Posted by GURPREET SINGH SIDHU
Punjab
14-11-2019 08:38 PM
Shrimaan ji , Fenvalrate faldaar butein vich keet de hamle di roktham karda hai, ate es salt da nam leke tuc kisi vi company da khareed sakde ho, dhanwqad
Posted by Gurjeet Singh
Punjab
14-11-2019 08:33 PM
ਤੁਸੀ ਘਰ ਵਿਚ ਪਸ਼ੂਆਂ ਲਈ ਮਸਾਲਾ ਤਿਆਰ ਕਰ ਸਕਦੇ ਹੋ ਇਸ ਨਾਲ ਪਸ਼ੂ ਦਾ ਹਾਜਮਾ ਵੀ ਠੀਕ ਰਹਿੰਦਾ ਹੈ ਅਤੇ ਵਧਿਆ ਗਰੋਥ ਵੀ ਹੁੰਦੀ ਹੈ , 10 ਕਿਲੋ ਕੋੜਤੁੱਮੇ, 1 ਕਿਲੋ ਸਰਫਲਾ (ਪੰਸਾਰੀ ਤੋਂ ਮਿਲ ਜਾਏਗਾ), 1 ਕਿਲੋ ਨਮਕ (ਪਾਕਿਸਤਾਨੀ, ਕਾਲਾ ਆਦਿ ਕੁੱਲ 4 ਨਮਕ 250 ਗ੍ਰਾਮ ਇਕੱਲੇ-ਇਕੱਲੇ ਪਾਓ), ਅੱਧਾ ਕਿਲੋ ਅਜਵੈਣ (4 ਕਿਸਮ ਦੀ ਅਜਵੈਣ ਦੁਕਾਨ ਤੋਂ ਮਿਲ ਜਾਏਗੀ), 200 ਗ੍ਰਾਮ ਕਾਲੀ ਜੀਰੀ, 200 ਗ੍ਰਾਮ ਕੜੂ, 200 ਗ੍ਰ.... (Read More)
ਤੁਸੀ ਘਰ ਵਿਚ ਪਸ਼ੂਆਂ ਲਈ ਮਸਾਲਾ ਤਿਆਰ ਕਰ ਸਕਦੇ ਹੋ ਇਸ ਨਾਲ ਪਸ਼ੂ ਦਾ ਹਾਜਮਾ ਵੀ ਠੀਕ ਰਹਿੰਦਾ ਹੈ ਅਤੇ ਵਧਿਆ ਗਰੋਥ ਵੀ ਹੁੰਦੀ ਹੈ , 10 ਕਿਲੋ ਕੋੜਤੁੱਮੇ, 1 ਕਿਲੋ ਸਰਫਲਾ (ਪੰਸਾਰੀ ਤੋਂ ਮਿਲ ਜਾਏਗਾ), 1 ਕਿਲੋ ਨਮਕ (ਪਾਕਿਸਤਾਨੀ, ਕਾਲਾ ਆਦਿ ਕੁੱਲ 4 ਨਮਕ 250 ਗ੍ਰਾਮ ਇਕੱਲੇ-ਇਕੱਲੇ ਪਾਓ), ਅੱਧਾ ਕਿਲੋ ਅਜਵੈਣ (4 ਕਿਸਮ ਦੀ ਅਜਵੈਣ ਦੁਕਾਨ ਤੋਂ ਮਿਲ ਜਾਏਗੀ), 200 ਗ੍ਰਾਮ ਕਾਲੀ ਜੀਰੀ, 200 ਗ੍ਰਾਮ ਕੜੂ, 200 ਗ੍ਰਾਮ ਕਾਲੀ ਮਿਰਚ,1 ਕਿਲੋ ਮੇਥੇ ਲਓ ਇਹ ਸਭ ਕੁੱਝ ਮਿਲਾ ਕੇ ਇੱਕ ਮਿੱਟੀ ਦੇ ਘੜੇ ਚ ਪਾ ਕੇ 10 ਦਿਨ ਲਈ ਛੱਡ ਦਿਓ ਅਤੇ ਥੋੜੇ ਸਮੇਂ ਬਾਅਦ ਘੜੇ ਨੂੰ ਹਿਲਾਉਂਦੇ ਰਹੋ ਜਦ ਇਹ ਸਭ ਸੁੱਕ ਗਿਆ ਤਾਂ ਇਸਨੂੰ ਬਾਹਰ ਕੱਢ ਪਾਊਡਰ ਬਣਾ ਲਓ ਅਤੇ ਰੋਜ਼ਾਨਾ 25 ਗ੍ਰਾਮ ਦਿੰਦੇ ਰਹੋ

Posted by Navdeep Singh
Punjab
14-11-2019 08:33 PM
Awara cow di nasal pta krni mushkil hai kyuki jiss ton ohh cross hundi hai usdi v pakki nasal nhi hundi, ohna nu dogli nasal bolia ja skda hai, jekar uss nu sahi breed jiwe HF, Sahiwal, Jersey nal cross krwaya jawe tan usde bache vich ohna de guun hunde hai fir tuci holi holi nasal sudar kr skde ho.

Posted by rk
Uttar Pradesh
14-11-2019 08:31 PM
श्रीमान जी, कृपया आप फसल की फोटो भेजें तजो आपको देख कर इसके बारे में पूरी जानकारी दी जा सके, धन्यवाद

Posted by shpinder
Punjab
14-11-2019 08:29 PM
tuci uss nu Triquin injection 250mg lgwao ate Beriwin injection 15ml lgwao ji, iss nal frak paa jawega..
Posted by Mohit Kumar
Uttar Pradesh
14-11-2019 08:25 PM
एक या दो बार गोडाई करना यह किस्म पर निर्भर करता है पहली गोडाई फसल बीजने के 3-4 सप्ताह बाद जब फसल 2 या 3 पत्ते निकाल लेती है और दूसरी गोडाई फूल निकलने से पहले करें मटरों की खेती के लिए नदीन नाशकों का प्रयोग बहुत प्रभावशाली होता है नदीनों की रोकथाम के लिए पैंडीमैथालीन 1 लीटर प्रति एकड़ और बसालिन 1 लीटर प्रति एकड़ का .... (Read More)
एक या दो बार गोडाई करना यह किस्म पर निर्भर करता है पहली गोडाई फसल बीजने के 3-4 सप्ताह बाद जब फसल 2 या 3 पत्ते निकाल लेती है और दूसरी गोडाई फूल निकलने से पहले करें मटरों की खेती के लिए नदीन नाशकों का प्रयोग बहुत प्रभावशाली होता है नदीनों की रोकथाम के लिए पैंडीमैथालीन 1 लीटर प्रति एकड़ और बसालिन 1 लीटर प्रति एकड़ का प्रयोग फसल बीजने से 48 घंटों के अंदर अंदर करें
Posted by Pancham.g
Bihar
14-11-2019 08:23 PM
usko aap pett ke kirro ke liye Flukarid-DS bolus den aur rojana 35-40kg rojana hara chara den aur usko achi feed dalen, usko her 3 mahine ke badd pett ke kirro ki goli jrur den, khurak ke sath sath aap Enerboost powder 50-50gm subah sham den isse kamjori durr rehti hai..

