Posted by Ajit kumar
Uttar Pradesh
14-11-2019 07:22 AM
श्रीमान जी, आपके पौधे पर फंगस का हमला बी दिखाई दे रहा है, इसकी रोकथाम के लिए आप mencozeb @ 4gm प्रति लीटर पानी के हिसाब से स्प्रे करें, धन्यवाद

Posted by Maya meghwal
Rajasthan
14-11-2019 07:21 AM
उसे पेट के कीड़ों के लिए Flukarid-Ds गोली भी दें और Enerdyna liquid 100ml रोजाना, Simlage bolus 1-1 सुबह शाम और Gouge पाउडर 50gm रोजाना दें इससे फर्क पड़ जाएगा, बाकि आप उसे रोजाना 35—40 किलो हरा चारा डालें और हर 3 महीने के बाद डीवॉर्मिंग जरूर करें.

Posted by Kulwinder Singh Gill
Punjab
14-11-2019 07:13 AM
ਕੁਲਵਿੰਦਰ ਜੀ, ਇਸਦੇ ਫਾਰਮ ਤੁਸੀਂ ਆਪਣੇ ਜਿਲੇ ਦੇ ਖੇਤੀਬਾੜੀ ਅਫਸਰ ਦੇ ਔਫੀਸ ਵਿਚ ਜਾ ਕੇ ਭਰ ਸਕਦੇ ਹੋ, ਧੰਨਵਾਦ

Posted by preet
Punjab
14-11-2019 06:54 AM
ਤੁਸੀ Ovulenta kit ਦੀ ਵਰਤੋਂ ਕਰ ਸਕਦੇ ਹੋ,ਇਸ ਵਿਚ 2 ਨੀਲੀਆਂ ਅਤੇ 1 ਸਫੇਦ ਗੋਲੀ ਹੁੰਦੀ ਹੈ ਪਹਿਲਾ ਤੁਸੀ 2 ਨੀਲੀਆਂ ਗੋਲੀਆਂ ਕੁੱਟ ਕੇ ਪਾਊਡਰ ਬਣਾ ਕੇ ਰੋਟੀ ਵਿਚ ਦਿਓ ਫਿਰ 10 ਮਿੰਟ ਬਾਦ ਸਫੇਦ ਗੋਲੀ ਦਿਓ, ਇਸ ਤ੍ਰਾਹ ਤੁਸੀ 5 ਦਿਨ ਦਵਾਈ ਦਿਓ, ਇਸ ਨਾਲ ਹੀਟ ਵਿਚ ਆ ਜਾਵੇਗੀ
Posted by jass sidhu
Punjab
14-11-2019 06:48 AM
jass sidhu ji tusi apna question sahi likho te detail vich pucho ji. jina vadya tareeke nal tusi question puche hovega ona hi vadiya tareeke nal answer den vich help mildi hai ji.

Posted by preet
Punjab
14-11-2019 06:43 AM
ਸ਼੍ਰੀਮਾਨ ਜੀ ਤੁਸੀ ਗੁਲੀ ਡੰਡੇ ਲਈ TOPIK@160GM JA AXIAL@400ML JA PUMA POWER@400ML JA LEADER@13GM ja SAFAL@13GM JA UPL di SHAGUN 21-11@ 200 gm ਪ੍ਰਤੀ ਏਕੜ ਦੇ ਹਿਸਾਬ ਨਾਲ ਦਵਾਈਆਂ ਦਾ ਪ੍ਰਯੋਗ ਕਰ ਸਕਦੇ ਹੋ, ਧੰਨਵਾਦ

Posted by Manpreet singh
Punjab
14-11-2019 06:03 AM
ਇਸਦੇ ਲਈ ਤੁਸੀ ਸਿਰਫ Amoxi-CV 625mg tablet 1-1 ਸਵੇਰੇ ਸ਼ਾਮ 6 ਦਿਨ ਦਿਓ ਅਤੇ 3 ਦਿਨ ਦਾ ਫਰਕ ਪਾ ਕੇ ਦੁਬਾਰਾ ਸ਼ੁਰੂ ਕਰ ਦਿਓ, ਇਸ ਨਾਲ ਫਰਕ ਪਵੇਗਾ

Posted by Arjun
Bihar
14-11-2019 05:33 AM
मोती की खेती एक बहुत ही अच्छा व्यवसाय है इस व्यवसाय को शुरू करने के लिए सबसे जरुरी है इसकी ट्रेनिंग, क्योकि इसमें बहुत सी ऐसी बारीकियें होती है जो हमें प्रेक्टिकल ट्रेनिंग में ही सीखने को मिलती है अगर आप इसकी ट्रेनिंग लेना चाहते है तो आप ग्लिटराटी पर्ल फार्मिंग ट्रेनिंग केंद्र प्रशिक्षण कार्य कर्म आयोजि.... (Read More)
मोती की खेती एक बहुत ही अच्छा व्यवसाय है इस व्यवसाय को शुरू करने के लिए सबसे जरुरी है इसकी ट्रेनिंग, क्योकि इसमें बहुत सी ऐसी बारीकियें होती है जो हमें प्रेक्टिकल ट्रेनिंग में ही सीखने को मिलती है अगर आप इसकी ट्रेनिंग लेना चाहते है तो आप ग्लिटराटी पर्ल फार्मिंग ट्रेनिंग केंद्र प्रशिक्षण कार्य कर्म आयोजित किया जा रहा है प्रशिक्षण कार्य कर्म में भाग लेने के लिए नीचे दिए गए नम्बर पर आज ही संपर्क करें और Rs 250/ से अपना रजिस्ट्रेशन करवाए अचल सिंह (फाउंडर )- 9711858258. धन्यवाद

Posted by Harvinder singh sekhon
Uttar Pradesh
14-11-2019 04:21 AM
Shri maan g the actual time of wheat sowing is 20 October-30 November....
Posted by Adesh Kumar
Uttar Pradesh
14-11-2019 03:45 AM
कृपया आप अपना सवाल विस्तार से पूछें कि आप क्या जानकारी लेना चाहते है ताकि आपको सही जानकारी दी जा सके

Posted by ak
Jharkhand
14-11-2019 03:18 AM
Ak ji makhan grass lene ke lia aap Dattat Ray 9766320879 se samparak kar sakte hai, Thankyou.

Posted by rajik soudagar
Maharashtra
14-11-2019 03:05 AM
Rajik ji chicks ki achi growth ke liye feed jruri hai aur feed mai sabhi jruri tatt v hone jruri hai, yadi feed kam hogi ja feed mai sabhi chijee nahi hongi to usske growth v kam hoti aur egg v kam honge..
Posted by shyam yadav
Madhya Pradesh
14-11-2019 03:03 AM
बकरी पालन बहुत ही लाभकारी काम है शुरूआत करने के लिए आप 10 बकरियों और 2 बकरे के साथ कर सकते हैं इन्हें खुराक कम चाहिए इसलिए इन्हें आसानी से पाल सकते हैं ये हर प्रकार के मौसम में पाली जा सकती हैं बकरियां 12-14 महीने में बच्चे देना शुरू कर देती है बकरी का गर्भ समय 150 दिन का होता है और साल में 1-5 बच्चे देती है साल में दो बच्.... (Read More)
बकरी पालन बहुत ही लाभकारी काम है शुरूआत करने के लिए आप 10 बकरियों और 2 बकरे के साथ कर सकते हैं इन्हें खुराक कम चाहिए इसलिए इन्हें आसानी से पाल सकते हैं ये हर प्रकार के मौसम में पाली जा सकती हैं बकरियां 12-14 महीने में बच्चे देना शुरू कर देती है बकरी का गर्भ समय 150 दिन का होता है और साल में 1-5 बच्चे देती है साल में दो बच्चे देना आम बात है बकरियां 8-10 वर्ष तक बच्चे देती हैं और अपन गिनती को तेजी से बढ़ा लेती हैं आप बारबरी, ब्लैक बंगाल, जैसी नसल पाल सकते हैं इसकी ट्रेनिेंग के लिए आप अपने कुषि विज्ञान केंद्र से संपर्क करे या फिर जो बकरी पालन का व्यवसाय कर रहा कोई किसान उसका फार्म स्वंय जाकर देखकर आयें तो और भी बारीकियों का पता चल जायेगा, इसके इलावा आप बीटल नस्ल का रख सकते है क्योंकि ये नस्ल मीट और दूध दोंनो कामों के लिए अच्छी रहती है, बकरी पालन में लोन लेने के लिए सबसे जरूरी है ट्रेनिंग सर्टीफिकेट अपने नज़दीक के कृषि विज्ञान केंद्र से ट्रेनिंग करने के बाद ट्रेनिंग के सर्टीफिकेट पर लोन एप्लाई होता है पर लोन मिलेगा या नहीं यह बैंक मेनेजर पर निर्भर करता है क्योंकि पहली बात यह है कि बैंक देखता है कि आपके अकाउंट में कितने पैसों का लेन देन हो रहा है और आपके पास ज़मीन गारंटी के तौर पर देने के लिए है या नहीं और अन्य भी कई बातें चैक करके लोन के लिए सहमत होता है बाकी कोशिश करें कि लोन के बिना अपने स्तर पर ही काम शुरू करें क्योंकि लोन की किश्त हर महीने भरनी पड़ेगी पर बकरियों से कमाई हर महीने नहीं होने होगी बाकी यदि कोशिश करके देखनी है तो अपने ट्रेनिंग सर्टीफिकेट से आप अपने जिले के पशु पालन विभाग अफसर को मिलें और उस पर प्रवानगी लेकर फिर बैंक से बात करके देखें.

