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Posted by Shyam Mohan Singh
Uttar Pradesh
11-11-2019 09:29 PM
Punjab
11-20-2019 03:41 PM
श्रीमान जी, यह फसल कई तरह की मिट्टी जैसे बढ़िया निकास और चिकनी से रेतली मिट्टी जिसमें जैविक तत्व मौजूद हों, में बढ़िया उगाई जाती है परन्तु यह रेतली और बढ़िया निकास वाली मिट्टी में बढ़िया परिणाम देती है बढ़िया परिणाम के लिए काफी मात्रा में रूड़ी की खाद डालें अच्छी खेती के लिए, मिट्टी का pH 6.5 होना चाहिए मोगरा की किस.... (Read More)
श्रीमान जी, यह फसल कई तरह की मिट्टी जैसे बढ़िया निकास और चिकनी से रेतली मिट्टी जिसमें जैविक तत्व मौजूद हों, में बढ़िया उगाई जाती है परन्तु यह रेतली और बढ़िया निकास वाली मिट्टी में बढ़िया परिणाम देती है बढ़िया परिणाम के लिए काफी मात्रा में रूड़ी की खाद डालें अच्छी खेती के लिए, मिट्टी का pH 6.5 होना चाहिए मोगरा की किस्म Double Mogra की बिजाई करें मिट्टी को भुरभुरा करने के लिए, सबसे पहले खेत को नदीन मुक्त करें खेत को नदीन मुक्त करने के लिए एक-दो बार आवश्यक गोड़ाई करें जोताई के बाद, रोपण के एक महीने पहले 30 सैं.मी.3 के गड्डे तैयार करें, और धूप में खुला छोड़ दें खेत की तैयारी के समय, 10 किलो रूड़ी की खाद मिट्टी में मिलाएं जून से नवंबर तक बिजाई की जाती है Mogra के लिए, 75 सैं.मी. x 1 मी. या 1.2 मी x 1.2 मी. या 2 मी. x 2 मी. का फासला रखें इसकी बिजाई 15 सैं.मी. गहराई पर करें इसका प्रजनन पौधे के भाग को काटकर, गाठों, ग्राफ्टिंग, बडिंग और टिशू कल्चर द्वारा किया जाता है प्रत्येक गड्ढे में एक तैयार पौधा लगाएं चमेली के फूल के लिए बीज उपचार की आवश्यकता नहीं होती क्योंकि इसे प्रजनन विधि द्वारा उगाया जाता है अच्छी तरह से तैयार ज़मीन अच्छे जल निकास वाली, उचित सिंचाई की सुविधा और धूप की आवश्यकता होती है रोपाई से एक महीना पहले उचित आकार के 45 सैं.मी. के गड्ढे खोदें और उन्हें कुछ दिनों के लिए धूप में खुला छोड़ दें रोपाई से पहले इन गड्ढों को, एक को रूड़ी की खाद से भर दें और दूसरे को बारीक रेत से भर दें भरने के बाद मिश्रण को अच्छे से मिक्स करने के लिए पानी दें प्रत्येक खड्ढे में एक तैयार पौधा लगाएं आमतौर पर कटाई छंटाई, उचित आकार और अच्छे उत्पादन के लिए जरूरी होती है छंटाई आम तौर पर पिछले सभी मौसमों की पुरानी टहनियों को निकालकर और बीमार, मरी हुई शाखाओं को निकालकर की जाती है छंटाई मुख्य रूप से अच्छी उपज और फूलों की अच्छी गुणवत्ता और मात्रा के लिए नवंबर महीने के आखिरी सप्ताह में की जाती है खेत की तैयारी के समय खादों को नाइट्रोजन के रूप में 60 ग्राम प्रति पौधा, पोटाशियम 120 ग्राम और फासफोरस 120 ग्राम प्रति पौधे में डालें व्यापारिक खेती के लिए इन खादों की खुराक की सिफारिश की गई है खादों को इक्ट्ठा मिलायें और दो बराबर भागों में डालें पहली खुराक जनवरी के महीने में दें और दूसरी खुराक जुलाई के महीने में दें जैविक खादों जैसे मूंगफली केक, नीम केक आदि 100 ग्राम प्रति पौधे में दें फूलों की उपज बढ़ाने के लिए जिंक 0.25 % और मैगनीशियम 0.5 % की स्प्रे करें आयरन की कमी को पूरा करने के लिए फैरस सल्फेट 5 ग्राम प्रति लीटर पानी में मिलाकर महीने के अंतराल पर दें फसल की अच्छी वृद्धि और विकास के लिए गोडाई की आवश्यकता होती है पहली गोडाई रोपाई के 3-4 सप्ताह बाद और प्रत्येक 2-3 महीनों में एक बार लगातार गोडाई करें उचित वृद्धि और फूलों के अच्छे विकास के लिए उचित समय के अंतराल पर सिंचाई करनी आवश्यक है गर्मियों के महीनों में सप्ताह में एक बार ज्यादा सिंचाई दें फूल निकलने के बाद अगली खाद डालने और छंटाई तक सिंचाई की आवश्यकता नहीं होती धन्यवाद
Posted by duje markam
Chattisgarh
11-11-2019 09:21 PM
Punjab
11-20-2019 12:23 PM
श्रीमान जी, पियाज की बिजाई का सही समय अक्तूबर से नवंबर तक का होता है, इसकी रोपाई दिसंबर से जनवरी महीने में की जाती है, धन्यवाद
Posted by Mohan singh
Uttar Pradesh
11-11-2019 09:21 PM
Punjab
11-20-2019 01:47 PM
Mohan ji, kripya ap apna sawal visthar se puche taki apko uska sahi jawab diya ja sake, dhanywad
Posted by ramsahay
Uttar Pradesh
11-11-2019 09:17 PM
Punjab
11-20-2019 12:15 PM
Shrimaan ji, kripya gehun ki kisam ka pura nam bataye taki apko iske bare mein puri jankari di ja sake,dhanywad
Posted by Surjeet singh
Uttar Pradesh
11-11-2019 09:15 PM
Punjab
11-20-2019 12:16 PM
Surjeet ji, kripya ap shimla mirch ki photo bejein taki apko iske bare mein puri jankari di ja ske, dhanywad
Posted by ramsahay
Uttar Pradesh
11-11-2019 09:09 PM
Punjab
11-11-2019 11:49 PM
श्रीमान जी आप गेहूं की किस्में जैसे कि WH 896, PBW 373, PBW 343,HD 2643, UP 2425, PBW 443, DBW 14, NW 2036, MACS 6145, HD 2824, PBW 524, PBW 502, PBW 291, 524, HD 2864, HI 8627, K9001, K-9162, k-8434, halna, naina, UP 2338 की बिजाई कर सकते है
