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Posted by yatendra kumar
Uttar Pradesh
05-11-2019 04:45 PM
Punjab
11-06-2019 10:32 AM
Yatendra ji, yeh macchar ke hamle ki vajah se hua hai, isme imidacloprid @ 1.5 ml prati liter pani ke hisaab se spray karein, dhanywad
Posted by karamjit singh
Punjab
05-11-2019 04:42 PM
Punjab
11-06-2019 10:26 AM
ਕਰਮਜੀਤ ਜੀ, ਤੁਸੀ FYM 6 ਟਨ ਪ੍ਰਤੀ ਏਕੜ ਦੇ ਹਿਸਾਬ ਨਾਲ ਪਾਓ ਅਤੇ ਬਿਜਾਈ ਦੇ ਸਮੇਂ ਨਾਈਟ੍ਰੋਜਨ,ਫਾਸਫੋਰਸ 10:30 ਕਿਲੋਗ੍ਰਾਮ (ਯੂਰੀਆਂ 22 ਕਿਲੋਗ੍ਰਾਮ ਅਤੇ ਸਿੰਗਲ ਸੁਪਰਫਾਸਫੇਟ 185 ਕਿਲੋਗ੍ਰਾਮ) ਪ੍ਰਤੀ ਏਕੜ ਵਿੱਚ ਪਾਉ ਧੰਨਵਾਦ
Posted by Rakesh
Uttar Pradesh
05-11-2019 04:40 PM
Punjab
11-06-2019 09:53 AM
राकेश जी, परवल कद्दू कुल की एक पौष्टिक सब्जी है परवल की खेती के लिए गर्म एवं अधिक आर्द्रता वाली जलवायु उपयुक्त होती है ऐसे क्षेत्र जहां औसत वार्षिक वर्षा 100 से 120 सेंमी. हो तथा तापक्रम 5 डिग्री सेल्सियस से कम नहीं जाता हो, वह क्षेत्र परवल की खेती के लिए सर्वोत्तम होता है लेकिन जहां सिंचाई की सुविधा न हो, वहाँ भी .... (Read More)
राकेश जी, परवल कद्दू कुल की एक पौष्टिक सब्जी है परवल की खेती के लिए गर्म एवं अधिक आर्द्रता वाली जलवायु उपयुक्त होती है ऐसे क्षेत्र जहां औसत वार्षिक वर्षा 100 से 120 सेंमी. हो तथा तापक्रम 5 डिग्री सेल्सियस से कम नहीं जाता हो, वह क्षेत्र परवल की खेती के लिए सर्वोत्तम होता है लेकिन जहां सिंचाई की सुविधा न हो, वहाँ भी परवल की खेती सफलतापूर्वक होती है बिहार की गंगा, सोन एवं गंडक दियारा क्षेत्रों में परवल की असिंचित फसल ही उगाई जाती है, फिर भी उपज अधिक प्राप्त होती है परवल भारी मिट्टी को छोड़कर सभी प्रकार की मिट्टियों में उगाया जा सकता है, परन्तु परवल की अच्छी पैदावार के लिए जल निकासयुक्त दोमट, बलुई दोमट मिट्टी जिसमें पर्याप्त मात्रा में जीवांश हो, अधिक उपयुक्त होती है यही कारण है कि परवल की खेती उत्तरप्रदेश, बिहार एवं पश्चिम बंगाल की नदियों के किनारों के दियारा क्षेत्रों में सफलतापूर्वक की जाती है परवल को हमेशा ऊँचे स्थान पर लगाना चाहिए, जहां पानी का जमाव नहीं होता हो उत्तरप्रदेश, बिहार तथा बंगाल में परवल की खेती पान के बरेजों में अंतरावर्ती फसल के रूप में करने की प्रथा अत्यंत पुरानी है, जहां के परवल के फल उच्च कोटि के गुणवत्ता वाले होते हैं मई-जून के महीनों में मिट्टी पलटने वाले हल से खेत को एकबार जुताई कर खुला छोड़ देना चाहिए ताकि हानिकारक कीड़े-मकोड़े मर जायें तथा खरपतवार सुख जायें लत्तर की रोपाई के लगभग एक महीना पहले मिट्टी में गोबर की सड़ी खाद अथवा कम्पोस्ट 200-250 क्विंटल प्रति हेक्टेयर की दर से अच्छी तरह मिला देना चाहिए लत्तर रोपाई के समय खेत को 3-4 बार देशी हल से जुताई करके पाटा चलाकर मिट्टी को भुरभुरा तथा समतल बना लेना आवश्यक है डंडाली, राजेन्द्र परवल-1, राजेन्द्र परवल-2, स्वर्ण रेखा, स्वर्ण अलौकिक, निमियां, सफेदा, सोनपुरा, संतोखबा, तिरकोलबा, गुथलिया की बिजाई कर सकते है परवल उगाने की निम्नलिखित विधियां हैं:-1. बीज द्वारा 2. जड़ों की कलम द्वारा. लत्ताओं की लच्छी द्वारा रोपाई का समय भिन्न-भिन्न स्थानों पर अलग-अलग होता है मैदानी भागों में परवल की रोपनी का उचित समय मध्य जुलाई से अक्टूबर तक और दियारा क्षेत्रों में सितम्बर से अक्टूबर तक होता है परवल में अलग-अलग पौधों पर नर और मादा फूल उत्पन्न होते हैं नर पुष्पों से फल नहीं बनते हैं बल्कि वे मादा पुष्पों में परागण का कार्य करते हैं जिसमें मादा पुष्पों से फल बनना सम्भव होता है नर पुष्प बड़े और सफेद होते हैं, जबकि मादा पुष्प थोड़ा छोटा और सफेद होता है, उसके नीचे गर्भाश्य जुड़ा रहता है जो कुछ दिनों में परागण के बाद बढ़कर फल बन जाता है इसका विस्तार लताओं या बेलों द्वारा किया जाता है परवल लगाने के समय नर और मादा पौधों का अनुपात 1:19 होना अनिवार्य है उपरोक्त अनुपात नहीं रहने पर उत्पादन में काफी कमी हो जाती है खेत में कतार से कतार की दूरी 2.5 मीटर तथा पौधे से पौधे की दूरी 1.5 मीटर रखना चाहिए साथ ही थल्ले, भूमि की सतह से 6-8 सेंमी. ऊँचाई पर बनाने चाहिए एक वर्ष पुरानी लताओं से 120-150 सेंमी. लम्बे टुकड़े काटकर इस प्रकार मोड़ना चाहिए कि लच्छी की लम्बाई 30 सेंमी. हो जाये तथा 10 सेंमी. गहरे थालों में इस प्रकार लगाया जाय कि दोनों सिरे ऊपर खुले रहें रोपनी के बाद और फल लगने के समय तक 4-5 बार निकाई-गुड़ाई करनी चाहिए ताकि लताओं की शाकीय वृद्धि तेजी से हो लताओं के बढ़ जाने पर इसकी अनावश्यक वृद्धि को रोकने के लिए बार-बार लताओं को हाथ से उलटते-पलटते रहना चाहिए ऐसा करने से गांठों से जड़ें निकलकर जमीन में प्रवेश नहीं कर पाती है और फलन अधिक होता है मार्च माह के मध्य से पौधों पर फल लगना शुरू हो जाता है प्रारम्भ में फल लगने के 10-12 दिनों के बाद फल तोड़ने लायक हो जाते हैं इस प्रकार मार्च एवं अप्रैल माह में फलों की तोडनी प्रति सप्ताह एक बार तथा मई में प्रति सप्ताह दो बार अवश्य करनी चाहिए फलों की तोड़ाई मुलायम एवं हरी अवस्था में सूर्योदय से पहले करनी चाहिए इससे फल अधिक समय तक ताजे बने रहते हैं धन्यवाद
Posted by Manish
Haryana
05-11-2019 04:38 PM
Punjab
11-06-2019 03:15 PM
Manish ji, yeh nutrient deficiency k vajah se ho raha hai, kripya ap isme NPK 191919 @ 1 kg ko 150 liter pani mein mila kar prati acre ke hisaab se spray karein, dhanywad
Posted by Ankit pal
Uttar Pradesh
05-11-2019 04:38 PM
Punjab
11-06-2019 02:46 PM
अंकित जी, सिंचित और सामान्य बिजाई स्थितियों में 1 नवंबर से 15 नवंबर तक बिजाई पूरी कर लें और पिछेती बिजाई की स्थितियों में 1 से 25 दिसंबर तक बिजाई पूरी कर लें पूर्वी यू पी के लिए, सिंचित और सामान्य बिजाई का उचित समय 1 नवंबर से 15 नवंबर तक है, जबकि पिछेती बिजाई के लिए 1 से 20 दिसंबर का समय उचित है ऊंचे पहाड़ी क्षेत्रों के ल.... (Read More)
अंकित जी, सिंचित और सामान्य बिजाई स्थितियों में 1 नवंबर से 15 नवंबर तक बिजाई पूरी कर लें और पिछेती बिजाई की स्थितियों में 1 से 25 दिसंबर तक बिजाई पूरी कर लें पूर्वी यू पी के लिए, सिंचित और सामान्य बिजाई का उचित समय 1 नवंबर से 15 नवंबर तक है, जबकि पिछेती बिजाई के लिए 1 से 20 दिसंबर का समय उचित है ऊंचे पहाड़ी क्षेत्रों के लिए, सिंचित और सामान्य बिजाई का उचित समय अक्तूबर के दूसरे पखवाड़े से लेकर नवंबर का पहला पखवाड़ा है जबकि पिछेती बिजाई के लिए 1 दिसंबर से 20 दिसंबर का समय उचित है निचले पहाड़ी क्षेत्रों के लिए, सिंचित और सामान्य बिजाई का उचित समय अक्तूबर के आखिरी सप्ताह से लेकर मध्य नवंबर तक का है जबकि पिछेती बिजाई के लिए नवंबर का दूसरा पखवाड़ा उचित समय है छोटे आकार की किस्मों के लिए 40 किलो बीज प्रति एकड़ में प्रयोग करें और मोटे किस्म के बीजों के लिए 50 किलो बीज प्रति एकड़ में प्रयोग करें यदि पिछेती बिजाई करनी हो तो 60 किलो बीज प्रति एकड़ में प्रयोग करें बिजाई से पहले बीज साफ और छांटे हुए होने चाहिए मिट्टी की जांच के आधार पर खादें डालें मिट्टी की जांच के अनुसार ही हम मिट्टी में आवश्यक खादों की मात्रा दे सकते हैं सिंचित क्षेत्रों के लिए, नाइट्रोजन 60 किलो (यूरिया 130 किलो), फासफोरस 24 किलो (एस एस पी 150 किलो), पोटाश 12 किलो (म्यूरेट ऑफ पोटाश 20 किलो) प्रति एकड़ में डालें नाइट्रोजन की आधी मात्रा और फासफोरस और पोटाश की पूरी मात्रा बिजाई के समय डालें बाकी नाइट्रोजन को पहली सिंचाई के समय डालें बारानी क्षेत्रों के लिए, नाइट्रोजन 24 किलो (यूरिया 52 किलो), फासफोरस 12 किलो (एस एस पी 75 किलो), पोटाश 8 किलो (म्यूरेट ऑफ पोटाश 15 किलो) प्रति एकड़ में डालें नाइट्रोज, फासफोरस और पोटाश की पूरी मात्रा बिजाई के समय डालें सिंचित क्षेत्रों में पिछेती बिजाई के लिए, नाइट्रोजन 50 किलो (यूरिया 110 किलो), फासफोरस 12 किलो (एस एस पी 75 किलो), पोटाश 16 किलो (म्यूरेट ऑफ पोटाश 27 किलो) प्रति एकड़ में डालें नाइट्रोजन की एक तिहाई मात्रा और फासफोरस और पोटाश की पूरी मात्रा बिजाई के समय डालें बाकी बची नाइट्रोजन की दो तिहाई मात्रा बिजाई के 35-40 दिनों के बाद डालें यह पाया गया है कि जिंक सल्फेट 10 किलो प्रति एकड़ में डालने से उपज में वृद्धि होती है जिंक की कमी को पूरा करने के लिए जिंक सल्फेट 0.5 प्रतिशत की फोलियर स्प्रे करें 15 दिनों के अंतराल पर दो से तीन स्प्रे करें अच्छी शाखाएं और उपज के लिए 19:19:19 घुलनशील खादें 5 ग्राम + स्टिकर 0.5 मि.ली. को प्रति लीटर पानी में मिलाकर बिजाई के 30 दिनों के बाद स्प्रे करें धन्यवाद
Posted by davinder
Punjab
05-11-2019 04:37 PM
Punjab
11-05-2019 06:03 PM
Davinder ji kirpa krke apna swal vistar nal pusho ji tuci ki jankari lena chahunde ho tan jo tuhanu sahi jankari diti ja skee.
