤੀ ਜਾ ਸਕੇ , ਧੰਨਵਾਦ
Posted by Ravendra Sen
Uttar Pradesh
05-11-2019 01:11 PM
रविन्दर जी, पश्चिमी यू पी में, सिंचित और सामान्य बिजाई स्थितियों में 1 नवंबर से 15 नवंबर तक बिजाई पूरी कर लें और पिछेती बिजाई की स्थितियों में 1 से 25 दिसंबर तक बिजाई पूरी कर लें पूर्वी यू पी के लिए, सिंचित और सामान्य बिजाई का उचित समय 1 नवंबर से 15 नवंबर तक है, जबकि पिछेती बिजाई के लिए 1 से 20 दिसंबर का समय उचित है ऊंचे .... (Read More)
रविन्दर जी, पश्चिमी यू पी में, सिंचित और सामान्य बिजाई स्थितियों में 1 नवंबर से 15 नवंबर तक बिजाई पूरी कर लें और पिछेती बिजाई की स्थितियों में 1 से 25 दिसंबर तक बिजाई पूरी कर लें पूर्वी यू पी के लिए, सिंचित और सामान्य बिजाई का उचित समय 1 नवंबर से 15 नवंबर तक है, जबकि पिछेती बिजाई के लिए 1 से 20 दिसंबर का समय उचित है ऊंचे पहाड़ी क्षेत्रों के लिए, सिंचित और सामान्य बिजाई का उचित समय अक्तूबर के दूसरे पखवाड़े से लेकर नवंबर का पहला पखवाड़ा है जबकि पिछेती बिजाई के लिए 1 दिसंबर से 20 दिसंबर का समय उचित है निचले पहाड़ी क्षेत्रों के लिए, सिंचित और सामान्य बिजाई का उचित समय अक्तूबर के आखिरी सप्ताह से लेकर मध्य नवंबर तक का है जबकि पिछेती बिजाई के लिए नवंबर का दूसरा पखवाड़ा उचित समय है सामान्य बिजाई के लिए कतारों में 20-22-5 सैं.मी. के फासले की सलाह दी जाती है यदि बिजाई देरी से करनी हो तो 15-18 सैं.मी. का फासला होना चाहिए लंबी किस्मों के लिए 6-7 सैं.मी. की गहराई का प्रयोग करें जबकि अन्य किस्मों के लिए 5-6 सैं.मी. की गहराई का प्रयोग करें बिजाई की विधि बीज ड्रिल , बुरकाव विधि छोटे आकार की किस्मों के लिए 40 किलो बीज प्रति एकड़ में प्रयोग करें और मोटे किस्म के बीजों के लिए 50 किलो बीज प्रति एकड़ में प्रयोग करें यदि पिछेती बिजाई करनी हो तो 60 किलो बीज प्रति एकड़ में प्रयोग करें बिजाई से पहले बीज साफ और छांटे हुए होने चाहिए बीजों को दीमक, झूठी कांगियारी से बचाने के लिए बिजाई से पहले क्लोरपाइरीफॉस 4 मि.ली. या टैबुकोनाज़ोल 2 डी एस 1.5-1.87 ग्राम या कार्बेनडाज़िम या थीरम 2 ग्राम से प्रति किलो बीज का उपचार करें रासायनिक उपचार के बाद ट्राइकोडरमा विराइड 1.15 प्रतिशत डब्लयु पी 4 ग्राम से प्रति किलो बीज का उपचार करें सिंचित क्षेत्रों के लिए, नाइट्रोजन 60 किलो (यूरिया 130 किलो), फासफोरस 24 किलो (एस एस पी 150 किलो), पोटाश 12 किलो (म्यूरेट ऑफ पोटाश 20 किलो) प्रति एकड़ में डालें नाइट्रोजन की आधी मात्रा और फासफोरस और पोटाश की पूरी मात्रा बिजाई के समय डालें बाकी नाइट्रोजन को पहली सिंचाई के समय डालें बारानी क्षेत्रों के लिए, नाइट्रोजन 24 किलो (यूरिया 52 किलो), फासफोरस 12 किलो (एस एस पी 75 किलो), पोटाश 8 किलो (म्यूरेट ऑफ पोटाश 15 किलो) प्रति एकड़ में डालें नाइट्रोज, फासफोरस और पोटाश की पूरी मात्रा बिजाई के समय डालें सिंचित क्षेत्रों में पिछेती बिजाई के लिए, नाइट्रोजन 50 किलो (यूरिया 110 किलो), फासफोरस 12 किलो (एस एस पी 75 किलो), पोटाश 16 किलो (म्यूरेट ऑफ पोटाश 27 किलो) प्रति एकड़ में डालें नाइट्रोजन की एक तिहाई मात्रा और फासफोरस और पोटाश की पूरी मात्रा बिजाई के समय डालें बाकी बची नाइट्रोजन की दो तिहाई मात्रा बिजाई के 35-40 दिनों के बाद डालें धन्यवाद

Posted by Harjinder Singh
Punjab
05-11-2019 01:11 PM
Harjinder ji isde lai tuci GADVASU VETERINARY UNIVERSITY LUDHIANA nal iss no. 0161 2553364, 2414026 te sampark kr skde ho.

Posted by Mr NK Sahu
Madhya Pradesh
05-11-2019 12:46 PM
कड़कनाथ मध्य प्रदेश की नसल है इस नसल की मलकीयत के लिए छत्तीसगढ़ और मध्य प्रदेश दोनों राज्यों में केस चलता रहा पर मध्य प्रदेश केस जीत गया जिस कारण यह अब मध्य प्रदेश की प्योर नसल है बहुत सारे लोग कहते हैं कि इसका खून भी काला होता है और अंडे भी काले होते हैं पर यह सच नहीं है इसकी त्वचा काली चमकीली होती है, कलगी भी .... (Read More)
कड़कनाथ मध्य प्रदेश की नसल है इस नसल की मलकीयत के लिए छत्तीसगढ़ और मध्य प्रदेश दोनों राज्यों में केस चलता रहा पर मध्य प्रदेश केस जीत गया जिस कारण यह अब मध्य प्रदेश की प्योर नसल है बहुत सारे लोग कहते हैं कि इसका खून भी काला होता है और अंडे भी काले होते हैं पर यह सच नहीं है इसकी त्वचा काली चमकीली होती है, कलगी भी काली होती है और इसकी चोंच और जीभ भी काले रंग की होती है अंडे देसी अंडों की तरह होते हैं और खून लाल से थोड़ा गहरा लाल होता है कुछ लोगों का कहना है कि इसे मीट के लिए साफ करना मुश्किल है और कोई आसानी से नहीं काट सकता और बाल उतारने के लिए इसे जीवित ही उबलते पानी में फेंकना पड़ता है पर इस बात में कोई सच्चाई नहीं है इसके अंडे में प्रोटीन की मात्रा ज्यादा होती है और फैट बिल्कुल कम होती है शूगर के मरीज़ों के लिए भी यह फायदेमंद है इसके चिकन का 800 रूपये किलो तक रेट है और छोटे बच्चे यदि मध्य प्रदेश से मंगवाते हैं तो एक 90—100 रूपये प्रति बच्चा आपको मिलेगा इसका अंडा 45—50 रूपये प्रति अंडा सेल हो जाता है 3 महीने तक एक बच्चे के पालन पर खर्चा 150 रूपये होता है और जब चूज़े बड़े हो जाते हैं तो 1500 रूपये आमदन हो जाती है इसे फीड नॉर्मल ब्रॉयलर वाली दे सकते हैं तो इसके साथ पालक भी खिला सकते हैं जिसमें आयरन होता है जो इसके लिए फायदेमंद होता है मध्य प्रदेश में बहुत सारे कड़कनाथ मुर्गे के फार्म हैं और इसलिए बहुत सारी कंपनियां कॉन्ट्रेक्ट करती हैं और अब ये कंपनियां पंजाब की तरफ भी अपना काम बढ़ा रही हैं सबसे पहले सोचने वाली बात यह है कि यदि ये कंपनियां हमें 35 रूपये का अंडा दे रही हैं तो हमसे 50 रूपये प्रति अंडा कैसे खरीदेंगी इसलिए बच्चे खरीदे से पहले पूरी जानकारी खरीदें क्योंकि कई लोगों के साथ यह धोखा हो रहा है कि कई फार्म वाले काली देसी ब्रॉयलर मुर्गी लेकर उससे कड़कनाथ का क्रॉस करवा लेते हैं जिसका पता दो महीने के बाद लगता है जब बच्चों की कलगी आ जाती है क्रॉस नसल के बच्चों की कलगी लाल होती है वे प्योर कड़कनाथ नहीं होते इसलिए यह ज़रूर चैक कर लें आपने अगर कड़कनाथ के चूजे खरीदने है तो आप Sumit Kumar 8006000291, 7906547529 Sumit Kumar Poultry Farm से सम्पर्क करे, इसकी ट्रेनिंग के लिए आप अपने नज़दीकी कृषि विज्ञान केन्द्र से संपर्क करें वहां से आप ट्रेनिंग ले सकते है धन्यवाद