Posted by amarpal singh
Punjab
11-11-2019 09:00 PM
Maharashtra
11-13-2019 03:58 PM
Amarpal singh ji sava 1734 da jhaad 23-24 quintal prati acre de hisaab nal dasea ja reha hai, te ea kanak di variety peeli kungi ate macchr tele di pratirodhak hai dhanwad
Posted by Manit rajpu
Uttar Pradesh
11-11-2019 08:56 PM
Punjab
11-20-2019 12:18 PM
श्रीमान जी, मोटे आलुओं की पैदावार के लिए 13:0:45 की 2 किलो और मैगनीश्यिम ई डी टी ए 100 ग्राम प्रति एकड़ की स्प्रे करें बीमारियों के हमले को रोकने के लिए फंगसनाशी प्रॉपीनेब 3 ग्राम प्रति लीटर पानी डालें आलुओं का आकार और गिणती बढ़ाने के लिए हयूमिक एसिड (12 प्रतिशत) 3 ग्राम + एम ए पी 12:61:0 की 8 ग्राम या डी ए पी 15 ग्राम प्रति लीटर की .... (Read More)
श्रीमान जी, मोटे आलुओं की पैदावार के लिए 13:0:45 की 2 किलो और मैगनीश्यिम ई डी टी ए 100 ग्राम प्रति एकड़ की स्प्रे करें बीमारियों के हमले को रोकने के लिए फंगसनाशी प्रॉपीनेब 3 ग्राम प्रति लीटर पानी डालें आलुओं का आकार और गिणती बढ़ाने के लिए हयूमिक एसिड (12 प्रतिशत) 3 ग्राम + एम ए पी 12:61:0 की 8 ग्राम या डी ए पी 15 ग्राम प्रति लीटर की स्प्रे पौधे की वृद्धि के समय करें धन्यवाद
Posted by Keshav Pathak
Chattisgarh
11-11-2019 08:53 PM
Maharashtra
11-20-2019 02:09 PM
केष्व जी गोबर की खाद के लिए आप गोबर को किसी गड्ढे में डाल कर उसमे आप रसोई का waste भी डाल सकते है और उसे उसे ढक दे लगभग 6 महीने बाद गोबर की खाद त्यार हो जाती है इलावा पाथी उपले को बोला जाता है
Posted by Madhuri Suryawanshi
Madhya Pradesh
11-11-2019 08:52 PM
Rajasthan
11-12-2019 09:01 AM
मोती की खेती एक बहुत ही अच्छा व्यवसाय है इस व्यवसाय को शुरू करने के लिए सबसे जरुरी है इसकी ट्रेनिंग, क्योकि इसमें बहुत सी ऐसी बारीकियें होती है जो हमें प्रेक्टिकल ट्रेनिंग में ही सीखने को मिलती है अगर आप इसकी ट्रेनिंग लेना चाहते है तो आप ग्लिटराटी पर्ल फार्मिंग ट्रेनिंग केंद्र प्रशिक्षण कार्य कर्म आयोजि.... (Read More)
मोती की खेती एक बहुत ही अच्छा व्यवसाय है इस व्यवसाय को शुरू करने के लिए सबसे जरुरी है इसकी ट्रेनिंग, क्योकि इसमें बहुत सी ऐसी बारीकियें होती है जो हमें प्रेक्टिकल ट्रेनिंग में ही सीखने को मिलती है अगर आप इसकी ट्रेनिंग लेना चाहते है तो आप ग्लिटराटी पर्ल फार्मिंग ट्रेनिंग केंद्र प्रशिक्षण कार्य कर्म आयोजित किया जा रहा है प्रशिक्षण कार्य कर्म में भाग लेने के लिए नीचे दिए गए नम्बर पर आज ही संपर्क करें और Rs 250/ से अपना रजिस्ट्रेशन करवाए अचल सिंह (फाउंडर )- 9711858258. धन्यवाद
Posted by Madhuri Suryawanshi
Madhya Pradesh
11-11-2019 08:49 PM
Rajasthan
11-12-2019 09:01 AM
मोती की खेती एक बहुत ही अच्छा व्यवसाय है इस व्यवसाय को शुरू करने के लिए सबसे जरुरी है इसकी ट्रेनिंग, क्योकि इसमें बहुत सी ऐसी बारीकियें होती है जो हमें प्रेक्टिकल ट्रेनिंग में ही सीखने को मिलती है अगर आप इसकी ट्रेनिंग लेना चाहते है तो आप ग्लिटराटी पर्ल फार्मिंग ट्रेनिंग केंद्र प्रशिक्षण कार्य कर्म आयोजि.... (Read More)
मोती की खेती एक बहुत ही अच्छा व्यवसाय है इस व्यवसाय को शुरू करने के लिए सबसे जरुरी है इसकी ट्रेनिंग, क्योकि इसमें बहुत सी ऐसी बारीकियें होती है जो हमें प्रेक्टिकल ट्रेनिंग में ही सीखने को मिलती है अगर आप इसकी ट्रेनिंग लेना चाहते है तो आप ग्लिटराटी पर्ल फार्मिंग ट्रेनिंग केंद्र प्रशिक्षण कार्य कर्म आयोजित किया जा रहा है प्रशिक्षण कार्य कर्म में भाग लेने के लिए नीचे दिए गए नम्बर पर आज ही संपर्क करें और Rs 250/ से अपना रजिस्ट्रेशन करवाए अचल सिंह (फाउंडर )- 9711858258. धन्यवाद
Posted by khuspal
Punjab
11-11-2019 08:29 PM
Punjab
11-20-2019 06:46 PM
Khuspal ji is bare visthar vich jankari lai tusi Japinder Wadhawan 9478810324 nal samparak kar sakde ho, Thankyou.
Posted by Keshav Pathak
Chattisgarh
11-11-2019 08:28 PM
Maharashtra
11-20-2019 02:08 PM
केष्व जी गोबर की खाद के लिए आप गोबर को किसी गड्ढे में डाल कर उसमे आप रसोई का waste भी डाल सकते है और उसे उसे ढक दे लगभग 6 महीने बाद गोबर की खाद त्यार हो जाती है इलावा पाथी उपले को बोला जाता है
Posted by Keshav Pathak
Chattisgarh
11-11-2019 08:25 PM
Haryana
11-19-2019 08:33 PM
जैविक ऑस्टर उगाने के लिए जैविक भूसे की जरूरत होती है
Posted by balgopal
Odisha
11-11-2019 08:25 PM
Punjab
11-20-2019 01:56 PM
shrimaan ji, ap bengan ki jarhon mein dheemk ka hamla check karein, agar dheemak ho to ap isme chlorpyriphos @ 4 ml per liter pani ke hisaab se spray karein, dhanywad
Posted by NAEEM CHOUDHARY
Maharashtra
11-11-2019 08:14 PM
Punjab
11-12-2019 09:05 AM
Naeem ji achi khurak ke sath sirohi bakri 1.5-2 litre tak duudh de deti hai.