Posted by pavan dhurve
Maharashtra
05-11-2019 04:37 PM
Punjab
11-05-2019 06:05 PM
पवन जी उसकी जांच करके ही उसके बारे में सही जानकारी दी जा सकती है आप नज़दीकी डॉक्टर से उसकी जांच करवा सकते है
Posted by sunil kumar
Bihar
05-11-2019 04:37 PM
Punjab
11-06-2019 10:30 AM
सुनील जी, यदि संभव हो, तो आलू की रोपाई से पहले, हरी खाद वाली फसलें जैसे सनई, जंतर आदि फसलें उगायें और उन्हें मिट्टी में अच्छी तरह दबायें यदि हरी खाद उपलब्ध ना हो तो गली सड़ी रूड़ी की खाद या गाय का गला हुआ गोबर 60-80 क्विंटल प्रति एकड़ में खेत की तैयारी के समय रोपाई से दो सप्ताह पहले डालें फसल की उचित वृद्धि के लिए नाइ.... (Read More)
सुनील जी, यदि संभव हो, तो आलू की रोपाई से पहले, हरी खाद वाली फसलें जैसे सनई, जंतर आदि फसलें उगायें और उन्हें मिट्टी में अच्छी तरह दबायें यदि हरी खाद उपलब्ध ना हो तो गली सड़ी रूड़ी की खाद या गाय का गला हुआ गोबर 60-80 क्विंटल प्रति एकड़ में खेत की तैयारी के समय रोपाई से दो सप्ताह पहले डालें फसल की उचित वृद्धि के लिए नाइट्रोजन 40-50 किलो (90-110 किलो यूरिया), फासफोरस 24-32 किलो (150-200 किलो सिंगल सुपर फासफेट) और पोटाश 40-50 किलो (66-85 किलो म्यूरेट ऑफ पोटाश) की मात्रा प्रति एकड़ में डालें बिजाई के समय नाइट्रोजन का 3/4 हिस्सा और फासफोरस और पोटाश की पूरी मात्रा डालें बाकी बचा हुआ नाइट्रोजन का 1/4 हिस्सा बिजाई से 35-40 दिन बाद जड़ों में मिट्टी लगाने के समय डालें धन्यवाद
Posted by ram
Punjab
05-11-2019 04:33 PM
Punjab
11-07-2019 11:36 AM
Ram ji, french beans di biaji lai tapmaan 18*C hona chahida hai,, is di bijai november mahine ch kiti ja sakdi hai, dhanwad
Posted by Shubham Pandit
Punjab
05-11-2019 04:33 PM
Punjab
11-05-2019 06:10 PM
Pandit ji tuci usde bhukar di janch krwao jekar bhukar hai tan usde bhukar de hisab nal ilagg krwao ji, jekar bhukar nahi hai tan tuci uss nu Broton liquid 50-50ml swere sham, Aptiast bolus 1-1 goli swere sham deo, iss nal frak paa jawega..
Posted by kulwinder singh
Punjab
05-11-2019 04:25 PM
Punjab
11-06-2019 10:42 AM
ਕੁਲਵਿੰਦਰ ਸਿੰਘ ਜੀ , ਪਾਣੀ ਵਾਲੇ ਨਦੀਨ ਨੂੰ ਹੱਥ ਨਾਲ ਹੀ ਕੱਢਿਆ ਜਾਂਦਾ ਹੈ, ਇਸ ਵਿਚ ਕੋਈ ਰਸਾਇਣ ਸਪਰੇ ਨਹੀਂ ਕਰ ਸਕਦੇ ਕਿਉਂਕਿ ਅਜਿਹਾ ਕਰਨ ਨਾਲ ਪਾਣੀ ਚ ਵਸਦੇ ਜੀਵ ਨੂੰ ਨੁਕਸਾਨ ਹੁੰਦਾ ਹੈ, ਤੁਸੀ ਇਸ ਨੂੰ ਹੱਥ ਨਾਲ ਏ ਕੱਢ ਦਿਓ, ਅਤੇ ਇਸ ਜਗਾਹ ਦੀ ਸਾਫ ਸਫਾਈ ਰੱਖੋ, ਧੰਨਵਾਦ
Posted by Kuldeep Maurya
Uttar Pradesh
05-11-2019 04:20 PM
Punjab
11-05-2019 07:10 PM
श्री मान WH 896: इस किस्म की सिंचित क्षेत्रों में समय पर बोने के लिए सिफारिश की गई है PBW 373: यह अधिक उपज वाली किस्म है इसकी सिंचित क्षेत्रों में पिछेती बिजाई के लिए सिफारिश की गई है यह किस्म विभिन्न बीमारियों के प्रतिरोधक है PBW 343: यह किस्म सिंचित और पिछेती बिजाई के क्षेत्रों के लिए उपयुक्त है यह किस्म 130-135 दिनों में कट.... (Read More)
श्री मान WH 896: इस किस्म की सिंचित क्षेत्रों में समय पर बोने के लिए सिफारिश की गई है PBW 373: यह अधिक उपज वाली किस्म है इसकी सिंचित क्षेत्रों में पिछेती बिजाई के लिए सिफारिश की गई है यह किस्म विभिन्न बीमारियों के प्रतिरोधक है PBW 343: यह किस्म सिंचित और पिछेती बिजाई के क्षेत्रों के लिए उपयुक्त है यह किस्म 130-135 दिनों में कटाई के लिए तैयार हो जाती है यह गर्दन तोड़, जल जमाव की स्थितियों के प्रतिरोधक किस्म है यह करनाल बंट के भी प्रतिरोधक और झुलस रोग को सहनेयोग्य किस्म है इसकी औसतन पैदावार 19 क्विंटल प्रति एकड़ होती है HD 2643: यह किस्म सिंचित और पिछेती बिजाई के क्षेत्रों के लिए उपयुक्त है इस किस्म से अच्छी गुणवत्ता वाली रोटी बनती है यह पत्ता और धारीदार कुंगी के प्रतिरोधक और करनाल बंट को सहनेयोग्य किस्म है UP 2425: यह सिंचित स्थितियों में पिछेती बिजाई के लिए उपयुक्त किस्म है PBW-443: यह किस्म सिंचित हालातों में समय पर बोने के लिए उपयुक्त किस्म है DBW-14: यह किस्म सिंचित हालातों में पिछेती बिजाई के लिए उपयुक्त है यह जल्दी पकने वाली किस्म है इसके दाने सख्त होते हैं NW-2036: यह सिंचित हालातों में पिछेती बिजाई के लिए उपयुक्त किस्म है यह जल्दी पकने वाली किस्म है दूसरे शब्दों में, यह किस्म 108 दिनों में कटाई के लिए तैयार हो जाती है इसके दाने छोटे, सुनहरी और अर्द्ध सख्त होते हैं MACS-6145: यह किस्म बारानी क्षेत्रों में समय पर बोने के लिए उपयुक्त है HD-2824: यह किस्म सिंचित क्षेत्रों में समय पर बिजाई के लिए उपयुक्त है PBW-502: यह किस्म पंजाब एग्रीकल्चर युनिवर्सिटी द्वारा विकसित की गई है यह किस्म सिंचित हालातों में समय पर बिजाई के लिए उपयुक्त है यह किस्म पत्ते और धारीदार कुंगी के प्रतिरोधक किस्म हैं
Posted by ਜਸਪ੍ਰੀਤ ਸਿੰਘ
Punjab