Posted by Santhosh
Telangana
05-11-2019 12:43 PM
BHARTIYA MANAV SWASTH EVAM SAMRADDHA SANSTHAN
बमोरिया मोती
सम्बर्धन केंद्र
( भारत का एक मात्र प्रशिक्षण केंद्र जहां देश विदेश से आते है लोग )
सुक्ष्म लघु मध्यम उद्यम भारत सरकार द्वारा पंजीकृत
कृषि मंत्री जी एवं मुख्या मंत्री जी द्वारा पुरुष्कृत
दैनिक भास्कर , राजिस्थान पत्रिका ,
सहारा समय ,बंसल NEWS आदि न्यूज़ चैनल द्वारा सत्याप.... (Read More)
BHARTIYA MANAV SWASTH EVAM SAMRADDHA SANSTHAN
बमोरिया मोती
सम्बर्धन केंद्र
( भारत का एक मात्र प्रशिक्षण केंद्र जहां देश विदेश से आते है लोग )
सुक्ष्म लघु मध्यम उद्यम भारत सरकार द्वारा पंजीकृत
कृषि मंत्री जी एवं मुख्या मंत्री जी द्वारा पुरुष्कृत
दैनिक भास्कर , राजिस्थान पत्रिका ,
सहारा समय ,बंसल NEWS आदि न्यूज़ चैनल द्वारा सत्यापित
मोती पालन से लाखो कैसे कमाए अब घर बैठे सीखे
WHATAPP FOR ONLINE TRAINING 9770085381 ( TEXT - ONLINE TRAINING )
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अगला प्रशिक्षण 9-10 NOV.
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Registration Shulk 100/-
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Posted by Mahaveer Mahaveer singh
Rajasthan
05-11-2019 12:41 PM
इसे मिट्टी की कई किस्मों में उगाया जा सकता है पर यह अच्छे निकास वाली रेतली दोमट मिट्टी में उगाने पर अच्छे परिणाम देती है मिट्टी की पी एच 4.7-7.7 होनी चाहिए मिट्टी में नाइट्रोजन की उच्च मात्रा ईसबगोल की रोपाई के लिए अच्छी होती है RI-87, RI-89, AMB-2, MI-4, TS-1-10, EC 124345 मिट्टी के भुरभुरा होने तक खेत की जोताई करें आखिरी जोताई के समय अच.... (Read More)
इसे मिट्टी की कई किस्मों में उगाया जा सकता है पर यह अच्छे निकास वाली रेतली दोमट मिट्टी में उगाने पर अच्छे परिणाम देती है मिट्टी की पी एच 4.7-7.7 होनी चाहिए मिट्टी में नाइट्रोजन की उच्च मात्रा ईसबगोल की रोपाई के लिए अच्छी होती है RI-87, RI-89, AMB-2, MI-4, TS-1-10, EC 124345 मिट्टी के भुरभुरा होने तक खेत की जोताई करें आखिरी जोताई के समय अच्छी तरह से गला हुआ गाय का गोबर 40-48 किलो प्रति एकड़ में डालें मिट्टी को भूमि के आकार में 8-12 मीटर x मीटर में विभाजित करें ईसबगोल की बिजाई के लिए उपयुक्त समय अक्तूबर से नवंबर का महीना होता है पिछेती बिजाई (दिसंबर के पहले पखवाड़े के बाद) ना करें क्योंकि यह पैदावार में कमी को बढ़ाता है पौधे से पौधे में 15 सैं.मी. फासले का प्रयोग करें बीजों को 1-2 सैं.मी. की गहराई में बोयें बीजों को बोने के लिए बुरकाव ढंग या कतार में बिजाई ढंग का प्रयोग किया जाता है बुरकाव करने के बाद बिजाई के समय झाड़ू की मदद से बीजों को मिट्टी में मिला दें

Posted by gurbaj singh
Punjab
05-11-2019 12:38 PM
Gurbaj ji tuhade sare swala de jwab ditte gye hai tuci App vich apne swala de jwab dekh skde ho..
Posted by Shiv Charan Dhabhai
Rajasthan
05-11-2019 12:34 PM
बकरी पालन बहुत ही लाभकारी काम है शुरूआत करने के लिए आप 10 बकरियों और 2 बकरे के साथ कर सकते हैं इन्हें खुराक कम चाहिए इसलिए इन्हें आसानी से पाल सकते हैं ये हर प्रकार के मौसम में पाली जा सकती हैं बकरियां 12-14 महीने में बच्चे देना शुरू कर देती है बकरी का गर्भ समय 150 दिन का होता है और साल में 1-5 बच्चे देती है साल में दो बच्.... (Read More)
बकरी पालन बहुत ही लाभकारी काम है शुरूआत करने के लिए आप 10 बकरियों और 2 बकरे के साथ कर सकते हैं इन्हें खुराक कम चाहिए इसलिए इन्हें आसानी से पाल सकते हैं ये हर प्रकार के मौसम में पाली जा सकती हैं बकरियां 12-14 महीने में बच्चे देना शुरू कर देती है बकरी का गर्भ समय 150 दिन का होता है और साल में 1-5 बच्चे देती है साल में दो बच्चे देना आम बात है बकरियां 8-10 वर्ष तक बच्चे देती हैं और अपन गिनती को तेजी से बढ़ा लेती हैं आप बारबरी, ब्लैक बंगाल, जैसी नसल पाल सकते हैं इसकी ट्रेनिेंग के लिए आप अपने कुषि विज्ञान केंद्र से संपर्क करे या फिर जो बकरी पालन का व्यवसाय कर रहा कोई किसान उसका फार्म स्वंय जाकर देखकर आयें तो और भी बारीकियों का पता चल जायेगा, इसके इलावा आप बीटल नस्ल का रख सकते है क्योंकि ये नस्ल मीट और दूध दोंनो कामों के लिए अच्छी रहती है..

