Posted by jagdeep Singh jattana
Punjab
11-11-2019 05:56 PM
ਜਗਦੀਪ ਜੀ ਆਪਣੀ ਖੇਤੀ ਦੀ ਸਾਰੀ ਟੀਮ ਵਲੋਂ ਤੁਹਾਨੂੰ ਵੀ ਗੁਰੂ ਨਾਨਕ ਦੇਵ ਜੀ ਦੇ ਗੁਰਪੁਰਬ ਦੀਆਂ ਬਹੁਤ ਬਹੁਤ ਵਧਾਈਆਂ ਧੰਨਵਾਦ

Posted by Balvir Singh Mann
Punjab
11-11-2019 05:56 PM
tuci uss nu nazdiki doctor ton check krwao jiss nal usde pair di janch krke sahi ilagg kita jaa skee.

Posted by Hirendra Kumar
Rajasthan
11-11-2019 05:53 PM
ईसबगोल की बिजाई के लिए उपयुक्त समय अक्तूबर से नवंबर का महीना होता है पिछेती बिजाई (दिसंबर के पहले पखवाड़े के बाद) ना करें क्योंकि यह पैदावार में कमी को बढ़ाता है
Posted by gurwinder kaur
Punjab
11-11-2019 05:52 PM
gurwinder kaur ji tusi daso ke kehdedoctor ne keha prali to aachar pon da tareeka ji.baki prali nu urea nal sodh ke pashua nu pa sakde ha ,aachar nai penda ji.baki jo tusi keh rahe oh silage hvega ji. Punjab silage 9855007007 nal gal karo ji.
Posted by Babu Sen
Rajasthan
11-11-2019 05:51 PM
बढ़िया वर्मी कंपोस्ट निम्नलिखित तरीके अनुसार बनायी जा सकती है इसलिए ऐसा स्थान लें जहां धूप ना आये और हवादार हो इस स्थान पर ईंटों या पत्थर के टुकड़े और मिट्टी की 2—3 इंच मोटी परत बिछायें मिट्टी पर थोड़ा सा पानी छिड़ककर गीला करें मिट्टी में 25 प्रतिशत से अधिक नमी नहीं होनी चाहिए इसके ऊपर गंडोए (40 गंडोए प्रति व.... (Read More)
बढ़िया वर्मी कंपोस्ट निम्नलिखित तरीके अनुसार बनायी जा सकती है इसलिए ऐसा स्थान लें जहां धूप ना आये और हवादार हो इस स्थान पर ईंटों या पत्थर के टुकड़े और मिट्टी की 2—3 इंच मोटी परत बिछायें मिट्टी पर थोड़ा सा पानी छिड़ककर गीला करें मिट्टी में 25 प्रतिशत से अधिक नमी नहीं होनी चाहिए इसके ऊपर गंडोए (40 गंडोए प्रति वर्ग फीट जगह) में मिलायें
इसके बाद वेस्ट जैसे कि बची कुची सब्जियां, फल, कच्चा गोबर, गोबर की सलरी की 8—10 इंच मोटी परत डालें दूसरी परत के बाद इसके ऊपर सूखे पत्ते या पराली से ढक दें हर परत के बाद पानी छिड़कें ताकि नमी बनी रहे वर्मीकंपोस्ट के बैड को 3—4 इंच मोटी गोबर की परत से ढक दें और इसके ऊपर बोरा या तिरपाल रखें ताकि नमी बनी रहे
रसोई, फसलों या डेयरी के बचे कुचे की परत को रैक से पलटते रहें और आवश्यकतानुसार थोड़ा थोड़ा करके और वेस्ट भी डाल सकते हैं इसके ऊपर कच्चा गोबर भी डाल सकते हैं पर ध्यान रखें कि यह परत पहले जितनी ही मोटी रहें वर्मी कंपोस्ट की खाद मौसम के हिसाब से 45—60 दिनों में तैयार हो जाती है सबसे ऊपर वाली परत को हटाकर गंडोए छलनी से अलग कर लें और निचली छोड़ दें इसके ऊपर दोबारा रसोई या एग्रो वेस्ट की 6 इंच मोटी परत बिछाकर दोबारा खाद तैयार की जा सकती हैं 45 दिनों के बाद पानी छिड़कना बंद करने से भी गंडोए निचली परत में चले जाते हैं और छलनी से अलग करने में समय कम लगता है तैयार वर्मी कंपोस्ट काले भूरे रंग की गंध रहित और चाय पत्ती जैसी होती है इसे छांव में हवा में सुखकर आवश्यकतानुसार थैले या बोरियों में डालकर रखा जा सकता है एक टन वर्मी कंपोस्ट में 1.0—1.5 किलोग्राम नाइट्रोजन, 5—10 किलोग्राम पोटाश और 3.5—5.0 किलो फासफोरस होता है इसके अलावा इसमें कई तरह के एन्ज़ाइम और सूक्ष्म तत्व कॉपर, आयरन, जिंक, सल्फर, कैलशियम और मैगनीशियम आदि होते हैं