Posted by arashdeep singh
Punjab
14-11-2019 08:22 PM
Arshdeep ji, PBW 725 ate HD 3086 di biaji da sahi sama october de chothe hafte to leke november de chothe hafte tak da hai, dhanwad

Posted by amarpal singh
Punjab
14-11-2019 08:19 PM
ਸ਼੍ਰੀਮਾਨ ਜੀ, ਕਿਰਪਾ ਕਰਕੇ ਝੋਨੇ ਦੀ ਕਿਸਮ ਦਾ ਪੂਰਾ ਨਾਮ ਦੱਸੋ ਤਾਂਜੋ ਤੁਹਾਨੂੰ ਇਸਦੀ ਪੂਰੀ ਜਾਣਕਾਰੀ ਦਿਤੀ ਜਾ ਸਕੇ, ਧੰਨਵਾਦ

Posted by आशुतोष
Madhya Pradesh
14-11-2019 08:18 PM
Shrimaan ji, HD 3226 ka seed Krishi vighyan kender mein nahi hai, ap iske beej lene ke liye Dr Dalip Gosain 9215757800 se samparak karein, dhanywad

Posted by prahalad ram
Rajasthan
14-11-2019 08:12 PM
अच्छे निकास वाली और उच्च कार्बनिक पदार्थों वाली मिट्टी जीरे की खेती के लिए उपयुक्त होती है जीरे की खेती के लिए उस ज़मीन का चयन करें जहां 3-4 वर्ष जीरे की खेती ना की गई हो निम्नलिखित किस्में राजस्थान में लगाने के लिए उपयुक्त हैं: RZ 19: यह किस्म राजस्थान के सभी क्षेत्रों में उगाने के लिए उपयुक्त है यह 125 दिनों में क.... (Read More)
अच्छे निकास वाली और उच्च कार्बनिक पदार्थों वाली मिट्टी जीरे की खेती के लिए उपयुक्त होती है जीरे की खेती के लिए उस ज़मीन का चयन करें जहां 3-4 वर्ष जीरे की खेती ना की गई हो निम्नलिखित किस्में राजस्थान में लगाने के लिए उपयुक्त हैं: RZ 19: यह किस्म राजस्थान के सभी क्षेत्रों में उगाने के लिए उपयुक्त है यह 125 दिनों में कटाई के लिए तैयार हो जाती है इसका पौधा लंबा, फूल गुलाबी रंग के, और दाने बड़े होते हैं इसकी औसतन पैदावार 4.2 क्विंटल प्रति एकड़ होती है
RZ 209: यह किस्म राजस्थान के सभी क्षेत्रों में उगाने के लिए उपयुक्त है इसके दाने स्वाह जैसे भूरे रंग के होते हैं यह किस्म 120-125 दिनों में कटाई के लिए तैयार हो जाती है इसकी औसतन पैदावार 2.4-2.8 क्विंटल प्रति एकड़ होती है यह किस्म पत्तों के ऊपरी धब्बा रोगों की प्रतिरोधक है
Gujarat Jeera 2: यह किस्म गुजरात कृषि विश्वविद्यालय द्वारा विकसित की गई है इसकी औसतन पैदावार 2.8 क्विंटल प्रति एकड़ होती है यह किस्म 100 दिनों में कटाई के लिए तैयार हो जाती है
RZ 223: यह मध्यम समय की किस्म है यह किस्म 120-130 दिनों में कटाई के लिए तैयार हो जाती है इसकी औसतन पैदावार 2.4 क्विंटल प्रति एकड़ होती है
GC 4: यह किस्म राजस्थान के सभी क्षेत्रों में उगाने के लिए उपयुक्त है इसके दाने स्वाह जैसे भूरे रंग के होते हैं यह किस्म 120 दिनों में कटाई के लिए तैयार हो जाती है इसकी औसतन पैदावार 2.4-2.8 क्विंटल प्रति एकड़ होती है जीरे की खेती के लिए अच्छी तरह से जोती गई और समतल ज़मीन की आवश्यकता होती है मिट्टी के भुरभुरा होने तक खेत की जोताई करें और मिट्टी को समतल करने के लिए सुहागा फेरें जीरे की बिजाई के लिए 15 से 30 नवंबर सही समय होता है कतारों में बिजाई के लिए दो पंक्तियों में 30 सैं.मी. फासले का प्रयोग करें बीजों को 10 सैं.मी. की गहराई में बोयें एक एकड़ खेत में बिजाई के लिए 4-6 किलो बीज पर्याप्त होते हैं खादों की सही मात्रा के लिए और अतिरिक्त प्रयोग ना करने के लिए मिट्टी की जांच सबसे महत्तवपूर्ण कदम है फसल की अच्छी वृद्धि और अच्छी उपज के लिए नाइट्रोजन 15 किलो (यूरिया 32 किलो) फासफोरस 11 किलो (एस एस पी 66 किलो) और पोटाश 7 किलो (म्यूरेट ऑफ पोटाश 12 किलो) को गाय के गले हुए गोबर 2 टन के साथ प्रति एकड़ में डालें
नाइट्रोजन की आधी मात्रा और फासफोरस और पोटाश की पूरी मात्रा बिजाई के समय डालें बाकी बची नाइट्रोजन की आधी मात्रा बिजाई के 35 दिनों के बाद डालें बिजाई के तुरंत बाद हल्की सिंचाई करें दूसरी सिंचाई बिजाई के 10 दिनों के बाद अंकुरण के समय करें उसके बाद तीन सिंचाइयां पर्याप्त होती हैं बाकी की सिंचाइयां बिजाई के 35वें, 60वें और 85वें दिन बाद करें एक बार फसल पक जाये तब सिंचाई ना करें बीज भरने की अवस्था में सिंचाई पत्तों के ऊपरी धब्बा रोग, चेपे और झुलस रोग के हमले को बढ़ाती है जीरे की फसल में नदीन गंभीर समस्या होते हैं नदीनों की जांच के लिए लगातार गोडाई और निराई करें पहली गोडाई बिजाई के 30-35 दिनों के बाद करें जब जीरे की फसल 5 सैं.मी. कद की हो जाये दूसरी गोडाई पहली गोडाई के 20-25 दिन बाद करें और खेत को नदीन रहित रखें रासायनिक रोकथाम के लिए बिजाई के 1-2 दिन बाद पैंडीमैथालीन 1 लीटर को 200 लीटर पानी में मिलाकर स्प्रे करें जीरे की फसल 100-115 दिनों में कटाई के लिए तैयार हो जाती है कटाई दरांती की सहायता से की जाती है फसल की कटाई के बाद पौधों को फर्श पर खिलार दें और धूप में सुखाने के लिए छोड़ दें धूप में अच्छे से सुखाने के बाद पौधों से दाने अलग कर लें
