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Posted by Ankit Yadav
Uttar Pradesh
15-11-2019 02:31 PM
Maharashtra
11-15-2019 05:52 PM
गेहूं की फसल को अच्छे अंकुरन के लिए अच्छी तरह से तैयार, पर ठोस बीज बैड की आवश्यकता होती है पिछली फसल की कटाई के बाद खेत की अच्छे तरीके से ट्रैक्टर की मदद से जोताई की जानी चाहिए खेत को आमतौर पर ट्रैक्टर के साथ तवियां जोड़कर जोता जाता है और उसके बाद दो या तीन बार हल या सुहागे से जोता जाता है खेत की जोताई शाम के सम.... (Read More)
गेहूं की फसल को अच्छे अंकुरन के लिए अच्छी तरह से तैयार, पर ठोस बीज बैड की आवश्यकता होती है पिछली फसल की कटाई के बाद खेत की अच्छे तरीके से ट्रैक्टर की मदद से जोताई की जानी चाहिए खेत को आमतौर पर ट्रैक्टर के साथ तवियां जोड़कर जोता जाता है और उसके बाद दो या तीन बार हल या सुहागे से जोता जाता है खेत की जोताई शाम के समय की जानी चाहिए और रोपाई की गई ज़मीन को पूरी रात खुला छोड़ देना चाहिए ताकि वह ओस की बूंदों से नमी सोख सके प्रत्येक जोताई के बाद सुहागा फेरना चाहिए बारानी क्षेत्रों में फसल को दीमक के हमले से बचाव के लिए क्लोरपाइरीफॉस 20 ई सी 700 मि.ली. को 5 लीटर पानी में मिलाकर 100 किलो बीजों का उपचार करें उसके बाद बीजों को छांव में सुखाएं सामान्य बिजाई के लिए कतारों में 20-22-5 सैं.मी. के फासले की सलाह दी जाती है यदि बिजाई देरी से करनी हो तो 15-18 सैं.मी. का फासला होना चाहिए लंबी किस्मों के लिए 6-7 सैं.मी. की गहराई का प्रयोग करें जबकि अन्य किस्मों के लिए 5-6 सैं.मी. की गहराई का प्रयोग करें बिजाई की विधि:- बीज ड्रिल, बुरकाव विधि
Posted by Sajid Khan
Rajasthan
15-11-2019 02:17 PM
Maharashtra
11-15-2019 05:55 PM
sajid ji kripya aap btaye je aane bijai ke kitne din bad iski sinchai ki hai taki aapko iske bare men poori jankari di ja sake.dhanywad
Posted by Gurwinder Singh Aadhiwal
Punjab
15-11-2019 02:13 PM
Punjab
11-21-2019 12:26 PM
ਗੁਰਵਿੰਦਰ ਜੀ ਕਿਰਪਾ ਕਰਕੇ ਸਵਾਲ ਵਿਸਤਾਰ ਨਾਲ ਪੁਛੋ ਤਾ ਜੋ ਤੁਹਾਨੂੰ ਇਸ ਬਾਰੇ ਪੂਰੀ ਜਾਣਕਾਰੀ ਦਿਤੀ ਜਾ ਸਕੇ ਧੰਨਵਾਦ
Posted by Bhupinder Pawar
Punjab
15-11-2019 02:12 PM
Punjab
11-15-2019 05:03 PM
usko aap Ostovet calcium 30ml/100birds ke hisab se den aur B-complex liquid 20ml/100birds ke hisab se den, aur usko 1 litre pani mai 1-2 chamch namak milla pani den, isse frak padd jayega.
Posted by भोला सिंह
Punjab
15-11-2019 01:36 PM
Punjab
11-20-2019 07:09 PM
Bhola singh ji Pm kisan samman nidhi yojna ke bare me puri jankari ja shkait ke lia aap 011-23381092 (Direct HelpLine), Email (pmkisan-ict@gov.in) par samparak kar, Thankyou.
Posted by Lovepreet bhullar
Punjab
15-11-2019 01:27 PM
Punjab
11-15-2019 01:36 PM
ਤੁਸੀ 250 ਗ੍ਰਾਮ ਗੁੜ, 250 ਗ੍ਰਾਮ ਗੁਲਕੰਦ, 100 ਗ੍ਰਾਮ ਸੌੰਫ, 100 ਗ੍ਰਾਮ ਸੁਕੇ ਆਵਲੇ ਤੇ 50 ਗ੍ਰਾਮ ਅਜਵਾਇਨ ਉਬਾਲ ਕੇ ਠਾਰ ਕੇ 5 ਦਿਨ ਦੇਣੀ ਸ਼ੁਰੂ ਕਰੋ ਅਤੇ ਉਸ ਨੂੰ Metra liquid 100-100ml ਸਵੇਰੇ ਸ਼ਾਮ ਦਿਓ, ਇਸ ਨਾਲ ਫਰਕ ਪੈ ਜਾਵੇਗਾ..
Posted by संजीव कुमार
Uttar Pradesh
15-11-2019 01:26 PM
Punjab
11-20-2019 07:10 PM
यह पानी की सतह पर तैरने वाला फर्ण है,जिसमें शाखाएं,तने और जड़ें होती हैं यह पौधा पानी में नीचे की तरफ को लटकता है यह हरे चारे की एक किस्म है,जो पशुओं के लिए फीड के तौर पर प्रयोग की जाती है,क्योंकि यह पशुओं के द्वारा आसानी से पचा लिया जाता है बाकी हरे चारे वाली फसलों के मुकाबले अज़ोला में अधिक पोषक तत्व होते हैं .... (Read More)
यह पानी की सतह पर तैरने वाला फर्ण है,जिसमें शाखाएं,तने और जड़ें होती हैं यह पौधा पानी में नीचे की तरफ को लटकता है यह हरे चारे की एक किस्म है,जो पशुओं के लिए फीड के तौर पर प्रयोग की जाती है,क्योंकि यह पशुओं के द्वारा आसानी से पचा लिया जाता है बाकी हरे चारे वाली फसलों के मुकाबले अज़ोला में अधिक पोषक तत्व होते हैं इसके अलावा धान की फसल में नाइट्रोजन की मात्रा को ठीक बनाए रखने के लिए भी इसका प्रयोग किया जाता है इसलिए अज़ोला को धान की फसल में बायो खाद या हरी खाद के तौर पर प्रयोग किया जाता है यह प्रोटीन,विटामिन,अमीनो एसिड और खनिजों जैसे कि (कैलशियम,पोटाशियम,फासफोरस और मैगनीशियम) का अच्छा स्त्रोत है यह फीड के तौर पर बकरियों,सुअरों,भेड़ों और खरगोशों को भी दिया जा सकता है अज़ोला की खेती • अज़ोला की खेती के लिए पानी इक्ट्ठा करने के लिए जगह की जरूरत होती है • पानी इक्ट्ठा करने के लिए 2 मीटर x 1 मीटर x 20 सैं.मी. (लंबाई x चौड़ाई x ऊंचाई) के हिसाब से गड्ढे खोदें • पानी रिसने,मिट्टी के तापमान और आसपास से पौधों की जड़ों के विकास से बचाव के लिए गड्ढों को प्लास्टिक शीट से ढक दें • प्लास्टिक शीट से बराबर मात्रा में 10—15 किलो छानी हुई मिट्टी बिना किसी मिलावट के डालें • गारा तैयार करने के लिए गोबर 5 किलो, एज़ोफोस 40 ग्राम और एज़ाफर्ट या एस एस पी 20 ग्राम को 10 लीटर पानी में मिलायें इसेअच्छी तरह मिलाने केबाद इसे छान लें और फिर 8 सैं.मी.तक ऊंचा स्तर उठानेके लिए और पानीमिलायें • बिजाई के लिए रोग और कीटों से मुक्त अज़ोला का प्रयोग करें • गड्ढे में अज़ोला 7—10 दिनों के अंदर तैयार हो जाता है और लगभग 1—1.5 किलो पैदावार प्राप्त होती है • अज़ोला की तेजी से पैदावार के लिए 2 किलो गोबर, 25 ग्राम एज़ोफोस और 20 ग्राम एज़ोफर्ट को 2 लीटर पानी में मिलाकर तैयार किया गारा 7 दिनके अंतराल पर डालते रहें पानी में से अज़ोला बाहर निकालने का तरीका पानी में से अज़ोला बाहर निकालने के लिए प्लास्टिक से बनी ट्रे का प्रयोग करें जिसमें 1 वर्ग सैं.मी. वाली जाली के सुराख बने हों सावधानियां • नाइट्रोजन के अलावा जल्दी ही थोड़े अंतराल पर गोबर वाला गारा, सुपर फासफेट और अन्य मैकरो और सूक्ष्मतत्व आदि ना मिलायें, इससे यह समय से पहले ही पक जाता है • अज़ोला के अच्छे विकास के लिए तापमान 30 डिगरी सेल्सियस से कम रहना चाहिए यदि तापमान इससे अधिक है तो छांव के लिए नैट लगाकर तापमान ठीक करें • अनावश्यक घनता को रोकने के लिए हर रोज़ या थोड़े दिन बाद अज़ोला पानी में से निकालते रहें • हर रोज चैक करते रहें और 5.5—7 तक बनाकर रखें • पानी में से अज़ोला निकालने के बाद अच्छी तरह धोकर पशुओं को खाने के लिए दें, Azola seed lene ke lia aap Sandeep 7014864529 se samparak kar sakte hai, Thankyou.
