
Posted by yogendra
Madhya Pradesh
06-11-2019 12:35 PM
Sir, from last few years the farming of black wheat in Punjab is very successful with average yield of 15-18 quintals per acre if organically sown and 22 quintals per acre if it is chemically sown, like other varieties of wheat it also take 145-165 days for its maturation, for more information and seed contact Malwinder singh Nelowalia 9888399412 thank you.

Posted by Himansu Kumar
Bihar
06-11-2019 12:35 PM
यह फसल बहुत तरह की मिट्टी जैसे कि रेतली, नमक वाली, दोमट और चिकनी मिट्टी में उगाई जा सकती है अच्छे जल निकास वाली, जैविक तत्व भरपूर, रेतली से दरमियानी ज़मीन में फसल अच्छी पैदावार देती है यह फसल नमक वाली तेजाबी ज़मीनों में भी उगाई जा सकती है पर बहुत ज्यादा जल जमाव और खारी या नमक वाली ज़मीन इस फसल की खेती के लिए उचित नह.... (Read More)
यह फसल बहुत तरह की मिट्टी जैसे कि रेतली, नमक वाली, दोमट और चिकनी मिट्टी में उगाई जा सकती है अच्छे जल निकास वाली, जैविक तत्व भरपूर, रेतली से दरमियानी ज़मीन में फसल अच्छी पैदावार देती है यह फसल नमक वाली तेजाबी ज़मीनों में भी उगाई जा सकती है पर बहुत ज्यादा जल जमाव और खारी या नमक वाली ज़मीन इस फसल की खेती के लिए उचित नहीं होती Kufri Bahar: इस किस्म के पौधे लंबे और तने मोटे होते हैं तनों की संख्या 4-5 प्रति पौधा होती है इसके आलू बड़े, सफेद रंग के, गोलाकार से अंडाकार होते हैं और इसका गुद्दा सफेद रंग का होता है यह किस्म 100-110 दिनों में पक जाती है और इसकी औसतन पैदावार 125 क्विंटल प्रति एकड़ होती है इसे ज्यादा देर तक स्टोर करके रखा जा सकता है यह पिछेती और अगेती झुलस रोग और पत्ता मरोड़ रोग की रोधक है Kufri Badshah: इसके पौधे लंबे और 4-5 तने प्रति पौधा होते हैं इसके आलू बड़े से दरमियाने, गोलाकार और हल्के सफेद रंग के होते हैं इसके आलू स्वाद होते हैं यह किस्म 100-110 दिनों में पक जाती है यह किस्म कोहरे को सहनेयोग्य है और पिछेती, अगेती झुलस रोग की प्रतिरोधक है Kufri Sutlaj: इस किस्म के पौधे घने और मोटे तने वाले होते हैं पत्ते हल्के हरे रंग के होते हैं आलू बड़े आकार के, गोलाकार और नर्म छिल्के वाले होते हैं यह किस्म 90-100 दिनों में पकती है इसकी औसतन पैदावार 160 क्विंटल प्रति एकड़ होती है यह किस्म खाने के लिए अच्छी और स्वादिष्ट होती है इन आलुओं को पकाना आसान होता है यह नए उत्पाद बनाने के लिए उचित किस्म नहीं है Kufri Anand: यह मध्यम समय की किस्म है, जो कि पिछेते झुलस रोग और कोहरे के प्रतिरोधक है इसकी औसतन पैदावार 140-160 क्विंटल प्रति एकड़ होती है Kufri Pukhraj: इसके पौधे लंबे और तने संख्या में कम और दरमियाने मोटे होते हैं आलू सफेद, बड़े, गोलाकार और नर्म छिल्के वाले होते हैं यह किस्म 70-90 दिनों में पकती है इसकी औसतन पैदावार 130 क्विंटल प्रति एकड़ है यह अगेती झुलस रोग की रोधक किस्म है और नए उत्पाद बनाने के लिए उचित नहीं है Kufri Chipsona 2: इस किस्म के पौधे दरमियाने कद के और कम तनों वाले होते हैं इसके पत्ते गहरे हरे और फूल सफेद रंग के होते हैं आलू सफेद, दरमियाने आकार के, गोलाकार, अंडाकार और नर्म होते हैं इसकी औसतन पैदावार 140 क्विंटल प्रति एकड़ होती है यह पिछेती झुलस रोग की रोधक किस्म है यह किस्म चिपस और फरैंच फ्राइज़ बनाने के लिए उचित है Kufri Chipsona 1: यह किस्म 90-100 दिनों में पुटाई के लिए तैयार हो जाती है Kufri Chandramukhi: इस किस्म के आलू बड़े अंडाकार आकार के होते हैं इसकी औसतन पैदावार 10 टन प्रति एकड़ होती है यह किस्म 80-90 दिनों में पुटाई के लिए तैयार हो जाती है Kufri Jyoti: यह प्रोसेसिंग के लिए उपयुक्त किस्म है इसकी औसतन पैदावार 80-120 क्विंटल प्रति एकड़ होती है Kufri Ashoka: यह किस्म CPIU, शिमला द्वारा विकसित की गई है और बिहार, हरियाणा, उत्तर प्रदेश और पश्चिमी बंगाल में खेती के लिए उपयुक्त किस्म है यह लंबे कद की और मोटे तने वाली किस्म है यह किस्म 70-80 दिनों में पककर तैयार हो जाती है इसके आलू बड़े, गोलाकार, सफेद और नर्म छिल्के वाले होते हैं यह पिछेती झुलस रोग को सहने योग्य किस्म है Kufri Lalima: इस किस्म के आलू गोल, लाल और सफेद गुद्दे वाले होते हैं आलू बड़े से मध्यम आकार के होते हैं यह किस्म 100-110 दिनों में पुटाई के लिए तैयार हो जाती है इसकी औसतन पैदावार 16 टन प्रति एकड़ होती है खेत को एक बार 30 सैं.मी. गहरा जोतकर अच्छे ढंग से बैड बनाएं जोताई के बाद 2-3 बार तवियां फेरें और फिर 2-3 बार सुहागा फेरें बिजाई से पहले खेत में नमी की मात्रा बनाकर रखें बिजाई के लिए दो ढंग मुख्य तौर पर प्रयोग किए जाते हैं 1. मेंड़ और खालियों वाला ढंग 2. समतल बैडों वाला ढंग अगेती बिजाई के लिए, सितंबर के आखिरी सप्ताह से अक्तूबर का पहला सप्ताह खेती के लिए उपयुक्त होता है मुख्य फसल के लिए अक्तूबर का दूसरे से चौथा सप्ताह बिजाई के लिए उपयुक्त समय होता है गांठों के आकार के अनुसार रोपाई का फासला विभिन्न होता है बिजाई के लिए कतार से कतार में 60 सैं.मी. और पौधे से पौधे में 20 सैं.मी. फासले का प्रयोग करें बीज बोने के बाद बीजों को 8-10 सैं.मी. तक मिट्टी की परत से ढक दें रोपाई के लिए बड़ी आकार की गांठों का प्रयोग किया जाता है बिजाई के लिए 13-15 क्विंटल बीज प्रयोग किए जाते हैं यदि संभव हो, तो आलू की रोपाई से पहले, हरी खाद वाली फसलें जैसे सनई, जंतर आदि फसलें उगायें और उन्हें मिट्टी में अच्छी तरह दबायें यदि हरी खाद उपलब्ध ना हो तो गली सड़ी रूड़ी की खाद या गाय का गला हुआ गोबर 60-80 क्विंटल प्रति एकड़ में खेत की तैयारी के समय रोपाई से दो सप्ताह पहले डालें फसल की उचित वृद्धि के लिए नाइट्रोजन 40-50 किलो (90-110 किलो यूरिया), फासफोरस 24-32 किलो (150-200 किलो सिंगल सुपर फासफेट) और पोटाश 40-50 किलो (66-85 किलो म्यूरेट ऑफ पोटाश) की मात्रा प्रति एकड़ में डालें बिजाई के समय नाइट्रोजन का 3/4 हिस्सा और फासफोरस और पोटाश की पूरी मात्रा डालें बाकी बचा हुआ नाइट्रोजन का 1/4 हिस्सा बिजाई से 35-40 दिन बाद जड़ों में मिट्टी लगाने के समय डालें बिजाई से पहले सिंचाई करें बिजाई के बाद 10-12 दिनों के अंदर अंदर पहली सिंचाई करें दूसरी सिंचाई पहली सिंचाई के 7 दिनों के बाद करें बाकी की सिंचाइयां जलवायु की परिस्थितियों और जरूरत के अनुसार करें गांठे बनने की अवस्था सिंचाई के लिए बहुत महत्तवपूर्ण होती है इस अवस्था में पानी की कमी ना होने दें ज्यादा सिंचाई ना करें इससे गलने की बीमारी का खतरा बढ़ता है पुटाई से 10-12 दिन पहले सिंचाई बंद कर दें डंठलों की कटाई : आलुओं को विषाणु से बचाने के लिए यह क्रिया बहुत जरूरी है और इससे आलुओं का आकार और गिणती भी बढ़ जाती है इस क्रिया में सही समय पर पौधे को ज़मीन के नज़दीक से काट दिया जाता है इसका समय अलग अलग स्थानों पर अलग है और चेपे की जनसंख्या पर निर्भर करता है उत्तरी भारत में यह क्रिया दिसंबर महीने में की जाती है धन्यवाद

