
Posted by भोला सिंह
Punjab
16-11-2019 06:51 AM
भोला सिंह जी आप खून की जांच अपने नज़दीकी पशु
पोल्ली क्लीनिक अस्पताल में जांच करवा सकते है

Posted by jagdeep sangha
Punjab
16-11-2019 06:45 AM
cow da milk vadon layi feed te medicine kehri use kr skde aan, cow hf hai te 9 kg milk hi dindi aa ?
BhaaG rajwa hara chaara te har 4kg dudh lai gau nu 1kg wadhya feed pao har 3 mahine baad malap rehat karo

Posted by भोला सिंह
Punjab
16-11-2019 06:44 AM
Pm kisan samman nidhi yojna के तहत खेती-किसानी के लिए सालाना 6000 रुपए तीन किस्तों में मिल रहे हैं प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि स्कीम (pradhan mantri kisan samman nidhi scheme) अब देश के सभी 14.5 करोड़ किसान परिवारों के लिए लागू हो गई है स्टेप बाई स्टेप जाने कैसे लें प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि योजना का लाभ प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि योजना का .... (Read More)
Pm kisan samman nidhi yojna के तहत खेती-किसानी के लिए सालाना 6000 रुपए तीन किस्तों में मिल रहे हैं प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि स्कीम (pradhan mantri kisan samman nidhi scheme) अब देश के सभी 14.5 करोड़ किसान परिवारों के लिए लागू हो गई है स्टेप बाई स्टेप जाने कैसे लें प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि योजना का लाभ प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि योजना का लाभ लेने के लिए आपको ऑनलाइन या ऑफलाइन आवेदन करना पड़ेगा किसानों को इसका लाभ पाने के लिए सबसे पहले कृषि विभाग में रजिस्ट्रेशन करवाना होगा, प्रशासन उसका वेरीफिकेशन करेगा रेवेन्यू रिकॉर्ड, बैंक अकाउंट नंबर, मोबाइल नंबर और आधार नंबर देना होगा कोई कन्फ्यूजन है तो अपने लेखपाल से संपर्क कर सकते हैं लेखपाल ही यह वेरीफाई करता है कि आप किसान हैं अगर लेखपाल और कृषि अधिकारी किसी असली किसान को इसका लाभ देने में आनाकानी कर रहे हैं तो सोमवार से शुक्रवार तक पीएम-किसान हेल्प डेस्क (PM-KISAN Help Desk) के ई-मेल Email (pmkisan-ict@gov.in) पर संपर्क कर सकते हैं वहां से भी न बात बने तो इस सेल के फोन नंबर 011-23381092 (Direct HelpLine) पर फोन करें आॉनलाइन आवेदन करते समय किसान को अपना आधार कार्ड नंबर, मतदाता पहचान पत्र और बैंक से संबंधित यानी कि बैंक खाता संख्या पास होना जरूरी है इसके अलावा अगर किसान एससी/एसटी वर्ग से है तो उसके लिए उसे सर्टिफिकेट देना होगा इसके बाद आपको अपनी जानकारी देने होगी जैसे कि पिता का नाम, मोबाइल नंबर, जन्मतिथि, खेती की जानकारी जैसे- खेत का आकार, कितनी जमीन है आदि प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि योजना का ऑफलाइन आवेदन करने के लिए किसानों को ग्राम पंचायत या फिर पास के सीएससी सेंटर जाना होगा वहां पर जाने के बाग आपको फार्म दिए जाएंगे, जिन्हें आपको भरना होगा कैसे पता चलेगा कि आपका नाम रजिस्टर हो चुका हैं प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि योजना का फार्म भरने के बाद जो भी लाभकारी किसान हैं, उनके नामों की लिस्ट पंचायत पर लगाई जाएगी इसके अलावा जिन किसानों को उसका लाभ मिलना है उनके मोबाइल पर भी एसएसएस भेजा जाएगा
Posted by rajiram mahala
Rajasthan
16-11-2019 06:10 AM
बिजाई की ढंग :-1.बिजाई वाली मशीन 2. छींटा देना विधि द्वारा 3. जीरो टिलेज़ ड्रिल 4. रोटावेटर आप इनमे से कोई तरीके का इस्तेमाल कर सकते है धन्यवाद

Posted by Rahul
Rajasthan
16-11-2019 06:05 AM
अगर आपकी ज़मीन में नमक की मात्रा ज्यादा है तो Gypsum @1 quintal प्रति एकड़ के हिसाब से डालें
Posted by Mandeep Sekhon
Punjab
16-11-2019 05:32 AM
HD 3086 (PusaGautam) : इसकी औसतन उपज 23 क्विंटल प्रति एकड़ होती है इसके पत्ते पीलेपन और भूरेपन की समस्या से रहित होते है इसके अच्छी किस्म के बरेड बनाने में सभी तत्त होते है इसकी बिजाई अक्तूबर से नवंबर महीने तक कर सकते है ये पकने के लिए 156 दिन का समय और इसकी लंबाई 56 सैं.मी होती है
Posted by Prabhjot Otaal
Punjab
16-11-2019 04:16 AM
ਜੇਕਰ ਤੁਹਾਡੇ ਪਸ਼ੂ ਵਾਰ ਵਾਰ ਰਪੀਟ ਹੋ ਰਹੇ ਹੈ ਤਾਂ ਤੁਸੀ ਓਹਨਾ ਹੀਟ ਵਿਚ ਆਉਣ ਤੇ ਬੱਚੇਦਾਨੀ ਵਿਚ Utrawin-oz ਦਵਾਈ 30 ਮਿਲੀ ਅਤੇ ਉਸ ਵਿਚ Metro IV drip 50ml ਮਿਕਸ ਕਰੋ ਅਤੇ ਇਸ ਤ੍ਰਾਹ ਕਰਕੇ 3 ਦਿਨ ਭਰਵਾਓ ਅਤੇ ਉਸ ਨੂੰ Bovimin-b ਪਾਊਡਰ 100 ਗ੍ਰਾਮ ਰੋਜਾਨਾ ਦੇਣਾ ਸ਼ੁਰੂ ਕਰੋ ਅਤੇ Agrimin-i ਗੋਲੀਆਂ ਰੋਜਾਨਾ 1 ਗੋਲੀ ਦਿਓ ਅਤੇ 21 ਦਿਨ ਤਕ ਦਿੰਦੇ ਰਹੋ, ਫਿਰ ਅਗਲੀ ਵਾਰ ਹੀਟ ਵਿਚ ਆਉਣ ਤੇ ਉਸ ਨੂੰ ਟੀਕਾ ਭਰਵਾਂ ਕੇ Pregstay gold ਪ.... (Read More)
ਜੇਕਰ ਤੁਹਾਡੇ ਪਸ਼ੂ ਵਾਰ ਵਾਰ ਰਪੀਟ ਹੋ ਰਹੇ ਹੈ ਤਾਂ ਤੁਸੀ ਓਹਨਾ ਹੀਟ ਵਿਚ ਆਉਣ ਤੇ ਬੱਚੇਦਾਨੀ ਵਿਚ Utrawin-oz ਦਵਾਈ 30 ਮਿਲੀ ਅਤੇ ਉਸ ਵਿਚ Metro IV drip 50ml ਮਿਕਸ ਕਰੋ ਅਤੇ ਇਸ ਤ੍ਰਾਹ ਕਰਕੇ 3 ਦਿਨ ਭਰਵਾਓ ਅਤੇ ਉਸ ਨੂੰ Bovimin-b ਪਾਊਡਰ 100 ਗ੍ਰਾਮ ਰੋਜਾਨਾ ਦੇਣਾ ਸ਼ੁਰੂ ਕਰੋ ਅਤੇ Agrimin-i ਗੋਲੀਆਂ ਰੋਜਾਨਾ 1 ਗੋਲੀ ਦਿਓ ਅਤੇ 21 ਦਿਨ ਤਕ ਦਿੰਦੇ ਰਹੋ, ਫਿਰ ਅਗਲੀ ਵਾਰ ਹੀਟ ਵਿਚ ਆਉਣ ਤੇ ਉਸ ਨੂੰ ਟੀਕਾ ਭਰਵਾਂ ਕੇ Pregstay gold ਪਾਊਡਰ 30 ਗ੍ਰਾਮ ਰੋਜਾਨਾ ਦਿਓ ਅਤੇ 20 ਦਿਨ ਤੱਕ ਦਿਓ, ਇਸ ਨਾਲ ਫਰਕ ਪੈ ਜਾਵੇਗਾ..