Posted by gurbaj singh
Punjab
05-11-2019 12:27 PM
gurbaj ji tuc isdi varto kar sakde ho isd akoi side effect nahi hai.dhanwad

Posted by Badal Badal
Madhya Pradesh
05-11-2019 12:16 PM
बदल जी कृपया आप इसकी फोटो भेजे ताकि आपको इसके बारे में पूरी जानकारी दी जा सके धन्यवाद
Posted by saddam Husain
Uttar Pradesh
05-11-2019 12:16 PM
saddam ji, yeh fungus ka hamla hua hai, ap eski rokthm ke liye mencozeb @ 4g prati liter pani ke hisaab se spray karein, dhanywad

Posted by Aman
Punjab
05-11-2019 12:08 PM
Aman ji yeh temprature ke karn ho raha hai . hawa jeyada ho sakti hai. yeh sab kuch check kare ji.

Posted by Rakesh bairwa
Rajasthan
05-11-2019 12:06 PM
मोती की खेती एक बहुत ही अच्छा व्यवसाय है इस व्यवसाय को शुरू करने के लिए सबसे जरुरी है इसकी ट्रेनिंग, क्योकि इसमें बहुत सी ऐसी बारीकियें होती है जो हमें प्रेक्टिकल ट्रेनिंग में ही सीखने को मिलती है अगर आप इसकी ट्रेनिंग लेना चाहते है तो आप ग्लिटराटी पर्ल फार्मिंग ट्रेनिंग केंद्र प्रशिक्षण कार्य कर्म आयोजि.... (Read More)
मोती की खेती एक बहुत ही अच्छा व्यवसाय है इस व्यवसाय को शुरू करने के लिए सबसे जरुरी है इसकी ट्रेनिंग, क्योकि इसमें बहुत सी ऐसी बारीकियें होती है जो हमें प्रेक्टिकल ट्रेनिंग में ही सीखने को मिलती है अगर आप इसकी ट्रेनिंग लेना चाहते है तो आप ग्लिटराटी पर्ल फार्मिंग ट्रेनिंग केंद्र प्रशिक्षण कार्य कर्म आयोजित किया जा रहा है प्रशिक्षण कार्य कर्म में भाग लेने के लिए नीचे दिए गए नम्बर पर आज ही संपर्क करें और Rs 250/ से अपना रजिस्ट्रेशन करवाए अचल सिंह (फाउंडर )- 9711858258. धन्यवाद
Posted by Nishant Kumar
Bihar
05-11-2019 12:02 PM
nishant jio yeh keet ke hamle ke karn hota hai iske liye aap quinalphos@4ml ko prati litre pani ke hisab se spray karen.dhanywad

Posted by tinku
Punjab
05-11-2019 11:58 AM
Tinku ji murgia di feed teyar karan lai 25 kg makki, 20 kg kanak, 5-6 kg soeyabeen khal te thoda mineral mixture mix karke morning te evening nu feed murgiya nu pao. ehna nu rajvi feed deyo jinni eh kha sakan
Posted by gurwinder kaur
Punjab
05-11-2019 11:53 AM
Ehna di varto sojish, pain ate fever vich kiti jndi hai...
Posted by Ramesh
Rajasthan
05-11-2019 11:50 AM
ramesh ji kripya swal vistar se pooche taki aapko iske bare men poori jankari di ja sake,dhanywad

Posted by भावेश पटेल
--
05-11-2019 11:37 AM
भावेश जी कृपया आप बताये के आप कोनसी फसल के मंडी भाव के बारे में जानकारी लेना चाहते है ताकि आपको इसके बारे में पूरी जानकारी दी जा सके धन्यवाद
Posted by Ramesh
Rajasthan
05-11-2019 11:30 AM
Ramesh ji, makka ka bhav is samay 1760 rupay prati quintal chal raha hai, dhanywad
Posted by Ramesh
Rajasthan
05-11-2019 11:28 AM
Ramesh ji makki ka bhav is samay 1760 rupay prati quintal chal raha hai, dhanywad

Posted by saraj khan sindhi
Rajasthan
05-11-2019 11:28 AM
Saraj ji kripya aap apne swal ke sath usse breed ki photo v upload kren tan jo apko uske vare mai sahi jankari di jaa skee..
Posted by Vijay Singh
Rajasthan
05-11-2019 11:27 AM
shrimaan g gehu mein total @110 kg urea per acre pao or esko 3 dose mein daal skte ho g..
Posted by Lalit Kumar
Uttar Pradesh
05-11-2019 11:26 AM
lalit ji yeh mashar ke karn aata hai iske liye aap imidacloprid@60ml ko prati acre ke hisab se spray karen.dhanywad

Posted by gurvinder singh
Rajasthan
05-11-2019 11:24 AM
Gurvinder ji, rajmah ki bijai ka samay october se november tak ka hota hai, iske liye 18-20 kilo beej prati bhiga ke hisaab se lagey ga, dhanywad

