Posted by धर्म वीर सिंह
Uttar Pradesh
23-11-2019 03:21 PM
धर्मवीर जी कृपया आप बताये के आपने इसमें कोई स्प्रे की है ताकि आपको इसके बारे में पूरी जानकारी दी जा सके धन्यवाद
Posted by Sandeep Chauhan
Punjab
23-11-2019 03:19 PM
sandeep ji tuc isnu 10-15 cm tak virli karo tahi isdi sahi growth hoyegi.dhanwad

Posted by arun
Haryana
23-11-2019 03:13 PM
बिजाई के लिए मध्य जनवरी से मार्च और अक्तूबर से नवंबर का महीना (संरक्षण में) उपयुक्त होता है प्रत्येक जगह में दो बीज बोयें और 45 सैं.मी. फासले का प्रयोग करें बीज को 2.5-3.5 सें.मी. की गहराई पर बोना चाहिए गड्ढा खोदकर विधि का प्रयोग किया जाता है
Posted by Anil Kumar
Rajasthan
23-11-2019 03:12 PM
anil ji kripya btaye ke aapne konsi khaad ise daali hai taki aapko iske bare men poori jankari di ja sake.dhanywad

Posted by kiran devi
Bihar
23-11-2019 02:57 PM
bhai sahib rajwa hara chaara te 2-3 kg feed pao har 3 mahine baad pet ke kirhe nikalne ki dwaee deo
Posted by akshay Kanungo
Madhya Pradesh
23-11-2019 02:56 PM
अक्षय जी आप अमरुद की किस्मे जैसे Lucknow Safeda,Red Fleshed,Mirzapuri Seedless की बिजाई कर सकते है फरवरी मार्च या अगस्त सितंबर का महीना अमरूद के पौधे लगाने के लिए सही माना जाता है

Posted by gurvinder singh
Punjab
23-11-2019 02:41 PM
Motia di kheti kite v ho sakdi hai ji kyuki es vich paani wale tank vich v kar sakde ho ji . baki punjab vich es puri jankari ate Training lai tusi Manish Vasudev 9417652857 nal samparak kar sakde ho.
Posted by Talwinder singh
Punjab
23-11-2019 02:31 PM
Talwinder ji jehde kisana ne jhone di bijai kiti hai ohna nu hi isda labh milega.

Posted by Manish
Uttarakhand
23-11-2019 02:21 PM
मनीष जी आप मेंथा की किस्मे जैसे MAS-1,Hybrid-77,Shivalik,EC-41911 की बिजाई कर सकते है इसकी बिजाई के लिए दिसंबर-जनवरी का समय अनुकूल होता है

Posted by kuldeep singh
Punjab
23-11-2019 02:09 PM
ਰੇਤਲੀਆਂ ਜ਼ਮੀਨਾਂ ਵਿੱਚ ਜਿੱਥੇ ਪਿਛਲੇ 5-6 ਸਾਲਾਂ ਤੋਂ ਲਗਾਤਾਰ ਝੋਨਾ ਲਾਇਆ ਜਾ ਰਿਹਾ ਹੈ, ਉੱਥੇ ਹਾੜ੍ਹੀ ਦੀਆਂ ਫ਼ਸਲਾਂ ਵਿੱਚ ਮੈਂਗਨੀਜ਼ ਤੱਤ ਦੀ ਘਾਟ ਆ ਸਕਦੀ ਹੈ ਅਤੇ ਕਣਕ ਪੀਲੀ ਪੈਣ ਲੱਗ ਜਾਂਦੀ ਹੈ ਮਿੱਟੀ ਪਰਖ ਆਧਾਰ ’ਤੇ ਜੇ ਜ਼ਮੀਨ ਵਿਚ ਉਪਲੱਬਧ ਮੈਗਨੀਜ਼ ਤੱਤ 3.5 ਕਿਲੋ ਪ੍ਰਤੀ ਏਕੜ ਤੋਂ ਘੱਟ ਹੋਵੇ ਤਾਂ ਅਜਿਹੀਆਂ ਜ਼ਮੀਨਾਂ ਵਿੱਚ ਬੀਜੀ ਕਣਕ, ਜੌਂਅ, ਜਵੀਂ, ਬਰਸੀਮ ਆਦਿ ਫਸਲਾਂ ਵਿੱਚ ਮੈਗ.... (Read More)
ਰੇਤਲੀਆਂ ਜ਼ਮੀਨਾਂ ਵਿੱਚ ਜਿੱਥੇ ਪਿਛਲੇ 5-6 ਸਾਲਾਂ ਤੋਂ ਲਗਾਤਾਰ ਝੋਨਾ ਲਾਇਆ ਜਾ ਰਿਹਾ ਹੈ, ਉੱਥੇ ਹਾੜ੍ਹੀ ਦੀਆਂ ਫ਼ਸਲਾਂ ਵਿੱਚ ਮੈਂਗਨੀਜ਼ ਤੱਤ ਦੀ ਘਾਟ ਆ ਸਕਦੀ ਹੈ ਅਤੇ ਕਣਕ ਪੀਲੀ ਪੈਣ ਲੱਗ ਜਾਂਦੀ ਹੈ ਮਿੱਟੀ ਪਰਖ ਆਧਾਰ ’ਤੇ ਜੇ ਜ਼ਮੀਨ ਵਿਚ ਉਪਲੱਬਧ ਮੈਗਨੀਜ਼ ਤੱਤ 3.5 ਕਿਲੋ ਪ੍ਰਤੀ ਏਕੜ ਤੋਂ ਘੱਟ ਹੋਵੇ ਤਾਂ ਅਜਿਹੀਆਂ ਜ਼ਮੀਨਾਂ ਵਿੱਚ ਬੀਜੀ ਕਣਕ, ਜੌਂਅ, ਜਵੀਂ, ਬਰਸੀਮ ਆਦਿ ਫਸਲਾਂ ਵਿੱਚ ਮੈਗਨੀਜ਼ ਦੀ ਘਾਟ ਆਵੇਗੀ ਇਸ ਘਾਟ ਨੂੰ ਪੂਰਾ ਕਰਨ ਲਈ 0.5% ਮੈਗਨੀਜ਼ ਸਲਫੇਟ (1 ਕਿਲੋ ਮੈਗਨੀਜ਼ ਸਲਫੇਟ 200 ਕਿਲੋ ਪਾਣੀ ਪ੍ਰਤੀ ਏਕੜ) ਦੇ ਘੋਲ ਦੀ ਸਪਰੇਅ ਕਰਨ ਦੀ ਸਿਫਾਰਸ਼ ਕੀਤੀ ਜਾਂਦੀ ਹੈ ਜਿਹੜੇ ਖੇਤਾਂ ਵਿੱਚ ਇਹ ਘਾਟ ਆਉਂਦੀ ਹੈ, ਉੱਥੇ ਕਣਕ ਨੂੰ ਪਹਿਲਾ ਪਾਣੀ ਲਾਉਣ ਤੋਂ 2-3 ਦਿਨ ਪਹਿਲਾਂ ਸਪਰੇਅ ਕਰੋ ਅਤੇ ਬਾਅਦ ਵਿਚ ਪਾਣੀ ਲਾਓ ਇਸ ਤੋਂ ਬਾਅਦ ਹਫ਼ਤੇ ਦੀ ਵਿੱਥ ’ਤੇ 3 ਸਪਰੇਅ ਹੋਰ ਕਰੋ ਬਰਸੀਮ ਵਿਚ ਇਸ ਤੱਤ ਦੀ ਘਾਟ ਉਦੋਂ ਆਉਂਦੀ ਹੈ, ਜਦੋਂ ਬਰਸੀਮ ਵੱਢਣਯੋਗ ਹੋ ਜਾਂਦਾ ਹੈ ਅਜਿਹੀ ਫ਼ਸਲ ਨੂੰ ਕੱਟਣ ਉਪਰੰਤ ਤਕਰੀਬਨ 2 ਹਫ਼ਤੇ ਦੇ ਨਵੇਂ ਫੁਟਾਰੇ ’ਤੇ 0.5 ਫ਼ੀਸਦੀ ਮੈਗਨੀਜ਼ ਸਲਫੇਟ ਦਾ ਸਪਰੇਅ ਕਰੋ