Posted by मनोज कुमार
Haryana
16-11-2019 03:16 AM
बकरी पालन बहुत ही लाभकारी काम है शुरूआत करने के लिए आप 10 बकरियों और 2 बकरे के साथ कर सकते हैं इन्हें खुराक कम चाहिए इसलिए इन्हें आसानी से पाल सकते हैं ये हर प्रकार के मौसम में पाली जा सकती हैं बकरियां 12-14 महीने में बच्चे देना शुरू कर देती है बकरी का गर्भ समय 150 दिन का होता है और साल में 1-5 बच्चे देती है साल में दो बच्.... (Read More)
बकरी पालन बहुत ही लाभकारी काम है शुरूआत करने के लिए आप 10 बकरियों और 2 बकरे के साथ कर सकते हैं इन्हें खुराक कम चाहिए इसलिए इन्हें आसानी से पाल सकते हैं ये हर प्रकार के मौसम में पाली जा सकती हैं बकरियां 12-14 महीने में बच्चे देना शुरू कर देती है बकरी का गर्भ समय 150 दिन का होता है और साल में 1-5 बच्चे देती है साल में दो बच्चे देना आम बात है बकरियां 8-10 वर्ष तक बच्चे देती हैं और अपन गिनती को तेजी से बढ़ा लेती हैं आप बारबरी, ब्लैक बंगाल, जैसी नसल पाल सकते हैं इसकी ट्रेनिेंग के लिए आप अपने कुषि विज्ञान केंद्र से संपर्क करे या फिर जो बकरी पालन का व्यवसाय कर रहा कोई किसान उसका फार्म स्वंय जाकर देखकर आयें तो और भी बारीकियों का पता चल जायेगा, इसके इलावा आप बीटल नस्ल का रख सकते है क्योंकि ये नस्ल मीट और दूध दोंनो कामों के लिए अच्छी रहती है
Posted by Naveen Kumar Singh
Bihar
15-11-2019 11:42 PM
श्रीमान जी , इसे मिट्टी की व्यापक किस्मों में उगाया जा सकता है अच्छे निकास वाली पहाड़ी मिट्टी पपीते की खेती के लिए उपयुक्त होती है रेतली और भारी मिट्टी में इसकी खेती ना करें पपीते की खेती के लिए मिट्टी की पी एच 6.5-7.0 होनी चाहिए प्रसिद्ध किस्में :-Pusa Dwarf: इसके फल मध्यम आकार के और अंडाकार होते हैं यह सूखे को सहनेयोग्य.... (Read More)
श्रीमान जी , इसे मिट्टी की व्यापक किस्मों में उगाया जा सकता है अच्छे निकास वाली पहाड़ी मिट्टी पपीते की खेती के लिए उपयुक्त होती है रेतली और भारी मिट्टी में इसकी खेती ना करें पपीते की खेती के लिए मिट्टी की पी एच 6.5-7.0 होनी चाहिए प्रसिद्ध किस्में :-Pusa Dwarf: इसके फल मध्यम आकार के और अंडाकार होते हैं यह सूखे को सहनेयोग्य किस्म है यह उच्च घनत्व में रोपाई के लिए लाभदायक है Pusa Giant: इस किस्म के पौधे तेज हवा को सहनेयोग्य है यह बड़े फलों का उत्पादन करती है यह पैकिंग के लिए उपयुक्त किस्म है CO 3: इसके फल बड़े आकार के और अंडाकार होते हैं इसे ज्यादा देर तक रखने की गुणवत्ता अच्छी होती है CO 1: यह छोटे कद की किस्म है जिसके फल मध्यम आकार के होते हैं फल गोलाकार, नर्म हरा-पीला छिल्का और संतरी पीले रंग का गुद्दा होता है फल रसदार होता है और इसे ज्यादा देर तक रखने की गुणवत्ता अच्छी होती है Coorg Honey Dew: इसे सीधे तौर पर खाने के लिए और प्रक्रिया के लिए प्रयोग किया जाता है इसके फल आयताकार और गुद्दा मोटा संतरी रंग का होता है Pusa Majesty: इसके फल मध्यम आकार के, गोल होते हैं इन्हें रखने की गुणवत्ता बहुत अच्छी होती है यह किस्म 146 दिनों में कटाई के लिए तैयार हो जाती है यह किस्म जड़ गलन निमाटोड के प्रतिरोधक किस्म है Pusa Delicious: यह मध्यम लंबी किस्म है इसके फल मध्यम आकार के होते हैं, गुद्दा गहरे संतरी रंग का होता है इस किस्म को कतारों में लगाने के लिए प्रयोग किया जाता है पपीते की खेती के लिए नदीन रहित भूमि का प्रयोग करें मिट्टी के भुरभुरा होने तक खेत की जोताई करें आखिरी जोताई के समय अच्छी तरह से गली हुई रूड़ी की खाद या गाय का गला हुआ गोबर मिट्टी में अच्छी तरह मिलाकर डालें सिफारिश किए गए फासलों पर 1 मीटर x 1 मीटर x 1 मीटर आकार के गड्ढे खोदें गड्ढों को मिट्टी और रूड़ी की खाद या गाय के गले हुए गोबर से भरें प्रयोग की गई किस्म के आधार पर प्रत्येक गड्ढे पर 2-4 नए पौधों की रोपाई करें रोपाई के बाद हल्की सिंचाई करें हवा से बचाव के लिए खूंटा लगाएं बीजों को 150 गेज़ की मोटाई वाले, 25 x 10 सैं.मी. के पॉलीथीन बैग में बोयें पानी के उचित निकास के लिए पॉलीथीन बैग के निचले हिस्से में 1 मि.मी. अर्द्धव्यास का छेद करें उसके बाद पॉलीथीन बैग में समान अनुपात में रूड़ी की खाद, मिट्टी और रेत डालें बिजाई से पहले बीजों का उपचार करें रोपाई के लिए 6-7 सप्ताह के पौधों का प्रयोग करें यूरिया 150 ग्राम, फासफोरस 80 ग्राम, पोटाश 100 ग्राम प्रति वृक्ष में प्रति वर्ष डालें खादों को 4 भागों में बांटकर रोपाई के बाद पहले, तीसरे, पांचवे और सातवें महीने में डालें बसंत के मौसम में फरवरी मार्च के महीने में बिजाई करें जबकि मॉनसून के मौसम में बिजाई के लिए जून जुलाई का महीना उपयुक्त होता है और पतझड़ के मौसम में बिजाई अक्तूबर से नवंबर महीने में की जाती है आमतौर पर 1.8 मीटर x 1.8 मीटर फासले का प्रयोग किया जाता है उच्च घनता की रोपाई के लिए 1.5 मीटर x 1.5 मीटर फासले का प्रयोग किया जाता है नर्सरी में बीज को 1 सैं.मी. की गहराई पर बोयें बीजो की खेत में सीधे बिजाई या मुख्य खेत में नए पौधों की रोपाई की जाती है 100-120 ग्राम बीज प्रति एकड़ में प्रयोग करें मिट्टी की किस्म, जलवायु के हालातों आदि के आधार पर सिंचाई करें सर्दियों में 15 दिनों के अंतराल पर और गर्मियों में 7 दिनों के अंतराल पर सिंचाई करें तने को पानी के संपर्क में ना आने दें और खेत में पानी भी खड़ा ना होने दें पौधे की प्रौढ़ अवस्था के दौरान नदीनों की रोकथाम जरूरी होती है नदीनों की तीव्रता के आधार पर, नियमित और हल्की गोडाई करें फ्लूक्लोरालिन या बूटाक्लोर 800 मि.ली. प्रति एकड़ में डालें नदीनों की रोकथाम के लिए मलचिंग भी एक प्रभावी तरीका है पौधों की रोपाई के कुछ दिनों बाद प्लास्टिक शीट या धान की पराली या गन्ने के बचे कुचे को मलच के रूप में डालें मुख्यत: फल के पूरा आकार लेने और हरे से हल्का पीला रंग होने पर तुड़ाई की जाती है पहली तुड़ाई रोपाई के 14-15 महीनों के बाद की जा सकती है 4-5 तुड़ाइयां प्रति मौसम की जा सकती हैं धन्यवाद
Posted by Naveen Kumar Singh
Bihar
15-11-2019 11:36 PM
इसे मिट्टी की व्यापक किस्मों में उगाया जा सकता है अच्छे निकास वाली पहाड़ी मिट्टी पपीते की खेती के लिए उपयुक्त होती है रेतली और भारी मिट्टी में इसकी खेती ना करें पपीते की खेती के लिए मिट्टी की पी एच 6.5-7.0 होनी चाहिए निम्नलिखित किस्में उत्तर प्रदेश में लगाने के लिए उपयुक्त हैं: Pusa Dwarf: इसके फल मध्यम आकार के और अंडाक.... (Read More)
इसे मिट्टी की व्यापक किस्मों में उगाया जा सकता है अच्छे निकास वाली पहाड़ी मिट्टी पपीते की खेती के लिए उपयुक्त होती है रेतली और भारी मिट्टी में इसकी खेती ना करें पपीते की खेती के लिए मिट्टी की पी एच 6.5-7.0 होनी चाहिए निम्नलिखित किस्में उत्तर प्रदेश में लगाने के लिए उपयुक्त हैं: Pusa Dwarf: इसके फल मध्यम आकार के और अंडाकार होते हैं यह सूखे को सहनेयोग्य किस्म है यह उच्च घनत्व में रोपाई के लिए लाभदायक है Pusa Giant: इस किस्म के पौधे तेज हवा को सहनेयोग्य है यह बड़े फलों का उत्पादन करती है यह पैकिंग के लिए उपयुक्त किस्म है CO 3: इसके फल बड़े आकार के और अंडाकार होते हैं इसे ज्यादा देर तक रखने की गुणवत्ता अच्छी होती है CO 1: यह छोटे कद की किस्म है जिसके फल मध्यम आकार के होते हैं फल गोलाकार, नर्म हरा-पीला छिल्का और संतरी पीले रंग का गुद्दा होता है फल रसदार होता है और इसे ज्यादा देर तक रखने की गुणवत्ता अच्छी होती है Coorg Honey Dew: इसे सीधे तौर पर खाने के लिए और प्रक्रिया के लिए प्रयोग किया जाता है इसके फल आयताकार और गुद्दा मोटा संतरी रंग का होता है CO 2: यह मध्यम आकार की अंडाकार, हरे पीले रंग की किस्म है इसका गुद्दा नर्म और लाल रंग का होता है इसमें रस की मात्रा काफी होती है और इसे ज्यादा देर तक रखने की गुणवत्ता अच्छी होती है Pusa Majesty: इसके फल मध्यम आकार के, गोल होते हैं इन्हें रखने की गुणवत्ता बहुत अच्छी होती है यह किस्म 146 दिनों में कटाई के लिए तैयार हो जाती है यह किस्म जड़ गलन निमाटोड के प्रतिरोधक किस्म है Pusa Delicious: यह मध्यम लंबी किस्म है इसके फल मध्यम आकार के होते हैं, गुद्दा गहरे संतरी रंग का होता है इस किस्म को कतारों में लगाने के लिए प्रयोग किया जाता है CO 5: यह किस्म दो वर्षों में 75-80 फल प्रति वृक्ष देती है IIHR39 and IIHR54: यह किस्म IIHR, बैंगलोर द्वारा विकसित की गई है इसके फल मध्यम आकार के होते हैं इसमें टी एस एस की मात्रा उच्च होती है Taiwan 785: यह छोटे कद की किस्म है इसके फल आयताकारा और गुद्दा मोटा संतरी रंग का होता है फलों को रखने की गुणवत्ता अच्छी होती है फलों को कतारों में प्रयोग किया जाता है और प्रक्रिया के लिए प्रयोग किया जाता है Taiwan 786: इसके फलों को कतारों में और प्रक्रिया के लिए प्रयोग किया जाता है इसके फल स्वाद और कम बीज वाले होते हैं फलों को रखने की गुणवत्ता बहुत अच्छी होती है Washington: यह कतारों में प्रयोग किए जाने वाली किस्म है इसके फल गोल, मध्यम आकार के और कम बीज वाले होते हैं फल का छिल्का गहरे पीले रंग का होता है नर और मादा पौधे अलग होते हैं Solo: इसके फल छोट, गहरे गुलाबी रंग का गुद्दा होता है, जो कि स्वाद में मीठा होता है यह किस्म कतारों में प्रयोग की जाती है Ranchi: फल आयताकार होते हैं और गुद्दा गहरे पीले रंग का होता है Honey Dew: इस किस्म के फल बड़े आकार के और कम बीज वाले होते हैं फल स्वाद होते हैं और नर पौधे मादा पौधे से छोटे होते हैं इसका पौधा मध्यम कद का होता है पपीते की खेती के लिए नदीन रहित भूमि का प्रयोग करें मिट्टी के भुरभुरा होने तक खेत की जोताई करें आखिरी जोताई के समय अच्छी तरह से गली हुई रूड़ी की खाद या गाय का गला हुआ गोबर मिट्टी में अच्छी तरह मिलाकर डालें सिफारिश किए गए फासलों पर 1 मीटर x 1 मीटर x 1 मीटर आकार के गड्ढे खोदें गड्ढों को मिट्टी और रूड़ी की खाद या गाय के गले हुए गोबर से भरें प्रयोग की गई किस्म के आधार पर प्रत्येक गड्ढे पर 2-4 नए पौधों की रोपाई करें रोपाई के बाद हल्की सिंचाई करें हवा से बचाव के लिए खूंटा लगाएं बीजों को 150 गेज़ की मोटाई वाले, 25 x 10 सैं.मी. के पॉलीथीन बैग में बोयें पानी के उचित निकास के लिए पॉलीथीन बैग के निचले हिस्से में 1 मि.मी. अर्द्धव्यास का छेद करें उसके बाद पॉलीथीन बैग में समान अनुपात में रूड़ी की खाद, मिट्टी और रेत डालें बिजाई से पहले बीजों का उपचार करें रोपाई के लिए 6-7 सप्ताह के पौधों का प्रयोग करें यूरिया 150 ग्राम, फासफोरस 80 ग्राम, पोटाश 100 ग्राम प्रति वृक्ष में प्रति वर्ष डालें खादों को 4 भागों में बांटकर रोपाई के बाद पहले, तीसरे, पांचवे और सातवें महीने में डालें बसंत के मौसम में फरवरी मार्च के महीने में बिजाई करें जबकि मॉनसून के मौसम में बिजाई के लिए जून जुलाई का महीना उपयुक्त होता है और पतझड़ के मौसम में बिजाई अक्तूबर से नवंबर महीने में की जाती है आमतौर पर 1.8 मीटर x 1.8 मीटर फासले का प्रयोग किया जाता है उच्च घनता की रोपाई के लिए 1.5 मीटर x 1.5 मीटर फासले का प्रयोग किया जाता है नर्सरी में बीज को 1 सैं.मी. की गहराई पर बोयें 100-120 ग्राम बीज प्रति एकड़ में प्रयोग करें मिट्टी की किस्म, जलवायु के हालातों आदि के आधार पर सिंचाई करें सर्दियों में 15 दिनों के अंतराल पर और गर्मियों में 7 दिनों के अंतराल पर सिंचाई करें तने को पानी के संपर्क में ना आने दें और खेत में पानी भी खड़ा ना होने दें मुख्यत: फल के पूरा आकार लेने और हरे से हल्का पीला रंग होने पर तुड़ाई की जाती है पहली तुड़ाई रोपाई के 14-15 महीनों के बाद की जा सकती है 4-5 तुड़ाइयां प्रति मौसम की जा सकती हैं