05-11-2019 04:18 PM
Punjab
11-05-2019 04:21 PM
ਜਪਾਨੀ ਬਟੇਰ (Japanese quail ) ਨੂੰ ਆਮ ਤੌਰ ‘ਤੇ ਬਟੇਰ ਕਿਹਾ ਜਾਂਦਾ ਹੈ ਹੇਚਰੀ ਵਿੱਚ 35 ਵਲੋਂ 40 ਦਿਨਾਂ ਵਿੱਚ ਬਟੇਰਾ ਖਾਣ ਲਾਇਕ ਹੋ ਜਾਂਦਾ ਹੈ ਇੱਕ ਆਂਡਾ ਪੰਜ ਰੁਪਏ ਵਿੱਚ ਵਿਕਦਾ ਹੈ ਬਟੇਰ ਤਿੰਨ – ਚਾਰ ਸੌ ਗਰਾਮ ਦਾ ਹੋ ਜਾਂਦਾ ਹੈ ਤਾਂ 120 ਰੁਪਏ ਜੋੜਾ ਵਿਕਦਾ ਹੈ ਪ੍ਰਤੀ ਬਟੇਰ 15 ਵਲੋਂ 20 ਰੁਪਏ ਬਚਤ ਹੁੰਦੀ ਹੈ ਇਸਨੂੰ ਮੁਰਗੀਆਂ ਦੇ ਮੁਕਾਬਲੇ ਬਿਮਾਰੀ ਬਹੁਤ ਹੀ ਘੱਟ ਲੱਗਦੀ ਹੈ ਖੰਭ ਦੇ ਆਧਾਰ ‘ਤੇ ਇਸ.... (Read More)
ਜਪਾਨੀ ਬਟੇਰ (Japanese quail ) ਨੂੰ ਆਮ ਤੌਰ ‘ਤੇ ਬਟੇਰ ਕਿਹਾ ਜਾਂਦਾ ਹੈ ਹੇਚਰੀ ਵਿੱਚ 35 ਵਲੋਂ 40 ਦਿਨਾਂ ਵਿੱਚ ਬਟੇਰਾ ਖਾਣ ਲਾਇਕ ਹੋ ਜਾਂਦਾ ਹੈ ਇੱਕ ਆਂਡਾ ਪੰਜ ਰੁਪਏ ਵਿੱਚ ਵਿਕਦਾ ਹੈ ਬਟੇਰ ਤਿੰਨ – ਚਾਰ ਸੌ ਗਰਾਮ ਦਾ ਹੋ ਜਾਂਦਾ ਹੈ ਤਾਂ 120 ਰੁਪਏ ਜੋੜਾ ਵਿਕਦਾ ਹੈ ਪ੍ਰਤੀ ਬਟੇਰ 15 ਵਲੋਂ 20 ਰੁਪਏ ਬਚਤ ਹੁੰਦੀ ਹੈ ਇਸਨੂੰ ਮੁਰਗੀਆਂ ਦੇ ਮੁਕਾਬਲੇ ਬਿਮਾਰੀ ਬਹੁਤ ਹੀ ਘੱਟ ਲੱਗਦੀ ਹੈ ਖੰਭ ਦੇ ਆਧਾਰ ‘ਤੇ ਇਸ ਨੂੰ ਵਿਭਿੰਨ ਕਿਸਮਾਂ ਵਿੱਚ ਵੰਡਿਆ ਜਾ ਸਕਦਾ ਹੈ, ਜਿਵੇਂ ਫਰਾਓਂ, ਇੰਗਲਿਸ਼ ਸਫੈਦ, ਟਿਕਸਡੋ, ਬ੍ਰਿਟਸ਼ ਰੇਜ ਅਤੇ ਮਾਚੁਰੀਅਨ ਗੋਲਡਨ ਜੇਕਰ ਤੁਸੀਂ ਵੀ ਜਾਪਾਨੀ ਬਟੇਰ ਪਾਲਣ ਬਾਰੇ ਟ੍ਰੇਨਿੰਗ ਲੈਣਾ ਚਾਹੁੰਦੇ ਹੋਂ ਤਾਂ ਇਸਨੂੰ ਪਾਲਣ ਦੀ ਸਿਖਲਾਈ ਚੰਡੀਗੜ੍ਹ ਦੇ ਕੇਂਦਰੀ ਮੁਰਗੀ ਪਾਲਣ ਸੰਸਥਾ (Central Poultry Development Organization (Northern Region)) ਤੋਂ ਮਿਲ ਜਾਵੇਗੀ ਇਸ ਸਬੰਧ ਵਿਚ CPDO ਵਲੋਂ ਸਮੇ ਸਮੇ ਤੇ ਮੁਰਗੀ ਪਾਲਣ ਨਾਲ ਸਬੰਧਿਤ ਸਿਖਲਾਈ ਦਿਤੀ ਜਾਂਦੀ ਹੈ ਜੋ ਤੁਸੀਂ ਆਨਲਾਈਨ ਫਾਰਮ ਭਰ ਕੇ ਰਜਿਸਟਰ ਕਰਵਾ ਸਕਦੇ ਹੋ ਇਹ ਇੰਡਸਟਰੀ ਏਰੀਆ , ਫੇਸ-1, ਚੰਡੀਗੜ੍ਹ ਵਿਚ ਸਥਿਤ ਹੈ ਤੁਸੀਂ ਫੋਨ 0172-2655391 ਤੇ ਸੰਪਰਕ ਵੀ ਕਰ ਸਕਦੇ ਹੋ ਹੋਰ ਜ਼ਿਆਦਾ ਜਾਣਕਾਰੀ ਲਈ ਵੈਬਸਾਈਟ http://cpdonrchd.gov.in ਤੇ ਜਾਓ
Posted by jasvir singh
Punjab
05-11-2019 04:13 PM
Punjab
11-05-2019 04:18 PM
ਜਸਵੀਰ ਜੀ ਇਹਨਾਂ ਦਾ ਕੰਮ ਇਕ ਹੀ ਹੁੰਦਾ ਹੈ, ਇੰਜੇਕਸ਼ਨ ਨਾਲ ਅਸਰ ਜਲਦੀ ਸ਼ੁਰੂ ਹੋਣ ਲਗ ਜਾਂਦਾ ਹੈ, ਇਸ ਲਈ ਇੰਜੇਕਸ਼ਨ ਦੀ ਵਰਤੋਂ ਕੀਤੀ ਜਾਂਦੀ ਹੈ, ਜੇਕਰ ਪਸ਼ੂ ਇੰਜੇਕਸ਼ਨ ਨਹੀਂ ਲਗਵਾਉਂਦਾ ਹੈ ਤਾਂ Liquid ਦੀ ਵਰਤੋਂ ਕਰ ਸਕਦੇ ਹੋ, ਇਹਨਾਂ ਨਾਲ ਥਨਾ ਦੀਆ ਬਿਮਾਰੀਆਂ ਵੀ ਕੰਟਰੋਲ ਰਹਿੰਦੀਆਂ ਹੈ ..
Posted by Ajay Jaildar
Haryana
05-11-2019 04:08 PM
Punjab
11-06-2019 10:45 AM
अजय जी, आप गेहूं की किस्मे जैसे के PBW 343, UP 2338, WH 711, WH 416, WH147 की बिजाई कर सकते हो, धन्यवाद
Posted by Balram Dairu
Rajasthan
05-11-2019 04:07 PM
Punjab
11-06-2019 10:48 AM
बलराम जी, नदीनों की संख्या को देखते हुए दो सप्ताह के अंतराल पर दो से तीन गोडाई और दो निराई करें धन्यवाद
Posted by Happy Singh
Punjab
05-11-2019 04:02 PM
Punjab
11-05-2019 06:09 PM
ਹੈਪੀ ਜੀ ਕਿਰਪਾ ਕਰਕੇ ਸਵਾਲ ਵਿਸਤਾਰ ਨਾਲ ਪੁਛੋ ਤਾ ਜੋ ਤੁਹਾਨੂੰ ਇਸ ਬਾਰੇ ਪੂਰੀ ਜਾਣਕਾਰੀ ਦਿਤੀ ਜਾ ਸਕੇ ਧੰਨਵਾਦ
Posted by akshay Kanungo
Madhya Pradesh
05-11-2019 04:00 PM
Punjab
11-06-2019 11:03 AM
अक्षय जी , फरवरी-मार्च या अगस्त-सितंबर महीना अमरूद , के रोपण का सबसे अनुकूल समय होता है रोपण उपयोग के लिए 6x5 m यदि रोपण के लिए 7 m की दूरी का उपयोग किया जाता है, तो वर्ग प्रणाली में, 196 पौधे को समायोजित किया जा सकता है और रोपण की हेक्सागोनल प्रणाली पर 216 इसे लीची और आम के बागों में भराव की फसल के रूप में लगाया जा सकता ह.... (Read More)
अक्षय जी , फरवरी-मार्च या अगस्त-सितंबर महीना अमरूद , के रोपण का सबसे अनुकूल समय होता है रोपण उपयोग के लिए 6x5 m यदि रोपण के लिए 7 m की दूरी का उपयोग किया जाता है, तो वर्ग प्रणाली में, 196 पौधे को समायोजित किया जा सकता है और रोपण की हेक्सागोनल प्रणाली पर 216 इसे लीची और आम के बागों में भराव की फसल के रूप में लगाया जा सकता है 06x0.6x0.6 मीटर के गड्ढे खोदें और खराब मिट्टी के लिए 1mx1mx1m के गड्ढे के आकार का उपयोग करें और कुछ दिनों के लिए सूरज को बेनकाब करें फिर गड्ढे को अच्छी तरह से विघटित गाय के गोबर, सुपरफॉस्फेट और मिट्टी से भरें गड्ढे के बीच में पौधे रोपें सीधी बुवाई या रोपाई विधि
Posted by Khushwant Singh
Punjab
05-11-2019 03:56 PM
Punjab
11-06-2019 01:48 PM
ਖੁਸ਼ਵੰਤ ਜੀ, ਅਨਾਰ ਦੇ ਫੱਟਣ ਦਾ ਕਾਰਣ boron ਤੱਤ ਦੀ ਕਮੀ ਹੁੰਦੀ ਹੈ, ਤੁਸੀ ਇਸ ਵਿਚ boron @ 1 gm ਪ੍ਰਤੀ ਲਿਟਰ ਪਾਣੀ ਦੇ ਹਿਸਾਬ ਨਾ ਸਪਰੇ ਕਰੋ, ਧੰਨਵਾਦ
Posted by G M Lapon
Punjab
05-11-2019 03:42 PM
Punjab
11-07-2019 03:50 PM
ਸ਼੍ਰੀਮਾਨ ਜੀ, ਕੁਦਰਤੀ ਖੇਤੀ ਲਈ ਕਣਕ ਦੀ ਬਿਜਾਈ ਤੋਂ ਪਹਿਲਾ ਇਸ ਵਿਚ ਰੂੜੀ ਦੀ ਖਾਦ 5 -7 ਟੰਨ ਪ੍ਰਤੀ ਏਕੜ ਦੇ ਹਿਸਾਬ ਨਾਲ ਪਾਓ, ਅਤੇ ਕਣਕ ਦੀ ਫ਼ਸਲ ਦੇ ਵਿਕਾਸ ਲਈ ਪਾਥੀਆਂ ਦੇ ਪਾਣੀ ਦਾ ਘੋਲ ਬਣਾ ਕੇ ਸਪਰੇ ਕਰੋ, ਇਸਦਾ ਘੋਲ ਤਿਆਰ ਕਾਰਨ ਲਈ 5 -7 ਪਾਥੀਆਂ ਨੂੰ 50 ਲਿਟਰ ਪਾਣੀ ਚ 4 -5 ਦੀਨਾ ਲਈ ਰੱਖੋ ਜਦ ਪਾਣੀ 30 ਲਿਟਰ ਹੋ ਜਾਏ ਤਾਂ ਇਸ ਵਿਚ 90 ਲਿਟਰ ਪਾਣੀ ਹੋਰ ਮਿਲਾ ਕੇ ਇਸਦੀ ਸਪਰੇ ਕਰ ਦਿਓ, ਜੇਕਰ ਫ਼ਸਲ ਵ.... (Read More)
