Experts Q&A Search

Posted by Gurdeep Saharan
Haryana
18-11-2019 06:36 PM
Maharashtra
11-20-2019 06:09 PM
gurdeep ji agar aap iske jaivik tareeke se beejna chahte hai to bijai se pehle gobar ki khaad khet men daale iske ilava aap iske uper growth ke liye uploan ke pani ki spray karen aur agar koi keet ka hamla hota hai to aap neem ke tel ki spray karen.dhanywad
Posted by Javed Qureshi
Madhya Pradesh
18-11-2019 06:28 PM
Haryana
11-23-2019 06:32 PM
मछली पालन करने के लिए तालाब होना जरूरी नहीं है जी आजकल आप आप टैंक में भी मछली पालन कर सकते है जी .बाकि 1 साल तक आमदन शुरू हो जाती है , लेकिन अगर आपने बिलकुल शुरू से काम शुरू करना है तो अपने नज़दीकी कृषि विज्ञानं केंद्र से ट्रेनिंग जरूर ले उसके बाद ही मछली पालन शुरू करे जी
Posted by Parjeet Sandhu
Punjab
18-11-2019 06:18 PM
Punjab
11-21-2019 03:14 PM
ਸ਼੍ਰੀਮਾਨ ਜੀ, ਬਾਜਰੇ ਦਾ ਮੰਡੀ ਰੇਟ ਇਸ ਵੇਲੇ 1700 ਤੋਂ 1750 ਰੁਪਏ ਪ੍ਰਤੀ ਕੁਇੰਟਲ ਦੇ ਹਿਸਾਬ ਨਾਲ ਚਲ ਰਿਹਾ ਹੈ, ਧੰਨਵਾਦ
Posted by Dev chaudhary
Haryana
18-11-2019 06:15 PM
Punjab
11-21-2019 03:31 PM
श्रीमान जी, कृपया आप बताये के अपने खेत में कोई फसल की बिजाई की है, ताकि उसके हिसाब से आपको जानकारी दी जा सके, धन्यवाद
Posted by Kashmir Singh
Punjab
18-11-2019 06:15 PM
Punjab
11-21-2019 03:28 PM
ਸ਼੍ਰੀਮਾਨ ਜੀ ਲਸਣ ਤੇ ਜਾਮਣੀ ਅਤੇ ਪੀਲੇ ਧੱਬੇ : ਜਿਅਦਾ ਹਮਲੇ ਦੀ ਸੂਰਤ ਵਿੱਚ ਲਗਭਗ 70 % ਤੱਕ ਨੁਕਸਾਨ ਹੋ ਜਾਂਦਾ ਹੈ ਪੱਤਿਆ ਉਤੇ ਜਾਮਣੀ ਧੱਬੇ ਦਿਖਾਈ ਦਿੰਦੇ ਹਨ ਪੀਲੀਆਂ ਧਾਰੀਆਂ ਭੂਰੇ ਰੰਗ ਦੀਆਂ ਹੋ ਕੇ ਪੱਤਿਆ ਦੇ ਸਿਰਿਆਂ ਤੱਕ ਪਹੁੰਚ ਜਾਦੀਆ ਹਨ ਇਸਨੂੰ ਰੋਕਣ ਲਈ ਪ੍ਰੋਪੀਨੇਬ 70 % WP 350 ਗ੍ਰਾਮ ਪ੍ਰਤੀ ਏਕੜ ਪ੍ਰਤੀ 150 ਲੀਟਰ ਪਾਣੀ ਦੀ ਸਪਰੇਅ, 10 ਦਿਨਾਂ ਦੇ ਵਕਫੇ ਤੇ ਦੋ ਵਾਰ ਕਰੋ ਧੰਨਵਾਦ
Posted by M S Randhawa
Punjab
18-11-2019 06:08 PM
Punjab
11-18-2019 06:27 PM
Shrimaan ji, 1121 da mandi rate is vele 2765 rupya prati quintal hath nal vadi gai fasal da hai ate 2570 rupay prati quintal machine nal vadi gai fasal da hai ate 1718 da rate is vele 2350 rupay prati quintal d hisaab nal chal reha hai, dhanwad
Posted by amit kumar
Uttar Pradesh
18-11-2019 06:01 PM
Punjab
11-20-2019 10:33 AM
बैंगन की फसल सख्त होने के कारण इसे अलग अलग तरह की मिट्टी में उगाया जा सकता है यह एक लंबे समय की फसल है, इसलिए अच्छे जल निकास वाली उपजाऊ रेतली दोमट मिट्टी उचित होती है और अच्छी पैदावार देती है अगेती फसल के लिए हल्की मिट्टी और अधिक पैदावार के लिए चिकनी और नमी या गारे वाली मिट्टी उचित होती है फसल की वृद्धि के लिए 5..... (Read More)
बैंगन की फसल सख्त होने के कारण इसे अलग अलग तरह की मिट्टी में उगाया जा सकता है यह एक लंबे समय की फसल है, इसलिए अच्छे जल निकास वाली उपजाऊ रेतली दोमट मिट्टी उचित होती है और अच्छी पैदावार देती है अगेती फसल के लिए हल्की मिट्टी और अधिक पैदावार के लिए चिकनी और नमी या गारे वाली मिट्टी उचित होती है फसल की वृद्धि के लिए 5.5-6.6 पी एच होनी चाहिए लंबी किस्में Pusa Purple Long: यह जल्दी पकने वाली किस्म है सर्दियों में यह 70-80 दिनों में और गर्मियों में यह 100-110 दिनों में पक जाती है इस किस्म के बूटे दरमियाने कद के और फल लंबे और जामुनी रंग के होते हैं इसकी औसतन पैदावार 120 क्विंटल प्रति एकड़ होती है Pusa Purple Cluster: यह किस्म आई. सी. ए. आर. नई दिल्ली द्वारा बनाई गई है यह दरमियाने समय की किस्म है इसके फल गहरे जामुनी रंग और गुच्छे में होते हैं यह बैक्टीरिया सूखे के कुछ हद तक प्रतिरोधक है Pusa Kranti: यह किस्म IARI, नई दिल्ली द्वारा विकसित की गई है यह किस्म बसंत और पतझड़ के मौसम में उगाने के लिए अनुकूल है यह किसम 130-150 दिनों में कटाई के लिए तैयार हो जाती हे इसके फल आकर्षित गहरे जामुनी रंग के होते हैं इसकी औसतन पैदावार 56-64 क्विंटल प्रति एकड़ होती है Punjab Sadabahar: इसकी औसतन पैदावार 120-160 क्विंटल प्रति एकड़ होती है Punjab Basarati: इसकी औसतन पैदावार 120-140 क्विंटल प्रति एकड़ होती है Pant Samrat: इसके फल रोपाई के 70 दिनों के बाद तुड़ाई