Posted by सुरेश कुमार शर्मा
Chattisgarh
15-11-2019 11:32 PM
श्रीमान जी, यह फंगस का हमला हुआ है कृपया आप इसमें carbendazim @ 4gm या mencozeb @ 4gm प्रति लीटर पानी के हिसाब से स्प्रे करें, धन्यवाद

Posted by श्रवण नायक
Uttar Pradesh
15-11-2019 11:29 PM
श्रीमान जी, इसके लिए आप NPK 191919 @ 10 gm प्रति लीटर पानी के हिसाब से स्प्रे करें , धन्य्वाद
Posted by sunil rawat
Uttarakhand
15-11-2019 11:06 PM
Sunil ji, ap tomato ki laxmi variety jo ke lambe akar ki hoti hai uski buvai kar sakte hain, dhanywad
Posted by sunil rawat
Uttarakhand
15-11-2019 10:58 PM
Sunil ji ap tomato ki varities jaise ke Avtar, Indam hybrid, All Rounder, ArkaMeghali, ArkaSurabhi ki buvai kar sakte hain, dhanywad
Posted by Rajendra Saini Rajendra Singh
Rajasthan
15-11-2019 10:54 PM
श्रीमान जी कृपया आप बताये के अपने इसमें कोनसी खाद डाली है, ताकि आपको इसके बारे में पूरी जानकारी दी जा सके, धन्यवाद
Posted by Rajendra Saini Rajendra Singh
Rajasthan
15-11-2019 10:43 PM
श्रीमान जी कृपया आप अपनी फसल की फोटो भेजें ताकि आपको उसके बारे में पूरी जानकारी दी जा सके, धन्यवाद

