Posted by Rajpreet singh
Punjab
06-11-2019 12:26 AM
Rajpreet ji, 1121 da rate is vele hath nal katti gai fasal da 2650 rupay prati acre hai ate machine nal katti gai fasal da rate 2570 rupay prati quintal hai, dhanwad

Posted by ਗੁਰਜੀਤ ਸਿੰਘ
Punjab
06-11-2019 12:06 AM
ਗੁਰਜੀਤ ਜੀ, ਕਿਰਪਾ ਕਰ ਕੇ ਆਪਣਾ ਸਵਾਲ ਵਿਸਥਾਰ ਨਾਲ ਪੁਛੋ ਤਾਕਿ ਤੁਹਾਨੂੰ ਇਸ ਬਾਰੇ ਪੂਰੀ ਜਾਣਕਾਰੀ ਦਿੱਤੀ ਜਾ ਸਕੇ, ਧੰਨਵਾਦ

Posted by Avinash Tiwari
Madhya Pradesh
05-11-2019 11:27 PM
Avinash ji, Gehoo ke liye aap 2967, 3086, 1105, 343, 550, 2851 lgaa skte ho or beej ki matra 40 kilo prati acre ke hisaab se dalein or urea 110 kg, SSP 150 kg or MOP 20 kg prati acre ke hisaab se dalei, dhanywad
Posted by Vipendr Singh
Uttar Pradesh
05-11-2019 11:05 PM
आपके द्धारा भेंजी गई ओडियो में आवाज समझ नहीं आ रही है कृप्या आप दोबारा साफ आवाज में ओडियो अपलोड करें ताकि आपको सही जानकारी दी जा सके

Posted by पी शर्मा
Chattisgarh
05-11-2019 10:57 PM
श्रीमान जी, यह फंगस का हमला हुआ है, इसकी रोकथाम के लिए आप carbendazim @ 4gm प्रति लीटर पानी के हिसाब से स्प्रे करें, धन्यवाद
Posted by Vipendr Singh
Uttar Pradesh
05-11-2019 10:56 PM
वीपेन्दर जी, एक एकड़ में बिजाई के लिए 12-15 किलो बीज उपयुक्त होते हैं देरी से बिजाई के लिए मोटे बीज वाली किस्मों का प्रयोग करें और 16-20 किलो बीज प्रति एकड़ में प्रयोग करें बीज का उपचार बिजाई से पहले बीज को कप्तान या थीरम 3 ग्राम से प्रति किलो बीज का उपचार करें रासायनिक उपचार के बाद, राइज़ोबियम 200 ग्राम से 10 किलो बीज का उ.... (Read More)
वीपेन्दर जी, एक एकड़ में बिजाई के लिए 12-15 किलो बीज उपयुक्त होते हैं देरी से बिजाई के लिए मोटे बीज वाली किस्मों का प्रयोग करें और 16-20 किलो बीज प्रति एकड़ में प्रयोग करें बीज का उपचार बिजाई से पहले बीज को कप्तान या थीरम 3 ग्राम से प्रति किलो बीज का उपचार करें रासायनिक उपचार के बाद, राइज़ोबियम 200 ग्राम से 10 किलो बीज का उपचार करें यदि मसूर पहली बार लगाई गई हो तो राइज़ोबियम से बीज का उपचार आवश्यक है धन्यवाद
Posted by JAFAK KHAN
Uttar Pradesh
05-11-2019 10:51 PM
Jafar ji, iske liye ap NAA 15 ml prati 50 liter pani ke hisaab se spray karein or ap isme vermicompost 4-5 ml prati podhe ke hisaab se dalein, dhanywad

Posted by prajjval singh
Chattisgarh
05-11-2019 10:20 PM
Shrimaan ji, swarag ka fal anjeer ko kehte hai, dhanywad
Posted by Naunihal sethi
Punjab
05-11-2019 10:14 PM
isde vare jankari lenn lai tuci iss no. 9466419455 te mere nal sampark kr skde ho..