ਸ਼੍ਰੀਮਾਨ ਜੀ, ਕੁਦਰਤੀ ਖੇਤੀ ਲਈ ਕਣਕ ਦੀ ਬਿਜਾਈ ਤੋਂ ਪਹਿਲਾ ਇਸ ਵਿਚ ਰੂੜੀ ਦੀ ਖਾਦ 5 -7 ਟੰਨ ਪ੍ਰਤੀ ਏਕੜ ਦੇ ਹਿਸਾਬ ਨਾਲ ਪਾਓ, ਅਤੇ ਕਣਕ ਦੀ ਫ਼ਸਲ ਦੇ ਵਿਕਾਸ ਲਈ ਪਾਥੀਆਂ ਦੇ ਪਾਣੀ ਦਾ ਘੋਲ ਬਣਾ ਕੇ ਸਪਰੇ ਕਰੋ, ਇਸਦਾ ਘੋਲ ਤਿਆਰ ਕਾਰਨ ਲਈ 5 -7 ਪਾਥੀਆਂ ਨੂੰ 50 ਲਿਟਰ ਪਾਣੀ ਚ 4 -5 ਦੀਨਾ ਲਈ ਰੱਖੋ ਜਦ ਪਾਣੀ 30 ਲਿਟਰ ਹੋ ਜਾਏ ਤਾਂ ਇਸ ਵਿਚ 90 ਲਿਟਰ ਪਾਣੀ ਹੋਰ ਮਿਲਾ ਕੇ ਇਸਦੀ ਸਪਰੇ ਕਰ ਦਿਓ, ਜੇਕਰ ਫ਼ਸਲ ਵਿਚ ਕੀਟ ਦਾ ਹਮਲਾ ਨਜ਼ਰ ਆਉਂਦਾ ਹੈ ਤਾਂ ਉਸਦੀ ਰੋਕਥਾਮ ਲਈ ਨੀਮ ਦਾ ਤੇਲ 50 ml ਪ੍ਰਤੀ ਏਕੜ ਦੇ ਹਿਸਾਬ ਨਾਲ ਸਪਰੇ ਕਰੋ ਅਤੇ ਜੇਕਰ ਫ਼ਸਲ ਵਿਚ ਫੰਗਸ ਦਾ ਹਮਲਾ ਹੋ ਜਾਏ ਉਸਦੇ ਲਈ ਖੱਟੀ ਲੱਸੀ 3 liter ਪ੍ਰਤੀ ਏਕੜ ਦੇ ਹਿਸਾਬ ਨਾਲ ਸਪਰੇ ਕਰਨੀ ਹੁੰਦੀ ਹੈ, ਧੰਨਵਾਦ
Posted by Hardev
Rajasthan
05-11-2019 03:42 PM
Punjab
11-06-2019 01:39 PM
हरदेव जी, आप जो की बिजाई के लिए इक एकड़ में 17 kg DAP डालें , धन्यवाद
Posted by balkour sidhu
Rajasthan
05-11-2019 03:41 PM
Punjab
11-07-2019 03:28 PM
Balkour ji, kripya ap bataye ke ap liquid trichoderma ki baat kar rahe hai, yan powder trichoderma ki baat kar rahe hai, taki apko iske bare mein puri jankari di ja sake, dhanywad
Posted by amit Kumar
Bihar
05-11-2019 03:41 PM
Punjab
11-05-2019 04:01 PM
बकरी पालन बहुत ही लाभकारी काम है शुरूआत करने के लिए आप 10 बकरियों और 2 बकरे के साथ कर सकते हैं इन्हें खुराक कम चाहिए इसलिए इन्हें आसानी से पाल सकते हैं ये हर प्रकार के मौसम में पाली जा सकती हैं बकरियां 12-14 महीने में बच्चे देना शुरू कर देती है बकरी का गर्भ समय 150 दिन का होता है और साल में 1-5 बच्चे देती है साल में दो बच्.... (Read More)
बकरी पालन बहुत ही लाभकारी काम है शुरूआत करने के लिए आप 10 बकरियों और 2 बकरे के साथ कर सकते हैं इन्हें खुराक कम चाहिए इसलिए इन्हें आसानी से पाल सकते हैं ये हर प्रकार के मौसम में पाली जा सकती हैं बकरियां 12-14 महीने में बच्चे देना शुरू कर देती है बकरी का गर्भ समय 150 दिन का होता है और साल में 1-5 बच्चे देती है साल में दो बच्चे देना आम बात है बकरियां 8-10 वर्ष तक बच्चे देती हैं और अपन गिनती को तेजी से बढ़ा लेती हैं आप बारबरी, ब्लैक बंगाल, जैसी नसल पाल सकते हैं इसकी ट्रेनिेंग के लिए आप अपने कुषि विज्ञान केंद्र से संपर्क करे या फिर जो बकरी पालन का व्यवसाय कर रहा कोई किसान उसका फार्म स्वंय जाकर देखकर आयें तो और भी बा​रीकियों का पता चल जायेगा, इसके इलावा आप बीटल नस्ल का रख सकते है क्योंकि ये नस्ल मीट और दूध दोंनो कामों के लिए अच्छी रहती है, बकरी पालन में लोन लेने के लिए सबसे जरूरी है ट्रेनिंग सर्टीफिकेट अपने नज़दीक के कृषि विज्ञान केंद्र से ट्रेनिंग करने के बाद ट्रेनिंग के सर्टीफिकेट पर लोन एप्लाई होता है पर लोन मिलेगा या नहीं यह बैंक मेनेजर पर निर्भर करता है क्योंकि पहली बात यह है कि बैंक देखता है कि आपके अकाउंट में कितने पैसों का लेन देन हो रहा है और आपके पास ज़मीन गारंटी के तौर पर देने के लिए है या नहीं और अन्य भी कई बातें चैक करके लोन के लिए सहमत होता है बाकी कोशिश करें कि लोन के बिना अपने स्तर पर ही काम शुरू करें क्योंकि लोन की किश्त हर महीने भरनी पड़ेगी पर बकरियों से कमाई हर महीने नहीं होने होगी बाकी यदि कोशिश करके देखनी है तो अपने ट्रेनिंग सर्टीफिकेट से आप अपने जिले के पशु पालन विभाग अफसर को मिलें और उस पर प्रवानगी लेकर फिर बैंक से बात करके देखें.
Posted by rajender sandhu
Rajasthan
05-11-2019 03:40 PM
Punjab
11-09-2019 03:44 PM
Rajender ji, tuc kallar jameen ch kanak di kisam HD 2851 di bijai kar sakde ho, jameen vich pehla 1 kg gypsum pa deo, dhanwad
Posted by jaskaran Singh
Punjab
05-11-2019 03:37 PM
Punjab
11-05-2019 04:03 PM
ਜੇਕਰ ਤੁਸੀ ਪਸ਼ੂਆਂ ਨੂੰ ਘਰ ਵਿਚ ਫੀਡ ਤਿਆਰ ਕਰਕੇ ਦੇਣੀ ਹੈ ਤਾਂ ਸੰਤੁਲਿਤ ਖੁਰਾਕ 100 ਕਿਲੋ ਬਣਾਉਣ ਲਈ ਲੋੜੀਂਦੀ ਸਮੱਗਰੀ ਚਾਹੀਦੀ ਹੈ ਜਿਵੇਂ 25 ਕਿਲੋ ਅਨਾਜ ( ਜਵਾਰ, ਬਾਜਰੀ (ਸਰਦੀਆਂ) , ਕਣਕ, ਜੌਂ ( ਗਰਮੀਆ) ਇਹਨਾਂ ਵਿੱਚੋ ਕੋਈ ਇੱਕ ) , ਦਾਲ ਚੂਰੀ 20 ਕਿਲੋ( ਮੂੰਗੀ ਚੂਰੀ, ਮਾਂਹ ਚੂਰੀ, ਮੋਠ ਚੂਰੀ ( ਕੇਵਲ ਸਰਦੀਆਂ ਲਈ) , ਮਸੁਰ ਚੂਰੀ ,ਅਰਹਰ, (ਇਨਾਂ ਵਿੱਚੋ ਇੱਕ ) , DOC 25 ਕਿਲੋ ( ਚੌਲਾਂ ਦਾ ਚੂਰਾ ) , ਫਾਈਬ.... (Read More)
ਜੇਕਰ ਤੁਸੀ ਪਸ਼ੂਆਂ ਨੂੰ ਘਰ ਵਿਚ ਫੀਡ ਤਿਆਰ ਕਰਕੇ ਦੇਣੀ ਹੈ ਤਾਂ ਸੰਤੁਲਿਤ ਖੁਰਾਕ 100 ਕਿਲੋ ਬਣਾਉਣ ਲਈ ਲੋੜੀਂਦੀ ਸਮੱਗਰੀ ਚਾਹੀਦੀ ਹੈ ਜਿਵੇਂ 25 ਕਿਲੋ ਅਨਾਜ ( ਜਵਾਰ, ਬਾਜਰੀ (ਸਰਦੀਆਂ) , ਕਣਕ, ਜੌਂ ( ਗਰਮੀਆ) ਇਹਨਾਂ ਵਿੱਚੋ ਕੋਈ ਇੱਕ ) , ਦਾਲ ਚੂਰੀ 20 ਕਿਲੋ( ਮੂੰਗੀ ਚੂਰੀ, ਮਾਂਹ ਚੂਰੀ, ਮੋਠ ਚੂਰੀ ( ਕੇਵਲ ਸਰਦੀਆਂ ਲਈ) , ਮਸੁਰ ਚੂਰੀ ,ਅਰਹਰ, (ਇਨਾਂ ਵਿੱਚੋ ਇੱਕ ) , DOC 25 ਕਿਲੋ ( ਚੌਲਾਂ ਦਾ ਚੂਰਾ ) , ਫਾਈਬਰ ਛਿਲਕਾ 15 ਕਿਲੋ (ਕਣਕ, ਚੌਕਰ, ਚਨਾ ਛਿਲਕਾ, ਮਟਰ ਛਿਲਕਾ, ਇਨਾਂ ਵਿੱਚੋ ਇੱਕ) , ਖਲ਼ 15 ਕਿਲੋ(ਸਰੋਂ, ਬਿਨੌਲਾ ਜਾਂ ਸੋਇਆ (ਇਹਨਾਂ ਵਿੱਚੋ ਕੋਈ ਇੱਕ) , ਮਿੱਠਾ ਸੋਡਾ 250 ਗ੍ਰਾਮ, 1 ਕਿਲੋ ਨਮਕ, ਗੁੜ 1 ਕਿਲੋ, 1 ਕਿੱਲੋ ਹਲਦੀ (ਸਰਦੀਆ ਵਿੱਚ ) ਇਹ ਨੂੰ ਰਲਾ ਲਵੋ ਇਹ ਫੀਡ ਪਸ਼ੂ ਲਈ ਬਹੁਤ ਲਾਹੇਵੰਦ ਹੁੰਦੀ ਹੈ, ਪਸ਼ੂ ਦਾ ਦੁੱਧ ਉਸਦੀ ਨਸਲ ਅਤੇ ਖੁਰਾਕ ਤੇ ਨਿਰਭਰ ਕਰਦਾ ਹੈ ਤੁਸੀ ਓਹਨਾ ਨੂੰ ਰੋਜਾਨਾ 35-40 ਕਿਲੋ ਹਰਾ ਚਾਰਾ ਦਿਓ ਅਤੇ ਤੁਸੀ ਉਸ ਨੂੰ Enerdyna liquid 100ml ਰੋਜਾਨਾ, Milkout powder 2-2 ਚਮਚ ਰੋਜਾਨਾ ਦੇਣਾ ਸ਼ੁਰੂ ਕਰੋ ਬਾਕੀ ਤੁਸੀ ਮਿਨਰਲ ਮਿਕਸਚਰ 50-50gm ਸਵੇਰੇ ਸ਼ਾਮ ਦਿਓ, ਇਸ ਨਾਲ ਫਰਕ ਪੈ ਜਾਵੇਗਾ..