Posted by davinder singh
Punjab
23-11-2019 02:09 PM
ਸ੍ਰੀ ਮਾਨ ਗੁੱਲੀ ਡੰਡਾ ÷ਆਮ ਤੌਰ ਤੇ ਕਣਕ ਦੇ ਵਿੱਚ ਗੁੱਲੀ ਡੰਡਾ 35-40 ਦਿਨਾਂ ਵਿੱਚ ਹੀ ਬਾਹਰ ਨਿਕਲਦਾ ਹੈ ਜਦੋਂ ਤੁਸੀਂ ਪਹਿਲਾਂ ਪਾਣੀ ਲਗਾ ਦਿੰਦੇ ਹੋ ਤਾਂ ਇਹ ਗੁੱਲੀ ਡੰਡਾ ਕਣਕ ਦੇ ਨਾਲ ਵਧਣਾ ਸ਼ੁਰੂ ਕਰ ਦਿੰਦਾ ਹੈ ਇਸ ਸਮੇਂ ਕਣਕ 40 ਦਿਨਾਂ ਦੇ ਆਸ-ਪਾਸ ਹੋ ਜਾਂਦੀ ਹੈ ਇਸ ਸਮੇਂ ਤੁਸੀਂ TOPIK@160GM ਜਾਂ AXIAL@400ML ਜਾਂ PUMA POWER@400ML ਜਾਂ LEADER@13GM ਜਾਂ SAFAL@13GM ਜਾਂ UPL ਦੀ SHAGUN 21-11@200gm ਨੂੰ 150 ਲੀਟਰ ਪਾਣੀ ਵਿੱਚ ਮਿਲਾ ਕੇ .... (Read More)
ਸ੍ਰੀ ਮਾਨ ਗੁੱਲੀ ਡੰਡਾ ÷ਆਮ ਤੌਰ ਤੇ ਕਣਕ ਦੇ ਵਿੱਚ ਗੁੱਲੀ ਡੰਡਾ 35-40 ਦਿਨਾਂ ਵਿੱਚ ਹੀ ਬਾਹਰ ਨਿਕਲਦਾ ਹੈ ਜਦੋਂ ਤੁਸੀਂ ਪਹਿਲਾਂ ਪਾਣੀ ਲਗਾ ਦਿੰਦੇ ਹੋ ਤਾਂ ਇਹ ਗੁੱਲੀ ਡੰਡਾ ਕਣਕ ਦੇ ਨਾਲ ਵਧਣਾ ਸ਼ੁਰੂ ਕਰ ਦਿੰਦਾ ਹੈ ਇਸ ਸਮੇਂ ਕਣਕ 40 ਦਿਨਾਂ ਦੇ ਆਸ-ਪਾਸ ਹੋ ਜਾਂਦੀ ਹੈ ਇਸ ਸਮੇਂ ਤੁਸੀਂ TOPIK@160GM ਜਾਂ AXIAL@400ML ਜਾਂ PUMA POWER@400ML ਜਾਂ LEADER@13GM ਜਾਂ SAFAL@13GM ਜਾਂ UPL ਦੀ SHAGUN 21-11@200gm ਨੂੰ 150 ਲੀਟਰ ਪਾਣੀ ਵਿੱਚ ਮਿਲਾ ਕੇ ਪ੍ਰਤੀ ਏਕੜ ਤੇ ਸਪਰੇਅ ਕਰ ਸਕਦੇ ਹੋ ਇਹਨਾਂ ਦੇ ਵਿੱਚੋਂ ਕੋਈ ਇੱਕ ਸਪਰੇਅ ਵਰਤ ਸਕਦੋ ਹੋ Topik ਦੀ ਥਾਂ ਇਹ ਸਪਰੇਆਂ ਵਰਤ ਸਕਦੇ ਹੋ ਜੇਕਰ ਬਾਥੂ ਹੈ ਤਾਂ ਉਸ ਦੇ ਲਈ algrip@10gm ਜਾਂ total@16gm ਨੂੰ 150 ਲੀਟਰ ਪਾਣੀ ਵਿੱਚ ਮਿਲਾ ਕੇ ਪ੍ਰਤੀ ਏਕੜ ਤੇ ਸਪਰੇਅ ਕਰ ਸਕਦੇ ਹੋ

