
Posted by Ashish
Haryana
12-11-2019 04:37 PM
gehun mein Nano fertlizer ka prayog inki kami dikhne par hi karna chahiye, vaise inki jyada jrurat nhi padti.

Posted by hakam singh
Punjab
12-11-2019 04:34 PM
असली केसर सिर्फ जम्मू कश्मीर, ईरान और अफगानिस्तान में ही हो सकता है, यह कुसुम है, इसकी भी कई दवाई बनती है, यदि कोई और छक है तो जम्मू कश्मीर के इस किसान से बात करें, जिसके दादे, पड़दादे भी केसर की खेती करते थे और यह भी केसर की खेती करते है Javid Ahmed- 95964 93260 बाकि आप यह वीडियो देखें https://www.youtube.com/watchv=vl7c6L3ETnQ&t=8s बाकि यदि फिर भी यकीन नहीं .... (Read More)
असली केसर सिर्फ जम्मू कश्मीर, ईरान और अफगानिस्तान में ही हो सकता है, यह कुसुम है, इसकी भी कई दवाई बनती है, यदि कोई और छक है तो जम्मू कश्मीर के इस किसान से बात करें, जिसके दादे, पड़दादे भी केसर की खेती करते थे और यह भी केसर की खेती करते है Javid Ahmed- 95964 93260 बाकि आप यह वीडियो देखें https://www.youtube.com/watchv=vl7c6L3ETnQ&t=8s बाकि यदि फिर भी यकीन नहीं है तो तो आप अमृतपाल सिंह बराड़ प्रोफेसर, पीएयू लुधियाना इस वीडियो संबंधी विचार पड़ सकते हैं, यह फसल केसर की नहीं है, यह फसल कसुंबडे की है, इसे अंग्रेजी में Safflower कहते है, और विज्ञानं में इसे Carthamus tinctorius कहते है
Posted by चौधरी Ravi Verma
Uttar Pradesh
12-11-2019 04:32 PM
श्रीमान जी, मक्की की फसल लगाने के लिए उपजाऊ, अच्छे जल निकास वाली, मैरा और लाल मिट्टी जिसमें नाइट्रोजन की उचित मात्रा हो, जरूरी है मक्की रेतली से लेकर भारी हर तरह की ज़मीनों में उगाई जा सकती है समतल ज़मीने मक्की के लिए बहुत अनुकूल है पर कईं पहाड़ी इलाकों में भी यह फसल उगाई जाती है अधिक पैदावार लेने के लिए मिट्टी म.... (Read More)
श्रीमान जी, मक्की की फसल लगाने के लिए उपजाऊ, अच्छे जल निकास वाली, मैरा और लाल मिट्टी जिसमें नाइट्रोजन की उचित मात्रा हो, जरूरी है मक्की रेतली से लेकर भारी हर तरह की ज़मीनों में उगाई जा सकती है समतल ज़मीने मक्की के लिए बहुत अनुकूल है पर कईं पहाड़ी इलाकों में भी यह फसल उगाई जाती है अधिक पैदावार लेने के लिए मिट्टी में जैविक तत्वों की अधिक मात्रा, पी एच 5.5-7.5 और अधिक पानी रोककर रखने की क्षमता होनी चाहिए बहुत ज्यादा भारी ज़मीनें इस फसल के लिए अच्छी नहीं मानी जाती प्रसिद्ध किस्में और पैदावार Ganga II: यह हाइब्रिड किस्म है जिसके दाने संतरी रंग के होते हैं यह किस्म 150-160 दिनों में कटाई के लिए तैयार हो जाती है इसकी औसतन पैदावार 28-32 क्विंटल प्रति एकड़ होती है
Deccan - 103: यह हाइब्रिड किस्म है जिसके दाने पीले रंग के होते हैं यह किस्म 150-160 दिनों में कटाई के लिए तैयार हो जाती है इसकी औसतन पैदावार 24-32 क्विंटल प्रति एकड़ होती है Deccan - 105: यह हाइब्रिड किस्म है जिसके दाने संतरी रंग के होते हैं यह किस्म 150-160 दिनों में कटाई के लिए तैयार हो जाती है इसकी औसतन पैदावार 24-32 क्विंटल प्रति एकड़ होती है Trisholta: यह हाइब्रिड किस्म है जिसके दाने संतरी रंग के होते हैं यह किस्म 150-160 दिनों में कटाई के लिए तैयार हो जाती है इसकी औसतन पैदावार 28-32 क्विंटल प्रति एकड़ होती है High Starch: यह हाइब्रिड किस्म है जिसके दाने सफेद रंग के होते हैं यह किस्म 150-160 दिनों में कटाई के लिए तैयार हो जाती है इसकी औसतन पैदावार 28-32 क्विंटल प्रति एकड़ होती है Mangiri: यह कंपोज़िट किस्म है जिसके दाने पीले रंग के होते हैं यह किस्म 170-180 दिनों में कटाई के लिए तैयार हो जाती है इसकी औसतन पैदावार 20-32 क्विंटल प्रति एकड़ होती है फसल के लिए प्रयोग किया जाने वाला खेत नदीनों और पिछली फसल से मुक्त होना चाहिए मिट्टी को नर्म करने के लिए 6 से 7 बार जोताई करें खेत में 4-6 टन प्रति एकड़ रूड़ी की खाद और 10 पैकेट एसपरजिलियम के डालें खेत में 45-50 सैं.मी. के फासले पर खाल और मेंड़ बनाएं रबी के मौसम में खेती के लिए बिजाई 15 अक्तूबर से 10 नवंबर तक पूरी कर लें मेंड़ों पर बिजाई करना ज्यादा लाभदायक रहता है क्योंकि इससे फसल को जल्दी अंकुरित होने में मदद मिलती है और फसल ठंड से भी बची रहती है रबी के मौसम में खेती के लिए 60x18 सैं.मी. फासले का प्रयोग करें बीजों को 4-5 सैं.