Posted by Navjot Singh
Punjab
06-11-2019 12:34 PM
ਉਸ ਨੂੰ ਤੁਸੀ Mifex 450ml ਬੋਤਲ ਲਗਵਾਓ, ਬੋਤਲ ਵਿਚ Injection Tonofas 20ml, Injection Avil 10ml ਪਾਓ ਅਤੇ ਇਸ ਨੂੰ IV(slow) ਲਗਵਾਓ, ਬਾਕੀ ਉਸ ਨੂੰ Injection X-nil 1gm, Injection Megludyne 20ml (IM) ਲਗਵਾਓ ਅਤੇ 3 ਦਿਨ ਲਗਾਓ..

Posted by yogendra
Madhya Pradesh
06-11-2019 12:34 PM
Yogendra ji, pishle kuch samey se punjab me black wheat ki kheti ki ja rahi hai jo ke kafi safal bhi rahi hai organic me iska jhaar (yield) 15-18/q or chemical kheti me 22/q ke aas pas raha hai, ye kisam bhi dusri kismo ki tarah hi 145 se 155 din me tyar hoti hai, Is ke bare me or jeada jankari or is ke seed lene ke lia aap Malwinder sinbgh Nelowalia 9888399412 se samparak kar sakte hai, Thankyou.

Posted by Pritpal Sandhu
Punjab
06-11-2019 12:29 PM
Pritpal ji, Unnat PBW 550 di bijai tuc kar sakde ho, isda jhaad 23 quintal prati acre hunda hai isto ilawa made paani ate retle vaahn de lyi tuc 2 lakh 12 ja 27p31, 25p35, 27p63 wargia kisma v lgaa skde ho. ihh retle vahn de vich kaamjab han, dhanwad
Posted by sukhwinder
Punjab
06-11-2019 12:22 PM
Sukhwinder ji, lethal dawai hai jo is vich chloropyriphos nam da chemical hunda hai jo syonk di roktham lai vartea janda hai is di varton 1 liter nu 60 kilo miti ch milla ke prati acre de hisaab nal kiti jandi hai, or T-Zole dawai vich tuberconzole nam da chemical hunda hai ea fungus di roktham lai vartea janda hai isdi varton 300 - 400 gm prai acre de hisaab nal kiti jandi hai, dhanwad

Posted by balkar singh
Punjab
06-11-2019 12:22 PM
Balkar ji 1121 da rate is vele hath nal kati gal fasal da 2650 rupay prati quintal hai ate machine nal kati gai fasal da rate 2570 rupay prati quintal hai, dhanwad