Posted by Suraj Kumar Sahu
Chattisgarh
11-11-2019 08:14 PM
Maharashtra
11-13-2019 04:13 PM
इसे मिट्टी की कई किस्मों में उगाया जाता है, लेकिन अंगूर की खेती के लिए उपजाऊ मिट्टी जिसकी पी एच 6.5-8.5 हो, और जल जमाव वाली मिट्टी उपयुक्त होती है किशमिश बनाने के लिए Thompson Seedless, Black Sahebi कच्चा खाने के लिए Thompson Seedless, Beauty Seedless, Black Sahebi, Anab-e-Shahi, जूस बनाने के लिए: Beauty Seedless, Black Prince वाइन बनाने के लिए Rangspray, Cholhu White, Cholhu Red अंगूर की खेती के लिए, अच्छी तरह से .... (Read More)
इसे मिट्टी की कई किस्मों में उगाया जाता है, लेकिन अंगूर की खेती के लिए उपजाऊ मिट्टी जिसकी पी एच 6.5-8.5 हो, और जल जमाव वाली मिट्टी उपयुक्त होती है किशमिश बनाने के लिए Thompson Seedless, Black Sahebi कच्चा खाने के लिए Thompson Seedless, Beauty Seedless, Black Sahebi, Anab-e-Shahi, जूस बनाने के लिए: Beauty Seedless, Black Prince वाइन बनाने के लिए Rangspray, Cholhu White, Cholhu Red अंगूर की खेती के लिए, अच्छी तरह से तैयार ज़मीन की आवश्यकता होती है मिट्टी के भुरभुरा होने तक ट्रैक्टर से 3-4 गहरी जोताई करें और हैरो से 3 जोताई करें गड्ढे भरने के समय, गाय का गोबर @ 50 किलोग्राम, एसएसपी @ 2 किलोग्राम और क्लोरपायरीफोस का मिश्रण मिलाएं इसके अलावा हल्की सिंचाई आवश्यक है नए पौधे अंगूर की मदिरा, कैल्शियम अमोनियम नाइट्रेट (CAN) @ 250gm और MOP @ 250gm को अप्रैल महीने में और फिर जून महीने में लागू करें सूखे क्षेत्रों में CAN @ 1200gm, SSP @ 1500gm और MOP 500 ग्राम पूर्ण विकसित मदिरा के लिए डालें स्टॉम्प @ 800 मिली प्रति एकड़ का प्रयोग पूरी तरह से जोताई के बाद मार्च के पहले पखवाड़े में किया जाता है और फिर Gramoxone 24 WCS (paraquat) या Glycel 41 SL (glyphosate)@1.6 लीटर/एकड़ का छिड़काव किया जाता है उद्भव के बाद जब खरपतवार 15-20 सेंटीमीटर की ऊँचाई को प्राप्त करते हैं मध्य पहाड़ियों में, सिंचाई फरवरी महीने के पहले पखवाड़े और फिर मार्च के पहले सप्ताह में दी जाती है फिर अप्रैल के शुरू से जून के अंत तक फलों के विकास के लिए फिर से सिंचाई दी जाती है कम वर्षा के दौरान सिंचाई आवश्यक है जलवायु के आधार पर शुष्क क्षेत्रों में, सप्ताह में एक बार सिंचाई दी जाती है मुख्य रूप से फरवरी के शुरू से लेकर अंत-अप्रैल तक सिंचाई की जाती है 18o ब्रिक्स वाले पके गुच्छों की कटाई की जाती है यह बीज रहित किस्मों के लिए औसतन 8-12.5 टन/ एकड़ और बीज वाली किस्मों के लिए 15-20 टन/एकड़ की उपज देता है
Posted by khuspal
Punjab
11-11-2019 08:11 PM
Punjab
11-20-2019 05:19 PM
Khuspal ji PM Tractor yojana bare puri jankari lai tusi apne nazdiki SBI Bank nal samparak kar sakde ho, Thankyou.
Posted by guri warring
Punjab
11-11-2019 08:02 PM
Rajasthan
11-12-2019 09:06 AM
ਵੈਸੇ ਤਾਂ ਬਾਜ਼ਾਰ ਵਿਚ ਬਹੁਤ ਸਾਰੀਆਂ ਕੰਪਨੀਆਂ ਦੀਆ ਫ਼ੀਡਜ ਆਉਂਦੀਆਂ ਹੈ ਜੋ ਕਿ ਕੰਪਨੀ ਵਾਲੇ ਆਪਣੇ ਹਿਸਾਬ ਨਾਲ ਤਿਆਰ ਕਰਕੇ ਦਿੰਦੇ ਹੈ, ਜੋ ਤੁਹਾਡਾ ਪਸ਼ੂ ਆਸਾਨੀ ਨਾਲ ਖਾਂਦਾ ਹੈ ਤੁਸੀ ਓਹੀ ਫੀਡ ਦੇ ਸਕਦੇ ਹੋ ਜੇਕਰ ਤੁਸੀ ਖੁਦ ਤਿਆਰ ਕਰਕੇ ਦੇਣਾ ਚਾਉਂਦੇ ਹੋ ਤਾਂ ਤੁਸੀ ਇਸ ਤਰੀਕੇ ਨਾਲ ਤਿਆਰ ਕਰਕੇ ਦੇ ਸਕਦੇ ਹੋ ਜਿਸ ਵਿਚ ਸਾਰੇ ਜਰੂਰੀ ਤੱਤ ਹੁੰਦੇ ਹੈ ਇਹ ਫੀਡ ਥੋੜੀ ਮਹਿੰਗੀ ਹੁੰਦੀ ਹੈ ਪ.... (Read More)