Posted by Ajay Patel
Uttar Pradesh
15-11-2019 01:25 PM

?

Punjab
11-15-2019 01:38 PM
पटेल जी कृपया आप इस एप में खेतीबाड़ी और पशु पालन से संबंधित सवाल पूछें ताकि आपको सही जानकारी दी जा सके
Posted by संजीव कुमार
Uttar Pradesh
15-11-2019 01:22 PM
Maharashtra
11-15-2019 02:12 PM
संजीव जी कृपया आप अपना सवाल विस्तार से पूछे ताकि आपको इसके बारे में पूरी जानकारी दी जा सके धन्यवाद
Posted by Rahul Dedha
Uttar Pradesh
15-11-2019 01:16 PM
Punjab
11-15-2019 01:41 PM
घर में कॉफ स्टाटर तैयार करने के लिए आप 40 किलो मक्की या गेहूं, सोयावीन खल 15 किलो, सरसो खल 7 किलो, चावल पोलिश 10 किलो, चोकर 10 किलो, तेल रहित चावल पोलिश 7 किलो, सीरा 10 किलो,मिर्नल मिक्सर्च 1 किलो और मिठा सोडा 100 ग्राम मिक्स करके अच्छी तरह पीसकर दें
Posted by संजीव कुमार
Uttar Pradesh
15-11-2019 01:14 PM
Maharashtra
11-15-2019 02:13 PM
मालाबार नीम के पेड़ की खेती सभी प्रकार की मिट्टी में की जा सकती है और पानी की कम आपूर्ति की आवश्यकता होती है मालाबार नीम रोपण से 2 साल के भीतर 40 फुट तक उचाई लेलेता है, मालाबार नीम एक नकदी नीम परिवार से संबंधित है इस पेड़ अपनी तेजी से विकास के लिए जाना जाता है हाल के दिनों में कर्नाटक के आसपास के किसान, तमिलनाडु, आ.... (Read More)
मालाबार नीम के पेड़ की खेती सभी प्रकार की मिट्टी में की जा सकती है और पानी की कम आपूर्ति की आवश्यकता होती है मालाबार नीम रोपण से 2 साल के भीतर 40 फुट तक उचाई लेलेता है, मालाबार नीम एक नकदी नीम परिवार से संबंधित है इस पेड़ अपनी तेजी से विकास के लिए जाना जाता है हाल के दिनों में कर्नाटक के आसपास के किसान, तमिलनाडु, आंध्र प्रदेश और केरल में इस वृक्ष की बढ़ी मात्रा में फार्मिंग कर रहे है और इसका प्रयोग सस्ती वुड (plywood इंडस्ट्री) के रूप में कर रहे है यदि पेड़ो को सिंचित किया जाये तो 5 वर्ष के अंत में काटा जा सकता है और प्लाई के लिए प्रयोग किया जासकता है मार्च - अप्रैल के दौरान बीज बोना सबसे अच्छा हैइसके पौधे लेने के लिए आप Radhe Sham 7727065370 Avishkar Agrotech से संपर्क कर सकते है इनसे ही आपको इसके बारे में पूरी जानकारी मिल जाएगी धन्यवाद
Posted by Prashant Indurkar
Maharashtra
15-11-2019 01:04 PM
Punjab
11-15-2019 01:43 PM
इसके लिए आप इसे नज़दीकी डॉक्टर से जांच करवायें क्योंकि बच्चे मरने के कई कारण हो सकते है उनकी जांच करके ही सही पता लग सकता है और बीमारी का सही पता लगाया जा सकता है
Posted by Bhupinder Pawar
Punjab
15-11-2019 01:00 PM
Punjab
11-15-2019 01:44 PM
Bhupinder ji murgi ka egg ko shop wale egg ke roop mai sale krte hai aur mugre ja murgi ko meat ke liye use krte hai, baki aap vistar se apna swal pushen ki aap kya jankari lena chahthe hai tan jo apko sahi jankari di jaa skee..
Posted by ਅੰਮ੍ਰਿਤਪਾਲ ਸਿੰਘ
Punjab
15-11-2019 12:52 PM
Punjab
11-19-2019 04:34 PM
ਸ਼੍ਰੀਮਾਨ ਜੀ, ਬਿਜਾਈ ਤੋਂ ਪਹਿਲਾਂ ਪੈਂਡੀਮੈਥਾਲੀਨ 1 ਲੀਟਰ ਪ੍ਰਤੀ ਏਕੜ ਜਾਂ ਫਲੂਕਲੋਰਾਲਿਨ 800 ਮਿ.ਲੀ ਪ੍ਰਤੀ ਏਕੜ ਨਦੀਨ-ਨਾਸ਼ਕ ਦੇ ਤੌਰ ਤੇ ਪਾਓ ਅਤੇ ਬਿਜਾਈ ਤੋਂ 30 ਦਿਨ ਬਾਅਦ ਇੱਕ ਵਾਰ ਹੱਥੀਂ-ਗੋਡੀ ਕਰੋ ਨਦੀਨਾਂ ਦੀ ਮਾਤਰਾ ਦੇ ਅਨੁਸਾਰ ਦੋਬਾਰਾ ਗੋਡੀ ਕਰੋ ਅਤੇ ਖੇਤ ਨੂੰ ਨਦੀਨ-ਮੁਕਤ ਰੱਖੋ ਧੰਨਵਾਦ
Posted by Gurnishan Singh Dhillon
Punjab
15-11-2019 12:48 PM
Punjab
11-19-2019 04:35 PM
ਸ਼੍ਰੀਮਾਨ ਜੀ, ਜ਼ੀਰੋ ਡਰਿੱਲ ਨਾਲ ਬਿਜਾਈ ਦੇ ਸਮੇਂ ਵਿਚ ਕੋਈ ਫਰਕ ਨਹੀਂ ਪੈਂਦਾ ਹੈ, ਬਿਜਾਈ ਦਾ ਸਮਾਂ ਜੋ ਨਿਯੁਕਤ ਹੁੰਦਾ ਹੈ, ਉਸੇ ਸਮਾਂ ਤੇ ਹੀ ਬਿਜਾਈ ਕੀਤੀ ਜਾਂਦੀ ਹੈ, ਧੰਨਵਾਦ
Posted by HARISH Kumar
Delhi
15-11-2019 12:36 PM
Punjab
11-21-2019 12:19 PM
Harish ji, Cost of miyawaki varies project to project as lot of factors are involved in. It costs approx 40 lacs for further information you can contact Onkar singh ji 8377866347. Thank you
Posted by jigar pandya
Gujarat
15-11-2019 12:29 PM
Chandigarh
11-15-2019 04:27 PM
ये पौधे बिजाई के 40—45 दिनों के बाद उपज देते है ये लगभग 10—12 कटाई दे देती है
Posted by parmar
Madhya Pradesh
15-11-2019 12:28 PM
Punjab
11-15-2019 03:52 PM
मुर्गियों को 30-50 ग्राम अजोला प्रतिदिन खिलाने से मुर्गियों मे शारीरिक भार व अण्डा उत्पादन क्षमता में 10-15 प्रति‍शत की वृद्वि होती है. भेंड एवं बकरियों को 150-200 ग्राम ताजा अजोला खिलाने से शारीरिक वृद्वि एवं दुग्ध उत्पादन में बढोतरी होती है. किसी छायादार स्‍थान पर 60 X 10 X 2 मीटर आकार की क्यारी खोदें क्यारी में 120 गेज क.... (Read More)