Posted by सूर्यकांत सोनी
Chattisgarh
15-11-2019 10:40 PM
यदि आप मछली पालन का काम शुरू करना चाहते हैं तो ट्रेनिंग बहुत जरूरी है यह ट्रेनिंग FFDA(fish farmer development aggency) हर जिले में बनी है जहां हमारा खेतीबाड़ी विभाग है वहां इसके अफसर बैठते हैं वहां जाकर एप्लीकेशन भरवायें वहां आपको 5 दिन की ट्रेनिंग दी जायेगी ट्रेनिंग के लिए दसवीं पास होना ज़रूरी है इस ट्रेनिंग में आपको लोन और सब्स.... (Read More)
यदि आप मछली पालन का काम शुरू करना चाहते हैं तो ट्रेनिंग बहुत जरूरी है यह ट्रेनिंग FFDA(fish farmer development aggency) हर जिले में बनी है जहां हमारा खेतीबाड़ी विभाग है वहां इसके अफसर बैठते हैं वहां जाकर एप्लीकेशन भरवायें वहां आपको 5 दिन की ट्रेनिंग दी जायेगी ट्रेनिंग के लिए दसवीं पास होना ज़रूरी है इस ट्रेनिंग में आपको लोन और सब्सिड़ी के बारे में सारी जानकारी प्राप्त हो जाएगी इसकी पुंग छोड़ने के लिए अप्रैल से अक्टूबर का समय बढ़िया होता है, बाकि यदि अपने शुरू करना है तो यूनिवर्सिटी की तरफ से एक एकड़ में शुरू कर सकते हैं. एक एकड़ में 5000 पूंग डाल सकते हैं यह 2 से 3 इंच का होता है यदि 5000 डालना है तो 3000 रोहू, 1000 कतला, 500 कॉमन कॉर्प और 500 मरीगल नस्ल डाली जाए यह पूंग आप मछली पालन विभाग से खरीद सकते हैं यह एक इंच का बच्चा 10 पैसा प्रति बच्चा मिलेगा यदि बढ़िया खुराक डाली जाए तो 8 महीनों में यह लगभग 800—900 ग्राम का हो जाता है बाकी मछली पालन के लिए नहरी पानी बढ़िया होता है और आप गांव का छप्पड़ ठेके से लेकर भी यह काम शुरू कर सकते हैं तालाब में मछली के बीज डालने से पहले इस बात की जांच कर लेनी चाहिए कि उस तालाब में काफी मात्रा में मछली की कुदरती खुराक उपलब्ध है.
Posted by Taranjeet Singh
Punjab
15-11-2019 10:18 PM
BhaaG deputy director dairy development ROPAR or krishi vigyan kendar naal sampark karo Training lao
Posted by Rohit Bhardwaj
Himachal Pradesh
15-11-2019 10:18 PM
Rohit Bhardwaj ji agar jmeen upjau hai dusri fasle aram se ho rahi hai to aap tulsi ki kheti kar sakte hai, is ki contract farming ke lia aap Aushadhiya kheti vikas sansthan 6268536795 se samparak kar sakte hai, in se aap ko seed bhi mil jae ga or aap ki tyar fasal khreed bhi lenge, Thankyou.
Posted by Dileep Maurya
Uttar Pradesh
15-11-2019 09:58 PM
HD 2967: यह बड़े कद की किस्म हैं इसके बूटे का औसतन कद 101 सेंमी है इसके दाने सुनहरे, छोटे, सख्त और चमकदार होते है यह लगभग 157 दिनों में पक जाती है इसका औसतन झाड 21.5 कुईटल प्रति एकड़ है
Posted by गुरमीत सिंह
Haryana
15-11-2019 09:51 PM
बंसी गेहूं का बीज लेने के लिए आप परमजीत सिंह जी से 97810 41978 इस नंबर पर संपर्क करे जी
Posted by nabin kumar sahoo
Odisha
15-11-2019 09:42 PM
Nabin ji vase to jithna khula rakhe jaye utni achi growth hoti hai, baki aap ghar mai rakh ker v growth krwa skte hai, iske liye apko achi khurak ka dian rkhna hoga jisme sbsi tatt sahi matra mai ho, kyuki khurak ke sath he sahi growth hoti hai.
Posted by pawan pankaj
Rajasthan
15-11-2019 09:42 PM
श्री मान रबी की फसलें गेहूं, जौं, सरसों,जवीं, अलसी आदि होती है
Posted by pawan pankaj
Rajasthan
15-11-2019 09:41 PM
पवन जी, कृपया आप बातये की आप कौन सी रबी की फसल के बारे में जानकारी लेना चाहते है, ताकि आपको उसके बारे में उच्चित जानकारी दी जा सके, धन्यवाद
Posted by Hardeep Singh
Punjab
15-11-2019 09:36 PM
ਸ਼੍ਰੀਮਾਨ ਜੀ, ਤੁਸੀ ਖਾਦ ਦੀ ਵਰਤੋਂ ਪਹਿਲੇ ਪਾਣੀ ਨਾਲ ਕਰ ਸਕਦੇ ਹੋ, ਪਰ ਜ਼ਿੰਕ ਦੀ ਵਰਤੋਂ ਓਦੋ ਹੀ ਕਰੋ ਜਦੋ ਇਸਦੀ ਕਮੀ ਦੇ ਲੱਛਣ ਕਣਕ ਉਤੇ ਦਿਖਦੇ ਹਨ, ਧੰਨਵਾਦ

Posted by ਕੁਲਦੀਪ ਸਿੰਘ
Punjab
15-11-2019 09:22 PM
Kuldeep ji kirpa krke isdia saff photos upload kro, ehna vich isdi photo saff nazar nhi hai rehi, tuci saff photos bhejo tan jo tuhanu sahi jankari diti ja skee.

Posted by arpit patidar
Madhya Pradesh
15-11-2019 09:12 PM
श्रीमान जी, आप आलू की किस्मे जैसे के Kufri Lauvkar, Kufri Chandramukhi, Kufri Surya, Kufri Pukhraj, Kufri Ashoka, Kufri Khyati, Kufri Jyoti, Kufri Chipsona-1, Kufri Chipsona-3, Kufri Chipsona-4, Kufri Frysona, Kufri Bahar, Kufri Badshah, Kufri Jawahar, Kufri Sutlej, Kufri Anand, Kufri Pushkar, Kufri Garima Kufri Himsona, Kufri Sindhuri की बुवाई कर सकते हैं, धन्यवाद
Posted by subhash yadav
Rajasthan
15-11-2019 09:02 PM
श्रीमान जी, यह फंगस का हमला हुआ है, इसकी रोकथाम के लिए आप copper oxychloride @ 3gm प्रति लीटर पानी के हिसाब से स्प्रे करें, धन्यवाद

Posted by sanampreet
Punjab
15-11-2019 09:01 PM
ਤੁਸੀ ਉਸਦੀ ਬੱਚੇਦਾਨੀ ਵਿਚ lixin-iu ਦਵਾਈ 3 ਦਿਨ ਲਗਾਤਾਰ ਭਰਵਾਓ, ਇਸਦੇ ਨਾਲ ਤੁਸੀ Bovimin-B ਪਾਊਡਰ 100 ਗ੍ਰਾਮ ਰੋਜਾਨਾ ਦਿਓ ਅਤੇ Pg care bolus ਜਾ Agrimin-i bolus ਰੋਜਾਨਾ ਇਕ ਗੋਲੀ ਅਤੇ 21 ਦਿਨ ਤਕ ਦਿਓ, ਫਿਰ ਅਗਲੀ ਵਾਰ ਹੀਟ ਵਿਚ ਆਉਣ ਤੇ ਇਸ ਨੂੰ ਟੀਕਾ ਭਰਵਾਂ ਕੇ ਇਹ ਗੋਲੀਆਂ 20 ਦਿਨ ਤਕ ਹੋਰ ਦਿੰਦੇ ਰਹੋ ..

Posted by Amandeep singh
Punjab
15-11-2019 08:53 PM
Amandeep ji yadi murgi aur murgio ki pure nasal hai to chicks v pure nasal ke honge, yeh apke birds ki sahi breed per nirbhar krta hai..