Posted by dilbag
Punjab
05-11-2019 11:18 AM
ਦਿਲਬਾਗ ਜੀ, ਕਾਲੀ ਮਿਰਚ ਦੀ ਵਰਤੋਂ ਸਦੀਆਂ ਤੋਂ ਖੰਘ, ਜ਼ੁਕਾਮ, ਨੱਕ ਬੰਦ, ਵਰਗੀਆਂ ਬਿਮਾਰੀਆਂ ਦੇ ਸਫਲਤਾਪੂਰਵਕ ਠੀਕ ਕਰਨ ਲਈ ਕੀਤੀ ਜਾ ਰਹੀ ਹੈ ਕਾਲੀ ਮਿਰਚ ਵਿਚ ਪਾਇਆ ਜਾਂਦਾ ਪਾਈਪਰੀਨ ਤੱਤ ਭੋਜਨ ਨੂੰ ਹਜ਼ਮ ਕਰਨ ਵਿਚ ਮਦਦ ਕਰਦਾ ਹੈ ਅਤੇ ਪੇਟ ਦੀਆਂ ਕਈ ਬਿਮਾਰੀਆਂ ਨੂੰ ਠੀਕ ਕਰਨ ਵਿਚ ਵੀ ਅਸਰਦਾਰ ਹੈ ਕਾਲੀ ਮਿਰਚ ਦੀ ਪਾਈਪਰੀਨ ਨਾਮਕ ਤੱਤ ਵਿੱਚ ਐਂਟੀ-ਡਿਪ੍ਰੈਸੈਂਟ ਗੁਣ ਹੁੰਦੇ ਹਨ ਜ.... (Read More)
ਦਿਲਬਾਗ ਜੀ, ਕਾਲੀ ਮਿਰਚ ਦੀ ਵਰਤੋਂ ਸਦੀਆਂ ਤੋਂ ਖੰਘ, ਜ਼ੁਕਾਮ, ਨੱਕ ਬੰਦ, ਵਰਗੀਆਂ ਬਿਮਾਰੀਆਂ ਦੇ ਸਫਲਤਾਪੂਰਵਕ ਠੀਕ ਕਰਨ ਲਈ ਕੀਤੀ ਜਾ ਰਹੀ ਹੈ ਕਾਲੀ ਮਿਰਚ ਵਿਚ ਪਾਇਆ ਜਾਂਦਾ ਪਾਈਪਰੀਨ ਤੱਤ ਭੋਜਨ ਨੂੰ ਹਜ਼ਮ ਕਰਨ ਵਿਚ ਮਦਦ ਕਰਦਾ ਹੈ ਅਤੇ ਪੇਟ ਦੀਆਂ ਕਈ ਬਿਮਾਰੀਆਂ ਨੂੰ ਠੀਕ ਕਰਨ ਵਿਚ ਵੀ ਅਸਰਦਾਰ ਹੈ ਕਾਲੀ ਮਿਰਚ ਦੀ ਪਾਈਪਰੀਨ ਨਾਮਕ ਤੱਤ ਵਿੱਚ ਐਂਟੀ-ਡਿਪ੍ਰੈਸੈਂਟ ਗੁਣ ਹੁੰਦੇ ਹਨ ਜੋ ਤਣਾਅ, ਤਣਾਅ ਤੋਂ ਰਾਹਤ ਪਾਉਂਦੇ ਹਨ. ਇਹ ਨਰਵਸ ਸਿਸਟਮ ਨੂੰ ਸਰਗਰਮ ਕਰਦਾ ਹੈ ਅਤੇ ਇਸ ਨੂੰ ਸਿਹਤਮੰਦ ਰੱਖਦਾ ਹੈ ਕਾਲੀ ਮਿਰਚ ਵਿਚ ਵਿਟਾਮਿਨ ਏ, ਵਿਟਾਮਿਨ ਸੀ, ਐਂਟੀ-ਆਕਸੀਡੈਂਟ, ਫਲੇਵੋਨੋਇਡ ਹੁੰਦੇ ਹਨ. ਕਾਲੀ ਮਿਰਚ ਦੀ ਐਂਟੀ-ਬੈਕਟਰੀਆ ਗੁਣ ਵੀ ਸਾਹ ਦੀਆਂ ਬਿਮਾਰੀਆਂ ਤੋਂ ਛੁਟਕਾਰਾ ਪਾਉਂਦੇ ਹਨ ਧੰਨਵਾਦ

Posted by Rajendra Tirole
Madhya Pradesh
05-11-2019 11:15 AM
यह कई तरह की मिट्टी में उगाई जाती है इसकी पैदावार के लिए नमकीन, क्षारीय और पानी खड़ा होने वाली मिट्टी से बचाव करें यह बढ़िया निकास वाली मिट्टी जिसमे बढ़िया जैविक तत्व मौजूद हों, में बढ़िया परिणाम देती है इसके बढ़िया विकास के लिए मिट्टी का pH 5.5-7 होना चाहिए Drudriha Tulsi: यह मुख्य रूप से बंगाल, नेपाल, चटगांव और महाराष्ट्र क्ष.... (Read More)
यह कई तरह की मिट्टी में उगाई जाती है इसकी पैदावार के लिए नमकीन, क्षारीय और पानी खड़ा होने वाली मिट्टी से बचाव करें यह बढ़िया निकास वाली मिट्टी जिसमे बढ़िया जैविक तत्व मौजूद हों, में बढ़िया परिणाम देती है इसके बढ़िया विकास के लिए मिट्टी का pH 5.5-7 होना चाहिए Drudriha Tulsi: यह मुख्य रूप से बंगाल, नेपाल, चटगांव और महाराष्ट्र क्षेत्रों में पाई जाती है यह गले को सूखेपन से राहत देता है यह हाथों, पैरों और गठिया की सूजन से आराम देता है Ram/Kali Tulsi (Ocimum canum): यह चीन, ब्राज़ील, पूर्व नेपाल और साथ ही बंगाल, बिहार, चटगांव और भारत के दक्षिणी क्षेत्रों में पाई जाती है इसका तना जामुनी और पत्ते हरे रंग के और बहुत ज्यादा सुगंधित होते है इसमें उचित मात्रा में औषधीय गुण जैसे ऐज़ाडिरैकटिन, ऐंटीफंगल , ऐंटीबैक्टीरियल, और पाचन तंत्र को ठीक रखती है यह गर्म क्षेत्रों में बढ़िया उगता है Babi Tulsi: यह पंजाब से त्रिवेंद्रम, बंगाल और बिहार में भी पाई जाती है इसका पौधा 1-2 फीट लम्बा होता है पत्ते 1-2 इंच लम्बे, अंडाकार और नुकीले होते है इसके पत्तों का स्वाद लौंग की तरह और सब्जियों में स्वाद के लिए प्रयोग किया जाता है तुलसी की खेती के लिए, अच्छी तरह से शुष्क मिट्टी की मांग की जाती है मिट्टी के भुरभुरा होने तक हैरो के साथ खेत की जोताई करें, फिर रूड़ी की खाद मिट्टी में मिलाएं तुलसी की रोपाई सीड बैड पर करें फरवरी के तीसरे महीने में नर्सरी बैड तैयार करें पौधे के विकास के अनुसार, 4.5 x 1.0 x 0.2 मीटर के सीड बैड तैयार करें बीजों को 60x60 सैं.मी. के फैसले पर बोयें बीजों को 2 सैं.मी. की गहराई पर बोयें बिजाई के 6-7 हफ्ते बाद, फसल की रोपाई खेत में करें तुलसी की खेती के लिए 120 ग्राम बीजों का प्रयोग प्रति एकड़ में करें फसल को मिट्टी से पैदा होने वाली बीमारीयों से रोकथाम के लिए, बिजाई से पहले मैनकोजेब 5 ग्राम प्रति किलोग्राम से बीजों का उपचार करें फसल की बढ़िया पैदावार के लिए बिजाई से पहले 15 टन रूड़ी की खाद मिट्टी में डालें तुलसी के बीजों को तैयार बैडों के साथ उचित अंतराल पर बोयें मानसून आने के 8 हफ्ते पहले बीजों को बैड पर बोयें बीजों को 2 सैं.मी. की गहराई पर बोयें बिजाई के बाद, रूड़ी की खाद और मिट्टी की पतली परत बीजों पर बना दें इसकी सिंचाई फुवारा विधि द्वारा की जाती है रोपाई के 15-20 दिनों के बाद, नए पौधों को तंदरुस्त बनाने के लिए 2% यूरिया का घोल डालें 6 हफ्ते पुराने और 4-5 पत्तों के अंकुरण होने पर अप्रैल के महीने में नए पौधे तैयार होते है तैयार बैडों को रोपाई 24 घंटे पहले पानी लगाएं ताकि पौधों को आसानी से उखाड़ा जा सकें और रोपाई के समय जड़ें मुलायम और सूजी हुई हो खेत की तैयारी के समय, रूड़ी की खाद को मिट्टी में मिलाएं खाद के तौर पर नाइट्रोजन 48 किलो(यूरिया 104 किलो), फासफोरस 24 किलो(सिंगल सुपर फासफेट 150 किलो) और पोटाश 24 किलो(मिउरेट 40 किलो) प्रति एकड़ में डालें नए पौधे लगाने के समय नाइट्रोजन की आधी मात्रा और फासफेट पेंटोऑक्साइड की पूरी मात्रा शुरुआती समय में डालें Mn 50 पी पी एम कंसंट्रेशन और Co@100 पी पी एम कंसंट्रेशन सूक्ष्म-तत्व डालें बाकी की बची हुई नाइट्रोजन को 2 हिस्सों में पहली और दूसरी कटाई के बाद डालें खेत को नदीनों से मुक्त करने के लिए कसी की मदद से गोड़ाई करें नदीनों की रोकथाम कम न होने पर यह फसल को नुकसान पहुंचाते है रोपण के एक महीने बाद पहली गोड़ाई और पहली गोड़ाई के चार हफ्ते बाद दूसरी गोड़ाई करें रोपण के दो महीने बाद कसी से अनुकूल गोड़ाई करें गर्मियों में, एक महीने में 3 सिंचाइयां करें और बरसात के मौसम में, सिंचाई की आवश्यकता नहीं होती एक साल में 12-15 सिंचाइयां करनी चाहिए पहली सिंचाई रोपण के बाद करें और दूसरी सिंचाई नए पौधों के स्थिर होने पर करें 2 सिंचाइयां करनी आवश्यक है और बाकी की सिंचाई मौसम के आधार पर करें इसके मंडीकरण के लिए आप Aushadhiya kheti vikas sansthan 6268536795 से संपर्क कर सकते हैं

