Posted by Neeraj Rathi
Uttar Pradesh
22-11-2019 11:04 AM
Neeraj Rathi ji Sall 2019-20 Wheat ka smarthan mull (MSP) 1925/- hai, Thankyou.

Posted by Bhavin
Gujarat
22-11-2019 11:02 AM
ग्वार को हर तरह की मिट्टी में उगाया जा सकता है अधिक पैदावार लेने के लिए इसकी बिजाई रेतली, चिकनी और सही निकास वाली जमीन में करनी लाभदायक होती है उपयुक्त पैदावार के लिए मिट्टी की पी एच 7 से 8 की आवश्यकता होती है ग्वार की पैदावार के लिए समतल ज़मीन की जरूरत होती है बिजाई से पहले मिट्टी के भुरभुरा होने तक खेत की 2-3 बार.... (Read More)
ग्वार को हर तरह की मिट्टी में उगाया जा सकता है अधिक पैदावार लेने के लिए इसकी बिजाई रेतली, चिकनी और सही निकास वाली जमीन में करनी लाभदायक होती है उपयुक्त पैदावार के लिए मिट्टी की पी एच 7 से 8 की आवश्यकता होती है ग्वार की पैदावार के लिए समतल ज़मीन की जरूरत होती है बिजाई से पहले मिट्टी के भुरभुरा होने तक खेत की 2-3 बार हल से जोताई करें इसके बाद तवियों से जोतने के बाद सुहागे से अच्छी तरह समतल कर लेना चाहिए और ग्वार की खेती के लिए मेंड़ और खालियां बनाएं खारी और जल जमाव वाली मिट्टी में बिजाई ना करें राजस्थान में ग्वार की बिजाई के लिए जून के पहले सप्ताह से जुलाई के पहले पखवाड़े का समय उपयुक्त होता है पौधों में 45-60 सैं.मी. x 20-30 सैं.मी. फासले का प्रयोग करें बीजों को खालियों पर 2-3 सैं.मी. की गहराई में बोयें कुछ क्षेत्रों में बिजाई छींटा देकर की जाती है और कुछ क्षेत्रों में ड्रिल विधि का प्रयोग किया जाता है एक एकड़ खेत में बिजाई के लिए 6-8 किलो बीज प्रति एकड़ प्रयोग करें जब इसे दानों और फलियों के उद्देश्य से उगाया जाये तो बीजों की मात्रा 8 किलो उपयुक्त होती है जबकि चारे के लिए अधिक बीज मात्रा की आवश्यकता होती है बिजाई से पहले, मिट्टी से पैदा होने वाले कीटों और बीमारियों से बचाने के लिए बीजों का उपचार करना जरूरी होता है बीजों को गर्म पानी में 56 डिगरी सैल्सियस पर 10 मिनट के लिए भिगो दें और फिर सामान्य तापमान पर बीजों को सुखाएं फंगस से बीजों को बचाने के लिए थीरम 3 ग्राम से प्रति किलो बीज का उपचार करें फिर बीजों को छांव में सुखाएं रासायनिक उपचार के बाद जीवाणु टीके से उपचार करें उसके लिए 10 प्रतिशत चीनी या गुड़ को उबले हुए पानी में डालकर घोल तैयार करें इस घोल के ठंडा होने के बाद जीवाणु कल्चर के 2 पैकेट मिलाएं और पतला पेस्ट बनाएं और इससे बीजों का उपचार करें उसके बाद बीजों को छांव में सुखाएं और तुरंत बिजाई के लिए प्रयोग करें आखिरी जोताई के समय, मिट्टी में अच्छी तरह से गला हुआ गाय का गोबर 4-4.8 टन प्रति एकड़ में डाले बिजाई के समय, नाइट्रोजन 8 किलो (यूरिया 18 किलो) के साथ फासफोरस 24 किलो (सिंगल सुपर फासफेट 150 किलो) और पोटाश 8 किलो (म्यूरेट ऑफ पोटाश 14 किलो) प्रति एकड़ में डालें अच्छी उपज के साथ अच्छी वृद्धि के लिए, बिजाई के 30 दिन बाद सोडियम मोलीबडेट 15 ग्राम को 10 लीटर पानी में मिलाकर स्प्रे करें फसल के शुरूआती विकास के दौरान गोडाई और निराई से खेत को नदीन मुक्त रखें इन प्रक्रिया से नदीनों के नियंत्रण के साथ साथ मिट्टी को हवादार बनाने में भी मदद मिलती है नदीनों के नियंत्रण के लिए रोपाई से पहले बसालिन 800 मि.ली. प्रति एकड़ में डालें बारानी फसल होने के कारण, इसे सिंचाई की आवश्यकता नहीं होती, लेकिन यदि जरूरत पड़े तो बारिश की मात्रा के आधार पर सिंचाई दें गर्मियों के मौसम की फसल के लिए मिट्टी में नमी के आधार पर 10-15 दिनों के अंतराल पर पानी दें चारे के रूप में प्रयोग करने के लिए, बोयी गई फसल की कटाई फूल पड़ने के समय कर देनी चाहिए हरी खाद के रूप में काश्त की फसल को फलियां पड़ने के समय ही खेत में जोत दें प्रयोग की गई किस्म के आधार पर बिजाई के 60-90 दिनों के बाद हरी फलियों की कटाई शुरू की जाती है बाकी की कटाई 10-12 दिनों के अंतराल पर की जाती है दानों के लिए कटाई फलियों के पकने पर करें पक कर तैयार हुई फसल को द्राती की सहायता से काटकर कुछ दिनों के लिए धूप में सुखाने के लिए छोड़ देना चाहिए इसके बाद दानों को गुहाई या थ्रैशर की सहायता से अलग कर लेना चाहिए ग्वार के बीजों से गोंद भी प्राप्त होती है सब से पहले बीजों का छिल्का उतारा जाता है इसके बाद बीजों को पीसकर गोंद अलग कर ली जाती है खाद्य पदार्थ और उदयोगिक उद्देश्यों के लिए बीजों में गोंद को थरमो मकैनीकल विधि से अलग किया जाता है