मी. की गहराई पर बोयें बिजाई हाथों से गड्ढा खोदकर या आधुनिक तरीके से ट्रैक्टर और बिजाई वाली मशीन की मदद से मेंड़ बनाकर की जा सकती है सर्दियों की मक्की के लिए 8-9 किलो बीज प्रति एकड़ में प्रयोग करें फसल को मिट्टी की बीमारियों और कीड़ों से बचाने के लिए बीज का उपचार करें सफेद जंग से बीजों को बचाने के लिए कार्बेनडाज़िम या थीरम 2 ग्राम प्रति किलो बीज के साथ उपचार करें रासायनिक उपचार के बाद बीज को एज़ोसपीरीलम 600 ग्राम + धान के चूरे के साथ उपचार करें उपचार के बाद बीज को 15-20 मिनटों के लिए छांव में सुखाएं एज़ोसपीरिलम मिट्टी में नाइट्रोजन को बांधकर रखने में मदद करता है अच्छी उपज प्राप्त करने के लिए नाइट्रोजन 50 किलो (यूरिया 110 किलो), फासफोरस 24 किलो (एस एस पी 150 किलो) और पोटाश 18 किलो (म्यूरेट ऑफ पोटाश 30 किलो) प्रति एकड़ में डालें नाइट्रोजन की 1/4 मात्रा और पोटाश और फासफोरस की पूरी मात्रा बिजाई के समय डालें यूरिया की बाकी की मात्रा को दो भागों में बांटकर पहली मात्रा जब फसल घुटने तक के कद की हो जाए तब और दूसरी मात्रा बालियां निकलने के समय डालें खरीफ ऋतु की मक्की में नदीन बड़ी समस्या होते हैं, जो कि खुराकी तत्व लेने में फसल से मुकाबला करते हैं और 35 प्रतिशत तक पैदावार कम कर देते हैं इसलिए अधिक पैदावार लेने के लिए नदीनों का हल करना जरूरी है मक्की की कम से कम दो गोडाई करें पहली गोडाई बिजाई से 20-25 दिन बाद और दूसरी गोडाई 40-45 दिन बाद , पर ज्यादा होने की हालत में एटराज़िन 500 ग्राम प्रति 200 लीटर पानी से स्प्रे करें गोडाई करने के बाद मिट्टी के ऊपर खाद की पतली परत बिछा दें और जड़ों से मिट्टी लगाएं कटाई और छंटाई: कटाई मतलब तंदरूस्त पौधों को रखकर बाकी के पौधों को हटा देना और एक पौधे से दूसरे पौधे की दूरी 20 सैं.मी. रखना पहली गोडाई के समय कटाई के समय करें पहली सिंचाई के समय खाली जगह को भरने के लिए 4-6 दिन पुराने पौधे लगाएं अंकुरन के तीसरे या चौथे सप्ताह बाद पानी लगाएं बाकी की सिंचाइयां 4-5 सप्ताह के फासले पर मध्य मार्च तक करें इसके इलावा और 1 या 2 सिंचाइयां वर्षा और मौसम की स्थिति के आधार पर करें जब पौधे घुटनों के कद के हो जायें तो फूल निकलने के समय और दाने बनने के समय सिंचाई महत्तवपूर्ण होती है यदि इस समय पानी की कमी हो तो पैदावार बहुत कम हो सकती है यदि पानी की कमी हो तो एक मेंड़ छोड़कर पानी दें इस से पानी भी बचता है धन्यवाद
Posted by भारत पाटीदार
Rajasthan
12-11-2019 04:28 PM
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Posted by parmar
Madhya Pradesh
12-11-2019 04:16 PM
यदि आप मुर्गी पालन के बारे में जानकारी लेना चाहते है तो सबसे पहले आपके लिए यह जानना जरूरी है कि मुर्गी पालन दो तरह का होता है कि आप अंडों का व्यवसाय करना चाहते हैं या मीट का यदि आप अंडों का धंधा करना चाहते हैं तो आपको लेयर मुर्गियां पालनी पड़ेंगी और यदि आप मीट का धंधा करना चाहते हैं तो आपको ब्रॉयलर मुर्गियां प.... (Read More)
यदि आप मुर्गी पालन के बारे में जानकारी लेना चाहते है तो सबसे पहले आपके लिए यह जानना जरूरी है कि मुर्गी पालन दो तरह का होता है कि आप अंडों का व्यवसाय करना चाहते हैं या मीट का यदि आप अंडों का धंधा करना चाहते हैं तो आपको लेयर मुर्गियां पालनी पड़ेंगी और यदि आप मीट का धंधा करना चाहते हैं तो आपको ब्रॉयलर मुर्गियां पालनी पड़ेंगी यदि आप ब्रायलर मुर्गी पालन करना चाहते हैं तो कम से कम 10 हजार मुर्गियों का धंधा शुरू करना चाहते हैं तो आपको 4 से 5 लाख का इतज़ाम करना पड़ेगा, ये आप अपने बजट के हिसाब से कम पंक्षियों से भी शुरू कर सकते हैं बाकि आप इस काम को ट्रेनिंग लेकर शुरू करें जिसमें आपको इस काम के बारे में पूरी जानकारी दी जाएगी ट्रेनिंग लेने के लिए आप अपने नज़दीकी कृषि विज्ञान केंद्र से संपर्क करें आप वहां जाकर अपना ट्रेनिंग का फार्म भर आएं जब भी ट्रेनिंग होगी तो वो आपको फोन करके उसके बारे में बता देंगे और ट्रेनिंग में आपको लोन और सब्सिड़ी के बारे में जानकारी प्राप्त हो जाएगी
Posted by Ramavtar
Uttar Pradesh
12-11-2019 03:59 PM
आपके द्धारा भेंजी ओडियो में आवाज समझ नहीं आ रही है कृपया आप दोबारा साफ आवाज में ओडियो अपलोड करें ताकि आपको सही जानकारी दी जा सके
Posted by dushyant rana
Haryana
12-11-2019 03:53 PM
यदि आपकी भैंस बार बार रिपीट हो रही है तो उसे हीट में आने पर उसकी बच्चेदानी में Lixin-iu तीन दिन भरवायें और उसे Agrimin पाउडर 100 ग्राम रोजाना दें और Concimax bolus रोजाना एक गोली दें और 14 दिन तक देते रहें फिर अगली बार हीट में आने पर उसे टीका भरवायें इस तरह वो गाभिन हो जाएगी और जो भी अंदर इंफेक्शन होगा वो खत्म हो जाएगा, यदि आप कोई ओर ज.... (Read More)
यदि आपकी भैंस बार बार रिपीट हो रही है तो उसे हीट में आने पर उसकी बच्चेदानी में Lixin-iu तीन दिन भरवायें और उसे Agrimin पाउडर 100 ग्राम रोजाना दें और Concimax bolus रोजाना एक गोली दें और 14 दिन तक देते रहें फिर अगली बार हीट में आने पर उसे टीका भरवायें इस तरह वो गाभिन हो जाएगी और जो भी अंदर इंफेक्शन होगा वो खत्म हो जाएगा, यदि आप कोई ओर जानकारी लेना चाहते है तो आप दोबारा सवाल पूछ सकते हैं
Posted by MANJINDER singh
Punjab
12-11-2019 03:41 PM
ਜੇਕਰ ਬਰਸੀਮ ਦੇ ਪੱਤੇ ਜਾਮਣੀ ਹੋ ਰਹੇ ਹਨ ਤਾਂ ਇਹ ਫਾਸਫੋਰਸ ਦੀ ਘਾਟ ਹੋ ਸਕਦੀ ਹੈ, ਇਸਦੇ ਲਈ ਤੁਸੀਂ NPK 0:52:34 @1kg ਪ੍ਰਤੀ ਏਕੜ ਦੀ ਵਰਤੋਂ ਕਰ ਸਕਦੇ ਹੋ