Posted by Laxman Meean
Rajasthan
05-11-2019 10:12 PM
लष्मन जी, इसे भारत की मिट्टी की कई किस्मों में उगाया जा सकता है गेहूं की खेती के लिए चिकनी दोमट या दोमट बनतर, अच्छे ढांचे और पानी सोखने की सामान्य क्षमता वाली मिट्टी उचित होती है छिद्रित और पानी कम सोखने वाली मिट्टी गेहूं की खेती के लिए उपयुक्त नहीं होती सूखे हालातों, अच्छे जल निकास वाली भारी मिट्टी इसकी ख.... (Read More)
लष्मन जी, इसे भारत की मिट्टी की कई किस्मों में उगाया जा सकता है गेहूं की खेती के लिए चिकनी दोमट या दोमट बनतर, अच्छे ढांचे और पानी सोखने की सामान्य क्षमता वाली मिट्टी उचित होती है छिद्रित और पानी कम सोखने वाली मिट्टी गेहूं की खेती के लिए उपयुक्त नहीं होती सूखे हालातों, अच्छे जल निकास वाली भारी मिट्टी इसकी खेती के लिए अनुकूल होती है भारी मिट्टी जिसका घटिया ढांचा और घटिया जल निकास हो इसकी खेती के लिए उपयुक्त नहीं होती क्योंकि गेहूं की फसल जल जमाव के प्रति संवेदनशील होती है इसकी किस्मे जैसे के Raj 1482, PBW 502, PBW 550, HD 2697, Raj 6560, Raj 3077, Raj 4079, Raj 4037, Raj 4120, DBW 17, Raj 4238, WH 1080, PBW 175, CCNNRVOI (Raj Molya Rodhak-1 पिछेती बिजाई की किस्में Raj 3765, Raj 3777 रेतली मिट्टी वाली किस्में : इन किस्मों की वृद्धि के लिए कम पानी की आवश्यकता होती है C 306, P.B.W. 299 क्षारीय मिट्टी की किस्में : क्षारीय क्षेत्रों में Raj 3077, K.R.L 1-4 और WH 157 जैसी किस्मों का प्रयोग करें, ये अच्छी उपज देती हैं गेहूं की फसल को अच्छे अंकुरन के लिए अच्छी तरह से तैयार, पर ठोस बीज बैड की आवश्यकता होती है पिछली फसल की कटाई के बाद खेत की अच्छे तरीके से ट्रैक्टर की मदद से जोताई की जानी चाहिए खेत को आमतौर पर ट्रैक्टर के साथ तवियां जोड़कर जोता जाता है और उसके बाद दो या तीन बार हल या सुहागे से जोता जाता है बारानी क्षेत्रों में खेत इस तरह से तैयार करना चाहिए कि वह नमी को सोख सके खेत की एक बार आयरन के हल से गहरी जोताई या सामान्य हल से दो या तीन बार जोताई करें और सुहागा फेरें खेत की जोताई शाम के समय की जानी चाहिए और रोपाई की गई ज़मीन को पूरी रात खुला छोड़ देना चाहिए ताकि वह ओस की बूंदों से नमी सोख सके प्रत्येक जोताई के बाद सुहागा फेरना चाहिए आखिरी जोताई के समय यूरिया 35-40 किलो प्रति एकड़ में डालें इससे गेहूं की अंकुरन प्रतिशतता में वृद्धि होती है अज़ोटोबैक्टर 2.5 किलो + फास्फेटिक 2.5 किलो + ट्राइकोडरमा 2.5 किलो को 100 किलो-125 किलो रूड़ी की खाद या गाय के गले हुए गोबर में मिलाकर आखिरी जोताई के समय खिलार दें
गेहूं की बिजाई सही समय पर करनी जरूरी है बारानी क्षेत्रों के लिए बिजाई नवंबर के पहले से तीसरे सप्ताह में पूरी कर लें, जबकि सिंचित क्षेत्रों में बिजाई अक्तूबर से 15 नवंबर तक पूरी कर लें सामान्य बिजाई के लिए कतारों में 20 सैं.मी. के फासले की सलाह दी जाती है यदि बिजाई देरी से करनी हो तो 18 सैं.मी. का फासला होना चाहिए 4-5 सैं.मी. की गहराई में बिजाई करनी चाहिए बिजाई का ढंग : बीज ड्रिल, बुरकाव विधि , जीरो टिलेज़ ड्रिल, रोटावेटरबीज की मात्रा
बिजाई के लिए 40 किलो बीज प्रति एकड़ में प्रयोग करें हल्की मिट्टी : यदि बिजाई देरी से की जाये तो नवंबर के आखिरी सप्ताह से दिसंबर के दूसरे सप्ताह तक बिजाई 50 किलो बीज प्रति एकड़ में प्रयोग करके पूरी कर लें देरी से बिजाई के लिए कम समय की किस्मों का प्रयोग करें भारी मिट्टी : सामान्य स्थितियों में बिजाई नवंबर केपहले से तीसरे सप्ताह में पूरी कर लें, जब कि सिंचित हालातों में दिसंबर महीने में बिजाई पूरी कर लें बीज की मात्रा 50 किलोग्राम प्रति एकड़ में रखें बीज का उपचार : बीजों को दीमक, फफूंद, झुलस रोग जैसे बीमारियों से बचाने के लिए बीजने से 24 घंटे पहले एक किलो बीजों का 4 मि.ली. क्लोरपाइरीफॉस या 1.5 - 1.87 ग्राम टेबुकोनाज़ोल 2 डी.एस या 2 ग्राम कार्बेनडाज़िम या थीरम मिलानी चाहिए रासायनिक उपचार के बाद बीजों को टी विराइड 1.15 प्रतिशत डब्लयु पी 4 ग्राम से प्रति किलो बीजों का उपचार करें IPM में टी विराइड 4 ग्राम + कार्बोक्सिन 75 डब्लयु पी 1.25 ग्राम या टैबुकोनाज़ोल 1.0 ग्राम से प्रति किलो बीजों का उपचार झूठी कांगियारी को रोकने के लिए किया जाता है उसके बाद दीमक से बचाव के लिए बिजाई से 15 दिनों के बाद मिट्टी का क्लोरोपाइरीफोस 1 लीटर को प्रति एकड़ में बुरकाव करके उपचार करें मिट्टी की जांच के आधार पर खादों का प्रयोग करें मिट्टी की जांच की मदद से हम खादों को मिट्टी की आवश्यकता के आधार पर दे सकते हैं गेहूं की समय पर बिजाई के लिए नाइट्रोजन 37-50 किलो (यूरिया 80-100 किलो), फासफोरस 8-15 किलो (एस एस पी 50-90 किलो) और पोटाश 12.5 किलो (म्यूरेट ऑफ पोटाश 20 किलो) प्रति एकड़ में डालें नाइट्रोजन की आधी मात्रा, पोटाश और फासफोरस की पूरी मात्रा बिजाई के समय डालें पहली सिंचाई के बाद नाइट्रोजन की बाकी बची आधी मात्रा डाल दें पहली सिंचाई बिजाई के 20-25 दिनों के बाद करनी चाहिए यह अवस्था जड़ गलन और नमी तनाव का समय होता है जिसके कारण उपज में कमी होती है दूसरी सिंचाई बिजाई के 40-45 दिनों के बाद पौधा बाहर निकलने के समय करनी चाहिए तीसरी सिंचाई 70-75 दिनों के बाद तना बनने के समय करनी चाहिए चौथी सिंचाई 90-95 दिनों के बाद फूल बनने के समय करनी चाहिए पांचवी सिंचाई 110-115 दिनों के बाद दूधिया अवस्था में करनी चाहिए रासायनिक नदीन रोकथाम : इसमें कम मेहनत और हाथों से नदीनों को उखाड़ने से होने वाली हानि ना होने कारण ज्यादातर यह तरीका ही अपनाया जाता है नुकसान से बचने के लिए पैंडीमैथालीन स्टांप (30 ई.सी.) 1 लीटर को 500 लीटर पानी के घोल में मिलाके बीजने के 0-3 दिनों के अंदर अंदर छिड़काव करना चाहिए चौड़े पत्तों वाले नदीनों की रोकथाम के लिए 2,4-डी 250 मि.ली. को 150 लीटर पानी में घोलकर प्रयोग करें उच्च पैदावार वाली फसलों की किस्मों की कटाई पत्तों और तने के पीले पड़ने और सूखने के बाद की जाती है हानि से बचने के लिए फसल की कटाई इसके पके हुए बूटों के सूखने से पहले की जानी चाहिए ग्राहक की तरफ से इसे स्वीकारने और इसकी अच्छी गुण्वत्ता के लिए इसको सही समय पर काटना चाहिए जब दानों में 25-30 प्रतिशत नमी रह जाती है तो यह इसे काटने का सही समय होता है हाथ से गेहूं काटने के समय तेज धार वाली द्राती का प्रयोग करना चाहिए कटाई के लिए कंबाइने भी उपलब्ध हैं, जिनकी सहायता से गेहूं की फसल की कटाई, दाने निकालना और छंटाई एक ही बार में की जा सकती है धन्यवाद