Posted by Deepak
Uttar Pradesh
22-11-2019 11:02 AM
श्री मान WH 896: इस किस्म की सिंचित क्षेत्रों में समय पर बोने के लिए सिफारिश की गई है PBW 373: यह अधिक उपज वाली किस्म है इसकी सिंचित क्षेत्रों में पिछेती बिजाई के लिए सिफारिश की गई है यह किस्म विभिन्न बीमारियों के प्रतिरोधक है PBW 343: यह किस्म सिंचित और पिछेती बिजाई के क्षेत्रों के लिए उपयुक्त है यह किस्म 130-135 दिनों में कट.... (Read More)
श्री मान WH 896: इस किस्म की सिंचित क्षेत्रों में समय पर बोने के लिए सिफारिश की गई है PBW 373: यह अधिक उपज वाली किस्म है इसकी सिंचित क्षेत्रों में पिछेती बिजाई के लिए सिफारिश की गई है यह किस्म विभिन्न बीमारियों के प्रतिरोधक है PBW 343: यह किस्म सिंचित और पिछेती बिजाई के क्षेत्रों के लिए उपयुक्त है यह किस्म 130-135 दिनों में कटाई के लिए तैयार हो जाती है यह गर्दन तोड़, जल जमाव की स्थितियों के प्रतिरोधक किस्म है यह करनाल बंट के भी प्रतिरोधक और झुलस रोग को सहनेयोग्य किस्म है इसकी औसतन पैदावार 19 क्विंटल प्रति एकड़ होती है HD 2643: यह किस्म सिंचित और पिछेती बिजाई के क्षेत्रों के लिए उपयुक्त है इस किस्म से अच्छी गुणवत्ता वाली रोटी बनती है यह पत्ता और धारीदार कुंगी के प्रतिरोधक और करनाल बंट को सहनेयोग्य किस्म है UP 2425: यह सिंचित स्थितियों में पिछेती बिजाई के लिए उपयुक्त किस्म है PBW-443: यह किस्म सिंचित हालातों में समय पर बोने के लिए उपयुक्त किस्म है DBW-14: यह किस्म सिंचित हालातों में पिछेती बिजाई के लिए उपयुक्त है यह जल्दी पकने वाली किस्म है इसके दाने सख्त होते हैं NW-2036: यह सिंचित हालातों में पिछेती बिजाई के लिए उपयुक्त किस्म है यह जल्दी पकने वाली किस्म है दूसरे शब्दों में, यह किस्म 108 दिनों में कटाई के लिए तैयार हो जाती है इसके दाने छोटे, सुनहरी और अर्द्ध सख्त होते हैं MACS-6145: यह किस्म बारानी क्षेत्रों में समय पर बोने के लिए उपयुक्त है HD-2824: यह किस्म सिंचित क्षेत्रों में समय पर बिजाई के लिए उपयुक्त है PBW-502: यह किस्म पंजाब एग्रीकल्चर युनिवर्सिटी द्वारा विकसित की गई है यह किस्म सिंचित हालातों में समय पर बिजाई के लिए उपयुक्त है यह किस्म पत्ते और धारीदार कुंगी के प्रतिरोधक किस्म है PDW-291: यह किस्म सिंचित हालातों में पिछेती बिजाई के लिए उपयुक्त किस्म है यह किस्म कुंगी, करनाल बंट और कांगियारी के प्रतिरोधक किस्म है PBW-524: यह सिंचित हालातों में पिछेती बिजाई के लिए उपयुक्त किस्म है यह किस्म कुंगी, करनाल बंट और कांगियारी के प्रतिरोधक किस्म है HD-2864: यह सिंचित हालातों में समय पर बिजाई के लिए उपयुक्त किस्म है यह किस्म पत्ते और धारीदार कुंगी के प्रतिरोधी और ताप को सहनेयोग्य किस्म है HI-8627: यह किस्म बारानी क्षेत्रों में समय पर बिजाई के लिए उपयुक्त है यह धारीदार कुंगी और पैर गलन के प्रतिरोधक किस्म है Ujiar(K-9006): यह किस्म सिंचित हालातों में समय पर बोने के लिए उपयुक्त है इसके दाने अर्द्ध सख्त और सुनहरी होते हैं यह किस्म करनाल बंट के प्रतिरोधक किस्म है Gangotri(K-9162): यह जल्दी पकने वाली और सिंचित हालातों में पिछेती बिजाई के लिए उपयुक्त किस्म है Prasad (K-8434): यह किस्म सिंचित हालातों में समय पर और नमक वाली और क्षारीय मिट्टी में बोने के लिए उपयुक्त है यह जल्दी पकने वाली किस्म है यह 115 दिनों में कटाई के लिए तैयार हो जाती है इसके दाने अर्द्ध सख्त, सुनहरी होते हैं यह किस्म पत्ता झुलस रोग, करनाल बंट और झूठी कांगियारी को सहनेयोग्य किस्म है Halna (K-7903): यह सिंचित क्षेत्रों में पिछेती और बहुत देर से उगाने के लिए उपयुक्त किस्म है यह किस्म नमक वाली मिट्टी के साथ साथ क्षारीय मिट्टी में उगाने के लिए उपयुक्त है इसके दाने सुनहरी और अर्द्ध सख्त होते हैं यह किस्म सभी प्रकार की कुंगियों के प्रतिरोधक किस्म है यह पत्ता झुलस रोग और करनाल बंट को भी सहनेयोग्य किस्म है Naina (K-9533): यह सिंचित क्षेत्रों में पिछेती बिजाई के लिए उपयुक्त किस्म है इसके दाने सुनहरी रंग के और अर्द्ध सख्त होते हैं यह सभी प्रकार की कुंगियों के प्रतिरोधक किस्म है यह पत्ता झुलस रोग और करनाल बंट को सहनेयोग्य किस्म है UP 2338: यह पिछेती बिजाई और समय पर बोने के लिए उपयुक्त किस्म है इसके दाने मोटे और सख्त होते हैं इसकी औसतन पैदावार 23 क्विंटल प्रति एकड़ होती है दूसरे राज्यों की किस्में PDW314: यह सिंचित हालातों में समय पर बोने के लिए उपयुक्त किस्म है WHD943(Durum): यह सिंचित हालातों में समय पर बोने के लिए उपयुक्त किस्म है HI 1563(Pusa Prachi): यह सिंचित हालातों में पिछेती बिजाई के लिए उपयुक्त किस्म है MPO-1225: यह सिंचित हालातों में समय पर बोने के लिए उपयुक्त किस्म है

Posted by Kamal jeet
Himachal Pradesh
22-11-2019 10:57 AM
कमलजीत जी यदि आप देसी मुर्गियों को रखते है तो इसके लिए आपका लगभग 5000—6000 तक खर्चा आ सकता है
Posted by ANUJ BHARDWAJ
Uttar Pradesh
22-11-2019 10:48 AM
Medicinal plants bohat tarah ke hote hai j . aapko kis plant ke bare me jankari chahiye ji.
Posted by ANUJ BHARDWAJ
Uttar Pradesh
22-11-2019 10:42 AM
अभी आप फसले जैसे गेंहू और सब्जियों की बिजाई कर सकते है धन्यवाद