ਵੈਸੇ ਤਾਂ ਬਾਜ਼ਾਰ ਵਿਚ ਬਹੁਤ ਸਾਰੀਆਂ ਕੰਪਨੀਆਂ ਦੀਆ ਫ਼ੀਡਜ ਆਉਂਦੀਆਂ ਹੈ ਜੋ ਕਿ ਕੰਪਨੀ ਵਾਲੇ ਆਪਣੇ ਹਿਸਾਬ ਨਾਲ ਤਿਆਰ ਕਰਕੇ ਦਿੰਦੇ ਹੈ, ਜੋ ਤੁਹਾਡਾ ਪਸ਼ੂ ਆਸਾਨੀ ਨਾਲ ਖਾਂਦਾ ਹੈ ਤੁਸੀ ਓਹੀ ਫੀਡ ਦੇ ਸਕਦੇ ਹੋ ਜੇਕਰ ਤੁਸੀ ਖੁਦ ਤਿਆਰ ਕਰਕੇ ਦੇਣਾ ਚਾਉਂਦੇ ਹੋ ਤਾਂ ਤੁਸੀ ਇਸ ਤਰੀਕੇ ਨਾਲ ਤਿਆਰ ਕਰਕੇ ਦੇ ਸਕਦੇ ਹੋ ਜਿਸ ਵਿਚ ਸਾਰੇ ਜਰੂਰੀ ਤੱਤ ਹੁੰਦੇ ਹੈ ਇਹ ਫੀਡ ਥੋੜੀ ਮਹਿੰਗੀ ਹੁੰਦੀ ਹੈ ਪਰ ਇਸ ਨਾਲ ਪਸ਼ੂ ਨੂੰ ਫਾਇਦਾ ਬਹੁਤ ਹੁੰਦਾ ਹੈ , ਬਾਕੀ ਜੇਕਰ ਤੁਸੀ ਜ਼ਿਆਦਾ ਮਹਿੰਗੀ ਫੀਡ ਨਹੀਂ ਵਰਤਣਾ ਚਾਉਂਦੇ ਤਾਂ ਤੁਸੀ ਬਜ਼ਾਰ ਚੋ ਕਿਸੀ ਵੀ ਕੰਪਨੀ ਦੀ ਫੀਡ ਦੇ ਸਕਦੇ ਹੋ , ਉਸ ਨਾਲ ਵੀ ਪਸ਼ੂ ਤੋਂ ਦੁੱਧ ਲਿਆ ਜਾ ਸਕਦਾ ਹੈ , ਸੰਤੁਲਿਤ ਖੁਰਾਕ 100 ਕਿਲੋ ਬਣਾਉਣ ਲਈ ਲੋੜੀਂਦੀ ਸਮੱਗਰੀ ਚਾਹੀਦੀ ਹੈ ਜਿਵੇਂ 25 ਕਿਲੋ ਅਨਾਜ ( ਜਵਾਰ, ਬਾਜਰੀ (ਸਰਦੀਆਂ) , ਕਣਕ, ਜੌਂ ( ਗਰਮੀਆ) ਇਹਨਾਂ ਵਿੱਚੋ ਕੋਈ ਇੱਕ ) , ਦਾਲ ਚੂਰੀ 20 ਕਿਲੋ( ਮੂੰਗੀ ਚੂਰੀ, ਮਾਂਹ ਚੂਰੀ, ਮੋਠ ਚੂਰੀ ( ਕੇਵਲ ਸਰਦੀਆਂ ਲਈ) , ਮਸੁਰ ਚੂਰੀ ,ਅਰਹਰ, (ਇਨਾਂ ਵਿੱਚੋ ਇੱਕ ) , DOC 25 ਕਿਲੋ ( ਚੌਲਾਂ ਦਾ ਚੂਰਾ ) , ਫਾਈਬਰ ਛਿਲਕਾ 15 ਕਿਲੋ (ਕਣਕ, ਚੌਕਰ, ਚਨਾ ਛਿਲਕਾ, ਮਟਰ ਛਿਲਕਾ, ਇਨਾਂ ਵਿੱਚੋ ਇੱਕ) , ਖਲ਼ 15 ਕਿਲੋ(ਸਰੋਂ, ਬਿਨੌਲਾ ਜਾਂ ਸੋਇਆ (ਇਹਨਾਂ ਵਿੱਚੋ ਕੋਈ ਇੱਕ) , ਮਿੱਠਾ ਸੋਡਾ 250 ਗ੍ਰਾਮ, 1 ਕਿਲੋ ਨਮਕ, ਗੁੜ 1 ਕਿਲੋ, 1 ਕਿੱਲੋ ਹਲਦੀ (ਸਰਦੀਆ ਵਿੱਚ ) ਇਹ ਨੂੰ ਰਲਾ ਲਵੋ ਇਹ ਫੀਡ ਪਸ਼ੂ ਲਈ ਬਹੁਤ ਲਾਹੇਵੰਦ ਹੁੰਦੀ ਹੈ
Posted by khuspal
Punjab
11-11-2019 08:00 PM
Punjab
11-20-2019 01:59 PM
Khuspal ji, patthiya di spray fasal de vikaas vich madad kardi hai, ate ea kise vi fasal te kiti ja sakdi hai, dhanwadc
Posted by Sunny Jassi
Punjab
11-11-2019 07:59 PM
Punjab
11-20-2019 01:51 PM
Sunny ji , PBW 373 picheti bijai di ik kisma hai, isdi bijai da sama 15 november to leke 15 december tak da hunda hai, dhanwad
Posted by khuspal
Punjab
11-11-2019 07:57 PM
Punjab
11-20-2019 02:36 PM
Khushpal ji, dakar dharti vich kuch alag to pon di lorh nhai hundi , jo khadaan di sifarish fasal de hisaab nal kiti jandi hai bs ohi paiyan jandiyan han, dhanwad
Posted by Al faruk Ahmed
Assam
11-11-2019 07:37 PM
Punjab
11-11-2019 08:09 PM
अहमद जी कृपया आप अपना सवाल विस्तार से पूछें कि आप क्या जानकारी लेना चाहते है ताकि आपको सही जानकारी दी जा सके
Posted by Munesh Raghav
Uttar Pradesh
11-11-2019 07:33 PM
Punjab
12-05-2019 04:34 PM
किसान यन्त्रों के लिए आप अपने ज़िले के कृषि विकास अफसर से संपर्क करे जी वह आपको गाइड कर सकते हो जी
Posted by Neetesh Rawat
Madhya Pradesh
11-11-2019 07:31 PM
Punjab
11-12-2019 09:08 AM
छोटे बच्चों को 5 दिन के होने पर lasota vaccination करवायें ​फिर 12 दिन के होने पर Gamboro , 26 दिन के होने पर फिर gamboro और 28—29 दिन के होने पर फिर lasota से वैक्सीनेशन करवायें इस तरह आप शुरू से वैक्सीनेशन करवा सकते हैं
Posted by kulvir singh
Punjab
11-11-2019 07:30 PM
Punjab
11-11-2019 11:50 PM
कुलवीर जी कृपया आप अपना सवाल विस्तार से पूछें ताकि आपको सही जानकारी दी जा सके
Posted by धारा सिंह रावत
Madhya Pradesh
11-11-2019 07:28 PM
Maharashtra
11-13-2019 04:10 PM
अदरक भारत की एक अहम मसाले वाली फसल है यह फसल अच्छे जल निकास वाली चिकनी, रेतली और लाल हर तरह की मिट्टी में उगाई जा सकती है खेत में पानी ना खड़ा होने दें क्योंकि खड़े पानी में यह ज्यादा देर बच नहीं पाएगी फसल की वृद्धि के लिए 6-6.5 पी एच वाली मिट्टी अच्छी मानी जाती है उस खेत में अदरक की फसल ना उगाएं जहां पिछली बार अदरक की.... (Read More)
अदरक भारत की एक अहम मसाले वाली फसल है यह फसल अच्छे जल निकास वाली चिकनी, रेतली और लाल हर तरह की मिट्टी में उगाई जा सकती है खेत में पानी ना खड़ा होने दें क्योंकि खड़े पानी में यह ज्यादा देर बच नहीं पाएगी फसल की वृद्धि के लिए 6-6.5 पी एच वाली मिट्टी अच्छी मानी जाती है उस खेत में अदरक की फसल ना उगाएं जहां पिछली बार अदरक की फसल उगाई गई हो हर साल एक ही ज़मीन पर अदरक की फसल ना लगाएं प्रसिद्ध किस्में :-Himgiri, IISR Varanda, IISR Mahima,Suprabha, Suruchi, IISR Rejatha खेत को दो तीन बार जोतें और सुहागे से समतल करें अदरक की बिजाई के लिए आवश्यक लंबाई के 15 सैं.मी. ऊंचे और 1 मीटर चौड़े बैड तैयार करें दो बैडों के बीच 50 सैं.