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Posted by Rupesh Thakur
Uttar Pradesh
27-11-2019 11:09 AM
Punjab
11-27-2019 01:55 PM
ठाकुर जी यदि आपकी भैंस चारा दाना नहीं खा रही है तो सबसे पहले आप उसके बुखार की जांच करवायें ​यदि बुखार है तो आप नज़दीकी डॉक्टर से बुखार के हिसाब से जांच करवायें यदि बुखार नहीं है तो आप उसे पेट के कीड़ों के लिए गोली दें और सुबह शाम और गोली सुबह शाम दें इससे फर्क पड़ जाएगा यदि आप कोई ओर जानकारी लेना चाहते है तो आप .... (Read More)
ठाकुर जी यदि आपकी भैंस चारा दाना नहीं खा रही है तो सबसे पहले आप उसके बुखार की जांच करवायें ​यदि बुखार है तो आप नज़दीकी डॉक्टर से बुखार के हिसाब से जांच करवायें यदि बुखार नहीं है तो आप उसे पेट के कीड़ों के लिए गोली दें और सुबह शाम और गोली सुबह शाम दें इससे फर्क पड़ जाएगा यदि आप कोई ओर जानकारी लेना चाहते है तो आप दोबारा अपना सवाल पूछ सकते है
Posted by ਨਵਪਰੀਤ ਸਿੰਘ
Punjab
27-11-2019 11:08 AM
Punjab
11-27-2019 03:28 PM
ਨਵਪਰੀਤ ਜੀ ਕਿਰਪਾ ਕਰਕੇ ਦੱਸੋ ਕੇ ਤੁਸੀ ਜਿਹੜੀ ਫੋਟੋ ਭੇਜੀ ਹੈ ਇਸਦੇ ਵਿਚ ਤੁਸੀ ਕਰਮ ਦੱਸੇ ਹਨ ਜਾ ਫੁੱਟ ਤਾ ਜੋ ਉਸਦੇ ਹਿਸਾਬ ਨਾਲ ਤੁਹਾਨੂੰ ਜਾਣਕਾਰੀ ਦਿਤੀ ਜਾ ਸਕੇ ਧੰਨਵਾਦ
Posted by Bajrang singh
Rajasthan
27-11-2019 11:07 AM
Punjab
11-27-2019 01:57 PM
Bajrang ji yadi apki bhains bacha girra deti hai too aap apne nazdiki pollyclinic mai uske blood ki janch krwayen aur brusilosis bimari ka pta lgwayen, jisse uska bacha girane ka sahi karan ptaa lgg skee.
Posted by deepak choudhary
Uttar Pradesh
27-11-2019 11:01 AM
Punjab
11-27-2019 01:59 PM
दीपक जी कृपया आप अपना सवाल विस्तार से पूछें आप इसके बारे में क्या जानकारी लेना चाहते है ताकि आपको इसके बारे में पूरी जानकारी दी जा सके
Posted by ranjee singh
Uttar Pradesh
27-11-2019 10:39 AM
Punjab
11-27-2019 02:07 PM
सबसे पहले आपके लिए यह जानना जरूरी है कि मुर्गी पालन दो तरह का होता है कि आप अंडों का व्यवसाय करना चाहते हैं या मीट का यदि आप अंडों का धंधा करना चाहते हैं तो आपको लेयर मुर्गियां पालनी पड़ेंगी और यदि आप मीट का धंधा करना चाहते हैं तो आपको ब्रॉयलर मुर्गियां पालनी पड़ेंगी यदि आप ब्रायलर मुर्गी पालन करना चाहते हैं त.... (Read More)
सबसे पहले आपके लिए यह जानना जरूरी है कि मुर्गी पालन दो तरह का होता है कि आप अंडों का व्यवसाय करना चाहते हैं या मीट का यदि आप अंडों का धंधा करना चाहते हैं तो आपको लेयर मुर्गियां पालनी पड़ेंगी और यदि आप मीट का धंधा करना चाहते हैं तो आपको ब्रॉयलर मुर्गियां पालनी पड़ेंगी यदि आप ब्रायलर मुर्गी पालन करना चाहते हैं तो कम से कम 10 हजार मुर्गियों का धंधा शुरू करना चाहते हैं तो आपको 4 से 5 लाख का इतज़ाम करना पड़ेगा, ये आप अपने बजट के हिसाब से कम पंक्षियों से भी शुरू कर सकते हैं बाकि आप इस काम को ट्रेनिंग लेकर शुरू करें जिसमें आपको इस काम के बारे में पूरी जानकारी दी जाएगी ट्रेनिंग लेने के लिए आप अपने नज़दीकी कृषि विज्ञान केंद्र से संपर्क करें आप वहां जाकर अपना ट्रेनिंग का फार्म भर आएं जब भी ट्रेनिंग होगी तो वो आपको फोन करके उसके बारे में बता देंगे..
Posted by Harsh Deep Singh
Punjab
27-11-2019 10:34 AM
Punjab
11-27-2019 02:09 PM
Harsh ji tuci uss nu hun Albomar liquid 30ml nu 10-10ml krke din vich 3 varr deo fir 1-1 month de farak nal salt change krke deworming kro ji baki uss nu 2 month tak maa da dudh deo fir hara chara, feed deni suru kr skde ho.
Posted by Rajnesh
Haryana
27-11-2019 10:27 AM
Punjab
11-27-2019 02:12 PM
Hanji original semen hai yeh karnal walo ka sultan murrah nasal ka semen hai..
Posted by साक्षी पटेल
Uttar Pradesh
27-11-2019 10:21 AM
Maharashtra
11-30-2019 03:48 PM
रूस में आम तौर पर गेहूं, ज्वार, सूरजमुखी, ज्वी और मखन घास बीजी जाती है
Posted by Rahul Dedha
Uttar Pradesh
27-11-2019 10:16 AM
Punjab
11-27-2019 02:14 PM
उसे आप Lactomood होमियोपेथिक दवा की 10—10 बूंदें दिन में तीन बार दें और Leptaden गोलियां जो Alarsin कंपनी का प्रोडक्ट है इसकी 10—10 गोलियां सुबह शाम दें और Milkout पाउडर 2—2 चम्मच सुबह शाम दें इससे फर्क पड़ जाएगा.
Posted by Naresh Nain
Punjab
27-11-2019 10:14 AM
Punjab
11-27-2019 02:17 PM
Naresh ji godrej feed lenn lai tuci Amit Telang 9918253555 ate cargill feed lenn lai Gourav 9501900210 ji nal sampark kr skde ho..
Posted by Sahib Cheema
Haryana
27-11-2019 10:13 AM
Punjab
11-27-2019 08:56 PM
उसे आप पहले दिन Zoctum 4.5gm injection , Megludyne injection 20ml, CRB injection 20ml, Vitum-H injection 5ml, Isoflud injection 5ml लगवायें और फिर अगले ​दो दिन Intasef tezo 3375 injection , Megludyne injection 20ml, CRB injection 20ml, Vitum-H injection 5ml, लगवायें इसमें से Isoflud injection पहले और तीसरे दिन लगाना है इससे फर्क पड़ जाएगा और इसे Mammidium पाउडर 50 ग्राम रोजाना दें
Posted by Amarjeet sidhu
Punjab
27-11-2019 10:11 AM
Punjab
11-27-2019 02:20 PM
Amarjeet ji tuci iss pett de kiria lai Fendykind plus liquid 10-10ml krke 3 din deo ate iss nu cargill di Calf starter feed deni suru kro, baki isdi khurak da dian rkho, iss nal vdia growth ho jawegi..
Posted by Surendra Jitarwal
Rajasthan
27-11-2019 10:11 AM
Maharashtra
11-27-2019 10:27 AM
Surendra ji you can check the attached image for nutrient deficiency analysis.
Posted by Amarjeet sidhu
Punjab
27-11-2019 10:06 AM
Punjab
11-27-2019 02:22 PM
Sidhu ji tuci iss nu pett de kiria lai Flukarid-Ds bolus deo ate iss nu rojana 35-40kg hara chara deo ate vdia company di feed deo, baki iss nu Enerboost powder 50-50gm swere sham deo, iss nal kamjori durr hundi hai ate sarir di vdia growth hundi hai..