Posted by dinesh kumar
Jharkhand
23-11-2019 02:01 PM
Dinesh kumar ji ganna katne ki machine lene ke liye aap TIRTH AGRO TECHNOLOGY PVT. LTD. Phone: +91 (2827) 234567 se samparak kar sakte hai, Thank you.

Posted by dinesh kumar
Jharkhand
23-11-2019 01:59 PM
dinesh ji kripya aap iski photo bheje taki aapko iske bare men poori jankari di ja sake.dhanywad

Posted by AMARJIT SINGH
Punjab
23-11-2019 01:56 PM
मक्की की फसल लगाने के लिए उपजाऊ, अच्छे जल निकास वाली, मैरा और लाल मिट्टी जिसमें नाइट्रोजन की उचित मात्रा हो, जरूरी है मक्की रेतली से लेकर भारी हर तरह की ज़मीनों में उगाई जा सकती है समतल ज़मीने मक्की के लिए बहुत अनुकूल है पर कईं पहाड़ी इलाकों में भी यह फसल उगाई जाती है अधिक पैदावार लेने के लिए मिट्टी में जैविक तत्.... (Read More)
मक्की की फसल लगाने के लिए उपजाऊ, अच्छे जल निकास वाली, मैरा और लाल मिट्टी जिसमें नाइट्रोजन की उचित मात्रा हो, जरूरी है मक्की रेतली से लेकर भारी हर तरह की ज़मीनों में उगाई जा सकती है समतल ज़मीने मक्की के लिए बहुत अनुकूल है पर कईं पहाड़ी इलाकों में भी यह फसल उगाई जाती है अधिक पैदावार लेने के लिए मिट्टी में जैविक तत्वों की अधिक मात्रा, पी एच 5.5-7.5 और अधिक पानी रोककर रखने की क्षमता होनी चाहिए बहुत ज्यादा भारी ज़मीनें इस फसल के लिए अच्छी नहीं मानी जाती आप मक्का की किस्मे जैसे के Ganga II, Deccan - 103, Deccan - 105, Trisholta, High Starch, Mangiri की बिजाई करें, फसल के लिए प्रयोग किया जाने वाला खेत नदीनों और पिछली फसल से मुक्त होना चाहिए मिट्टी को नर्म करने के लिए 6 से 7 बार जोताई करें खेत में 4-6 टन प्रति एकड़ रूड़ी की खाद और 10 पैकेट एसपरजिलियम के डालें खेत में 45-50 सैं.मी. के फासले पर खाल और मेंड़ बनाएं रबी के मौसम में खेती के लिए बिजाई 15 अक्तूबर से 10 नवंबर तक पूरी कर लें मेंड़ों पर बिजाई करना ज्यादा लाभदायक रहता है क्योंकि इससे फसल को जल्दी अंकुरित होने में मदद मिलती है और फसल ठंड से भी बची रहती है रबी के मौसम में खेती के लिए 60x18 सैं.मी. फासले का प्रयोग करें बीजों को 4-5 सैं.मी. की गहराई पर बोयें बिजाई हाथों से गड्ढा खोदकर या आधुनिक तरीके से ट्रैक्टर और बिजाई वाली मशीन की मदद से मेंड़ बनाकर की जा सकती है सर्दियों की मक्की के लिए 8-9 किलो बीज प्रति एकड़ में प्रयोग करें फसल को मिट्टी की बीमारियों और कीड़ों से बचाने के लिए बीज का उपचार करें सफेद जंग से बीजों को बचाने के लिए कार्बेनडाज़िम या थीरम 2 ग्राम प्रति किलो बीज के साथ उपचार करें रासायनिक उपचार के बाद बीज को एज़ोसपीरीलम 600 ग्राम + धान के चूरे के साथ उपचार करें उपचार के बाद बीज को 15-20 मिनटों के लिए छांव में सुखाएं एज़ोसपीरिलम मिट्टी में नाइट्रोजन को बांधकर रखने में मदद करता है अच्छी उपज प्राप्त करने के लिए नाइट्रोजन 50 किलो (यूरिया 110 किलो), फासफोरस 24 किलो (एस एस पी 150 किलो) और पोटाश 18 किलो (म्यूरेट ऑफ पोटाश 30 किलो) प्रति एकड़ में डालें खरीफ ऋतु की मक्की में नदीन बड़ी समस्या होते हैं, जो कि खुराकी तत्व लेने में फसल से मुकाबला करते हैं और 35 प्रतिशत तक पैदावार कम कर देते हैं इसलिए अधिक पैदावार लेने के लिए नदीनों का हल करना जरूरी है मक्की की कम से कम दो गोडाई करें पहली गोडाई बिजाई से 20-25 दिन बाद और दूसरी गोडाई 40-45 दिन बाद , पर ज्यादा होने की हालत में एटराज़िन 500 ग्राम प्रति 200 लीटर पानी से स्प्रे करें गोडाई करने के बाद मिट्टी के ऊपर खाद की पतली परत बिछा दें और जड़ों से मिट्टी लगाएं अंकुरन के तीसरे या चौथे सप्ताह बाद पानी लगाएं बाकी की सिंचाइयां 4-5 सप्ताह के फासले पर मध्य मार्च तक करें इसके इलावा और 1 या 2 सिंचाइयां वर्षा और मौसम की स्थिति के आधार पर करें जब पौधे घुटनों के कद के हो जायें तो फूल निकलने के समय और दाने बनने के समय सिंचाई महत्तवपूर्ण होती है यदि इस समय पानी की कमी हो तो पैदावार बहुत कम हो सकती है यदि पानी की कमी हो तो एक मेंड़ छोड़कर पानी दें इस से पानी भी बचता है
इसका खर्चा एक एकड़ में 15200 रुपये के हिसाब से होता है धन्यवाद