Posted by Shahid Khan
Rajasthan
05-11-2019 10:01 PM
मोती की खेती एक बहुत ही अच्छा व्यवसाय है इस व्यवसाय को शुरू करने के लिए सबसे जरुरी है इसकी ट्रेनिंग, क्योकि इसमें बहुत सी ऐसी बारीकियें होती है जो हमें प्रेक्टिकल ट्रेनिंग में ही सीखने को मिलती है अगर आप इसकी ट्रेनिंग लेना चाहते है तो आप ग्लिटराटी पर्ल फार्मिंग ट्रेनिंग केंद्र प्रशिक्षण कार्य कर्म आयोजि.... (Read More)
मोती की खेती एक बहुत ही अच्छा व्यवसाय है इस व्यवसाय को शुरू करने के लिए सबसे जरुरी है इसकी ट्रेनिंग, क्योकि इसमें बहुत सी ऐसी बारीकियें होती है जो हमें प्रेक्टिकल ट्रेनिंग में ही सीखने को मिलती है अगर आप इसकी ट्रेनिंग लेना चाहते है तो आप ग्लिटराटी पर्ल फार्मिंग ट्रेनिंग केंद्र प्रशिक्षण कार्य कर्म आयोजित किया जा रहा है प्रशिक्षण कार्य कर्म में भाग लेने के लिए नीचे दिए गए नम्बर पर आज ही संपर्क करें और Rs 250/ से अपना रजिस्ट्रेशन करवाए अचल सिंह (फाउंडर )- 9711858258. धन्यवाद
Posted by sourav Shrivastava
Madhya Pradesh
05-11-2019 09:55 PM
श्रीमान जी गेहूं को पहला पानी 25 दिनों के बाद ही दें यदि हो सके तो गेहूं को पानी 30 दिन तक दें इस समय पहली यूरिया का छिड़काव करके गेहूं को पानी दें, 25—30 दिनों तक गेहूं को पानी की जरूरत होती है इससे पहले पानी देने से गेहूं की ग्रोथ कम होती है अगर आप पानी 25—30 दिनों के बाद देते है और यूरिया का छिड़काव इस समय करते है तो ग.... (Read More)
श्रीमान जी गेहूं को पहला पानी 25 दिनों के बाद ही दें यदि हो सके तो गेहूं को पानी 30 दिन तक दें इस समय पहली यूरिया का छिड़काव करके गेहूं को पानी दें, 25—30 दिनों तक गेहूं को पानी की जरूरत होती है इससे पहले पानी देने से गेहूं की ग्रोथ कम होती है अगर आप पानी 25—30 दिनों के बाद देते है और यूरिया का छिड़काव इस समय करते है तो ग्रोथ तेज़ी से होती है, यह गेहूं को पानी देने की सही स्टेज होती है, गेहूं को कुल्य 4-6 पानी की जरुरत पड़ती है, अधिक डाकर ज़मीन में 4 पानी देने की जरूरत होती है और रेतली ज़मीन में 6 पानी लगा सकते है
Posted by ਨਵਪਰੀਤ ਸਿੰਘ
Punjab
05-11-2019 09:43 PM
ਤੁਸੀ ਬਾਸਮਤੀ ਦੀ ਪਰਾਲੀ ਨੂੰ ਪਸ਼ੂਆਂ ਦੇ ਚਾਰੇ ਦੇ ਲਈ ਵਰਤ ਸਕਦੇ ਹੋ ਪਰ ਪਰਾਲੀ ਵਿਚ ਜ਼ਿਆਦਾ ਖਾਦਾਂ ਅਤੇ ਸਪ੍ਰੇਹਾਂ ਦੀ ਵਰਤੋਂ ਨਾ ਕੀਤੀ ਗਈ ਹੋਏ ਕਿਉਕਿ ਪਰਾਲੀ ਦੇ ਵਿਚ ਇਹਨਾਂ ਦਾ ਅਸਰ ਰਹਿੰਦਾ ਹੈ, ਜਿਸ ਨਾਲ ਪਸ਼ੂ ਨੂੰ ਨੁਕਸਾਨ ਹੋ ਸਕਦਾ ਹੈ ਧੰਨਵਾਦ
Posted by Santosh Kumar mehta
Jharkhand
05-11-2019 09:32 PM
Santosh ji, iske liye ap NPK 130045 @ 10 gm prati liter pani ke hisaab se apray karein, dhanywad
Posted by Gurdhyan Singh
Haryana
05-11-2019 09:28 PM
श्रीमान जी गेहूं में कुल 110 किलो यूरिया डाला जाता है इसे आप 2—3 भागो में बांट सकते है गेहूं में डीएपी 55 किलो प्रति एकड़ के हिसाब से डाला जाता है आप एक एकड़ के हिसाब से डीएपी की एक बोरी डाल सकते हैं यदि एसएसपी का प्रयोग कर रहे है तो एसएसपी 150 किलो प्रति एकड़ के हिसाब से प्रयोग कर सकते है डीएपी को गेहूं के बीज के साथ .... (Read More)
श्रीमान जी गेहूं में कुल 110 किलो यूरिया डाला जाता है इसे आप 2—3 भागो में बांट सकते है गेहूं में डीएपी 55 किलो प्रति एकड़ के हिसाब से डाला जाता है आप एक एकड़ के हिसाब से डीएपी की एक बोरी डाल सकते हैं यदि एसएसपी का प्रयोग कर रहे है तो एसएसपी 150 किलो प्रति एकड़ के हिसाब से प्रयोग कर सकते है डीएपी को गेहूं के बीज के साथ मिक्स करके बिजाई कर सकते है इस तरीके से बीज के साथ एसएसपी का प्रयोग कर सकते है नहीं तो गेहूं के लिए खेत तैयार करते समय खेत में छिड़काव कर सकते है डीएपी और एसएपी में से कोई भी एक प्रयोग कर सकते है यदि खेत में पोटाश की कमी है तो पोटाश 20 किलो प्रति एकड़ के हिसाब से प्रयोग कर सकते है
Posted by nitin kumar
Uttar Pradesh
05-11-2019 09:27 PM
Nitin ji, Father of agronomy is Pietro de Crescenzi , Thank you