Posted by Harpinder Singh
Punjab
12-11-2019 03:39 PM
Harpinder Singh ji, is tarah photo dekh ke is bare jankari diti nahi ja sakdi , kirpa kar is dey label di photo bhejo, taki dekh ke tuhanu is bare puri jankari diti ja sake, dhanwad
Posted by MANJINDER singh
Punjab
12-11-2019 03:38 PM
Manjinder ji kirpa krke apna swal vistar nal pusho ji tuci ki jankari lena chahunde ho tan jo tuhanu sahi jankari diti ja skee.

Posted by Prince Pal
Punjab
12-11-2019 03:16 PM
Prince ji aap punjab mai v barbari nasal ko rakh skte hai, kyuki isko achi khurak ate sahi dekhbhal ki jruat hoti hai jisse yeh jldi growth krti hai..
Posted by sangam thakur
Madhya Pradesh
12-11-2019 03:01 PM
बकरी पालन बहुत ही लाभकारी काम है शुरूआत करने के लिए आप 10 बकरियों और 2 बकरे के साथ कर सकते हैं इन्हें खुराक कम चाहिए इसलिए इन्हें आसानी से पाल सकते हैं ये हर प्रकार के मौसम में पाली जा सकती हैं बकरियां 12-14 महीने में बच्चे देना शुरू कर देती है बकरी का गर्भ समय 150 दिन का होता है और साल में 1-5 बच्चे देती है साल में दो बच्.... (Read More)
बकरी पालन बहुत ही लाभकारी काम है शुरूआत करने के लिए आप 10 बकरियों और 2 बकरे के साथ कर सकते हैं इन्हें खुराक कम चाहिए इसलिए इन्हें आसानी से पाल सकते हैं ये हर प्रकार के मौसम में पाली जा सकती हैं बकरियां 12-14 महीने में बच्चे देना शुरू कर देती है बकरी का गर्भ समय 150 दिन का होता है और साल में 1-5 बच्चे देती है साल में दो बच्चे देना आम बात है बकरियां 8-10 वर्ष तक बच्चे देती हैं और अपन गिनती को तेजी से बढ़ा लेती हैं आप बारबरी, ब्लैक बंगाल, जैसी नसल पाल सकते हैं इसकी ट्रेनिेंग के लिए आप अपने कुषि विज्ञान केंद्र से संपर्क करे या फिर जो बकरी पालन का व्यवसाय कर रहा कोई किसान उसका फार्म स्वंय जाकर देखकर आयें तो और भी बारीकियों का पता चल जायेगा, इसके इलावा आप बीटल नस्ल का रख सकते है क्योंकि ये नस्ल मीट और दूध दोंनो कामों के लिए अच्छी रहती है, बकरी पालन में लोन लेने के लिए सबसे जरूरी है ट्रेनिंग सर्टीफिकेट अपने नज़दीक के कृषि विज्ञान केंद्र से ट्रेनिंग करने के बाद ट्रेनिंग के सर्टीफिकेट पर लोन एप्लाई होता है पर लोन मिलेगा या नहीं यह बैंक मेनेजर पर निर्भर करता है क्योंकि पहली बात यह है कि बैंक देखता है कि आपके अकाउंट में कितने पैसों का लेन देन हो रहा है और आपके पास ज़मीन गारंटी के तौर पर देने के लिए है या नहीं और अन्य भी कई बातें चैक करके लोन के लिए सहमत होता है बाकी कोशिश करें कि लोन के बिना अपने स्तर पर ही काम शुरू करें क्योंकि लोन की किश्त हर महीने भरनी पड़ेगी पर बकरियों से कमाई हर महीने नहीं होने होगी बाकी यदि कोशिश करके देखनी है तो अपने ट्रेनिंग सर्टीफिकेट से आप अपने जिले के पशु पालन विभाग अफसर को मिलें और उस पर प्रवानगी लेकर फिर बैंक से बात करके देखें.