के लिए तैयार हो जाते हैं गोल किस्में Pusa Purple Round: यह किस्म छोटे पत्ते, शाख और फल के छेदक की रोधक किस्म है Pant Rituraj: इस किस्म के फल गोल और आकर्षित जामुनी रंग के होते हैं और इनमें बीज की मात्रा भी कम होती है इसकी औसतन पैदावार 160 क्विंटल प्रति एकड़ होती है Banaras Giant: यह वाराणसी और उसके नजदीक के क्षेत्रों में प्रसिद्ध किस्म है इसके फल हरे और सफेद रंग के होते हैं इसकी औसतन पैदावार 400 क्विंटल प्रति एकड़ होती है Swarna Mani: यह किस्म बैक्टीरियल सूखे के प्रतिरोधक किस्म है इसकी औसतन पैदावार 24-26 टन प्रति एकड़ होती है Swarna Ajay: इसकी औसतन पैदावार 28-30 टन प्रति एकड़ होती है बैंगन की खेती पूरे वर्ष की जाती है खरीफ मौसम के लिए, नर्सरी फरवरी - मार्च के महीने में तैयार करें और मार्च - अप्रैल के महीने में रोपाई करें सर्दियों के मौसम में, नर्सरी की तैयारी के लिए जून जुलाई का समय उपयुक्त होता है और रोपाई के लिए जुलाई अगस्त का महीना उपयुक्त होता है बसंत के मौसम में, सितंबर के महीने में नर्सरी तैयार करें और अक्तूबर - नवंबर के महीने में रोपाई पूरी कर लें लंबी किस्मों के लिए, कतार से कतार में 60-75 सैं.मी. जबकि गोल किस्मों के लिए कतारों में 80-90 सैं.मी. और पौधे से पौधे में 60-70 सैं.मी. फासले का प्रयोग करें नर्सरी में, बीज को 1.5 सैं.मी. गहराई में बोयें और मिट्टी से ढक दें खेत में पनीरी लगाकर इसकी बिजाई की जाती है मिट्टी के भुरभुरा होने तक खेत की तीन से चार बार जोताई करें गाय का गला हुआ गोबर 42 क्विंटल प्रति एकड़ में डालें और मिट्टी में अच्छी तरह मिलायें बैंगन के बीज 3 मीटर लंबे, 1 मीटर चौड़े और 15 सैं.मी. ऊंचे बैडों पर बोये जाते हैं पहले बैडों में बढ़िया रूड़ी की खाद डालें फिर बिजाई से दो दिन पहले कप्तान का घोल डालें ताकि जो नर्सरी बैडों में पौधों को नष्ट होने से बचाया जा सके उसके बाद बीजों को कतारों में 2.5 सैं.मी. के फासले पर और 1.5 सैं.मी. की गहराई पर बोयें हल्की सिंचाई करें पौधों के अंकुरन तक बैडों को काले रंग की पॉलीथीन शीट या पराली से ढक दें तंदरूस्त पौधे जिनके 3-4 पत्ते निकलें हों और कद 12-15 सैं.मी. (30-40 days crop) हो, खेत में पनीरी लगाने के लिए तैयार होते हैं बैंगन की खेती पूरे वर्ष की जाती है खरीफ मौसम के लिए, नर्सरी फरवरी - मार्च के महीने में तैयार करें और मार्च - अप्रैल के महीने में रोपाई करें सर्दियों के मौसम में, नर्सरी की तैयारी के लिए जून जुलाई का समय उपयुक्त होता है और रोपाई के लिए जुलाई अगस्त का महीना उपयुक्त होता है बसंत के मौसम में, सितंबर के महीने में नर्सरी तैयार करें और अक्तूबर - नवंबर के महीने में रोपाई पूरी कर लें लंबी किस्मों के लिए, कतार से कतार में 60-75 सैं.मी. जबकि गोल किस्मों के लिए कतारों में 80-90 सैं.मी. और पौधे से पौधे में 60-70 सैं.मी. फासले का प्रयोग करें नर्सरी में, बीज को 1.5 सैं.मी. गहराई में बोयें और मिट्टी से ढक दें खेत में पनीरी लगाकर इसकी बिजाई की जाती है एक एकड़ खेत में बिजाई के लिए 300-400 ग्राम बीज प्रति एकड़ में प्रयोग करें नाइट्रोजन 60 किलो (130 किलो यूरिया), फासफोरस 20 किलो (125 किलो सिंगल सुपर फासफेट) और पोटाश 20 किलो (35 किलो म्यूरेट ऑफ पोटाश) की मात्रा प्रति एकड़ में प्रयोग करें नाइट्रोजन की एक तिहाई मात्रा और फासफोरस और पोटाश की पूरी मात्रा आखिरी जोताई के समय डालें बाकी बची नाइट्रोजन को रोपाई के बाद 30 वें और 45वें दिन डालें नदीनों को रोकने, अच्छे विकास और उचित हवा के लिए दो - चार गोडाई करें काले रंग की पॉलिथीन शीट से पौधों को ढक दें जिससे नदीनों का विकास कम हो जाता है और ज़मीन का तापमान भी बना रहता हैं नदीनों को रोकने के लिए पौधे लगाने से पहले मिट्टी में फलूकलोरालिन 600-800 मि.ली. प्रति एकड़ या ऑक्साडायाज़ोन 400 ग्राम प्रति एकड़ डालें अच्छे परिणाम के लिए पौधे लगाने से पहले एलाकलोर 2 लीटर प्रति एकड़ की मिट्टी के तल पर स्प्रे
Posted by Sanjay Kumar
Haryana
18-11-2019 05:59 PM
Punjab
11-20-2019 07:02 PM
Gehun ke beej ki matra iski kisam pr nirbhar krti hai. aam taur pr dekhen to aadha acre me 20-22 kg beej boya jata hai.