Posted by padam singh rathore
Rajasthan
05-11-2019 03:23 PM
Punjab
11-06-2019 02:32 PM
पदम् जी, आप ओषिदिये पौधों की पैदावार कर सकते है जोकि काम समय में की जायदा मुनाफा देती है, ओषिदिये फसलें जैसे के ओला, ईसबगोल, बेल, सनाय, सोये , हीना की बिजाई कर कर सकते है, धन्यवाद
Posted by cp patidar
Madhya Pradesh
05-11-2019 03:19 PM
Maharashtra
11-05-2019 05:10 PM
Pant Lentil 8 (PL 063): यह किस्म 2010 में जारी की गई इसकी औसतन पैदावार 5 क्विंटल प्रति एकड़ होती है यह किस्म 135 दिनों में पक जाती है यह किस्म काफी हद तक कुंगी, सूखे और फली छेदक के प्रतिरोधक किस्म है Garima: यह सिंचित और असिंचित दोनों क्षेत्रों में उगाई जा सकती है इसके पत्ते चौड़े और गहरे हरे रंग के होते हैं इसके दाने सपना किस्म के दा.... (Read More)
Pant Lentil 8 (PL 063): यह किस्म 2010 में जारी की गई इसकी औसतन पैदावार 5 क्विंटल प्रति एकड़ होती है यह किस्म 135 दिनों में पक जाती है यह किस्म काफी हद तक कुंगी, सूखे और फली छेदक के प्रतिरोधक किस्म है Garima: यह सिंचित और असिंचित दोनों क्षेत्रों में उगाई जा सकती है इसके पत्ते चौड़े और गहरे हरे रंग के होते हैं इसके दाने सपना किस्म के दानों से बड़े होते हैं यह किस्म 135 दिनों में कटाई के लिए तैयार हो जाती है इसकी औसतन पैदावार 6 क्विंटल प्रति एकड़ होती है Bombay 18: यह किस्म 130-140 दिनों में कटाई के लिए तैयार हो जाती है इसकी औसतन पैदावार 4-4.8 क्विंटल प्रति एकड़ होती है DPL 15: यह किस्म 130-140 दिनों में कटाई के लिए तैयार हो जाती है इसकी औसतन पैदावार 5.6-6.4 क्विंटल प्रति एकड़ होती है Pant Lentil 7: यह किस्म 147 दिनों में कटाई के लिए तैयार हो जाती है इसकी औसतन पैदावार 6 क्विंटल प्रति एकड़ होती है इसका बीज आपको लोकल market में मिल जायेगा धन्यवाद
Posted by ਅਰਸ਼ਪ੍ਰੀਤ ਸਿੰਘ
Punjab
05-11-2019 03:19 PM
Punjab
11-05-2019 03:35 PM
ਤੁਸੀ ਗਾਂ ਨੂੰ ਰੋਜਾਨਾ 35-40 ਕਿਲੋ ਹਰਾ ਚਾਰਾ ਦਿਓ ਅਤੇ ਹਰ 3 ਮਹੀਨਿਆਂ ਬਾਦ ਪੇਟ ਦੇ ਕੀੜਿਆਂ ਲਈ ਗੋਲੀ ਜਰੂਰ ਦਿਓ ਅਤੇ ਉਸ ਨੂੰ ਦੇਸੀ ਘਿਓ ਦੇ ਸਕਦੇ ਹੋ ਇਹ ਤੁਸੀ 100 ਗ੍ਰਾਮ ਰੋਜਾਨਾ ਦੇ ਸਕਦੇ ਹੋ, ਬਾਕੀ ਤੁਸੀ ਉਸ ਨੂੰ ਘਰ ਵਿਚ ਫੀਡ ਤਿਆਰ ਵੀ ਦੇ ਸਕਦੇ ਹੋ ਸੰਤੁਲਿਤ ਖੁਰਾਕ 100 ਕਿਲੋ ਬਣਾਉਣ ਲਈ ਲੋੜੀਂਦੀ ਸਮੱਗਰੀ ਚਾਹੀਦੀ ਹੈ ਜਿਵੇਂ 25 ਕਿਲੋ ਅਨਾਜ ( ਜਵਾਰ, ਬਾਜਰੀ (ਸਰਦੀਆਂ) , ਕਣਕ, ਜੌਂ ( ਗਰਮੀ.... (Read More)
ਤੁਸੀ ਗਾਂ ਨੂੰ ਰੋਜਾਨਾ 35-40 ਕਿਲੋ ਹਰਾ ਚਾਰਾ ਦਿਓ ਅਤੇ ਹਰ 3 ਮਹੀਨਿਆਂ ਬਾਦ ਪੇਟ ਦੇ ਕੀੜਿਆਂ ਲਈ ਗੋਲੀ ਜਰੂਰ ਦਿਓ ਅਤੇ ਉਸ ਨੂੰ ਦੇਸੀ ਘਿਓ ਦੇ ਸਕਦੇ ਹੋ ਇਹ ਤੁਸੀ 100 ਗ੍ਰਾਮ ਰੋਜਾਨਾ ਦੇ ਸਕਦੇ ਹੋ, ਬਾਕੀ ਤੁਸੀ ਉਸ ਨੂੰ ਘਰ ਵਿਚ ਫੀਡ ਤਿਆਰ ਵੀ ਦੇ ਸਕਦੇ ਹੋ ਸੰਤੁਲਿਤ ਖੁਰਾਕ 100 ਕਿਲੋ ਬਣਾਉਣ ਲਈ ਲੋੜੀਂਦੀ ਸਮੱਗਰੀ ਚਾਹੀਦੀ ਹੈ ਜਿਵੇਂ 25 ਕਿਲੋ ਅਨਾਜ ( ਜਵਾਰ, ਬਾਜਰੀ (ਸਰਦੀਆਂ) , ਕਣਕ, ਜੌਂ ( ਗਰਮੀਆ) ਇਹਨਾਂ ਵਿੱਚੋ ਕੋਈ ਇੱਕ ) , ਦਾਲ ਚੂਰੀ 20 ਕਿਲੋ( ਮੂੰਗੀ ਚੂਰੀ, ਮਾਂਹ ਚੂਰੀ, ਮੋਠ ਚੂਰੀ ( ਕੇਵਲ ਸਰਦੀਆਂ ਲਈ) , ਮਸੁਰ ਚੂਰੀ ,ਅਰਹਰ, (ਇਨਾਂ ਵਿੱਚੋ ਇੱਕ ) , DOC 25 ਕਿਲੋ ( ਚੌਲਾਂ ਦਾ ਚੂਰਾ ) , ਫਾਈਬਰ ਛਿਲਕਾ 15 ਕਿਲੋ (ਕਣਕ, ਚੌਕਰ, ਚਨਾ ਛਿਲਕਾ, ਮਟਰ ਛਿਲਕਾ, ਇਨਾਂ ਵਿੱਚੋ ਇੱਕ) , ਖਲ਼ 15 ਕਿਲੋ(ਸਰੋਂ, ਬਿਨੌਲਾ ਜਾਂ ਸੋਇਆ (ਇਹਨਾਂ ਵਿੱਚੋ ਕੋਈ ਇੱਕ) , ਮਿੱਠਾ ਸੋਡਾ 250 ਗ੍ਰਾਮ, 1 ਕਿਲੋ ਨਮਕ, ਗੁੜ 1 ਕਿਲੋ, 1 ਕਿੱਲੋ ਹਲਦੀ (ਸਰਦੀਆ ਵਿੱਚ ) ਇਹ ਨੂੰ ਰਲਾ ਲਵੋ ਇਹ ਫੀਡ ਪਸ਼ੂ ਲਈ ਬਹੁਤ ਲਾਹੇਵੰਦ ਹੁੰਦੀ ਹੈ..