Posted by vj barupal
Rajasthan
12-11-2019 03:01 PM
श्री मान आप गेंहू की किस्मे जैसे PBW 1 Zn, UNNAT PBW 343, WH 542, PBW 725, PBW 677, HD 2851, WHD-912, HD 3043, WH 1105, PBW 660, PBW-502, HD 3086 (PusaGautam), HD 2967, DBW17, PBW 621, UNNAT PBW 550, TL 2908, PBW 175, PBW 527, WHD 943, PDW 291, PDW 233, UP-2328, PBW 590, PBW 509, PBW 373 की बिजाई कर सकते है इनकी औसतन पैदावार 22 -25 क्विंटल होता है और यह 150-157 दिन तक कटाई के लिए तैयार हो जाती है धन्यवाद
Posted by sangam thakur
Madhya Pradesh
12-11-2019 02:59 PM
इस फसल को मिट्टी की अलग अलग किस्मों, जिनमें पानी सोखने की क्षमता कम होती है और जिनकी पी एच 5.0 से 9.5 के बीच में होती है, में भी उगाया जा सकता है धान की पैदावार के लिए रेतली से लेकर गारी मिट्टी तक, और गारी से चिकनी मिट्टी जिसमें पानी को सोखने की क्षमता कम होती है इस फसल के लिए अच्छी मानी जाती है शुष्क खेतों को अच्छा ब.... (Read More)
इस फसल को मिट्टी की अलग अलग किस्मों, जिनमें पानी सोखने की क्षमता कम होती है और जिनकी पी एच 5.0 से 9.5 के बीच में होती है, में भी उगाया जा सकता है धान की पैदावार के लिए रेतली से लेकर गारी मिट्टी तक, और गारी से चिकनी मिट्टी जिसमें पानी को सोखने की क्षमता कम होती है इस फसल के लिए अच्छी मानी जाती है शुष्क खेतों को अच्छा बनाने, नदीन रहित और सेहतमंद वृद्धि के लिए ग्लाफोसेट डालनी चाहिए गेहूं की कटाई के बाद ज़मीन पर हरी खाद के तौर पर मई के पहले सप्ताह ढैंचा (बीज दर 20 किलोग्राम प्रति एकड़), या सन (बीज दर 20 किलोग्राम प्रति एकड़) या लोबीया (बीज दर 12 किलोग्राम प्रति एकड़) की बिजाई करनी चाहिए जब फसल 6 से 8 सप्ताह की हो जाए तो इसे खेत में कद्दू करने से एक दिन खेत में ही जोत देना चाहिए इस तरह प्रति एकड़ 25 किलो नाइट्रोजन खाद की बचत होती है भूमि को समतल करने के लिए लेज़र लेवलर का प्रयोग किया जाता है इसके बाद खेत में पानी खड़ा कर दें ताकि भूमि के अंदर ऊंचे नीचे स्थानों की पहचान हो सके इस तरह पानी के रसाव के कारण पानी की होने वाले बर्बादी को कम किया जा सके बिजाई का समय यू पी के सिंचित और निम्न बारानी क्षेत्रों में मध्य जून से शुरूआती जुलाई तक का समय उपयुक्त होता है बीज की गहराई:-पौधे की गहराई 2-3 सैं.मी. होनी चाहिए फासला बनाकर लगाने से पौधे ज्यादा पैदावार देते हैं एक एकड़ खेत में 6-8 किलो बीज प्रति एकड़ में प्रयोग करें बिजाई से पहले 10 लीटर पानी में 20 ग्राम कार्बेनडाज़िम $ 1 ग्राम स्ट्रैप्टोसाईक्लिन घोल लें और इस घोल में बीजो को 8-10 घंटे तक भिगोयें उसके बाद बीजों को छांव में सुखाएं और फिर बिजाई के लिए प्रयोग करें फसल को जड़ गलन रोग से बचाने के लिए नीचे दिए गए फंगसनाशी का प्रयोग किया जा सकता है पहले रासायनिक फंगीनाशी का प्रयोग करें फिर बीजों का टराईकोडरमा के साथ उपचार करें वैट बैड नर्सरी : यह तकनीक उन क्षेत्रों में अपनाई जाती है जहां पर पानी ज्यादा मात्रा में पाया जाता है नर्सरी का 1/10 हिस्सा दूसरे खेत में लगाया जाता है इसकी बिजाई छींटे द्वारा की जाती है यहां पर खेत की जोताई और खेत को समतल किया जाता है बैडों पर कईं दिन तक नमी बनाए रखनी चाहिए पानी से खेत को ज्यादा ना भरें जब नर्सरी 2 सैं.मी. से वृद्धि कर जाए तब पानी को खेत में लगाते रहना चाहिए बिजाई के 15 दिन बाद 26 किलो यूरिया डालना चाहिए जब नर्सरी 25-30 सैं.मी. तक लंबी हो जाए तब उसे 15-21 दिन बाद दूसरे खेत में लगा देना चाहिए और खेत को लगातार पानी लगाते रहना चाहिए सूखे बैड वाली नर्सरी : यह तकनीक शुष्क क्षेत्रों में अपनाई जाती है जो बैड बनाया जाता है वो बिजाई वाले खेत का 1/10 हिस्से में बीज बोया जाता है बैड का आकार सीमित होना चाहिए और उसकी ऊंचाई 6-10 से.मी होनी चाहिए धान का आधा जला हुआ छिलका बैड पर बिखेर देना चाहिए इससे जड़ें मजबूत होती हैं सही समय पर सिंचाई करते रहना चाहिए और नमी बनाए रखना चाहिए ताकि नए पौधे नष्ट ना हों तत्वों की पूर्ति के लिए खाद डालना जरूरी है मॉडीफाईड मैट नर्सरी : यह नर्सरी लगाने का एक ऐसा तरीका है जिसमें कम जगह और कम बीजों की जरूरत होती है यह नर्सरी किसी भी जगह पर बनाई जा सकती हैं जहां पर समतल जगह हो और पानी की सुविधा हो इसकी पनीरी लगाने के लिए 1% खेत की जरूरत होती है 4 से.मी की सतह पर नए पौधे लगाए जाते हैं इसे बनाने के लिए 1 मीटर चौड़े और 20-30 मीटर लंबे जमीन के टुकड़े की जरूरत होती है इसके ऊपर बिछाने के लिए पॉलीथीन और केले के पत्तों की जरूरत होती है इसके इलावा एक लकड़ी का बकसा जो कि 4 से.मी गहरा होता हैं मिट्टी के मिश्रण से भरा होता है बीजों को इसके अंदर रख देना चाहिए और फिर बीजों को सूखी मिट्टी के साथ ढक देना चाहिए इसके बाद पानी का छिड़काव कर देना चाहिए लकड़ी के बक्से को नमी देते रहना चाहिए बिजाई से 11-14 दिनों के बाद पौध तैयार हो जाती है जब पौध तैयार हो जाती है तब मैट से पौध को दूसरे खेत में रोपण कर दिया जाता है फासला: पौधों का फासला 20x20 सैं.मी. या 25x25 सैं.मी. होना चाहिए पनीरी लगाने का ढंग 1. कद्दू करके लगाई जाने वाली पनीरी : आमतौर पर पंक्ति में लगाए जाने वाले पौधे 20x15 सैं.मी. दूरी पर लगाए जाते हैं और देरी से लगाई जाने वाली पनीरी 15x15 सैं.मी. पर लगाई जाती है नए पौधों की गहराई 2-3 सैं.मी. होनी चाहिए 2. बैड बनाकर लगाई जाने वाली पनीरी : यह बैड भारी ज़मीनों के लिए बनाए जाते हैं पनीरी लगाने से पहले खालियों में पानी लगाना चाहिए और फिर पनीरी को खेत में लगाना चाहिए पौधे से पौधे का फासला 9 सैं.मी. होना चाहिए 3. मशीनी ढंग से लगाई जाने वाली पनीरी : मैट पनीरी के लिए मशीनों का प्रयोग किया जाता है यह मशीन 30x12 सैं.मी. के फासले पर पनीरी लगानी चाहिए सिंचित और कम बारानी वाले क्षेत्रों के लिए लगभग 41-50 किलो नाइट्रोजन (यूरिया 90-110 किलो), 30 किलो फासफोरस (एस एस पी 190 किलो) और 27 किलो पोटाश (म्यूरेट ऑफ पोटाश 45 किलो) प्रति एकड़ में डालें नाइट्रोजन की आधी मात्रा और फासफोरस और पोटाश की पूरी मात्रा रोपाई के समय डालें बाकी बची नाइट्रोजन को दो भागों में बांटकर, नाइट्रोजन का 1/4 हिस्सा शाखाएं निकलने के समय और 1/4 हिस्सा बालियां निकलने के समय डालें जल जमाव वाले क्षेत्रों में नाइट्रोजन 30-41 किलो (यूरिया 65-90 किलो) प्रति एकड़ में शुरूआती खुराक के तौर पर डालें कम बारानी क्षेत्रों के लिए नाइट्रोजन 23-32 किलो (यूरिया 52-70 किलो) और फासफोरस 16 किलो (एस एस पी 100 किलो) प्रति एकड़ में प्रयोग करें नाइट्रोजन की आधी मात्रा और फासफोरस की पूरी मात्रा रोपाई से पहले और बाकी बची नाइट्रोजन बालियां निकलने के समय डालें ऊंचे क्षेत्रों के लिए नाइट्रोजन 23 किलो (यूरिया 52 किलो), फासफोरस 12 किलो (एस एस पी 75 किलो) और पोटाश 12 किलो (म्यूरेट ऑफ पोटाश 20 किलो) प्रति एकड़ में डालें नाइट्रोजन की आधी और फासफोरस और पोटाश की पूरी मात्रा बिजाई के तीन सप्ताह बाद डालें बाकी बची नाइट्रोजन को दो भागों में बांटे पहले भाग को बिजाई के 6 सप्ताह बाद और दूसरे भाग को बालियां निकलने के समय डालें रोपाई के 2 से 3 दिन बाद नदीनों के अंकुरण से पहले बूटाक्लोर 50 ई सी 1200 मि.ली. या थायोबेनकार्ब 50 ई सी 1200 मि.ली. या पैंडीमैथालीन 30 ई सी या प्रैटीलाक्लोर 50 ई सी 600 मि.ली. प्रति एकड़ में डालें इनमें से किसी एक नदीननाशक को 60 किलो रेत में मिलाकर 4-5 सैं.मी. गहरे खड़े पानी में बुरकाव करें चौड़े पत्ते वाले नदीनों की रोकथाम के लिए मेटसलफुरॉन 20 डब्लयु पी 30 ग्राम को 150 लीटर पानी में मिलाकर नदीनों के अंकुरण के बाद रोपाई के 20-25 दिन बाद डालें स्प्रे से पहले खेत में खड़े पानी का निकास कर दें और स्प्रे के एक दिन बाद सिंचाई करें नदीनों के अंकुरण से पहले बूटाक्लोर 1 लीटर को बिजाई के 6 से 7 दिनों के बाद प्रति एकड़ में स्प्रे करें पनीरी लगाने के बाद खेत में दो सप्ताह तक अच्छी तरह पानी खड़ा रहने देना चाहिए जब सारा पानी सूख जाए तो उसके दो दिन बाद फिर से पानी को लगाना चाहिए खड़े पानी की गहराई 10 सै.मी. से ज्यादा नहीं होनी चाहिए खेत में से बूटी और नदीनों को निकालने से पहले खेत में से सारा पानी निकाल देना चाहिए ओर इस प्रक्रिया के पूरे होने के बाद खेत की फिर से सिंचाई करनी चाहिए पकने से 15 दिन पहले सिंचाई करनी बंद करनी चाहिए ताकि फसल को आसानी से काटा जा सके ऊंची भूमि पर सिंचाई पूरी तरह से बारिश पर निर्भर करती है बारिश की तीव्रता और नियमितता के आधार पर और पानी की उपलब्धता के आधार पर गंभीर अवस्थाओं में सिंचाई करें जब दाने पूरी तरह पक जायें और फसल का रंग सुनहरी हो जाये तो खड़ी फसल की कटाई कर लेनी चाहिए ज्यादातर फसल की कटाई हाथों से द्राती से या कंबाइन से की जाती है काटी गई फसल के बंडल बनाके उनको छांटा जाता है दानों को बालियों से अलग कर लिया जाता है दानों को बालियों से अलग करने के बाद उसकी छंटाई की जाती है धान की कटाई करने के बाद पैदावार को काटने से लेकर प्रयोग तक नीचे लिखी प्रक्रिया अपनाई जाती है 1.कटाई 2. छंटाई 3. सफाई 4. सुखाना 5. गोदाम में रखना 6.पॉलिश करना और इसके बाद इसे बेचने के लिए भेजना दानों को स्टोर करने से पहले इन्हें कीटों और बीमारियों से बचाने के लिए 10 किलोग्राम दानों के लिए 500 ग्राम नीम के पाउडर को मिलाना चाहिए स्टोर किए गए दानों को कीटों के हमले से बचाने के लिए 30 मि.ली. मैलाथियोन 50 ई.सी. को 3 लीटर पानी में घोल तैयार करके इसका छिड़काव करना चाहिए इस घोल का छिड़काव 100 वर्ग मीटर के क्षेत्र में हर 15 दिनों के बाद करना चाहिए, धन्यवाद