Posted by gurpreet
Punjab
11-11-2019 05:50 PM
Gurpreet ji, palak ke beej ki paidawaar lagbhag 115 qtl prati acre se 125 qtl prati acre tak ki hoti hai, dhanywad

Posted by vishnu
Rajasthan
11-11-2019 05:44 PM
vishnu ji kripya swal vistar se pooche taki aapko uske hisab se jankari di ja sake,dhanywad
Posted by Gurvinder Singh
Uttarakhand
11-11-2019 05:43 PM
Gurvinder Singh ji yeh dono hi best hai kai bar kuch pashuyo par agrimin forte ka jeyada asar hota hai kayi bar cfc achha result deta hai ji.
Posted by furqan
Madhya Pradesh
11-11-2019 05:40 PM
श्रीमान जी, कृपया आप बताये के आपके आलू में क्या समस्या है और अपने किस किस खाद का उपयोग किया है, ताकि आपको इसके बारे में बताया जा सके, धन्यवाद
Posted by furqan
Madhya Pradesh
11-11-2019 05:38 PM
श्रीमान जी, कृपया आप बताये के आपके आलू में क्या समस्या है और आपने किस किस खाद का उपयोग किया है, ताकि आपको इसके बारे में बताया जा सके, धन्यवाद
Posted by pukhraj bana
Rajasthan
11-11-2019 05:32 PM
श्रीमान जी, गाजर का भाव 1000-1500 रूपए प्रति क्विंटल के हिसाब से चल रहा है, धन्यवाद

Posted by jasmail
Tamil Nadu
11-11-2019 05:27 PM
jasmail ji gobhi de butte isde fasle de hisab nal beeje jande han par ik acre vich lagbhag 1200 boota laya ja sakda hai.dhanwad

Posted by jasmail
Tamil Nadu
11-11-2019 05:25 PM
jasmail ji tuc khali khet nu wah ke fasl di bijai to pehlan stomp@1 litre nu prtai acre de hisab nal spray karo.dhanwad
Posted by pukhraj bana
Rajasthan
11-11-2019 05:22 PM
श्रीमान जी, गाजर का भाव 1000-1500 रूपए प्रति क्विंटल के हिसाब से चल रहा है, धन्यवाद
Posted by Keshav Pathak
Chattisgarh
11-11-2019 05:11 PM
केष्व जी गोबर की खाद के लिए आप गोबर को किसी गड्ढे में डाल कर उसमे आप रसोई का waste भी डाल सकते है और उसे उसे ढक दे लगभग 6 महीने बाद गोबर की खाद त्यार हो जाती है इलावा पाथी उपले को बोला जाता है

Posted by vipindeep singh
Punjab
11-11-2019 05:05 PM
ਵਿਪਿਨ ਜੀ ਕਿਰਪਾ ਕਰਕੇ ਦੱਸੋ ਕਿ ਕਣਕ ਦੀ ਬਿਜਾਈ ਤੋਂ ਬਾਅਦ ਮੀਹ ਪਿਆ ਜਾ ਨਹੀਂ ਤਾ ਜੋ ਤੁਹਾਨੂੰ ਉਸਦੇ ਹਿਸਾਬ ਨਾਲ ਜਾਣਕਾਰੀ ਦਿਤੀ ਜਾ ਸਕੇ ਧੰਨਵਾਦ

Posted by Gurwinder Singh
Punjab
11-11-2019 05:03 PM
ਗੁਰਵਿੰਦਰ ਜੀ ਮੱਛਰ ਦੀ ਰੋਕਥਾਮ ਦੇ ਲਈ ਤੁਸੀ imidacloprid @1.5 ml ਨੂੰ ਪ੍ਰਤੀ ਲੀਟਰ ਪਾਣੀ ਦੇ ਹਿਸਾਬ ਨਾਲ ਸਪਰੇ ਕਰੋ ਧੰਨਵਾਦ