Posted by Gurjeet Singh
Punjab
14-11-2019 08:06 PM
isde lai tuci 1 chamch namak, 1 chamch fatkadi lao ate ehna nu 1 glass pani vich gholl lao ate 3-4 varr akha vich maro, iss nal frak paa jawega..
Posted by Gurpreet Singh
Punjab
14-11-2019 08:05 PM
ਸ਼੍ਰੀਮਾਨ ਜੀ, ਆਪਣੀ ਫ਼ਸਲ ਵਿਚ ਸੁੰਡੀ ਦਾ ਹਮਲਾ ਚੈੱਕ ਕਰੋ, ਅਗਰ ਸੁੰਡੀ ਮੌਜੂਦ ਹੋਵੇ ਤਾਂ ਇਸ ਵਿਚ quinalphos @ 4 ml ਪ੍ਰਤੀ ਲਿਟਰ ਪਾਣੀ ਦੇ ਹਿਸਾਬ ਨਾਲ ਸਪਰੇ ਕਰੋ ਇਸ ਤੋਂ ਇਲਾਵਾ ਤੁਸੀ ਸਿਓਂਕ ਦਾ ਹਮਲਾ ਵੀ ਚੈੱਕ ਕਰੋ, ਸਿਓਂਕ ਦੇ ਹਮਲੇ ਦੇ chlorpyriphos @ 4 ml ਪ੍ਰਤੀ ਲਿਟਰ ਪਾਣੀ ਦੇ ਹਿਸਾਬ ਨਾਲ ਸਪਰੇ ਕਰੇ ਸਕਦੇ ਹੋ, ਧੰਨਵਾਦ
Posted by Jagdish Prasad
Rajasthan
14-11-2019 08:04 PM
इसकी खेती अलग-अलग तरह की मिट्टी जैसे कि रेतली दोमट, चिकनी, गार और भारी मिट्टी में की जा सकती है यह फसल गहरी दोमट और जलोढ़ मिट्टी, जिसका निकास प्रबंध बढ़िया, नमी को बरकरार रखने की क्षमता,जैविक तत्वों वाली मिट्टी में बढ़िया परिणाम देती है विरली और रेतली मिट्टी इसकी खेती के लिए बढ़िया नहीं मानी जाती है, क्योंकि मिट्.... (Read More)
इसकी खेती अलग-अलग तरह की मिट्टी जैसे कि रेतली दोमट, चिकनी, गार और भारी मिट्टी में की जा सकती है यह फसल गहरी दोमट और जलोढ़ मिट्टी, जिसका निकास प्रबंध बढ़िया, नमी को बरकरार रखने की क्षमता,जैविक तत्वों वाली मिट्टी में बढ़िया परिणाम देती है विरली और रेतली मिट्टी इसकी खेती के लिए बढ़िया नहीं मानी जाती है, क्योंकि मिट्टी के घटिया जमाव और कम उपजाऊ-पन के कारण इस में गांठों का उत्पादन सही नहीं होता है इसकी खेती के लिए मिट्टी का pH 6-7 होना चाहिए निम्नलिखित किस्में राजस्थान में लगाने के लिए उपयुक्त हैं: लाल किस्में: Pusa Red, Nasik Red, Agrifound Light Red, Punjab Red Round, Arka Kalyan,
N-53: यह किस्म NIPHAD द्वारा जारी की गई है इसकी गांठे गोल समतल आकार की होती हैं जो कि लाल रंग की होती हैं यह किस्म रोपाई के बाद 90-100 दिनों में पक जाती है इसकी औसतन पैदावार 80 क्विंटल प्रति एकड़ होती है
Agrifound Dark Red: यह किस्म NHRDF, नासिक द्वारा जारी की गई है इसकी गांठे ग्लोब के आकर की होती हैं और गहरे लाल रंग की होती हैं यह किस्म रोपाई के बाद 95-110 दिनों में तैयार हो जाती है इसकी औसतन पैदावार 125-140 क्विंटल प्रति एकड़ होती है
सफेद किस्में : Udaipur 102, Pusa White Flat, Pusa White Round.
पीली किस्में
Early Grano: यह किस्म आई ए आर आई, नई दिल्ली द्वारा तैयार की गई है इसके प्याज़ पीले रंग के होते है यह खरीफ और रबी दोनों मौसम में उगानेयोग्य किस्म है इसकी औसतन पैदावार 200 क्विंटल प्रति एकड़ होती है बिजाई मध्य दिसंबर से मध्य जनवरी में की जाती है रोपाई के लिए 10-15 सैं.मी. कद के पौधे चुनें कतार से कतार में 15 सैं.मी. और पौधे से पौधे में 10 सैं.मी. के फासले का प्रयोग करें एक एकड़ खेत की पनीरी तैयार करने के लिए 4-5 किलो बीज पर्याप्त होते हैं बिजाई से 10 दिन पहले 15-20 टन रूड़ी की खाद डालें नाइट्रोजन 41 किलो(यूरिया 90 किलो), फासफोरस 45 किलो(सिंगल सुपर फासफेट 125 किलो) और पोटाश 45 किलो(म्युरेट ऑफ़ पोटाश 75 किलो) प्रति एकड़ डालें फासफोरस और पोटाश की पूरी मात्रा और नाइट्रोजन की आधी मात्रा रोपण के समय डालें बाकी बची हुई नाइट्रोजन टॉप ड्रेसिंग (मिट्टी में मिलाना) के तौर पर रोपण के चार हफ्ते बाद डालें मिट्टी की किस्म और जलवायु के आधार पर सिंचाई की मात्रा और आवर्ती का फैसला करें पहली सिंचाई बिजाई के तुरंत बाद करें और फिर आवश्यकता अनुसार 10-15 दिनों के फासले पर सिंचाई करें शुरुआत में नए पौधे धीरे-धीरे बढ़ते हैं, इसलिए नुकसान से बचाव के लिए गोड़ाई की जगह रासायनिक नदीन-नाशक का प्रयोग करें नदीनों की रोकथाम के लिए बिजाई से 72 घंटे के बीच पेंडीमिथाइल (स्टंप) 1 लीटर को 200 लीटर पानी में मिला कर प्रति एकड़ पर स्प्रे करें नदीनों के अंकुरण के उपरांत बिजाई से 7 दिन बाद ऑक्सीफ्लोफैन 425 मि.ली. को 200 लीटर पानी में मिला कर प्रति एकड़ पर स्प्रे करें नदीनों की रोकथाम के लिए 2-3 गोड़ाई की सिफारिश की जाती है पहली गोड़ाई बिजाई से एक महीने बाद और दूसरी गोड़ाई, पहली गोड़ाई से एक महीने के बाद करें सही समय पर पुटाई करना बहुत जरूरी है पुटाई का सही समय, ऋतु, मंडी रेट आदि पर निर्भर करते है 50% हरे पत्तों का नीचे की तरफ गिरना दर्शाता है कि फसल पुटाई के लिए तैयार है फसल की पुटाई हाथों से प्याज़ को उखाड़ कर की जाती है पुटाई के बाद प्याज़ों को 2-3 दिन के लिए अनावश्यक नमी को निकालने के लिए खेत को छोड़ दें