Posted by ਸੁਖਚੈਨ िਸੰਘ
Punjab
05-11-2019 03:13 PM
Punjab
11-06-2019 01:44 PM
ਸੁਖਚੈਨ ਜੀ , UNNAT PBW 343: ਇਹ ਕਿਸਮ ਸਿੰਚਾਈ ਵਾਲੇ ਖੇਤਰਾਂ ਵਿੱਚ ਲਗਾਉਣ ਯੋਗ ਹੈ ਪੱਕਣ ਦੇ ਲਈ ਇਹ 155 ਦਿਨਾਂ ਦਾ ਸਮਾਂ ਲੈਦੀ ਹੈ ਇਹ ਕਰਨਾਲ ਬੰਟ ਦੀ ਪ੍ਰਤਿਰੋਧੀ ਅਤੇ ਬਲਾਈਟ ਨੂੰ ਵੀ ਸਹਿਣ ਯੋਗ ਹੈ ਇਸਦੀ ਔਸਤ ਪੈਦਾਵਾਰ 23.2 ਕੁਇੰਟਲ ਪ੍ਰਤੀ ਏਕੜ ਹੈ UNNAT PBW 550: ਇਹ ਕਿਸਮ ਪੰਜਾਬ ਦੇ ਸਾਰਿਆਂ ਇਲਾਕਿਆਂ ਵਿੱਚ ਉਗਾਈ ਜਾਂਦੀ ਹੈ ਇਹ ਕਿਸਮ 145 ਦਿਨਾਂ ਵਿੱਚ ਪੱਕ ਕੇ ਤਿਆਰ ਹੋ ਜਾਂਦੀ ਹੈ ਇਹ ਪੀਲੀ ਅਤੇ ਭੂਰ.... (Read More)
ਸੁਖਚੈਨ ਜੀ , UNNAT PBW 343: ਇਹ ਕਿਸਮ ਸਿੰਚਾਈ ਵਾਲੇ ਖੇਤਰਾਂ ਵਿੱਚ ਲਗਾਉਣ ਯੋਗ ਹੈ ਪੱਕਣ ਦੇ ਲਈ ਇਹ 155 ਦਿਨਾਂ ਦਾ ਸਮਾਂ ਲੈਦੀ ਹੈ ਇਹ ਕਰਨਾਲ ਬੰਟ ਦੀ ਪ੍ਰਤਿਰੋਧੀ ਅਤੇ ਬਲਾਈਟ ਨੂੰ ਵੀ ਸਹਿਣ ਯੋਗ ਹੈ ਇਸਦੀ ਔਸਤ ਪੈਦਾਵਾਰ 23.2 ਕੁਇੰਟਲ ਪ੍ਰਤੀ ਏਕੜ ਹੈ UNNAT PBW 550: ਇਹ ਕਿਸਮ ਪੰਜਾਬ ਦੇ ਸਾਰਿਆਂ ਇਲਾਕਿਆਂ ਵਿੱਚ ਉਗਾਈ ਜਾਂਦੀ ਹੈ ਇਹ ਕਿਸਮ 145 ਦਿਨਾਂ ਵਿੱਚ ਪੱਕ ਕੇ ਤਿਆਰ ਹੋ ਜਾਂਦੀ ਹੈ ਇਹ ਪੀਲੀ ਅਤੇ ਭੂਰੀ ਕੁੰਗੀ ਦੀ ਰੋਧਕ ਕਿਸਮ ਹੈ ਇਸਦਾ ਔਸਤਨ ਕੱਦ 86 ਸੈ.ਮੀ. ਹੁੰਦਾ ਹੈ ਇਸ ਦਾ ਔਸਤਨ ਝਾੜ 23 ਕੁਇੰਟਲ ਪ੍ਰਤੀ ਏਕੜ ਹੁੰਦਾ ਹੈ PBW 1 Zn: ਇਸ ਕਿਸਮ ਦੇ ਪੌਦੇ ਦਾ ਔਸਤਨ ਕੱਦ 103 ਸੈ.ਮੀ. ਹੁੰਦਾ ਹੈ ਇਹ ਕਿਸਮ 151 ਦਿਨਾਂ ਵਿੱਚ ਕਟਾਈ ਲਈ ਤਿਆਰ ਹੋ ਜਾਂਦੀ ਹੈ ਇਸ ਦਾ ਔਸਤਨ ਝਾੜ 22.5 ਕੁਇੰਟਲ ਪ੍ਰਤੀ ਏਕੜ ਹੁੰਦਾ ਹੈ PBW 725: ਇਹ ਕਿਸਮ ਪੀ ਏ ਯੂ, ਐਗਰੀਕਲਚਰ ਯੂਨੀਵਰਸਿਟੀ ਦੁਆਰਾ ਸਿਫਾਰਿਸ਼ ਕੀਤੀ ਗਈ ਹੈ ਇਹ ਇੱਕ ਮੱਧਰੀ ਕਿਸਮ ਹੈ ਅਤੇ ਇਹ ਸਿੰਚਾਈ ਵਾਲੇ ਖੇਤਰਾਂ ਵਿੱਚ ਲਗਾਈ ਜਾਂਦੀ ਹੈ ਇਹ ਪੀਲੇ ਅਤੇ ਭੂਰੇ ਜੰਗ ਦੀ ਪ੍ਰਤਿਰੋਧੀ ਕਿਸਮ ਹੈ ਇਸਦੇ ਦਾਣੇ ਮੋਟੇ , ਅਤੇ ਗਹਿਰੇ ਰੰਗ ਦੇ ਹੁੰਦੇ ਹਨ ਇਹ 155 ਦਿਨਾਂ ਵਿੱਚ ਪੱਕ ਕੇ ਤਿਆਰ ਹੋ ਜਾਂਦੀ ਹੈ ਇਸਦੀ ਸਲਾਨਾ ਔਸਤ ਝਾੜ 23 ਕੁਇੰਟਲ ਪ੍ਰਤੀ ਏਕੜ ਹੈ PBW 677: ਇਹ ਕਿਸਮ 160 ਦਿਨਾਂ ਵਿੱਚ ਕਟਾਈ ਲਈ ਤਿਆਰ ਹੋ ਜਾਂਦੀ ਹੈ ਇਸਦਾ ਔਸਤ ਝਾੜ 22.4 ਕੁਇੰਟਲ ਪ੍ਰਤੀ ਏਕੜ ਹੈ HD 3086 (PusaGautam) : ਇਸ ਦਾ ਔਸਤਨ ਝਾੜ 23 ਕੁਇੰਟਲ ਪ੍ਰਤੀ ਏਕੜ ਹੁੰਦਾ ਹੈ ਇਹ ਪੱਤਿਆਂ ਦੇ ਪੀਲੇਪਣ ਅਤੇ ਭੂਰੇਪਣ ਦੀ ਬਿਮਾਰੀ ਤੋਂ ਰਹਿਤ ਹੁੰਦੀ ਹੈ ਵਧੀਆ ਕਿਮਸ ਦੇ ਬਰੈੱਡ ਬਣਾਉਣ ਦੇ ਸਾਰੇ ਗੁਣ/ਤੱਤ ਇਸ ਵਿਚ ਮੌਜੂਦ ਹਨ WH 1105: ਇਸ ਦੀ ਕਾਢ ਪੰਜਾਬ ਖੇਤੀਬਾੜੀ ਯੂਨੀਵਰਸਿਟੀ ਵੱਲੋਂ ਕੀਤੀ ਗਈ ਹੈ ਇਹ ਇੱਕ ਛੋਟੇ ਕੱਦ ਵਾਲੀ ਕਿਸਮ ਹੈ ਜਿਸ ਵਿਚ ਬੂਟੇ ਦਾ ਔਸਤਨ ਕੱਦ 97 ਸੈ.ਮੀ. ਤੱਕ ਹੁੰਦਾ ਹੈ ਇਸ ਦੇ ਦਾਣੇ ਸੁਨਹਿਰੇ, ਮਧਰੇ, ਸਖਤ ਅਤੇ ਚਮਕਦਾਰ ਹੁੰਦੇ ਹਨ ਇਹ ਪੱਤਿਆਂ ਦੇ ਪੀਲੇਪਣ ਅਤੇ ਭੂਰੇਪਣ ਦੀ ਬਿਮਾਰੀ ਤੋਂ ਰਹਿਤ ਹੁੰਦੀ ਹੈ ਪਰੰਤੂ ਇਹ ਦਾਣਿਆਂ ਦੇ ਖਰਾਬ ਹੋਣ ਅਤੇ ਸਿੱਟਿਆਂ ਦੇ ਭੂਰੇ ਪੈਣ ਦੀ ਬਿਮਾਰੀ ਪ੍ਰਤੀ ਸੰਵੇਦਨਸ਼ੀਲ ਹੈ ਇਹ ਲਗਭਗ 157 ਦਿਨਾਂ ਵਿੱਚ ਪੱਕ ਜਾਂਦੀ ਹੈ ਇਸ ਦੀ ਔਸਤਨ ਪੈਦਾਵਾਰ 23.1 ਕੁਇੰਟਲ ਪ੍ਰਤੀ ਏਕੜ ਹੈ HD 2967: ਇਹ ਵੱਡੇ ਕੱਦ ਦੀ ਕਿਸਮ ਹੈ ਜਿਸ ਵਿਚ ਬੂਟੇ ਦਾ ਔਸਤਨ ਕੱਦ 101 ਸੈ.ਮੀ. ਤੱਕ ਹੁੰਦਾ ਹੈ ਇਸ ਦੇ ਦਾਣੇ ਸੁਨਹਿਰੇ, ਮਧਰੇ, ਸਖਤ ਅਤੇ ਚਮਕਦਾਰ ਹੁੰਦੇ ਹਨ ਇਹ ਲਗਭਗ 157 ਦਿਨਾਂ ਵਿੱਚ ਪੱਕ ਜਾਂਦੀ ਹੈ ਇਸ ਦੀ ਔਸਤਨ ਪੈਦਾਵਾਰ 21.5 ਕੁਇੰਟਲ ਪ੍ਰਤੀ ਏਕੜ ਹੈ PBW 621: ਇਹ ਕਿਸਮ ਪੰਜਾਬ ਦੇ ਸਾਰਿਆਂ ਇਲਾਕਿਆਂ ਵਿੱਚ ਉਗਾਈ ਜਾਂਦੀ ਹੈ ਇਹ ਕਿਸਮ 158 ਦਿਨਾਂ ਵਿੱਚ ਪੱਕ ਕੇ ਤਿਆਰ ਹੋ ਜਾਂਦੀ ਹੈ ਇਹ ਪੀਲੀ ਅਤੇ ਭੂਰੀ ਕੁੰਗੀ ਦੀ ਰੋਧਕ ਕਿਸਮ ਹੈ ਇਸਦਾ ਔਸਤਨ ਕੱਦ 100 ਸੈ.ਮੀ. ਹੁੰਦਾ ਹੈI ਧੰਨਵਾਦ
Posted by sunil Kumar
Uttar Pradesh
05-11-2019 03:07 PM
Rajasthan
11-05-2019 03:37 PM
पशु के टीका भरवाने के 3 महीने बाद आप डॉक्टर से चेक करवा सकते है जी सही तो डॉक्टर ही बता सकता है जी लेकिन देसी तरीके के अनुसार जब पशु को क्रॉस करवाया या टीका भरवाये 40 दिन हो जायें तो उसके बाद पशु के सुबह के पेशाब को खुले बर्तन में डाल लें और उसमें 1 चम्मच सरसों का तेल डाल दें इसके बाद ध्यान से चैक करें यदि सरसों का त.... (Read More)
पशु के टीका भरवाने के 3 महीने बाद आप डॉक्टर से चेक करवा सकते है जी सही तो डॉक्टर ही बता सकता है जी लेकिन देसी तरीके के अनुसार जब पशु को क्रॉस करवाया या टीका भरवाये 40 दिन हो जायें तो उसके बाद पशु के सुबह के पेशाब को खुले बर्तन में डाल लें और उसमें 1 चम्मच सरसों का तेल डाल दें इसके बाद ध्यान से चैक करें यदि सरसों का तेल उसमें एक टिक्की की तरह जम जाये तो पशु ठहर गया है पर यदि तेल की बूंदें बिखर जायें तो समझ लें कि पशु खाली है
Posted by Imran Razwi
Gujarat
05-11-2019 03:03 PM
Madhya Pradesh
11-05-2019 03:10 PM
BHARTIYA MANAV SWASTH EVAM SAMRADDHA SANSTHAN बमोरिया मोती सम्बर्धन केंद्र ( भारत का एक मात्र प्रशिक्षण केंद्र जहां देश विदेश से आते है लोग ) सुक्ष्म लघु मध्यम उद्यम भारत सरकार द्वारा पंजीकृत कृषि मंत्री जी एवं मुख्या मंत्री जी द्वारा पुरुष्कृत दैनिक भास्कर , राजिस्थान पत्रिका , सहारा समय ,बंसल NEWS आदि न्यूज़ चैनल द्वारा सत्याप.... (Read More)
BHARTIYA MANAV SWASTH EVAM SAMRADDHA SANSTHAN बमोरिया मोती सम्बर्धन केंद्र ( भारत का एक मात्र प्रशिक्षण केंद्र जहां देश विदेश से आते है लोग ) सुक्ष्म लघु मध्यम उद्यम भारत सरकार द्वारा पंजीकृत कृषि मंत्री जी एवं मुख्या मंत्री जी द्वारा पुरुष्कृत दैनिक भास्कर , राजिस्थान पत्रिका , सहारा समय ,बंसल NEWS आदि न्यूज़ चैनल द्वारा सत्यापित मोती पालन से लाखो कैसे कमाए अब घर बैठे सीखे WHATAPP FOR ONLINE TRAINING 9770085381 ( TEXT - ONLINE TRAINING ) https://youtu.be/MMvKOBzkgFA अगला प्रशिक्षण 9-10 NOV. सीट बुक करने के लिए भी उपरोक्त न. पर करे Registration Shulk 100/- CONT FOR MORE DETAIL 9770085381 9407461361
Posted by shaiffuddin
Jharkhand
05-11-2019 02:56 PM
Punjab
11-05-2019 03:39 PM
Aap chicks ko Broton liquid de skte hai, isse hajam sahi rehta hai aur khurak hajam hoti rehti hai jisse sarir ki growth achi hoti hai, iska koi nuksan nahi hai yeh aap 20ml/100 birds de hisab se de skte hai aur isko din mai kisi v sme de skte hai..