Posted by Jitendra saini
Rajasthan
18-11-2019 05:46 PM
Punjab
11-21-2019 03:08 PM
Shrimaan ji, isme ap 300 gm urea ki khaad dalein, dhnaywad
Posted by Jitu Yadav
Rajasthan
18-11-2019 05:45 PM
Maharashtra
11-19-2019 11:25 AM
jitu ji kripya btaye ke aapne pani test karvaya hai ya nahi kyuki fluoride ka content ke adhar par hum koi bhi treatment recommend nahi kar sakte agar aapne pani test karvaya hai to kripya aap uski report ki photo bheje aur is pani ko aap pashuon ko pilane ke liye istemal bilkul na kare. agar fasl men bhi ho sake to aap nehri pani se sinchai kare.dhanywad
Posted by vishnu
Rajasthan
18-11-2019 05:32 PM
Punjab
11-20-2019 05:38 PM
नहीं जी फरवरी , मार्च या फिर अगस्त , सितंबर को लगाए जाने चाहिए जी
Posted by Palwinder singh
Punjab
18-11-2019 05:24 PM
Punjab
11-18-2019 09:41 PM
Tuci uss nu nazdiki doctor ton janch krwao kyuki usdi janch krke he sahi ilagg ho skda hai..
Posted by Karan Deep
Punjab
18-11-2019 05:23 PM
Punjab
11-18-2019 09:40 PM
Deep ji uss nu tuci Kol liqud 200ml ek varr ate Bloatosil liquid 100ml pilao, eh tuci 2 din deo, iss nal frak paa jawega..
Posted by Harsh Deep Singh
Punjab
18-11-2019 05:22 PM
Punjab
11-21-2019 03:41 PM
ਸ਼੍ਰੀਮਾਨ ਜੀ, ਬੈਂਗਣ ਦੀ ਫਸਲ ਸਖਤ ਹੋਣ ਕਾਰਨ ਇਸ ਨੂੰ ਵੱਖ ਵੱਖ ਤਰ੍ਹਾਂ ਦੀਆਂ ਮਿੱਟੀਆਂ ਵਿੱਚ ਉਗਾਇਆ ਜਾ ਸਕਦਾ ਹੈ ਇਹ ਇੱਕ ਲੰਬੇ ਸਮੇਂ ਦੀ ਫਸਲ ਹੈ, ਇਸ ਲਈ ਵਧੀਆ ਨਿਕਾਸ ਵਾਲੀ ਉਪਜਾਊ ਰੇਤਲੀ ਦੋਮਟ ਮਿੱਟੀ ਉਚਿੱਤ ਹੁੰਦੀ ਹੈ ਅਤੇ ਵਧੀਆ ਝਾੜ ਦਿੰਦੀ ਹੈ ਅਗੇਤੀ ਫਸਲ ਲਈ ਹਲਕੀ ਮਿੱਟੀ ਅਤੇ ਵੱਧ ਝਾੜ ਲਈ ਚੀਕਣੀ ਅਤੇ ਨਮੀਂ ਜਾਂ ਗਾਰੇ ਵਾਲੀ ਮਿੱਟੀ ਉੱਚਿਤ ਹੁੰਦੀ ਹੈ ਫਸਲ ਦੇ ਵਾਧੇ ਲਈ 5.5-6.6 .... (Read More)
ਸ਼੍ਰੀਮਾਨ ਜੀ, ਬੈਂਗਣ ਦੀ ਫਸਲ ਸਖਤ ਹੋਣ ਕਾਰਨ ਇਸ ਨੂੰ ਵੱਖ ਵੱਖ ਤਰ੍ਹਾਂ ਦੀਆਂ ਮਿੱਟੀਆਂ ਵਿੱਚ ਉਗਾਇਆ ਜਾ ਸਕਦਾ ਹੈ ਇਹ ਇੱਕ ਲੰਬੇ ਸਮੇਂ ਦੀ ਫਸਲ ਹੈ, ਇਸ ਲਈ ਵਧੀਆ ਨਿਕਾਸ ਵਾਲੀ ਉਪਜਾਊ ਰੇਤਲੀ ਦੋਮਟ ਮਿੱਟੀ ਉਚਿੱਤ ਹੁੰਦੀ ਹੈ ਅਤੇ ਵਧੀਆ ਝਾੜ ਦਿੰਦੀ ਹੈ ਅਗੇਤੀ ਫਸਲ ਲਈ ਹਲਕੀ ਮਿੱਟੀ ਅਤੇ ਵੱਧ ਝਾੜ ਲਈ ਚੀਕਣੀ ਅਤੇ ਨਮੀਂ ਜਾਂ ਗਾਰੇ ਵਾਲੀ ਮਿੱਟੀ ਉੱਚਿਤ ਹੁੰਦੀ ਹੈ ਫਸਲ ਦੇ ਵਾਧੇ ਲਈ 5.5-6.6 pH ਹੋਣੀ ਚਾਹੀਦੀ ਹੈ ਤੁਸੀ ਬੈਂਗਣ ਦੀਆ ਕਿਸਮਾਂ ਜਿਵੇ ਕੇ Punjab Bahar, Punjab No 8, Jamuni GOI (S 16), Punjab Barsati, Punjab Neelam, Punjab Sadabahar, PH 4, Pusa Purple Long, Pusa Purple Cluster, Pusa Hybrid 5, Pusa Purple Round, Pant Rituraj ਦੀ ਬਿਜਾਈ ਕਰੋ ਬੈਂਗਣ ਦੇ ਬੀਜ 3 ਮੀ.ਲੰਬੇ, 1 ਮੀ.ਚੌੜੇ ਅਤੇ 15 ਸੈ.ਮੀ. ਉੱਚੇ ਬੈੱਡਾਂ ਤੇ ਬੀਜੇ ਜਾਂਦੇ ਹਨ ਪਹਿਲਾਂ ਬੈੱਡਾਂ ਵਿੱਚ ਵਧੀਆ ਰੂੜੀ ਦੀ ਖਾਦ ਪਾਓ ਫਿਰ ਬਿਜਾਈ ਤੋਂ ਦੋ ਦਿਨ ਪਹਿਲਾਂ ਕਪਤਾਨ ਦਾ ਘੋਲ ਪਾਓ ਤਾਂ ਜੋ ਨਰਸਰੀ ਬੈੱਡਾਂ ਵਿਚਲੇ ਪੌਦਿਆਂ ਨੂੰ ਨਸ਼ਟ ਹੋਣ ਤੋਂ ਬਚਾਇਆ ਜਾ ਸਕੇ ਫਿਰ 5 ਸੈ.ਮੀ. ਦੇ ਫਾਸਲੇ ਤੇ ਬਿਜਾਈ ਕਰ ਕੇ ਬੈੱਡਾਂ ਨੂੰ ਗਲ਼ੀ ਹੋਈ ਖਾਦ ਜਾਂ ਸੁੱਕੇ ਪੱਤਿਆਂ ਨਾਲ ਢੱਕ ਦਿੱਤਾ ਜਾਂਦਾ ਹੈ ਹਲਕੀ ਸਿੰਚਾਈ ਕਰੋ ਪੌਦਿਆਂ ਦੇ ਪੁੰਗਰਣ ਤੱਕ ਬੈੱਡਾਂ ਨੂੰ ਕਾਲੇ ਰੰਗ ਦੀ ਪੋਲੀਥੀਨ ਸ਼ੀਟ ਜਾਂ ਪਰਾਲੀ ਨਾਲ ਢੱਕ ਦਿਓ ਤੰਦਰੁਸਤ ਪੌਦੇ ਜਿਨ੍ਹਾਂ ਦੇ 3-4 ਪੱਤੇ ਨਿਕਲੇ ਹੋਣ ਅਤੇ ਕੱਦ 12-15 ਸੈ.ਮੀ. ਹੋਵੇ, ਖੇਤ ਵਿੱਚ ਪਨੀਰੀ ਲਗਾਉਣ ਲਈ ਤਿਆਰ ਹੁੰਦੇ ਹਨ ਖੇਤ ਵਿੱਚ ਪਨੀਰੀ ਸ਼ਾਮ ਦੇ ਸਮੇਂ ਹੀ ਲਗਾਓ ਅਤੇ ਪਨੀਰੀ ਲਗਾਉਣ ਤੋਂ ਬਾਅਦ ਹਲਕੀ ਸਿੰਚਾਈ ਕਰੋ ਰੋਪਣ ਕਰਨ ਤੋਂ ਪਹਿਲਾਂ ਖੇਤ ਨੂੰ ਵਧੀਆ ਤਰੀਕੇ ਨਾਲ 4-5 ਵਾਰ ਵਾਹੋ ਅਤੇ ਪੱਧਰਾ ਕਰੋ ਫਿਰ ਖੇਤ ਵਿੱਚ ਲੋੜ ਮੁਤਾਬਿਕ ਆਕਾਰ ਦੇ ਬੈੱਡ ਬਣਾਓ ਪਹਿਲੀ ਫਸਲ ਲਈ ਅਕਤੂਬਰ ਵਿੱਚ ਪਨੀਰੀ ਬੀਜੋ ਤਾਂ ਜੋ ਨਵੰਬਰ ਤੱਕ ਪਨੀਰੀ ਖੇਤ ਵਿੱਚ ਲਗਾਉਣ ਲਈ ਤਿਆਰ ਹੋ ਜਾਵੇ ਦੂਜੀ ਫਸਲ ਲਈ ਨਵੰਬਰ ਵਿੱਚ ਪਨੀਰੀ ਬੀਜੋ ਤਾਂ ਜੋ ਫਰਵਰੀ ਦੇ ਪਹਿਲੇ ਪੰਦਰਵਾੜੇ ਤੱਕ ਪਨੀਰੀ ਖੇਤ ਵਿੱਚ ਲਗਾਉਣ ਲਈ ਤਿਆਰ ਹੋ ਜਾਵੇ ਫਾਸਲਾ ਫਸਲ ਦੀ ਕਿਸਮ ਅਤੇ ਮਿੱਟੀ ਦੀ ਉਪਜਾਊ ਸ਼ਕਤੀ ਤੇ ਨਿਰਭਰ ਕਰਦਾ ਹੈ ਕਤਾਰਾਂ ਵਿੱਚ 60 ਸੈ.ਮੀ. ਅਤੇ ਪੌਦਿਆਂ ਵਿੱਚ 35-40 ਸੈ.ਮੀ. ਦਾ ਫਾਸਲਾ ਰੱਖੋ ਨਰਸਰੀ ਵਿੱਚ ਬੀਜਾਂ ਨੂੰ 1 ਸੈ.