Posted by Kamal jeet
Himachal Pradesh
22-11-2019 10:39 AM
ब्रोकली की उचित और अच्छी वृद्धि के लिए नमी वाली मिट्टी की जरूरत होती है ब्रोकली की खेती के लिए अच्छी खाद वाली मिट्टी ठीक होती है ब्रोकली की खेती के लिए मिट्टी का pH 5.0-6.5 होना चाहिऐ प्रसिद्ध किस्में:- Palam Samridhi: यह किस्म 2015 में जारी की गई है इस किस्म की पनीरी अद्र्ध फैलने वाली है जिन्हें कोमल, बड़े, और हरे रंग के पत्ते ल.... (Read More)
ब्रोकली की उचित और अच्छी वृद्धि के लिए नमी वाली मिट्टी की जरूरत होती है ब्रोकली की खेती के लिए अच्छी खाद वाली मिट्टी ठीक होती है ब्रोकली की खेती के लिए मिट्टी का pH 5.0-6.5 होना चाहिऐ प्रसिद्ध किस्में:- Palam Samridhi: यह किस्म 2015 में जारी की गई है इस किस्म की पनीरी अद्र्ध फैलने वाली है जिन्हें कोमल, बड़े, और हरे रंग के पत्ते लगते हैं इसका फल गोल, घना, और हरे रंग का होता है इसके फल का औसतन भार 300 ग्राम होता है यह किस्म पनीरी लगाने से 70—75 दिनो के बाद पक जाती हैं और इसकी औसतन पैदावार 72 क्विंटल प्रति एकड़ होती है इसकी बिजाई के लिए मध्य अगस्त से मध्य सितंबर तक का समय ठीक होता है कतारों में फसला 45X45 सें.मी. रखें बीज को 1—1.5 सें.मी की गहराई पर बोयें इसकी बिजाई कतारों में या छिडकाव से भी कर सकते हैं एक एकड़ खेत में बिजाई के लिए 250 ग्राम बीजों का प्रयोग करें मिट्टी से पैदा होने वाली बीमारियों से बचाव के लिए बिजाई से पहले बीजों को गर्म पानी (58 डिगरी सेल्सियस) में 30 मिनट के लिए रखकर उपचार करें 40 टन रूडी की खाद डालें इसके इलावा नाइट्रोजन 50 किलो (यूरिया 110 किलो), फासफोर्स 25 किलो (सिंगल सुपर फॉसफेट 155 किलो) और पोटाशियम 25 किलो (म्यूरेट ऑफ पोटाश 40 किलो) प्रति एकड़ डालें रोपाई से पहले रूडी की खाद , फासफोर्स और पोटाशियम की पूरी मात्रा और नाइट्रोजन की आधी मात्रा डालें बाकि बची नाइट्रोजन की मात्रा रोपाई से एक महीने के बाद डालें नदीनो की रोकथाम के लिए रोपाई से पहले फलूक्लोरालिन (बसालिन) 1—2 लीटर को प्रति 600—700 लीटर पानी में मिलाकर प्रति एकड़ में स्प्रे करें और रोपण से 30—40 दिनो के बाद हाथ से गड़ाई करें नए पौधो के रोपाई से एक दिन पहले पैंडीमैथालिन 1 लीटर प्रति एकड़ पर स्प्रे करें रोपण के तुरंत बाद , पहली सिंचाई करें मिट्टी जलवायु या मौसम की स्थिति अनुसार गर्मियों में 7—8 दिनों और सर्दियों में 10—15 दिनो के फासले से सिंचाई करें मैदानी क्षेत्रों में फल की तुड़ाई का समय दिसंबर से मार्च का महीना है जबकि पहाड़ी क्षेत्रों में नवंबर से अप्रैल का महीना है

Posted by sunny singh
Punjab
22-11-2019 10:35 AM
sunny ji kripya swal vistar se pooche taki aapko iske bare men poori jankari di ja sake.dhanywad

Posted by sunny singh
Punjab
22-11-2019 10:20 AM
sunny singh ji agriculture department nu navi notification aayi hai os de anusar 5 acre tak de kissana nu hi prali na sadan layi bounas mil sakda hai ji.
Posted by dineshkumawat
Madhya Pradesh
22-11-2019 10:19 AM
dinesh ji aap iske patton ke neeche machar ka hamla check karen agar maujood hai to aap imidacloprid@1.5ml ko prati litre pani ke hisab se spray karen.dhanywad
Posted by amit pandey
Uttar Pradesh
22-11-2019 10:12 AM
अमित जी नमस्कार कृपया आप अपना सवाल विस्तार से पूछे ताकि आपको इसके बारे में पूरी जानकारी दी जा सके धन्यवाद