Posted by BHERU LAL GURJAR
Rajasthan
27-11-2019 09:49 AM
Punjab
11-27-2019 01:34 PM
भेरू लाल जी इसका भाव 5500 -5751 रुपये प्रति क्विंटल के हिसाब से चल रहा है
Posted by Rohit prajapat
Madhya Pradesh
27-11-2019 09:35 AM
Punjab
11-27-2019 02:27 PM
बकरी पालन बहुत ही लाभकारी काम है शुरूआत करने के लिए आप 10 बकरियों और 2 बकरे के साथ कर सकत हैं इन्हें खुराक कम चाहिए इसलिए इन्हें आसानी से पाल सकते हैं ये हर प्रकार के मौसम में पाली जा सकती हैं बकरियां 12-14 महीने में बच्चे देना शुरू कर देती है बकरी का गर्भ समय 150 दिन का होता है और साल में 1-5 बच्चे देती है साल में दो बच्च.... (Read More)
बकरी पालन बहुत ही लाभकारी काम है शुरूआत करने के लिए आप 10 बकरियों और 2 बकरे के साथ कर सकत हैं इन्हें खुराक कम चाहिए इसलिए इन्हें आसानी से पाल सकते हैं ये हर प्रकार के मौसम में पाली जा सकती हैं बकरियां 12-14 महीने में बच्चे देना शुरू कर देती है बकरी का गर्भ समय 150 दिन का होता है और साल में 1-5 बच्चे देती है साल में दो बच्चे देना आम बात है बकरियां 8-10 वर्ष तक बच्चे देती हैं और अपन गिनती को तेजी से बढ़ा लेती हैं आप बारबरी, ब्लैक बंगाल, जैसी नसल पाल सकते हैं इसकी ट्रेनिेंग के लिए आप अपने कुषि विज्ञान केंद्र से संपर्क करे या फिर जो बकरी पालन का व्यवसाय कर रहा कोई किसान उसका फार्म स्वंय जाकर देखकर आयें तो और भी बा​रीकियों का पता चल जायेगा, आप ब्लैक बंगाल, बीटल, सिरोही, जमुनापरी, बरबरी नस्ल रख सकते हैं.
Posted by Harinder Singh
Punjab
27-11-2019 09:34 AM
Punjab
11-27-2019 10:12 AM
harinder ji jaivik kheti de layi tuc sabto pehlan bhut ghat jhag de vich isnu shuru karo jekar jaivik kheti karn bare soch rahe ho ta bhut vadia vichar hai isde layi tuc apne ilake de vich jehde kisan jaivik kheti kar rahe han ohna nal sampark karo ate ohna de tjarube nu samjho isto bad tuc jaivikkheti shuru karo.dhanwad
Posted by Gurwinder Singh
Punjab
27-11-2019 09:34 AM
Punjab
11-27-2019 10:31 AM
Gurwinder ji mushroom da beej lab vich tyar kita janda hai.isnu ghr vich tyar nahi kita janda.dhanwad
Posted by Gurri Saspali
Punjab
27-11-2019 09:34 AM
Punjab
11-27-2019 08:57 PM
Hanji Gurri ji ehh pansari ton asani nal mill jawegi..
Posted by laddi narwal
Punjab
27-11-2019 09:28 AM
Rajasthan
11-27-2019 02:32 PM
ਤੁਸੀਂ ਹੇਠਾਂ ਦਿੱਤੇ ਗਏ ਫਾਰਮੂਲੇ ਦੇ ਅਨੁਸਾਰ ਦਿਤੀ ਗਈ ਸਮੱਗਰੀ ਦੀ ਵਰਤੋਂ ਕਰ ਸਕਦੇ ਹੋ 10 ਕਿਲੋ ਸੋਇਆਬੀਨ •    8 ਕਿਲੋ ਵੜੇਵਿਆਂ ਦੀ ਖਲ •    9 ਸਰੋਂ ਦੀ ਖਲ •    40 ਕਿਲੋ ਚੋਕਰ •    20 ਕਿਲੋ ਕਣਕ ਜਾਂ ਮੱਕੀ •    10 ਕਿਲੋ ਛੋਲੇ •    1 ਕਿਲੋ ਨਮਕ •    2 ਮਿਨਰਲ ਮਿਸ਼ਰਣ ਇਹ ਸਾਰੀਆ ਚੀਜ਼ਾਂ ਨੂੰ ਚੰਗੀ ਤਰਾਂ ਮਿਕਸ ਕਰਕੇ ਪਿਸਾ ਲਵੋ ਤੇ 1-1.5 ਕਿਲੋ ਇਕ ਟਾਈਮ ਤੱਕ ਦੇ ਸਕਦੇ ਹੋਂ
Posted by Gurwinder Singh
Punjab
27-11-2019 09:26 AM
Punjab
11-27-2019 09:32 AM
gurwinder ji kirpa karke swal vistar nal pucho ke tuc ghr vich mushroom uga rakhe han ja ugaun bare soch rahe ho ta jo tuhanu is bare poori jankari diti ja sake.dhanwad
Posted by c. d
Madhya Pradesh
27-11-2019 09:20 AM
Maharashtra
11-27-2019 12:10 PM
पुदीना मैंथा के नाम से जानी जाने वाली एक क्रियाशील जड़ी बूटी है पुदीने को मिट्टी की कई किस्मों जैसे दरमियाने से गहरी उपजाऊ मिट्टी, जिसमें पानी को सोखने की क्षमता ज्यादा हो, में उगाया जाता है इसको जल-जमाव वाली मिट्टी में भी उगाया जा सकता है उच्च नमी वाली मिट्टी में यह अच्छे परिणाम देती है इस फसल के लिए मिट्टी .... (Read More)
पुदीना मैंथा के नाम से जानी जाने वाली एक क्रियाशील जड़ी बूटी है पुदीने को मिट्टी की कई किस्मों जैसे दरमियाने से गहरी उपजाऊ मिट्टी, जिसमें पानी को सोखने की क्षमता ज्यादा हो, में उगाया जाता है इसको जल-जमाव वाली मिट्टी में भी उगाया जा सकता है उच्च नमी वाली मिट्टी में यह अच्छे परिणाम देती है इस फसल के लिए मिट्टी का pH 6-7.5 होना चाहिए प्रसिद्ध किस्में:- MAS-1: यह छोटे कद की किस्म है जिसकी ऊंचाई 30-45 सैं.मी. होती है यह बीमारीयों की रोधक और जल्दी पकने वाली किस्म है इसमें मैन्थोल की मात्रा 70-80% होती है इसकी औसतन पैदावार 80 क्विंटल प्रति एकड़ जड़ी-बूटियां के तौर पर और 50-60 किलोग्राम प्रति एकड़ तेल के तौर पर होती है Hybrid-77: इसकी ऊंचाई 50-60 सैं.मी. होती है यह किस्म पत्तों के धब्बा रोग और कुंगी के रोधक होती है, और यह जल्दी पकने वाली किस्म है इसमें मैन्थोल की मात्रा 80-85% होती है इसकी औसतन पैदावार 80 क्विंटल प्रति एकड़ जड़ी-बूटियां के तौर पर और 50-60 किलोग्राम प्रति एकड़ तेल के तौर पर होती है यह रेतली दोमट मिट्टी में बढ़िया पैदावार देती है औरऐसी शुष्क मौसम में की आवश्यकता होती है Shivalik: यह चीन की खेती से चुनी गई किस्म है यह किस्म उत्तर प्रदेश के तराई क्षेत्रों और उत्तरांचल में अच्छी वृद्धि करती है इसमें मैन्थोल की मात्रा 65-70% होती है इसकी औसतन पैदावार 120 क्विंटल प्रति एकड़ जड़ी-बूटियां के तौर पर और 72 किलोग्राम प्रति एकड़ तेल के तौर पर होती है यह किस्म फंगस रोगों से जल्दी प्रभावित होती है EC-41911: यह किस्म रूसी जर्मप्लाज्म से ली गई है यह किस्म पानी की रोधक और आकार में सीधी होती है इसमें मैन्थोल की मात्रा 70%पायी जाती है इसकी औसतन पैदावार 120 क्विंटल प्रति एकड़ जड़ी-बूटियां के तौर पर और 72 किलोग्राम प्रति एकड़ तेल के तौर पर होती है इस किस्म से तैयार तेल का प्रयोग विभिन्न