Posted by vishnu
Rajasthan
11-11-2019 05:03 PM
विष्णु जी कृपया आप इसकी उम्र बताये ताकि आपको इसके बारे में पूरी जानकारी दी जा सके धन्यवाद
Posted by Amit Panwar
Rajasthan
11-11-2019 05:00 PM
अमित जी यह फंगस है इसके लिए आप copper oxychloride @3 ग्राम को प्रति लीटर पानी के हिसाब से स्प्रे करें धन्यवाद

Posted by Mahesh Panwar
Rajasthan
11-11-2019 04:58 PM
mahesh ji yeh keet ka hamla ho raha hai iske liye aap quinalphos@4ml ko prati litre pani ke hisab se spray karen.dhanywad

Posted by ਨਵਨੀਤ ਸਿੰਘ
Punjab
11-11-2019 04:54 PM
ਫਸਲ ਦੀ ਬਿਜਾਈ ਲਈ ਅਕਤੂਬਰ ਦਾ ਅੰਤ ਵਾਲਾ ਹਫਤਾ ਅਤੇ ਨਵੰਬਰ ਦਾ ਪਹਿਲਾ ਹਫਤਾ ਉਚਿੱਤ ਸਮਾਂ ਹੁੰਦਾ ਹੈ

Posted by gurpreet singh
Punjab
11-11-2019 04:51 PM
ਕਣਕ ਦੀ ਬਿਜਾਈ ਸਹੀ ਸਮੇਂ ਤੇ ਕਰਨੀ ਜਰੂਰੀ ਹੈ ਪਿਛੇਤੀ ਬਿਜਾਈ ਦਾ ਫਸਲ ਦੀ ਪੈਦਾਵਾਰ ਤੇ ਬੁਰਾ ਅਸਰ ਪੈਂਦਾ ਹੈ ਕਣਕ ਦੀ ਬਿਜਾਈ 25 ਅਕ੍ਤੂਬਰ ਤੋਂ ਨਵੰਬਰ ਮਹੀਨੇ ਵਿੱਚ ਕੀਤੀ ਜਾਂਦੀ ਹੈ

Posted by Shivnarayan Meena
Madhya Pradesh
11-11-2019 04:51 PM
meena ji kripya swal vistar se pooche ke aap jankari kya lena chahte hai taki aapko iske bare men poori jankari di ja sake.dhanywad

Posted by gurpreet singh
Punjab
11-11-2019 04:49 PM
gurpreet ji jekar jameen retli hai ta ugan de chance haige ne jekar jameen dakar hai ta bijai dubara karni payegi.dhanwad

Posted by Banty Rajput
Punjab
11-11-2019 04:48 PM
ਬੰਟੀ ਜੀ ਕਿਰਪਾ ਕਰਕੇ ਦੱਸੋ ਕਿ ਤੁਸੀ ਪਰੋਮ ਕਿਸਨੂੰ ਕਹਿ ਰਹੇ ਹੋ ਜਾ ਤਾ ਇਸਦੀ ਫੋਟੋ ਭੇਜੋ ਤਾ ਜੋ ਤੁਹਾਨੂੰ ਇਸ ਬਾਰੇ ਪੂਰੀ ਜਾਣਕਾਰੀ ਦਿਤੀ ਜਾ ਸਕੇ ਧੰਨਵਾਦ
Posted by Navdeep Singh
Punjab
11-11-2019 04:32 PM
ਉਸ ਨੂੰ Lactomood ਹੋਮਿਓਪੈਥਿਕ ਦਵਾਈ ਦੀਆ 10-10 ਬੂੰਦਾਂ ਦਿਨ ਵਿਚ 3 ਵਾਰ ਦਿਓ , Lactin bolus 1-1 ਗੋਲੀ ਸਵੇਰੇ ਸ਼ਾਮ ਦਿਓ ਅਤੇ Anabolite liquid 100ml ਰੋਜਾਨਾ ਅਤੇ Milkout ਪਾਊਡਰ 1-1 ਚਮਚ ਸਵੇਰੇ ਸ਼ਾਮ ਦਿਓ.
Posted by ramesh kumar bishnoi
Punjab
11-11-2019 04:19 PM
Cardamom grows well in soil which is rich in organic matter. The ideal soil for sowing cardamom is loamy soil which is rich in humus. The ideal soil pH ranges from 4.5-7 and it is cultivated in uttarakhand.