Posted by inshaaf khan
Rajasthan
05-11-2019 02:45 PM
Punjab
11-05-2019 04:29 PM
inshaaf ji aap iske uper mancozeb@400 gram ko prati acre ke hisab se spray karen.dhanywad
Posted by sukhjot
Punjab
05-11-2019 02:43 PM
Punjab
11-06-2019 12:28 PM
Sukhjot ji, 1121 da bhav 2650 rupay prati quintal hath nal katai vali fasal da ate 2570 rupay prati quintal machine na katai vali fasal da hai, dhanwad
Posted by sanu
West Bengal
05-11-2019 02:43 PM
Madhya Pradesh
11-05-2019 03:08 PM
BHARTIYA MANAV SWASTH EVAM SAMRADDHA SANSTHAN बमोरिया मोती सम्बर्धन केंद्र ( भारत का एक मात्र प्रशिक्षण केंद्र जहां देश विदेश से आते है लोग ) सुक्ष्म लघु मध्यम उद्यम भारत सरकार द्वारा पंजीकृत कृषि मंत्री जी एवं मुख्या मंत्री जी द्वारा पुरुष्कृत दैनिक भास्कर , राजिस्थान पत्रिका , सहारा समय ,बंसल NEWS आदि न्यूज़ चैनल द्वारा सत्याप.... (Read More)
BHARTIYA MANAV SWASTH EVAM SAMRADDHA SANSTHAN बमोरिया मोती सम्बर्धन केंद्र ( भारत का एक मात्र प्रशिक्षण केंद्र जहां देश विदेश से आते है लोग ) सुक्ष्म लघु मध्यम उद्यम भारत सरकार द्वारा पंजीकृत कृषि मंत्री जी एवं मुख्या मंत्री जी द्वारा पुरुष्कृत दैनिक भास्कर , राजिस्थान पत्रिका , सहारा समय ,बंसल NEWS आदि न्यूज़ चैनल द्वारा सत्यापित मोती पालन से लाखो कैसे कमाए अब घर बैठे सीखे WHATAPP FOR ONLINE TRAINING 9770085381 ( TEXT - ONLINE TRAINING ) https://youtu.be/MMvKOBzkgFA अगला प्रशिक्षण 9-10 NOV. सीट बुक करने के लिए भी उपरोक्त न. पर करे Registration Shulk 100/- CONT FOR MORE DETAIL 9770085381 9407461361
Posted by Vikas Thory
Haryana
05-11-2019 02:35 PM
Punjab
11-07-2019 11:47 AM
विकास जी, यह goose berry का पौधा है, धन्यवाद
Posted by tinku
Punjab
05-11-2019 02:34 PM
Punjab
11-05-2019 03:07 PM
tuci 50-60gm mineral mixture mix krke de skde ho..
Posted by PADMABHAI MOGAMJI patel
Gujarat
05-11-2019 02:26 PM
Maharashtra
02-22-2020 11:22 AM
श्री मान Red sandalwood, white sandalwood चंदन की किस्में हैं. इसकी खेती के लिए जमीन को अप्रैल-मई महीने में तैयार किया जाता है इसकी बिजाई मई-अक्टूबर महीने में की जाती है पर इसको बीजने का सबसे सही समय जुलाई-अगस्त महीना है पौधे से पौधे की दूरी 3 मीटर होनी चाहिए..यूरिया@50ग्राम/पेड़/साल , एसएसपी@100 ग्राम/पेड़/साल और मयूरिएट आफ पोटाश@40 ग्रा.... (Read More)
श्री मान Red sandalwood, white sandalwood चंदन की किस्में हैं. इसकी खेती के लिए जमीन को अप्रैल-मई महीने में तैयार किया जाता है इसकी बिजाई मई-अक्टूबर महीने में की जाती है पर इसको बीजने का सबसे सही समय जुलाई-अगस्त महीना है पौधे से पौधे की दूरी 3 मीटर होनी चाहिए..यूरिया@50ग्राम/पेड़/साल , एसएसपी@100 ग्राम/पेड़/साल और मयूरिएट आफ पोटाश@40 ग्राम/पेड़/सालको दो हिस्सों में डालना चाहिए पहली डोज़ मार्च-अप्रैल महीने में और दूसरी डोज़ सितम्बर-अक्टूबर में दी जानी चाहिए इसके बारे में और जानकारी लेने के लिए आप अरुण खुरमी 9878123123 जी से संपर्क कर सकते है
Posted by Sonu Bansal
Haryana
05-11-2019 02:20 PM
Maharashtra
11-05-2019 04:12 PM
Biofloc मछली पालन की नई तकनीक है, जिसका invention Dr.YORRAM AVNIMELECH जो कि ISRAEL के है जहाँ पानी की कमी हैै उस परस्तिथि में मछली पालन कैसे किया जाये, उस तकनीक का invention किया पर फ़िलहाल भारत के कई राज्यों में किसान इस तकनीक का इस्तेमाल करके मछली पालन कर रहे हैं इसमें हम थोड़ी जगह में जहाँ सिर्फ 4 मीटर का टैंक लगता है और 1 मीटर इसकी लम्बाई होत.... (Read More)
Biofloc मछली पालन की नई तकनीक है, जिसका invention Dr.YORRAM AVNIMELECH जो कि ISRAEL के है जहाँ पानी की कमी हैै उस परस्तिथि में मछली पालन कैसे किया जाये, उस तकनीक का invention किया पर फ़िलहाल भारत के कई राज्यों में किसान इस तकनीक का इस्तेमाल करके मछली पालन कर रहे हैं इसमें हम थोड़ी जगह में जहाँ सिर्फ 4 मीटर का टैंक लगता है और 1 मीटर इसकी लम्बाई होती है मतलब की 10,000 लीटर इसमें हम अपना मछली पालन शुरू करके 1100-1300 किलो fish बना सकते हैं इसमें ज़्यादा पानी की ज़रूरत नहीं पड़ती और ना ही ज़्यादा जगह की ज़रूरत होती है, इसमें 650 -700 रूपये बिकने वाली मछलियां हैं वह हम इसमें डालते हैं और यह मछलियां 6 से 7 महीने तक बिकने योग्य हो जाती है, shrimp farming मतलब की झींगा इसका culture period -90 दिन का होता है BFT टैंक में आपको C:N ratio की सहायता से आपको बढ़िया बैक्टीरिया maintain करना होता है, और drainage की सहायता से sludge removal किया जाता है अगर आपका मैनेजमेंट एकदम सटीक रहा तो 0 % प्रतिशत पानी अदला-बदली किये बिना culture पूरा किया जा सकता है आपको उचित blower की सहायता से DO (dissolved oxygen ) maintain करने की ज़रूरत पड़ती है C:N ratio मतलब की कार्बन: नाइट्रोजन ratio अनुपात बनाएं रखना पड़ता है कार्बन जिससे की बैक्टीरिया (हेट्रोट्रॉपिक बैक्टीरिया) ठीक से काम करके नाइट्रोजन को कम कर सके क्योंकि नाइट्रोजन का एक हिस्सा जो कि non ionised Ammonia [NH3] जो मछली के लिए जानलेवा होता हैैै अधिक जानकारी के लिए 9096843382 पर फ़ोन कीजिये.