ਮੀ. ਡੂੰਘਾਈ ਵਿੱਚ ਬੀਜੋ ਅਤੇ ਮਿੱਟੀ ਨਾਲ ਢੱਕ ਦਿਓ ਖੇਤ ਵਿੱਚ ਪਨੀਰੀ ਲਗਾ ਕੇ ਇਸਦੀ ਬਿਜਾਈ ਕੀਤੀ ਜਾਂਦੀ ਹੈ ਇੱਕ ਏਕੜ ਖੇਤ ਦੀ ਪਨੀਰੀ ਤਿਆਰ ਕਰਨ ਲਈ 300-400 ਗ੍ਰਾਮ ਬੀਜਾਂ ਦੀ ਵਰਤੋਂ ਕਰੋ ਬਿਜਾਈ ਲਈ ਤੰਦਰੁਸਤ ਅਤੇ ਵਧੀਆ ਬੀਜ ਹੀ ਵਰਤੋ ਬਿਜਾਈ ਤੋਂ ਪਹਿਲਾਂ ਬੀਜਾਂ ਨੂੰ ਥੀਰਮ 3 ਗ੍ਰਾਮ ਜਾਂ ਕਾਰਬੈਂਡਾਜ਼ਿਮ 3 ਗ੍ਰਾਮ ਪ੍ਰਤੀ ਕਿਲੋ ਬੀਜ ਨਾਲ ਸੋਧੋ ਰਸਾਇਣਿਕ ਸੋਧ ਤੋਂ ਬਾਅਦ ਬੀਜਾਂ ਨੂੰ ਟ੍ਰਾਈਕੋਡਰਮਾ ਵਿਰਾਈਡ 4 ਗ੍ਰਾਮ ਪ੍ਰਤੀ ਕਿਲੋ ਬੀਜ ਨਾਲ ਸੋਧੋ ਅਤੇ ਫਿਰ ਛਾਂਵੇਂ ਸੁਕਾਉਣ ਤੋਂ ਬਾਅਦ ਤੁਰੰਤ ਬਿਜਾਈ ਕਰੋ ਅਖੀਰ ਵਾਰ ਖੇਤ ਨੂੰ ਵਾਹੁਣ ਵੇਲੇ ਰੂੜੀ ਦੀ ਖਾਦ 10 ਟਨ ਪ੍ਰਤੀ ਏਕੜ ਮਿੱਟੀ ਵਿੱਚ ਮਿਲਾਉ ਨਾਇਟ੍ਰੋਜਨ 25 ਕਿਲੋ (55 ਕਿਲੋ ਯੂਰੀਆ), ਫਾਸਫੋਰਸ 25 ਕਿਲੋ (155 ਕਿਲੋ ਸਿੰਗਲ ਸੁਪਰ ਫਾਸਫੇਟ) ਅਤੇ ਪੋਟਾਸ਼ 12 ਕਿਲੋ (20 ਕਿਲੋ ਮਿਊਰੇਟ ਆੱਫ ਪੋਟਾਸ਼ੀਅਮ) ਦੀ ਮਾਤਰਾ ਪ੍ਰਤੀ ਏਕੜ ਵਿੱਚ ਵਰਤੋ ਫਾਸਫੋਰਸ, ਪੋਟਾਸ਼ ਅਤੇ ਨਾਈਟ੍ਰੋਜਨ ਦੀ ਪੂਰੀ ਮਾਤਰਾ ਪਨੀਰੀ ਖੇਤ ਵਿੱਚ ਲਗਾਉਣ ਸਮੇਂ ਪਾਓ ਦੋ ਤੁੜਾਈਆਂ ਤੋਂ ਬਾਅਦ 25 ਕਿਲੋ ਨਾਇਟ੍ਰੋਜਨ ਪ੍ਰਤੀ ਏਕੜ ਪਾਓ ਪਾਣੀ ਚ ਘੁਲਣਯੋਗ ਖਾਦਾਂ: ਫਸਲ ਦੇ ਸ਼ੁਰੂਆਤੀ ਵਿਕਾਸ ਸਮੇਂ ਹਿਊਮਿਕ ਤੇਜ਼ਾਬ 1 ਲੀਟਰ ਪ੍ਰਤੀ ਏਕੜ ਜਾਂ ਮਿੱਟੀ ਵਿੱਚ ਮਿਲਾ 5 ਕਿਲੋ ਪ੍ਰਤੀ ਏਕੜ ਪਾਓ ਇਹ ਫਸਲ ਦੇ ਝਾੜ ਅਤੇ ਵਾਧੇ ਵਿੱਚ ਬਹੁਤ ਮਦਦ ਕਰਦਾ ਹੈ ਪਨੀਰੀ ਲਗਾਉਣ ਤੋਂ 10-15 ਦਿਨ ਬਾਅਦ ਖੇਤ ਵਿੱਚ 19:19:19 ਦੇ ਨਾਲ 2.5 – 3 ਗ੍ਰਾਮ ਪ੍ਰਤੀ ਲੀਟਰ ਸੂਖਮ ਤੱਤਾਂ ਦੀ ਸਪਰੇਅ ਕਰੋ ਸ਼ੁਰੂਆਤੀ ਵਿਕਾਸ ਸਮੇਂ ਕਈ ਵਾਰ ਘੱਟ ਤਾਪਮਾਨ ਕਾਰਨ ਪੌਦੇ ਮਿੱਟੀ ਵਿੱਚੋਂ ਸੂਖਮ ਤੱਤ ਨਹੀਂ ਲੈ ਪਾਉਂਦੇ ਹਨ, ਜਿਸ ਨਾਲ ਪੌਦਾ ਪੀਲਾ ਪੈ ਜਾਂਦਾ ਹੈ ਅਤੇ ਕਮਜ਼ੋਰ ਦਿਖਦਾ ਹੈ ਅਜਿਹੀ ਸਥਿਤੀ ਵਿੱਚ 19:19:19 ਜਾਂ 12:61:0 ਦੀ 5-7 ਗ੍ਰਾਮ ਪ੍ਰਤੀ ਲੀਟਰ ਦੀ ਸਪਰੇਅ ਕਰੋ ਲੋੜ ਮੁਤਾਬਿਕ 10-15 ਦਿਨ ਬਾਅਦ ਦੋਬਾਰਾ ਸਪਰੇਅ ਕਰੋ ਪਨੀਰੀ ਖੇਤ ਵਿੱਚ ਲਗਾਉਣ ਤੋਂ 40-45 ਦਿਨਾਂ ਬਾਅਦ 20% ਬੋਰੋਨ 1 ਗ੍ਰਾਮ ਵਿੱਚ ਸੂਖਮ ਤੱਤ 2.5-3 ਗ੍ਰਾਮ ਪ੍ਰਤੀ ਲੀਟਰ ਪਾਣੀ ਨਾਲ ਸਪਰੇਅ ਕਰੋ ਫਸਲ ਵਿੱਚ ਤੱਤਾਂ ਦੀ ਪੂਰਤੀ ਅਤੇ ਝਾੜ 10-15% ਵਧਾਉਣ ਲਈ 13:00:45 ਦੀਆਂ 10 ਗ੍ਰਾਮ ਪ੍ਰਤੀ ਲੀਟਰ ਪਾਣੀ ਦੀਆਂ ਦੋ ਸਪਰੇਆਂ ਕਰੋ ਪਹਿਲੀ ਸਪਰੇਅ 50 ਦਿਨਾਂ ਬਾਅਦ ਅਤੇ ਦੂਜੀ ਸਪਰੇਅ ਪਹਿਲੀ ਸਪਰੇਅ ਤੋਂ 10 ਦਿਨ ਬਾਅਦ ਕਰੋ ਜਦੋਂ ਫੁੱਲ ਜਾਂ ਫ਼ਲ ਨਿਕਲਣ ਦਾ ਸਮਾਂ ਹੋਵੇ ਤਾਂ 0:52:34 ਜਾਂ 13:0:45 ਦੀ 5-7 ਗ੍ਰਾਮ ਪ੍ਰਤੀ ਲੀਟਰ ਪਾਣੀ ਦੀ ਸਪਰੇਅ ਕਰੋ ਵੱਧ ਤਾਪਮਾਨ ਹੋਣ ਕਰ ਕੇ ਫੁੱਲ ਡਿੱਗਣੇ ਸ਼ੁਰੂ ਹੋ ਜਾਂਦੇ ਹਨ, ਇਸ ਦੀ ਰੋਕਥਾਮ ਲਈ ਪਲੈਨੋਫਿਕਸ(ਐਨ ਏ ਏ) 5 ਮਿ.ਲੀ. ਪ੍ਰਤੀ 10 ਲੀਟਰ ਪਾਣੀ ਦੀ ਸਪਰੇਅ ਫੁੱਲ ਨਿਕਲਣ ਸਮੇਂ ਕਰੋ 20-25 ਦਿਨ ਬਾਅਦ ਇਹ ਸਪਰੇਅ ਦੋਬਾਰਾ ਕਰੋ ਨਦੀਨਾਂ ਨੂੰ ਰੋਕਣ, ਵਧੀਆ ਵਿਕਾਸ ਅਤੇ ਉੱਚਿਤ ਹਵਾ ਲਈ ਦੋ-ਚਾਰ ਗੋਡੀਆਂ ਕਰੋ ਕਾਲੇ ਰੰਗ ਦੀ ਪੋਲੀਥੀਨ ਸ਼ੀਟ ਨਾਲ ਪੌਦਿਆਂ ਨੂੰ ਢੱਕ ਦਿਓ ਜਿਸ ਨਾਲ ਨਦੀਨਾਂ ਦਾ ਵਿਕਾਸ ਘੱਟ ਜਾਂਦਾ ਹੈ ਅਤੇ ਜ਼ਮੀਨ ਦਾ ਤਾਪਮਾਨ ਵੀ ਬਣਿਆ ਰਹਿੰਦਾ ਹੈ ਨਦੀਨਾਂ ਨੂੰ ਰੋਕਣ ਲਈ ਪੌਦੇ ਲਗਾਉਣ ਤੋਂ ਪਹਿਲਾਂ ਮਿੱਟੀ ਵਿੱਚ ਫਲੂਕਲੋਰਾਲੀਨ 800-1000 ਮਿ.ਲੀ. ਪ੍ਰਤੀ ਏਕੜ ਜਾਂ ਓਕਸਾਡਾਇਆਜ਼ੋਨ 400 ਗ੍ਰਾਮ ਪ੍ਰਤੀ ਏਕੜ ਪਾਓ ਵਧੀਆ ਨਤੀਜੇ ਲਈ ਪੌਦੇ ਲਗਾਉਣ ਤੋਂ ਪਹਿਲਾਂ ਐਲਾਕਲੋਰ 2 ਲੀਟਰ ਪ੍ਰਤੀ ਏਕੜ ਦੀ ਮਿੱਟੀ ਦੇ ਤਲ ਤੇ ਸਪਰੇਅ ਕਰੋ ਗਰਮੀਆਂ ਵਿੱਚ ਹਰ 3-4 ਦਿਨ ਬਾਅਦ ਪਾਣੀ ਲਾਓ ਅਤੇ ਸਰਦੀਆਂ ਵਿੱਚ 12-15 ਦਿਨ ਬਾਅਦ ਪਾਣੀ ਲਾਓ ਵਧੇਰੇ ਝਾੜ ਲੈਣ ਲਈ ਸਹੀ ਸਮੇਂ ਤੇ ਪਾਣੀ ਲਾਉਣਾ ਬਹੁਤ ਜਰੂਰੀ ਹੈ ਫਸਲ ਨੂੰ ਕੋਹਰੇ ਵਾਲੇ ਦਿਨਾਂ ਵਿੱਚ ਬਚਾਉਣ ਲਈ ਮਿੱਟੀ ਵਿੱਚ ਨਮੀ ਬਣਾਈ ਰੱਖੋ ਅਤੇ ਲਗਾਤਾਰ ਪਾਣੀ ਲਾਓ ਫਸਲ ਵਿੱਚ ਪਾਣੀ ਖੜਨ ਤੋਂ ਰੋਕੋ, ਕਿਉਂਕਿ ਬੈਂਗਣ ਦੀ ਫਸਲ ਖੜੇ ਪਾਣੀ ਨੂੰ ਨਹੀਂ ਸਹਾਰ ਸਕਦੀ ਧੰਨਵਾਦ
Posted by avaneesh kumar
Uttar Pradesh
18-11-2019 05:19 PM
Punjab
11-18-2019 06:50 PM
श्रीमान जी गेहूं की किस्में PBW 550 , unnat pbw 550 ,unnat pbw 343 , PBW 1 zn , PBW 725 , PBW 677 , HD 3086 , WH 1105 , HD 2967 , PBW 621 , DBW 17 , PBW 502 , WH 542 ,TL 2908 की बिजाई कर सकते हैं।
Posted by avaneesh kumar
Uttar Pradesh
18-11-2019 05:16 PM
Punjab
11-18-2019 06:52 PM
श्री मान WH 896: इस किस्म की सिंचित क्षेत्रों में समय पर बोने के लिए सिफारिश की गई है PBW 373: यह अधिक उपज वाली किस्म है इसकी सिंचित क्षेत्रों में पिछेती बिजाई के लिए सिफारिश की गई है यह किस्म विभिन्न बीमारियों के प्रतिरोधक है PBW 343: यह किस्म सिंचित और पिछेती बिजाई के क्षेत्रों के लिए उपयुक्त है यह किस्म 130-135 दिनों में कट.... (Read More)