Posted by kashmir singh
Punjab
12-11-2019 02:43 PM
Kashir ji, is vich tuc NPK 191919 @10 gm prati liter pani de hisaab nal spray karo, dhanwad
Posted by RAJU KUMAR
Bihar
12-11-2019 02:43 PM
यदि आप लेयर मुर्गी पालन करना चाहते है तो लेयर फार्मिंग के लिए आपको 50 फीट लंबाई वाली जगह और 20 फीट चौड़ाई वाली जगह की जरूरत होती है यह आपका 1000 वर्ग फुट जगह बन जाती है यहां आप 1000 बच्चों को रख सकते हैं इस प्रकार आप अपने बजट के हिसाब से बच्चों को रख सकते है और यदि आप लेयर का बच्चा अपने फार्म पर तैयार करते है तो आपको बच्च.... (Read More)
यदि आप लेयर मुर्गी पालन करना चाहते है तो लेयर फार्मिंग के लिए आपको 50 फीट लंबाई वाली जगह और 20 फीट चौड़ाई वाली जगह की जरूरत होती है यह आपका 1000 वर्ग फुट जगह बन जाती है यहां आप 1000 बच्चों को रख सकते हैं इस प्रकार आप अपने बजट के हिसाब से बच्चों को रख सकते है और यदि आप लेयर का बच्चा अपने फार्म पर तैयार करते है तो आपको बच्चा अंडे देने तक 160—170 रूप्ये प्रति बच्चे के हिसाब से खर्चा आएगा यदि आप तैयार बच्चा लेकर आते है तो वो आपको 205—210 रूप्ये प्रति बच्चे के हिसाब से पड़ेगा फिर आप उस हिसाब से इनको खरीद सकते है

Posted by Ssb
Uttarakhand
12-11-2019 02:42 PM
DW 187 wheat ka seed lene ke lia aap Dr Dalip Gosain 9215757800 se samparak kar sakte hai, Thankyou.
Posted by Balvir Singh
Punjab
12-11-2019 02:26 PM
Balvir ji, kirpa kar ke tuc siyonk ka hamla check karo, te jekar siyonk hove tan tuc chlorpyriphos @ 4ml prati liter pani de hisaab nal spray karo, dhanwad

Posted by lakhbeer singh
Punjab
12-11-2019 02:24 PM
Hanji tusi retli zameen vich Unnat PBW550 kisam lga skde ho.

Posted by hasan
Maharashtra
12-11-2019 02:19 PM
श्रीमान जी, बरानी क्षेत्र के लिए urea 35 kg , SSP 50 kg , MoP 15 kg ,प्रति एकड़ के हिसाब से , सभी खादों को बिजाई के समय पर ही डालें, समय से बुवाई वाली किस्मो के लिए urea 105 kg , SSP 150 kg , MoP 30 kg प्रति एकड़ के हिसाब से . आधी nitrogen की मात्रा बिजाई के समय पर डालें और आधी बिजाई के 3 हफ़्तों बाद, potash और SSP की पूरी मात्रा बिजाई के समय पर डालें, पिछेती बिजाई वाली किस.... (Read More)
श्रीमान जी, बरानी क्षेत्र के लिए urea 35 kg , SSP 50 kg , MoP 15 kg ,प्रति एकड़ के हिसाब से , सभी खादों को बिजाई के समय पर ही डालें, समय से बुवाई वाली किस्मो के लिए urea 105 kg , SSP 150 kg , MoP 30 kg प्रति एकड़ के हिसाब से . आधी nitrogen की मात्रा बिजाई के समय पर डालें और आधी बिजाई के 3 हफ़्तों बाद, potash और SSP की पूरी मात्रा बिजाई के समय पर डालें, पिछेती बिजाई वाली किस्मो के लिए urea 70 kg , SSP 100 kg , MoP 30 kg प्रति एकड़ के हिसाब से डालें, आधी nitrogen की मात्रा बिजाई के समय पर डालें और आधी बिजाई के 3 हफ़्तों बाद, potash और SSP की पूरी मात्रा बिजाई के समय पर डालें, धन्यवाद