Posted by Pankaj Singh
Uttar Pradesh
05-11-2019 10:53 AM
Pankaj ji kripya aap apna swal vistar se pooche taki aapko iske bare men poori jankari di ja sake.dhanywad

Posted by Pankaj Singh
Uttar Pradesh
05-11-2019 10:48 AM
Pankaj Singh ji, play store or app store par bahut si apps availabe hai, jisse ap apne khet ko map sakte hain, par iske bare mein kuch kaha nahi ja sakta hai ke vo sahi jankari dege ke nahi, dhanywad
Posted by satish
Uttar Pradesh
05-11-2019 10:40 AM
बिजाई के पहले पड़ाव के समय धनिये की फसल के लिए नदीन गंभीर समस्या होते हैं फसल को नदीनों से मुक्त करने के लिए एक या दो बार गोडाई करने की जरूरत पड़ती है पहली गोडाई बिजाई से 4 सप्ताह बाद और दूसरी 5 से 6 सप्ताह बाद करनी चाहिए
Posted by satish
Uttar Pradesh
05-11-2019 10:38 AM
बिजाई के पहले पड़ाव के समय धनिये की फसल के लिए नदीन गंभीर समस्या होते हैं फसल को नदीनों से मुक्त करने के लिए एक या दो बार गोडाई करने की जरूरत पड़ती है पहली गोडाई बिजाई से 4 सप्ताह बाद और दूसरी 5 से 6 सप्ताह बाद करनी चाहिए
Posted by R Singh
Haryana
05-11-2019 10:33 AM
R singh ji yeh fungus ho gayi hai iske liye aap iski jitni tehni sookhi hui hai uske uper bordo paste ka istemal karen.dhanywad
Posted by R Singh
Haryana
05-11-2019 10:29 AM
R singh ji yeh tatv ki kami hai iske liye aap vermicompost@4 kilo ko prati paudhe ke hisab se daale.dhanywad
Posted by vishal singh
Uttar Pradesh
05-11-2019 10:25 AM
vishal ji aap alsi, sarso, kasumbda, til aur toriya ki bijai kar sakte hai aap khet ki fecing kare jis se fasl ko khet men nuksaan na ho.dhanywad

Posted by Boota singh Sandhu
Uttarakhand
05-11-2019 10:20 AM
बूटा जी आप किसम जैसे UP 2785: यह किस्म नवंबर महीने में बोयी जाती है इसकी औसतन पैदावार 22 क्विंटल प्रति एकड़ होती है इसके दाने बड़े आकार के होते हैं दूसरे शब्दों में 1000 बीजों का भार 55 ग्राम होता है DBW 17: यह किस्म 130-135 दिनों में पक जाती है और इसकी औसतन पैदावार 18-20 क्विंटल प्रति एकड़ होती है यह किस्म भूरी कुंगी और करनाल बंट के .... (Read More)
बूटा जी आप किसम जैसे UP 2785: यह किस्म नवंबर महीने में बोयी जाती है इसकी औसतन पैदावार 22 क्विंटल प्रति एकड़ होती है इसके दाने बड़े आकार के होते हैं दूसरे शब्दों में 1000 बीजों का भार 55 ग्राम होता है DBW 17: यह किस्म 130-135 दिनों में पक जाती है और इसकी औसतन पैदावार 18-20 क्विंटल प्रति एकड़ होती है यह किस्म भूरी कुंगी और करनाल बंट के प्रतिरोधक किस्म है PBW 502: इस किस्म के पौधे का कद 86 सैं.मी. होता है यह किस्म सिंचित क्षेत्रों में समय पर बोने के लिए उपयुक्त है यह किस्म पत्तों पर कुंगी और धारीदार कुंगी के प्रतिरोधक किस्म है PBW 343: यह किस्म सिंचित और पिछेती बिजाई वाले क्षेत्रों के लिए उपयुक्त है यह किस्म 130-135 दिनों में कटाई के लिए तैयार हो जाती है यह किस्म गर्दन तोड़ और जल जमाव हालातों के प्रतिरोधक है यह किस्म करनाल बंट के प्रतिरोधी और झुलस रोग को सहनेयोग्य है इसकी औसतन पैदावार 19 क्विंटल प्रति एकड़ होती है WH 542: यह किस्म 130-135 दिनों में पक जाती है और इसकी औसतन पैदावार 25 क्विंटल प्रति एकड़ होती है यह किस्म पीली कुंगी के प्रतिरोधक है UP 2382: यह किस्म 125-135 दिनों में पक जाती है और इसकी औसतन पैदावार 23 क्विंटल प्रति एकड़ होती है यह किस्म भूरी कुंगी के प्रति संवेदनशील है UP 2554: यह किस्म 130-135 दिनों में पक जाती है और इसकी औसतन पैदावार 25 क्विंटल प्रति एकड़ होती है यह किस्म भूरी कुंगी और करनाल बंट के प्रतिरोधक और झुलस रोग को सहनेयोग्य है PDW 291 (Durum), PDW 251 (Durum), WH 896 (Durum) और PDW 233 (Durum) किस्में सिंचित क्षेत्रों में समय पर बोने वाली किस्में हैं
Posted by ਜੀ ਐਸ ਵਿਰਕ
Punjab
05-11-2019 10:19 AM
shrimaan g kirpa krke eh dsso tuc kehdi fasal lyi termite di roktham lyi puch rhe ho g ta jo tuhanu poori jaankari ditti ja ske g..
Posted by ਜੀ ਐਸ ਵਿਰਕ
Punjab
05-11-2019 10:16 AM
ਸਿਉਂਕ ਦੀ ਰੋਕਥਾਮ ਦੇ ਲਈ ਤੁਸੀ chlorpyriphos @1 ਲੀਟਰ ਨੂੰ 60 ਕਿਲੋ ਰੇਤ ਵਿਚ ਮਿਲਾ ਕੇ ਪ੍ਰਤੀ ਏਕੜ ਦੇ ਹਿਸਾਬ ਨਾਲ ਪਾਓ ਧੰਨਵਾਦ