Posted by रजत चौधरी
Uttar Pradesh
23-11-2019 01:54 PM
मालाबार नीम के पेड़ की खेती सभी प्रकार की मिट्टी में की जा सकती है और पानी की कम आपूर्ति की आवश्यकता होती है मालाबार नीम रोपण से 2 साल के भीतर 40 फुट तक उचाई लेलेता है, मालाबार नीम एक नकदी नीम परिवार से संबंधित है इस पेड़ अपनी तेजी से विकास के लिए जाना जाता है हाल के दिनों में कर्नाटक के आसपास के किसान, तमिलनाडु, आ.... (Read More)
मालाबार नीम के पेड़ की खेती सभी प्रकार की मिट्टी में की जा सकती है और पानी की कम आपूर्ति की आवश्यकता होती है मालाबार नीम रोपण से 2 साल के भीतर 40 फुट तक उचाई लेलेता है, मालाबार नीम एक नकदी नीम परिवार से संबंधित है इस पेड़ अपनी तेजी से विकास के लिए जाना जाता है हाल के दिनों में कर्नाटक के आसपास के किसान, तमिलनाडु, आंध्र प्रदेश और केरल में इस वृक्ष की बढ़ी मात्रा में फार्मिंग कर रहे है और इसका प्रयोग सस्ती वुड (plywood इंडस्ट्री) के रूप में कर रहे है यदि पेड़ो को सिंचित किया जाये तो 5 वर्ष के अंत में काटा जा सकता है और प्लाई के लिए प्रयोग किया जासकता है मार्च - अप्रैल के दौरान बीज बोना सबसे अच्छा हैइसके पौधे लेने के लिए आप Radhe Sham 7727065370 Avishkar Agrotech से संपर्क कर सकते है इनसे ही आपको इसके बारे में पूरी जानकारी मिल जाएगी धन्यवाद

Posted by kunal majhi
Odisha
23-11-2019 01:50 PM
मोती की खेती एक बहुत ही अच्छा व्यवसाय है इस व्यवसाय को शुरू करने के लिए सबसे जरुरी है इसकी ट्रेनिंग, क्योकि इसमें बहुत सी ऐसी बारीकियें होती है जो हमें प्रेक्टिकल ट्रेनिंग में ही सीखने को मिलती है अगर आप इसकी ट्रेनिंग लेना चाहते है तो आप ग्लिटराटी पर्ल फार्मिंग ट्रेनिंग केंद्र प्रशिक्षण कार्य कर्म आयोजि.... (Read More)
मोती की खेती एक बहुत ही अच्छा व्यवसाय है इस व्यवसाय को शुरू करने के लिए सबसे जरुरी है इसकी ट्रेनिंग, क्योकि इसमें बहुत सी ऐसी बारीकियें होती है जो हमें प्रेक्टिकल ट्रेनिंग में ही सीखने को मिलती है अगर आप इसकी ट्रेनिंग लेना चाहते है तो आप ग्लिटराटी पर्ल फार्मिंग ट्रेनिंग केंद्र प्रशिक्षण कार्य कर्म आयोजित किया जा रहा है प्रशिक्षण कार्य कर्म में भाग लेने के लिए नीचे दिए गए नम्बर पर आज ही संपर्क करें और Rs 250/ से अपना रजिस्ट्रेशन करवाए अचल सिंह (फाउंडर )- 9711858258. धन्यवाद

Posted by devendra bihone
Madhya Pradesh
23-11-2019 01:48 PM
devendra ji aap kisme jaise Palam Uphaar,Pusa Snowball 1,Pant Shubhra ki bijai kar sakte hai.dhanywad
Posted by vakil singh
Punjab
23-11-2019 01:47 PM
vakil ji kirpa karke daso ke kehdi fasl vich nadeen han kyuki har fasl vich nadeena di roktham de layi alag dwai di varto kiti jandi hai.dhanwad
Posted by jitendra kr.bharti
Jharkhand
23-11-2019 01:46 PM
फसल को भी दे सकते है और पेस्टीसाइड की मात्रा कम कर दे

Posted by manoj prajapati
Uttar Pradesh
23-11-2019 01:43 PM
manoj prajapati ji aapke konsi murgi ke bird dhalne hai ji layer ya fir briolar farming karna chahte hai ji.
Posted by shree ram bhil
Rajasthan
23-11-2019 01:40 PM
सुंडीयों की रोकथाम के लिए मिर्च 5 किलो, लसहुन 5 किलो, अक्क के पत्ते 5 किलो, सुखचैन के पत्ते 5 किलो धतूरे 5 किलो, अरिंद 5 किलो को 10 लीटर गाय के मूत्र में 4 दिन के लिए भिगो कर रखें 4 दिन के बाद इन पत्तो को गाय मूत्र में पीसे और 1 दिन के लिए फिर छांव में रख दें इसे ढ़ककर छांव में रखना जरूरी होता है इस घोल को किसी कपड़े के साथ छान.... (Read More)
सुंडीयों की रोकथाम के लिए मिर्च 5 किलो, लसहुन 5 किलो, अक्क के पत्ते 5 किलो, सुखचैन के पत्ते 5 किलो धतूरे 5 किलो, अरिंद 5 किलो को 10 लीटर गाय के मूत्र में 4 दिन के लिए भिगो कर रखें 4 दिन के बाद इन पत्तो को गाय मूत्र में पीसे और 1 दिन के लिए फिर छांव में रख दें इसे ढ़ककर छांव में रखना जरूरी होता है इस घोल को किसी कपड़े के साथ छान लें और फिर 100 लीटर पानी के हिसाब से एक एकड में स्प्रे करें इससे सुंडी कंट्रोल हो जायेगी
Posted by Harmander jeet singh . fateh singh
Punjab
23-11-2019 01:31 PM
Harmander jeet singh ji baby plant len lai tusi Aushadhiya kheti vikas sansthan 6268536795 nal samparak kar sakde ho, Thankyou.