Posted by Vivek Kumar srivastava
Uttar Pradesh
06-11-2019 12:21 PM
श्रीमान जी, यह कई तरह की मिट्टी में उगाई जाती है इसकी पैदावार के लिए नमकीन, क्षारीय और पानी खड़ा होने वाली मिट्टी से बचाव करें यह बढ़िया निकास वाली मिट्टी जिसमे बढ़िया जैविक तत्व मौजूद हों, में बढ़िया परिणाम देती है इसके बढ़िया विकास के लिए मिट्टी का pH 5.5-7 होना चाहिए Drudriha Tulsi: यह मुख्य रूप से बंगाल, नेपाल, चटगांव और महार.... (Read More)
श्रीमान जी, यह कई तरह की मिट्टी में उगाई जाती है इसकी पैदावार के लिए नमकीन, क्षारीय और पानी खड़ा होने वाली मिट्टी से बचाव करें यह बढ़िया निकास वाली मिट्टी जिसमे बढ़िया जैविक तत्व मौजूद हों, में बढ़िया परिणाम देती है इसके बढ़िया विकास के लिए मिट्टी का pH 5.5-7 होना चाहिए Drudriha Tulsi: यह मुख्य रूप से बंगाल, नेपाल, चटगांव और महाराष्ट्र क्षेत्रों में पाई जाती है यह गले को सूखेपन से राहत देता है यह हाथों, पैरों और गठिया की सूजन से आराम देता है Ram/Kali Tulsi (Ocimum canum): यह चीन, ब्राज़ील, पूर्व नेपाल और साथ ही बंगाल, बिहार, चटगांव और भारत के दक्षिणी क्षेत्रों में पाई जाती है इसका तना जामुनी और पत्ते हरे रंग के और बहुत ज्यादा सुगंधित होते है इसमें उचित मात्रा में औषधीय गुण जैसे ऐज़ाडिरैकटिन, ऐंटीफंगल , ऐंटीबैक्टीरियल, और पाचन तंत्र को ठीक रखती है यह गर्म क्षेत्रों में बढ़िया उगता है Babi Tulsi: यह पंजाब से त्रिवेंद्रम, बंगाल और बिहार में भी पाई जाती है इसका पौधा 1-2 फीट लम्बा होता है पत्ते 1-2 इंच लम्बे, अंडाकार और नुकीले होते है इसके पत्तों का स्वाद लौंग की तरह और सब्जियों में स्वाद के लिए प्रयोग किया जाता है तुलसी की खेती के लिए, अच्छी तरह से शुष्क मिट्टी की मांग की जाती है मिट्टी के भुरभुरा होने तक हैरो के साथ खेत की जोताई करें, फिर रूड़ी की खाद मिट्टी में मिलाएं तुलसी की रोपाई सीड बैड पर करें फरवरी के तीसरे महीने में नर्सरी बैड तैयार करें पौधे के विकास के अनुसार, 4.5 x 1.0 x 0.2 मीटर के सीड बैड तैयार करें बीजों को 60x60 सैं.मी. के फैसले पर बोयें बीजों को 2 सैं.मी. की गहराई पर बोयें बिजाई के 6-7 हफ्ते बाद, फसल की रोपाई खेत में करें तुलसी की खेती के लिए 120 ग्राम बीजों का प्रयोग प्रति एकड़ में करें फसल को मिट्टी से पैदा होने वाली बीमारीयों से रोकथाम के लिए, बिजाई से पहले मैनकोजेब 5 ग्राम प्रति किलोग्राम से बीजों का उपचार करें फसल की बढ़िया पैदावार के लिए बिजाई से पहले 15 टन रूड़ी की खाद मिट्टी में डालें तुलसी के बीजों को तैयार बैडों के साथ उचित अंतराल पर बोयें मानसून आने के 8 हफ्ते पहले बीजों को बैड पर बोयें बीजों को 2 सैं.मी. की गहराई पर बोयें बिजाई के बाद, रूड़ी की खाद और मिट्टी की पतली परत बीजों पर बना दें इसकी सिंचाई फुवारा विधि द्वारा की जाती है रोपाई के 15-20 दिनों के बाद, नए पौधों को तंदरुस्त बनाने के लिए 2% यूरिया का घोल डालें 6 हफ्ते पुराने और 4-5 पत्तों के अंकुरण होने पर अप्रैल के महीने में नए पौधे तैयार होते है तैयार बैडों को रोपाई 24 घंटे पहले पानी लगाएं ताकि पौधों को आसानी से उखाड़ा जा सकें और रोपाई के समय जड़ें मुलायम और सूजी हुई हो खेत की तैयारी के समय, रूड़ी की खाद को मिट्टी में मिलाएं खाद के तौर पर नाइट्रोजन 48 किलो(यूरिया 104 किलो), फासफोरस 24 किलो(सिंगल सुपर फासफेट 150 किलो) और पोटाश 24 किलो(मिउरेट 40 किलो) प्रति एकड़ में डालें नए पौधे लगाने के समय नाइट्रोजन की आधी मात्रा और फासफेट पेंटोऑक्साइड की पूरी मात्रा शुरुआती समय में डालें Mn 50 पी पी एम कंसंट्रेशन और Co@100 पी पी एम कंसंट्रेशन सूक्ष्म-तत्व डालें बाकी की बची हुई नाइट्रोजन को 2 हिस्सों में पहली और दूसरी कटाई के बाद डालें खेत को नदीनों से मुक्त करने के लिए कसी की मदद से गोड़ाई करें नदीनों की रोकथाम कम न होने पर यह फसल को नुकसान पहुंचाते है रोपण के एक महीने बाद पहली गोड़ाई और पहली गोड़ाई के चार हफ्ते बाद दूसरी गोड़ाई करें रोपण के दो महीने बाद कसी से अनुकूल गोड़ाई करें गर्मियों में, एक महीने में 3 सिंचाइयां करें और बरसात के मौसम में, सिंचाई की आवश्यकता नहीं होती एक साल में 12-15 सिंचाइयां करनी चाहिए पहली सिंचाई रोपण के बाद करें और दूसरी सिंचाई नए पौधों के स्थिर होने पर करें 2 सिंचाइयां करनी आवश्यक है और बाकी की सिंचाई मौसम के आधार पर करें इसके मंडीकरण के लिए आप Aushadhiya kheti vikas sansthan 6268536795 से संपर्क कर सकते हैं धन्यवाद
Posted by Rajveer Singh
Punjab
06-11-2019 12:16 PM
rajveer ji punjab vich isdi kheti di sifarish nahi kiti jandi.dhanwad
Posted by BhupendrBhupendrSingh
Rajasthan
06-11-2019 11:59 AM
Bhupendr ji kripya aap apna swal vistar se pushen ki aap kya jankari lena chathe hai tan jo apko sahi jankari di jaa skee..

Posted by Rameshwar
Haryana
06-11-2019 11:57 AM
bhai sahib nazdik ke pashu palan adhikari se sampark karein

Posted by Prabhjot Randhawa
Punjab
06-11-2019 11:57 AM
ਸ੍ਰੀ ਮਾਨ ਜੀ HD 3086 (PusaGautam) : ਇਸ ਦਾ ਔਸਤਨ ਝਾੜ 23 ਕੁਇੰਟਲ ਪ੍ਰਤੀ ਏਕੜ ਹੁੰਦਾ ਹੈ ਇਹ ਪੱਤਿਆਂ ਦੇ ਪੀਲੇਪਣ ਅਤੇ ਭੂਰੇਪਣ ਦੀ ਬਿਮਾਰੀ ਤੋਂ ਰਹਿਤ ਹੁੰਦੀ ਹੈ ਵਧੀਆ ਕਿਮਸ ਦੇ ਬਰੈੱਡ ਬਣਾਉਣ ਦੇ ਸਾਰੇ ਗੁਣ/ਤੱਤ ਇਸ ਵਿਚ ਮੌਜੂਦ ਹਨ,ਇਸਦੀ ਬਿਜਾਈ ਅਕਤੂਬਰ ਤੋਂ ਲੈ ਕੇ ਨਵੰਬਰ ਮਹੀਨੇ ਤੱਕ ਕਰ ਸਕਦੇ ਹੋ ਇਹ ਪੱਕਣ ਲਈ 156 ਦਿਨ ਅਤੇ ਕੱਦ 96 ਸੈਂਟੀਮੀਟਰ ਹੈ
Posted by Sarbjit Singh
Punjab
06-11-2019 11:57 AM
sarbjit ji kripa karke swal vistar nal pucho ta jo tuhanu is bare poori jankari diti ja sake.dhanwad

Posted by Jagdish Kumar kol
Madhya Pradesh
06-11-2019 11:53 AM
Nutrient film technique (NFT) is a hydroponic technique where in a very shallow stream of water containing all the dissolved nutrients required for plant growth is re-circulated past the bare roots of plants in a watertight gully, also known as channels.Deep Floating Technique (DFT) The DFT system keeps the hydroponics plant roots in the nutrient solution for 15-20 centimeter at all times. ... This system is popular in the Japan plant industry. Advantage. Lower investment because the DFT system does not need a water pump or extra container for nutrient solution.