Posted by Parwinder Singh
Punjab
22-11-2019 10:05 AM
ਜੇਕਰ ਇਹ ਹੁਣ ਹੀਟ ਵਿਚ ਲੱਛਣ ਦਿਖਾ ਰਹੀ ਹੈ ਤਾਂ ਤੁਸੀ ਇਸਦੀ ਬੱਚੇਦਾਨੀ ਵਿਚ Utrawin-oz ਦਵਾਈ 30 ਮਿਲੀ ਅਤੇ ਉਸ ਵਿਚ Metro IV drip 50ml ਮਿਕਸ ਕਰੋ ਅਤੇ ਇਸ ਤ੍ਰਾਹ ਕਰਕੇ 3 ਦਿਨ ਭਰਵਾਓ ਅਤੇ ਉਸ ਨੂੰ Minfa gold ਪਾਊਡਰ 100 ਗ੍ਰਾਮ ਰੋਜਾਨਾ ਦੇਣਾ ਸ਼ੁਰੂ ਕਰੋ ਅਤੇ PG care ਗੋਲੀਆਂ ਰੋਜਾਨਾ 1 ਗੋਲੀ ਦਿਓ ਅਤੇ 21 ਦਿਨ ਤਕ ਦਿੰਦੇ ਰਹੋ, ਫਿਰ ਅਗਲੀ ਵਾਰ ਹੀਟ ਵਿਚ ਆਉਣ ਤੇ ਉਸ ਨੂੰ ਟੀਕਾ ਭਰਵਾਂ ਕੇ Pregstay gold ਪਾਊਡਰ 30 ਗ੍ਰਾਮ ਰੋਜਾ.... (Read More)
ਜੇਕਰ ਇਹ ਹੁਣ ਹੀਟ ਵਿਚ ਲੱਛਣ ਦਿਖਾ ਰਹੀ ਹੈ ਤਾਂ ਤੁਸੀ ਇਸਦੀ ਬੱਚੇਦਾਨੀ ਵਿਚ Utrawin-oz ਦਵਾਈ 30 ਮਿਲੀ ਅਤੇ ਉਸ ਵਿਚ Metro IV drip 50ml ਮਿਕਸ ਕਰੋ ਅਤੇ ਇਸ ਤ੍ਰਾਹ ਕਰਕੇ 3 ਦਿਨ ਭਰਵਾਓ ਅਤੇ ਉਸ ਨੂੰ Minfa gold ਪਾਊਡਰ 100 ਗ੍ਰਾਮ ਰੋਜਾਨਾ ਦੇਣਾ ਸ਼ੁਰੂ ਕਰੋ ਅਤੇ PG care ਗੋਲੀਆਂ ਰੋਜਾਨਾ 1 ਗੋਲੀ ਦਿਓ ਅਤੇ 21 ਦਿਨ ਤਕ ਦਿੰਦੇ ਰਹੋ, ਫਿਰ ਅਗਲੀ ਵਾਰ ਹੀਟ ਵਿਚ ਆਉਣ ਤੇ ਉਸ ਨੂੰ ਟੀਕਾ ਭਰਵਾਂ ਕੇ Pregstay gold ਪਾਊਡਰ 30 ਗ੍ਰਾਮ ਰੋਜਾਨਾ ਦਿਓ ਅਤੇ 20 ਦਿਨ ਤੱਕ ਦਿਓ, ਇਸ ਨਾਲ ਫਰਕ ਪੈ ਜਾਵੇਗਾ..

Posted by Harsh Deep Singh
Punjab
22-11-2019 09:55 AM
harsh ji bengani de patte de hatha machar da hamla check karo jekar maujood hai ta tuc imidacloprid@1.5ml nu prtai litre pani de hisab nal spray karo.dhanwad
Posted by gurlal
Punjab
22-11-2019 09:50 AM
gurlal ji tuc NPK 191919 ek kilo nu 150 litre pani de hisab nal spray karo.dhanwad

Posted by Ghanashyam
Gujarat
22-11-2019 09:30 AM
Ghanashyam ji ashi nasal ki Murrah lene ke lia aap Sulender Sharma 9873269064 Sharma Enterprises Pvt. Ltd. se samparak kar sakte hai, Thankyou.
Posted by Pramod Chaudhary
Haryana
22-11-2019 09:19 AM
Pramod ji kripya aap iski umar btaye taki aapko iske bare men poori jankari di ja sake,dhanywad
Posted by Dheeraj Kumar
Bihar
22-11-2019 09:17 AM
PDW314: यह सिंचित हालातों में समय पर बोने के लिए उपयुक्त किस्म है WHD943(Durum): यह सिंचित हालातों में समय पर बोने के लिए उपयुक्त किस्म है HI 1563(Pusa Prachi): यह सिंचित हालातों में पिछेती बिजाई के लिए उपयुक्त किस्म है MPO-1225: यह सिंचित हालातों में समय पर बोने के लिए उपयुक्त किस्म है WH 416: यह किस्म अगेती बिजाई और समय पर बोने के लिए उपयुक्त .... (Read More)
PDW314: यह सिंचित हालातों में समय पर बोने के लिए उपयुक्त किस्म है WHD943(Durum): यह सिंचित हालातों में समय पर बोने के लिए उपयुक्त किस्म है HI 1563(Pusa Prachi): यह सिंचित हालातों में पिछेती बिजाई के लिए उपयुक्त किस्म है MPO-1225: यह सिंचित हालातों में समय पर बोने के लिए उपयुक्त किस्म है WH 416: यह किस्म अगेती बिजाई और समय पर बोने के लिए उपयुक्त किस्म है यह किस्म कम उपजाऊ लेकिन सिंचित ज़मीनों में खेती के लिए उपयुक्त है इसके दाने लंबे, मध्यम आकार के और सुनहरी रंग के होते हैं यह भूरी कुंगी के प्रतिरोधक पर पीली कुंगी को सहनेयोग्य किस्म है इसकी औसतन पैदावार 22 क्विंटल प्रति एकड़ होती है WH 283: यह समय पर बिजाई वाले क्षेत्रों के लिए उपयुक्त किस्म है इसके दाने मध्यम, सख्त और चमकदार सुनहरी रंग के होते हैं यह किस्म भूरी और पीली कुंगी के प्रतिरोधक किस्म है इसकी औसतन पैदावार 20 क्विंटल प्रति एकड़ होती है WH 147: यह उपजाऊ और सिंचित ज़मीनों में समय पर बिजाई के लिए उपयुक्त किस्म है इसके दाने मध्यम, नर्म और चमकदार सुनहरी रंग के होते हैं यह किस्म भूरी कुंगी और करनाल बंट बीमारियों के प्रतिरोधक किस्म है इसकी औसतन पैदावार 20 क्विंटल प्रति एकड़ होती है WH 157: यह उपजाऊ और सिंचित ज़मीनों में समय पर बिजाई के लिए उपयुक्त किस्म है इसके दाने बड़े, सख्त होते हैं इसकी औसतन पैदावार 19 क्विंटल प्रति एकड़ होती है Kalyansona: यह गेहूं की बहुत छोटे कद वाली किस्म है जो कि बहुत सारे हालातों के अनुकूल होती है और पूरे भारत में इसको बीजने की सलाह दी जाती है इसे बहुत जल्दी फंगस की बीमारी लगती है इसलिए इसे फंगस रहित क्षेत्रों में बीजने की सलाह दी जाती है UP-(368): अधिक पैदावार वाली इस किस्म को पंतनगर द्वारा विकसित किया गया है यह फंगस और पीलेपन की और बीमारियों से रहित होती है WL-(711): यह छोटे कद और अधिक पैदावार वाली और कम समय में पकने वाली किस्म है यह कुछ हद तक सफेद धब्बे ओर पीलेपन की बीमारी से रहित होती है UP-(319): यह बहुत ज्यादा छोटे कद वाली गेहूं की किस्म है, जिसमें फंगस/उल्ली के प्रति प्रतिरोधकता काफी हद तक पाई जाती है दानों को टूटने से बचाने के लिए इसकी समय से कटाई कर लेनी चाहिए
Posted by ਹਰਜੀਤ ਸਿੰਘ
Punjab
22-11-2019 09:11 AM
Harjeet ji tuci uss nu nazdiki kisi hor doctor ton check krwao ji, kyuki usdi janch krke sahi ilagg howega.
Posted by PARMINDER SINGH BARN
Punjab
22-11-2019 09:03 AM
parminder ji isde lyi tuc NPK 191919 ik kilo nu 150 litre pani vich mila ke spray karo.dhanwad