श्री मान WH 896: इस किस्म की सिंचित क्षेत्रों में समय पर बोने के लिए सिफारिश की गई है PBW 373: यह अधिक उपज वाली किस्म है इसकी सिंचित क्षेत्रों में पिछेती बिजाई के लिए सिफारिश की गई है यह किस्म विभिन्न बीमारियों के प्रतिरोधक है PBW 343: यह किस्म सिंचित और पिछेती बिजाई के क्षेत्रों के लिए उपयुक्त है यह किस्म 130-135 दिनों में कटाई के लिए तैयार हो जाती है यह गर्दन तोड़, जल जमाव की स्थितियों के प्रतिरोधक किस्म है यह करनाल बंट के भी प्रतिरोधक और झुलस रोग को सहनेयोग्य किस्म है इसकी औसतन पैदावार 19 क्विंटल प्रति एकड़ होती है HD 2643: यह किस्म सिंचित और पिछेती बिजाई के क्षेत्रों के लिए उपयुक्त है इस किस्म से अच्छी गुणवत्ता वाली रोटी बनती है यह पत्ता और धारीदार कुंगी के प्रतिरोधक और करनाल बंट को सहनेयोग्य किस्म है UP 2425: यह सिंचित स्थितियों में पिछेती बिजाई के लिए उपयुक्त किस्म है PBW-443: यह किस्म सिंचित हालातों में समय पर बोने के लिए उपयुक्त किस्म है DBW-14: यह किस्म सिंचित हालातों में पिछेती बिजाई के लिए उपयुक्त है यह जल्दी पकने वाली किस्म है इसके दाने सख्त होते हैं NW-2036: यह सिंचित हालातों में पिछेती बिजाई के लिए उपयुक्त किस्म है यह जल्दी पकने वाली किस्म है दूसरे शब्दों में, यह किस्म 108 दिनों में कटाई के लिए तैयार हो जाती है इसके दाने छोटे, सुनहरी और अर्द्ध सख्त होते हैं MACS-6145: यह किस्म बारानी क्षेत्रों में समय पर बोने के लिए उपयुक्त है HD-2824: यह किस्म सिंचित क्षेत्रों में समय पर बिजाई के लिए उपयुक्त है PBW-502: यह किस्म पंजाब एग्रीकल्चर युनिवर्सिटी द्वारा विकसित की गई है यह किस्म सिंचित हालातों में समय पर बिजाई के लिए उपयुक्त है यह किस्म पत्ते और धारीदार कुंगी के प्रतिरोधक किस्म है PDW-291: यह किस्म सिंचित हालातों में पिछेती बिजाई के लिए उपयुक्त किस्म है यह किस्म कुंगी, करनाल बंट और कांगियारी के प्रतिरोधक किस्म है PBW-524: यह सिंचित हालातों में पिछेती बिजाई के लिए उपयुक्त किस्म है यह किस्म कुंगी, करनाल बंट और कांगियारी के प्रतिरोधक किस्म है HD-2864: यह सिंचित हालातों में समय पर बिजाई के लिए उपयुक्त किस्म है यह किस्म पत्ते और धारीदार कुंगी के प्रतिरोधी और ताप को सहनेयोग्य किस्म है HI-8627: यह किस्म बारानी क्षेत्रों में समय पर बिजाई के लिए उपयुक्त है यह धारीदार कुंगी और पैर गलन के प्रतिरोधक किस्म है Ujiar(K-9006): यह किस्म सिंचित हालातों में समय पर बोने के लिए उपयुक्त है इसके दाने अर्द्ध सख्त और सुनहरी होते हैं यह किस्म करनाल बंट के प्रतिरोधक किस्म है Gangotri(K-9162): यह जल्दी पकने वाली और सिंचित हालातों में पिछेती बिजाई के लिए उपयुक्त किस्म है Prasad (K-8434): यह किस्म सिंचित हालातों में समय पर और नमक वाली और क्षारीय मिट्टी में बोने के लिए उपयुक्त है यह जल्दी पकने वाली किस्म है यह 115 दिनों में कटाई के लिए तैयार हो जाती है इसके दाने अर्द्ध सख्त, सुनहरी होते हैं यह किस्म पत्ता झुलस रोग, करनाल बंट और झूठी कांगियारी को सहनेयोग्य किस्म है Halna (K-7903): यह सिंचित क्षेत्रों में पिछेती और बहुत देर से उगाने के लिए उपयुक्त किस्म है यह किस्म नमक वाली मिट्टी के साथ साथ क्षारीय मिट्टी में उगाने के लिए उपयुक्त है इसके दाने सुनहरी और अर्द्ध सख्त होते हैं यह किस्म सभी प्रकार की कुंगियों के प्रतिरोधक किस्म है यह पत्ता झुलस रोग और करनाल बंट को भी सहनेयोग्य किस्म है Naina (K-9533): यह सिंचित क्षेत्रों में पिछेती बिजाई के लिए उपयुक्त किस्म है इसके दाने सुनहरी रंग के और अर्द्ध सख्त होते हैं यह सभी प्रकार की कुंगियों के प्रतिरोधक किस्म है यह पत्ता झुलस रोग और करनाल बंट को सहनेयोग्य किस्म है UP 2338: यह पिछेती बिजाई और समय पर बोने के लिए उपयुक्त किस्म है इसके दाने मोटे और सख्त होते हैं इसकी औसतन पैदावार 23 क्विंटल प्रति एकड़ होती है दूसरे राज्यों की किस्में PDW314: यह सिंचित हालातों में समय पर बोने के लिए उपयुक्त किस्म है WHD943(Durum): यह सिंचित हालातों में समय पर बोने के लिए उपयुक्त किस्म है HI 1563(Pusa Prachi): यह सिंचित हालातों में पिछेती बिजाई के लिए उपयुक्त किस्म है MPO-1225: यह सिंचित हालातों में समय पर बोने के लिए उपयुक्त किस्म है
Posted by vishal Gupta
Punjab
18-11-2019 05:12 PM
Punjab
11-19-2019 09:05 PM
partnership Main goat farm shuru kar sakte hai. iske liye aap pehla goat farm ke name par firm registered karwaye. goat farming ke regarding sabhi tarah ki ter and condition soch kar aap likhwa sakte hai ji. yah sujav hai ke goat farming se judi jitni baate ho sakti hai aap partnership deed me likhwa le.