Posted by vicky
Haryana
06-11-2019 11:53 AM
मिट्टी की जांच के आधार पर खादों का प्रयोग करें मिट्टी की जांच की मदद से हम उचित खाद देकर मिट्टी में आवश्यक तत्वों कमी कमी को पूरा कर सकते हैं सिंचित क्षेत्रों में N:P:K@60:24:12 किलोग्राम प्रति एकड़ में यूरिया 130 किलोग्राम, एस एस पी 150 किलोग्राम और म्यूरेट ऑफ पोटाश 20 किलोग्राम प्रति एकड़ में डालें नाइट्रोजन की आधी मात.... (Read More)
मिट्टी की जांच के आधार पर खादों का प्रयोग करें मिट्टी की जांच की मदद से हम उचित खाद देकर मिट्टी में आवश्यक तत्वों कमी कमी को पूरा कर सकते हैं सिंचित क्षेत्रों में N:P:K@60:24:12 किलोग्राम प्रति एकड़ में यूरिया 130 किलोग्राम, एस एस पी 150 किलोग्राम और म्यूरेट ऑफ पोटाश 20 किलोग्राम प्रति एकड़ में डालें नाइट्रोजन की आधी मात्रा और फासफोरस और पोटाश की पूरी मात्रा बिजाई के समय डालें नाइट्रोजन की बाकी मात्रा को पहली सिंचाई के समय डालें असिंचित क्षेत्रों में N:P:K@12:6:0 यूरिया 26 किलो और एस एस पी 40 किलो प्रति एकड़ में प्रयोग करें नाइट्रोजन, पोटाश और फासफोरस की पूरी मात्रा बिजाई के समय डालें
फसल की पैदावार को बढ़ाने के लिए जिंक सलफेट 10 किलोग्राम प्रति एकड़ में डालें जिंक की कमी को जिंक सलफेट 0.5 प्रतिशत स्प्रे द्वारा पूरा किया जा सकता है 15 दिनों के अंतराल पर 2-3 स्प्रे करें

Posted by Rovin singh jat
Rajasthan
06-11-2019 11:48 AM
गेंहूं की बिजाई सही समय पर करनी जरूरी है बारानी क्षेत्रों के लिए बिजाई नवंबर के पहले से तीसरे सप्ताह में पूरी कर लें, जबकि सिंचित क्षेत्रों में बिजाई अक्तूबर से 15 नवंबर तक पूरी कर लें
Posted by Ankit mukati
Madhya Pradesh
06-11-2019 11:45 AM
अंकित जी, 1एकड़ में 1 .6 बीघा होते हैं, धन्यवाद

Posted by Harshad Khode
Madhya Pradesh
06-11-2019 11:40 AM
Harshad ji kripya aap apne swal ke sath photo v upload kren tan jo apko sahi jankari di jaa skee.

Posted by happy
--
06-11-2019 11:36 AM
happy ji kirpa karke daso ke isdi bijai kive kiti hai ta jo tuhanu osde hisab nal jankari diti ja sake.dhanwad
Posted by R.K. Singh
Bihar
06-11-2019 11:35 AM
शर्मा जी कृपया सवाल विस्तार से पूछे के आप बांस के पौधे को नष्ट क्यों करना चाहते है यह किसी फसल में है ताकि आपको इसके बारे में पूरी जानकारी दी जा सके धन्यवाद
Posted by Ankit mukati
Madhya Pradesh
06-11-2019 11:34 AM
अंकित जी यह फंगस के कारण हो रहा है इसके लिए आप mancozeb @400 ग्राम को प्रति एकड़ के हिसाब से स्प्रे करें धन्यवाद
Posted by Vinay Prabhakar
Bihar
06-11-2019 11:32 AM
विनय जी बकरी पालन की ट्रेनिंग आप अपने नज़दीकी कृषि विज्ञान केन्द्र से ले सकते है आप वहां जाकर अपना ट्रेनिंग का फार्म भर आए जब भी वहां ट्रेनिंग होगी तो वो आपको फोन करके बता देंगे ट्रेनिंग के लिए आप Krishi Vigyan Kendra Saraiya Muzaffarpur, Goraul Rd, Sadipur, Dist. - Saraiya 843126(Bihar) India Phone: 06223 255 552 से संपर्क कर सकते है
Posted by Ravi
Rajasthan
06-11-2019 11:31 AM
असली केसर सिर्फ जम्मू कश्मीर, ईरान और अफगानिस्तान में ही हो सकता है, यह कुसुम है, इसकी भी कई दवाई बनती है, यदि कोई ओर समस्या है तो जम्मू कश्मीर के इस किसान से बात करें, जिसके दादे, पड़दादे भी केसर की खेती करते थे और यह भी केसर की खेती करते है Javid Ahmed- 95964 93260 बाकि आप यह वीडियो देखें https://www.youtube.com/watchv=vl7c6L3ETnQ&t=8s बाकि यदि फिर भी यकीन .... (Read More)
असली केसर सिर्फ जम्मू कश्मीर, ईरान और अफगानिस्तान में ही हो सकता है, यह कुसुम है, इसकी भी कई दवाई बनती है, यदि कोई ओर समस्या है तो जम्मू कश्मीर के इस किसान से बात करें, जिसके दादे, पड़दादे भी केसर की खेती करते थे और यह भी केसर की खेती करते है Javid Ahmed- 95964 93260 बाकि आप यह वीडियो देखें https://www.youtube.com/watchv=vl7c6L3ETnQ&t=8s बाकि यदि फिर भी यकीन नहीं है तो तो आप अमृतपाल सिंह बराड़ प्रोफेसर, पीएयू लुधियाना इस वीडियो संबंधी विचार पड़ सकते हैं, यह फसल केसर की नहीं है, यह फसल कसुंबडे की है, इसे अंग्रेजी में Safflower कहते है, और विज्ञानं में इसे Carthamus tinctorius कहते है
Posted by ashok kumar painkra
Chattisgarh
06-11-2019 11:30 AM
ashok ji aap kisme jaise (G – 3),Bhagya,lakshmi,(G – 4),Andhra Jyothi (G- 5) ki bijai kar sakte hai.dhanywad
Posted by Rahul Dedha
Uttar Pradesh
06-11-2019 11:29 AM
आप पशुओं को दूध के हिसाब से मिर्नल मिक्सर्च दे सकते है ज्यादा दूध देने वाले पशुओं को 100 ग्राम मिर्नल मिक्सर्च रोजाना दे सकते है और दूसरे पशुओं को 50 ग्राम मिर्नल मिक्सर्च रोजाना दे सकते है
Posted by JAFAK KHAN
Uttar Pradesh
06-11-2019 11:24 AM
Jafak ji, yeh machar ke hamle ki vajah se hua hai, kripya ap isme imidacloprid @ 1.5 ml prati liter pani ke hisaab se spray karein, dhanywad
Posted by Ashish uikey
Madhya Pradesh
06-11-2019 11:24 AM
यह विभिन्न प्रकार की मिट्टी में विकसित हो सकता है जिसमें सैंडी दोमट से लेकर मिट्टी, काली मिट्टी और लाल मिट्टी होती है जिसमें उचित जल निकासी होती है उच्च कार्बनिक सामग्री के साथ अच्छी तरह से सूखा रेतीली मिट्टी के नीचे उगाए जाने पर यह सबसे अच्छा परिणाम देता है अच्छी वृद्धि के लिए मिट्टी का पीएच 7-8.5 होना चाहिए.... (Read More)
यह विभिन्न प्रकार की मिट्टी में विकसित हो सकता है जिसमें सैंडी दोमट से लेकर मिट्टी, काली मिट्टी और लाल मिट्टी होती है जिसमें उचित जल निकासी होती है उच्च कार्बनिक सामग्री के साथ अच्छी तरह से सूखा रेतीली मिट्टी के नीचे उगाए जाने पर यह सबसे अच्छा परिणाम देता है अच्छी वृद्धि के लिए मिट्टी का पीएच 7-8.5 होना चाहिए यह मध्यम अम्लीय और लवणीय मिट्टी को सहन कर सकता है उच्च अम्लीय मिट्टी में खेती से बचें शुरुआती फसलों के लिए हल्की मिट्टी फायदेमंद होती है जहां भारी पैदावार के लिए मिट्टी दोमट और गाद दोमट मिट्टी उपयोगी होती है इसकी किस्मे जैसे के Pusa 120, Pusa Rubi, Pusa Sheetal, Pusa Hybrid 4, Arka Anyanya, Arka Vikas, Arka Abha, Kashi Hemant, Hisar Lalit, Arka Saurabh, HS 101, HS 102, Hisar Arun (Selection 7)की बिजाई कर सकते है टमाटर के बीजों को पहले नर्सरी में बोया जाता है फिर मुख्य क्षेत्र में रोपाई की जाती है मुख्य क्षेत्र की तैयारी के लिए, इसे अच्छी तरह से चूर्णित और समतल मिट्टी की आवश्यकता होती है 4-5 बार के लिए भूमि की जुताई ki जाती है अंतिम जुताई के समय मिट्टी में अच्छी तरह से विघटित गोबर @ 60 किग्रा / एकड़ मिलाएँ रोपाई के उद्देश्य के लिए 80-90 cm चौड़ाई का तैयार bed खरीफ की फसल के लिए जून से सितंबर महीने में नर्सरी में बीज बोते हैं ग्रीष्म ऋतु के लिए, नवंबर-दिसंबर में नर्सरी तैयार की जाती है जबकि सर्दियों के मौसम के लिए, सितंबर महीने में नर्सरी में बीज बोते हैं
खरीफ की फसल, 60cmx60cm की spacing का उपयोग करें जबकि गर्मी और सर्दियों के मौसम के लिए, 60cmx45cm के spacing का उपयोग करें
नर्सरी में 0.5 cm की गहराई पर बीज बोएं और फिर मिट्टी से ढक दें मुख्य खेत में रोपाई की रोपाई
पंक्तियों में 5-7 cm की दूरी पर 1 मीटर की चौड़ाई और 5 मीटर की लंबाई वाले टमाटर पर बीज बोना एक एकड़ भूमि के लिए अंकुर प्राप्त करने के लिए, लगभग 25 उठाए हुए की आवश्यकता होती है बीजों की बुवाई से पहले कार्बोफ्यूरान 3 जी @ 10 ग्राम / वर्ग मीटर को नर्सरी मिट्टी में मिलाएं अंकुर को कीट और बीमारी के हमले से बचाने के लिए, मैनकोजेब @ 2 ग्राम / लीटर पानी का छिड़काव करें रोपाई के उद्देश्य के लिए चार से पांच सप्ताह का अंकुर यानी 10-15 cm ऊंचाई उपयुक्त है एक एकड़ भूमि में बुवाई के लिए अंकुर तैयार करने के लिए 140-160 ग्राम बीज दर का प्रयोग करें संकर किस्मों के लिए, बीज दर 80-100 ग्राम / एकड़ का प्रयोग करें सामान्य तौर पर, नाइट्रोजन @ 40 किग्रा -60 किग्रा, फास्फोरस @ 20 किग्रा और पोटाश @ 24-32 किग्रा यूरिया @ 90-130 किग्रा, एसएसपी @ 125 किग्रा और एमओपी @ 40-55 किग्रा / एकड़ के रूप में लागू करें रोपाई के प्रत्यारोपण से तीन से चार सप्ताह पहले, फास्फोरस और पोटाश की पूरी खुराक और नाइट्रोजन की एक तिहाई मात्रा लागू करें रोपाई के 30 और 50 दिनों के बाद दो बराबर छींटों में नाइट्रोजन की शेष मात्रा लागू करें
रोपाई के बाद दो-तीन दिनों तक हल्की सिंचाई करें सर्दियों में, 12 से 15 दिनों के अंतराल पर और गर्मियों के महीने में सिंचाई करें, मिट्टी की नमी के आधार पर 6-7 दिनों के अंतराल के साथ आवेदन करें फूलों की अवस्था सिंचाई के लिए महत्वपूर्ण है, इस चरण के दौरान पानी के तनाव से फूल गिर सकता है और फलने और उत्पादकता पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ सकता है विभिन्न शोधों के अनुसार, यह पाया गया है कि, हर पखवाड़े में आधा इंच सिंचाई जड़ों की अधिकतम पैठ का कारण बनती है और इस प्रकार उच्च उपज देती है इसके अलावा, अतिरिक्त सिंचाई से बचें धन्यवाद
Posted by Ashish uikey
Madhya Pradesh
06-11-2019 11:23 AM
Ashish ji, iske liye ap tilt @ 200 ml prati acre ke hisaab se spray karein, dhanywad
Posted by sukhpreet singh
Punjab
06-11-2019 11:17 AM
ਮੌਸਮ ਵਿਭਾਗ ਦੇ ਅਨੁਸਾਰ ਮੀਹ ਪੈਣ ਦੀ ਸੰਭਾਵਨਾ ਹੈ ਧੰਨਵਾਦ
Posted by R.K. Singh
Bihar
06-11-2019 11:08 AM
अपने खेती की मिटटी जाँच करवाने के लिए आप अपने नज़दीकी कृषि विज्ञानं केंद्र से संपर्क कर सकते है और वहां मिटटी की जाँच भी करवा सकते है जी , आपके कृषि विज्ञानं केंद्र का पता आप नोट कर सकते है जी Krishi Vigyan Kendra Jalalgarh, Purnea
Post - Jalalgarh,
Dist - Purnea – 854327 (Bihar) India
Phone : 9934488102