Posted by GurpreetSingh
Punjab
23-11-2019 01:18 PM
tuci uss nu turant nazdiki doctor ton janch krwao kyuki usdi janch krke he sahi ilagg ho skda hai..

Posted by Gopal jat
Rajasthan
23-11-2019 01:16 PM
Shrimaan ji, yeh macchar ka hamla hua hai, iski roktham ke liye ap imidacloprid @ 1.5 ml prati liter pani ke hisaab se spray karein, dhanywad
Posted by jagbir singh
Haryana
23-11-2019 01:04 PM
December mhine mein aap full-gobhi, mooli, tmaatr, ki kheti kr skte hain.
Posted by Satish kumar
Haryana
23-11-2019 01:02 PM
satish kumar ji aap sbjiyan jaise chkunder, shlgam, fulgobhi, tmatr, kaali sarson ke beej, muli, palk, ptta gobhi, shimla mirch, lehsun, pyaaj, matar, dhniya ki bijai kar skte hain. dhnywad
Posted by Anil Kumar Dubey
Uttar Pradesh
23-11-2019 01:01 PM
फसल के 1-3 वर्ष की हो जाने पर, अच्छी तरह से गला हुए गाय का गोबर 5-20 किलो और युरिया 100-300 ग्राम प्रति वृक्ष में डालें 4-6 वर्ष की फसल में, अच्छी तरह से गला हुआ गाय का गोबर 25-50 किलो और युरिया 100-300 ग्राम प्रति वृक्ष में डालें 7-9 वर्ष की फसल में, यूरिया 600-800 ग्राम और गाय का गला हुआ गोबर 60-90 किलो प्रति वृक्ष में डालें जब फसल 10 वर्ष की य.... (Read More)
फसल के 1-3 वर्ष की हो जाने पर, अच्छी तरह से गला हुए गाय का गोबर 5-20 किलो और युरिया 100-300 ग्राम प्रति वृक्ष में डालें 4-6 वर्ष की फसल में, अच्छी तरह से गला हुआ गाय का गोबर 25-50 किलो और युरिया 100-300 ग्राम प्रति वृक्ष में डालें 7-9 वर्ष की फसल में, यूरिया 600-800 ग्राम और गाय का गला हुआ गोबर 60-90 किलो प्रति वृक्ष में डालें जब फसल 10 वर्ष की या इससे ज्यादा की हो जाए तो गाय का गला हुआ गोबर 100 किलो या यूरिया 800-1600 ग्राम प्रति वृक्ष में डालें नींबू की फसल को नियमित अंतराल पर सिंचाई की आवश्यकता होती है सर्दियों और गर्मियों में जीवन बचाव सिंचाई जरूर देनी चाहिए फूल आने के समय, फल लगने के समय और पौधे के अच्छे विकास के लिए सिंचाई आवश्यक है ज्यादा सिंचाई से जड़ गलन और तना गलन की बीमारियों का खतरा होता है उच्च आवृत्ति की सिंचाई फायदेमंद होती है नमकीन पानी फसल के लिए हानिकारक होता है धन्यवाद

Posted by sanjeev
Madhya Pradesh
23-11-2019 12:59 PM
sanjeev ji aap halki sinchai karke genhu ke beej ka chita de sakte hai.dhanywad

Posted by gourav
Odisha
23-11-2019 12:58 PM
gourav ji aap apna question detail me puche ji . fir aapko sahi answer diya ja sakta hai ji.
Posted by lilaram Patel
Rajasthan
23-11-2019 12:51 PM
patel ji aap iske uper quinalphos@4ml ko prati litre pani ke hisab se spray karen.dhanywad

Posted by ravneet maan
Punjab
23-11-2019 12:43 PM
tuci iss nu doctor ton check krwao iss ni kisse chij nal reaction krke v ho skda hai, isdi janch krke sahi ptaa lgg skda hai.

Posted by Aman
Punjab
23-11-2019 12:35 PM
Aman ji tusi es bolus vashi nu de sakde ho ehda koe nuksan nai hai teresult v vadiya hai ji.
Posted by Dayanand kumar
Bihar
23-11-2019 12:17 PM
मोती की खेती एक बहुत ही अच्छा व्यवसाय है इस व्यवसाय को शुरू करने के लिए सबसे जरुरी है इसकी ट्रेनिंग, क्योकि इसमें बहुत सी ऐसी बारीकियें होती है जो हमें प्रेक्टिकल ट्रेनिंग में ही सीखने को मिलती है अगर आप इसकी ट्रेनिंग लेना चाहते है तो आप ग्लिटराटी पर्ल फार्मिंग ट्रेनिंग केंद्र प्रशिक्षण कार्य कर्म आयोजि.... (Read More)
मोती की खेती एक बहुत ही अच्छा व्यवसाय है इस व्यवसाय को शुरू करने के लिए सबसे जरुरी है इसकी ट्रेनिंग, क्योकि इसमें बहुत सी ऐसी बारीकियें होती है जो हमें प्रेक्टिकल ट्रेनिंग में ही सीखने को मिलती है अगर आप इसकी ट्रेनिंग लेना चाहते है तो आप ग्लिटराटी पर्ल फार्मिंग ट्रेनिंग केंद्र प्रशिक्षण कार्य कर्म आयोजित किया जा रहा है प्रशिक्षण कार्य कर्म में भाग लेने के लिए नीचे दिए गए नम्बर पर आज ही संपर्क करें और Rs 250/ से अपना रजिस्ट्रेशन करवाए अचल सिंह (फाउंडर )- 9711858258. धन्यवाद
Posted by amit pandey
Uttar Pradesh
23-11-2019 12:15 PM
अमित जी आपके सभी सवालों के जवाब दिए जा चुके है आप एप में अपने सभी सवालों के जवाब देख सकते है