व्यंजनों में स्वाद के लिए किया जाता है Gomti: यह किस्म रंग में हल्के लाल रंग की होती है इसकी पैदावार बाकी किस्मों की पैदावार से कम होती है इसमें मैन्थोल की मात्रा 78-80% होती है Himalaya: इसके पत्तों का आकार बाकी किस्मों से बड़ा होता है यह किस्म कुंगी, झुलस, सफेद धब्बे और पत्तों पर धब्बे रोग की रोधक है इसमें मैन्थोल की मात्रा 78-80% होती है इसकी औसतन पैदावार 160 क्विंटल प्रति एकड़ जड़ी-बूटियां के तौर पर और 80-100 किलोग्राम प्रति एकड़ तेल के तौर पर होती है Kosi: यह किस्म 90 दिनों में पक जाती है यह किस्म कुंगी, झुलस, सफेद धब्बे और पत्तों के धब्बे रोग की प्रतिरोधक है इसमें मैन्थोल की मात्रा 75-80 प्रतिशत होती है और तेल की पैदावार 80-100 किलोग्राम प्रति एकड़ होती है Saksham: यह किस्म सी वी हिमालय की तरफ से टिशू कल्चर द्वारा तैयार की गई है इसमें मैन्थोल की मात्रा 80% होती है और तेल की पैदावार 90-100 किलोग्राम प्राप्त होती है पुदीने की बिजाई के लिए सुविधाजनक आकार के बैड तैयार करें खेत की तैयारी के समय खेत की अच्छी तरह जोताई करें जैविक खाद जैसे रूड़ी की खाद 100-120 क्विंटल प्रति एकड़ रूड़ी की खाद डालें रूड़ी की खाद के बाद हरी खाद डालें इसकी बिजाई के लिए दिसंबर-जनवरी का समय अनुकूल होता है पौधे के भागों की बिजाई 40 सैं.मी. के फासले पर और पंक्तियों के बीच का फासला 60 सैं.मी होना चाहिए बीज को 2-3 सैं.मी. की गहराई में बोयें पौधे के जड़ वाले भाग को मुख्य खेत में बोया जाता है खेत की तैयारी के समय रूड़ी की खाद 80-120 क्विंटल प्रति एकड़ में डालें और अच्छी तरह मिलायें नाइट्रोजन 58 किलो (यूरिया 130 किलो), फासफोरस 32-40 किलो (सिंगल सुपर फासफेट 80-100 किलो), पोटाशियम 20 किलो (म्यूरेट ऑफ पोटाश 33 किलो) प्रति एकड़ में डालें गर्मियों में मॉनसून से पहले जलवायु और मिट्टी के आधार पर 6-9 सिंचाइयां जरूर की जानी चाहिए मॉनसून के बाद 3 सिंचाइयों की आवश्यकता होती है पहली सिंचाई सितंबर महीने में, दूसरी अक्तूबर में और तीसरी नवंबर महीने में की जानी चाहिए सर्दियों में ज्यादा सिंचाई की आवश्यकता नहीं होती, लेकिन यदि सर्दियों में बारिश ना पड़े तो एक सिंचाई जरूर देनी चाहिए पौधे 100-120 दिनों में कटाई के लिए तैयार हो जाते हैं जब निचले पत्ते पीले रंग के होने शुरू हो जायें, तब कटाई करें कटाई दराती से और बूटियों को मिट्टी की सतह के 2-3 सैं.मी. ऊपर से निकालें अगली कटाई पहली कटाई के बाद 80 दिनों के अंतराल पर करें ताजी पत्तियों को उत्पाद बनाने के लिए प्रयोग किया जाता है, धन्यवाद
Posted by c. d
Madhya Pradesh
27-11-2019 09:17 AM
Maharashtra
11-27-2019 09:31 AM
पुदीना मैंथा के नाम से जानी जाने वाली एक क्रियाशील जड़ी बूटी है पुदीने को मिट्टी की कई किस्मों जैसे दरमियाने से गहरी उपजाऊ मिट्टी, जिसमें पानी को सोखने की क्षमता ज्यादा हो, में उगाया जाता है इसको जल-जमाव वाली मिट्टी में भी उगाया जा सकता है उच्च नमी वाली मिट्टी में यह अच्छे परिणाम देती है इस फसल के लिए मिट्टी .... (Read More)
पुदीना मैंथा के नाम से जानी जाने वाली एक क्रियाशील जड़ी बूटी है पुदीने को मिट्टी की कई किस्मों जैसे दरमियाने से गहरी उपजाऊ मिट्टी, जिसमें पानी को सोखने की क्षमता ज्यादा हो, में उगाया जाता है इसको जल-जमाव वाली मिट्टी में भी उगाया जा सकता है उच्च नमी वाली मिट्टी में यह अच्छे परिणाम देती है इस फसल के लिए मिट्टी का pH 6-7.5 होना चाहिए प्रसिद्ध किस्में:- MAS-1: यह छोटे कद की किस्म है जिसकी ऊंचाई 30-45 सैं.मी. होती है यह बीमारीयों की रोधक और जल्दी पकने वाली किस्म है इसमें मैन्थोल की मात्रा 70-80% होती है इसकी औसतन पैदावार 80 क्विंटल प्रति एकड़ जड़ी-बूटियां के तौर पर और 50-60 किलोग्राम प्रति एकड़ तेल के तौर पर होती है Hybrid-77: इसकी ऊंचाई 50-60 सैं.मी. होती है यह किस्म पत्तों के धब्बा रोग और कुंगी के रोधक होती है, और यह जल्दी पकने वाली किस्म है इसमें मैन्थोल की मात्रा 80-85% होती है इसकी औसतन पैदावार 80 क्विंटल प्रति एकड़ जड़ी-बूटियां के तौर पर और 50-60 किलोग्राम प्रति एकड़ तेल के तौर पर होती है यह रेतली दोमट मिट्टी में बढ़िया पैदावार देती है औरऐसी शुष्क मौसम में की आवश्यकता होती है Shivalik: यह चीन की खेती से चुनी गई किस्म है यह किस्म उत्तर प्रदेश के तराई क्षेत्रों और उत्तरांचल में अच्छी वृद्धि करती है इसमें मैन्थोल की मात्रा 65-70% होती है इसकी औसतन पैदावार 120 क्विंटल प्रति एकड़ जड़ी-बूटियां के तौर पर और 72 किलोग्राम प्रति एकड़ तेल के तौर पर होती है यह किस्म फंगस रोगों से जल्दी प्रभावित होती है EC-41911: यह किस्म रूसी जर्मप्लाज्म से ली गई है यह किस्म पानी की रोधक और आकार में सीधी होती है इसमें मैन्थोल की मात्रा 70%पायी जाती है इसकी औसतन पैदावार 120 क्विंटल प्रति एकड़ जड़ी-बूटियां के तौर पर और 72 किलोग्राम प्रति एकड़ तेल के तौर पर होती है इस किस्म से तैयार तेल का प्रयोग विभिन्न व्यंजनों में स्वाद के लिए किया जाता है Gomti: यह किस्म रंग में हल्के लाल रंग की होती है इसकी पैदावार बाकी किस्मों की पैदावार से कम होती है इसमें मैन्थोल की मात्रा 78-80% होती है Himalaya: इसके पत्तों का आकार बाकी किस्मों से बड़ा होता है यह किस्म कुंगी, झुलस, सफेद धब्बे और पत्तों पर धब्बे रोग की रोधक है इसमें मैन्थोल की मात्रा 78-80% होती है इसकी औसतन पैदावार 160 क्विंटल प्रति एकड़ जड़ी-बूटियां के तौर पर और 80-100 किलोग्राम प्रति एकड़ तेल के तौर पर होती है Kosi: यह किस्म 90 दिनों में पक जाती है यह किस्म कुंगी, झुलस, सफेद धब्बे और पत्तों के धब्बे रोग की प्रतिरोधक है इसमें मैन्थोल की मात्रा 75-80 प्रतिशत होती है और तेल की पैदावार 80-100 किलोग्राम प्रति एकड़ होती है Saksham: यह किस्म सी वी हिमालय की तरफ से टिशू कल्चर द्वारा तैयार की गई है इसमें मैन्थोल की मात्रा 80% होती है और तेल की पैदावार 90-100 किलोग्राम प्राप्त होती है पुदीने की बिजाई के लिए सुविधाजनक आकार के बैड तैयार करें खेत की तैयारी के समय खेत की अच्छी तरह जोताई करें जैविक खाद जैसे रूड़ी की खाद 100-120 क्विंटल प्रति एकड़ रूड़ी की खाद डालें रूड़ी की खाद के बाद हरी खाद डालें इसकी बिजाई के लिए दिसंबर-जनवरी का समय अनुकूल होता है पौधे के भागों की बिजाई 40 सैं.