Posted by gagandeep singh
Punjab
11-11-2019 03:53 PM
ਗਗਨ ਜੀ ਕਿਰਪਾ ਕਰਕੇ ਸ਼ਿਮਲਾ ਮਿਰਚ ਦੀ ਬਿਜਾਈ ਦਾ ਢੰਗ ਦੱਸੋ ਤਾ ਜੋ ਤੁਹਾਨੂੰ ਇਸ ਬਾਰੇ ਪੂਰੀ ਜਾਣਕਾਰੀ ਦਿਤੀ ਜਾ ਸਕੇ ਧੰਨਵਾਦ

Posted by Kamlesh Singadiya
Madhya Pradesh
11-11-2019 03:34 PM
kamlesh ji aap iske uper NPK 130045@1 kilo ko 150 litre pani ke hisab se spray karen.dhanywad

Posted by sunil kumar
Bihar
11-11-2019 03:32 PM
मोटे आलुओं की पैदावार के लिए 13:0:45 की 2 किलो और मैगनीश्यिम ई डी टी ए 100 ग्राम प्रति एकड़ की स्प्रे करें बीमारियों के हमले को रोकने के लिए फंगसनाशी प्रॉपीनेब 3 ग्राम प्रति लीटर पानी डालें आलुओं का आकार और गिणती बढ़ाने के लिए हयूमिक एसिड (12 प्रतिशत) 3 ग्राम + एम ए पी 12:61:0 की 8 ग्राम या डी ए पी 15 ग्राम प्रति लीटर की स्प्रे पौध.... (Read More)
मोटे आलुओं की पैदावार के लिए 13:0:45 की 2 किलो और मैगनीश्यिम ई डी टी ए 100 ग्राम प्रति एकड़ की स्प्रे करें बीमारियों के हमले को रोकने के लिए फंगसनाशी प्रॉपीनेब 3 ग्राम प्रति लीटर पानी डालें आलुओं का आकार और गिणती बढ़ाने के लिए हयूमिक एसिड (12 प्रतिशत) 3 ग्राम + एम ए पी 12:61:0 की 8 ग्राम या डी ए पी 15 ग्राम प्रति लीटर की स्प्रे पौधे की वृद्धि के समय करें

Posted by jaswinder singh
Punjab
11-11-2019 03:24 PM
ਜਸਵਿੰਦਰ ਜੀ ਕਿਰਪਾ ਕਰਕੇ ਦੱਸੋ ਕੇ ਤੁਸੀ ਇਸਨੂੰ ਕਿਹੜੀ ਕਿਹੜੀ ਖਾਦ ਪਾਈ ਹੈ ਤਾ ਜੀ ਤੁਹਾਨੂੰ ਇਸ ਬਾਰੇ ਪੂਰੀ ਜਾਣਕਾਰੀ ਦਿਤੀ ਜਾ ਸਕੇ ਧੰਨਵਾਦ

Posted by BALJIT SINGH
Punjab
11-11-2019 03:17 PM
ਬਲਜੀਤ ਜੀ ਕਣਕ ਨੂੰ ਹਲਕਾ ਪਾਣੀ ਲਾ ਦਿਓ ਅਤੇ ਯੂਰੀਆ ਪਾ ਦਿਓ ਜਦੋ ਕਣਕ 20 -21 ਦਿਨ ਦੀ ਹੋ ਜਾਏਗੀ ਉਸ ਸਮੇ ਸਿੰਚਾਈ ਕਰ ਦਿਓ ਧੰਨਵਾਦ

Posted by krishn pal
Madhya Pradesh
11-11-2019 02:48 PM
यह 115-120 दिनों में पक कर त्यार हो जाती है इसकी पैदावार प्रति 22-24क्विंटल एकड़ के हिसाब से होती है धन्यवाद

Posted by karulal Patidar
Madhya Pradesh
11-11-2019 02:32 PM
मिट्टी जाँच काम को छोटे से स्तर से शुरू कर करना है तो घर पर मिटटी जाँच केंद्र बना सकते है जी जब पूरा आत्मविश्वास हो जाय तो इस बिज़नेस को उसी आधार पर बढ़ा भी सकता है और इसमें आप रिपोर्ट को व्हट्सप पर डायरेक्ट किसान को भेज भी सकते है इस मशीन को खरीदने के लिए आप 9212302277 नंबर पर हर्ष जी से बात कर सकते है
Posted by BAGA RAM
Rajasthan
11-11-2019 02:27 PM
जीरे की बिजाई के लिए 15 से 30 नवंबर सही समय होता है कतारों में बिजाई के लिए दो पंक्तियों में 30 सैं.मी. फासले का प्रयोग करें बीजों को 10 सैं.मी. की गहराई में बोयें बिजाई के लिए बुरकाव ढंग या कतार में बिजाई ढंग का प्रयोग करें