Posted by Jagmeet Brar
Punjab
05-11-2019 09:17 PM
ਬਰਾੜ ਜੀ ਤੁਸੀ ਉਸ ਨੂੰ ਨਜ਼ਦੀਕੀ ਡਾਕਟਰ ਤੋਂ ਜਾਂਚ ਕਰਵਾਓ ਜੀ ਉਸਦੀ ਜਾਂਚ ਕਰਕੇ ਸਹੀ ਇਲਾਜ ਹੋਵੇਗਾ ਜੀ
Posted by Gurpartap singh
Punjab
05-11-2019 09:17 PM
Gurpartap ji, ap Coj 88 kisam di bijai kar sakde ho, dhanywad

Posted by gurjot
Punjab
05-11-2019 09:16 PM
BhaaG gheo khao aap par majj nu rajwa wadhya hara chaara te 2-3 kg feed pao har 3 mahine baad malap rehat karo
Posted by Gurpartap singh
Punjab
05-11-2019 09:14 PM
BhaaG isnu rajwa hara chaara te 3 kg feed rojana dyo har 3 mahine baad malap rehat karo
Posted by ramanjit singh
Punjab
05-11-2019 09:11 PM
Ramanjit ji, kripya ap ganne ki photo bajein taki apko dekh kar uska sahi hal bataya ja sake, dhanywad
Posted by Sewak .lSingh
Punjab
05-11-2019 09:07 PM
BhaaG isnu 35-40 kg hara chaara te har 4kg dudh lai gau nu 1kg wadhya feed pao har 3 mahine baad malap rehat karo

Posted by kamal
Rajasthan
05-11-2019 09:07 PM
Kamal ji ap iske liye NPK 130045 @ 10 gm prati liter pani ke hisaab se spray karein, dhanywad

Posted by Surybhansingh Sindram
Chattisgarh
05-11-2019 09:04 PM
मिर्च की बुवाई का नियुक्त समय अक्तूबर से नवंबर तक का है टमाटर को लगाने का सही समय नवंबर से दिसंबर तक का है, और दवाइयों का शिडकाव किसी बीमारी या कीट के हमले के बाद ही किया जाता है, धन्यावद