Posted by Narin Zala
Gujarat
14-11-2019 08:02 PM
Narin ji, ap medicinal plants jaise ke Gokshura, Arjuna, Ashoka, Gandhapushpa, Miswak, Eranda, Chitraka, Shyonaka, Kapikachhu ki kheti kar sakte hain isme kam samay mein hi amdan ani shuru ho jatihai, iske ilawa ap gehun ki bijai, sabjiyan jaise ke matar, tamatar, mirch , piyaj ki kheti kar sakte hain , dhanywad

Posted by sandhu
Punjab
14-11-2019 08:00 PM
ਸ਼੍ਰੀਮਾਨ ਜੀ, ਕਣਕ ਦੀ ਕਿਸਮ ਦੀ ਬਿਜਾਈ ਦਾ ਸਮਾਂ ਜਾਨਣ ਲਈ ਤੁਸੀ ਨਾਲ ਬੇਜੀ ਗਈ ਫੋਟੋ ਵਿਚ ਦੇਖੋ, ਧੰਨਵਾਦ
Posted by Mahaveer Yadav
Rajasthan
14-11-2019 07:58 PM
इस फसल की खेती अलग-अलग मिट्टी की किस्मों में की जा सकती है जैसे कि रेतली, चिकनी, दोमट, काली, लाल मिट्टी, जिसमें पानी के निकास का सही प्रबंध हो इसकी अच्छी पैदावार के लिए इसे अच्छे निकास वाली रेतली मिट्टी में उत्तम जैविक तत्वों से उगाया जा सकता है अच्छे निकास वाली मिट्टी की पी एच 7-8.5 होनी चाहिए यह तेजाबी और खारी मि.... (Read More)
इस फसल की खेती अलग-अलग मिट्टी की किस्मों में की जा सकती है जैसे कि रेतली, चिकनी, दोमट, काली, लाल मिट्टी, जिसमें पानी के निकास का सही प्रबंध हो इसकी अच्छी पैदावार के लिए इसे अच्छे निकास वाली रेतली मिट्टी में उत्तम जैविक तत्वों से उगाया जा सकता है अच्छे निकास वाली मिट्टी की पी एच 7-8.5 होनी चाहिए यह तेजाबी और खारी मिट्टी में भी उगने योग्य फसल है ज्यादा तेजाबी मिट्टी में खेती ना करें अगेती फसल के लिए हल्की मिट्टी लाभदायक है, जबकि अच्छी पैदावार के लिए चिकनी, दोमट और बारीक रेत वाली मिट्टी बहुत अच्छी है प्रसिद्ध किस्में :- Pusa Rubi,Pusa Early Dwarf,Punjab Chhuhara,Pusa 120,Roma Selection 120 टमाटर के बीजों को पहले नर्सरी में बोया जाता है और फिर हन्हें मुख्य खेत में रोपित किया जाता है मुख्य खेत की तैयार के लिए अच्छी जोताई और समतल मिट्टी की जरूरत होती है मिट्टी को भुरभुरा बनाने के लिए 4-5 बार जोताई करें फिर मिट्टी को समतल करने के लिए सुहागा फेरें आखिरी जोताई के समय गाय का गला हुआ गोबर 60 किलो को मिट्टी में अच्छी तरह मिलायें रोपाई के लिए 80-90 सैं.मी. चौड़े बैड तैयार करें बिजाई से एक महीना पहले मिट्टी को धूप में खुला छोड़ दें आवश्यक लंबाई और 80-90 सैं.मी. की चौड़ाई वाले बैडों पर टमाटर के बीजों को बोयें बिजाई के बाद बैडों को प्लास्टिक शीट से ढक दें और फूलों को पानी देने वाले डब्बे से रोज़ सुबह बैडों की सिंचाई करें रोगाणुओं के हमले से फसल को बचाने के लिए नर्सरी वाले बैडों को अच्छे नाइलोन के जाल से ढक दें पनीरी लगाने के 10-15 दिन बाद 19:19:19 के साथ सूक्ष्म तत्वों की 2.5-3 ग्राम प्रति लीटर पानी में मिलाकर स्प्रे करें पौधों को तंदरूस्त और मजबूत बनाने के लिए बिजाई के 20 दिन बाद लीहोसिन 1 मि.ली. प्रति लीटर पानी की स्प्रे करें प्रभावित पौधों को खेत में से उखाड़ दें ताकि पौधों का फासला सही रखा जा सके और निरोग पौधों को रोगाणुओं से भी बचाया जा सके रोगाणुओं से बचाव के लिए मिट्टी में नमी बनाये रखें यदि सूखा दिखे तो पौधों को रोपाई से पहले मैटालैक्सिल 2.5 ग्राम प्रति लीटर पानी में 2-3 बार भिगोयें बिजाई से 25-30 दिन बाद पनीरी वाले पौधे तैयार हो जाते हैं और इनके 3-4 पत्ते निकल आते हैं यदि पौधों की आयु 30 दिन से ज्यादा हो तो इसके उपचार के बाद इसे खेत में लगायें पनीरी उखाड़ने के 24 घंटे पहले बैडों को पानी लगायें ताकि पौधे आसानी से उखाड़े जा सकें बसंत के मौसम के लिए नर्सरी नवंबर-दिसंबर में तैयार करें जबकि सर्दियों में KE मौसम में सितंबर-अक्तूबर महीने में नर्सरी में बीजों को बोयें किस्म और विकास के ढंग मुताबिक 60x30 सैं.मी. या 75x60 सैं.मी. या 75x75 सैं.मी. का फासला रखें में छोटे कद वाली किस्म के लिए 75x30 सैं.मी. का फासला रखें और वर्षा वाले मौसम के लिए 120-150x30 सैं.मी. का फासला रखें नर्सरी में बीजों को 0-5 सैं.मी. गहराई में बोयें और मिट्टी से ढक दें पनीरी को उखाड़कर खेत में लगा दें एक एकड़ खेत में बिजाई के लिए 100-160 ग्राम बीज नए पौधे तैयार करने के लिए प्रयोग किए जाते हैं हाइब्रिड किस्मों के लिए 80-100 ग्राम बीज प्रति एकड़ में प्रयोग करें नाइट्रोजन 40-60 किलो (90-130 किलो यूरिया), फासफोरस 25 किलो (155 किलो एस एस पी) और पोटाश 25 किलो (42 किलो एम ओ पी) की मात्रा प्रति एकड़ में प्रयोग करें नए पौधों की रोपाई के 2-3 सप्ताह पहले फासफोरस और पोटाश की पूरी मात्रा और नाइट्रोजन की एक तिहाई मात्रा डालें बाकी बची नाइट्रोजन को दो भागों में बांटकर रोपाई 30 और 50 दिनों के बाद डालें लगातार गोडाई करें और जड़ों को मिट्टी लगाएं 45 दिनों तक खेत को नदीन रहित रखें यदि नदीन नियंत्रण से बाहर हो जायें तो यह 70-90 प्रतिशत पैदावार कम कर देंगे रोपाई से पहले मुख्य खेत में पैंडीमैथालीन 0.4 किलो को प्रति एकड़ में लगाएं यदि नदीनों की संख्या ज्यादा हो तो नदीनों के अंकुरण के बाद सैंकर 0.2 किलो की प्रति एकड़ में स्प्रे करें नदीनों को रोकने के साथ साथ मिट्टी के तापमान को कम करने के लिए मलचिंग भी प्रभावी तरीका है रोपाई के बाद दो से तीन दिन हल्की सिंचाई करें मिट्टी में नमी के आधार पर सर्दियों में 12 से 15 दिनों के अंतराल पर सिंचाई करें और गर्मियों में 6-7 दिनों के अंतराल पर सिंचाई करें फूल निकलने की अवस्था सिंचाई के लिए गंभीर होती हैं इस अवस्था में पानी की कमी से फूलों का गिरना बढ़ता है और फलों और उत्पादकता पर इसका गंभीर प्रभाव पड़ता है बहुत सारी जांचों के मुताबिक यह पता चला है कि हर पखवाड़े में आधा इंच सिंचाई करने से जड़ें ज्यादा फैलती हैं और इससे पैदावार भी अधिक हो जाती है अत्याधिक सिंचाई ना करें पनीरी लगाने के 70 दिन बाद पौधे फल देना शुरू कर देते हैं कटाई का समय इस बात पर निर्भर करता है कि फलों को दूरी वाले स्थानों पर लेकर जाना है या ताजे फलों को मंडी में ही बेचना है आदि पके हरे टमाटर जिनका 1/4 भाग गुलाबी रंग का हो, लंबी दूरी वाले स्थानों पर लेकर जाने के लिए प्रयोग किए जाते हैं ज्यादातर सारे फल गुलाबी या लाल रंग में बदल जाते हैं, पर सख्त गुद्दे वाले टमाटरों को नज़दीक की मंडी में बेचा जा सकता है अन्य उत्पाद बनाने और बीज तैयार करने के लिए पूरी तरह पके और नर्म गुद्दे वाले टमाटरों का प्रयोग किया जाता है कटाई के बाद आकार के आधार पर टमाटरों को छांट लिया जाता है इसके बाद टमाटरों को बांस की टोकरियों या लकड़ी के बक्सों में पैक कर लिया जाता है लंबी दूरी पर लिजाने के लिए टमाटरों को पहले ठंडा रखें ताकि इनके खराब होने की संभावना कम हो जाये पूरी तरह पके टमाटरों से जूस, सीरप और कैचअप आदि उत्पाद भी तैयार किए जाते हैं
Posted by Gurjeet Singh
Punjab
14-11-2019 07:57 PM
sir medical wali kli chuna pashu nu de skde haan ya nhi, je de skde haan ta kini matra ch deni hai ?
tuci pashu nu chune di kali krke de skde ho, jithe tuhade pashu pani pinde hai tuci uss tanki vich hafte vich 1 varr chunne di kali kr deya kro, iss nal calcium pashu de anndar jnda hai jiss nal pashu vich calcium di kami purri hundi hai, kali krde sme dian rkho ki chunne da koi v tukda pashu de anndar nahi jana chahida kyuki uss nal pashu nu nuksan ho skda hai..
Posted by Gurjeet Singh
Punjab
14-11-2019 07:54 PM
isda lai sirf pashu da tora fera jruri hai, uss nu khula shdd ke toora ferrra krwao ji.