Posted by Diljot sandhu
Punjab
14-11-2019 01:45 AM
ਸ਼੍ਰੀਮਾਨ ਜੀ, 1121 ਝੋਨੇ ਦਾ ਰੇਟ ਇਸ ਵੇਲੇ ਹੱਥ ਨਾਲ ਵੱਡੀ ਗਈ ਫ਼ਸਲ ਦਾ 2650 ਰੁਪਏ ਪ੍ਰਤੀ ਕੁਇੰਟਲ ਦੇ ਹਿਸਾਬ ਨਾਲ ਚੱਲ ਰਿਹਾ ਹੈ ਅਤੇ ਮਸ਼ੀਨ ਨਾਲ ਵੱਡੀ ਗਈ ਫ਼ਸਲ ਦਾ ਰੇਟ 2570 ਰੁਪਏ ਪ੍ਰਤੀ ਕੁਇੰਟਲ ਹੈ, ਧੰਨਵਾਦ

Posted by bivnesh kumar
Uttar Pradesh
14-11-2019 12:30 AM
Bivnesh kumar ji plant lene ke lia aap Sulender 8736801125 Jai Shree Bag & Nursery, se samparak kar sakte hai, Thankyou.

Posted by Mpatidar Patidar
Madhya Pradesh
13-11-2019 10:54 PM
श्रीमान जी, जायफल की खेती के लिए गर्म एवं आर्द्रता तथा 150 से. मी.तथा इससे अधिक वार्षिक वर्षा वाले स्थान आदर्श माने जाते हैं इसको समुद्र तट से लगभग 1300 मी. ऊंचाई वाले स्थानों पर सफल रूप से उगा सकते हैं चिकनी मिट्टी, बालुई मिट्टी तथा लाल लैटराइट मिट्टी उसकी वृद्धि के लिए आदर्श मानी जाती है जायफल की पैदावार के लिए .... (Read More)
श्रीमान जी, जायफल की खेती के लिए गर्म एवं आर्द्रता तथा 150 से. मी.तथा इससे अधिक वार्षिक वर्षा वाले स्थान आदर्श माने जाते हैं इसको समुद्र तट से लगभग 1300 मी. ऊंचाई वाले स्थानों पर सफल रूप से उगा सकते हैं चिकनी मिट्टी, बालुई मिट्टी तथा लाल लैटराइट मिट्टी उसकी वृद्धि के लिए आदर्श मानी जाती है जायफल की पैदावार के लिए अत्यधिक शुष्क अथवा अत्यधिक जलमग्नता दोनों तरफ की परिस्थिति उपयुक्त नहीं है जायफल एक क्रास परागित है तथा इसके पौधों में आपस में कई महत्वपूर्ण विभिन्नताएं देखी गई हैं इसके पौधे की वृद्धि की सभी अवस्थाओं तथा शक्ति में ही विभिन्नताएं नहीं होतीं बल्कि इसमें लिंग समतुल्य सम्बन्ध, लम्बाई, फल का आकार एवं संख्या तथा जावित्री की उपज एवं गुणवत्ता में भी विभिन्नताएं होती हैं एक स्वस्थ वृक्ष से लगभग 2000 फल /वृक्ष प्राप्त होते हैं यह संख्या कुछ सेकड़े से लेकर 10,000 फल/वृक्ष तक हो सकती है भारतीय मसाला फसल अनुसन्धान संस्थान, कालीकट द्वारा विकसित उच्च उपज वाली प्रजाति आई.आई.एस.आर विश्वश्री में रोपण के आठ वर्ष पश्चात लगभग 1000 फल/वृक्ष की दर से उत्पादन होता है जब इसके पेड़ों की संख्या 360 प्रति हेक्टर हो तब इसकी अनुमानित उपज लगभग 3122 कि.ग्राम शुष्क जायफल (छिलके युक्त) तथा 480 कि.ग्राम शुष्क जावित्री प्रति हेक्टर प्राप्त होती है आईआईएस आर विश्वश्री से शुष्क जायफल तथा जावित्री क्रमशः 70 तथा 35%प्राप्त होती है जायफल में 7.1% इसेंशियल ओयल 9.8% ओलिओरसिन तथा 30.9% मक्खन जबकि जावित्री में 7.1% इसेनशियल ओयल,13.8% ओलिओरसिन की मात्रा होती है आईआईएसआर ने कुछ अधिक उच्च उपज वाली उच्च स्तरीय पंक्तियों जैसे A9 -20,22,25,69,150, A4 -12,22,52 A11 - 23,70 को चिन्हित किया हैतथा इनकी वितरण हेतु पैदावार की जा रही है जायफल को वर्षा ऋतु के आरम्भिक काल में रोपण करते है 0.75 मी.X 0.75 मी 0.75 मी. आकार के 9 मी X 9 मी. के अन्तराल पर गढ्डे खोद कर उसमें रोपण के 15 दिन पहले जैविक खाद तथा मृदा भर देते हैं पैलीगीयोंत्रोफिक ग्राफट को रोपण के लिए गढ्डों में 5मी.X5 मी. का अन्तराल रखना चाहिए खेत में प्रति 20 मादा ग्राफट पर एक नर ग्राफट को आवश्यक रोपण करना चाहिए पौधों को रोपण के पश्चात प्रारम्भिक अवस्था में सूर्य के झुलसा देने वाले प्रकाश से बचाने हेतू छाया प्रदान करनी चाहिए जायफल को जब ढलान युक्त पहाड़ी क्षेत्रों तथा एकल फसल प्रणाली (मोनोक्रोप) के रूप में खेती कर रहे है तब स्थाई छायादार वृक्षों को रोपण करना चाहिए जायफल की 15 वर्ष पुराने नारियल के बागों में अन्त: फसल सर्वोत्तम होती हैक्योंकि इन बागों की छाया जायफल की पैदावार के लिए आदर्श मानी जाती है इसकी खेती हेतू नारियल के बाग़ नदी-तट के सहारे अथवा उसके निकटवर्ती क्षेत्र अति उपयुक्त होते हैं इसमे ग्रीष्मकाल में सिंचाई अति आवश्यक है खाद को पौधे के चारों और कम गहराई वाले गड्ढे खोद कर डालने चाहिए केरल कृषि विभाग द्वारा संस्तुत 20 ग्राम नाइट्रोजन (40 ग्राम यूरिया ), 18 ग्राम P2 O2 (110 ग्राम सुपर फोस्फेट ) तथा 50 ग्राम K2 O (80 ग्राम पोटाश का म्यूरेट) को रोपण के पश्चात् प्रारम्भिक वर्षों में डालना चाहिए तथा पौधे की प्रगति के अनुसार खाद की मात्रा में वृद्धि करके क्रमशः 500 ग्राम नाइट्रोजन (1090 ग्राम यूरिया), 250 ग्राम P2 O5 (1560 ग्राम सुपर फोस्फेट ) तथा 1000 ग्राम K2O (1670 ग्राम पोटास का म्यूरेट) प्रति वर्ष पुराने या परिपक्व वृक्षों में डालना चाहिए 7-8 वर्ष पुराने वृक्ष में एफ वाई एम 2-5 कि. ग्राम की दर से तथा 15 वर्ष पुराने या परिपक्क वृक्षों 50 कि. ग्राम की दर डालना चाहिए जायफल के मादा वृक्ष से 6 वर्ष बाद फल आना आरम्भ हो जाता है जबकि 20 वर्ष पश्चात यह अपनी चरम सीमा पर होते हैं फूल के 9 महीने पश्चात फल तुड़ाई के लिए तैयार हो जाती है माह जून- अगस्त तुड़ाई के लिए सबसे उत्तम समय है जब फल पक जाये और फलभित्ति फट जाये तब फल तोड़ने के लिए तैयार होता है तुड़ाई के पश्चात बाहरी आवरण को अलग कर देते हैं तथा जायफल को जावित्री से अलग करते हैं जायफल तथा जावित्री को अलग-अलग सूर्य के प्रकाश में सुखाते हैं सुखाने के पश्चात जावित्री का लाल रंग धीरे –धीरे भूरा पीला तथा भुरभुरा रंग का हो जाता है स्वस्थ्य फलभित्ति को आचार, जैम तथा जैली बनाने में उपयोग कर सकते हैं धन्यवाद
Posted by चौधरी Ravi Verma
Uttar Pradesh
13-11-2019 10:30 PM
Ravi जी, आप प्याज़ की बिजाई के लिए 2-3 किलो प्रति एकड़ बीज का उपयोग कर सकते हैं, और आप केले की फसल के साथ प्याज़ लगा सकते हैं इसके बारे में पूरी जानकारी के लिए केले के पौधों का फासला बताएं

Posted by Amritpal singh
Punjab
13-11-2019 10:07 PM
ਤੁਸੀ Enerboost powder 50gm ਰੋਜਾਨਾ ਅਤੇ Fatplus ਪਾਊਡਰ 50gm ਜਾਂ Fatmax ਪਾਊਡਰ 50gm ਰੋਜਾਨਾ ਦਿਓ ਅਤੇ ਓਹਨਾ ਨੂੰ ਵਧੀਆ ਖੁਰਾਕ ਅਤੇ ਫੀਡ ਦੇ ਨਾਲ ਨਾਲ 1kg ਸਰੋਂ ਦੀ ਖਲ, 1kg ਵੜੇਵਿਆ ਦੀ ਖਲ ਸਵੇਰੇ ਸ਼ਾਮ ਦਿਉ.