मुर्गियों को 30-50 ग्राम अजोला प्रतिदिन खिलाने से मुर्गियों मे शारीरिक भार व अण्डा उत्पादन क्षमता में 10-15 प्रति‍शत की वृद्वि होती है. भेंड एवं बकरियों को 150-200 ग्राम ताजा अजोला खिलाने से शारीरिक वृद्वि एवं दुग्ध उत्पादन में बढोतरी होती है. किसी छायादार स्‍थान पर 60 X 10 X 2 मीटर आकार की क्यारी खोदें क्यारी में 120 गेज की सिलपुटिन शीट को बिछाकर उपर के किनारो पर मिटटी का लेप कर व्यवस्थित कर दें. सिलपुटिन शीट को बिछाने की जगह पशुपालक पक्का निर्माण कर क्यारी तैयार कर सकते है. 80-100 किलोग्राम साफ उपजाउ मिटटी की परत कयारी में बिछा दें. 5-7 किलो गोबर (2-3 दिन पुराना) 10-15 लीटर पानी में घोल बनाकर मिटटी पर फेला दें. क्यारी में 400-500 लीटर पानी भरे जिसमे क्यारी में पानी की गहराई लगभग 10-15 सेमी तक हो जावें. अब उपजाउ मिटटी व गोबर खाद को जल में अच्छी तरह मिश्रित कर देवे. इस मिश्रण पर दो किलो ताजा अजोला को फेला देवें इसके पश्‍चात से 10 लीटर पानी को अच्छी तरह से अजोला पर छिडके जिससे अजोला अपनी सही स्थिति में आ सकें. कयारी को अब 50 प्रति‍शत नायलोन जाली से ढक कर 15-20 दिन तक अजोला को वृद्धि करने दें. 21वें दिन से औसतन 15-20 क़िलोग्राम अजोला प्रतिदिन प्राप्त की जा सकती है. प्रतिदिन 15-20 क़िलोग्राम अजोला की उपज प्राप्त करने हेतु 20 ग्राम सुपरफॉस्फेट तथा 50 क़िलोग्राम गोबर का घोल बनाकर प्रति माह क्यारी में मिलावें.
Posted by goldy pal
Haryana
15-11-2019 12:20 PM
Punjab
11-15-2019 01:53 PM
बकरी पालन बहुत ही लाभकारी काम है शुरूआत करने के लिए आप 10 बकरियों और 2 बकरे के साथ कर सकते हैं इन्हें खुराक कम चाहिए इसलिए इन्हें आसानी से पाल सकते हैं ये हर प्रकार के मौसम में पाली जा सकती हैं बकरियां 12-14 महीने में बच्चे देना शुरू कर देती है बकरी का गर्भ समय 150 दिन का होता है और साल में 1-5 बच्चे देती है साल में दो बच्.... (Read More)
बकरी पालन बहुत ही लाभकारी काम है शुरूआत करने के लिए आप 10 बकरियों और 2 बकरे के साथ कर सकते हैं इन्हें खुराक कम चाहिए इसलिए इन्हें आसानी से पाल सकते हैं ये हर प्रकार के मौसम में पाली जा सकती हैं बकरियां 12-14 महीने में बच्चे देना शुरू कर देती है बकरी का गर्भ समय 150 दिन का होता है और साल में 1-5 बच्चे देती है साल में दो बच्चे देना आम बात है बकरियां 8-10 वर्ष तक बच्चे देती हैं और अपन गिनती को तेजी से बढ़ा लेती हैं आप बारबरी, ब्लैक बंगाल, जैसी नसल पाल सकते हैं इसकी ट्रेनिेंग के लिए आप अपने कुषि विज्ञान केंद्र से संपर्क करे या फिर जो बकरी पालन का व्यवसाय कर रहा कोई किसान उसका फार्म स्वंय जाकर देखकर आयें तो और भी बा​रीकियों का पता चल जायेगा, इसके इलावा आप बीटल नस्ल का रख सकते है क्योंकि ये नस्ल मीट और दूध दोंनो कामों के लिए अच्छी रहती है बकरी लेने के लिए आप Sandeep 9317517763, 9991606387 SR Commercial Goat Farm से संपर्क कर सकते है
Posted by HARISH Kumar
Delhi
15-11-2019 12:16 PM
Rajasthan
11-15-2019 04:58 PM
मियावाकी तकनीक से 1 एकड़ में जंगल लगाने में कितना लगपाग 40 लाख खर्च आएगा
Posted by ਮਲਕੀਤ ਸਿੰਘ
Punjab
15-11-2019 12:02 PM
Punjab
11-15-2019 02:08 PM
ਮਲਕੀਤ ਸਿੰਘ ਜੀ ਸਤਿ ਸ਼੍ਰੀ ਅਕਾਲ ਜੀ, ਸੁਝਾਅ ਦੇਣ ਲਈ ਧੰਨਵਾਦ ਜੀ, ਅਸੀ ਕੋਸ਼ਿਸ਼ ਕਰਾਂਗੇ ਕਿ ਇਸ ਸਬੰਧੀ ਵੀ ਐਪ ਤੇ ਆਪਸ਼ਨ ਲਗਈ ਜਾ ਸਕੇ ਜੀ, ਧੰਨਵਾਦ
Posted by ਮਲਕੀਤ ਸਿੰਘ
Punjab
15-11-2019 11:59 AM
Punjab
11-15-2019 07:04 PM
श्री मान यूनिवर्सिटी इसकी सिफारिश नहीं करती लेकिन कई किसान अपने तजुर्बों से इसे रला कर बीजते है अगर आप इसे रला कर बीजोगे आप अगले साल इसका बीज नहीं रख सकते
Posted by Ajay Patel
Uttar Pradesh
15-11-2019 11:45 AM
Punjab
11-19-2019 11:39 AM
श्रीमान जी, इसकी रोकथाम के लिए आप imidacloprid @ 1.5 ml प्रति लीटर पानी के हिसाब से स्प्रे करें, धन्यवाद
Posted by Ajay Patel
Uttar Pradesh
15-11-2019 11:43 AM
Punjab
11-19-2019 11:35 AM
Ajay ji, is par aap imidacloprid @ 1.5 ml prati liter pani ke hisaab se spray karein, dhanywad
Posted by sandesh sharma
Delhi
15-11-2019 11:35 AM
Punjab
11-15-2019 02:06 PM
Sandesh ji murgi lene ke liye aap Sumit Kumar 8006000291, 7906547529 Sumit Kumar Poultry Farm nal sampark kr skte ho..