Posted by Ritesh Kumar
Chattisgarh
05-11-2019 02:16 PM
Madhya Pradesh
11-05-2019 03:13 PM
SIR Contract FARMING ME KAI BAR PRESANI AATI HE TO SELP PLAN KRE
Posted by sharvan pareek
Rajasthan
05-11-2019 02:11 PM
Punjab
11-06-2019 01:42 PM
श्रवण जी, कृपया आप इसमें NPK 130045 @ 10 gm प्रति लीटर पानी के हिसाब से स्प्रे करें और इसकी ग्रोथ के लिए आप vermicompost 4 -5 kg प्रति पोधे के हिसाब से डालें, धन्यवाद धन्यवाद
Posted by ਹਰਿੰਦਰ ਪਾਲ ਸਿੰਘ ਵਿਰਕ
Punjab
05-11-2019 02:04 PM
Punjab
11-05-2019 04:30 PM
ਹਰਿੰਦਰਪਾਲ ਜੀ ਤੁਸੀ ਇਸਦੇ ਉਪਰ ਨਿਮ ਦੇ ਤੇਲ ਦੀ ਸਪਰੇ ਕਰੋ ਇਸਦੀ ਮਾਤਰਾ 50 ml ਨੂੰ ਪ੍ਰਤੀ ਏਕੜ ਦੇ ਹਿਸਾਬ ਨਾਲ ਸਪਰੇ ਕਰੋ ਧੰਨਵਾਦ
Posted by keshu Ratiya
Gujarat
05-11-2019 01:58 PM
Punjab
11-05-2019 03:59 PM
केशू जी उसे आप पेट के कीड़ों के लिए Flukarid-Ds bolus दें और रोजाना 35—40 किलो हरा चारा दें और उसे ब्याने से दो महीने पहले Vitum-H liquid 10-10ml सुबह शाम देना शुरू करें और उसे अच्छी कंपनी की फीड डालें जिससे उसकी अच्छी ग्रोथ हो जाएगी
Posted by jeevan
Chattisgarh
05-11-2019 01:58 PM
Punjab
11-07-2019 11:18 AM
Alag Alag yantro par, Alag Alag state ki apne subsidiaries scheme hai. Nearby KVK ya Block mein sampark bhi Kar sakte hai
Posted by Thakurdas Thakurdas
Uttar Pradesh
05-11-2019 01:55 PM
Punjab
11-07-2019 11:39 AM
Thakurdas ji, kripya ap isme keet da hamla check karein, or agar keet ka hamla mojood ho to uski photo bejein taki us hisaab se apko roktham ki jankari di ja sake, dhanywad
Posted by Rishabh
Uttar Pradesh
05-11-2019 01:42 PM
Maharashtra
11-08-2019 04:00 PM
Rishabh ji please ask your question in detail so that we can provide you information accordingly.thank you
Posted by jagdish nagar
Madhya Pradesh
05-11-2019 01:39 PM
Maharashtra
11-05-2019 05:21 PM
जगदीश जी बढ़िया निकास वाली रेतली दोमट या हल्की लाल मिट्टी, जिसका 7.5-8.0 pH हो, में उगाने पर अच्छे परिणाम देती है नमी बरकरार रखने वाली और जल सोखने वाली मिट्टी में अश्वगंधा की खेती नहीं की जा सकती है इसके लिए मिट्टी हल्की, गहरी और अच्छे जल निकास वाली होनी चाहिए अच्छे निकास वाली काली और भारी मिट्टी इसकी खेती के लिए अ.... (Read More)
जगदीश जी बढ़िया निकास वाली रेतली दोमट या हल्की लाल मिट्टी, जिसका 7.5-8.0 pH हो, में उगाने पर अच्छे परिणाम देती है नमी बरकरार रखने वाली और जल सोखने वाली मिट्टी में अश्वगंधा की खेती नहीं की जा सकती है इसके लिए मिट्टी हल्की, गहरी और अच्छे जल निकास वाली होनी चाहिए अच्छे निकास वाली काली और भारी मिट्टी इसकी खेती के लिए अनुकूल होती हैं Jawahar Asgand-20 and Jawahar Asgand-134: यह उच्च क्षारी किस्म है यह जवाहरलाल नेहरू कृषि विश्वविद्यालय, मध्य प्रदेश द्वारा विकसित की गई है इस किस्म के पौधेका कद छोटा होता है और यह अपना घनत्व ज्यादा होने के कारण जनि जाती है यह किस्म की पैदावार 180 दिनों में सूखी जड़ों में कुल 0.30% एनोलाइड की मात्रा है Raj Vijay Ashwagandha-100: यह किस्म भी जवाहरलाल नेहरू कृषि विश्वविद्यालय, मध्य प्रदेश द्वारा तैयार की गई है Rakshita and Poshita: अधिक उपज देने वाली यह किस्म CSIR-CIMAP लखनऊ द्वारा विकसित की गई है WSR : यह किस्म सी एस आई आर खेतरी रिसर्च लैबोर्टरी, जम्मू द्वारा विकसित की गई है अश्वगंधा की खेती के लिए भुरभुरी और समतल ज़मीन की आवश्यकता होती है मिट्टी को भुरभुरा करने के लिए खेत की 2-3 बार जोताई करें और बारिश से पहले खेत की डिस्क या तवियों से जोताई करें खेत को अप्रैल-मई के महीने में तैयार करें खेत की तैयारी के समय, लगभग 4-8 टन रूड़ी की खाद प्रति एकड़ डालें और मिट्टी में अच्छी तरह मिला दें फिर सुहागे के साथ खेत को समतल करें इस में किसी भी रासायनिक खाद या कीटनाशक प्रयोग करने की जरूरत नहीं पड़ती, क्योंकि यह एक चिकित्सिक पौधा है और जैविक खेती के द्वारा उगता है कुछ जैविक खादें जैसे कि रूड़ी की खाद, वर्मी कम्पोस्ट, हरी खाद आदि जरूरत अनुसार प्रयोग की जा सकती है कुछ बायो-कीटनाशक, जोकि नीम, चित्रकमूल, धतूरा, गौ-मूत्र आदि से तैयार होते है, इनको मिट्टी और बीजों से पैदा होने वाली बीमारीयों को रोकने के लिए प्रयोग किया जा सकता है मिट्टी की उपजाऊ शक्ति बढ़ाने के लिए नाइट्रोजन(यूरिया 14 किलो) और फासफोरस 6 किलो(सिंगल सुपर फासफेट 38 किलो) प्रति एकड़ की आवश्यकता होती है खेत को नदीन मुक्त करने के लिए आमतौर पर दो बार गोडाई की आवश्यकता होती है पहली बिजाई के 20-25 दिनों और दूसरी गोडाई पहली गोडाई के 20-25 दिनों के बाद करें नदीनों को रोकने के लिए बिजाई से पहले इसोप्रोटूरान 200 ग्राम और ग्लाइफोसेट 600 ग्राम प्रति एकड़ में डालें अनावश्यक पानी और बारिश के साथ फसल को नुकसान होता है यदि बारिश वाले दिन हो तो सिंचाई की आवश्यकता नहीं होती, 1-2 बार जीवन रक्षक सिंचाइयां करें सिंचित हालातों में फसल को, 10-15 दिनों में एक बार सिंचाई करें पहली सिंचाई अंकुरन से 30-35 दिनों के बाद और दूसरी सिंचाई पहली सिंचाई के 60-70 दिनों के बाद करनी चाहिए पौधा 160-180 दिनों में पैदावार देना है कटाई सूखे मौसम में करें, जब पत्ते सूख रहे हो और फल लाल संतरी रंग के हो जायें कटाई हाथों से जड़ों को उखाड़कर या मशीन द्वारा बिना जड़ों को नुकसान पहुंचाए की जाती है,जैसे कि पावर टिल्लर या कंट्री पलोअ आदि के साथ कटाई के बाद पौधे से जड़ों को अलग करें और इन्हें छोटे-छोटे टुकड़ों में जैसे 8-10 सैं.मी. काट दें और फिर हवा में सुखाएं कटाई के बाद छंटाई की जाती है जड़ों के टुकड़ों को बेचने के लिए टीन के बक्सों में स्टोर कर लिया जाता है जड़ें जितनी लंबी होंगी उसका मुल्य उतना ही ज्यादा होगा फल को अलग से तोड़ें और हवा में सुखा के पीस लिया जाता है ताकि बीज आसानी से बाहर निकल सकें
Posted by Vishal Mahajan
Madhya Pradesh
05-11-2019 01:23 PM
Punjab
11-05-2019 01:30 PM
श्रीमान जी, गेहूं की फसल को अच्छे अंकुरन के लिए अच्छी तरह से तैयार, पर ठोस बीज बैड की आवश्यकता होती है पिछली फसल की कटाई के बाद खेत की अच्छे तरीके से ट्रैक्टर की मदद से जोताई की जानी चाहिए खेत को आमतौर पर ट्रैक्टर के साथ तवियां जोड़कर जोता जाता है और उसके बाद दो या तीन बार हल या सुहागे से जोता जाता है खेत की जोत.... (Read More)
श्रीमान जी, गेहूं की फसल को अच्छे अंकुरन के लिए अच्छी तरह से तैयार, पर ठोस बीज बैड की आवश्यकता होती है पिछली फसल की कटाई के बाद खेत की अच्छे तरीके से ट्रैक्टर की मदद से जोताई की जानी चाहिए खेत को आमतौर पर ट्रैक्टर के साथ तवियां जोड़कर जोता जाता है और उसके बाद दो या तीन बार हल या सुहागे से जोता जाता है खेत की जोताई शाम के समय की जानी चाहिए और रोपाई की गई ज़मीन को पूरी रात खुला छोड़ देना चाहिए ताकि वह ओस की बूंदों से नमी सोख सके प्रत्येक जोताई के बाद सुहागा फेरना चाहिए सामान्य बिजाई के लिए कतारों में 20-22-5 सैं.मी. के फासले की सलाह दी जाती है यदि बिजाई देरी से करनी हो तो 15-18 सैं.मी. का फासला होना चाहिए लंबी किस्मों के लिए 6-7 सैं.मी. की गहराई का प्रयोग करें जबकि अन्य किस्मों के लिए 5-6 सैं.मी. की गहराई का प्रयोग करें आप बीज को बीज ड्रिल, बुरकाव विधि की मदद से बुवाई करें, धन्यवाद
Posted by shivratan
Rajasthan
05-11-2019 01:22 PM
Punjab
11-06-2019 02:01 PM
Shivratan ji, gehun ke liye ap kisme jaise ke Raj 1482, PBW 502, PBW 550, HD 2697, Raj 6560, Raj 3077, Raj 4079, Raj 4037, Raj 4120, DBW 17, Raj 4238, WH 1080, PBW 175, CCNNRVOI (Raj Molya Rodhak-1, picheti bijai ke liye kisme jaise ke Raj 3765, Raj 3777 retli miti ke liye kisme jaise ke C 306, P.B.W. 299, kashriye khetron ke liye kisme jaise ke Raj 3077, K.R.L 1-4 और WH 157 ki buyai ki ja skati hai, dhanywad