Posted by Indresh
Madhya Pradesh
18-11-2019 05:04 PM
Haryana
11-19-2019 09:09 PM
अपने घर से एक कमरा चुन लें जिस मे वायू को आसानी से पहुचा सको और उस कमरे में पानी का नुकसान आप को महशूस ना लगे उस कमरे में मशरूम की खेती करनी चाहिए मशरूम की खेती से अगर आप अपना बिजनेस शुरू करना चाहते हैं तो आपको अक्टूबर में शुरुआत करना पड़ेगा उससे पहले कहीं आपके नजदीक मशरूम की उत्पादन यूनिट लगी हुई है तो वहां भ्.... (Read More)
अपने घर से एक कमरा चुन लें जिस मे वायू को आसानी से पहुचा सको और उस कमरे में पानी का नुकसान आप को महशूस ना लगे उस कमरे में मशरूम की खेती करनी चाहिए मशरूम की खेती से अगर आप अपना बिजनेस शुरू करना चाहते हैं तो आपको अक्टूबर में शुरुआत करना पड़ेगा उससे पहले कहीं आपके नजदीक मशरूम की उत्पादन यूनिट लगी हुई है तो वहां भ्रमण करें उससे आपको मशरूम के फार्म का डिजाइन मशरूम फार्म के अंदर किस तरीके से हवाएं देनी होती हैं फार्म के अंदर से किस तरह गए से बाहर निकाली जाती हैं और मशरूम फार्म के अंदर किस तरह से टेंपरेचर और नमी मेंटेन किया जाता है एक सफल किसान के लिए इन बहुत सारी बातों की जानकारी होना अति आवश्यक है नहीं तो हम जैसे लोगों के द्वारा दिए गए जवाबों को तोड़ मरोड़ करके बहुत सारे लोग गलत जवाब देने पर लगे हुए हैं जिससे किसानों को नुकसान भी होने के चांस बढ़ जाएंगे आपके नजदीक जहां कोई सरकारी संस्था ट्रेनिंग करवाती हो आप उनसे मिली है आपके जिले के नजदीक कृषि विज्ञान केंद्र मैं जाइए वहां कृषि वैज्ञानिकों की सलाह लेना जो यह बड़ा ही लिखकर बताते हैं यह वह लोग आपको किस वैरायटी का किस समय में कितने टेंपरेचर पर खेती की जाती है बता देंगे उसका आपको फायदा मिलेगा
Posted by BHERU LAL GURJAR
Rajasthan
18-11-2019 04:50 PM
Punjab
11-21-2019 03:43 PM
श्रीमान की कृपया आप गेहूं की इस किसम का पूरा नाम बताये ताकि आपको इसके बारे में पूरी जानकारी दी जा सके, धन्यवाद
Posted by Kuldeep Pandey
Uttar Pradesh
18-11-2019 04:30 PM
Punjab
11-19-2019 07:19 PM
Kuldeep Pandey ji goat training ke lia aap CIRG, Makhdoom, Farah, Mathura, UP 0565-2763320, se samparak kar sakte hai, Thankyou.
Posted by Raj malviya
Madhya Pradesh
18-11-2019 04:28 PM
Punjab
11-21-2019 03:23 PM
Shrimaan ji, ap unhi faslon ki bijai karein jinko kam pani ki avshkta hoti hai, jaise ke gwar, sabjiya jaise ke muli, fulgobhi, or gehun ki kam pani khapat vali kisme jaise ke JW 3020, JW 3173, JW 3269, JW 17, HI 1500 ki bijai ap kar sakte hain, dhanywad
Posted by daljeet
Punjab
18-11-2019 04:25 PM
Punjab
11-21-2019 03:26 PM
ਸ਼੍ਰੀਮਾਨ ਜੀ, ਇਸਦੇ ਲਈ ਤੁਸੀ round up @ 1 ਲਿਟਰ ਪ੍ਰਤੀ ਏਕੜ ਦੇ ਹਿਸਾਬ ਨਾਲ ਸਪਰੇ ਕਰੋ, ਧੰਨਵਾਦ
Posted by Sonu Yadav
Uttar Pradesh
18-11-2019 04:15 PM
Maharashtra
11-18-2019 04:19 PM
sonu ji aap waste decomposer ki spray kar sakte hai.iski spray aap 15-20 din ke bad bhi kar sakte hai.dhanywad
Posted by भीमसिंह सुराणा
Rajasthan
18-11-2019 04:13 PM
Punjab
11-19-2019 09:25 PM
यह कोई बीमारी नहीं है यह अधिक नर फूलों की समस्या है लाल रंग के फूल मादा हैं हरे फूल खिलने के बाद पीले रंग वाले नर फूल हैं हाइब्रिड बीज की कमी , पानी या खाद की कमी, पौधे की बढ़ती उम्र एवं तापमान की अधिकता से भी नर फूलों की संख्या बढ़ जाती है ज़रूरत के अनुसार खाद पानी देते रहें पके फलों की कटाई करे एवं पानी के साथ .... (Read More)
यह कोई बीमारी नहीं है यह अधिक नर फूलों की समस्या है लाल रंग के फूल मादा हैं हरे फूल खिलने के बाद पीले रंग वाले नर फूल हैं हाइब्रिड बीज की कमी , पानी या खाद की कमी, पौधे की बढ़ती उम्र एवं तापमान की अधिकता से भी नर फूलों की संख्या बढ़ जाती है ज़रूरत के अनुसार खाद पानी देते रहें पके फलों की कटाई करे एवं पानी के साथ नाइट्रोजन दें DCH 177 एक बहुत अच्छा हाइब्रिड है जोना केवल ज़्यादा पैदावार देता है अधिक नर फूलों की समस्या भी इसमें नहीं है
Posted by kheman sahu
Chattisgarh
18-11-2019 04:13 PM
Punjab
11-20-2019 05:53 PM
इसमें आप NPK 19 19 19 @1kg को 150 लीटर पानी में मिला कर प्रति एकड़ के हिसाब से स्प्रे करें
Posted by Sonu Yadav
Uttar Pradesh
18-11-2019 04:13 PM
Punjab
11-20-2019 05:52 PM
Gehun men jyada khaado ki jrurat nhi hoti, so aap is me koi extra product ka upyog na kre.
Posted by Shubham Baburao Ingole
Maharashtra
18-11-2019 04:07 PM
Punjab
11-20-2019 05:48 PM
कृपया अपना सवाल विस्तार से पूछें, कि आप कौन से प्रोडक्ट के बारे में जानकारी लेना चाहते हैं
Posted by BALESHWAR patidar
Madhya Pradesh
18-11-2019 04:02 PM

?