Posted by jaspreet singh
Punjab
12-11-2019 02:11 PM
ਖੁੰਬਾ ਦੀਆ ਕਿਸਮਾਂ ਕਈ ਤਰਾਂ ਦੀਆ ਹੁੰਦੀਆਂ ਹਨ ਜਿਵੇਂ ਬਟਨ ਖੁੰਬ, ਢੀਂਗਰੀ, ਸ਼ਟਾਕੀ ਖੁੰਬ, ਪਰਾਲੀ ਖੁੰਬ ਅਤੇ ਮਿਲਕੀ ਖੁੰਬ ਇਹਨਾਂ ਵਿਚੋਂ ਕੁੱਜ ਖੁੰਬਾ ਸਰਦੀ ਦੇ ਮੌਸਮ ਵਿਚ ਅਤੇ ਕੁੱਜ ਗਰਮੀ ਦੇ ਮੌਸਮ ਵਿਚ ਲਗਾਈਆਂ ਜਾਂਦੀਆਂ ਹਨ ਅਤੇ ਹਰ ਇਕ ਖੁੰਬ ਲਗਾਉਣ ਦਾ ਸਮਾਂ ਅਲਗ ਅਲਗ ਹੈ ਜਿਵੇ *ਬਟਨ ਖੁੰਬ ਦਾ ਸਮਾਂ ਸਤੰਬਰ ਤੋਂ ਮਾਰਚ ਤਕ ਹੈ ਇਸ ਸਮੇ ਵਿੱਚ ਆਪਾ ਇਸ ਤੋਂ 2 ਫਸਲਾਂ ਲੈ ਸਕਦੇ ਹਾਂ .... (Read More)
ਖੁੰਬਾ ਦੀਆ ਕਿਸਮਾਂ ਕਈ ਤਰਾਂ ਦੀਆ ਹੁੰਦੀਆਂ ਹਨ ਜਿਵੇਂ ਬਟਨ ਖੁੰਬ, ਢੀਂਗਰੀ, ਸ਼ਟਾਕੀ ਖੁੰਬ, ਪਰਾਲੀ ਖੁੰਬ ਅਤੇ ਮਿਲਕੀ ਖੁੰਬ ਇਹਨਾਂ ਵਿਚੋਂ ਕੁੱਜ ਖੁੰਬਾ ਸਰਦੀ ਦੇ ਮੌਸਮ ਵਿਚ ਅਤੇ ਕੁੱਜ ਗਰਮੀ ਦੇ ਮੌਸਮ ਵਿਚ ਲਗਾਈਆਂ ਜਾਂਦੀਆਂ ਹਨ ਅਤੇ ਹਰ ਇਕ ਖੁੰਬ ਲਗਾਉਣ ਦਾ ਸਮਾਂ ਅਲਗ ਅਲਗ ਹੈ ਜਿਵੇ *ਬਟਨ ਖੁੰਬ ਦਾ ਸਮਾਂ ਸਤੰਬਰ ਤੋਂ ਮਾਰਚ ਤਕ ਹੈ ਇਸ ਸਮੇ ਵਿੱਚ ਆਪਾ ਇਸ ਤੋਂ 2 ਫਸਲਾਂ ਲੈ ਸਕਦੇ ਹਾਂ ਢੀਂਗਰੀ ਦਾ ਸਮਾਂ ਅਕਤੂਬਰ ਤੋਂ ਮਾਰਚ ਤਕ ਹੈ ਇਸ ਸਮੇ ਵਿੱਚ ਆਪਾ ਇਸ ਤੋਂ 3 ਫ਼ਸਲਾਂ ਲੈ ਸਕਦੇ ਹਾਂ ਸ਼ਟਾਕੀ ਖੁੰਬ ਦਾ ਸਮਾਂ ਅਕਤੂਬਰ ਤੋਂ ਅੱਧ ਫਰਵਰੀ ਤਕ ਹੈ ਆਪਾ ਇਸ ਤੋਂ ਇਕ ਫ਼ਸਲ ਹੀ ਲੈ ਸਕਦੇ ਹਾਂ ਪਰਾਲੀ ਖੁੰਬ ਦਾ ਸਮਾਂ ਅਪ੍ਰੈਲ ਤੋਂ ਅਗਸਤ ਤਕ ਹੈ ਆਪਾ ਇਸ ਤੋਂ 4 ਫਸਲਾਂ ਲੈ ਸਕਦੇ ਹਾਂ ਮਿਲਕੀ ਖੁੰਬ ਦਾ ਸਮਾਂ ਅਪ੍ਰੈਲ ਤੋਂ ਸਤੰਬਰ ਤਕ ਹੈ ਬਾਕੀ ਸ਼ੁਰੂਆਤ ਵਿੱਚ ਇਸ ਦੀ ਕੰਪੋਸਟ ਤਿਆਰ ਕਰਨ ਦਾ ਸਾਰਾ ਤਰੀਕਾ ਤੁਸੀ ਜਾਂ ਤਾਂ ਕ੍ਰਿਸ਼ੀ ਵਿਗਿਆਨ ਕੇਂਦਰ ਤੋਂ ਟ੍ਰੇਨਿੰਗ ਲਵੋ ਜਾ ਫਿਰ ਮਸ਼ਰੂਮ ਦੀ ਖੇਤੀ ਕਰਨ ਵਾਲੇ ਕਿਸਾਨਾਂ ਦੇ ਫਾਰਮ ਤੇ ਜਾ ਕੇ ਜਾਣਕਾਰੀ ਲਵੋ ਜੀ

Posted by ਕੁਲਦੀਪ ਸਿੰਘ
Punjab
12-11-2019 02:06 PM
Os nu nu najdeeke Doctor nu dekhao ji. Temperature down hon de kai karn hunde han. Calcium level down hona,badhajma ja pneumonia v ho skda hai.

Posted by भोला सिंह
Punjab
12-11-2019 02:01 PM
Kirpa krke apna swal vistar nal pusho ji tuci ki jankari lena chahunde ho tan jo tuhanu sahi jankari diti ja skee..
Posted by Phulchand MEENA
Rajasthan
12-11-2019 02:00 PM
Phulchand ji, kripya ap apne gehun ki photo bejein tajo apko dekh karuska hal batay ja sake, dhanywad
Posted by Javed Qureshi
Madhya Pradesh
12-11-2019 01:44 PM
बकरी पालन बहुत ही लाभकारी काम है शुरूआत करने के लिए आप 10 बकरियों और 2 बकरे के साथ कर सकते हैं इन्हें खुराक कम चाहिए इसलिए इन्हें आसानी से पाल सकते हैं ये हर प्रकार के मौसम में पाली जा सकती हैं बकरियां 12-14 महीने में बच्चे देना शुरू कर देती है बकरी का गर्भ समय 150 दिन का होता है और साल में 1-5 बच्चे देती है साल में दो बच्.... (Read More)
बकरी पालन बहुत ही लाभकारी काम है शुरूआत करने के लिए आप 10 बकरियों और 2 बकरे के साथ कर सकते हैं इन्हें खुराक कम चाहिए इसलिए इन्हें आसानी से पाल सकते हैं ये हर प्रकार के मौसम में पाली जा सकती हैं बकरियां 12-14 महीने में बच्चे देना शुरू कर देती है बकरी का गर्भ समय 150 दिन का होता है और साल में 1-5 बच्चे देती है साल में दो बच्चे देना आम बात है बकरियां 8-10 वर्ष तक बच्चे देती हैं और अपन गिनती को तेजी से बढ़ा लेती हैं आप बारबरी, ब्लैक बंगाल, जैसी नसल पाल सकते हैं इसकी ट्रेनिेंग के लिए आप अपने कुषि विज्ञान केंद्र से संपर्क करे या फिर जो बकरी पालन का व्यवसाय कर रहा कोई किसान उसका फार्म स्वंय जाकर देखकर आयें तो और भी बारीकियों का पता चल जायेगा, इसके इलावा आप बीटल नस्ल का रख सकते है क्योंकि ये नस्ल मीट और दूध दोंनो कामों के लिए अच्छी रहती है, बकरी पालन में लोन लेने के लिए सबसे जरूरी है ट्रेनिंग सर्टीफिकेट अपने नज़दीक के कृषि विज्ञान केंद्र से ट्रेनिंग करने के बाद ट्रेनिंग के सर्टीफिकेट पर लोन एप्लाई होता है पर लोन मिलेगा या नहीं यह बैंक मेनेजर पर निर्भर करता है क्योंकि पहली बात यह है कि बैंक देखता है कि आपके अकाउंट में कितने पैसों का लेन देन हो रहा है और आपके पास ज़मीन गारंटी के तौर पर देने के लिए है या नहीं और अन्य भी कई बातें चैक करके लोन के लिए सहमत होता है बाकी कोशिश करें कि लोन के बिना अपने स्तर पर ही काम शुरू करें क्योंकि लोन की किश्त हर महीने भरनी पड़ेगी पर बकरियों से कमाई हर महीने नहीं होने होगी बाकी यदि कोशिश करके देखनी है तो अपने ट्रेनिंग सर्टीफिकेट से आप अपने जिले के पशु पालन विभाग अफसर को मिलें और उस पर प्रवानगी लेकर फिर बैंक से बात करके देखें.