Posted by Gopal jat
Rajasthan
22-11-2019 09:02 AM
gopal ji aap iske patton ke neeche machar ka hamla check kare agar maujood ha to aap iske uper imidacloprid@1.5ml ko prati litre pani ke hisab se spray karen.dhanywad
Posted by Ramnarayan
Madhya Pradesh
22-11-2019 08:55 AM
उसे पेट के कीड़ों के लिए Flukarid-Ds गोली भी दें और Enerdyna liquid 100ml रोजाना, Broton liquid 50-50ml सुबह शाम और Gouge पाउडर 50gm रोजाना दें इससे फर्क पड़ जाएगा, बाकि आप उसे रोजाना 35—40 किलो हरा चारा डालें और हर 3 महीने के बाद डीवॉर्मिंग जरूर करें.

Posted by ravi
Madhya Pradesh
22-11-2019 08:54 AM
ravi ji di gayi photo men keet to dikhai nahi de raha hai kripya btaye ke aapne isme khaad kya kya daali hai taki aapko iske bare men poori jankari di ja sake.dhanywad

Posted by Tanu
Punjab
22-11-2019 08:50 AM
Shri maan g UNNAT PBW 550: ਇਹ ਕਿਸਮ ਪੰਜਾਬ ਦੇ ਸਾਰਿਆਂ ਇਲਾਕਿਆਂ ਵਿੱਚ ਉਗਾਈ ਜਾਂਦੀ ਹੈ ਇਹ ਕਿਸਮ 145 ਦਿਨਾਂ ਵਿੱਚ ਪੱਕ ਕੇ ਤਿਆਰ ਹੋ ਜਾਂਦੀ ਹੈ ਇਹ ਪੀਲੀ ਅਤੇ ਭੂਰੀ ਕੁੰਗੀ ਦੀ ਰੋਧਕ ਕਿਸਮ ਹੈ ਇਸਦਾ ਔਸਤਨ ਕੱਦ 86 ਸੈ.ਮੀ. ਹੁੰਦਾ ਹੈ ਇਸ ਦਾ ਔਸਤਨ ਝਾੜ 23 ਕੁਇੰਟਲ ਪ੍ਰਤੀ ਏਕੜ ਹੁੰਦਾ ਹੈ
PBW 509: ਉਪ-ਪਰਬਤੀ ਖੇਤਰਾਂ ਨੂੰ ਛੱਡ ਕੇ ਇਹ ਕਿਸਮ ਪੂਰੇ ਪੰਜਾਬ ਵਿੱਚ ਉਗਾਈ ਜਾਂਦੀ ਹੈ ਇਹ ਕਿਸਮ 130 ਦਿਨਾਂ ਵਿੱਚ ਪੱ.... (Read More)
Shri maan g UNNAT PBW 550: ਇਹ ਕਿਸਮ ਪੰਜਾਬ ਦੇ ਸਾਰਿਆਂ ਇਲਾਕਿਆਂ ਵਿੱਚ ਉਗਾਈ ਜਾਂਦੀ ਹੈ ਇਹ ਕਿਸਮ 145 ਦਿਨਾਂ ਵਿੱਚ ਪੱਕ ਕੇ ਤਿਆਰ ਹੋ ਜਾਂਦੀ ਹੈ ਇਹ ਪੀਲੀ ਅਤੇ ਭੂਰੀ ਕੁੰਗੀ ਦੀ ਰੋਧਕ ਕਿਸਮ ਹੈ ਇਸਦਾ ਔਸਤਨ ਕੱਦ 86 ਸੈ.ਮੀ. ਹੁੰਦਾ ਹੈ ਇਸ ਦਾ ਔਸਤਨ ਝਾੜ 23 ਕੁਇੰਟਲ ਪ੍ਰਤੀ ਏਕੜ ਹੁੰਦਾ ਹੈ
PBW 509: ਉਪ-ਪਰਬਤੀ ਖੇਤਰਾਂ ਨੂੰ ਛੱਡ ਕੇ ਇਹ ਕਿਸਮ ਪੂਰੇ ਪੰਜਾਬ ਵਿੱਚ ਉਗਾਈ ਜਾਂਦੀ ਹੈ ਇਹ ਕਿਸਮ 130 ਦਿਨਾਂ ਵਿੱਚ ਪੱਕ ਕੇ ਤਿਆਰ ਹੋ ਜਾਂਦੀ ਹੈ ਇਹ ਪੀਲੀ ਅਤੇ ਭੂਰੀ ਕੁੰਗੀ ਦੀ ਰੋਧਕ ਕਿਸਮ ਹੈ ਇਸਦਾ ਔਸਤਨ ਕੱਦ 85 ਸੈ.ਮੀ. ਹੁੰਦਾ ਹੈ

Posted by Parminder Virdi
Punjab
22-11-2019 08:39 AM
Parminder Virdi ji there wale wahan te tusi munafa nai lai sakde ji. eh jamin jisde name te hai oh hi fieda lai sakda hai ji.

Posted by Parminder Virdi
Punjab
22-11-2019 08:34 AM
ਤੁਸੀ ਸਬਜ਼ੀਆਂ ਜਿਵੇ ਫੁੱਲਗੋਭੀ, ਆਲੂ, ਸਰ੍ਹੋਂ, ਮੂਲੀ, ਪਾਲਕ, ਪੱਤਾ ਗੋਭੀ, ਸ਼ਿਮਲਾ ਮਿਰਚ, ਲਸਣ , ਪਿਆਜ, ਮਟਰ, ਧਨੀਆ ਦੀ ਬਿਜਾਈ ਕਰ ਸਕਦੇ ਹੋ ਧੰਨਵਾਦ
Posted by Navi
Punjab
22-11-2019 08:29 AM
उसे रोजाना 35—40 किलो हरा चारा डालें और अच्छी कंपनी की फीड डालें बाकि आप उसे Enerdyna liquid 100ml रोज़ाना, Milkout powder 2-2 चम्मच सुबह शाम और Calcimust gold liquid 50ml रोज़ाना दें, इससे फर्क पड़ जाएगा, बाकी खुराक का पूरा ध्यान रखें.
Posted by Gurnam Singh Bhatti
Punjab
22-11-2019 08:26 AM
gurnam ji jeere di kheti punjab vich sifarish nahi kiti jandi hai.dhanwad
Posted by श्रवण कुमार
Rajasthan
22-11-2019 08:11 AM
श्रवण कुमार जी आप इसके ऊपर zinc sulphate @3 ग्राम को प्रति लीटर पानी के हिसाब से स्प्रे करें यह तत्व की कमी के कारण होता है धन्यवाद