Posted by Dsvirk Shab
Punjab
05-11-2019 10:07 AM
ਤੁਸੀ ਮੱਝ ਨੂੰ vitum-H 10-10ml ਸਵੇਰੇ ਸ਼ਾਮ ਦਿਓ ਅਤੇ Metabolite ਪਾਊਡਰ ਦੀ ਰੋਜਾਨਾ 1 ਪੁੜੀ ਦੇਣੀ ਸ਼ੁਰੂ ਕਰੋ ਅਤੇ ਕਾਰਗਿਲ ਦੀ Transition mix ਫੀਡ ਦੇਣੀ ਸ਼ੁਰੂ ਕਰੋ, ਇਸ ਨਾਲ ਲੇਵਾ ਅਤੇ ਦੁੱਧ ਵਧਿਆ ਹੋ ਜਾਵੇਗਾ..

Posted by Dsvirk Shab
Punjab
05-11-2019 10:05 AM
ਜੇਕਰ ਤੁਸੀ ਪਸ਼ੂਆਂ ਨੂੰ ਘਰ ਵਿਚ ਫੀਡ ਤਿਆਰ ਕਰਕੇ ਦੇਣੀ ਹੈ ਤਾਂ ਸੰਤੁਲਿਤ ਖੁਰਾਕ 100 ਕਿਲੋ ਬਣਾਉਣ ਲਈ ਲੋੜੀਂਦੀ ਸਮੱਗਰੀ ਚਾਹੀਦੀ ਹੈ ਜਿਵੇਂ 25 ਕਿਲੋ ਅਨਾਜ ( ਜਵਾਰ, ਬਾਜਰੀ (ਸਰਦੀਆਂ) , ਕਣਕ, ਜੌਂ ( ਗਰਮੀਆ) ਇਹਨਾਂ ਵਿੱਚੋ ਕੋਈ ਇੱਕ ) , ਦਾਲ ਚੂਰੀ 20 ਕਿਲੋ( ਮੂੰਗੀ ਚੂਰੀ, ਮਾਂਹ ਚੂਰੀ, ਮੋਠ ਚੂਰੀ ( ਕੇਵਲ ਸਰਦੀਆਂ ਲਈ) , ਮਸੁਰ ਚੂਰੀ ,ਅਰਹਰ, (ਇਨਾਂ ਵਿੱਚੋ ਇੱਕ ) , DOC 25 ਕਿਲੋ ( ਚੌਲਾਂ ਦਾ ਚੂਰਾ ) , ਫਾਈਬ.... (Read More)
ਜੇਕਰ ਤੁਸੀ ਪਸ਼ੂਆਂ ਨੂੰ ਘਰ ਵਿਚ ਫੀਡ ਤਿਆਰ ਕਰਕੇ ਦੇਣੀ ਹੈ ਤਾਂ ਸੰਤੁਲਿਤ ਖੁਰਾਕ 100 ਕਿਲੋ ਬਣਾਉਣ ਲਈ ਲੋੜੀਂਦੀ ਸਮੱਗਰੀ ਚਾਹੀਦੀ ਹੈ ਜਿਵੇਂ 25 ਕਿਲੋ ਅਨਾਜ ( ਜਵਾਰ, ਬਾਜਰੀ (ਸਰਦੀਆਂ) , ਕਣਕ, ਜੌਂ ( ਗਰਮੀਆ) ਇਹਨਾਂ ਵਿੱਚੋ ਕੋਈ ਇੱਕ ) , ਦਾਲ ਚੂਰੀ 20 ਕਿਲੋ( ਮੂੰਗੀ ਚੂਰੀ, ਮਾਂਹ ਚੂਰੀ, ਮੋਠ ਚੂਰੀ ( ਕੇਵਲ ਸਰਦੀਆਂ ਲਈ) , ਮਸੁਰ ਚੂਰੀ ,ਅਰਹਰ, (ਇਨਾਂ ਵਿੱਚੋ ਇੱਕ ) , DOC 25 ਕਿਲੋ ( ਚੌਲਾਂ ਦਾ ਚੂਰਾ ) , ਫਾਈਬਰ ਛਿਲਕਾ 15 ਕਿਲੋ (ਕਣਕ, ਚੌਕਰ, ਚਨਾ ਛਿਲਕਾ, ਮਟਰ ਛਿਲਕਾ, ਇਨਾਂ ਵਿੱਚੋ ਇੱਕ) , ਖਲ਼ 15 ਕਿਲੋ(ਸਰੋਂ, ਬਿਨੌਲਾ ਜਾਂ ਸੋਇਆ (ਇਹਨਾਂ ਵਿੱਚੋ ਕੋਈ ਇੱਕ) , ਮਿੱਠਾ ਸੋਡਾ 250 ਗ੍ਰਾਮ, 1 ਕਿਲੋ ਨਮਕ, ਗੁੜ 1 ਕਿਲੋ, 1 ਕਿੱਲੋ ਹਲਦੀ (ਸਰਦੀਆ ਵਿੱਚ ) ਇਹ ਨੂੰ ਰਲਾ ਲਵੋ ਇਹ ਫੀਡ ਪਸ਼ੂ ਲਈ ਬਹੁਤ ਲਾਹੇਵੰਦ ਹੁੰਦੀ ਹੈ, ਪਸ਼ੂ ਦਾ ਦੁੱਧ ਉਸਦੀ ਨਸਲ ਅਤੇ ਖੁਰਾਕ ਤੇ ਨਿਰਭਰ ਕਰਦਾ ਹੈ ਤੁਸੀ ਓਹਨਾ ਨੂੰ ਰੋਜਾਨਾ 35-40 ਕਿਲੋ ਹਰਾ ਚਾਰਾ ਦਿਓ ਅਤੇ ਤੁਸੀ ਉਸ ਨੂੰ Enerdyna liquid 100ml ਰੋਜਾਨਾ, Milkout powder 2-2 ਚਮਚ ਰੋਜਾਨਾ ਦੇਣਾ ਸ਼ੁਰੂ ਕਰੋ ਬਾਕੀ ਤੁਸੀ ਮਿਨਰਲ ਮਿਕਸਚਰ 50-50gm ਸਵੇਰੇ ਸ਼ਾਮ ਦਿਓ, ਇਸ ਨਾਲ ਫਰਕ ਪੈ ਜਾਵੇਗਾ..