Posted by vinod
Madhya Pradesh
06-11-2019 11:06 AM
खुम्ब की किस्में कई प्रकार की होती है जैसे कि बटन खुम्ब, डीगरी, शटाकी खुम्ब, पराली खुम्ब, और मिलकी खुम्ब इनमे से कुइ खुम्ब सर्दियो के मौसम में और कुछ गर्मीयों के मौसम में लगाये जाते है और हर खुम्ब को लगाने का समय अलग अलग है जैसे बटन खुम्ब का समय सितंबर से मार्च तक होता है इस समय में हम तीन फसले ले सकते है शटाकी ख.... (Read More)
खुम्ब की किस्में कई प्रकार की होती है जैसे कि बटन खुम्ब, डीगरी, शटाकी खुम्ब, पराली खुम्ब, और मिलकी खुम्ब इनमे से कुइ खुम्ब सर्दियो के मौसम में और कुछ गर्मीयों के मौसम में लगाये जाते है और हर खुम्ब को लगाने का समय अलग अलग है जैसे बटन खुम्ब का समय सितंबर से मार्च तक होता है इस समय में हम तीन फसले ले सकते है शटाकी खुम्ब का समय अक्तूबर से मध्य फरवरी तक हैं इस समय हम एक फसल ही ले सकते है पराली खुम्ब का समय अप्रैल से अगस्त तक है इस समय हम चार फसले ले सकते है मिलकी खुम्ब का समय अप्रैल से सितंबर तक है आप अब अप्रैल में मिलकी या पराली खुम्ब लगा सकते है पराली खुमब के लिए आपको पराली, बीज, बांस, सेबा, आदि की जरूरत है पराली के पूले, धानो की पराली 1-1 किलो के पूले दोनो सिरो से सेबे से बांध कर तैयार किये जाते है पूले के सिरे कांट कर एक सार कर लिए जाते है पूलो की क्यिारी लगाना पराली के पूलो को साफ पानी में 16-20 घंटो के लिए डूबो दे गिले पूलो को ढलान पर रख कर फालतू पानी को निकलने दे कमरे ईटो और बांस से एक पलेटफार्म बनाये इस पलेटफार्म पर 5 पूलो की एक तहय लगाये जिसके ऊपर 75 ग्राम बीज डाले इसके ऊपर की तहय उलट होती है इस प्रकार 5-5 पूलो की तहय में 300 ग्राम बीज डाल कर कियारी तैयार करे सबसे ऊपर दो पूलो को खोलकर रख दे खुम्बो का फूटना बिजाई से 7-9 दिनो के बाद खुम्ब फूटने लगती है पानी और हवा का संचार बिजाई के दो दिन के बाद हर रोज पानी का छिडका करे खुम्बो के फूटने के बाद हवा का संचार 6-8 घंटे प्रति दिन किया जाता है खुम्बो की तूडाई खुम्बो के फूटने के बाद 1-2 दिनो के बाद तोडाई के योग्य हो जाती है मिलकी खुम्ब मिलकी खुम्ब के लिए तूडी, बीज, मोमी लिफाफे, सेबा, केसिंग,मिट्टी आदि होने चाहिये तूडी की तैयारी सूकी तूडी को पक्के फर्श पर बिछा कर 16-20 घंटे पानी से गिला करे गिली तूडी को बोरी में भर कर सेबे से बांध दे इस बोरी को उबलते पानी में 45-50 मिनट रखें तूडी को निकालकर पक्के फर्श पर बिछा कर ठंडा करे यह तूडी बिजाई के लिए तैयार है बिजाई ठंडी तूडी में बीज मिलाकर मोमी लिफाफो में भर दें एक मोमी लिफाफें में लगभग 2 किलो गिली तूडी और 70-80 ग्राम बीज पडता है लिफाफे के मुंह को सेबे से अच्छी तरह बांध कर कमरे में रख दे केसिंग बिजाई के दो तीन हफतो के बाद लिफाफे खोलकर केसिंग की 1-1.5 की तहय लगा दें केसिंग में तूडी और रेतली मिट्टी होती है 24 घंटो के लिए 4 प्रतिशत फारमलेन के घोल से जीवाणु रहित किया जाता है खुम्बो का फूटना केसिंग मिट्टी डालने के लगभग दो हफतो में खुम्बो के छोटे छोटे किणके निकलने शुरू हो जाते है और 4-5 दिन के बाद तोडने योग्य हो जाते है खुम्बो की तूडाई लगभग 35-40 दिनो तक की जाती है धन्यवाद