Posted by raj Singh
Punjab
22-11-2019 07:52 AM
ਤੁਸੀ ਕਣਕ ਦੀਆਂ ਹੇਠ ਦਿਤੀਆਂ ਕਿਸਮਾਂ ਦੀ ਬਿਜਾਈ ਕਰ ਸਕਦੇ ਹੋ :-UNNAT PBW 343: ਇਹ ਕਿਸਮ ਸਿੰਚਾਈ ਵਾਲੇ ਖੇਤਰਾਂ ਵਿੱਚ ਲਗਾਉਣ ਯੋਗ ਹੈ ਪੱਕਣ ਦੇ ਲਈ ਇਹ 155 ਦਿਨਾਂ ਦਾ ਸਮਾਂ ਲੈਦੀ ਹੈ ਇਹ ਕਰਨਾਲ ਬੰਟ ਦੀ ਪ੍ਰਤਿਰੋਧੀ ਅਤੇ ਬਲਾਈਟ ਨੂੰ ਵੀ ਸਹਿਣ ਯੋਗ ਹੈ ਇਸਦੀ ਔਸਤ ਪੈਦਾਵਾਰ 23.2 ਕੁਇੰਟਲ ਪ੍ਰਤੀ ਏਕੜ ਹੈ
UNNAT PBW 550: ਇਹ ਕਿਸਮ ਪੰਜਾਬ ਦੇ ਸਾਰਿਆਂ ਇਲਾਕਿਆਂ ਵਿੱਚ ਉਗਾਈ ਜਾਂਦੀ ਹੈ ਇਹ ਕਿਸਮ 145 ਦਿਨਾਂ ਵ.... (Read More)
ਤੁਸੀ ਕਣਕ ਦੀਆਂ ਹੇਠ ਦਿਤੀਆਂ ਕਿਸਮਾਂ ਦੀ ਬਿਜਾਈ ਕਰ ਸਕਦੇ ਹੋ :-UNNAT PBW 343: ਇਹ ਕਿਸਮ ਸਿੰਚਾਈ ਵਾਲੇ ਖੇਤਰਾਂ ਵਿੱਚ ਲਗਾਉਣ ਯੋਗ ਹੈ ਪੱਕਣ ਦੇ ਲਈ ਇਹ 155 ਦਿਨਾਂ ਦਾ ਸਮਾਂ ਲੈਦੀ ਹੈ ਇਹ ਕਰਨਾਲ ਬੰਟ ਦੀ ਪ੍ਰਤਿਰੋਧੀ ਅਤੇ ਬਲਾਈਟ ਨੂੰ ਵੀ ਸਹਿਣ ਯੋਗ ਹੈ ਇਸਦੀ ਔਸਤ ਪੈਦਾਵਾਰ 23.2 ਕੁਇੰਟਲ ਪ੍ਰਤੀ ਏਕੜ ਹੈ
UNNAT PBW 550: ਇਹ ਕਿਸਮ ਪੰਜਾਬ ਦੇ ਸਾਰਿਆਂ ਇਲਾਕਿਆਂ ਵਿੱਚ ਉਗਾਈ ਜਾਂਦੀ ਹੈ ਇਹ ਕਿਸਮ 145 ਦਿਨਾਂ ਵਿੱਚ ਪੱਕ ਕੇ ਤਿਆਰ ਹੋ ਜਾਂਦੀ ਹੈ ਇਹ ਪੀਲੀ ਅਤੇ ਭੂਰੀ ਕੁੰਗੀ ਦੀ ਰੋਧਕ ਕਿਸਮ ਹੈ ਇਸਦਾ ਔਸਤਨ ਕੱਦ 86 ਸੈ.ਮੀ. ਹੁੰਦਾ ਹੈ ਇਸ ਦਾ ਔਸਤਨ ਝਾੜ 23 ਕੁਇੰਟਲ ਪ੍ਰਤੀ ਏਕੜ ਹੁੰਦਾ ਹੈ
PBW 1 Zn: ਇਸ ਕਿਸਮ ਦੇ ਪੌਦੇ ਦਾ ਔਸਤਨ ਕੱਦ 103 ਸੈ.ਮੀ. ਹੁੰਦਾ ਹੈ ਇਹ ਕਿਸਮ 151 ਦਿਨਾਂ ਵਿੱਚ ਕਟਾਈ ਲਈ ਤਿਆਰ ਹੋ ਜਾਂਦੀ ਹੈ ਇਸ ਦਾ ਔਸਤਨ ਝਾੜ 22.5 ਕੁਇੰਟਲ ਪ੍ਰਤੀ ਏਕੜ ਹੁੰਦਾ ਹੈ
PBW 725: ਇਹ ਕਿਸਮ ਪੀ ਏ ਯੂ, ਐਗਰੀਕਲਚਰ ਯੂਨੀਵਰਸਿਟੀ ਦੁਆਰਾ ਸਿਫਾਰਿਸ਼ ਕੀਤੀ ਗਈ ਹੈ ਇਹ ਇੱਕ ਮੱਧਰੀ ਕਿਸਮ ਹੈ ਅਤੇ ਇਹ ਸਿੰਚਾਈ ਵਾਲੇ ਖੇਤਰਾਂ ਵਿੱਚ ਲਗਾਈ ਜਾਂਦੀ ਹੈ ਇਹ ਪੀਲੇ ਅਤੇ ਭੂਰੇ ਜੰਗ ਦੀ ਪ੍ਰਤਿਰੋਧੀ ਕਿਸਮ ਹੈ ਇਸਦੇ ਦਾਣੇ ਮੋਟੇ , ਅਤੇ ਗਹਿਰੇ ਰੰਗ ਦੇ ਹੁੰਦੇ ਹਨ ਇਹ 155 ਦਿਨਾਂ ਵਿੱਚ ਪੱਕ ਕੇ ਤਿਆਰ ਹੋ ਜਾਂਦੀ ਹੈ ਇਸਦੀ ਸਲਾਨਾ ਔਸਤ ਝਾੜ 23 ਕੁਇੰਟਲ ਪ੍ਰਤੀ ਏਕੜ ਹੈ