Posted by Balpreet
Punjab
14-11-2019 07:51 PM
Balpreet ji, please send your CV at info@apnikheti.com, thank you
Posted by Gurjeet Singh
Punjab
14-11-2019 07:50 PM
ਇਸਦੇ ਲਈ ਤੁਸੀ ਗਲੋਂ ਦੀ ਵੇਲ ਦੇ ਪੱਤੇ 1 ਕਿਲੋ ਲਓ ਅਤੇ ਉਸ ਨੂੰ 3 ਲੀਟਰ ਪਾਣੀ ਵਿਚ ਉਬਾਲ ਲਓ ਜਦੋ ਪਾਣੀ ਇਕ ਲੀਟਰ ਰਹਿ ਜਾਵੇ ਫਿਰ ਉਸ ਨੂੰ ਠੰਡਾ ਕਰਕੇ ਪਸ਼ੂ ਨੂੰ ਪਿਲਾ ਦਿਓ, ਇਹ ਤੁਸੀ ਇਕ ਦਿਨ ਵਿਚ 3 ਵਾਰ ਦੇ ਸਕਦੇ ਹੋ, ਇਸ ਨਾਲ ਫਰਕ ਪੈ ਜਾਵੇਗਾ
Posted by ajaib Singh
Punjab
14-11-2019 07:50 PM
BhaaG isnu rajwa hara chaara te har din 2kg feed rojana dyo te malap rehat karo
Posted by R Singh
Haryana
14-11-2019 07:49 PM
श्रीमान जी एचडी 3226 का बीज लेने के लिए आप Dr Dalip Gosain 9215757800 से संपर्क कर सकते है
Posted by ajaib Singh
Punjab
14-11-2019 07:48 PM
tuci uss nu pett de kiria lai Flukarid-Ds bolus deo ate rojana 35-40kg hara chara deo ate vdia feed deo, baki uss nu Vitum-H liquid 10ml rojana ate Enerboost powder 100gm rojana deo, iss nal kamjori duur rehegi.
Posted by ajaib Singh
Punjab
14-11-2019 07:47 PM
BhaaG isnu rajwa hara chaara te har 3kg dudh lai 1 kg feed pao har 3 mahine baad malap rehat karo 1quintal feed da formula Anaaj 45 kg khal 25 kg chokar or rice polish 30kg min mix 2kg namak 1 kg rla lao

Posted by Ghanshyam Mehta
Madhya Pradesh
14-11-2019 07:42 PM
श्रीमान जी, कृपया आप फसल की फोटो भेजें तजो आपको देख कर इसके बारे में पूरी जानकारी दी जा सके, धन्यवाद
Posted by Kulwinder singh
Punjab
14-11-2019 07:38 PM
श्रीमान जी, इसके लिए आप vermicompost @ 4-5 kg प्रति पौधे के हिसाब से डालें, धन्यवाद

Posted by tejinder singh
Punjab
14-11-2019 07:38 PM
Tejinder ji, eh ik certified seed hai, is vich koi milawat nahi hai, tuc is di bijai kar sakde ho, dhanwad
Posted by ਨਵਪਰੀਤ ਸਿੰਘ
Punjab
14-11-2019 07:29 PM
ਉਸ ਨੂੰ Lactin bolus 1-1 ਗੋਲੀ ਸਵੇਰੇ ਸ਼ਾਮ ਦਿਓ ਅਤੇ Anabolite liquid 100ml ਰੋਜਾਨਾ ਅਤੇ Milkout ਪਾਊਡਰ 2-2 ਚਮਚ ਸਵੇਰੇ ਸ਼ਾਮ ਦਿਓ..

Posted by sandeep
Madhya Pradesh
14-11-2019 07:26 PM
श्रीमान जी, बिजाई का उचित समय अक्तूबर के आखिरी सप्ताह से लेकर मध्य नवंबर तक का है जबकि पिछेती बिजाई के लिए नवंबर का दूसरा पखवाड़ा उचित समय है सामान्य बिजाई के लिए कतारों में 20-22-5 सैं.मी. के फासले की सलाह दी जाती है लंबी किस्मों के लिए 6-7 सैं.मी. की गहराई का प्रयोग करें जबकि अन्य किस्मों के लिए 5-6 सैं.मी. की गहराई का प.... (Read More)
श्रीमान जी, बिजाई का उचित समय अक्तूबर के आखिरी सप्ताह से लेकर मध्य नवंबर तक का है जबकि पिछेती बिजाई के लिए नवंबर का दूसरा पखवाड़ा उचित समय है सामान्य बिजाई के लिए कतारों में 20-22-5 सैं.मी. के फासले की सलाह दी जाती है लंबी किस्मों के लिए 6-7 सैं.मी. की गहराई का प्रयोग करें जबकि अन्य किस्मों के लिए 5-6 सैं.मी. की गहराई का प्रयोग करें बिजाई की विधि बीज ड्रिल, बुरकाव विधि धन्यवाद

Posted by harppret
Punjab
14-11-2019 07:24 PM
पशु का दूध उसकी नसल और खुराक पर निर्भर करता है कोई भी देने से शरीर की कमी पूरी होती है जिससे दूध की कमी पूरी होती है आप उसे खुराक के साथ साथ Calcimust gold liquid 50ml रोजाना दे सकते है इसका अच्छा रिजल्ट है

Posted by rakesh prajapati
Uttar Pradesh
14-11-2019 07:13 PM
श्रीमान जी, कृपया आप बोरान के लेबल की फोटो भेजें या आप इसके साल्ट का नाम बताये ताकि आपको उसके बारे में पूरी जानकारी दी जा सके, धन्यवाद

Posted by Shivam Birla
Madhya Pradesh
14-11-2019 06:58 PM
पशु का दूध उसकी नस्ल पर निर्भर करता है, यदि नस्ल बढ़िया है तो दूध भी बढ़िया होगा, बाकि खुराक, पशु के रहने की जगह , समय-समय पर डीवॉर्मिंग करवाना, इन सभी बातों का पूरा ध्यान रखना ज़रूरी है इसके साथ आप 250 ग्राम गुड़ और 2 किलो दलिया अच्छी तरह गर्म करके फिर उसमें 100 ग्राम सरसों का तेल मिक्स करें इसे आधा आधा करके सुबह शाम दे स.... (Read More)
पशु का दूध उसकी नस्ल पर निर्भर करता है, यदि नस्ल बढ़िया है तो दूध भी बढ़िया होगा, बाकि खुराक, पशु के रहने की जगह , समय-समय पर डीवॉर्मिंग करवाना, इन सभी बातों का पूरा ध्यान रखना ज़रूरी है इसके साथ आप 250 ग्राम गुड़ और 2 किलो दलिया अच्छी तरह गर्म करके फिर उसमें 100 ग्राम सरसों का तेल मिक्स करें इसे आधा आधा करके सुबह शाम दे सकते हैं इस तरह आप 5—7 दिन दें, इससे दूध बढ़ जाएगा. बाकि आप Anabolite liquid 100ml रोज़ाना देना शुरू करें और आप Milkout पाउडर के 2—2 चम्मच सुबह शाम दें इसका भी दूध बढ़ाने में बढ़िया परिणाम है आप पशु की खुराक का ध्यान रखें..