Posted by Gurmeet Singh
Punjab
11-11-2019 02:20 PM
ਗੁਰਮੀਤ ਜੀ ਜੇਕਰ ਬਾਸਮਤੀ ਹੱਥਾਂ ਨਾਲ ਝਾੜੀ ਹੋਈ ਹੈ ਤਾ ਇਸਦਾ ਰੇਟ 2650 ਚਲ ਰਿਹਾ ਹੈ ਜੇਕਰ ਮਸ਼ੀਨ ਨਾਲ ਵਢਾਈ ਹੈ ਇਸਦਾ ਰੇਟ 2570 ਰੁਪਏ ਚਲ ਰਿਹਾ ਹੈ ਧੰਨਵਾਦ

Posted by Chetan
Madhya Pradesh
11-11-2019 02:17 PM
राजमांह को इसके लाल रंग की वजह से और किडनी के आकार जैसा होने पर किडनी बीन्स भी कहा जाता है यह प्रोटीन का मुख्य स्त्रोत है और मोलीबडेनम तत्व भी देता है इसमें कोलैस्ट्रोल को कम करने वाले तत्व भी हैं उत्तरी भारत में इसकी दाल भी बनाई जाती है भारत में, महाराष्ट्र, जम्मू कश्मीर, हिमाचल प्रदेश, उत्तराखंड, बंगाल, ताम.... (Read More)
राजमांह को इसके लाल रंग की वजह से और किडनी के आकार जैसा होने पर किडनी बीन्स भी कहा जाता है यह प्रोटीन का मुख्य स्त्रोत है और मोलीबडेनम तत्व भी देता है इसमें कोलैस्ट्रोल को कम करने वाले तत्व भी हैं उत्तरी भारत में इसकी दाल भी बनाई जाती है भारत में, महाराष्ट्र, जम्मू कश्मीर, हिमाचल प्रदेश, उत्तराखंड, बंगाल, तामिलनाडू, केरल, कर्नाटक मुख्य राजमांह उत्पादक राज्य हैं मिट्टी इसे मिट्टी की व्यापक किस्मों जैसे हल्की रेतली से भारी चिकनी मिट्टी में उगाया जा सकता है जल निकास वाली दोमट ज़मीनों में इसकी पैदावार बहुत अच्छी होती है यह नमक वाली मिट्टी के प्रति बहुत संवेदनशील है लगभग 5.5-6 पी एच वाली ज़मीनों में इसकी पैदावार अधिक होती है VL Rajma 125: यह किस्म उत्तराखंड के पहाड़ी इलाकों में समय से बोयी जाती है इसकी फली में 4-5 बीज होते हैं और 100 बीज का भार लगभग 41.38 ग्राम होता है RBL 6: यह किस्म पंजाब में बोयी जाती है इसके बीज हल्के हरे रंग के होते हैं और फली में 6-8 बीज होते हैं दूसरे राज्यों की किस्में इसके इलावा भारत में उगाई जाने वाली प्रसिद्ध किस्में: HUR 15, HUR-137, Amber, Arun, Arka Komal, Arka Suvidha, Pusa Parvathi, Pusa Himalatha, VL Boni 1, Ooty 1आदि ज़मीन की तैयारी मिट्टी के भुरभुरा होने तक खेत की 2-3 बार जोताई करें, खेत को समतल रखें ताकि उसमें पानी ना खड़ा रहे यह फसल जल जमाव के प्रति काफी संवेदनशील होती है आखिरी जोताई के समय, 60-80 क्विंटल प्रति एकड़ रूड़ी की खाद डालें ताकि अच्छी पैदावार मिल सके बिजाई का समय बसंत की ऋतु में राजमांह की बिजाई फरवरी से मार्च और खरीफ की ऋतु में इसकी बिजाई मई से जून के महीने की जाती है पंजाब में कुछ किसान राजमांह की बिजाई जनवरी के आखिरी सप्ताह करते हैं फासला अगेती किस्मों के लिए कतारों में 45-60 सैं.