मी. का फासला रखें नदीनों कीटों और बीमारियों की जांच के लिए बैड की मिट्टी को धूप लगवायें इसके लिए बैड को पॉलीथीन शीट से 20-30 दिनों के लिए ढकें रोपाई के समय नीम केक 25 ग्राम को प्रति गड्ढे में डालें और मिट्टी में अच्छी तरह मिलायें अच्छी उपज प्राप्त करने के लिए राइज़ोम की बिजाई मई के पहले सप्ताह में पूरी कर लें राइज़ोम को कतारों में बोयें और कतार में 40-45 सैं.मी. और दो पौधों में 30 सैं.मी. फासला रखें राइज़ोम की रोपाई के बाद खेत में 50 क्विंटल हरे पत्तों की मलचिंग प्रति एकड़ में करें दूसरी मलचिंग 20 क्विंटल हरे पत्तों के साथ 40 दिनों के बाद करें बीज की गहराई 3-4 सैं.मी. के करीब होनी चाहिए अदरक की बिजाई सीधे ढंग से और पनीरी लगाकर की जा सकती है बिजाई के लिए ताजे और बीमारी रहित गांठों का प्रयोग करें बिजाई के लिए 5-6.5 क्विंटल प्रति एकड़ बीज का प्रयोग करें बिजाई से पहले गांठों को मैनकोजेब 3 ग्राम प्रति लीटर पानी से उपचार करें गांठों को 30 मिनट के लिए घोल में भिगो दें इससे गांठों को फफूंदी से बचाया जा सकता है उपचार के बाद गांठों को 3-4 घंटें के लिए छांव में सुखाएं खेत की तैयारी के समय 60 क्विंटल रूड़ी की खाद प्रति एकड़ मिट्टी में डालें नाइट्रोजन 24 किलो (52 किलो यूरिया), फासफोरस 20 किलो (125 किलो सिंगल सुपर फासफेट) और पोटाश 20 किलो (35 किलो म्यूरेट ऑफ पोटाश) की मात्रा प्रति एकड़ में प्रयोग करें रूड़ी की खाद या गाय का गोबर 60 क्विंटल प्रति एकड़ में डालें पोटाश और फासफोरस की पूरी मात्रा बिजाई के समय डालें नाइट्रोजन की दूसरी मात्रा 20 किलो (45 किलो यूरिया) बिजाई के 45 दिनों के बाद, जबकि बिजाई के 120 दिनों के बाद नाइट्रोजन की तीसरी मात्रा 16 किलो (यूरिया 35 किलो) डालें रोपाई के बाद पहली सिंचाई करें इसे बारानी फसल के तौर पर उगाया जाता है इसलिए बारिश की तीव्रता और नियमितता के आधार पर सिंचाई करें बारिश की अनुपस्थिति में, बाकी की सिंचाई 10 दिनों के अंतराल पर करें अदरक की पूरी फसल को कुल 16-18 सिंचाइयों की आवश्यकता होती है बिजाई के 3 दिन बाद एट्राज़िन 4-5 ग्राम प्रति लीटर पानी की नमी वाली मिट्टी पर स्प्रे करें उन नदीनों को खत्म करने के लिए जो पहली नदीन नाशक स्प्रे के बाद पैदा होते हैं, बिजाई के 12-15 दिनों के बाद गलाइफोसेट 4-5 ग्राम प्रति लीटर पानी की स्प्रे करें नदीन नाशक की स्प्रे करने के बाद खेत को हरी खाद से या धान की पराली से ढक दें जड़ों के विकास के लिए जड़ों में मिट्टी लगाएं बिजाई के 50-60 दिनों के बाद पहली बार जड़ों में मिट्टी लगाएं और उसके 40 दिन बाद दोबारा मिट्टी लगाएं
Posted by Shivam kumar
Uttar Pradesh
11-11-2019 07:25 PM
Punjab
11-11-2019 11:25 PM
शिवम जी आप tebuconzole का प्रयोग बीज सोध के लिए कर सकते है इसकी 1.5—1.88 ग्राम को प्रति किलो बीज के हिसाब से सोध कर प्रयोग कर सकते है धन्यवाद
Posted by Vishal Mahajan
Madhya Pradesh
11-11-2019 07:24 PM
Punjab
11-11-2019 11:27 PM
विशाल जी मक्की की बिजाई का सही समय मध्य अक्तूबर से नवंबर तक होता है तो आप अब इसकी बिजाई कर सकते है
Posted by ਗੁਰਵਿੰਦਰ ਸਿੰਘ ਲਖਣਪਾਲ
Punjab
11-11-2019 07:15 PM
Punjab
11-11-2019 07:57 PM
sir cow nu pet de keria Di medisan fantas 3 deo,hara chara 35 40 kg Cargill feed 3 4 kg 2 kg Dalia, pharik pay u ga
Posted by khuspal
Punjab
11-11-2019 07:11 PM
Punjab
11-11-2019 11:29 PM
खुशपाल जी एचडी 3226 का बीज लेने के लिए आप बराड़ बीज स्टोर से संपक्र 8068211817, 9814097127 कर सकते है
Posted by Jarnail Singh Dandiwall
Punjab
11-11-2019 07:07 PM
Punjab
11-13-2019 05:43 PM
ਹਲਦੀ ਦੀ ਬਿਜਾਈ ਅਪ੍ਰੈਲ ਤੋਂ 30 ਮਈ ਤੱਕ ਹੁੰਦੀ ਹੈ ਜੀ
Posted by sunil kumar
Bihar
11-11-2019 07:04 PM
Maharashtra
11-19-2019 04:15 PM
sunil kumar ji aapne jo photo upload kari hai woh sahi show nai ho rahi hai ji. kirpeya dobara photo upload kare or detail me question puche ji.