Posted by Gurpreet singh
Punjab
14-11-2019 06:55 PM
ਸ੍ਰੀ ਮਾਨ ਜੀ ਕਿਸਮ ਸੁਪਰ 272 , 120-125 ਦਿਨਾਂ ਦੇ ਅੰਦਰ ਪੱਕਣ ਵਾਲੀ ,ਇਸਦਾ ਔਸਤਨ ਕੱਦ 95 ਸੈਂਟੀਮੀਟਰ ,ਇਸਦਾ ਔਸਤਨ ਝਾੜ 26 ਕੁਇੰਟਲ ਪ੍ਰਤੀ ਏਕੜ ਭਾਰੀ ਜਮੀਨ ਵਿੱਚ ਨਵੰਬਰ ਦੇ ਚੌਥੇ ਹਫਤੇ ਤੱਕ ਬੀਜ ਸਕਦੇ ਹੋ ਅਤੇ ਇਸ ਦਾ ਬੀਜ 40 ਕਿਲੋ ਪ੍ਰਤੀ ਏਕੜ ਪੈਂਦਾ ਹੈ ਧੰਨਵਾਦ
Posted by Talwinder singh
Punjab
14-11-2019 06:45 PM
ਸ਼੍ਰੀਮਾਨ ਜੀ, HD 3086 ਦੀ ਬਿਜਾਈ ਦਾ ਸਹੀ ਸਮਾਂ ਅਕਤੂਬਰ ਦੇ ਚੋਥੇ ਹਫਤੇ ਤੋਂ ਨਵੰਬਰ ਦੇ ਚੋਥੇ ਹਫਤੇ ਤਕ ਦਾ ਹੈ, ਧੰਨਵਾਦ

Posted by मानसिह
Rajasthan
14-11-2019 06:45 PM
श्रीमान जी, पान मेथी की खेती के लिए शीतोष्ण आबोहवा की जरूरत होती है, जिस में बीजों के जमाव के लिए हलकी सी गरमी, पौधों की बढ़वार के लिए थोड़ी ठंडक और पकने के लिए गरम मौसम मिले. वैसे, यह मेथी हर तरह की जमीन में उगाई जा सकती है, लेकिन अच्छी उपज के लिए बलुई या दोमट मिट्टी सही रहती है अच्छी फसल के लिए 2-2.5 टन गोबर की सड़ी ख.... (Read More)
श्रीमान जी, पान मेथी की खेती के लिए शीतोष्ण आबोहवा की जरूरत होती है, जिस में बीजों के जमाव के लिए हलकी सी गरमी, पौधों की बढ़वार के लिए थोड़ी ठंडक और पकने के लिए गरम मौसम मिले. वैसे, यह मेथी हर तरह की जमीन में उगाई जा सकती है, लेकिन अच्छी उपज के लिए बलुई या दोमट मिट्टी सही रहती है अच्छी फसल के लिए 2-2.5 टन गोबर की सड़ी खाद या कंपोस्ट खाद प्रति एकड़ के हिसाब से खेत तैयार करते समय मिला देनी चाहिए इस के अलावा 45 किलोग्राम urea , 50 किलो SSP व 25 पोटाश प्रति एकड़ देने से उपज में बढ़ोतरी होती है. नाइट्रोजन की आधी मात्रा और फास्फोरस व पोटाश की पूरी मात्रा बोआई से पहले देते हैं. बाकी नाइट्रोजन 15-15 दिन के अंतराल पर 2 बार में देते हैं. पान मेथी को अगर बीज के रूप में उगाना है, तो इसे मध्य सितंबर से नवंबर माह तक बोया जाता है. लेकिन अगर इसे हरी सब्जी के लिए उगाना है तो मध्य अक्तूबर से मार्च माह तक भी बो सकते हैं. वैसे, अच्छी उपज लेने के लिए नागौर इलाके में इसे ज्यादातर अक्तूबर से दिसंबर माह के बीच ही बोया जाता है. इस की बोआई लाइनों में करनी चाहिए. लाइन से लाइन की दूरी 15 से 20 सैंटीमीटर व गहराई 2 से 3 सैंटीमीटर रखनी चाहिए. ज्यादा गहराई पर बीज का जमाव अच्छा नहीं रहता. बीज बोने के बाद पाटा जरूर लगाएं, ताकि बीज मिट्टी से ढक जाए. यह मेथी 8 से 10 दिनों में जम जाती है.बीज बोने के बाद पाटा जरूर लगाएं, ताकि बीज मिट्टी से ढक जाए. यह मेथी 8 से 10 दिनों में जम जाती है. पान मेथी के पौधे जब 7-8 पत्तियों के हो जाएं तब पहली सिंचाई कर देनी चाहिए. यह समय खेत की दशा, मिट्टी की किस्म व मौसमी बारिश वगैरह के मुताबिक घटबढ़ सकता है. हरी पत्तियों की ज्यादा कटाई के लिए सिंचाई की तादाद बढ़ा सकते हैं. मेथी के पौधे जब 7-8 पत्तियों के हो जाएं तब पहली सिंचाई कर देनी चाहिए. यह समय खेत की दशा, मिट्टी की किस्म व मौसमी बारिश वगैरह के मुताबिक घटबढ़ सकता है. हरी पत्तियों की ज्यादा कटाई के लिए सिंचाई की तादाद बढ़ा सकते हैं. पान मेथी में पत्तियों व तनों के ऊपर सफेद चूर्ण हो जाता है व पत्तियां हलकी पीली पड़ जाती हैं. बचाव के लिए 800 से 1200 ग्राम प्रति हेक्टेयर ब्लाईटाक्स 500-600 लिटर पानी में घोल बना कर पौधों पर छिड़क दें.पत्तियां व तनों को खाने वाली गिड़ार से बचाने के लिए 2 मिलीलिटर रोगर 200 लिटर पानी में घोल कर फसल पर छिड़काव करें. छिड़काव कटाई से 5 से 7 दिन पहले करें. बोआई के 3-4 हफ्ते बाद कसूरी मेथी हरी सब्जी के तौर पर कटाई के लिए तैयार हो जाती है. बाद में फूल आने तक हर 15 दिन में कटाई करते हैं. बीज उत्पादन के लिए 2 कटाई के बाद कटाई बंद कर देनी चाहिए. धन्यवाद

Posted by bablu
Maharashtra
14-11-2019 06:45 PM
आप उनकी खुराक का ध्यान रखें तथा उनके रहने सहने का भी ध्यान रखें बाकि आप पशु वाले चिकित्सा स्टोर से EGG FORMULA नाम का पाउडर लेकर फीड में मिलाकर दें, इससे मुर्गियां अंडे देने शुरू देंगी, इसके साथ आप Ostovet कैल्शियम दें, इसे 15ml प्रति 100 मुर्गियों के हिसाब से दें.
Posted by jitendra kr.bharti
Jharkhand
14-11-2019 06:42 PM
Jitendra kr.bharti ji Mushroom ka Spawn lene ke lia aap Mr. jai bhadouriya 8882876224 se samparak kar sakte hai, in se aap ko training bhi mil jae gi, Thankyou.