Posted by Balvir Singh Mann
Punjab
05-11-2019 09:03 PM
ਬਲਵੀਰ ਜੀ chlorpyriphos ਸਿਉਂਕ ਦੀ ਰੋਕਥਾਮ ਦੇ ਲਈ ਵਰਤੀ ਜਾਂਦੀ ਹੈ ਜੇਕਰ ਚੂਹਿਆਂ ਦੀ ਦਿੱਕਤ ਹੈ ਤਾ ਤੁਸੀ ਚੂਹਿਆਂ ਤੋਂ ਬਚਾ ਲਈ ਤੁਸੀ ਹੇਠ ਲਿਖੇ ਤਰੀਕੇ ਵਰਤ ਸਕਦੇ ਹੋ ਪਿੰਜਰਿਆਂ ਦੀ ਵਰਤੋਂ ਕਰਨੀ: ਚੂਹਿਆਂ ਨੂੰ ਫੜਨ ਲਈ ਵੱਖ ਵੱਖ ਤਰ੍ਹਾਂ ਦੇ ਪਿੰਜਰਿਆਂ ਦੀ ਵਰਤੋਂ ਕੀਤੀ ਜਾ ਸਕਦੀ ਹੈ ਇਨ੍ਹਾਂ ਪਿੰਜਰਿਆਂ ਦੀ ਵਰਤੋਂ ਕਰਨ ਤੋਂ ਪਹਿਲਾਂ ਪਿੰਜਰਿਆਂ ਨੂੰ ਚੰਗੀ ਤਰ੍ਹਾਂ ਧੋ ਕੇ ਸਾਫ ਕਰ ਲੈਣਾ .... (Read More)
ਬਲਵੀਰ ਜੀ chlorpyriphos ਸਿਉਂਕ ਦੀ ਰੋਕਥਾਮ ਦੇ ਲਈ ਵਰਤੀ ਜਾਂਦੀ ਹੈ ਜੇਕਰ ਚੂਹਿਆਂ ਦੀ ਦਿੱਕਤ ਹੈ ਤਾ ਤੁਸੀ ਚੂਹਿਆਂ ਤੋਂ ਬਚਾ ਲਈ ਤੁਸੀ ਹੇਠ ਲਿਖੇ ਤਰੀਕੇ ਵਰਤ ਸਕਦੇ ਹੋ ਪਿੰਜਰਿਆਂ ਦੀ ਵਰਤੋਂ ਕਰਨੀ: ਚੂਹਿਆਂ ਨੂੰ ਫੜਨ ਲਈ ਵੱਖ ਵੱਖ ਤਰ੍ਹਾਂ ਦੇ ਪਿੰਜਰਿਆਂ ਦੀ ਵਰਤੋਂ ਕੀਤੀ ਜਾ ਸਕਦੀ ਹੈ ਇਨ੍ਹਾਂ ਪਿੰਜਰਿਆਂ ਦੀ ਵਰਤੋਂ ਕਰਨ ਤੋਂ ਪਹਿਲਾਂ ਪਿੰਜਰਿਆਂ ਨੂੰ ਚੰਗੀ ਤਰ੍ਹਾਂ ਧੋ ਕੇ ਸਾਫ ਕਰ ਲੈਣਾ ਚਾਹੀਦਾ ਹੈ ਤਾਂ ਜੋ ਕਿਸੇ ਕਿਸਮ ਦੀ ਮੁਸ਼ਕ ਨਾ ਆਵੇ ਸਾਫ਼ ਪਿੰਜਰਿਆਂ ਨੂੰ ਖੇਤਾਂ ਵਿੱਚ ਚੂਹਿਆਂ ਦੇ ਆਉਣ-ਜਾਣ ਵਾਲੇ ਰਸਤਿਆਂ ਅਤੇ ਨੁਕਸਾਨ ਵਾਲੀਆਂ ਥਾਂਵਾਂ ’ਤੇ ਰੱਖੋ ਵੱਡੀ ਗਿਣਤੀ ਵਿੱਚ ਚੂਹਿਆਂ ਨੂੰ ਫੜਨ ਲਈ ਪਹਿਲਾਂ ਚੂਹਿਆਂ ਨੂੰ ਪਿੰਜਰਿਆਂ ਵਿੱਚ 10-15 ਗ੍ਰਾਮ ਅਨਾਜ ਨੂੰ ਤੇਲ ਲਗਾ ਕੇ ਦੋ ਤੋਂ ਤਿੰਨ ਦਿਨਾਂ ਤਕ ਮੂੰਹ ਖੋਲ੍ਹ ਕੇ ਰੱਖੋ ਚੂਹਿਆਂ ਨੂੰ ਗਿਝਾਉਣ ਤੋਂ ਬਾਅਦ ਪਿੰਜਰੇ ਅੰਦਰ ਕਾਗ਼ਜ਼ ਦੇ ਟੁਕੜੇ ਉੱਤੇ 10-15 ਗ੍ਰਾਮ ਦਾਣੇ ਅਤੇ ਨਾਲੀਦਾਰ ਦਾਖ਼ਲੇ ਤੇ ਚੁਟਕੀ ਭਰ ਦਾਣੇ ਰੱਖ ਕੇ ਮੂੰਹ ਬੰਦ ਕਰ ਦਿਓ ਅਜਿਹਾ ਕਰ ਕੇ ਤਿੰਨ ਦਿਨ ਤਕ ਚੂਹੇ ਅਤੇ ਫੜੇ ਚੂਹਿਆਂ ਨੂੰ ਪਾਣੀ ਵਿੱਚ ਡੁਬੋ ਕੇ ਮਾਰੋ ਪਿੰਜਰਿਆਂ ਦੀ ਦੁਬਾਰਾ ਵਰਤੋਂ ਕਰਨ ਲਈ ਘੱਟੋ-ਘੱਟ 30-35 ਦਿਨਾਂ ਦਾ ਵਕਫ਼ਾ ਜ਼ਰੂਰ ਰੱਖੋ ਕੀੜੇਮਾਰ ਜ਼ਹਿਰਾਂ ਦੀ ਵਰਤੋਂ ਨਾਲ ਰੋਕਥਾਮ: ਚੂਹਿਆਂ ਦੀ ਕੀੜੇਮਾਰ ਜ਼ਹਿਰਾਂ ਦੀ ਵਰਤੋਂ ਨਾਲ ਰੋਕਥਾਮ ਕਰਨ ਲਈ ਜ਼ਹਿਰੀਲਾ ਚੋਗਾ ਵਰਤਣ ਲਈ ਬਹੁਤ ਹੀ ਸਾਵਧਾਨੀ ਅਤੇ ਸਹੀ ਤਰੀਕਾ ਵਰਤਣ ਦੀ ਜ਼ਰੂਰਤ ਹੁੰਦੀ ਹੈ ਚੂਹਿਆਂ ਦਾ ਇਸ ਜ਼ਹਿਰੀਲੇ ਚੋਗੇ ਨੂੰ ਖਾਣਾ, ਵਰਤੇ ਗਏ ਦਾਣਿਆਂ ਦਾ ਮਿਆਰੀਪਣ, ਸੁਆਦ ਅਤੇ ਤੇਲ ਦੀ ਮਹਿਕ ’ਤੇ ਨਿਰਭਰ ਕਰਦਾ ਹੈ ਜ਼ਹਿਰੀਲਾ ਚੋਗਾ ਬਣਾਉਣਾ ਜਿੰਕ ਫਾਸਫਾਈਡ ਦੀ ਵਰਤੋਂ: ਇੱਕ ਕਿਲੋ ਬਾਜਰਾ, ਕਣਕ, ਜਵਾਰ ਦਾ ਦਲੀਆ ਜਾਂ ਇਨਾਂ ਦਾ ਮਿਸ਼ਰਣ ਲੈ ਕੇ ਇਸ ਵਿੱਚ 20 ਗ੍ਰਾਮ ਤੇਲ ਜੇ ਹੋ ਸਕੇ ਤਾਂ ਮੂੰਗਫਲੀ ਦਾ ਤੇਲ ਅਤੇ 25 ਗ੍ਰਾਮ ਜਿੰਕਫਾਸਫਾਈਡ ਪਾ ਕੇ ਚੰਗੀ ਤਰ੍ਹਾਂ ਮਿਲਾਓ ਇਸ ਤਰ੍ਹਾਂ ਤਿਆਰ ਕੀਤੇ ਜ਼ਹਿਰੀਲੇ ਚੋਗੇ ਨੂੰ ਕਾਗ਼ਜ਼ ਦੀਆਂ ਪੁੜੀਆਂ ਬਣਾ ਕੇ ਖੇਤ ਵਿੱਚ ਗੇਝ ਵਾਲੀਆਂ ਜਗ੍ਹਾ ’ਤੇ ਰੱਖੋ ਬਰੋਮਾਡਾਇਓਲੋਨ ਦੀ ਵਰਤੋਂ: 20 ਗ੍ਰਾਮ ਬਰੋਮਾਡਾਇਓਲੋਨ 0 005 ਫ਼ੀਸਦੀ ਪਾਊਡਰ, 20 ਗ੍ਰਾਮ ਬੂਰਾ ਖੰਡ ਅਤੇ 20 ਗ੍ਰਾਮ ਤੇਲ ਨੂੰ ਇੱਕ ਕਿਲੋ ਕਿਸੇ ਵੀ ਅਨਾਜ ਦੇ ਦਲੀਏ ਵਿੱਚ ਮਿਲਾਉ ਅਤੇ ਪੂਰੇ ਖੇਤ ਵਿੱਚ 40 ਕੁ ਥਾਵਾਂ ’ਤੇ ਰੱਖੋ ਰੈਕੁਮਿਨ ਦੀ ਵਰਤੋਂ: 50 ਗ੍ਰਾਮ ਰੈਕੁਮਿਨ 0 0375 ਫ਼ੀਸਦੀ ਪਾਊਡਰ, 20 ਗ੍ਰਾਮ ਮੂੰਗਫਲੀ ਜਾਂ ਸੂਰਜਮੁਖੀ ਦਾ ਤੇਲ ਅਤੇ 20 ਗ੍ਰਾਮ ਬੂਰਾ ਖੰਡ ਨੂੰ ਇੱਕ ਕਿਲੋ ਕਿਸੇ ਵੀ ਅਨਾਜ ਦੇ ਦਲੀਏ ਵਿੱਚ ਮਿਲਾਓ ਇਹ ਵੀ ਚੂਹਿਆਂ ਨੂੰ ਮਾਰਨ ਲਈ ਇੱਕ ਕਾਰਗਰ ਤਰੀਕਾ ਹੈ