Posted by Keshav Pathak
Chattisgarh
11-11-2019 06:56 PM
Maharashtra
11-20-2019 02:06 PM
केष्व जी गोबर की खाद के लिए आप गोबर को किसी गड्ढे में डाल कर उसमे आप रसोई का waste भी डाल सकते है और उसे उसे ढक दे लगभग 6 महीने बाद गोबर की खाद त्यार हो जाती है इलावा पाथी उपले को बोला जाता है
Posted by ਸਰਬਜੋਤ ਸਿੰਘ ਚੀਮਾਂ
Punjab
11-11-2019 06:30 PM
Punjab
11-11-2019 06:49 PM
ਸਰਬਜੋਤ ਸਿੰਘ ਚੀਮਾਂ ਜੀ ਜੇਕਰ ਤੁਹਾਨੂੰ 24 ਘੰਟਿਆ ਵਿੱਚ ਜਵਾਬ ਨਹੀ ਮਿਲਿਆ ਤਾਂ ਤੁਸੀ ਸਾਡੇ ਹੈਲਪਲਾਈਨ ਨੰਬਰ 9779977641 ਤੇ ਕਾਲ ਕਰ ਸਕਦੇ ਹੋ , ਕਈ ਵਾਰ ਕੁੱਝ ਟੈਕਨੀਕਲ ਕਾਰਨਾ ਕਰਕੇ ਜੁਆਬ ਵਿੱਚ ਦੇਰੀ ਹੋ ਸਕਦੀ ਹੈ ਜੀ
Posted by amit pandey
Uttar Pradesh
11-11-2019 06:22 PM
Punjab
11-11-2019 06:48 PM
bhai sahib har 3 mahine baad pet ke kirhe nikalne ki dwaee deo
Posted by Rakesh Suryawanshi
Madhya Pradesh
11-11-2019 06:13 PM
Maharashtra
11-14-2019 01:35 PM
इसे भारत की मिट्टी की कई किस्मों में उगाया जा सकता है गेहूं की खेती के लिए चिकनी दोमट या दोमट बनतर, अच्छे ढांचे और पानी सोखने की सामान्य क्षमता वाली मिट्टी उचित होती है छिद्रित और पानी कम सोखने वाली मिट्टी गेहूं की खेती के लिए उपयुक्त नहीं होती सूखे हालातों, अच्छे जल निकास वाली भारी मिट्टी इसकी खेती के लिए अ.... (Read More)
इसे भारत की मिट्टी की कई किस्मों में उगाया जा सकता है गेहूं की खेती के लिए चिकनी दोमट या दोमट बनतर, अच्छे ढांचे और पानी सोखने की सामान्य क्षमता वाली मिट्टी उचित होती है छिद्रित और पानी कम सोखने वाली मिट्टी गेहूं की खेती के लिए उपयुक्त नहीं होती सूखे हालातों, अच्छे जल निकास वाली भारी मिट्टी इसकी खेती के लिए अनुकूल होती है भारी मिट्टी जिसका घटिया ढांचा और घटिया जल निकास हो इसकी खेती के लिए उपयुक्त नहीं होती क्योंकि गेहूं की फसल जल जमाव के प्रति संवेदनशील होती है इसकी किस्मे जैसे के Raj 1482, PBW 502, PBW 550, HD 2697, Raj 6560, Raj 3077, Raj 4079, Raj 4037, Raj 4120, DBW 17, Raj 4238, WH 1080, PBW 175, CCNNRVOI (Raj Molya Rodhak-1 पिछेती बिजाई की किस्में Raj 3765, Raj 3777 रेतली मिट्टी वाली किस्में : इन किस्मों की वृद्धि के लिए कम पानी की आवश्यकता होती है C 306, P.B.W. 299 क्षारीय मिट्टी की किस्में : क्षारीय क्षेत्रों में Raj 3077, K.R.L 1-4 और WH 157 जैसी किस्मों का प्रयोग करें, ये अच्छी उपज देती हैं गेहूं की फसल को अच्छे अंकुरन के लिए अच्छी तरह से तैयार, पर ठोस बीज बैड की आवश्यकता होती है पिछली फसल की कटाई के बाद खेत की अच्छे तरीके से ट्रैक्टर की मदद से जोताई की जानी चाहिए खेत को आमतौर पर ट्रैक्टर के साथ तवियां जोड़कर जोता जाता है और उसके बाद दो या तीन बार हल या सुहागे से जोता जाता है बारानी क्षेत्रों में खेत इस तरह से तैयार करना चाहिए कि वह नमी को सोख सके खेत की एक बार आयरन के हल से गहरी जोताई या सामान्य हल से दो या तीन बार जोताई करें और सुहागा फेरें खेत की जोताई शाम के समय की जानी चाहिए और रोपाई की गई ज़मीन को पूरी रात खुला छोड़ देना चाहिए ताकि वह ओस की बूंदों से नमी सोख सके प्रत्येक जोताई के बाद सुहागा फेरना चाहिए आखिरी जोताई के समय यूरिया 35-40 किलो प्रति एकड़ में डालें इससे गेहूं की अंकुरन प्रतिशतता में वृद्धि होती है अज़ोटोबैक्टर 2.5 किलो + फास्फेटिक 2.5 किलो + ट्राइकोडरमा 2.5 किलो को 100 किलो-125 किलो रूड़ी की खाद या गाय के गले हुए गोबर में मिलाकर आखिरी जोताई के समय खिलार दें गेहूं की बिजाई सही समय पर करनी जरूरी है बारानी क्षेत्रों के लिए बिजाई नवंबर के पहले से तीसरे सप्ताह में पूरी कर लें, जबकि सिंचित क्षेत्रों में बिजाई अक्तूबर से 15 नवंबर तक पूरी कर लें सामान्य बिजाई के लिए कतारों में 20 सैं.मी. के फासले की सलाह दी जाती है यदि बिजाई देरी से करनी हो तो 18 सैं.मी. का फासला होना चाहिए 4-5 सैं.