Posted by rajjan
Madhya Pradesh
15-11-2019 08:38 PM
श्रीमान जी, गुलाब की खेती के लिए जैविक तत्वों से भरपूर और अच्छे जल निकास वाली रेतली दोमट मिट्टी अनुकूल होती है बढ़िया विकास के लिए मिट्टी का pH 6 से 7.5 होना चाहिए यह जल जमाव को सहनयोग्य नहीं है, इसलिए उचित जल निकास का प्रबंध होना चाहिए और अनावश्यक पानी को निकाल देना चाहिए किस्मों के लिए आप देसी गुलाब और इंग्लिश ग.... (Read More)
श्रीमान जी, गुलाब की खेती के लिए जैविक तत्वों से भरपूर और अच्छे जल निकास वाली रेतली दोमट मिट्टी अनुकूल होती है बढ़िया विकास के लिए मिट्टी का pH 6 से 7.5 होना चाहिए यह जल जमाव को सहनयोग्य नहीं है, इसलिए उचित जल निकास का प्रबंध होना चाहिए और अनावश्यक पानी को निकाल देना चाहिए किस्मों के लिए आप देसी गुलाब और इंग्लिश गुलाब किस्मे लगा सकते हैं. मिट्टी को नरम करने के लिए जोताई और गोड़ाई करें बिजाई से 4-6 सप्ताह पहले खेती के लिए बैड तैयार करें बैड बनाने कि लिए 2 टन रूड़ी की खाद और 2 किलो सुपर फासफेट डालें बैडों को एक समान बनाने के लिए उनको समतल करें और बैडों के ऊपर बोयें होये गुलाब गड्डों में बोयें हुए गुलाबों से ज्यादा मुनाफे वाले होते है उत्तरी भारत में बिजाई का सही समय मध्य अक्तूबर है रोपाई के बाद पौधे को छांव में रखें और अगर बहुत ज्यादा धुप हो, तो पौधे पर पानी का छिड़काव करें दोपहर के अंत वाले समय बोया गया गुलाब बढ़िया उगता हैबैड पर 30 सैं.मी. व्यास और 30 सैं.मी. गहरे गड्ढे खोद कर 75 सैं.मी. के फासले पर पौधों की बिजाई करें दो पौधों के बीच में फासला गुलाब की किस्म पर निर्भर करता है बीजों को 2-3 सैं.मी. गहराई में बोयें इसकी बिजाई सीधी या पनीरी लगा कर की जाती है गुलाब की फसल का का प्रजनन काटी गई जड़ों और बडिंग द्वारा किया जाता है उत्तरी भारत में दिसंबर-फरवरी महीने का समय टी-बडिंग के लिए उचित होता है पौधे की कांट-छांट दूसरे और उसके बाद के वर्षों में की जाती है उत्तरी भारत में गुलाब की झाड़ियों की कांट-छांट अक्तूबर के दूसरे या तीसरे हफ्ते में की जाती है जो शाखाएं झाड़ियों को घना बनाएं, उन्हें निकाल दें लटके हुए गुलाबों को छंटाई की जरूरत नहीं होती छंटाई के बाद, अच्छे से गले हुए 7-8 किलो गाय के गोबर को प्रति पौधे को डालें और मिट्टी में अच्छी तरह मिलायें ग्रीन हाउस में, गुलाबों को पंक्तियों में बोया जाता है और पौधों का घनत्व 7-14 पौधे प्रति वर्ग मीटर होनी चाहिए बैड की तैयारी के समय 2 टन रूड़ी की खाद और 2 किलो सुपर फास्फेट को मिट्टी में डालें तीन महीने के फासले पर 10 किलो रूड़ी की खाद और 8 किलो नाइट्रोजन, 8 किलो फासफोरस और 16 किलो पोटाश प्रति पौधे में डालें छंटाई के बाद ही सारी खादों को डालें ज्यादा पैदावार लेने के लिए छंटाई से एक महीने बाद, जी ए 3@ 200 पी पी एम(2 ग्राम प्रति लीटर) की स्प्रे करें पौधे की तनाव सहन शक्ति को बढ़ाने के लिए घुलनशील जड़ उत्तेजक(रैली गोल्ड/रिजोम) 100 ग्राम+ टिपोल 60 मि.ली. को 100 लीटर पानी में डालकर प्रति एकड़ में शाम के समय सिंचाई करें पौधों को खेत में लगाएं ताकि बढ़िया ढंग से विकास कर सके सिंचाई मिट्टी की किस्म और जलवायु के अनुसार करें आधुनिक सिंचाई तकनीक जैसे ड्रिप सिंचाई गुलाब की खेती के लिए लाभदायक होती है फव्वारा सिंचाई से परहेज करें क्योंकि इससे पत्तों को लगने वाली बीमारियां बढ़ती हैं धन्यवाद
Posted by Neeraj Rathi
Uttar Pradesh
15-11-2019 08:35 PM
श्रीमान जी, गेहूं की फसल को अच्छे अंकुरन के लिए अच्छी तरह से तैयार, पर ठोस बीज बैड की आवश्यकता होती है पिछली फसल की कटाई के बाद खेत की अच्छे तरीके से ट्रैक्टर की मदद से जोताई की जानी चाहिए खेत को आमतौर पर ट्रैक्टर के साथ तवियां जोड़कर जोता जाता है और उसके बाद दो या तीन बार हल या सुहागे से जोता जाता है खेत की जोताई.... (Read More)
श्रीमान जी, गेहूं की फसल को अच्छे अंकुरन के लिए अच्छी तरह से तैयार, पर ठोस बीज बैड की आवश्यकता होती है पिछली फसल की कटाई के बाद खेत की अच्छे तरीके से ट्रैक्टर की मदद से जोताई की जानी चाहिए खेत को आमतौर पर ट्रैक्टर के साथ तवियां जोड़कर जोता जाता है और उसके बाद दो या तीन बार हल या सुहागे से जोता जाता है खेत की जोताई शाम के समय की जानी चाहिए और रोपाई की गई ज़मीन को पूरी रात खुला छोड़ देना चाहिए ताकि वह ओस की बूंदों से नमी सोख सके प्रत्येक जोताई के बाद सुहागा फेरना चाहिए सामान्य बिजाई के लिए कतारों में 20-22-5 सैं.मी. के फासले की सलाह दी जाती है यदि बिजाई देरी से करनी हो तो 15-18 सैं.मी. का फासला होना चाहिए लंबी किस्मों के लिए 6-7 सैं.मी. की गहराई का प्रयोग करें जबकि अन्य किस्मों के लिए 5-6 सैं.मी. की गहराई का प्रयोग करें आप बीज को बीज ड्रिल, बुरकाव विधि की मदद से बुवाई करें, धन्यवाद

Posted by Suraj Gupta
Chattisgarh
15-11-2019 08:30 PM
उसे आप Bloatosil liquid 100ml रोजाना तीन दिन तक दें और Buffzon powder 50gm रोजाना दें इससे फर्क पड़ जाएगा
Posted by surendra Prasad kushwaha
Jharkhand
15-11-2019 08:25 PM
सुरिंद्रा जी उसे आप Broton liquid 10ml रोजाना, Metra liquid 50ml रोजाना और Bovimin-B powder 20gm रोजाना दें इससे सफाई भी होगी और हाज़मा भी सही रहेगा

Posted by Suraj Gupta
Chattisgarh
15-11-2019 08:23 PM
Suraj ji, kripya ap iski backside label ki photo bejein tajo apko dekh kar bataya ja sakde , ke yeh kya kam karega , dhanywad
Posted by GURPREET SINGH SIDHU
Punjab
15-11-2019 08:16 PM
Gurpreet ji, Fenvalrate 20% jayda tar guava ate citrus de butain te keet de hamle di roktham lai vartea janda hai, dhanwad

Posted by Shamsher singh
Punjab
15-11-2019 08:10 PM
ਸ਼੍ਰੀਮਾਨ ਜੀ ਇਹ ਦਵਾਈ ਇਕ ਨਦੀਨ ਨਾਸ਼ਕ ਹੈ, ਤੁਸੀ ਇਸਨੂੰ ਬਿਜਾਈ ਤੋਂ ਪਹਿਲਾ ਖੇਤ ਵਿਚ ਪਾ ਦਿਓ, ਤੇ waste decomposer ਨਾਲ ਤੁਸੀ ਬੀਜ ਨੂੰ 2 ਤੋਂ 3 ਘੰਟੇ ਪਹਿਲਾ ਸੋਧ ਲੋ, ਇਸ ਲਈ ਬੀਜ ਨੂੰ waste decomposer ਵਿਚ ਭਿਓਂਕੇ ਰੱਖਣਾ ਹੁੰਦਾ ਹੈ, ਧੰਨਵਾਦ
Posted by Mandeep dhillon
Punjab
15-11-2019 08:10 PM
श्री मान जी सुपर 252— 130—140 दिनों के अंदर पकने वाली किस्म है इसकी औसतन लंबाई 103 सैं.मी. है इसकी औसतन उपज 24 क्विंटल प्रति एकड़ और इसकी बिजाई अक्तूबर के चौथे सप्ताह से नवंबर के चौथे सप्ताह तक बिजाई कर सकते है