मी. और पौधों में फासला 10-15 सैं.मी. रखें पॉल जैसी किस्मों के लिए पहाड़ी क्षेत्रों में पौधे का फासला 3-4 मीटर प्रति पहाड़ी होना चाहिए बीज की गहराई बीज को 6-7 सैं.मी. गहरा बोयें बिजाई की विधि इसकी बिजाई गड्ढा खोदकर की जाती है समतल क्षेत्रों में बीज पंक्तियों में बोयें जाते हैं और पहाड़ी क्षेत्रों में इसकी खेती बैड बनाकर की जाती है अगेती किस्मों के लिए 30-35 किलोग्राम बीज प्रति एकड़ का प्रयोग करें पॉल किस्मों की बिजाई पहाड़ी क्षेत्रों में 1 मीटर के फासले पर 3-4 पौधे प्रति पहाड़ी पर लगाए जाते हैं बीज की मात्रा 10-12 किलोग्राम प्रति एकड़ प्रयोग की जाती है बीज का उपचार बिजाई से पहले थीरम 4 ग्राम से प्रति किलो बीज का उपचार करें बीजों का छांव में सुखाएं और तुरंत बो दें खरपतवार नियंत्रण फसल के शुरू में नदीनों की रोकथाम जरूरी है इस अवस्था में नदीनों का हमला ना होने दें खादें डालने और सिंचाई करने के साथ ही गोडाई कर दें नदीनों के अंकुरन से पहले फ्लूक्लोरालिन 800 मि.ली. प्रति एकड़ या पैंडीमैथालीन 1 लीटर प्रति एकड़ का प्रयोग करें सिंचाई बीजों के अच्छे अंकुरण के लिए बिजाई से पहले सिंचाई करें फसल की वृद्धि के दौरान 6-7 सिंचाइयों की आवश्यकता होती है बिजाई के बाद 25वें दिन सिंचाई करें और अच्छी उपज प्राप्त करने के लिए 25 दिनों के अंतराल पर 3 सिंचाइयां जरूरी होती हैं फसल के खिलने, फूल निकलने के दौरान और फलियां विकसित होने की अवस्था में सिंचाई करें इन अवस्थाओं पर पानी की कमी ना होने दें फसल की कटाई जब इसकी फलियां पूरी तरह पक जायें और रंग पीला हो जाये तो इसकी तुड़ाई की जा सकती है इसके पत्ते पीले पड़ने के बाद गिरने शुरू हो जाते हैं किस्म के आधार पर इसकी फलियां 7-12 दिनों में पककर तुड़ाई के लिए तैयार हो जाती हैं पूरी फसल 120-130 दिनों में कटाई के लिए तैयार हो जाती हैं कटाई समय से करें काटी हुई फसल 3-4 दिनों के लिए धूप में रखें अच्छी तरह सूखने के बाद बैलों या छड़ों की मदद से छंटाई की जा सकती हैं कटाई के बाद राजमांह को कटाई के बाद कईं कामों के लिए प्रयोग किया जाता है सांभ संभाल के समय इसकी देखभाल जरूरी है राजमांह को स्टोर करने से पहले आकार और क्वालिटी के आधार पर बांटा जाता है गले हुए राजमांह धूप में हल्की गर्मी में रख दिए जाते हैं ताकि उनमें से नमी की मात्रा कम हो जाये इसके लिए हमेशा ठंडी, अंधेरे और सूखी जगह पर रख दिया जाता है