PBW 677: ਇਹ ਕਿਸਮ 160 ਦਿਨਾਂ ਵਿੱਚ ਕਟਾਈ ਲਈ ਤਿਆਰ ਹੋ ਜਾਂਦੀ ਹੈ ਇਸਦਾ ਔਸਤ ਝਾੜ 22.4 ਕੁਇੰਟਲ ਪ੍ਰਤੀ ਏਕੜ ਹੈ HD 3086 (PusaGautam) : ਇਸ ਦਾ ਔਸਤਨ ਝਾੜ 23 ਕੁਇੰਟਲ ਪ੍ਰਤੀ ਏਕੜ ਹੁੰਦਾ ਹੈ ਇਹ ਪੱਤਿਆਂ ਦੇ ਪੀਲੇਪਣ ਅਤੇ ਭੂਰੇਪਣ ਦੀ ਬਿਮਾਰੀ ਤੋਂ ਰਹਿਤ ਹੁੰਦੀ ਹੈ ਵਧੀਆ ਕਿਮਸ ਦੇ ਬਰੈੱਡ ਬਣਾਉਣ ਦੇ ਸਾਰੇ ਗੁਣ/ਤੱਤ ਇਸ ਵਿਚ ਮੌਜੂਦ ਹਨ
WH 1105: ਇਸ ਦੀ ਕਾਢ ਪੰਜਾਬ ਖੇਤੀਬਾੜੀ ਯੂਨੀਵਰਸਿਟੀ ਵੱਲੋਂ ਕੀਤੀ ਗਈ ਹੈ ਇਹ ਇੱਕ ਛੋਟੇ ਕੱਦ ਵਾਲੀ ਕਿਸਮ ਹੈ ਜਿਸ ਵਿਚ ਬੂਟੇ ਦਾ ਔਸਤਨ ਕੱਦ 97 ਸੈ.ਮੀ. ਤੱਕ ਹੁੰਦਾ ਹੈ ਇਸ ਦੇ ਦਾਣੇ ਸੁਨਹਿਰੇ, ਮਧਰੇ, ਸਖਤ ਅਤੇ ਚਮਕਦਾਰ ਹੁੰਦੇ ਹਨ ਇਹ ਪੱਤਿਆਂ ਦੇ ਪੀਲੇਪਣ ਅਤੇ ਭੂਰੇਪਣ ਦੀ ਬਿਮਾਰੀ ਤੋਂ ਰਹਿਤ ਹੁੰਦੀ ਹੈ ਪਰੰਤੂ ਇਹ ਦਾਣਿਆਂ ਦੇ ਖਰਾਬ ਹੋਣ ਅਤੇ ਸਿੱਟਿਆਂ ਦੇ ਭੂਰੇ ਪੈਣ ਦੀ ਬਿਮਾਰੀ ਪ੍ਰਤੀ ਸੰਵੇਦਨਸ਼ੀਲ ਹੈ ਇਹ ਲਗਭਗ 157 ਦਿਨਾਂ ਵਿੱਚ ਪੱਕ ਜਾਂਦੀ ਹੈ ਇਸ ਦੀ ਔਸਤਨ ਪੈਦਾਵਾਰ 23.1 ਕੁਇੰਟਲ ਪ੍ਰਤੀ ਏਕੜ ਹੈ
HD 2967: ਇਹ ਵੱਡੇ ਕੱਦ ਦੀ ਕਿਸਮ ਹੈ ਜਿਸ ਵਿਚ ਬੂਟੇ ਦਾ ਔਸਤਨ ਕੱਦ 101 ਸੈ.ਮੀ. ਤੱਕ ਹੁੰਦਾ ਹੈ ਇਸ ਦੇ ਦਾਣੇ ਸੁਨਹਿਰੇ, ਮਧਰੇ, ਸਖਤ ਅਤੇ ਚਮਕਦਾਰ ਹੁੰਦੇ ਹਨ ਇਹ ਲਗਭਗ 157 ਦਿਨਾਂ ਵਿੱਚ ਪੱਕ ਜਾਂਦੀ ਹੈ ਇਸ ਦੀ ਔਸਤਨ ਪੈਦਾਵਾਰ 21.5 ਕੁਇੰਟਲ ਪ੍ਰਤੀ ਏਕੜ ਹੈ
PBW 621: ਇਹ ਕਿਸਮ ਪੰਜਾਬ ਦੇ ਸਾਰਿਆਂ ਇਲਾਕਿਆਂ ਵਿੱਚ ਉਗਾਈ ਜਾਂਦੀ ਹੈ ਇਹ ਕਿਸਮ 158 ਦਿਨਾਂ ਵਿੱਚ ਪੱਕ ਕੇ ਤਿਆਰ ਹੋ ਜਾਂਦੀ ਹੈ ਇਹ ਪੀਲੀ ਅਤੇ ਭੂਰੀ ਕੁੰਗੀ ਦੀ ਰੋਧਕ ਕਿਸਮ ਹੈ ਇਸਦਾ ਔਸਤਨ ਕੱਦ 100 ਸੈ.ਮੀ. ਹੁੰਦਾ ਹੈI
HD 3226:- jhaad 24 qtl / acre.
Posted by Harvir singh garcha
Punjab
22-11-2019 07:49 AM
ਤੁਸੀ ਉਸਦੀ ਬੱਚੇਦਾਨੀ ਵਿਚ Metricef-IU ਦਵਾਈ ਦੋ ਦਿਨ ਲਗਾਤਾਰ ਭਰਵਾਓ ਅਤੇ ਉਸ ਨੂੰ Bovimin-B ਪਾਊਡਰ 100 ਗ੍ਰਾਮ ਰੋਜਾਨਾ ਅਤੇ PG care bolus ਰੋਜਾਨਾ ਇਕ ਗੋਲੀ ਦਿਓ ਅਤੇ 21 ਦਿਨ ਤਕ ਦਿਓ, ਫਿਰ ਅਗਲੀ ਵਾਰ ਦੁਬਾਰਾ ਹੀਟ ਵਿਚ ਆਉਣ ਤੇ ਉਸ ਨੂੰ ਟੀਕਾ ਭਰਵਾਓ, ਟੀਕਾ ਭਰਵਾਕੇ ਤੁਸੀ ਉਸ ਨੂੰ Receptel injection 5ml IV ਲਗਵਾਓ..