Posted by Mukhtiar Singh
Punjab
06-11-2019 11:05 AM
ਪਸ਼ੂ ਨੂੰ ਸੂਣ ਤੋਂ 2 ਮਹੀਨੇ ਪਹਿਲਾ vitum-H 10-10ml ਸਵੇਰੇ ਸ਼ਾਮ ਦਿਓ ਅਤੇ ਕਾਰਗਿਲ ਦੀ Transition mix ਫੀਡ ਦੇਣੀ ਸ਼ੁਰੂ ਕਰੋ, ਇਸ ਨਾਲ ਲੇਵਾ ਅਤੇ ਦੁੱਧ ਵਧਿਆ ਹੋ ਜਾਵੇਗਾ..

Posted by Jai Pathania
Punjab
06-11-2019 11:02 AM
आप गाय को हीट में आने पर बच्चेदानी में Utrawin-oz दवा 30 मि.ली. और उसमें Metro IV drip 50ml मिक्स करें और तीन दिन भरवायें और उसे Minfa gold पाउडर 100 ग्राम रोजाना देना शुरू करें और Agrimin-i गोलियां रोजाना एक गोली दें और 21 दिनों तक देते रहे फिर अगली बार हीट में आने पर टीका भरवायें और उसे Pregstay gold रोजाना 20 दिन तक दें इससे फर्क पड़ जाएगा

Posted by sunil kumar
Bihar
06-11-2019 10:59 AM
Sunil ji yeh macchar ke hamle ki vja se sikudte hai, kripya ap isme imidacloprid @ 60 ml prati acre ke hisaab se spray karein, dhanywad

Posted by R. K. Singh
Bihar
06-11-2019 10:55 AM
ये आपके तालाब पर निर्भर करता है कि आपने किस हिसाब से तालाब तैयार किया है वैैसे तो आप रोहू मछली को रख सकते है आप अपने तालाब के हिसाब से पुंग छोड सकते है और अच्छी खुराक देकर तैयार कर सकते है

Posted by ashis
Uttar Pradesh
06-11-2019 10:46 AM
श्रीमान जी, यह बहुत बड़े कद की किस्म है जिसमें पौधे का औसतन कद 101 सैंमी होता है इसके दाने सुनहरे, मध्यम, सख्त और चमकदार होते हैं यह लगभग 157 दिनों में पक जाती है यह पत्तों के पीलेपन और भूरेपन से रहित है इसकी औसत पैदावर 21.5 क्विंटल प्रति एकड़ है धन्यवाद
Posted by aalok
Uttar Pradesh
06-11-2019 10:37 AM
अलोक जी कृप्या आप अपना सवाल विस्तार से पूछें कि आप क्या जानकारी लेना चाहते है ताकि आपको सही लानकारी दी जा सके
Posted by Sumitter Singh
Punjab
06-11-2019 10:36 AM
ਸੁਮਮਿਤ੍ਰ ਸਿੰਘ ਜੀ, ਇਸ ਵਿਚ ਤੱਤਾਂ ਦੀ ਕਮੀ ਹੈ, ਤੁਸੀ ਇਸ ਉਪਰ NPK 005234 @ 1 kg ਨੂੰ 150 ਲਿਟਰ ਪਾਣੀ ਚ ਘੋਲ ਕੇ ਪ੍ਰਤੀ ਏਕੜ ਦੇ ਹਿਸਾਬ ਨਾਲ ਸਪਰੇ ਕਰੋ, ਧੰਨਵਾਦ

Posted by vishal kumar
Uttar Pradesh
06-11-2019 10:35 AM
कृप्या आप अपना सवाल विस्तार से पूछें कि आप क्या जानकारी लेना चाहते है ताकि आपको सही लानकारी दी जा सके