Posted by Sharanpreet Singh
Punjab
15-11-2019 11:34 AM
Punjab
11-15-2019 11:41 AM
ਸਰੋਂ ਦੀ ਬਿਜਾਈ ਦਾ ਸਹੀ ਸਮਾਂ ਸਤੰਬਰ ਤੋਂ ਅਕਤੂਬਰ ਹੈ ਤੋਰੀਆ ਫਸਲ ਲਈ ਬਿਜਾਈ ਸਤੰਬਰ ਦੇ ਪਹਿਲੇ ਪੰਦਰਵਾੜੇ ਤੋਂ ਅੱਧ ਅਕਤੂਬਰ ਤੱਕ ਕਰ ਲੈਣੀ ਚਾਹੀਦੀ ਹੈ ਅਫਰੀਕਨ ਸਰੋਂ ਅਤੇ ਤਾਰਾਮੀਰਾ ਦੀ ਫਸਲ ਅਕਤੂਬਰ ਦੇ ਅਖੀਰ ਤੱਕ ਬੀਜੀ ਜਾ ਸਕਦੀ ਹੈ ਰਾਇਆ ਫਸਲ ਦੀ ਬਿਜਾਈ ਅੱਧ ਅਕਤੂਬਰ ਤੋਂ ਨਵੰਬਰ ਦੇ ਅਖੀਰ ਤੱਕ ਕੀਤੀ ਜਾਂਦੀ ਹੈ ਜਦੋਂ ਤਾਰਾਮੀਰਾ ਨੂੰ ਮੁੱਖ ਫਸਲ ਦੇ ਵਿੱਚ ਉਗਾਇਆ ਜਾਂਦਾ ਹ.... (Read More)
ਸਰੋਂ ਦੀ ਬਿਜਾਈ ਦਾ ਸਹੀ ਸਮਾਂ ਸਤੰਬਰ ਤੋਂ ਅਕਤੂਬਰ ਹੈ ਤੋਰੀਆ ਫਸਲ ਲਈ ਬਿਜਾਈ ਸਤੰਬਰ ਦੇ ਪਹਿਲੇ ਪੰਦਰਵਾੜੇ ਤੋਂ ਅੱਧ ਅਕਤੂਬਰ ਤੱਕ ਕਰ ਲੈਣੀ ਚਾਹੀਦੀ ਹੈ ਅਫਰੀਕਨ ਸਰੋਂ ਅਤੇ ਤਾਰਾਮੀਰਾ ਦੀ ਫਸਲ ਅਕਤੂਬਰ ਦੇ ਅਖੀਰ ਤੱਕ ਬੀਜੀ ਜਾ ਸਕਦੀ ਹੈ ਰਾਇਆ ਫਸਲ ਦੀ ਬਿਜਾਈ ਅੱਧ ਅਕਤੂਬਰ ਤੋਂ ਨਵੰਬਰ ਦੇ ਅਖੀਰ ਤੱਕ ਕੀਤੀ ਜਾਂਦੀ ਹੈ ਜਦੋਂ ਤਾਰਾਮੀਰਾ ਨੂੰ ਮੁੱਖ ਫਸਲ ਦੇ ਵਿੱਚ ਉਗਾਇਆ ਜਾਂਦਾ ਹੈ ਤਾਂ ਇਸ ਦੀ ਬਿਜਾਈ ਮੁੱਖ ਫਸਲ ਤੇ ਨਿਰਭਰ ਕਰਦੀ ਹੈ
Posted by Gurtej Singh
Punjab
15-11-2019 11:31 AM
Punjab
11-15-2019 02:03 PM
BhaaG rajwa hara chaara te har 3kg dudh lai majh nu 1kg feed pao har 3 mahine baad malap rehat karo 1quintal feed da formula Anaaj 45 kg khal 25 kg chokar or rice polish 30kg min mix 2kg namak 1kg aap bna lao
Posted by manpreet Chahal
Punjab
15-11-2019 11:29 AM
Punjab
11-15-2019 07:11 PM
Posted by ravi singh
Uttar Pradesh
15-11-2019 11:29 AM
Punjab
11-19-2019 05:25 PM
रवि जी आप इसकी बिजाई कर सकते है पर पिछले साल से इस साल उपज कम आएगी धन्यवाद
Posted by Gurkirpal singh
Punjab
15-11-2019 11:24 AM
Punjab
11-19-2019 05:24 PM
ਸ਼੍ਰੀਮਾਨ ਜੀ ਤੁਸੀ ਇਸ ਦੀ ਸਪਰੇ ਕਰ ਸਕਦੇ ਹੋ, ਇਸਦੀ ਮਾਤਰਾ 3 -4 ml ਪ੍ਰਤੀ ਲਿਟਰ ਪਾਣੀ ਦੇ ਹਿਸਾਬ ਨਾਲ ਕੀਤੀ ਜਾਂਦੀ ਹੈ, ਧੰਨਵਾਦ
Posted by ATMA singh
Punjab
15-11-2019 11:18 AM
Punjab
11-15-2019 02:05 PM
austan 9 mahine 9 din lendi ae
Posted by ATMA singh
Punjab
15-11-2019 11:17 AM
Punjab
11-15-2019 02:12 PM
Atma ji tuci uss nu Sharkoferol liquid 50-50ml swere sham deo ate Bovimin-B powder 50-100 gm rojana deo, iss nal frak paa jawega, baki usdi deworming her 3 month badd jrurr kro ji..
Posted by Vikas Thory
Haryana
15-11-2019 11:12 AM
Punjab
11-20-2019 07:19 PM
Posted by Sudhir Malik
Haryana
15-11-2019 11:09 AM
Punjab
03-16-2020 07:56 PM
Sudhir Malik ji tuc jaivik kheti karn vale farmer Jaspreet Singh 9872509966 9779280366 Whole Organic nal sampark kar sakde ho isto ilava tuc waste decomposer lain layi Regional Centre of Organic Farming, Regional Director Kisan Bhawan, Sector 14, Panchkula-134 109 (Haryana). 0172-2564460, sampark kar skte hain.
Posted by kuldeep
Haryana
15-11-2019 11:05 AM
Punjab
11-19-2019 09:58 AM
श्रीमान जी, बिजाई के 20-25 दिनों के बाद पहली सिंचाई देनी चाहिए जड़ें बनने के समय पर नमी का होना पैदावार को कम होने से बचाता है ठंडे क्षेत्रों में जैसे पहाड़ी क्षेत्रों और जहां पर गेहूं की पिछेती बिजाई की जाती है वहां पर बिजाई के लगभग 25-30 दिनों के बाद पहली सिंचाई करें बिजाई के 40-45 दिनों के बाद पौधा बनने के समय दूसरी .... (Read More)
श्रीमान जी, बिजाई के 20-25 दिनों के बाद पहली सिंचाई देनी चाहिए जड़ें बनने के समय पर नमी का होना पैदावार को कम होने से बचाता है ठंडे क्षेत्रों में जैसे पहाड़ी क्षेत्रों और जहां पर गेहूं की पिछेती बिजाई की जाती है वहां पर बिजाई के लगभग 25-30 दिनों के बाद पहली सिंचाई करें बिजाई के 40-45 दिनों के बाद पौधा बनने के समय दूसरी सिंचाई करें तीसरी सिंचाई 70-75 दिनों के बाद नोड्स बनने के समय करें फूल निकलने के समय चौथी सिंचाई 90-95 दिनों में करें पांचवी सिंचाई बिजाई के 110-115 दिनों के बाद करें जब दाने अपरिपक्व होते हैं धन्यवाद