Posted by ਸਨਮਦੀਪ
Punjab
15-11-2019 08:07 PM
ਭਾਰ ਪੈਣ ਦੇ ਇਲਾਜ ਲਈ ਤੁਸੀ ਇਹ ਦੇਸੀ ਤਰੀਕਾ ਵਰਤ ਸਕਦੇ ਹੋ, ਤੁਸੀ 1 ਕਿਲੋ ਸਤਿਆਨਾਸ਼ੀ ਬੀਜ ਲਓ, ਅੱਧਾ ਕਿਲੋ ਕਮਰਕੱਸ, ਅੱਧਾ ਕਿਲੋ ਜੋਂਖਾਰ ਲਓ, ਇਹ ਸਭ ਪੰਸਾਰੀ ਤੋਂ ਮਿਲ ਜਾਵੇਗਾ ਇਹ ਸਾਰਾ ਕੁਜ ਤੁਸੀ ਮਿਲਾ ਲਓ ਅਤੇ ਇਸਦਾ ਪਾਊਡਰ ਬਣਾ ਸਕਦੇ ਹੋ ਅਤੇ ਰੋਜਾਨਾ ਰਾਤ ਨੂੰ ਇਹ ਮਿਸ਼ਰਣ ਅੱਧਾ ਕਿਲੋ ਲਓ ਅਤੇ ਅੱਧਾ ਕਿਲੋ ਸ਼ੱਕਰ ਲਓ ਅਤੇ ਇਹਨਾਂ ਨੂੰ ਭਿਗੋ ਕੇ ਰੱਖ ਦਿਓ ਅਤੇ ਅਗਲੇ ਦਿਨ ਪਸ਼ੂ ਨ.... (Read More)
ਭਾਰ ਪੈਣ ਦੇ ਇਲਾਜ ਲਈ ਤੁਸੀ ਇਹ ਦੇਸੀ ਤਰੀਕਾ ਵਰਤ ਸਕਦੇ ਹੋ, ਤੁਸੀ 1 ਕਿਲੋ ਸਤਿਆਨਾਸ਼ੀ ਬੀਜ ਲਓ, ਅੱਧਾ ਕਿਲੋ ਕਮਰਕੱਸ, ਅੱਧਾ ਕਿਲੋ ਜੋਂਖਾਰ ਲਓ, ਇਹ ਸਭ ਪੰਸਾਰੀ ਤੋਂ ਮਿਲ ਜਾਵੇਗਾ ਇਹ ਸਾਰਾ ਕੁਜ ਤੁਸੀ ਮਿਲਾ ਲਓ ਅਤੇ ਇਸਦਾ ਪਾਊਡਰ ਬਣਾ ਸਕਦੇ ਹੋ ਅਤੇ ਰੋਜਾਨਾ ਰਾਤ ਨੂੰ ਇਹ ਮਿਸ਼ਰਣ ਅੱਧਾ ਕਿਲੋ ਲਓ ਅਤੇ ਅੱਧਾ ਕਿਲੋ ਸ਼ੱਕਰ ਲਓ ਅਤੇ ਇਹਨਾਂ ਨੂੰ ਭਿਗੋ ਕੇ ਰੱਖ ਦਿਓ ਅਤੇ ਅਗਲੇ ਦਿਨ ਪਸ਼ੂ ਨੂੰ ਦਿਓ, ਇਸ ਤਰ੍ਹਾਂ ਤੁਸੀ 4 ਦਿਨ ਲਗਾਤਾਰ ਦਿਓ, ਇਸ ਨਾਲ ਫਰਕ ਪੈ ਜਾਵੇਗਾ .

Posted by manjir
Punjab
15-11-2019 08:01 PM
shrimaan ji, 1121 basmati hath nal vaddi fasal da rate 2700- 2915 rupay prati quintal hai, ate machine nal vadi gai fasal da rate 2400 - 2879 rupay prati quintal hai, dhanwad

Posted by rk
Punjab
15-11-2019 07:57 PM
ਬੱਕਰੀ ਪਾਲਣ ਸ਼ੁਰੂਆਤ ਕਰਨ ਲਈ ਤੁਸੀ 10 ਬੱਕਰੀਆਂ ਅਤੇ 2 ਬੱਕਰਿਆਂ ਨਾਲ ਕਰ ਸਕਦੇ ਹੋ ਇਹਨਾਂ ਦੀ ਖੁਰਾਕ ਅਵਸਥਾ ਘਟ ਹੁੰਦੀ ਹੈ ਇਸ ਲਈ ਅਸੀਂ ਇਹਨਾਂ ਨੂੰ ਅਸਾਨੀ ਨਾਲ ਪਾਲ ਸਕਦੇ ਹਾਂ ਇਹ ਹਰ ਪ੍ਰਕਾਰ ਦੇ ਵਾਤਾਵਰਨ ਵਿੱਚ ਪਾਲੀਆਂ ਜਾ ਸਕਦੀਆਂ ਹਨ ਬਕਰੀਆਂ 12-14 ਮਹੀਨਿਆਂ ਵਿੱਚ ਬੱਚੇ ਦੇਣਾ ਸ਼ੁਰੂ ਕਰ ਦੇਂਦੀਆਂ ਹਨ ਬਕਰੀ ਦਾ ਗਰਬ ਸਮਾਂ 150 ਦਿਨ ਦਾ ਹੁੰਦਾ ਹੈ ਅਤੇ ਸਾਲ ਵਿੱਚ 1-5 ਬੱਚੇ ਦਿੰਦਿਆਂ ਹਨ .... (Read More)
ਬੱਕਰੀ ਪਾਲਣ ਸ਼ੁਰੂਆਤ ਕਰਨ ਲਈ ਤੁਸੀ 10 ਬੱਕਰੀਆਂ ਅਤੇ 2 ਬੱਕਰਿਆਂ ਨਾਲ ਕਰ ਸਕਦੇ ਹੋ ਇਹਨਾਂ ਦੀ ਖੁਰਾਕ ਅਵਸਥਾ ਘਟ ਹੁੰਦੀ ਹੈ ਇਸ ਲਈ ਅਸੀਂ ਇਹਨਾਂ ਨੂੰ ਅਸਾਨੀ ਨਾਲ ਪਾਲ ਸਕਦੇ ਹਾਂ ਇਹ ਹਰ ਪ੍ਰਕਾਰ ਦੇ ਵਾਤਾਵਰਨ ਵਿੱਚ ਪਾਲੀਆਂ ਜਾ ਸਕਦੀਆਂ ਹਨ ਬਕਰੀਆਂ 12-14 ਮਹੀਨਿਆਂ ਵਿੱਚ ਬੱਚੇ ਦੇਣਾ ਸ਼ੁਰੂ ਕਰ ਦੇਂਦੀਆਂ ਹਨ ਬਕਰੀ ਦਾ ਗਰਬ ਸਮਾਂ 150 ਦਿਨ ਦਾ ਹੁੰਦਾ ਹੈ ਅਤੇ ਸਾਲ ਵਿੱਚ 1-5 ਬੱਚੇ ਦਿੰਦਿਆਂ ਹਨ ਸਾਲ ਵਿੱਚ 2 ਬੱਚੇ ਦੇਨਾ ਆਮ ਗੱਲ ਹੁੰਦੀ ਹੈ ਬਕਰੀਆਂ 8-10 ਸਾਲ ਤਕ ਬੱਚੇ ਦਿੰਦਿਆਂ ਹਨ ਅਤੇ ਆਪਣੀ ਗਿਣਤੀ ਵਿੱਚ ਤੇਜੀ ਨਾਲ ਵਾਧਾ ਕਰ ਲੈਂਦਿਆਂ ਹਨ ਪੰਜਾਬ ਵਿੱਚ ਤੁਸੀ ਬਰਬਰੀ, ਬਲੈਕ ਬੰਗਾਲ, ਸਿਰੋਹੀ ਆਦਿ ਨਸਲ ਪਾਲ ਸਕਦੇ ਹੋ ਇਹ ਤੁਹਾਨੂੰ ਨੇੜੇ ਦੇ ਕਿਸੇ ਸਫਲ ਬੱਕਰੀ ਪਾਲਕ ਜਾਂ ਵੈਟਨਰੀ ਯੂਨੀਵਰਸਿਟੀ ਤੋਂ ਪ੍ਰਾਪਤ ਕਰ ਸਕਦੇ ਹੋ ਬਾਕੀ ਤੁਸੀਂ ਉਸ ਕਿਸਾਨ ਨੂੰ ਮਿਲ ਸਕਦੇ ਹੋ ਜੋ ਪਹਿਲਾਂ ਕਈ ਸਾਲਾਂ ਤੋਂ ਬੱਕਰੀ ਫਾਰਮ ਚਲਾ ਰਿਹਾ ਹੋਵੇ, ਉਸ ਤੋਂ ਤੁਹਾਨੂੰ ਬੱਕਰੀ ਫਾਰਮ ਬਾਰੇ ਪੂਰੀ ਜਾਣਕਾਰੀ ਮਿਲ ਜਾਵੇਗੀ..

Posted by ਅਮਰਬੀਰ ਸਿੰਘ
Punjab
15-11-2019 07:49 PM
श्रीमान जी ,यूरिया 110 kg प्रति एकड़ के हिसाब से डाला जाता है, नाइट्रोजन की एक तिहाई मात्रा और फासफोरस और पोटाश की पूरी मात्रा बिजाई के समय डालें बाकी बची नाइट्रोजन की दो तिहाई मात्रा बिजाई के 35-40 दिनों के बाद डालें धन्यवाद

Posted by rupam deep
Punjab
15-11-2019 07:48 PM
Rupam ji , canola can be successfully cultivated in the Gurdaspur region of Punjab, time of sowing is from October to mid November , thank you
Posted by ਪਿ੍ਤਪਾਲ ਸਿੰਘ
Punjab
15-11-2019 07:45 PM
ਤੁਸੀ ਇਹ ਚੀਜ਼ਾਂ ਪਸ਼ੂ ਨੂੰ ਦੇ ਸਕਦੇ ਹੋ, ਜੇਕਰ ਪਸ਼ੂ ਦਲੀਆ ਵਿਚ ਨਹੀਂ ਖਾਂਦਾ ਤਾਂ ਤੁਸੀ ਵੈਸੇ ਹੀ ਖਵਾ ਸਕਦੇ ਹੋ, ਤੁਸੀ 20 ਗ੍ਰਾਮ ਮੀਠਾ ਸੋਡਾ, 50 ਗ੍ਰਾਮ ਤਾਰਾ ਮੀਰਾ, 50 ਗ੍ਰਾਮ ਮਿਨਰਲ ਮਿਕਸਚਰ, 50 ਗ੍ਰਾਮ ਹਿਮਾਲਿਆ ਬਤੀਸਾ ਦੇ ਸਕਦੇ ਹੋ..