मी. की गहराई में बिजाई करनी चाहिए बिजाई का ढंग : बीज ड्रिल, बुरकाव विधि , जीरो टिलेज़ ड्रिल, रोटावेटरबीज की मात्रा बिजाई के लिए 40 किलो बीज प्रति एकड़ में प्रयोग करें हल्की मिट्टी : यदि बिजाई देरी से की जाये तो नवंबर के आखिरी सप्ताह से दिसंबर के दूसरे सप्ताह तक बिजाई 50 किलो बीज प्रति एकड़ में प्रयोग करके पूरी कर लें देरी से बिजाई के लिए कम समय की किस्मों का प्रयोग करें भारी मिट्टी : सामान्य स्थितियों में बिजाई नवंबर केपहले से तीसरे सप्ताह में पूरी कर लें, जब कि सिंचित हालातों में दिसंबर महीने में बिजाई पूरी कर लें बीज की मात्रा 50 किलोग्राम प्रति एकड़ में रखें बीज का उपचार : बीजों को दीमक, फफूंद, झुलस रोग जैसे बीमारियों से बचाने के लिए बीजने से 24 घंटे पहले एक किलो बीजों का 4 मि.ली. क्लोरपाइरीफॉस या 1.5 - 1.87 ग्राम टेबुकोनाज़ोल 2 डी.एस या 2 ग्राम कार्बेनडाज़िम या थीरम मिलानी चाहिए रासायनिक उपचार के बाद बीजों को टी विराइड 1.15 प्रतिशत डब्लयु पी 4 ग्राम से प्रति किलो बीजों का उपचार करें IPM में टी विराइड 4 ग्राम + कार्बोक्सिन 75 डब्लयु पी 1.25 ग्राम या टैबुकोनाज़ोल 1.0 ग्राम से प्रति किलो बीजों का उपचार झूठी कांगियारी को रोकने के लिए किया जाता है उसके बाद दीमक से बचाव के लिए बिजाई से 15 दिनों के बाद मिट्टी का क्लोरोपाइरीफोस 1 लीटर को प्रति एकड़ में बुरकाव करके उपचार करें मिट्टी की जांच के आधार पर खादों का प्रयोग करें मिट्टी की जांच की मदद से हम खादों को मिट्टी की आवश्यकता के आधार पर दे सकते हैं गेहूं की समय पर बिजाई के लिए नाइट्रोजन 37-50 किलो (यूरिया 80-100 किलो), फासफोरस 8-15 किलो (एस एस पी 50-90 किलो) और पोटाश 12.5 किलो (म्यूरेट ऑफ पोटाश 20 किलो) प्रति एकड़ में डालें नाइट्रोजन की आधी मात्रा, पोटाश और फासफोरस की पूरी मात्रा बिजाई के समय डालें पहली सिंचाई के बाद नाइट्रोजन की बाकी बची आधी मात्रा डाल दें पहली सिंचाई बिजाई के 20-25 दिनों के बाद करनी चाहिए यह अवस्था जड़ गलन और नमी तनाव का समय होता है जिसके कारण उपज में कमी होती है दूसरी सिंचाई बिजाई के 40-45 दिनों के बाद पौधा बाहर निकलने के समय करनी चाहिए तीसरी सिंचाई 70-75 दिनों के बाद तना बनने के समय करनी चाहिए चौथी सिंचाई 90-95 दिनों के बाद फूल बनने के समय करनी चाहिए पांचवी सिंचाई 110-115 दिनों के बाद दूधिया अवस्था में करनी चाहिए रासायनिक नदीन रोकथाम : इसमें कम मेहनत और हाथों से नदीनों को उखाड़ने से होने वाली हानि ना होने कारण ज्यादातर यह तरीका ही अपनाया जाता है नुकसान से बचने के लिए पैंडीमैथालीन स्टांप (30 ई.सी.) 1 लीटर को 500 लीटर पानी के घोल में मिलाके बीजने के 0-3 दिनों के अंदर अंदर छिड़काव करना चाहिए चौड़े पत्तों वाले नदीनों की रोकथाम के लिए 2,4-डी 250 मि.ली. को 150 लीटर पानी में घोलकर प्रयोग करें उच्च पैदावार वाली फसलों की किस्मों की कटाई पत्तों और तने के पीले पड़ने और सूखने के बाद की जाती है हानि से बचने के लिए फसल की कटाई इसके पके हुए बूटों के सूखने से पहले की जानी चाहिए ग्राहक की तरफ से इसे स्वीकारने और इसकी अच्छी गुण्वत्ता के लिए इसको सही समय पर काटना चाहिए जब दानों में 25-30 प्रतिशत नमी रह जाती है तो यह इसे काटने का सही समय होता है हाथ से गेहूं काटने के समय तेज धार वाली द्राती का प्रयोग करना चाहिए कटाई के लिए कंबाइने भी उपलब्ध हैं, जिनकी सहायता से गेहूं की फसल की कटाई, दाने निकालना और छंटाई एक ही बार में की जा सकती है धन्यवाद
Posted by Vijay Thakur
Punjab
11-11-2019 06:12 PM
Punjab
11-12-2019 08:39 AM
श्रीमान जी एचडी 3226 नर्ई किस्म है जिसकी औसतन उपज 22—30 क्विंटल प्रति एकड़ है इसकी बिजाई 25 अक्तूबर से 30 नवंबर तक 35 किलो बीज डाल सकते है इसका पौधा मोटा होने के कारण ये गिरती नहीं है इसकी औसतन लंबाई 105 सैं.मी. होती है किस्म सुपर 272, 120—125 दिनों में तैयार हो जाती है इसकी औसतन लंबाई 95 सैं.मी., इसकी औसतन उपज 26 क्विंटल प्रति एकड़ .... (Read More)