Posted by harpreet singh
Punjab
15-11-2019 10:50 AM
Punjab
11-19-2019 09:56 AM
ਹਰਪ੍ਰੀਤ ਜੀ, ਇਹ ਭਾਰਤ ਦੀ ਇੱਕ ਮੱਹਤਵਪੂਰਨ ਫ਼ਸਲ ਹੈ ਮਿਰਚ ਹਲਕੀ ਤੋਂ ਭਾਰੀ ਹਰ ਤਰ੍ਹਾਂ ਦੀ ਮਿੱਟੀ ਵਿੱਚ ਉਗਾਈ ਜਾ ਸਕਦੀ ਹੈ CH-1: ਇਹ ਕਿਸਮ ਪੀ ਏ ਯੂ ਲੁਧਿਆਣੇ ਵੱਲੋਂ ਬਣਾਈ ਗਈ ਹੈ ਇਹ ਦਰਮਿਆਨੇ ਕੱਦ ਵਾਲੀ ਕਿਸਮ ਹੈ ਇਸਦਾ ਫ਼ਲ ਦਰਮਿਆਨੇ ਆਕਾਰ ਅਤੇ ਹਲਕੇ ਹਰੇ ਰੰਗ ਦਾ ਹੁੰਦਾ ਹੈ ਜੋ ਪੱਕਣ ਤੋਂ ਬਾਅਦ ਗੂੜੇ ਲਾਲ ਰੰਗ ਦਾ ਹੋ ਜਾਂਦਾ ਹੈ ਇਸ ਕਿਸਮ ਦਾ ਫ਼ਲ ਬਹੁਤ ਕੌੜਾ ਅਤੇ ਆਕਰਸ਼ਿਤ ਹੁੰਦਾ ਹੈ .... (Read More)
ਹਰਪ੍ਰੀਤ ਜੀ, ਇਹ ਭਾਰਤ ਦੀ ਇੱਕ ਮੱਹਤਵਪੂਰਨ ਫ਼ਸਲ ਹੈ ਮਿਰਚ ਹਲਕੀ ਤੋਂ ਭਾਰੀ ਹਰ ਤਰ੍ਹਾਂ ਦੀ ਮਿੱਟੀ ਵਿੱਚ ਉਗਾਈ ਜਾ ਸਕਦੀ ਹੈ CH-1: ਇਹ ਕਿਸਮ ਪੀ ਏ ਯੂ ਲੁਧਿਆਣੇ ਵੱਲੋਂ ਬਣਾਈ ਗਈ ਹੈ ਇਹ ਦਰਮਿਆਨੇ ਕੱਦ ਵਾਲੀ ਕਿਸਮ ਹੈ ਇਸਦਾ ਫ਼ਲ ਦਰਮਿਆਨੇ ਆਕਾਰ ਅਤੇ ਹਲਕੇ ਹਰੇ ਰੰਗ ਦਾ ਹੁੰਦਾ ਹੈ ਜੋ ਪੱਕਣ ਤੋਂ ਬਾਅਦ ਗੂੜੇ ਲਾਲ ਰੰਗ ਦਾ ਹੋ ਜਾਂਦਾ ਹੈ ਇਸ ਕਿਸਮ ਦਾ ਫ਼ਲ ਬਹੁਤ ਕੌੜਾ ਅਤੇ ਆਕਰਸ਼ਿਤ ਹੁੰਦਾ ਹੈ ਇਹ ਕਿਸਮ ਗਲਣ ਰੋਗ ਨੂੰ ਸਹਾਰ ਸਕਦੀ ਹੈ ਇਸਦਾ ਔਸਤਨ ਝਾੜ 95-100 ਕੁਇੰਟਲ ਪ੍ਰਤੀ ਏਕੜ ਹੈ CH-3: ਇਹ ਕਿਸਮ ਪੰਜਾਬ ਖੇਤੀਬਾੜੀ ਯੂਨੀਵਰਸਿਟੀ, ਲੁਧਿਆਣਾ ਦੁਆਰਾ ਬਣਾਈ ਗਈ ਹੈ ਇਸਦੇ ਫ਼ਲ ਦਾ ਆਕਾਰ CH-1 ਦੇ ਆਕਾਰ ਨਾਲੋਂ ਵੱਡਾ ਹੁੰਦਾ ਹੈ ਇਸ ਵਿੱਚ ਕੈਪਸੇਸਿਨ ਦੀ ਮਾਤਰਾ 0.52% ਹੁੰਦੀ ਹੈ ਇਸ ਦਾ ਔਸਤਨ ਝਾੜ 100-110 ਕੁਇੰਟਲ ਪ੍ਰਤੀ ਏਕੜ ਹੁੰਦਾ ਹੈ CH-27: ਇਸ ਕਿਸਮ ਦੇ ਪੌਦੇ ਲੰਬੇ ਹੁੰਦੇ ਹਨ ਅਤੇ ਜ਼ਿਆਦਾ ਸਮੇਂ ਤੱਕ ਫ਼ਲ ਦਿੰਦੇ ਹਨ ਇਸ ਕਿਸਮ ਦੇ ਫ਼ਲ ਦਰਮਿਆਨੇ ਲੰਬੇ (6.7 ਸੈ.ਮੀ.), ਪਤਲੇ ਛਿਲਕੇ ਵਾਲੇ, ਸ਼ੁਰੂ ਵਿੱਚ ਹਲਕੇ ਹਰੇ ਅਤੇ ਪੱਕਣ ਤੋਂ ਬਾਅਦ ਲਾਲ ਰੰਗ ਦੇ ਹੁੰਦੇ ਹਨ ਇਹ ਕਿਸਮ ਪੱਤਾ ਮਰੋੜ, ਫਲ ਅਤੇ ਜੜ੍ਹ ਗਲਣ, ਰਸ ਚੂਸਣ ਵਾਲੇ ਕੀਟਾਂ ਜਿਵੇਂ ਕਿ ਮਕੌੜਾ ਜੂੰ ਆਦਿ ਦੀ ਰੋਧਕ ਹੈ ਇਸ ਦਾ ਔਸਤਨ ਝਾੜ 90-110 ਕੁਇੰਟਲ ਪ੍ਰਤੀ ਏਕੜ ਹੁੰਦਾ ਹੈ Punjab Sindhuri: ਇਸ ਕਿਸਮ ਦੇ ਪੌਦੇ ਗੂੜੇ ਹਰੇ, ਠੋਸ ਅਤੇ ਦਰਮਿਆਨੇ ਕੱਦ ਦੇ ਹੁੰਦੇ ਹਨ ਇਹ ਛੇਤੀ ਪੱਕਣ ਵਾਲੀ ਕਿਸਮ ਹੈ ਅਤੇ ਇਸਦੀ ਪਹਿਲੀ ਤੁੜਾਈ ਪਨੀਰੀ ਲਾਉਣ ਤੋਂ 75 ਦਿਨ ਬਾਅਦ ਕੀਤੀ ਜਾ ਸਕਦੀ ਹੈ ਇਸਦੇ ਫ਼ਲ ਲੰਮੇ (7-14 ਸੈ.ਮੀ.), ਮੋਟੇ ਛਿਲਕੇ ਵਾਲੇ, ਸ਼ੁਰੂ ਵਿੱਚ ਗੂੜੇ ਹਰੇ ਅਤੇ ਪੱਕਣ ਤੋਂ ਬਾਅਦ ਗੂੜੇ ਲਾਲ ਰੰਗ ਦੇ ਹੁੰਦੇ ਹਨ ਇਸ ਦਾ ਔਸਤਨ ਝਾੜ 70-75 ਕੁਇੰਟਲ ਪ੍ਰਤੀ ਏਕੜ ਹੁੰਦਾ ਹੈ Punjab Tej: ਇਸਦੇ ਪੌਦੇ ਹਲਕੇ ਹਰੇ, ਫੈਲੇ ਹੋੋਏ ਅਤੇ ਦਰਮਿਆਨੇ ਕੱਦ ਦੇ ਹੁੰਦੇ ਹਨ ਇਹ ਛੇਤੀ ਪੱਕਣ ਵਾਲੀ ਕਿਸਮ ਹੈ ਅਤੇ ਇਸਦੀ ਪਹਿਲੀ ਤੁੜਾਈ ਪਨੀਰੀ ਲਾਉਣ ਤੋਂ 75 ਦਿਨ ਬਾਅਦ ਕੀਤੀ ਜਾ ਸਕਦੀ ਹੈ ਇਸਦੇ ਫ਼ਲ ਲੰਮੇ (6-8 ਸੈ.ਮੀ.), ਪਤਲੇ ਛਿਲਕੇ ਵਾਲੇ, ਸ਼ੁਰੂ ਵਿੱਚ ਹਲਕੇ ਹਰੇ ਰੰਗ ਦੇ ਹੁੰਦੇ ਹਨ ਜੋ ਪੱਕਣ ਤੋਂ ਬਾਅਦ ਗੂੜੇ ਲਾਲ ਰੰਗ ਦੇ ਹੋ ਜਾਂਦੇ ਹਨ ਇਸ ਦਾ ਔਸਤਨ ਝਾੜ 60 ਕੁਇੰਟਲ ਪ੍ਰਤੀ ਏਕੜ ਹੁੰਦਾ ਹੈ Pusa Jwala: ਇਸ ਕਿਸਮ ਦੇ ਪੌਦੇ ਛੋਟੇ ਕੱਦ ਦੇ, ਝਾੜੀਆਂ ਵਾਲੇ ਅਤੇ ਹਲਕੇ ਹਰੇ ਰੰਗ ਦੇ ਹੁੰਦੇ ਹਨ ਇਸਦੇ ਫਲ 9-10 ਸੈ.ਮੀ. ਲੰਬੇ, ਹਲਕੇ ਹਰੇ ਅਤੇ ਬਹੁਤ ਕੌੜੇ ਹੁੰਦੇ ਹਨ ਇਹ ਕਿਸਮ ਥਰਿਪ ਅਤੇ ਮਕੌੜਾ ਜੂੰ ਦੀ ਰੋਧਕ ਹੈ ਇਸ ਦਾ ਔਸਤਨ ਝਾੜ 34 ਕੁਇੰਟਲ (ਹਰੀਆਂ ਮਿਰਚਾਂ) ਅਤੇ 7 ਕੁਇੰਟਲ (ਸੁੱਕੀਆਂ ਮਿਰਚਾਂ) ਪ੍ਰਤੀ ਏਕੜ ਹੁੰਦਾ ਹੈ Pusa Sadabahar: ਇਸਦੇ ਪੌਦੇ ਸਿੱਧੇ, ਸਦਾਬਹਾਰ (2-3 ਸਾਲ), 60-80 ਸੈ.ਮੀ. ਕੱਦ ਦੇ ਹੁੰਦੇ ਹਨ ਇਸਦੇ ਫ਼ਲ 6-8 ਸੈ.ਮੀ. ਲੰਬੇ ਹੁੰਦੇ ਹਨ ਫਲ ਗੁੱਛਿਆਂ ਵਿੱਚ ਲੱਗਦੇ ਹਨ ਅਤੇ ਹਰੇਕ ਗੁੱਛੇ ਚ 6-14 ਫਲ ਹੁੰਦੇ ਹਨ ਪੱਕਣ ਸਮੇਂ ਫਲ ਗੂੜੇ ਲਾਲ ਰੰਗ ਦੇ ਅਤੇ ਕੌੜੇ ਹੁੰਦੇ ਹਨ ਇਹ ਕਿਸਮ CMV, TMV ਅਤੇ ਪੱਤਾ ਮਰੋੜ ਦੀ ਰੋਧਕ ਹੈ ਇਸਦੀ ਪਹਿਲੀ ਤੁੜਾਈ ਪਨੀਰੀ ਲਾਉਣ ਤੋਂ 75-80 ਦਿਨ ਬਾਅਦ ਕੀਤੀ ਜਾ ਸਕਦੀ ਹੈ ਇਸਦਾ ਔਸਤਨ ਝਾੜ 38 ਕੁਇੰਟਲ (ਹਰੀਆਂ ਮਿਰਚਾਂ) ਅਤੇ 8 ਕੁਇੰਟਲ (ਸੁੱਕੀਆਂ ਮਿਰਚਾਂ) ਪ੍ਰਤੀ ਏਕੜ ਹੈ Arka Meghana: ਇਹ ਹਾਈਬ੍ਰਿਡ ਕਿਸਮ ਵੱਧ ਝਾੜ ਵਾਲੀ ਅਤੇ ਪੱਤਿਆਂ ਦੇ ਧੱਬਾ ਰੋਗ ਦੀ ਰੋਧਕ ਹੈ ਇਸ ਦੇ ਫਲਾਂ ਦੀ ਲੰਬਾਈ 10.6 ਸੈ.