Posted by Dsvirk Shab
Punjab
05-11-2019 10:02 AM
ਜੇਕਰ ਤੁਹਾਡੀ ਗਾਂ ਵਾਰ ਵਾਰ ਰਪੀਟ ਹੁੰਦੀ ਹੈ ਤਾਂ ਤੁਸੀ ਇਸਦੀ ਬੱਚੇਦਾਨੀ ਵਿਚ Utrawin-oz ਦਵਾਈ 30 ਮਿਲੀ ਅਤੇ ਉਸ ਵਿਚ Metro IV drip 50ml ਮਿਕਸ ਕਰੋ ਅਤੇ ਇਸ ਤ੍ਰਾਹ ਕਰਕੇ 3 ਦਿਨ ਭਰਵਾਓ ਅਤੇ ਉਸ ਨੂੰ Minfa gold ਪਾਊਡਰ 100 ਗ੍ਰਾਮ ਰੋਜਾਨਾ ਦੇਣਾ ਸ਼ੁਰੂ ਕਰੋ ਅਤੇ Agrimin-i ਗੋਲੀਆਂ ਰੋਜਾਨਾ 1 ਗੋਲੀ ਦਿਓ ਅਤੇ 21 ਦਿਨ ਤਕ ਦਿੰਦੇ ਰਹੋ, ਫਿਰ ਅਗਲੀ ਵਾਰ ਹੀਟ ਵਿਚ ਆਉਣ ਤੇ ਉਸ ਨੂੰ ਟੀਕਾ ਭਰਵਾਂ ਕੇ Pregstay gold ਪਾਊਡਰ 30 ਗ੍ਰਾਮ ਰ.... (Read More)
ਜੇਕਰ ਤੁਹਾਡੀ ਗਾਂ ਵਾਰ ਵਾਰ ਰਪੀਟ ਹੁੰਦੀ ਹੈ ਤਾਂ ਤੁਸੀ ਇਸਦੀ ਬੱਚੇਦਾਨੀ ਵਿਚ Utrawin-oz ਦਵਾਈ 30 ਮਿਲੀ ਅਤੇ ਉਸ ਵਿਚ Metro IV drip 50ml ਮਿਕਸ ਕਰੋ ਅਤੇ ਇਸ ਤ੍ਰਾਹ ਕਰਕੇ 3 ਦਿਨ ਭਰਵਾਓ ਅਤੇ ਉਸ ਨੂੰ Minfa gold ਪਾਊਡਰ 100 ਗ੍ਰਾਮ ਰੋਜਾਨਾ ਦੇਣਾ ਸ਼ੁਰੂ ਕਰੋ ਅਤੇ Agrimin-i ਗੋਲੀਆਂ ਰੋਜਾਨਾ 1 ਗੋਲੀ ਦਿਓ ਅਤੇ 21 ਦਿਨ ਤਕ ਦਿੰਦੇ ਰਹੋ, ਫਿਰ ਅਗਲੀ ਵਾਰ ਹੀਟ ਵਿਚ ਆਉਣ ਤੇ ਉਸ ਨੂੰ ਟੀਕਾ ਭਰਵਾਂ ਕੇ Pregstay gold ਪਾਊਡਰ 30 ਗ੍ਰਾਮ ਰੋਜਾਨਾ ਦਿਓ ਅਤੇ 20 ਦਿਨ ਤੱਕ ਦਿਓ, ਇਸ ਨਾਲ ਫਰਕ ਪੈ ਜਾਵੇਗਾ..

Posted by Ashesh Sharma
Madhya Pradesh
05-11-2019 09:57 AM
इसके मंडीकरण के लिए आप Aushadhiya kheti vikas sansthan 6268536795 से संपर्क कर सकते हैं

Posted by iqbal singh boparai
Punjab
05-11-2019 09:54 AM
ਬਿਜਾਈ ਤੋਂ 10 ਦਿਨ ਪਹਿਲਾਂ 20 ਟਨ ਰੂੜੀ ਦੀ ਖਾਦ ਪਾਓ ਨਾਈਟ੍ਰੋਜਨ 40 ਕਿਲੋ(ਯੂਰੀਆ 90ਕਿਲੋ), ਫਾਸਫੋਰਸ 20 ਕਿਲੋ(ਸਿੰਗਲ ਸੁਪਰ ਫਾਸਫੇਟ 125 ਕਿਲੋ) ਅਤੇ ਪੋਟਾਸ਼ 20 ਕਿਲੋ(ਮਿਊਰੇਟ ਆੱਫ ਪੋਟਾਸ਼ 35 ਕਿਲੋ) ਪ੍ਰਤੀ ਏਕੜ ਪਾਓ ਫਾਸਫੋਰਸ ਅਤੇ ਪੋਟਾਸ਼ ਦੀ ਪੂਰੀ ਮਾਤਰਾ ਅਤੇ ਨਾਈਟ੍ਰੋਜਨ ਦੀ ਅੱਧੀ ਮਾਤਰਾ ਰੋਪਣ ਸਮੇਂ ਪਾਓ ਬਾਕੀ ਬਚੀ ਨਾਈਟ੍ਰੋਜਨ ਟਾੱਪ ਡਰੈਸਿੰਗ (ਮਿੱਟੀ ਵਿੱਚ ਮਿਲਾਉਣਾ) ਦੇ ਤੌਰ ਤੇ ਰੋਪ.... (Read More)
ਬਿਜਾਈ ਤੋਂ 10 ਦਿਨ ਪਹਿਲਾਂ 20 ਟਨ ਰੂੜੀ ਦੀ ਖਾਦ ਪਾਓ ਨਾਈਟ੍ਰੋਜਨ 40 ਕਿਲੋ(ਯੂਰੀਆ 90ਕਿਲੋ), ਫਾਸਫੋਰਸ 20 ਕਿਲੋ(ਸਿੰਗਲ ਸੁਪਰ ਫਾਸਫੇਟ 125 ਕਿਲੋ) ਅਤੇ ਪੋਟਾਸ਼ 20 ਕਿਲੋ(ਮਿਊਰੇਟ ਆੱਫ ਪੋਟਾਸ਼ 35 ਕਿਲੋ) ਪ੍ਰਤੀ ਏਕੜ ਪਾਓ ਫਾਸਫੋਰਸ ਅਤੇ ਪੋਟਾਸ਼ ਦੀ ਪੂਰੀ ਮਾਤਰਾ ਅਤੇ ਨਾਈਟ੍ਰੋਜਨ ਦੀ ਅੱਧੀ ਮਾਤਰਾ ਰੋਪਣ ਸਮੇਂ ਪਾਓ ਬਾਕੀ ਬਚੀ ਨਾਈਟ੍ਰੋਜਨ ਟਾੱਪ ਡਰੈਸਿੰਗ (ਮਿੱਟੀ ਵਿੱਚ ਮਿਲਾਉਣਾ) ਦੇ ਤੌਰ ਤੇ ਰੋਪਣ ਤੋਂ ਚਾਰ ਹਫਤੇ ਬਾਅਦ ਪਾਓ
ਪਾਣੀ ਵਿੱਚ ਘੁਲਣਸ਼ੀਲ ਖਾਦਾਂ: ਰੋਪਣ ਤੋਂ 10-15 ਦਿਨ ਬਾਅਦ ਸੂਖਮ-ਤੱਤ 2.5-3 ਗ੍ਰਾਮ ਪ੍ਰਤੀ ਲੀਟਰ ਪਾਣੀ ਦੇ ਨਾਲ 19:19:19 ਦੀ ਸਪਰੇਅ ਕਰੋ
Posted by Sewak .lSingh
Punjab
05-11-2019 09:52 AM
Sewak ji ehh tuahnu 40-45000 tak mill skdi hai baki khridan ate vechan wale di apsi sehmti te nirbhar hai..
Posted by Ravinder singh
Punjab
05-11-2019 09:25 AM
shrimaan g tuc @1 kg urea nu 120 liter pani vich ghol ke per acre spray kr skde ho g...