Posted by मानसिह
Rajasthan
14-11-2019 06:36 PM
मानसिंह जी कृृपया आप अपना सवाल विस्तार से पूछें कि आप क्या जानकारी लेना चाहते है ताकि आपको सही जानकारी दी जा सके
Posted by ਹਰਪਾਲ ਸਿੰਘ
Punjab
14-11-2019 06:34 PM
ਹਰਪਾਲ ਜੀ, ਫਿਲਹਾਲ ਜੋ ਸਕੀਮ ਚੱਲ ਰਹੀ ਹੈ, ਉਸ ਵਿੱਚ 5 ਏਕੜ ਤੱਕ ਦੀ ਜ਼ਮੀਨ ਵਾਲੇ ਕਿਸਾਨਾਂ ਨੂੰ ਹੀ ਮੁਆਵਜ਼ਾ ਮਿਲ ਰਿਹਾ ਹੈ, ਸੋ ਤੁਸੀਂ ਇਸ ਲਈ ਯੋਗ ਨਹੀਂ ਹੋ

Posted by Jashanpreet Singh
Punjab
14-11-2019 06:21 PM
Posted by hemant tyagi
Uttar Pradesh
14-11-2019 06:04 PM
निम्नलिखित किस्में उत्तर प्रदेश में लगाने के लिए उपयुक्त हैं: अगेती पकने वाली किस्में: CoS 687, CoS 8436, CoS 88230, CoS 95435, CoS 91232
मध्य मौसम और देरी से पकने वाली किस्में: Co 1148, CoS 767, BO 91
पूर्वी यू पी के बाढ़ संभावित क्षेत्रों के लिए किस्में: CoSe 96234, CoSe 96436, Co-98014 (Karan-1), Co-pant 97222, Colk-94184(Birendra), Co-0233 (Kamal), Co-0233
Co 87263: इसे सरायु के नाम से भी जाना जाता है इसकी बिजाई .... (Read More)
निम्नलिखित किस्में उत्तर प्रदेश में लगाने के लिए उपयुक्त हैं: अगेती पकने वाली किस्में: CoS 687, CoS 8436, CoS 88230, CoS 95435, CoS 91232
मध्य मौसम और देरी से पकने वाली किस्में: Co 1148, CoS 767, BO 91
पूर्वी यू पी के बाढ़ संभावित क्षेत्रों के लिए किस्में: CoSe 96234, CoSe 96436, Co-98014 (Karan-1), Co-pant 97222, Colk-94184(Birendra), Co-0233 (Kamal), Co-0233
Co 87263: इसे सरायु के नाम से भी जाना जाता है इसकी बिजाई के लिए फरवरी से मार्च का समय उपयुक्त होता है इसकी औसतन पैदावार 264 क्विंटल प्रति एकड़ होती है यह किस्म कांगियारी और रतुआ रोग के प्रतिरोधक किस्म है
Co 87268 (Moti): इस किस्म की बिजाई के लिए फरवरी से मार्च का महीना उपयुक्त होता है इसकी औसतन पैदावार 312 क्विंटल प्रति एकड़ होती है यह किस्म कांगियारी और रतुआ रोग के प्रतिरोधक किस्म है
Co Pant 90223: इस किस्म की बिजाई के लिए फरवरी से मार्च का महीना उपयुक्त होता है इसकी औसतन पैदावार 292 क्विंटल प्रति एकड़ होती है यह किस्म कुछ हद तक रतुआ रोग और कांगियारी के प्रतिरोधी और सुखा और जलजमाव को सहनेयोग्य है
CoS 1230: इसकी औसतन पैदावार 280 क्विंटल प्रति एकड़ होती है
BO 128 (Pramod): यह किस्म बसंत में बिजाई के लिए उपयुक्त है इसकी औसतन पैदावार 276 क्विंटल प्रति एकड़ होती है यह जल जमाव को सहनेयोग्य किस्म है
Co 89029: इसकी औसतन पैदावार 280 क्विंटल प्रति एकड़ होती है
CoSe 92423: यह किस्म बसंत में बिजाई के लिए उपयुक्त है इसकी औसतन पैदावार 280 क्विंटल प्रति एकड़ होती है यह रतुआ रोग के प्रतिरोधक किस्म है
CoSe 95422 (Rasbhari): यह किस्म बसंत में बिजाई के लिए उपयुक्त है इसकी औसतन पैदावार 271 क्विंटल प्रति एकड़ होती है यह रतुआ रोग के प्रतिरोधक किस्म है
CoS 94270 (Sweta): यह किस्म कुछ हद तक रतुआ रोग के प्रतिरोधक किस्म है इसकी औसतन पैदावार 324 क्विंटल प्रति एकड़ होती है
CoLK 94184 (Birendra): यह जल्दी पकने वाली किस्म है यह मोढ़ी फसल के लिए उपयुक्त किस्म है इसकी औसतन पैदावार 320 क्विंटल प्रति एकड़ होती है
Posted by rakesh suthar
Rajasthan
14-11-2019 05:59 PM
Rakesh ji, kripya ap variety ka pura nam bataye taki apko iske bare mein puri jankari di ja sake, dhanywad

Posted by bhupinder singh samra
Punjab
14-11-2019 05:54 PM
ਬਿਜਾਈ ਤੋ ਦੋ ਹਫਤੇ ਪਹਿਲਾਂ ਖੇਤ ਦੀ ਤਿਆਰੀ ਸਮੇਂ 200 ਕੁਇੰਟਲ ਪ੍ਰਤੀ ਏਕੜ ਰੂੜੀ ਦੀ ਖਾਦ ਪਾਓ ਫਸਲ ਦੇ ਉਚਿੱਤ ਵਾਧੇ ਲਈ ਨਾਈਟ੍ਰੋਜਨ 75 ਕਿਲੋ (165 ਕਿਲੋ ਯੂਰੀਆ), ਫਾਸਫੋਰਸ 25 ਕਿਲੋ (155 ਕਿਲੋ ਸਿੰਗਲ ਸੁਪਰ ਫਾਸਫੇਟ) ਅਤੇ ਪੋਟਾਸ਼ 25 ਕਿਲੋ (40 ਕਿਲੋ ਮਿਊਰੇਟ ਆੱਫ ਪੋਟਾਸ਼) ਦੀ ਮਾਤਰਾ ਪ੍ਰਤੀ ਏਕੜ ਵਿੱਚ ਪਾਓ ਬਿਜਾਈ ਸਮੇਂ ਨਾਈਟ੍ਰੋਜਨ ਦਾ 3/4 ਹਿੱਸਾ ਅਤੇ ਫਾਸਫੋਰਸ ਅਤੇ ਪੋਟਾਸ਼ ਦੀ ਪੂਰੀ ਮਾਤਰਾ ਪਾਓ.... (Read More)
ਬਿਜਾਈ ਤੋ ਦੋ ਹਫਤੇ ਪਹਿਲਾਂ ਖੇਤ ਦੀ ਤਿਆਰੀ ਸਮੇਂ 200 ਕੁਇੰਟਲ ਪ੍ਰਤੀ ਏਕੜ ਰੂੜੀ ਦੀ ਖਾਦ ਪਾਓ ਫਸਲ ਦੇ ਉਚਿੱਤ ਵਾਧੇ ਲਈ ਨਾਈਟ੍ਰੋਜਨ 75 ਕਿਲੋ (165 ਕਿਲੋ ਯੂਰੀਆ), ਫਾਸਫੋਰਸ 25 ਕਿਲੋ (155 ਕਿਲੋ ਸਿੰਗਲ ਸੁਪਰ ਫਾਸਫੇਟ) ਅਤੇ ਪੋਟਾਸ਼ 25 ਕਿਲੋ (40 ਕਿਲੋ ਮਿਊਰੇਟ ਆੱਫ ਪੋਟਾਸ਼) ਦੀ ਮਾਤਰਾ ਪ੍ਰਤੀ ਏਕੜ ਵਿੱਚ ਪਾਓ ਬਿਜਾਈ ਸਮੇਂ ਨਾਈਟ੍ਰੋਜਨ ਦਾ 3/4 ਹਿੱਸਾ ਅਤੇ ਫਾਸਫੋਰਸ ਅਤੇ ਪੋਟਾਸ਼ ਦੀ ਪੂਰੀ ਮਾਤਰਾ ਪਾਓ ਬਾਕੀ ਬਚਿਆ ਨਾਈਟ੍ਰੋਜਨ ਦਾ 1/4 ਹਿੱਸਾ ਬਿਜਾਈ ਤੋਂ 30-40 ਦਿਨ ਬਾਅਦ ਜੜ੍ਹਾਂ ਨਾਲ ਮਿੱਟੀ ਲਾਉਣ ਸਮੇਂ ਪਾਓ ਹਲਕੀਆਂ ਜ਼ਮੀਨਾਂ ਵਿੱਚ ਅੱਧੀ ਮਾਤਰਾ ਨਾਈਟ੍ਰੋਜਨ ਅਤੇ ਫਾਸਫੋਰਸ ਅਤੇ ਪੋਟਾਸ਼ ਦੀ ਪੂਰੀ ਮਾਤਰਾ ਬਿਜਾਈ ਸਮੇਂ ਪਾਓ ਅਤੇ ਬਾਕੀ ਦੀ ਨਾਈਟ੍ਰੋਜਨ ਦੋ ਹਿੱਸਿਆ ਵਿੱਚ ਜੜਾਂ ਨੂੰ ਮਿੱਟੀ ਲਾਉਣ ਸਮੇਂ ਦੋ ਵਾਰ ਕਰਕੇ ਪਾਓ