Posted by Jitu Yadav
Rajasthan
23-11-2019 12:09 PM
Jitu Yadav ji, kripya ap kism ka pura nam bataye taki apko dekh kar iske bare mein puri jankari di ja sake, dhanywad
Posted by Rakesh kumar
Punjab
23-11-2019 11:49 AM
rakesh ji tuc isnu ikathe rla ke na beejo.ehna di alag alag bijai karo.dhanwad
Posted by Aman Verma
Uttar Pradesh
23-11-2019 11:37 AM
श्री मान WH 896: इस किस्म की सिंचित क्षेत्रों में समय पर बोने के लिए सिफारिश की गई है PBW 373: यह अधिक उपज वाली किस्म है इसकी सिंचित क्षेत्रों में पिछेती बिजाई के लिए सिफारिश की गई है यह किस्म विभिन्न बीमारियों के प्रतिरोधक है PBW 343: यह किस्म सिंचित और पिछेती बिजाई के क्षेत्रों के लिए उपयुक्त है यह किस्म 130-135 दिनों में कट.... (Read More)
श्री मान WH 896: इस किस्म की सिंचित क्षेत्रों में समय पर बोने के लिए सिफारिश की गई है PBW 373: यह अधिक उपज वाली किस्म है इसकी सिंचित क्षेत्रों में पिछेती बिजाई के लिए सिफारिश की गई है यह किस्म विभिन्न बीमारियों के प्रतिरोधक है PBW 343: यह किस्म सिंचित और पिछेती बिजाई के क्षेत्रों के लिए उपयुक्त है यह किस्म 130-135 दिनों में कटाई के लिए तैयार हो जाती है यह गर्दन तोड़, जल जमाव की स्थितियों के प्रतिरोधक किस्म है यह करनाल बंट के भी प्रतिरोधक और झुलस रोग को सहनेयोग्य किस्म है इसकी औसतन पैदावार 19 क्विंटल प्रति एकड़ होती है HD 2643: यह किस्म सिंचित और पिछेती बिजाई के क्षेत्रों के लिए उपयुक्त है इस किस्म से अच्छी गुणवत्ता वाली रोटी बनती है यह पत्ता और धारीदार कुंगी के प्रतिरोधक और करनाल बंट को सहनेयोग्य किस्म है UP 2425: यह सिंचित स्थितियों में पिछेती बिजाई के लिए उपयुक्त किस्म है PBW-443: यह किस्म सिंचित हालातों में समय पर बोने के लिए उपयुक्त किस्म है DBW-14: यह किस्म सिंचित हालातों में पिछेती बिजाई के लिए उपयुक्त है यह जल्दी पकने वाली किस्म है इसके दाने सख्त होते हैं NW-2036: यह सिंचित हालातों में पिछेती बिजाई के लिए उपयुक्त किस्म है यह जल्दी पकने वाली किस्म है दूसरे शब्दों में, यह किस्म 108 दिनों में कटाई के लिए तैयार हो जाती है इसके दाने छोटे, सुनहरी और अर्द्ध सख्त होते हैं MACS-6145: यह किस्म बारानी क्षेत्रों में समय पर बोने के लिए उपयुक्त है HD-2824: यह किस्म सिंचित क्षेत्रों में समय पर बिजाई के लिए उपयुक्त है PBW-502: यह किस्म पंजाब एग्रीकल्चर युनिवर्सिटी द्वारा विकसित की गई है यह किस्म सिंचित हालातों में समय पर बिजाई के लिए उपयुक्त है यह किस्म पत्ते और धारीदार कुंगी के प्रतिरोधक किस्म है PDW-291: यह किस्म सिंचित हालातों में पिछेती बिजाई के लिए उपयुक्त किस्म है यह किस्म कुंगी, करनाल बंट और कांगियारी के प्रतिरोधक किस्म है PBW-524: यह सिंचित हालातों में पिछेती बिजाई के लिए उपयुक्त किस्म है यह किस्म कुंगी, करनाल बंट और कांगियारी के प्रतिरोधक किस्म है HD-2864: यह सिंचित हालातों में समय पर बिजाई के लिए उपयुक्त किस्म है यह किस्म पत्ते और धारीदार कुंगी के प्रतिरोधी और ताप को सहनेयोग्य किस्म है HI-8627: यह किस्म बारानी क्षेत्रों में समय पर बिजाई के लिए उपयुक्त है यह धारीदार कुंगी और पैर गलन के प्रतिरोधक किस्म है Ujiar(K-9006): यह किस्म सिंचित हालातों में समय पर बोने के लिए उपयुक्त है इसके दाने अर्द्ध सख्त और सुनहरी होते हैं यह किस्म करनाल बंट के प्रतिरोधक किस्म है Gangotri(K-9162): यह जल्दी पकने वाली और सिंचित हालातों में पिछेती बिजाई के लिए उपयुक्त किस्म है Prasad (K-8434): यह किस्म सिंचित हालातों में समय पर और नमक वाली और क्षारीय मिट्टी में बोने के लिए उपयुक्त है यह जल्दी पकने वाली किस्म है यह 115 दिनों में कटाई के लिए तैयार हो जाती है इसके दाने अर्द्ध सख्त, सुनहरी होते हैं यह किस्म पत्ता झुलस रोग, करनाल बंट और झूठी कांगियारी को सहनेयोग्य किस्म है Halna (K-7903): यह सिंचित क्षेत्रों में पिछेती और बहुत देर से उगाने के लिए उपयुक्त किस्म है यह किस्म नमक वाली मिट्टी के साथ साथ क्षारीय मिट्टी में उगाने के लिए उपयुक्त है इसके दाने सुनहरी और अर्द्ध सख्त होते हैं यह किस्म सभी प्रकार की कुंगियों के प्रतिरोधक किस्म है यह पत्ता झुलस रोग और करनाल बंट को भी सहनेयोग्य किस्म है Naina (K-9533): यह सिंचित क्षेत्रों में पिछेती बिजाई के लिए उपयुक्त किस्म है इसके दाने सुनहरी रंग के और अर्द्ध सख्त होते हैं यह सभी प्रकार की कुंगियों के प्रतिरोधक किस्म है यह पत्ता झुलस रोग और करनाल बंट को सहनेयोग्य किस्म है UP 2338: यह पिछेती बिजाई और समय पर बोने के लिए उपयुक्त किस्म है इसके दाने मोटे और सख्त होते हैं इसकी औसतन पैदावार 23 क्विंटल प्रति एकड़ होती है दूसरे राज्यों की किस्में PDW314: यह सिंचित हालातों में समय पर बोने के लिए उपयुक्त किस्म है WHD943(Durum): यह सिंचित हालातों में समय पर बोने के लिए उपयुक्त किस्म है HI 1563(Pusa Prachi): यह सिंचित हालातों में पिछेती बिजाई के लिए उपयुक्त किस्म है MPO-1225: यह सिंचित हालातों में समय पर बोने के लिए उपयुक्त किस्म है