Posted by ਗੁਰਦੀਪ ਸਿੰਘ
Punjab
11-11-2019 02:05 PM
ਗੁਰਦੀਪ ਸਿੰਘ ਜੀ ਇਸ ਵਿੱਚ ਜਿੰਕ ਦੀ ਘਾਟ ਲੱਗ ਰਹੀ ਹੈ ਜੀ
Posted by ramanjit singh
Punjab
11-11-2019 01:52 PM
श्रीमान जी Pyrilla की रोकथाम के लिए आप Dimethoate or Acephate @ 1-1.5 ml प्रति लीटर पानी के हिसाब से स्प्रे करें धन्यवाद

Posted by jagpal singh
Punjab
11-11-2019 01:51 PM
Jagpal ji, kirpa kar ke apna sawal visthar nal pucho ke tuc seb kito mangwa ke business karna yan seb khud lga ke business karna chonde ho, tajo tuhnu is bare puri jankari diti ja sake, dhanwad

Posted by BIJOY
Andaman & Nicobar Islands
11-11-2019 01:48 PM
जलवायु सुपारी की खेती समुद्र तल से 1,000 मीटर की ऊंचाई पर भूमध्य रेखा के 28 डिग्री उत्तर और 28 डिग्री दक्षिण क्षेत्रों के बीच की जाती है, जहां तापमान 15 से 38 डिग्री सेंटीग्रेड रहता है सुपारी की खेती सफलतापूर्वक की जाती है भूमि सुपारी को कई प्रकार की भूमि में उगाया जा सकता है, लेकिन समुद्र के किनारे की भूमि जिसमें सि.... (Read More)
जलवायु सुपारी की खेती समुद्र तल से 1,000 मीटर की ऊंचाई पर भूमध्य रेखा के 28 डिग्री उत्तर और 28 डिग्री दक्षिण क्षेत्रों के बीच की जाती है, जहां तापमान 15 से 38 डिग्री सेंटीग्रेड रहता है सुपारी की खेती सफलतापूर्वक की जाती है भूमि सुपारी को कई प्रकार की भूमि में उगाया जा सकता है, लेकिन समुद्र के किनारे की भूमि जिसमें सिंचाई की सुविधा और जल निकासी की व्यवस्था अच्छी है सुपारी प्रजाति उनमें कई नई किस्मों का चयन किया गया है, जिनमें मंगला, सुमंगला, श्री मंगला और मोहित नगर आदि शामिल हैं काली -17, एक स्थानीय किस्म अंडमान द्वीप समूह में स्थित होने के लिए बहुत उपयुक्त पाई गई है पौध रोपण पौधे लगाने के लिए पहले खेत की जुताई करके सिंचाई तथा जल निकास की नालियां बना ली जाती है खेत का रेखांकन वर्गाकार विधि से जिसमें 2.7 मी० पंक्ति से पंक्ति तथा 2.7 मीटर पौधों से पौधे की दूरी पर पौध लगाने के लिए किया जाता है रेखांकन के बाद 90 घन सेमी० के गड्ढे खोदे जाते हैं और उनमें 15 किलोग्राम सङी कम्पोस्ट या गोबर की खाद और ऊपरी सतह की गड्ढे की खुदी मिट्टी को मिलाकर भर दिया जाता है पौधों का रोपण जून-जुलाई में करना चाहिए नर्सरी में तैयार 12 से 18 महीने पुराने पौधे जिनमें पत्तियां अधिक हो तथा ऊंचाई कम हो, लगाने के लिए अच्छे माने जाते हैं सुपारी के पौधों को मिश्रित फसल के रुप में केला, अनन्नास, कोको आदि फसलों के साथ भी लगाया जाता है पौध प्रसारण सुपारी के पौधे बीज से प्रसारित किये जाते है अच्छी किस्म के रोग रहित तथा फलत वाले पौधों से बीज नट जो पुर्णतय परिपक्व हो, छाँटे जाते है बीज नट बालू की क्यारियों में 5 से 6 से.मी. की दूरी पर बोया जाता है बीज नट को बोने के बाद बालू से ढक दिया जाता है सामान्यत: बीज बोने के बाद 40 दिन में उग आते है तीन महीने तक उगे हुए पौधों को नर्सरी में ही रहने दिया जाता है, इसके बाद उन्हें दूसरी नर्सरी तैयार करके 30 X 30 से.मी. की दूरी पर बरसात में लगा दिया जाता है नर्सरी में पौधे 12 से 18 महीने में अंतिम खेत में लगाने के लिये तैयार हो जातें है

Posted by karanjit singh
Punjab
11-11-2019 01:47 PM
Karanjit ji tusi hun javi la sakde han. Aage rate changa aun di umeed hai. Baki rate demand and supply te jada nirbhar karda hai. Dhanwad.