मी. के फासले पर और पंक्तियों के बीच का फासला 60 सैं.मी होना चाहिए बीज को 2-3 सैं.मी. की गहराई में बोयें पौधे के जड़ वाले भाग को मुख्य खेत में बोया जाता है खेत की तैयारी के समय रूड़ी की खाद 80-120 क्विंटल प्रति एकड़ में डालें और अच्छी तरह मिलायें नाइट्रोजन 58 किलो (यूरिया 130 किलो), फासफोरस 32-40 किलो (सिंगल सुपर फासफेट 80-100 किलो), पोटाशियम 20 किलो (म्यूरेट ऑफ पोटाश 33 किलो) प्रति एकड़ में डालें गर्मियों में मॉनसून से पहले जलवायु और मिट्टी के आधार पर 6-9 सिंचाइयां जरूर की जानी चाहिए मॉनसून के बाद 3 सिंचाइयों की आवश्यकता होती है पहली सिंचाई सितंबर महीने में, दूसरी अक्तूबर में और तीसरी नवंबर महीने में की जानी चाहिए सर्दियों में ज्यादा सिंचाई की आवश्यकता नहीं होती, लेकिन यदि सर्दियों में बारिश ना पड़े तो एक सिंचाई जरूर देनी चाहिए पौधे 100-120 दिनों में कटाई के लिए तैयार हो जाते हैं जब निचले पत्ते पीले रंग के होने शुरू हो जायें, तब कटाई करें कटाई दराती से और बूटियों को मिट्टी की सतह के 2-3 सैं.मी. ऊपर से निकालें अगली कटाई पहली कटाई के बाद 80 दिनों के अंतराल पर करें ताजी पत्तियों को उत्पाद बनाने के लिए प्रयोग किया जाता है, धन्यवाद
Posted by Rohitash khoth
Rajasthan
27-11-2019 09:04 AM
Punjab
11-27-2019 02:34 PM
उसे आप Lactomood होमियोपेथिक दवा की 10—10 बूंदें दिन में तीन बार दें और Leptaden गोलियां जो Alarsin कंपनी का प्रोडक्ट है इसकी 10—10 गोलियां सुबह शाम दें और Milkout पाउडर 2—2 चम्मच सुबह शाम दें इससे फर्क पड़ जाएगा.
Posted by ਹਰਪ੍ਰੀਤ ਸਿੰਧੂ
Punjab
27-11-2019 08:54 AM
Punjab
11-27-2019 09:15 AM
ਹਰਪ੍ਰੀਤ ਜੀ ਪੰਜਾਬ ਦੇ ਵਿਚ ਅੱਜ ਮੀਹ ਪੈਣ ਦੀ ਸੰਭਾਵਨਾ ਹੈ ਤਾ ਕਿਰਪਾ ਕਰਕੇ ਮੀਹ ਦੀ wait ਕਰੋ ਜੇਕਰ ਮੀਹ ਨਹੀਂ ਪੈਂਦਾ ਹੈ ਤਾ ਤੁਸੀ ਪਾਣੀ ਲਾ ਸਕਦੇ ਹੋ ਨਹੀਂ ਤਾ ਮੀਹ ਅਤੇ ਪਾਣੀ ਦੋਨੋ ਦੀ ਫ਼ਸਲ ਦੀ ਗਰੋਥ ਨੂੰ ਰੋਕ ਦੇਣਗੇ ਅਤੇ ਫ਼ਸਲ ਦਾ ਨੁਕਸਾਨ ਹੋਏਗਾ ਧੰਨਵਾਦ
Posted by chhitar Mal CHOUDHARY
Rajasthan
27-11-2019 08:51 AM
Punjab
11-27-2019 02:36 PM
चौधरी जी उन्हें आप पेट के कीड़ों के लिए Piperazine liquid दें और यदि वो 8 महीने से छोटे है तो एक एक महीने के बाद साल्ट बदलकर पेट के कीड़ों की दवा जरूर दें बाकि आप उन्हें अच्छी खुराक, चारा और फीड दें इसके साथ साथ Cafplan पाउडर 50—100 ग्राम रोजाना दे सकते है इससे अच्छी ग्रोथ हो जाएगी
Posted by Rupes kumar
Bihar
27-11-2019 08:47 AM
Punjab
11-27-2019 02:37 PM
संतुलित खुराक 100 किलो बनाने के लिए आवश्यक सामग्री चाहिए जैसे 25 किलो अनाज (ज्वार, बाजरी (सर्दियां), गेहूं, जौं (गर्मियां)इनमें से कोई एक), दाल चूरी 20 किलो (मूंग चूरी, मांह चूरी, मोठ चूरी (केवल सर्दियों के लिए), मसूर चूरी, अरहर (इनमें से एक), डी ओ सी 25 किलो (धान का चूरा), फाइबर छिल्का 15 किलो (गेहूं, चौकर, चना छिल्का, मटर छिल्का.... (Read More)
संतुलित खुराक 100 किलो बनाने के लिए आवश्यक सामग्री चाहिए जैसे 25 किलो अनाज (ज्वार, बाजरी (सर्दियां), गेहूं, जौं (गर्मियां)इनमें से कोई एक), दाल चूरी 20 किलो (मूंग चूरी, मांह चूरी, मोठ चूरी (केवल सर्दियों के लिए), मसूर चूरी, अरहर (इनमें से एक), डी ओ सी 25 किलो (धान का चूरा), फाइबर छिल्का 15 किलो (गेहूं, चौकर, चना छिल्का, मटर छिल्का, इनमें से एक), खल 15 किला (सरसों, बिनौला या सोया (इनमें से कोई एक), मीठा सोडा 250 ग्राम, 1 किलो नमक, गुड़ 1 किला, 1 किलो हल्दी (सर्दियां में) इन्हें मिला लें यह फीड पशु के लिए बहुत लाभदायक होती है बाकि इसके साथ Enerboost पाउडर 100 ग्राम रोज़ाना दें, इससे पशु की कमज़ोरी दूर होती है और उसे रोजाना 35—40 किलो हरा चारा भी दें
Posted by chhitar Mal CHOUDHARY
Rajasthan
27-11-2019 08:41 AM
Maharashtra
11-27-2019 10:04 AM
जीरे में आप सिंचाइयां बिजाई के 35वें, 60वें और 85वें दिन बाद करें धन्यवाद
Posted by Rupes kumar
Bihar
27-11-2019 08:39 AM
Punjab
11-27-2019 03:19 PM
आप 250 ग्राम गुड़ और 1 किलो दलिया अच्छी तरह गर्म करके फिर उसमें 100 ग्राम सरसों का तेल मिक्स करें इसे आधा आधा करके सुबह शाम दे सकते हैं इस तरह आप 5—7 दिन दें, इससे दूध बढ़ जाएगा. बाकि आप Anabolite liquid 100ml रोज़ाना देना शुरू करें और आप Milkout पाउडर के 2—2 चम्मच सुबह शाम दें इसका भी दूध बढ़ाने में बढ़िया परिणाम है आप पशु की खुराक का ध्या.... (Read More)
आप 250 ग्राम गुड़ और 1 किलो दलिया अच्छी तरह गर्म करके फिर उसमें 100 ग्राम सरसों का तेल मिक्स करें इसे आधा आधा करके सुबह शाम दे सकते हैं इस तरह आप 5—7 दिन दें, इससे दूध बढ़ जाएगा. बाकि आप Anabolite liquid 100ml रोज़ाना देना शुरू करें और आप Milkout पाउडर के 2—2 चम्मच सुबह शाम दें इसका भी दूध बढ़ाने में बढ़िया परिणाम है आप पशु की खुराक का ध्यान रखें..