Posted by tikkadhillon
Punjab
13-11-2019 10:00 PM
Tikka ji tuci uss nu pett de kiria Bendikind plus bolus deo ate Cargill di Heifer dry feed deo ate Cafplan powder 50-50gm rojana dena suru kro, iss nal vdia growth ho jawegi..

Posted by Ashok Kundu
Haryana
13-11-2019 09:56 PM
Ashok ji, agar ap summer squash ki buvai november ke mahine mein karna chahte hai to apko yeh low tunnel technique ke dawara karni padi gi, dhanywad
Posted by kanhaiya
Madhya Pradesh
13-11-2019 09:40 PM
श्रीमान जी, यह फंगस का हमला हुआ है, इसकी रोकथाम के लिए आप tilt @ 200 ml प्रति एकड़ के हिसाब से स्प्रे करें, धन्यवाद
Posted by SUKHDEV Singh
Punjab
13-11-2019 09:35 PM
ਸ੍ਰੀ ਮਾਨ ਜੀ ਕਿਸਮ ਸੁਪਰ 272 120-125 ਦਿਨਾਂ ਦੇ ਅੰਦਰ ਪੱਕਣ ਵਾਲੀ ,ਇਸਦਾ ਔਸਤਨ ਕੱਦ 95 ਸੈਂਟੀਮੀਟਰ ,ਇਸਦਾ ਔਸਤਨ ਝਾੜ 26 ਕੁਇੰਟਲ ਪ੍ਰਤੀ ਏਕੜ ਭਾਰੀ ਜਮੀਨ ਵਿੱਚ ਨਵੰਬਰ ਦੇ ਚੌਥੇ ਹਫਤੇ ਤੱਕ ਬੀਜ ਸਕਦੇ ਹੋ ਅਤੇ ਇਸ ਦਾ ਬੀਜ 40 ਕਿਲੋ ਪ੍ਰਤੀ ਏਕੜ ਪੈਂਦਾ ਹੈ
Posted by kanhaiya
Madhya Pradesh
13-11-2019 09:34 PM
कन्हैया जी आप द्धारा भेंजी गई फोटो अपलोड नहीं हुई है कृपया आप दोबारा फोटो अपलोड करें ताकि आपको सही जानकारी दी जा सके
Posted by भगवान बेंडकोळी
Maharashtra
13-11-2019 09:27 PM
यदि आप मुर्गी पालन के बारे में जानकारी लेना चाहते है तो सबसे पहले आपके लिए यह जानना जरूरी है कि मुर्गी पालन दो तरह का होता है कि आप अंडों का व्यवसाय करना चाहते हैं या मीट का यदि आप अंडों का धंधा करना चाहते हैं तो आपको लेयर मुर्गियां पालनी पड़ेंगी और यदि आप मीट का धंधा करना चाहते हैं तो आपको ब्रॉयलर मुर्गियां प.... (Read More)
यदि आप मुर्गी पालन के बारे में जानकारी लेना चाहते है तो सबसे पहले आपके लिए यह जानना जरूरी है कि मुर्गी पालन दो तरह का होता है कि आप अंडों का व्यवसाय करना चाहते हैं या मीट का यदि आप अंडों का धंधा करना चाहते हैं तो आपको लेयर मुर्गियां पालनी पड़ेंगी और यदि आप मीट का धंधा करना चाहते हैं तो आपको ब्रॉयलर मुर्गियां पालनी पड़ेंगी यदि आप ब्रायलर मुर्गी पालन करना चाहते हैं तो कम से कम 10 हजार मुर्गियों का धंधा शुरू करना चाहते हैं तो आपको 4 से 5 लाख का इतज़ाम करना पड़ेगा, ये आप अपने बजट के हिसाब से कम पंक्षियों से भी शुरू कर सकते हैं बाकि आप इस काम को ट्रेनिंग लेकर शुरू करें जिसमें आपको इस काम के बारे में पूरी जानकारी दी जाएगी ट्रेनिंग लेने के लिए आप अपने नज़दीकी कृषि विज्ञान केंद्र से संपर्क करें आप वहां जाकर अपना ट्रेनिंग का फार्म भर आएं जब भी ट्रेनिंग होगी तो वो आपको फोन करके उसके बारे में बता देंगे और ट्रेनिंग में आपको लोन और सब्सिड़ी के बारे में जानकारी प्राप्त हो जाएगी, ट्रेनिंग लेने के लिए आप अपने Krishi Vigyan Kendra, Nandurbar. Kolda Maharashtra, India. Phone No. : 02564240544 से संपर्क कर सकते है वहां आप अपना ट्रेनिंग का फार्म भर आएं जब भी ट्रेनिंग होगी तो वो आपको फोन करके बता देंगे

Posted by Harman Sidhu
Chattisgarh
13-11-2019 09:01 PM
ਸ਼੍ਰੀਮਾਨ ਜੀ, ਤੁਸੀ ਕਣਕ ਦੀਆ ਇਹਨਾਂ ਕਿਸਮ ਦੀ ਬਿਜਾਈ ਕਰ ਸਕਦੇ ਹੋ HD 2851: ਇਹ ਕਿਸਮ ਸਮੇ ਸਿਰ ਉਗਾਉਣਯੋਗ ਕਿਸਮ ਹੈ ਅਤੇ ਸਿੰਚਾਈ ਵਾਲੇ ਇਲਾਕਿਆਂ ਦੇ ਵਿੱਚ ਉਗਾਈ ਜਾਂਦੀ ਹੈ I ਇੱਹ ਕਿਸਮ 126-134 ਦਿਨਾਂ ਦੇ ਵਿੱਚ ਪੱਕ ਜਾਂਦੀ ਹੈ ਅਤੇ ਇਸ ਕਿਸਮ ਦਾ ਕੱਦ 80-90 ਸੈਂਟੀਮੀਟਰ ਹੈ UP-2328: ਇਹ ਕਿਸਮ 130-135 ਦਿਨਾਂ ਵਿੱਚ ਕਟਾਈ ਲਈ ਤਿਆਰ ਹੋ ਜਾਂਦੀ ਹੈ ਇਸਦੀਆਂ ਬੱਲੀਆਂ ਸਖ਼ਤ ਅਤੇ ਸ਼ਰਬਤੀ ਰੰਗ ਦੀਆਂ ਅਤੇ ਦਾ.... (Read More)
ਸ਼੍ਰੀਮਾਨ ਜੀ, ਤੁਸੀ ਕਣਕ ਦੀਆ ਇਹਨਾਂ ਕਿਸਮ ਦੀ ਬਿਜਾਈ ਕਰ ਸਕਦੇ ਹੋ HD 2851: ਇਹ ਕਿਸਮ ਸਮੇ ਸਿਰ ਉਗਾਉਣਯੋਗ ਕਿਸਮ ਹੈ ਅਤੇ ਸਿੰਚਾਈ ਵਾਲੇ ਇਲਾਕਿਆਂ ਦੇ ਵਿੱਚ ਉਗਾਈ ਜਾਂਦੀ ਹੈ I ਇੱਹ ਕਿਸਮ 126-134 ਦਿਨਾਂ ਦੇ ਵਿੱਚ ਪੱਕ ਜਾਂਦੀ ਹੈ ਅਤੇ ਇਸ ਕਿਸਮ ਦਾ ਕੱਦ 80-90 ਸੈਂਟੀਮੀਟਰ ਹੈ UP-2328: ਇਹ ਕਿਸਮ 130-135 ਦਿਨਾਂ ਵਿੱਚ ਕਟਾਈ ਲਈ ਤਿਆਰ ਹੋ ਜਾਂਦੀ ਹੈ ਇਸਦੀਆਂ ਬੱਲੀਆਂ ਸਖ਼ਤ ਅਤੇ ਸ਼ਰਬਤੀ ਰੰਗ ਦੀਆਂ ਅਤੇ ਦਾਣੇ ਦਰਮਿਆਨੇ ਮੋਟੇ ਆਕਾਰ ਦੇ ਹੁੰਦੇ ਹਨ ਇਹ ਸਿੰਚਿਤ ਖੇਤਰਾਂ ਲਈ ਅਨੁਕੂਲ ਕਿਸਮ ਹੈ ਇਸਦਾ ਔਸਤਨ ਝਾੜ 20-22 ਕੁਇੰਟਲ ਪ੍ਰਤੀ ਏਕੜ ਹੁੰਦਾ ਹੈ PBW 590: ਇਹ ਪੰਜਾਬ ਦੇ ਸਾਰੇ ਖੇਤਰਾਂ ਵਿੱਚ ਉਗਾਈ ਜਾਂਦੀ ਹੈ ਇਹ ਕਿਸਮ 128 ਦਿਨਾਂ ਵਿੱਚ ਪੱਕ ਕੇ ਤਿਆਰ ਹੋ ਜਾਂਦੀ ਹੈ ਇਹ ਪੀਲੀ ਅਤੇ ਭੂਰੀ ਕੁੰਗੀ ਦੀ ਰੋਧਕ ਕਿਸਮ ਹੈ ਇਸਦਾ ਔਸਤਨ ਕੱਦ 80 ਸੈ.ਮੀ. ਹੁੰਦਾ ਹੈ PBW 509: ਉਪ-ਪਰਬਤੀ ਖੇਤਰਾਂ ਨੂੰ ਛੱਡ ਕੇ ਇਹ ਕਿਸਮ ਪੂਰੇ ਪੰਜਾਬ ਵਿੱਚ ਉਗਾਈ ਜਾਂਦੀ ਹੈ ਇਹ ਕਿਸਮ 130 ਦਿਨਾਂ ਵਿੱਚ ਪੱਕ ਕੇ ਤਿਆਰ ਹੋ ਜਾਂਦੀ ਹੈ ਇਹ ਪੀਲੀ ਅਤੇ ਭੂਰੀ ਕੁੰਗੀ ਦੀ ਰੋਧਕ ਕਿਸਮ ਹੈ ਇਸਦਾ ਔਸਤਨ ਕੱਦ 85 ਸੈ.ਮੀ. ਹੁੰਦਾ ਹੈ ਧੰਨਵਾਦ