ਮੀ. ਅਤੇ ਚੌੜਾਈ 1.2 ਸੈ.ਮੀ. ਹੁੰਦੀ ਹੈ ਇਸ ਦੇ ਫਲ ਸ਼ੁਰੂ ਵਿੱਚ ਗੂੜੇ ਹਰੇ ਅਤੇ ਪੱਕਣ ਤੋਂ ਬਾਅਦ ਲਾਲ ਹੋ ਜਾਂਦੇ ਹਨ ਇਸਦਾ ਔਸਤਨ ਝਾੜ 134 ਕੁਇੰਟਲ (ਹਰੀ ਮਿਰਚ) ਅਤੇ 20 ਕੁਇੰਟਲ (ਸੁੱਕੀ ਮਿਰਚ) ਹੁੰਦਾ ਹੈ Arka Sweta: ਇਹ ਹਾਈਬ੍ਰਿਡ ਕਿਸਮ ਵਧੇਰੇ ਝਾੜ ਵਾਲੀ ਅਤੇ ਤਾਜ਼ਾ ਮੰਡੀ ਵਿੱਚ ਵੇਚਣਯੋਗ ਹੈ ਇਹ ਸੇਂਜੂ ਸਥਿਤੀਆਂ ਵਿੱਚ ਸਾਉਣੀ ਅਤੇ ਹਾੜੀ ਦੋਨੋਂ ਵਿੱਚ ਉਗਾਈ ਜਾ ਸਕਦੀ ਹੈ ਇਸ ਦੇ ਫਲ ਦੀ ਲੰਬਾਈ 11-12 ਸੈ.ਮੀ., ਚੌੜਾਈ 1.2-1.5 ਸੈ.ਮੀ. ਹੁੰਦੀ ਹੈ ਫਲ ਮੁਲਾਇਮ ਅਤੇ ਦਰਮਿਆਨੇ ਕੌੜੇ ਹੁੰਦੇ ਹਨ ਫਲ ਸ਼ੁਰੂ ਵਿੱਚ ਹਲਕੇ ਹਰੇ ਅਤੇ ਪੱਕਣ ਤੋਂ ਬਾਅਦ ਲਾਲ ਹੋ ਜਾਂਦੇ ਹਨ ਇਹ ਵਿਸ਼ਾਣੂਆਂ ਨੂੰ ਸਹਾਰਨਯੋਗ ਕਿਸਮ ਹੈ ਇਸ ਦਾ ਔਸਤਨ ਝਾੜ 132 ਕੁਇੰਟਲ (ਹਰੀਆਂ ਮਿਰਚਾਂ) ਅਤੇ 20 ਕੁਇੰਟਲ (ਸੁੱਕੀਆਂ ਮਿਰਚਾਂ) ਪ੍ਰਤੀ ਏਕੜ ਹੈ Kashi Early: ਇਸ ਹਾਈਬ੍ਰਿਡ ਕਿਸਮ ਦੇ ਪੌਦੇ ਦਾ ਕੱਦ ਲੰਬਾ (100-110 ਸੈ.ਮੀ.) ਹੁੰਦਾ ਹੈ ਇਸਦਾ ਤਣਾ ਟਾਹਣੀਆਂ ਤੋਂ ਬਿਨਾਂ ਫਿੱਕਾ ਹਰਾ ਹੁੰਦਾ ਹੈ ਇਸ ਦੇ ਫ਼ਲ ਕੌੜੇ, ਲੰਬੇ ( 8-9 x 1.0-1.2 ਸੈ.ਮੀ.), ਆਕਰਸ਼ਿਕ, ਸ਼ੁਰੂ ਵਿੱਚ ਗੂੜੇ ਹਰੇ ਜੋ ਪੱਕਣ ਤੋਂ ਬਾਅਦ ਚਮਕੀਲੇ ਲਾਲ ਹੋ ਜਾਂਦੇ ਹਨ ਇਸ ਕਿਸਮ ਵਿੱਚ ਹਰੀ ਮਿਰਚ ਦੀ ਪਹਿਲੀ ਤੁੜਾਈ ਪਨੀਰੀ ਲਗਾਉਣ ਤੋਂ 45 ਦਿਨ ਬਾਅਦ ਕੀਤੀ ਜਾ ਸਕਦੀ ਹੈ ਇਸ ਦਾ ਔਸਤਨ ਝਾੜ 100 ਕੁਇੰਟਲ (ਪੱਕੀ ਹੋਈ ਲਾਲ) ਹੁੰਦਾ ਹੈ Kashi Surkh: ਇਸ ਕਿਸਮ ਦੇ ਪੌਦੇ ਛੋਟੇ ਕੱਦ ਦੇ ਹੁੰਦੇ ਹਨ, ਜਿਨ੍ਹਾਂ ਦਾ ਤਣਾ ਟਾਹਣੀਆਂ ਵਾਲਾ ਹੁੰਦਾ ਹੈ ਇਸਦੇ ਫ਼ਲ ਹਲਕੇ ਹਰੇ, ਸਿੱਧੇ, ਲੰਬੇ 11-12 ਸੈ.ਮੀ. ਹੁੰਦੇ ਹਨ ਇਹ ਹਰੀ ਅਤੇ ਲਾਲ ਦੋਨੋਂ ਤਰ੍ਹਾਂ ਦੀਆਂ ਮਿਰਚਾਂ ਉਗਾਉਣਯੋਗ ਕਿਸਮ ਹੈ ਇਸਦੀ ਪਹਿਲੀ ਤੁੜਾਈ ਪਨੀਰੀ ਲਗਾਉਣ ਤੋਂ 55 ਦਿਨਾਂ ਬਾਅਦ ਕੀਤੀ ਜਾ ਸਕਦੀ ਹੈ ਇਸ ਵਿੱਚ ਹਰੀ ਮਿਰਚ ਦਾ ਔਸਤਨ ਝਾੜ 100 ਕੁਇੰਟਲ ਪ੍ਰਤੀ ਏਕੜ ਹੈ Kashi Anmol: ਇਸ ਕਿਸਮ ਦੇ ਪੌਦੇ ਦਰਮਿਆਨੇ ਕੱਦ ਦੇ(60-70 ਸੈ.ਮੀ.) ਹੁੰਦੇ ਹਨ, ਜਿਨ੍ਹਾਂ ਦਾ ਤਣਾ ਟਾਹਣੀਆਂ ਵਾਲਾ ਹੁੰਦਾ ਹੈ ਅਤੇ ਇਹ ਆਕਰਸ਼ਿਕ ਹਰੇ ਕੌੜੇ ਫਲ ਪੈਦਾ ਕਰਦਾ ਹੈ ਇਸਦੀ ਪਹਿਲੀ ਤੁੜਾਈ ਪਨੀਰੀ ਲਗਾਉਣ ਤੋਂ 55 ਦਿਨ ਬਾਅਦ ਕੀਤੀ ਜਾ ਸਕਦੀ ਹੈ ਇਸਦਾ ਔਸਤਨ ਝਾੜ 80 ਕੁਇੰਟਲ ਪ੍ਰਤੀ ਏਕੜ ਹੁੰਦਾ ਹੈ ਧੰਨਵਾਦ
Posted by Suraj Arya
Punjab
15-11-2019 10:49 AM
Punjab
11-19-2019 09:54 AM
shrimaan ji, eh chikni mitti hai, sabjiya di paidawaar thodi retli mitti ch jayda vadia hundi ai, dhanwad
Posted by muntakhab
Jharkhand
15-11-2019 10:42 AM
Punjab
11-19-2019 09:51 AM
श्रीमान जी, जब भी नए पौधे की बुवाई की जाती ही, उसकी जड़ बनने में 45 -60 दिन लग जाते हैं और जड़ बनने के बाद यह विधि करना शुरू कर देता है , धन्यवाद
Posted by Ajay Singh
Haryana
15-11-2019 10:25 AM
Maharashtra
11-15-2019 10:49 AM
खुम्ब की किस्में कई प्रकार की होती है जैसे कि बटन खुम्ब, डीगरी, शटाकी खुम्ब, पराली खुम्ब, और मिलकी खुम्ब इनमे से कुइ खुम्ब सर्दियो के मौसम में और कुछ गर्मीयों के मौसम में लगाये जाते है और हर खुम्ब को लगाने का समय अलग अलग है जैसे बटन खुम्ब का समय सितंबर से मार्च तक होता है इस समय में हम तीन फसले ले सकते है शटाकी .... (Read More)
खुम्ब की किस्में कई प्रकार की होती है जैसे कि बटन खुम्ब, डीगरी, शटाकी खुम्ब, पराली खुम्ब, और मिलकी खुम्ब इनमे से कुइ खुम्ब सर्दियो के मौसम में और कुछ गर्मीयों के मौसम में लगाये जाते है और हर खुम्ब को लगाने का समय अलग अलग है जैसे बटन खुम्ब का समय सितंबर से मार्च तक होता है इस समय में हम तीन फसले ले सकते है शटाकी खुम्ब का समय अक्तूबर से मध्य फरवरी तक हैं इस समय हम एक फसल ही ले सकते है पराली खुम्ब का समय अप्रैल से अगस्त तक है इस समय हम चार फसले ले सकते है मिलकी खुम्ब का समय अप्रैल से सितंबर तक है आप अब अप्रैल में मिलकी या पराली खुम्ब लगा सकते है पराली खुमब के लिए आपको पराली, बीज, बांस, सेबा, आदि की जरूरत है पराली के पूले, धानो