Posted by Sanskar Kushwaha
Uttar Pradesh
14-11-2019 05:35 PM
श्रीमान जी , यह मिट्टी की कई किस्मों जैसे अच्छे जल निकास वाली लाल दोमट से चिकनी मिट्टी, काली मिट्टी से लैटेराइट मिट्टी में उगाई जाती है यह चट्टानी मिट्टी और हल्की मिट्टी में भी उगाई जा सकती है मिट्टी की गहराई 20-30 सैं.मी. से ज्यादा नहीं होनी चाहिए यह रेतली दोमट से दरमियानी काली मिट्टी जो अच्छे जल निकास वाली हो, .... (Read More)
श्रीमान जी , यह मिट्टी की कई किस्मों जैसे अच्छे जल निकास वाली लाल दोमट से चिकनी मिट्टी, काली मिट्टी से लैटेराइट मिट्टी में उगाई जाती है यह चट्टानी मिट्टी और हल्की मिट्टी में भी उगाई जा सकती है मिट्टी की गहराई 20-30 सैं.मी. से ज्यादा नहीं होनी चाहिए यह रेतली दोमट से दरमियानी काली मिट्टी जो अच्छे जल निकास वाली हो, में अच्छे परिणाम देती है पौधे की वृद्धि के लिए मिट्टी pH 6-8 होना चाहिए प्रसिद्ध किस्में:- Satavari (Asparagus racemosus),Satavari (Asparagus sarmentosa Linn.)शतावरी की खेती के लिए, अच्छे जल निकास वाली रेतली दोमट मिट्टी की आवश्यकता होती है मिट्टी को भुरभुरा बनाने के लिए, ज़मीन की अच्छे से जोताई करें, और 15 सैं.मी. की गहराई में गड्ढा खोदें रोपाई तैयार बैडों पर की जाती है पौधों की रोपाई जून-जुलाई के महीने में की जाती है इसके विकास के अनुसार 4.5x 1.2 मीटर फासले का प्रयोग करें और 20 सैं.मी. गहराई में गड्ढा खोदें जब पौधा 45 सैं.मी. का हो जाए, तब खेत में रोपाई की जाती है अधिक पैदावार के लिए, 400-600 ग्राम बीजों का प्रति एकड़ में प्रयोग करें फसल को मिट्टी से होने वाले कीटों और बीमारियों से बचाने के लिए, बिजाई से पहले बीजों को गाय के मूत्र में 24 घंटे के लिए डाल कर उपचार करें उपचार के बाद बीज नर्सरी बैड में बोये जाते हैं अधिक पैदावार के लिए, 400-600 ग्राम बीजों का प्रति एकड़ में प्रयोग करें फसल को मिट्टी से होने वाले कीटों और बीमारियों से बचाने के लिए, बिजाई से पहले बीजों को गाय के मूत्र में 24 घंटे के लिए डाल कर उपचार करें उपचार के बाद बीज नर्सरी बैड में बोये जाते हैं बिजाई से पहले मिट्टी का रासायनिक उपचार किया जाता है अप्रैल के महीने में बीज बोये जाते हैं शतावरी के बीजों को 30-40 सैं.मी. की चौड़ाई वाले और आवश्यक लंबाई वाले बैडों पर बोया जाता है बिजाई के बाद बैडों को नमी के लिए पतले कपड़े से ढक दिया जाता है 8-10 दिनों में पौधों का अंकुरण शुरू हो जाता है 45 सैं.मी. ऊंचाई के होने पर पौधे रोपाई के लिए तैयार हो जाते हैं पौधों की रोपाई 60 x 60 सैं.मी. की मेड़ों पर की जाती है खेत की तैयारी के समय, 80 क्विंटल प्रति एकड़ गली हुई रूड़ी की खाद को मिट्टी में अच्छी तरह मिलायें नाइट्रोजन 24 किलो (यूरिया 52 किलो), फासफोरस 32 किलो (सिंगल सुपर फासफेट 52 किलो), और पोटाश 40 किलो (म्यूरेट ऑफ पोटाश 66 किलो) प्रति एकड़ में डालें मिट्टी से पैदा होने वाली बीमारियों से पौधे को बचाने के लिए जैविक कीट नाशी जैसे धतूरा, चित्रकमूल और गाय के मूत्र का प्रयोग करें फसल के विकास के समय लगातार गोडाई की आवश्यकता होती है खेत को नदीन मुक्त बनाने के लिए 6-8 हाथ से गोडाई की आवश्यकता होती है पौधों को खेत में रोपण करने के बाद पहली सिंचाई तुरंत कर देनी चाहिए इस फसल को ज्यादा सिंचाई की जरूरत नहीं होती इसलिए शुरूआत में 4-6 दिनों के फासले पर सिंचाई कर दें और फिर कुछ समय के बाद सप्ताह के फासले पर सिंचाई करें पुटाई से पहले सिंचाई जरूर करनी चाहिए ताकि गड्ढों मे से जड़ों को आसानी से निकाला जा सके रोपाई के बाद 20-30 महीनों में पौधे की जड़ें परिपक्व हो जाती हैं मिट्टी और जलवायु के आधार पर जड़ें 12-14 महीनों में पक जाती हैं मार्च-मई के महीने में जब बीज पक जाये, तब पुटाई की जाती है पुटाई कसी की सहायता से की जाती है प्रक्रिया और दवाइयां बनाने के लिए अच्छे से पके बीजों की आवश्यकता होती है आप इसके पौधे नजदीकी नर्सरी से ले सकते है अगर आपको पौधे वह न मिले तो आप दुबारा सवाल दाल कर हमें बता सकते है धन्यवाद
Posted by Kamal Hassan
Rajasthan
14-11-2019 05:33 PM
आप उन्हें B—complex रोजाना 20ml/100 birds के हिसाब से एक बार पानी में दें

Posted by Dsvirk Shab
Punjab
14-11-2019 05:24 PM
Virk ji ehh powder Intas company da product hai ehh 300gm ate 900gm di packing vich aaunda hai isda rate tuci apne nazdiki medical store ton pta kr skde ho, tuci powder di photo dekh skde ho.
Posted by ashok tiwari
Madhya Pradesh
14-11-2019 05:23 PM
Ashok ji, apka sujhaw dene ke liye boht boht dhanywad, hamari yehi koshish rehti hai ke hm kisano ko unki samsyaon ka jald se jald jawab dain, dhanywad
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