Posted by Harman Sidhu
Chattisgarh
13-11-2019 08:58 PM
ਸ੍ਰੀ ਮਾਨ ਜੀ UNNAT PBW 550: ਇਹ ਕਿਸਮ ਪੰਜਾਬ ਦੇ ਸਾਰਿਆਂ ਇਲਾਕਿਆਂ ਵਿੱਚ ਉਗਾਈ ਜਾਂਦੀ ਹੈ ਇਹ ਕਿਸਮ 145 ਦਿਨਾਂ ਵਿੱਚ ਪੱਕ ਕੇ ਤਿਆਰ ਹੋ ਜਾਂਦੀ ਹੈ ਇਹ ਪੀਲੀ ਅਤੇ ਭੂਰੀ ਕੁੰਗੀ ਦੀ ਰੋਧਕ ਕਿਸਮ ਹੈ ਇਸਦਾ ਔਸਤਨ ਕੱਦ 86 ਸੈ.ਮੀ. ਹੁੰਦਾ ਹੈ ਇਸ ਦਾ ਔਸਤਨ ਝਾੜ 23 ਕੁਇੰਟਲ ਪ੍ਰਤੀ ਏਕੜ ਹੁੰਦਾ ਹੈ
Posted by kuldeep
Haryana
13-11-2019 08:58 PM
Kuldeep ji, gehun ki kheti ka sahi samay october se november tak ka hota hai, ab ap gehun ki bijai kar sakte hain, dhanywad
Posted by ਜਸਵੀਰ ਸਿੰਘ
Punjab
13-11-2019 08:45 PM
ਸ਼੍ਰੀਮਾਨ ਜੀ, ਤੁਸੀ ਇਹਨਾਂ ਦੋਨਾਂ ਨੂੰ ਮਿਲਾ ਕੇ ਨਹੀਂ ਪਾ ਸਕਦੇ, ਤੁਸੀ ਕਣਕ ਤੇ urea ਦੀ ਵਰਤੋਂ ਕਰੋ, ਅਤੇ ਜੇ ਬਾਅਦ ਵਿਚ ਲੋੜ ਪਾਵੇ ਤਾਂ ਹੀ NPK ਦਾ ਪ੍ਰਯੋਗ ਕਰੋ, ਧੰਨਵਾਦ
Posted by RAJESH SINGH RAJPUT
Madhya Pradesh
13-11-2019 08:40 PM
Rajesh ji usko aap Anabolite liquid 100-100ml subah sham, Gouge powder 50gm rojana dena suru kro, iss nal frak paa jawega baki tuci uss nu vdia khurak ate feed deo ji..

Posted by narendra Kumar
Uttar Pradesh
13-11-2019 08:30 PM
श्रीमान जी, गोभी की किस्मे जैस Pusa Snowball K-1: यह किस्म सनोबाल 1 से देरी में पकने वाली किस्म है इसके बाहरी पत्ते ऊपर की तरफ सीधे और बीच वाला फूल घना और फूल बर्फ के जैसे सफेद होते हैं यह 110-120 दिनों में तैयार हो जाती है इसकी औसतन पैदावार 72-87.5 क्विंटल प्रति एकड़ होती है Snowball 16 : यह देरी से पकने वाली किस्म है फूल सख्त और आकर्षित स.... (Read More)
श्रीमान जी, गोभी की किस्मे जैस Pusa Snowball K-1: यह किस्म सनोबाल 1 से देरी में पकने वाली किस्म है इसके बाहरी पत्ते ऊपर की तरफ सीधे और बीच वाला फूल घना और फूल बर्फ के जैसे सफेद होते हैं यह 110-120 दिनों में तैयार हो जाती है इसकी औसतन पैदावार 72-87.5 क्विंटल प्रति एकड़ होती है Snowball 16 : यह देरी से पकने वाली किस्म है फूल सख्त और आकर्षित सफेद रंग के होते हैं इसकी औसतन पैदावार 100-125 क्विंटल प्रति एकड़ होती है की बिजाई करें, धन्यवाद

Posted by jagmeet singh
Punjab
13-11-2019 08:30 PM
ਸ਼੍ਰੀਮਾਨ ਜੀ, ਬਾਸਮਤੀ ਦਾ ਰੇਟ ਸਰਕਾਰ ਵਲੋਂ ਤਹਿ ਕੀਤਾ ਜਾਂਦਾ ਹੈ ਅਤੇ ਇਹ ਸਰਕਾਰ ਵਲੋਂ ਹੀ ਵਧਾਇਆ ਜਾ ਘਟਾਇਆ ਜਾਂਦਾ ਹੈ ਇਸ ਬਾਰੇ ਹਾਲੇ ਕੁਛ ਨਹੀਂ ਕਿਹਾ ਜਾ ਸਕਦਾ ਧੰਨਵਾਦ
Posted by GURPREET SINGH SIDHU
Punjab
13-11-2019 08:25 PM
Shrimaan ji , Fenvalrate ik salt da nam hai joke faldaar butein vich keet de hamle di roktham karda hai, ate es salt da nam leke tuc kisi vi company da khareed sakde ho, dhanwqad
Posted by ਜਸਵੀਰ ਸਿੰਘ
Punjab
13-11-2019 08:20 PM
ਸ਼੍ਰੀਮਾਨ ਜੀ, ਤੁਸੀ ਇਹਨਾਂ ਨੂੰ ਮਿਲਾ ਕੇ ਨਾ ਪਾਓ, ਇਹਨਾਂ ਦਾ ਅਲੱਗ ਅਲੱਗ ਹੀ ਪ੍ਰਯੋਗ ਕਰੋ, ਧੰਨਵਾਦ
Posted by ajay sharma
Haryana
13-11-2019 08:18 PM
अजय जी Pusa Gautam HD 3086 गेहूं की बहुत अच्छी किस्म है आप इसकी बिजाई कठियाल इलाके में कर सकते है HD 3086 की पैदावार 23 क्विंटल प्रति एकड़ है ये भूरी और पीली कुंगी की प्रतिरोधी है इसकी बिजाई का सही समय अक्तूबर के चौथे सप्ताह से लेकर नवंबर के चौथे सप्ताह तक होता है