Punjab
11-21-2019 03:06 PM
Shrimaan ji, kripya ap apna sawal visthar se puche ke ap is video ke dawara kya puchna chahte hain, taki apko iske bare mein puri jankari di ja sake, dhanywad
Posted by RAJKUMAR
Rajasthan
18-11-2019 03:58 PM
Maharashtra
11-18-2019 04:03 PM
अफीम एक वार्षिक औषधीय बूटी है, जिसमें कई जरूरी एल्कलॉइड (वे तत्व जिनमें ड्रग्स की मात्रा होती है) जैसे मोर्फिन, कोडेन और थिबेन होते हैं अच्छी उपज और वृद्धि के लिए इसे उपजाऊ, अच्छे निकास वाली काली मिट्टी और हल्की दोमट मिट्टी की आवश्यकता होती है मिट्टी की पी एच 7 के लगभग होनी चाहिए प्रसिद्ध किस्में :- Chetak: यह अधिक .... (Read More)
अफीम एक वार्षिक औषधीय बूटी है, जिसमें कई जरूरी एल्कलॉइड (वे तत्व जिनमें ड्रग्स की मात्रा होती है) जैसे मोर्फिन, कोडेन और थिबेन होते हैं अच्छी उपज और वृद्धि के लिए इसे उपजाऊ, अच्छे निकास वाली काली मिट्टी और हल्की दोमट मिट्टी की आवश्यकता होती है मिट्टी की पी एच 7 के लगभग होनी चाहिए प्रसिद्ध किस्में :- Chetak: यह अधिक उपज वाली किस्म है इसके पौधे का औसतन कद 80-90 सैं.मी. होता है इसके फूल सफेद रंग के और फल बड़े और गोल आकार में होते हैं यह अधिक उपजाऊ मिट्टी में अच्छी पैदावार देती है इसमें मोर्फिन की मात्रा 12.5 प्रतिशत होती है यह मोर्फिन की औसतन पैदावार 2 किलोग्राम प्रति एकड़ देती है मिट्टी की किस्म के आधार पर मिट्टी के भुरभुरा होने तक खेत की दो-तीन बार जोताई करें मिट्टी को अच्छे से समतल करें ताकि खेत में पानी ना खड़ा हो सके खेत की तैयारी के समय अच्छी तरह से गला हुआ, गाय का गोबर 4 टन प्रति एकड़ में डालें अफीम की बिजाई के लिए अक्तूबर के आखिरी सप्ताह से लेकर नवंबर के पहले सप्ताह तक का समय उपयुक्त होता है इसके बीज छोटे होते हैं इसलिए बीजों को बारीक रेत में अच्छे से मिलाया जाता है और फिर बिजाई के लिए प्रयोग किया जाता है 3 मीटर चौड़े और 5 मीटर लंबे बैड तैयार किए जाते हैं बैड पर 30 सैं.मी. के फासले पर कतार बनाई जाती है, फिर बीजों को कतारों में बोया जाता है पौधे से पौधे का फासला 30 सैं.मी. रखें बिजाई के लिए बुरकाव या कतार में बिजाई का ढंग प्रयोग किया जाता है बीज की मात्रा ज्यादा डालने से गोडाई करने में परेशानी आती है, जिससे फसल का विकास अच्छा नहीं होता, इसलिए बुरकाव विधि से ज्यादा कतारों में बिजाई करने को ज्यादा महत्तव दिया जाता है एक एकड़ खेत के लिए 2 किलो बीज की मात्रा बहुत होती है बिजाई से पहले मैनकोजेब 4 ग्राम से प्रति किलो बीजों का उपचार करें नाइट्रोजन 36 किलो (यूरिया 80 किलो), फासफोरस 16 किलो (एस एस पी 100 किलो), पोटाश 4 किलो (म्यूरेट ऑफ पोटाश 10 किलो) प्रति एकड़ में डालें फासफोरस और पोटाश की पूरी मात्रा और नाइट्रोजन की आधी मात्रा बिजाई के समय डालें नाइट्रोजन की बाकी बची मात्रा को दो भागों में बांटे, पहली मात्रा बिजाई के 40-50 दिन के बाद डालें और दूसरी मात्रा फूल बनने से पहले डालें अफीम की पूरी फसल को 8-10 सिंचाइयों की आवश्यकता होती है बिजाई के तुरंत बाद हल्की सिंचाई करें फिर मिट्टी की किस्म, सिंचित क्षेत्र के आधार पर 6-7 दिनों के अंतराल पर सिंचाई करें जलवायु हालातों और आवश्यकता के आधार पर सिंचाई के अंतराल को बढ़ाकर, सिंचित खेत में 10-12 दिनों के अंतराल पर सिंचाई करें चीरा लगाने से 8-10 दिन पहले सिंचाई बंद कर दें नदीनों की तीव्रता के आधार पर दो से तीन गोडाई करें नदीनों की रासायनिक रोकथाम के लिए लसोप्रोटियूरॉन 500 ग्राम को 200 लीटर पानी में मिलाकर बिजाई के बाद तीसरे दिन डालें नदीननाशक क्रिया के 30 दिन बाद पहली गोडाई करें बिजाई के 95-115 दिनों बाद अफीम में फूल निकलते हैं फूल बनने के बाद, 15-20 दिनों में फल परिपक्व हो जाते हैं जब फल अपने रंग को हरे से हल्के हरे में बदल देता है और फल घना हो जाता है तब कट लगाने और दूध इक्ट्ठा करने के लिए सही अवस्था होती है दोपहर में कट लगाने के प्रक्रिया पूरी कर लें और दूध को अगले दिन की सवेर में इक्ट्ठा करें इस प्रक्रिया को हर तीन दिन बाद दोहरायें प्रत्येक फल में 3-56 बार कट लगाए जा सकते हैं आखिरी कट लगाने के बाद फसल को 20-25 दिनों के लिए फसल को सूखने के लिए छोड़ दें अच्छी तरह से सुखाने के बाद फल की तुड़ाई करें और फसल को दरांती के साथ काट दें सूखे फलों की तुड़ाई के बाद उन्हें खुली जगह में बिछा दें और उनमें से बीज निकाल लें धन्यवाद
Posted by ਗੁਰਮੇਲ ਸਿੰਘ
Punjab
18-11-2019 03:35 PM
Punjab
11-18-2019 05:59 PM
ਵੱਛੀ ਦੇ ਸਿੰਗ ਉਦੋਂ ਦਾਗਣੇ ਚਾਹੀਦੇ ਹਨ ਜਦੋਂ ਉਹ ਹੱਥ ਫੇਰਦਿਆਂ ਰੜਕਣ ਲੱਗ ਜਾਣ, ਇੱਕ ਗੱਲ ਦਾ ਹੋਰ ਧਿਆਨ ਰੱਖੋ ਕਿ ਪਸ਼ੂ ਨੂੰ ਬੇਹੋਸ਼ ਕਰਕੇ ਸਿੰਗ ਨਾ ਦਾਗੋ ਅੱਜਕਲ ਇਲਟ੍ਰੋਨਿਕ ਹੀਟਰ ਮਾਰਕੀਟ ਵਿੱਚ ਮਿਲ ਜਾਂਦਾ ਹੈ ਉਸ ਨਾਲ ਹੀ ਸਿੰਗ ਦਾਗੋ, ਬਾਕੀ ਵੱਛੀ ਨੂੰ ਜਨਮ ਤੋਂ 7 ਦਿਨ ਬਾਦ ਪੇਟ ਦੇ ਕੀੜਿਆਂ ਲਈ ਦਵਾਈ ਦਿਓ ਅਤੇ ਫਿਰ ਹਰ ਇਕ-ਇਕ ਮਹੀਨੇ ਬਾਦ ਡੇਵਰਮਿੰਗ ਕਰੋ ਅਤੇ 8 ਮਹੀਨਿਆਂ ਦੀ ਹੋਣ ਤ.... (Read More)
ਵੱਛੀ ਦੇ ਸਿੰਗ ਉਦੋਂ ਦਾਗਣੇ ਚਾਹੀਦੇ ਹਨ ਜਦੋਂ ਉਹ ਹੱਥ ਫੇਰਦਿਆਂ ਰੜਕਣ ਲੱਗ ਜਾਣ, ਇੱਕ ਗੱਲ ਦਾ ਹੋਰ ਧਿਆਨ ਰੱਖੋ ਕਿ ਪਸ਼ੂ ਨੂੰ ਬੇਹੋਸ਼ ਕਰਕੇ ਸਿੰਗ ਨਾ ਦਾਗੋ ਅੱਜਕਲ ਇਲਟ੍ਰੋਨਿਕ ਹੀਟਰ ਮਾਰਕੀਟ ਵਿੱਚ ਮਿਲ ਜਾਂਦਾ ਹੈ ਉਸ ਨਾਲ ਹੀ ਸਿੰਗ ਦਾਗੋ, ਬਾਕੀ ਵੱਛੀ ਨੂੰ ਜਨਮ ਤੋਂ 7 ਦਿਨ ਬਾਦ ਪੇਟ ਦੇ ਕੀੜਿਆਂ ਲਈ ਦਵਾਈ ਦਿਓ ਅਤੇ ਫਿਰ ਹਰ ਇਕ-ਇਕ ਮਹੀਨੇ ਬਾਦ ਡੇਵਰਮਿੰਗ ਕਰੋ ਅਤੇ 8 ਮਹੀਨਿਆਂ ਦੀ ਹੋਣ ਤੋਂ ਬਾਦ 3-3 ਮਹੀਨਿਆਂ ਦੇ ਫਰਕ ਨਾਲ ਡਿਵਰਮਿੰਗ ਕਰੋ ਜੀ, ਮੱਝਾਂ ਅਤੇ ਗਾਵਾਂ ਦੀ ਵੀ 3 ਮਹੀਨੇ ਫਰਕ ਨਾਲ ਡਿਵਰਮਿੰਗ ਕਰੋ ਜੀ, ਤਾਜ਼ੇ ਸੂਏ ਪਸ਼ੂ ਦੀ ਸੂਣ ਤੋਂ 7 ਦਿਨ ਬਾਦ ਡਿਵਰਮਿੰਗ ਕਰ ਸਕਦੇ ਹੋ..