Posted by rakesh kamboj
Haryana
05-11-2019 09:21 AM
Rakesh ji Lactomood homeopathic dwai dene se pashu sme per dudh deta hai, usko pasma sahi atta hai aur pashu assani se dudh de deta hai, iski 10-10 drops din mai 3 varr de skte hai..
Posted by ABHISHEK GUPTA
Bihar
05-11-2019 09:17 AM
Abhishek ji yeh fungus ke karn ho raha hai iske liye aap mancozeb@400 gram ko prati acre ke hisab se spray karen.dhanywad

Posted by niraj patidar
Madhya Pradesh
05-11-2019 08:55 AM
फसल के 1-3 वर्ष की हो जाने पर, अच्छी तरह से गला हुए गाय का गोबर 10-30 किलो और युरिया 240-720 ग्राम प्रति वृक्ष डालें 4-7 वर्ष की फसल में, अच्छी तरह से गला हुआ गाय का गोबर 40-80 किलो और युरिया 960-1680 ग्राम और सिंगल सुपर फासफेट 1375-2400 प्रति वृक्ष डालें जब फसल 8 वर्ष की या इससे ज्यादा की हो जाए तो गाय का गला हुआ गोबर 100 किलो या यूरिया 1920 ग्र.... (Read More)
फसल के 1-3 वर्ष की हो जाने पर, अच्छी तरह से गला हुए गाय का गोबर 10-30 किलो और युरिया 240-720 ग्राम प्रति वृक्ष डालें 4-7 वर्ष की फसल में, अच्छी तरह से गला हुआ गाय का गोबर 40-80 किलो और युरिया 960-1680 ग्राम और सिंगल सुपर फासफेट 1375-2400 प्रति वृक्ष डालें जब फसल 8 वर्ष की या इससे ज्यादा की हो जाए तो गाय का गला हुआ गोबर 100 किलो या यूरिया 1920 ग्राम और सिंगल सुपर फासफेट 2750 ग्राम प्रति वृक्ष डालें
गाय के गले हुए गोबर की पूरी मात्रा दिसंबर महीने के दौरान डालें जबकि यूरिया के दो हिस्से, पहला फरवरी महीने में और दूसरा अप्रैल-मई के महीने में डालें यूरिया की पहली खुराक के समय सिंगल सुपर फासफेट खाद की पूरी मात्रा डालें
यदि पकने से पहले फलों का गिरना दिखाई दे तो फलों के ज्यादा गिरने को रोकने के लिए 2,4-D 10 ग्राम को 500 लीटर पानी में मिलाकर स्प्रे करें पहली स्प्रे मार्च के अंत में, फिर अप्रैल के अंत में करें अगस्त और सितंबर के अंत में दोबारा स्प्रे करें यदि संतरे के नज़दीक कपास की फसल उगाई गई हो तो 2,4-D की स्प्रे करने से परहेज़ करें, इसकी जगह GA3 की स्प्रे करें

Posted by Ravindra Mukati
Madhya Pradesh
05-11-2019 08:55 AM
shrimaan g makki mein coragen @60 ml per acre ja fame @30 ml per acre ka spray kr skte ho g..

Posted by Sandeep Turka
Punjab
05-11-2019 08:49 AM
ਆਮ ਤੌਰ ਤੇ ਕਣਕ ਦੇ ਵਿੱਚ ਗੁੱਲੀ ਡੰਡਾ 35-40 ਦਿਨਾਂ ਵਿੱਚ ਹੀ ਬਾਹਰ ਨਿਕਲਦਾ ਹੈ ਜਦੋਂ ਤੁਸੀਂ ਪਹਿਲਾਂ ਪਾਣੀ ਲਗਾ ਦਿੰਦੇ ਹੋ ਤਾਂ ਇਹ ਗੁੱਲੀ ਡੰਡਾ ਕਣਕ ਦੇ ਨਾਲ ਵਧਣਾ ਸ਼ੁਰੂ ਕਰ ਦਿੰਦਾ ਹੈ ਇਸ ਸਮੇਂ ਕਣਕ 40 ਦਿਨਾਂ ਦੇ ਆਸ-ਪਾਸ ਹੋ ਜਾਂਦੀ ਹੈ ਇਸ ਸਮੇਂ ਤੁਸੀਂ TOPIK@160GM ਜਾਂ AXIAL@400ML ਜਾਂ PUMA POWER@400ML ਜਾਂ LEADER@13GM ਜਾਂ SAFAL@13GM ਜਾਂ UPL ਦੀ SHAGUN 21-11@200gm ਨੂੰ 150 ਲੀਟਰ ਪਾਣੀ ਵਿੱਚ ਮਿਲਾ ਕੇ ਪ੍ਰਤੀ ਏਕੜ ਤੇ ਸਪਰੇਅ .... (Read More)
ਆਮ ਤੌਰ ਤੇ ਕਣਕ ਦੇ ਵਿੱਚ ਗੁੱਲੀ ਡੰਡਾ 35-40 ਦਿਨਾਂ ਵਿੱਚ ਹੀ ਬਾਹਰ ਨਿਕਲਦਾ ਹੈ ਜਦੋਂ ਤੁਸੀਂ ਪਹਿਲਾਂ ਪਾਣੀ ਲਗਾ ਦਿੰਦੇ ਹੋ ਤਾਂ ਇਹ ਗੁੱਲੀ ਡੰਡਾ ਕਣਕ ਦੇ ਨਾਲ ਵਧਣਾ ਸ਼ੁਰੂ ਕਰ ਦਿੰਦਾ ਹੈ ਇਸ ਸਮੇਂ ਕਣਕ 40 ਦਿਨਾਂ ਦੇ ਆਸ-ਪਾਸ ਹੋ ਜਾਂਦੀ ਹੈ ਇਸ ਸਮੇਂ ਤੁਸੀਂ TOPIK@160GM ਜਾਂ AXIAL@400ML ਜਾਂ PUMA POWER@400ML ਜਾਂ LEADER@13GM ਜਾਂ SAFAL@13GM ਜਾਂ UPL ਦੀ SHAGUN 21-11@200gm ਨੂੰ 150 ਲੀਟਰ ਪਾਣੀ ਵਿੱਚ ਮਿਲਾ ਕੇ ਪ੍ਰਤੀ ਏਕੜ ਤੇ ਸਪਰੇਅ ਕਰ ਸਕਦੇ ਹੋ ਇਹਨਾਂ ਦੇ ਵਿੱਚੋਂ ਕੋਈ ਇੱਕ ਸਪਰੇਅ ਵਰਤ ਸਕਦੋ ਹੋ Topik ਦੀ ਥਾਂ ਇਹ ਸਪਰੇਆਂ ਵਰਤ ਸਕਦੇ ਹੋ ਜੇਕਰ ਬਾਥੂ ਹੈ ਤਾਂ ਉਸ ਦੇ ਲਈ algrip@10gm ਜਾਂ total@16gm ਨੂੰ 150 ਲੀਟਰ ਪਾਣੀ ਵਿੱਚ ਮਿਲਾ ਕੇ ਪ੍ਰਤੀ ਏਕੜ ਤੇ ਸਪਰੇਅ ਕਰ ਸਕਦੇ ਹੋ
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