Posted by jitendra ram
Bihar
27-11-2019 08:28 AM
Punjab
11-27-2019 02:46 PM
बकरी पालन ट्रेनिंग आप अपने नज़दीकी कृषि विज्ञानं केंद्र सकते है जी नज़दीकी कृषि विज्ञानं केंद्र का पता आप नोट कर सकते है जीKrishiVigyan Kendra, Sitamarhi Vill+PO - BalhaMadhusudan Via - Janakpur Road (Pupri) Distt.- Sitamarhi - 843320 (Bihar) इंडिया , इसके इलावा हरयाणा के तारूआना गांव में भी बकरी पालन ट्रेनिंग SR Commercial Goat Farm पर 20 फरवरी से शुरू हो रही है इसके लिए आप रजिस्टर्ड करवाने के .... (Read More)
बकरी पालन ट्रेनिंग आप अपने नज़दीकी कृषि विज्ञानं केंद्र सकते है जी नज़दीकी कृषि विज्ञानं केंद्र का पता आप नोट कर सकते है जीKrishiVigyan Kendra, Sitamarhi Vill+PO - BalhaMadhusudan Via - Janakpur Road (Pupri) Distt.- Sitamarhi - 843320 (Bihar) इंडिया , इसके इलावा हरयाणा के तारूआना गांव में भी बकरी पालन ट्रेनिंग SR Commercial Goat Farm पर 20 फरवरी से शुरू हो रही है इसके लिए आप रजिस्टर्ड करवाने के लिए 93501 46903 पर कॉल कर सकते है जी
Posted by Mohan kumar
Uttar Pradesh
27-11-2019 08:21 AM
Maharashtra
11-27-2019 11:14 AM
मोहन जी आप सब्जियां जैसे चुकन्दर, शलगम, फूलगोभी, टमाटर, काली सरसों के बीज, मूली, पालक, पत्ता गोभी, शिमला मिर्च, लहसुन, प्याज, मटर, धनिया की बिजाई कर सकते है
Posted by Mohan kumar
Uttar Pradesh
27-11-2019 08:15 AM
Maharashtra
11-27-2019 10:20 AM
बढ़िया वर्मी कंपोस्ट निम्नलिखित तरीके अनुसार बनायी जा सकती है इसलिए ऐसा स्थान लें जहां धूप ना आये और हवादार हो इस स्थान पर ईंटों या पत्थर के टुकड़े और मिट्टी की 2—3 इंच मोटी परत बिछायें मिट्टी पर थोड़ा सा पानी छिड़ककर गीला करें मिट्टी में 25 प्रतिशत से अधिक नमी नहीं होनी चाहिए इसके ऊपर गंडोए (40 गंडोए प्रति व.... (Read More)
बढ़िया वर्मी कंपोस्ट निम्नलिखित तरीके अनुसार बनायी जा सकती है इसलिए ऐसा स्थान लें जहां धूप ना आये और हवादार हो इस स्थान पर ईंटों या पत्थर के टुकड़े और मिट्टी की 2—3 इंच मोटी परत बिछायें मिट्टी पर थोड़ा सा पानी छिड़ककर गीला करें मिट्टी में 25 प्रतिशत से अधिक नमी नहीं होनी चाहिए इसके ऊपर गंडोए (40 गंडोए प्रति वर्ग फीट जगह) में मिलायें इसके बाद वेस्ट जैसे कि बची कुची सब्जियां, फल, कच्चा गोबर, गोबर की सलरी की 8—10 इंच मोटी परत डालें दूसरी परत के बाद इसके ऊपर सूखे पत्ते या पराली से ढक दें हर परत के बाद पानी छिड़कें ताकि नमी बनी रहे वर्मीकंपोस्ट के बैड को 3—4 इंच मोटी गोबर की परत से ढक दें और इसके ऊपर बोरा या तिरपाल रखें ताकि नमी बनी रहे रसोई, फसलों या डेयरी के बचे कुचे की परत को रैक से पलटते रहें और आवश्यकतानुसार थोड़ा थोड़ा करके और वेस्ट भी डाल सकते हैं इसके ऊपर कच्चा गोबर भी डाल सकते हैं पर ध्यान रखें कि यह परत पहले जितनी ही मोटी रहें वर्मी कंपोस्ट की खाद मौसम के हिसाब से 45—60 दिनों में तैयार हो जाती है सबसे ऊपर वाली परत को हटाकर गंडोए छलनी से अलग कर लें और निचली छोड़ दें इसके ऊपर दोबारा रसोई या एग्रो वेस्ट की 6 इंच मोटी परत बिछाकर दोबारा खाद तैयार की जा सकती हैं 45 दिनों के बाद पानी छिड़कना बंद करने से भी गंडोए निचली परत में चले जाते हैं और छलनी से अलग करने में समय कम लगता है तैयार वर्मी कंपोस्ट काले भूरे रंग की गंध रहित और चाय पत्ती जैसी होती है इसे छांव में हवा में सुखकर आवश्यकतानुसार थैले या बोरियों में डालकर रखा जा सकता है एक टन वर्मी कंपोस्ट में 1.0—1.5 किलोग्राम नाइट्रोजन, 5—10 किलोग्राम पोटाश और 3.5—5.0 किलो फासफोरस होता है इसके अलावा इसमें कई तरह के एन्ज़ाइम और सूक्ष्म तत्व कॉपर, आयरन, जिंक, सल्फर, कैलशियम और मैगनीशियम आदि होते हैं