Posted by Rajnesh
Haryana
05-11-2019 08:58 PM
Rajnesh ji, HD 3086 ki height 96 cm hai, or yeh kareeb 156 dino mein pakk jati hai, yeh pili or bhorri jang ki pratirodhi hai, iski paidawaar 23.0 quintals hai, dhnaywad
Posted by Dharmendra Dhurve
Madhya Pradesh
05-11-2019 08:46 PM
धर्मेंदर जी, फल के फटने का कारन boron तत्व की कमी होती है, इसके लिए आप boron @ 1 gm प्रति लीटर पानी के हिसाब से स्प्रे करें, फल पर दाग फंगस की वजह से हो रहे है, इसके लिए आप copper oxychloride @ 3g प्रति लीटर पानी के हिसाब से स्प्रे करें, और फल के टूट कर घिरने के लिए आप planofix @ 4ml प्रति 15 लीटर पानी के हिसाब से स्प्रे करें, सभी स्प्रे इक ही समय पर न.... (Read More)
धर्मेंदर जी, फल के फटने का कारन boron तत्व की कमी होती है, इसके लिए आप boron @ 1 gm प्रति लीटर पानी के हिसाब से स्प्रे करें, फल पर दाग फंगस की वजह से हो रहे है, इसके लिए आप copper oxychloride @ 3g प्रति लीटर पानी के हिसाब से स्प्रे करें, और फल के टूट कर घिरने के लिए आप planofix @ 4ml प्रति 15 लीटर पानी के हिसाब से स्प्रे करें, सभी स्प्रे इक ही समय पर ना करें इन्हे 2 -3 दिन के फैसले पर करें धन्यवाद

Posted by amarpal singh
Punjab
05-11-2019 08:40 PM
श्रीमान जी ये किस्म पकने के लिए 126—134 दिन लेती है इसकी लंबाई छोटी होती है इसकी तूड़ी अच्छी बनती है इसकी लंबाई 80—90 सैं.मी. होती है इसकी उपज अच्छे खेत में 23 क्विंटल तक चल जाती है पर जो इसकी उपज सिफारिश की जाती है वो 18 क्विंटल प्रति एकड़ है इसकी उपज दाने मोटे होने के कारण ज्यादा होती है इसकी रोटी भी अच्छी बनती है इसकी .... (Read More)
श्रीमान जी ये किस्म पकने के लिए 126—134 दिन लेती है इसकी लंबाई छोटी होती है इसकी तूड़ी अच्छी बनती है इसकी लंबाई 80—90 सैं.मी. होती है इसकी उपज अच्छे खेत में 23 क्विंटल तक चल जाती है पर जो इसकी उपज सिफारिश की जाती है वो 18 क्विंटल प्रति एकड़ है इसकी उपज दाने मोटे होने के कारण ज्यादा होती है इसकी रोटी भी अच्छी बनती है इसकी बिजाई के लिए 40—45 किलो बीज प्रति एकड़ के हिसाब से डालें ये नरमे वाले खेत में कामयाब है

Posted by ਬਲਕਾਰ ਚੰਦ
Punjab
05-11-2019 08:35 PM
ਬਲਕਾਰ ਜੀ, ਅੰਗੂਰਾਂ ਕਿ ਸ਼ਟਾਈ ਦਾ ਸਹੀ ਸਮਾਂ ਨਵੰਬਰ ਤੋਂ ਦਸੰਬਰ ਤਕ ਦਾ ਹੁੰਦਾ ਹੈ, ਇਸ ਸਮੇਂ ਵਿਚ ਇਸ ਦੀ ਸ਼ਟਾਈ ਕੀਤੀ ਜਾਂਦੀ ਹੈ , ਅਤੇ ਕਟਾਈ ਦਾ ਸਹੀ ਸਮਾਂ ਗਰਮੀਆਂ ਦਾ ਹੁੰਦਾ ਹੈ, ਗ਼ਮੀਆਂ ਦੇ ਮਹੀਨੇ ਜੂਨ ਜੁਲਾਈ ਦੇ ਦੌਰਾਨ ਕੀਤੀ ਜਾਂਦੀ ਹੈ ਸ਼ਟਾਈ ਦੌਰਾਨ ਤੁਸੀ ਉਹ ਟਾਹਣੀਆਂ ਨੂੰ ਹਟਾ ਦਿਓ ਜਿਨ੍ਹਾਂ ਉਪਰ ਕਿਸੇ ਬਿਮਾਰੀ ਦਾ ਹਮਲਾ ਹੋਇਆ ਹੈ ਅਤੇ ਕਟਾਈ ਇਸ ਹਿਸਾਬ ਨਾਲ ਕਰਨੀ ਹੈ ਕੇ .... (Read More)
ਬਲਕਾਰ ਜੀ, ਅੰਗੂਰਾਂ ਕਿ ਸ਼ਟਾਈ ਦਾ ਸਹੀ ਸਮਾਂ ਨਵੰਬਰ ਤੋਂ ਦਸੰਬਰ ਤਕ ਦਾ ਹੁੰਦਾ ਹੈ, ਇਸ ਸਮੇਂ ਵਿਚ ਇਸ ਦੀ ਸ਼ਟਾਈ ਕੀਤੀ ਜਾਂਦੀ ਹੈ , ਅਤੇ ਕਟਾਈ ਦਾ ਸਹੀ ਸਮਾਂ ਗਰਮੀਆਂ ਦਾ ਹੁੰਦਾ ਹੈ, ਗ਼ਮੀਆਂ ਦੇ ਮਹੀਨੇ ਜੂਨ ਜੁਲਾਈ ਦੇ ਦੌਰਾਨ ਕੀਤੀ ਜਾਂਦੀ ਹੈ ਸ਼ਟਾਈ ਦੌਰਾਨ ਤੁਸੀ ਉਹ ਟਾਹਣੀਆਂ ਨੂੰ ਹਟਾ ਦਿਓ ਜਿਨ੍ਹਾਂ ਉਪਰ ਕਿਸੇ ਬਿਮਾਰੀ ਦਾ ਹਮਲਾ ਹੋਇਆ ਹੈ ਅਤੇ ਕਟਾਈ ਇਸ ਹਿਸਾਬ ਨਾਲ ਕਰਨੀ ਹੈ ਕੇ ਉਸਦੀ ਲੰਭਾਈ ਵੱਧ ਅਤੇ ਚੌੜਾਈ ਘੱਟ ਰਹੇ, ਧੰਨਵਾਦ