Posted by NOWO
Jharkhand
23-11-2019 11:34 AM
मोती की खेती एक बहुत ही अच्छा व्यवसाय है इस व्यवसाय को शुरू करने के लिए सबसे जरुरी है इसकी ट्रेनिंग, क्योकि इसमें बहुत सी ऐसी बारीकियें होती है जो हमें प्रेक्टिकल ट्रेनिंग में ही सीखने को मिलती है अगर आप इसकी ट्रेनिंग लेना चाहते है तो आप ग्लिटराटी पर्ल फार्मिंग ट्रेनिंग केंद्र प्रशिक्षण कार्य कर्म आयोजि.... (Read More)
मोती की खेती एक बहुत ही अच्छा व्यवसाय है इस व्यवसाय को शुरू करने के लिए सबसे जरुरी है इसकी ट्रेनिंग, क्योकि इसमें बहुत सी ऐसी बारीकियें होती है जो हमें प्रेक्टिकल ट्रेनिंग में ही सीखने को मिलती है अगर आप इसकी ट्रेनिंग लेना चाहते है तो आप ग्लिटराटी पर्ल फार्मिंग ट्रेनिंग केंद्र प्रशिक्षण कार्य कर्म आयोजित किया जा रहा है प्रशिक्षण कार्य कर्म में भाग लेने के लिए नीचे दिए गए नम्बर पर आज ही संपर्क करें और Rs 250/ से अपना रजिस्ट्रेशन करवाए अचल सिंह (फाउंडर )- 9711858258. धन्यवाद
Posted by aman brar
Punjab
23-11-2019 11:34 AM
ਗੰਡੋਇਆ ਦੀ ਖਾਦ ਲਈ ਤੁਸੀ ਅੰਗਰੇਜ਼ ਸਿੰਘ ਭੁੱਲਰ ਜੀ ਨਾਲ 9417613396 ਨੰਬਰ ਤੇ ਸੰਪਰਕ ਕਰ ਸਕਦੇ ਹੋ ਜੀ

Posted by Mahendra Yadav
Madhya Pradesh
23-11-2019 11:33 AM
आम के पौधे अगस्त से सितंबर और फरवरी मार्च के महीने में बोये जाते हैं पौधे हमेशा शाम को ठंडे समय में बोयें फसल को तेज हवा से बचाएं