Posted by Manpreet singh
Punjab
13-11-2019 08:12 PM
uss nu tuci Gocold bolus rojana 1 goli ate Ciprofloxacin bolus rojana 1 goli deo, iss nal frak paa jawega..
Posted by GURPREET SINGH SIDHU
Punjab
13-11-2019 08:12 PM
ਸ਼੍ਰੀਮਾਨ ਜੀ, ਸਟੋਬਰੀ ਦੀ ਖੇਤੀ ਪੋਲੀਹਾਊਸ ਦੇ ਅੰਦਰ ਜਾਂ ਖੁੱਲੇ ਖੇਤ ਵਿੱਚ ਕਰ ਸਕਦੇਂ ਹੋ ਚੀਕਣੀ , ਬਾਲੂ ਅਤੇ ਚੰਗੇ ਪਾਣੀ ਦੀ ਨਿਕਾਸੀ ਵਾਲੀ ਜ਼ਮੀਨ ਸਟਰਾਬੇਰੀ ਲਈ ਚੰਗੀ ਹੁੰਦੀ ਹੈ ਏਸਿਡਿਕ ਵਿੱਚ PH level 5.0 to 6.5 ਹੋਣਾ ਚਾਹੀਦਾ ਹੈ ਮਿੱਟੀ ਦੀ ਨਾਜੁਕਤਾ ਤੀਹ ਤੋਂ ਚਾਲ੍ਹੀ ਸੇਂਟੀਮੀਟਰ ਹੋਣੀ ਚਾਹੀਦੀ ਹੈ ਸਟਰਾਬੇਰੀ ਦੇ ਸਹੀ ਵਾਧੇ ਲਈ ਦਿਨ ਵੇਲੇ ਤਾਪਮਾਨ 20-25° ਡਿਗਰੀ ਅਤੇ ਰਾਤ ਵੇਲੇ 7-12° ਡਿ.... (Read More)
ਸ਼੍ਰੀਮਾਨ ਜੀ, ਸਟੋਬਰੀ ਦੀ ਖੇਤੀ ਪੋਲੀਹਾਊਸ ਦੇ ਅੰਦਰ ਜਾਂ ਖੁੱਲੇ ਖੇਤ ਵਿੱਚ ਕਰ ਸਕਦੇਂ ਹੋ ਚੀਕਣੀ , ਬਾਲੂ ਅਤੇ ਚੰਗੇ ਪਾਣੀ ਦੀ ਨਿਕਾਸੀ ਵਾਲੀ ਜ਼ਮੀਨ ਸਟਰਾਬੇਰੀ ਲਈ ਚੰਗੀ ਹੁੰਦੀ ਹੈ ਏਸਿਡਿਕ ਵਿੱਚ PH level 5.0 to 6.5 ਹੋਣਾ ਚਾਹੀਦਾ ਹੈ ਮਿੱਟੀ ਦੀ ਨਾਜੁਕਤਾ ਤੀਹ ਤੋਂ ਚਾਲ੍ਹੀ ਸੇਂਟੀਮੀਟਰ ਹੋਣੀ ਚਾਹੀਦੀ ਹੈ ਸਟਰਾਬੇਰੀ ਦੇ ਸਹੀ ਵਾਧੇ ਲਈ ਦਿਨ ਵੇਲੇ ਤਾਪਮਾਨ 20-25° ਡਿਗਰੀ ਅਤੇ ਰਾਤ ਵੇਲੇ 7-12° ਡਿਗਰੀ ਹੋਣਾ ਚਾਹੀਦਾ ਹੈ ਇਸ ਲਈ ਇਸਦੀ ਪਨੀਰੀ ਲਾਉਣ ਦਾ ਕੰਮ ਅੱਧ ਅਕਤੂਬਰ ਤੋਂ ਨਵੰਬਰ ਤਕ ਕਰ ਦੇਣਾ ਚਾਹੀਦਾ ਹੈ ਇਹਨਾਂ ਮਹੀਨਿਆਂ ਤੇ ਇਸਤੋਂ ਬਾਅਦ ਪੰਜਾਬ ਵਿਚ ਲਗਭਗ ਇਹੀ ਤਾਪਮਾਨ ਹੁੰਦਾ ਹੈ ਸਟਰਾਬੇਰੀ ਦੀ ਖੇਤੀ ਮਲਚਿੰਗ ਵਿਧੀ ਰਾਹੀਂ ਕੀਤੀ ਜਾਂਦੀ ਹੈ ਸਭ ਤੋਂ ਪਹਿਲਾਂ ਖੇਤ ਨੂੰ ਤਿਆਰ ਕੀਤਾ ਜਾਂਦਾ ਹੈ ਇਸ ਦੇ ਬਾਅਦ ਟਰੈਕਟਰ ਦੀ ਸਹਾਇਤਾ ਨਾਲ ਮਲਚਿੰਗ ਮਸ਼ੀਨ ਨੂੰ ਖੇਤ ਵਿੱਚ ਉਤਾਰਿਆ ਜਾਂਦਾ ਹੈ ਚਾਰ ਫੁੱਟ ਕਿਆਰੀ ਤਿਆਰ ਕੀਤੀ ਜਾਂਦੀ ਹੈ ਇਸ ਵਿੱਚ ਡਰਿੱਪ ਲਾਈਨ ਫਿੱਟ ਕੀਤੀ ਜਾਂਦੀ ਹੈ ਇਸ ਦੇ ਬਾਅਦ ਮਸ਼ੀਨ ਦੀ ਸਹਾਇਤਾ ਨਾਲ ਕਿਆਰੀਆਂ ਉੱਤੇ ਪਲਾਸਟਿਕ ਸ਼ੀਟ ਵਿਛਾਈ ਜਾਂਦੀ ਹੈ ਮਲਚਿੰਗ ਲਈ ਹਲਕਾ ਅਤੇ ਲਚਕੀਲਾ ਪਦਾਰਥ ਲਵੋ ਤਾਂ ਜੋ ਸਟਰਾਬੇਰੀ ਦੇ ਬੂਟੇ ਦੀ ਰਫ਼ਤਾਰ ਉੱਤੇ ਅਸਰ ਨਾ ਪਵੇ ਜਿਸਨੂੰ ਬਾਅਦ ਵਿਚ ਦੋਨਾਂ ਪਾਸਿਆਂ ਤੋਂ ਮਿੱਟੀ ਵਿੱਚ ਦਬਾ ਦਿਤਾ ਜਾਂਦਾ ਹੈ ਹੁਣ ਇਸ ਸ਼ੀਟ ਵਿਚ ਮੋਰੀਆਂ ਕੱਢ ਕੇ ਉਸ ਵਿਚ ਸਟਰਾਬੇਰੀ ਦੀ ਪਨੀਰੀ ਲਈ ਜਾਂਦੀ ਹੈ ਪਨੀਰੀ ਲਾਉਣ ਵੇਲੇ ਜੜ ਨੂੰ ਪੂਰੀ ਤਰ੍ਹਾਂ ਮਿੱਟੀ ਵਿੱਚ ਸੇਟ ਕਰ ਦਿਓ ਜੜ ਬਹਾਰ ਰਹਿਣ ਨਾਲ ਪੌਦੇ ਦੇ ਸੁੱਕਣ ਦਾ ਖ਼ਤਰਾ ਹੁੰਦਾ ਹੈ ਪੌਦੇ ਨੂੰ ਜਿਆਦਾ ਤਾਪਮਾਨ ਅਤੇ ਠੰਡ ਤੋਂ ਬਚਨ ਲਈ ਇਸਦੇ ਊਪਰ ਛਾਂ ਕਰਨੀ ਚਾਹੀਦੀ ਹੈ ਜੋ ਤੁਸੀਂ ਲੋ ਟਨਲ ਵਿਧੀ ਨਾਲ ਕਰ ਸਕਦੇ ਹੋ ਮੌਸਮ ਦਾ ਬਹੁਤ ਖਿਆਲ ਰੱਖਣਾ ਪੈਂਦਾ ਹੈ ਥੋੜੀ ਜਿਹੀ ਲਾਪਰਵਾਹੀ ਨਾਲ ਸਾਰੀ ਫ਼ਸਲ ਖ਼ਰਾਬ ਹੋ ਸਕਦੀ ਹੈ ਪਹਿਲੇ ਸਾਲ ਆਪਣੇ ਖੇਤ ਵਿੱਚ ਸਟ੍ਰਾਬੇਰੀ ਦੀ ਖੇਤੀ ਕਰਨ ਦਾ ਕੁੱਲ ਖਰਚਾ ਢਾਈ ਤੋ ਤਿੰਨ ਲੱਖ ਰੁਪਏ ਪ੍ਰਤੀ ਏਕੜ ਦੇ ਹਿਸਾਬ ਆ ਜਾਦਾ ਹੈ ਕਿਉਕਿ ਕਿਸਾਨ ਨੂੰ ਪਹਿਲੇ ਸਾਲ ਡਰਿੱਪ ਸਿਸਟਮ ਅਤੇ ਫੁਆਰਿਆਂ ਆਦਿ ਤੇ ਵੀ ਖਰਚ ਕਰਨਾ ਪੈਦਾ ਹੈ ਪਰ ਅਗਲੇ ਸਾਲਾ ਵਿੱਚ ਕਿਸਾਨ ਦਾ ਇਹ ਖਰਚ ਬਚ ਜਾਦਾ ਹੈ ਇਸਦੇ ਲਈ ਇੱਕ ਏਕੜ ਵਿੱਚ 40 ਬੈਡ ਬਣਦੇ ਹਨ ਅਤੇ ਇੱਕ ਬੈਡ ਤੇ 1000 ਸਟ੍ਰਾਬੇਰੀ ਦੇ ਪੌਦੇ ਲੱਗਦੇ ਹਨ ਇਸ ਤਰਾਂ ਇੱਕ ਏਕੜ ਵਿੱਚ ਚਾਲੀ ਹਜ਼ਾਰ ਪੌਦੇ ਲਾਏ ਜਾਦੇ ਹਨ, ਇੱਕ ਪੌਦਾ 3 ਤੋ 4 ਰੁਪਏ ਤੱਕ ਮਿਲ ਜਾਦਾ ਹੈ ਅਤੇ ਇਸ ਦਾ ਝਾੜ 50 ਤੋ 60 ਕੁਇੰਟਲ ਤੱਕ ਨਿਕਲ ਆਉਦਾ ਹੈ 25-30 ਕੁਇੰਟਲ ਗੋਬਰ ਦੀ ਖਾਦ ਇੱਕ ਏਕੜ ਵਿੱਚ ਪਾਓ ਇਹ ਖਾਦ ਇੱਕ ਸਾਲ ਵਿੱਚ ਪਾਉਣੀ ਹੁੰਦੀ ਹੈ ਫਿਰ 20 : 40 : 40 NPK KG / ਹੇਕਟਏਰ ਪਾਉਣੀ ਹੈ ਚੰਗੀ ਫਸਲ ਲਈ ਯੂਰਿਆ ਦੋ ਫ਼ੀਸਦੀ ਜ਼ਿੰਕ ਸਲਫੇਟ , ਅੱਧਾ ਪ੍ਰਤੀਸ਼ਤ ਕੈਲਸ਼ਿਅਮ ਸਲਫੇਟ ਅੱਧਾ ਫ਼ੀਸਦੀ ਅਤੇ ਬੋਰਿਕ ਏਸਿਡ 0 . 2 ਫ਼ੀਸਦੀ ਚੰਗੀ ਫਸਲ ਲਈ ਠੀਕ ਹੈ ਸਿੰਚਾਈ ਛੇਤੀ ਛੇਤੀ ਪਰ ਹਲਕੀ ਕਰਨੀ ਚਾਹੀਦੀ ਹੈ ਜਿਆਦਾ ਪਾਣੀ ਠੀਕ ਨਹੀਂ ਹੈ ਪੱਤੇ ਗਿੱਲੇ ਨਾ ਕਰੋ ਤੁਪਕਾ ਸਿੰਚਾਈ ਨਾਲ ਘੱਟ ਪਾਣੀ ਲੱਗ ਸਕਦਾ ਹੈ ਜੇਕਰ ਤੁਪਕਾ ਸਚਾਈ ਨਹੀਂ ਕਰ ਰਹੇ ਤਾਂ ਕਿਆਰੀਆਂ ਦੇ ਵਿਚਾਲੇ ਪਾਣੀ ਖਾਲ ਵਿੱਚ ਹੀ ਲਗਾਓ ਨਦੀਨ ਹੱਥ ਨਾਲ ਹਟਾਓ ਜਾਂ ਕੀੜੇ ਮਕੋੜੇ ਅਤੇ ਦੂਜੀਆ ਬਿਮਾਰਿਆ ਵੱਲ ਧਿਆਨ ਰੱਖਣਾ ਜਰੂਰੀ ਹੈ ਜੇਕਰ ਕੋਈ ਪੋਦਾ ਜਿਆਦਾ ਖਰਾਬ ਹੈ ਉਹਨੂੰ ਹਟਾ ਦਿਓ ਜਦੋਂ ਫਲ ਦਾ ਰੰਗ 70% ਲਾਲ ਹੋ ਜਾਵੇ ਤਾਂ ਤੋੜ ਲੈਣਾ ਚਾਹੀਦਾ ਹੈ ਜੇਕਰ ਮਾਰਕਿਟ ਦੂਰੀ ਉੱਤੇ ਹੈ ਤਾਂ ਥੋੜ੍ਹਾ ਸਖ਼ਤ ਹੀ ਤੋੜਨਾ ਚਾਹੀਦਾ ਹੈ ਤੁੜਵਾਈ ਵੱਖ ਵੱਖ ਦਿਨਾਂ ਵਿਚ ਕਰਨੀ ਚਾਹੀਦੀ ਹੈ ਸਟਰਾਬੇਰੀ ਦੀ ਪੈਕਿੰਗ ਪਲਾਸਟਿਕ ਦੀਆਂ ਪਲੇਟਾਂ ਵਿੱਚ ਕਰਨੀ ਚਾਹੀਦੀ ਹੈ ਇਸਨ੍ਹੂੰ ਹਵਾਦਾਰ ਜਗ੍ਹਾ ਉੱਤੇ ਰੱਖਣਾ ਚਾਹੀਦਾ ਹੈ ਜਿੱਥੇ ਤਾਪਮਾਨ ਪੰਜ ਡਿਗਰੀ ਹੋ ਇੱਕ ਦਿਨ ਦੇ ਬਾਅਦ ਸਟਰਾਬੇਰੀ ਦੀ ਪੈਕਿੰਗ ਦਾ ਤਾਪਮਾਨ ਜ਼ੀਰੋ ਡਿਗਰੀ ਹੋਣਾ ਚਾਹੀਦਾ ਹੈ ਮਾਰਕੀਟ ਵਿੱਚ ਸਟ੍ਰਾਬੇਰੀ ਔਸਤ 200 ਰੁਪਏ ਪ੍ਰਤੀ ਤੱਕ ਵਿਕਦੀ ਹੈ ਇਸ ਤਰਾਂ ਪੰਜ ਲੱਖ ਪ੍ਰਤੀ ਏਕੜ ਤੋ ਇਸ ਦੀ ਆਮਦਨ ਸ਼ੁਰੂ ਹੋ ਕੇ ਅੱਗੇ ਆਪਣੀ ਮਿਹਨਤ ਨਾਲ ਕਿਸਾਨ ਆਮਦਨ ਵਿੱਚ ਭਰਪੂਰ ਵਾਧਾ ਕਰ ਸਕਦਾ ਹੈ ਸਟ੍ਰਾਬੇਰੀ ਦੇ ਪੌਦੇ ਸਤੰਬਰ ਤੋ ਅਕਤੂਬਰ ਤੱਕ ਲਾਏ ਜਾਦੇ ਹਨ ਅਤੇ 3 ਮਹੀਨੇ ਬਾਦ ਇਹ ਫਲ ਦੇਣਾ ਸ਼ੁਰੂ ਕਰ ਦਿੰਦੇ ਹਨ ਇਸ ਦੀ ਫਸਲ ਅਪ੍ਰੈਲ ਤੱਕ ਚਲਦੀ ਹੈ ਇਸ ਦੀ ਮਾਰਕੀਟਿੰਗ ਵਿੱਚ ਕਿਸੇ ਤਰਾਂ ਦੀ ਪਰੇਸ਼ਾਨੀ ਨਹੀ ਹੈ ਉਹ ਏਲਨਾਬਾਦ,ਸਿਰਸਾ,ਹਨੂੰਮਾਨਗੜ,ਗੰਗਾਨਗਰ ਤੋ ਇਲਾਵਾ ਬਠਿੰਡਾ,ਮੋਗਾ ਜਲੰਧਰ,ਲੁਧਿਆਣਾ ਵਿੱਚ ਇਸ ਦੀ ਮਾਰਕੀਟਿੰਗ ਕਰ ਸਕਦੇ ਹਾਂ ਜੇਕਰ ਜ਼ਿਆਦਾ ਮਾਤਰਾ ਵਿੱਚ ਸਟ੍ਰਾਬੇਰੀ ਹੋਵੇ ਤਾਂ ਦਿੱਲੀ ਇਸ ਦੀ ਮੁੱਖ ਮਾਰਕੀਟ ਹੈ ਧੰਨਵਾਦ
Posted by GURPREET SINGH SIDHU
Punjab
13-11-2019 08:08 PM
sahi jaankari lyi kirpa krke kisam da naam dso ji, taa ji tuhanu poori jaankari diti jaa ske.