Posted by jobanpreet singh
Punjab
05-11-2019 08:34 PM
tuci uss nu Cargil di Transition mix feed deni suru kro ate Calcium di jgah tuci uss nu Vitum-H liquid 10-10ml swere sham deo, iss nal lewa vdia tyar howega..
Posted by Hukamsingh kumpawat
Rajasthan
05-11-2019 08:32 PM
श्रीमान जी, यह किस्म दिसंबर से मध्य जनवरी के तीसरे सप्ताह में बोयी जा सकती है इसके पौधे का कद 85-95 सैं.मी. होता है यह किस्म 120 दिनों में कटाई के लिए तैयार हो जाती है इसकी औसतन पैदावार 16-20 क्विंटल प्रति एकड़ होती है धन्यवाद

Posted by ਹਰਦੀਪ ਸਿੰਘ ਟਿਵਾਣਾ
Punjab
05-11-2019 08:32 PM
श्रीमान जी HD 3086 (PusaGautam) : इसकी औसतन उपल 23 क्विंटल प्रति एकड़ होती है ये पत्तों के पीलेपन और भूरेपन की बीमारी से रहित होती है इस किस्म के बनने वाले बरेडों में सभी तत्त मौजूद होते है इसकी बिजाई अक्तूबर से नवंबर महीने तक कर सकते है ये पकने के लिए 156 दिन का समय लेती है और इसकी लंबाई 96 सैं.मी. है HD 2967: ये लंबाई वाली किस्म है .... (Read More)
श्रीमान जी HD 3086 (PusaGautam) : इसकी औसतन उपल 23 क्विंटल प्रति एकड़ होती है ये पत्तों के पीलेपन और भूरेपन की बीमारी से रहित होती है इस किस्म के बनने वाले बरेडों में सभी तत्त मौजूद होते है इसकी बिजाई अक्तूबर से नवंबर महीने तक कर सकते है ये पकने के लिए 156 दिन का समय लेती है और इसकी लंबाई 96 सैं.मी. है HD 2967: ये लंबाई वाली किस्म है इसके पौधे की औसतन लंबाई 101 सैं.मी. होती है इसके दाने सुनहिरी, छोटे, सख्त और चमकीले होते है ये लगभग 157 दिनों में तैयार हो जाती है इसकी औसतन पैदावार 21.5 क्विंटल प्रति एकड़ है

Posted by ਹਰਦੀਪ ਸਿੰਘ ਟਿਵਾਣਾ
Punjab
05-11-2019 08:32 PM
ਸ੍ਰੀ ਮਾਨ ਜੀ UNNAT PBW 550: ਇਹ ਕਿਸਮ ਪੰਜਾਬ ਦੇ ਸਾਰਿਆਂ ਇਲਾਕਿਆਂ ਵਿੱਚ ਉਗਾਈ ਜਾਂਦੀ ਹੈ ਇਹ ਕਿਸਮ 145 ਦਿਨਾਂ ਵਿੱਚ ਪੱਕ ਕੇ ਤਿਆਰ ਹੋ ਜਾਂਦੀ ਹੈ ਇਹ ਪੀਲੀ ਅਤੇ ਭੂਰੀ ਕੁੰਗੀ ਦੀ ਰੋਧਕ ਕਿਸਮ ਹੈ ਇਸਦਾ ਔਸਤਨ ਕੱਦ 86 ਸੈ.ਮੀ. ਹੁੰਦਾ ਹੈ ਇਸ ਦਾ ਔਸਤਨ ਝਾੜ 23 ਕੁਇੰਟਲ ਪ੍ਰਤੀ ਏਕੜ ਹੁੰਦਾ ਹੈ
Posted by Raj Kumar Singh
Uttar Pradesh
05-11-2019 08:31 PM
श्रीमान जी, जैविक तरीके से गेहूं की बुवाई करने के लिए आप बिजाई से पहले गोबर की खाद 5 -7 टन प्रति एकड़ के हिसाब से डालें, और गेहूं की फसल के विकास के लिए आप इसमें उपलों के पानी का घोल बना कर स्प्रे करें, इसका घोल बनाने के लिए आप 5 -7 उपलों को 50 लीटर पानी में मिला कर 4 से 5 दिन के लिए रखें जब पानी 30 लीटर रह जाता है तब इसमें 90 ल.... (Read More)
श्रीमान जी, जैविक तरीके से गेहूं की बुवाई करने के लिए आप बिजाई से पहले गोबर की खाद 5 -7 टन प्रति एकड़ के हिसाब से डालें, और गेहूं की फसल के विकास के लिए आप इसमें उपलों के पानी का घोल बना कर स्प्रे करें, इसका घोल बनाने के लिए आप 5 -7 उपलों को 50 लीटर पानी में मिला कर 4 से 5 दिन के लिए रखें जब पानी 30 लीटर रह जाता है तब इसमें 90 लीटर पानी को मिला कर इसकी स्प्रे करें, अगर फसल में किसी कीट का हमला हो जाए तो उसकी रोकथाम के लिए आप नीम के तेल की 50 ml प्रति एकड़ के हिसाब से स्प्रे करें और अगर फसल में फंगस का हमला हो जाए तो उसके लिए आप खट्टी लस्सी 3 लीटर प्रति एकड़ के हिसाब से स्प्रे के, धन्यवाद
Posted by ਦਵਿੰਦਰ ਸਿੰਘ
Punjab
05-11-2019 08:26 PM
श्रीमान जी ये किस्म पकने के लिए 126—134 दिन लेती है इसकी लंबाई छोटी होती है इसकी तूड़ी बहुत कम बनती है इसकी लंबाई 80—90 सैं.मी. होती है इसकी उपज अच्छे खेत में 23 क्विंटल चल रही है पर जो इसकी उपज सिफारिश की जाती है वो 18 क्विंटल प्रति एकड़ है इसकी उपज इसके दाने मोटे होने के कारण ज्यादा होती है इसकी रोटी भी अच्छी बनती है इस.... (Read More)
श्रीमान जी ये किस्म पकने के लिए 126—134 दिन लेती है इसकी लंबाई छोटी होती है इसकी तूड़ी बहुत कम बनती है इसकी लंबाई 80—90 सैं.मी. होती है इसकी उपज अच्छे खेत में 23 क्विंटल चल रही है पर जो इसकी उपज सिफारिश की जाती है वो 18 क्विंटल प्रति एकड़ है इसकी उपज इसके दाने मोटे होने के कारण ज्यादा होती है इसकी रोटी भी अच्छी बनती है इसकी बिजाई के लिए बीज 40—45 किलो प्रति एकड़ के हिसाब से डालें ये नरमे वाले खेत में कामयाब है
Posted by om anjana Ranipura ujjain MP
Madhya Pradesh
05-11-2019 08:22 PM
जी हां आप मक्खन घास लगा सकते है