Posted by Avtar Singh
Punjab
15-11-2019 07:44 PM
ਸ਼੍ਰੀਮਾਨ ਜੀ , ਇਹ ਕਈ ਤਰ੍ਹਾਂ ਦੀ ਮਿੱਟੀ ਵਿੱਚ ਉਗਾਈ ਜਾਂਦੀ ਹੈ ਇਸਦੀ ਖੇਤੀ ਨਮਕੀਨ, ਖਾਰੀ ਅਤੇ ਪਾਣੀ ਖੜਾ ਹੋਣ ਵਾਲੀ ਮਿੱਟੀ ਵਿੱਚ ਨਾ ਕਰੋ ਇਹ ਵਧੀਆ ਨਿਕਾਸ ਵਾਲੀ ਮਿੱਟੀ, ਜਿਸ ਵਿੱਚ ਵਧੀਆ ਜੈਵਿਕ ਤੱਤ ਮੌਜ਼ੂਦ ਹੋਣ, ਵਿੱਚ ਵਧੀਆ ਨਤੀਜਾ ਦਿੰਦੀ ਹੈ ਇਸਦੇ ਵਧੀਆ ਵਿਕਾਸ ਲਈ ਮਿੱਟੀ ਦਾ pH 5.5-7 ਹੋਣਾ ਚਾਹੀਦਾ ਹੈ ਤੁਲਸੀ ਦੀਆ ਕਿਸਮਾਂ ਜਿਵੇ ਕੇ Krishna Tulsi (Ocimum sanctum), Drudriha TulsiRam/Kali Tulsi (Ocimum canum), Babi Tulsi, Tukashm.... (Read More)
ਸ਼੍ਰੀਮਾਨ ਜੀ , ਇਹ ਕਈ ਤਰ੍ਹਾਂ ਦੀ ਮਿੱਟੀ ਵਿੱਚ ਉਗਾਈ ਜਾਂਦੀ ਹੈ ਇਸਦੀ ਖੇਤੀ ਨਮਕੀਨ, ਖਾਰੀ ਅਤੇ ਪਾਣੀ ਖੜਾ ਹੋਣ ਵਾਲੀ ਮਿੱਟੀ ਵਿੱਚ ਨਾ ਕਰੋ ਇਹ ਵਧੀਆ ਨਿਕਾਸ ਵਾਲੀ ਮਿੱਟੀ, ਜਿਸ ਵਿੱਚ ਵਧੀਆ ਜੈਵਿਕ ਤੱਤ ਮੌਜ਼ੂਦ ਹੋਣ, ਵਿੱਚ ਵਧੀਆ ਨਤੀਜਾ ਦਿੰਦੀ ਹੈ ਇਸਦੇ ਵਧੀਆ ਵਿਕਾਸ ਲਈ ਮਿੱਟੀ ਦਾ pH 5.5-7 ਹੋਣਾ ਚਾਹੀਦਾ ਹੈ ਤੁਲਸੀ ਦੀਆ ਕਿਸਮਾਂ ਜਿਵੇ ਕੇ Krishna Tulsi (Ocimum sanctum), Drudriha TulsiRam/Kali Tulsi (Ocimum canum), Babi Tulsi, Tukashmiya Tulsi, Amrita Tulsi ਦੀ ਬਿਜਾਈ ਕਰ ਸਕਦੇ ਹੋ ਤੁਲਸੀ ਦੀ ਖੇਤੀ ਲਈ, ਚੰਗੀ ਤਰ੍ਹਾਂ ਖੁਸ਼ਕ ਮਿੱਟੀ ਦੀ ਲੋੜ ਹੁੰਦੀ ਹੈ ਮਿੱਟੀ ਦੇ ਭੁਰਭੁਰਾ ਹੋਣ ਤੱਕ ਤਵੀਆਂ ਨਾਲ ਖੇਤ ਦੀ ਵਾਹੀ ਕਰੋ, ਫਿਰ ਰੂੜੀ ਦੀ ਖਾਦ ਮਿੱਟੀ ਵਿੱਚ ਮਿਲਾਓ ਤੁਲਸੀ ਦਾ ਰੋਪਣ ਬੈੱਡਾਂ ਤੇ ਕਰੋ ਫਰਵਰੀ ਦੇ ਤੀਜੇ ਮਹੀਨੇ ਵਿੱਚ ਨਰਸਰੀ ਬੈੱਡ ਤਿਆਰ ਕਰੋ ਪੌਦੇ ਦੇ ਵਿਕਾਸ ਦੇ ਅਨੁਸਾਰ, 4.5x1.0x0.2 ਮੀਟਰ ਦੇ ਬੈੱਡ ਤਿਆਰ ਕਰੋ ਬੀਜਾਂ ਨੂੰ 60x60 ਸੈ.ਮੀ. ਦੇ ਫਾਸਲੇ ਤੇ ਬੀਜੋ ਬੀਜ ਨੂੰ 2 ਸੈ.ਮੀ. ਡੂੰਘਾਈ ਤੇ ਬੀਜੋ ਬਿਜਾਈ ਦੇ 6-7 ਹਫਤੇ ਬਾਅਦ, ਮੁੱਖ ਖੇਤ ਵਿੱਚ ਰੋਪਣ ਕਰੋ ਤੁਲਸੀ ਦੀ ਖੇਤੀ ਲਈ ਪ੍ਰਤੀ ਏਕੜ ਵਿੱਚ 120 ਗ੍ਰਾਮ ਬੀਜਾਂ ਦੀ ਵਰਤੋਂ ਕਰੋ ਫਸਲ ਨੂੰ ਮਿੱਟੀ ਤੋਂ ਪੈਦਾ ਹੋਣ ਵਾਲੀਆਂ ਬਿਮਾਰੀਆਂ ਤੋਂ ਬਚਾਉਣ ਲਈ, ਬਿਜਾਈ ਤੋਂ ਪਹਿਲਾਂ ਮੈਨਕੋਜ਼ੇਬ 5 ਗ੍ਰਾਮ ਪ੍ਰਤੀ ਕਿਲੋ ਨਾਲ ਬੀਜਾਂ ਨੂੰ ਸੋਧੋ ਫਸਲ ਦੀ ਵਧੀਆ ਪੈਦਾਵਾਰ ਲਈ ਬਿਜਾਈ ਤੋਂ ਪਹਿਲੇ 15 ਟਨ ਰੂੜੀ ਦੀ ਖਾਦ ਮਿੱਟੀ ਵਿੱਚ ਪਾਓ ਤੁਲਸੀ ਦੇ ਬੀਜਾਂ ਨੂੰ ਤਿਆਰ ਬੈੱਡਾਂ ਤੇ ਉਚਿੱਤ ਫਾਸਲੇ ਤੇ ਬੀਜੋ ਮਾਨਸੂਨ ਆਉਣ ਦੇ 8 ਹਫਤੇ ਪਹਿਲਾਂ ਬੀਜਾਂ ਨੂੰ ਬੈੱਡ ਤੇ ਬੀਜੋ ਬੀਜਾਂ ਨੂੰ 2 ਸੈ.