Posted by prabhjot singh
Punjab
12-11-2019 01:40 PM
Prabhjot ji pashu suun ton 1-1.5 month pehla dudh utar lgg jnda hai, pashu nu suun to 2 mahine vdia dekhbhal, vdia feed, rajhma hra chara dena suru krna chahida hai, uss nu Vitum-H liquid 10-10ml swere sham dena suru krna chahida hai jiss nal lewa vdia tyar hunda hai..
Posted by Niranjan lal
Uttar Pradesh
12-11-2019 01:38 PM
Niranjan ji, give application of Urea@110kg, SSP@155kg/acre and MoP@20kg/acre. Apply 1/3rd amount of nitrogen and full dose of P & K at time sowing. Apply remaining amount of Nitrogen i.e 2/3rd of Nitrogen, 35-40days after sowing. As pre-emergence of weeds apply Pendimethalin(Stomp 30EC)@1320ml/acre at 0-3 days after sowing in 200liters of water/acre. Apply 2-4,D@ 0.2-0.4Kg/acre, 25-30 days after sowing. after the crop has received its first irrigation at CRI stage. Fluroxypur@0.08-0.24kg/acre is a good alternative to 2,4-D for controlling broad leaf weeds. Spray the herbicides, both pre and post emergence, when there is sufficient moisture in the soil. Spray on clear and sunny days. Thank you

Posted by rahul patidar
Madhya Pradesh
12-11-2019 01:37 PM
इसके लिए आप NPK 19 19 19 @10gm प्रति लीटर पानी के हिसाब से स्प्रे करें

Posted by rajnish
Maharashtra
12-11-2019 01:37 PM
Rajnish ji, this happend beacuse of attack of sucking insect , please give the application of imidacloprid @ 1.5 ml per liter of water, thank you

Posted by Vikas Thory
Haryana
12-11-2019 01:36 PM
श्री मान इसकी किस्में हैं---PNB 83, PNB 233, CO 3, Pusa Giant Napier, Gajraj, NB-5, NB-6, NB 37 and NB-35..I इसकी बिजाई गन्ने की तरह की जाती है इसकी बिजाई का सही समय फरवरी से अप्रैल के अंत तक का है I एक एकड़ में 11000 कलमें लगती है Iइसका बीज आप PAU लुधियाना से ला सकते हो I

Posted by rahul patidar
Madhya Pradesh
12-11-2019 01:35 PM
श्रीमान जी, गेहूं के लिए आप किस्मे जैसे गेहूं की बिजाई के लिए JW 1201 (21.2क्विंटल/एकड़), GW 322 (22-24क्विंटल/एकड़), HI 8498 (22-24क्विंटल/एकड़), HI 1544 (22-24क्विंटल/एकड़), JW 1203 (16.8-18क्विंटल/एकड़) की बिजाई कर सकते हो ,धन्यवाद
Posted by manish tiwari
Bihar
12-11-2019 01:33 PM
Kripya apna swal vistar se puchhe, k aap kaun si fasal ki parjati ke bare me jaankari lena chahte hai.
Posted by ਜਗਮੀਤ ਸਿੰਘ
Punjab
12-11-2019 01:26 PM
ਜੇਕਰ ਤੁਸੀਂ Zinc 33% ਦੀ ਵਰਤੋਂ ਕਰ ਰਹੇ ਹੋ ਤਾਂ ਇਸਦਾ ਛਿੱਟਾ ਦੇ ਸਕਦੇ ਹੋ ਅਤੇ Chelated Zinc ਦੀ ਸਪਰੇਅ ਕੀਤੀ ਜਾਂਦੀ ਹੈ
ਇਸਦੀ ਮਾਤਰਾ ਫਸਲ ਅਨੁਸਾਰ ਵੱਖ-ਵੱਖ ਹੁੰਦੀ ਹੈ ਸੋ ਮਾਤਰਾ ਦੀ ਜਾਣਕਾਰੀ ਲਈ ਫਸਲ ਦਾ ਨਾਮ ਦੱਸੋ ਜੀ

Posted by gurbaj singh
Punjab
12-11-2019 01:10 PM
उसे आप पेट के कीड़ों के लिए Bendikind plus गोली दें और Broton liquid 50ml रोजाना और enerboost powder 50gm रोजाना दें इससे फर्क पड़ जाएगा

Posted by sunil kumar
Bihar
12-11-2019 01:09 PM
Shrimaan ji, yeh macchar ke hamle ki vajah se hua hai, iski roktham ke liye ap imidacloprid @ 1.5 ml prati liter pani ke hisaab se spray karein, dhanywad
Posted by BHERU LAL GURJAR
Rajasthan
12-11-2019 01:07 PM
is me mealy bug keet ke hamle ki jaanch kre, agar hamla dikhe toh imidacloprid @60ml prati 150 litre paani ke hisab se upyog kre.

Posted by ARUN KUMAR
Punjab
12-11-2019 01:04 PM
राम राम अरुण कुमार जी , खसखस की खेती को शुरू करवाने के लिए बहुत सारी संस्थाएं पंजाब सरकार को इसकी खेती को शुरू करने की मांग कर रही है लेकिन बारे में कुछ जयादा कहा नहीं जा सकता जी और खेतीबाड़ी यूनिवर्सिटी की तरफ से भी अभी कुछ विचार नहीं किया गया है जी

Posted by Gurwinder Singh
Punjab
12-11-2019 12:52 PM
श्रीमान जी गेहूं एचडी 3086 (PusaGautam) : इसकी औसतन उपज 23 क्विंटल प्रति एकड़ होती है ये पत्तों के पीलेपन और भूरेपन की समस्या से रहित होती है इसमें अच्छी किस्म के बरेड बनाने के सभी तत्त होते है इसकी बिजाई अक्तूबर से नवंबर महीने तक कर सकते है ये पकने के लिए 156 दिन और लंबाई 96 सैं.मी. है इसका बीज 40—45 किलो प्रति एकड़ डाला जाता ह.... (Read More)
श्रीमान जी गेहूं एचडी 3086 (PusaGautam) : इसकी औसतन उपज 23 क्विंटल प्रति एकड़ होती है ये पत्तों के पीलेपन और भूरेपन की समस्या से रहित होती है इसमें अच्छी किस्म के बरेड बनाने के सभी तत्त होते है इसकी बिजाई अक्तूबर से नवंबर महीने तक कर सकते है ये पकने के लिए 156 दिन और लंबाई 96 सैं.मी. है इसका बीज 40—45 किलो प्रति एकड़ डाला जाता है
Posted by Niranjan lal
Uttar Pradesh
12-11-2019 12:47 PM
Niranjan ji, give application of Urea@110kg, SSP@ 155kg/acre and MoP@20kg/acre. Apply 1/3rd amount of nitrogen and full dose of P & K at time sowing. Apply remaining amount of Nitrogen i.e 2/3rd of Nitrogen, 35-40days after sowing. As pre-emergence of weeds , apply Pendimethalin (Stomp 30 EC) @1 Ltr at 0-3 days before sowing in 200 litres of water/acre. Use 2, 4-D @250 ml in 150 ltr water for controlling broad leaf weeds. Thank you
Posted by ਕੁਲਵੀਰ ਸਿੰਘ
Punjab
12-11-2019 12:46 PM
श्रीमान जी एचडी 3086 किस्म की बिजाई अक्तूबर से चौथे सप्ताह से नवंबर के चौथे सप्ताह तक कर सकते है
Posted by Niranjan lal
Uttar Pradesh
12-11-2019 12:43 PM
Niranjan ji, dose of fertlizer and weedicide is different for every crop , so please ask your question in detail that for which crop do you want to know the dose of fertilizer and weedicide, thank you
Posted by Virdharam choudhary
Rajasthan
12-11-2019 12:35 PM
श्रीमान जी, इसके लिए आप NPK 191919 @ 1 kg को 150 लीटर पानी में मिला कर प्रति एकड़ के हिसाब से स्प्रे करें, धन्यवाद