Posted by Jasdeep Singh
Punjab
23-11-2019 11:28 AM
ਸੰਤੁਲਿਤ ਖੁਰਾਕ 100 ਕਿਲੋ ਬਣਾਉਣ ਲਈ ਲੋੜੀਂਦੀ ਸਮੱਗਰੀ ਚਾਹੀਦੀ ਹੈ ਜਿਵੇਂ 25 ਕਿਲੋ ਅਨਾਜ ( ਜਵਾਰ, ਬਾਜਰੀ (ਸਰਦੀਆਂ) , ਕਣਕ, ਜੌਂ ( ਗਰਮੀਆ) ਇਹਨਾਂ ਵਿੱਚੋ ਕੋਈ ਇੱਕ ) , ਦਾਲ ਚੂਰੀ 20 ਕਿਲੋ( ਮੂੰਗੀ ਚੂਰੀ, ਮਾਂਹ ਚੂਰੀ, ਮੋਠ ਚੂਰੀ ( ਕੇਵਲ ਸਰਦੀਆਂ ਲਈ) , ਮਸੁਰ ਚੂਰੀ ,ਅਰਹਰ, (ਇਨਾਂ ਵਿੱਚੋ ਇੱਕ ) , DOC 25 ਕਿਲੋ ( ਚੌਲਾਂ ਦਾ ਚੂਰਾ ) , ਫਾਈਬਰ ਛਿਲਕਾ 15 ਕਿਲੋ (ਕਣਕ, ਚੌਕਰ, ਚਨਾ ਛਿਲਕਾ, ਮਟਰ ਛਿਲਕਾ, ਇਨਾਂ ਵਿ.... (Read More)
ਸੰਤੁਲਿਤ ਖੁਰਾਕ 100 ਕਿਲੋ ਬਣਾਉਣ ਲਈ ਲੋੜੀਂਦੀ ਸਮੱਗਰੀ ਚਾਹੀਦੀ ਹੈ ਜਿਵੇਂ 25 ਕਿਲੋ ਅਨਾਜ ( ਜਵਾਰ, ਬਾਜਰੀ (ਸਰਦੀਆਂ) , ਕਣਕ, ਜੌਂ ( ਗਰਮੀਆ) ਇਹਨਾਂ ਵਿੱਚੋ ਕੋਈ ਇੱਕ ) , ਦਾਲ ਚੂਰੀ 20 ਕਿਲੋ( ਮੂੰਗੀ ਚੂਰੀ, ਮਾਂਹ ਚੂਰੀ, ਮੋਠ ਚੂਰੀ ( ਕੇਵਲ ਸਰਦੀਆਂ ਲਈ) , ਮਸੁਰ ਚੂਰੀ ,ਅਰਹਰ, (ਇਨਾਂ ਵਿੱਚੋ ਇੱਕ ) , DOC 25 ਕਿਲੋ ( ਚੌਲਾਂ ਦਾ ਚੂਰਾ ) , ਫਾਈਬਰ ਛਿਲਕਾ 15 ਕਿਲੋ (ਕਣਕ, ਚੌਕਰ, ਚਨਾ ਛਿਲਕਾ, ਮਟਰ ਛਿਲਕਾ, ਇਨਾਂ ਵਿੱਚੋ ਇੱਕ) , ਖਲ਼ 15 ਕਿਲੋ(ਸਰੋਂ, ਬਿਨੌਲਾ ਜਾਂ ਸੋਇਆ (ਇਹਨਾਂ ਵਿੱਚੋ ਕੋਈ ਇੱਕ) , ਮਿੱਠਾ ਸੋਡਾ 250 ਗ੍ਰਾਮ, 1 ਕਿਲੋ ਨਮਕ, ਗੁੜ 1 ਕਿਲੋ, 1 ਕਿੱਲੋ ਹਲਦੀ (ਸਰਦੀਆ ਵਿੱਚ ) ਇਹ ਨੂੰ ਰਲਾ ਲਵੋ ਇਹ ਫੀਡ ਪਸ਼ੂ ਲਈ ਬਹੁਤ ਲਾਹੇਵੰਦ ਹੁੰਦੀ ਹੈ
Posted by मुकेश कुमार
Uttar Pradesh
23-11-2019 11:26 AM
मुकेश जी आप किस चीज़ की सरकारी योजना के बारे में पूछ रहे है क्योंकि अलग अलग काम जैसे खेतीबाड़ी, पशुपालन, मशीनरी पर अलग अलग सरकारी योजना होती है कृपया आप विस्तार से अपना सवाल पूछें ताकि आपको सही जानकारी दी जा सके

Posted by Gurpreet
Punjab
23-11-2019 11:25 AM
ਗੁਰਪ੍ਰੀਤ ਜੀ ਤੁਸੀ ਇਸ ਸਬੰਧੀ ਆਪਣੇ ਜ਼ਿਲੇ ਦੇ ਪਸ਼ੂ ਪਾਲਣ ਦਫਤਰ ਵਿੱਚ ਮੁੱਖ ਅਧਿਕਾਰੀ ਨਾਲ ਸਲਾਹ ਕਰ ਸਕਦੇ ਹੋ ਉਹ ਤੁਹਾਨੂੰ ਇਸ ਸਬੰਧੀ ਜਾਣਕਾਰੀ ਪਤਾ ਕਰਕੇ ਦੇ ਸਕਦੇ ਹਨ

Posted by Jagjeet Singh Sidhu
Punjab
23-11-2019 11:17 AM
jagjeet ji kirpa karke isde label di photo bhejo ta jo isdi company bare jankari prapt karke kisam bare dasy aja sake kyuki eh kisam university valo sifarish nahi hai.dhanwad
Posted by Kalyan Singh
Uttar Pradesh
23-11-2019 11:14 AM
पश्चिमी यू पी में, सिंचित और सामान्य बिजाई स्थितियों में 1 नवंबर से 15 नवंबर तक बिजाई पूरी कर लें और पिछेती बिजाई की स्थितियों में 1 से 25 दिसंबर तक बिजाई पूरी कर लें
पूर्वी यू पी के लिए, सिंचित और सामान्य बिजाई का उचित समय 1 नवंबर से 15 नवंबर तक है, जबकि पिछेती बिजाई के लिए 1 से 20 दिसंबर का समय उचित है
ऊंचे पहाड़ी क्.... (Read More)
पश्चिमी यू पी में, सिंचित और सामान्य बिजाई स्थितियों में 1 नवंबर से 15 नवंबर तक बिजाई पूरी कर लें और पिछेती बिजाई की स्थितियों में 1 से 25 दिसंबर तक बिजाई पूरी कर लें
पूर्वी यू पी के लिए, सिंचित और सामान्य बिजाई का उचित समय 1 नवंबर से 15 नवंबर तक है, जबकि पिछेती बिजाई के लिए 1 से 20 दिसंबर का समय उचित है
ऊंचे पहाड़ी क्षेत्रों के लिए, सिंचित और सामान्य बिजाई का उचित समय अक्तूबर के दूसरे पखवाड़े से लेकर नवंबर का पहला पखवाड़ा है जबकि पिछेती बिजाई के लिए 1 दिसंबर से 20 दिसंबर का समय उचित है
निचले पहाड़ी क्षेत्रों के लिए, सिंचित और सामान्य बिजाई का उचित समय अक्तूबर के आखिरी सप्ताह से लेकर मध्य नवंबर तक का है जबकि पिछेती बिजाई के लिए नवंबर का दूसरा पखवाड़ा उचित समय है
Posted by Ramesh Mishra
Uttar Pradesh
23-11-2019 10:58 AM
ramesh ji foundation seed ek category hoti hai aur iska istemal aap ek bar hi kar sakte hai.dhanywad
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