ਮੀ. ਡੂੰਘਾਈ ਤੇ ਬੀਜੋ ਬਿਜਾਈ ਦੇ ਬਾਅਦ, ਰੂੜੀ ਦੀ ਖਾਦ ਅਤੇ ਮਿੱਟੀ ਦੀ ਪਤਲੀ ਪਰਤ ਬੀਜਾਂ ਤੇ ਬਣਾ ਦਿਓ ਇਸਦੀ ਸਿੰਚਾਈ ਫੁਹਾਰਾ ਵਿਧੀ ਦੁਆਰਾ ਕੀਤੀ ਜਾਂਦੀ ਹੈ ਰੋਪਣ ਦੇ 15-20 ਦਿਨਾਂ ਬਾਅਦ, ਨਵੇਂ ਪੌਦਿਆਂ ਨੂੰ ਤੰਦਰੁਸਤ ਬਣਾਉਣ ਲਈ 2% ਯੂਰੀਆ ਦਾ ਘੋਲ ਪਾਓ 6 ਹਫਤੇ ਪੁਰਾਣੇ ਅਤੇ 4-5 ਪੱਤਿਆਂ ਦੇ ਪੁੰਗਰਨ ਤੇ ਅਪ੍ਰੈਲ ਦੇ ਮਹੀਨੇ ਵਿੱਚ ਨਵੇਂ ਪੌਦੇ ਤਿਆਰ ਹੁੰਦੇ ਹਨ ਰੋਪਣ ਤੋਂ 24 ਘੰਟੇ ਪਹਿਲਾਂ ਤਿਆਰ ਬੈੱਡਾਂ ਨੂੰ ਪਾਣੀ ਲਾਓ ਤਾਂ ਕਿ ਪੌਦਿਆਂ ਨੂੰ ਆਸਾਨੀ ਨਾਲ ਪੁੱਟਿਆ ਜਾ ਸਕੇ ਅਤੇ ਰੋਪਣ ਦੇ ਸਮੇਂ ਜੜ੍ਹਾਂ ਮੁਲਾਇਮ ਹੋਣ ਖੇਤ ਦੀ ਤਿਆਰੀ ਦੇ ਸਮੇਂ, ਰੂੜੀ ਦੀ ਖਾਦ ਮਿੱਟੀ ਵਿੱਚ ਮਿਲਾਓ ਖਾਦ ਦੇ ਤੌਰ ਤੇ ਨਾਈਟ੍ਰੋਜਨ 48 ਕਿਲੋ(ਯੂਰੀਆ 104 ਕਿਲੋ), ਫਾਸਫੋਰਸ 24 ਕਿਲੋ(ਸਿੰਗਲ ਸੁਪਰ ਫਾਸਫੇਟ 150 ਕਿਲੋ) ਅਤੇ ਪੋਟਾਸ਼ 24 ਕਿਲੋ( ਮਿਊਰੇਟ ਆਫ ਪੋਟਾਸ਼ 40 ਕਿਲੋ) ਪ੍ਰਤੀ ਏਕੜ ਵਿੱਚ ਪਾਓ ਨਵੇਂ ਪੌਦੇ ਲਗਾਉਣ ਸਮੇਂ ਨਾਈਟ੍ਰੋਜਨ ਦੀ ਅੱਧੀ ਮਾਤਰਾ ਅਤੇ ਫਾਸਫੇਟ ਪੈਨਟੌਕਸਾਈਡ ਦੀ ਪੂਰੀ ਮਾਤਰਾ ਸ਼ੁਰੂਆਤੀ ਸਮੇਂ ਵਿੱਚ ਪਾਓ ਮੈਗਨੀਜ਼ 50 ਪੀ ਪੀ ਐਮ ਕੰਸਨਟ੍ਰੇਸ਼ਨ ਅਤੇ ਕਾਰਬਨ ਮੋਨੋਆਕਸਾਈਡ 100 ਪੀ ਪੀ ਐਮ ਕੰਸਨਟ੍ਰੇਟ ਸੂਖਮ-ਤੱਤ ਪਾਓ ਬਾਕੀ ਦੀ ਬਚੀ ਨਾਈਟ੍ਰੋਜਨ ਨੂੰ 2 ਹਿੱਸਿਆਂ ਵਿੱਚ ਪਹਿਲੀ ਅਤੇ ਦੂਜੀ ਕਟਾਈ ਦੇ ਬਾਅਦ ਪਾਓ ਖੇਤ ਨੂੰ ਨਦੀਨ ਮੁਕਤ ਕਰਨ ਲਈ ਕਹੀ ਜਾਂ ਕਸੀਏ ਨਾਲ ਗੋਡੀ ਕਰੋ ਨਦੀਨਾਂ ਦੀ ਰੋਕਥਾਮ ਘੱਟ ਨਾ ਹੋਣ ਤੇ ਇਹ ਫਸਲ ਨੂੰ ਨੁਕਸਾਨ ਪਹੁੰਚਾਉਂਦੇ ਹਨ ਰੋਪਣ ਦੇ ਇੱਕ ਮਹੀਨੇ ਬਾਅਦ ਪਹਿਲੀ ਗੋਡੀ ਅਤੇ ਪਹਿਲੀ ਗੋਡੀ ਦੇ 4 ਹਫਤੇ ਬਾਅਦ ਦੂਜੀ ਗੋਡੀ ਕਰੋ ਰੋਪਣ ਦੇ ਦੋ ਮਹੀਨੇ ਬਾਅਦ ਕਹੀ ਜਾਂ ਕਸੀਏ ਨਾਲ ਗੋਡੀ ਕਰੋ ਗਰਮੀਆਂ ਵਿੱਚ ਇੱਕ ਮਹੀਨੇ ਵਿੱਚ 3 ਸਿੰਚਾਈਆਂ ਕਰੋ ਅਤੇ ਵਰਖਾ ਦੇ ਮੌਸਮ ਵਿੱਚ, ਸਿੰਚਾਈ ਦੀ ਲੋੜ ਨਹੀਂ ਹੁੰਦੀ ਇੱਕ ਸਾਲ ਵਿੱਚ 12-15 ਸਿੰਚਾਈਆਂ ਕਰਨੀਆਂ ਚਾਹੀਦੀਆਂ ਹਨ ਪਹਿਲੀ ਸਿੰਚਾਈ ਰੋਪਣ ਤੋਂ ਬਾਅਦ ਅਤੇ ਦੂਜੀ ਸਿੰਚਾਈ ਨਵੇਂ ਪੌਦਿਆਂ ਦੇ ਸਥਿਰ ਹੋਣ ਤੇ ਕਰੋ ਇਸ ਫਸਲ ਨੂੰ ਮੁੱਖ ਤੌਰ ਤੇ 2 ਸਿੰਚਾਈਆਂ ਕਰਨ ਦੀ ਲੋੜ ਹੈ ਅਤੇ ਬਾਕੀ ਸਿੰਚਾਈਆਂ ਮੌਸਮ ਦੇ ਅਧਾਰ ਤੇ ਕਰੋ ਰੋਪਣ ਦੇ ਤਿੰਨ ਮਹੀਨੇ ਬਾਅਦ ਪੌਦਾ ਪੈਦਾਵਾਰ ਦੇਣਾ ਸ਼ੁਰੂ ਕਰ ਦਿੰਦਾ ਹੈ ਇਸਦੀ ਤੁੜਾਈ ਪੂਰੀ ਤਰ੍ਹਾਂ ਫੁੱਲ ਨਿਕਲਣ ਦੇ ਸਮੇਂ ਕੀਤੀ ਜਾਂਦੀ ਹੈ ਪੌਦੇ ਨੂੰ 15 ਸੈ.ਮੀ. ਜ਼ਮੀਨ ਦੇ ਉੱਪਰ ਤੋਂ ਸ਼ਾਖਾਵਾਂ ਨੂੰ ਕੱਟੋ ਤਾਂ ਕਿ ਇਹਨਾਂ ਨੂੰ ਦੋਬਾਰਾ ਵਰਤਿਆ ਜਾ ਸਕੇ ਭਵਿੱਖ ਵਿੱਚ ਵਰਤਣ ਲਈ ਇਸਦੇ ਤਾਜ਼ੇ ਪੱਤਿਆਂ ਨੂੰ ਧੁੱਪ ਵਿੱਚ ਸੁਕਾਇਆ ਜਾਂਦਾ ਹੈ ਤੁੜਾਈ ਦੇ ਬਾਅਦ, ਪੱਤਿਆਂ ਨੂੰ ਸੁਕਾਇਆ ਜਾਂਦਾ ਹੈ ਫਿਰ ਤੇਲ ਦੀ ਪ੍ਰਾਪਤੀ ਲਈ ਇਸਦਾ ਅਰਕ ਕੱਢਿਆ ਜਾਂਦਾ ਹੈ ਇਸਨੂੰ ਦੂਰੀ ਵਾਲੇ ਸਥਾਨ ਤੇ ਲਿਜਾਣ ਲਈ ਹਵਾ-ਰਹਿਤ ਪੈਕਟਾਂ ਵਿੱਚ ਪੈਕ ਕੀਤਾ ਜਾਂਦਾ ਹੈ ਪੱਤਿਆਂ ਨੂੰ ਸੁੱਕੀ ਜਗ੍ਹਾ ਤੇ ਸਟੋਰ ਕੀਤਾ ਜਾਂਦਾ ਹੈ ਇਸਦੀਆਂ ਜੜ੍ਹਾਂ ਤੋਂ ਕਈ ਤਰ੍ਹਾਂ ਦੇ ਉਤਪਾਦ ਜਿਵੇਂ ਕਿ ਤੁਲਸੀ ਤੇਲ, ਤੁਲਸੀ ਅਦਰਕ, ਤੁਲਸੀ ਪਾਊਡਰ, ਤੁਲਸੀ ਚਾਹ ਅਤੇ ਤੁਲਸੀ ਕੈਪਸੂਲ ਆਦਿ ਤਿਆਰ ਕੀਤੇ ਜਾਂਦੇ ਹਨ ਧੰਨਵਾਦ
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