श्रीमान जी एचडी 3226 नर्ई किस्म है जिसकी औसतन उपज 22—30 क्विंटल प्रति एकड़ है इसकी बिजाई 25 अक्तूबर से 30 नवंबर तक 35 किलो बीज डाल सकते है इसका पौधा मोटा होने के कारण ये गिरती नहीं है इसकी औसतन लंबाई 105 सैं.मी. होती है किस्म सुपर 272, 120—125 दिनों में तैयार हो जाती है इसकी औसतन लंबाई 95 सैं.मी., इसकी औसतन उपज 26 क्विंटल प्रति एकड़ भारी ज़मीन में नवंबर के चौथे सप्ताह तक बिजाई कर सकते है
Posted by khuspal
Punjab
11-11-2019 06:09 PM
Punjab
02-22-2020 12:44 PM
ਹਾਜੀ ਸਤਿ ਸ਼੍ਰੀ ਅਕਾਲ ਜੀ ਤੁਹਾਡੇ ਵੱਲੋਂ ਪੁੱਛੇ ਸਾਰੇ ਸਵਾਲਾਂ ਦਾ ਜਵਾਬ ਦਾ ਦਿੱਤਾ ਜਾ ਚੁੱਕਿਆ ਹੈ ਤੁਸੀ ਆਪਣੇ ਸਵਾਲਾਂ ਦੇ ਜਵਾਬ ਦੇਖਣ ਲਈ ਐਪ ਵਿੱਚ ਮੇਰੇ ਸਵਾਲ ਤੇ ਕਲਿੱਕ ਕਰਕੇ ਜਾਂ ਫਿਰ ਮੇਰੀ ਪ੍ਰੋਫਾਈਲ ਦੇ ਹੇਠਾ ਆਪਣੇ ਸਵਾਲ ਜਵਾਬ ਦੇਖ ਸਕਦੇ ਹੋ ਵੀ ਜੇਕਰ ਤੁਹਾਨੂੰ ਜਵਾਬ ਸਬੰਧੀ ਕਿਸੇ ਤਰਾਂ ਦੀ ਸਮੱਸਿਆ ਆ ਰਹੀ ਹੈ ਤਾਂ ਤੁਸੀ ਸਾਡੇ ਹੈਲਪਲਾਈਨ ਨੰਬਰ: 97799-77641 ਤੇ ਕਾਲ ਕਰ ਸਕਦੇ .... (Read More)
ਹਾਜੀ ਸਤਿ ਸ਼੍ਰੀ ਅਕਾਲ ਜੀ ਤੁਹਾਡੇ ਵੱਲੋਂ ਪੁੱਛੇ ਸਾਰੇ ਸਵਾਲਾਂ ਦਾ ਜਵਾਬ ਦਾ ਦਿੱਤਾ ਜਾ ਚੁੱਕਿਆ ਹੈ ਤੁਸੀ ਆਪਣੇ ਸਵਾਲਾਂ ਦੇ ਜਵਾਬ ਦੇਖਣ ਲਈ ਐਪ ਵਿੱਚ ਮੇਰੇ ਸਵਾਲ ਤੇ ਕਲਿੱਕ ਕਰਕੇ ਜਾਂ ਫਿਰ ਮੇਰੀ ਪ੍ਰੋਫਾਈਲ ਦੇ ਹੇਠਾ ਆਪਣੇ ਸਵਾਲ ਜਵਾਬ ਦੇਖ ਸਕਦੇ ਹੋ ਵੀ ਜੇਕਰ ਤੁਹਾਨੂੰ ਜਵਾਬ ਸਬੰਧੀ ਕਿਸੇ ਤਰਾਂ ਦੀ ਸਮੱਸਿਆ ਆ ਰਹੀ ਹੈ ਤਾਂ ਤੁਸੀ ਸਾਡੇ ਹੈਲਪਲਾਈਨ ਨੰਬਰ: 97799-77641 ਤੇ ਕਾਲ ਕਰ ਸਕਦੇ ਹੋਂ
Posted by prabhjot singh
Punjab
11-11-2019 06:09 PM
Punjab
11-11-2019 06:49 PM
BhaaG har 3 mahine baad malap rehat karna zaruri hai
Posted by prabhjot singh
Punjab
11-11-2019 06:07 PM
Punjab
11-11-2019 06:50 PM
BhaaG rajwa hara chaara te har 3kg dudh lai 1kg feed pao 1kg kanak da dalia 500g gur ch rinh ke swer te itna hi shaam nu 7din khuao
Posted by junun Baral
Odisha
11-11-2019 06:07 PM
Madhya Pradesh
11-12-2019 10:30 AM
https://youtu.be/g4wqW8anr1g EARN 4-5 LAKH BY HOME ROOF COURT YARD OPEN LAND BALCONY बमोरिया मोती सम्बर्धन केंद्र ( भारत का एक मात्र प्रशिक्षण केंद्र जहां देश विदेश से आते है लोग ) सुक्ष्म लघु मध्यम उद्यम भारत सरकार द्वारा पंजीकृत कृषि मंत्री जी एवं मुख्या मंत्री जी द्वारा पुरुष्कृत दैनिक भास्कर , राजिस्थान पत्रिका , सहारा समय ,बंसल NEWS आदि न्यूज़.... (Read More)
https://youtu.be/g4wqW8anr1g EARN 4-5 LAKH BY HOME ROOF COURT YARD OPEN LAND BALCONY बमोरिया मोती सम्बर्धन केंद्र ( भारत का एक मात्र प्रशिक्षण केंद्र जहां देश विदेश से आते है लोग ) सुक्ष्म लघु मध्यम उद्यम भारत सरकार द्वारा पंजीकृत कृषि मंत्री जी एवं मुख्या मंत्री जी द्वारा पुरुष्कृत दैनिक भास्कर , राजिस्थान पत्रिका , सहारा समय ,बंसल NEWS आदि न्यूज़ चैनल द्वारा सत्यापित मोती पालन से लाखो कैसे कमाए अब घर बैठे सीखे WHATAPP FOR ONLINE TRAINING 9770085381 ( TEXT - ONLINE TRAINING ) अगला प्रशिक्षण 23-24 NOV सीट बुक करने के लिए भी उपरोक्त न. पर करे ऑनलाइन ट्रेनिंग फीस 2500/- ( PROTECT PEN DRIVE WITH ALL VIDEO * PEARL FARMING BOOK IN HINDI * SEED AND OTHER* MATERIAL LIFE TIME SUPPORT HOW TO EARN 1 LAKH WITH BAMORIYA FARM CONCEPT ) OFFLINE TRAINING FEE 6000/-
Posted by prabhjot singh
Punjab
11-11-2019 06:03 PM
Punjab
11-11-2019 08:02 PM
vitamin h 10 ml,50 GM minralmix,4kg Dalia,50_100 GM desi gi deo
Posted by Hirendra Kumar
Rajasthan
11-11-2019 05:58 PM
Maharashtra
11-11-2019 06:01 PM
ईसबगोल की बिजाई के लिए उपयुक्त समय अक्तूबर से नवंबर का महीना होता है पिछेती बिजाई (दिसंबर के पहले पखवाड़े के बाद) ना करें क्योंकि यह पैदावार में कमी को बढ़ाता है प्रति हेक्टेयर के हिसाब से 2.4 किलो NPK का स्प्रे किया जाता है धन्यवाद