की पराली 1-1 किलो के पूले दोनो सिरो से सेबे से बांध कर तैयार किये जाते है पूले के सिरे कांट कर एक सार कर लिए जाते है पूलो की क्यिारी लगाना पराली के पूलो को साफ पानी में 16-20 घंटो के लिए डूबो दे गिले पूलो को ढलान पर रख कर फालतू पानी को निकलने दे कमरे ईटो और बांस से एक पलेटफार्म बनाये इस पलेटफार्म पर 5 पूलो की एक तहय लगाये जिसके ऊपर 75 ग्राम बीज डाले इसके ऊपर की तहय उलट होती है इस प्रकार 5-5 पूलो की तहय में 300 ग्राम बीज डाल कर कियारी तैयार करे सबसे ऊपर दो पूलो को खोलकर रख दे खुम्बो का फूटना बिजाई से 7-9 दिनो के बाद खुम्ब फूटने लगती है पानी और हवा का संचार बिजाई के दो दिन के बाद हर रोज पानी का छिडका करे खुम्बो के फूटने के बाद हवा का संचार 6-8 घंटे प्रति दिन किया जाता है खुम्बो की तूडाई खुम्बो के फूटने के बाद 1-2 दिनो के बाद तोडाई के योग्य हो जाती है मिलकी खुम्ब मिलकी खुम्ब के लिए तूडी, बीज, मोमी लिफाफे, सेबा, केसिंग,मिट्टी आदि होने चाहिये तूडी की तैयारी सूकी तूडी को पक्के फर्श पर बिछा कर 16-20 घंटे पानी से गिला करे गिली तूडी को बोरी में भर कर सेबे से बांध दे इस बोरी को उबलते पानी में 45-50 मिनट रखें तूडी को निकालकर पक्के फर्श पर बिछा कर ठंडा करे यह तूडी बिजाई के लिए तैयार है बिजाई ठंडी तूडी में बीज मिलाकर मोमी लिफाफो में भर दें एक मोमी लिफाफें में लगभग 2 किलो गिली तूडी और 70-80 ग्राम बीज पडता है लिफाफे के मुंह को सेबे से अच्छी तरह बांध कर कमरे में रख दे केसिंग बिजाई के दो तीन हफतो के बाद लिफाफे खोलकर केसिंग की 1-1.5 की तहय लगा दें केसिंग में तूडी और रेतली मिट्टी होती है 24 घंटो के लिए 4 प्रतिशत फारमलेन के घोल से जीवाणु रहित किया जाता है खुम्बो का फूटना केसिंग मिट्टी डालने के लगभग दो हफतो में खुम्बो के छोटे छोटे किणके निकलने शुरू हो जाते है और 4-5 दिन के बाद तोडने योग्य हो जाते है खुम्बो की तूडाई लगभग 35-40 दिनो तक की जाती है
Posted by gurinder
Punjab
15-11-2019 10:19 AM
Punjab
11-15-2019 10:30 AM
ਸ੍ਰੀ ਮਾਨ ਜੀ HD 2967: ਇਹ ਵੱਡੇ ਕੱਦ ਦੀ ਕਿਸਮ ਹੈ ਜਿਸ ਵਿਚ ਬੂਟੇ ਦਾ ਔਸਤਨ ਕੱਦ 101 ਸੈ.ਮੀ. ਤੱਕ ਹੁੰਦਾ ਹੈ ਇਸ ਦੇ ਦਾਣੇ ਸੁਨਹਿਰੇ, ਮਧਰੇ, ਸਖਤ ਅਤੇ ਚਮਕਦਾਰ ਹੁੰਦੇ ਹਨ ਇਹ ਲਗਭਗ 157 ਦਿਨਾਂ ਵਿੱਚ ਪੱਕ ਜਾਂਦੀ ਹੈ ਇਸ ਦੀ ਔਸਤਨ ਪੈਦਾਵਾਰ 21.5 ਕੁਇੰਟਲ ਪ੍ਰਤੀ ਏਕੜ ਹੈ ਇਸਦੀ ਬਿਜਾਈ ਅਕਤੂਬਰ ਤੋਂ ਲੈ ਕੇ 30 ਨਵੰਬਰ ਤੱਕ ਕਰ ਸਕਦੇ ਹੋ
Posted by muntakhab
Jharkhand
15-11-2019 09:58 AM
Punjab
11-19-2019 09:43 AM
श्रीमान जी, कृपया आप बताये के आपके चीकू की आयु कितनी है, ताकि आपको इसका उच्चित समाधान दिया जा सके, धन्यवाद
Posted by Digpal Chauhan
Uttarakhand
15-11-2019 09:43 AM
Chandigarh
11-15-2019 04:39 PM
इसे मिट्टी की कई किस्मों में उगाया जाता है लेकिन अच्छे जल निकास वाली रेतली दोमट मिट्टी कीवी की खेती के लिए अच्छी होती है अच्छी उपज प्राप्त करने के लिए मिट्टी की पी एच 6.9 से कम होनी चाहिए भारी गीली मिट्टी में इसकी खेती नहीं करनी चाहिए क्योंकि यह पौधे की वृद्धि पर प्रभाव डालती है निम्नलिखित किस्में उत्तराखं.... (Read More)