Posted by Navdeep Singh
Punjab
13-11-2019 08:02 PM
Navdeep ji jekar tuci desi cow rakhna chahunde ho tan Sahiwal nasal di cow rkh skde ho, jekar tuci vedesi cow rkhni hai tan tuci HF, Jersey cow rkh skde ho..

Posted by Sandeep Narayan Verma
Uttar Pradesh
13-11-2019 08:02 PM
श्रीमान जी, आलू की खेती के लिए तापमान 14-25* C होना चाहिए यह फसल बहुत तरह की मिट्टी जैसे कि रेतली, नमक वाली, दोमट और चिकनी मिट्टी में उगाई जा सकती है अच्छे जल निकास वाली, जैविक तत्व भरपूर, रेतली से दरमियानी ज़मीन में फसल अच्छी पैदावार देती है यह फसल नमक वाली तेजाबी ज़मीनों में भी उगाई जा सकती है पर बहुत ज्यादा जल जमाव .... (Read More)
श्रीमान जी, आलू की खेती के लिए तापमान 14-25* C होना चाहिए यह फसल बहुत तरह की मिट्टी जैसे कि रेतली, नमक वाली, दोमट और चिकनी मिट्टी में उगाई जा सकती है अच्छे जल निकास वाली, जैविक तत्व भरपूर, रेतली से दरमियानी ज़मीन में फसल अच्छी पैदावार देती है यह फसल नमक वाली तेजाबी ज़मीनों में भी उगाई जा सकती है पर बहुत ज्यादा जल जमाव और खारी या नमक वाली ज़मीन इस फसल की खेती के लिए उचित नहीं होती इसकी किस्मे जैसे के Kufri Bahar, Kufri Badshah, Kufri Sutlaj, Kufri Anand, Kufri Pukhraj, Kufri Chipsona 2, Kufri Chipsona 1, Kufri Chandramukhi, Kufri Jyoti, Kufri Ashoka, Kufri Lalima की बुवाई कर सकते है खेत को एक बार 30 सैं.मी. गहरा जोतकर अच्छे ढंग से बैड बनाएं जोताई के बाद 2-3 बार तवियां फेरें और फिर 2-3 बार सुहागा फेरें बिजाई से पहले खेत में नमी की मात्रा बनाकर रखें बिजाई के लिए दो ढंग मुख्य तौर पर प्रयोग किए जाते हैं 1. मेंड़ और खालियों वाला ढंग 2. समतल बैडों वाला ढंग अगेती बिजाई के लिए, सितंबर के आखिरी सप्ताह से अक्तूबर का पहला सप्ताह खेती के लिए उपयुक्त होता है मुख्य फसल के लिए अक्तूबर का दूसरे से चौथा सप्ताह बिजाई के लिए उपयुक्त समय होता है गांठों के आकार के अनुसार रोपाई का फासला विभिन्न होता है बिजाई के लिए कतार से कतार में 60 सैं.मी. और पौधे से पौधे में 20 सैं.मी. फासले का प्रयोग करें बीज बोने के बाद बीजों को 8-10 सैं.मी. तक मिट्टी की परत से ढक दें बिजाई के लिए ट्रैक्टर से चलने वाली सेमी ऑटोमेटिक या ऑटोमैटिक प्लांटर का प्रयोग करें रोपाई के लिए बड़ी आकार की गांठों का प्रयोग किया जाता है बिजाई के लिए 13-15 क्विंटल बीज प्रयोग किए जाते हैं बिजाई के लिए सेहतमंद आलू ही चुने बिजाई से पहले आलुओं को कोल्ड स्टोर से निकालकर 1-2 सप्ताह के लिए छांव वाले स्थान पर रखें ताकि वे अंकुरित हो जायें आलुओं के सही अंकुरन के लिए उन्हें जिबरैलिक एसिड 1 ग्राम प्रति 10 लीटर पानी में मिलाकर एक घंटे के लिए उपचार करें फिर छांव में सुखाएं और 10 दिनों के लिए हवादार कमरे में रखें फिर काटकर आलुओं को मैनकोजेब 0.5 प्रतिशत घोल (5 ग्राम प्रति लीटर पानी) में 10 मिनट के लिए भिगो दें इससे आलुओं को शुरूआती समय में गलने से बचाया जा सकता है आलुओं को गलने और जड़ों में कालापन रोग से बचाने के लिए साबुत और काटे हुए आलुओं को 6 प्रतिशत मरकरी के घोल (टैफासन) 0.25 प्रतिशत (2.5 ग्राम प्रति लीटर पानी) में डालें यदि संभव हो, तो आलू की रोपाई से पहले, हरी खाद वाली फसलें जैसे सनई, जंतर आदि फसलें उगायें और उन्हें मिट्टी में अच्छी तरह दबायें यदि हरी खाद उपलब्ध ना हो तो गली सड़ी रूड़ी की खाद या गाय का गला हुआ गोबर 60-80 क्विंटल प्रति एकड़ में खेत की तैयारी के समय रोपाई से दो सप्ताह पहले डालें फसल की उचित वृद्धि के लिए नाइट्रोजन 40-50 किलो (90-110 किलो यूरिया), फासफोरस 24-32 किलो (150-200 किलो सिंगल सुपर फासफेट) और पोटाश 40-50 किलो (66-85 किलो म्यूरेट ऑफ पोटाश) की मात्रा प्रति एकड़ में डालें बिजाई से पहले सिंचाई करें बिजाई के बाद 10-12 दिनों के अंदर अंदर पहली सिंचाई करें दूसरी सिंचाई पहली सिंचाई के 7 दिनों के बाद करें बाकी की सिंचाइयां जलवायु की परिस्थितियों और जरूरत के अनुसार करें गांठे बनने की अवस्था सिंचाई के लिए बहुत महत्तवपूर्ण होती है इस अवस्था में पानी की कमी ना होने दें ज्यादा सिंचाई ना करें इससे गलने की बीमारी का खतरा बढ़ता है पुटाई से 10-12 दिन पहले सिंचाई बंद कर दें धन्यवाद