Posted by davinder sandgu
Punjab
05-11-2019 08:21 PM
ਦਵਿੰਦਰ ਦੀ ਕਿਸਮ ਦੀ ਬਿਜਾਈ ਦਾ ਸਮਾਂ ਦੇਖਣ ਲਈ ਤੁਸੀ ਨਾਲ ਭੇਜੀ ਹੋਈ ਫੋਟੋ ਨੂੰ ਦੇਖੋ, ਧੰਨਵਾਦ
Posted by om anjana Ranipura ujjain MP
Madhya Pradesh
05-11-2019 08:17 PM
आप चारे की फसल लगाना चाहते है तो आप बरसीम,ज्वी, राईघास की बिजाई कर सकते है..

Posted by sahu boss
Rajasthan
05-11-2019 08:15 PM
श्रीमान जी, आप किस्मे जैसे के Type-8, Type-9 (perennials), RL 88 (perennials), Anand 2 (annual) और LLC 3(annual) की बुवाई कर सकते है, धन्यवाद

Posted by sahu boss
Rajasthan
05-11-2019 08:07 PM
श्रीमान जी , रिजका की रोपाई के लिए अच्छी तरह से तैयार ज़मीन की आवश्यकता होती है मिट्टी को भुरभुरा करने के लिए 3-4 जोताई के बाद एक गहरी जोताई करें उसके बाद सुहागे से खेत को समतल करें बिजाई के लिए अक्तूबर का समय अच्छा होता है बीज को बोने के लिए 1-3 सैं.मी. गहराई का प्रयोग करें कतार में 20 सैं.मी. फासले का प्रयोग करें 8-10 क.... (Read More)
श्रीमान जी , रिजका की रोपाई के लिए अच्छी तरह से तैयार ज़मीन की आवश्यकता होती है मिट्टी को भुरभुरा करने के लिए 3-4 जोताई के बाद एक गहरी जोताई करें उसके बाद सुहागे से खेत को समतल करें बिजाई के लिए अक्तूबर का समय अच्छा होता है बीज को बोने के लिए 1-3 सैं.मी. गहराई का प्रयोग करें कतार में 20 सैं.मी. फासले का प्रयोग करें 8-10 किलोग्राम बीज प्रति एकड़ में प्रयोग करें बीजों की ऊपरली परत सख्त होने के कारण बीजों को 6-8 घंटे के लिए पानी में भिगोयें और फिर बिजाई के लिए प्रयोग करें खेत की तैयारी के समय गाय का गला हुआ गोबर 80 क्विंटल प्रति एकड़ में मिट्टी में अच्छी तरह मिलायें नाइट्रोजन 8-14 किलो (15-30 किलो यूरिया) और फासफोरस 25-33 किलो (एस एस पी 150-200 किलो) प्रति एकड़ में डालें बिजाई के 55-60 दिनों के बाद पहली कटाई की जाती है और उसके बाद अगली कटाई, पहली कटाई के बाद 30-35 दिनों के अंतराल पर की जाती है 7-8 कटाइयों से प्रति वर्ष हरे चारे की औसतन पैदावार 280-320 क्विंटल प्रति एकड़ प्राप्त होती है धन्यवाद

Posted by shiva
Madhya Pradesh
05-11-2019 08:01 PM
Shiv ji, kripya ap bataye ki ap dhan ke bare mein kya jankari lena chahte hai, taki apko uski puri jankari di ja sake,dhanywad

Posted by shashank shekhar
Bihar
05-11-2019 08:01 PM
इसके लिए आप जैविक खाद जैसे वर्मीकंपोस्ट को अपने आम के पौधे को डाल सकते है धन्यवाद

Posted by gurbaj singh
Punjab
05-11-2019 07:52 PM
Gurbaj ji, kirpa kar ke eh daso k tuc dhaniye di bijai kive kiti hai, taki tuh
Posted by Rajat kumar
Punjab
05-11-2019 07:51 PM
ਰਜਤ ਜੀ, ਇਹ ਬੀਜ 120-125 ਦਿਨਾਂ ਵਿੱਚ ਪੱਕ ਜਾਂਦਾ ਹੈ, ਧੰਨਵਾਦ

Posted by nimayhaldar
Uttar Pradesh
05-11-2019 07:49 PM
श्रीमान जी, यह किस्म सिंचित हालातों में समय पर बोने के लिए उपयुक्त है इसकी पैदावार 21.9 क्विंटल प्रति एकड़ है, धन्यवाद

Posted by Harender chahar Dkchahar
Uttar Pradesh
05-11-2019 07:49 PM
Harender ji, podhe ke upar ka hisaa jo sukh raha hai, use kaat kar vaha baudeaux paste lga dein, dhanywad

Posted by amit Kumar
Bihar
05-11-2019 07:45 PM
Amit ji bakri lene ke liye aap Subash Kumar/Raj Kumar 9504617933, 9504097570 se sampark kr skte hai..

Posted by Harender chahar Dkchahar
Uttar Pradesh
05-11-2019 07:43 PM
हरेन्दर जी, इस पौधे के सूखे हुए हिस्से को निकल कर वह पर bardeaux paste लगा दें, धन्यवाद
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