इसे मिट्टी की कई किस्मों में उगाया जाता है लेकिन अच्छे जल निकास वाली रेतली दोमट मिट्टी कीवी की खेती के लिए अच्छी होती है अच्छी उपज प्राप्त करने के लिए मिट्टी की पी एच 6.9 से कम होनी चाहिए भारी गीली मिट्टी में इसकी खेती नहीं करनी चाहिए क्योंकि यह पौधे की वृद्धि पर प्रभाव डालती है निम्नलिखित किस्में उत्तराखंड में लगाने के लिए उपयुक्त हैं: Hayward: इस किस्म के फल चौड़े और समतल होते हैं इस किस्म को अधिक ठंडे समय की आवश्यकता होती है Abbott: यह किस्म जल्दी फूल निकालने वाली और जल्दी पकने वाली किस्म है इसके फल मध्यम आकार के और लंबाकार आकार के होते हैं इसके फल स्वाद में बहुत मीठे होते हैं Allison: यह जल्दी पकने वाली किस्म है इसके फल स्वाद में मीठे होते हैं इसके फल Abbott किस्म से लंबे और चौड़े होते हैं नर और मादा फूल मौजूद होते हैं Monty: यह अधिक पैदावार वाली किस्म है यह देरी से पकने वाली और जल्दी फल पकने वाली किस्म है इसके फल अच्छे आकार के और लंबाकार होते हैं Bruno: इस किस्म को कम ठंडे तापमान की आवश्यकता होती है इसके फल का आधार लंबा पतला होता है इस किस्म के फल गहरे भूरे रंग के होते हैं जो कि आकार में छोटे और घने होते हैं हवा एक प्रमुख कारक है इसलिए कीवी के फलों को अच्छे विकास के लिए और हवा से बचाने के लिए शैड की आवश्यकता होती है कीवी की खेती के लिए खड़ी ढाल भूमि की आवश्यकता होती है मिट्टी के भुरभुरा होने तक खेत की अच्छी तरह से जोताई करें 1मीटर x 1 मीटर x 1मीटर आकार के गड्ढे तैयार करें और इन गड्ढों को रूड़ी की खाद या गाय के गले हुए गोबर से सितंबर अक्तूबर के महीने में अच्छी तरह भरें क्योंकि कीवी एक ऐसा पौधा है जिस पर नर और मादा एक ही पौधे पर होते हैं इसलिए बिजाई के दौरान नर और मादा का अनुपात 1 9 रखें, भारत में दो नर पौधे उपलब्ध हैं Tomuri और Allison परागन के लिए बागान में मधुमक्खियों की अधिक जनसंख्या रखें रोपाई जनवरी-फरवरी महीने में की जाती है शुरूआती खुराक के तौर पर रूड़ी की खाद 50 किलो और NPK का मिश्रण 0.5 किलो जिसमें नाइट्रोजन की मात्रा 15 प्रतिशत हो, प्रति वर्ष डालें 5 वर्ष के बाद, नाइट्रोजन 850-950 ग्राम, फासफोरस 500-600 ग्राम और पोटाश 800-900 ग्राम प्रति वर्ष डालें यूरिया खाद को दो भागों में बांटें, आधी से दो तिहाई मात्रा जनवरी -फरवरी महीने में डालें और बाकी की मात्रा को अप्रैल- मई के महीने में फल बनने के बाद डालें 20-30 सैं.मी. गहरी और 30 सैं.मी. चौड़ी खाइयों में पोषक तत्व डालें वृद्धि के शुरूआती समय में (सितंबर से अक्तूबर महीने में) सिंचाई की आवश्यकता होती है फसल की अच्छी वृद्धि के लिए 10-15 दिनों के अंतराल पर सिंचाई करें नदीनों को निकालने के लिए निराई गोडाई करें हवा के हमले से बचाने के लिए मलचिंग एक प्रभावी तरीका है 4-5 वर्ष की आयु में कीवी फल देना शुरू करते हैं और व्यापारिक तौर पर 7-8 वर्ष क आयु में फल देना शुरू करते हैं तुड़ाई मुख्यत: अक्तूबर से दिसंबर में की जाती है लंबी दूरी वाले स्थानों पर ले जाने के लिए सख्त फलों की तुड़ाई की जाती है दो सप्ताह में सख्त फल नर्म हो जाते हैं और खाने योग्य हो जाते हैं
Posted by muntakhab
Jharkhand
15-11-2019 09:40 AM
Punjab
11-18-2019 06:43 PM
shrimaan ji, ap flowering time pe NPK @ 130045 @ 10 gm prati liter pani ke hisaab se spray karein, dhanywad
Posted by gurdeep
Punjab
15-11-2019 09:35 AM
Punjab
11-18-2019 06:39 PM
Gurdeep ji, 1121 da rate is vele 2765 rupay prati quintal hath nal cuti gai fasal da ate 2570 rupay prati quintal machine nal cuti gai fasal da hai, dhanwad
Posted by ladi
Punjab
15-11-2019 09:13 AM
Punjab
11-15-2019 02:14 PM
ਪਸ਼ੂ ਦਾ ਦੁੱਧ ਉਸਦੀ ਨਸਲ ਅਤੇ ਖੁਰਾਕ ਤੇ ਨਿਰਭਰ ਕਰਦਾ ਹੈ ਤੁਸੀ ਓਹਨਾ ਨੂੰ ਰੋਜਾਨਾ 35-40 ਕਿਲੋ ਹਰਾ ਚਾਰਾ ਦਿਓ ਅਤੇ ਤੁਸੀ ਉਸ ਨੂੰ Enerdyna liquid 100ml ਰੋਜਾਨਾ, Milkout powder 2-2 ਚਮਚ ਰੋਜਾਨਾ ਦੇਣਾ ਸ਼ੁਰੂ ਕਰੋ ਬਾਕੀ ਤੁਸੀ ਮਿਨਰਲ ਮਿਕਸਚਰ 50-50gm ਸਵੇਰੇ ਸ਼ਾਮ ਦਿਓ, ਇਸ ਨਾਲ ਫਰਕ ਪੈ ਜਾਵੇਗਾ..