Posted by Hariom Pandey
Uttar Pradesh
18-11-2019 03:28 PM
Punjab
11-20-2019 05:45 PM
इसके लिए आप mancozeb @4gm प्रति लीटर पानी का उपयोग कर सकते हैं
Posted by bhupinder Singh sekhon
Punjab
18-11-2019 03:22 PM
Punjab
11-18-2019 06:54 PM
Posted by ਪਰਮਜੀਤ ਸਿੰਘ
Punjab
18-11-2019 03:10 PM
Punjab
11-21-2019 03:03 PM
ਸ਼੍ਰੀਮਾਨ ਜੀ, DBW 173 ਅਤੇ ਸੁਪਰ ਗੋਲ੍ਡ 1112 ਦੋਨੋ ਹੀ ਕਣਕ ਦੀਆ ਵੱਧੀਆ ਕਿਸਮਾਂ ਹਨ, DBW 173 ਦਾ ਝਾੜ 24 ਕੁਇੰਟਲ ਪ੍ਰਤੀ ਏਕੜ ਹੈ, ਇਹ 130 ਤੋਂ 135 ਦਿਨਾਂ ਵਿਚ ਪੱਕ ਜਾਂਦੀ ਹੈ, ਇਹ ਪੀਲੀ ਅਤੇ ਭੂਰੀ ਕੁੰਗੀ ਦੀ ਪ੍ਰਤੀਰੋਧੀ ਹੈ, ਇਹ ਕਿਸਮ ਦਾ ਕਦ ਬਹੁਤ ਛੋਟਾ ਹੋਣ ਕਰਕੇ ਇਹ ਡਿਗਦੀ ਨਹੀਂ ਹੈ, ਅਤੇ ਸੁਪਰੀਮ 1112 ਨਾਮ ਦੀ ਕੋਈ ਕਿਸਮਾਂ ਨਹੀ ਹੈ , ਇਸ ਤੋਂ ਇਲਾਵਾ ਸੁਪਰ ਗੋਲਗ 1112 ਦਾ ਔਸਤਨ ਝਾੜ 26 ਕੁਇੰਟਲ ਪਤਰਾਤੀ .... (Read More)
ਸ਼੍ਰੀਮਾਨ ਜੀ, DBW 173 ਅਤੇ ਸੁਪਰ ਗੋਲ੍ਡ 1112 ਦੋਨੋ ਹੀ ਕਣਕ ਦੀਆ ਵੱਧੀਆ ਕਿਸਮਾਂ ਹਨ, DBW 173 ਦਾ ਝਾੜ 24 ਕੁਇੰਟਲ ਪ੍ਰਤੀ ਏਕੜ ਹੈ, ਇਹ 130 ਤੋਂ 135 ਦਿਨਾਂ ਵਿਚ ਪੱਕ ਜਾਂਦੀ ਹੈ, ਇਹ ਪੀਲੀ ਅਤੇ ਭੂਰੀ ਕੁੰਗੀ ਦੀ ਪ੍ਰਤੀਰੋਧੀ ਹੈ, ਇਹ ਕਿਸਮ ਦਾ ਕਦ ਬਹੁਤ ਛੋਟਾ ਹੋਣ ਕਰਕੇ ਇਹ ਡਿਗਦੀ ਨਹੀਂ ਹੈ, ਅਤੇ ਸੁਪਰੀਮ 1112 ਨਾਮ ਦੀ ਕੋਈ ਕਿਸਮਾਂ ਨਹੀ ਹੈ , ਇਸ ਤੋਂ ਇਲਾਵਾ ਸੁਪਰ ਗੋਲਗ 1112 ਦਾ ਔਸਤਨ ਝਾੜ 26 ਕੁਇੰਟਲ ਪਤਰਾਤੀ ਏਕੜ ਦੱਸਿਆ ਜਾ ਰਿਹਾ ਹੈ, ਇਹ ਪੀਲੀ ਕੁੰਗੀ ਦੀ ਪ੍ਰਤੀਰੋਧੀ ਹੈ, ਅਤੇ ਇਸਦਾ ਕਦ ਆਮ ਕਣਕ ਦੇ ਕਦ ਨਾਲੋਂ ਜਿਆਦਾ ਹੁੰਦਾ ਹੈ, ਇਹ ਡਿਗਦੀ ਨਹੀਂ ਹੈ, ਧੰਨਵਾਦ
Posted by AMITKUMAR
Bihar
18-11-2019 03:01 PM
Punjab
11-18-2019 03:08 PM
amit ji kripya aap btaye ke aapne ise khaad ke taur par kya kya daala hai taki aapko uske hisab se jankari di ja sake.dhanywad
Posted by Devinder singh
Punjab
18-11-2019 03:00 PM
Punjab
11-18-2019 03:17 PM
BhaaG rajwa hara chaara naal 2-3 kg parali pa sakde ho par is nu ulli na lagi howe changi suki howe wadhya feed pao jis wich 2 kg min mix te 1kg namak har quintal feed ch howe jan phir 50 g mineral mix rozaana deo
Posted by Chanpreet Nahal
Punjab
18-11-2019 02:55 PM
Punjab
11-18-2019 06:01 PM
Chanpreet ji tuci majh di nazdiki doctor ton janch krwao ji jiss nal ohna de muuh di janch krke sahi ilag kita jaa skee..
Posted by Chanpreet Nahal
Punjab
18-11-2019 02:54 PM
Punjab
11-18-2019 06:01 PM
Chanpreet ji tuci pashua di nazdiki doctor ton janch krwao ji jiss nal ohna de muuh di janch krke sahi ilag kita jaa skee..
Posted by BALSINGH CHAREL
Madhya Pradesh
18-11-2019 02:38 PM
Punjab
11-18-2019 05:06 PM
भिंडी की बिजाई आप जून महीने में की जाती है और गर्मी में आप फरवरी के आखिर से मार्च महीने तक की जाती है धन्यवाद
Posted by Rohtash Kumar
Haryana
18-11-2019 02:29 PM
Punjab
11-19-2019 05:44 PM
रोहताश जी आप किस्मे जैसे Pusa Bold की बिजाई कर सकते है धन्यवाद
Posted by SATYAM KUMAR
Bihar
18-11-2019 02:26 PM
Punjab
11-19-2019 03:24 PM
Satyam ji apke swalo ke jwab diye ja chukee hai, yaddi aap koi aur jankari lena chahte hai to aap App mai dubara apna swal push skte hai apko App mai sarri jankari di jayegi..
Posted by arshdeep singh
Punjab
18-11-2019 02:24 PM
Punjab
11-23-2019 06:33 PM
arshdeep singh ji koe v vpari 50 kg tak mal nai chukega ji . baki jekar koe vpari ajeha milda hai ta tohanu osda number das dita javega ji.
Posted by b subbatedfu
Andhra Pradesh
18-11-2019 02:14 PM
Punjab
11-21-2019 02:33 PM
Shrimaan ji, black gram ka rate ajj MSP 5700 rupay prati quintal year 2019-20 chal raha hai, dhanywad