Posted by Harsh Deep Singh
Punjab
12-11-2019 12:34 PM
Sir sade ploon jhoti aa ohde kal nu 10 mahine poore hone aa ajj oh phul dikhaundi aa ki kriye ohnu ?
tuci uss nu khurak ek varr ekathi naa paao, uss nu turri deni bilkul bnnd kr deo ate usda picha ucha rakho, jddo jekar jyada pisha dekha rehi hai tan uss nu rassi paa ke rkho ate suun smee doctor nu bullao, kyuki hun enni jldi isda illag mushkil hai.

Posted by Md Rustam Ali Quadri
Bihar
12-11-2019 12:28 PM
आप इसे Broton liquid 10ml रोजाना और Groviplex liquid रोजाना देना शुरू करें इससे अच्छी ग्रोथ हो जाएगी ये आप उन्हें शरीर के भार के हिसाब दे सकते है बाकि आप उनकी खुराक और फीड का पूरा ध्यान रखें
Posted by sachin patel
Madhya Pradesh
12-11-2019 12:11 PM
Sachin patel ji Medicinal plants ki contract farming ke lia aap Aushadhiya kheti vikas sansthan 6268536795 se samparak kar sakte hai, Thankyou.

Posted by nishan singh
Punjab
12-11-2019 12:05 PM
ਸ਼੍ਰੀਮਾਨ ਜੀ, ਤੁਸੀ ਮੱਕੀ ਦੀਆ ਕਿਸਮ ਜਿਵੇ Buland:-ਇਹ ਕਿਸਮ ਸੇਂਜੂ ਖੇਤਰਾਂ ਵਿੱਚ ਹਾੜ੍ਹੀ ਦੇ ਸਮੇਂ ਸਾਰੇ ਰਾਜ ਵਿੱਚ ਬੀਜੀ ਜਾ ਸਕਦੀ ਹੈ ਜੋ ਕਿ ਪੱਕਣ ਲਈ 178 ਦਿਨ ਦਾ ਸਮਾਂ ਲੈਂਦੀ ਹੈ ਇਹ ਵੱਧ ਝਾੜ ਦੇਣ ਵਾਲੀ ਕਿਸਮ ਹੈ ਅਤੇ ਠੰਡ ਨੂੰ ਸਹਾਰਣਯੋਗ ਹੈ ਇਸਦਾ ਔਸਤ ਝਾੜ 31 ਕੁਇੰਟਲ ਪ੍ਰਤੀ ਏਕੜ ਹੈ Partap 1:- ਇਹ ਕਿਸਮ ਸੇਂਜੂ ਖੇਤਰਾਂ ਵਿੱਚ ਹਾੜ੍ਹੀ ਦੇ ਸਮੇਂ ਸਾਰੇ ਰਾਜ ਵਿੱਚ ਬੀਜੀ ਜਾ ਸਕਦੀ ਹੈ ਜੋ .... (Read More)
ਸ਼੍ਰੀਮਾਨ ਜੀ, ਤੁਸੀ ਮੱਕੀ ਦੀਆ ਕਿਸਮ ਜਿਵੇ Buland:-ਇਹ ਕਿਸਮ ਸੇਂਜੂ ਖੇਤਰਾਂ ਵਿੱਚ ਹਾੜ੍ਹੀ ਦੇ ਸਮੇਂ ਸਾਰੇ ਰਾਜ ਵਿੱਚ ਬੀਜੀ ਜਾ ਸਕਦੀ ਹੈ ਜੋ ਕਿ ਪੱਕਣ ਲਈ 178 ਦਿਨ ਦਾ ਸਮਾਂ ਲੈਂਦੀ ਹੈ ਇਹ ਵੱਧ ਝਾੜ ਦੇਣ ਵਾਲੀ ਕਿਸਮ ਹੈ ਅਤੇ ਠੰਡ ਨੂੰ ਸਹਾਰਣਯੋਗ ਹੈ ਇਸਦਾ ਔਸਤ ਝਾੜ 31 ਕੁਇੰਟਲ ਪ੍ਰਤੀ ਏਕੜ ਹੈ Partap 1:- ਇਹ ਕਿਸਮ ਸੇਂਜੂ ਖੇਤਰਾਂ ਵਿੱਚ ਹਾੜ੍ਹੀ ਦੇ ਸਮੇਂ ਸਾਰੇ ਰਾਜ ਵਿੱਚ ਬੀਜੀ ਜਾ ਸਕਦੀ ਹੈ ਜੋ ਕਿ ਪੱਕਣ ਲਈ 180 ਦਿਨ ਦਾ ਸਮਾਂ ਲੈਂਦੀ ਹੈ ਇਹ ਠੰਡ ਨੂੰ ਸਹਾਰਣਯੋਗ ਕਿਸਮ ਹੈ ਅਤੇ ਬਿਮਾਰੀਆਂ ਦੀ ਰੋਧਕ ਹੈ ਇਸਦਾ ਔਸਤ ਝਾੜ 25 ਕੁਇੰਟਲ ਪ੍ਰਤੀ ਏਕੜ ਹੈ ਬੇਬੀ ਕੌਰਨ ਦੀ ਉਪਜ ਲਈ ਇਹ ਵਧੀਆ ਕਿਸਮ ਹੈ PMH 9:- ਇਹ ਪੰਜਾਬ ਖੇਤੀਬਾੜੀ ਯੂਨੀਵਰਸਿਟੀ ਦੁਆਰਾ ਤਿਆਰ ਕੀਤੀ ਗਈ ਕਿਸਮ ਹੈ ਇਹ ਠੰਡ ਨੂੰ ਸਹਾਰਣਯੋਗ ਅਤੇ ਦੇਰ ਨਾਲ ਪੱਕਣ ਵਾਲੀ ਕਿਸਮ ਹੈ ਇਹ ਹਾੜ੍ਹੀ ਦੇ ਮੌਸਮ ਵਿੱਚ ਉਗਾਉਣ ਯੋਗ ਕਿਸਮ ਹੈ ਇਹ ਤਣੇ ਦੇ ਟੁੱਟਣ ਅਤੇ ਜੰਗ ਦੀ ਰੋਧਕ ਕਿਸਮ ਹੈ ਇਹ 180 ਦਿਨ ਵਿੱਚ ਪੱਕ ਕੇ ਤਿਆਰ ਹੋ ਜਾਂਦੀ ਹੈ ਇਸ ਦਾ ਔਸਤਨ ਝਾੜ 32.5 ਕੁਇੰਟਲ ਪ੍ਰਤੀ ਏਕੜ ਹੈ ਕੇ ਦੀ ਬਿਜਾਈ ਕਰ ਸਕਦੇ ਹੋ, ਧੰਨਵਾਦ
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