Posted by Harsh Deep Singh
Punjab
22-11-2019 07:42 AM
harsh lail ji ss nu turant doctor ton check krwao ji jiss nal usdi janch krke sahi ilag kita jaa sake ji. es tarah kuch idea lagona muskil hai ji.
Posted by Jaspal Singh
Punjab
22-11-2019 07:38 AM
Jaspal Singh ji punjab vich agla pau da kissan mela march vich hovega ji. baki es to elava je ko hor chota kissan mela lagda hai ta tohanu jankari de ditti javgi ji.

Posted by jaspreet singh
Punjab
22-11-2019 07:38 AM
jaspreet ji tuc gobhi di growth de layi NPK 191919 ek kilo nu 150 litre pani de hisab nal spray karo.dhanwad
Posted by jaspreet singh
Punjab
22-11-2019 07:31 AM
Jaspreet ji tuhade sare swala de jwab dite gye hai tuci App vich apne sare swala de jwab dekh skde ho.
Posted by ਕੁਲਵੀਰ ਸਿੰਘ
Punjab
22-11-2019 07:12 AM
ਸ੍ਰੀ ਮਾਨ ਜੀ ਬਾਥੂ ਦੇ ਲਈ algrip@10gm ਜਾਂ total@16gm ਨੂੰ 150 ਲੀਟਰ ਪਾਣੀ ਵਿੱਚ ਮਿਲਾ ਕੇ ਪ੍ਰਤੀ ਏਕੜ ਤੇ ਸਪਰੇਅ ਕਰ ਸਕਦੇ ਹੋ
Posted by rahul kumar
Uttar Pradesh
22-11-2019 07:07 AM
राहुल जी अगर आपके घर में देसी बीज है तो आप इसकी बिजाई कर सकते है धन्यवाद

Posted by tulsiram hatta bhidari
Madhya Pradesh
22-11-2019 07:06 AM
यदि आप मधु मक्खी पालन के बारे में जानकारी लेना चाहते है और अगर आप नए सिरे से मक्खी पालन का व्यवसाय शुरू करना चाहते हैं तो अगस्त से जनवरी तक शुरू किया जा सकता है इसमें 100 मक्खी के बक्सों से आप औसतन 25000-30000 तक का मुनाफा ले सकते हैं शुरूआत में यदि आप 100 बक्सों से काम शुरू करते हैं तो औसतन 4-5 लाख तक खर्चा आता है आप अपने बजट.... (Read More)
यदि आप मधु मक्खी पालन के बारे में जानकारी लेना चाहते है और अगर आप नए सिरे से मक्खी पालन का व्यवसाय शुरू करना चाहते हैं तो अगस्त से जनवरी तक शुरू किया जा सकता है इसमें 100 मक्खी के बक्सों से आप औसतन 25000-30000 तक का मुनाफा ले सकते हैं शुरूआत में यदि आप 100 बक्सों से काम शुरू करते हैं तो औसतन 4-5 लाख तक खर्चा आता है आप अपने बजट के हिसाब से बक्सों की गिणती कम ज्यादा कर सकते हैं बाकी यदि इसकी ट्रेनिंग लेकर शुरू करें तो बढ़िया रहेगा ट्रेनिंग में आपको पूरी जानकरी मिलेगी किस तरह से इसका रख रखाव करना होता है जी और उसके बाद जब आपने यह काम शुरू करना है तो आप बक्से नज़दीकी किसी भी मधुमखी पालन का काम करने वाले किसान से खरीद सकते है.

Posted by hardeep singh
Punjab
22-11-2019 06:58 AM
ਹਰਦੀਪ ਜੀ ਕ੍ਰਿਪਾ ਕਰਕੇ ਸਵਾਲ ਵਿਸਤਾਰ ਨਾਲ ਪੁਛੋ ਤਾ ਜੋ ਤੁਹਾਨੂੰ ਇਸ ਬਾਰੇ ਪੂਰੀ ਜਾਣਕਾਰੀ ਦਿਤੀ ਜਾ ਸਕੇ ਧੰਨਵਾਦ

Posted by भोला सिंह
Punjab
22-11-2019 06:51 AM
करेला :- बीज बोने के लिए फरवरी से मार्च या जून से जुलाई का समय उपयुक्त होता है भिंडी :- उत्तर में यह वर्षा और बसंत के मौसम में उगाई जाती है वर्षा वाले मौसम में, इसकी बिजाई जून-जुलाई के महीने और बसंत ऋतु में फरवरी-मार्च के महीने में की जाती है
Posted by hemraj
Rajasthan
22-11-2019 06:49 AM
श्रीमान जी अब आप किस्म जैसे कि PBW 550 , unnat pbw 550 ,unnat pbw 343 , PBW 1 zn , PBW 725 , PBW 677 , HD 3086 , WH 1105 , HD 2967 , PBW 621 , DBW 17 , PBW 502 , WH 542 ,TL 2908 बिजाई कर सकते हैं

Posted by भोला सिंह
Punjab
22-11-2019 06:36 AM
भोला जी गाजर का बीज एक कनाल में 500 ग्राम,शलगम 375 ग्राम,मूली का बीज 500 ग्राम धनिया का बीज एक किलो प्रति एक कनाल के हिसाब से डाला जाता है

Posted by Maninder Sidhu
Punjab
22-11-2019 06:22 AM
maninder ji kripa karke swal vistar nal pucho ta jo tuhanu is bare poori jankari diti ja sake.dhanwad
Posted by sukhvinder singh
Punjab
22-11-2019 04:39 AM
jekar ehh heat de lashan dekha rehi hai tan iss nu tika bhrwaa deo ate iss nu Pregstay gold powder 30gm rojana 20din tak deo..
Posted by Balvir Singh
Punjab
22-11-2019 02:57 AM
ਉੱਤਰ ਵਿੱਚ ਇਹ ਵਰਖਾ ਅਤੇ ਬਸੰਤ ਦੇ ਮੌਸਮ ਵਿੱਚ ਉਗਾਈ ਜਾਂਦੀ ਹੈ ਵਰਖਾ ਵਾਲੇ ਮੌਸਮ ਵਿੱਚ, ਇਸਦੀ ਬਿਜਾਈ ਜੂਨ-ਜੁਲਾਈ ਮਹੀਨੇ ਅਤੇ ਬਸੰਤ ਰੁੱਤ ਵਿੱਚ ਫਰਵਰੀ-ਮਾਰਚ ਦੇ ਮਹੀਨੇ ਕੀਤੀ ਜਾਂਦੀ ਹੈ

Posted by Guddu Yadav
Uttar Pradesh
22-11-2019 02:20 AM
guddu ji kripya aap swal vistar se pooche taki aapko iske bare men poori jankari di ja sake.dhanywad
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