Posted by Karan
Punjab
13-11-2019 08:02 PM
ਤੁਸੀ ਓਹਨਾ ਨੂੰ ਪੇਟ ਦੇ ਕੀੜਿਆਂ ਲਈ Flukarid-DS ਗੋਲੀ ਦਿਓ ਅਤੇ ਓਹਨਾ ਨੂੰ ਤੁਸੀ Enerdyna liquid 100-100ml ਸਵੇਰੇ ਸ਼ਾਮ ਰੋਜ, Gouge ਪਾਊਡਰ ਦੇ 1-1 ਪਾਉਚ ਸਵੇਰੇ ਸ਼ਾਮ ਦਿਓ, ਅਤੇ Calcimust gold liquid 50ml ਰੋਜਾਨਾ ਦਿਓ ਇਸਦਾ ਵੀ ਦੁੱਧ ਵਧਾਉਣ ਵਿਚ ਵਧਿਆ ਰਿਜਲਟ ਹੈ ਬਾਕੀ ਤੁਸੀ ਖੁਰਾਕ ਦਾ ਪੂਰਾ ਧਿਆਨ ਰੱਖੋ.

Posted by sukhmandhaliwal
Punjab
13-11-2019 07:59 PM
je karand ho gyi hai ta tuhanu karand tod ke jrurat anusar bijayi krni pvegi ji.

Posted by inder
Madhya Pradesh
13-11-2019 07:59 PM
श्रीमान जी यह फंगस का हमला हुआ है, इसकी रोकथाम के लिए आप carbendazim @ 4gm प्रति लीटर पानी के हिसाब से स्प्रे करें, धन्यवाद
Posted by गोलू
Uttar Pradesh
13-11-2019 07:57 PM
श्रीमान जी आप गेंदे की किस्मे जैसे के African Marigold: इस किस्म की फसल 90 सैं.मी. तक लम्बी होती है इसके फूल बड़े आकार के और लैमन, पीले, सुनहरे, संतरी और गहरे पीले रंग के होते हैं यह लम्बे समय की किस्म है इसकी अन्य किस्में जैसे Giant Double African Orange, Crown of Gold, Giant Double African Yellow, Chrysanthemum Charm, Golden Age, Cracker Jack आदि हैं French Marigold: यह छोटे कद की जल्दी पकने वाली किस्म.... (Read More)
श्रीमान जी आप गेंदे की किस्मे जैसे के African Marigold: इस किस्म की फसल 90 सैं.मी. तक लम्बी होती है इसके फूल बड़े आकार के और लैमन, पीले, सुनहरे, संतरी और गहरे पीले रंग के होते हैं यह लम्बे समय की किस्म है इसकी अन्य किस्में जैसे Giant Double African Orange, Crown of Gold, Giant Double African Yellow, Chrysanthemum Charm, Golden Age, Cracker Jack आदि हैं French Marigold: यह छोटे कद की जल्दी पकने वाली किस्में हैं इसके फूल छोटे आकार के और पीले, संतरी, सुनहरे पीले, लाल जंग और महोगनी रंग के होते हैं इसकी अन्य किस्में जैसे Rusty Red, Butter Scotch, Red Borcade, Star of India, Lemon drop आदि हैं Pusa Basanti Gainda: यह लम्बे समय की किस्म है इसका पौधा 58.80 सैं.मी. लम्बा और गहरे हरे रंग के पत्ते होते हैं इसके फूल सल्फर पीले, दोहरे और कारनेशन किस्म के होते हैं Pusa Narangi Gainda: फूल निकलने के लिए 125-136 दिनों की आवश्यकता होती है इसका पौधा लम्बा और कद में 73.30 सैं.मी. का होता है और पत्ते गहरे हरे रंग के होते हैं इसके फूल संतरी रंग के और कारनेशन किस्म के होते हैं फूल घने और दोहरी परत वाले होते हैं इसके ताजे फूलों की पैदावार 140 क्विंटल प्रति एकड़ होती है की बिजाई करें, धन्यवाद
Posted by गोलू
Uttar Pradesh
13-11-2019 07:46 PM
श्रीमान जी , इस फसल की खेती अलग-अलग मिट्टी की किस्मों में की जा सकती है जैसे कि रेतली, चिकनी, दोमट, काली, लाल मिट्टी, जिसमें पानी के निकास का सही प्रबंध हो इसकी अच्छी पैदावार के लिए इसे अच्छे निकास वाली रेतली मिट्टी में उत्तम जैविक तत्वों से उगाया जा सकता है अच्छे निकास वाली मिट्टी की पी एच 7-8.5 होनी चाहिए यह तेजा.... (Read More)
श्रीमान जी , इस फसल की खेती अलग-अलग मिट्टी की किस्मों में की जा सकती है जैसे कि रेतली, चिकनी, दोमट, काली, लाल मिट्टी, जिसमें पानी के निकास का सही प्रबंध हो इसकी अच्छी पैदावार के लिए इसे अच्छे निकास वाली रेतली मिट्टी में उत्तम जैविक तत्वों से उगाया जा सकता है अच्छे निकास वाली मिट्टी की पी एच 7-8.5 होनी चाहिए यह तेजाबी और खारी मिट्टी में भी उगने योग्य फसल है ज्यादा तेजाबी मिट्टी में खेती ना करें अगेती फसल के लिए हल्की मिट्टी लाभदायक है, जबकि अच्छी पैदावार के लिए चिकनी, दोमट और बारीक रेत वाली मिट्टी बहुत अच्छी है प्रसिद्ध किस्में :- Pusa Rubi,Pusa Early Dwarf,Punjab Chhuhara,Pusa 120,Roma Selection 120 टमाटर के बीजों को पहले नर्सरी में बोया जाता है और फिर हन्हें मुख्य खेत में रोपित किया जाता है मुख्य खेत की तैयार के लिए अच्छी जोताई और समतल मिट्टी की जरूरत होती है मिट्टी को भुरभुरा बनाने के लिए 4-5 बार जोताई करें फिर मिट्टी को समतल करने के लिए सुहागा फेरें आखिरी जोताई के समय गाय का गला हुआ गोबर 60 किलो को मिट्टी में अच्छी तरह मिलायें रोपाई के लिए 80-90 सैं.मी. चौड़े बैड तैयार करें बिजाई से एक महीना पहले मिट्टी को धूप में खुला छोड़ दें आवश्यक लंबाई और 80-90 सैं.मी. की चौड़ाई वाले बैडों पर टमाटर के बीजों को बोयें बिजाई के बाद बैडों को प्लास्टिक शीट से ढक दें और फूलों को पानी देने वाले डब्बे से रोज़ सुबह बैडों की सिंचाई करें रोगाणुओं के हमले से फसल को बचाने के लिए नर्सरी वाले बैडों को अच्छे नाइलोन के जाल से ढक दें पनीरी लगाने के 10-15 दिन बाद 19:19:19 के साथ सूक्ष्म तत्वों की 2.5-3 ग्राम प्रति लीटर पानी में मिलाकर स्प्रे करें पौधों को तंदरूस्त और मजबूत बनाने के लिए बिजाई के 20 दिन बाद लीहोसिन 1 मि.ली. प्रति लीटर पानी की स्प्रे करें प्रभावित पौधों को खेत में से उखाड़ दें ताकि पौधों का फासला सही रखा जा सके और निरोग पौधों को रोगाणुओं से भी बचाया जा सके रोगाणुओं से बचाव के लिए मिट्टी में नमी बनाये रखें यदि सूखा दिखे तो पौधों को रोपाई से पहले मैटालैक्सिल 2.5 ग्राम प्रति लीटर पानी में 2-3 बार भिगोयें बिजाई से 25-30 दिन बाद पनीरी वाले पौधे तैयार हो जाते हैं और इनके 3-4 पत्ते निकल आते हैं यदि पौधों की आयु 30 दिन से ज्यादा हो तो इसके उपचार के बाद इसे खेत में लगायें पनीरी उखाड़ने के 24 घंटे पहले बैडों को पानी लगायें ताकि पौधे आसानी से उखाड़े जा सकें बसंत के मौसम के लिए नर्सरी नवंबर-दिसंबर में तैयार करें जबकि सर्दियों में KE मौसम में सितंबर-अक्तूबर महीने में नर्सरी में बीजों को बोयें किस्म और विकास के ढंग मुताबिक 60x30 सैं.मी. या 75x60 सैं.मी. या 75x75 सैं.मी. का फासला रखें में छोटे कद वाली किस्म के लिए 75x30 सैं.मी. का फासला रखें और वर्षा वाले मौसम के लिए 120-150x30 सैं.मी. का फासला रखें नर्सरी में बीजों को 0-5 सैं.मी. गहराई में बोयें और मिट्टी से ढक दें पनीरी को उखाड़कर खेत में लगा दें एक एकड़ खेत में बिजाई के लिए 100-160 ग्राम बीज नए पौधे तैयार करने के लिए प्रयोग किए जाते हैं हाइब्रिड किस्मों के लिए 80-100 ग्राम बीज प्रति एकड़ में प्रयोग करें नाइट्रोजन 40-60 किलो (90-130 किलो यूरिया), फासफोरस 25 किलो (155 किलो एस एस पी) और पोटाश 25 किलो (42 किलो एम ओ पी) की मात्रा प्रति एकड़ में प्रयोग करें नए पौधों की रोपाई के 2-3 सप्ताह पहले फासफोरस और पोटाश की पूरी मात्रा और नाइट्रोजन की एक तिहाई मात्रा डालें बाकी बची नाइट्रोजन को दो भागों में बांटकर रोपाई 30 और 50 दिनों के बाद डालें लगातार गोडाई करें और जड़ों को मिट्टी लगाएं 45 दिनों तक खेत को नदीन रहित रखें यदि नदीन नियंत्रण से बाहर हो जायें तो यह 70-90 प्रतिशत पैदावार कम कर देंगे रोपाई से पहले मुख्य खेत में पैंडीमैथालीन 0.4 किलो को प्रति एकड़ में लगाएं यदि नदीनों की संख्या ज्यादा हो तो नदीनों के अंकुरण के बाद सैंकर 0.2 किलो की प्रति एकड़ में स्प्रे करें नदीनों को रोकने के साथ साथ मिट्टी के तापमान को कम करने के लिए मलचिंग भी प्रभावी तरीका है रोपाई के बाद दो से तीन दिन हल्की सिंचाई करें मिट्टी में नमी के आधार पर सर्दियों में 12 से 15 दिनों के अंतराल पर सिंचाई करें और गर्मियों में 6-7 दिनों के अंतराल पर सिंचाई करें फूल निकलने की अवस्था सिंचाई के लिए गंभीर होती हैं इस अवस्था में पानी की कमी से फूलों का गिरना बढ़ता है और फलों और उत्पादकता पर इसका गंभीर प्रभाव पड़ता है बहुत सारी जांचों के मुताबिक यह पता चला है कि हर पखवाड़े में आधा इंच सिंचाई करने से जड़ें ज्यादा फैलती हैं और इससे पैदावार भी अधिक हो जाती है अत्याधिक सिंचाई ना करें पनीरी लगाने के 70 दिन बाद पौधे फल देना शुरू कर देते हैं कटाई का समय इस बात पर निर्भर करता है कि फलों को दूरी वाले स्थानों पर लेकर जाना है या ताजे फलों को मंडी में ही बेचना है आदि पके हरे टमाटर जिनका 1/4 भाग गुलाबी रंग का हो, लंबी दूरी वाले स्थानों पर लेकर जाने के लिए प्रयोग किए जाते हैं ज्यादातर सारे फल गुलाबी या लाल रंग में बदल जाते हैं, पर सख्त गुद्दे वाले टमाटरों को नज़दीक की मंडी में बेचा जा सकता है अन्य उत्पाद बनाने और बीज तैयार करने के लिए पूरी तरह पके और नर्म गुद्दे वाले टमाटरों का प्रयोग किया जाता है कटाई के बाद आकार के आधार पर टमाटरों को छांट लिया जाता है इसके बाद टमाटरों को बांस की टोकरियों या लकड़ी के बक्सों में पैक कर लिया जाता है लंबी दूरी पर लिजाने के लिए टमाटरों को पहले ठंडा रखें ताकि इनके खराब होने की संभावना कम हो जाये पूरी तरह पके टमाटरों से जूस, सीरप और कैचअप आदि उत्पाद भी तैयार किए जाते हैं धन्यवाद