Posted by Suresh Kumar Yadav
Uttar Pradesh
11-11-2019 01:42 PM
श्री मान WH 896: इस किस्म की सिंचित क्षेत्रों में समय पर बोने के लिए सिफारिश की गई है PBW 373: यह अधिक उपज वाली किस्म है इसकी सिंचित क्षेत्रों में पिछेती बिजाई के लिए सिफारिश की गई है यह किस्म विभिन्न बीमारियों के प्रतिरोधक है PBW 343: यह किस्म सिंचित और पिछेती बिजाई के क्षेत्रों के लिए उपयुक्त है यह किस्म 130-135 दिनों में कट.... (Read More)
श्री मान WH 896: इस किस्म की सिंचित क्षेत्रों में समय पर बोने के लिए सिफारिश की गई है PBW 373: यह अधिक उपज वाली किस्म है इसकी सिंचित क्षेत्रों में पिछेती बिजाई के लिए सिफारिश की गई है यह किस्म विभिन्न बीमारियों के प्रतिरोधक है PBW 343: यह किस्म सिंचित और पिछेती बिजाई के क्षेत्रों के लिए उपयुक्त है यह किस्म 130-135 दिनों में कटाई के लिए तैयार हो जाती है यह गर्दन तोड़, जल जमाव की स्थितियों के प्रतिरोधक किस्म है यह करनाल बंट के भी प्रतिरोधक और झुलस रोग को सहनेयोग्य किस्म है इसकी औसतन पैदावार 19 क्विंटल प्रति एकड़ होती है HD 2643: यह किस्म सिंचित और पिछेती बिजाई के क्षेत्रों के लिए उपयुक्त है इस किस्म से अच्छी गुणवत्ता वाली रोटी बनती है यह पत्ता और धारीदार कुंगी के प्रतिरोधक और करनाल बंट को सहनेयोग्य किस्म है UP 2425: यह सिंचित स्थितियों में पिछेती बिजाई के लिए उपयुक्त किस्म है PBW-443: यह किस्म सिंचित हालातों में समय पर बोने के लिए उपयुक्त किस्म है DBW-14: यह किस्म सिंचित हालातों में पिछेती बिजाई के लिए उपयुक्त है यह जल्दी पकने वाली किस्म है इसके दाने सख्त होते हैं NW-2036: यह सिंचित हालातों में पिछेती बिजाई के लिए उपयुक्त किस्म है यह जल्दी पकने वाली किस्म है दूसरे शब्दों में, यह किस्म 108 दिनों में कटाई के लिए तैयार हो जाती है इसके दाने छोटे, सुनहरी और अर्द्ध सख्त होते हैं MACS-6145: यह किस्म बारानी क्षेत्रों में समय पर बोने के लिए उपयुक्त है HD-2824: यह किस्म सिंचित क्षेत्रों में समय पर बिजाई के लिए उपयुक्त है PBW-502: यह किस्म पंजाब एग्रीकल्चर युनिवर्सिटी द्वारा विकसित की गई है यह किस्म सिंचित हालातों में समय पर बिजाई के लिए उपयुक्त है यह किस्म पत्ते और धारीदार कुंगी के प्रतिरोधक है UP2338 ki beejayi:-पश्चिमी यू पी में, सिंचित और सामान्य बिजाई स्थितियों में 1 नवंबर से 15 नवंबर तक बिजाई पूरी कर लें और पिछेती बिजाई की स्थितियों में 1 से 25 दिसंबर तक बिजाई पूरी कर लें पूर्वी यू पी के लिए, सिंचित और सामान्य बिजाई का उचित समय 1 नवंबर से 15 नवंबर तक है, जबकि पिछेती बिजाई के लिए 1 से 20 दिसंबर का समय उचित है ऊंचे पहाड़ी क्षेत्रों के लिए, सिंचित और सामान्य बिजाई का उचित समय अक्तूबर के दूसरे पखवाड़े से लेकर नवंबर का पहला पखवाड़ा है जबकि पिछेती बिजाई के लिए 1 दिसंबर से 20 दिसंबर का समय उचित है निचले पहाड़ी क्षेत्रों के लिए, सिंचित और सामान्य बिजाई का उचित समय अक्तूबर के आखिरी सप्ताह से लेकर मध्य नवंबर तक का है जबकि पिछेती बिजाई के लिए नवंबर का दूसरा पखवाड़ा उचित समय है PDW-291: यह किस्म सिंचित हालातों में पिछेती बिजाई के लिए उपयुक्त किस्म है यह किस्म कुंगी, करनाल बंट और कांगियारी के प्रतिरोधक किस्म है PBW-524: यह सिंचित हालातों में पिछेती बिजाई के लिए उपयुक्त किस्म है यह किस्म कुंगी, करनाल बंट और कांगियारी के प्रतिरोधक किस्म है HD-2864: यह सिंचित हालातों में समय पर बिजाई के लिए उपयुक्त किस्म है यह किस्म पत्ते और धारीदार कुंगी के प्रतिरोधी और ताप को सहनेयोग्य किस्म है HI-8627: यह किस्म बारानी क्षेत्रों में समय पर बिजाई के लिए उपयुक्त है यह धारीदार कुंगी और पैर गलन के प्रतिरोधक किस्म है Ujiar(K-9006): यह किस्म सिंचित हालातों में समय पर बोने के लिए उपयुक्त है इसके दाने अर्द्ध सख्त और सुनहरी होते हैं यह किस्म करनाल बंट के प्रतिरोधक किस्म है
Posted by Rajinder Singh
Himachal Pradesh
11-11-2019 01:37 PM
Rajinder ji kripya aap apna swal vistar se pushen ki aap kya jankari lena chahthe hai tan jo apko sahi jankari di jaa ske.

Posted by khuspal
Punjab
11-11-2019 01:30 PM
khuspal ji, 1 acre mein makki ka 8-10 kg beej lag jata hai, dhanywad
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