Posted by jitendra ram
Bihar
27-11-2019 08:15 AM
Punjab
11-27-2019 03:20 PM
बकरी पालन ट्रेनिंग आप अपने नज़दीकी कृषि विज्ञानं केंद्र सकते है जी नज़दीकी कृषि विज्ञानं केंद्र का पता आप नोट कर सकते है जीKrishiVigyan Kendra, Sitamarhi Vill+PO - BalhaMadhusudan Via - Janakpur Road (Pupri) Distt.- Sitamarhi - 843320 (Bihar) इंडिया , इसके इलावा हरयाणा के तारूआना गांव में भी बकरी पालन ट्रेनिंग SR Commercial Goat Farm पर 20 फरवरी से शुरू हो रही है इसके लिए आप रजिस्टर्ड करवाने के लि.... (Read More)
बकरी पालन ट्रेनिंग आप अपने नज़दीकी कृषि विज्ञानं केंद्र सकते है जी नज़दीकी कृषि विज्ञानं केंद्र का पता आप नोट कर सकते है जीKrishiVigyan Kendra, Sitamarhi Vill+PO - BalhaMadhusudan Via - Janakpur Road (Pupri) Distt.- Sitamarhi - 843320 (Bihar) इंडिया , इसके इलावा हरयाणा के तारूआना गांव में भी बकरी पालन ट्रेनिंग SR Commercial Goat Farm पर 20 फरवरी से शुरू हो रही है इसके लिए आप रजिस्टर्ड करवाने के लिए 93501 46903 पर कॉल कर सकते है जी
Posted by ਹਰਜੀਤ ਗਿੱਲ
Punjab
27-11-2019 07:55 AM
Punjab
11-27-2019 11:06 AM
ਹਰਜੀਤ ਜੀ ਆਲੂਆਂ ਨੂੰ ਬਿਜਾਈ ਤੋਂ 30 -40 ਦਿਨ ਬਾਦ ਤਕ ਤੁਸੀ ਸਾਰੀਆਂ ਖਾਦਾਂ ਦੀ ਮਾਤਰਾ ਪਾ ਦਿਓ ਮੋਟੇ ਆਲੂਆਂ ਦੀ ਪੈਦਾਵਾਰ ਲਈ, 13:0:45 ਦੀ 2 ਕਿਲੋ ਅਤੇ ਮੈਗਨੀਸ਼ੀਅਮ ਈ ਡੀ ਟੀ ਏ 100 ਗ੍ਰਾਮ ਪ੍ਰਤੀ ਏਕੜ ਦੀ ਸਪਰੇਅ ਕਰੋ ਬਿਮਾਰੀਆਂ ਦੇ ਹਮਲੇ ਨੂੰ ਰੋਕਣ ਲਈ ਉੱਲੀਨਾਸ਼ਕ ਪ੍ਰੋਪਿਨੇਬ 3 ਗ੍ਰਾਮ ਪ੍ਰਤੀ ਲੀਟਰ ਪਾਣੀ ਪਾਓ ਆਲੂਆਂ ਦਾ ਆਕਾਰ ਅਤੇ ਗਿਣਤੀ ਵਧਾਉਣ ਲਈ ਹਿਊਮਿਕ ਐਸਿਡ (12%) 3 ਗ੍ਰਾਮ+ਐੱਮ ਏ ਪੀ 12:61:.... (Read More)
ਹਰਜੀਤ ਜੀ ਆਲੂਆਂ ਨੂੰ ਬਿਜਾਈ ਤੋਂ 30 -40 ਦਿਨ ਬਾਦ ਤਕ ਤੁਸੀ ਸਾਰੀਆਂ ਖਾਦਾਂ ਦੀ ਮਾਤਰਾ ਪਾ ਦਿਓ ਮੋਟੇ ਆਲੂਆਂ ਦੀ ਪੈਦਾਵਾਰ ਲਈ, 13:0:45 ਦੀ 2 ਕਿਲੋ ਅਤੇ ਮੈਗਨੀਸ਼ੀਅਮ ਈ ਡੀ ਟੀ ਏ 100 ਗ੍ਰਾਮ ਪ੍ਰਤੀ ਏਕੜ ਦੀ ਸਪਰੇਅ ਕਰੋ ਬਿਮਾਰੀਆਂ ਦੇ ਹਮਲੇ ਨੂੰ ਰੋਕਣ ਲਈ ਉੱਲੀਨਾਸ਼ਕ ਪ੍ਰੋਪਿਨੇਬ 3 ਗ੍ਰਾਮ ਪ੍ਰਤੀ ਲੀਟਰ ਪਾਣੀ ਪਾਓ ਆਲੂਆਂ ਦਾ ਆਕਾਰ ਅਤੇ ਗਿਣਤੀ ਵਧਾਉਣ ਲਈ ਹਿਊਮਿਕ ਐਸਿਡ (12%) 3 ਗ੍ਰਾਮ+ਐੱਮ ਏ ਪੀ 12:61:0 ਦੀ 8 ਗ੍ਰਾਮ ਜਾਂ ਡੀ ਏ ਪੀ 15 ਗ੍ਰਾਮ ਪ੍ਰਤੀ ਲੀਟਰ ਦੀ ਸਪਰੇਅ ਪੌਦੇ ਦੇ ਵਾਧੇ ਸਮੇਂ ਕਰੋ
Posted by ASHISH KUMAR
Jharkhand
27-11-2019 07:54 AM
Maharashtra
11-27-2019 10:18 AM
ashish ji kripya btaye ke aap genhu men nadeeno ki roktham ke bare men jankari lena chahte hai taki aapko iske bare men poori jankari di ja sake.dhanywad
Posted by Jeevan Chouhan
Madhya Pradesh
27-11-2019 07:51 AM
Maharashtra
11-27-2019 09:57 AM
जीवन जी यह तत्व की कमी है इसके लिए आप ferrous sulphate @1 किलो को 150 लीटर पानी में मिला कर स्प्रे करें धन्यवाद
Posted by Banwari L al
Rajasthan
27-11-2019 07:42 AM
Maharashtra
11-27-2019 09:51 AM
बनवारी जी आपके द्वारा भेजी गयी फोटो आधी अपलोड हुई है कृपया पूरी फोटो भेजे ताकि आपको इसके बारे में पूरी जानकारी दी जा सके धन्यवाद