Posted by inderjit
Punjab
06-11-2019 10:32 AM
ਇਸਨੂੰ ਕਿਸੇ ਤਰਾਂ ਦੀ ਵੀ ਹਲਕੀ ਤੋ ਭਾਰੀ ਜ਼ਮੀਨ ਵਿੱਚ ਉਗਾਇਆ ਜਾ ਸਕਦਾ ਹੈ ਡੂੰਘੀ ਮੈਰਾ,ਵਧੀਆਂ ਜਲ ਨਿਕਾਸ ਵਾਲੀ, ਪਾਣੀ ਨੂੰ ਬੰਨ ਕੇ ਰੱਖਣ ਵਾਲੀ ਅਤੇ ਵਧੀਆ ਜੈਵਿਕ ਖਣਿਜ਼ਾਂ ਵਾਲੀ ਜਮੀਨ ਸਭ ਤੋ ਵਧੀਆ ਰਹਿੰਦੀ ਹੈ ਨਰਮ ਅਤੇ ਰੇਤਲੀਆ ਜਮੀਨਾਂ ਇਸ ਲਈ ਵਧੀਆਂ ਨਹੀਂ ਹੁੰਦੀਆ ਕਿਉਕਿ ਇਸ ਵਿੱਚ ਬਣੀਆਂ ਗੰਢਾਂ ਛੇਤੀ ਖਰਾਬ ਹੋ ਜਾਦੀਆਂ ਹਨ ਜਮੀਨ ਦਾ pH 6-7 ਹੋਣਾ ਚਾਹੀਦਾ ਹੈ ਇਸ ਦੀਆ ਕਿਸਮ ਜਿਵ.... (Read More)
ਇਸਨੂੰ ਕਿਸੇ ਤਰਾਂ ਦੀ ਵੀ ਹਲਕੀ ਤੋ ਭਾਰੀ ਜ਼ਮੀਨ ਵਿੱਚ ਉਗਾਇਆ ਜਾ ਸਕਦਾ ਹੈ ਡੂੰਘੀ ਮੈਰਾ,ਵਧੀਆਂ ਜਲ ਨਿਕਾਸ ਵਾਲੀ, ਪਾਣੀ ਨੂੰ ਬੰਨ ਕੇ ਰੱਖਣ ਵਾਲੀ ਅਤੇ ਵਧੀਆ ਜੈਵਿਕ ਖਣਿਜ਼ਾਂ ਵਾਲੀ ਜਮੀਨ ਸਭ ਤੋ ਵਧੀਆ ਰਹਿੰਦੀ ਹੈ ਨਰਮ ਅਤੇ ਰੇਤਲੀਆ ਜਮੀਨਾਂ ਇਸ ਲਈ ਵਧੀਆਂ ਨਹੀਂ ਹੁੰਦੀਆ ਕਿਉਕਿ ਇਸ ਵਿੱਚ ਬਣੀਆਂ ਗੰਢਾਂ ਛੇਤੀ ਖਰਾਬ ਹੋ ਜਾਦੀਆਂ ਹਨ ਜਮੀਨ ਦਾ pH 6-7 ਹੋਣਾ ਚਾਹੀਦਾ ਹੈ ਇਸ ਦੀਆ ਕਿਸਮ ਜਿਵੇ ਕੇ PG 17, Yamuna Safed (G-1), Yamuna Safed 2(G-50), Yamuna Safed 3 (G 282), Yamuna Safed 4 (G 323)ਦੀ ਬਿਜਾਈ ਕਰ ਸਕਦੇ ਹੋ ਖੇਤ ਨੂੰ 3- 4 ਵਾਰ ਵਾਹ ਕੇ ਨਰਮ ਕਰੋ ਅਤੇ ਜੈਵਿਕ ਖਣਿਜ਼ਾਂ ਨੂੰ ਵਧਾਉਣ ਲਈ ਰੂੜੀ ਦੀ ਖਾਦ ਪਾਉ ਖੇਤ ਨੂੰ ਪੱਧਰਾ ਕਰਕੇ ਕਿਆਰਿਆ ਅਤੇ ਖਾਲਾ ਵਿੱਚ ਵੰਡ ਦਿਉ ਬਿਜਾਈ ਲਈ ਸਹੀ ਸਮਾਂ ਸਤੰਬਰ ਦੇ ਅਖੀਰਲੇ ਹਫਤੇ ਤੋਂ ਅਕਤੂਬਰ ਦਾ ਪਹਿਲਾ ਹਫਤਾ ਮੰਨਿਆਂ ਜਾਂਦਾ ਹੈ
ਪੌਦੇ ਤੋਂ ਪੌਦੇ ਦਾ ਫਾਸਲਾ 7.5 ਸੈ:ਮੀ: ਅਤੇ ਕਤਾਰਾਂ ਵਿੱਚ ਫਾਸਲਾ 15 ਸੈ:ਮੀ: ਰੱਖੋ ਲਸਣ ਦੀਆਂ ਗੰਢੀਆਂ ਨੂੰ 3-5 ਸੈ:ਮੀ: ਡੂੰਘਾ ਅਤੇ ਉਸਦਾ ਉੱਗਰਣ ਵਾਲਾ ਸਿਰਾ ਉੱਪਰ ਨੂੰ ਰੱਖੋ ਇਸ ਦੀ ਬਿਜਾਈ ਲਈ ਕੇਰਾ ਢੰਗ ਦੀ ਵਰਤੋ ਕਰੋ ਬਿਜਾਈ ਹੱਥਾ ਨਾਲ ਜਾਂ ਮਸ਼ੀਨ ਨਾਲ ਕੀਤੀ ਜਾ ਸਕਦੀ ਹੈ ਲਸਣ ਦੀਆਂ ਗੰਢੀਆਂ ਨੂੰ ਮਿੱਟੀ ਨਾਲ ਢੱਕ ਕੇ ਹਲਕੀ ਸਿੰਚਾਈ ਕਰੋ ਬਿਜਾਈ ਲਈ 225-250 ਕਿਲੋਗ੍ਰਾਮ ਬੀਜ ਪ੍ਰਤੀ ਏਕੜ ਬੀਜੋ ਬੀਜ ਨੂੰ ਥੀਰਮ 2 ਗ੍ਰਾਮ ਪ੍ਰਤੀ ਕਿਲੋ + ਬੈਨੋਮਾਈਲ 50 WP @ 1 ਗ੍ਰਾਮ ਪ੍ਰਤੀ ਲੀਟਰ ਪਾਣੀ ਨਾਲ ਸੋਧ ਕੇ ਉਖੇੜਾ ਰੋਗ ਅਤੇ ਕਾਂਗਿਆਰੀ ਤੋਂ ਬਚਾਇਆ ਜਾ ਸਕਦਾ ਹੈ ਰਸਾਇਣ ਵਰਤਣ ਤੋਂ ਬਾਅਦ ਬੀਜ ਨੂੰ ਟਰਾਈਕੋਡਰਮਾ ਵਿਰਾਇਡ 2 ਗ੍ਰਾਮ ਪ੍ਰਤੀ ਕਿੱਲੋ ਬੀਜ ਨਾਲ ਸੋਧ ਕੇ ਇਸਨੂੰ ਮਿੱਟੀ ਦੀਆਂ ਬਿਮਾਰੀਆਂ ਤੋ ਬਚਾਇਆ ਜਾ ਸਕਦਾ ਹੈ
ਬਿਜਾਈ ਤੋਂ 10 ਦਿਨ ਪਹਿਲਾਂ ਖੇਤ ਵਿੱਚ ਵਿੱਚ 2 ਟਨ ਰੂੜੀ ਦੀ ਖਾਦ ਪਾਉ 50 ਕਿੱਲੋ ਨਾਈਟ੍ਰੋਜਨ (110 ਕਿਲੋ ਯੂਰੀਆ ) ਅਤੇ 25 ਕਿੱਲੋ ਫਾਸਫੋਰਸ (115 ਕਿੱਲੋ ਸਿੰਗਲ ਸੁਪਰ ਫਾਸਫੇਟ) ਪ੍ਰਤੀ ਏਕੜ ਪਾਉ ਸਾਰੀ ਸਿੰਗਲ ਸੁਪਰ ਫਾਸਫੇਟ ਬਿਜਾਈ ਤੋਂ ਪਹਿਲਾਂ ਅਤੇ ਨਾਈਟ੍ਰੋਜਨ ਤਿੰਨ ਹਿੱਸਿਆ ਵਿੱਚ ਬਿਜਾਈ ਤੋਂ 30 ,45 ਅਤੇ 60 ਦਿਨਾਂ ਬਾਅਦ ਪਾਉ ਫ਼ਸਲ ਨੂੰ ਖੇਤ ਵਿੱਚ ਲਾਉਣ ਤੋਂ 10-15 ਦਿਨ ਬਾਅਦ 19:19:19 ਅਤੇ ਸੂਖਮ ਤੱਤ 2.5- 3 ਗ੍ਰਾਮ ਪ੍ਰਤੀ ਲੀਟਰ ਪਾਣੀ ਵਿੱਚ ਮਿਲਾ ਕੇ ਸਪਰੇਅ ਕਰੋ ਸ਼ੁਰੂ ਵਿੱਚ ਲਸਣ ਦਾ ਪੌਦਾ ਹੌਲੀ ਵਧਦਾ ਹੈ ਇਸ ਲਈ ਨਦੀਨ ਨਾਸ਼ਕਾਂ ਦੀ ਵਰਤੋਂ ਗੋਡੀ ਨਾਲੋ ਵਧੀਆ ਰਹਿੰਦੀ ਹੈ ਨਦੀਨਾਂ ਨੂੰ ਰੋਕਣ ਲਈ ਪੈਂਡੀਮੈਥਾਲਿਨ 1 ਲੀਟਰ ਪ੍ਰਤੀ 200 ਲੀਟਰ ਪਾਣੀ ਪ੍ਰਤੀ ਏਕੜ ਵਿੱਚ ਪਾ ਕੇ ਬਿਜਾਈ ਤੋਂ 72 ਘੰਟਿਆਂ ਦੇ ਵਿੱਚ ਸਪਰੇਅ ਕਰੋ ਇਸ ਤੋਂ ਬਿਨਾਂ ਨਦੀਨ ਨਾਸ਼ਕ ਔਕਸੀਫਲੋਰਫਿਨ 425 ਮਿ:ਲੀ: ਲੀਟਰ ਪ੍ਰਤੀ 200 ਲੀਟਰ ਪਾਣੀ ਵਿੱਚ ਪਾ ਕੇ ਸਪਰੇਅ ਬਿਜਾਈ ਤੋਂ 7 ਦਿਨ ਬਾਅਦ ਕਰੋ ਨਦੀਨਾਂ ਦੀ ਰੋਕਥਾਮ ਲਈ 2 ਗੋਡੀਆ ਦੀ ਜਰੂਰਤ ਹੈ ਪਹਿਲੀ ਗੋਡੀ ਬਿਜਾਈ ਤੋਂ 1 ਮਹੀਨੇ ਬਾਅਦ ਅਤੇ ਦੂਜੀ ਗੋਡੀ ਬਿਜਾਈ ਤੋਂ 2 ਮਹੀਨੇ ਬਾਅਦ ਕਰੋ ਸਿੰਚਾਈ ਵਾਤਾਵਰਨ ਅਤੇ ਜਮੀਨ ਦੇ ਅਨੁਸਾਰ ਕਰੋ ਪਹਿਲੀ ਸਿੰਚਾਈ ਬਿਜਾਈ ਸਮੇਂ ਅਤੇ ਬਾਅਦ ਵਿੱਚ 10-15 ਦਿਨਾਂ ਦੇ ਵਕਫੇ ਤੇ ਕਰੋ ਇਹ ਫ਼ਸਲ ਬਿਜਾਈ ਤੋਂ 135- 150 ਦਿਨ ਬਾਅਦ ਜਾਂ ਜਦੋਂ 50 % ਪੱਤੇ ਪੀਲੇ ਹੋ ਜਾਣ ਅਤੇ ਸੁੱਕ ਜਾਣ ਉਦੋ ਵੱਢੀ ਜਾ ਸਕਦੀ ਹੈ ਵਾਢੀ ਤੋਂ 15 ਦਿਨ ਪਹਿਲਾਂ ਸਿੰਚਾਈ ਬੰਦ ਕਰ ਦਿਉ ਪੌਦਿਆਂ ਨੂੰ ਪੁੱਟ ਕੇ ਛੋਟੇ ਗੁੱਛਿਆਂ ਵਿੱਚ ਬੰਨੋ ਅਤੇ 2-3 ਦਿਨ ਲਈ ਖੇਤ ਵਿੱਚ ਸੁੱਕਣ ਲਈ ਰੱਖ ਦਿਉ ਪੂਰੀ ਤਰਾ ਸੁੱਕਣ ਤੋਂ ਬਾਅਦ ਸੁੱਕੇ ਹੋਏ ਤਣੇ ਵੱਢ ਦਿਉ ਅਤੇ ਗੰਢਾ ਨੂੰ ਸਾਫ਼ ਕਰੋ ਧੰਨਵਾਦ

Posted by parvinder singh
Punjab
06-11-2019 10:13 AM
Parvinder singh ji battery wala spray pump lene ke lia aap Rajiv garg (Raja)9815940212, 9317793673 Raja Enterprises se samparak kar sakte hai, Thankyou.

Posted by k Kumawat
Madhya Pradesh
06-11-2019 10:13 AM
Kumawat ji lehsun mein mirch ki kheti karne ke liye ik katar lehsun ki lagaye or agli mirch ki , is tareeke se ap in dono ki ikathi bijai kar sakte hain, dhanywad
Posted by ashok kumar painkra
Chattisgarh
06-11-2019 10:12 AM
Ashok kumar painkra ji Napier hybrid ki cutting mil jayegi is ki cutting ke liye aap Bharat Bhushan 9412568747 se samparak kar sakte hai. Thank you.

Posted by Manpreet singh
Punjab
06-11-2019 10:12 AM
tuci uss nu Amoxi-CV 625mg tablet 1-1 goli swere sham 2-3 din tak deo, iss nal frak paa jawega.

Posted by Jabar Singh Rao
Rajasthan
06-11-2019 10:06 AM
श्रीमान जी, कृपया आप अपना सवाल विस्तार से पूछे के आप कौन से कीट की बात कर रहे है और उसकी फोटो भेजें ताकि आपको उसका सही समाधान दिया जा सके, धनयवाद
Posted by sukhwinder
Punjab
06-11-2019 09:55 AM
Sukhwinder ji, kaller vali jameen lai 3 saal lagatar kisi fasal di bijai toh pehla gypsum 1 kg prati acre de hisaab nal pao

Posted by sanjay ahirwar
Madhya Pradesh
06-11-2019 09:54 AM
Sanjay ji, kripya ap apna sawal visthar se puche ke ap kis fasal ke mandi bhav ke bare mein janna chahte hai, taki apko uske bare mein puri jankari di ja sake, dhanywad

Posted by vk
Haryana
06-11-2019 09:47 AM
WH 1105 की खोज पंजाब खेतीबाड़ी यूनिवर्सिटी द्वारा की गई है यह एक छोटे कद की किस्म है जिसमें पौधे का औसतन कद 97 सैंमी तक होता है, इसके दाने सुनहरे, मध्यम, सख्त और चमकदार होते हैं यह पत्तों के पीलेपन और भूरेपन की बीमारी से रहित है परंतु यह दानों के खराब होने के प्रति संवेदनशील है यह लगभग 157 दिनों में पक जाती है इसकी औस.... (Read More)
WH 1105 की खोज पंजाब खेतीबाड़ी यूनिवर्सिटी द्वारा की गई है यह एक छोटे कद की किस्म है जिसमें पौधे का औसतन कद 97 सैंमी तक होता है, इसके दाने सुनहरे, मध्यम, सख्त और चमकदार होते हैं यह पत्तों के पीलेपन और भूरेपन की बीमारी से रहित है परंतु यह दानों के खराब होने के प्रति संवेदनशील है यह लगभग 157 दिनों में पक जाती है इसकी औसतन पैदावार 23.1 क्विंटल प्रति एकड़ है धन्यवाद
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