Posted by prajjval singh
Chattisgarh
13-11-2019 07:35 PM
gehun utpadan mein bharat ka doosra sthan hai, jb ki pehla sthaan China ka hai.

Posted by palwinder singh
Punjab
13-11-2019 07:32 PM
Plawinder ji, tamatar, mirch ate bangan lagan da sahi sama october to november tak da hai , tuc is di paneeri hun lga sakde ho

Posted by ਕੁਲਦੀਪ ਸਿੰਘ
Punjab
13-11-2019 07:26 PM
ਜੇਕਰ ਗੋਹੇ ਦਾ ਬੰਨ ਪੈ ਗਿਆ ਹੈ ਤਾਂ ਤੁਸੀ ਉਸ ਨੂੰ 400 ਗ੍ਰਾਮ ਜੰਗ ਜੰਗਹਰੜ, 200 ਗ੍ਰਾਮ ਤਿਰਫਲਾ , 400 ਗ੍ਰਾਮ ਸਤਿਆਨਾਸ਼ੀ , ਇਨ੍ਹਾਂ ਨੂੰ ਚੰਗੀ ਤ੍ਰਾਹ ਮਿਲਾ ਕੇ ਇਸਦਾ ਪਾਊਡਰ ਬਣਾ ਲਓ , ਫਿਰ ਤੁਸੀ 2 ਲਿਟਰ ਪਾਣੀ ਗਰਮ ਕਰੋ ਅਤੇ ਉਸ ਵਿੱਚ ਇਹ ਪਾਓ ਫਿਰ ਠੰਡਾ ਕਰਕੇ ਨਾਲ਼ ਦੀ ਮਦਦ ਨਾਲ ਪਿਲਾਓ , ਇਹ ਚੀਜਾਂ ਤੁਹਾਨੂੰ ਕਿਸੀ ਵੀ ਪੰਸਾਰੀ ਦੀ ਦੁਕਾਨ ਤੋਂ ਮਿਲ ਜਾਣਗੀਆਂ , ਇਸ ਨਾਲ ਅਗਲੇ ਦਿਨ ਫਰਕ ਪ.... (Read More)
ਜੇਕਰ ਗੋਹੇ ਦਾ ਬੰਨ ਪੈ ਗਿਆ ਹੈ ਤਾਂ ਤੁਸੀ ਉਸ ਨੂੰ 400 ਗ੍ਰਾਮ ਜੰਗ ਜੰਗਹਰੜ, 200 ਗ੍ਰਾਮ ਤਿਰਫਲਾ , 400 ਗ੍ਰਾਮ ਸਤਿਆਨਾਸ਼ੀ , ਇਨ੍ਹਾਂ ਨੂੰ ਚੰਗੀ ਤ੍ਰਾਹ ਮਿਲਾ ਕੇ ਇਸਦਾ ਪਾਊਡਰ ਬਣਾ ਲਓ , ਫਿਰ ਤੁਸੀ 2 ਲਿਟਰ ਪਾਣੀ ਗਰਮ ਕਰੋ ਅਤੇ ਉਸ ਵਿੱਚ ਇਹ ਪਾਓ ਫਿਰ ਠੰਡਾ ਕਰਕੇ ਨਾਲ਼ ਦੀ ਮਦਦ ਨਾਲ ਪਿਲਾਓ , ਇਹ ਚੀਜਾਂ ਤੁਹਾਨੂੰ ਕਿਸੀ ਵੀ ਪੰਸਾਰੀ ਦੀ ਦੁਕਾਨ ਤੋਂ ਮਿਲ ਜਾਣਗੀਆਂ , ਇਸ ਨਾਲ ਅਗਲੇ ਦਿਨ ਫਰਕ ਪੈ ਜਾਵੇਗੀ ਅਤੇ ਉਸਦਾ ਪੇਟ ਸਾਫ਼ ਹੋ ਜਾਵੇਗਾ ..
Expert Communities
We do not share your personal details with anyone
We do not share your personal details with anyone
Sign In
Registering to this website, you accept our Terms of Use and our Privacy Policy.
Your mobile number and password is invalid
We have sent your password on your mobile number
All fields marked with an asterisk (*) are required:
Sign Up
Registering to this website, you accept our Terms of Use and our Privacy Policy.
All fields marked with an asterisk (*) are required:
Please select atleast one option
Please select text along with image