Posted by praveennndrtgbbvg
Madhya Pradesh
27-11-2019 07:25 AM
Maharashtra
11-27-2019 09:46 AM
प्रवीण जी आप इसके ऊपर NPK 191919 एक किलो को 150 लीटर पानी के हिसाब से स्प्रे करें इसके इलावा आप इसके ऊपर fungicide जैसे म-45 @4 ग्राम को प्रति लीटर पानी के हिसाब से स्प्रे करें धन्यवाद
Posted by navi
Punjab
27-11-2019 07:24 AM
Punjab
11-27-2019 08:32 AM
ਸ੍ਰੀ ਮਾਨ ਆਮ ਤੌਰ ਤੇ ਕਣਕ ਦੇ ਵਿੱਚ ਗੁੱਲੀ ਡੰਡਾ 35-40 ਦਿਨਾਂ ਵਿੱਚ ਹੀ ਬਾਹਰ ਨਿਕਲਦਾ ਹੈ ਜਦੋਂ ਤੁਸੀਂ ਪਹਿਲਾਂ ਪਾਣੀ ਲਗਾ ਦਿੰਦੇ ਹੋ ਤਾਂ ਇਹ ਗੁੱਲੀ ਡੰਡਾ ਕਣਕ ਦੇ ਨਾਲ ਵਧਣਾ ਸ਼ੁਰੂ ਕਰ ਦਿੰਦਾ ਹੈ ਇਸ ਸਮੇਂ ਕਣਕ 40 ਦਿਨਾਂ ਦੇ ਆਸ-ਪਾਸ ਹੋ ਜਾਂਦੀ ਹੈ ਇਸ ਸਮੇਂ ਤੁਸੀਂ TOPIK@160GM ਜਾਂ AXIAL@400ML ਜਾਂ PUMA POWER@400ML ਜਾਂ LEADER@13GM ਜਾਂ SAFAL@13GM ਜਾਂ UPL ਦੀ SHAGUN 21-11@200gm ਨੂੰ 150 ਲੀਟਰ ਪਾਣੀ ਵਿੱਚ ਮਿਲਾ ਕੇ ਪ੍ਰਤੀ ਏਕੜ ਤ.... (Read More)
ਸ੍ਰੀ ਮਾਨ ਆਮ ਤੌਰ ਤੇ ਕਣਕ ਦੇ ਵਿੱਚ ਗੁੱਲੀ ਡੰਡਾ 35-40 ਦਿਨਾਂ ਵਿੱਚ ਹੀ ਬਾਹਰ ਨਿਕਲਦਾ ਹੈ ਜਦੋਂ ਤੁਸੀਂ ਪਹਿਲਾਂ ਪਾਣੀ ਲਗਾ ਦਿੰਦੇ ਹੋ ਤਾਂ ਇਹ ਗੁੱਲੀ ਡੰਡਾ ਕਣਕ ਦੇ ਨਾਲ ਵਧਣਾ ਸ਼ੁਰੂ ਕਰ ਦਿੰਦਾ ਹੈ ਇਸ ਸਮੇਂ ਕਣਕ 40 ਦਿਨਾਂ ਦੇ ਆਸ-ਪਾਸ ਹੋ ਜਾਂਦੀ ਹੈ ਇਸ ਸਮੇਂ ਤੁਸੀਂ TOPIK@160GM ਜਾਂ AXIAL@400ML ਜਾਂ PUMA POWER@400ML ਜਾਂ LEADER@13GM ਜਾਂ SAFAL@13GM ਜਾਂ UPL ਦੀ SHAGUN 21-11@200gm ਨੂੰ 150 ਲੀਟਰ ਪਾਣੀ ਵਿੱਚ ਮਿਲਾ ਕੇ ਪ੍ਰਤੀ ਏਕੜ ਤੇ ਸਪਰੇਅ ਕਰ ਸਕਦੇ ਹੋ ਇਹਨਾਂ ਦੇ ਵਿੱਚੋਂ ਕੋਈ ਇੱਕ ਸਪਰੇਅ ਵਰਤ ਸਕਦੋ ਹੋ Topik ਦੀ ਥਾਂ ਇਹ ਸਪਰੇਆਂ ਵਰਤ ਸਕਦੇ ਹੋ ਜੇਕਰ ਬਾਥੂ ਹੈ ਤਾਂ ਉਸ ਦੇ ਲਈ algrip@10gm ਜਾਂ total@16gm ਨੂੰ 150 ਲੀਟਰ ਪਾਣੀ ਵਿੱਚ ਮਿਲਾ ਕੇ ਪ੍ਰਤੀ ਏਕੜ ਤੇ ਸਪਰੇਅ ਕਰ ਸਕਦੇ ਹੋ
Posted by praveennndrtgbbvg
Madhya Pradesh
27-11-2019 07:21 AM
Maharashtra
11-27-2019 09:43 AM
praveenn ji aap iske uper NPK 191919 ek kilo ko 150 litre pani ke hisab se spray karen iske ilava aap fungicide jaise M-45@4 grm ko prati litre pani ke hisab se spray karen.dhanywad
Posted by gurdeep singh
Punjab
27-11-2019 07:13 AM
Punjab
11-27-2019 09:41 AM
gurdeep ji bimari ja keet to ilava meet vich tat vadh ghat vi ho sakde han is layi tuc mitti di janch krai jisde layi tuc najdiki Kvk baithida jo ke dabwali road te maujood hai otho karva sakde ho ate usde adhar te hi tuc fasl vich khaadan di varto karo.dhanwad
Posted by kulwinder
Punjab
27-11-2019 07:12 AM
Punjab
11-27-2019 08:34 AM
ਸ੍ਰੀ ਮਾਨ ਖੁੰਬਾਂ  ਦੀਆ ਕਿਸਮਾਂ ਕਈ ਤਰਾਂ ਦੀਆ ਹੁੰਦੀਆਂ ਹਨ ਜਿਵੇਂ ਬਟਨ ਖੁੰਬ, ਢੀਂਗਰੀ, ਸ਼ਟਾਕੀ ਖੁੰਬ, ਪਰਾਲੀ ਖੁੰਬ ਅਤੇ ਮਿਲਕੀ ਖੁੰਬ ਇਹਨਾਂ ਵਿਚੋਂ +ਅਲਗ ਹੈ ਜਿਵੇ *ਬਟਨ ਖੁੰਬ ਦਾ ਸਮਾਂ ਸਤੰਬਰ ਤੋਂ ਮਾਰਚ ਤਕ ਹੈ ਇਸ ਸਮੇ ਵਿੱਚ ਆਪਾ ਇਸ ਤੋਂ 2 ਫਸਲਾਂ ਲੈ ਸਕਦੇ ਹਾਂ * *ਢੀਂਗਰੀ ਦਾ ਸਮਾਂ ਅਕਤੂਬਰ ਤੋਂ ਮਾਰਚ ਤਕ ਹੈ ਇਸ ਸਮੇ ਵਿੱਚ ਆਪਾ ਇਸ ਤੋਂ 3 ਫ਼ਸਲਾਂ ਲੈ ਸਕਦੇ ਹਾਂ * * ਸ਼ਟਾਕੀ ਖੁੰਬ ਦਾ .... (Read More)
ਸ੍ਰੀ ਮਾਨ ਖੁੰਬਾਂ  ਦੀਆ ਕਿਸਮਾਂ ਕਈ ਤਰਾਂ ਦੀਆ ਹੁੰਦੀਆਂ ਹਨ ਜਿਵੇਂ ਬਟਨ ਖੁੰਬ, ਢੀਂਗਰੀ, ਸ਼ਟਾਕੀ ਖੁੰਬ, ਪਰਾਲੀ ਖੁੰਬ ਅਤੇ ਮਿਲਕੀ ਖੁੰਬ ਇਹਨਾਂ ਵਿਚੋਂ +ਅਲਗ ਹੈ ਜਿਵੇ *ਬਟਨ ਖੁੰਬ ਦਾ ਸਮਾਂ ਸਤੰਬਰ ਤੋਂ ਮਾਰਚ ਤਕ ਹੈ ਇਸ ਸਮੇ ਵਿੱਚ ਆਪਾ ਇਸ ਤੋਂ 2 ਫਸਲਾਂ ਲੈ ਸਕਦੇ ਹਾਂ * *ਢੀਂਗਰੀ ਦਾ ਸਮਾਂ ਅਕਤੂਬਰ ਤੋਂ ਮਾਰਚ ਤਕ ਹੈ ਇਸ ਸਮੇ ਵਿੱਚ ਆਪਾ ਇਸ ਤੋਂ 3 ਫ਼ਸਲਾਂ ਲੈ ਸਕਦੇ ਹਾਂ * * ਸ਼ਟਾਕੀ ਖੁੰਬ ਦਾ ਸਮਾਂ ਅਕਤੂਬਰ ਤੋਂ ਅੱਧ ਫਰਵਰੀ ਤਕ ਹੈ ਆਪਾ ਇਸ ਤੋਂ ਇਕ ਫ਼ਸਲ ਹੀ ਲੈ ਸਕਦੇ ਹਾਂ * *ਪਰਾਲੀ ਖੁੰਬ ਦਾ ਸਮਾਂ ਅਪ੍ਰੈਲ ਤੋਂ ਅਗਸਤ ਤਕ ਹੈ ਆਪਾ ਇਸ ਤੋਂ 4 ਫਸਲਾਂ ਲੈ ਸਕਦੇ ਹਾਂ * ਮਿਲਕੀ ਖੁੰਬ ਦਾ ਸਮਾਂ ਅਪ੍ਰੈਲ ਤੋਂ ਸਤੰਬਰ ਤਕ ਹੈ ਤੁਸੀ ਹੁਣ ਅਪ੍ਰੈਲ ਵਿਚ ਪਰਾਲੀ ਜਾ ਮਿਲਕੀ ਖੁੰਬ ਲਗਾ ਸਕਦੇ ਹੋ ਪਰਾਲੀ ਖੁੰਬ ਦੇ ਲਈ ਤੁਹਾਨੂੰ ਪਰਾਲੀ,ਬੀਜ,ਬਾਂਸ, ਸੇਬਾ ਆਦਿ ਦੀ ਜ਼ਰੂਰਤ ਹੈ *ਪਰਾਲੀ ਦੇ ਪੂਲੇ*-- ਝੋਨੇ ਦੀ ਪਰਾਲੀ ਦੇ 1-1 ਕਿਲੋ ਦੇ ਪੂਲੇ  ਦੋਨੋ ਸਿਰਿਆ ਤੋਂ ਸੇਬੇ ਨਾਲ ਬੰਨ ਕੇ ਤਿਆਰ ਕੀਤੇ ਜਾਂਦੇ ਹਨ ਪੂਲੇ ਦੇ ਸਿਰੇ ਕਟ ਕ ਇਕ ਬਰਾਬਰ ਕਰ ਲਏ ਜਾਂਦੇ ਹਨ *ਪੂਲਿਆ ਦੀ ਕਿਆਰੀ ਲਗਾਉਣਾ*---ਪਰਾਲੀ ਦੇ ਪੂਲਿਆ ਨੂੰ ਸਾਫ ਪਾਣੀ ਵਿਚ 16-20 ਘੰਟੇ ਲਈ ਡਬੋ ਦਇਓ ਗਿਲੇ ਪੂਲਿਆ ਨੂੰ ਢਲਾਨ ਤੇ ਰੱਖ ਕੇ ਵਾਧੂ ਪਾਣੀ ਨਿਕਲਣ ਦਇਓ ਕਮਰੇ ਚ ਇੱਟਾਂ ਤੇ ਬਾਂਸ ਦਾ ਇਕ ਢਕਵਾ ਪਲੇਟਫਾਰਮ ਬਣਾਓ ਇਸ ਪਲੇਟਫਾਰਮ ਤੇ  5 ਪੂਲਿਆ ਦੀ ਇਕ ਤਹਿ ਲਗਾਓ ਜਿਸ ਉਪਰ ਲਗਭਗ 75 ਗ੍ਰਾਮ ਬੀਜ ਪਾਓ ਇਸ ਤੋਂ ਉਪਰ ਵਾਲੀ ਤਹਿ ਉਲਟ ਹੁੰਦੀ ਹੈ ਇਸ ਤਰਾਂ 5-5 ਪੂਲਿਆ ਦੀਆ 4 ਤਹਿਆ ਵਿਚ  300 ਗ੍ਰਾਮ  ਬੀਜ ਪਾ ਕ  ਇਕ ਕਿਆਰੀ ਤਿਆਰ ਕੀਤੀ ਜਾਂਦੀ ਹੈ ਸਭ ਤੋਂ ਉਪਰ 2 ਪੂਲੇ ਖੋਲ ਕੇ ਰੱਖ ਦਿਤੇ ਜਾਂਦੇ ਹਨ *ਖੁੰਬਾ ਦਾ ਫੁੱਟਣਾ*---ਬਿਜਾਈ ਤੋਂ 7-9 ਦਿਨਾਂ ਬਾਅਦ ਖੁੰਬਾਂ ਫੁਟਣ ਲਗ ਪੈਂਦੀਆਂ ਹਨ *ਪਾਣੀ ਤੇ ਹਵਾ ਦਾ ਸੰਚਾਰ*--  ਬਿਜਾਈ ਦੇ 2 ਦਿਨ ਬਾਅਦ ਹਰ ਰੋਜ ਪਾਣੀ ਦਾ ਛਿੜਕਾਅ ਕੀਤਾ ਜਾਂਦਾ ਹੈ ਖੁੰਬਾਂ ਫੁਟਣ ਉਪਰੰਤ ਹਵਾ ਦਾ ਸੰਚਾਰ 6-8 ਘੰਟੇ ਪ੍ਰਤੀ ਦਿਨ ਕੀਤਾ ਜਾਂਦਾ ਹੈ * ਖੁੰਬਾਂ ਦੀ ਤੁੜਾਈ*-- ਖੁੰਬਾਂ ਫੁੱਟਣ ਉਪਰੰਤ 1-2 ਦਿਨਾਂ ਵਿਚ ਤੋੜਨ ਯੋਗ ਹੋ ਜਾਂਦੀਆਂ ਹਨ **ਮਿਲਕੀ ਖੁੰਬ** ਮਿਲਕੀ ਖੁੰਬ ਲਈ ਤੂੜੀ ,ਬੀਜ ,ਮੋਮੀ ਲਿਫਾਫੇ(12×16),ਸੇਬਾ,ਕੇਸਿੰਗ, ਮਿਟੀ ਆਦਿ ਚਾਹੀਦੇ ਹਨ *ਤੂੜੀ ਦੀ ਤਿਆਰੀ*--ਸੁਕੀ ਤੂੜੀ ਨੂੰ ਪੱਕੇ ਫ਼ਰਸ਼ ਤੇ ਵਿਛਾ ਕੇ 16-20 ਘੰਟੇ ਪਾਣੀ ਨਾਲ ਗਿਲਾ ਕਰੋ ਗਿਲੀ ਤੂੜੀ ਨੂੰ ਬੋਰੀ ਵਿਚ ਭਰ ਕੇ ਸੇਬੇ ਨਾਲ਼ ਬੰਨ ਦਇਓ ਇਸ ਬੋਰੀ ਨੂੰ ਉਬਲਦੇ ਪਾਣੀ ਵਿਚ 45-50 ਮਿੰਟ ਲਈ ਰੱਖੋ ਤੂੜੀ ਨੂੰ ਕੱਢ ਕੇ ਪੱਕੇ ਫ਼ਰਸ਼ ਤੇ  ਵਿਛਾ ਕੇ ਠੰਡਾ ਕਰ ਲਓ ਇਹ ਤੂੜੀ ਬਿਜਾਈ ਲਈ ਤਿਆਰ ਹੈ *ਬਿਜਾਈ*--- ਠੰਡੀ ਤੂੜੀ ਵਿਚ ਬੀਜ ਰਲਾ ਕੇ ਮੋਮੀ ਲਿਫਾਫੇ ਵਿਚ ਭਰ ਦਇਓ 1 ਮੋਮੀ ਲਿਫਾਫੇ ਵਿਚ ਲਗਭਗ 2 ਕਿਲੋ ਗਿਲੀ ਤੂੜੀ ਅਤੇ 70-80 ਗ੍ਰਾਮ ਬੀਜ ਪੈਂਦਾ ਹੈ ਲਿਫਾਫੇ ਦੇ ਮੂੰਹ ਨੂੰ ਸੇਬੇ ਨਾਲ ਬੰਨ ਕੇ ਕਮਰੇ ਵਿਚ ਰੱਖ ਦਇਓ *ਕੇਸਿੰਗ*--ਬਿਜਾਈ ਦੇ 2-3 ਹਫਤਿਆਂ ਬਾਅਦ ਲਿਫਾਫੇ ਖੋਲ ਕੇ ਕੇਸਿੰਗ ਦੀ 1-1.5 ਦੀ ਤਹਿ ਲਗਾ ਦਇਓ ਕੇਸਿੰਗ ਵਿਚ ਰੂੜੀ ਤੇ ਰੇਤਲੀ ਮਿਟੀ(4:1) ਹੁੰਦੀ ਹੈ ਜੋ ਕ 24 ਘੰਟਿਆ ਲਈ 4% ਫਾਰਮਲੇਨ ਦੇ ਘੋਲ਼ ਨਾਲ ਜੀਵਣੁ ਰਹਿਤ ਕੀਤੀ ਜਾਂਦੀ ਹੈ *ਖੁੰਬਾਂ ਦਾ ਫੁੱਟਣਾ*-- ਕੇਸਿੰਗ ਮਿਟੀ ਪਾਉਣ ਤੋਂ ਲਗਭਗ 2 ਹਫਤਿਆਂ ਵਿਚ ਖੁੰਬਾਂ ਦੇ ਛੋਟੇ-ਛੋਟੇ ਕਿਣਕੇ ਨਿਕਲਣੇ ਸ਼ੁਰੂ ਹੋ ਜਾਂਦੇ ਹਨ ਜੋ ਕ 4-5 ਦਿਨਾਂ ਵਿਚ ਤੋੜਨ ਯੋਗ ਹੋ ਜਾਂਦੇ ਹਨ *ਖੁੰਬਾਂ ਦੀ ਤੁੜਾਈ*-- ਲਗਭਗ 35 -40 ਦਿਨਾਂ ਤਕ ਕੀਤੀ ਜਾਂਦੀ ਹੈ
Posted by mamu
Uttar Pradesh
27-11-2019 07:04 AM
Maharashtra
11-27-2019 09:38 AM
बिजाई के तुरंत बाद पहली सिंचाई करें यह अंकुरन में सहायता करती है उसके बाद मिट्टी की किस्म और जलवायु के आधार पर बाकी सिंचाइयां गर्मियों में 6-7 दिनों के फासले पर करें और सर्दियों के महीने में 10-12 दिनों के अंतराल पर करें आमतौर पर गाजर को तीन से चार सिंचाइयां की जरूरत होती है ज्यादा सिंचाई से परहेज़ करें क्योंकि.... (Read More)
बिजाई के तुरंत बाद पहली सिंचाई करें यह अंकुरन में सहायता करती है उसके बाद मिट्टी की किस्म और जलवायु के आधार पर बाकी सिंचाइयां गर्मियों में 6-7 दिनों के फासले पर करें और सर्दियों के महीने में 10-12 दिनों के अंतराल पर करें आमतौर पर गाजर को तीन से चार सिंचाइयां की जरूरत होती है ज्यादा सिंचाई से परहेज़ करें क्योंकि इससे जड़ों के गलने का डर रहता है कटाई से दो या तीन हफ्ते पहले सिंचाई रोक दें इससे गाजर की मिठास और स्वाद बढ़ जाता है